<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>धर्म-अध्यात्म - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>  शुभ योग में आज से शुरू हुआ सावन  महीना</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2316</link><description>जानें जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में क्या है अंतर
पंडित प्रकाश उपाध्याय
इस साल सावन महीने की शुरुआत आज 30 जुलाई से हो गई है।. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार सावन का आरंभ शुभ योग में हुआ है। इसलिए पूरे महीने भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप, दान और सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व रहेगा। इस महीने का समापन 28 अगस्त 2026 को होगा।
सावन सोमवार 2026 और महत्व
हिंदू धर्म में सावन के सोमवार को भगवान शिव का सबसे प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से साधन को विशेष फलों की प्राप्ति होती हैं। इसके अलावा सावन सोमवार उपवास के प्रभाव से मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना भी पूरी होती हैं।
पहला सावन सोमवार - 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार - 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार - 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार - 24 अगस्त 2026
सावन सोमवार पूजा सामग्री
सावन में संपूर्ण पूजा सामग्रियों से उपासना करने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं। साथ ही महादेव भी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा सामग्रियों की बात करें, तो गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, शमी के पत्ते व फूल, भांग, धतूरा चंदन, अक्षत, रूई की बत्ती, पुष्प, धूप, दीप, इत्र, लौंग शामिल है। वहीं कुछ मौसमी फल, मिठाई, नैवेद्य और अनाज भी शामिल कर लें। महादेव की भक्ति के लिए शिव चालीसा, शिव मंत्रों की पुस्तक और दान की चीजें भी लें।
सावन सोमवार पूजा विधि
-सावन सोमवार की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर में गंगाजल का छिडक़ाव करें।
-अब मंदिर जाएं या घर में शिवलिंग स्थापित कर गंगाजल व शुद्ध जल से अभिषेक करें।
-इसके बाद दूध, पंचामृत या अन्य सामग्री से अभिषेक करें।
-11 या 21 बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के फूल और अक्षत अर्पित करें।
-माता पार्वती को सुहाग सामग्री और भगवान गणेश को दुर्वा चढ़ाएं।
-अंत में मौसमी फल, मिठाई का भोग लगाकर शिव आरती करें और मंत्र जाप करें।
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में अंतर
सावन में भगवान शिव का अभिषेक कई प्रकार से किया जाता है, लेकिन अधिकांश लोग जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक के बीच का अंतर नहीं जानते। जलाभिषेक सबसे सरल पूजा विधि है। इसमें भगवान शिव को शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित किया जाता है। हालांकि, कुछ लोग इसमें कच्चा दूध और फूल भी शामिल कर लेते हैं। वहीं रुद्राभिषेक अधिक विधि-विधान और विशेष मंत्रों के साथ किया जाता है। इसमें गंगाजल, दूध, दही, गन्ने का रस, गुड़ और शहद से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि, रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति को मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही आर्थिक संकट जीवन से दूर होते हैं। पंचामृत अभिषेक की बात करें, तो इसमें दूध, दही, शहद, घी और शक्कर या चीनी से बने पंचामृत से भगवान शिव का स्नान कराया जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता आती हैं।</description><guid>2316</guid><pubDate>30-Jul-2026 6:24:35 am</pubDate></item><item><title>  अगस्त में इन 4 राशि वाले जातकों के जीवन में आ सकती है परेशानियां</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2315</link><description>पंडित प्रकाश उपाध्याय
अगस्त महीने में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र राशि परिवर्तन करेंगे। इसके अलावा साल के दो बड़े और आखिरी ग्रहण, चंद्रमा-सूर्य भी इसी महीने पड़ेंगे, जिससे ग्रहों की स्थिति और अधिक प्रभावशाली रहेगी। अगस्त में ग्रहों-नक्षत्रों का असर सभी राशियों के लिए शुभ-अशुभ परिणाम लेकर आएगा। लेकिन यह समय कुछ राशियों के लिए परेशानियों का संकेत भी दे रहा है। आइये जानते हैं इन राशियों के बारे में .....
वृषभ राशि
अगस्त का महीना वृषभ राशि वालों के लिए स्वास्थ्य के लिहाज से थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। धन लाभ के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। मौसम में बदलाव या पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। घर में किसी बात को लेकर तनाव रहेगा। व्यापार में मंदी का सामना करना पड़ सकता है। अगर कोई वस्तु को खरीदने की योजना बनाई थी, तो उसमें कुछ परेशानियां आ सकती हैं।
कर्क राशि
कर्क राशि वालों पर कार्यक्षेत्र का दबाव बढ़ सकता है। पुरानी बातों का भार मन पर बना रहेगा। नौकरी को लेकर और प्रयास आपको करने होंगे। कुछ कठिन समय का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक लाभ की योजनाएं असफल हो सकती हैं। नौकरी में जिम्मेदारियां अधिक रहने से मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। दोस्तों से अनबन महसूस होगी।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए पूरा महीना सतर्कता बरतने का संकेत दे रहा है। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। विवादों से दूरी बनाए रखना और अपनी योजनाओं को गोपनीय रखना बेहतर रहेगा। अपेक्षाओं के कारण मानसिक दबाव बढऩे की पूरी संभावना है। आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने से लाभ मिलेगा।
मकर राशि
मकर राशि वाले जातकों को आर्थिक मामलों में मिला- जुला परिणाम मिल सकते हैं। शादीशुदा लोग अपने कुछ पारिवारिक मुद्दों को सुलझाने में व्यस्त रहेंगे। आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है धन संबंधी मामलों में भी अत्यंत सतर्कता बरतें। आर्थिक निर्णय सोच-समझकर लें। आत्मविश्वास में कमी महसूस होगी, जिस कारण अपनी बात खुलकर रखने में दिक्कतें आ सकती हैं।</description><guid>2315</guid><pubDate>25-Jul-2026 11:48:49 am</pubDate></item><item><title> आज का दिन कैसे रहेगा 12 राशि वाले जातकों के लिए</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2314</link><description>पंडित प्रकाश उपाध्याय
​मेष राशि:
आज का दिन भावनाओं को संभालने का है। किसी विषय को लेकर मन में आज कुछ गहरी भावनात्मक तीव्रता हो सकती है। इससे थोड़ी बेचैनी, तनाव, चिंता जैसी स्थिति बन सकती है। लिहाजा मन को शांत रखते हुए काम करें। मेडिटेशन का सहारा लेना कारगर साबित होगा। अनुराधा नक्षत्र का मित्रता और सहयोग वाला भाव आज काम आएगा। छुपे मामलों और दस्तावेज के लिहाज से दिन बेहद अनुकूल है। बुधदेव के आज मार्गी होने से बातचीत और निर्णय में एक ताजी स्पष्टता आई है। बीमा, आयकर या कोई पुराना दस्तावेज जो हफ्तों से अटका हो उसे आज आगे बढ़ाएं। ससुराल पक्ष से कोई सुखद बात हो सकती है। पैसों में स्थिर वृद्धि जारी है। घर में सूर्यदेव और गुरू का विलंबित शुभ साथ बना है।
​वृष राशि
वृष राशि वालों के लिए आज का दिन जीवनसाथी के साथ उन विषयों पर बात करने का है, जो आप किसी दूसरों के साथ नहीं कर सकते हैं। जीवनसाथी के साथ धैर्य रखें। अनावश्यक गुस्सा दिखाने से मामला उलझ सकता है। साझेदारी के मामले में दिन बेहद महत्वपूर्ण है। बुधदेव के मार्गी होने से जीवनसाथी के साथ जो बातचीत हफ्तों से अटकी थी वो आज स्पष्टता के साथ आगे बढ़ेगी। व्यापारिक साझेदारी में भी आज कोई पुराना मामले में निर्णय लेने का अनुकूल समय है। मंगलदेव व्यक्तित्व में स्थिर और मजबूत ऊर्जा दे रहे हैं। मन में आज कुछ भावनात्मक उतार-चढ़ाव हो सकता है, मित्रता और सहयोग से सुलझाएं। साझेदारी में कोई नया बड़ा कदम आज उठा सकते हैं क्योंकि बुध मार्गी हो गए हैं।
​मिथुन राशि
 आज का दिन सेहत और नौकरी के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि लग्नेश बुधदेव आज मार्गी हो गए हैं। पिछले हफ्तों की अटकन के बाद अब सेहत और काम दोनों में एक ताजी और स्पष्ट ऊर्जा आएगी। नौकरी से जुड़ा कोई पुराना अटका काम आज आगे बढ़ाएं। बिगड़ी हुई दिनचर्या की व्यवस्था को संभालने का समय है। मन में भावनात्मक गहराई हो सकती है, उसे सहयोग और मित्रता से संभालें। सेहत का खास ध्यान रखें। नौकरी में नया कदम अब उठा सकते हैं।
​कर्क राशि
कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन कुछ नया सीखने का है। आय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। मन में आज गहरी भावनात्मक संवेदनशीलता हो सकती है, मित्रों के साथ समय बिताएं। प्रेम, रचनात्मकता और संतान के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बुधदेव के मार्गी होने से प्रेम और रचनात्मकता में पिछले हफ्तों की जो उलझन चल रही थी, वह आज खुलने लगेगी। बच्चों के साथ आज कुछ खास और यादगार वक्त बिताएं। किसी रचनात्मक काम की नई शुरुआत आज से करना शुभ है। व्यक्तित्व पर गुरू और सूर्यदेव का गरिमामय साथ बना हुआ है। लाभ में स्थिर वृद्धि जारी है। बड़े भावनात्मक फैसले जल्दी में न लें।
​सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन घर और परिवार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बुधदेव के मार्गी होने से घर से जुड़ी जो बातचीत या काम पिछले हफ्तों से अटका हुआ था वो आज आगे बढ़ेगा। मां के साथ कोई जरूरी बात आज स्पष्टता से करें। जमीन या संपत्ति का कोई काम आज शुरू करना शुभ है। वाहन चलाने में विशेष सावधानी बरतें। योगकारक मंगलदेव करियर में आपकी स्थिति को मजबूत बनाए रखेंगे। शुक्रदेव व्यक्तित्व पर आकर्षण बनाए हुए हैं। मन में आज गहरी भावनात्मक तीव्रता हो सकती है, घर में ही शांति खोजें। बड़े फैसले धैर्य से लें।
​कन्या राशि
​ कन्या राशि वालों के लिए छोटी यात्रा के लिए आज से बेहतर समय नहीं। आज का दिन भाई-बहन और बातचीत के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। लग्नेश बुधदेव के आज मार्गी होने से भाई-बहन के साथ जो बात पिछले हफ्तों से अटकी थी, वो आज स्पष्टता के साथ सुलझेगी। पड़ोसी से कोई पुराने विवाद को आज सुलझाएं। बातचीत में आज एक ताजी और स्पष्ट ऊर्जा आई है। लाभ में गुरू का विलंबित शुभ साथ बना है। मन में भावनात्मक गहराई परेशान कर सकती है। कंधों को आज आराम दें। करियर में अब नए कदम उठा सकते हैं। जीवनसाथी के साथ रिश्ते में अनुशासित स्थिरता है।
​तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए आज का दिन धन और परिवार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बुधदेव के मार्गी होने से पैसों और परिवार से जुड़ी जो बातें पिछले हफ्तों से उलझी थीं, वो आज एक ताजी स्पष्टता के साथ आगे बढ़ेंगी। कोई पुराना वित्तीय निर्णय जो टाला जा रहा था, वो आज लेना अनुकूल है। परिवार के साथ आज बैठकर कोई जरूरी बात करें। आवाज में आज एक ताजी और प्रभावी ऊर्जा आएगी। मन में भावनात्मक गहराई हो सकती है, अनुराधा नक्षत्र का मित्रता भाव काम आएगा। आंखों का ध्यान रखें। नई खरीदारी के लिए आज शुभ समय है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। चंद्र आज आपकी राशि में है जिससे भावनाओं में एक गहरी तीव्रता आ सकती है, लेकिन मंगलदेव की ऊर्जा इस तीव्रता को संभालने में मदद करती है। मित्रों का साथ आज विशेष रूप से फायदेमंद रहेगा। बुधदेव के मार्गी होने से आज कोई भी नई शुरुआत, नया एग्रीमेंट या बड़ा निर्णय लेना शुभ है। सिर में हल्का भारीपन हो सकता है, थोड़ा आराम करें। जीवनसाथी के साथ अनुशासन और सहयोग से रिश्ता मजबूत करें। बड़े भावनात्मक फैसले जल्दी में न लें।
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए आज का दिन पुरानी उलझनों को सुलझाने का है। बुधदेव के मार्गी होने से पुरानी मानसिक उलझनें थीं, वो आज ताजी स्पष्टता के साथ सुलझने लगेंगी। विदेश से कोई शुभ समाचार मिल सकता है और उपयोगी संपर्क हो सकता है। कोर्ट-कचहरी के किसी मामले में आज सफलता मिल सकती है। मन में भावनात्मक गहराई हो सकती है, भक्ति और सहयोग भाव काम आएगा। खर्चों पर नजर रखें। शत्रु हावी होने की कोशिश करेंगे। लग्नेश का विलंबित शुभ साथ भाग्य में बना है। नींद आज गहरी और अच्छी आएगी। जीवनसाथी के साथ वक्त बिताएं।
​मकर राशि
मकर राशि वालों के लिए आज का दिन लाभ और इच्छापूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। मनवांछित फल मिलने से प्रसन्नता बनी रहेगी। बुधदेव के मार्गी होने से लाभ और मित्रों से जुड़ी जो बातें पिछले हफ्तों से अटकी थीं वो आज नई राहें लेकर आएंगी। कोई पुरानी इच्छा जो लंबे समय से मन में थी वो आज पूरी हो सकती है। किसी पुराने मित्र से बात या मुलाकात हो सकती है। लग्नेश शनिदेव बातचीत में एक अनुशासित औरस्थिर ऊर्जा दे रहे हैं। भाग्य में गुरू का विलंबित शुभ साथ है। मन में भावनात्मक गहराई हो सकती है, मित्रों के साथ समय बिताएं। नया एग्रीमेंट आज कर सकते हैं।
​कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन करियर में किसी अटके काम को आगे बढ़ाने का है। बुधदेव के मार्गी होने से करियर में जो बाधाएं आ रही थीं, वो अब दूर होंगी। काम या बातचीत पिछले हफ्तों से अटकी थी वो आज एक ताजी स्पष्टता के साथ आगे बढ़ेगी। बॉस या किसी वरिष्ठ से आज स्पष्ट और सीधी बात करने का अनुकूल समय है। सरकारी काम में लाभ मिलेगा। पिता का पूरी तरह से साथ मिलेगा। लग्नेश शनिदेव धन में एक अनुशासित और स्थिर ऊर्जा दे रहे हैं। मन में भावनात्मक गहराई हो सकती है, अनुराधा का अनुशासन काम आएगा।
​मीन राशि
मीन राशि वालों के लिए आज का दिन भाग्य और धर्म के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। बुधदेव के मार्गी होने से भाग्य और लंबी यात्रा से जुड़ी जो कार्यक्रम पिछले हफ्तों से अटके थे, वो आज नई राहें लेकर आएंगी। किसी तीर्थ यात्रा का प्लान आज पक्का करना बेहद शुभ है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। गुरू या किसी बड़े से मिलना हो तो आज अनुकूल समय है। लग्नेश बृहस्पतिदेव प्रेम और रचनात्मकता में एक गहरी और भावनात्मक ऊर्जा दे रहे हैं। जीवनसाथी के साथ रिश्ते में भावनात्मक गहराई के साथ मित्रता का भाव रखें।</description><guid>2314</guid><pubDate>24-Jul-2026 6:50:59 am</pubDate></item><item><title>आज का दिन कैसे रहेगा 12 राशि वाले जातकों के लिए</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2313</link><description>पंडित प्रकाश उपाध्याय
मेष राशि
आज का दिन आपके लिए नई खुशियां और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी के संकेत लेकर आया है। मन प्रसन्न रहेगा और जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस होंगे। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और जीवनसाथी या प्रिय व्यक्ति के साथ यादगार समय बिताने का अवसर मिल सकता है। संतान की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना आज आपके लिए बेहद जरूरी रहेगा। यदि लंबे समय से घर, मकान या दुकान खरीदने की योजना बना रहे थे, तो उसके पूरे होने की संभावना मजबूत है। वहीं पिताजी के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरतना बेहतर रहेगा।
वृषभ राशि
आज का दिन उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यशैली से सभी प्रभावित होंगे और आप अपने सहयोगियों से भी बेहतर प्रदर्शन करवाने में सफल रहेंगे। विदेश से जुड़े व्यापार करने वालों को कोई सुखद समाचार मिल सकता है। मन की कोई पुरानी इच्छा पूरी होने से संतोष का अनुभव होगा। यदि प्रॉपर्टी खरीदने का विचार बना रहे हैं, तो परिस्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी। हालांकि किसी भी निर्णय में जल्दबाजी करने से बचें।
मिथुन राशि
आज का दिन अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए बेहद अनुकूल रहेगा। लंबे समय से रुके हुए काम गति पकड़ेंगे और सफलता मिलने की संभावना बढ़ेगी। नए लोगों से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलेंगे। परिवार के किसी सदस्य को अपने काम में शामिल कर सकते हैं। वाणी पर संयम बनाए रखें, क्योंकि छोटी-सी बात भी विवाद का कारण बन सकती है। सरकारी कार्य पूरे होने की संभावना भी मजबूत दिखाई दे रही है।
कर्क राशि
आज का दिन खुशियों और सुकून से भरा रहेगा। मित्रों के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा और किसी पार्टी या पारिवारिक कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। घर से निकलने से पहले माता-पिता का आशीर्वाद लेना आपके लिए शुभ रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यों के लिए प्रशंसा और सफलता मिलेगी। अपनी किसी पुरानी गलती से सीख लेकर आगे बढ़ेंगे। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई से जुड़ी परेशानियां दूर होती नजर आएंगी और मन एकाग्र रहेगा।
सिंह राशि
आज व्यस्तता जरूर रहेगी, लेकिन आपकी मेहनत आपको सफलता के करीब ले जाएगी। व्यापार में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि परिणाम आपके पक्ष में आने में थोड़ा समय लग सकता है। आय बढ़ाने के नए अवसरों पर आपका ध्यान रहेगा। पिताजी के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा, लेकिन उनके स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखें। सामाजिक कार्यों में भाग लेने से मान-सम्मान और पहचान बढ़ेगी।
कन्या राशि
आज खर्चों पर नियंत्रण रखना आपके लिए जरूरी रहेगा। अपनी पसंद की चीजों पर खर्च करने का मन करेगा, लेकिन बजट का ध्यान रखना समझदारी होगी। धन-धान्य में वृद्धि के संकेत हैं और कोई पुराना लेन-देन भी समाप्त हो सकता है। विद्यार्थियों का मन पढ़ाई से भटक सकता है, इसलिए उन्हें अधिक एकाग्र रहने की आवश्यकता होगी। एक साथ कई जिम्मेदारियां आने के बावजूद आप सभी कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर पाएंगे। माता-पिता का आशीर्वाद आपके लिए विशेष लाभदायक रहेगा।
तुला राशि
आज का दिन आपको विशेष सावधानी बरतने की सलाह देता है। कानूनी या प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में कोई भी कदम सोच-समझकर उठाएं। यदि आपने किसी से कोई वादा किया था, तो उसे निभाने का प्रयास करें। संतान की उपलब्धियां आपको गर्व का अनुभव कराएंगी। भावनाओं में बहकर कोई फैसला लेने से बचें। धैर्य और विवेक से लिया गया निर्णय ही आपके लिए लाभदायक साबित होगा।
वृश्चिक राशि
आज परिस्थितियां आपके पक्ष में रहने वाली हैं। मानसिक शांति बनी रहेगी और कई रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें, विशेष रूप से पेट से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। दूसरों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से बचें। यदि पिताजी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता है, तो समय रहते उचित सलाह लें। धन से जुड़े अटके हुए मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। परिवार के साथ बिताया गया समय सुकून देगा।
धनु राशि
आज आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। यदि नौकरी बदलने का विचार कर रहे थे, तो कोई अच्छा अवसर मिल सकता है। परिवार में किसी शुभ कार्य का आयोजन घर का माहौल खुशनुमा बनाएगा। विद्यार्थियों का मन नई चीजें सीखने में लगेगा और किसी नए कोर्स की शुरुआत करने का विचार बन सकता है। संतान की सफलता आपको गर्व और खुशी का अनुभव कराएगी।
मकर राशि
आज आपको अपने कामों पर पूरा ध्यान देने की आवश्यकता होगी। कुछ रुकावटें जरूर आएंगी, लेकिन धैर्य और मेहनत से आप उन्हें पार कर लेंगे। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। लंबे समय से टाले गए कार्यों को पूरा करने का प्रयास करें, अन्यथा परिवार के सदस्य नाराज हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें, ताकि आपकी मेहनत और विचारों को उचित महत्व मिल सके।
कुंभ राशि
आज स्वास्थ्य के मामले में राहत महसूस होगी और मानसिक शांति भी बनी रहेगी। पिताजी की सलाह आपके लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकती है, इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से सुनें। यदि किसी समस्या को लेकर मन परेशान था, तो उसका समाधान मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में मनपसंद जिम्मेदारी मिलने से उत्साह बढ़ेगा। निवेश से जुड़े मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेना ही आपके हित में रहेगा।
मीन राशि
आज का दिन छोटे-छोटे अवसरों को बड़े लाभ में बदलने का रहेगा। आपकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और आप अपने सभी जरूरी काम समय पर पूरे करने में सफल रहेंगे। व्यस्तता के बावजूद परिवार के लिए समय निकालेंगे, जिससे रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत होगी, हालांकि कुछ नए विरोधी भी सामने आ सकते हैं। सरकारी कार्यों में भी सकारात्मक प्रगति होने की संभावना है।
</description><guid>2313</guid><pubDate>23-Jul-2026 7:58:33 am</pubDate></item><item><title> बनते काम बिगड़ रहे हैं तो तुरंत करें लाल किताब के ये 5 आसान उपाय</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2312</link><description>पंडित प्रकाश उपाध्याय
कई बार ऐसा होता है जब व्यक्ति खूब मेहनत करता है और उसके बनते काम भी बिगड़ने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में कई बार व्यक्ति परेशान हो जाता है और अपने काम के लिए कोई प्रयास भी नहीं करता। लेकिन क्या आप जानते हैं लाल किताब में लगभग सभी परेशानियों के उपाय बताए गए हैं। तो आइए जानते हैं लाल किताब के 5 आसान उपाय जिन्हें करने से आप अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं। इन उपायों को आपको 43 दिनों तक करना होगा।
-सबसे पहले तो इस बात का खास ख्याल रखें की आप कोई भी गलत कर्म वाले काम न करें। शनि, राहु, केतु के मंदे कार्य न करें। जैसे ब्याज का धंधा, गृह क्लेश, शराब पीना आदि।
-43 दिनों तक गुड़ और गेहूं का दान दें और उसके बाद अगले 3 वर्षों तक गुड़ और गेहूं का रविवार को मंदिर में दान देते रहें। ऐसा करने से जल्द ही आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे।
-अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में शनि 7वें, चंद्र और मंगल पांचवें या सातवें भाव में हो तो 43 दिन तक हलवे में दूध मिलाकर मंदिर में बांटे और अगले तीन वर्षों तक हर मंगलवार को मंदिर में हलवा बांटे।
-अगर आपको बार-बार किसी काम में बाधा आती है या फिर आपके काम बनते बनते रुक जाते हैं तो सुबह स्नान कर पूजा करें और भगवान की आरती करते समय दीपक में दो लौंग डाल दें। इसके बाद जैसे-जैसे लोग जलता रहेगा आपकी बाधाएं दूर होती जाएंगी।
-बिगड़े काम को बनाने के लिए भी लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही जीवन में अगर सफलता नहीं मिल रही है तो इसके लिए नींबू में चार लौंग को गाड़ दें और इसके बाद ॐ श्री हनुमते नम: मंत्र का जप करें और लौंग गड़े नींबू को जहां भी जाए अपने साथ ले जाएं। इसके बाद आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे।</description><guid>2312</guid><pubDate>14-Jul-2026 4:41:31 pm</pubDate></item><item><title> श्री बलदेवज्यू मंदिर </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2311</link><description>श्री बलदेवज्यू मंदिर जिसे तुलसी क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, ओडिशा के केंद्रपड़ा ज़िले के इच्छापुर में स्थित है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई, भगवान बलदेव (बलराम) को समर्पित है और यह राज्य के सबसे पवित्र वैष्णव तीर्थस्थलों में से एक है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बाद, इसे ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है।
बलदेवज्यू मंदिर में दर्शन का समय
मंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 05:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक और शाम 06:00 बजे से रात 11:00 बजे तक है।
बलदेवज्यू मंदिर के मुख्य त्योहार
इस मंदिर में साल भर कई त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें रथ यात्रा, झूलन यात्रा, जन्माष्टमी, होली, मकर संक्रांति और कार्तिक पूर्णिमा शामिल हैं। यहाँ की रोज़ाना की पूजा-पद्धति पुरी के जगन्नाथ मंदिर जैसी ही है। देवी-देवताओं की पूजा 'षोडश उपचार' की परंपरा के अनुसार की जाती है।
यह मंदिर अपनी स्वादिष्ट 'रसाबली' प्रसाद के लिए खास तौर पर मशहूर है। यह ओड़िशा की एक पारंपरिक मिठाई है जो भगवान बलदेव को भोग के रूप में चढ़ाई जाती है।
बलदेवज्यू मंदिर कैसे पहुँचें
यह मंदिर ओड़िशा के केंद्रपड़ा में इच्छापुर में स्थित है। केंद्रपाड़ा भुवनेश्वर, कटक और आस-पास के शहरों से बसों और टैक्सियों के ज़रिए अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। केंद्रपड़ा रेलवे स्टेशन मंदिर के सबसे पास का मुख्य रेलवे स्टेशन है, जो यहाँ से लगभग 4.1 किलोमीटर दूर है। बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है।</description><guid>2311</guid><pubDate>10-Jul-2026 9:23:08 am</pubDate></item><item><title> गलती से भी किसी को गिफ्ट ना करें ये 7 चीजें</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2310</link><description>कई बार अच्छे इरादे के बावजूद भी अनजाने में दी गई कुछ चीजें रिश्तों में दरार डाल देती हैं और किस्मत पर बुरा असर डालती हैं। फेंगशुई विशेषज्ञों के अनुसार कुछ वस्तुओं को गिफ्ट करने से पूरी तरह बचना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।
नुकीली चीजें गिफ्ट में देने से बचें
चाकू, कैंची, तलवार या कोई भी नुकीली वस्तु गिफ्ट में कभी ना दें। फेंगशुई में इन चीजों को रिश्तों को काटने वाला प्रतीक माना जाता है। ऐसा गिफ्ट देने से दोनों पक्षों के बीच अनजाने में दूरियां बढ़ने लगती हैं और विवाद की संभावना बढ़ जाती है। भले ही ये चीजें महंगी और उपयोगी हों, लेकिन इनका ऊर्जात्मक प्रभाव बहुत नकारात्मक होता है।
रूमाल गिफ्ट में ना दें
रूमाल को फेंगशुई में आंसू, विदाई और उदासी का प्रतीक माना जाता है। किसी को रूमाल गिफ्ट करना अनजाने में यह संदेश देता है कि रिश्ते में अलगाव या दुख आने वाला है। इससे देने वाले और गिफ्ट पाने वाले दोनों के जीवन में भावनात्मक अस्थिरता आ सकती है। अगर किसी खास अवसर पर रूमाल देना ही पड़े तो उसके साथ कोई सकारात्मक वस्तु जैसे फूल या मिठाई जरूर दें।
वाटर फाउंटेन या एक्वेरियम गिफ्ट ना दें
इनडोर वाटर फाउंटेन या एक्वेरियम धन और सौभाग्य का प्रतीक होते हैं, लेकिन इन्हें किसी को गिफ्ट करना अपने घर का सौभाग्य दूसरे को सौंपने जैसा माना जाता है। फेंगशुई में ऐसा गिफ्ट देने से पाने वाले के घर से धन और सकारात्मक ऊर्जा कम होने लगती है। अगर किसी को पानी से संबंधित वस्तु देनी ही है, तो छोटा और साधारण आइटम चुनें।
प्लास्टिक या आर्टिफिशियल गिफ्ट्स से परहेज करें
आजकल प्लास्टिक के महंगे गिफ्ट्स और आर्टिफिशियल शो-पीस बहुत चलन में हैं। लेकिन फेंगशुई के अनुसार ये चीजें मृत ऊर्जा लेकर आती हैं। ये घर की सकारात्मकता को कम करती हैं और तरक्की में बाधा डालती हैं। इनकी जगह हमेशा जीवित पौधे, प्राकृतिक वस्तुएं या उपयोगी चीजें गिफ्ट में दें, जो ऊर्जा को बढ़ाती हों।
घड़ी गिफ्ट में ना दें
फेंगशुई और चीनी संस्कृति में घड़ी गिफ्ट में देना अशुभ माना जाता है। घड़ी समय का प्रतीक है और इसे गिफ्ट करना 'समय समाप्त' का संदेश दे सकता है। इससे देने वाले और पाने वाले दोनों के जीवन में अनचाही जल्दबाजी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं। अगर घड़ी देनी ही हो, तो इसके साथ कोई सिक्का या पैसे जरूर दें, ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हो जाए।
नकली फूल गिफ्ट ना करें
नकली फूलों को स्थिरता और जीवनहीनता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भूलकर भी किसी को नकली फूल गिफ्ट में ना दें। ऐसा करने से भाग्य भी प्रभावित होता है। असली फूल ही गिफ्ट में देना सबसे अच्छा है, क्योंकि वे जीवन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होते हैं।
गलत पौधे गिफ्ट करने से बचें
वैसे तो पौधा गिफ्ट करना शुभ माना जाता है, लेकिन पौधा पूरी तरह स्वस्थ, हरा-भरा और जीवंत होना चाहिए। पौधे की पत्तियां कहीं से भी सूखी, कटी-फटी या पीली नहीं होनी चाहिए। सूखा या बीमार पौधा गिफ्ट करना नकारात्मक ऊर्जा देता है।
सही गिफ्ट चुनने का फेंगशुई तरीका
फेंगशुई कहता है कि गिफ्ट चुनते समय उसकी ऊर्जा पर ध्यान दें। हमेशा ऐसी चीज चुनें जो सकारात्मक हो, उपयोगी हो और गिफ्ट पाने वाले को खुशी दे। फूल, मिठाई, अच्छी किताब, क्रिस्टल या हरे पौधे गिफ्ट में देना बहुत शुभ माना जाता है। गिफ्ट देते समय शुभ भावना रखें और दिल से आशीर्वाद दें।
सही गिफ्ट से मजबूत होंगे रिश्ते
फेंगशुई हमें याद दिलाता है कि गिफ्ट केवल वस्तु नहीं, बल्कि ऊर्जा का आदान-प्रदान है। गलत चीज गिफ्ट करने से अनजाने में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए अगली बार कोई गिफ्ट चुनते समय इन 7 चीजों से सावधानी बरतें। सही गिफ्ट से रिश्ते मजबूत होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
</description><guid>2310</guid><pubDate>07-Jul-2026 12:01:33 pm</pubDate></item><item><title> काम में नहीं लगता दिल? बेचैन मन को शांत करेंगे ये रत्न</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2309</link><description>पन्ना रत्न: बुद्धि और स्पष्टता का प्रतीक
पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। यह सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाता है और मानसिक धुंधलापन दूर करता है। जो लोग काम में मन नहीं लगा पाते या बार-बार भटक जाते हैं, उनके लिए पन्ना बेहद उपयोगी है। यह रत्न व्यापार और नौकरी दोनों में नई स्पष्टता लाता है। पन्ना पहनने से निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और छोटी-छोटी गलतियां कम हो जाती हैं।
मूंगा रत्न: साहस और ऊर्जा बढ़ाने वाला
मूंगा मंगल ग्रह से जुड़ा रत्न है। यह व्यक्ति में साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व गुण जगाता है। जो लोग अपनी क्षमता के बावजूद आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, उनके लिए मूंगा बहुत कारगर साबित होता है। यह रत्न करियर में रुकावटें दूर करता है और नई चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देता है। मूंगा पहनने से व्यक्ति में सक्रियता बढ़ती है और आलस्य कम होता है।
गोमेद रत्न: राहु की उलझनों से मुक्ति
गोमेद राहु का रत्न है। यह उन लोगों के लिए खास है जिनका मन बार-बार भटकता है या अनावश्यक चिंताएं सताती हैं। गोमेद मानसिक तनाव कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। यह रत्न करियर में अचानक आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। गोमेद पहनने से व्यक्ति की सोच स्पष्ट होती है और गलत फैसलों से बचाव होता है।
नीलम रत्न: अनुशासन और लंबी सफलता
नीलम शनि ग्रह का रत्न है। यह मेहनत का पूरा फल दिलाता है और अनुशासन बनाए रखने में सहायक होता है। जो लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन परिणाम नहीं मिल रहे, उनके लिए नीलम बहुत प्रभावी है। यह रत्न करियर में स्थिरता लाता है और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाता है। नीलम पहनने से व्यक्ति धैर्यवान और लक्ष्य केंद्रित होता है।
जेड रत्न: संतुलन और सही निर्णय
जेड रत्न करियर और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है और बेचैनी को शांत करता है। जो लोग लगातार तनाव में रहते हैं या फैसले लेने में कन्फ्यूजन महसूस करते हैं, उनके लिए जेड बेहतर विकल्प है। यह रत्न मानसिक शांति के साथ-साथ व्यावसायिक बुद्धिमत्ता भी बढ़ाता है।
रत्न धारण करने के नियम
कोई भी रत्न धारण करने से पहले ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। रत्न को शुद्ध धातु में जड़वाकर शुभ मुहूर्त में पहनना चाहिए। हर रत्न का अपना एक नियमित रखरखाव होता है। बिना सलाह के रत्न पहनने से उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है।
इन रत्नों से मिलने वाले लाभ
ये पांच रत्न ना सिर्फ मन को शांत करते हैं बल्कि करियर और कारोबार में नई दिशा भी देते हैं। नियमित उपयोग से फोकस बढ़ता है, निर्णय क्षमता मजबूत होती है और सफलता के नए रास्ते खुलते हैं। सही रत्न चुनकर और श्रद्धा के साथ धारण करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
</description><guid>2309</guid><pubDate>07-Jul-2026 11:59:44 am</pubDate></item><item><title> इन तारीखों पर जन्मे लड़के बनते हैं परफेक्ट दामाद !</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2308</link><description>एक अच्छा इंसान हर रिश्ते दिल से निभाता है। वहीं अगर आप अपनी बेटी के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढ रहे हैं तो चूजी होना लाजमी है। हर कोई चाहता है कि बेटी का घर अच्छे से बसे। तो चलिए न्यूमेरेलॉजी की मदद से जानते हैं कि आखिर किन तारीखों में जन्मे लड़के परफेक्ट दामाद बनते हैं? मूलांक 2 और मूलांक 7 वाले लड़के अच्छे दामाद वाली कैटेगरी में बिल्कुल फिट बैठते हैं। आइए जानते हैं कैसे?
मूलांक 2 और मूलांक 7 हैं परफेक्ट
न्यूमेरेलॉजी के अनुसार जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या फिर 29 तारीख को होता है उनका मूलांक 2 होगा। तो वहीं जिनका जन्म 7, 16 और 25 तारीख को होगा उनका मूलांक 7 होगा।
फीलिंग्स की कद्र करते हैं मूलांक 2 वाले लड़के
मूलांक 2 का स्वामी ग्रह चंदमा है तो ये काफी इमोशनल होते हैं। रिश्ते की गहराई को समझते हैं और बेहद भरोसेमंद होते हैं। समझदार होने के साथ-साथ सामने वाले के मन की बात आसानी से समझ लेते हैं और रिश्ते में प्यार-सम्मान बनाए रखते हैं।
पत्नी को देते हैं प्रिंसेंस ट्रीटमेंट
मूलांक 3 वाले लड़के पत्नी को प्रिंसेस ट्रीटमेंट देने में जरा भी पीछे नहीं हटते हैं। न्यूमेरेलॉजी के हिसाब से ये अपने पार्टनर की हर एक बात ध्यान से सुनते हैं और सही राय भी देते हैं। हर छोटी-छोटी बात का ख्याल रखना इन्हें पसंद है।
मूलांक 7 वाले लड़के लेते हैं सही फैसला
पार्टनर का सही फैसला लेना जिंदगी की कई मुश्किलों को कम कर सकता है। कन्फ्यूजन में पड़े लोग ना सिर्फ रिश्ता उलझाते हैं बल्कि जिंदगी को भी सही ट्रैक पर नहीं ले पाते हैं। स्वामी ग्रह केतु होने के नाते मूलांक 7 वाले लड़के फालतू की बहस करने से बचते हैं। रिश्तों में सही बैलेंस बनाकर चलते हैं।
ससुराल वालों का जीतते हैं दिल
न्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 7 वाले लड़के ससुराल में हर किसी के चहेते बन जाते हैं। सॉफ्ट नेचर के होते हैं। बड़ों की बात सुनते हैं और परिवार के हर एक सदस्य के साथ इनका बॉन्ड बहुत ही अच्छा होता है।
क्यों बनते हैं पसंदीदा दामाद?
मूलांक 2 और मूलांक 7 वाले लड़के अपने खास गुणों की वजह से ही दामाद का रोल भी अच्छे से अदा करते हैं। इनमें समझदारी होती है। साथ ही ये समझदार बहुत होते हैं और इन्हें अच्छे से हर एक रिश्ता निभाना आता है। साथ ही ये ईमानदार भी बहुत होते हैं। यही सारे गुण इन्हें बाकियों से खास बनाते हैं।
---डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
</description><guid>2308</guid><pubDate>07-Jul-2026 11:35:17 am</pubDate></item><item><title>जुलाई में  गुरु होंगे अस्त और शनि चलेंगे उल्टी चाल , इन राशि वाले जातकों को होगी परेशानी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2307</link><description>पंडित प्रकाश उपाध्याय
पंचांग के अनुसार जुलाई महीने में दो प्रभावशाली ग्रहों शनिदेव और बृहस्पति की चाल में परिवर्तन आएगा। इसका असर कुछ राशियों नकारात्मक पड़ेगा। 14 जुलाई को गुरु अस्त होंगे फिर इसके बाद 27 जुलाई को शनि मीन राशि में रहते हुए वक्री होंगे।जिससे कुछ राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत होगी।
आइए जानते है कि किन-किन राशियों के ऊपर इसका असर पड़ेगा-
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए जुलाई का महीना बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस राशि वाले जातकों के आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। कार्यस्थल पर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि के दौरान कोई बड़ा निवेश करने से बचने और लेन-देन में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें आ सकती हैं। खर्च बढ़ेंगे। इस दौरान आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए जुलाई महीना कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं। कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल होते-होते रह सकती है। वैवाहिक जीवन में बेहतर तालमेल के साथ चलना होगा। नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं।
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए जुलाई महीना अच्छा नहीं कहा जा सकता है। कार्यों में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में बेहतर संतुलन बनाकर रहना होगा। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी करने से बचना होगा। धन के लेन-देन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी की जरूरत होगी। इस राशि वाले जातकों को लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना होगा।
</description><guid>2307</guid><pubDate>30-Jun-2026 8:42:46 am</pubDate></item><item><title> आज से शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, जानें आषाढ़ मास  के प्रमुख व्रत,  त्योहार और उत्सव</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2306</link><description>आषाढ़ मास या आदि हिंदू कैलेंडर का एक महीना है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में जून / जुलाई से मेल खाता है। भारत के कैलेंडर में, यह महीना वर्ष का चौथा महीना होता है। वैदिक ज्योतिष में आषाढ़ की शुरुआत सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश से होती है। यह दो महीनों में से पहला है जिसमें मनसून का मौसम शामिल है। बंगाली कैलेंडर में आषाढ़ तीसरा महीना होता है।
आषाढ़ मास में रथ यात्रा प्रमुख त्योहारों में से एक है जो भगवान जगन्नाथ को समर्पित है जो हर साल पुरी और अन्य स्थानों पर आयोजित किया जाता है। गुरु पूर्णिमा, गुरु को समर्पित एक त्योहार आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इससे पहले शयनी एकादशी, शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें चंद्र दिवस (एकादशी) को मनाई जाती है।
आषाढ़ मास 2026
इस साल मंगलवार 30 जून 2026 से बुधवार 29 जुलाई 2026 तक आषाढ़ मास की गणना है।

आषाढ़ मास 2026 व्रत, त्यौहार, जयंती और उत्सव
30 जून मंगलवार 2026: इष्टि
03 जुलाई शुक्रवार 2026: कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी
10 जुलाई शुक्रवार 2026: योगिनी एकादशी
11 जुलाई शनिवार 2026: गौण योगिनी एकादशी, वैष्णव योगिनी एकादशी
12 जुलाई रविवार 2026: रवि प्रदोष व्रत
14 जुलाई मंगलवार 2026: दर्श अमावस्या, अन्वाधान, आषाढ़ अमावस्या
15 जुलाई बुधवार 2026: आषाढ़ नवरात्रि, इष्टि
16 जुलाई बृहस्पतिवार 2026: जगन्नाथ रथयात्रा, कर्क संक्रान्ति
25 जुलाई शनिवार 2026: देवशयनी एकादशी
26 जुलाई रविवार 2026: रवि प्रदोष व्रत
27 जुलाई सोमवार 2026: जयापार्वती व्रत प्रारम्भ
28 जुलाई मंगलवार 2026: कोकिला व्रत
29 जुलाई बुधवार 2026: गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा, आषाढ़ पूर्णिमा, अन्वधन</description><guid>2306</guid><pubDate>30-Jun-2026 7:52:14 am</pubDate></item><item><title> घर में कहां लगाएं एसी, जानें सही दिशा और वास्तु के नियम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2305</link><description>वास्तु शास्त्र में घर की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी वस्तु की सही दिशा और स्थान को महत्वपूर्ण माना गया है, ताकि जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। घर, दुकान या किसी भी प्रतिष्ठान में लगाए जाने वाला एयर कंडीशनर (AC) वास्तु के अनुसार अग्नि तत्व से जुड़ा उपकरण माना जाता है। यदि इसे गलत दिशा में लगाया जाए, तो इसका असर मानसिक स्थिति, स्वास्थ्य और आर्थिक हालात पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि AC को किस दिशा में लगाना शुभ माना जाता है और किन दिशाओं में लगाने से बचना चाहिए।
शुभ दिशा
घर में एसी लगवाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार एसी को हमेशा अग्नि कोण यानी दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता हैष यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी होती है और बिजली से चलने वाले उपकरणों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं एसी इस तरह लगाना चाहिए कि उसकी ठंडी हवा सीधे सिर पर न आए। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, बल्कि वास्तु के अनुसार भी इसे उचित नहीं माना जाता।
पश्चिम और उत्तर दिशा
इसके अलावा पश्चिम और उत्तर दिशा को AC लगाने के लिए सबसे बढ़िया माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पश्चिम दिशा के जलदेव स्वामी वरुण देव हैं, यह दिशा शुक्र को समर्पित है। वहीं, उत्तर कुबेर की दिशा मानी गई हैं, जो देव खजांची हैं। इन दिशाओं में AC लगाने से घर में धन का प्रवाह अच्छा बना रहता है, वहीं AC की लाइफ भी अच्छी होती है। ये दिशाएं आपके बिजली बिल को भी कम करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।
गलत दिशा
एसी लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पश्चिम दिशा का चयन करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर भूलकर भी AC या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं लगाने चाहिए। ऐसा करने से धन हानि, अनावश्यक खर्च और व्यापार में नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी AC लगाना वास्तु के अनुसार सही नहीं है। इस दिशा में लगाए गए इलेक्ट्रिक उपकरण जल्दी खराब हो सकते हैं।
पूर्व दिशा में भी AC लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बिजली खर्च बढ़ने की आशंका रहती है।
अगर आप भी इस गर्मी में अपने घर में नया एसी लगवाने जा रहे हैं, तो वास्तु के इन आसान नियमों का ध्यान जरूर रखें। इससे न केवल घर ठंडा रहेगा बल्कि जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता भी बनी रहेगी।
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</description><guid>2305</guid><pubDate>13-May-2026 11:48:13 am</pubDate></item><item><title> घर को बुरी नजर से बचाने सरल और आसान उपाय</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2304</link><description>भारत सहित दुनिया के कई देश सालों से बुरी नजर को लेकर विश्वास करते हैं. उनका मानना ​​है कि यह बुरी ऊर्जा ईर्ष्या या बुरे इरादों से आती है. हालांकि इसको लेकर विज्ञान को कोई सबूत नहीं मिला है कि ऐसी कोई निगेटिव एनर्जी मौजूद है, फिर भी बहुत से लोग अपने घरों को इससे बचाने के लिए पुराने उपाय और आध्यात्मिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. वे न सिर्फ घर के दरवाजे में बुरी नजर से बचने के लिए नजरबट्टू टांगते हैं बल्कि वास्तु के मुताबिक कई तरह के उपाय करते हैं. आइए जानते हैं कि वे किस तरह के उपाय करते हैं.
घर में नमक रखना और उसका पोंछा लगाना
बहुत से लोगों का मानना ​​है कि नमक निगेटिव एनर्जी से छुटकारा पाने का एक शक्तिशाली माध्यम है. लोग अक्सर अपने कमरों के कोनों में या दरवाजों के पास सेंधा नमक से भरे कटोरे रखते हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे अपना काम करते रहें, उन्हें हर हफ्ते बदला जाता है. कमरे की ऊर्जा को शुद्ध करने का एक और आम तरीका है, फर्श पर पोंछा लगाने के लिए नमक वाले पानी का इस्तेमाल करना.
कपूर और अगरबत्ती जलाना
लोगों का मानना​है कि अगरबत्ती या कपूर जलाने से हवा शुद्ध होती है. इसकी महक से उन्हें ईश्वर के करीब होने का एहसास होता है और उन्हें मन की शांति मिलती है. कुछ परिवार हर रोज पूजा करते हैं और घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए कपूर जलाते हैं.
</description><guid>2304</guid><pubDate>13-May-2026 11:28:40 am</pubDate></item><item><title> घर के मुख्य दरवाजे पर रखें 7 चीजें, खींची चली आएंगी लक्ष्मी माता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2302</link><description>घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, रौशन भरा रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की हर एक चीज में ऊर्जा मौजूद होती है। घर में गलत जगह पर गलत चीजें रखने या बनवाने से वास्तु दोष लगता है। घर के मुख्य दरवाजे पर कुछ चीजें रखने से मां लक्ष्मी का वास होता है और धन-धान्य में भी वृद्धि होती है। आइए जानते हैं घर की एन्ट्रेंस पर कौन सी लकी वस्तुएं रखनी चाहिए-
स्वास्तिक का चिन्ह- हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। इसलिए अपने घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
घोड़े की नाल- घर के लिए घोड़े की नाल बेहद लकी मानी जाती है। घोड़े की नाल को हमेशा मुख्य द्वार के ऊपरी भाग में लगाया जाता है। इससे गुड लक बना रहता है।
तोरण लगाएं- आम के पत्तों का तोरण बनाकर मुख द्वार पर लगाएं। ध्यान रखें की तोरण में इस्तेमाल किए गए पत्ते हरे-भरे होने चाहिए न की कटे-फटे। इससे घर में पॉजिटिविटी बनी रहेगी।
शुभ-लाभ- घर के मुख द्वार के ऊपर या दाएं-बाएं भाग में लाल चंदन से शुभ-लाभ लिखें। शुभ-लाभ शुभट का प्रतीक है। इसे लिखने से घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है।
दीपक जलाएं- घर के मुख्य द्वार पर शाम के वक्त रोज दीपक जलाएं, जिससे पॉजिटिव एनर्जी घर में प्रवेश कर सके। मान्यता है शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
तुलसी पौधा- तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। घर के मुख द्वार के पास तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ये पौधा सूखने या सड़ने न पाए। सुबह-शाम तुलसी जी के समक्ष दीपक भी जलाएं।
सूर्य यंत्र: घर के मेन दरवाजे पर सूर्य यंत्र लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर को बुरी नजर या नेगेटिव एनर्जी से बचाया जा सकता है।
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</description><guid>2302</guid><pubDate>13-May-2026 11:00:04 am</pubDate></item><item><title> हाथ के नाखूनों की बनावट खोलती है व्यक्ति के व्यक्तित्व से जुड़े कई राज</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2301</link><description>हस्त रेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं के अलावा नाखूनों का भी खास महत्व है। हाथ के नाखूनों की बनावट भी व्यक्ति के व्यक्तित्व व स्वभाव से जुड़े कई राज खोलते हैं। हर व्यक्ति के हाथ के नाखूनों की बनावट अलग-अलग होती है। कुछ लोगों के नाखून छोटे, किसी के लंबे या चौड़े होते हैं। जानें हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ के नाखूनों की बनावट से क्या संकेत मिलते हैं।
चौड़े नाखून
कहते हैं कि जिन लोगों के हाथ के नाखून चौड़े होते हैं वे बुद्धि के धनी होते हैं। ऐसे लोगों में सोचने व फैसला लेने की क्षमता अधिक होती है। ये अपने सभी कार्यों में सफलता पाते हैं।
गोलाकार नाखून
हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के नाखून गोलाकार होते हैं, वे व्यक्ति सशक्त विचारों वाले एवं तुरंत फैसला लेने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति जो भी फैसला लेते हैं उन पर अमल करना भी जानते हैं।
चौकोर नाखून
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, चौकोर नाखून वाले व्यक्ति स्वभाव से गंभीर माने जाते हैं। इन लोगों में लीड करने की क्षमता होती है। कहते हैं कि लोग राजनीति में सफल होते हैं।
लंबे नाखून
हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के लंबे नाखून होते हैं, वे रोमांस से भरपूर होते हैं। यह स्वभाव से भोले और विनम्र होते हैं। यह लोग आसानी से दूसरों पर भरोसा कर लेते हैं।
पूर्ण नाखून
हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के हाथ के नाखूनों चौड़ाई की अपेक्षा मामूली लंबे होते हैं और अपनी प्राकृतिक चमक लिए हुए होते हैं। ऐसे व्यक्ति उत्तम विचारों वाले और निरंतर आगे की ओर बढ़ते रहने की भावना रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग सामाजिक मान-प्रतिष्ठा पाते हैं।
</description><guid>2301</guid><pubDate>13-May-2026 10:47:28 am</pubDate></item><item><title> भाग्यशाली लोगों की हाथ में होती हैं ये रेखाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2300</link><description>हिंदू धर्म में हस्तरेखा शास्त्र को हमेशा से खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इंसान की हथेली में मौजूद रेखाएं उसके स्वभाव, भाग्य, करियर और धन योग तक का संकेत देती हैं। यही वजह है कि वर्षों से लोग अपनी हथेली की रेखाओं को देखकर भविष्य का आकलन करते आए हैं। खासकर वे रेखाएं, जो धन और भाग्य से जुड़ी होती हैं, उन्हें बेहद शुभ माना जाता है। आज हम समझेंगे कि किस प्रकार की रेखाएं यह बताती हैं कि व्यक्ति जीवन में कब और कैसे धनवान बन सकता है।
भाग्य रेखा क्या होती है?
हर व्यक्ति की भाग्य रेखा अलग होती है। किसी की सीधी, किसी की टूटी हुई, किसी की कटी-फटी तो किसी की पूरी तरह टेढ़ी-मेढ़ी। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, वह रेखा जो कलाई के पास से शुरू होकर सीधे मध्यमा उंगली (सबसे लंबी उंगली) की तरफ जाती है, वही भाग्य रेखा कहलाती है। इस रेखा की मजबूती और गहराई यह बताती है कि व्यक्ति की किस्मत उसे कितनी दूर तक ले जाएगी और जीवन में कब अवसर मिलेंगे। अगर आपकी भाग्य रेगा सीधी और गहरी है तो यह अच्छे करियर और स्थिर सफलता का संकेत है। अगर टूटी या कटी हुई रेखा है तो ये जीवन में उतार-चढ़ाव और संघर्ष का संकेत है और अगर टेढ़ी-मेढ़ी रेखा है तो ये जीवन में अस्थिरता, लेकिन अचानक मिलने वाले अवसर का संकेत देती है।
धन रेखा कहाँ होती है?
हथेली में एक विशेष रेखा होती है जिसे धन रेखा कहा जाता है। जब आप अपनी हथेली को देखें, तो अनामिका ऊंगली यानी रिंग फिंगर के नीचे सूर्य पर्वत से निकलकर जो रेखा हृदय रेखा को पार करते हुए मस्तिष्क रेखा की ओर बढ़ती है, उसे धन रेखा माना जाता है।
ऐसी रेखा वाले लोग माने जाते हैं बेहद भाग्यशाली
हस्तरेखा शास्त्र में एक विशेष संयोजन को अत्यंत शुभ कहा गया है। अगर किसी व्यक्ति की रेखा कलाई के पास से शुरू होकर सीधे शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे) तक जाती हो और फिर हल्का-सा मुड़कर गुरु पर्वत (तर्जनी उंगली के नीचे) की ओर पहुंच जाए, तो यह बहुत ही दुर्लभ और शुभ योग माना जाता है। ऐसे लोग बेहद भाग्यशाली होते हैं।
</description><guid>2300</guid><pubDate>13-May-2026 10:44:30 am</pubDate></item><item><title> बिना एक पैसा खर्च किए घर से भगाएं निगेटिविटी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2299</link><description>दिनभर की थकान और दफ्तर की भागदौड़ के बाद जब हम घर की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो उम्मीद होती है कि वहां सुकून मिलेगा. लेकिन क्या कभी आपने ये महसूस किया है कि घर पहुंचते ही बिना वजह भारीपन, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होने लगे? अगर हां, तो यह आपके घर का वास्तु या फेंगशुई दोष हो सकता है. अक्सर लोग फेंगशुई के नाम पर महंगे शो-पीस खरीदने लगते हैं, लेकिन असल में फेंगशुई ऊर्जा के सही संतुलन का नाम है. आइए जानते हैं कि कैसे आप अपनी जेब से एक चवन्नी खर्च किए बिना अपने आशियाने को खुशियों से भर सकते हैं.
1. कबाड़ को हटाएं
फेंगशुई का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम है सफाई. रुकी हुई ऊर्जा अक्सर पुराने कबाड़, टूटे हुए सामान या लंबे समय से बंद पड़ी अलमारियों में जमा हो जाती है. यदि आपके घर में ऐसी चीजें हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उन्हें हटा दें. खाली जगह का मतलब है नई ऊर्जा के लिए रास्ता बनाना. जैसे ही आप घर का कोना-कोना साफ करते हैं, आप खुद को हल्का और मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे.
2. ताजी हवा और प्राकृतिक रोशनी
सूरज की रोशनी और ताजी हवा प्राकृतिक रूप से नकारात्मकता को नष्ट करती है. रोज सुबह कम से कम 20 मिनट के लिए अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें. फेंगशुई में माना जाता है कि चलती हुई हवा ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू बनाती है. अगर आपके घर के किसी कोने में हमेशा अंधेरा रहता है, तो वहां रोशनी की व्यवस्था करें ताकि ऊर्जा सही हो जाए.
3. मुख्य द्वार
फेंगशुई के अनुसार, 'ची' यानी ऊर्जा मुख्य द्वार से ही घर में प्रवेश करती है. बिना खर्च किए इसे बेहतर बनाने के लिए बस अपने मुख्य द्वार को साफ रखें. वहां रखे पुराने जूते-चप्पल हटा दें. ये सुनिश्चित करें कि दरवाजा खुलते समय आवाज न करे. एक साफ और सुंदर प्रवेश द्वार न केवल मेहमानों को, बल्कि सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता है.
4. शीशों का सही इस्तेमाल
आपके घर में मौजूद पुराने शीशे भी फेंगशुई का बड़ा टूल बन सकते हैं. बस उनकी दिशा बदलें. यदि आपके घर के किसी खिड़की के बाहर हरियाली या सुंदर दृश्य है, तो उसके सामने शीशा लगाएं. इससे बाहर की सकारात्मक ऊर्जा परावर्तित होकर घर के अंदर आएगी. ध्यान रहे, शीशा कभी भी मुख्य द्वार या बिस्तर के ठीक सामने न रखें, वरना यह ऊर्जा को वापस बाहर भेज सकता है या नींद में खलल डाल सकता है.
5. पानी और नमक
घर की निगेटिविटी सोखने के लिए नमक सबसे सस्ता और असरदार तरीका है. पोंछे के पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक या सेंधा नमक मिलाकर घर की सफाई करें. इसके अलावा, बाथरूम या घर के अंधेरे कोनों में एक कटोरी में नमक भरकर रखें. यह वातावरण की दूषित ऊर्जा को सोख लेता है. हर हफ्ते इस नमक को बदल दें. यह छोटा सा बदलाव घर के माहौल को काफी सकारात्मक बना देता है.
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</description><guid>2299</guid><pubDate>08-May-2026 1:07:28 pm</pubDate></item><item><title> मूलांक 1 वालों के लिए जैकपॉट साबित होते हैं इन 3 मूलांक के पार्टनर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2298</link><description>0- शादी के बाद चमक जाती है किस्मत!
अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 1 होगा। न्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 1 वालों पर सूर्य का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है क्योंकि यही इनका स्वामी ग्रह होता है। ऐसे में मूलांक 1 वालों में लीडरशिप क्वालिटी कूट-कूटकर भरी होती है। ये लोग जहां भी जाते हैं, वहां पर अपनी अलग छाप जरूर छोड़ते हैं। वहीं दूसरी ओर इनकी यही हाई एनर्जी कई बार रिश्ते पर हावी हो जाती है। ऐसे में मूलांक 1 वालों को ऐसे पार्टनर का चुनाव करना चाहिए जो ना सिर्फ इन्हें समझे बल्कि सपोर्ट भी करें।
मूलांक 1 को किससे करनी चाहिए शादी?
मूलांक 1 तो क्या हर किसी के मन में ये सवाल आता है कि आखिर शादी कैसे इंसान से की जाए? अब ऐसे में अगर न्यूमेरेलॉजी यानी अंक ज्योतिष की मदद ली जाए तो काम थोड़ा सा आसान हो जाता है। मूलांक 1 वालों के लिए सेम मूलांक का पार्टनर सबसे परफेक्ट होता है। जब दो मूलांक 1 साथ आते हैं तो ये जोड़ी पावरफुल बनती है। दोनों एंबिशियस होते हैं और ये मिलकर हर वो बड़ी चीज हासिल कर सकते हैं जिसका सपना सभी देखते हैं। हालांकि दिक्कत तब आएगी जब दोनों का ईगो क्लैश होगा। ऐसे में एक-दूसरे की फीलिंग्स का सम्मान किया जाए तो इस जोड़ी के टक्कर का कोई नहीं है।
मूलांक 1 और मूलांक 3 की जोड़ी
न्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 1 वाले अगर अपने लिए शांत और समझदार पार्टनर की तलाश करें तो चीजें आसान हो सकती हैं। ऐसे में मूलांक 3 वाले लोग इनके लिए परफेक्ट साबित हो सकते हैं। दरअसल इस मूलांक के लोग मूलांक 1 वालों के गुस्से और डॉमिनेटिंग नेचर को अच्छे से बैलेंस कर ले जाते हैं। इन दोनों का मैच इसलिए भी अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि इनके रिश्ते में समझदारी तो होगी ही साथ ही एक-दूसरे का अच्छा सपोर्ट भी होगा।
मूलांक 1 और मूलांक 5 की जोड़ी
न्यूमेरेलॉजी के हिसाब से ये कॉम्बिनेशन भी अच्छा साबित होता है। अगर मूलांक 1 वाले लोग मूलांक 5 वालों से शादी करते हैं तो इनकी जिंदगी में एक्साइटमेंट खूब आएगा। मूलांक 1 वाले जहां थोड़ा सा सीरियस होते हैं वहीं मूलांक 5 वाले चीजों को खुशनुमा बना देते हैं। ऐसे में इनकी जोड़ी फन और बैलेंस का अच्छा कॉम्बिनेशन बन जाती है।
मूलांक 8 से रहें थोड़ा सावधान
मूलांक 1 वाले अगर अपने लिए परफेक्ट मैच देख रहे हैं तो उन्हें कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए। न्यूमेरेलॉजी के हिसाब से इन लोगों को मूलांक 8 वालों से बचना चाहिए। दरअसल मूलांक 8 का स्वामी ग्रह शनि होता है। सूर्य और शनि एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाते हैं। ऐसे में मूलांक 1 वाले अगर मूलांक 8 वाले लाइफ पार्टनर को चुनते हैं तो मनमुटाव की स्थिति हमेशा बनी रहेगी। ऐसे में रिश्ते में तनाव बढ़ता जाएगा। अगर मूलांक 1 वाले इस मूलांक के साथी को चुनते हैं को समझदारी से काम लेके चीजों को बैलेंस किया जा सकता है लेकिन इसमें धैर्य की बहुत जरूर होगी।
न्यूमेरोलॉजी के हिसाब से चुनें सही लाइफ पार्टनर
न्यूमेरोलॉजी के अनुसार हर एक मूलांक की अपनी एनर्जी और नेचर होता है। मूलांक 1 वालों के लिए 1, 3 और 5 सबसे बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इनकी एनर्जी एक-दूसरे के साथ मैच करती है। सही पार्टनर मिलने से रिश्ते में टकराव कम होता है और ऐसे में लाइफ ज्यादा स्मूद चलती है। ऐसे में न्यूमेरेलॉजी की मदद लेकर सही पार्टनर का चुनाव करना बेहतर है। डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं।
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</description><guid>2298</guid><pubDate>08-May-2026 1:04:27 pm</pubDate></item><item><title>  घर के मुख्य दरवाजे पर रखें 7 चीजें, खींची चली आएंगी लक्ष्मी माता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2297</link><description>घर का मुख्य द्वारऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, रौशन भरा रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की हर एक चीज में ऊर्जा मौजूद होती है। घर में गलत जगह पर गलत चीजें रखने या बनवाने से वास्तु दोष लगता है। घर के मुख्य दरवाजे पर कुछ चीजें रखने से मां लक्ष्मी का वास होता है और धन-धान्य में भी वृद्धि होती है। आइए जानते हैं घर की एन्ट्रेंस पर कौन सी लकी वस्तुएं रखनी चाहिए-
स्वास्तिक का चिन्ह- हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। इसलिए अपने घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
घोड़े की नाल- घर के लिए घोड़े की नाल बेहद लकी मानी जाती है। घोड़े की नाल को हमेशा मुख्य द्वार के ऊपरी भाग में लगाया जाता है। इससे गुड लक बना रहता है।
तोरण लगाएं- आम के पत्तों का तोरण बनाकर मुख द्वार पर लगाएं। ध्यान रखें की तोरण में इस्तेमाल किए गए पत्ते हरे-भरे होने चाहिए न की कटे-फटे। इससे घर में पॉजिटिविटी बनी रहेगी।
शुभ-लाभ- घर के मुख द्वार के ऊपर या दाएं-बाएं भाग में लाल चंदन से शुभ-लाभ लिखें। शुभ-लाभ शुभट का प्रतीक है। इसे लिखने से घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है।
दीपक जलाएं- घर के मुख्य द्वार पर शाम के वक्त रोज दीपक जलाएं, जिससे पॉजिटिव एनर्जी घर में प्रवेश कर सके। मान्यता है शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
तुलसी पौधा- तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। घर के मुख द्वार के पास तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ये पौधा सूखने या सड़ने न पाए। सुबह-शाम तुलसी जी के समक्ष दीपक भी जलाएं।सूर्य यंत्र: घर के मेन दरवाजे पर सूर्य यंत्र लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर को बुरी नजर या नेगेटिव एनर्जी से बचाया जा सकता है।
</description><guid>2297</guid><pubDate>23-Apr-2026 12:07:06 pm</pubDate></item><item><title> अक्षय तृतीया क्यों है इतनी खास? जानें क्या हैं इसकी पौराणिक कथाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2296</link><description>अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. अक्षय शब्द का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, यानी जो कभी समाप्त न हो. माना जाता है कि इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल अनंत काल तक बना रहता है. यह दिन नई शुरुआत करने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है.
शास्त्रों के अनुसार इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था, जो इस तिथि को और भी पावन बनाता है. इस विशेष अवसर पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में खुशहाली आती है और मानसिक शांति मिलती है.
अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक अर्थ और मान्यताएं
अक्षय तृतीया का दिन इतिहास और पुराणों की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी है. हिंदू मान्यता के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. इसे युगादि तिथि भी कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने महाभारत सुनानी शुरू की थी और भगवान गणेश ने उसे लिखना आरंभ किया था. इस तिथि का संबंध श्रीकृष्ण से भी है उन्होंने इसी दिन पांडवों को अक्षय पात्र भेंट किया था और सुदामा की निर्धनता भी इसी दिन दूर की थी. ये सभी कथाएं हमें सिखाती हैं कि सच्ची भक्ति और अच्छे कर्मों से जीवन में कभी न समाप्त होने वाले सुख की प्राप्ति होती है.
अनंत फल पाने के लिए इस दिन क्या करें?
इस पावन दिन पर किए गए कुछ विशेष कार्य जीवन को सुखद बनाने में मदद करते हैं. अक्षय तृतीया पर दान का सबसे अधिक महत्व है. गर्मी के समय में जल, गुड़, सत्तू या पंखे का दान करना बहुत अच्छा माना जाता है. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा में पीले फूलों और तुलसी दल का उपयोग करना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है. सोने या चांदी की वस्तु खरीदना भी शुभ माना जाता है, लेकिन अगर यह संभव न हो, तो केवल मिट्टी का एक घड़ा खरीदना भी सौभाग्य लाने वाला होता है. अपनी मधुर वाणी से दूसरों का सम्मान करें और कड़वी बातों से पूरी तरह दूर रहें. यह सादगी भरा व्यवहार ही हमें असल में मानसिक सुकून की ओर ले जाता है.
सात्विक जीवन और सुखद भविष्य के लिए नेक संकल्प
अक्षय तृतीया का पर्व हमें यह समझाता है कि असली संपत्ति हमारे अच्छे विचार और पुण्य कर्म हैं. इस दिन किसी की बुराई करने या मन में गलत ख्याल लाने से बचना चाहिए ताकि हमारे पुण्य का नाश न हो. सात्विक भोजन ग्रहण करने और भगवान के नाम का जाप करने से मानसिक तनाव दूर होता है और काम करने की नई शक्ति मिलती है. अपनी मेहनत पर भरोसा रखना और जरूरतमंदों की सेवा करना ही हमें एक बेहतर इंसान बनाता है. जब हम पवित्र भाव से इस दिन का स्वागत करते हैं, तो हमारे सभी काम बनने लगते हैं और घर में सुख का वास होता है. यह दिन आत्म-चिंतन करने और अपने जीवन को सही दिशा देने के लिए सबसे शुभ है.</description><guid>2296</guid><pubDate>19-Apr-2026 12:50:29 pm</pubDate></item><item><title> अक्षय तृतीया पर बनेगा अक्षय योग...राशि के लोगों को फायदा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2295</link><description>अक्षय तृतीया को 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस साल की अक्षय तृतीया एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के कारण विशेष महत्व रखती है. ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे. यह विशेष स्थिति एक शक्तिशाली अक्षय योग का निर्माण कर रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय योग में शुरू किए गए किसी भी कार्य का फल कभी समाप्त नहीं होता. 2026 के इस विशेष दिन पर ग्रहों की वापसी चार राशियों के जातकों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाएगी. राजसी सुख के साथ-साथ आपकी जेबें धन से भरी रहेंगी.
आइए जानते हैं कि मेष, वृषभ, सिंह और वृश्चिक राशि के लोगों क्या फायदा पहुंचने वाला है.
मेष राशि
अक्षय योग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ेगा. आपके साहस और कार्यक्षेत्र में निपुणता से उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित होगा, जिससे पदोन्नति की प्रबल संभावना है. इतना ही नहीं, इस दौरान आपकी आय में भी वृद्धि होगी. ज्योतिष के अनुसार, व्यापारियों को नए निवेशों से बड़ा लाभ प्राप्त हो सकता है.
वृषभ राशि
चूंकि इस राशि का स्वामी चंद्रमा है इसलिए अक्षय तृतीया आपके लिए शुभ है. जमीन या घर खरीदने जैसे आपके लंबे समय से संजोए सपने पूरे हो सकते हैं. पारिवारिक विवाद सुलझेंगे और मन को शांति मिलेगी. भाग्य का पहिया इतना अनुकूल रहेगा कि आप किसी भी नए उद्यम में अद्भुत सफलता प्राप्त करेंगे.
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है. सरकारी कामकाज या लंबित कानूनी मामलों का तुरंत समाधान हो जाएगा. बड़े व्यापारिक सौदे करने का यह सबसे अच्छा समय है. समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की प्रबल संभावना है.
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों को आर्थिक उन्नति के मामले में सबसे अधिक लाभ हो सकता है. पैतृक संपत्ति से बड़ी धनराशि प्राप्त होने की संभावना है. नौकरी की तलाश करने वालों के लिए उत्कृष्ट अवसर मिलेंगे. इस योग के प्रभाव से विदेश यात्रा की आपकी इच्छा भी पूरी हो सकती है.
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</description><guid>2295</guid><pubDate>19-Apr-2026 12:47:34 pm</pubDate></item><item><title> अक्षय तृतीया पर इन प्रमुख मंदिरों में करें पूजा, बन जाएगा जीवन का सबसे शुभ दिन!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2293</link><description>अक्षय तृतीया पर बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ, जगन्नाथ पुरी, केदारनाथ और महालक्ष्मी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक बेहद शुभ पर्व माना जाता है, जिसे सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी खत्म नहीं होता और उसका फल जीवनभर मिलता रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन सोना खरीदने, दान करने और खासतौर पर मंदिरों में पूजा करने को बेहद शुभ मानते हैं।
भारत में ऐसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां अक्षय तृतीया के दिन विशेष पूजा और दर्शन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन इन धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
अगर आप भी इस अक्षय तृतीया को खास बनाना चाहते हैं, तो इस लेख में हम आपको भारत के कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति मानी जाती है। साथ ही यह एक शानदार ट्रैवल एक्सपीरियंस भी बन सकता है। अक्षय तृतीया पर इन मंदिरों की यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अनुभव भी देती है। यह यात्रा मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।
श्री बद्रीनाथ मंदिर
अक्षय तृतीया के दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं, जो इसे बेहद खास बना देता है। इस दिन यहां दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है और हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। अक्षय तृतीया पर यहां पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
श्री जगन्नाथ मंदिर
पुरी का जगन्नाथ मंदिर इस दिन विशेष अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
केदारनाथ मंदिर
हालांकि केदारनाथ के कपाट अलग तिथि पर खुलते हैं, लेकिन अक्षय तृतीया के आसपास इसकी यात्रा की शुरुआत करना बेहद शुभ माना जाता है
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</description><guid>2293</guid><pubDate>17-Apr-2026 12:56:23 pm</pubDate></item><item><title> खत्म नहीं हो रहा घर का लड़ाई-झगड़ा, तो आजमाएं ये टिप्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2292</link><description>फेंगशुई को चीनी वास्तु शास्त्र भी कहा जाता है। इसमें भी वास्तु शास्त्र की तरह जीवन को सुखमय बनाने के नियम बताए गए हैं। अगर घर में पारिवारिक विवाद खत्म नहीं हो रहा है, तो आप इससे छुटकारा पाने के लिए कुछ फेंगशुई टिप्स अपना सकते हैं। मान्यता है कि अगर आप अपने घर में फेंगशुई के नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आज हम आपको घर से नेगेटिविटी दूर करने के कुछ फेंगशुई टिप्स बताने जा रहे हैं।
मुख्य द्वार का ख्याल
फेंगशुई में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जाएं प्रवेश होती है। अगर आप चाहते हैं कि घर में पॉजिटिव एनर्जी जाए, तो दरवाजे को हमेशा साफ रखें।
इन बातों का रखें ध्यान
इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका मुख्य द्वार जर्जर हालात में नहीं होना चाहिए और न ही मेन गेट पर नेम प्लेट टूटी हुई होनी चाहिए। मुख्य द्वार पर फालतू का सामान रखने से भी बचना चाहिए। इससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है, जिससे लड़ाई-झगड़े की स्थिति में आपको लाभ देखने को मिल सकता है।
कछुए की मूर्ति
घर में बिना वजह के लड़ाई-झगड़ा होता है, तो आप फेंगशुई में बताए गए ये उपाय कर सकते हैं। आपको घर में कछुए की मूर्ति रखने से फायदा मिल सकता है। फेंगशुई के अनुसार, कछुए को सही स्थान और सही प्रकार रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। पौराणिक ग्रंथों और हिंदू धर्म में कछुए को सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, विष्णुजी ने स्वयं कच्छप अवतार लिया था। साथ ही, कछुए को शांत जीव माना जाता है।
फेंगशुई कछुआ रखने के नियम
मान्यता है कि उत्तर दिशा माता लक्ष्मी की होती है। ऐसे में कछुए को अपने घर में उत्तर दिशा में ही रखना चाहिए। मान्यता है कि उत्तर दिशा में कछुआ रखने से शत्रुओं का भी नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
कपूर के उपायों से लाभ
फेंगशुई के मुताबिक घर में कपूर जलाने से भी सकारात्मकता बढ़ती है। साथ ही घर में खुशबूदार चीजें जैसे मोमबत्तियां, फूलदान व क्रिस्टल बॉल आद भी रख सकते हैं, जिससे माहौल में शांति बनी रहती है।
कौन सा प्लांट लगाएं
इसके साथ ही फेंगशुई में माना गया है कि मनी प्लांट, जेड प्लांट और बैम्बू ट्री को घर में रखने से नकारात्मकता दूर होती है। फेंगशुई में माना गया है कि आपके घर में यदि घर में टपकता हुआ पानी, टूटी घड़ी, बर्तन, आइना, खराब पड़े जूते या फिर इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा हुआ है, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। ऐसे में इन चीजों को या तो तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए या फिर हटा देना चाहिए।
</description><guid>2292</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:28:06 am</pubDate></item><item><title> झगड़े और नकारात्मक ऊर्जा से पाएं छुटकारा, घर से निकालें ये 4 चीज़ें</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2291</link><description>वास्तु शास्त्र की ही तरह फेंगशुई चीन की प्राचीन विद्या है, जो घर में ऊर्जा (Chi) के संतुलन को बनाए रखने पर जोर देती है.कहा जाता है कि हमारे घर में रखी हर एक चीज घर के माहौल और परिवार के मनोबल पर गहरा असर डालती है. अगर घर में अशांति, लड़ाई-झगड़ा या नकारात्मक ऊर्जा बढ़ रही है, तो इसका एक कारण गलत या खराब चीजें घर में रखना भी हो सकता है. इसलिए, फेंगशुई के अनुसार कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें घर से हटाकर शांति, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाई जा सकती है.
1. टूटी हुई घड़ी
टूटी हुई या बंद पड़ी घड़ी को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता. फेंगशुई के अनुसार घड़ी समय और ऊर्जा का प्रतीक होती है. अगर यह बंद होती है, तो यह रुकावट, धीमी चाल और नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है. इसलिए टूटी घड़ी को तुरंत घर से बाहर निकाल देना चाहिए.
2. टूटे हुए बर्तन
घर में फालतू या टूटा हुआ बर्तन रखना न केवल बेकार सामान जमा करने जैसा लगता है, बल्कि इससे परिवार के रिश्तों में तनाव और नकारात्मक सोच भी बढ़ सकती है. फेंगशुई में कहा गया है कि जैसे घर की व्यवस्था साफ और व्यवस्थित होती है, वैसे ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.इसलिए पुराने बर्तन को घर से हटा दें.
3. टूटा हुआ शीशा / कांच
टूटा हुआ शीशा या कांच सबसे अशुभ माना जाता है. इसकी ऊर्जा में नेगेटिव वाइब्स और तनाव भी होता है. फेंगशुई के हिसाब से ऐसे टूटे शीशे या ग्लास को घर से बाहर निकाल देना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग खुल सके.
4. टूटी हुई चप्पल / जूते
कई लोग टूटे हुए जूते या स्लीपर को घर में रख देते हैं, सोचते हैं कि शायद बाद में काम आ जाएं. लेकिन फेंगशुई के अनुसार ऐसे टूटे चप्पल घर की ऊर्जा को भारी बनाते हैं और मनमुटाव, चिंता और रिश्तों में खटास को बढ़ा सकते हैं.इन्हें तुरंत हटाना चाहिए.
क्यों यह काम करता है?
फेंगशुई विद्या के अनुसार, घर में अव्यवस्थित, टूटी-फूटी और पुरानी चीजें जमा होने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है. यह ऊर्जा घर के सदस्यों के मनोबल, रिश्तों और मानसिक स्थिति पर असर डालती है.जब आप इन चीजों को बाहर निकालते हैं, तो घर में पॉजिटिव एनर्जी का मार्ग खुलता है, जिससे तनाव, झगड़े और नकारात्मकता कम होती है और सुख-शांति बनी रहती है.
</description><guid>2291</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:26:33 am</pubDate></item><item><title> हाथ के नाखूनों की बनावट खोलती है व्यक्ति के व्यक्तित्व से जुड़े कई राज</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2290</link><description>हस्त रेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं के अलावा नाखूनों का भी खास महत्व है। हाथ के नाखूनों की बनावट भी व्यक्ति के व्यक्तित्व व स्वभाव से जुड़े कई राज खोलते हैं। हर व्यक्ति के हाथ के नाखूनों की बनावट अलग-अलग होती है। कुछ लोगों के नाखून छोटे, किसी के लंबे या चौड़े होते हैं। जानें हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ के नाखूनों की बनावट से क्या संकेत मिलते हैं।
चौड़े नाखून
कहते हैं कि जिन लोगों के हाथ के नाखून चौड़े होते हैं वे बुद्धि के धनी होते हैं। ऐसे लोगों में सोचने व फैसला लेने की क्षमता अधिक होती है। ये अपने सभी कार्यों में सफलता पाते हैं।
गोलाकार नाखून
हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के नाखून गोलाकार होते हैं, वे व्यक्ति सशक्त विचारों वाले एवं तुरंत फैसला लेने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति जो भी फैसला लेते हैं उन पर अमल करना भी जानते हैं।
चौकोर नाखून
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, चौकोर नाखून वाले व्यक्ति स्वभाव से गंभीर माने जाते हैं। इन लोगों में लीड करने की क्षमता होती है। कहते हैं कि लोग राजनीति में सफल होते हैं।
लंबे नाखून
हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के लंबे नाखून होते हैं, वे रोमांस से भरपूर होते हैं। यह स्वभाव से भोले और विनम्र होते हैं। यह लोग आसानी से दूसरों पर भरोसा कर लेते हैं।
पूर्ण नाखून
हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के हाथ के नाखूनों चौड़ाई की अपेक्षा मामूली लंबे होते हैं और अपनी प्राकृतिक चमक लिए हुए होते हैं। ऐसे व्यक्ति उत्तम विचारों वाले और निरंतर आगे की ओर बढ़ते रहने की भावना रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग सामाजिक मान-प्रतिष्ठा पाते हैं।
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</description><guid>2290</guid><pubDate>04-Apr-2026 10:28:52 am</pubDate></item><item><title> भाग्यशाली लोगों के हाथ में होती हैं ये रेखाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2289</link><description>हिंदू धर्म में हस्तरेखा शास्त्र को हमेशा से खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इंसान की हथेली में मौजूद रेखाएं उसके स्वभाव, भाग्य, करियर और धन योग तक का संकेत देती हैं। यही वजह है कि वर्षों से लोग अपनी हथेली की रेखाओं को देखकर भविष्य का आकलन करते आए हैं। खासकर वे रेखाएं, जो धन और भाग्य से जुड़ी होती हैं, उन्हें बेहद शुभ माना जाता है। आज हम समझेंगे कि किस प्रकार की रेखाएं यह बताती हैं कि व्यक्ति जीवन में कब और कैसे धनवान बन सकता है।
भाग्य रेखा क्या होती है?
हर व्यक्ति की भाग्य रेखा अलग होती है। किसी की सीधी, किसी की टूटी हुई, किसी की कटी-फटी तो किसी की पूरी तरह टेढ़ी-मेढ़ी। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, वह रेखा जो कलाई के पास से शुरू होकर सीधे मध्यमा उंगली (सबसे लंबी उंगली) की तरफ जाती है, वही भाग्य रेखा कहलाती है। इस रेखा की मजबूती और गहराई यह बताती है कि व्यक्ति की किस्मत उसे कितनी दूर तक ले जाएगी और जीवन में कब अवसर मिलेंगे। अगर आपकी भाग्य रेगा सीधी और गहरी है तो यह अच्छे करियर और स्थिर सफलता का संकेत है। अगर टूटी या कटी हुई रेखा है तो ये जीवन में उतार-चढ़ाव और संघर्ष का संकेत है और अगर टेढ़ी-मेढ़ी रेखा है तो ये जीवन में अस्थिरता, लेकिन अचानक मिलने वाले अवसर का संकेत देती है।
धन रेखा कहाँ होती है?
हथेली में एक विशेष रेखा होती है जिसे धन रेखा कहा जाता है। जब आप अपनी हथेली को देखें, तो अनामिका ऊंगली यानी रिंग फिंगर के नीचे सूर्य पर्वत से निकलकर जो रेखा हृदय रेखा को पार करते हुए मस्तिष्क रेखा की ओर बढ़ती है, उसे धन रेखा माना जाता है।
ऐसी रेखा वाले लोग माने जाते हैं बेहद भाग्यशाली
हस्तरेखा शास्त्र में एक विशेष संयोजन को अत्यंत शुभ कहा गया है। अगर किसी व्यक्ति की रेखा कलाई के पास से शुरू होकर सीधे शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे) तक जाती हो और फिर हल्का-सा मुड़कर गुरु पर्वत (तर्जनी उंगली के नीचे) की ओर पहुंच जाए, तो यह बहुत ही दुर्लभ और शुभ योग माना जाता है। ऐसे लोग बेहद भाग्यशाली होते हैं।
</description><guid>2289</guid><pubDate>04-Apr-2026 10:27:02 am</pubDate></item><item><title> सूर्य की राशि में लगेगा चंद्र ग्रहण, इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2288</link><description> 3 मार्च 2026 का दिन ज्योतिष दृष्टि से बेहद खास है। इस तिथि पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। बड़ी बात यह है कि, यह भारत में नजर आएगा और इसका प्रभाव भी मान्य होगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, यह चन्द्र ग्रहण सूर्य की राशि सिंह में लग रहा है। सिंह राशि में पहले से केतु हैं और इसलिए यहां चंद्रमा से उनकी युति हो रही है, जिससे ग्रहण योग भी बन रहा है। ऐसे में यह समय 12 राशियों के जीवन पर असर डाल सकता है। इस दौरान कुछ राशियों को शुभ परिणाम, तो कुछ जातकों के तनाव में वृद्धि हो सकती हैं। ऐसे में आइए चंद्र ग्रहण का सभी राशियों पर प्रभाव जानते हैं।
 मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए समय थोड़ा सतर्क रहने वाला रहेगा।
आपको निवेश से लेकर यात्रा पर जाने तक विशेष सावधानियां रखनी होगी।
किसी भी कार्य में जल्दबाजी करना आपके तनाव को बढ़ा सकता है।
वृषभ राशि
आपको धन लाभ और नए घर की प्राप्ति के योग बन सकते हैं, क्योंकि समय लाभदायक साबित हो सकता है।
रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।
विवाह के योग है और परिवार का सहयोग भी मिलेगा।
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों को नई नौकरी की प्राप्ति होगी।
कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
किसी पर अधिक भरोसा करना आपके दुखों को बढ़ा सकता है।
व्यापार करने वालों के कार्यों का विस्तार संभव है।
कर्क राशि
कर्क राशि वालों को अलर्ट रहने की जरूरत रहेगी।
खासकर धन से जुड़े मामलों में सतर्क रहें।
इस समय भूलकर भी आप भावनाओं में आकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें।
सिंह राशि
सिंह राशि वालों की परेशानियां बढ़ सकती हैं और उनके विरोधी सक्रिय रह सकते हैं।
सेहत का भी ध्यान रखना आवश्यक रहेगा।
आर्थिक लाभ भी संभव है परंतु खर्च भी अधिक रहेगा।
कन्या राशि
कन्या राशि के लिए समय खास रहेगा और मेहनत का मनचाहा फल प्राप्त होगा।
करियर में तरक्की के योग बन सकते हैं।
पारिवारिक समस्याओं के चलते परेशान होना पड़ सकता है।
तुला राशि
तुला राशि वालों को सफलता मिलने के संकेत हैं।
सेहत पहले से बेहतर होगी और लंबे समय से चल रही परेशानियां दूर हो सकती हैं।
समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और स्वयं को भाग्यशाली महसूस करेंगे।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए समय सामान्य रहेगा।
नियमित कार्यों पर ध्यान दें और विवादों से दूर रहें।
धन लाभ हो सकता है पर लेनदेन सावधानी से करें।
धनु राशि
धनु राशि वालों के जीवन में कुछ बदलाव आ सकते हैं।
शुरुआत में थोड़ा दबाव महसूस हो सकता है।
कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का समय होगा।
मकर राशि
मकर राशि वालों को लाभ मिलने की संभावना है।
व्यापार और नौकरी दोनों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
समय आपके लिए कई नई परेशानियां लेकर आ सकता है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों को भी लाभ के संकेत हैं।
नए अवसर मिल सकते हैं और आय के नए स्रोत बन सकते हैं।
लेकिन लव पार्टनर के साथ गलतफहमियां पनप सकती हैं।
मीन राशि
मीन राशि वालों को सावधानी रखने की आवश्यकता है।
सेहत और खर्चों पर विशेष ध्यान दें।
अचानक से कुछ एक बड़े खर्च आपके सामने आएंगे।
</description><guid>2288</guid><pubDate>02-Mar-2026 7:41:00 pm</pubDate></item><item><title>अष्टधातु का छल्ला पहनने के फायदे व नियम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2287</link><description>अष्टधातु के छल्ले और अंगूठी का ज्योतिषशास्त्र में खास महत्व बताया गया है। यह आठ धातुओं सोना, तांबा, पीतल, चांदी, सीसा, लोहा, कांसा और जस्ता से मिलकर बना होता है। इन आठों धातुओं अलग-अलग महत्व होता है जो किसी न किसी ग्रह से संबंधित होता है। ऐसे में अष्टधातु के छल्ले को विधिपूर्वक और नियमों का ख्याल रखते हुए धारण करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति बेहतर होती है और उनके प्रतिकूल प्रभाव से भी राहत पाई जा सकती है। यह छल्ला जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसे धारण करने से धन संबंधी समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकती है और फिजूलखर्ची दूर होने लगती है।
ऐसे में आइए विस्तार से जानें की इसे कैसे, कब, किसे और किस दिन पहनना चाहिए। साथ ही, अष्टधातु का छल्ला धारण करने के फायदे भी जानें...
अष्टधातु का छल्ला पहनने के नियम
  शास्त्रों के अनुसार अष्टधातु से निर्मित छल्ला या अंगूठी शनिवार और मंगलवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, इसे पूर्णिमा और शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त में धारण करना अत्यंत लाभदायक माना गया है। इससे जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।
  अष्टधातु के छल्ले को अनामिका उंगली में पहनना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, आप यह छल्ला तर्जनी उंगली में भी धारण कर सकते हैं, इसे गुरु की उंगली माना जाता है। इससे ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव से बचाव होता है।
  अष्टधातु का छल्ला धारण करने से पहले स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। फिर, पूजा-पाठ करके अपने कुल देवी-देवता, भाग्येश अथवा लग्नेश के मंत्रों का जाप करके छल्ला धारण करना चाहिए। इसे पूर्व दिशा की ओर मुख करके पहनना उत्तम माना जाता है।
  शनिवार या मंगलवार के दिन छल्ले को धारण करने से पहले इसे गंगाजल से शुद्ध भी अवश्य करना चाहिए और धूप अगरबत्ती दिखाकर अष्टधातु का छल्ला या अंगूठी धारण करें। इसे धारण करने वालों को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।
  मेष, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ आदि राशि वालों को अष्टधातु का छल्ला अवश्य धारण करना चाहिए। ऐसा करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। वहीं, जिनकी कुंडली में राहु की स्थिति अशुभ हो वे भी इस छल्ले को पहन सकते हैं।
  अष्टधातु का छल्ला धारण करने से पहले ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरूर दिखानी चाहिए। उनकी सलाह लेकर सही धातु धारण करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अष्टधातु का छल्ला पहनने के फायदे
ज्योतिषशास्त्र में अष्टधातु के छल्ले को धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे कुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है और उनकी स्थिति भी सही की जा सकती है। अगर आप करियर, नौकरी या कारोबार में समस्याओं और बाधाओं का सामना कर रहे हैं तो उससे भी यह निजात दिला सकता है। इससे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही, फिजूलखर्ची कम होने लगती है। लेकिन अष्टधातु का छल्ला धारण करने से पहले नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। इससे जातक को जीवन में सुखों की प्राप्ति हो सकती है और सफलता के मार्ग खुलते हैं।</description><guid>2287</guid><pubDate>01-Jan-2026 2:32:25 pm</pubDate></item><item><title>   सुंदरता एवं वास्तुकला का अनूठा संगम  नौलखा मंदिर </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2286</link><description> -जानिये अपने मंदिरों को
नौलखा मंदिर' भारत में कई स्थानों पर हैं, जिनमें मुख्य रूप से बेगूसराय (बिहार) और देवघर (झारखंड) के मंदिर प्रसिद्ध हैं, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। बाबा वैद्यनाथ की नगरी में अपनी सुंदरता एवं वास्तुकला का अनूठा संगम नौलखा मंदिर देवघर शहर के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में से एक है।
सभी ने नौलखा हार के बारे में सुना होगा, परंतु मंदिर का यह नाम कैसे पड़ा इसके पीछे एक रोचक इतिहास है। भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप को समर्पित यह मंदिर नौ-लाख रुपये की लागत से बना अतः यह जनमानस के बीच नौलखा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दक्षिण भारतीय मंदिरों जैसी शैली, ग्रेनाइट और संगमरमर से निर्मित इस मंदिर में विग्रह स्वरूप भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में विराजमान हैं, साथ ही साथ संत बालानंद ब्रह्मचारी जी की एक मूर्ति भी स्थापित है। अतः मंदिर का वास्तविक नाम गुरु और गोविंद के स्वरूप को समर्पित जुगल मंदिर है।
नौलखा मंदिर की ऊंचाई 146 फीट है। मंदिर झारखंड के देवघर शहर से सिर्फ 2 किमी दूर स्थित है तथा अपनी स्थापत्य कला की सुंदरता के लिए भक्तों एवं पर्यटकों दोनों के ही बीच अत्यधिक प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला कोलकाता में बेलूर मठ अर्थात रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय से प्रेरित जान पड़ती है।
प्रचलित नाम: जुगल मंदिर, नौलखा मंदिर देवघर, नौलक्खा मंदिर
दर्शन समय
7.00 AM - 12.00 PM, 2.00 PM - 7:30 PM
नौलखा मंदिर देवघर का इतिहास
पथूरिया घाट की रानी श्रीमती चरुशिला ने अपने पति अक्षय घोष और बेटे जतिंद्र घोष को कम उम्र में ही खो दिया था। मौत की इन घटनाओं ने रानी को अत्यधिक दुखी कर दिया। शांति की तलाश में रानी ने अपना घर छोड़ दिया और संत श्री बालानंद ब्रह्मचारी से मुलाकात के लिए देवघर पहुँची और बालानंद ब्रह्मचारी के आश्रम में रहीं। उनकी शिक्षा और उपदेशों से प्रभावित होकर चरुशिला जी महाराज जी की शिष्या बन गईं। श्री बालानंद ब्रह्मचारी जी ने उन्हें भगवान श्री कृष्ण का एक मंदिर बनाने की प्रेरणा दी। मंदिर के निर्माण के लिए रानी चरुशिला ने 9 लाख रुपये का अभूतपूर्व दान दिया। 1941 के लगभग 9 लाख रुपये अपने में ही एक बहुत बड़ी राशि हुआ करती थी।

1. बेगूसराय का नौलखा मंदिर (बिहार)
स्थान: बिशनपुर, बेगूसराय.
निर्माण: 1953 में संत महावीर दास द्वारा.
खासियत: राजस्थानी वास्तुकला का प्रभाव, सफेद संगमरमर की मूर्तियां, सुंदर नक्काशी, और शहर का विहंगम दृश्य.
2. अन्य नौलखा मंदिर
बक्सर (बिहार): दक्षिण भारतीय शैली और सुंदर मूर्तियों वाला एक और धार्मिक स्थल.
गुजरात (घुमली): 12वीं सदी का सूर्य मंदिर.

</description><guid>2286</guid><pubDate>30-Dec-2025 7:36:28 am</pubDate></item><item><title> नए साल 2026 में लकी नंबर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2285</link><description>मूलांक 1  सूर्य का वर्ष
मूलांक 1 वाले 2026 में लीडरशिप और तरक्की के राजा बनेंगे। लकी नंबर 1, 3, 5 आपके लिए धन और सम्मान लाएंगे। शादी या रिलेशनशिप में मूलांक 2, 4 और 7 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट करेगी और जीवन में बैलेंस लाएगी। मूलांक 1 की जोड़ी में हमेशा रोमांस और तरक्की बनी रहती है।
मूलांक 2  चंद्रमा की कृपा
मूलांक 2 वाले 2026 में भावनात्मक स्थिरता और पारिवारिक सुख पाएंगे। लकी नंबर 2, 4, 6 आपके लिए शांति और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1, 4 और 6 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको समझेगी और जीवन में मिठास घोलेगी। मूलांक 2 की जोड़ी में प्यार गहरा और लंबा चलता है।
मूलांक 3  गुरु की कृपा
मूलांक 3 वाले 2026 में क्रिएटिविटी और प्रसिद्धि पाएंगे। लकी नंबर 3, 6, 9 आपके लिए धन और ज्ञान लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3, 6 और 9 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट करेगी और जीवन में रंग भरेगी। मूलांक 3 की जोड़ी में हमेशा खुशी और उत्साह रहता है।
मूलांक 4  राहु का प्रभाव
मूलांक 4 वाले 2026 में मेहनत का फल पाएंगे। लकी नंबर 4, 5, 8 आपके लिए स्थिरता और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1, 2 और 7 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट करेगी और जीवन में बैलेंस लाएगी। मूलांक 4 की जोड़ी में विश्वास और मजबूती रहती है।
मूलांक 5  बुध की कृपा
मूलांक 5 वाले 2026 में ट्रैवल और एडवेंचर पाएंगे। लकी नंबर 5, 1, 6 आपके लिए मौके और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3, 5, 6 और 8 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको एक्साइटमेंट और सपोर्ट देगी। मूलांक 5 की जोड़ी में कभी बोरियत नहीं आती है।
मूलांक 6  शुक्र का प्रभाव
मूलांक 6 वाले 2026 में लव और लग्जरी पाएंगे। लकी नंबर 6, 3, 9 आपके लिए सुख और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3, 6 और 8 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको प्यार और लग्जरी देगी। मूलांक 6 की जोड़ी में हमेशा रोमांस और सुख रहता है।
मूलांक 7  केतु का प्रभाव
मूलांक 7 वाले 2026 में आध्यात्म और ज्ञान पाएंगे। लकी नंबर 7, 2, 5 आपके लिए शांति और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1 और 4 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको गहराई और समझ देगी। मूलांक 7 की जोड़ी में आत्मिक जुड़ाव रहता है।
मूलांक 8  शनि की कृपा
मूलांक 8 वाले 2026 में मेहनत का बड़ा फल पाएंगे। लकी नंबर 8, 4, 5 आपके लिए शक्ति और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1, 3, 5 और 6 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट और ताकत देगी। मूलांक 8 की जोड़ी में मजबूती और समृद्धि रहती है।
मूलांक 9
मूलांक 9 वाले 2026 में दान और सेवा से प्रसिद्धि पाएंगे। लकी नंबर 9, 3, 6 आपके लिए सम्मान और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3 (क्रिएटिव), 6 (रोमांटिक) और 9 (धार्मिक) सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको ऊर्जा और प्रेम देगी। मूलांक 9 की जोड़ी में हमेशा सेवा और सुख रहता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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</description><guid>2285</guid><pubDate>21-Dec-2025 10:30:00 am</pubDate></item><item><title> पुरुषों का कान छिदवाना और बाली पहनना शुभ होता है या अशुभ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2284</link><description>हिंदू ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में पुरुषों का कान छिदवाना और बाली पहनना मुख्य रूप से शुभ माना जाता है। कर्णवेध संस्कार हिंदू धर्म के षोडश संस्कारों में से एक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कान छिदवाने से राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं, बुद्धि बढ़ती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। हालांकि, कुछ मान्यताओं में एक कान छिदवाना या गलत धातु की बाली पहनना अशुभ हो सकता है। आधुनिक समय में यह फैशन भी है, लेकिन शास्त्रों में इसका गहरा महत्व है।
कर्णवेध संस्कार का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में कर्णवेध नवम संस्कार है। पुरुषों के लिए यह बहुत शुभ है। ज्योतिष के अनुसार, कान केतु ग्रह से जुड़े हैं। कान छिदवाने से केतु और राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। इससे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है और बुद्धि तेज होती है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा और योद्धा कान छिदवाते थे, जो साहस और शक्ति का प्रतीक था। भगवान शिव और विष्णु से जुड़े होने से यह सम्मान और भक्ति का संकेत है।
पुरुषों के लिए बाली पहनने के ज्योतिषीय लाभ
ज्योतिष शास्त्र में सोने या चांदी की बाली पहनना पुरुषों के लिए शुभ है। सोना सूर्य और गुरु से जुड़ा है, जो आत्मविश्वास और निर्णय शक्ति बढ़ाता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और नकारात्मक विचार दूर रहते हैं। राहु-केतु के दोष में बाली पहनने से लाभ मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार, कान में एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जो बाली पहनने से रक्त संचार बेहतर होता है, सुनने की क्षमता बढ़ती है और सिरदर्द जैसी समस्याएं कम होती हैं। सेलिब्रिटी जैसे विराट कोहली और रणबीर कपूर भी बाली पहनते हैं, जो फैशन के साथ ज्योतिषीय लाभ लेते हैं।
क्या अशुभ हो सकता है?
कुछ स्थितियों में कान छिदवाना या बाली पहनना अशुभ हो सकता है:
  केवल एक कान छिदवाना (खासकर बायां पहले) कुछ मान्यताओं में अशुभ है।
  लोहे या निकल की बाली पहनना - इससे शनि या राहु का प्रभाव बढ़ सकता है।
  अशुभ मुहूर्त में छिदवाना - शनिवार-रविवार से बचें।
  अगर कुंडली में मंगल या शनि मजबूत नहीं तो पहले ज्योतिषी से सलाह लें।
  गलत धातु या तरीके से करने पर स्वास्थ्य समस्या या मानसिक अशांति हो सकती है।
सही तरीका और उपाय--
पुरुषों के लिए दोनों कान छिदवाना और सोने की बाली पहनना सबसे शुभ है। शुभ मुहूर्त में (सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार) करवाएं। बाली में सोना या चांदी चुनें। अगर फैशन के लिए कर रहे हैं, तो भी ज्योतिषीय लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य और भाग्य के लिए यह परंपरा अपनाएं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पुरुषों का कान छिदवाना और बाली पहनना शुभ है। यह स्वास्थ्य, बुद्धि और ग्रह दोष निवारण के लिए लाभदायक है।
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</description><guid>2284</guid><pubDate>21-Dec-2025 10:27:46 am</pubDate></item><item><title> रविवार के दिन बाल कटवाने से कमजोर होता है ये ग्रह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2283</link><description>नहीं करने चाहिए ये काम
ज्योतिष शास्त्र में हफ्ते के हर एक दिन के महत्व को बताया गया है। हिंदू धर्म में सोमवार से लेकर रविवार को किसी ना किसी वजह के चलते महत्वपूर्ण माना गया है। बात की जाए रविवार की तो इसका संबंध सूर्य ग्रह से होता है। सारे ग्रहों में सूर्य सबसे बड़ा होता है और इसका प्रभाव भी काफी पड़ता है। ऐसे में रविवार के दिन ऐसी चीजें करने से बचना चाहिए जिससे ये ग्रह कमजोर हो। नीचे विस्तार से जानें कि रविवार के दिन कौन सी चीजें करने से बचना चाहिए।
ना कटवाएं अपने बाल
आम तौर पर लोग ग्रूमिंग से जुड़ी चीजों को छुट्टी वाले दिन करवाना पसंद करते हैं। इत्मीनान की वजह से लोग रविवार को ही हेयरकट और सेविंग करवाते हैं लेकिन शास्त्र के हिसाब से ये गलत है। रविवार के दिन बाल कटवाने से बचना चाहिए। अगर ऐसा किया जाता है तो धीरे-धीरे सूर्य ग्रह कमजोर होने लगता है। सूर्य के कमजोर होते ही सबसे बुरा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है। जिन लोगों का सूर्य कमजोर होने लगता है, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें होने लगती हैं।
अवॉइड करें इस रंग के कपड़ें
हर एक दिन किसी ना किसी ग्रह से प्रभावित हैं। हर एक ग्रह का संबंध किसी ना किसी रंग के साथ जरूर होता है। ऐसे में किसी दिन विशेष के हिसाब से कुछ रंगों को अवॉइड करना भी जरूरी होता है। बात करें रविवार की तो इस दिन काले और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। सूर्य की कृपा पाने के लिए रविवार को 4 रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन लाल, पीला, नारंगी और सुनहरे रंग के कपड़े पहनना अच्छा होता है। इन रंगों का सीधा संबंध सूर्य के साथ ही होता है।
ना करें इन चीजों का सेवन
रविवार के दिन मास-मदिरा और लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों को खाना अवाइड करना चाहिए। साथ ही इस दिन खट्टी चीजों के सेवन से बचना चाहिए। इसके अलावा रविवार को नींबू, इमली और आचार जैसी चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। कई लोग इस दिन काली उदड़ दाल भी नहीं खाते हैं।
</description><guid>2283</guid><pubDate>14-Dec-2025 10:04:43 am</pubDate></item><item><title> वास्तुशास्त्र के अनुसार हर घर में होनी चाहिए ये चीजें</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2282</link><description>वास्तुशास्त्र केवल दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, खुशहाली और स्थिरता लाने का एक प्राचीन तरीका है। माना जाता है कि घर में कुछ चीजें रखने से ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है, रिश्तों में मधुरता आती है और आर्थिक स्थिरता भी बढ़ती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार हर घर में कुछ खास चीजें अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि यह न सिर्फ वातावरण को पवित्र बनाती हैं बल्कि परिवार के लोगों के मन पर भी अच्छा प्रभाव डालती हैं।
तुलसी का पौधा- तुलसी घर में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाए तो सबसे अच्छा होता है। तुलसी नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है और घर के वातावरण को शांत करती है।
पानी से भरा कलश- घर के मंदिर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में तांबे या पीतल का जल-कलश रखना शुभ माना जाता है। यह शुद्धता, शांति और स्थिरता का प्रतीक है। कहा जाता है कि इससे घर में मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
शंख- शंख घर में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। घर में शंख रखा होना भी शुभ माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इससे बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं।
स्वास्तिक या ऊॅं का चिन्ह- मुख्य दरवाजे के पास स्वास्तिक, ऊॅं, शुभ-लाभ जैसे प्रतीक ऊर्जा को स्थिर रखते हैं। इन्हें लगाने से घर में समृद्धि आती है और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है।
पीतल या तांबे की घंटी- घर में पीतल या तांबे की घंटी रखें। घंटी की ध्वनि घर से नकारात्मक ऊर्जा हटाती है। पूजा के समय पीतल या तांबे की छोटी घंटी बजाने से वातावरण पवित्र होता है और मन में शांति आती है। घर में इसे मंदिर के पास रखना शुभ माना जाता है।
</description><guid>2282</guid><pubDate>23-Nov-2025 9:22:34 pm</pubDate></item><item><title> तुलसी के पास भूल से भी ना लगाएं ये पौधे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2281</link><description>हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा बहुत ही पवित्र माना जाता है. इन्हें सिर्फ मां लक्ष्मी का प्रतीक ही नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है. हर घर के आंगन में माता तुलसी विराजमान होती है और जहां तुलसी होंगी वहीं श्रीहरि भी विराजमान होंगे. इनके बिना किसी भी धार्मिक कार्य को अधूरा समझा जाता है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर सुबह-शाम तुलसी के सामने दीपक जलाना, जल चढ़ाना और इनकी परिक्रमा करना शुभ फल देता है. लेकिन बहुत से लोग गलती से माता तुलसी के पास ऐसे पौधे लगा देते हैं जो उनकी पवित्रता को कम कर देते हैं. वास्तुशास्त्र के अनुसार, ये पौधे तुलसी की ऊर्जा को कमजोर कर देते हैं, जिससे घर में अशुभ प्रभाव बढ़ता है. तो आइए जानते हैं उन पौधों के बारे में जिनको तुलसी के पास नहीं लगाना चाहिए.
1. कैक्टस
कैक्टस भले ही देखने में सुंदर लगे, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके कांटे अशुभता और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं. तुलसी जहां शांति और सुख की ऊर्जा फैलाती है, वहीं कैक्टस के कांटे कलह, क्रोध और मतभेद बढ़ाने का कारण बनते हैं. साथ ही, इसको तुलसी के पास लगाने से परिवार में लड़ाई-झगड़े जैसी स्थिति भी उत्पन्न होने लगती है.
2. मनी प्लांट
वास्तु शास्त्र के अनुसार, वैसे तो मनी प्लांट को बहुत ही शुभ माना जाता है. लेकिन तुलसी के पास इसे रखना शुभ नहीं होता है. इन दोनों के स्वभाव में विरोध होने के कारण, दोनों साथ उगने पर एक-दूसरे की वृद्धि रोकते हैं.
3. अपराजिता
अपराजिता का पौधा बहुत ही शुभ और देवी की आराधना में उपयोगी माना जाता है, लेकिन इसे तुलसी के पास लगाना वर्जित है. दरअसल, तुलसी के पास अपराजिता लगाने से दोनों की ग्रोथ प्रभावित होती है और तुलसी का पौधा धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है.
4. धतूरा
धतूरा भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, लेकिन तुलसी के पास इसे रखना बहुत बड़ा दोष माना गया है. धतूरा विषैला पौधा है और उसकी तीव्र तासीर तुलसी की कोमल ऊर्जा को नष्ट कर देती है. तुलसी का पौधा जहां शुद्धता और सात्त्विकता का प्रतीक है.
5. नींबू का पौधा
नींबू के पौधे में बहुत ही सारी औषधीय गुण पाए जाते हैं. लेकिन, वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी के पास नींबू का पौधा नहीं लगाना चाहिए. कहते हैं कि ऐसा करने से घर की समृद्धि में रुकावट आ जाती है और आर्थिक कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं.
</description><guid>2281</guid><pubDate>16-Nov-2025 9:31:23 pm</pubDate></item><item><title> तुलसी विवाह के दिन करें तुलसी माता का श्रृंगार, घर में आएगी खुशहाली</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2280</link><description>कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह कराया जाता है. इस तिथि को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं. इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है, जिनमें भगवान विष्णु विश्राम अवस्था में रहते हैं. जब वे इस दिन पुनः जागृत होते हैं, तो समस्त सृष्टि में शुभ कार्यों का प्रारंभ होता है. इसी दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जो धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना गया है. तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का विशेष प्रकार से श्रृंगार किया जाता है. जानते हैं कि तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का श्रृंगार कैसे करें ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके.
तुलसी विवाह की तैयारी और पूजन विधि
सबसे पहले घर या आंगन में जहां तुलसी का पौधा स्थापित है, उस स्थान की सफाई करें, उसके बाद गंगाजल या पवित्र जल का छिड़काव करें. तुलसी माता को नए वस्त्र पहनाएं, पास में एक सुंदर आसन पर शालिग्राम भगवान को स्थापित करें, उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं, चंदन, फूल और तुलसी दल अर्पित करें. इस दौरान मंगल गीत, विवाह मंत्र, और आरती गाई जाती है. पूजा के बाद प्रसाद स्वरूप पंचामृत, मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है. इस दिन देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. संध्या समय तुलसी जी की आरती की जाती है.
तुलसी विवाह का महत्व
तुलसी विवाह में माता तुलसी (जिसे वृंदा देवी भी कहा जाता है) और श्री शालिग्राम भगवान (जो भगवान विष्णु का स्वरूप हैं) का विवाह होता है. मान्यता है कि इस विवाह से घर में सुख, समृद्धि, और सौभाग्य का वास होता है. जो लोग अपने घर में यह विवाह कराते हैं, उन्हें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्याता है कि इस दिन व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को अच्छा वर मिलता है. वहीं विवाहित दंपतियों के जीवन में इस व्रत को रखने से खुशहाली आती है.
तुलसी माता का श्रृंगार
मां तुलसी का श्रृंगार करना तुलसी विवाह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस दिन विशेष रूप से माता तुलसी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. सबसे पहले तुलसी के गमले या स्थान को अच्छी तरह साफ करें. पवित्र जल से शुद्ध करें. इसके बाद तुलसी माता को लाल या पीले रंग की साड़ी पहनाएं, क्योंकि ये रंग शुभता और मंगल के प्रतीक माने जाते हैं.
मां तुलसी को चुनरी, चूड़ी, नथनी, मांग टीका, हार, कंगन, बिंदी, फूल, कमरबंद और अन्य हल्के आभूषणों से सजाएं. उनके चारों ओर सुंदर रंगोली बना कर दीपक जलाएं.
</description><guid>2280</guid><pubDate>30-Oct-2025 10:31:45 am</pubDate></item><item><title> तुलसी विवाह पर हल्दी से करें ये अचूक उपाय, विवाह में आ रही बाधाएं होंगी दूर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2279</link><description>हिंदू धर्म में तुलसी विवाह को पवित्र और बेहद ही शुभ माना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। कार्तिक द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व देव उठनी एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है। इसलिए इसे देव उठान द्वादशी भी कहा जाता है। इस दिन माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप से कराया जाता है।
तुलसी विवाह के दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विधि-विधान से विवाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह में कराने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। वैवाहिक जीवन में आ रही कठिनाइयों दूर होती हैं और विवाह में देरी जैसी समस्याओं का समाधान निकलता है। कहा जाता है कि तुलसी विवाह वैवाहिक जीवन में प्रेम को बढ़ाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने असुरराज जालंधर का वध किया था, जिससे क्रोधित होकर उसकी पत्नी वृंदा ने भगवान को श्राप दिया कि वे शालीग्राम पत्थर के रूप में पूजे जाएंगे। बाद में वृंदा ने शरीर त्याग दिया और उनका पुनर्जन्म तुलसी के रूप में हुआ। अपनी भक्ति के प्रभाव से उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में प्राप्त किया। तभी से हर वर्ष तुलसी विवाह परंपरा प्रचलित है।
हल्दी के उपाय से दूर होगी विवाह में देरी
तुलसी विवाह के दिन हल्दी का उपाय करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। तुलसी विवाह के दिन स्नान से पहले पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाएं। यह उपाय शरीर-मन की शुद्धि और गुरु ग्रह की शक्ति बढ़ाने के लिए शुभ माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर तुलसी और शालीग्राम की पूजा करें। पूजा में हल्दी या हल्दी मिले दूध का लेप अर्पित करें। ऐसा करने से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होते हैं और शुभ विवाह के योग बनते हैं।
</description><guid>2279</guid><pubDate>30-Oct-2025 10:25:35 am</pubDate></item><item><title> आंवला नवमी....जानें आंवला के पेड़ की पूजा व दान करने से क्या फल मिलता है?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2278</link><description>पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी (31 अक्टूबर 2025) से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष पर निवास करते हैं, इसलिए इसे आंवला नवमी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा-अर्चना और दान का अक्षय फल मिलता है, इसलिए इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। आंवला नवमी के दिन ही कृष्ण ने कंस के आमंत्रण पर वृंदावन छोड़कर मथुरा की ओर प्रस्थान किया था।
भारतीय शास्त्रों में आंवले को दैवीय फल माना जाता है। पद्म और स्कंद पुराण में वर्णन है कि आंवला ब्रह्माजी के आंसुओं से उत्पन्न हुआ। वहीं, एक अन्य कथा कहती है कि समुद्र मंथन के समय निकले अमृत कलश से पृथ्वी पर अमृत की बूंदें गिरने से आंवले अस्तित्व में आया।
एक बार देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण कर रही थीं। उनकी इच्छा हुई कि भगवान विष्णु और शिव की एक साथ पूजा की जाए। उन्होंने विचार किया कि विष्णु को तुलसी अत्यधिक प्रिय है और शिव को बेल। इन दोनों के गुण एक साथ आंवले में हैं। देवी लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर उसकी पूजा की। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर विष्णु और शिव प्रकट हुए। माता लक्ष्मी ने आंवले के पेड़ के नीचे उन्हें भोजन कराया और उसके बाद स्वयं भोजन को प्रसाद रूप में ग्रहण किया। उस दिन से ही यह तिथि आंवला नवमी के नाम से प्रसिद्ध हुई।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा, आंवले से स्नान, आंवले को खाने और आंवले का दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है। चरक संहिता में उल्लेख मिलता है कि कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन ही महर्षि च्यवन ने आंवले के सेवन से सदा युवा रहने का वरदान प्राप्त किया था। एक मान्यता यह भी है कि सतयुग की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को हुई थी।
एक अन्य कथा के अनुसार इसी दिन आदि शंकराचार्य को एक निर्धन स्त्री ने भिक्षा में सूखा आंवला दिया था। उस निर्धन स्त्री की गरीबी से द्रवित होकर शंकराचार्य ने मां लक्ष्मी की मंत्रों द्वारा स्तुति की, जो कनकधारा स्तोत्र के रूप में जानी जाती है। उस निर्धन स्त्री के भाग्य में धन न होते हुए भी शंकराचार्य की विनती पर मां लक्ष्मी ने उसके घर स्वर्ण आंवलों की वर्षा करके उसकी दरिद्रता दूर की।
</description><guid>2278</guid><pubDate>30-Oct-2025 10:23:21 am</pubDate></item><item><title> 7 नवंबर से इन राशियों की बदलेगी किस्मत, राहु के स्वाति नक्षत्र में शुक्र करेंगे गोचर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2277</link><description>सुख-संपत्ति, वैभव व ऐश्वर्य आदि के कारक शुक्र समय-समय पर अपनी राशि व नक्षत्र में बदलाव करते रहते हैं। 7 नवंबर 2025, शुक्रवार को शुक्र रात 09 बजकर 13 मिनट पर स्वाति नक्षत्र में गोचर करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है। राहु के नक्षत्र में शुक्र का गोचर मेष से लेकर मीन राशि तक अपना प्रभाव डालेगा। शुक्र के नक्षत्र परिवर्तन से कई राशि वालों की लाइफ में सकारात्मक बदलाव होंगे और यह अवधि वित्त, करियर व व्यावसायिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगी। जानें शुक्र का नक्षत्र गोचर किन राशियों के लिए रहेगा अच्छा।
1. वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को शुक्र नक्षत्र परिवर्तन से अच्छे फलों की प्राप्ति होगी। इस समय आपको करियर में नई उपलब्धि हासिल हो सकती है। नौकरी करने वालों को अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं। इनकम के नए साधन बनेंगे और पुराने स्रोत से भी रुपए-पैसे आएंगे। परिवार का साथ मिलेगा। भौतिक सुखों में वृद्धि होगी।
2. कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र नक्षत्र परिवर्तन अच्छा रहने वाला है। इस समय आपकी आय में आकस्मिक वृद्धि हो सकती है। अटके हुए धन की वापसी होने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मानसिक तौर पर आप मजबूत महसूस करेंगे। व्यावसायिक रूप से आपकी स्थिति सुदृढ़ होगी। नौकरी चाकरी के लिहाज से समय अनुकूल रहने वाला है।
3. मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए शुक्र नक्षत्र गोचर लाभकारी रहने वाला है। इस समय आपकी आय में वृद्धि के साथ प्रमोशन मिलने के संकेत हैं। व्यापारिक विस्तार मिल सकता है। यात्रा लाभकारी रहेगी। पारिवारिक परेशानियां सुलझाने में सफल रहेंगे। अपनों का साथ मिलेगा। भाग्य का साथ मिलेगा और कार्यों में सफलता पाएंगे।
</description><guid>2277</guid><pubDate>30-Oct-2025 10:21:35 am</pubDate></item><item><title>गोवर्धन पूजा: जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के क्रोध से बचाया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2276</link><description>गोवर्धन पर्वत ने एक बार ब्रज के गोप-गोपियों की रक्षा की थी। गोवर्धन पर्वत उठाने की यह घटना तब की है, जब भगवान कृष्ण को आत्मबोध हुआ था। भगवान आत्मबोध होने के बाद एक संकेत की प्रतीक्षा कर रहे थे। जब गुरु गर्गाचार्य ने कृष्ण को याद दिलाया कि वह कौन हैं और उनके जीवन का ध्येय क्या है, तो गोवर्धन पर्वत पर खड़े-खड़े कृष्ण को एक तरह का बोध हुआ। फिर भी, गोकुलवासियों के लिए अपने प्यार के कारण उनका मन अब भी ऊहापोह में था।
जो ध्येय अभी बहुत दूर है, क्या उसके लिए उन्हें वाकई यह सब भूल जाना चाहिए, जो वह जानते हैं और जो उन्हें पसंद है? अपने अंदर कहीं वह इसे पक्का करने का एक संकेत ढूंढ़ रहे थे कि उन्हें जो बोध हुआ है, और जो उन्हें याद दिलाया गया है, वह इतना अहम मकसद है कि उसके लिए उन्हें वह सब कुछ भूल जाना चाहिए, जो उन्हें पसंद है।
इंद्रोत्सव मनाना बंद करने और गोपोत्सव का नया उत्सव शुरू करने के इस क्रांतिकारी कदम के बाद गोवर्धन पहाड़ की तराई में हर कोई खुशी मना रहा था। अचानक बारिश की जोरदार बौछारों के साथ एक भयानक तूफान उठा और नदी उफनने लगी। गोकुल के सीधे-सादे लोगों को लगा कि इंद्रोत्सव न मनाने के कारण इंद्र देव उनसे कुपित हो गए हैं और बारिश की इन बौछारों में उन्हें डुबाने वाले हैं। यमुना का पानी बढ़ता जा रहा था। कृष्ण इस इलाके को अच्छी तरह से जानते थे। उन्होंने गोवर्धन पहाड़ में कई जगह सुराख देखे थे। वह गोकुल के युवाओं को वहां लेकर गए। जब उन्होंने ज्यादा जगह बनाने के लिए कुछ चट्टानें हटाईं, तो वहां एक विशाल गुफा का पता चला। पशुओं सहित हर कोई उस विशाल गुफा के अंदर जाने लगा, मगर वह जगह काफी नहीं थी।
फिर अचानक पूरा पहाड़ जमीन से छह फीट ऊपर उठ गया और वह गुफा इतनी बड़ी हो गई कि जानवरों समेत ब्रज का सारा जनसमूह उसमें समा सकता था। वे आराम से कुछ दिनों तक उसमें रहे। बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही वे बाहर निकले। इस प्रकार कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान-मर्दन किया।</description><guid>2276</guid><pubDate>20-Oct-2025 3:52:09 pm</pubDate></item><item><title>दिवाली से पहले घर से निकाल दें ये 6 अशुभ चीजें</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/religion.php?articleid=2275</link><description>दिवाली का पवित्र त्योहार आने वाला है. इस साल दीपावली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. कहते हैं कि दिवाली-धनतेरस जैसे शुभ त्योहार आने से पहले घर की अच्छी तरह सफाई कर लेनी चाहिए और कुछ अशुभ चीजों को बाहर निकाल देना चाहिए, जिनके कारण घर में दरिद्रता पांव पसारती है. ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने बताया है.
खंडित मूर्तियां-
दिवाली से पहले घर के मंदिर की साफ-सफाई जरूर करनी चाहिए. इस दौरान टूटी या खंडित मूर्तियों को घर से बाहर निकाल दें. इन मूर्तियों को कूड़े-कचरे में बिल्कुल न फेंके. इन्हें या तो नदी-तालाब में विसर्जित कर दीजिए या फिर किसी पवित्र या खाली स्थान पर रख दीजिए.
बंद घड़ी
आपके घर में जितनी भी बंद घड़ियां हैं या तो उन्हें चालू करवा लें या फिर घर से बाहर कर दें. घर में बंद घड़ियों का होना शुभ नहीं माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, बंद घड़ियां इंसान के दुर्भाग्य का कारण बन सकती हैं. ऐसे लोगों के घर में दरिद्रता बहुत जल्दी पांव पसारती है.
जंग लगी चीजें
यदि घर में जंग लगा हुआ लोहा या अनुपयोगी सामान पड़ा है तो उसे तुरंत बाहर कर दीजिए. कोई भी ऐसा सामान जो बहुत दिनों से उपयोग नहीं हुआ है. टूटा-फूटा या खराब हो चुका है, उसे फौरन बाहर कर दें. जंग लगा हुआ ताला, पुराने खोटे सिक्के, पुराने बर्तन या कोई भी गैर-जरूरी सामान घर में बिल्कुल न रहने दें.
खराब फर्नीचर
दिवाली की सफाई में टूटा हुआ फर्नीचर भी घर से बाहर करें. दीमक लगा सोफा, टूटी हुई कुर्सी या जंग खाई मेज घर में रहने रहने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है. यदि वो रिपेयर कराने की स्थिति में है तो करवा लीजिए, अन्यथा घर से बाहर करना ही एकमात्र विकल्प है.
टूटा शीशा
दिवाली की सफाई में कांच का टूटा हुआ सामान भी घर से बाहर कर दें. अक्सर लोग कांच का महंगा सामान घर ले आते हैं. लेकिन उसके टूटने के बावजूद उसे बाहर नहीं फेकते हैं. ऐसा करना गलत है. घर में टूटा हुआ कांच रखना अशुभ होता है. कांच के टूटे बर्तन या आईना रखना भी ठीक नहीं माना जाता है.
फटे-पुराने कपड़े
अपने घर में फटे-पुराने कपड़े बिल्कुल न रखें. जो कपड़े पुराने हो चुके हैं. फट चुके हैं और आप अब उनका इस्तेमाल नहीं करते हैं, उन्हें तुरंत घर से बाहर कर दीजिए. ऐसे कपड़े आदमी को बदकिस्मत बनाते हैं.</description><guid>2275</guid><pubDate>18-Oct-2025 2:15:40 pm</pubDate></item></channel></rss>