<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>सेहत - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>  इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर सूजन घटाने तक, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन क्यों है इतना खास?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2609</link><description>आयुर्वेद में हल्दी को एक खास औषधि की तरह देखा जाता है। इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसमें पाया जाने वाला एक्टिव कंपाउंड करक्यूमिन (Curcumin)। यही तत्व हल्दी को उसका चमकीला पीला रंग देता है और कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। आधुनिक शोधों में भी करक्यूमिन की एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी सपोर्ट करने वाली खूबियों पर ध्यान दिया गया है। आइए जानते हैं कि करक्यूमिन को इतना खास क्यों माना जाता है और यह शरीर को किस तरह फायदा पहुंचा सकता है?
हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंंद है करक्यूमिन
कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि करक्यूमिन हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंंद है। साल 2025 में Food And Chemical Toxicology नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, करक्यूमिन धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है जिससे धमनियांं सख्त नहीं होतींं। साथ ही यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है।
इम्यूनिटी मजबूत होती है
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह इम्यूनिटी सेल्स की कार्यप्रणाली को संतुलित करने में मदद करता है। इसलिए हल्दी को हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाया जाता है ताकि सेहत अच्छी रहे।
सूजन कम करने में मदद मिलती है
करक्यूमिन में एंंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। जोड़ों की समस्या या त्वचा रोग में हल्दी को बहुत उपयोगी माना जाता है।
फ्री रेडिकल्स से बचाता है करक्यूमिन
हमारे शरीर में रोजाना फ्री रेडिकल्स बनते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह नुकसान समय के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। करक्यूमिन एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, जो फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।
करक्यूमिन का सेवन कैसे करें?
हल्दी को भोजन में शामिल करने का सबसे आसान तरीका है कि आप इसे दाल, सब्जी, सूप या दूध में मिला सकते हैं। हालांकि करक्यूमिन की शरीर में एब्जॉर्ब होने की क्षमता सीमित होती है, लेकिन फिर भी एक्सपर्ट इसे हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं।
सेहत के लिए हल्दी के नुकसान क्या हैं?
जरूरत से ज्यादा मात्रा में हल्दी लेने से पेट में गड़बड़ी, मतली, दस्त या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</description><guid>2609</guid><pubDate>03-Jun-2026 11:33:59 am</pubDate></item><item><title>  खाना खाने के बाद तुरंत बाद गैस होने लगती है, तो पिएं ये 4 होममेड ड्रिंक्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2608</link><description> आजकल लोगों का खानपान काफी खराब होता जा रहा है, जिसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। देखा जा रहा है कि लोगों को अक्सर खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट में दर्द और यहां तक कि सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। सही आहार, नियमित दिनचर्या और कुछ आसान उपायों से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। लेकिन कुछ आसान और घरेलू ड्रिंक्स आपकी इस परेशानी को कम कर सकते हैं, जिनके बारे में हम आपको कुछ खास होममेड ड्रिंक्स के खास फायदों के बारे में बताने वाले हैं।
गुनगुना नींबू पानी
अगर आप सुबह हल्का गुनगुना पानी नहीं पीते हैं तो आज से ही पीना शुरू कर दीजिए। नींबू पानी पीने के फायदे आमतौर पर पाचन क्रिया को अच्छा बनाने के लिए सबसे ज्यादा होते हैं। क्योंकि हल्का गुनगुना और नींबू वाला पानी पाचन तंत्र को सक्रिय करने में बेहद असरदार होता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर को डिटॉक्स करते हैं और गैस व एसिडिटी को कम कर देते हैं। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पेट हल्का रहता है और सूजन में राहत मिलती है।
अदरक का पानी
अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह दोनों की तत्व पेट की सूजन और गैस को कम करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अदरक का पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और भोजन भी आसानी से पच जाता है। यह मतली और भारीपन की समस्या को भी दूर करने में मददगार साबित होता है।
जीरा वॉटर
जीरा पाचन के लिए बहुत फायदेमंद है। ऐसे में जीरा वॉटर पेट में गैस बनने की समस्या को कम कर सकता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे पेट की सूजन और अपच में राहत मिलती है। अगर आप चाहें तो सुबह भी जीरे का पानी पी सकते हैं क्योंकि खाली पेट जीरे का पानी पीने के फायदे भी कई अलग-अलग हो सकते हैं।
अजवाइन का पानी
अजवाइन का पानी भी पेट की गैस और सूजन से राहत दिलाता है। इसमें थाइमोल नामक तत्व होता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत करता है। अजवाइन का पानी गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग से तुरंत राहत दिलाता है। अगर आप हैवी डाइट लेते हैं को उसके बाद इसे पीना बहुत लाभकारी साबित होता है।
शहद व पुदीने वाला पानी
शहद और पुदीने का पानी स्वादिष्ट होने के साथ ही पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है। पुदीना पेट को ठंडक देता है और पेट की जलन व सूजन को कम करने का काम करता है, जबकि शहद पाचन को सुधारता है। इन दोनों का मिश्रण गैस और ब्लोटिंग से राहत दिलाने का काम करता है। साथ ही शरीर को ताजगी भी देता है।
</description><guid>2608</guid><pubDate>19-May-2026 11:51:07 am</pubDate></item><item><title> नीम से चमक सकता है चेहरा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2607</link><description>0- निखरी-साफ त्वचा के लिए करें इस्तेमाल, कंटेंट क्रिएटर रावत ने बताया तरीका
चेहरा चमकाने के लिए हम अपनी स्किन पर फेस वॉश, क्रीम और सीरम समेत ना जाने क्या-क्या लगाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इससे त्वचा को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है? इस स्थिति से बचने के लिए आप चेहरे पर कंटेंट क्रिएटर शेफ रावत के बताए नीम की पत्तियों वाले घरेलू नुस्खे को अपना सकते हैं। इससे चेहरे की त्वचा साफ हो सकती है और मुंहासे जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है।
आमतौर पर चेहरा साफ करने के लिए लोग बाजार में बिकने वाले प्रोडक्ट्स और दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि ये तरीके चाहे कितने ही कारगर क्यों ना नजर आते हो। मगर इनसे लॉन्ग टर्म में त्वचा को नुकसान ही हो सकता है। अगर आप इस स्थिति से बचना चाहते हैं, तो नीम का घरेलू नुस्खा त्वचा के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है।
चेहरा साफ क्यों नहीं दिखता है?
  प्रदूषण
  धूल-मिट्टी
  बंद पोर्स
  एक्स्ट्रा ऑयल प्रोडक्शन
जैसे कई कारण शामिल हैं। कई मामलों में लोगों के चेहरे का कालापन मेकअप नहीं हटाने और सही तरह से स्किन केयर पर ध्यान नहीं देने की वजह से होता है।
साफ त्वचा के लिए नुस्खा
कंटेंट क्रिएटर शेफ रावत ने एक इंस्टाग्राम वीडियो बनाई है। इस वीडियो में उन्होंने त्वचा को साफ करने वाले 2 बहुत ही बेहतरीन नुस्खों के बारे में बताया है। ये नुस्खे त्वचा को साफ करने के लिए नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं। यहां हम आपको नीम की पत्तियां इस्तेमाल करने के दो तरीके बताएंगे, जिनसे असल में त्वचा को लाभ हो सकता है। आइए अब दोनों नुस्खे जान लेते हैं।
नीम की स्टीम के फायदे
इसके लिए आपको एक कटोरे में पानी गर्म कर लेना है। इसमें नीम की पत्तियां डालें और कुछ देर उबाल लें। आपको टॉवल की मदद से चेहरे पर नीम की भाप लेनी है। बता दें कि नीम के पत्तों की भाप लेने से त्वचा और सांस दोनों को बहुत फायदा होगा। ये एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंहासे कम करने, स्किन पोर्स को गहराई से साफ करने, त्वचा की जलन शांत करने, बंद नाक खोलने और सांस की समस्या से राहत दिलाने में मददगार है।
नीम की स्टीम के फायदे
इसके लिए आपको एक कटोरे में पानी गर्म कर लेना है। इसमें नीम की पत्तियां डालें और कुछ देर उबाल लें। आपको टॉवल की मदद से चेहरे पर नीम की भाप लेनी है। बता दें कि नीम के पत्तों की भाप लेने से त्वचा और सांस दोनों को बहुत फायदा होगा। ये एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंहासे कम करने, स्किन पोर्स को गहराई से साफ करने, त्वचा की जलन शांत करने, बंद नाक खोलने और सांस की समस्या से राहत दिलाने में मददगार है।
नीम के त्वचा को फायदे
बता दें कि नीम त्वचा के लिए नेचुरल उपाय है, जो अपने एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण मुंहासे, दाग-धब्बों और संक्रमण को कम कर सकता है। ये त्वचा को गहराई से साफ कर, सूजन को कम करने, एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करने और रंगत सुधारने में मदद करती है।
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</description><guid>2607</guid><pubDate>13-May-2026 11:41:27 am</pubDate></item><item><title> बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए डाइट में शामिल करें ये फूड्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2606</link><description>बच्चे बार-बार कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह संतुलित और फाइबर से भरपूर डाइट न लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी होती है। हालांकि यह समस्या आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर बच्चे को बेचैनी, चिड़चिड़ापन और भूख कम लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे शुरुआत से ही बच्चों में हेल्दी आदतें विकसित करें, जैसे समय पर खाना खाना और रोजाना शारीरिक गतिविधि करना, जिससे उनकी पाचन बेहतर बना रहे।
कब्ज के लक्षणों में आमतौर पर पॉटी का अनियमित होना, सख्त या सूखी पॉटी आना और पॉटी करते समय दर्द या परेशानी होना शामिल है। बच्चों को पेट दर्द, पेट फूलना या पेट ठीक से साफ न होने जैसा महसूस हो सकता है। कुछ बच्चे दर्द के डर से वॉशरूम जाने से बचते हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। वहीं, गंभीर मामलों में भूख कम लगना या थोड़ा-थोड़ा पॉटी लीकेज जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।
कब्ज से बचाने के लिए पेरेंट्स को बच्चों की डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्हें संतुलित और फाइबर से भरपूर खाना देना जरूरी है। इसके लिए ओट्स, ब्राउन राइस और गेहूं जैसे साबुत अनाज रोज के आहार में शामिल करें। साथ ही पपीता, सेब (छिलके सहित), नाशपाती और केला जैसे फल भी दें, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, पालक, गाजर और बीन्स जैसी हरी सब्जियां भी बच्चों के पाचन के लिए फायदेमंद होती हैं। दही जैसे प्रोबायोटिक फूड आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे पाचन मजबूत होता है।
साथ ही, बच्चों को दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और पॉटी नरम बनी रहे।
कब्ज बढ़ाने वाले किन फूड्स से रहें दूर-
तले-भुने खाने, रिफाइंड आटा, चॉकलेट, कैफीनयुक्त ड्रिंक्स और पैकेटबंद स्नैक्स का ज्यादा सेवन करने से बचें, क्योंकि ये कब्ज के साथ-साथ एसिडिटी को भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बच्चों को इन चीजों का सेवन कम से कम कराएं और उनकी डाइट में हेल्दी विकल्प शामिल करें।
कब्ज से बचाव के एक्टिविटी जरूरी -
पाचन को स्वस्थ रखने में फिजिकल एक्टिविटी अहम भूमिका निभाती है। नियमित मूवमेंट से आंतें बेहतर तरीके से काम करती हैं, जिससे खाना आसानी से पचता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को दौड़ने, साइकिल चलाने, बाहर खेलने या हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें, जिससे पेट की समस्याएं कम हो सकें। वहीं, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से कब्ज और आंतों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।
ये उपाय भी आएंगे काम-
बच्चों को समय पर भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करें और खाना छोड़ने की आदत से बचाएं। इसके अलावा, उन्हें धीरे-धीरे खाना खाने और भोजन को अच्छी तरह चबाने की आदत सिखाएं। इसके साथ ही, नियमित समय पर टॉयलेट जाने की आदत विकसित करना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नींद की कमी पाचन और मेटाबॉलिज्म दोनों को प्रभावित कर सकती है। स्क्रीन टाइम सीमित करें और बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
डॉक्टर से जरूर सलाह लें-
अगर कब्ज दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, बच्चे को तेज पेट दर्द, उल्टी, पॉटी में खून या वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
पेरेंट्स ध्यान रखें ये बात:
बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि पेरेंट्स को उनकी दिनचर्या को ठीक रखें। उन्हें समय पर खाना खिलाएं, पर्याप्त पानी पिलाएं और रोज एक्टिविटी करने की आदत डालें। इन आदतों को बचपन से अपनाने से पाचन बेहतर रहता है। ध्यान रखें कि दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय शुरू से ही अच्छी आदतें डालना सबसे आसान और असरदार तरीका है।
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</description><guid>2606</guid><pubDate>13-May-2026 11:34:42 am</pubDate></item><item><title>  20 मिनट में बॉडी होगी डिटॉक्स!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2605</link><description>0- पानी में 3 चीजों को मिलाकर पैरों को भिगोएं
बॉडी के टॉक्सिंस निकालने के लिए डिटॉक्सड्रिंक पीने के बारे में तो कई बार सुना होगा। लेकिन क्या कभी सुना है पैरों को अगर खास तरह के मिक्सचर में डुबोया जाए तो ये शरीर में जमा टॉक्सिंस को निकालने में मदद करेंगे। पैरों के पोर्स ब्लड वेसल्स खुलते हैं। जिससे खास इंग्रीडिएंट्स शरीर में घुल रहे टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद मिलती है। हेल्थ कोच शिवांगी देसाई ने शरीर को टॉक्सिन फ्री बनाने के लिए डिटॉक्स करने का तरीका शेयर किया है। जिसकी मदद से बॉडी के साथ माइंड को हील करने का भी मौका मिलता है। हेल्थ कोच ने बताया कि 20 मिनट गुनगुने पानी में 3 चीजों को मिलाकर पैरों को भिगोने से बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। जानें क्या हैं वो 3 चीज और किस तरह से बॉडी डिटॉक्स में हेल्प करेंगी।
पानी में इन चीजों को मिलाकर पैरों को भिगोएं
पैरों को मात्र 20 मिनट अगर गुनगुने पानी में भिगोया जाए तो इससे बॉडी डिटॉक्स होगी। गुनगुने पानी में ये 3 चीजों को मिलाएं।
गुनगुना पानी
एप्सम सॉल्ट
एप्पल साइडर विनेगर
रोजमेरी या लेवेंडर या अदरक (जो उपलब्ध हो)
गर्म पानी में एक कप एप्सम सॉल्ट डालें। साथ ही एप्पल साइडर विनेगर आधा कप डालकर पैरों को करीब 20 मिनट तक भिगोएं। इस पानी में अदरक के टुकड़े डाल दें। अगर हो सके तो रोजमेरी या लेवेंडर भी डाल सकते हैं।
कैसे काम करता है ये तरीका
  गर्म पानी में पैरों को भिगोने से पैर के पोर्स ओपन होते हैं। जिससे लिम्फ एक्टिवेट होते हैं।
  वहीं एप्सम सॉल्ट को जब पानी में डालकर उसमे पैरों को भिगोते हैं तो एप्सम में मौजूद मैग्नीशियम शरीर से हैवी मेटल्स को बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही शरीर में हो रही इंफ्लेमेशन को भी कम करता है।
  पानी में साथ में जब एप्पल साइडर विनेगर को डालते हैं तो ये स्किन के पीएच लेवल को बैलेंस करने में मदद करता है। साथ ही टॉक्सिंस को निकालता है। टिश्यू में फंसे टॉक्सिन को लूज करता है। जिससे वो बाहर निकल सकें।
  जब इस पानी में एप्सम सॉल्ट के साथ रोजमेरी, लैवेंडर या फिर अदरक के टुकड़े डालते हैं तो इससे ब्लड सर्कुलेशन को रेगुलेट करता है। जो लिम्फ रुके हुए होते हैं उन्हें मूव करने में हेल्प करता है।
  इस प्रोसेस से बॉडी रिलैक्स होने के साथ डिटॉक्स भी होती है। साथ ही माइंड को फील होता है कि वो खुद की केयर कर रहा है।
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</description><guid>2605</guid><pubDate>13-May-2026 11:12:12 am</pubDate></item><item><title> धूप में जाते ही हो जाता है माइग्रेन, आखिर क्या है कारण?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2604</link><description>सिर में दर्द होना बहुत आम समस्या है, पर हर सिरदर्द आम हो ये जरूरी नहीं है। कुछ प्रकार का सिरदर्द, माइग्रेन हो सकता है। सिर के एक हिस्से तेज दर्द, आंखों में चुभन हो, तेज रोशनी बर्दाश्त न होने के साथ मितली जैसा महसूस होना माइग्रेन का संकेत हो सकता है। माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, बढ़ता स्क्रीन टाइम, नींद की कमी, खराब खानपान और लगातार तनाव जैसी स्थितियों ने माइग्रेन की समस्या बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ माइग्रेन को न्यूरोलॉजिकल या साइकोसोमेटिक समस्या मानते हैं। माइग्रेन का दर्द कई घंटों से लेकर 2-3 दिन तक भी रह सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके कारणों को समझना जरूरी है। वहीं आपको अगर माइग्रेन की दिक्कत है तो इसे ट्रिगर करने वाली स्थितियों से बचाव जरूरी है। क्या आपको भी थोड़ी देर धूप में रहने से माइग्रेन हो जाता है?
माइग्रेन की समस्या के बारे में जान लीजिए---
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दिमाग की नसों, केमिकल्स और नर्व सिग्नल्स में असामान्य बदलाव होने लगते हैं।
  माइग्रेन के लिए आनुवंशिक कारकों, मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक परिवर्तन और पर्यावरणीय कारणों को जिम्मेदार माना जाता है।
  परिवार में किसी को माइग्रेन है तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है।
  कुछ प्रकार के हार्मोनल बदलाव, खासकर महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के दौरान माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।
  बहुत ज्यादा तनाव लेना, नींद पूरी न होना, बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम, शरीर में पानी की कमी और अनियमित खानपान माइग्रेन का कारण बन सकता है।
  माइग्रेन के दौरान व्यक्ति को रोशनी, आवाज और गंध के प्रति अधिक संवेदनशीलता हो जाती है।
धूप में हो सकता है माइग्रेन अटैक--
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूप को माइग्रेन का एक बहुत आम ट्रिगर माना जाती है। तेज धूप या बहुत अधिक चमकदार रोशनी आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे ब्रेन की संवेदनशील नसें एक्टिव हो जाती हैं और माइग्रेन अटैक हो सकता है। माइग्रेन के शिकार लोगों में 'फोटोफोबिया' (प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता) की समस्या बहुत आम है।
  माइग्रेन से पीड़ित लोगों का नर्वस सिस्टम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए तेज रोशनी उनके लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
  गर्मियों में तेज धूप के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन भी हो सकता है जिसे पहले से माइग्रेन को ट्रिगर करने वाला बड़ा कारण माना जाता रहा है।
  धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स फैलती हैं और माइग्रेन दर्द बढ़ सकता है।
माइग्रेन से बचाव कैसे करें?
माइग्रेन से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने ट्रिगर्स को पहचाने और इससे बचाव करते रहें। अगर धूप से माइग्रेन बढ़ता है तो बाहर निकलते समय सनग्लासेस पहनें, छाता इस्तेमाल करें और सिर को ढककर रखें ताकि तेज रोशनी सीधे आंखों पर न पड़े।
शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना चाहिए।
नींद का एक नियमित शेड्यूल बनाना चाहिए क्योंकि पर्याप्त और तय समय पर नींद लेने से माइग्रेन का खतरा कम होता है।
तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने वाली एक्सरसाइज फायदेमंद मानी जाती हैं।
खानपान समय पर करें और लंबे समय तक खाली पेट न रहें, क्योंकि भूख माइग्रेन ट्रिगर कर सकती है।
अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह से दवाइयां ले सकते हैं।
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</description><guid>2604</guid><pubDate>13-May-2026 10:57:25 am</pubDate></item><item><title> गर्मी का कहर...घर से निकलने से पहले रखें इन जरूरी बातों का ध्यान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2603</link><description>अप्रैल का महीना शुरू होते ही गर्मी अपने तेवर दिखाने लगती है और कई इलाकों में लू चलना भी शुरू हो जाता है। तेज धूप और गर्म हवाएं न केवल शरीर को थका देती हैं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।ऐसे में सबसे पहले आपके लिए ये समझना जरूरी है कि लू लगना है क्या? दरअसल, लू लगना यानी हीट स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है। खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग और बाहर काम करने वाले लोग इसके ज्यादा शिकार होते हैं।
ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सावधानी बरती जाए और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए। यहां इस लेख में हम आपको लू लगने के लक्षण के साथ इससे बचने के तरीके बताएंगे।
पर्याप्त पानी पिएं
गर्मी में शरीर से पसीने के जरिए पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकलते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जो कमजोरी, चक्कर और थकान का कारण बनती है। इसलिए दिनभर में बार-बार पानी पीना जरूरी है। साथ ही, आप नींबू पानी या ओआरएस जैसे पेय भी ले सकते हैं, जिससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है।
धूप में बाहर निकलने से बचें
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सूरज की किरणें सबसे तेज होती हैं। इस दौरान बाहर निकलने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढककर निकलें और सीधी धूप से बचें।
हल्के और ढीले कपड़े पहनें
गर्मी में सूती (कॉटन) और हल्के रंग के कपड़े पहनना सबसे अच्छा रहता है। ये कपड़े शरीर को ठंडा रखते हैं और पसीने को जल्दी सोख लेते हैं, जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है। टाइट और सिंथेटिक कपड़े गर्मी को बढ़ा सकते हैं, इसलिए उनसे बचना चाहिए।
ठंडे पेय पदार्थ लें
नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और बेल का शरबत जैसे प्राकृतिक पेय शरीर को ठंडक देते हैं और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करते हैं। ये पेय न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि ऊर्जा भी बनाए रखते हैं, जिससे थकान कम होती है।
</description><guid>2603</guid><pubDate>13-May-2026 10:50:18 am</pubDate></item><item><title>गर्मी में कौन सा कुकिंग ऑयल सेहत के लिए है बेस्ट?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2602</link><description>गर्मियों में अच्छे स्वास्थ्य के लिए अक्सर लोगों को तला-भुना खाना खाने से बचने और हेल्दी डाइट लेने जैसी सलाह दी जाती है। ऐसे में हेल्दी डाइट के साथ-साथ खाना पकाने के लिए सही तेल का इस्तेमाल करना भी जरूरी होता है। ऐसे में यह सवाल आता है गर्मियों में कौन सा तेल खाना पकाने के लिए अच्छा होता है? गर्मियों में खाना पकाने के लिए घी, नारियल तेल और सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें हेल्दी फैट्स और कई गुण होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। ध्यान रहे, इनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करें।
नारियल तेल
नारियल तेल (Coconut oil) की तासीर ठंडी होती है, साथ ही, इसमें हेल्दी फैट्स, विटामिन-ई, सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। इससे खाना पकाने से शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, नारियल तेल पचाने में हल्का होता है, जिससे मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने, पाचन में सुधार करने, पित्त दोष को शांत करने, स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। नारियल तेल को खाना पकाने और तड़का मारने के लिए फायदेमंद माना जाता है।
सरसों का तेल
सरसों के तेल (Mustard oil) में अच्छी मात्रा में ओमेगा-3, ओमेगा-6 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। गर्मियों में खाना पकाने के लिए इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इससे पाचन में सुधार करने और इंफेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है।
घी
गर्मियों में खाना पकाने के लिए घी (Ghee) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें अच्छी मात्रा में विटामिन-ए, डी, ई, के और हेल्दी फैट्स होते हैं। ऐसे में इससे खाने पकाने से शरीर को मॉइस्चराइज रखने, पाचन में सुधार करने, जोड़ों को स्वास्थ्य रखने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, स्किन को हेल्दी रखने और स्वास्थ्य को हेल्दी बनाए रखने में मदद मिलती है।
सावधानियां
तेल का इस्तेमाल स्वास्थ्य स्थिति और एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार ही करें। खासकर किसी मेडिकल कंडीशन में।
निष्कर्ष
गर्मियों में अच्छे स्वास्थ्य के लिए नारियल तेल, सरसों का तेल और घी से खाना पकाया जा सकता है। इनको स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। ध्यान रहे कोई भी मेडिकल कंडीशन होने पर इनका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
रोज घी खाने से क्या फायदा होता है?
रोज घी खाने से पाचन में सुधार करने, जोड़ों को हेल्दी रखने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, ब्रेन को रिलैक्स करने, शरीर को एनर्जी देने और स्किन को हेल्दी होने में मदद मिलती है।
</description><guid>2602</guid><pubDate>10-May-2026 7:25:31 am</pubDate></item><item><title> कहीं आप तो नहीं खा रहे हैं हाइब्रिड खीरा,,, इन तरीकों से करें देसी खीरे की पहचान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2601</link><description>बाजार में मिलावटी के साथ अब इंजेक्शन से पकाई गई फल-सब्जियों की भी भरमार है। ऐसे में खरीदने से पहले समझना पड़ता है क्या सही है और क्या नुकसानदायक। गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में खीरा आने लगता है और लोग खीरा खाना पसंद भी करते हैं। खीरा लोग राह चलते भी खा लेते हैं और इसका सलाद-रायता भी बढ़िया लगता है। कभी आपने गौर किया हो तो देखा होगा कि बाजार में मिलने वाले कुछ खीरे चिकने होते हैं, उनका स्वाद मीठा भी नहीं होता। क्या आप जानते हैं इस तरह के खीरे हाइब्रिड होते हैं। अक्सर लोग चिकना और हरा रंग देखकर इसे खरीद लाते हैं लेकिन इसके स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए होने वाले फायदों के मामले में भी इसमें काफी अंतर होता है।
देसी खीरा और हाइब्रिड खीरा के बीच अंतर
देसी खीरा और हाइब्रिड खीरा दोनों ही आम तौर पर खाये जाने वाले खीरे के अलग-अलग प्रकार हैं, लेकिन इनकी बनावट, स्वाद, पैदावार और खेती के तरीके में काफी अंतर होता है। देसी खीरा प्राकृतिक या पारंपरिक किस्म से उगाया जाता है, जो स्थानीय रूप से किसान उगाते हैं। जबकि हाइब्रिड खीरा दो अलग-अलग किस्मों के क्रॉस-ब्रीडिंग से तैयार किया जाता है।
3 तरीकों से करें पहचान
बाजार में देसी के साथ हाइब्रिड खीरे भी खूब बिक रहे हैं, ऐसे में अगर आप देसी खीरा पहचानने में चूक रहे हैं। तो किसानों के बताए कुछ तरीकों से आसानी से देसी खीरे की पहचान कर सकते हैं। इससे आप फिर कभी धोखा नहीं खाएंगे।
  रंग और बनावट
देसी और हाइब्रिड खीरे की पहचान करने का आसान तरीका है उसका रंग। देसी खीरा आमतौर पर हल्का हरा और थोड़ा चकत्तेदार होता है। इसकी लंबाई भी छोटी-मोटी होती है। तो वहीं हाइब्रिड खीरा रंग का गहरा हरा होता है और ये पतला, लंबा, सीधे आकार का होता है। इसका हरा रंग साधारण से ज्यादा चमकता है।
  स्वाद और बीज से पहचानें
स्वाद के मामले में देसी खीरा आप झट स पहचान लेंगे। स्वाद में देसी हल्का मीठा और पानी से भरा होता है। स्वाद में देसी खीरा कई बार कड़वा होता है, जबकि हाइब्रिड बिल्कुल कड़वा नहीं होगा। इसके बीज छोटे-बड़े होते हैं और खुशबू भी मीठी-मीठी आती है। तो वहीं हाइब्रिड खीरा रसीला तो होता है लेकिन इसमें बीज ज्यादा नहीं होते और खुशबू भी नहीं होती।
  छिलके से जानें
देसी खीरा का छिलका पतला, खुरदरा होता है और इसमें पतली लाइनें भी बनी होती हैं। तो वहीं हाइब्रिड का छिलका बिल्कुल परफेक्ट चिकना, हरा और चमकदार दिखेगा।
</description><guid>2601</guid><pubDate>08-May-2026 1:00:53 pm</pubDate></item><item><title>  मामूली बदन दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2600</link><description>हमें कई बार पैरों, कमर या कंधे में दर्द होता है, तो शायद ही इस तरफ ध्यान देते हैं। हममें से ज्यादातर लोगों के लिए यह चिंता का विषय नहीं होता है। हमें लगता है कि यह दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार मामूली सा बदन दर्द भी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है? जी, हां! यह सच है। यहां हम जानेंगे कि मामूली बदन दर्द को क्यों न इग्नोर करें और यह किन बीमारियों का संकेत हो सकता है?
मामूली बदन दर्द किन समस्याओं का संकेत है?
एनीमियाः मामूली बदन दर्द एनीमिया का संकेत हो सकता है। एनीमिया एक बीमारी है, जिसमें रेड ब्लड सेल्स सही तरह से काम नहीं करते हैं और ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होती है। ऐसे में शरीर में दर्द, हार्ट रेट का बढ़ना और थकान-कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं।
विटामिन डी की कमीः हमारे शरीर के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी पोषक तत्व है। हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन डी जरूरी होता है। जब शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है, तो शुरुआती दिनों में बदन दर्द, मसल्स पेन, मांसपेशियों में क्रैंप्स आना जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
फाइब्रोमायल्जियाः यह एक तरह की क्रोनिक बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों, हड्डियों में दर्द होने लगता है। इस समस्या में व्यक्ति थकान, कमजोरी और काफी संवेदनशील हो जाता है। फाइब्रोमायल्जिया के कारण मरीज तनाव या अवसाद में भी आ सकता है।
क्रोनिक फटीग सिंड्रोमः आपको जानकर हैरानी होगी कि यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें मरीज को 6 महीने से अधिक समय तक थकान रहती है। शुरुआती दिनों में लोग अक्सर अपनी थकान को गंभीरता से नहीं लेते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी वजह से बदन दर्द हो सकता है, जो सामान्य प्रतीत होता है। इस कंडीशन को भी इग्नोर किया जाना सही नहीं है।
निष्कर्ष
मामूली सा होने वाला बदन दर्द कब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है, इसका पता नहीं चलता है। इसलिए, अगर किसी को लंबे समय से मामूली बदन दर्द भी हो रहा है, तो उसकी अनदेखी न करें। तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं।</description><guid>2600</guid><pubDate>01-May-2026 2:24:27 pm</pubDate></item><item><title>  ज्यादा ककड़ी खाने से खराब हो सकता है पेट </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2599</link><description>गर्मियों में ज्यादातर लोग खीरे के साथ-साथ ककड़ी का सेवन करना पसंद करते हैं। इसका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट करने, पाचन में सुधार करने और वजन कम करने जैसे कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन करने से फायदे के बजाए स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। गर्मियों में ककड़ी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इसमें अच्छी मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जो पाचन के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका जरूर से ज्यादा सेवन करने से व्यक्ति को पेट से जुड़ी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
ब्लोटिंग होने की समस्या
अधिक ककड़ी का सेवन करने से व्यक्ति को पेट फूलने या ब्लोटिंग और सूजन होने की समस्या हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति को भारीपन महसूस होने जैसी परेशानी हो सकती है।
गैस होना
ककड़ी में अच्छी मात्रा में पानी और फाइबर होता है। ऐसे में इसका जरूरत से ज्यादा सेवन करने से गैस, अपच और डकार होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पेट दर्द होने
ककड़ी में कुकुरबिटासिन (Cucurbitacins) नामक कंपाउड होता है। ऐसे में ककड़ी का अधिक सेवन करने के कारण व्यक्ति को पेट दर्द होने की समस्या हो सकती है, खासकर जिन लोगों का पेट सेंसिटिव होता है। इसके अलावा, ककड़ी में पानी होता है। ऐसे में इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में भारीपन और ऐंठन की समस्या हो सकती है।
जी मिचलाने या उल्टी होने
कई बार ककड़ी का जरूरत से ज्यादा सेवन करने के कारण व्यक्ति को जी मिचलाने और उल्टी आने की समस्या भी हो सकती है।
ककड़ी कब और कैसे खाएं?
ककड़ी को अच्छे से धोकर कच्चा खाया जा सकता है। इसके अलावा, इसको सलाद या रायते के रूप में खाया जा सकता है। गर्मियों में ककड़ी को मीड मील में, सुबह के समय या लंच से आधे घंटे पहले सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। इससे स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
सावधानियां
गर्मियों में ककड़ी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसको सही तरीके से खाना जरूरी होता है। इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति को किडनी से जुड़ी या कोई अन्य मेडिकल कंडीशन है, तो इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करें।
निष्कर्ष
जरूरत से ज्यादा ककड़ी का सेवन करने से ब्लोटिंग, गैस, कब्ज, जी मिचलाने, उल्टी और पेट में दर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में ककड़ी का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। इसके अलावा, इससे किसी भी तरह की एलर्जी या परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वहीं, किसी मेडिकल कंडीशन में इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।</description><guid>2599</guid><pubDate>29-Apr-2026 4:58:13 pm</pubDate></item><item><title>रोज 30 मिनट ब्रिस्क वॉक से हार्ट अटैक का खतरा काफी कम होता है </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2598</link><description> अक्सर लोग हार्ट से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं। हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए अक्सर लोगों को नियमित एक्सरसाइज करने, वॉक करने और बैलेंस डाइट लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या वाकई में वॉक करना हार्ट के लिए फायदेमंद होता है? और अगर हां तो हेल्दी हार्ट के लिए कितनी वॉक करनी चाहिए? नियमित रूप से वॉक करना दिल को स्वस्थ रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। यह एक ऐसी एक्सरसाइज है, जिसको सभी लोग आसानी से कर सकते हैं। वॉक करने से हार्ट से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में भी सहायक है।
हेल्दी हार्ट के लिए कितनी देर वॉक करें?
हर व्यक्ति को हफ्ते में कम से 150 मिनट तक मध्यम गति वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसका मतलब है कि हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनट के लिए ब्रिस्क वॉकिंग करें। बिल्कुल न चलने से बेहतर है कि आप थोड़ा बहुत चलें और जितना ज्यादा आप चलेंगे, आपके दिल को उतना ही अधिक फायदा होगा। इससे कम समय में ही, फिटनेस को बेहतर करने, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। लंबे समय तक पैदल चलने से दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। ऐसे में स्वस्थ रखने के लिए हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट पैदल चलने का टारगेट रखना चाहिए।
क्या है ब्रिस्क वॉकिंग?
 तेज चाल में चलने को ब्रिस्क वॉकिंग कहा जाता है। लेकिन इसमें इतना तेज भी नहीं चलना है कि आप थक जाएं। स्टडी के अनुसार, इसको समझने का एक आसान तरीका ये है कि ब्रिस्क वॉकिंग वो होती है, जब आप चल रहे हों, तो आप बात तो कर सकें, लेकिन गाना न गा सकें। यही हेल्दी हार्ट के लिए सही गति मानी जाती है। इस तरह की वॉक करना दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे दिल की धड़कन थोड़ी तेज होती है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होती है। रोजाना 30 मिनट के लिए ब्रिस्क वॉक करने से शरीर और दिल दोनों के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। इससे शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर करने, वजन कम करने, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करे
नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद मिलती है, जिससे हार्ट को सही मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। ये हार्ट के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे
नियमित रूप से वॉक करने से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, दिल के दबाव को कम करने और हार्ट के कार्यों को बेहतर करने में मदद मिलती है। बता दें, हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट पर दबाव बढ़ने लगता है, जो इसके कार्यों में बाधा डालता है। 2024 में Iranian Journal of Public Health के अनुसार, तेजी से चलने यानी ब्रिस्क वॉक करना हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए फायदेमंद है। इससे ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है। इससे दिल को दुरुस्त रखने में भी मदद मिलती है।
वजन कम करे
ब्रिस्क वॉक करने से शरीर में जमा एक्स्ट्रा कैलोरीज को बर्न करने में मदद मिलती है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। बता दें, ज्यादा वजन कम के कारण भी व्यक्ति को दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करे
रोज 30 मिनट के लिए ब्रिस्क वॉक करने से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ावा देने और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) के स्तर को कम करने में मदद मिलती है, जो दिल के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक है।
क्या एक साथ 30 मिनट चलना जरूरी है?
 हेल्दी हार्ट के लिए वॉक करना फायदेमंद होता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि 30 मिनट की वॉक एक साथ ही की जाए। हेल्दी हार्ट के लिए ब्रिस्क वॉक को दिनभर में 10-15 मिनट के छोटे-छोटे सेशन में करना भी फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसके लिए नियमितता (consistency) जरूरी है। आप दिनभर में वॉक के 10-15 मिनट के 2-3 सेशन कर सकते हैं।
कैसे शुरू करें वॉक?
अगर आप ज्यादा एक्टिव नहीं हैं और आपकी लाइफस्टाइल काफी बैठकर काम करने वाली है, तो वॉक धीरे-धीरे शुरु करें। इसके लिए वॉक 10 मिनट से शुरु करें और फिर धीरे-धीरे टाइम बढ़ाएं।
कम समय से शुरू करें
कम एक्टिव लोग वॉक करने की शुरुआत 10 मिनट के साथ करें। जब वॉक करने की आदत हो जाए, तो धीरे-धीरे वॉक का टाइम बढ़ाएं।
रोज का टारगेट तय करें
हेल्दी हार्ट के लिए वॉक करने के लिए नियमित रूप से टार्गेट तय करें, जैसे की रोज कम से कम 15 मिनट चलना है और फिर इस लक्ष्य को बढ़ाएं। ऐसा करने से हार्ट की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
नियमितता है जरूरी
दिल को स्वस्थ रखने के लिए वॉक करना फायदेमंद होता है, लेकिन इसके लिए नियमितता भी जरूरी है। रोज थोड़ा-थोड़ा चलना फायदेमंद होता है।
नियमितता से क्या फायदे होते हैं?
दिल की सेहत के लिए सबसे जरूरी है नियमितता। रोज थोड़ा-थोड़ा चलना लंबे समय के लिए फायदेमंद है। इससे हार्ट को कई लाभ मिलते हैं।
वॉक करते समय इन बातों को रखें ध्यान
 वॉक करते समय मध्यम गति में चलें, सही पोस्चर रखें और आरामदायक जूते पहनें। इनसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।
-दिल की मांसपेशियां होती हैं मजबूत
-कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करे
-ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे
-वजन कम करे
-स्ट्रेस कम करे
किन लोगों के लिए वॉक करना है ज्यादा फायदेमंद?
सुबह-शाम वॉक करना हार्ट ही नहीं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में कुछ लोगों को वॉक जरूर करनी चाहिए।
-अधिक वजन से परेशान लोग
-हाई ब्लड प्रेशर
-कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा होने
-जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं
-लाइफस्टाइल एक्टिव न होने
-डॉक्टर से सलाह कब लें?
अगर किसी व्यक्ति को अधिक वजन होने, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने के साथ-साथ अगर किसी व्यक्ति को दिल की धड़कन के अनियमित होने, सीने में दर्द होने, थकान होने, सांस लेने में परेशानी होने, चक्कर आने, ठंडा पसीना आने और जी मिचलाने की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
हेल्दी हार्ट के लिए वॉक करना एक असरदार तरीका है। इसके लिए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट यानी 30 मिनट ब्रिस्क वॉक करते हैं, तो दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा, हेल्दी हार्ट के लिए नियमित रूप से बैलेंस डाइट लें, नियमित एक्सरसाइज करें, स्ट्रेस कम करें और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें। इसके अलावा, हार्ट से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</description><guid>2598</guid><pubDate>26-Apr-2026 7:50:57 am</pubDate></item><item><title> बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए डाइट में शामिल करें ये फूड्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2597</link><description>बच्चे बार-बार कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह संतुलित और फाइबर से भरपूर डाइट न लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी होती है। हालांकि यह समस्या आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर बच्चे को बेचैनी, चिड़चिड़ापन और भूख कम लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे शुरुआत से ही बच्चों में हेल्दी आदतें विकसित करें, जैसे समय पर खाना खाना और रोजाना शारीरिक गतिविधि करना, जिससे उनकी पाचन बेहतर बना रहे।
कब्ज के लक्षणों में आमतौर पर पॉटी का अनियमित होना, सख्त या सूखी पॉटी आना और पॉटी करते समय दर्द या परेशानी होना शामिल है। बच्चों को पेट दर्द, पेट फूलना या पेट ठीक से साफ न होने जैसा महसूस हो सकता है। कुछ बच्चे दर्द के डर से वॉशरूम जाने से बचते हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। वहीं, गंभीर मामलों में भूख कम लगना या थोड़ा-थोड़ा पॉटी लीकेज जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।
कब्ज से बचाने के लिए पेरेंट्स को बच्चों की डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्हें संतुलित और फाइबर से भरपूर खाना देना जरूरी है। इसके लिए ओट्स, ब्राउन राइस और गेहूं जैसे साबुत अनाज रोज के आहार में शामिल करें। साथ ही पपीता, सेब (छिलके सहित), नाशपाती और केला जैसे फल भी दें, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, पालक, गाजर और बीन्स जैसी हरी सब्जियां भी बच्चों के पाचन के लिए फायदेमंद होती हैं। दही जैसे प्रोबायोटिक फूड आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे पाचन मजबूत होता है।
साथ ही, बच्चों को दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और पॉटी नरम बनी रहे।
कब्ज बढ़ाने वाले किन फूड्स से रहें दूर-
तले-भुने खाने, रिफाइंड आटा, चॉकलेट, कैफीनयुक्त ड्रिंक्स और पैकेटबंद स्नैक्स का ज्यादा सेवन करने से बचें, क्योंकि ये कब्ज के साथ-साथ एसिडिटी को भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बच्चों को इन चीजों का सेवन कम से कम कराएं और उनकी डाइट में हेल्दी विकल्प शामिल करें।
कब्ज से बचाव के एक्टिविटी जरूरी -
पाचन को स्वस्थ रखने में फिजिकल एक्टिविटी अहम भूमिका निभाती है। नियमित मूवमेंट से आंतें बेहतर तरीके से काम करती हैं, जिससे खाना आसानी से पचता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को दौड़ने, साइकिल चलाने, बाहर खेलने या हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें, जिससे पेट की समस्याएं कम हो सकें। वहीं, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से कब्ज और आंतों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।
ये उपाय भी आएंगे काम-
बच्चों को समय पर भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करें और खाना छोड़ने की आदत से बचाएं। इसके अलावा, उन्हें धीरे-धीरे खाना खाने और भोजन को अच्छी तरह चबाने की आदत सिखाएं। इसके साथ ही, नियमित समय पर टॉयलेट जाने की आदत विकसित करना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नींद की कमी पाचन और मेटाबॉलिज्म दोनों को प्रभावित कर सकती है। स्क्रीन टाइम सीमित करें और बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
डॉक्टर से जरूर सलाह लें-
अगर कब्ज दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, बच्चे को तेज पेट दर्द, उल्टी, पॉटी में खून या वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
पेरेंट्स ध्यान रखें ये बात:
बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि पेरेंट्स को उनकी दिनचर्या को ठीक रखें। उन्हें समय पर खाना खिलाएं, पर्याप्त पानी पिलाएं और रोज एक्टिविटी करने की आदत डालें। इन आदतों को बचपन से अपनाने से पाचन बेहतर रहता है। ध्यान रखें कि दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय शुरू से ही अच्छी आदतें डालना सबसे आसान और असरदार तरीका है।
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</description><guid>2597</guid><pubDate>23-Apr-2026 12:19:04 pm</pubDate></item><item><title>  नीम से चमक सकता है चेहरा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2596</link><description>निखरी-साफ त्वचाके लिए करें इस्तेमाल, कंटेंट क्रिएटर रावत ने बताया तरीका
चेहरा चमकाने के लिए हम अपनी स्किन पर फेस वॉश, क्रीम और सीरम समेत ना जाने क्या-क्या लगाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इससे त्वचा को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है? इस स्थिति से बचने के लिए आप चेहरे पर कंटेंट क्रिएटर शेफ रावत के बताए नीम की पत्तियों वाले घरेलू नुस्खे को अपना सकते हैं। इससे चेहरे की त्वचा साफ हो सकती है और मुंहासे जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है।
आमतौर पर चेहरा साफ करने के लिए लोग बाजार में बिकने वाले प्रोडक्ट्स और दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि ये तरीके चाहे कितने ही कारगर क्यों ना नजर आते हो। मगर इनसे लॉन्ग टर्म में त्वचा को नुकसान ही हो सकता है। अगर आप इस स्थिति से बचना चाहते हैं, तो नीम का घरेलू नुस्खा त्वचा के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है।
चेहरा साफ क्यों नहीं दिखता है?
  प्रदूषण
  धूल-मिट्टी
  बंद पोर्स
  एक्स्ट्रा ऑयल प्रोडक्शन
जैसे कई कारण शामिल हैं। कई मामलों में लोगों के चेहरे का कालापन मेकअप नहीं हटाने और सही तरह से स्किन केयर पर ध्यान नहीं देने की वजह से होता है।
साफ त्वचा के लिए नुस्खा
कंटेंट क्रिएटर शेफ रावत ने एक इंस्टाग्राम वीडियो बनाई है। इस वीडियो में उन्होंने त्वचा को साफ करने वाले 2 बहुत ही बेहतरीन नुस्खों के बारे में बताया है। ये नुस्खे त्वचा को साफ करने के लिए नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं। यहां हम आपको नीम की पत्तियां इस्तेमाल करने के दो तरीके बताएंगे, जिनसे असल में त्वचा को लाभ हो सकता है। आइए अब दोनों नुस्खे जान लेते हैं।
नीम की स्टीम के फायदे
इसके लिए आपको एक कटोरे में पानी गर्म कर लेना है। इसमें नीम की पत्तियां डालें और कुछ देर उबाल लें। आपको टॉवल की मदद से चेहरे पर नीम की भाप लेनी है। बता दें कि नीम के पत्तों की भाप लेने से त्वचा और सांस दोनों को बहुत फायदा होगा। ये एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंहासे कम करने, स्किन पोर्स को गहराई से साफ करने, त्वचा की जलन शांत करने, बंद नाक खोलने और सांस की समस्या से राहत दिलाने में मददगार है।
नीम की स्टीम के फायदे
इसके लिए आपको एक कटोरे में पानी गर्म कर लेना है। इसमें नीम की पत्तियां डालें और कुछ देर उबाल लें। आपको टॉवल की मदद से चेहरे पर नीम की भाप लेनी है। बता दें कि नीम के पत्तों की भाप लेने से त्वचा और सांस दोनों को बहुत फायदा होगा। ये एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंहासे कम करने, स्किन पोर्स को गहराई से साफ करने, त्वचा की जलन शांत करने, बंद नाक खोलने और सांस की समस्या से राहत दिलाने में मददगार है।
नीम के त्वचा को फायदे
बता दें कि नीम त्वचा के लिए नेचुरल उपाय है, जो अपने एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण मुंहासे, दाग-धब्बों और संक्रमण को कम कर सकता है। ये त्वचा को गहराई से साफ कर, सूजन को कम करने, एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करने और रंगत सुधारने में मदद करती है।
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</description><guid>2596</guid><pubDate>23-Apr-2026 12:15:47 pm</pubDate></item><item><title> धूप में जाते ही हो जाता है माइग्रेन, आखिर क्या है कारण?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2595</link><description>सिर में दर्द होना बहुत आम समस्या है, पर हर सिरदर्द आम हो ये जरूरी नहीं है। कुछ प्रकार का सिरदर्द, माइग्रेन हो सकता है। सिर के एक हिस्से तेज दर्द, आंखों में चुभन हो, तेज रोशनी बर्दाश्त न होने के साथ मितली जैसा महसूस होना माइग्रेन का संकेत हो सकता है। माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, बढ़ता स्क्रीन टाइम, नींद की कमी, खराब खानपान और लगातार तनाव जैसी स्थितियों ने माइग्रेन की समस्या बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ माइग्रेन को न्यूरोलॉजिकल या साइकोसोमेटिक समस्या मानते हैं। माइग्रेन का दर्द कई घंटों से लेकर 2-3 दिन तक भी रह सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके कारणों को समझना जरूरी है। वहीं आपको अगर माइग्रेन की दिक्कत है तो इसे ट्रिगर करने वाली स्थितियों से बचाव जरूरी है। क्या आपको भी थोड़ी देर धूप में रहने से माइग्रेन हो जाता है?
माइग्रेन की समस्या के बारे में जान लीजिए---
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दिमाग की नसों, केमिकल्स और नर्व सिग्नल्स में असामान्य बदलाव होने लगते हैं।
  माइग्रेन के लिए आनुवंशिक कारकों, मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक परिवर्तन और पर्यावरणीय कारणों को जिम्मेदार माना जाता है।
  परिवार में किसी को माइग्रेन है तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है। कुछ प्रकार के हार्मोनल बदलाव, खासकर महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के दौरान माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।
  बहुत ज्यादा तनाव लेना, नींद पूरी न होना, बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम, शरीर में पानी की कमी और अनियमित खानपान माइग्रेन का कारण बन सकता है। माइग्रेन के दौरान व्यक्ति को रोशनी, आवाज और गंध के प्रति अधिक संवेदनशीलता हो जाती है।
धूप में हो सकता है माइग्रेन अटैक--
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूप को माइग्रेन का एक बहुत आम ट्रिगर माना जाती है। तेज धूप या बहुत अधिक चमकदार रोशनी आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे ब्रेन की संवेदनशील नसें एक्टिव हो जाती हैं और माइग्रेन अटैक हो सकता है। माइग्रेन के शिकार लोगों में 'फोटोफोबिया' (प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता) की समस्या बहुत आम है।
  माइग्रेन से पीड़ित लोगों का नर्वस सिस्टम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए तेज रोशनी उनके लिए परेशानी पैदा कर सकती है। गर्मियों में तेज धूप के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन भी हो सकता है जिसे पहले से माइग्रेन को ट्रिगर करने वाला बड़ा कारण माना जाता रहा है। धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स फैलती हैं और माइग्रेन दर्द बढ़ सकता है।
माइग्रेन से बचाव कैसे करें?
माइग्रेन से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने ट्रिगर्स को पहचाने और इससे बचाव करते रहें। अगर धूप से माइग्रेन बढ़ता है तो बाहर निकलते समय सनग्लासेस पहनें, छाता इस्तेमाल करें और सिर को ढककर रखें ताकि तेज रोशनी सीधे आंखों पर न पड़े।
शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना चाहिए। नींद का एक नियमित शेड्यूल बनाना चाहिए क्योंकि पर्याप्त और तय समय पर नींद लेने से माइग्रेन का खतरा कम होता है। तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने वाली एक्सरसाइज फायदेमंद मानी जाती हैं।
खानपान समय पर करें और लंबे समय तक खाली पेट न रहें, क्योंकि भूख माइग्रेन ट्रिगर कर सकती है। अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह से दवाइयां ले सकते हैं।
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</description><guid>2595</guid><pubDate>17-Apr-2026 12:52:21 pm</pubDate></item><item><title> लू लगने पर क्या ज्यादा फायदेमंद है नींबू पानी या छाछ? </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2594</link><description>गर्मियों में नींबू पानी और छाछ दोनों ही शरीर के लिए फायदेमंद ड्रिंक्स होती हैं। यह गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने में मदद करती है। नींबू पानी में विटामिन सी जैसे अन्य तत्वों के साथ छाछ में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन बी होता है। यह दोनों ड्रिंक्स शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। आइए अब जानते हैं लू से बचाव करने में छाछ ज्यादा फायदेमंद होती है या फिर नींबू पानी।
गर्मियों का महीना शुरू होते ही शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी होता है। गर्मियों में लू लगने से लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो कई बार सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
कैसे पता चलेगा लू लगी है या नहीं?
गर्मियों में लू लगने पर आपको शरीर में कई तरह के लक्षण दिखने लगते हैं। जैसे- सिर में दर्द, चक्कर आना, उल्टी वाला मन होना, शरीर का तापमान बढ़ जाना, त्वचा का लाला होना और चक्कर आना, आदि। यह सारे लक्षण आपको लू लगने पर दिखाई देंगे।
लू लगने के बाद डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
गर्मियों में लू लगने के बाद आप घर पर रहकर अपना बचाव कर सकते हैं। लेकिन , अगर आपका बुखार कम नहीं हो रहा है, बार-बार उल्टी आ रही है, सांस लेने में दिक्कत हो और शरीर से पसीना न आना आदि लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 
लू से बचाव में कौन है ज्यादा असरदार?
गर्मियों के मौसम में लू से बचाव के लिए आप नींबू पानी का सेवन कर सकते हैं। इसमें विटामिन सी की मात्रा भरपूर होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। दूसरी तरफ छाछ का भी सेवन लू से बचाव करने में मदद करता है। यह प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत है, जो पेट की समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। कुल मिलाकर लू लगने के बाद जल्दी आराम पाने के लिए आप छाछ और नींबू पानी दोनों का सेवन कर सकते हैं।
लू से बचने के अन्य घरेलू तरीके
गर्मियों में लू से बचने के लिए आप घर पर रहकर ही घरेलू तरीकों का इस्तेमाल करें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, नींबू पानी, छाछ, आम पन्ना या सत्तू का सेवन कर सकते है। यह सभी घरेलू ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है और शरीर को लू से बचाव करने में मदद करती हैं।</description><guid>2594</guid><pubDate>17-Apr-2026 11:16:58 am</pubDate></item><item><title> ग्लोइंग स्किन पाने के लिए कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल कैसे करें?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2593</link><description>आयुर्वेद में कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल स्किन की सुंदरता और चमक को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कई जड़ी-बूटियों और नेचुरल तत्वों को मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें केसर, चंदन, मंजिष्ठा, हल्दी और अन्य औषधीयां शामिल होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह तेल स्किन को पोषण देने, दाग-धब्बों को कम करने और चेहरे की नेचुरल चमक बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए, इस तेल का नियमित इस्तेमाल करने से स्किन को मुलायम, चमकदार और हेल्दी रखने में मदद मिलती है।
ग्लोइंग स्किन के लिए कुमकुमादि तेल कैसे इस्तेमाल करें?
 केसर के औषधीय गुणों से भरपूर होता है। केसर में क्रोसिन और सफ्रानल जैसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो स्किन को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाते हैं और समय से पहले बुढ़ापे को रोकते हैं। ऐसे में कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल स्किन का नेचुरल ग्लो बढ़ाने और हेल्दी रखने के लिए आप इन तरीकों से कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं-
1. रात में चेहरे पर लगाएं
कुमकुमादि तेल का सबसे अच्छा इस्तेमाल रात में इसका उपयोग करना अच्छा माना जाता है। इस तेल का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपने चेहरे को किसी हल्के फेसवॉश से साफ करें। इसके बाद चेहरा अच्छी तरह सुखा लें और फिर 2 से 3 बूंद कुमकुमादि तेल को अपनी हथेली पर लें और हल्के हाथों से चेहरे और गर्दन पर मसाज करें। इसे पूरी रात अपने चेहरे पर लगा रहने दें और सुबह चेहरे को धो लें। ऐसा करने से स्किन को गहराई से पोषण मिलता है और समय के साथ स्किन पर चमक बढ़ती है।
2. मसाज के रूप में इस्तेमाल करें
आप कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल चेहरे की मसाज करने के लिए भी कर सकते हैं। चेहरे पर इस तेल से मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और स्किन ज्यादा हेल्दी दिखती है। इस तेल का इस्तेमाल करने के लिए अपने चेहरे को साफ करने के बाद 3 से 4 बूंद तेल लेकर उंगलियों से गोल-गोल घुमाते हुए 5 से 10 मिनट तक चेहरे की मसाज करें। मसाज करने के बाद तेल को स्किन में सोखने दें। हफ्ते में 3 से 4 बार इस तेल से मसाज करने से आपको अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं।
3. फेस पैक में मिलाकर उपयोग करें
आप कुमकुमादि तेल को फेस पैक में मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकते हैं। आप 1 चम्मच चंदन पाउडर या मुल्तानी मिट्टी लेकर उसमें गुलाब जल मिलाकर 2 से 3 बूंद कुमकुमादि तेल मिला लें। इसके बाद इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने के बाद 15 से 20 मिनट बाद सादे पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से आपकी स्किन साफ होती है और चमकदार बनाने में मदद मिलती है।
4. मॉइस्चराइजर के साथ मिलाकर लगाएं
अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ऑयली है तो आप कुमकुमादि तेल को सीधे लगाने के स्थान पर मॉइश्चराइजर में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। आप अपने मॉइश्चराइजर में 1 से 2 बूंद तेल मिलाकर अपने चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे आपकी स्किन को पोषण मिलता है और तेल ज्यादा भारी भी नहीं लगता है।
कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
-हमेशा असली और अच्छी क्वालिटी वाला कुमकुमादि तेल खरीदें।
-पहली बार अगर आप इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो पैच टेस्ट जरूर करें।
-अगर स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है तो डॉक्टर या एक्सपर्ट से कंसल्ट करें।
-बहुत ज्यादा मात्रा में इस तेल को अपने चेहरे पर लगाने से बचें।
-नियमित इस्तेमाल से ही आपको इसका अच्छा रिजल्ट मिल सकता है।
-</description><guid>2593</guid><pubDate>13-Apr-2026 1:49:18 pm</pubDate></item><item><title> सिर्फ जुकाम से नहीं, कई समस्याओं से राहत देता है जायफल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2592</link><description>जायफल गरम मसाले में आने वाला एक खास इंग्रेडिएंट है, जिसका इस्तेमाल पुलाव और बिरयानी में किया जाता है। इसका स्वाद हल्का मीठा और तीखा होता है, जो खाने के स्वाद को बढ़ा सकता है। कुकिंग के अलावा जायफल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो कई समस्याओं से राहत पाने में मदद करते हैं। यहां दादी-नानी के बताए 5 नुस्खें हैं जो हेल्थ से लेकर स्किन से जुड़े हैं। जानिए-
1) सिरदर्द में कारगर जायफल
सिरदर्द में जायफल का इस्तेमाल एक बहुत ही पुराना और असरदार नुस्खा है। दरअसल, जायफल में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो दर्द निवारक और शांतिदायक गुणों से भरपूर होते हैं। सिर के भारीपन या तनाव के कारण हो रहे सिरदर्द को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप एक पत्थर पर जायफल को थोड़ा सा पानी डालकर घिस लें। अब इस तैयार पेस्ट को माथे पर लगाएं। इस नुस्खे से दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
2) नजला या जुकाम
जुकाम और नजला में जायफल काम आ सकता है। इसकी गर्म तासीर जमे हुए कफ को पिघलाने और बंद नाक को खोलने में बहुत मदद करता है। इस दिक्कत से निपटने के लिए जायफल को पत्थर पर पानी डालकर घिसें और फिर इसे छाती पर लगाएं। आपको 3 दिन में आराम मिल जाएगा।
3) मुंह में छाले
जायफल में एंटी-सेप्टिक और हीलिंग प्रॉपर्टीज होती है, जो दर्द को कम करती है और छालों को जल्दी भरने में मदद करती है। इस समस्या से निपटने के लिए घिसे हुए जायफल को पानी में मिलाएं और फिर कुल्ला करें। इस नुस्खे को अपनाकर छालों से हो रही जलन से भी निपटने में मदद मिलती है।
4) धूप से काली हुई स्किन
जायफल स्किन के डेड सेल्स को हटाने में मदद करता है, जिससे चेहरे पर ग्लो आता है। धूप में काली हुई स्किन को साफ करने के लिए आप दूध में जायफल को घिसें और फिर इसे चेहरे पर लगाएं। आपको कुछ दिन में असर दिखने लगेगा।
5) जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द से निपटने के लिए सरसों के तेल में जायफल पाउडर मिलाकर गर्म करें। इस तेल से दर्द वाली जगह पर मालिश करें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का ऑप्शन नहीं है। किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े सवालों के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।
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</description><guid>2592</guid><pubDate>04-Apr-2026 10:11:27 am</pubDate></item><item><title> पुराना नुस्खा, आज भी असरदार!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2591</link><description>आजकल लोग हेल्दी रहने के लिए नेचुरल और घरेलू उपायों की ओर तेजी से वापस लौट रहे हैं। खासकर ऐसे ड्रिंक्स, जो शरीर को अंदर से साफ करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करें। नींबू, लहसुन और दालचीनी से बना यह पारंपरिक ड्रिंक भी ऐसा ही एक आसान और असरदार नुस्खा है, जिसका इस्तेमाल पुराने समय से किया जाता रहा है।
इन तीनों चीजों में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन सुधारने और एनर्जी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन एक हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ इसे शामिल करने से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं और आप खुद को ज्यादा एक्टिव और फिट महसूस कर सकते हैं।
1 नींबू (स्लाइस में कटा हुआ)
3 लहसुन की कलियां
1 बड़ा चम्मच दालचीनी
कैसे बनाएं:
  एक पैन में 1 लीटर पानी डालें।
  इसमें नींबू, लहसुन और दालचीनी डालें और अच्छे से उबालें।
  फिर 57 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें।
  अब इसे छान लें और हल्का गर्म होने पर पिएं।
पावरफुल ड्रिंक
यह ड्रिंक तीन शक्तिशाली चीजों का मिश्रण है, जो शरीर को अंदर से सपोर्ट करता है।
  लहसुन: इसमें सल्फर कंपाउंड्स होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
  दालचीनी: यह ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती है।
  नींबू: इसमें विटामिन C होता है, जो शरीर को एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट देता है।
क्या फायदे मिल सकते हैं?
  लिवर की कार्यक्षमता को सपोर्ट करता है: इस ड्रिंक में मौजूद नींबू और लहसुन शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। यह लिवर को बेहतर तरीके से काम करने में सपोर्ट देता है और शरीर से टॉक्सिन्स निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
  ब्लड शुगर बैलेंस में मदद कर सकता है: दालचीनी को ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर में शुगर के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
  शरीर को एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट देता है: नींबू में विटामिन C और अन्य एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। इससे त्वचा और शरीर दोनों को हेल्दी रखने में सहायता मिलती है।
  इम्यून सिस्टम बूस्ट करे: लहसुन और नींबू दोनों ही इम्यूनिटी को सपोर्ट करते हैं। यह शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं और आपको बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
कैसे करें सेवन?
इस ड्रिंक को दिन में 1 बार, सुबह या शाम के समय हल्का गर्म पी सकते हैं। नियमित सेवन से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
किन बातों का रखें ध्यान?
  खाली पेट ज्यादा मात्रा में ना लें
  अगर कोई बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लें
  स्वाद तेज लगे तो मात्रा कम कर सकते हैं
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</description><guid>2591</guid><pubDate>04-Apr-2026 10:09:52 am</pubDate></item><item><title> कैसे पता लगाएं कि आप पर्याप्त पानी पी रहे हैं?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2590</link><description>आज के समय में हर किसी को पता है कि हाइड्रेट रहना कितना जरूरी है, लेकिन बिजी लाइफस्टाइल और बैड हैबिट्स के कारण हम पर्याप्त पानी भी नहीं पी पा रहे हैं। यही कारण है कि आज के समय में काफी लोग निर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि, असली दिक्कत ये नहीं है बल्कि ये है कि लोगों को निर्जलीकरण के लक्षणों का भी पता नहीं है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि निर्जलीकरण से कोई लक्षण दिखता ही नहीं है, लक्षण तो दिखते हैं लेकिन तब दिखते हैं जब स्थिति खराब हो चुकी होती है। इस लेख में हम ऐसे ही लक्षणों के बारे में बात करेंगे, जिनकी मदद से आप शरीर में पानी की कमी का पता लगा सकते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर शरीर में पर्याप्त पानी है, तो किडनियां सही से अपना काम कर पाती हैं और स्वस्थ रहती हैं, हमारे जोड़ों में पर्याप्त लुब्रिकेशन रहता है आनी चिकनाई बनी रहती है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है। इलेक्ट्रोलाइट हमारी मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है, जिससे दिमाग को फोकस रखने, मूड को स्टेबल रखने और कई जरूरी कार्यों को पूरा करने में मदद मिलती है।
शरीर में पानी की कमी के संकेत
क्लीवलैंड क्लिनिक द्वारा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में डिहाइड्रेशन के लक्षण का पता कई बार नहीं चल पाता है। हालांकि, अगर ध्यान दिया जाए तो कुछ संकेत देखे जा सकते हैं -
-लगातार थकान या सुस्ती रहना
-बार-बार मुंह व होंठ सूखना
-सिरदर्द या चक्कर आना
-पेशाब का रंग गहरा पीला होना
-ध्यान न लगा पाना या सोच न पाना
-मांसपेशियों में ऐंठन होने लगना
अगर ऐसे लक्षणों को इग्नोर किया जा रहा है और फिर भी तरल पदार्थों का सेवन नहीं बढ़ाया जा रहा है, तो इससे स्थिति और गंभीर भी हो सकती है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
- इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस
-हीट स्ट्रोक (लू लगना)
-गुर्दे में पथरी
-किडनी फेलियर
-शॉक या कोमा (गंभीर स्थितियों में)
अमेरिकी हेल्थ एजेंसी के अनुसार बदलते मौसम के कारण भी शरीर के हाइड्रेशन लेवल पर सीधा असर पड़ता है। गर्मियों में ज्यादा पसीना निकलने और पर्याप्त पानी न पीने के कारण लोग ज्यादा बीमार पड़ते हैं। इसलिए गर्मियों मे ज्यादातर वे लोग प्रभावित होते हैं, ज्यादा समय बाहर गर्मी में रहते हैं जैसे कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले, फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग व लेबर आदि।

कितना पानी पीना जरूरी है
क्या आपको भी लगता है कि आप पर्याप्त पानी पी रहे हैं और फिर भी डिहाइड्रेट हो रही बॉडी? तो हो सकता है कि आप पर्याप्त पानी ही नहीं पी रहे हैं। हालांकि, इसका कोई सटीक जवाब देना तो मुश्किल हो सकता है, क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर की जरूरत अलग होती है। शरीर को पानी की कितनी जरूरत है वह उसकी उम्र, हेल्थ कंडीशन, उसकी शारीरिक गतिविधियां और वह किस मौसम में रह रहा है आदि पर निर्भर करती हैं। हालांकि, सामान्य तौर पर एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना दिन में 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
हाइड्रेट रहने के आसान तरीके
अगर आपको भी पानी पीना याद नहीं रहता है, तो आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इस समस्या से बच सकते हैं और खुद को हाइड्रेट रख सकते हैं -
-पानी की बोतल अपने साथ रखें
-गर्मियों में पानी को ठंडा रखने वाली बोतल साथ रखें
-हाइड्रेशन के चक्कर में मीठे पेय पदार्थ न पिएं
-पानी के दौरान भी थोड़ा-बहुत पानी जरूर पिएं
-पानी की बोतल में नींबू काटकर डाल लें, जिससे फ्लेवर बदलेगा
-डिहाइड्रेशन हो जाए तो क्या करें
शरीर में पानी की कमी होना यानि डिहाइड्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासतौर पर अगर आपको निम्न लक्षण दिख रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
-चक्कर आना या सिर घूमना
-जी मिचलाना या उल्टी आने जैसा मन होना
-हल्का सिर दर्द रहना
-ज्यादा प्यास लगना और यूरिन कम आना
ये लक्षण बेहद गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं और इसलिए इन्हें इग्रोर नहीं करना चाहिए। डिहाइड्रेशन का ज्यादा खतरा आमतौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में ज्यादा होता है और इनमें डिहाइड्रेशन से होने वाली नुकसान भी गंभीर हो सकते हैं। साथ ही जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या फिर किडनी से जुड़ी कोई समस्या रहती है, तो उन्हें भी डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।</description><guid>2590</guid><pubDate>03-Apr-2026 2:46:53 pm</pubDate></item><item><title> क्या मल्टीग्रेन आटे से भी कब्ज की समस्या हो सकती है? </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2589</link><description> मल्टीग्रेन आटा आजकल का नया ट्रेंड बन चुका है। हर कोई आजकल इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहा है। पहले जहां सिर्फ डायबिटीज के मरीज इस आटे को खाते थे वहीं अब ये हर किसी के नॉर्मल डाइट का हिस्सा बनता जा रहा है। मल्ट्रीग्रेन आटे में कई प्रकार के मोटे अनाजों को शामिल किया जाता है जो कि हाई फाइबर से भरपूर होते हैं। हाई फाइबर जहां डाइजेशन बूस्टर और मेटाबॉलिज्म तेज करने वाला होता है वहीं ये आंतों की गति को भी तेज करता है मल में थोक जोड़कर इसे मुलायम बनाता है और पेट साफ करने में मदद करता है। हालांकि, फाइबर शरीर के लिए जरूरी है लेकिन ज्यादा मात्रा में फाइबर का सेवन शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ये कब्ज की भी वजह बन सकता है कैसे, जानते हैं इस बारे में -
 मल्टीग्रेन आटे से कब्ज हो तो क्या करें?
मल्टीग्रेन आटे से होने वाले कब्ज से बचने के लिए आपको ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए दरअसल जितना ज्यादा आप पानी पिएंगे शरीर फाइबर को उतने आराम से पचा लेगा जिससे कि आपको कब्ज की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा मल्टीग्रेन आटे का सेवन धीरे-धीरे बढ़ाएं अचानक से इस आटे पर निर्भर न हो जाएं या सिर्फ इसी को डाइट में शामिल न करें।
इस संकेतों पर दें ध्यान
मल्टीग्रेन आटे से आपका मल टाइट होने लगे या आपको बवासीर जैसी समस्या महसूस होने लगे तो आपको सतर्क हो जाने की जरूरत है। इसके अलावा अगर आपको लग रहा है कि आपका खाना सही से नहीं पच पा रहा या गैस व बदहजमी की दिक्कत हो रही है और ये लगातार बनी रहती है तो इसका मतलब है कि आप फाइबर ज्यादा मात्रा में ले रहे हैं और पानी कम पी रहे हैं।
ऐसी में आपको अपनी डाइट में सबसे पहले तो फल, सब्जियां और दही शामिल करना चाहिए जो कि पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करे। इसके अलावा भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं और नियमित समय पर खाएं। टहलने जैसी हल्की शारीरिक गतिविधि भी मल त्याग में सहायक होती है। तो इस प्रकार से डाइट सही करें और मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी को डाइट में शामिल तो करें लेकिन संतुलित मात्रा में।
सबसे अच्छा मल्टीग्रेन आटा कौन सा होता है?
मल्टीग्रेन आटा कई प्रकार के अनाजों से बनता है लेकिन सबसे अच्छा आटा उसे माना जाता है जिसमें 25% तक बाजरा होता है और बाकी दूसरे अनाज। हालांकि, ये खाने वाले की पसंद पर भी निर्भर करता है।
मल्टीग्रेन आटा किसे नहीं खाना चाहिए?
मल्टीग्रेन आटा उन तमाम लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनका पाचन क्रिया कमजोर हो या जिन्हें खाना पचाने में मुश्किल हो रही हो। इसके अलावा गैस से जुड़ी समस्या वाले लोगों को भी इसके सेवन से बचना चाहिए।</description><guid>2589</guid><pubDate>01-Apr-2026 6:12:22 pm</pubDate></item><item><title>  गर्मियों में शरीर को ठंडा रखे सौंफ, जानिए सेवन के 5 आसान तरीके </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2588</link><description>चिलचिलाती गर्मी में न सिर्फ पसीना आता है, बल्कि अंदरुनी रूप से भी कई तरह की समस्याएं होने का खतरा रहता है। मुख्य रूप से शरीर में गर्मी बढ़ने से पेट से जुड़ी दिक्कतें काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसके अलावा इस सीजन में काफी ज्यादा सुस्ती और थकान जैसा अनुभव होता है। अगर आप गर्मियों की इन समस्याओं को कम करना चाहते हैं, तो सौंफ का सेवन कर सकते हैं। सौंफ में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो गर्मियों में आपको ठंडक दे सकते हैं। इसके सेवन से पेट की गर्मी को शांत कियाा जा सकता है। साथ ही यह गर्मियों के दिनों में आपके शरीर को एनर्जी प्रदान कर सकता है। गर्मियों के दिनों में खुद को ठंडा रखने के लिए आप सौंफ का सेवन कई तरह से कर सकते हैं। आइए जानते हैं गर्मियों में कैसे करें सौंफ का सेवन?
1. गर्मियों में पिएं सौंफ का पानी
गर्मियों में अगर आप खुद को ठंडा रखना चाहते हैं, सौंफ का पानी पी सकते हैं। यह शरीर को ठंडा रखने के लिए काफी असरदार हो सकता है। इसके लिए 1 चम्मच सौंफ लें। इसे 1 गिलास पानी में रातभर के लिए भिगोकर छोड़ दें। इसके बाद सुबह पानी को छानकर इसका सेवन करें। इससे आपका पाचन भी ठीक रहता है। साथ ही आप लंबे समय तक हाइड्रेट रहते हैं।
2. सौंफ और दही का कॉम्बिनेशन भी है बेस्ट
गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ और दही का कॉम्बिनेशन भी आपके लिए अच्छा हो सकता है। इसके लिए 1 कटोरी में दही लें, इसमें 1 टीस्पून भुनी हुई सौंफ मिक्स करें। इस मिश्रण का सेवन करने से आपका पाचन सही रहता है। साथ ही शरीर की गर्मी भी कम होती है। दोपहर के समय इस मिश्रण का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।
3. सौंफ और नींबू का शरबत रखे ठंडा
शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ और नींबू का शरबत फायदेमंद हो सकता है। इससे आप फ्रेश फील करते हैं। सौंफ का शरबत तैयार करने के लिए 1 चम्मच सौंफ को 1 कप पानी में डालकर अच्छी तरह से उबाल लें। इसके बाद इसे ठंडा होने दें। बाद में आधा नींबू और 1 चम्मच शहद डालकर इसका सेवन करें। गर्मियों में यह ड्रिंक आपके लिए बेस्ट साबित हो सकता है।
4. गर्मियों में पिएं सौंफ की चाय
गर्मियों के दिनों में पेट को ठंडा रखने के साथ-साथ शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ की चाय पी सकते हैं। इस चाय को बनाने के लिए आप 1 कप पानी लें, इसमें 1 चम्मच सौंफ डालकर कुछ मिनटों के लिए उबाल लें। अब इसमें थोड़ा सा अदरक कद्दूकस करके डालें। अब इसे छानकर चाय की तरह पिएं।
5. खीरा और सौंफ का सलाद गर्मियों में रखे ठंडा
सौंफ के साथ-साथ खीरा भी आपके स्वास्थ्य के लिए बेस्ट हो सकता है। इसके सेवन से आप फ्रेश महसूस करते हैं। इसके लिए 1 कटोरी खीरा लें। इसपर करीब 1 चम्मट भुनी हुई सौंफ का पाउडर डालें। आप चाहे, तो इसपर हल्का सा नींबू का रस या फिर नमक डालकर खाएं। इससे शरीर में पानी की कमी दूर होती है। साथ ही शरीर को ठंडक मिल सकती है।</description><guid>2588</guid><pubDate>31-Mar-2026 1:13:05 pm</pubDate></item><item><title> फैटी लिवर ग्रेड 1, 2 और 3 में क्या अंतर है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2587</link><description>फैटी लिवर की गंभीरता के अनुसार इसे तीन ग्रेड में बांटा गया है। इसमें फैटी लिवर ग्रेड 1 शुरुआती दौर होता है, जिसका समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह बढ़कर फैटी लिवर ग्रेड 2 से लेकर 3 तक चला जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 सबसे गंभीर अवस्था है। लिवर पर थोड़ा फैट होना नॉर्मल है, क्योंकि लिवर को इसकी जरूरत एनर्जी के लिए पड़ती है, लेकिन जैसे ही फैट का लेवल 5% से ज्यादा होने लगता है, उसे फैटी लिवर कहा जाता है। इससे लिवर में सूजन होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसे ही फैटी लिवर की शुरुआत कहा जाता है।
फैटी लिवर ग्रेड 1 के लक्षण
 फैटी लिवर के शुरुआती स्टेज पर लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे साइलेंट बीमारी कहा जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 1 में लिवर पर इतना कम फैट जमा होता है कि इसके लक्षणों में कई बार रोगी को थकान या पेट के ऊपरी दाहिने भाग में थोड़ा बहुत दर्द हो सकता है। इन लक्षणों को आमतौर पर मरीज इग्नोर कर देते हैं क्योंकि ये लक्षण किसी भी खास तरह की बीमारी का इशारा नहीं करते। अगर किसी भी व्यक्ति को बार-बार ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
-मोटापा - कमर का साइज बहुत ज्यादा होना
टाइप 2 डायबिटीज
-ब्लड में HDL कोलेस्ट्रॉल लेवल बहुत कम होना
-हाई ब्लड प्रेशर होना
-जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उनमें अल्कोहल के कारण लिवर पर फैट जमा हो जाता है।
-तेजी से वजन कम होना
-HIV का इलाज कराना
-किसी कैंसर का इलाज कराना
-कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाइयां लेना
-फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
-अल्ट्रासाउंड - अगर फैटी लिवर की शुरुआत होती है, तो इसे अल्ट्रासाउंड के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है।
-लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)- इस टेस्ट के जरिए यह पता चलता है कि लिवर कितने बेहतर तरीके से काम कर रहा है। अगर SGPT और SGOT एंजाइम बढ़े हुए आते हैं, तो लिवर में सूजन हो सकती है।
लिपिड प्रोफाइल - अगर ब्लड में ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो फैटी लिवर होने की संभावना हो सकती है।
ब्लड शुगर - फैटी लिवर की समस्या डायबिटीज रोगियों को होने का खतरा रहता है, इसलिए डॉक्टर HbA1c टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।
ग्रेड 1 फैटी लिवर का इलाज
ग्रेड 1 फैटी लिवर शुरुआती स्टेज होती है, जबकि ग्रेड 3 ज्यादा गंभीर मानी जाती है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर मरीज में बीमारी एक ही तरह से आगे नहीं बढ़ती। कई लोगों में यह लंबे समय तक स्थिर रहती है और सही जीवनशैली, वजन घटाने, व्यायाम, शुगर व लिपिड कंट्रोल तथा डॉक्टर की सलाह से इसमें सुधार भी हो सकता है।
ग्रेड 2 फैटी लिवर
 ग्रेड 2 फैटी लिवर मोडरेट कंडीशन है। Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार के मुताबिक, लिवर के सेल्स में 34% से लेकर 66% तक फैट जमा हो जाए, तो इसे ग्रेड 2 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज के लिवर के फंक्शन पर असर पड़ने लगता है।
फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण
जैसे-जैसे लिवर में फैट बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। हालांकि ग्रेड 1 फैटी लिवर में लक्षण काफी हद तक नजर नहीं आते, लेकिन लिवर में फैट बढ़ने के साथ लक्षणों की पहचान होने लगती है। ग्रेड 2 फैटी लिवर के लक्षणों में भूख कम लगना, पेट में सूजन और खाना न पचना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। मैंने कई मरीजों की स्किन में पीलापन और अचानक वजन बढ़ना भी देखा है। वैसे ग्रेड 2 फैटी लिवर में पेट में सूजन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। बहुत ज्यादा प्यास लगना, ब्लोटिंग, पेट के ऊपरी भाग में दर्द और नींद खराब होना भी फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण हो सकते हैं।
ग्रेड 2 फैटी लिवर के कारण
-बैलेंस्ड डाइट न खाना
बहुत ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाना
-मोटापा
-फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाला लाइफस्टाइल अपनाना
-बहुत ज्यादा शराब पीना
-परिवार में लिवर से जुड़ी बीमारियों की हिस्ट्री
-फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच करने के लिए डॉक्टर मरीज को ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
लिवर फंक्शन टेस्ट - लिवर की हेल्थ को जानने के लिए एंजाइम और प्रोटीन चेक किए जाते हैं।
फाइब्रो स्कैन - लिवर कितना हार्ड हो गया है, इसे जानने के लिए फाइब्रो स्कैन की सलाह दी जा सकती है।
सीटी स्कैन - लिवर के ग्रेड को विस्तार से जांचने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन भी कराया जा सकता है। फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज
आमतौर पर ग्रेड 2 फैटी लिवर में मरीजों को वजन कम करने की सलाह दी जाती है ताकि फैटी लिवर की बीमारी का इलाज किया जा सके। जैसे ही मरीज का वजन कम होता है, इससे लिवर का फैट और सूजन कम होती है। इसके अलावा, मरीज को हेल्दी फूड, डाइट का पोर्शन साइज और फिजिकल एक्सरसाइज करने की सलाहदी जाती है।
फैटी लिवर ग्रेड 3
Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अगर लिवर के सेल्स में 67 फीसदी से ज्यादा फैट जमा हो जाए, तो उसे ग्रेड 3 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्टेज में लिवर के आसपास के टिश्यू में गंभीर सूजन आ जाती है, इस वजह से ग्रेड 3 को बहुत ही गंभीर स्थिति माना जाता है। अगर फैटी लिवर ग्रेड 3 का समय पर इलाज न हो, तो लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में कई बार लिवर ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ सकती है, इसलिए लिवर से जुड़े लक्षणों की पहचान करके समय पर इलाज कराने की जरूरत होती है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 के लक्षण
-पेट के ऊपर दाईं तरफ दर्द या पेट भरा हुआ महसूस होना
-बहुत ज्यादा थकान लगना
-बिना वजह वजन तेजी से कम होना
-मतली महसूस होना
-हाथ, पैर और टांगों में सूजन दिखाई देना
-फैटी लिवर ग्रेड 3 की जांच कैसे की जाती है?
इस स्टेज पर डॉक्टर मरीज को अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है।अगर डॉक्टर को लिवर में गंभीर रूप से सूजन महसूस होती है, तो लिवर बायोप्सी की सलाह भी दी जा सकती है। इसमें लिवर के टिश्यू के छोटे से हिस्से को लेकर लैब में टेस्ट किया जाता है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज
अगर मरीज का वजन ज्यादा होता है, तो उसे वजन कम करने की सलाह दी जाती है।इसके अलावा मरीज को अपनी डाइट और खानपान पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इसके साथ, मरीज को किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
फैटी लिवर ग्रेड 1 से 3 तक बढ़ने के कारण क्या है?
फैटी लिवर के गंभीर होने में कई रिस्क फैक्टर्स जैसे अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, अल्कोहल, स्मोकिंग, हाई कोलेस्ट्रॉल, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी न करना कंट्रोल न हो, तो फैटी लिवर गंभीर हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में डायग्नोसिस नहीं होता है, तो यह फैटी लिवर के ग्रेड बढ़ते जाते हैं। इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।

</description><guid>2587</guid><pubDate>30-Mar-2026 12:36:00 pm</pubDate></item><item><title> खीरे की सलाद... भूलकर भी इन 5 चीजों के साथ ना खाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2586</link><description>गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो शरीर को ठंडक देता है और पानी की कमी को भी पूरी करता है। इसे खाने से शरीर तरोताजा हो जाता है। लगभग हर घर में खीरे का इस्तेमाल सलाद के रूप किया जाता है, जो हेल्थ के लिए अच्छा भी है। लेकिन कई बार हम बिना सोचे-समझे इसे हर चीज के साथ खा लेते हैं, जिससे स्वाद तो बिगड़ता ही है, साथ में पाचन से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां भी हो सकती हैं। सही तरीके से खाया जाए तो खीरा बहुत फायदेमंद है, लेकिन गलत कॉम्बिनेशन इसका मजा खराब कर सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि ये जान लें कि किन चीजों के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए, ताकि आपका जायका भी ना बिगड़े और पेट से जुड़ी समस्या भी ना हों। चलिए जानते हैं ऐस कौन से फूड आइटम हैं जिनके साथ खीरा का कॉम्बिनेशन सही नहीं होता।
डेयरी प्रोडक्ट (खासकर दही) के साथ खीरा
खीरा और दही का कॉम्बिनेशन कई जगह पर इस्तेमाल होता है, लेकिन इन दोनों की जोड़ी कई बार परेशानी में डाल सकती है। खीरे में पानी बहुत ज्यादा होता है, जिससे दही पतली हो सकती है और उसका क्रीमी टेक्सचर खराब हो सकता है। इससे खाने का मजा कम हो जाता है। इसके अलावा हेल्थ के लिहाज से भी देखें तो ये पाचन संबंधी परेशानियों को जन्म दे सकता है।
मीट के साथ ना खाएं खीरा
मीट और खीरा साथ खाने से कभी-कभी पाचन से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। मीट में प्रोटीन ज्यादा होता है और उसे पचने में समय लगता है, जबकि खीरा हल्का और पानी से भरपूर होता है और जल्दी पच जाता है। इस अंतर की वजह से पेट में भारीपन या एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि अगर आप मीट खा रहे हैं तो उस टाइम खीरा खाने से परहेज करें या थोड़ा टाइम का गैप लेकर खीरा खाएं।
खट्टे फलों के साथ खीरा अवॉइड करें
संतरा या नींबू जैसे खट्टे फल स्वाद में तेज होते हैं, जबकि खीरा बहुत हल्का और सादा स्वाद देता है। दोनों को साथ मिलाने पर कई बार खट्टापन ज्यादा लगने लगता है और खीरे की फ्रेशनेस कही दब सी जाती है। साथ ही ज्यादा खट्टापन खीरे के क्रंचनेस को भी कम कर सकता है। वहीं पाचन के लिहाज से भी ये कॉम्बिनेशन सही नहीं है।
लहसुन के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए
लहसुन का स्वाद बहुत तेज होता है और यह आसानी से किसी भी हल्की चीज का स्वाद दबा सकता है। जब आप खीरे के साथ ज्यादा लहसुन मिला देते हैं तो खीरे का ताजा स्वाद महसूस ही नहीं होता। अगर आपको लहसुन पसंद है तो उसे बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करें, ताकि खीरे की पहचान बनी रहे और और टेस्ट भी बैलेंस रहे।
टमाटर के साथ खीरा खाने से बचें
खीरा और टमाटर का सलाद बहुत कॉमन है। लेकिन इसमें एक छोटी सी बात ध्यान रखने वाली है। खीरा पानी छोड़ता है, जिससे टमाटर का स्वाद हल्का पड़ सकता है। हेल्थ के लिहाज से देखें तो खीरे और टमाटर का कॉम्बिनेशन आपके पेट के PH बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे पेट में गैस और ब्लोटिंग की शिकायत भी हो सकती है।खीरे की सलाद... भूलकर भी इन 5 चीजों के साथ ना खाएं
गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो शरीर को ठंडक देता है और पानी की कमी को भी पूरी करता है। इसे खाने से शरीर तरोताजा हो जाता है। लगभग हर घर में खीरे का इस्तेमाल सलाद के रूप किया जाता है, जो हेल्थ के लिए अच्छा भी है। लेकिन कई बार हम बिना सोचे-समझे इसे हर चीज के साथ खा लेते हैं, जिससे स्वाद तो बिगड़ता ही है, साथ में पाचन से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां भी हो सकती हैं। सही तरीके से खाया जाए तो खीरा बहुत फायदेमंद है, लेकिन गलत कॉम्बिनेशन इसका मजा खराब कर सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि ये जान लें कि किन चीजों के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए, ताकि आपका जायका भी ना बिगड़े और पेट से जुड़ी समस्या भी ना हों। चलिए जानते हैं ऐस कौन से फूड आइटम हैं जिनके साथ खीरा का कॉम्बिनेशन सही नहीं होता।
डेयरी प्रोडक्ट (खासकर दही) के साथ खीरा
खीरा और दही का कॉम्बिनेशन कई जगह पर इस्तेमाल होता है, लेकिन इन दोनों की जोड़ी कई बार परेशानी में डाल सकती है। खीरे में पानी बहुत ज्यादा होता है, जिससे दही पतली हो सकती है और उसका क्रीमी टेक्सचर खराब हो सकता है। इससे खाने का मजा कम हो जाता है। इसके अलावा हेल्थ के लिहाज से भी देखें तो ये पाचन संबंधी परेशानियों को जन्म दे सकता है।
मीट के साथ ना खाएं खीरा
मीट और खीरा साथ खाने से कभी-कभी पाचन से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। मीट में प्रोटीन ज्यादा होता है और उसे पचने में समय लगता है, जबकि खीरा हल्का और पानी से भरपूर होता है और जल्दी पच जाता है। इस अंतर की वजह से पेट में भारीपन या एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि अगर आप मीट खा रहे हैं तो उस टाइम खीरा खाने से परहेज करें या थोड़ा टाइम का गैप लेकर खीरा खाएं।
खट्टे फलों के साथ खीरा अवॉइड करें
संतरा या नींबू जैसे खट्टे फल स्वाद में तेज होते हैं, जबकि खीरा बहुत हल्का और सादा स्वाद देता है। दोनों को साथ मिलाने पर कई बार खट्टापन ज्यादा लगने लगता है और खीरे की फ्रेशनेस कही दब सी जाती है। साथ ही ज्यादा खट्टापन खीरे के क्रंचनेस को भी कम कर सकता है। वहीं पाचन के लिहाज से भी ये कॉम्बिनेशन सही नहीं है।
लहसुन के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए
लहसुन का स्वाद बहुत तेज होता है और यह आसानी से किसी भी हल्की चीज का स्वाद दबा सकता है। जब आप खीरे के साथ ज्यादा लहसुन मिला देते हैं तो खीरे का ताजा स्वाद महसूस ही नहीं होता। अगर आपको लहसुन पसंद है तो उसे बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करें, ताकि खीरे की पहचान बनी रहे और और टेस्ट भी बैलेंस रहे।
टमाटर के साथ खीरा खाने से बचें
खीरा और टमाटर का सलाद बहुत कॉमन है। लेकिन इसमें एक छोटी सी बात ध्यान रखने वाली है। खीरा पानी छोड़ता है, जिससे टमाटर का स्वाद हल्का पड़ सकता है। हेल्थ के लिहाज से देखें तो खीरे और टमाटर का कॉम्बिनेशन आपके पेट के PH बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे पेट में गैस और ब्लोटिंग की शिकायत भी हो सकती है।
</description><guid>2586</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:54:48 pm</pubDate></item><item><title> ज्यादा पानी वाला नारियल खरीदने का आसान तरीका</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2585</link><description>गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी तो काफी सारे लोग पीते हैं। लेकिन इसे खरीदने की सही ट्रिक बहुत कम लोगों को पता है। अक्सर आपके साथ होता होगा जब आप कोकोनट वॉटर खरीद कर घर लाते होंगे और उसमें बहुत कम पानी निकलता होगा। ऐसे आप ठगा हुआ महसूस करते हैं लेकिन आज के बाद ऐसा नहीं होगा। बस ये छोटा सा तरीका जान लें जिससे हमेशा ज्यादा पानी वाला नारियल ही खरीदेंगे। नोट कर लें दुकान वाले की बताई ये छोटी सी ट्रिक।
ज्यादा पानी वाले नारियल की पहचान
जब भी ज्यादा पानी वाला कोकोनट खरीदना हो तो बस ये एक छोटी सी पहचान कर लें। हमेशा नारियल की तली को देख कर ही खरीदें।
गोल बॉटम वाले नारियल में होगा ज्यादा पानी
ज्यादा पानी वाला नारियल खरीदना है तो कोशिश करें कि नारियल की तली गोल हो। इस तरह के नारियल में पानी ज्यादा होने के चांस होते हैं। आपको एक कोकोनट में लगभग 3 से 4 गिलास पानी निकल सकता है।
3 कोने वाला नारियल खरीदने से बचे
अगर आपके खरीदे नारियल की तली में 3 कोने जैसी डिजाइन बनी है। तो खरीदने से बचें क्योंकि इस तरह के कोकोनट में पानी काफी कम होता है।
नारियल को थपथपाकर चेक करें
नारियल में पानी कम है या ज्यादा इसे चेक करना है तो हमेशा नारियल को हल्के हाथ से थपथपाएं। अगर नारियल अंदर से खोखला यानी कम पानी वाला होगा तो उसमे ढप ढप की आवाज आएगी। मतलब ये कि दो नारियल को हथेलियों से थपथपाकर चेक करें। अगर एक नारियल में ज्यादा आवाज कर रहा है तो इसका मतलब है कि उसमे पानी की मात्रा कम है।
नारियल पर लगे धब्बे
अगर आपके खरीदे हुए नारियल पर काले धब्बे दिखाई दे रहे तो इसे बेकार समझने की गलती ना करें क्योंकि इसी नारियल में आमतौर पर सबसे ज्यादा पानी होता है। लेकिन ध्यान रहे कि ये केवल काले रंग के धब्बे हो अगर धब्बों के साथ दरार हो तो बिल्कुल ना खरीदें। दरार होने पर इसके अंदर से खराब होने का डर होता है।
--
</description><guid>2585</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:53:16 pm</pubDate></item><item><title> सुबह पेट साफ नहीं हुआ तो ये नुस्खे आजमाकर देख लें, मिल सकता है आराम!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2584</link><description>आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। कई लोग सुबह उठने के बाद पेट साफ न होने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसे कब्ज भी कहा जाता है। ये समस्या छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
पेट सही तरीके से साफ न होने पर दिनभर सुस्ती, गैस, एसिडिटी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। ऐसे में दवाइयों पर निर्भर रहने की बजाय कुछ आसान घरेलू नुस्खों को अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।
सही खानपान और लाइफस्टाइल में थोड़े बदलाव से आप अपने पाचन तंत्र को मजबूत बना सकते हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे असरदार घरेलू उपाय बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप सुबह पेट साफ न होने की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
गुनगुना पानी पीना---
सुबह उठते ही खाली पेट गुनगुना पानी पीना सबसे आसान और असरदार उपायों में से एक है।
यह आंतों को सक्रिय करता है और पाचन तंत्र को जागने का संकेत देता है।
नियमित रूप से यह आदत अपनाने से कब्ज की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।
नींबू और शहद
गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीना एक नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक की तरह काम करता है।
नींबू पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है, जबकि शहद आंतों को लुब्रिकेट करता है।
इससे मल त्यागना आसान होता है और पेट हल्का महसूस होता है।
फाइबर युक्त आहार
फाइबर पाचन तंत्र के लिए बेहद जरूरी होता है।
फल (जैसे पपीता, सेब), हरी सब्जियां, ओट्स, दलिया और चिया सीड्स का नियमित सेवन करने से कब्ज की समस्या में काफी सुधार आता है।
रात में त्रिफला का सेवन
आयुर्वेद में त्रिफला को पाचन के लिए बहुत लाभकारी माना गया है।
यह तीन औषधियों (आंवला, हरड़, बहेड़ा) का मिश्रण होता है।
रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लेने पर यह आंतों को साफ करता है और सुबह पेट आसानी से साफ होता है।
--
</description><guid>2584</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:29:36 pm</pubDate></item><item><title> महिलाओं की कमर और पुरुषों के पेट पर ही क्यों जमा होती है चर्बी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2583</link><description>फिटनेस कोच ने समझाया
आपने अक्सर नोटिस किया होगा कि महिलाओं का मोटापा कमर से और पुरुषों का मोटापा पेट पर दिखता है। पर क्या इसके पीछे की साइंस को समझते हैं? नहीं, तो आइए फिटनेस कोच से जानते हैं।
शरीर एक बहुत ही स्मार्ट मशीन की तरह काम करता है, जो आपकी जरूरतों के लिए एनर्जी बचाकर रखता है। फैट बढ़ने की वजह सिर्फ ज्यादा खाना नहीं है, बल्कि यह हमारी खराब लाइफस्टाइल और शरीर के अंदर होने वाले हार्मोनल बदलावों का नतीजा है। हाई-कैलोरी फूड खाने पर अगर आप शारीरिक मेहनत कम करते हैं, तो बची हुई कैलोरी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैट सेल्स के रूप में जमा होने लगती है। आपने अक्सर देखा होगा की महिलाओं की कमर और पुरुषों के पेट पर खूब फैट जमा रहता है। क्या आप जानते हैं इसकी वजह? नहीं तो फिटनेस कोच से समझिए।
कमर पर क्यों जमा होता है महिलाओं का फैट
एस्ट्रोजन महिलाओं का फैट कमर और जांघों पर इकट्ठा होने का कारण है। ये कोई कोस्मेटिक नहीं है बल्कि इसके पीछे साइंस है। इसका काम लड़कियों को प्रेगनेंसी के दौरान एनर्जी देना है और प्रेगनेंसी के बाद भी ये ब्रेस्टफीडिंग में मदद करता है, क्योंकि ये फैट आसानी से कम नहीं होता। ये फैट स्टेबल होता है, इसलिए कुछ लड़कियां अक्सर वेट लॉस के दौरान ऊपर की बॉडी फैट को कम कर लेती हैं, लेकिन लोअर बॉडी फैट उतना ही रहता है। इस स्टेबल फैट को गायनॉइड फैट कहते हैं।
पेट पर क्यों जमा होता है पुरुषों का फैट
पुरुषों में चर्बी पेट पर जमा होने का कारण है टेस्टोस्टेरोन। जैसे ही ये हार्मोन नीचे जाता है वैसे ही बैली फैट बढ़ जाता है। ऐसा स्मोकिंग, अल्कोहल, स्ट्रेस और वर्कआउट ना करने की वजह से होता है। इस तरह के फैट से सबसे बड़ा खतरा फैटी लिवर और दिल की बीमारियों के होने का खतरा होता है। इस फैट को एंड्राइड फैट कहते हैं।
क्या कमर और बैली फैट को कम कर सकते हैं?
इस तरह के दोनों फैट को कम कर सकते हैं। लेकिन दोनों का जवाब सेम नहीं है और न ही इसका साइंस और न्यूट्रीशियन सेम है।
</description><guid>2583</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:27:29 pm</pubDate></item><item><title> बच्चों में प्रोटीन की कमी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2582</link><description>आज के समय में बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे एनर्जेटिक और हर तरह से हेल्दी बढ़ें। इसके लिए वे बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज और समय पर हेल्थ चेकअप पर ध्यान देते हैं लेकिन कई बार, बच्चों की डाइट में प्रोटीन को नजरअंदाज कर दिया जाता है। प्रोटीन न सिर्फ मांसपेशियों और हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम, हार्मोन संतुलन और शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत के लिए भी अहम भूमिका निभाता है।
बच्चों में प्रोटीन की कमी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
प्रोटीन केवल मसल्स बनाने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास, हार्मोन संतुलन और इम्यूनिटी के लिए भी जरूरी है। यह कोशिकाओं की मरम्मत करता है, नई कोशिकाओं का निर्माण करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अगर बच्चे की डाइट में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो उनका विकास धीमा हो सकता है।
शुरुआती दौर में प्रोटीन की कमी के लक्षण अक्सर हल्के और नजरअंदाज किए जाने वाले होते हैं। जैसे कि बच्चे जल्दी थक जाते हैं, खेलों में भाग लेने में अनिच्छा होती है, बालों और स्किन की क्वालिटी प्रभावित होती है और बार-बार जुकाम या बुखार जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि माता-पिता सतर्क रहें और इन संकेतों को समय रहते पहचानें, तो प्रोटीन की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है।
1. धीमा विकास
सबसे पहला संकेत यह होता है कि बच्चा अपनी उम्र के अनुसार लंबाई या वजन में पीछे रह जाता है। छोटे बच्चों में यह रुकावट धीरे-धीरे नजर आती है, लेकिन समय रहते पहचानने पर इसे सुधारा जा सकता है।
2. बार-बार कमजोरी और थकान
प्रोटीन की कमी से बच्चों में एनर्जी की कमी हो जाती है। वे जल्दी थक जाते हैं, खेलों या एक्टिविटी में भाग लेने में अनिच्छुक रहते हैं और छोटी-छोटी चीजों में भी थकान महसूस करते हैं।
3. बालों और स्किन की समस्याएं
प्रोटीन की कमी से बाल टूटने लगते हैं, झड़ते हैं और बालों में चमक कम हो जाती है। स्किन भी रूखी और संवेदनशील हो सकती है। यह संकेत अक्सर माता-पिता अनदेखा कर देते हैं।
4. इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा
प्रोटीन इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। इसके अभाव में बच्चे जल्दी बीमार पड़ते हैं, बार-बार जुकाम, बुखार या अन्य इंफेक्शन की समस्या सामने आती है।
5. मसल्स और हड्डियों में कमजोरी
प्रोटीन की कमी से मसल्स कमजोर होते हैं। इसके कारण बच्चे आसानी से चोट खा सकते हैं और हड्डियों की मजबूती भी प्रभावित होती है।
बच्चों में प्रोटीन की कमी का कारण
, बच्चों में प्रोटीन की कमी का मुख्य कारण असंतुलित डाइट है। कई बच्चे फ्रूट्स और जूस पसंद करते हैं, लेकिन दाल, अंडा, दूध, पनीर, मांस या सोया जैसी प्रोटीन-रिच चीजें कम खाते हैं। इसके अलावा शाकाहारी बच्चों में सही प्रोटीन सोर्स न मिलने पर यह कमी जल्दी दिखने लगती है।
- बच्चों को रोजाना प्रोटीन से भरपूर डाइट दें, जिसमें दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, मांस या सोया शामिल हों।
-नट्स, मूंगफली, चना या सोया स्नैक्स में शामिल कर सकते हैं। यह बच्चों को एनर्जी और प्रोटीन दोनों देता है।
-सिर्फ एक तरह का प्रोटीन देने की बजाय विभिन्न सोर्स से प्रोटीन दें। इससे बच्चा सभी जरूरी अमिनो एसिड्स प्राप्त करता है।
-अगर बच्चे की ग्रोथ धीमी लग रही है, बार-बार कमजोरी या बीमारियां हो रही हैं, तो तुरंत पीडियाट्रिशियन से सलाह लें।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बच्चों में प्रोटीन की कमी शुरुआती दौर में आसानी से पहचान की जा सकती है अगर माता-पिता सतर्क रहें। धीमा विकास, कमजोरी, बालों और स्किन की समस्याएं, बार-बार होने वाली बीमारियां, ये सभी संकेत होते हैं। बैलेंस्ड और प्रोटीन-रिच डाइट से इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। समय रहते सही कदम उठाने से बच्चों का विकास सामान्य और हेल्दी रहता है।
</description><guid>2582</guid><pubDate>26-Mar-2026 6:43:58 am</pubDate></item><item><title> सिर में गैस चढ़ने के लक्षण क्या हैं? जानें 3 नुस्खे, जिनसे तुरंत पा सकते हैं आराम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2581</link><description>सिर में दर्द अचानक से होने पर कई बार लोगों के मुंह से कहते सुना होगा कि 'सिर में गैस चढ़ गई है' यह आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाली लाइन है, वास्तव में यह वह स्थिति होती है, जिसमें पेट में गैस बनने पर इसका असर सिर तक महसूस होता है। यह परेशानी किसी भी व्यक्ति को तब होती है, जब हमारा पाचन तंत्र सही तरीके से काम नहीं कर पाता है। जब गैस बनने लगती है, तो न सिर्फ पेट में बल्कि सिर में दर्द, भारीपन, बेचैनी जैसा महसूस हो सकता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं सिर में गैस बनने के लक्षण क्या हैं और इसे कम करने के लिए क्या करें?
सिर में गैस चढ़ने के मुख्य लक्षण क्या हैं?
सिर में गैस चढ़ने पर न सिर्फ दर्द बल्कि अन्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे-
-सिर में दर्द के साथ भारीपन महसूस होना। यह दर्द कभी हल्का, तो कभी तेज हो सकता है, खासकर माथे या सिर के ऊपरी हिस्से में।
-काफी ज्यादा गैस बनने पर शरीर में असहजता बढ़ती है, जिससे चक्कर या हल्की कमजोरी महसूस हो सकती है।
-कुछ लोगों को पेट में गैस होने पर मतली, उल्टी की इच्छा या जी मिचलाना जैसे लक्षण नजर आते हैं।
-बिना बात के बार-बार डकार आना और पेट में सूजन होना भी गैस बनने के लक्षण हो सकते हैं।
-कुछ लोगों के सिर के साथ-साथ पेट में भी भारीपन महसूस हो सकता है।
-सिर भारी होने के कारण व्यक्ति को काम पर ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है।
सिर में गैस चढ़ने पर क्या करें?
-अजवाइन और काला नमक का पिएं पानी
-गैस की परेशानी होने पर अक्सर अजवाइन और काला नमक का पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसका सेवन करने के लिए आधा चम्मच अजवाइन लें, इसे चुटकीभर काला नमक के साथ मिलाएं और गुनगुने पानी के साथ लें। इस मिश्रण के सेवन से पाचन में सुधार आता है और गैस को जल्दी बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।
गर्म पानी या अदरक की चाय
गर्म चीजें पेट को आराम देती हैं और गैस को कम करती हैं। अगर आपके पेट में गैस की परेशानी ज्यादा रहती है, तो एक कप गुनगुना पानी धीरे-धीरे पिएं या अदरक की चाय बनाकर पिएं। इससे आपको काफी लाभ हो सकता है। दरअसल, अदरक पाचन को तेज करता है और सिर के भारीपन को भी कम करता है।
हींग का पानी गैस को निकाले बाहर
गैस को कम करने के लिए हींग का पानी भी फायदेमंद हो सकता है। इसका सेवन करने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकीभर हींग मिलाकर पिएं। यह गैस को तुरंत कम करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है।
-पेट में गैस बनने पर सिर में गैस चढ़ सकता है।
-गैस की परेशानी होने पर अजवाइन का सेवन करें।
-हींग के सेवन से पेट में गैस बनने की परेशानी कम हो सकती है।</description><guid>2581</guid><pubDate>21-Mar-2026 2:05:21 pm</pubDate></item><item><title> गर्मियों का सुपरफूड है खीरा...सलाद बनाकर खाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2580</link><description>गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और अब तेज धूप से लोग बेहाल भी होने लगे हैं। तेज धूप की वजह से डिहाईड्रेशन की समस्या होना लाजमी है। इससे बचने के लिए पानी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है और गर्मियों के मुताबिक चीजों को डायट में शामिल करना भी उतना ही जरूरी है। गर्मी के मौसम के लिए खीरा सबसे बेस्ट है। इसमें पानी की अच्छी मात्रा होती है। खीरे से बनी सलाद में कैलोरीज की मात्रा कम होती है और पानी की मात्रा ज्यादा इसलिए इसे खाकर तुरंत पेट भर सकता है। इसलिए हेल्दी स्नैकिंग के लिए भी इसे खा सकते हैं। यहां हम 5 तरह से खीरे की सलाद बनाने का तरीका बता रहे हैं जानिए।
1) मूंगफली खीरे की सलाद
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए स्लाइस किए खीरे, पीनट बटर, सोया सॉस, शहद, तिल का तेल,दरदरी पिसी मूंगफली। सलाद बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में पीनट बटर, सोया सॉस, शहद, तिल के तेल को अच्छे से मिलाएं। फिर एक बड़ी कटोरी में कटे हुए खीरे डालें इसमें तैयार की सॉस डालें और दरदरी पिसी मूंगफली से सजाएं और सर्व करें।
2) नींबू वाले खीरे की सलाद
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए खीरा, जैतून का तेल, काली मिर्च, पुदीने की पत्तियां। सलाद बनाने के लिए सभी चीजों को मिक्स करें और फिर सर्व करें।
3) स्पाइसी खीरे की सलाद
इसे बनाने के लिए खीरे के टुकड़े,नींबू का रस, मिर्ची पाउडर, नमक, शहद और ऑलिव ऑयल लें। सभी को अच्छे से मिक्स करें और फिर सर्व करें।
4)एवोकाडो और खीरे की सलाद
एवोकाडो सेहत के लिए काफी अच्छा होता है। इसे खीरे के साथ मिलाकर सलाद बना सकते हैं। इसे बनाने के लिए चाहिए खीरे के टुकड़े, एवोकाडो, नमक, काली मिर्च, धनिया फ्रेश, तिल के बीज और नींबू का रस। एवोकाडो को मैश करके खीरे के टुकड़ों के साथ मिलाएं और फिर नमक, काली मिर्च, धनिया फ्रेश, तिल के बीज और नींबू का रस डालकर सर्व करें।
5) ग्रीक योगर्ट और खीरा
इस सलाद को बनाने के लिए कटे हुए खीरे, ग्रीक योगर्ट, नींबू का रस, नमक, काली मिर्च, ऑलिव ऑयल चाहिए। इसे तैयार करने के लिए सलाद की प्लेट में खीरा और योगर्ट को मिक्स करें। फिर ऑलिव ऑयल के साथ नमक और काली मिर्ची डालें।</description><guid>2580</guid><pubDate>13-Mar-2026 1:04:26 pm</pubDate></item><item><title> हेल्थ प्रॉब्लम्स जिन्हें नजरअंदाज करना महिलाओं को पड़ सकता है भारी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2579</link><description>अकसर महिलाएं कुछ हेल्थ प्रॉब्लम्स को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं। ऐसी महिलाएं डॉक्टर के पास भी तब जाती हैं, जब समस्या हद से ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसी ही समस्याओं का सबसे कॉमन उदाहरण है लगातार महसूस होने वाली थकान है। महिलाएं अक्सर इसे काम का बोझ या व्यस्त दिनचर्या समझकर टाल देती हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली थकान एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, विटामिन की कमी या लंबे समय के तनाव का संकेत भी हो सकती है। रोजवॉक बाय रेनबो हॉस्पिटल्स की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. स्वाति सिन्हा से जानते हैं सेहत से जुड़ी ऐसी 5 समस्याओं के बारे में जिन्हें महिलाएं अकसर रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा समझकर नजरअंदाज करती रहती हैं।
बहुत दर्द या ज्यादा ब्लीडिंग वाले पीरियड्स
कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द या अधिक ब्लीडिंग होना सामान्य है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह हमेशा सामान्य नहीं होता। डॉ. स्वाति सिन्हा कहती हैं कि बहुत ज्यादा दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग या पीरियड्स का अनियमित होना कई बार एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है।
बार-बार यूरिन इन्फेक्शन होना
कुछ महिलाएं बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन या पेशाब के दौरान महसूस होने वाली जलन को हल्की समस्या समझकर खुद ही दवा ले लेती हैं। लेकिन बार-बार होने वाले यूटीआई कई बार किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी होता है।
पाचन से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करना
लगातार पेट फूलना, कब्ज या पेट में असहजता जैसी समस्याएं भी अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो यह सेहत से जुड़ी कई समस्याओं जैसे हार्मोनल बदलाव, गट हेल्थ से जुड़ी समस्या और अन्य मेडिकल कंडीशन का कारण हो सकती है। इसलिए पाचन से जुड़ी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य के संकेतों को अनदेखा करना
चिंता, मूड स्विंग्स, नींद की समस्या या भावनात्मक थकान को अक्सर रोजमर्रा के तनाव का हिस्सा मान लिया जाता है। लेकिन कई मामलों में ये लक्षण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं या हार्मोनल बदलाव का संकेत हो सकते हैं। अगर इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
असामान्य ब्लीडिंग और अन्य निजी समस्याएं
सीके बिड़ला हॉस्पिटल (दिल्ली) की फिजिशियन डॉक्टर मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जिनके बारे में महिलाएं झिझक के कारण डॉक्टर से बात नहीं करतीं। जिसमें पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग, सेक्स के बाद ब्लीडिंग और सेक्स के दौरान दर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं। ये लक्षण कई बार सर्विक्स या यूटरस से जुड़ी समस्या, एंडोमेट्रियोसिस या किसी इन्फेक्शन का संकेत हो सकते हैं। इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
समय पर पहचान और इलाज क्यों जरूरी है
डॉक्टरों की मानें तो शरीर बार-बार संकेत देता है कि कुछ ठीक नहीं है। अगर इन संकेतों को सामान्य मानकर नजरअंदाज किया जाता रहे, तो बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि अगर कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे या असामान्य लगे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अपने शरीर के संकेतों को समझना और नियमित हेल्थ चेक-अप करवाना लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी है।
--</description><guid>2579</guid><pubDate>13-Mar-2026 12:59:03 pm</pubDate></item><item><title>क्या लूज मोशन में चाय-कॉफी पीना सेफ होता है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2578</link><description> लूज मोशन या डायरिया वायरल/बैक्टीरियल संक्रमण, दूषित खाना या पानी, फूड पॉइजनिंग की वजह से हो सकता है। इसके अलावा, जिनकी पाचन क्षमता कमजोर होती है, उन्हें भी कुछ-कुछ समय के अंतराल में लूज मोशन की दिक्कत हो जाती है। बहरहाल, लूज मोशन होने की वजह से शरीर से काफी मात्रा में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए एक्सपर्ट इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने की सलाह देते हैं।
दस्त होने पर चाय-कॉफी पीना सही होता है?
 लूज मोशन में चाय या कॉफी पीना बिल्कुल सही नहीं है। इनमें कैफीन होता है। कैफीन एक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जो शरीर से तरल पदार्थों का नुकसान बढ़ाता है और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का कारण बनता है। यही नहीं, दस्त होने पर चाय पीने से आंतों पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिससे डायरिया जैसी कंडीशन और बिगड़ सकती है। लूज मोशन होने चाय या कॉफी पीने के बजाय बेहतर है कि आप पानी, नारियल पानी या बिना कैफीन वाली हर्बल चाय का सेवन करें।
लूज मोशन में चाय या कॉफी पीने के नुकसान
डिहाइड्रेशन का रिस्कः दस्त होने पर शरीर से पहले की काफी मात्रा में पानी निकल जाता है। ऐसे में अगर आप चाय या कॉफी भी पीते हैं, तो इसकी वजह से बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है। दस्त में बॉडी का डिहाइड्रेट होना सही संकेत नहीं है। इससे चक्कर आना, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
डाइजेस्टिव ट्रैक्ट पर असरः दस्त यानी डायरिया होने पर चाय या कॉफी इसलिए भी नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से डाइजेस्टिव ट्रैक्ट पर बुरा असर पड़ता है, जो कि पहले से ही कमजोर है। ऐसे में पेट दर्द, पेट में अकड़न जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
कमजोर पाचन क्षमताः दस्त होने के बावजूद बार-बार चाय पीना सही नहीं है। इससे पाचन क्षमता पहले की तुलना में और भी कमजोर हो जाती है। इससे मरीज की रिकवरी भी धीमी हो जाती है, जो कि सही नहीं है।
निष्कर्ष
लूज मोशन होने पर किसी को भी चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर किसी की आदत है नियमित चाय या कॉफी पीने की तो ऐसी स्थिति में बेहतर होगा कि आप हर्बल टी पिएं। इसके अलावा, दस्त लगने पर दिन भर में काफी ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। अदरक की चाय या सूप भी इस अवस्था में फायदेमंद होता है।</description><guid>2578</guid><pubDate>10-Mar-2026 11:00:33 pm</pubDate></item><item><title>  हंग कर्ड या सामान्य दही: पाचन के लिए क्या है ज्यादा बेहतर?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2577</link><description>भारतीय भोजन में दाल-चावल हो, पराठा हो या फिर खिचड़ी, दही के साथ खाने का स्वाद ही अलग हो जाता है। यही वजह है कि लगभग हर घर में दही रोजाना अलग-अलग तरीकों से खाया जाता है। दही न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि इसे पाचन के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं लेकिन पिछले कुछ समय में हेल्दी खाने का ट्रेंड बढ़ने के साथ हंग कर्ड का सेवन भी बढ़ा है। सलाद, डिप्स, सैंडविच और हेल्दी स्नैक्स में इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। कई लोग इसे सामान्य दही से ज्यादा हेल्दी मानते हैं, क्योंकि यह गाढ़ा, क्रीमी और प्रोटीन से भरपूर माना जाता है।
दोनों ही चीजें दूध से बनती हैं और पोषण से भरपूर होती हैं। हालांकि उनकी बनावट, पानी की मात्रा और पोषक तत्वों में थोड़ा अंतर होता है, जिससे पाचन और शरीर पर उनका प्रभाव भी थोड़ा अलग हो सकता है। पाचन के लिहाज से दोनों ही विकल्प अच्छे हो सकते हैं, लेकिन यह व्यक्ति की पाचन क्षमता और जरूरत पर निर्भर करता है। सामान्य दही हल्का होता है और इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को भारी चीजें पचाने में परेशानी होती है या जिनका पाचन कमजोर है, उनके लिए सामान्य दही ज्यादा अच्छा विकल्प हो सकता है।
वहीं हंग कर्ड गाढ़ा होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह थोड़ा भारी महसूस हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को हाई प्रोटीन डाइट चाहिए, उनके लिए हंग कर्ड एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
हंग कर्ड सामान्य दही से ही बनाया जाता है। इसे तैयार करने के लिए दही को एक सूती कपड़े में बांधकर कुछ घंटों के लिए टांग दिया जाता है, जिससे उसका पानी यानी व्हे (Whey) निकल जाता है। इस प्रक्रिया के बाद हंग कर्ड में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा और पानी की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए यह गाढ़ा और ज्यादा क्रीमी महसूस होता है।
 सामान्य दही पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और पेट की कई समस्याओं जैसे गैस, एसिडिटी और कब्ज में राहतदे सकता है। इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह शरीर को हाइड्रेशन भी देता है और गर्मियों में ठंडक पहुंचाने में मदद करता है। दही को हमेशा ताजा और सही मात्रा में ही खाना चाहिए। बहुत ज्यादा खट्टा दही पेट के लिए सही नहीं माना जाता। दही को दिन के समय खाना ज्यादा अच्छा माना जाता है क्योंकि रात में कुछ लोगों को इसे पचाने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा दही में ज्यादा नमक या चीनी मिलाने से बचना चाहिए। अगर दही को फल, सलाद या हेल्दी मसालों के साथ लिया जाए तो यह और भी पौष्टिक बन सकता है।
हंग कर्ड और सामान्य दही दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन पाचन के लिहाज से सामान्य दही हल्का और जल्दी पचने वाला माना जाता है। वहीं हंग कर्ड प्रोटीन से भरपूर और गाढ़ा होता है, जो खास जरूरतों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। इसलिए यह कहना सही होगा कि दोनों में से कौन बेहतर है, यह व्यक्ति की डाइट, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य जरूरतों पर निर्भर करता है।



</description><guid>2577</guid><pubDate>08-Mar-2026 5:44:46 pm</pubDate></item><item><title>  स्किन की इन 5 समस्याओं को दूर करता है कुंकुमादि तेल, इस तरह से करें इस्तेमाल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2576</link><description>जब किसी के चेहरे पर दाग-धब्बे होते हैं या झाइयां पड़ती हैं तो आयुर्वेद में कुंकुमादि तेल लगाने की सलाह दी जाती है। इस तेल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। कुंकुमादि तेल मुंहासों और फुंसियों को कम करने में मदद करता है। यह तेल त्वचा पर सीबम के उत्पादन को नियंत्रित करता है और रोमछिद्रों को बंद होने से रोकने में मदद करता है।
दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाए
अगर आपके चेहरे पर दाग-धब्बे हैं, तो आप कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मुलेठी और मंजिष्ठा के गुण होते हैं, जो मेलानिन के उत्पादन को संतुलित करते हैं। यह सनटैनिंग, झाइयों और काले धब्बों को कम करने में असरदार होता है। चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने के लिए आप कुछ दिनों तक कुंकुमादि तेल का यूज कर सकते हैं।
ड्राई स्किन से छुटकारा
रूखी और बेजान त्वचा से छुटकारा पाने के लिए आप कुंकुमादि तेल का यूज कर सकते हैं। इस तेल को लगाने से त्वचा को पोषण मिलता है और नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इस तेल को लगाने से त्वचा की ड्राईनेस दूर होती है। यह चेहरे की बनावट को बेहतर करने में मदद करता है और रंगत को सुधारता है।
मुंहासों से निजात दिलाए
अगर आपके चेहरे पर कील-मुंहासे या एक्ने हैं तो कुंकुमादि तेल लगा सकते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मुंहासों को मिटाने में असरदार होते हैं। इस तेल को लगाने से मुंहासे पैदा होने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और इससे मुंहासों को कम करने में मदद मिलती है। इस तेल को लगाने से मुंहासों के दाग भी धीरे-धीरे रिमूव होने लगते हैं।
झुर्रियों को मिटाने में असरदार
चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए भी आप कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। इस तेल को लगाने से एंटी-एजिंग के लक्षण कम होते हैं। इस तेल को लगाने से फाइन लाइंस की समस्या दूर होती है और झुर्रियां कम होती हैं। यह त्वचा को टाइट बनाता है और जवां बनाए रखने में मदद करता है।
बेजान त्वचा से छुटकारा
कुंकुमादि तेल बेजान त्वचा से भी छुटकारा दिलाता है। इस तेल को लगाने से त्वचा पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और बेजान त्वचा ठीक होती है। इस तेल को लगाने से त्वचा का निखार वापस आता है। इस तेल को लगाने से त्वचा का निखार कई गुना बढ़ जाता है।</description><guid>2576</guid><pubDate>07-Mar-2026 4:54:01 pm</pubDate></item><item><title>गर्मियों में छाछ पीने का सही समय क्या है और इससे क्या फायदे मिलेंगे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2575</link><description>गर्मियों की तपिश जैसे ही शरीर को छूकर निकलने लगती है, हमारा ठंडे पेय पदार्थों के साथ प्यार उतना ही बढ़ने लगता है। गर्मियां जितनी ज्यादा बढ़ती है शरीर को अपना तापमान कंट्रोल करने के लिए उतनी ही ज्यादा हाइड्रेशन की जरूरत पड़ती है और ठंड से संपर्क अच्छा लगने लगता है। ऐसे में आप क्या पीते हैं? नींबू पानी, नारियल पानी? हालांकि, इस समय छाछ एक ऐसा पारंपरिक पेय बन चुका है, जो न केवल शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी बेहतर बना सकता है। आपको बता दें कि दही से बनने वाली छाछ में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो गर्मी के मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि जरूरी है कि आप इसका सेवन सही समय पर करें वरना आपको परेशानी हो सकती है। तो आइए हम आपको बताते हैं कि क्या है छाछ का सेवन करने का सबसे सही समय और इसके सेवन से आपको क्या लाभ मिल सकते हैं।
हमारे बुजुर्ग बताते हैं आए हैं कि छाछ पीने का सबसे उत्तम समय दोपहर का होता है और यह आयुर्वेद भी मानता है। दोपहर के समय में खासकर लंच के बाद छाछ का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इस समय जब भोजन के साथ छाछ पीते हैं तो खाने को आसानी से पचने में मदद मिलती है और पेट में भारीपन व गैस जैसी समस्याएं कम हो जाती है। वहीं गर्मियों में मौसम में जब आप दोपहर के समय इसका सेवन करते हैं तो शरीर को ठंडक भी महसूस होती है।
छाछ एक प्रोबायोटिक पेय पदार्थ है, जो उसे आपकी आंतों के लिए सबसे अच्छे पेय पदार्थों में से एक बनाता है। छाछ में पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया न सिर्फ पाचन क्रिया को अच्छा बनाते हैं, बल्कि आंतों को हेल्दी रखने में भी मदद करते हैं। ऐसे में जब आप इसका सेवन सही समय पर करते हैं तो गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं आपसे दूर रहने लगती हैं। वहीं जब आप नियमित रूप से छाछ का सेवन करते हैं तो पेट हल्का रहता है और पाचन प्रक्रिया बेहतर ढंग से हो पाती है।
 मेडिकल साइंस कहता है कि अगर शरीर में तरल की कमी आनी डिहाइड्रेशन हो जाता है, तो उससे पसीना आना कम हो जाता है और शरीर गर्मी का शिकार हो जाता है। अब ऐसे में छाछ भी शरीर को हाइड्रेट रखने का एक अच्छा पेय पदार्थ है और खासतौर पर इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स भी पाए जाते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर हाइड्रेट रहता है। साथ ही इसे पीने से शरीर की थकान और कमजोरी भी दूर हो जाती है।
वजन कंट्रोल में भी मददगार
अगर आप वजन कम करने का प्लान कर रहे हैं, तो कोल्ड ड्रिंक्स जैसे पेय पदार्थ पीने से कहीं बेहतर विकल्प छाछ है। क्योंकि छाछ में उनकी तुलना में कैलोरी काफी कम होती है और वहीं यह पाचन को अच्छा बनाने में भी मदद करता है जिससे काफी फायदा मिलता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती, आप अनहेल्दी स्नैकिंग से दूर रहते हैं और तय समय पर पौष्टिक भोजन करने की आदत बन जाती है।</description><guid>2575</guid><pubDate>06-Mar-2026 4:53:34 pm</pubDate></item><item><title>हर डायबिटीज रोगी को खाने चाहिए ये 2 फल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2574</link><description>हेल्दी रहने के लिए फलों का सेवन काफी अहम बताया जाता है। हर फल की अपनी खासियत होती है और इनमें अलग-अलग तरह के पोषक तत्व भी होते हैं। ऐसे ही दो फल और हैं जो खासतौर से डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। डायबिटीज रिवर्सल एक्सपर्ट डॉ प्रमोद त्रिपाठी बताते हैं कि ये दो फल इन्सुलिन को सपोर्ट भी करते हैं और थोड़ा-थोड़ा डायबिटीज की दवाइयों की तरह भी काम करते हैं। डॉक्टर हर शुगर के मरीज को ये दो फल खाने की सलाह देते हैं। उन्होंने इनके फायदे और कई जरूरी बातों के बारे में भी बताया है। तो चलिए जानते हैं वो दो फल आखिर कौन से हैं।
डायबिटीज में दवा की तरह काम करती है मौसंबी
डॉ प्रमोद त्रिपाठी कहते हैं कि पहला फल मौसंबी है, जो हर शुगर के पेशेंट को जरूर खाना चाहिए। इसका GI महज 41-45 होता है और ये फाइबर और फ्लेवनॉयड्स में रिच होती है। दरअसल मौसंबी 'अकार्बोज' नाम की डायबिटीज की दवा की तरह काम करती है। ये खाने के बाद शुगर की स्पाइक को कम करती है क्योंकि आपकी आंतों में कार्बोहाइड्रेट का एब्जॉरपशन धीमा कर देता है।
डायबिटीज रोगी खूब खाएं संतरा
दूसरा फल है संतरा जो डायबिटीज के मरीजों को जरूर खाना चाहिए। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 50-52 के बीच होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, फाइबर और हेस्पेरिडिन नामक प्लांट बेस्ड फ्लेवोनॉयड भी मौजूद होता है। डॉ प्रमोद कहते हैं कि संतरे का असर मेटफॉर्मिन नामक दवाई की तरह होता है। ये पूरे शरीर की ब्लड वेसल्स में एंटी इन्फ्लेमेटरी इफेक्ट ले कर आता है। इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है और लिवर से शुगर के रिलीज को स्लो कर देता है।
संतरे और मौसंबी का जूस फायदेमंद है या फल?
अब एक और अहम सवाल है कि क्या संतरे और मौसंबी को साबुत खाना फायदेमंद है या इनका जूस बनाकर भी पी सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो हमेशा साबुत फल खाना ही बेहतर होता है। जब आप संतरे या मौसंबी का जूस बनाकर पीते हैं, तो सारा फाइबर निकल जाता है। ये फाइबर ही होता है जो शुगर के अवशोषण को कम करता है। जूस में सिर्फ शुगर बचती है, जिससे शुगर लेवल स्पाइक होता है। वहीं जब आप साबुत फल खाते हैं तो फाइबर, विटामिन और बाकी पोषक तत्व शरीर को संतुलित रूप में मिलते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल भी बैलेंस बना रहता है।</description><guid>2574</guid><pubDate>05-Mar-2026 3:45:00 pm</pubDate></item><item><title> क्या इंस्टेंट ओट्स वाकई हेल्दी ब्रेकफास्ट है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2573</link><description>ओट्स एक तरह का होल ग्रेन फूड है। इसमें फाइबर और प्रोटीन भी मौजूद होता है। ओट्स मॉर्निंग एनर्जी और वेट लॉस के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। कई लोग रोल्ड ओट्स को खाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग इंस्टेंट ओट्स को हेल्दी ब्रेकफास्ट समझकर खा लेते हैं, लेकिन क्या इंस्टेंट ओट्स वाकई एक हेल्दी विकल्प है? इंस्टेंट ओट्स जल्दी तैयार हो जाते हैं इसलिए इसे ज्यादातर लोग अपने नाश्ते में शामिल करते हैं पर इसके सेहतमंद होने पर सवाल खड़ा होता है। एक्सपर्ट और रिसर्च की मदद से इस सवाल का जवाब आगे जानते हैं।
इंस्टेंट ओट्स खाने से पेट जल्दी भरता है-
एक स्टडी में 48 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। हर व्यक्ति को अलग-अलग दिनों पर अलग-अलग नाश्ता दिया गया। जिन लोगों को नाश्ते में इंस्टेंट ओट्स दिए गए, उन्हें पेट जल्दी भरा हुआ महसूस हुआ। इस स्टडी में इंस्टेंट ओट्स खाने का कोई नुकसान नहीं देखा गया है।
इंस्टेंट ओट्स ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं इंस्टेंट ओट्स भी रोल्ड ओट्स की तरह हेल्दी होते हैं। इंस्टेंट ओट्स और रोल्ड ओट्स की कैलोरी में ज्यादा फर्क नहीं होता। 40 ग्राम इंस्टेंट ओट्स में करीब 200 कैलोरी होती हैं वहीं रोल्ड ओट्स में करीब 150 कैलोरी होती हैं। इंस्टेंट ओट्स में फैट और फाइबर तीन ग्राम होता है और रोल्ड ओट्स में फैट और फाइबर पांच से छह ग्राम होता है। इंस्टेंट ओट्स ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं और इन्हें खाने से शुगर लेवल बढ़ सकता है वहीं दूसरी ओर रोल्ड ओट्स कम प्रोसेस्ड होते हैं, इनमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, ये धीरे पचते हैं और इसे खाकर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है।
इंस्टेंट ओट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 80 होता है और ग्लाइसेमिक लोड करीब 17 होता है। वहीं रोल्ड ओट्स की बात करें, तो जीआई 55 होता है और जीएल करीब 11 होता है। यानी डायबिटिक मरीजों के लिए रोल्ड ओट्स ज्यादा बेहतर विकल्प है क्योंकि इसका जीआई, इंस्टेंट ओट्स के मुकाबले कम होता है।
इंस्टेंट और रोल्ड ओट्स दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं, आप दोनों में से किसी का भी सेवन कर सकते हैं। National Library Of Medicine की स्टडी कहती है कि इंस्टेंट ओट्स खाने से सेहत को कोई नुकसान नहीं होता वहीं इंस्टेंट ओट्स, रोल्ड ओट्स के मुकाबले ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं और इनका जीआई भी रोल्ड ओट्स के मुकाबले ज्यादा होता है, इसलिए डायबिटिक मरीजों के लिए रोल्ड ओट्स बेहतर हैं और स्वस्थ लोगों के लिए भी रोल्ड ओट्स बेहतर विकल्प हैं, हालांकि इंस्टेंट ओट्स खाकर भी सेहत पर कोई बुरा असर देखा नहीं जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं।

</description><guid>2573</guid><pubDate>04-Mar-2026 5:15:06 pm</pubDate></item><item><title>रात में कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए ...!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2572</link><description>रात का समय शरीर के आराम और खुद को रिपेयर करने का होता है. इस दौरान पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है, इसलिए रात में क्या और कितना खाया जा रहा है, इसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. अगर रात का खानपान सही न हो, तो शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता. इसके संकेत कई रूपों में दिखते हैं, जैसे रात में पेट भारी लगना, गैस, एसिडिटी, सीने में जलन, नींद बार-बार टूटना या सुबह उठते ही थकान महसूस होना.
कुछ लोगों को रात में बेचैनी, पसीना आना या सुबह सिर भारी लगने की समस्या भी होती है. वजन बढ़ना, कब्ज और दिनभर सुस्ती रहना भी इस बात का इशारा है कि रात के खाने पर ध्यान देने की जरूरत है. ये लक्षण बताते हैं कि रात में भोजन का समय, मात्रा और आदतें सही नहीं हैं. इसलिए अच्छी नींद और बेहतर सेहत के लिए रात के खानपान को संतुलित रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि रात के समय कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए.
रात में कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए?
रात में ऐसे फूड्स नहीं खाने चाहिए जो पचने में भारी हों या पेट पर ज़्यादा दबाव डालें. तले-भुने और बहुत मसालेदार फूड्स पाचन को बिगाड़ सकते हैं और एसिडिटी की समस्या बढ़ा देते हैं. बहुत मीठा खाने से ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है और नींद प्रभावित होती है. ज्यादा नमक वाले फूड्स शरीर में पानी रोकते हैं, जिससे सूजन और बेचैनी हो सकती है.
प्रोसेस्ड और जंक फूड्स में मौजूद फैट पाचन तंत्र को सुस्त कर देता है. रात में चाय, कॉफी या कैफीन वाले पेय लेने से दिमाग एक्टिव रहता है और नींद नहीं आती. बहुत ज्यादा ठंडे या भारी डेयरी प्रोडक्ट्स भी पेट में गड़बड़ी कर सकते हैं. इसलिए रात में ऐसे फूड्स से दूरी रखना सेहत के लिए बेहतर होता है.
रात में कौन से फूड्स खाना सही है?
रात के समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है. उबली या हल्की सब्जियां, दाल, सादी रोटी या थोड़ा चावल पाचन के लिए सही होते हैं. खिचड़ी, सूप या दलिया जैसे फूड्स पेट पर बोझ नहीं डालते.
सीमित मात्रा में दही या छाछ लेने से पाचन को आराम मिलता है. ये फूड्स शरीर को ज़रूरी पोषण देते हैं और नींद को भी बेहतर बनाते हैं. हल्का भोजन करने से पेट साफ रहता है और सुबह शरीर हल्का महसूस करता है. इसलिए रात में सादा और संतुलित खाना फायदेमंद होता है.
रात को अच्छी सेहत के लिए ये भी जरूरी
रात का खाना सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले खा लेना चाहिए. खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और हल्की वॉक करें. टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना न खाएं, ताकि पेट भरने का सही संकेत मिले. बहुत अधिक पानी या ठंडा पानी रात में न पिएं. सोने और उठने का समय तय रखें. तनाव से दूर रहना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है. सही खानपान के साथ सही आदतें अपनाने से रात में शरीर को पूरा आराम मिलता है और सेहत बनी रहती है. </description><guid>2572</guid><pubDate>03-Mar-2026 8:04:45 pm</pubDate></item><item><title>  रात में स्क्रीन की ब्लू लाइट आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2571</link><description> आज के समय में ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी में लगे रहते हैं, जिसके बाद लोगों को सोने में परेशानी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने से अक्सर लोगों को सोने से पहले मोबाइल और टीवी जैसी स्क्रीन वाली चीजों का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाती है, लेकिन क्या वाकई रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?
रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस नींद को कैसे प्रभावित करती है?
 रात में तेज ब्राइटनेस वाली स्क्रीन का इस्तेमाल करने से व्यक्ति की नींद में काफी परेशानी हो सकती है। मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट निकलती है, जो सीधे शरीर के नेचुरल स्लीप-वेक साइकिल पर असर डालती है, जिसे सर्कडियन रिदम भी कहा जाता है। ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को कम करती है। बता दें, मेलाटोनिन हार्मोन आपको नींद दिलाने के लिए जिम्मेदार होता है। जब मेलाटोनिन का लेवल कम होता है, तो आपका ब्रेन ज्यादा देर तक अलर्ट रहता है, जिससे सोना मुश्किल हो जाता है।
 नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, रात को कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) नींद और बायोलॉजिकल रिदम को गंभीर रूप से बाधित करती है। ये ब्लू लाइट व्यक्ति के शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को कम करती है, शरीर के तापमान को बढ़ाती है और सुबह की एकाग्रता को प्रभावित करती है। लाइट की तीव्रता के मुकाबले उसकी वेवलेंथ स्वास्थ्य पर अधिक बुरा प्रभाव डालता है।
नींद की क्वालिटी होती है प्रभावित
, रात में तेज रोशनी वाली स्क्रीन आपके दिमाग को यह भी सिग्नल देती है कि अभी भी दिन है। इससे नींद आने में देर होती है और नींद की क्वालिटी कम हो जाती है। अगर आप सो भी जाते हैं, तो सोने से पहले तेज रोशनी में रहने से नींद हल्की हो सकती है और आप बार-बार जाग सकते हैं, साथ ही, ऐसा लंबे समय तक करने से समय के साथ, खराब नींद मूड, कॉन्संट्रेशन, इम्यूनिटी और पूरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती है।
अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या करें?
नींद की गुणवत्ता में सुधार करने और अच्छी नींद को बढ़ावा देने के लिए कुछ हेल्दी आदतों को अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
-शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें।
-नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें।
-सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें और इसके इस्तेमाल से बचें।
-अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं।
-सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल न करने और शांति का माहौल बनाकर सोने से आपके शरीर को आरामदायक नींद के लिए नेचुरली तैयार होने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
रात को स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को प्रभावित करती है। रात को सोने से पहले ब्लू लाइट का ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करने से नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है और ऐसा लंबे समय तक करने से काम पर फोकस करने में परेशानी होने, नींद के प्रभावित होने, मूड पर असर पड़ने, इम्यूनिटी पर असर पड़ने और स्वास्थ्य पर बुरा असर होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में नींद से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें। नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें, सोने से 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करें, अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं। इसके अलावा, नींद से जुड़ी अधिक समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</description><guid>2571</guid><pubDate>03-Mar-2026 5:38:26 pm</pubDate></item><item><title>  सुपरफूड है सहजन (मुनगा) की फली का सूप  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2570</link><description>औषधीय गुणों से भरपूर सहजन (मुनगा) का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। सहजन की फली में अच्छी मात्रा में बहुत पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे में इसके सूप का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। सहजन के सूप को सुपरफूड माना जाता है । आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर सहजन यानी मोरिंगा के सूप में भरपूर मात्रा में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीबैक्टीरियल के गुण, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जिससे पाचन में सुधार करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, वजन कम करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।
हार्ट के लिए फायदेमंद
सहजन के सूप में अच्छी मात्रा में पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।
ब्लड शुगर को नियंत्रित करे
सहजन यानी मोरिंगा के सूप में एंटी-डायबिटीक के गुण, साथ ही, इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। ऐसे में इसके सूप का सेवन करने से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
पाचन में सुधार करे
सहजन के सूप में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। इसका सेवन करने से गट के बैक्टीरिया को बेहतर करने, पाचन में सुधार करने, बाउल मूवमेंट में सुधार करने, सूजन को कम करने, पाचन प्रक्रिया में सुधार करने और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।
हड्डियों के लिए फायदेमंद
सहजन के सूप में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं। इससे हड्डियों को मजबूती देने, शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने, शरीर की थकान को दूर करने में मदद मिलती है।
इम्यूनिटी बूस्ट करने में सहायक
सहजन (मुनगा) के सूप में अच्छी मात्रा में विटामिन सी, एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन से बचाव करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, थकान को दूर करने, कमजोरी को दूर करने, शरीर को हाइड्रेट करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।

सहजन की फली का सूप बनाने की विधि
सामग्री
सहजन
 छोटा चम्मच मक्खन
1 तेज पत्ता
1 हरी मिर्च
5-6 लहसुन की कलियाँ
 टमाटर
कुछ धनिया के डंठल
1 बड़ा चम्मच पीली मूंग दाल
सूप बनाने के लिए 1 कप पानी।
सूप के लिए 1.5 कप पानी
आवश्यकतानुसार नमक
 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
 छोटा चम्मच सौंफ | सौंफ के बीज
स्वादानुसार काली मिर्च पाउडर
निर्देश
प्रेशर कुकर/पैन में मक्खन डालें।
अब इसमें एक तेज पत्ता, हरी मिर्च, लहसुन की कलियाँ, आधा टमाटर, कुछ धनिया के डंठल और 1 बड़ा चम्मच मूंग दाल मिला दें।
एक मिनट तक भूनें और फिर कटी हुई सहजन की फली डालें।
एक कप पानी, थोड़ा नमक, हल्दी पाउडर और सौंफ के बीज डालें।
कुकर को ढककर बंद कर दें।
प्रेशर कुकर में 3 सीटी आने तक पकाएं।
प्रेशर कम होने पर कुकर खोलें, सब कुछ ठंडा होने दें।
सब कुछ पीस लें
पीसते समय 1 कप पानी डालें
इसे अच्छी तरह छान लें
छानते समय पानी डालें
रेशे को फेंक दें
नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
इसे उबलने दें और गैस बंद कर दें।
सहजन की फली का सूप तैयार है
</description><guid>2570</guid><pubDate>02-Mar-2026 4:29:15 pm</pubDate></item></channel></rss>