<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>सेहत - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title> ग्लोइंग स्किन पाने के लिए कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल कैसे करें?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2593</link><description>आयुर्वेद में कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल स्किन की सुंदरता और चमक को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कई जड़ी-बूटियों और नेचुरल तत्वों को मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें केसर, चंदन, मंजिष्ठा, हल्दी और अन्य औषधीयां शामिल होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह तेल स्किन को पोषण देने, दाग-धब्बों को कम करने और चेहरे की नेचुरल चमक बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए, इस तेल का नियमित इस्तेमाल करने से स्किन को मुलायम, चमकदार और हेल्दी रखने में मदद मिलती है।
ग्लोइंग स्किन के लिए कुमकुमादि तेल कैसे इस्तेमाल करें?
 केसर के औषधीय गुणों से भरपूर होता है। केसर में क्रोसिन और सफ्रानल जैसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो स्किन को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाते हैं और समय से पहले बुढ़ापे को रोकते हैं। ऐसे में कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल स्किन का नेचुरल ग्लो बढ़ाने और हेल्दी रखने के लिए आप इन तरीकों से कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं-
1. रात में चेहरे पर लगाएं
कुमकुमादि तेल का सबसे अच्छा इस्तेमाल रात में इसका उपयोग करना अच्छा माना जाता है। इस तेल का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपने चेहरे को किसी हल्के फेसवॉश से साफ करें। इसके बाद चेहरा अच्छी तरह सुखा लें और फिर 2 से 3 बूंद कुमकुमादि तेल को अपनी हथेली पर लें और हल्के हाथों से चेहरे और गर्दन पर मसाज करें। इसे पूरी रात अपने चेहरे पर लगा रहने दें और सुबह चेहरे को धो लें। ऐसा करने से स्किन को गहराई से पोषण मिलता है और समय के साथ स्किन पर चमक बढ़ती है।
2. मसाज के रूप में इस्तेमाल करें
आप कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल चेहरे की मसाज करने के लिए भी कर सकते हैं। चेहरे पर इस तेल से मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और स्किन ज्यादा हेल्दी दिखती है। इस तेल का इस्तेमाल करने के लिए अपने चेहरे को साफ करने के बाद 3 से 4 बूंद तेल लेकर उंगलियों से गोल-गोल घुमाते हुए 5 से 10 मिनट तक चेहरे की मसाज करें। मसाज करने के बाद तेल को स्किन में सोखने दें। हफ्ते में 3 से 4 बार इस तेल से मसाज करने से आपको अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं।
3. फेस पैक में मिलाकर उपयोग करें
आप कुमकुमादि तेल को फेस पैक में मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकते हैं। आप 1 चम्मच चंदन पाउडर या मुल्तानी मिट्टी लेकर उसमें गुलाब जल मिलाकर 2 से 3 बूंद कुमकुमादि तेल मिला लें। इसके बाद इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने के बाद 15 से 20 मिनट बाद सादे पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से आपकी स्किन साफ होती है और चमकदार बनाने में मदद मिलती है।
4. मॉइस्चराइजर के साथ मिलाकर लगाएं
अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ऑयली है तो आप कुमकुमादि तेल को सीधे लगाने के स्थान पर मॉइश्चराइजर में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। आप अपने मॉइश्चराइजर में 1 से 2 बूंद तेल मिलाकर अपने चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे आपकी स्किन को पोषण मिलता है और तेल ज्यादा भारी भी नहीं लगता है।
कुमकुमादि तेल का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
-हमेशा असली और अच्छी क्वालिटी वाला कुमकुमादि तेल खरीदें।
-पहली बार अगर आप इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो पैच टेस्ट जरूर करें।
-अगर स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है तो डॉक्टर या एक्सपर्ट से कंसल्ट करें।
-बहुत ज्यादा मात्रा में इस तेल को अपने चेहरे पर लगाने से बचें।
-नियमित इस्तेमाल से ही आपको इसका अच्छा रिजल्ट मिल सकता है।
-</description><guid>2593</guid><pubDate>13-Apr-2026 1:49:18 pm</pubDate></item><item><title> सिर्फ जुकाम से नहीं, कई समस्याओं से राहत देता है जायफल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2592</link><description>जायफल गरम मसाले में आने वाला एक खास इंग्रेडिएंट है, जिसका इस्तेमाल पुलाव और बिरयानी में किया जाता है। इसका स्वाद हल्का मीठा और तीखा होता है, जो खाने के स्वाद को बढ़ा सकता है। कुकिंग के अलावा जायफल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो कई समस्याओं से राहत पाने में मदद करते हैं। यहां दादी-नानी के बताए 5 नुस्खें हैं जो हेल्थ से लेकर स्किन से जुड़े हैं। जानिए-
1) सिरदर्द में कारगर जायफल
सिरदर्द में जायफल का इस्तेमाल एक बहुत ही पुराना और असरदार नुस्खा है। दरअसल, जायफल में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो दर्द निवारक और शांतिदायक गुणों से भरपूर होते हैं। सिर के भारीपन या तनाव के कारण हो रहे सिरदर्द को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप एक पत्थर पर जायफल को थोड़ा सा पानी डालकर घिस लें। अब इस तैयार पेस्ट को माथे पर लगाएं। इस नुस्खे से दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
2) नजला या जुकाम
जुकाम और नजला में जायफल काम आ सकता है। इसकी गर्म तासीर जमे हुए कफ को पिघलाने और बंद नाक को खोलने में बहुत मदद करता है। इस दिक्कत से निपटने के लिए जायफल को पत्थर पर पानी डालकर घिसें और फिर इसे छाती पर लगाएं। आपको 3 दिन में आराम मिल जाएगा।
3) मुंह में छाले
जायफल में एंटी-सेप्टिक और हीलिंग प्रॉपर्टीज होती है, जो दर्द को कम करती है और छालों को जल्दी भरने में मदद करती है। इस समस्या से निपटने के लिए घिसे हुए जायफल को पानी में मिलाएं और फिर कुल्ला करें। इस नुस्खे को अपनाकर छालों से हो रही जलन से भी निपटने में मदद मिलती है।
4) धूप से काली हुई स्किन
जायफल स्किन के डेड सेल्स को हटाने में मदद करता है, जिससे चेहरे पर ग्लो आता है। धूप में काली हुई स्किन को साफ करने के लिए आप दूध में जायफल को घिसें और फिर इसे चेहरे पर लगाएं। आपको कुछ दिन में असर दिखने लगेगा।
5) जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द से निपटने के लिए सरसों के तेल में जायफल पाउडर मिलाकर गर्म करें। इस तेल से दर्द वाली जगह पर मालिश करें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का ऑप्शन नहीं है। किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े सवालों के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।
--
</description><guid>2592</guid><pubDate>04-Apr-2026 10:11:27 am</pubDate></item><item><title> पुराना नुस्खा, आज भी असरदार!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2591</link><description>आजकल लोग हेल्दी रहने के लिए नेचुरल और घरेलू उपायों की ओर तेजी से वापस लौट रहे हैं। खासकर ऐसे ड्रिंक्स, जो शरीर को अंदर से साफ करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करें। नींबू, लहसुन और दालचीनी से बना यह पारंपरिक ड्रिंक भी ऐसा ही एक आसान और असरदार नुस्खा है, जिसका इस्तेमाल पुराने समय से किया जाता रहा है।
इन तीनों चीजों में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन सुधारने और एनर्जी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन एक हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ इसे शामिल करने से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं और आप खुद को ज्यादा एक्टिव और फिट महसूस कर सकते हैं।
1 नींबू (स्लाइस में कटा हुआ)
3 लहसुन की कलियां
1 बड़ा चम्मच दालचीनी
कैसे बनाएं:
  एक पैन में 1 लीटर पानी डालें।
  इसमें नींबू, लहसुन और दालचीनी डालें और अच्छे से उबालें।
  फिर 57 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें।
  अब इसे छान लें और हल्का गर्म होने पर पिएं।
पावरफुल ड्रिंक
यह ड्रिंक तीन शक्तिशाली चीजों का मिश्रण है, जो शरीर को अंदर से सपोर्ट करता है।
  लहसुन: इसमें सल्फर कंपाउंड्स होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
  दालचीनी: यह ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती है।
  नींबू: इसमें विटामिन C होता है, जो शरीर को एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट देता है।
क्या फायदे मिल सकते हैं?
  लिवर की कार्यक्षमता को सपोर्ट करता है: इस ड्रिंक में मौजूद नींबू और लहसुन शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। यह लिवर को बेहतर तरीके से काम करने में सपोर्ट देता है और शरीर से टॉक्सिन्स निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
  ब्लड शुगर बैलेंस में मदद कर सकता है: दालचीनी को ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर में शुगर के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
  शरीर को एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट देता है: नींबू में विटामिन C और अन्य एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। इससे त्वचा और शरीर दोनों को हेल्दी रखने में सहायता मिलती है।
  इम्यून सिस्टम बूस्ट करे: लहसुन और नींबू दोनों ही इम्यूनिटी को सपोर्ट करते हैं। यह शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं और आपको बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
कैसे करें सेवन?
इस ड्रिंक को दिन में 1 बार, सुबह या शाम के समय हल्का गर्म पी सकते हैं। नियमित सेवन से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
किन बातों का रखें ध्यान?
  खाली पेट ज्यादा मात्रा में ना लें
  अगर कोई बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लें
  स्वाद तेज लगे तो मात्रा कम कर सकते हैं
--
</description><guid>2591</guid><pubDate>04-Apr-2026 10:09:52 am</pubDate></item><item><title> कैसे पता लगाएं कि आप पर्याप्त पानी पी रहे हैं?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2590</link><description>आज के समय में हर किसी को पता है कि हाइड्रेट रहना कितना जरूरी है, लेकिन बिजी लाइफस्टाइल और बैड हैबिट्स के कारण हम पर्याप्त पानी भी नहीं पी पा रहे हैं। यही कारण है कि आज के समय में काफी लोग निर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि, असली दिक्कत ये नहीं है बल्कि ये है कि लोगों को निर्जलीकरण के लक्षणों का भी पता नहीं है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि निर्जलीकरण से कोई लक्षण दिखता ही नहीं है, लक्षण तो दिखते हैं लेकिन तब दिखते हैं जब स्थिति खराब हो चुकी होती है। इस लेख में हम ऐसे ही लक्षणों के बारे में बात करेंगे, जिनकी मदद से आप शरीर में पानी की कमी का पता लगा सकते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर शरीर में पर्याप्त पानी है, तो किडनियां सही से अपना काम कर पाती हैं और स्वस्थ रहती हैं, हमारे जोड़ों में पर्याप्त लुब्रिकेशन रहता है आनी चिकनाई बनी रहती है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है। इलेक्ट्रोलाइट हमारी मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है, जिससे दिमाग को फोकस रखने, मूड को स्टेबल रखने और कई जरूरी कार्यों को पूरा करने में मदद मिलती है।
शरीर में पानी की कमी के संकेत
क्लीवलैंड क्लिनिक द्वारा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में डिहाइड्रेशन के लक्षण का पता कई बार नहीं चल पाता है। हालांकि, अगर ध्यान दिया जाए तो कुछ संकेत देखे जा सकते हैं -
-लगातार थकान या सुस्ती रहना
-बार-बार मुंह व होंठ सूखना
-सिरदर्द या चक्कर आना
-पेशाब का रंग गहरा पीला होना
-ध्यान न लगा पाना या सोच न पाना
-मांसपेशियों में ऐंठन होने लगना
अगर ऐसे लक्षणों को इग्नोर किया जा रहा है और फिर भी तरल पदार्थों का सेवन नहीं बढ़ाया जा रहा है, तो इससे स्थिति और गंभीर भी हो सकती है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
- इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस
-हीट स्ट्रोक (लू लगना)
-गुर्दे में पथरी
-किडनी फेलियर
-शॉक या कोमा (गंभीर स्थितियों में)
अमेरिकी हेल्थ एजेंसी के अनुसार बदलते मौसम के कारण भी शरीर के हाइड्रेशन लेवल पर सीधा असर पड़ता है। गर्मियों में ज्यादा पसीना निकलने और पर्याप्त पानी न पीने के कारण लोग ज्यादा बीमार पड़ते हैं। इसलिए गर्मियों मे ज्यादातर वे लोग प्रभावित होते हैं, ज्यादा समय बाहर गर्मी में रहते हैं जैसे कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले, फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग व लेबर आदि।

कितना पानी पीना जरूरी है
क्या आपको भी लगता है कि आप पर्याप्त पानी पी रहे हैं और फिर भी डिहाइड्रेट हो रही बॉडी? तो हो सकता है कि आप पर्याप्त पानी ही नहीं पी रहे हैं। हालांकि, इसका कोई सटीक जवाब देना तो मुश्किल हो सकता है, क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर की जरूरत अलग होती है। शरीर को पानी की कितनी जरूरत है वह उसकी उम्र, हेल्थ कंडीशन, उसकी शारीरिक गतिविधियां और वह किस मौसम में रह रहा है आदि पर निर्भर करती हैं। हालांकि, सामान्य तौर पर एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना दिन में 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
हाइड्रेट रहने के आसान तरीके
अगर आपको भी पानी पीना याद नहीं रहता है, तो आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इस समस्या से बच सकते हैं और खुद को हाइड्रेट रख सकते हैं -
-पानी की बोतल अपने साथ रखें
-गर्मियों में पानी को ठंडा रखने वाली बोतल साथ रखें
-हाइड्रेशन के चक्कर में मीठे पेय पदार्थ न पिएं
-पानी के दौरान भी थोड़ा-बहुत पानी जरूर पिएं
-पानी की बोतल में नींबू काटकर डाल लें, जिससे फ्लेवर बदलेगा
-डिहाइड्रेशन हो जाए तो क्या करें
शरीर में पानी की कमी होना यानि डिहाइड्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासतौर पर अगर आपको निम्न लक्षण दिख रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
-चक्कर आना या सिर घूमना
-जी मिचलाना या उल्टी आने जैसा मन होना
-हल्का सिर दर्द रहना
-ज्यादा प्यास लगना और यूरिन कम आना
ये लक्षण बेहद गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं और इसलिए इन्हें इग्रोर नहीं करना चाहिए। डिहाइड्रेशन का ज्यादा खतरा आमतौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में ज्यादा होता है और इनमें डिहाइड्रेशन से होने वाली नुकसान भी गंभीर हो सकते हैं। साथ ही जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या फिर किडनी से जुड़ी कोई समस्या रहती है, तो उन्हें भी डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।</description><guid>2590</guid><pubDate>03-Apr-2026 2:46:53 pm</pubDate></item><item><title> क्या मल्टीग्रेन आटे से भी कब्ज की समस्या हो सकती है? </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2589</link><description> मल्टीग्रेन आटा आजकल का नया ट्रेंड बन चुका है। हर कोई आजकल इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहा है। पहले जहां सिर्फ डायबिटीज के मरीज इस आटे को खाते थे वहीं अब ये हर किसी के नॉर्मल डाइट का हिस्सा बनता जा रहा है। मल्ट्रीग्रेन आटे में कई प्रकार के मोटे अनाजों को शामिल किया जाता है जो कि हाई फाइबर से भरपूर होते हैं। हाई फाइबर जहां डाइजेशन बूस्टर और मेटाबॉलिज्म तेज करने वाला होता है वहीं ये आंतों की गति को भी तेज करता है मल में थोक जोड़कर इसे मुलायम बनाता है और पेट साफ करने में मदद करता है। हालांकि, फाइबर शरीर के लिए जरूरी है लेकिन ज्यादा मात्रा में फाइबर का सेवन शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ये कब्ज की भी वजह बन सकता है कैसे, जानते हैं इस बारे में -
 मल्टीग्रेन आटे से कब्ज हो तो क्या करें?
मल्टीग्रेन आटे से होने वाले कब्ज से बचने के लिए आपको ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए दरअसल जितना ज्यादा आप पानी पिएंगे शरीर फाइबर को उतने आराम से पचा लेगा जिससे कि आपको कब्ज की समस्या नहीं होगी। इसके अलावा मल्टीग्रेन आटे का सेवन धीरे-धीरे बढ़ाएं अचानक से इस आटे पर निर्भर न हो जाएं या सिर्फ इसी को डाइट में शामिल न करें।
इस संकेतों पर दें ध्यान
मल्टीग्रेन आटे से आपका मल टाइट होने लगे या आपको बवासीर जैसी समस्या महसूस होने लगे तो आपको सतर्क हो जाने की जरूरत है। इसके अलावा अगर आपको लग रहा है कि आपका खाना सही से नहीं पच पा रहा या गैस व बदहजमी की दिक्कत हो रही है और ये लगातार बनी रहती है तो इसका मतलब है कि आप फाइबर ज्यादा मात्रा में ले रहे हैं और पानी कम पी रहे हैं।
ऐसी में आपको अपनी डाइट में सबसे पहले तो फल, सब्जियां और दही शामिल करना चाहिए जो कि पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करे। इसके अलावा भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं और नियमित समय पर खाएं। टहलने जैसी हल्की शारीरिक गतिविधि भी मल त्याग में सहायक होती है। तो इस प्रकार से डाइट सही करें और मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी को डाइट में शामिल तो करें लेकिन संतुलित मात्रा में।
सबसे अच्छा मल्टीग्रेन आटा कौन सा होता है?
मल्टीग्रेन आटा कई प्रकार के अनाजों से बनता है लेकिन सबसे अच्छा आटा उसे माना जाता है जिसमें 25% तक बाजरा होता है और बाकी दूसरे अनाज। हालांकि, ये खाने वाले की पसंद पर भी निर्भर करता है।
मल्टीग्रेन आटा किसे नहीं खाना चाहिए?
मल्टीग्रेन आटा उन तमाम लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनका पाचन क्रिया कमजोर हो या जिन्हें खाना पचाने में मुश्किल हो रही हो। इसके अलावा गैस से जुड़ी समस्या वाले लोगों को भी इसके सेवन से बचना चाहिए।</description><guid>2589</guid><pubDate>01-Apr-2026 6:12:22 pm</pubDate></item><item><title>  गर्मियों में शरीर को ठंडा रखे सौंफ, जानिए सेवन के 5 आसान तरीके </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2588</link><description>चिलचिलाती गर्मी में न सिर्फ पसीना आता है, बल्कि अंदरुनी रूप से भी कई तरह की समस्याएं होने का खतरा रहता है। मुख्य रूप से शरीर में गर्मी बढ़ने से पेट से जुड़ी दिक्कतें काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसके अलावा इस सीजन में काफी ज्यादा सुस्ती और थकान जैसा अनुभव होता है। अगर आप गर्मियों की इन समस्याओं को कम करना चाहते हैं, तो सौंफ का सेवन कर सकते हैं। सौंफ में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो गर्मियों में आपको ठंडक दे सकते हैं। इसके सेवन से पेट की गर्मी को शांत कियाा जा सकता है। साथ ही यह गर्मियों के दिनों में आपके शरीर को एनर्जी प्रदान कर सकता है। गर्मियों के दिनों में खुद को ठंडा रखने के लिए आप सौंफ का सेवन कई तरह से कर सकते हैं। आइए जानते हैं गर्मियों में कैसे करें सौंफ का सेवन?
1. गर्मियों में पिएं सौंफ का पानी
गर्मियों में अगर आप खुद को ठंडा रखना चाहते हैं, सौंफ का पानी पी सकते हैं। यह शरीर को ठंडा रखने के लिए काफी असरदार हो सकता है। इसके लिए 1 चम्मच सौंफ लें। इसे 1 गिलास पानी में रातभर के लिए भिगोकर छोड़ दें। इसके बाद सुबह पानी को छानकर इसका सेवन करें। इससे आपका पाचन भी ठीक रहता है। साथ ही आप लंबे समय तक हाइड्रेट रहते हैं।
2. सौंफ और दही का कॉम्बिनेशन भी है बेस्ट
गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ और दही का कॉम्बिनेशन भी आपके लिए अच्छा हो सकता है। इसके लिए 1 कटोरी में दही लें, इसमें 1 टीस्पून भुनी हुई सौंफ मिक्स करें। इस मिश्रण का सेवन करने से आपका पाचन सही रहता है। साथ ही शरीर की गर्मी भी कम होती है। दोपहर के समय इस मिश्रण का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।
3. सौंफ और नींबू का शरबत रखे ठंडा
शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ और नींबू का शरबत फायदेमंद हो सकता है। इससे आप फ्रेश फील करते हैं। सौंफ का शरबत तैयार करने के लिए 1 चम्मच सौंफ को 1 कप पानी में डालकर अच्छी तरह से उबाल लें। इसके बाद इसे ठंडा होने दें। बाद में आधा नींबू और 1 चम्मच शहद डालकर इसका सेवन करें। गर्मियों में यह ड्रिंक आपके लिए बेस्ट साबित हो सकता है।
4. गर्मियों में पिएं सौंफ की चाय
गर्मियों के दिनों में पेट को ठंडा रखने के साथ-साथ शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ की चाय पी सकते हैं। इस चाय को बनाने के लिए आप 1 कप पानी लें, इसमें 1 चम्मच सौंफ डालकर कुछ मिनटों के लिए उबाल लें। अब इसमें थोड़ा सा अदरक कद्दूकस करके डालें। अब इसे छानकर चाय की तरह पिएं।
5. खीरा और सौंफ का सलाद गर्मियों में रखे ठंडा
सौंफ के साथ-साथ खीरा भी आपके स्वास्थ्य के लिए बेस्ट हो सकता है। इसके सेवन से आप फ्रेश महसूस करते हैं। इसके लिए 1 कटोरी खीरा लें। इसपर करीब 1 चम्मट भुनी हुई सौंफ का पाउडर डालें। आप चाहे, तो इसपर हल्का सा नींबू का रस या फिर नमक डालकर खाएं। इससे शरीर में पानी की कमी दूर होती है। साथ ही शरीर को ठंडक मिल सकती है।</description><guid>2588</guid><pubDate>31-Mar-2026 1:13:05 pm</pubDate></item><item><title> फैटी लिवर ग्रेड 1, 2 और 3 में क्या अंतर है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2587</link><description>फैटी लिवर की गंभीरता के अनुसार इसे तीन ग्रेड में बांटा गया है। इसमें फैटी लिवर ग्रेड 1 शुरुआती दौर होता है, जिसका समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह बढ़कर फैटी लिवर ग्रेड 2 से लेकर 3 तक चला जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 सबसे गंभीर अवस्था है। लिवर पर थोड़ा फैट होना नॉर्मल है, क्योंकि लिवर को इसकी जरूरत एनर्जी के लिए पड़ती है, लेकिन जैसे ही फैट का लेवल 5% से ज्यादा होने लगता है, उसे फैटी लिवर कहा जाता है। इससे लिवर में सूजन होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसे ही फैटी लिवर की शुरुआत कहा जाता है।
फैटी लिवर ग्रेड 1 के लक्षण
 फैटी लिवर के शुरुआती स्टेज पर लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे साइलेंट बीमारी कहा जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 1 में लिवर पर इतना कम फैट जमा होता है कि इसके लक्षणों में कई बार रोगी को थकान या पेट के ऊपरी दाहिने भाग में थोड़ा बहुत दर्द हो सकता है। इन लक्षणों को आमतौर पर मरीज इग्नोर कर देते हैं क्योंकि ये लक्षण किसी भी खास तरह की बीमारी का इशारा नहीं करते। अगर किसी भी व्यक्ति को बार-बार ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
-मोटापा - कमर का साइज बहुत ज्यादा होना
टाइप 2 डायबिटीज
-ब्लड में HDL कोलेस्ट्रॉल लेवल बहुत कम होना
-हाई ब्लड प्रेशर होना
-जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उनमें अल्कोहल के कारण लिवर पर फैट जमा हो जाता है।
-तेजी से वजन कम होना
-HIV का इलाज कराना
-किसी कैंसर का इलाज कराना
-कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाइयां लेना
-फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
-अल्ट्रासाउंड - अगर फैटी लिवर की शुरुआत होती है, तो इसे अल्ट्रासाउंड के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है।
-लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)- इस टेस्ट के जरिए यह पता चलता है कि लिवर कितने बेहतर तरीके से काम कर रहा है। अगर SGPT और SGOT एंजाइम बढ़े हुए आते हैं, तो लिवर में सूजन हो सकती है।
लिपिड प्रोफाइल - अगर ब्लड में ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो फैटी लिवर होने की संभावना हो सकती है।
ब्लड शुगर - फैटी लिवर की समस्या डायबिटीज रोगियों को होने का खतरा रहता है, इसलिए डॉक्टर HbA1c टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।
ग्रेड 1 फैटी लिवर का इलाज
ग्रेड 1 फैटी लिवर शुरुआती स्टेज होती है, जबकि ग्रेड 3 ज्यादा गंभीर मानी जाती है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर मरीज में बीमारी एक ही तरह से आगे नहीं बढ़ती। कई लोगों में यह लंबे समय तक स्थिर रहती है और सही जीवनशैली, वजन घटाने, व्यायाम, शुगर व लिपिड कंट्रोल तथा डॉक्टर की सलाह से इसमें सुधार भी हो सकता है।
ग्रेड 2 फैटी लिवर
 ग्रेड 2 फैटी लिवर मोडरेट कंडीशन है। Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार के मुताबिक, लिवर के सेल्स में 34% से लेकर 66% तक फैट जमा हो जाए, तो इसे ग्रेड 2 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज के लिवर के फंक्शन पर असर पड़ने लगता है।
फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण
जैसे-जैसे लिवर में फैट बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। हालांकि ग्रेड 1 फैटी लिवर में लक्षण काफी हद तक नजर नहीं आते, लेकिन लिवर में फैट बढ़ने के साथ लक्षणों की पहचान होने लगती है। ग्रेड 2 फैटी लिवर के लक्षणों में भूख कम लगना, पेट में सूजन और खाना न पचना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। मैंने कई मरीजों की स्किन में पीलापन और अचानक वजन बढ़ना भी देखा है। वैसे ग्रेड 2 फैटी लिवर में पेट में सूजन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। बहुत ज्यादा प्यास लगना, ब्लोटिंग, पेट के ऊपरी भाग में दर्द और नींद खराब होना भी फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण हो सकते हैं।
ग्रेड 2 फैटी लिवर के कारण
-बैलेंस्ड डाइट न खाना
बहुत ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाना
-मोटापा
-फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाला लाइफस्टाइल अपनाना
-बहुत ज्यादा शराब पीना
-परिवार में लिवर से जुड़ी बीमारियों की हिस्ट्री
-फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच करने के लिए डॉक्टर मरीज को ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
लिवर फंक्शन टेस्ट - लिवर की हेल्थ को जानने के लिए एंजाइम और प्रोटीन चेक किए जाते हैं।
फाइब्रो स्कैन - लिवर कितना हार्ड हो गया है, इसे जानने के लिए फाइब्रो स्कैन की सलाह दी जा सकती है।
सीटी स्कैन - लिवर के ग्रेड को विस्तार से जांचने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन भी कराया जा सकता है। फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज
आमतौर पर ग्रेड 2 फैटी लिवर में मरीजों को वजन कम करने की सलाह दी जाती है ताकि फैटी लिवर की बीमारी का इलाज किया जा सके। जैसे ही मरीज का वजन कम होता है, इससे लिवर का फैट और सूजन कम होती है। इसके अलावा, मरीज को हेल्दी फूड, डाइट का पोर्शन साइज और फिजिकल एक्सरसाइज करने की सलाहदी जाती है।
फैटी लिवर ग्रेड 3
Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अगर लिवर के सेल्स में 67 फीसदी से ज्यादा फैट जमा हो जाए, तो उसे ग्रेड 3 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्टेज में लिवर के आसपास के टिश्यू में गंभीर सूजन आ जाती है, इस वजह से ग्रेड 3 को बहुत ही गंभीर स्थिति माना जाता है। अगर फैटी लिवर ग्रेड 3 का समय पर इलाज न हो, तो लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में कई बार लिवर ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ सकती है, इसलिए लिवर से जुड़े लक्षणों की पहचान करके समय पर इलाज कराने की जरूरत होती है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 के लक्षण
-पेट के ऊपर दाईं तरफ दर्द या पेट भरा हुआ महसूस होना
-बहुत ज्यादा थकान लगना
-बिना वजह वजन तेजी से कम होना
-मतली महसूस होना
-हाथ, पैर और टांगों में सूजन दिखाई देना
-फैटी लिवर ग्रेड 3 की जांच कैसे की जाती है?
इस स्टेज पर डॉक्टर मरीज को अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है।अगर डॉक्टर को लिवर में गंभीर रूप से सूजन महसूस होती है, तो लिवर बायोप्सी की सलाह भी दी जा सकती है। इसमें लिवर के टिश्यू के छोटे से हिस्से को लेकर लैब में टेस्ट किया जाता है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज
अगर मरीज का वजन ज्यादा होता है, तो उसे वजन कम करने की सलाह दी जाती है।इसके अलावा मरीज को अपनी डाइट और खानपान पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इसके साथ, मरीज को किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
फैटी लिवर ग्रेड 1 से 3 तक बढ़ने के कारण क्या है?
फैटी लिवर के गंभीर होने में कई रिस्क फैक्टर्स जैसे अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, अल्कोहल, स्मोकिंग, हाई कोलेस्ट्रॉल, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी न करना कंट्रोल न हो, तो फैटी लिवर गंभीर हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में डायग्नोसिस नहीं होता है, तो यह फैटी लिवर के ग्रेड बढ़ते जाते हैं। इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।

</description><guid>2587</guid><pubDate>30-Mar-2026 12:36:00 pm</pubDate></item><item><title> खीरे की सलाद... भूलकर भी इन 5 चीजों के साथ ना खाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2586</link><description>गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो शरीर को ठंडक देता है और पानी की कमी को भी पूरी करता है। इसे खाने से शरीर तरोताजा हो जाता है। लगभग हर घर में खीरे का इस्तेमाल सलाद के रूप किया जाता है, जो हेल्थ के लिए अच्छा भी है। लेकिन कई बार हम बिना सोचे-समझे इसे हर चीज के साथ खा लेते हैं, जिससे स्वाद तो बिगड़ता ही है, साथ में पाचन से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां भी हो सकती हैं। सही तरीके से खाया जाए तो खीरा बहुत फायदेमंद है, लेकिन गलत कॉम्बिनेशन इसका मजा खराब कर सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि ये जान लें कि किन चीजों के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए, ताकि आपका जायका भी ना बिगड़े और पेट से जुड़ी समस्या भी ना हों। चलिए जानते हैं ऐस कौन से फूड आइटम हैं जिनके साथ खीरा का कॉम्बिनेशन सही नहीं होता।
डेयरी प्रोडक्ट (खासकर दही) के साथ खीरा
खीरा और दही का कॉम्बिनेशन कई जगह पर इस्तेमाल होता है, लेकिन इन दोनों की जोड़ी कई बार परेशानी में डाल सकती है। खीरे में पानी बहुत ज्यादा होता है, जिससे दही पतली हो सकती है और उसका क्रीमी टेक्सचर खराब हो सकता है। इससे खाने का मजा कम हो जाता है। इसके अलावा हेल्थ के लिहाज से भी देखें तो ये पाचन संबंधी परेशानियों को जन्म दे सकता है।
मीट के साथ ना खाएं खीरा
मीट और खीरा साथ खाने से कभी-कभी पाचन से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। मीट में प्रोटीन ज्यादा होता है और उसे पचने में समय लगता है, जबकि खीरा हल्का और पानी से भरपूर होता है और जल्दी पच जाता है। इस अंतर की वजह से पेट में भारीपन या एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि अगर आप मीट खा रहे हैं तो उस टाइम खीरा खाने से परहेज करें या थोड़ा टाइम का गैप लेकर खीरा खाएं।
खट्टे फलों के साथ खीरा अवॉइड करें
संतरा या नींबू जैसे खट्टे फल स्वाद में तेज होते हैं, जबकि खीरा बहुत हल्का और सादा स्वाद देता है। दोनों को साथ मिलाने पर कई बार खट्टापन ज्यादा लगने लगता है और खीरे की फ्रेशनेस कही दब सी जाती है। साथ ही ज्यादा खट्टापन खीरे के क्रंचनेस को भी कम कर सकता है। वहीं पाचन के लिहाज से भी ये कॉम्बिनेशन सही नहीं है।
लहसुन के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए
लहसुन का स्वाद बहुत तेज होता है और यह आसानी से किसी भी हल्की चीज का स्वाद दबा सकता है। जब आप खीरे के साथ ज्यादा लहसुन मिला देते हैं तो खीरे का ताजा स्वाद महसूस ही नहीं होता। अगर आपको लहसुन पसंद है तो उसे बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करें, ताकि खीरे की पहचान बनी रहे और और टेस्ट भी बैलेंस रहे।
टमाटर के साथ खीरा खाने से बचें
खीरा और टमाटर का सलाद बहुत कॉमन है। लेकिन इसमें एक छोटी सी बात ध्यान रखने वाली है। खीरा पानी छोड़ता है, जिससे टमाटर का स्वाद हल्का पड़ सकता है। हेल्थ के लिहाज से देखें तो खीरे और टमाटर का कॉम्बिनेशन आपके पेट के PH बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे पेट में गैस और ब्लोटिंग की शिकायत भी हो सकती है।खीरे की सलाद... भूलकर भी इन 5 चीजों के साथ ना खाएं
गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो शरीर को ठंडक देता है और पानी की कमी को भी पूरी करता है। इसे खाने से शरीर तरोताजा हो जाता है। लगभग हर घर में खीरे का इस्तेमाल सलाद के रूप किया जाता है, जो हेल्थ के लिए अच्छा भी है। लेकिन कई बार हम बिना सोचे-समझे इसे हर चीज के साथ खा लेते हैं, जिससे स्वाद तो बिगड़ता ही है, साथ में पाचन से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां भी हो सकती हैं। सही तरीके से खाया जाए तो खीरा बहुत फायदेमंद है, लेकिन गलत कॉम्बिनेशन इसका मजा खराब कर सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि ये जान लें कि किन चीजों के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए, ताकि आपका जायका भी ना बिगड़े और पेट से जुड़ी समस्या भी ना हों। चलिए जानते हैं ऐस कौन से फूड आइटम हैं जिनके साथ खीरा का कॉम्बिनेशन सही नहीं होता।
डेयरी प्रोडक्ट (खासकर दही) के साथ खीरा
खीरा और दही का कॉम्बिनेशन कई जगह पर इस्तेमाल होता है, लेकिन इन दोनों की जोड़ी कई बार परेशानी में डाल सकती है। खीरे में पानी बहुत ज्यादा होता है, जिससे दही पतली हो सकती है और उसका क्रीमी टेक्सचर खराब हो सकता है। इससे खाने का मजा कम हो जाता है। इसके अलावा हेल्थ के लिहाज से भी देखें तो ये पाचन संबंधी परेशानियों को जन्म दे सकता है।
मीट के साथ ना खाएं खीरा
मीट और खीरा साथ खाने से कभी-कभी पाचन से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। मीट में प्रोटीन ज्यादा होता है और उसे पचने में समय लगता है, जबकि खीरा हल्का और पानी से भरपूर होता है और जल्दी पच जाता है। इस अंतर की वजह से पेट में भारीपन या एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि अगर आप मीट खा रहे हैं तो उस टाइम खीरा खाने से परहेज करें या थोड़ा टाइम का गैप लेकर खीरा खाएं।
खट्टे फलों के साथ खीरा अवॉइड करें
संतरा या नींबू जैसे खट्टे फल स्वाद में तेज होते हैं, जबकि खीरा बहुत हल्का और सादा स्वाद देता है। दोनों को साथ मिलाने पर कई बार खट्टापन ज्यादा लगने लगता है और खीरे की फ्रेशनेस कही दब सी जाती है। साथ ही ज्यादा खट्टापन खीरे के क्रंचनेस को भी कम कर सकता है। वहीं पाचन के लिहाज से भी ये कॉम्बिनेशन सही नहीं है।
लहसुन के साथ खीरा नहीं खाना चाहिए
लहसुन का स्वाद बहुत तेज होता है और यह आसानी से किसी भी हल्की चीज का स्वाद दबा सकता है। जब आप खीरे के साथ ज्यादा लहसुन मिला देते हैं तो खीरे का ताजा स्वाद महसूस ही नहीं होता। अगर आपको लहसुन पसंद है तो उसे बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करें, ताकि खीरे की पहचान बनी रहे और और टेस्ट भी बैलेंस रहे।
टमाटर के साथ खीरा खाने से बचें
खीरा और टमाटर का सलाद बहुत कॉमन है। लेकिन इसमें एक छोटी सी बात ध्यान रखने वाली है। खीरा पानी छोड़ता है, जिससे टमाटर का स्वाद हल्का पड़ सकता है। हेल्थ के लिहाज से देखें तो खीरे और टमाटर का कॉम्बिनेशन आपके पेट के PH बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे पेट में गैस और ब्लोटिंग की शिकायत भी हो सकती है।
</description><guid>2586</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:54:48 pm</pubDate></item><item><title> ज्यादा पानी वाला नारियल खरीदने का आसान तरीका</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2585</link><description>गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नारियल पानी तो काफी सारे लोग पीते हैं। लेकिन इसे खरीदने की सही ट्रिक बहुत कम लोगों को पता है। अक्सर आपके साथ होता होगा जब आप कोकोनट वॉटर खरीद कर घर लाते होंगे और उसमें बहुत कम पानी निकलता होगा। ऐसे आप ठगा हुआ महसूस करते हैं लेकिन आज के बाद ऐसा नहीं होगा। बस ये छोटा सा तरीका जान लें जिससे हमेशा ज्यादा पानी वाला नारियल ही खरीदेंगे। नोट कर लें दुकान वाले की बताई ये छोटी सी ट्रिक।
ज्यादा पानी वाले नारियल की पहचान
जब भी ज्यादा पानी वाला कोकोनट खरीदना हो तो बस ये एक छोटी सी पहचान कर लें। हमेशा नारियल की तली को देख कर ही खरीदें।
गोल बॉटम वाले नारियल में होगा ज्यादा पानी
ज्यादा पानी वाला नारियल खरीदना है तो कोशिश करें कि नारियल की तली गोल हो। इस तरह के नारियल में पानी ज्यादा होने के चांस होते हैं। आपको एक कोकोनट में लगभग 3 से 4 गिलास पानी निकल सकता है।
3 कोने वाला नारियल खरीदने से बचे
अगर आपके खरीदे नारियल की तली में 3 कोने जैसी डिजाइन बनी है। तो खरीदने से बचें क्योंकि इस तरह के कोकोनट में पानी काफी कम होता है।
नारियल को थपथपाकर चेक करें
नारियल में पानी कम है या ज्यादा इसे चेक करना है तो हमेशा नारियल को हल्के हाथ से थपथपाएं। अगर नारियल अंदर से खोखला यानी कम पानी वाला होगा तो उसमे ढप ढप की आवाज आएगी। मतलब ये कि दो नारियल को हथेलियों से थपथपाकर चेक करें। अगर एक नारियल में ज्यादा आवाज कर रहा है तो इसका मतलब है कि उसमे पानी की मात्रा कम है।
नारियल पर लगे धब्बे
अगर आपके खरीदे हुए नारियल पर काले धब्बे दिखाई दे रहे तो इसे बेकार समझने की गलती ना करें क्योंकि इसी नारियल में आमतौर पर सबसे ज्यादा पानी होता है। लेकिन ध्यान रहे कि ये केवल काले रंग के धब्बे हो अगर धब्बों के साथ दरार हो तो बिल्कुल ना खरीदें। दरार होने पर इसके अंदर से खराब होने का डर होता है।
--
</description><guid>2585</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:53:16 pm</pubDate></item><item><title> सुबह पेट साफ नहीं हुआ तो ये नुस्खे आजमाकर देख लें, मिल सकता है आराम!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2584</link><description>आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। कई लोग सुबह उठने के बाद पेट साफ न होने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसे कब्ज भी कहा जाता है। ये समस्या छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
पेट सही तरीके से साफ न होने पर दिनभर सुस्ती, गैस, एसिडिटी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। ऐसे में दवाइयों पर निर्भर रहने की बजाय कुछ आसान घरेलू नुस्खों को अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।
सही खानपान और लाइफस्टाइल में थोड़े बदलाव से आप अपने पाचन तंत्र को मजबूत बना सकते हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे असरदार घरेलू उपाय बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप सुबह पेट साफ न होने की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
गुनगुना पानी पीना---
सुबह उठते ही खाली पेट गुनगुना पानी पीना सबसे आसान और असरदार उपायों में से एक है।
यह आंतों को सक्रिय करता है और पाचन तंत्र को जागने का संकेत देता है।
नियमित रूप से यह आदत अपनाने से कब्ज की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।
नींबू और शहद
गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीना एक नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक की तरह काम करता है।
नींबू पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है, जबकि शहद आंतों को लुब्रिकेट करता है।
इससे मल त्यागना आसान होता है और पेट हल्का महसूस होता है।
फाइबर युक्त आहार
फाइबर पाचन तंत्र के लिए बेहद जरूरी होता है।
फल (जैसे पपीता, सेब), हरी सब्जियां, ओट्स, दलिया और चिया सीड्स का नियमित सेवन करने से कब्ज की समस्या में काफी सुधार आता है।
रात में त्रिफला का सेवन
आयुर्वेद में त्रिफला को पाचन के लिए बहुत लाभकारी माना गया है।
यह तीन औषधियों (आंवला, हरड़, बहेड़ा) का मिश्रण होता है।
रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लेने पर यह आंतों को साफ करता है और सुबह पेट आसानी से साफ होता है।
--
</description><guid>2584</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:29:36 pm</pubDate></item><item><title> महिलाओं की कमर और पुरुषों के पेट पर ही क्यों जमा होती है चर्बी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2583</link><description>फिटनेस कोच ने समझाया
आपने अक्सर नोटिस किया होगा कि महिलाओं का मोटापा कमर से और पुरुषों का मोटापा पेट पर दिखता है। पर क्या इसके पीछे की साइंस को समझते हैं? नहीं, तो आइए फिटनेस कोच से जानते हैं।
शरीर एक बहुत ही स्मार्ट मशीन की तरह काम करता है, जो आपकी जरूरतों के लिए एनर्जी बचाकर रखता है। फैट बढ़ने की वजह सिर्फ ज्यादा खाना नहीं है, बल्कि यह हमारी खराब लाइफस्टाइल और शरीर के अंदर होने वाले हार्मोनल बदलावों का नतीजा है। हाई-कैलोरी फूड खाने पर अगर आप शारीरिक मेहनत कम करते हैं, तो बची हुई कैलोरी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैट सेल्स के रूप में जमा होने लगती है। आपने अक्सर देखा होगा की महिलाओं की कमर और पुरुषों के पेट पर खूब फैट जमा रहता है। क्या आप जानते हैं इसकी वजह? नहीं तो फिटनेस कोच से समझिए।
कमर पर क्यों जमा होता है महिलाओं का फैट
एस्ट्रोजन महिलाओं का फैट कमर और जांघों पर इकट्ठा होने का कारण है। ये कोई कोस्मेटिक नहीं है बल्कि इसके पीछे साइंस है। इसका काम लड़कियों को प्रेगनेंसी के दौरान एनर्जी देना है और प्रेगनेंसी के बाद भी ये ब्रेस्टफीडिंग में मदद करता है, क्योंकि ये फैट आसानी से कम नहीं होता। ये फैट स्टेबल होता है, इसलिए कुछ लड़कियां अक्सर वेट लॉस के दौरान ऊपर की बॉडी फैट को कम कर लेती हैं, लेकिन लोअर बॉडी फैट उतना ही रहता है। इस स्टेबल फैट को गायनॉइड फैट कहते हैं।
पेट पर क्यों जमा होता है पुरुषों का फैट
पुरुषों में चर्बी पेट पर जमा होने का कारण है टेस्टोस्टेरोन। जैसे ही ये हार्मोन नीचे जाता है वैसे ही बैली फैट बढ़ जाता है। ऐसा स्मोकिंग, अल्कोहल, स्ट्रेस और वर्कआउट ना करने की वजह से होता है। इस तरह के फैट से सबसे बड़ा खतरा फैटी लिवर और दिल की बीमारियों के होने का खतरा होता है। इस फैट को एंड्राइड फैट कहते हैं।
क्या कमर और बैली फैट को कम कर सकते हैं?
इस तरह के दोनों फैट को कम कर सकते हैं। लेकिन दोनों का जवाब सेम नहीं है और न ही इसका साइंस और न्यूट्रीशियन सेम है।
</description><guid>2583</guid><pubDate>29-Mar-2026 12:27:29 pm</pubDate></item><item><title> बच्चों में प्रोटीन की कमी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2582</link><description>आज के समय में बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे एनर्जेटिक और हर तरह से हेल्दी बढ़ें। इसके लिए वे बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज और समय पर हेल्थ चेकअप पर ध्यान देते हैं लेकिन कई बार, बच्चों की डाइट में प्रोटीन को नजरअंदाज कर दिया जाता है। प्रोटीन न सिर्फ मांसपेशियों और हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम, हार्मोन संतुलन और शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत के लिए भी अहम भूमिका निभाता है।
बच्चों में प्रोटीन की कमी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
प्रोटीन केवल मसल्स बनाने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास, हार्मोन संतुलन और इम्यूनिटी के लिए भी जरूरी है। यह कोशिकाओं की मरम्मत करता है, नई कोशिकाओं का निर्माण करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अगर बच्चे की डाइट में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो उनका विकास धीमा हो सकता है।
शुरुआती दौर में प्रोटीन की कमी के लक्षण अक्सर हल्के और नजरअंदाज किए जाने वाले होते हैं। जैसे कि बच्चे जल्दी थक जाते हैं, खेलों में भाग लेने में अनिच्छा होती है, बालों और स्किन की क्वालिटी प्रभावित होती है और बार-बार जुकाम या बुखार जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि माता-पिता सतर्क रहें और इन संकेतों को समय रहते पहचानें, तो प्रोटीन की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है।
1. धीमा विकास
सबसे पहला संकेत यह होता है कि बच्चा अपनी उम्र के अनुसार लंबाई या वजन में पीछे रह जाता है। छोटे बच्चों में यह रुकावट धीरे-धीरे नजर आती है, लेकिन समय रहते पहचानने पर इसे सुधारा जा सकता है।
2. बार-बार कमजोरी और थकान
प्रोटीन की कमी से बच्चों में एनर्जी की कमी हो जाती है। वे जल्दी थक जाते हैं, खेलों या एक्टिविटी में भाग लेने में अनिच्छुक रहते हैं और छोटी-छोटी चीजों में भी थकान महसूस करते हैं।
3. बालों और स्किन की समस्याएं
प्रोटीन की कमी से बाल टूटने लगते हैं, झड़ते हैं और बालों में चमक कम हो जाती है। स्किन भी रूखी और संवेदनशील हो सकती है। यह संकेत अक्सर माता-पिता अनदेखा कर देते हैं।
4. इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा
प्रोटीन इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। इसके अभाव में बच्चे जल्दी बीमार पड़ते हैं, बार-बार जुकाम, बुखार या अन्य इंफेक्शन की समस्या सामने आती है।
5. मसल्स और हड्डियों में कमजोरी
प्रोटीन की कमी से मसल्स कमजोर होते हैं। इसके कारण बच्चे आसानी से चोट खा सकते हैं और हड्डियों की मजबूती भी प्रभावित होती है।
बच्चों में प्रोटीन की कमी का कारण
, बच्चों में प्रोटीन की कमी का मुख्य कारण असंतुलित डाइट है। कई बच्चे फ्रूट्स और जूस पसंद करते हैं, लेकिन दाल, अंडा, दूध, पनीर, मांस या सोया जैसी प्रोटीन-रिच चीजें कम खाते हैं। इसके अलावा शाकाहारी बच्चों में सही प्रोटीन सोर्स न मिलने पर यह कमी जल्दी दिखने लगती है।
- बच्चों को रोजाना प्रोटीन से भरपूर डाइट दें, जिसमें दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, मांस या सोया शामिल हों।
-नट्स, मूंगफली, चना या सोया स्नैक्स में शामिल कर सकते हैं। यह बच्चों को एनर्जी और प्रोटीन दोनों देता है।
-सिर्फ एक तरह का प्रोटीन देने की बजाय विभिन्न सोर्स से प्रोटीन दें। इससे बच्चा सभी जरूरी अमिनो एसिड्स प्राप्त करता है।
-अगर बच्चे की ग्रोथ धीमी लग रही है, बार-बार कमजोरी या बीमारियां हो रही हैं, तो तुरंत पीडियाट्रिशियन से सलाह लें।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बच्चों में प्रोटीन की कमी शुरुआती दौर में आसानी से पहचान की जा सकती है अगर माता-पिता सतर्क रहें। धीमा विकास, कमजोरी, बालों और स्किन की समस्याएं, बार-बार होने वाली बीमारियां, ये सभी संकेत होते हैं। बैलेंस्ड और प्रोटीन-रिच डाइट से इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। समय रहते सही कदम उठाने से बच्चों का विकास सामान्य और हेल्दी रहता है।
</description><guid>2582</guid><pubDate>26-Mar-2026 6:43:58 am</pubDate></item><item><title> सिर में गैस चढ़ने के लक्षण क्या हैं? जानें 3 नुस्खे, जिनसे तुरंत पा सकते हैं आराम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2581</link><description>सिर में दर्द अचानक से होने पर कई बार लोगों के मुंह से कहते सुना होगा कि 'सिर में गैस चढ़ गई है' यह आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाली लाइन है, वास्तव में यह वह स्थिति होती है, जिसमें पेट में गैस बनने पर इसका असर सिर तक महसूस होता है। यह परेशानी किसी भी व्यक्ति को तब होती है, जब हमारा पाचन तंत्र सही तरीके से काम नहीं कर पाता है। जब गैस बनने लगती है, तो न सिर्फ पेट में बल्कि सिर में दर्द, भारीपन, बेचैनी जैसा महसूस हो सकता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं सिर में गैस बनने के लक्षण क्या हैं और इसे कम करने के लिए क्या करें?
सिर में गैस चढ़ने के मुख्य लक्षण क्या हैं?
सिर में गैस चढ़ने पर न सिर्फ दर्द बल्कि अन्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे-
-सिर में दर्द के साथ भारीपन महसूस होना। यह दर्द कभी हल्का, तो कभी तेज हो सकता है, खासकर माथे या सिर के ऊपरी हिस्से में।
-काफी ज्यादा गैस बनने पर शरीर में असहजता बढ़ती है, जिससे चक्कर या हल्की कमजोरी महसूस हो सकती है।
-कुछ लोगों को पेट में गैस होने पर मतली, उल्टी की इच्छा या जी मिचलाना जैसे लक्षण नजर आते हैं।
-बिना बात के बार-बार डकार आना और पेट में सूजन होना भी गैस बनने के लक्षण हो सकते हैं।
-कुछ लोगों के सिर के साथ-साथ पेट में भी भारीपन महसूस हो सकता है।
-सिर भारी होने के कारण व्यक्ति को काम पर ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है।
सिर में गैस चढ़ने पर क्या करें?
-अजवाइन और काला नमक का पिएं पानी
-गैस की परेशानी होने पर अक्सर अजवाइन और काला नमक का पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसका सेवन करने के लिए आधा चम्मच अजवाइन लें, इसे चुटकीभर काला नमक के साथ मिलाएं और गुनगुने पानी के साथ लें। इस मिश्रण के सेवन से पाचन में सुधार आता है और गैस को जल्दी बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।
गर्म पानी या अदरक की चाय
गर्म चीजें पेट को आराम देती हैं और गैस को कम करती हैं। अगर आपके पेट में गैस की परेशानी ज्यादा रहती है, तो एक कप गुनगुना पानी धीरे-धीरे पिएं या अदरक की चाय बनाकर पिएं। इससे आपको काफी लाभ हो सकता है। दरअसल, अदरक पाचन को तेज करता है और सिर के भारीपन को भी कम करता है।
हींग का पानी गैस को निकाले बाहर
गैस को कम करने के लिए हींग का पानी भी फायदेमंद हो सकता है। इसका सेवन करने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकीभर हींग मिलाकर पिएं। यह गैस को तुरंत कम करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है।
-पेट में गैस बनने पर सिर में गैस चढ़ सकता है।
-गैस की परेशानी होने पर अजवाइन का सेवन करें।
-हींग के सेवन से पेट में गैस बनने की परेशानी कम हो सकती है।</description><guid>2581</guid><pubDate>21-Mar-2026 2:05:21 pm</pubDate></item><item><title> गर्मियों का सुपरफूड है खीरा...सलाद बनाकर खाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2580</link><description>गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और अब तेज धूप से लोग बेहाल भी होने लगे हैं। तेज धूप की वजह से डिहाईड्रेशन की समस्या होना लाजमी है। इससे बचने के लिए पानी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है और गर्मियों के मुताबिक चीजों को डायट में शामिल करना भी उतना ही जरूरी है। गर्मी के मौसम के लिए खीरा सबसे बेस्ट है। इसमें पानी की अच्छी मात्रा होती है। खीरे से बनी सलाद में कैलोरीज की मात्रा कम होती है और पानी की मात्रा ज्यादा इसलिए इसे खाकर तुरंत पेट भर सकता है। इसलिए हेल्दी स्नैकिंग के लिए भी इसे खा सकते हैं। यहां हम 5 तरह से खीरे की सलाद बनाने का तरीका बता रहे हैं जानिए।
1) मूंगफली खीरे की सलाद
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए स्लाइस किए खीरे, पीनट बटर, सोया सॉस, शहद, तिल का तेल,दरदरी पिसी मूंगफली। सलाद बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में पीनट बटर, सोया सॉस, शहद, तिल के तेल को अच्छे से मिलाएं। फिर एक बड़ी कटोरी में कटे हुए खीरे डालें इसमें तैयार की सॉस डालें और दरदरी पिसी मूंगफली से सजाएं और सर्व करें।
2) नींबू वाले खीरे की सलाद
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए खीरा, जैतून का तेल, काली मिर्च, पुदीने की पत्तियां। सलाद बनाने के लिए सभी चीजों को मिक्स करें और फिर सर्व करें।
3) स्पाइसी खीरे की सलाद
इसे बनाने के लिए खीरे के टुकड़े,नींबू का रस, मिर्ची पाउडर, नमक, शहद और ऑलिव ऑयल लें। सभी को अच्छे से मिक्स करें और फिर सर्व करें।
4)एवोकाडो और खीरे की सलाद
एवोकाडो सेहत के लिए काफी अच्छा होता है। इसे खीरे के साथ मिलाकर सलाद बना सकते हैं। इसे बनाने के लिए चाहिए खीरे के टुकड़े, एवोकाडो, नमक, काली मिर्च, धनिया फ्रेश, तिल के बीज और नींबू का रस। एवोकाडो को मैश करके खीरे के टुकड़ों के साथ मिलाएं और फिर नमक, काली मिर्च, धनिया फ्रेश, तिल के बीज और नींबू का रस डालकर सर्व करें।
5) ग्रीक योगर्ट और खीरा
इस सलाद को बनाने के लिए कटे हुए खीरे, ग्रीक योगर्ट, नींबू का रस, नमक, काली मिर्च, ऑलिव ऑयल चाहिए। इसे तैयार करने के लिए सलाद की प्लेट में खीरा और योगर्ट को मिक्स करें। फिर ऑलिव ऑयल के साथ नमक और काली मिर्ची डालें।</description><guid>2580</guid><pubDate>13-Mar-2026 1:04:26 pm</pubDate></item><item><title> हेल्थ प्रॉब्लम्स जिन्हें नजरअंदाज करना महिलाओं को पड़ सकता है भारी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2579</link><description>अकसर महिलाएं कुछ हेल्थ प्रॉब्लम्स को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं। ऐसी महिलाएं डॉक्टर के पास भी तब जाती हैं, जब समस्या हद से ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसी ही समस्याओं का सबसे कॉमन उदाहरण है लगातार महसूस होने वाली थकान है। महिलाएं अक्सर इसे काम का बोझ या व्यस्त दिनचर्या समझकर टाल देती हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली थकान एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, विटामिन की कमी या लंबे समय के तनाव का संकेत भी हो सकती है। रोजवॉक बाय रेनबो हॉस्पिटल्स की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. स्वाति सिन्हा से जानते हैं सेहत से जुड़ी ऐसी 5 समस्याओं के बारे में जिन्हें महिलाएं अकसर रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा समझकर नजरअंदाज करती रहती हैं।
बहुत दर्द या ज्यादा ब्लीडिंग वाले पीरियड्स
कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द या अधिक ब्लीडिंग होना सामान्य है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह हमेशा सामान्य नहीं होता। डॉ. स्वाति सिन्हा कहती हैं कि बहुत ज्यादा दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग या पीरियड्स का अनियमित होना कई बार एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है।
बार-बार यूरिन इन्फेक्शन होना
कुछ महिलाएं बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन या पेशाब के दौरान महसूस होने वाली जलन को हल्की समस्या समझकर खुद ही दवा ले लेती हैं। लेकिन बार-बार होने वाले यूटीआई कई बार किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी होता है।
पाचन से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करना
लगातार पेट फूलना, कब्ज या पेट में असहजता जैसी समस्याएं भी अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो यह सेहत से जुड़ी कई समस्याओं जैसे हार्मोनल बदलाव, गट हेल्थ से जुड़ी समस्या और अन्य मेडिकल कंडीशन का कारण हो सकती है। इसलिए पाचन से जुड़ी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य के संकेतों को अनदेखा करना
चिंता, मूड स्विंग्स, नींद की समस्या या भावनात्मक थकान को अक्सर रोजमर्रा के तनाव का हिस्सा मान लिया जाता है। लेकिन कई मामलों में ये लक्षण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं या हार्मोनल बदलाव का संकेत हो सकते हैं। अगर इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
असामान्य ब्लीडिंग और अन्य निजी समस्याएं
सीके बिड़ला हॉस्पिटल (दिल्ली) की फिजिशियन डॉक्टर मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जिनके बारे में महिलाएं झिझक के कारण डॉक्टर से बात नहीं करतीं। जिसमें पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग, सेक्स के बाद ब्लीडिंग और सेक्स के दौरान दर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं। ये लक्षण कई बार सर्विक्स या यूटरस से जुड़ी समस्या, एंडोमेट्रियोसिस या किसी इन्फेक्शन का संकेत हो सकते हैं। इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
समय पर पहचान और इलाज क्यों जरूरी है
डॉक्टरों की मानें तो शरीर बार-बार संकेत देता है कि कुछ ठीक नहीं है। अगर इन संकेतों को सामान्य मानकर नजरअंदाज किया जाता रहे, तो बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि अगर कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे या असामान्य लगे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अपने शरीर के संकेतों को समझना और नियमित हेल्थ चेक-अप करवाना लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी है।
--</description><guid>2579</guid><pubDate>13-Mar-2026 12:59:03 pm</pubDate></item><item><title>क्या लूज मोशन में चाय-कॉफी पीना सेफ होता है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2578</link><description> लूज मोशन या डायरिया वायरल/बैक्टीरियल संक्रमण, दूषित खाना या पानी, फूड पॉइजनिंग की वजह से हो सकता है। इसके अलावा, जिनकी पाचन क्षमता कमजोर होती है, उन्हें भी कुछ-कुछ समय के अंतराल में लूज मोशन की दिक्कत हो जाती है। बहरहाल, लूज मोशन होने की वजह से शरीर से काफी मात्रा में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए एक्सपर्ट इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने की सलाह देते हैं।
दस्त होने पर चाय-कॉफी पीना सही होता है?
 लूज मोशन में चाय या कॉफी पीना बिल्कुल सही नहीं है। इनमें कैफीन होता है। कैफीन एक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जो शरीर से तरल पदार्थों का नुकसान बढ़ाता है और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का कारण बनता है। यही नहीं, दस्त होने पर चाय पीने से आंतों पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिससे डायरिया जैसी कंडीशन और बिगड़ सकती है। लूज मोशन होने चाय या कॉफी पीने के बजाय बेहतर है कि आप पानी, नारियल पानी या बिना कैफीन वाली हर्बल चाय का सेवन करें।
लूज मोशन में चाय या कॉफी पीने के नुकसान
डिहाइड्रेशन का रिस्कः दस्त होने पर शरीर से पहले की काफी मात्रा में पानी निकल जाता है। ऐसे में अगर आप चाय या कॉफी भी पीते हैं, तो इसकी वजह से बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है। दस्त में बॉडी का डिहाइड्रेट होना सही संकेत नहीं है। इससे चक्कर आना, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
डाइजेस्टिव ट्रैक्ट पर असरः दस्त यानी डायरिया होने पर चाय या कॉफी इसलिए भी नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से डाइजेस्टिव ट्रैक्ट पर बुरा असर पड़ता है, जो कि पहले से ही कमजोर है। ऐसे में पेट दर्द, पेट में अकड़न जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
कमजोर पाचन क्षमताः दस्त होने के बावजूद बार-बार चाय पीना सही नहीं है। इससे पाचन क्षमता पहले की तुलना में और भी कमजोर हो जाती है। इससे मरीज की रिकवरी भी धीमी हो जाती है, जो कि सही नहीं है।
निष्कर्ष
लूज मोशन होने पर किसी को भी चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर किसी की आदत है नियमित चाय या कॉफी पीने की तो ऐसी स्थिति में बेहतर होगा कि आप हर्बल टी पिएं। इसके अलावा, दस्त लगने पर दिन भर में काफी ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। अदरक की चाय या सूप भी इस अवस्था में फायदेमंद होता है।</description><guid>2578</guid><pubDate>10-Mar-2026 11:00:33 pm</pubDate></item><item><title>  हंग कर्ड या सामान्य दही: पाचन के लिए क्या है ज्यादा बेहतर?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2577</link><description>भारतीय भोजन में दाल-चावल हो, पराठा हो या फिर खिचड़ी, दही के साथ खाने का स्वाद ही अलग हो जाता है। यही वजह है कि लगभग हर घर में दही रोजाना अलग-अलग तरीकों से खाया जाता है। दही न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि इसे पाचन के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं लेकिन पिछले कुछ समय में हेल्दी खाने का ट्रेंड बढ़ने के साथ हंग कर्ड का सेवन भी बढ़ा है। सलाद, डिप्स, सैंडविच और हेल्दी स्नैक्स में इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। कई लोग इसे सामान्य दही से ज्यादा हेल्दी मानते हैं, क्योंकि यह गाढ़ा, क्रीमी और प्रोटीन से भरपूर माना जाता है।
दोनों ही चीजें दूध से बनती हैं और पोषण से भरपूर होती हैं। हालांकि उनकी बनावट, पानी की मात्रा और पोषक तत्वों में थोड़ा अंतर होता है, जिससे पाचन और शरीर पर उनका प्रभाव भी थोड़ा अलग हो सकता है। पाचन के लिहाज से दोनों ही विकल्प अच्छे हो सकते हैं, लेकिन यह व्यक्ति की पाचन क्षमता और जरूरत पर निर्भर करता है। सामान्य दही हल्का होता है और इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को भारी चीजें पचाने में परेशानी होती है या जिनका पाचन कमजोर है, उनके लिए सामान्य दही ज्यादा अच्छा विकल्प हो सकता है।
वहीं हंग कर्ड गाढ़ा होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह थोड़ा भारी महसूस हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को हाई प्रोटीन डाइट चाहिए, उनके लिए हंग कर्ड एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
हंग कर्ड सामान्य दही से ही बनाया जाता है। इसे तैयार करने के लिए दही को एक सूती कपड़े में बांधकर कुछ घंटों के लिए टांग दिया जाता है, जिससे उसका पानी यानी व्हे (Whey) निकल जाता है। इस प्रक्रिया के बाद हंग कर्ड में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा और पानी की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए यह गाढ़ा और ज्यादा क्रीमी महसूस होता है।
 सामान्य दही पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और पेट की कई समस्याओं जैसे गैस, एसिडिटी और कब्ज में राहतदे सकता है। इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह शरीर को हाइड्रेशन भी देता है और गर्मियों में ठंडक पहुंचाने में मदद करता है। दही को हमेशा ताजा और सही मात्रा में ही खाना चाहिए। बहुत ज्यादा खट्टा दही पेट के लिए सही नहीं माना जाता। दही को दिन के समय खाना ज्यादा अच्छा माना जाता है क्योंकि रात में कुछ लोगों को इसे पचाने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा दही में ज्यादा नमक या चीनी मिलाने से बचना चाहिए। अगर दही को फल, सलाद या हेल्दी मसालों के साथ लिया जाए तो यह और भी पौष्टिक बन सकता है।
हंग कर्ड और सामान्य दही दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन पाचन के लिहाज से सामान्य दही हल्का और जल्दी पचने वाला माना जाता है। वहीं हंग कर्ड प्रोटीन से भरपूर और गाढ़ा होता है, जो खास जरूरतों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। इसलिए यह कहना सही होगा कि दोनों में से कौन बेहतर है, यह व्यक्ति की डाइट, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य जरूरतों पर निर्भर करता है।



</description><guid>2577</guid><pubDate>08-Mar-2026 5:44:46 pm</pubDate></item><item><title>  स्किन की इन 5 समस्याओं को दूर करता है कुंकुमादि तेल, इस तरह से करें इस्तेमाल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2576</link><description>जब किसी के चेहरे पर दाग-धब्बे होते हैं या झाइयां पड़ती हैं तो आयुर्वेद में कुंकुमादि तेल लगाने की सलाह दी जाती है। इस तेल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। कुंकुमादि तेल मुंहासों और फुंसियों को कम करने में मदद करता है। यह तेल त्वचा पर सीबम के उत्पादन को नियंत्रित करता है और रोमछिद्रों को बंद होने से रोकने में मदद करता है।
दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाए
अगर आपके चेहरे पर दाग-धब्बे हैं, तो आप कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मुलेठी और मंजिष्ठा के गुण होते हैं, जो मेलानिन के उत्पादन को संतुलित करते हैं। यह सनटैनिंग, झाइयों और काले धब्बों को कम करने में असरदार होता है। चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने के लिए आप कुछ दिनों तक कुंकुमादि तेल का यूज कर सकते हैं।
ड्राई स्किन से छुटकारा
रूखी और बेजान त्वचा से छुटकारा पाने के लिए आप कुंकुमादि तेल का यूज कर सकते हैं। इस तेल को लगाने से त्वचा को पोषण मिलता है और नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इस तेल को लगाने से त्वचा की ड्राईनेस दूर होती है। यह चेहरे की बनावट को बेहतर करने में मदद करता है और रंगत को सुधारता है।
मुंहासों से निजात दिलाए
अगर आपके चेहरे पर कील-मुंहासे या एक्ने हैं तो कुंकुमादि तेल लगा सकते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मुंहासों को मिटाने में असरदार होते हैं। इस तेल को लगाने से मुंहासे पैदा होने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और इससे मुंहासों को कम करने में मदद मिलती है। इस तेल को लगाने से मुंहासों के दाग भी धीरे-धीरे रिमूव होने लगते हैं।
झुर्रियों को मिटाने में असरदार
चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए भी आप कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। इस तेल को लगाने से एंटी-एजिंग के लक्षण कम होते हैं। इस तेल को लगाने से फाइन लाइंस की समस्या दूर होती है और झुर्रियां कम होती हैं। यह त्वचा को टाइट बनाता है और जवां बनाए रखने में मदद करता है।
बेजान त्वचा से छुटकारा
कुंकुमादि तेल बेजान त्वचा से भी छुटकारा दिलाता है। इस तेल को लगाने से त्वचा पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और बेजान त्वचा ठीक होती है। इस तेल को लगाने से त्वचा का निखार वापस आता है। इस तेल को लगाने से त्वचा का निखार कई गुना बढ़ जाता है।</description><guid>2576</guid><pubDate>07-Mar-2026 4:54:01 pm</pubDate></item><item><title>गर्मियों में छाछ पीने का सही समय क्या है और इससे क्या फायदे मिलेंगे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2575</link><description>गर्मियों की तपिश जैसे ही शरीर को छूकर निकलने लगती है, हमारा ठंडे पेय पदार्थों के साथ प्यार उतना ही बढ़ने लगता है। गर्मियां जितनी ज्यादा बढ़ती है शरीर को अपना तापमान कंट्रोल करने के लिए उतनी ही ज्यादा हाइड्रेशन की जरूरत पड़ती है और ठंड से संपर्क अच्छा लगने लगता है। ऐसे में आप क्या पीते हैं? नींबू पानी, नारियल पानी? हालांकि, इस समय छाछ एक ऐसा पारंपरिक पेय बन चुका है, जो न केवल शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी बेहतर बना सकता है। आपको बता दें कि दही से बनने वाली छाछ में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो गर्मी के मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि जरूरी है कि आप इसका सेवन सही समय पर करें वरना आपको परेशानी हो सकती है। तो आइए हम आपको बताते हैं कि क्या है छाछ का सेवन करने का सबसे सही समय और इसके सेवन से आपको क्या लाभ मिल सकते हैं।
हमारे बुजुर्ग बताते हैं आए हैं कि छाछ पीने का सबसे उत्तम समय दोपहर का होता है और यह आयुर्वेद भी मानता है। दोपहर के समय में खासकर लंच के बाद छाछ का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इस समय जब भोजन के साथ छाछ पीते हैं तो खाने को आसानी से पचने में मदद मिलती है और पेट में भारीपन व गैस जैसी समस्याएं कम हो जाती है। वहीं गर्मियों में मौसम में जब आप दोपहर के समय इसका सेवन करते हैं तो शरीर को ठंडक भी महसूस होती है।
छाछ एक प्रोबायोटिक पेय पदार्थ है, जो उसे आपकी आंतों के लिए सबसे अच्छे पेय पदार्थों में से एक बनाता है। छाछ में पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया न सिर्फ पाचन क्रिया को अच्छा बनाते हैं, बल्कि आंतों को हेल्दी रखने में भी मदद करते हैं। ऐसे में जब आप इसका सेवन सही समय पर करते हैं तो गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं आपसे दूर रहने लगती हैं। वहीं जब आप नियमित रूप से छाछ का सेवन करते हैं तो पेट हल्का रहता है और पाचन प्रक्रिया बेहतर ढंग से हो पाती है।
 मेडिकल साइंस कहता है कि अगर शरीर में तरल की कमी आनी डिहाइड्रेशन हो जाता है, तो उससे पसीना आना कम हो जाता है और शरीर गर्मी का शिकार हो जाता है। अब ऐसे में छाछ भी शरीर को हाइड्रेट रखने का एक अच्छा पेय पदार्थ है और खासतौर पर इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स भी पाए जाते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर हाइड्रेट रहता है। साथ ही इसे पीने से शरीर की थकान और कमजोरी भी दूर हो जाती है।
वजन कंट्रोल में भी मददगार
अगर आप वजन कम करने का प्लान कर रहे हैं, तो कोल्ड ड्रिंक्स जैसे पेय पदार्थ पीने से कहीं बेहतर विकल्प छाछ है। क्योंकि छाछ में उनकी तुलना में कैलोरी काफी कम होती है और वहीं यह पाचन को अच्छा बनाने में भी मदद करता है जिससे काफी फायदा मिलता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती, आप अनहेल्दी स्नैकिंग से दूर रहते हैं और तय समय पर पौष्टिक भोजन करने की आदत बन जाती है।</description><guid>2575</guid><pubDate>06-Mar-2026 4:53:34 pm</pubDate></item><item><title>हर डायबिटीज रोगी को खाने चाहिए ये 2 फल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2574</link><description>हेल्दी रहने के लिए फलों का सेवन काफी अहम बताया जाता है। हर फल की अपनी खासियत होती है और इनमें अलग-अलग तरह के पोषक तत्व भी होते हैं। ऐसे ही दो फल और हैं जो खासतौर से डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। डायबिटीज रिवर्सल एक्सपर्ट डॉ प्रमोद त्रिपाठी बताते हैं कि ये दो फल इन्सुलिन को सपोर्ट भी करते हैं और थोड़ा-थोड़ा डायबिटीज की दवाइयों की तरह भी काम करते हैं। डॉक्टर हर शुगर के मरीज को ये दो फल खाने की सलाह देते हैं। उन्होंने इनके फायदे और कई जरूरी बातों के बारे में भी बताया है। तो चलिए जानते हैं वो दो फल आखिर कौन से हैं।
डायबिटीज में दवा की तरह काम करती है मौसंबी
डॉ प्रमोद त्रिपाठी कहते हैं कि पहला फल मौसंबी है, जो हर शुगर के पेशेंट को जरूर खाना चाहिए। इसका GI महज 41-45 होता है और ये फाइबर और फ्लेवनॉयड्स में रिच होती है। दरअसल मौसंबी 'अकार्बोज' नाम की डायबिटीज की दवा की तरह काम करती है। ये खाने के बाद शुगर की स्पाइक को कम करती है क्योंकि आपकी आंतों में कार्बोहाइड्रेट का एब्जॉरपशन धीमा कर देता है।
डायबिटीज रोगी खूब खाएं संतरा
दूसरा फल है संतरा जो डायबिटीज के मरीजों को जरूर खाना चाहिए। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 50-52 के बीच होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, फाइबर और हेस्पेरिडिन नामक प्लांट बेस्ड फ्लेवोनॉयड भी मौजूद होता है। डॉ प्रमोद कहते हैं कि संतरे का असर मेटफॉर्मिन नामक दवाई की तरह होता है। ये पूरे शरीर की ब्लड वेसल्स में एंटी इन्फ्लेमेटरी इफेक्ट ले कर आता है। इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है और लिवर से शुगर के रिलीज को स्लो कर देता है।
संतरे और मौसंबी का जूस फायदेमंद है या फल?
अब एक और अहम सवाल है कि क्या संतरे और मौसंबी को साबुत खाना फायदेमंद है या इनका जूस बनाकर भी पी सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो हमेशा साबुत फल खाना ही बेहतर होता है। जब आप संतरे या मौसंबी का जूस बनाकर पीते हैं, तो सारा फाइबर निकल जाता है। ये फाइबर ही होता है जो शुगर के अवशोषण को कम करता है। जूस में सिर्फ शुगर बचती है, जिससे शुगर लेवल स्पाइक होता है। वहीं जब आप साबुत फल खाते हैं तो फाइबर, विटामिन और बाकी पोषक तत्व शरीर को संतुलित रूप में मिलते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल भी बैलेंस बना रहता है।</description><guid>2574</guid><pubDate>05-Mar-2026 3:45:00 pm</pubDate></item><item><title> क्या इंस्टेंट ओट्स वाकई हेल्दी ब्रेकफास्ट है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2573</link><description>ओट्स एक तरह का होल ग्रेन फूड है। इसमें फाइबर और प्रोटीन भी मौजूद होता है। ओट्स मॉर्निंग एनर्जी और वेट लॉस के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। कई लोग रोल्ड ओट्स को खाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग इंस्टेंट ओट्स को हेल्दी ब्रेकफास्ट समझकर खा लेते हैं, लेकिन क्या इंस्टेंट ओट्स वाकई एक हेल्दी विकल्प है? इंस्टेंट ओट्स जल्दी तैयार हो जाते हैं इसलिए इसे ज्यादातर लोग अपने नाश्ते में शामिल करते हैं पर इसके सेहतमंद होने पर सवाल खड़ा होता है। एक्सपर्ट और रिसर्च की मदद से इस सवाल का जवाब आगे जानते हैं।
इंस्टेंट ओट्स खाने से पेट जल्दी भरता है-
एक स्टडी में 48 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। हर व्यक्ति को अलग-अलग दिनों पर अलग-अलग नाश्ता दिया गया। जिन लोगों को नाश्ते में इंस्टेंट ओट्स दिए गए, उन्हें पेट जल्दी भरा हुआ महसूस हुआ। इस स्टडी में इंस्टेंट ओट्स खाने का कोई नुकसान नहीं देखा गया है।
इंस्टेंट ओट्स ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं इंस्टेंट ओट्स भी रोल्ड ओट्स की तरह हेल्दी होते हैं। इंस्टेंट ओट्स और रोल्ड ओट्स की कैलोरी में ज्यादा फर्क नहीं होता। 40 ग्राम इंस्टेंट ओट्स में करीब 200 कैलोरी होती हैं वहीं रोल्ड ओट्स में करीब 150 कैलोरी होती हैं। इंस्टेंट ओट्स में फैट और फाइबर तीन ग्राम होता है और रोल्ड ओट्स में फैट और फाइबर पांच से छह ग्राम होता है। इंस्टेंट ओट्स ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं और इन्हें खाने से शुगर लेवल बढ़ सकता है वहीं दूसरी ओर रोल्ड ओट्स कम प्रोसेस्ड होते हैं, इनमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, ये धीरे पचते हैं और इसे खाकर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है।
इंस्टेंट ओट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 80 होता है और ग्लाइसेमिक लोड करीब 17 होता है। वहीं रोल्ड ओट्स की बात करें, तो जीआई 55 होता है और जीएल करीब 11 होता है। यानी डायबिटिक मरीजों के लिए रोल्ड ओट्स ज्यादा बेहतर विकल्प है क्योंकि इसका जीआई, इंस्टेंट ओट्स के मुकाबले कम होता है।
इंस्टेंट और रोल्ड ओट्स दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं, आप दोनों में से किसी का भी सेवन कर सकते हैं। National Library Of Medicine की स्टडी कहती है कि इंस्टेंट ओट्स खाने से सेहत को कोई नुकसान नहीं होता वहीं इंस्टेंट ओट्स, रोल्ड ओट्स के मुकाबले ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं और इनका जीआई भी रोल्ड ओट्स के मुकाबले ज्यादा होता है, इसलिए डायबिटिक मरीजों के लिए रोल्ड ओट्स बेहतर हैं और स्वस्थ लोगों के लिए भी रोल्ड ओट्स बेहतर विकल्प हैं, हालांकि इंस्टेंट ओट्स खाकर भी सेहत पर कोई बुरा असर देखा नहीं जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं।

</description><guid>2573</guid><pubDate>04-Mar-2026 5:15:06 pm</pubDate></item><item><title>रात में कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए ...!</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2572</link><description>रात का समय शरीर के आराम और खुद को रिपेयर करने का होता है. इस दौरान पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है, इसलिए रात में क्या और कितना खाया जा रहा है, इसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. अगर रात का खानपान सही न हो, तो शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता. इसके संकेत कई रूपों में दिखते हैं, जैसे रात में पेट भारी लगना, गैस, एसिडिटी, सीने में जलन, नींद बार-बार टूटना या सुबह उठते ही थकान महसूस होना.
कुछ लोगों को रात में बेचैनी, पसीना आना या सुबह सिर भारी लगने की समस्या भी होती है. वजन बढ़ना, कब्ज और दिनभर सुस्ती रहना भी इस बात का इशारा है कि रात के खाने पर ध्यान देने की जरूरत है. ये लक्षण बताते हैं कि रात में भोजन का समय, मात्रा और आदतें सही नहीं हैं. इसलिए अच्छी नींद और बेहतर सेहत के लिए रात के खानपान को संतुलित रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि रात के समय कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए.
रात में कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए?
रात में ऐसे फूड्स नहीं खाने चाहिए जो पचने में भारी हों या पेट पर ज़्यादा दबाव डालें. तले-भुने और बहुत मसालेदार फूड्स पाचन को बिगाड़ सकते हैं और एसिडिटी की समस्या बढ़ा देते हैं. बहुत मीठा खाने से ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है और नींद प्रभावित होती है. ज्यादा नमक वाले फूड्स शरीर में पानी रोकते हैं, जिससे सूजन और बेचैनी हो सकती है.
प्रोसेस्ड और जंक फूड्स में मौजूद फैट पाचन तंत्र को सुस्त कर देता है. रात में चाय, कॉफी या कैफीन वाले पेय लेने से दिमाग एक्टिव रहता है और नींद नहीं आती. बहुत ज्यादा ठंडे या भारी डेयरी प्रोडक्ट्स भी पेट में गड़बड़ी कर सकते हैं. इसलिए रात में ऐसे फूड्स से दूरी रखना सेहत के लिए बेहतर होता है.
रात में कौन से फूड्स खाना सही है?
रात के समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है. उबली या हल्की सब्जियां, दाल, सादी रोटी या थोड़ा चावल पाचन के लिए सही होते हैं. खिचड़ी, सूप या दलिया जैसे फूड्स पेट पर बोझ नहीं डालते.
सीमित मात्रा में दही या छाछ लेने से पाचन को आराम मिलता है. ये फूड्स शरीर को ज़रूरी पोषण देते हैं और नींद को भी बेहतर बनाते हैं. हल्का भोजन करने से पेट साफ रहता है और सुबह शरीर हल्का महसूस करता है. इसलिए रात में सादा और संतुलित खाना फायदेमंद होता है.
रात को अच्छी सेहत के लिए ये भी जरूरी
रात का खाना सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले खा लेना चाहिए. खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और हल्की वॉक करें. टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना न खाएं, ताकि पेट भरने का सही संकेत मिले. बहुत अधिक पानी या ठंडा पानी रात में न पिएं. सोने और उठने का समय तय रखें. तनाव से दूर रहना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है. सही खानपान के साथ सही आदतें अपनाने से रात में शरीर को पूरा आराम मिलता है और सेहत बनी रहती है. </description><guid>2572</guid><pubDate>03-Mar-2026 8:04:45 pm</pubDate></item><item><title>  रात में स्क्रीन की ब्लू लाइट आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2571</link><description> आज के समय में ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी में लगे रहते हैं, जिसके बाद लोगों को सोने में परेशानी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने से अक्सर लोगों को सोने से पहले मोबाइल और टीवी जैसी स्क्रीन वाली चीजों का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाती है, लेकिन क्या वाकई रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?
रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस नींद को कैसे प्रभावित करती है?
 रात में तेज ब्राइटनेस वाली स्क्रीन का इस्तेमाल करने से व्यक्ति की नींद में काफी परेशानी हो सकती है। मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट निकलती है, जो सीधे शरीर के नेचुरल स्लीप-वेक साइकिल पर असर डालती है, जिसे सर्कडियन रिदम भी कहा जाता है। ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को कम करती है। बता दें, मेलाटोनिन हार्मोन आपको नींद दिलाने के लिए जिम्मेदार होता है। जब मेलाटोनिन का लेवल कम होता है, तो आपका ब्रेन ज्यादा देर तक अलर्ट रहता है, जिससे सोना मुश्किल हो जाता है।
 नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, रात को कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) नींद और बायोलॉजिकल रिदम को गंभीर रूप से बाधित करती है। ये ब्लू लाइट व्यक्ति के शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को कम करती है, शरीर के तापमान को बढ़ाती है और सुबह की एकाग्रता को प्रभावित करती है। लाइट की तीव्रता के मुकाबले उसकी वेवलेंथ स्वास्थ्य पर अधिक बुरा प्रभाव डालता है।
नींद की क्वालिटी होती है प्रभावित
, रात में तेज रोशनी वाली स्क्रीन आपके दिमाग को यह भी सिग्नल देती है कि अभी भी दिन है। इससे नींद आने में देर होती है और नींद की क्वालिटी कम हो जाती है। अगर आप सो भी जाते हैं, तो सोने से पहले तेज रोशनी में रहने से नींद हल्की हो सकती है और आप बार-बार जाग सकते हैं, साथ ही, ऐसा लंबे समय तक करने से समय के साथ, खराब नींद मूड, कॉन्संट्रेशन, इम्यूनिटी और पूरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती है।
अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या करें?
नींद की गुणवत्ता में सुधार करने और अच्छी नींद को बढ़ावा देने के लिए कुछ हेल्दी आदतों को अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
-शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें।
-नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें।
-सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें और इसके इस्तेमाल से बचें।
-अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं।
-सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल न करने और शांति का माहौल बनाकर सोने से आपके शरीर को आरामदायक नींद के लिए नेचुरली तैयार होने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
रात को स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को प्रभावित करती है। रात को सोने से पहले ब्लू लाइट का ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करने से नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है और ऐसा लंबे समय तक करने से काम पर फोकस करने में परेशानी होने, नींद के प्रभावित होने, मूड पर असर पड़ने, इम्यूनिटी पर असर पड़ने और स्वास्थ्य पर बुरा असर होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में नींद से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें। नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें, सोने से 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करें, अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं। इसके अलावा, नींद से जुड़ी अधिक समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</description><guid>2571</guid><pubDate>03-Mar-2026 5:38:26 pm</pubDate></item><item><title>  सुपरफूड है सहजन (मुनगा) की फली का सूप  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2570</link><description>औषधीय गुणों से भरपूर सहजन (मुनगा) का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। सहजन की फली में अच्छी मात्रा में बहुत पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे में इसके सूप का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। सहजन के सूप को सुपरफूड माना जाता है । आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर सहजन यानी मोरिंगा के सूप में भरपूर मात्रा में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीबैक्टीरियल के गुण, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जिससे पाचन में सुधार करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, वजन कम करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।
हार्ट के लिए फायदेमंद
सहजन के सूप में अच्छी मात्रा में पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।
ब्लड शुगर को नियंत्रित करे
सहजन यानी मोरिंगा के सूप में एंटी-डायबिटीक के गुण, साथ ही, इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। ऐसे में इसके सूप का सेवन करने से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
पाचन में सुधार करे
सहजन के सूप में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। इसका सेवन करने से गट के बैक्टीरिया को बेहतर करने, पाचन में सुधार करने, बाउल मूवमेंट में सुधार करने, सूजन को कम करने, पाचन प्रक्रिया में सुधार करने और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।
हड्डियों के लिए फायदेमंद
सहजन के सूप में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं। इससे हड्डियों को मजबूती देने, शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने, शरीर की थकान को दूर करने में मदद मिलती है।
इम्यूनिटी बूस्ट करने में सहायक
सहजन (मुनगा) के सूप में अच्छी मात्रा में विटामिन सी, एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन से बचाव करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, थकान को दूर करने, कमजोरी को दूर करने, शरीर को हाइड्रेट करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।

सहजन की फली का सूप बनाने की विधि
सामग्री
सहजन
 छोटा चम्मच मक्खन
1 तेज पत्ता
1 हरी मिर्च
5-6 लहसुन की कलियाँ
 टमाटर
कुछ धनिया के डंठल
1 बड़ा चम्मच पीली मूंग दाल
सूप बनाने के लिए 1 कप पानी।
सूप के लिए 1.5 कप पानी
आवश्यकतानुसार नमक
 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
 छोटा चम्मच सौंफ | सौंफ के बीज
स्वादानुसार काली मिर्च पाउडर
निर्देश
प्रेशर कुकर/पैन में मक्खन डालें।
अब इसमें एक तेज पत्ता, हरी मिर्च, लहसुन की कलियाँ, आधा टमाटर, कुछ धनिया के डंठल और 1 बड़ा चम्मच मूंग दाल मिला दें।
एक मिनट तक भूनें और फिर कटी हुई सहजन की फली डालें।
एक कप पानी, थोड़ा नमक, हल्दी पाउडर और सौंफ के बीज डालें।
कुकर को ढककर बंद कर दें।
प्रेशर कुकर में 3 सीटी आने तक पकाएं।
प्रेशर कम होने पर कुकर खोलें, सब कुछ ठंडा होने दें।
सब कुछ पीस लें
पीसते समय 1 कप पानी डालें
इसे अच्छी तरह छान लें
छानते समय पानी डालें
रेशे को फेंक दें
नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
इसे उबलने दें और गैस बंद कर दें।
सहजन की फली का सूप तैयार है
</description><guid>2570</guid><pubDate>02-Mar-2026 4:29:15 pm</pubDate></item><item><title> पेट साफ करने के लिए फायदेमंद हैं ये 3 सीड्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2569</link><description>पाचन तंत्र का सही तरीके से काम करना पूरे शरीर की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। जब पेट ठीक से साफ नहीं होता, तो कब्ज, पेट फूलना, भारीपन, गैस और सुस्ती जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो सकते हैं। बार-बार दवा लेना लंबे समय में पाचन तंत्र को कमजोर कर सकता है। दवा के बजाय हेल्दी सीड्स का सेवन कर सकते हैं। सीड्स की मदद से पेट साफ रखने में मदद मिल सकती है और पाचन तंत्र के लिए भी कई सीड्स फायदेमंद होते हैं।
1. चिया सीड्स
-इसमें सॉल्यूबल फाइबर होता है और इसे भिगाने के बाद यह जेल के फॉर्म में बन जाता है। ये जेल तीन काम करता है-
-शुगर अब्जार्ब होने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
-गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है।
-इससे आप बेहतर ढंग से मल त्याग कर पाते हैं।
-MDPI की एक स्टडी के मुताबिक, कब्ज के मरीजों के लिए चिया सीड्स का सेवन फायदेमंद होता है। चिया सीड्स की मदद से बाउल मूवमेंट में सुधार होता है। चिया सीड्स में सॉल्यूबल फाइबर होता है जो स्टूल को नर्म बनाता है और पेट को साफ करने में मदद करता है।
कैसे खाएं चिया सीड्स?
-इसे ड्राई फॉर्म में न खाएं।
चिया सीड्स को रातभर भीगाकर ही खाएं।
-अगर रातभर नहीं भीगाकर रखा है, तो खाने से 15 से 20 मिनट पहले जरूर भीगा लें और फिर इसे खाएं।
-इसे बादाम के दूध या योगर्ट के साथ मिलाएं और बेरीज डालकर भी खा सकते हैं।
-2. फ्लैक्स सीड्स- Flax Seeds
-फ्लैक्स सीड्स ओमेगा 3 से भरपूर होते हैं और इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
-ब्लोटिंग, हार्मोनल संतुलिन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को बेहतर करने में फ्लैक्स सीड्स का सेवन फायदेमंद है।
-नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, फ्लैक्स सीड्स का सेवन करने से आंतों की मूवमेंट बेहतर होती है जिससे पेट साफ होने में मदद मिलती है।
कैसे खाएं फ्लैक्स सीड्स?
-फ्लैक्स सीड्स को रॉ खाने के बजाय इसे पीसकर खाना जरूरी है तभी शरीर इसके गुणोंं को अब्जार्ब कर पाएगा।
-एक टेबलस्पून पीसे हुए फ्लैक्स सीड्स को स्मूदी या ओटमील के साथ मिलाकर खा सकते हैं।
-हफ्ते में 3 से 4 बार इसका सेवन कर सकते हैं।
-3. सब्जा या बेसिल सीड्स- Basil Seeds
-तुलसी के सीड्स को सब्जा सीड्स भी कहते हैं।
-इनकी तासीर ठंडी होती है और इसमें भी चिया सीड्स की तरह सॉल्यूबल फाइबर होता है।
-डाइजेशन की आयुर्वेदिक मेडिसिन में तुलसी के सीड्स का काफी इस्तेमाल होता है।
-नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, सब्जा सीड्स में डाइटरी फाइबर होता है जो आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाता है। स्टडी के मुताबिक, बेसिल सीड्स का हाई फाइबर कंटेंट गट हेल्थ को सपोर्ट करता है और स्टूल मूवमेंट सुधारने में मदद कर सकता है, जिससे पेट साफ रखने में मदद मिलती है।
कैसे खाएं सब्जा सीड्स?
सब्जा सीड्स को ओटमील में डालकर खा सकते हैं।
इसे बादाम के दूध या बादाम के दही के साथ भी मिलाकर खा सकते हैं।
निष्कर्ष:
पेट को साफ करने के लिए चिया सीड्स, सब्जा सीड्स और फ्लैक्स सीड्स का सेवन फायदेमंद होता है। डॉक्टर की सलाह पर इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

</description><guid>2569</guid><pubDate>28-Feb-2026 7:34:06 am</pubDate></item><item><title> महिलाओं का आइडियल वजन कितना होना चाहिए? 50kg से कम या ज्यादा?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2568</link><description> अगर आपके लिए पीक फिटनेस का मतलब 18 परसेंट बॉडी फैट है, यानी कि एकदम सपाट पेट और बहुत पतला लुक , तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। दरअसल, आइडियल बॉडी फैट परसेंटेज खासकर 20 परसेंट से कम महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़्यादा स्ट्रेसफुल हो सकता है और इसे आइडियल लक्ष्य नहीं मानना ​​चाहिए। अगर महिलाओं के लिए आइडियल बॉडी फैट के परसेंटेज के बारे में बात की जाए, तो यह कुछ महिलाओं के लिए 24 से 30 परसेंट के बीच होता है, जबकि कुछ अन्य 20 से 23 परसेंट के बीच बेहतर होता है।
कितना होना चाहिए महिलाओं का आइडियल वजन?
महिलाओं का आइडियल वजन उनकी लंबाई पर निर्भर करता है। इसे मापने का सबसे आसान तरीका है BMI होता है। BMI को मापने के लिए आपको अपने वजन से लंबाई को भाग यानि डिवाइड करके पता लग सकता है।
ऐसे में अगर आपकी हाइट 410 इंच है, तो आपको वजन 4152 kg के बीच होना चाहिए।
50 फीट हाइट वालों का वजन 4556 kg के बीच होना चाहिए।
52 फीट हाइट वाली महिलाओं का वजन 4960 kg के आसपास होना चाहिए।
54 से 56 फीट की महिलाओं का वजन 5365 kg के आसपास होना टाहिए।
जरूरत से ज्यादा फैट कम करने के नुकसान
न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं कि बहुत ज़्यादा पतला होना हार्मोन्स और शरीर के अन्य ज़रूरी फंक्शन को बिगाड़कर उल्टा असर कर सकता है, जिससे आखिरकार शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ता है। दरअसल, सुपर फ्लैट पेट, 18% बॉडी फैट के साथ पीरियड्स का अनियमित होना या बंद होना, बहुत ज़्यादा बालों का झड़ना, लगातार भूख और क्रेविंग, कम एनर्जी लेवल और अजीब मूड स्विंग्स होते हैं। कुल मिलाकर, इस तरह का शरीर एक महिला के सिस्टम के लिए हार्मोनल, शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत ज़्यादा स्ट्रेसफुल होता है।
न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो एक महिला के लिए आइडियल बॉडी फैट परसेंटेज सिर्फ़ वह नहीं है, जिसमें वह अच्छी दिखती है, बल्कि वह है जहां उसकी एनर्जी ज़्यादा हो, मूड स्टेबल हो, पीरियड्स रेगुलर हों, बाल हेल्दी हों और वह खुद को सबसे अच्छा महसूस करे। इसलिए, जब आपका शरीर सही से अपना काम कर रही है, तो आपको ज्यादा पतला होने की जरूरत नहीं है।
हेल्दी खान-पान पर ध्यान
हेल्दी रहने के लिए हमेशा कहा जाता है कि हेल्दी खान-पान पर ध्यान दो। दरअसल, अगर आप हेल्दी खाते-पीते हैं, तो आपका शरीर ऐसे ही फिट रहता है। आपका वजन भी मेंटेन रहता है, आपका फिट रहने के ज्यादा वजन कम करने की जरूरत नहीं होती है। इसलिए ध्यान रखें कि हेल्दी फैट बनाए रखने के लिए हेल्दी खान-पान पर ध्यान दें।</description><guid>2568</guid><pubDate>26-Feb-2026 2:43:44 pm</pubDate></item><item><title> रूखे-पतले हो चुके बालों को फिर से घना और सिल्की बना देंगे ये 3 हेयर मास्क</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2567</link><description>आज के समय में खान-पान पर खास ध्यान न देने और कई अन्य कारणों लोगों को बालों को झड़ने, टूटने, रूखा होने और पतले होने की समस्या होती है। ऐसे में रूखे-पतले बालों की समस्या से राहत के लिए घर पर 3 हेयर मास्क को बनाया जा सकता है। आइए जानें -
1. एलोवेरा जेल, शहद और नारियल तेल हेयर मास्क
रेसिपी-इसके लिए दो चम्मच ताजा एलोवेरा जेल में एक चम्मच शहद और तीन चम्मच नारियल तेल को अच्छे से मिला लें।अब इस हेयर मास्क को बालों और स्कैल्प में आधे घंटे के लिए लगा रहने दे। इसके बाद बालों को माइल्ड शैंपू की मदद से बालों को धो लें।
 फायदे
-इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से मॉइस्चराइज करने और बालों को अंदर तक नमी प्रदान करने में मदद मिलती है, जिससे बालों की फ्रिजीनेस और बालों की ड्राइनेस को कम करने में मदद मिलती है।नारियल तेल और एलोवेरा जेल के इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को जड़ों से मजबूती देने, टूटने से रोकने, घना बनाने और बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
-इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से स्कैल्प का इंफेक्शन से बचाव करने और डैंड्रफ की समस्या से राहत देने में भी मदद मिलती है।
-इससे बालों का डैमेज से बचाव करने और हेल्दी रखने में मदद मिलती है। एलोवेरासूखे और बेजान बालों के लिए एक बहुत अच्छा और नेचुरल उपचार है। इसमें मौजूद 75 एक्टिव तत्व, जैसे विटामिन और एंजाइम, बालों को गहराई से मॉइस्चराइज करते हैं और स्कैल्प को स्वस्थ रखते हैं। यह बालों को नेचुरल लचीलापन बढ़ाकर, उनको डैमेज से बचाता है।
2. केला, शहद और बादाम तेल हेयर मास्क
रेसिपी- इसके लिए 1 पके हुए केले को अच्छे से मैश कर लें।अब इसमें 1 बड़ी चम्मच शहद और 2 बड़ी चम्मच बादाम के तेल को डालकर अच्छे से मिला लें।अब इस हेयर मास्क को साफ बालों पर अच्छे से लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद बालों को हल्के गुनगुने पानी से धो लें।
फायदे
-इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से नमी देने और मॉइस्चराइज करने में मदद मिलती है, जिससे बाल नेचुरली सॉफ्ट और स्मूद बनते हैं।
-इसका इस्तेमाल करने से बालों की फ्रिजीनेस को कम करने और बालों को नेचुरल रूप से शाइनी बनाने में मदद मिलती है।
-इससे बालों को झड़ने, टूटने और बालों का डैमेज से बचाव करने में मदद मिलती है।
-बादाम के तेल, केले और शहद के हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से स्कैल्प को पोषण देने और डैंड्रफ जैसी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिलती है।
3. एवोकाडो, केला, नारियल तेल और शहद हेयर मास्क
रेसिपी
-इसके लिए 1 पके हुए केले और एवोकाडो को अच्छे से मैश कर लें।
-अब इसमें 2 बड़ी चम्मच नारियल तेल और 1 चम्मच शहद को अच्छे से मिला लें।
-अब इसको हेयर मास्क को बालों के सिरे पर लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें।
-इसके बाद माइल्ड शैंपू की मदद से बालों को धो लें।
फायदे
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, सूखे और बेजान बालों (Dry Hair) के लिए नारियल तेल सबसे प्रभावी समाधान है। नारियल तेल अन्य तेलों के मुकाबले बालों की गहराई तक जाकर प्रोटीन के नुकसान को रोकता है, साथ ही, बालों में नमी को लॉक करता है, जिससे बालों को धोने के दौरान शैंपू को बालों की नेचुरल नमी नहीं छीन पाता है। इससे बालों को मजबूती देने, टूटने को कम करता है और उनमें लचीलापन लाता है।इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से नमी देने, बालों के रूखेपन को दूर करने और बालों में मॉइस्चराइज रखने में मदद मिलती है। इसका इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से पोषण देने रिपेयर करने और जड़ों से मजबूती देने में मदद मिलती है। बालों को नेचुरल रूप से शाइनी बनाने और नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इससे बालों को झड़ने और टूटने से बचाव करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
बालों के रूखेपन और पतलेपन को कम करने के लिए एलोवेरा जेल, शहद हेयर मास्क और नारियल तेल, केला, शहद और बादाम ऑयल हेयर मास्क और एवोकाडो, केला, नारियल तेल और शहद हेयर मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनसे बालों को गहराई से पोषण देने, नमी को बालों में लॉक करने, बालों को गहराई से पोषण देने और बालों को हेल्दी बनाए रखने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, बालों को झड़ने, अधिक पतले होने और रूखे होने की समस्या के अधिक होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।</description><guid>2567</guid><pubDate>20-Feb-2026 3:49:32 pm</pubDate></item><item><title>  हाई कोलेस्ट्रॉल से परेशान? आज ही डाइट में शामिल करें ये 4 दालें </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2566</link><description>आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हाई कोलेस्ट्रॉल एक गंभीर समस्या बन चुका है, अक्सर हमें इसका तब पता चलता है जब रिपोर्ट में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ा हुआ मिलता है। यह वही फैट है जो धीरे-धीरे हमारी धमनियों में जमा होकर ब्लॉकेज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है लेकिन क्या हो अगर इस समस्या का समाधान आपकी रोज की थाली में ही छुपा हो? डाइट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ साधारण दिखने वाली दालें जैसे बीन्स, चने, मटर और मसूर आपके दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल होने पर कौन-सी दालें खाना फायदेमंद होती हैं?
1. राजमा
राजमा घुलनशील फाइबर (soluble fiber) से भरपूर होता है। यह फाइबर आंतों में जाकर कोलेस्ट्रॉल को बांध लेता है और उसे शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। नियमित रूप से राजमा खाने से LDL के लेवल में कमी देखी जा सकती है। सप्ताह में कम से कम 2-3 बार राजमा को अपने भोजन में शामिल करें। इसे कम तेल और कम नमक में पकाएं ताकि इसका फायदा मिल सके। राजमा में प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं।
2. काबुली चना
काबुली चना या छोले भी हाई फाइबर और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का अच्छा सोर्स हैं, इनमें मौजूद घुलनशील फाइबर खून में मौजूद अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। उबले हुए चने या चना सलाद का सेवन नाश्ते या लंच में किया जा सकता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत कम होती है। चने में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में भी सहायक होते हैं, जिससे हार्ट डिजीज का जोखिम घटता है।
3. हरी मटर
हरी मटर में फाइबर और विटामिन K के साथ अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ-साथ शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत करती है। मटर को सब्जी, सूप या सलाद के रूप में रोजाना डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट्स धमनियों में जमा चर्बी को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा मटर वजन कंट्रोल में भी सहायक है, जो कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है।
4. मसूर दाल
मसूर दाल हल्की और जल्दी पचने वाली दाल है, लेकिन इसके फायदे बेहद असरदार हैं। इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर और फोलेट होता है, जो हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी है। मसूर दाल का नियमित सेवन LDL को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को संतुलित रखने में मदद करता है। यह ब्लड शुगर को भी स्थिर रखती है, जिससे डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
स्टडी के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 130 ग्राम (करीब एक सर्विंग) दालों जैसे कि बीन्स, चने, मटर और मसूर का सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल(LDL) में 5% तक की कमी आ सकती है। यह हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने का एक प्रभावी और नेचुरल तरीका है। दालों में मौजूद हाई फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। बैलेंस डाइट में नियमित रूप से दालों को शामिल करना कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट के लिए फायदेमंद है।

</description><guid>2566</guid><pubDate>17-Feb-2026 5:14:54 pm</pubDate></item><item><title>  पेट की जलन को शांत करते हैं ये 5 फूड्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2565</link><description>गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (GERD) एक पाचन समस्या है। इस बीमारी में पेट का एसिड फिर से खाने की नली में आ जाता है। जीईआरडी से राहत के लिए कुछ हेल्दी फूड्स को डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। इन फूड्स को खाने से पेट की जलन शांत होती है और पाचन बेहतर रहता है।विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी संगठन (World Gastroenterology Organisation) की मानें, तो जीआईआरडी को हल्के में लेने की गलती नहीं करना चाहिए। इससे व्यक्ति की जिंदगी की क्वालिटी खराब हो सकती है, इससे काम की प्रोडक्टिविटी घट सकती है, अनिद्रा की समस्या हो सकती है और रोज के रूटीन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
1. दही खाने से पेट की जलन दूर होती है
दही का सेवन करने से पेट के एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। दही खाने से पेट की जलन भी दूर होती है। दही का सेवन करने से ब्लोटिंग की समस्या को भी दूर करने में मदद मिलती है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स की मदद से डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। दही के गुड बैक्टीरिया पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
2. चावल की कांंजी
चावल की कांजी में प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं। इसे पीने से पेट में गुड बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ती है और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। चावल की कांजी का सेवन करने से ब्लोटिंग की समस्या भी दूर होती है और यह आसानी से पच जाती है। जीईआरडी के मरीज इस मौसम में कांजी का सेवन कर सकते हैं।
3. मुलेठी जड़ की चाय
एसिडिटी और जीईआरडी के लक्षणों को कम करने के लिए मुलेठी की जड़ से बनी चाय का सेवन फायदेमंद होता है। मुलेठी की जड़ से बनी चाय का सेवन दोपहर या रात के खाने के बाद कर सकते हैं। दिनभर में एक कप चाय का सेवन काफी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, मुलेठी जड़ का सेवन करने से हार्टबर्न और जीईआरडी के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।
4. आंवला से पेट के एसिड कंट्रोल होते हैं
जीईआरडी से राहत के लिए आंवला का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन सी पाया जाता है। आंवला का सेवन करने से पेट में बन रहे एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। ScienceDirect की एक स्टडी के मुताबिक, आंवला का सेवन करने से सीने में जलन कम होती है और जीईआरडी के मरीजों में लक्षणाें को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
5. उबली हुई सब्जियां
उबली हुई सब्जियों में फैट की मात्रा कम होती है, ये आसानी से पच जाती हैं और जीईआरडी के मरीजों के लिए खासकर फायदेमंद होती हैं। जीईआरडी से राहत के लिए ब्रोकली, गाजर, बीन्स, मटर वगैरह का सेवन कर सकते हैं। इन सब्जियों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जिससे पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।</description><guid>2565</guid><pubDate>16-Feb-2026 5:41:31 pm</pubDate></item><item><title>  प्याज का रस Vs चावल का पानी: लंबे और मजबूत बालों के लिए बेस्ट क्या है?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2564</link><description>बालों को घना और मजबूत बनाने के लिए अक्सर लोगों को प्याज के रस और चावल के पानी जैसी चीजों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इसमें बहुत से गुण होते हैं, जिनसे कई तरीकों से बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। जानें लंबे और मजबूत बालों के लिए प्याज का रस या चावल का पानी क्या ज्यादा फायदेमंद है?
लंबे बालों के लिएप्याज का रस
प्याज के रस में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-माइक्रोबियल के गुण होते हैं, साथ ही, इसमें सल्फर कंपाउंड और प्रोटीन जैसे तत्व होते हैं। इसको बालों में लगाने से बालों के स्ट्रक्चर को बेहतर करने, स्कैल्प को शांत करने, स्कैल्प की सूजन को कम करने, बालों को झड़ने से रोकने, शाइनी बनाने, बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव करने, बालों को जड़ों से मजबूती देने और घना बनाने में मदद मिलती है। ये स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद होता है।
लंबे बालों के लिए चावल का पानी
चावल के पानी एक तरह का फर्मेंटेड पानी होता है। इसमें अमीनो एसिड, पेप्टाइड्स, विटामिन-बी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में बालों पर चावल के पानी का इस्तेमाल करने से बालों को अंदर से रिपेयर करने, बालों को मजबूती देने, बालों को शाइनी बनाने, बालों का स्ट्रेस से बचाव करने, बालों को स्मूद बनाने, टूटने से बचाने, बालों को शाइनी बनाए रखने और स्कैल्प के पीएच को बैलेंस करने में मदद मिलती है।
लंबे बालों के लिए प्याज का रस या चावल का पानी क्या है फायदेमंद?
लंबे, घने और मजबूत बालों के लिए प्याज का रस और चावल का पानी दोनों ही अपने-अपने तरीकों से फायदेमंद हैं। इसका इस्तेमाल अलग-अलग किया जा सकता है। इनका इस्तेमाल करने से बालों को टूटने से रोकने, स्कैल्प की सूजन को कम करने, बालों को टूटने से रोकने, ड्राइनेस को कम करने और शाइनी बनाने में मदद मिलती है।
सावधानियां
दोनों का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। प्याज के रस या चावल के पानी किसी से भी एलर्जी होने पर इसका इस्तेमाल करने से बचें। इसके अलावा, इनमें किसी भी चीज का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करें। बालों से जुड़ी कोई परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</description><guid>2564</guid><pubDate>13-Feb-2026 2:31:58 pm</pubDate></item><item><title>  वात-कफ दोष संतुलन के लिए फायदेमंद है सोंठ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2563</link><description>आयुर्वेद के मुताबिक, सोंठ का सेवन करने से पाचन अग्नि को मजबूत करने में मदद मिलती है। यह शरीर में गर्माहट को बढ़ाकर कफ को पतला करता है और वात में दर्द और अकड़न को दूर करता है। सोंठ लगभग हर बीमारी में फायदेमंद होता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसका सेवन करने से एचबीए1सी और फास्टिंग ग्लूकोज में सुधार होता है। सोंठ को शुंठी भी कहा जाता है। ड्राई जिंजर और सोंठ अलग है। सोंठ जो बाजार में मिल रहा है वो ज्यादातर नकली होता है इसलिए इसे एक्सपर्ट की सलाह लेकर खरीदें। सोंठ डाइजेशन को बेहतर बनाता है। यह वात-कफ शामक है। साथ ही यह त्रिदोष को भी दूर करने में मदद करता है। इस लेख में जानेंगे वात-कफ दोष में सोंठ के फायदे।
वात-कफ दोष के लिए सोंठ के फायदे-
-वात-कफ दोष में पेट में गैस, अपच, पेट फूलने की समस्या हो सकती है। इसे दूर करने के लिए सोंठ का सेवन फायदेमंद है।
-सर्दी-खांसी, बलगम और गले की खराश को दूर करने के लिए सोंठ का सेवन भी फायदेमंद है।
-वात दोष में जोड़ों के दर्द और सूजन को दूर करने के लिए सोंठ असरदार है।
-शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सोंठ का सेवन करना चाहिए।
-वजन कम करने के लिए मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
सोंठ का सेवन कैसे करें?
 बलगम खांसी है, तो शहद के साथ लें। इसे खाने के बाद घी के साथ भी खाने से पहले ले सकते हैं। अगर पाचन को बेहतर करना है या सर्दी से बचना है, तो इसका काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। चाय में भी इसे मिलाकर पी सकते हैं। दिनभर में एक से दो ग्राम सोंठ पाउडर का सेवन कर सकते हैं। ज्यादा मात्रा में सोंठ का सेवन करने से पेट में जलन, एसिडिटी और मुंह में छाले हो सकते हैं। सब्जी, दाल या सूप में सोंठ पाउडर डालकर सेवन कर सकते हैं। दिन में एक सोंठ इसे गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं।
सोंठ और अदरक में फर्क है
अक्सर लोग सोंठ को अदरक समझ लेते हैं, लेकिन इन दोनों में फर्क है। अदरक पौधे की ताजी जड़ होती है जबकि सोंठ को सुखाकर बनाया जाता है। अदरक को ठंडी प्रकृति का माना जाता है जबकि सोंठ की तासीर गर्म होती है। पाचन सुधारने के लिए, पेट की गैस दूर करने के लिए या सर्दी-जुकाम होने पर अदरक का सेवन फायदेमंद है जबकि वात और कफ दोष संतुलन, जोड़ों के दर्द, अपच में सोंठ का सेवन ज्यादा फायदेमंद है।

</description><guid>2563</guid><pubDate>12-Feb-2026 4:11:15 pm</pubDate></item><item><title> जापानी महिलाओं की जवां स्किन का राज है ये शेल जिंजर , जानें फायदे और कैसे करें इस्तेमाल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2562</link><description>भारत जैसे देश में रहने वाले ज्यादातर लोग अक्सर जापान की महिलाओं की हेल्दी और ग्लोइंग स्किन का सीक्रेट जानने की कोशिश करते हैं। हालांकि, स्किन का हेल्थ अक्सर बार आपके स्थान के पर्यावरण, पानी, वायु और जेनेटिक कारणों पर निर्भर करता है। लेकिन, इसके बाद भी आप अपनी स्किन को लंबे समय तक जवां और हेल्दी रखने के लिए अच्छे स्किन केयर रूटीन में अच्छी चीजों को शामिल करना बहुत जरूरी है। जापान की महिलाओं की हेल्दी स्किन का राज शेल जिंजर को भी माना जाता है।
शेल जिंजर का वैज्ञानिक नाम Alpinia zerumbet है, जो एक तरह का नेचुरल हर्ब है और जापान के साथ पूर्वी एशिया के देशों में पाया जाता है। इस हर्ब को आमतौर पर जापानी महिलाओं की जवां और ग्लोइंग स्किन का राज माना जाता है।
शेल जिंजर में विटामिन, एंटी-एजिंग और एंटीऑक्सीडेंट्स गुण पाए जाते हैंं। यही कारण है कि जापानी महिलाएं इसे अपनी स्किनकेयर रूटीन में शामिल करती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की स्टडी के अनुसार, अल्पिनिया से बनने वाले प्रोडक्ट्स में एसेंशियल ऑयल और अल्पिनिया के अर्क से बने साबुन और कॉस्मेटिक शामिल हैं। अल्पिनिया का इस्तेमाल आमतौर पर सनबर्न के इलाज के लिए भी किया जाता है। अल्पिनिया के पाउडर का इस्तेमाल नहाने के पानी में एडिटिव के तौर पर भी किया जाता है।
1. एंटी-एजिंग गुण
शेल जिंजर में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो फ्री रेडिकल्स से लड़कर स्किन सेल्स को नुकसान पहुंचाने से बचाता है। इसके सेवन से स्किन पर उम्र बढ़ने के लक्षण जैसे झुर्रियां और उम्र बढ़ने के निशान कम दिखते हैं।
2. त्वचा को जवां रखें
शेल जिंजर में मौजूद पोषक तत्व स्किन की नमी को बनाए रखने और इसकी लोच बढ़ाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने से स्किन को मुलायम, ग्लोइंग और हेल्दी रखा जा सकता है।
3. त्वचा को हाइड्रेट रखता है
शेल जिंजर में मॉइश्चराइजिंग गुण पाए जाते हैं, जो आपकी स्किन पर ड्राइनेस के कारण होने वाली जलन, खुजली आदि समस्याओं को दूर करने में मदद करता है और स्किन की नमी को बनाए रखता है।
4. त्वचा को टोन करता है
शेल जिंजर के नियमित इस्तेमाल से स्किन काफी टाइट और फरर्म महसूस होने लगती है, खासकर आपके माथे, आंखों के आसपास और गाल की स्किन टोन रहती है।
5. त्वचा की रंगत में सुधार
शेल जिंजर में नेचुरल फ्लेवोनॉयड्स पाए जाते हैं, जो स्किन के टेस्चर को बनाते हैं और डार्क स्पॉट्स के साथ-साथ पिग्मेंटेशन को कम करने में मदद करता है।
शेल जिंजर का इस्तेमाल कैसे करें?
शेल जिंजर का इस्तेमाल स्किन के लिए काफी हेल्दी माना जाता है। यह एक नेचुरल हर्ब के रूप में काम करता है, जिसका इस्तेमाल आप सीधे अपनी स्किन पर कर सकते हैं। आप शेल जिंजर का फेस मास्क, शेल जिंजर का टॉनिक, शेल जिंजर फेस ऑयल और क्रीम के साथ मिलाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ध्यान रहे अगर आप पहली बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो पैच टेस्ट जरूर कर लें।
निष्कर्ष
जापानी महिलाओं की जवां और ग्लोइंग स्किन का राज सिर्फ महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि शेल जिंजर जैसे नेचुरल हर्ब्स को भी माना जाता है। इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरे पर उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने, स्किन की नमी को बनाए रखने, डार्क स्पॉट्स को कम करने और सन डैमेज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।</description><guid>2562</guid><pubDate>11-Feb-2026 2:06:50 pm</pubDate></item><item><title>  नाग केसर के इस्तेमाल का सही तरीका क्या है? </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2561</link><description>आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जिनके नाम तो आम लोगों ने सुने होते हैं, लेकिन उनके असली गुणों और उपयोग के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। नाग केसर भी उन्हीं औषधियों में से एक है। नाग केसर का उपयोग खासतौर पर उन बीमारियों में किया जाता है, जिनमें शरीर के अंदर रक्तस्राव की समस्या होती है।
नाग केसर की पहचान क्या है?
नाग केसर दिखने में लाल रंग के छोटे-छोटे बीज या कली जैसे होते हैं। इसकी बनावट सूखी होती है और रंग गहरा लाल या भूरा-लाल दिखाई देता है। आयुर्वेद में शुद्ध नाग केसर का चयन बहुत जरूरी माना गया है, क्योंकि मिलावटी या नकली नाग केसर से लाभ नहीं मिलता।
नाग केसर की तासीर कैसी होती है?
आयुर्वेदिक दृष्टि से नाग केसर की तासीर शीत यानी ठंडी मानी जाती है। डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार नाग केसर वीर्य में भी शीतल होता है, इसलिए यह शरीर की गर्मी, रक्तस्राव और पित्त विकारों को शांत करने में मदद करता है। यही कारण है कि इसे बवासीर, नकसीर और महिलाओं के अत्यधिक रक्तस्राव में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है।
नाग केसर के फायदे क्या हैं?
-नाग केसर ब्लीडिंग पाइल्स यानी खून वाली बवासीर में खासतौर पर लाभकारी माना जाता है।इसके सेवन से मल के साथ आने वाला खून धीरे-धीरे कम हो सकता है।
-इसके अलावा महिलाओं में रक्त प्रदर यानी अत्यधिक मासिक रक्तस्राव की समस्या में भी नाग केसर उपयोगी होता है।
-नाक से बार-बार खून आना यानी नकसीर की समस्या में भी नाग केसर का उपयोग किया जाता है।
-आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर की इंटरनल ब्लीडिंग को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।
-साथ ही यह शरीर में जमा टॉक्सिन को कम करके अंदरूनी सफाई में सहायक होता है।
बवासीर के लिए नाग केसर का उपयोग कैसे करें?
 जिन लोगों को ब्लीडिंग पाइल्स की समस्या है, उनके लिए नाग केसर काफी फायदेमंद हो सकता है। नाग केसर चूर्ण को शहद या मिश्री के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि मात्रा और सेवन की अवधि व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है ।नाग केसर बवासीर में सूजन और जलन को शांत करने के साथ-साथ खून बहने की समस्या को भी कम करता है।
नाग केसर के नुकसान क्या हैं?
नाग केसर के कोई गंभीर नुकसान नहीं बताए गए हैं लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक या पुरानी कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें नाग केसर का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने पर पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को भी किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही इसका उपयोग करना चाहिए।
निष्कर्ष
नाग केसर आयुर्वेद की एक प्रभावशाली औषधि है, जिसका उपयोग ब्लीडिंग पाइल्स, नकसीर, महिलाओं के रक्त प्रदर और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी समस्याओं में किया जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह वात-पित्त को शांत करने में मदद करता है। हालांकि इसके नुकसान बहुत कम बताए गए हैं, फिर भी कब्ज या अन्य गंभीर समस्याओं में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।</description><guid>2561</guid><pubDate>03-Feb-2026 4:34:01 pm</pubDate></item><item><title>बालों के लिए वरदान हैं अलसी के बीज, जानें फायदे और इस्तेमाल का तरीका</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2560</link><description>अलसी के इस्तेमाल से बालों को पोषण मिलेगा और रूखे-बेजान बालों की समस्या भी कम होगी। अलसी में मौजूद विटामिन E, विटामिन B और ओमेगा 3 फैटी एसिड बालों की क्वालिटी बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। इस लेख में जानिए बालों में अलसी का प्रयोग कैसे करें और इसके फायदे क्या हैं।
बालों के लिए अलसी के फायदे
-अलसी के बीजों में प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है। अलसी के बीजों से आप तेल बना सकते हैं, जिसके इस्तेमाल से स्कैल्प हेल्दी रहेगी और बालों की जड़ों को भरपूर पोषण मिलेगा और बाल मजबूत होंगे।
-सर्दियों के मौसम में अलसी के इस्तेमाल से बालों की कमजोर जड़ों को पोषण मिलेगा। जिससे बालों का झड़ना कम हो सकता है।
-अलसी के बीजों से बने तेल के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा, जिससे बालों की ग्रोथ होगी और सफेद बालों की समस्या कम हो सकती है।
-अलसी के बीजों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड बालों को मजबूत और हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है।
-ड्राई स्कैल्प की समस्या में भी अलसी फायदा करती है, इसके इस्तेमाल से ड्राई स्कैल्प और डैंड्रफ जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
-अलसी में मौजूद बीटा-कैरोटीन बालों को सॉफ्ट और शाइनी बनाने में सहायक हो सकता है।
-अलसी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स से बालों की क्वालिटी में सुधार हो सकता है।
बालों में अलसी का उपयोग कैसे करें
अलसी हेयर मास्क -
अलसी के बीजों से आप हेयर मास्क बना सकते हैं, इसे बनाने के लिए अलसी को पानी में भिगोकर 3 से 4 घंटे के लिए रखें। फिर इसे ब्लेंडर में पीसकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें और बालों पर लगाएं। इससे आपके बाल मॉइश्चराइज होंगे।
अलसी का तेल -
बाजार में आपको अलसी के बीजों का तेल आसानी से मिल जाएगा। आप घर में भी अलसी का तेल बना सकते हैं, इसे बनाने के लिए अलसी के बीजों को हल्का भूनने के बाद पीसें और फिर इसके पाउडर को जैतून के तेल के साथ पकाएं। ठंडा होने पर तेल को बोतल में भरें। इस तेल से स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बालों को पोषण मिलता है। इससे बाल मजबूत होते हैं और बाल झड़ने की समस्या कम हो सकती है।
अलसी का जेल
अलसी के बीजों से जेल बनाना बेहद आसान है। इसे बनाने के लिए जरूरत अनुसार अलसी को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रखें और अगली सुबह इसे धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट के लिए पकाएं। ठंडा होने पर छानकर अलसी के जेल को अलग कर लें।</description><guid>2560</guid><pubDate>31-Jan-2026 1:59:16 pm</pubDate></item><item><title> बालों को लंबा, घना और मजबूत करेंगे ये 3 नुस्खे, कई हेयर प्रॉब्लम से दिलाएंगे छुटकारा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2559</link><description> हम सभी चाहते हैं कि हमारे बाल झड़ना भी बंद हो जाएं और साथ ही वह लंबे, घने व मजबूत हो जाएं। लेकिन अगर आप इसी तरह अपनी बालों पर केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते रहेंगे तो स्कैल्प ड्राई होने लगेगी और बालों की हेल्थ बद से बदतर होती रहेगी। ऐसे में हर कोई चाहता है कि उसके बाल खूबसूरत हो जाए और यह तभी संभव है जब आप नेचुरल और असरदार चीजों का इस्तेमाल करें। हमारी प्रकृति में आंवला, रीठा, शिकाकाई, मेहंदी जैसी कई चीजें उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल आपके बालों की हर समस्या के लिए फायदेमंद हो सकता है।
पहला नुस्खा है स्मूथ हेयर पाने का
 इस नेचुरल हेयर मास्क को बनाने के लिए 1 चम्मच फ्लैक्स सीड्स और 1 गिलास पानी की जरूरत है। साथ ही अगर आपके बाल लंबे हैं तो सामग्री को बढ़ाया भी जा सकता है। आइए अब हम इस नुस्खे को बनाने का तरीका जानें-
-सबसे पहले आप एक पैन लें और उसमें पानी व फ्लैक्स सीड्स डालकर हल्की आंच में उबाल लें।
-10 मिनट तक उबालने के बाद के बाद आप गैस बंद कर दें और छान लें।
-हेयर मास्क को ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
-ठंडा होने के बाद आप इसे अपने बालों पर लगाएं और फिर 30 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें।
-समय पूरा होने के बाद शैम्पू से हेयर वॉश कर लें।
-फिर देखें कैसे आपके बालों में सिल्कीनेस आती है।
बाल बढ़ाने के लिए असरदार हेयर मास्क
बाल बढ़ाने हैं तो आप इस आंवला मेथी वाले हेयर मास्क का इस्तेमालकरें। इसे बनाने के लिए आपको चाहिए 2 गुड़हल के फूल, 1 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच भीगे हुए मेथी के बीज और 5 चम्मच एलोवेरा जेल। सामग्री तो बता दी, आइए अब हम आपको हेयर ग्रोथ मास्क को बनाने का तरीका बताते हैं।
हेयर ग्रोथ मास्क कैसे बनाएं?
इस हेयर ग्रोथ मास्क को बनाने के लिए पहले आप एक मिक्सर लें और उसमें गुड़हल के फूल, आंवला पाउडर, पानी सहित भीगे हुए मे मेथी के बीज और 5 चम्मच एलोवेरा जेल डालकर घुमा लें और पेस्ट तैयार कर लें। इस तैयार पैक को आप अपने बालों पर सिरों से लेकर जड़ों तक लगाएं और 30-45 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। समय पूरा होने के बाद हेयर वॉश कर लें और फिर देखें कैसे आपके बालों की ग्रोथ बढ़नी शुरु हो जाती है।
बालों को मजबूत करेगा आंवला का नुस्खा
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए 1 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच भृंगराज, 3 चम्मच एलोवेरा जेल और 1 चम्मच कलौंजी। ये सभी चीजें आप इकट्ठा कर लें। इसके बाद सूखे आंवला और भृंगराज पाउडर सहित सभी चीजों को मिक्स करके पेस्ट तैयार कर लें।
जब पेस्ट बनकर तैयार हो जाए तो इसके अपने बालों की जड़ों से सिरों तक लगाएं और 45 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। जब समय पूरा हो जाए तो बालों को साफ पानी और शैम्पू से धो लें। पहले ही इस्तेमाल में आपको असर दिखेगा और नियमित तौर पर या हफ्ते में जितनी बार भी आप हेयर वॉश करते हैं तो इसका इस्तेमाल करें।
बालों को स्मूथ बनाने के लिए आंवला फायदेमंद है।
हेयर ग्रोथ के लिए भृंगराज का इस्तेमाल करें।
एलोवेरा जेल आपके हेयर को स्ट्रेंथ देने में मदद करेगा।</description><guid>2559</guid><pubDate>28-Jan-2026 12:24:36 pm</pubDate></item><item><title>  दिल की सेहत के लिए सर्दियों में रोजाना कितने कदम चलना चाहिए?  </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2557</link><description>अच्छे स्वास्थ्य के लिए अक्सर लोगों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करने और वॉक करने की सलाह दी जाती है। नियमित रूप से वॉक करने और खाना खाने के बाद भी वॉक करने से वजन कम करने, पाचन को दुरुस्त करने, नींद की गुणवत्ता में सुधार करने, ब्रेन को रिलैक्स करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, साथ ही, इससे हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। हेल्दी हार्ट के लिए वॉक करना फायदेमंद होता है। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से कितने कदम चलना चाहिए?
हेल्दी हार्ट के लिए दिन में कितने कदम चलना चाहिए? -
सर्दियों में हार्ट को हेल्दी रखने के लिए रोजाना फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ठंडा मौसम अक्सर कम मूवमेंट और दिल पर ज्यादा दबाव का कारण बनता है। आदर्श रूप से, ज्यादातर वयस्कों को दिल की सेहत के लिए, सर्दियों में भी हर दिन 7 हजार से 10 हजार कदम चलने का लक्ष्य रखना चाहिए, जो लोग कम एक्टिव रहते हैं, बुजुर्ग हैं या जिन्हें हाइपरटेंशन, डायबिटीज या स्थिर दिल की बीमारी जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए ज्यादा सही और सुरक्षित लक्ष्य रोजाना 5 हजार-7हजार कदम चलना होगा, जिसे धीरे-धीरे सहनशक्ति बढ़ने के साथ बढ़ाया जा सकता है। चलना हेल्दी ब्लड प्रेशर बनाए रखने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने और सर्दियों से जुड़ी दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है, जो ठंड के कारण ब्लड वेसेल्स के सिकुड़ने से बढ़ जाती हैं।
चलते समय इन बातों का रखें ध्यान
 हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को सलाह दी जाती है कि जिससे हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ऐसे में इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
-चलने को छोटे-छोटे सेशन में बांट लें
-दिन के गर्म समय में चलें
-सही सर्दियों के कपड़े पहनें
-बहुत ज्यादा ठंड में अचानक तेज एक्सरसाइज करने से बचें
-तेजी से ज्यादा जरूरी है रेगुलरिटी, ऐसे में रोजाना चलें, भले ही सामान्य गति से हो।
निष्कर्ष
दिल के सेहत के लिए सर्दियों में वयस्कों को 1 दिन में 7 हजार से 10 हजार कदम चला चाहिए। वहीं, कम एक्टिव रहने वाले, बुजुर्ग, हाइपरटेंशन, डायबिटीज या दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से 5 हजार-7हजार कदम चलना चाहिए। ऐसा करने से हार्ट के स्वास्थ्य में सुधार करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, लेकिन नियमित रूप से वॉक करना बेहद जरूरी है। ऐसे में ध्यान रहे, चलने पर परेशानी होने या हार्ट से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

</description><guid>2557</guid><pubDate>22-Jan-2026 8:32:44 am</pubDate></item><item><title> विटामिन सी के लिए कौन सा बेहतर है?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2556</link><description> आंवलाके जूस और नींबू पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, साथ ही, ये दोनों विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स हैं।के जूस और नींबू पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, साथ ही, ये दोनों विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स हैं। आंवला के जूस और नींबू पानी में भरपूर विटामिन-सी होता है। इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने और स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि आंवला जूस या नींबू पानी विटामिन-सी की कमी को दूर करने के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है?
विटामिन-सी के लिए आंवला का जूस या नींबू पानी?
आंवला जूस और नींबू का पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है। विटामिन-सी के लिए दोनों का सेवन किया जा सकता है। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में विटामिन-सी की कमी को दूर करने, शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने, स्किन को हेल्दी और यंग बनाने, बीमारियों से बचाव करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, हड्डियों को मजबूती देने, घाव को जल्दी भरने, आयरन के अवशोषण को बेहतर करने, मूड को बेहतर करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।
आंवले का जूस और नींबू पानी पीने के फायदे
आंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है। विटामिन-सी के लिए दोनों का सेवन करना फायदेमंद होता है।
शरीर को हाइड्रेट करे
आंवले के जूस और नींबू पानी का सेवन करने से शरीर को नेचुरल रूप से हाइड्रेट करने और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।
मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करे
आंवले के जूस और नींबू पानी दोनों ही विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स माना जाता है। इनका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद मिलती है, जिससे वजन कम करने और पाचन प्रक्रिया में सुधार करने में मदद मिलती है।
पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर करे
विटामिन-सी से भरपूर आंवले के जूस और नींबू पानी का सेवन करने से शरीर में विटामिन-सी की कमी को दूर करने के साथ-साथ आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।
स्किन और बालों को हेल्दी रखे
आंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने, स्किन को हेल्दी और यंग बनाए रखने, बालों को जड़ों से मजबूती देने और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। इनसे बालों और स्किन में एजिंग के लक्षणों से बचाव करने में मदद मिलती है।
इम्यूनिटी बूस्ट करे
आंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, सर्दी-खांसी से बचाव करने, इंफेक्शन से बचाव करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।
शरीर को डिटॉक्स करे
आंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में विटामिन-सी होता है। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ शरीर को नेचुरल रूप से डिटॉक्स करने में मदद मिलती है, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं और स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।
निष्कर्ष
विटामिन-सी के लिए आंवला के जूस और नींबू के पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन को दुरुस्त करने, मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने, आयरन जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, शरीर को डिटॉक्स करने, स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके अलावा, इनसे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इनका सेवन करने से बचें, साथ ही, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</description><guid>2556</guid><pubDate>21-Jan-2026 7:42:28 am</pubDate></item><item><title> चाय या कॉफी -सुबह क्या पीना है सेहत के लिए फायदेमंद?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2555</link><description>सुबह की शुरुआत अक्सर लोग चाय या कॉफी के साथ करना पसंद करते हैं। लेकिन, सवाल यह ये उठता है कि सुबह की शुरुआत किसी हेल्दी ड्रिंक से करनी चाहिए या कॉफी पीने से?
सुबह की ड्रिंक क्यों जरूरी है?
सुबह उठने के बाद हमारा शरीर 6 से 8 घंटे तक बिना पानी और पोषण के रहता है। ऐसे में सुबह उठने के बाद पहली चीज हम जो भी पीते हैं, उसका सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज्म, पाचन, एनर्जी लेवल और हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। इसलिए, सुबह आप क्या पी रहे हैं यह सोच समझकर पीना चाहिए, ताकि आपकी सेहत पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।
कॉफी के फायदे
ऑफिस, कॉलेज या घर पर रहने वाले लोगों को भी कॉफी पीना बहुत पसंद है ऐसे में आइए जानते हैं कॉफी पीने के फायदों के बारे में:
-कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग को एक्टिव करने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।
-मूड को बेहतर बनाने में फायदेमंद है
-थकान और सुस्ती को कम करता है
-वर्कआउट से पहले पीने से परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है।
कॉफी के नुकसान
-कॉफी पीने के जहां कई फायदे हैं वहीं इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं, जैसे:
-खाली पेट कॉफी पीने से एसिडिटी और गैस की समस्या होती है
-ज्यादा कॉफी पीने से नींद, एंग्जाइटी और हार्टबीट प्रभावित हो सकती है
-डिहाइड्रेशन होने की संभावना
हर्बल टी के फायदे
-हर्बल टी जैसे ग्रीन टी, अदरक-नींबू की चाय, दालचीनी की चाय, तुलसी की चाय या कैमोमाइल टी में काफीन नहीं पाया जाता है या बहुत कम होता है, जिस कारण ये शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
-हर्बल चाय पीने से पाचन तंत्र एक्टिव और मजबूत होता है
-शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है
-इम्युनिटी बूस्ट होती है
-स्ट्रेस और सूजन कम होती है
-वजन कंट्रोल करने में फायदेमंद है
हर्बल चाय के नुकसान
हर्बल चाय पीने से भी कुछ नुकसान है, क्योंकि ज्यादा हर्बल चाय में मौजूद कुछ जड़ी-बूटियां आपके लिए नुकसानदायक होती हैं। एक्सपर्ट की माने तो सुबह खाली पेट हर्बल चाय पीना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद होता है, खासकर अगर आपको एसिडिटी, कब्ज या गैस की समस्या हो। इसलिए, आप ज्यादा मात्रा में हर्बल चाय पीने से बचें और इसकी सामग्रियों का ध्यान रखें, ताकि आपको इसका सही फायदा मिल सके।
हर्बल चाय या कॉफी: किसी क्या पीना चाहिए?
-हर्बल टी और कॉफी दोनों के फायदे अपने-अपने स्थान पर अलग है। इसलिए आइए जानते हैं कि किसे क्या पीना चाहिए:
-अगर आपको एसिडिटी या पेट से जुड़ी समस्या है तो हर्बल चाय आपके लिए बेहतर ऑप्शन है।
-लंबे समय तक फोकस चाहिए काम करने के लिए तो आप सीमित मात्रा में कॉपी पी सकते हैं।
-तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए आप हर्बल चाय पी सकते हैं।
-अपने शरीर को डिटॉक्स करने और इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए हर्बल चाय पिएं।
निष्कर्ष
हर्बल चाय और कॉफी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन सुबह के समय आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हर्बल चाय है। इसलिए, अगर आप सेहत से जुड़ी समस्याओं को दूर करना चाहते हैं तो हर्बल चाय सुबह पीना फायदेमंद होता है, वहीं फोकस बढ़ाने और शरीर को एक्टिव करने के लिए आप कॉफी का सेवन कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि आपको ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज लेने से बचना चाहिए।</description><guid>2555</guid><pubDate>19-Jan-2026 1:12:45 pm</pubDate></item><item><title> कौन सा तेल स्किन एजिंग को धीमा करता है?</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2554</link><description>आज के दौर में बढ़ती उम्र के निशान चेहरे पर जल्दी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में स्किन को जवान बनाए रखने का तरीका बोतलों में बंद है, या फिर इसका जवाब हमारी परंपरा और आयुर्वेद में छिपा है? आयुर्वेद हजारों सालों से यह मानता आया है कि स्किन की सेहत सीधे शरीर के दोषों वात, पित्त और कफ से जुड़ी होती है। जब खासकर वात दोष असंतुलित होता है, तो त्वचा सबसे पहले असर दिखाती है। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपकी स्किन के लिए कौन-सा तेल सबसे बेहतर है और किस तरह देसी तेल एजिंग की रफ्तार को कम कर सकते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है।
कौन सा तेल स्किन एजिंग को धीमा करता है?
आयुर्वेद के अनुसार स्किन की उम्र बढ़ने का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। जब वात बढ़ता है, तो स्किन रूखी, बेजान और झुर्रियों वाली हो जाती है। इसके अलावा दोषों का असंतुलन, गलत तेल का उपयोग और ऋतु के अनुसार देखभाल न करना भी स्किन एजिंग को तेज करता है। ''तेल वही फायदेमंद होता है जो दोषों को संतुलित रखे और शरीर की प्रकृति के अनुसार हो।''
 नॉर्थ इंडिया के लिए सरसों का तेल क्यों है बेहतर?
आयुर्वेद के अनुसार नॉर्थ इंडियन लोगों के लिए सरसों का तेल सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह तेल गर्म तासीर का होता है, जो वात दोष को संतुलित करता है। सरसों का तेल पूरे साल उपयोग किया जा सकता है और यह त्वचा में गहराई तक जाकर पोषण देता है। नियमित अभ्यंग से त्वचा में रक्त संचार बेहतर होता है, रूखापन कम होता है और एजिंग की प्रक्रिया धीमी होती है।
साउथ इंडिया और नॉर्थ ईस्ट के लिए नारियल तेल
साउथ इंडियन और नॉर्थ ईस्ट के लोगों के लिए नारियल तेल सबसे अच्छा विकल्प है। यह शीतल प्रकृति का होता है और वहां के मौसम व शरीर की प्रकृति के अनुकूल है। नारियल तेल न सिर्फ स्किन को मॉइश्चराइज करता है, बल्कि स्किन पर नेचुरल ग्लो भी लाता है। इसका नियमित उपयोग स्किन बैरियर को मजबूत करता है और समय से पहले झुर्रियां आने से बचाता है।
गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मूंगफली का तेल
गुजरात जैसे क्षेत्रों में जहां मूंगफली प्रचुर मात्रा में उगती है, वहां मूंगफली का तेल स्किन के लिए बेहतर माना जाता है। यह तेल वहां के लोगों के दोषों को संतुलित रखता है और त्वचा को पोषण देता है। आयुर्वेद मानता है कि स्थानीय रूप से उगने वाली चीजें शरीर और स्किन के साथ बेहतर तालमेल बनाती हैं।
ऋतु के अनुसार तेल
आयुर्वेद में ऋतु के अनुसार तेल बदलने पर भी जोर दिया गया है। शिशिर ऋतु यानी शीत काल में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे त्वचा ज्यादा रूखी और बेजान हो सकती है। ऐसे में नॉर्थ इंडिया में तिल के तेल का उपयोग बेहद लाभकारी माना जाता है। तिल का तेल त्वचा को गहराई से पोषण देता है और एजिंग के लक्षणों को कम करता है।
स्किन एजिंग स्लो करने के लिए क्या रखें ध्यान?
सिर्फ सही तेल ही नहीं, बल्कि सही समय और सही तरीका भी जरूरी है। रोज या सप्ताह में 2-3 बार अभ्यंग, मौसम के अनुसार तेल का चयन और प्राकृतिक तेलों का उपयोग स्किन एजिंग को काफी हद तक धीमा कर सकता है।
निष्कर्ष
आयुर्वेद के अनुसार स्किन एजिंग को स्लो करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है, क्षेत्र, ऋतु और शरीर की प्रकृति के अनुसार सही तेल का चुनाव। जो तेल जहां उगता है, वही वहां के लोगों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। इसलिए विदेशी तेलों के बजाय सरसों, नारियल, मूंगफली, तिल और घृत जैसे देसी विकल्प अपनाकर आप त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी, सॉफ्ट और युवा बनाए रख सकते हैं।</description><guid>2554</guid><pubDate>18-Jan-2026 6:24:18 pm</pubDate></item><item><title>  बाकुची चूर्ण के फायदे </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/health.php?articleid=2553</link><description>आयुर्वेद में कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो बहुत पॉपुलर नहीं हैं लेकिन बहुत प्रभावशाली हैं। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बाकुची जिसे त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। खास बात यह है कि इसका प्रभाव त्वचा की बाहरी समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि कई अंदरूनी समस्याओं पर भी देखा गया है। आयुर्वेद के साथ-साथ इसके फायदों को विज्ञान ने भी सही माना है। आज इस लेख में हम जानेंगे बाकुची चूर्ण के फायदे।
1. सफेद दाग में फायदेमंद
बाकुची चूर्ण का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सफेद दाग यानी विटिलिगो से जुड़े मामलों में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह त्वचा में रंग देने वाले तत्व मेलानिन की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। बाकुची का वैज्ञानिक नाम Psoralea corylifolia है।कई रिसर्च में भी सामने आया है कि Psoralea corylifolia में पाए जाने वाले Psoralen और Bakuchiol जैसे कंपाउंड्स त्वचा में पिगमेंटेशन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ क्लिनिकल स्टडीज में Psoralen आधारित थेरेपी को विटिलिगो के इलाज में सहायक पाया गया है। हालांकि इसका असर धीरे-धीरे दिखता है इसलिए इसे आयुर्वेद में लॉन्ग-टर्म सपोर्ट के रूप में देखा जाता है।
2. स्किन इंफेक्शन में राहत
आयुर्वेद में बाकुची को प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर माना गया है। दाद, खाज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं में इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।
कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि बाकुची में मौजूद एक्टिव कंपाउंड्स फंगस और बैक्टीरिया के ग्रोथ को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे स्किन क्लीनिंग और स्किन डिटॉक्स से जोड़कर देखा जाता है।
3. बार-बार निकलने वाले कील-मुंहासे में उपयोगी
आजकल की लाइफस्टाइल में मुंहासे सिर्फ टीनएज की समस्या नहीं रह गई है। खराब पाचन, हार्मोनल असंतुलन और बढ़ता स्ट्रेस भी इसकी वजह बनते हैं। आयुर्वेदिक नजरिए से देखा जाए, तो बाकुची चूर्ण शरीर के अंदर जमा अशुद्ध तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जब अंदर की सफाई बेहतर होती है, तो उसका असर स्किन पर दिखता है। इससे त्वचा जवान बनी रहती है और व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से कम दिखाई देता है। इसी वजह से ऑयली स्किन और बार-बार पिंपल्स की समस्या में बाकुची को फायदेमंद माना जाता है।
4. सोरायसिस और एक्जिमा में भी फायदेमंद
सोरायसिस और एक्जिमा जैसी स्किन कंडीशन में स्किन ड्राई, लाल और इरिटेटेड रहती है। आयुर्वेद में बाकुची को स्किन रिपेयरिंग गुणों वाला माना गया है। कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इसके बायोएक्टिव कंपाउंड्स स्किन सेल्स के हेल्दी रिन्यूअल को सपोर्ट कर सकते हैं। इसी वजह से इसे क्रॉनिक स्किन डिसऑर्डर में सहायक जड़ी-बूटी माना जाता है।
5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद
आयुर्वेद में माना जाता है कि अगर पाचन सही है, तो आधी बीमारियां खुद-ब-खुद कंट्रोल में रहती हैं। बाकुची चूर्ण पाचन अग्नि को एक्टिव करने में मदद करता है। यह गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। जब डाइजेशन बेहतर होता है, तो शरीर पोषक तत्वों को भी सही तरीके से एब्जॉर्ब कर पाता है।
कुल मिलाकर आयुर्वेद में त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बाकुची का प्रयोग पुराने समय से ही किया जाता रहा है। इसके साथ-साथ यह पाचन और इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी फायदेमंद है। आधुनिक स्टडीज भी इसके कई पारंपरिक दावों को सपोर्ट करती नजर आती हैं।

</description><guid>2553</guid><pubDate>16-Jan-2026 6:14:49 pm</pubDate></item></channel></rss>