<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>देश - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>जयशंकर ने यूक्रेन पर रणनीति में बदलाव के दिए संकेत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31321</link><description>मॉस्को और कीव के साथ की जा रही वार्ता
नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए सिर्फ पैरोकारी करने के बजाय हाल के महीनों में कीव और मॉस्को, दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज कर दिए हैं तथा यह लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में नयी दिल्ली की हालिया पहल की पहली उद्घोषणा है। एक कार्यक्रम में जयशंकर की ये टिप्पणियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस बयान के कुछ दिनों बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास इस विवाद का पारस्परिक रूप से स्वीकार्य होने वाला एक समाधान तलाशने के लिए ''अच्छे विचार'' हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने शुक्रवार को कहा कि कीव को संभावित युद्धविराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले हैं। नयी दिल्ली की कोशिशों के बारे में जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है। पिछले चार साल से अधिक समय से भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए यूक्रेन विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। नयी दिल्ली में 'म्यूनिख लीडर्स मीटिंग' में जयशंकर ने कहा, ''उस टकराव पर हमारा रुख बहुत स्पष्ट रहा है कि हम इसे खत्म होते देखना चाहते हैं। इसके लिए बातचीत और कूटनीति की जरूरत होगी। इस मामले में बातचीत होनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''हम कई साल से इसकी हिमायत कर रहे हैं, और हाल के महीनों में हम सिर्फ इससे कहीं आगे बढ़कर इसमें थोड़ा और शामिल हुए हैं। इस मामले में हमारी रूस और यूक्रेन, दोनों से बातचीत हो रही है। हम मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत काला सागर में पोत परिवहन की सुरक्षा के मुद्दे से हो रही है।'' जयशंकर ने कहा कि भारत इससे आगे बढ़कर कुछ ऐसी तात्कालिक चिंताओं पर भी ध्यान दे रहा है जो दोनों (रूस और यूक्रेन) को अनाज और ऊर्जा के निर्यात तथा हमले न होने की संभावनाओं से संबंधित हैं। इन विषयों पर अभी बातचीत जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि अंतहीन युद्ध को अब समाप्त करना चाहिए। विदेश मंत्री ने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर भी बात की।
उन्होंने कहा, ''भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रहे हैं, खासकर 1950 के दशक से। उस इतिहास को भुलाया नहीं गया है।'' विदेश मंत्री ने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और हमारी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब तत्कालीन सोवियत संघ कई तरह से देश के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा, ''ऐसे समय में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोसी देश में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा था, रूस एक ऐसा देश था जिसके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे थे, और उस विरासत का हम पर कई तरह से असर पड़ा है।'' जयशंकर ने कहा कि अब यह जुड़ाव काफी व्यापक हो गया है।
उन्होंने कहा, ''आज यह रिश्ता काफी हद तक आर्थिक भी हो गया है। इसमें सैन्य और परमाणु पहलू हैं, साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र भी है। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश के साथ-साथ ऊर्जा और संसाधनों का भी लेन-देन होता है।'' विदेश मंत्री ने बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बारे में कहा, ''बैठक में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज के हालात में अमेरिका ने अपनी स्थिति में एक बड़ा बदलाव किया है। यह स्थिति में बदलाव उसकी अपनी पसंद का नतीजा है।'' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एक तरह से, वह ''जान-बूझकर'' एक ''अकेली पड़ती हुई महाशक्ति'' बन गया है। जयशंकर ने कहा, ''इस परिदृश्य की दूसरी विशेषता निश्चित रूप से चीन का उदय है। चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है--और एक तरह से, यह उसकी अपनी सोच भी है और कई मायनों में हकीकत भी। और हम बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा देख रहे हैं।'' जयशंकर ने कहा, ''आज यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण हर देश के पास मौजूद किसी भी तरह के प्रभाव या ताकत का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जाने लगा है। और यह प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे पर निर्भरता की जटिलता के साथ-साथ जारी रहती है।''</description><guid>31321</guid><pubDate>05-Oct-2026 12:20:47 am</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री मोदी ने एशियाई खेलों के अभियान के बाद भारतीय दल को बधाई दी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31320</link><description>नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन के लिए उन्हें रविवार को बधाई दी और खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने दृढ़ संकल्प, जुनून और खेल भावना के साथ देश का प्रतिनिधित्व किया। भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण के पदकों की तुलना से 21 कम है। मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ''एशियाई खेल 2026 के समापन के साथ ही मैं भारतीय दल के हर सदस्य को बधाई देता हूं जिन्होंने दृढ़ संकल्प, जुनून और शानदार खेल भावना के साथ हमारे देश का प्रतिनिधित्व किया। '' उन्होंने सभी भारतीय पदक विजेताओं को भी बधाई दी और कहा कि उनके प्रदर्शन ने 'देश को अपार खुशी' दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''उम्मीद है कि ये खेल आने वाले वर्षों में और बड़ी उपलब्धियों के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही, ये जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में भी योगदान देंगे। '' दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद रविवार को नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भव्य समापन समारोह के साथ एशियाई खेलों का समापन हुआ। इन खेलों में 350 से अधिक रिकॉर्ड बने जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। एशिया के 45 देशों के खिलाड़ियों ने इन खेलों में हिस्सा लिया।</description><guid>31320</guid><pubDate>05-Oct-2026 12:18:34 am</pubDate></item><item><title>मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति पार्मेलिन के बीच हुई व्यापक वार्ता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31319</link><description>नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की मेजबानी की और इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, आवागमन और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को मजबूत करने के नए अवसरों पर व्यापक बातचीत की। पार्मेलिन सोमवार सुबह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचे, जो उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा है। हालांकि, इस वर्ष वह दूसरी बार भारत आए हैं। वह इससे पहले फरवरी में आयोजित 'एआई इंपैक्ट समिट' में हिस्सा लेने पहुंचे थे। राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद स्विस राष्ट्रपति का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''दोनों नेताओं के समक्ष एक व्यापक एजेंडा है, जिसके तहत वे भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी के विभिन्न आयामों पर चर्चा करने के साथ-साथ इसे और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार करेंगे।'' प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि वह भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के आधार पर भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को गहरा करने की राष्ट्रपति पार्मेलिन की प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि वह भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को आगे बढ़ाते हुए भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को गहरा करने की राष्ट्रपति पार्मेलिन की प्रतिबद्धता की ''सराहना'' करते हैं। करीब 16 वर्षों तक चली बातचीत के बाद मार्च 2024 में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच इस महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस व्यापक व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य देश आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की योजना बना रहे हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रभावी हुए इस व्यापार समझौते से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। वर्तमान में इंजीनियरिंग, सेवा, रसायन और दवा जैसे क्षेत्रों में 330 से अधिक स्विस कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में स्विट्जरलैंड में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। अपनी यात्रा के दौरान पार्मेलिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।</description><guid>31319</guid><pubDate>05-Oct-2026 12:14:45 am</pubDate></item><item><title>वायुसेना प्रमुख ने पायलट स्मित मच्छार की वीरता को सराहा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31318</link><description>नयी दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार ने इस सप्ताह 'फ्लाईदुबई' की एक उड़ान को बचाने में असाधारण बहादुरी का परिचय दिया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हर भारतीय को मच्छार पर गर्व है। उन्होंने जो किया, वह असाधारण बहादुरी थी। उन्होंने अदम्य शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया।'' बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। हालांकि, मच्छार ने घायल अवस्था में भी हमलवार का वीरता से मुकाबला करते हुए विमान गिराने के उसके प्रयास को विफल कर दिया।</description><guid>31318</guid><pubDate>04-Oct-2026 2:48:28 pm</pubDate></item><item><title>वैश्विक अनिश्चितता अब स्थायी चुनौती, मजबूती बढ़ाने वाली नीतियां जरूरी: सीतारमण</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31317</link><description>नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता अब 'स्थायी स्थिति' बन गई है और ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है, जो आर्थिक मजबूती बढ़ाएं। उन्होंने देशों से खुले और भरोसेमंद आर्थिक संबंध बनाए रखने का आह्वान किया। सीतारमण ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगले दशक के झटकों से निपटने के लिए भारत की चार प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने में आत्मनिर्भरता पर ध्यान देने और निजी क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) समेत निवेश का नेतृत्व करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कामकाज की बदलती दुनिया के बीच कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण और उसे लागू करने में उद्योग को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। वित्त मंत्री ने यहां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026 में कहा, ''वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब लगातार बनी रहने वाली स्थिति है और नीतियां इसी को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। हमें आगे बढ़ते हुए लगातार मजबूती बढ़ाते रहना होगा। यह एक बार किया जाने वाला प्रयास नहीं है। आने वाले वर्षों के लिए तैयारी जरूरी है और भारत इनका सामना मजबूती के साथ कर रहा है।'' खुले, भरोसेमंद और नियम आधारित वैश्विक आर्थिक संबंधों की बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि देशों को एक-दूसरे के साथ संवाद और बातचीत के जरिये हुए समझौतों के माध्यम से जुड़ना चाहिए, न कि भू-राजनीतिक मतभेदों को व्यापार और निवेश में बाधा बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में कारोबार के लिए अधिक निश्चितता होनी चाहिए, देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाना चाहिए और बाजारों को विभाजित करने वाले अनावश्यक प्रतिबंधों से बचना चाहिए।'' सीतारमण ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में संरचनात्मक आत्मनिर्भरता की जरूरत बताते हुए कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को इस तरह बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक ही स्रोत पर निर्भरता कम हो और घरेलू स्तर पर उत्पादन एवं आपूर्ति की क्षमता बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.83 प्रतिशत है, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों में यह 2.7 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च में निजी क्षेत्र का योगदान केवल 36 प्रतिशत है। निजी क्षेत्र से निवेश का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए सीतारमण ने कहा, ''निवेश का स्तर और निजी क्षेत्र की भागीदारी, दोनों बढ़ाना हमारी नवोन्मेष क्षमता को मजबूत करने के लिए जरूरी है।'' मंत्री ने कहा कि भारत के लिए मजबूती का अर्थ पिछले एक दशक में तैयार की गई बुनियादी संरचना पर आगे बढ़ते हुए आर्थिक वृद्धि को तेज और व्यापक बनाना है। उन्होंने कहा, ''आने वाले वर्षों में भारत की मजबूती की परीक्षा इस बात से भी होगी कि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना किस तरह करता है और इनका असर परिवारों और कारोबारी गतिविधियों पर कितना कम पड़ता है।'' 'बदलाव के दौर में मजबूती' विषय पर सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि मजबूती का प्रमाण उन संभावित नतीजों में निहित है, जो सामने नहीं आए। इनमें महंगाई का ऐसा दौर शामिल है, जिसने जोर नहीं पकड़ा, ईंधन केंद्रों पर लंबी कतारें नहीं लगीं, बैंकिंग क्षेत्र में तनाव नहीं उभरा और राजकोषीय सुधार के लिए दबाव नहीं बना। उन्होंने कहा, ''इन संभावित लेकिन सामने नहीं आए परिणामों पर अर्थशास्त्रियों को उतना ही ध्यान देना चाहिए जितना मुख्य आर्थिक वृद्धि दर पर।'' सीतारमण ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देशभर में आर्थिक गतिविधियों को सरल, अधिक भरोसेमंद और अधिक उत्पादक बनाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता, चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों के जरिये राष्ट्रीय स्तर की रूपरेखा को आगे बढ़ाया है।</description><guid>31317</guid><pubDate>04-Oct-2026 2:46:50 pm</pubDate></item><item><title>प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का अगला संस्करण कोलकाता में होगा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31316</link><description>नयी दिल्ली। प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) सम्मेलन का अगला संस्करण जनवरी में कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह तीन-दिवसीय सम्मेलन सात जनवरी से शुरू होगा और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ''प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का 19वां संस्करण सात से नौ जनवरी 2027 तक कोलकाता में आयोजित किया जाएगा।'' इसका आयोजन विदेश मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार करेगी।
प्रवासी भारतीय दिवस महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से नौ जनवरी 1915 को भारत लौटने की स्मृति में मनाया जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान करेंगी और समापन सत्र की अध्यक्षता करेंगी। मंत्रालय ने कहा, ''सम्मेलन में 'युवा प्रवासी भारतीय दिवस' का आयोजन भी होगा। इस आयोजन में दुनियाभर से भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य, युवा प्रवासी नेता, उद्यमी, पेशेवर, शिक्षाविद, नवोन्मेषक और अन्य हितधारक भाग लेंगे।''</description><guid>31316</guid><pubDate>04-Oct-2026 2:44:28 pm</pubDate></item><item><title>बीएनएस के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद भारत दुनिया के सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में होगा: शाह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31315</link><description>भोपाल. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी। शाह ने राज्य की राजधानी भोपाल के भेल क्षेत्र स्थित दशहरा मैदान में आयोजित गोपालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ऐसी विस्तृत योजना पर काम कर रही है, जिससे 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में ''नशे के लिए कोई जगह'' नहीं बचेगी। शाह ने कहा, ''भारत की न्याय व्यवस्था कभी 'तारीख पर तारीख' के तानों के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष में न्याय दिलाने का पूरा काम हो जाएगा।'' उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून उनके शासन को बचाने के लिए थे, जबकि तीन नए आपराधिक कानून भारत के नागरिकों के सम्मान, संपत्ति और शरीर की रक्षा के लिए हैं। शाह ने कहा, ''इन कानूनों का मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं। दंड का प्रावधान केवल अपराधियों को अपराध करने से रोकने के लिए है। इन कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी।'' शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आजादी के बाद से कृषि व्यवस्था, ग्रामीण विकास और सहकारिता से जुड़े लोगों की अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग थी, लेकिन तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी ने 75 वर्षों तक अलग सहकारिता मंत्रालय नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर सहकारिता क्षेत्र को नयी दिशा दी। इसका सबसे बड़ा लाभ हमारे गोपालकों को मिलेगा। खुले बाजार में दूध बेचने पर बिचौलिए लाभ का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं, लेकिन सहकारिता मॉडल में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है।'' शाह ने बड़ी संख्या में सम्मेलन में पहुंचे गोपालकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश में 'श्वेत क्रांति 2.0' के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन से सबसे अधिक लाभ गोपालकों को होगा। उन्होंने कहा, ''गोपालकों की यह भागीदारी पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नए संकल्प और नयी ऊर्जा का प्रतीक है।'' शाह ने कहा कि देश में 2013-14 में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 307 ग्राम थी, जो बढ़कर 485 ग्राम हो गई है। उन्होंने कहा, ''भारत आज दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला देश है। देश के पांच प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भाजपा की सरकारें हैं। कांग्रेस ने अपने शासन में पशुपालकों के कल्याण के लिए क्या किया, इसका जवाब उसे देना चाहिए। हमारी सरकारों का ध्यान पशुपालकों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर है।'' केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार का विरोध करने वाले कांग्रेस नेताओं के सवालों का हिसाब देने वह यहां आए हैं। उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के 75 वर्षों के शासन में देश का दूध उत्पादन 14.60 करोड़ टन तक पहुंचा, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में यह बढ़कर 25 करोड़ टन तक पहुंचा है। इसके पीछे भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों की निरंतर मेहनत है।'' शाह ने कहा कि सरकार ऐसी विस्तृत योजना बना रही है, जिससे 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। शाह ने इससे पहले नए आपराधिक कानूनों पर केंद्रित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और उसका अवलोकन भी किया। शाह कार्यक्रम के बाद भोपाल के भौंरी क्षेत्र स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के विस्तारित 'अत्रि' परिसर का शिलान्यास करेंगे और परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।</description><guid>31315</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:37:40 am</pubDate></item><item><title>समावेशिता से ही विकास टिकाऊ बनता है, आम सहमति से लिए जाएं फैसले: उपराष्ट्रपति</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31314</link><description>नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को जोर देकर कहा कि समावेशिता ही विकास को टिकाऊ बना सकती है और उन्होंने आम सहमति के आधार पर फैसले लेने पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने यहां पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अल्पविकसित से विकासशील और अब विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हम खुद को विकसित अर्थव्यवस्था तभी कह सकते हैं जब यह सभी का समावेशी विकास हो और इसके लाभ हर कोने-कोने तक पहुंचें। राधाकृष्णन ने यह भी रेखांकित किया कि तेजी से हो रहे बदलावों के इस दौर में, जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और वैश्विक व्यापार बदल रहा है, हमें आम सहमति से फैसले लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम बहस कर सकते हैं, चर्चा कर सकते हैं और एक ऐसे अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं जो सभी को स्वीकार्य हो। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उनका दृढ़ विश्वास है कि केवल स्वतंत्र और पारदर्शी बहस ही लोकतंत्र को मजबूत करती है। नीति निर्माताओं को हमेशा जमीनी तथ्यों से अवगत रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ''नीति निर्माण में इतना लचीला होना चाहिए कि वह नीति अपने आप में एक बड़ी सफलता बन जाए।''</description><guid>31314</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:31:46 am</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा, राष्ट्रपति मुर्मू ने कुमकुम, प्रणवी और नीरज को दी बधाई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31313</link><description>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों कुमकुम अनिल मोहोद, प्रणवी शरथ उर्स और नीरज चौहान को बधाई दी है। उन्होंने कुमकुम और प्रणवी के गोल्ड मेडल तथा नीरज के ब्रॉन्ज मेडल को भारतीय खेलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए तीनों खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
राष्ट्रपति ने कुमकुम अनिल मोहोद को एशियन गेम्स 2026 के रिकर्व विमेंस इंडिविजुअल इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुमकुम का पूरे गेम्स में अभियान शानदार रहा और उन्होंने टीम इवेंट्स में भी दो मेडल जीतकर अपनी उपलब्धियों में इजाफा किया।
द्रौपदी मुर्मूने कहा कि कुमकुम के गोल्ड मेडल जीतने के बाद एशियन गेम्स का आयोजन स्थल भारत के नेशनल एंथम से गूंज उठा। उन्होंने भारतीय महिला तीरंदाजों की इस संस्करण में शानदार सफलता में कुमकुम के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि उनका प्रदर्शन खासकर देश की युवा लड़कियों को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणवी शरथ उर्स को विमेंस इंडिविजुअल स्ट्रोक प्ले में गोल्ड मेडल जीतने और एशियन गेम्स में इंडिविजुअल गोल्फ गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि ओपनिंग टी से लेकर फाइनल पुट तक प्रणवी ने अपनी निरंतरता बनाए रखी और भारतीय गोल्फ के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
राष्ट्रपति ने प्रणवी के गोल्ड मेडल को भारतीय महिला गोल्फ को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता देश में महिला गोल्फ के लिए एक नया माइलस्टोन है और प्रणवी को भविष्य में भी कई उपलब्धियां हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दीं। द्रौपदी मुर्मु ने आर्चरी के रिकर्व मेंस इंडिविजुअल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले नीरज चौहान को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में दोनों तीरंदाज भारतीय थे, जो इंडियन रिकर्व आर्चरी के लिए एक खास पल रहा।
राष्ट्रपति ने कहा कि नीरज का ब्रॉन्ज मेडल एशियन गेम्स में इंडिविजुअल रिकर्व पोडियम पर भारत की मजबूत मौजूदगी को और बढ़ाता है। उन्होंने इसे भारतीय आर्चरी के लिए गर्व का विषय बताते हुए नीरज को भविष्य की उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दीं।</description><guid>31313</guid><pubDate>03-Oct-2026 3:56:43 pm</pubDate></item><item><title> स्वच्छता अभियान 6.0 में ई-कचरे और कबाड़ पर फोकस, पांच साल में 5,102 करोड़ रुपए की कमाई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31312</link><description>नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के कार्यान्वयन चरण का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अब महज साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन, सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, लंबित मामलों में कमी और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की स्थायी संस्कृति बन चुकी है। अभियान के तहत पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपए की कमाई हुई है, जबकि 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक कार्यालयी जगह खाली कराई गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2014 में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल धीरे-धीरे जन-आंदोलन और फिर सरकारी कार्यालयों में संस्थागत प्रक्रिया में बदल गई। उन्होंने कहा कि शौचालय और साफ-सफाई से शुरू हुआ अभियान अब पुरानी फाइलों, बेकार फर्नीचर, ई-फाइलों, ई-कचरे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार निपटान तक पहुंच गया है।
जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा निर्धारित स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में श्रमदान किया। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम पहल के तहत पौधे लगाए और पुराने रिकॉर्ड हटाने की प्रक्रिया की प्रतीकात्मक शुरुआत की। इस दौरान सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाइयां देकर सम्मानित भी किया गया। डीएआरपीजी इस अभियान के लिए नोडल विभाग है।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने सीएसआईआर मुख्यालय पहुंचकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी इकोसिस्टम में विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 को आगे बढ़ाया। उन्होंने व्यापक सफाई अभियान का नेतृत्व किया और स्वच्छता सिग्नेचर कैंपेन तथा पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। सफाई मित्रों को भी सम्मानित किया गया। सीएसआईआर में पुराने रिकॉर्ड और कबाड़ की समीक्षा, उनके निपटान, कार्यस्थल में सुधार तथा कार्यालयी स्थान के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक जगह खाली कराकर उसका बेहतर उपयोग संभव बनाया गया। इसके अलावा 180.48 लाख से अधिक फाइलों को बंद या हटाया गया और देशभर में 24.20 लाख सफाई स्थलों की पहचान कर उनकी सफाई की गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कबाड़ और अनावश्यक रिकॉर्ड हटाकर खाली हुई जगह का उपयोग ग्रीन एरिया विकसित करने या लंबे समय से अवरुद्ध और कम उपयोग वाली जगहों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष स्वच्छता अभियान ने स्वच्छता को केवल वार्षिक गतिविधि के बजाय सरकारी संस्थानों की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने में मदद की है।
जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का भी दौरा किया। वहां विशेष अभियान 6.0 के तहत पृथ्वी भवन और मौसम भवन से ई-कचरे तथा अनुपयोगी उपकरणों को हटाने और निपटान की प्रक्रिया शुरू की गई। इस अभियान के तहत कुल 705 वस्तुओं की पहचान की गई है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने केंद्रीय मंत्री को निपटान के लिए चुनी गई वस्तुओं की जानकारी दी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की गतिविधियां वैज्ञानिक इकोसिस्टम में चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा हैं। पृथ्वी विज्ञान, सीएसआईआर और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले 100 से अधिक विज्ञान संस्थानों ने 2 अक्टूबर से इस अभियान में भाग लेना शुरू किया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों में स्वच्छता और अनुपयोगी सामान के व्यवस्थित निपटान की संस्कृति को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्री ने विशेष स्वच्छता अभियान को वैज्ञानिक इकोसिस्टम की कचरे से संपदा अवधारणा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल कचरे का निपटान करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिनके माध्यम से कचरे को उपयोगी उत्पादों, सामग्री, ऊर्जा और आर्थिक अवसरों में बदला जा सके।
सीएसआईआर के तकनीकी पोर्टफोलियो में नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण, ई-कचरे से महत्वपूर्ण धातुओं और दुर्लभ खनिजों की पुनर्प्राप्ति, लिथियम-आयन बैटरी का पुनर्चक्रण, बायोमेथेनेशन, कृषि अपशिष्ट से जैव-अपघटित उत्पादों का निर्माण, अपशिष्ट जल से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और औद्योगिक कचरे से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों को उपयोग और आगे के विकास के लिए उद्योग जगत तथा अन्य संगठनों को उपलब्ध कराया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष अभियानों के अनुभव बताते हैं कि स्वच्छता अभियान किस तरह प्रशासनिक सुधार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और संस्थागत दक्षता बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। वैज्ञानिक क्षेत्र में यह सोच कचरे की पहचान और निपटान से आगे बढ़कर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण, नवाचार और संपदा सृजन तक पहुंच रही है।
विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा सितंबर में की गई तैयारियों के बाद विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान में स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी, रिकॉर्ड की समीक्षा और छंटाई, कार्यालयी स्थान का बेहतर उपयोग, ई-कचरे एवं अनुपयोगी सामान का वैज्ञानिक निपटान तथा बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के संस्थागत लक्ष्यों के साथ समग्र सरकारी प्रयास के रूप में लागू किया जा रहा है।
</description><guid>31312</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:33:20 pm</pubDate></item><item><title> प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से उद्यमियों को मिला संबल, 73 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31311</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) देशभर में स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के साथ समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की इस प्रमुख योजना को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) लागू करता है। योजना के तहत खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गैर-कृषि क्षेत्र के नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमियों को बैंक से स्वीकृत ऋण पर मार्जिन मनी (MM) सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता दी जाती है। वित्त वर्ष 2014-15 से PMEGP के तहत करीब 8.12 लाख सूक्ष्म उद्यमियों को 24,398.61 करोड़ रुपए की मार्जिन मनी सब्सिडी के साथ सहायता दी गई है। योजना के माध्यम से लगभग 73.08 लाख लोगों के लिए टिकाऊ रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसका उद्देश्य नौकरी तलाशने वालों को उद्यम स्थापित कर रोजगार देने वालों में बदलने के लिए जरूरी वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना है।
PMEGP के तहत मार्जिन मनी सब्सिडी के साथ बैंक ऋण की सुविधा उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने में मदद करती है। पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए यह सहायता शुरुआती पूंजी की चुनौती को कम करती है और उन्हें अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्यम में बदलने का अवसर देती है।
हिमाचल प्रदेश के परवाणू की पूजा शर्मा द्वारा शुरू की गई स्किनकांती आयुर्वेद PMEGP से लाभान्वित उद्यम की सफलता का उदाहरण है। 25 लाख रुपए की परियोजना लागत से भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से शुरू हुई यह इकाई आज सालाना 30 करोड़ रुपए का कारोबार कर रही है और करीब 300 लोगों को रोजगार दे रही है। इनमें 95% महिलाएं हैं।
स्किनकांती आयुर्वेद ने आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़कर हाथ से बने साबुन के उत्पादन में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी ने विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और लागत कम करने जैसी तकनीकी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके उत्पाद विभिन्न रिटेल और संस्थागत माध्यमों के जरिए देशभर में उपलब्ध हैं।
पंजाब के मोहाली में सुरेंद्र पाल सिंह नागी द्वारा स्थापित M/s Ess Pee Quality Products ने भी PMEGP के सहयोग से स्थानीय उद्यम से वैश्विक बाजार तक का सफर तय किया है। बैंक ऑफ बड़ौदा से 21 लाख रुपए की शुरुआती परियोजना लागत के साथ शुरू हुई यह इकाई अब करीब 38 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार वाले व्यवसाय में बदल चुकी है और लगभग 130 लोगों को रोजगार दे रही है।
कंपनी शहद, कुकीज और फ्रूट जैम जैसे खाद्य उत्पाद तैयार करती है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा फ्रांस समेत 26 देशों में इनका निर्यात करती है। कंपनी का AA+ BRCGS सर्टिफिकेशन हासिल करना वैश्विक गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप उसके उत्पादन को दर्शाता है। PMEGP से जुड़े उद्यमियों की सफलता की कहानियां सूक्ष्म उद्यमों के विस्तार, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में योजना की भूमिका को सामने लाती हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसर बढ़ने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।
PMEGP के संभावित लाभार्थी योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आवेदन प्रक्रिया के लिए आधिकारिक PMEGP पोर्टल पर जा सकते हैं।</description><guid>31311</guid><pubDate>03-Oct-2026 11:45:57 am</pubDate></item><item><title> जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में पीयूष गोयल ने वैश्विक व्यापार विकृतियों पर जताई चिंता, WTO अनुरूप उपायों की वकालत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31310</link><description>नई दिल्ली। अमेरिका के मिलवॉकी में 2 अक्टूबर को आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन दिवस पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक व्यापार में विकृतियों को दूर करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुरूप नियम-आधारित और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता एवं उत्पादन, सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की घरेलू मांग पर आधारित है। भारत डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है।
गोयल ने कहा कि भारत कई सदस्य देशों की इस चिंता से सहमत है कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाला समर्थन डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण को बढ़ावा दे सकता है। ऐसी चिंताओं के समाधान के लिए WTO के अनुरूप उपाय उपलब्ध हैं, जिनमें साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटी शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित होने पर व्यापार विकृतियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसका इस्तेमाल WTO नियमों से बाहर के उपायों के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही, समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर नहीं डाला जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें औद्योगीकरण के लिए नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत है।
सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत को अद्यतन करने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि जी20 सदस्यों के साथ भारत का व्यापार पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली पर निर्भर करता है। उन्होंने MFN सिद्धांत को इस व्यवस्था की प्रमुख गारंटी बताते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों तक सभी के लिए समान शर्तें लागू हों।
गोयल ने WTO में आम सहमति को सर्वोपरि बताते हुए विकासशील देशों के लिए विशेष एवं भिन्न व्यवहार (Special and Differential Treatment) बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को विकसित देशों के साथ बराबरी की स्थिति तक पहुंचने में मदद मिलती है। उन्होंने WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने का भी आह्वान किया।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जबरन श्रम पर रोक लगाता है और इसे सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से लागू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन 29 और 105 की पुष्टि की है तथा जुलाई 2026 में जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया।
गोयल ने कहा कि सीमा पर उठाए जाने वाले कदम पूरे देशों, क्षेत्रों या वर्गों के बारे में अनुमानों के बजाय विशिष्ट और सत्यापन योग्य साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने उचित प्रक्रिया और WTO नियमों के सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन श्रम मानकों के लिए सक्षम, सार्वभौमिक और त्रिपक्षीय निकाय है। उन्होंने जी20 सदस्यों के बीच जबरन श्रम उन्मूलन और अच्छी प्रथाओं के स्वैच्छिक आदान-प्रदान के उद्देश्य का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग में सदस्यों की निगरानी, नए दायित्वों का सृजन या किसी जानकारी का एकतरफा व्यापार कार्रवाई के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
गोयल ने WTO को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, निष्पक्ष, समान, गैर-भेदभावपूर्ण, पारदर्शी, खुले, समावेशी और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विकासशील देशों के लिए अपने लोगों के विकास और पोषण से जुड़ी नीतियों को लागू करने की स्वतंत्रता तथा सर्वसम्मति से निर्णय लेने के महत्व पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने मिलवॉकी में आयोजित कार्यक्रमों और आतिथ्य के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की जी20 अध्यक्षता और राजदूत ग्रीर को धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार का उल्लेख किया कि जिन मुद्दों का समाधान मिलकर नहीं हो सकता, उन्हें उन मुद्दों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए, जिनका समाधान मिलकर किया जा सकता है। गोयल ने कहा कि भारत ने इसी भावना के साथ बैठक में भाग लिया और चारों विषयों पर अपनी चिंताओं तथा रचनात्मक सुझावों को साझा किया। उन्होंने 2027 में जी20 की अध्यक्षता के लिए यूनाइटेड किंगडम को भारत के पूर्ण समर्थन की भी घोषणा की।
बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार एवं पर्यटन मंत्री, सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री, फ्रांस के विदेश व्यापार एवं आर्थिक आकर्षण के प्रतिनिधि मंत्री, दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
</description><guid>31310</guid><pubDate>03-Oct-2026 11:43:35 am</pubDate></item><item><title> एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा, सुजीत-अंकुश-परवीन को गोल्ड पर पीएम मोदी ने दी बधाई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31309</link><description>नई दिल्ली। एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों एवं टीमों को बधाई दी है। भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार का दिन शानदार रहा। प्रधानमंत्री ने पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाले सुजीत, पुरुषों की 80 किग्रा मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक विजेता अंकुश और महिलाओं की 65 किग्रा मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली परवीन को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने पुरुष क्वाड्रेंट सेपकटकरा में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम और महिलाओं की डिंगी स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल करने वाली नेत्रा कुमानन की उपलब्धियों की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेलों में पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा के रोमांचक फाइनल में जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक जीतने पर सुजीत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में अपने पदार्पण पर सुजीत ने भारत को इस संस्करण में कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक दिलाया है। प्रधानमंत्री ने उनकी जीत को यादगार बताते हुए आगामी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने पुरुषों की 80 किग्रा मुक्केबाजी के फाइनल में शानदार जीत के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाले अंकुश को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि अंकुश का जुनून और समर्पण सराहनीय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता ने एशियाई खेलों में भारत के मुक्केबाजी अभियान का समापन शानदार अंदाज में सुनिश्चित किया है।
महिलाओं की 65 किग्रा मुक्केबाजी स्पर्धा के कड़े मुकाबले के फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाली परवीन को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी उपलब्धि को भारतीय मुक्केबाजी में एक और शानदार अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि परवीन की सफलता बेहद प्रेरणादायक है और यह खेल में उत्कृष्टता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने उन्हें भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री ने पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष क्वाड्रेंट टीम को भी बधाई दी। उन्होंने इसे भारतीय सेपकटकरा के लिए ऐतिहासिक पल बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि एशियाई खेलों के इस पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में यह भारत का पहला पदक है। उन्होंने टीम के दृढ़ संकल्प और लड़ने के जज्बे की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि देश में सेपकटकरा को और बढ़ावा देगी।
प्रधानमंत्री ने महिलाओं की डिंगी स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली नेत्रा कुमानन को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए बड़ी कामयाबी है। प्रधानमंत्री ने नेत्रा के लिए भविष्य में और सफलता की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह देश में एथलीटों की नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेंगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट के जरिए इन उपलब्धियों की जानकारी साझा की। सुजीत को बधाई देते हुए पीएमओ ने कहा कि उन्होंने अपने एशियाई खेलों के पदार्पण पर भारत को कुश्ती में इस संस्करण का पहला स्वर्ण पदक दिलाया और यह वास्तव में यादगार जीत है।
अंकुश की जीत पर पीएमओ ने कहा कि पुरुषों की 80 किग्रा मुक्केबाजी में फाइनल की शानदार जीत के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। पोस्ट में उनके जुनून और समर्पण की सराहना की गई और कहा गया कि उनकी सफलता ने भारत के मुक्केबाजी अभियान का समापन शानदार मोड़ पर किया।
परवीन को बधाई देते हुए पीएमओ ने उनकी उपलब्धि को भारतीय मुक्केबाजी में एक और शानदार अध्याय बताया। वहीं, भारतीय पुरुष क्वाड्रेंट टीम के कांस्य पदक को पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में भारत का पहला पदक बताते हुए टीम के दृढ़ संकल्प और लड़ने के जज्बे की सराहना की गई।
नेत्रा कुमानन को बधाई देते हुए पीएमओ ने कहा कि महिलाओं की डिंगी स्पर्धा में उनका कांस्य पदक भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। पीएमओ ने उनके भविष्य में नई ऊंचाइयां हासिल करने और देश में एथलीटों की नई पीढ़ी को प्रेरित करने की कामना की।</description><guid>31309</guid><pubDate>03-Oct-2026 11:30:48 am</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी से फोन पर बात करते हुए भावुक हुए पायलट स्मित मच्छार, प्रधानमंत्री को बताया अपना सबसे बड़ा आइडल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31307</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की है। उन्होंने स्मित मच्छार से उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी से बात करते हुए पायलट स्मित भावुक गए। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना सबसे बड़ा आइडल बताया। स्मित मच्छार ने कहा, आप मेरे सबसे बड़े आइडल हैं। आप कॉल करके मेरी हौसला अफजाई कर रहे हैं, मुझे बहुत गर्व हो रहा है। स्मित ने पीएम मोदी से कहा, मैंने कभी नहीं सोचा था कि आपसे मेरी बात होगी।
स्मित के भावुक होने पर पीएम मोदी ने कहा, आपने इतना बड़ा काम किया है कि हर देशवासी और पूरी दुनिया लोग आपको देखने, आपसे बात करने के लिए आतुर हैं। आपने सचमुच में पूरे देश का नाम रौशन किया है।
वीडियो कॉल पर पर बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने स्मित से कहा कि पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है। महामृत्युंजय के जाप चल रहे हैं। आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने लोगों की जान बचाई है। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा, आपके शरीर पर इतना बड़ा घाव हुआ और स्वयं जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे। उस समय भी आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है। इसलिए मैं हृदय से गर्व अनुभव करता हूं।
स्मित के परिजनों से बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, मुझे कल भूपेंद्र भाई और गीताबेन से बात करने का अवसर मिला। मैंने गीताबेन को बोला कि आपका नाम गीता है, लेकिन आपने कृष्ण की गीता को पूरी तरह बचा दिया। आपने साक्षात गीता के संस्कारों से स्मित का जीवन बनाया।पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक है। उन्होंने कहा, अगर ऐसा (आप सभी की जान न बचाते) न करते तो पता नहीं, पूरे देश और भारत के पायलटों पर क्या-क्या बीतती। सभी पायलटों को किस तरह से देखा जाता। आपने सभी को बचा लिया है।
इस दौरान, पीएम मोदी ने सऊदी और यूएई सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने स्मित की बहुत देखभाल की। मैं उनका बहुत आभारी हूं।</description><guid>31307</guid><pubDate>02-Oct-2026 5:10:21 pm</pubDate></item><item><title>गुजरात में UCC लागू, विवाह से लेकर उत्तराधिकार तक बदलेंगे नियम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31306</link><description>नई दिल्ली। गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो गया है। गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है और राज्य में कानून को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था। यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान करता है। विधेयक के अनुसार कानून को प्रभावी करने की तारीख राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। इसमें विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है।
यूसीसी में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को लेकर बेटियों और बेटों के बीच समानता का प्रावधान किया गया है। यानी पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटी को भी बेटे के समान अधिकार मिलेगा। बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकार भी कानून के तहत निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा सरोगेसी और गोद लेने से जुड़े बच्चों को भी कानूनी अधिकारों के मामले में समान सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी कानून के तहत संरक्षित किया गया है।
गुजरात यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू किया गया है। इसके तहत पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने पर प्रतिबंध रहेगा। विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी एक समान कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यूसीसी की प्रमुख व्यवस्थाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी शामिल है। राज्य में ऐसे संबंधों को निर्धारित समय-सीमा और प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। इससे संबंधित कानूनी अधिकारों और दायित्वों को भी कानून के तहत निर्धारित किया गया है।
गुजरात यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके प्रावधानों से छूट दी गई है। इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना बताया गया है।
गुजरात में यूसीसी की दिशा में पहल 2022 में शुरू हुई थी। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की थी। इसके बाद फरवरी 2024 में गुजरात सरकार ने यूसीसी की जरूरत और उसके संभावित स्वरूप का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की। समिति ने राज्य में व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया और यूसीसी के स्वरूप को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की।
मार्च 2026 में समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया। गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को विधेयक पारित किया। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी विधेयक के पारित होने के बाद गुजरात सरकार और विधायकों को बधाई दी गई थी। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून को अपनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है। अब राज्य सरकार द्वारा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी अधिसूचनाओं और नियमों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
</description><guid>31306</guid><pubDate>02-Oct-2026 5:09:33 pm</pubDate></item><item><title>एनसीईआरटी: कक्षा नौ के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर शामिल, केवल नयी व्यवस्था के बारे में बात</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31305</link><description>नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) ने कक्षा-9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है और ईमानदारी से कर चुकाने को नागरिकों का एक महत्वपूर्ण दायित्व बताने वाला संदेश भी दिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद, मंगलवार को 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' शीर्षक से किताब जारी की गई। पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था। एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी के अनुसार, अब छात्र नयी व्यवस्था के तहत कर स्लैब के हिसाब से आयकर की वास्तविक गणना को समझ सकते हैं  इस आयु के बच्चों (कक्षा 9) के लिए यह पहली बार है  और इसके साथ ही उन्हें यह संदेश भी दिया गया है कि ''ईमानदारी से और समय पर'' कर चुकाना ''हर नागरिक का एक अहम दायित्व'' है, जिससे देश का विकास होता है। 'अपनी व्यक्तिगत आय को प्रबंधित करना' शीर्षक वाला अध्याय कहता है कि पैसे को प्रबंधित करने का सफ़र बचपन से ही शुरू हो जाता है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, पैसे का समझदारी से प्रबंधन करने का मतलब सिर्फ़ ज़्यादा कमाना नहीं है, बल्कि हर चरण पर सोच-समझकर वित्तीय फ़ैसले लेना है-चाहे वह खर्च करना हो, बचत करना हो, निवेश करना हो, जोखिमों से सुरक्षा हो, ज़िम्मेदारी से उधार लेना हो या कर चुकाना हो। इसमें कहा गया है कि आज लोग जो फ़ैसले लेते हैं, वे उनके आर्थिक भविष्य को आकार देते हैं और आर्थिक अवसरों व चुनौतियों को प्रबंधित करते हुए आर्थिक स्थिरता पाने की उनकी क्षमता तय करते हैं। इस अध्याय में नयी आयकर व्यवस्था के तहत कर संबंधी स्लैब की एक सारणी दी गई है और इसमें बताए गए स्लैब के अनुसार कर की देनदारी का हिसाब लगाने के तरीके भी विस्तार से बताए गए हैं। इसमें पुरानी कर व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं है। पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भारत आयकर की गणना के लिए स्लैब प्रणाली का पालन करता है, जैसा कि सारणी में दिखाया गया है। इसके बाद नयी कर व्यवस्था के तहत कर स्लैब का एक चार्ट दिया गया है।
इसे एक अप्रैल, 2023 से 'डिफ़ॉल्ट' कर व्यवस्था बना दिया गया, जिसका मतलब है कि करदाताओं को अपने-आप इसमें शामिल कर लिया जाता है, जब तक कि वे खास तौर पर पुरानी व्यवस्था को न चुनें। इस अध्याय में ''व्यक्तिगत वित्त स्तंभों'' पर एक और खंड है, जिसमें हर स्तंभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है- जैसे आय, खर्चों की योजना, बचत, निवेश और सुरक्षा व जोखिम प्रबंधन।</description><guid>31305</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:25:53 am</pubDate></item><item><title>लोक सेवाओं में ऐसे युवाओं को लाना होगा जो सरकारी पद से नहीं, जनसेवा से आकर्षित हों: मोदी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31304</link><description>नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश को ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाना चाहिए, जो सरकारी पद पाने के लिए आकर्षित न हों, बल्कि जनसेवा से प्रेरित हों। यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भर्ती परीक्षा में केवल यह न परखा जाए कि अभ्यर्थी को कितना ज्ञान है, बल्कि यह भी देखा जाए कि ''वह युवा सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है।'' उन्होंने कहा, ''हमारा मंत्र है... नागरिक देवो भव। यानी हमारे लिए देश का नागरिक किसी देवता से कम नहीं है। हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है।'' मोदी ने कहा कि ''हमें हमेशा दो बातों को कसौटी के रूप में याद रखना चाहिए। पहला- राष्ट्र प्रथम। दूसरा- नागरिक प्रथम।'' उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएएसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ''हमें ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाना चाहिए, जो सरकारी पद से नहीं, बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों। इसलिए यह जरूरी है कि भर्ती परीक्षा में केवल यह न परखा जाए कि अभ्यर्थी को क्या पता है, बल्कि यह भी देखा जाए कि वह युवा सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है।'' मोदी ने इस अवसर पर एक स्मारक सिक्का, डाक टिकट और '100 लैंडमार्क जजमेंट्स : शेपिंग द पॉलिसीज ऑफ यूपीएससी एंड पब्लिक सर्विस कमीशंस इन इंडिया' शीर्षक वाली पुस्तक भी जारी की। बृहस्पतिवार का कार्यक्रम उन सालभर चले समारोहों के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया, जो एक अक्टूबर 2025 को शुरू हुए थे। इन समारोहों का आयोजन 1926 में यूपीएससी की हुई स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया।</description><guid>31304</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:23:13 am</pubDate></item><item><title>केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कैप्टन मच्छार के साहस को सराहा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31303</link><description>नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'फ्लाईदुबई' की इजराइल जा रही उड़ान को सह-पायलट द्वारा कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश को नाकाम करने के लिए बृहस्पतिवार को भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की। जोशी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कैप्टन स्मित मच्छार ने संकट के महत्वपूर्ण क्षण में असाधारण साहस और उल्लेखनीय संयम का परिचय दिया, जिससे सैकड़ों लोगों की जान बचाने और उस त्रासदी को टालने में मदद मिली, जो विनाशकारी हो सकती थी।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''मैं दुनिया भर के लोगों के साथ कैप्टन मच्छार के शौर्य को सलाम करता हूं और उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करता हूं।'' बुधवार को मच्छार ने 'फ्लाईदुबई' की एक उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की अपने सह-पायलट की कोशिश को नाकाम कर दिया था। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। दुबई से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे। इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में उसका मार्ग सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। सह-पायलट के हमले में गंभीर रूप से घायल मच्छार का सऊदी अरब के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।</description><guid>31303</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:21:50 am</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार के परिवार से बात की, उनकी बहादुरी की तारीफ की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31302</link><description>नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कैप्टन स्मित मच्छार की पत्नी और माता-पिता से फोन पर बात की और उनकी बहादुरी की सराहना की। कैप्टन मच्छार ने 'फ्लाईदुबई' उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की अपने सह-पायलट की कोशिश को नाकाम कर दिया था, जिससे सैकड़ों लोगों की जान बची। पायलट की पत्नी और उनके माता-पिता के साथ फोन पर बातचीत में मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय मिशन घायल पायलट को हर संभव मदद मुहैया करा रहे हैं। पायलट का सऊदी अरब के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फोन पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने पायलट की बहादुरी की तारीफ की, जिसकी वजह से सैकड़ों लोगों की जान बची। इससे पहले, मोदी ने भारतीय पायलट की प्रशंसा करते हुए उन्हें ''नायक'' बताया था और कहा था कि देश को उनकी बहादुरी पर गर्व है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे। इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में उसका मार्ग सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे।</description><guid>31302</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:20:42 am</pubDate></item><item><title> श्रीनगर में कश्मीर मैराथन 2026 का आयोजन, एडीजी नीतीश कुमार ने दिखाई हरी झंडी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31301</link><description>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा श्रीनगर में गुरुवार को कश्मीर मैराथन 2026 का आयोजन किया गया। इस मैराथन को एडीजी जम्मू-कश्मीर पुलिस नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौड़ में समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि मैराथन में उम्मीद से ज्यादा भीड़ उमड़ी, खासकर इसलिए क्योंकि यह आयोजन एक वर्किंग डे पर रखा गया था। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के बाहर से भी कई धावक और खेल प्रेमी इस मैराथन में हिस्सा लेने के लिए आए हैं।उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा आयोजित रन फॉर यूनिटी मैराथन में उम्मीद से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, खासकर यह देखते हुए कि आज काम का दिन है। कई धावक और खेल प्रेमी जम्मू-कश्मीर के बाहर से भी इसमें भाग लेने आए हैं।
एडीजी ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों की भागीदारी उत्साहजनक रही। उन्होंने कहा, हम देख रहे हैं कि हर वर्ग के लोग-छोटे बच्चे, दिव्यांगजन, महिलाएं और लड़कियां इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जो वास्तव में दिल को छू लेने वाला है।
नीतीश कुमार ने बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने में खेलों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, खेल हमारे बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। हमारे युवाओं की उत्साही भागीदारी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वे कश्मीर में नशे के खतरे को सफलतापूर्वक हरा रहे हैं। मैराथन में शामिल एक प्रतिभागी ने कहा कि हर युवा को इस एकता मैराथन में भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा, हर युवा को इस मैराथन फॉर यूनिटी में भाग लेना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण है। मैं बारामूला जिले की उरी तहसील से बुधवार रात यहां पहुंचा और गुरुवार सुबह इसमें शामिल हुआ। यह मैराथन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर उन युवाओं के लिए जो नशे की ओर झुक रहे हैं। मेरा उनसे संदेश है कि वे इन गलत गतिविधियों को छोड़ दें और अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।
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</description><guid>31301</guid><pubDate>01-Oct-2026 11:05:43 am</pubDate></item><item><title> भारत को स्मित मच्छार पर गर्व, PM मोदी ने फ्लाईदुबई के पायलट की बहादुरी को सराहा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31300</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है। फ्लाईदुबई की फ्लाइट के दौरान पायलट पर हमला हुआ था, लेकिन इसके बावजूद स्मित यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटे। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, कैप्टन स्मित मच्छार एक हीरो हैं। बेहद गंभीर खतरे के बीच और खुद बुरी तरह घायल होने के बावजूद उन्होंने जबरदस्त हिम्मत दिखाई और दूसरों की जान बचाने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटे। उनकी बहादुरी की वजह से सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी और एक बड़ी त्रासदी टल गई।
उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है। उनके जल्द ठीक होने, फिर से पूरी ताकत हासिल करने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने असाधारण हिम्मत दिखाई। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की असाधारण बहादुरी को मेरा सलाम। घायल पायलट को लेकर चिंता जताते हुए नेतन्याहू ने उनके जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना की और उन्हें सच्चा हीरो भी बताया।
इजरायली प्रधानमंत्री के मुताबिक, घटना के दौरान कैप्टन मच्छार को चाकू मारा गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने हमलावर का मुकाबला किया और उसे रोकने की कोशिश की। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने हमलावर को काबू करने में मदद की। नेतन्याहू ने कहा कि पायलट के इन कदमों से एक बड़ी विमान दुर्घटना टल गई।
उन्होंने कहा कि इजरायली नागरिकों और दूसरे देशों के लोगों समेत 174 लोगों की जान बचाई जा सकी। ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड 1073 में पैदा हुए खतरे को टालने में कैप्टन मच्छार की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी तारीफ हो रही है। इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने भी भारतीय पायलट के साथ उन यात्रियों और क्रू मेंबर्स की तारीफ की, जिन्होंने खतरे को खत्म करने में मदद की। अजार ने एक्स पर कहा कि वह कैप्टन मच्छार के ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने उन्हें एक अनुभवी और प्रतिभाशाली पायलट बताया।
अजार ने लिखा, दूसरे देशों के लोगों के साथ मैं भी फ्लाई दुबई की उड़ान एफजेड 1073 के अनुभवी और प्रतिभाशाली भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं। वह एक हीरो हैं। इजरायली राजदूत ने कहा कि पायलट के साथ-साथ इजरायली और अमीराती यात्रियों तथा क्रू मेंबर्स की हिम्मत की वजह से विमान में सवार लोगों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा, उनकी हिम्मत और दूसरे इजरायली व अमीराती यात्रियों और क्रू मेंबर्स की बहादुरी ने 180 लोगों की जान बचाई।
</description><guid>31300</guid><pubDate>01-Oct-2026 11:04:35 am</pubDate></item><item><title> धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं, PM मोदी ने साझा किया सुभाषित</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31299</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धैर्य और दृढ़ निश्चय का संदेश देते हुए सुभाषित साझा किया गया। पीएम की ओर से बताया गया कि धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति भी अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्। सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीराः॥ साझा किया गया। इसका भावार्थ है कि जिस प्रकार देवताओं ने समुद्र से रत्नों को प्राप्त करने के बाद भी अमृत की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयत्न किया, उसी प्रकार धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति भी अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं।
प्रधानमंत्री की ओर से यह श्लोक महर्षि भर्तृहरि के प्रसिद्ध ग्रंथ नीतिशतकम् से साझा किया गया है। इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान मूल्यवान रत्नों को पाकर देवता संतुष्ट नहीं हुए, भयंकर विष से डरे नहीं और अमृत मिलने तक वे नहीं रुके; इसी प्रकार धैर्यवान (धीर) लोग अपने निश्चित लक्ष्य को प्राप्त किए बिना कभी पीछे नहीं हटते।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उससे सबसे पहले कई प्रकार की बहुमूल्य वस्तुएं और रत्न निकले। रास्ते में भयंकर विष हलाहल भी निकला और अंत में अमृत निकला। मंथन में मणियां और सुंदर वस्तुएं मिलीं, जिन्हें देखकर कोई भी सामान्य व्यक्ति लालच में आ सकता था लेकिन देवताओं का लक्ष्य सिर्फ अमृत पाना था। वे छोटे-छोटे लाभों या प्रलोभनों में फंसकर संतुष्ट नहीं हुए।
इस श्लोक का भावार्थ है कि जीवन में बड़ी सफलता पाने के लिए प्रलोभनों से ऊपर उठना होगा, संकटों का सामना करना होगा और अपने ध्येय के प्रति अडिग रहना होगा। जब भयानक विष निकला, तो सारा संसार भयभीत हो सकता था लेकिन देवताओं ने उस संकट से घबराकर अपने कदम पीछे नहीं खींचे। जब तक उन्हें अमृत नहीं मिल गया, तब तक उन्होंने अपने प्रयासों को नहीं रोका।
</description><guid>31299</guid><pubDate>01-Oct-2026 10:45:19 am</pubDate></item><item><title>मूल्य समर्थन योजना के तहत तीन राज्यों में 7.11 लाख टन दलहन, तिलहन की खरीद को मंजूरी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31298</link><description>नयी दिल्ली. केंद्र ने 'मूल्य समर्थन योजना' (पीएसएस) के तहत तीन राज्यों -- उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में चालू खरीफ सत्र में 5.21 लाख टन दलहन और 1.90 लाख टन तिलहन की 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' (एमएसपी) पर खरीद को मंजूरी दी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा लागू पीएसएस अभियान तब शुरू होते हैं जब अधिसूचित जिंस (जिन चीज़ों के लिए एमएसपी तय है) की बाजार कीमत सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से नीचे गिर जाती है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में 5,547.99 करोड़ रुपये मूल्य के दलहन और तिलहन की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी है। उन्होंने बयान में कहा, ''इस फैसले का मकसद किसानों को बाजार की कीमतों में गिरावट से बचाना और उनकी उपज के लिए अच्छा लाभ सुनिश्चित करना है, खासकर दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों के लिए।'' मंज़ूर की गई खरीद योजना के तहत, तीन राज्यों के किसानों को एमएसपी पर मुख्य दलहनों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर खरीद से फायदा होगा। उत्तर प्रदेश में लगभग 4,66,000 टन अरहर (तुअर) और 6,250 टन मूंग की खरीद की जाएगी, जबकि कर्नाटक में 1,15,500 टन सोयाबीन, 13,413 टन सूरजमुखी के बीज और 38,250 टन मूंग की खरीद होगी। तेलंगाना में पीएसएस के तहत 62,000 टन सोयाबीन और 10,766 टन मूंग की एमएसपी पर खरीद की जाएगी।
चौहान ने कहा कि इस फैसले से किसानों को ज़्यादा आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, साथ ही दलहनों और तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी तय केंद्रों पर खरीद की व्यवस्था पारदर्शी रहेगी और किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में समय पर मिल जाएगा।</description><guid>31298</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:42:49 am</pubDate></item><item><title>महात्मा गांधी ने शासन के आदर्श मॉडल की कल्पना राम राज्य के रूप में की थी : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31297</link><description>नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नौंवी कक्षा की सामाजिक विज्ञान विषय की नयी पाठ्यपुस्तक तैयार की है, जिसके अनुसार महात्मा गांधी ने 'राम राज्य' की कल्पना सुशासन के एक आदर्श मॉडल के रूप में की थी। पाठ्यपुस्तक के मुताबिक महात्मा गांधी का सुशासन का यह आदर्श मॉडल ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित था। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' नामक यह पुस्तक मंगलवार को जारी की गई। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह महीने बाद इसे जारी किया गया है। इस पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था। पुस्तक के 'गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी' (शासन और सार्वजनिक नीति) नामक अध्याय में संस्कृत के एक श्लोक ''प्रजासुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्'' का उल्लेख किया गया है, जिसका अर्थ है, ''प्रजा की खुशी में राजा की खुशी है और प्रजा के हित में ही राजा का हित है।'' पाठ्यपुस्तक में कहा गया है, ''महात्मा गांधी ने 'राम राज्य' की कल्पना शासन और सार्वजनिक नीति में ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा, कल्याण और जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित शासन के एक आदर्श मॉडल के रूप में की थी। राम राज्य पर गांधी के विचार प्राचीन अतीत से लेकर वर्तमान समय तक भारतीयों की सामूहिक कल्पना को प्रतिबिंबित करते हैं।'' इसमें रामायण और 16वीं सदी के रामचरितमानस में वर्णित राम राज्य को ''सुशासन और अच्छे सामूहिक जीवन के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक'' बताया गया है। पुस्तक में शासन की अवधारणा को समझाने के लिए महाभारत और वैदिक परंपरा का भी सहारा लिया गया है। इसमें बताया गया है कि शासन केवल सत्ता के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रति जिम्मेदारियां भी शामिल हैं। पुस्तक के इस अध्याय में कहा गया है, ''वैदिक काल से लेकर रामायण और महाभारत तक, भारतीय परंपरा ने लगातार शासन को केवल सत्ता के इस्तेमाल के साधन के बजाय एक पवित्र जिम्मेदारी के रूप में देखा है।'' इसमें कहा गया है, ''सुशासन का आकलन केवल शासक की शक्ति से नहीं, बल्कि समाज में शांति, समृद्धि, न्याय और कल्याण की स्थिति से किया जाता था।'' अध्याय में इन संदर्भों का इस्तेमाल राजधर्म की व्यापक अवधारणा को समझाने के लिए किया गया है, जो न्यायपूर्ण शासन से जुड़े कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को दर्शाता है। इसके अलावा नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, आयुष्मान भारत योजना और खेलो भारत नीति का भी उल्लेख किया गया है। पुस्तक के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत शुरू की गई यह नीतियां ''नीति निर्माण के उत्कृष्ट उदाहरण'' हैं। पुस्तक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को ''इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण'' बताया गया है कि किस तरह परामर्श, विशेषज्ञों की सलाह और जन भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक नीति तैयार की जाती है। खेलो भारत नीति 2025 के संदर्भ में पुस्तक ने नीति निर्माण से ध्यान हटाकर उसके क्रियान्वयन पर जोर दिया है। इसमें कहा गया है कि इसकी सफलता ''राज्यों, जिलों, स्थानीय निकायों, स्कूलों, प्रशिक्षकों, परिवारों और खिलाड़ियों'' के बीच समन्वय पर निर्भर करती है। पुस्तक में ''नीति समन्वय : सुशासन की कुंजी'' शीर्षक वाले खंड में इस नीति का उल्लेख किया गया है।
स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को पुस्तक में कम आय वाले परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के उदाहरण के रूप में बताया गया है। पुस्तक में एक अन्य प्रमुख योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का भी उल्लेख किया गया है और विद्यार्थियों से इसके लाभों का अध्ययन करने को कहा गया है।</description><guid>31297</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:36:09 am</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री मोदी बृहस्पतिवार को यूपीएससी के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31296</link><description>नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे। यूपीएससी केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए भर्ती के वास्ते प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस मौके पर प्रधानमंत्री एक स्मारक सिक्का, एक डाक टिकट और 'भारत में यूपीएससी और लोक सेवा आयोगों की नीतियों को आकार देने वाले - 100 ऐतिहासिक निर्णय' नामक पुस्तक का विमोचन करेंगे। यह कार्यक्रम उन सालभर चलने वाले समारोहों का समापन होगा जो पिछले साल एक अक्टूबर से शुरू हुए थे और 1926 में यूपीएससी की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम यूपीएससी द्वारा 30 सितंबर और एक अक्टूबर, 2026 को आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा है। राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा शिक्षाविद् समेत देशभर के विभिन्न हितधारक इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। बयान के अनुसार 'शताब्दी समारोह - मंथन' यूपीएससी के शताब्दी समारोहों का उद्घाटन कार्यक्रम था, जो बुधवार को यहां 'भारत मंडपम' में आयोजित किया गया।</description><guid>31296</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:34:21 am</pubDate></item><item><title>वर्ष 2001 के बाद मानसून के दौरान चौथी बार सबसे कम बारिशः आईएमडी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31295</link><description>नयी दिल्ली. देश में इस मानसून सीजन (जून-सितंबर) में दीर्घ अवधि औसत (एलपीए) की 87.4 प्रतिशत बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को यह जानकारी दी। आईएमडी ने बताया कि मानसून सीजन में सामान्य बारिश 868.6 मिमी होती है, जबकि इस साल देश में 759.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने कहा कि इस मानसून सीजन के दौरान देश में हुई बारिश वर्ष 2001 के बाद से चौथी सबसे कम है। एलपीए (दीर्घ अवधि औसत) किसी क्षेत्र में किसी महीने या मौसम के दौरान होने वाली बारिश का 30 से 50 वर्षों के लंबे समय के आंकड़ों के आधार पर निकाला गया औसत होता है। वर्तमान में देश में एक जून से 30 सितंबर के बीच हुई बारिश में करीब 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।</description><guid>31295</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:32:05 am</pubDate></item><item><title>नितिन नवीन ने भाजपा की राज्य इकाइयों के नवनियुक्त प्रभारियों की बैठक की अध्यक्षता की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31294</link><description>नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नवनियुक्त प्रभारियों और सह-प्रभारियों की पहली बैठक की अध्यक्षता की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में पार्टी इकाइयों के प्रभारी और सह-प्रभारी के रूप में हाल में नियुक्त सभी नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी. एल. संतोष ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में भाजपा के उपाध्यक्ष राम माधव, बैजयंत जय पांडा, रेखा वर्मा और भारती प्रवीण पवार शामिल हुए।
भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, हरीश द्विवेदी, सतीश पूनिया और बिप्लब कुमार देब के साथ-साथ पार्टी के राज्यसभा सदस्य तरुण चुग भी बैठक में शामिल हुए। दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और कमलजीत सहरावत भी बैठक में मौजूद थीं।
नवीन ने 23 सितंबर को सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भाजपा के प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए थे। उन्होंने हरियाणा और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को सौंपी थी। तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभार पार्टी उपाध्यक्ष राम माधव को दिया गया था। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था, जबकि जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और आनंद ओझा को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया था। बैजयंत जय पांडा को महाराष्ट्र का प्रभारी नियुक्त किया गया था, जबकि अमित मालवीय, सदानंद शेट तनावड़े और पार्टी सांसद कमलजीत सहरावत को सह-प्रभारी बनाया गया था। हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक में पार्टी इकाइयों का प्रभारी नियुक्त किया गया था। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को उत्तराखंड का सह-प्रभारी बनाया गया था। तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया था।</description><guid>31294</guid><pubDate>29-Sep-2026 12:32:32 am</pubDate></item><item><title>आयकर विभाग ने कंपनियों के लिए कर ऑडिट रिपोर्ट</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31293</link><description>रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा तीन सप्ताह बढाई
नयी दिल्ली. आयकर विभाग ने सोमवार को कंपनियों के लिए आकलन वर्ष 2026-27 का आयकर रिटर्न दाखिल करने और ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख तीन सप्ताह बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी। इसके तहत, कंपनियां अब आकलन वर्ष 2026-27 का आयकर रिटर्न 31 अक्टूबर के बजाय 21 नवंबर तक दाखिल कर सकेंगी। इसी तरह, कर ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख भी 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर कर दी गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा कि दोनों अनुपालनों की अंतिम तारीखें बढ़ा दी गई हैं। कर विशेषज्ञ कंपनियों की वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने की लंबे समय से मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि बिना ऑडिट रिपोर्ट वाले मामलों में आयकर रिटर्न दाखिल करने की 31 अगस्त की समयसीमा के बाद ऑडिट पूरा करने के लिए समय काफी कम रह गया था। नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के वरिष्ठ साझेदार अमित अग्रवाल ने कहा कि समयसीमा बढ़ाना यह बतात है कि सीबीडीटी ने मौजूदा अनुपालन अवधि में करदाताओं और कर पेशेवरों के सामने आ रही वास्तविक दिक्कतों को ध्यान में रखा है। अग्रवाल ने कहा, ''अतिरिक्त 21 दिन कारोबारियों को कर ऑडिट पूरा करने, जरूरी मिलान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त समय देंगे कि आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी सही हो और दस्तावेज के रूप में उसके उचित प्रमाण उपलब्ध हों।'' वेतनभोगी करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। वहीं, कारोबार या पेशे से आय वाले ऐसे करदाताओं के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त है, जिनके खातों का लेखा-परीक्षण कराना जरूरी नहीं है। आयकर विभाग ने इससे पहले कहा था कि आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 अगस्त तक रिकॉर्ड 7.8 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे।</description><guid>31293</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:50:19 am</pubDate></item><item><title>व्यक्ति ने घर के पीछे चिता तैयार कर आत्महत्या की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31292</link><description>कोल्लम (केरलम) . केरलम के चथिनमकुलम में सोमवार को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने घर के पीछे तैयार की गई चिता पर खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी। मृतक की पहचान पनायम के निकट चथिनमकुलम निवासी हरींद्रन पिल्लई के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, पड़ोसियों ने दोपहर में उसके घर के पीछे आग लगी देखी। उस समय पिल्लई की पत्नी और दो बच्चे घर पर नहीं थे। पुलिस ने बताया कि एक पड़ोसी से सूचना मिलने पर उनकी पत्नी एक रिश्तेदार के साथ मौके पर पहुंचीं तो चिता पर जलता हुआ शव देखा। अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस और दमकल एवं बचाव सेवा कर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझाई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने पिल्लई की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिले।
बाद में शव पर मिली एक अंगूठी के आधार पर पुलिस और रिश्तेदारों ने उनकी पहचान पिल्लई के रूप में की।
पुलिस ने बताया कि पिल्लई पूजा सामग्री की दुकान चलाते थे। पुलिस ने कहा कि आत्महत्या के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। किलिकोल्लूर पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है।</description><guid>31292</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:49:33 am</pubDate></item><item><title>1962 के युद्ध के नायक जसवंत सिंह रावत के उत्तराखंड स्थित घर को संग्रहालय में बदला जाएगा:बलूनी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31291</link><description>नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद अनिल बलूनी ने सोमवार को कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग में सीमा की रक्षा करते हुए अदम्य साहस दिखाने के साथ सर्वोच्च बलिदान देने वाले राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के उत्तराखंड स्थित पैतृक घर को एक आधुनिक संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''मैं 17 नवंबर को पौड़ी गढ़वाल के बड़यूं गांव स्थित बाबा जसवंत सिंह रावत के पैतृक घर में संग्रहालय निर्माण के लिए भूमि पूजन करूंगा।'' बलूनी ने बताया कि उन्होंने शनिवार को उत्तराखंड के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र में स्थित रावत के पैतृक गांव बड़यूं का दौरा किया और 1962 के भारत-चीन युद्ध के अमर शहीद को उनके जन्मस्थान पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने 'पवित्र मिट्टी' को नमन किया और उनके पैतृक घर को 'भव्य संग्रहालय और प्रेरणा स्थल' के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया। बलूनी ने बताया कि दौरे के दौरान उन्होंने रावत के परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर संग्रहालय के संबंध में चर्चा की। उन्होंने कहा, ''उन्होंने न केवल इसके निर्माण के लिए सहमति दी, बल्कि इस पहल की सराहना भी की।'' वर्ष 1962 में 'नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी' (अब अरुणाचल प्रदेश) के नूरानांग में युद्ध के दौरान रावत गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट की चौथी बटालियन में तैनात थे और उन्होंने दुश्मन का बेहद साहस और वीरता के साथ मुकाबला किया था। बलूनी ने कहा, ''प्रतिकूल परिस्थितियों में तीन दिनों तक अकेले मोर्चा संभालते हुए उन्होंने करीब 300 दुश्मन सैनिकों को मार गिराया और 17 नवंबर, 1962 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया।'' उन्होंने कहा, ''जसवंत गढ़ युद्ध स्मारक, जो तवांग से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, उसी पवित्र भूमि पर बना है जहां इस महान योद्धा ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। मैं भूमि पूजन के लिए इस स्थल की मिट्टी लाऊंगा।'' बलूनी ने कहा कि राइफलमैन रावत को 19 अगस्त, 1960 को महज 19 वर्ष की उम्र में चौथी गढ़वाल राइफल्स में भर्ती किया गया था। मातृभूमि की रक्षा करते हुए 17 नवंबर, 1962 को सर्वोच्च बलिदान देने के समय उनकी उम्र केवल 21 वर्ष थी। उन्होंने कहा, ''बाबा जसवंत सिंह जी का पैतृक गांव बड़यूं देशभक्ति का तीर्थ स्थल है। इसे देश के वीर शहीदों को समर्पित एक प्रमुख स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले लोग इस 'नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) के नायक' की असाधारण वीरता को देख सकेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे।'' भाजपा सांसद ने कहा, ''उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।</description><guid>31291</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:24:41 am</pubDate></item><item><title>सेना की अभियानगत क्षमताएं बढ़ाने के लिए जनरल सेठ ने पेश किया समर्थ दृष्टिकोण</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31290</link><description>नयी दिल्ली. सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने रविवार को कहा कि सेना में लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को झेलने की क्षमता होनी चाहिए, जबकि प्रौद्योगिकी से सैनिक अधिक तेज और बेहतर सूचनाओं से लैस बनने चाहिए। जनरल सेठ ने सेना की अभियानगत तैयारियों को बढ़ाने के लिए 'समर्थ' (एसएएमएआरटीएच) दृष्टिकोण पेश किया।
उन्होंने एनडीटीवी रक्षा शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा कि एक प्रभावी सेना में बदलते खतरों की तुलना में अपनी क्षमताओं को तेजी से अनुकूलित और उन्नत करने की क्षमता होनी चाहिए। जनरल सेठ ने कहा कि साथ ही उसे स्वयं का आधुनिकीकरण करते हुए ''परिवर्तनकारी युद्धों'' के दौर में किसी भी अभियान के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने 'समर्थ' (एसएएमएआरटीएच) शब्द के जरिए भारतीय सेना के लिए अपना दृष्टिकोण बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी में 'समर्थ' का अर्थ सक्षम होता है। जनरल सेठ ने इस अवधारणा के प्रत्येक अक्षर को समझाते हुए कहा कि 'एस' का मतलब 'सस्टेनेबिलिटी' (स्थिरता) है, यानी लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों को झेलने की क्षमता। 'ए' का अर्थ 'ऐडेपटेशन' (अनुकूलन) और 'एम' का अर्थ 'मॉडर्ननाइजेशन' (आधुनिकीकरण) है, ताकि सेना अभियान के लिए तैयार रह सके। उन्होंने कहा कि अगले 'ए' का अर्थ 'एसेलेरेशन' (क्षमताओं में तेज से वृद्धि) है, जिसमें पुरानी प्रणालियों की प्रभावशीलता बढ़ाने वाली क्षमताओं का एकीकरण और प्रौद्योगिकी का समावेश शामिल है। सेना प्रमुख ने कहा कि वहीं 'आर' का अर्थ 'रेजिलिएंस (लचीलापन) है, जबकि 'टी' टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी) को दर्शाता है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वायत्त प्रणालियां, रोबोटिक्स, ड्रोन आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वहीं 'एच' का अर्थ 'ह्यूमन-मशीन' (मानव-मशीन) समन्वय है। जनरल सेठ ने कहा, ''प्रौद्योगिकी को हमारे सैनिकों को अधिक तेज, बेहतर सूचनाओं से लैस और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। इससे उन्हें बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''यही 'समर्थ' का अर्थ है- एक सक्षम बल होना, जिसमें सहनशीलता और अनुकूलन की क्षमता हो तथा जो परिवर्तनकारी युद्धों के इस दौर में दूसरों से आगे रहने में सक्षम हो।''</description><guid>31290</guid><pubDate>28-Sep-2026 3:11:17 pm</pubDate></item><item><title>शाह ने आचार्य पद्मसागर सूरीश्वर के 92वें जन्मदिन पर अहमदाबाद में उनसे मुलाकात की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31289</link><description>अहमदाबाद. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि उन्होंने अहमदाबाद में जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य पद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज के 92वें जन्मदिन पर उनसे मुलाकात की और आशीर्वाद लिया। शाह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि अपने प्रवचनों और तपस्या के जरिए आचार्य अनगिनत लोगों को अहिंसा, करुणा और सदाचरण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। शाह ने कहा, आचार्य पद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज ने जैन धर्म की समृद्ध परंपराओं और त्याग के आदर्शों को जीवित रखा है। उनका जीवन आध्यात्मिक साधना, संयम और जनसेवा का अनुकरणीय उदाहरण है। आज मैंने अहमदाबाद के शेला में उनके 92वें जन्मदिन पर उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, मैं ईश्वर से कामना करता हूं कि वह हमेशा स्वस्थ रहें और उनका आशीर्वाद समाज का मार्गदर्शन करता रहे। शाह ने इस कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और अन्य लोगों के साथ 43वें कैलास श्रुतसागर ग्रंथसूची का विमोचन भी किया।</description><guid>31289</guid><pubDate>28-Sep-2026 3:10:14 pm</pubDate></item><item><title> निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही, चार लोगों की मौत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31288</link><description>अंबाला. हरियाणा के अंबाला शहर के निकट धूलकोट गांव में रविवार को निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढहने से चार लोगों की मौत हो गई जबकि 10 से अधिक लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हादसा शाम से ठीक पहले उस समय हुआ, जब इमारत का निर्माण कार्य जारी था।

अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया तथा पुलिस व आपात सेवाओं को सूचना दी गयी। एक घायल मजदूर ने बताया कि कुछ श्रमिक भूतल पर काम कर रहे थे, जबकि अन्य ऊपर निर्माण कार्य में लगे थे। अंबाला की सिविल सर्जन रेणु बेरी ने संवाददाताओं को बताया कि 12 घायल मजदूरों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से पांच का अभी इलाज चल रहा है, दो को अनुरोध पर छुट्टी दे दी गई जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया, ''शाम को चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उनके शवों को शवगृह में रखवा दिया गया है।'' अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने शाम को संवाददाताओं से बातचीत में घटना में चार लोगों की मौत होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), पुलिस और प्रशासन की टीम राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या मलबे के नीचे और लोग फंसे हैं, पुलिस अधीक्षक ने कहा, ''दो-तीन लोगों का पता लगा लिया गया है और उन्हें बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।''</description><guid>31288</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:54:43 am</pubDate></item><item><title> भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है : राजनाथ सिंह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31287</link><description>नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है और इस राह में चुनौतियां होंगी, लेकिन देश का संकल्प अडिग है। सिंह ने कहा कि भारत अगले दो दशकों के युद्ध को ध्यान में रखते हुए अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है। पाकिस्तान की ओर परोक्ष इशारा करते हुए सिंह ने यह भी कहा कि जब तक ''हमारा पड़ोसी देश आतंकवाद को सरकार की नीति के रूप में जारी रखता है, तब तक भारत उसके खिलाफ हर तरह की कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।''
सिंह 'एनडीटीवी रक्षा सम्मेलन' के एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सत्र में थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और सशस्त्र बलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज का युद्ध केवल सैनिक बनाम सैनिक का मामला नहीं है, बल्कि यह कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इसमें जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सूचना युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन और सटीक मारक हथियार शामिल हैं। सिंह ने यह भी कहा कि भारत एक ऐसी सभ्यतागत शक्ति है, जिसका उदय टकराव या व्यवधान के बजाय समावेशी विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य बिना किसी विघटन के आगे बढ़ना और संघर्ष के बिना सकारात्मक बदलाव लाना है। अपने संबोधन के दौरान सिंह ने यह भी कहा कि जो राष्ट्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा, उसे युद्ध के मैदान में बढ़त हासिल होगी। उन्होंने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति के साथ-साथ सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए उठाए गए कुछ कदमों को भी रेखांकित किया।
विश्व व्यवस्था में भारत की स्थिति पर सिंह ने कहा, ''मेरा मानना है कि हम एक सभ्यतागत शक्ति हैं। हमारे उत्थान का उद्देश्य किसी दूसरे देश को पीछे छोड़ना या मौजूदा व्यवस्था को खत्म करना नहीं है; बल्कि यह सामूहिक और समावेशी विकास के बारे में है। हमारा लक्ष्य है - बिना विघटन के उत्थान, संघर्ष के बिना सकारात्मक बदलाव।'' उन्होंने कहा, ''हम ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं, जहां भारत आगे बढ़े और पूरी दुनिया भी हमारे साथ आगे बढ़े।''</description><guid>31287</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:40:23 am</pubDate></item><item><title> झील में नाव पलटी, कम से कम 12 लोगों की मौत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31286</link><description>बुकावु.कांगो की किवु झील में व्यापारियों को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिससे कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लापता हो गए। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, नाव में 50 से अधिक लोग सवार थे और यह शनिवार रात किवु प्रांत में इदज्वी द्वीप के पास से गुजरते समय अचानक पलट गई। दुर्घटनास्थल के पास स्थित किशेके गांव के मुखिया फेलिक्स हबिरागी ने बताया कि लगभग 15 लोगों को बचा लिया गया है। उन्होंने कहा कि हादसे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है।
स्थानीय प्रशासक मुहिंदो तांबुका पास्कल के अनुसार, नाव इदज्वी द्वीप के ब्विना से बोजा जा रही थी और इसमें भारी मात्रा में सामान भी लदा हुआ था। घटनास्थल के बताए जा रहे वीडियो में ग्रामीणों और अन्य यात्रियों को झील से शवों को बाहर निकालते हुए देखा जा सकता है। इदज्वी निवासी क्रिश्चियन अमीनी दाहिरा ने बताया कि नाव पर उनका एक दोस्त भी सवार था, जिसकी हादसे में मौत हो गई। उन्होंने कहा, नाव पर चढ़ने से पहले, शाम को ही हमारी बात हुई थी। यह उसके परिवार और मेरे लिए बहुत दुख की बात है। एक नागरिक समाज संगठन से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त नाव पर सवार कई लोगों ने जीवनरक्षक जैकेट नहीं पहन रखी थी।
</description><guid>31286</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:26:56 am</pubDate></item><item><title> राघव चड्ढा ने ट्राई के विशेष टैरिफ वाउचर अनिवार्य करने के कदम का स्वागत किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31285</link><description>नयी दिल्ली. भाजपा के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दूरसंचार कंपनियों को केवल वॉयस कॉल और एसएमएस के लिए अनिवार्य रूप से कम कीमत पर टैरिफ वाउचर जारी करने का आदेश दिया जाना ''रचनात्मक राजनीति'' का एक बेहतरीन उदाहरण है। चड्ढा ने एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को विशेष टैरिफ वाउचर (एसटीवी) जारी करने को कहा है, जिसका मुद्दा उन्होंने 11 मार्च को संसद के बजट सत्र के दौरान उठाया था। चड्ढा ने कहा, ''यह रचनात्मक राजनीति का एक बेहतरीन उदाहरण है। मुझे उम्मीद है कि हम इसी तरह मिलकर भारत की वास्तविक समस्याओं का समाधान करते रहेंगे।'' भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा 22 सितंबर को जारी दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (13वां संशोधन) विनियम, 2026 के अनुसार, दूरसंचार कंपनियों को केवल वॉयस कॉल और एसएमएस के लिए विशेष टैरिफ वाउचर जारी करने होंगे।
ये मौजूदा उन वाउचर के समान होंगे, जिनमें डेटा, वॉयस कॉल और एसएमएस की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं और जिनकी वैधता 30 दिन या उससे कम होती है। सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए चड्ढा ने कहा, ''11 मार्च को मैंने संसद में प्रीपेड मोबाइल उपयोगकर्ताओं की कुछ समस्याओं को उठाया था। मैंने बताया था कि एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन हमें 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है। 28 दिन की अवधि वाले मासिक रिचार्ज प्लान क्यों हैं? 30 दिन की वैधता वाले प्लान शुरू किए जाने चाहिए।'' सांसद ने कहा, ''मैंने यह भी बताया था कि ऐसे कई उपभोक्ता हैं जो डेटा का इस्तेमाल नहीं करते। उनके लिए केवल वॉयस कॉल वाले रिचार्ज प्लान होने चाहिए। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने लोगों की इस मांग को स्वीकार कर लिया है।''
</description><guid>31285</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:25:11 am</pubDate></item><item><title> 15 अक्टूबर से मिठाई की यूज बाई डेट दिखाना होगा अनिवार्य</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31284</link><description>लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने राज्य में 15 अक्टूबर से बेची जाने वाली मिठाइयों पर 'यूज बाई डेट' यानी उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, यह व्यवस्था विशेष रूप से खुली मिठाइयों को लेकर महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक इनके संबंध में उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं था। राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, पिछले कुछ समय में मिठाई निर्माण और बिक्री प्रतिष्ठानों में की गई प्रवर्तन एवं निरीक्षण कार्रवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को मिठाई के निर्माण की तारीख और उसके इस्तेमाल की समय सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे में उपभोक्ता मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग अवधि के बारे में सही निर्णय नहीं ले पाता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मिठाई की उपयोग अवधि उसकी प्रकृति और प्रकार के आधार पर अलग-अलग होती है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग मिठाइयों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक हो सकती है। डॉ. रोशन ने बताया कि विभाग का मानना है कि मिठाई की 'यूज बाई डेट' स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से उपभोक्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित खाद्य पदार्थ का सेवन किस अवधि तक करना उचित है। उन्होंने बताया कि इससे खाद्य पदार्थ की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिक जागरूक निर्णय ले सकेगा। अधिकारी ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत पैक्ड मिठाइयों पर पहले से ही 'यूज बाई डेट' अंकित करना अनिवार्य है लेकिन खुली मिठाइयों के संबंध में ऐसी जानकारी प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट अनिवार्य प्रावधान नहीं था। उन्होंने बताया कि अब यह व्यवस्था खुली मिठाइयों पर भी लागू की जाएगी।
</description><guid>31284</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:24:24 am</pubDate></item><item><title>नीट पेपर लीक विवाद के मद्देनजर एनटीए के नए कार्यालय में तैनात किए जाएंगे सीआईएसएफ कर्मी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31283</link><description>नयी दिल्ली. राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक और प्रशासनिक खामियों को लेकर हुए बड़े विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के नए कार्यालय में कामकाज शुरू होने पर ''गोपनीय क्षेत्रों'' में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मी तैनात किए जाएंगे। यह कदम इस साल की शुरुआत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-स्नातक का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उठाया गया है। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा सुधारों की सिफारिश करने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल के गठन की घोषणा की थी। इस समिति ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। प्रश्नपत्र लीक मामले में दायर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में तीन विषय विशेषज्ञों को प्रश्नपत्र लीक का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। आरोप पत्र में कहा गया है कि एनटीए के गोपनीय विभाग में प्रवेश या बाहर निकलने के दौरान विशेषज्ञों की कोई जांच या तलाशी नहीं होती थी। आरोप पत्र के अनुसार इससे विशेषज्ञों को छोटे कागज के टुकड़ों पर प्रश्नपत्रों के सवाल लिखकर ले जाने का मौका मिला। साल 2017 में निष्पक्ष, पारदर्शी और मानकीकृत परीक्षाएं कराने के लिए स्थापित एनटीए में अब तक ओखला स्थित इसके कार्यालय से कामकाज किया जा रहा था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''मिंटो रोड स्थित भारत सरकार प्रेस भवन में 55 हजार वर्ग फुट से अधिक का एक समर्पित कार्यालय परिसर है। इस इमारत की पूरी पांचवीं मंजिल और चौथी तथा छठी मंजिल की कुछ जगह एनटीए को दी गई है। पिछले एक महीने में गोपनीय और संवेदनशील कामकाज को नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है।'' सीबीआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तीनों आरोपी विशेषज्ञों की हरकतों का इसलिए पता नहीं चल पाया क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में स्थित एनटीए कार्यालय में सीसीटीवी लाइव फीड की निगरानी के लिए कोई अलग नियंत्रण कक्ष नहीं था। नए परिसर में निगरानी की योजना के बारे में अधिकारी ने कहा, ''भवन में गोपनीय क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां आवाजाही और कामकाज पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। गृह मंत्रालय ने परिसर के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सुरक्षा को मंजूरी दी है।''</description><guid>31283</guid><pubDate>27-Sep-2026 12:28:07 am</pubDate></item><item><title>बैंक यूनियन ने आईबीए के आश्वासन के बाद तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल स्थगित की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31282</link><description>नयी दिल्ली/बैंक यूनियन ने पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करने समेत अपनी मांगों पर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) से मिले आश्वासन के बाद देशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल रविवार को स्थगित कर दी। सोमवार से शुरू होने वाली इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने किया था। यह हड़ताल बैंकिंग क्षेत्र की छमाही लेखाबंदी के समय हो रही थी। हड़ताल स्थगित होने के बाद सोमवार को बैंक सामान्य रूप से काम करेंगे। यूएफबीयू ने एक बयान में कहा, ''बाकी शनिवार को अवकाश घोषित करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए आईबीए और यूएफबीयू की एक उच्चस्तरीय समिति का तत्काल गठन किया जाएगा। यह समिति सभी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी, सभी हितधारकों से चर्चा करेगी और ऐसा समाधान निकालने का प्रयास करेगी, जो सभी हितधारकों, खासकर ग्राहकों, को स्वीकार्य हो।'' बयान में कहा गया कि स्केल-चार और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के संबंध में आईबीए के साथ बातचीत शुरू की जा सकती है। इसमें कहा गया है कि इसके तहत यूनियन और संघों की आपत्तियों को दूर करने के लिए योजना में बदलाव का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा जा सकता है। बयान में कहा गया कि आश्वासन के मद्देनजर यूएफबीयू ने प्रस्तावित आंदोलन और हड़ताल को स्थगित करने पर सहमति जताई।</description><guid>31282</guid><pubDate>27-Sep-2026 12:26:33 am</pubDate></item><item><title>नितिन नवीन ने भाजपा संगठन, निर्वाचित प्रतिनिधियों और बंगाल सरकार के बीच समन्वय पर जोर दिया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=31281</link><description>कोलकाता. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पश्चिम बंगाल में पार्टी संगठन, निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर रविवार को जोर दिया। नवीन ने राज्य इकाई के हाल में किए गए पुनर्गठन के बाद उसके कामकाज की समीक्षा की।
 शुक्रवार को राज्य भाजपा में किए गए संगठनात्मक फेरबदल के बाद पश्चिम बंगाल के अपने पहले दौरे पर आए नवीन ने राज्य पदाधिकारियों, जिला नेताओं, सांसदों, विधायकों और अन्य पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य पार्टी के संगठनात्मक तंत्र को राज्य में उसकी सरकार के साथ समन्वित करना था। पार्टी सूत्रों ने बताया कि नवीन का संदेश स्पष्ट था कि संगठन के पदाधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच मतभेदों के कारण गतिविधियों के अलग-अलग केंद्र नहीं बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी तंत्र को सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि उसके कार्यों को लोगों तक पहुंचाया जा सके। भाजपा की राज्य इकाई के नेता ने कहा, ''संगठन और निर्वाचित प्रतिनिधियों को करीबी समन्वय के साथ काम करना चाहिए और पार्टी तथा सरकार को एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए।'' न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में संगठनात्मक समीक्षा बैठक के दौरान नवीन ने राज्य पदाधिकारियों, विभाग संयोजकों, राज्य मोर्चा अध्यक्षों, जिला पदाधिकारियों और पार्टी के आईटी, मीडिया तथा सोशल मीडिया संचालन का काम संभालने वाले लोगों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल भी बैठक में मौजूद रहे और उन्होंने इसे संबोधित किया। भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी के सांसदों और विधायकों के साथ भी चर्चा की। इस दौरान निर्वाचित प्रतिनिधियों और संगठन के बीच समन्वय समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई। वह अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान बाद में राज्य कोर ग्रुप और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
 पार्टी सूत्रों ने बताया कि हाल के महीनों में कोलकाता, उसके आसपास के क्षेत्रों और कुछ जिलों में ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई गई थी, जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों और संगठन के नेताओं के बीच पर्याप्त समन्वय के बिना काम करने की धारणा बनी थी। भाजपा के राज्यसभा सदस्य राहुल सिन्हा ने कहा, ''राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल में नयी सरकार के पहले 150 दिनों में किए गए कार्यों का जायजा लिया। यह भाजपा सरकार के भविष्य के कामकाज के लिए गृहकार्य है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत केंद्रीय नेतृत्व राज्य में किए जा रहे काम और भविष्य की योजनाओं पर नजर रख रहा है। सिन्हा ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह बंगाल के लिए गौरवशाली दौर है।'' उन्होंने कहा कि भाजपा की ''डबल इंजन सरकार'' की अवधारणा का मतलब राज्य और केंद्र सरकारों के बीच समन्वय है। सूत्रों ने बताया कि नवीन ने इस बात पर भी जोर दिया कि संगठन को पिछले कुछ महीनों में नयी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का सक्रिय रूप से प्रचार-प्रसार करना चाहिए। भाजपा की राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसी बैठकें यह दर्शाती हैं कि सरकार बनने के बाद भी संगठनात्मक गतिविधियां जारी हैं।</description><guid>31281</guid><pubDate>27-Sep-2026 12:23:01 am</pubDate></item></channel></rss>