<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>देश - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सदस्य के रूप में संभाली नई जिम्मेदारी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29975</link><description>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। राज्यसभा में सदन की कार्रवाई प्रारंभ होने के कुछ देर बाद ही राज्यसभा में नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। शपथ लेने वालों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, असम से प्रमोद बोरो व बिहार से उपेंद्र कुशवाहा शामिल रहे।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का बतौर सांसद यह पहला कार्यकाल है। वह बिहार से राज्यसभा के सांसद चुने गए हैं। बिहार से ही भाजपा के शिवेश कुमार ने भी राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। बिहार से निर्वाचित जनता दल यूनाइटेड के रामनाथ ठाकुर ने भी सांसद के तौर पर शपथ ली। असम से भाजपा के तेराश गोवाला, जोगेन मोहन, यूपीपी (एल) के प्रमोद बोरो ने शपथ ली। हरियाणा से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने राज्यसभा सदस्य की शपथ ली।
इसके अलावा, तेलंगाना से कांग्रेस के वेम नरेंद्र रेड्डी और अभिषेक मनु सिंघवी और हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के अनुराग शर्मा ने राज्यसभा की शपथ ली। महाराष्ट्र से भाजपा के विनोद तावड़े, ओडिशा से भाजपा के सुजीत कुमार, छत्तीसगढ़ से भाजपा की लक्ष्मी वर्मा व कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम ने शपथ ली। गौरतलब है कि गुरुवार को संसद में देश की महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन का उल्लेख किया गया। सांसदों ने पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई के निधन पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को बताया कि विख्यात गायिका आशा भोसले ने अपने आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और भारतीय संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाई। उन्हें पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। आशा भोसले का 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था।
सदन को यह भी बताया गया कि मोहसिना किदवई का 8 अप्रैल 2026 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह राज्यसभा की सदस्य रहीं और छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने राज्यसभा में दो कार्यकाल पूरे किए। उनका जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हुआ था। करीब छह दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों में सेवा दी। वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहीं और केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उनके निधन को देश ने एक अनुभवी जननेता, कुशल प्रशासक और प्रतिष्ठित सांसद की क्षति बताया। सदन ने दोनों महान हस्तियों के निधन को देश की अपूरणीय क्षति बताया। अंत में सभी सदस्यों ने खड़े होकर दिवंगत आत्माओं की स्मृति में मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।</description><guid>29975</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:40:45 am</pubDate></item><item><title>  हरिवंश फिर होंगे राज्यसभा के उपसभापति, शुक्रवार को  होगा निर्वाचन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29974</link><description>नई दिल्ली। राष्ट्रपति की ओर से नामित हरिवंश नारायण सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय में उपसभापति पद के लिए नामांकन किया। वे जनता दल(यू) से सदन में दो बार निर्वाचित एवं दोनों बार राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं।
राज्यसभा में शुक्रवार को उपसभापति का निर्वाचन होगा। विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर आपत्ति जाहिर करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसका अर्थ है कि बिना विरोध हरिवंश फिर से उपसभापति बन जायेंगे।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में कहा कि विपक्ष ने शुक्रवार कोनिर्वाचन प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है। हालांकि इसके पीछे हरिवंश का निरादर करने का कोई ईरादा नहीं है। विपक्ष को उम्मीद है कि हरिवंश अपने तीसरे कार्यकाल में विपक्ष के अनुरोधों के प्रति अधिक सहिष्णु और ग्रहणशील होंगे।
जयराम रमेश ने तीन आपत्तियां जताई है। उनका कहना है कि 7 सालों से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है। राज्यसभा में राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत किसी व्यक्ति को इससे पहले कभी भी उपसभापति पद के लिए विचार नहीं किया गया है। वहीं, उन्हें तीसरी बार मौका देते समय विपक्ष से विचार भी नहीं किया गया।
पिछले माह राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित किया था। हरिवंश नारायण सिंह का 9 अप्रैल को उपसभापति के तौर पर कार्यकाल समाप्त हो गया। तब से यह पद खाली है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति सदन का संचालन करते हैं।</description><guid>29974</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:38:38 am</pubDate></item><item><title>शुक्रवार से दिल्ली और कश्मीर के बीच शुरू होगी मालगाड़ी सेवा: उत्तरी रेलवे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29973</link><description>नई दिल्ली। उत्तरी रेलवे के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि शुक्रवार से नई दिल्ली के आदर्श नगर से कश्मीर के बडगाम के बीच संयुक्त पार्सल प्रोडक्ट रैपिड कार्गो सर्विस (जेपीपी-आरसीएस) ट्रेन चलाई जाएगी। उत्तरी रेलवे के बयान के अनुसार, यह ट्रेन नई दिल्ली के आदर्श नगर स्टेशन और मध्य कश्मीर के बडगाम के बीच संचालित होगी।
अधिकारियों ने कहा कि इससे घाटी के व्यापारियों, खासकर फल उत्पादकों और हस्तशिल्प कारीगरों को बड़ी राहत मिलेगी। आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह सेवा फिलहाल 31 मई तक ट्रायल आधार पर नियमित रूप से चलाई जाएगी। इसके बाद यात्रियों और माल की मांग (ऑक्यूपेंसी) संतोषजनक रहने पर इसे स्थायी सेवा में शामिल किया जा सकता है।
ट्रेन संख्या 00462 बडगाम से सुबह 6:15 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 5 बजे दिल्ली के आदर्श नगर पहुंचेगी। रास्ते में माल चढ़ाने और उतारने की सुविधा के लिए ट्रेन बाड़ी ब्राह्मण और अंबाला कैंट स्टेशन पर भी निर्धारित ठहराव करेगी। बयान में कहा गया कि बाड़ी ब्राह्मण रेलवे स्टेशन पर ट्रेन 00462 का समय व्यापारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बदला गया है।
वापसी यात्रा में ट्रेन संख्या 00461 आदर्श नगर से सुबह 5 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 10:45 बजे बडगाम पहुंचेगी। इस विशेष पार्सल ट्रेन में आठ पार्सल वैन और एक सीटिंग-कम-लगेज कोच होंगे। रेलवे के अनुसार, यह सेवा सड़क परिवहन की तुलना में ज्यादा तेज होगी और 23-24 घंटे में दूरी तय करेगी, जिससे सेब और चेरी जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान ताजे बने रहेंगे।
बयान में कहा गया कि इस पहल का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और केसर, अखरोट, पश्मीना शॉल और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों को देश भर के बाजारों तक तेजी से पहुंचाना है। सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर उचित सिंघल ने पत्रकारों को बताया कि व्यापारियों और किसानों की लगातार मांग को देखते हुए 17 अप्रैल से 31 मई तक इस पार्सल ट्रेन को नियमित रूप से चलाने का फैसला लिया गया है।</description><guid>29973</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:35:45 am</pubDate></item><item><title>परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय, यह मेरा वादा, मेरी गारंटी : प्रधानमंत्री मोदी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29972</link><description>नई दिल्ली। परिसीमन बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में स्पष्ट और सख्त संदेश देते हुए कहा कि देश में होने वाली यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह निर्णय देश की एकता और संविधान की भावना के अनुरूप होगा।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम, छोटे राज्य हों या बड़े, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले हुए परिसीमन के दौरान जो अनुपात तय किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और आगे की वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।
उन्होंने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अगर किसी को भरोसा चाहिए तो वह गारंटी देने को भी तैयार हैं। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। जब नीयत साफ होती है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं होती। कुछ लोग इस प्रक्रिया को उनके राजनीतिक स्वार्थ से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे मिल सकता है, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी का नुकसान नहीं होगा। हमें किसी क्रेडिट की जरूरत नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि बिल पारित होने के बाद वह सभी दलों को श्रेय देने के लिए तैयार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश को क्षेत्रीय नजरिए से बांटकर नहीं देखा जा सकता। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हम एक देश हैं। हमें देश को टुकड़ों में सोचने का कोई अधिकार नहीं है।
पीएम मोदी ने नारी सशक्तीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका हक है। हम यह न सोचें कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं, यह उनका अधिकार है, जिसे दशकों से रोका गया है। आज हमें उस गलती का प्रायश्चित करने का अवसर मिला है। लोकतंत्र की जननी होने के नाते, यह भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता है। इसी प्रतिबद्धता के कारण पंचायतों में ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने में अनुभव और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पंचायत स्तर पर किए गए प्रयोगों ने यह साबित किया है कि सही नीयत और अनुभव से बड़े बदलाव संभव हैं। मैंने लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। मेरा अनुभव यह है कि संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने की प्रतिबद्धता लाभकारी सिद्ध होती है। जैसे-जैसे अनुभव गहराता है, उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।</description><guid>29972</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:34:23 am</pubDate></item><item><title>महिला आरक्षण पर पीएम की अपील: राजनीति से ऊपर उठकर लें ऐतिहासिक फैसला</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29971</link><description>नई दिल्ली। संसद में एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसे क्षण बार-बार नहीं आते। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अवसर केवल एक विधेयक पारित करने का नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में लाने का है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को मदर ऑफ डेमोक्रेसी कहा जाता है और हजारों वर्षों की लोकतांत्रिक परंपरा में यह एक नया आयाम जोड़ने का समय है। उन्होंने माना कि यह कदम 25-30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था, जिससे यह व्यवस्था अब तक और परिपक्व हो चुकी होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का मतलब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक आंकड़े नहीं हैं, बल्कि नीति-निर्धारण में सभी की समान भागीदारी जरूरी है। देश की 50% आबादी को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीति के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विषय पूरे देश और समाज से जुड़ा है, इसलिए सभी दलों को एकजुट होकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में पंचायत स्तर पर महिलाओं की मजबूत नेतृत्व क्षमता विकसित हुई है। लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में काम कर चुकी हैं और अब वे नीति-निर्धारण में भागीदारी चाहती हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को खुद यह तय करने का अवसर मिलना चाहिए कि प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान की शक्ति के कारण ही वे इस पद तक पहुंचे हैं। उनका दायित्व है कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना उनके सामर्थ्य के साथ अन्याय होगा।
उन्होंने कहा कि 2023 में इस विधेयक को व्यापक समर्थन मिला था और अब इसे लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए। 2029 तक इसे लागू करने का अवसर है, जिसे गंवाया नहीं जाना चाहिए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में किसी राज्य या क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा और परिसीमन में संतुलन बनाए रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका अधिकार है, जिसे लंबे समय तक टाला गया है। अब समय है कि इस ऐतिहासिक कमी को दूर किया जाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसले का श्रेय किसी एक दल या व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे सदन और देश का सामूहिक निर्णय होगा।
उन्होंने बताया कि देशभर में पंचायत, ब्लॉक और शहरी निकायों में बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं और प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं। उनका अनुभव संसद की कार्यक्षमता को और बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया जाए, ताकि देश की नारी शक्ति को मजबूत संदेश दिया जा सके।</description><guid>29971</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:32:32 am</pubDate></item><item><title>परिसीमन से दक्षिण की ताकत बढ़ेगी, भ्रांति न फैलाएं: अमित शाह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29970</link><description>नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन पर चल रही बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत घटेगी नहीं, बल्कि और मजबूत होगी।
गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश की 25 सीटें बढ़कर 38 हो जाएंगी, जबकि तेलंगाना की 17 सीटें बढ़कर 26 होंगी। केरल की 20 सीटें बढ़कर 30 और कर्नाटक की 28 सीटें बढ़कर 42 हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की 39 सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी और उसकी हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। ऐसे में यह कहना गलत है कि दक्षिण भारत को परिसीमन से नुकसान होगा।
अमित शाह ने बताया कि वर्तमान 543 सदस्यीय लोकसभा में दक्षिण भारत के 129 सांसद हैं, जो 23.76% हिस्सेदारी रखते हैं। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी और हिस्सेदारी 23.87% तक पहुंच जाएगी, यानी दक्षिण की ताकत में स्पष्ट वृद्धि होगी। गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि दक्षिण भारत को लेकर जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर गलतफहमी फैलाने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है और वर्तमान जनगणना प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ रही है। इस पर भी किसी तरह का भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग से संबंधित कानून पहले की तरह ही है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का मौजूदा चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
</description><guid>29970</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:30:36 am</pubDate></item><item><title> प्रधानमंत्री ने तनावपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच स्थायी शांति की अपील की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29969</link><description>नयी दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया एक 'बेहद तनावपूर्ण' स्थिति से गुजर रही है, जिससे सभी देश प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति लाने की अपील की, क्योंकि सैन्य संघर्ष से किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता। मोदी ने ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ व्यापक वार्ता के बाद यह टिप्पणी की, जिसमें व्यापार, रक्षा और अवसंरचना के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। अपनी वार्ता में, मोदी और स्टॉकर ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में संघर्षों के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की और उन्हें कम करने के लिए संयुक्त रूप से काम करने का संकल्प लिया।
ऑस्ट्रिया के चांसलर विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से चार दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को नयी दिल्ली पहुंचे। भारत की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मीडिया बयान में कहा, ''पूरी दुनिया बहुत ही गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रही है। और यह स्थिति हम सब को प्रभावित कर रही है।'' उन्होंने कहा, ''ऐसे तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में, भारत और ऑस्ट्रिया इस बात पर एकमत हैं कि सैन्य संघर्ष से समस्याओं का हल नहीं हो सकता। चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम एक स्थिर, टिकाऊ और स्थायी शांति का समर्थन करते हैं। मोदी ने कहा, हम इस बात पर भी सहमत हैं कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है और आतंकवाद का उन्मूलन हमारी साझा प्रतिबद्धता है।'' मोदी-स्टॉकर वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें एक समझौता भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों को एक-दूसरे के यहां निवेश करने में सहायता के लिए एक त्वरित तंत्र स्थापित करने से संबंधित है। सैन्य क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक समझौता किया गया। भारत और ऑस्ट्रिया ने आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना को सुगम बनाना भी शामिल है। स्टॉकर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया द्विपक्षीय व्यापार में बहुत सकारात्मक वृद्धि हो रही है और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा। पश्चिमी एशियाई संकट का जिक्र करते हुए चांसलर ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय से निपटने के लिए स्थिरता, विश्वास और भरोसेमंद साझेदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक चुनौतियां और गंभीर होती जा रही हैं, ऐसी साझेदारियां अधिक मूल्यवान हो जाती हैं। साथ मिलकर, हम ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें हम स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ रह सकते हैं। हम नियमों पर आधारित विश्व व्यवस्था के पक्षधर हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्टॉकर की यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और भारत में रेलवे के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा पहल सहित कई इंजीनियरिंग परियोजनाओं में ऑस्ट्रियाई कंपनियों की भागीदारी का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता होने के बाद, भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू हो गया है। चांसलर स्टॉकर की यात्रा के साथ, हम भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को भी एक नए युग में ले जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि चांसलर की यात्रा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों में नयी ऊर्जा का संचार करेगी। उन्होंने कहा, हमें खुशी है कि वह एक व्यापक दृष्टिकोण और एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं। ऑस्ट्रिया की विशेषज्ञता को भारत की गति और व्यापकता के साथ मिलाकर, हम पूरी दुनिया के लिए विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा, हम रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपनी साझेदारी को मजबूत करेंगे। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों की स्पष्ट रूप से निंदा की। दोनों नेताओं ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले और नवंबर में लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की भी कड़ी शब्दों में निंदा की। जॉर्ज ने कहा कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद से व्यापक तरीके से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया।
</description><guid>29969</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:27:27 am</pubDate></item><item><title>धोलेरा में बनेगा भारत का पहला चिप प्लांट, केंद्र ने एसईजेड को दी मंजूरी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29968</link><description>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुजरात के धोलेरा में भारत का पहला चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) को अधिसूचित कर मंजूरी दे दी है। इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, यह एसईजेड करीब 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से लगभग 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह संयंत्र इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और आईटी/आईटीईएस सेवाओं को समर्थन देगा और इसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ आसान लॉजिस्टिक्स व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
यह परियोजना देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (चिप निर्माण) प्लांट होगी, जो भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।
सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। 3 जून 2025 को जारी अधिसूचना के तहत न्यूनतम भूमि आवश्यकता 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दी गई है।
इन सुधारों में जमीन उपयोग में लचीलापन, फ्री सप्लाई को नेट फॉरेन एक्सचेंज में शामिल करना और घरेलू बाजार (डीटीए) में बिक्री की अनुमति जैसे प्रावधान शामिल हैं। इनका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और कारोबार को आसान बनाना है।
सुधारों के बाद कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट शामिल है, जिसमें करीब 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इसके अलावा, एक्वस समूह कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसईजेड स्थापित कर रहा है।
सीजी सेमी, कायन्स सेमीकॉन और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है, जो देश में सप्लाई चेन को मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।
सरकार का लक्ष्य इन एसईजेड के माध्यम से एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है। मंत्रालय ने कहा कि उद्योग की भागीदारी और नीतिगत समर्थन से भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण केंद्र बनाने में यह पहल अहम साबित होगी।</description><guid>29968</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:20:06 am</pubDate></item><item><title>ऑस्ट्रिया के चांसलर ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29967</link><description>नई दिल्ली। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।
राष्ट्रपति ने डॉ. स्टॉकर की पहली भारत यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच संबंध लोकतंत्र और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं, जो दोनों देशों को और करीब लाते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रिया यात्रा ने संबंधों को नई दिशा दी। इससे नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के निष्कर्ष के बाद हो रही है, जिससे व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए भारत में निवेश के व्यापक अवसर हैं, खासकर सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया दोनों ही ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं और विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। 2024 में शुरू किया गया इंडिया-ऑस्ट्रिया स्टार्टअप ब्रिज इस क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत कर रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यह यात्रा भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सभी महत्वपूर्ण आयामों को और गति प्रदान करेगी।</description><guid>29967</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:18:59 am</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी और मैक्रों की बातचीत, होर्मुज की सुरक्षा पर बनी सहमति</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29966</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फोन किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तुरंत सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने हालात को लेकर चिंता जताई और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया संकट के बीच यह दूसरी बार है जब राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की। इससे पहले 19 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय हालात पर चिंता व्यक्त की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा स्थिति में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और फ्रांस मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रयास जारी रखेंगे। इससे पहले 14 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा की थी। ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी संघर्ष की स्थिति के बाद वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक संपर्क तेज हुए हैं। ऐसे में भारत, फ्रांस और अमेरिका के बीच संवाद क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
</description><guid>29966</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:15:53 am</pubDate></item><item><title> राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिकित्सकों से नवाचार अपनाने की अपील</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29964</link><description>नागपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को युवा चिकित्सकों से नवाचार, अनुसंधान करने और निरंतर सीखते रहने का आग्रह करते हुए इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा में नैतिक मूल्य सर्वोपरि हैं और प्रौद्योगिकी करुणा का स्थान नहीं ले सकती। राष्ट्रपति मुर्मू नागपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह में एक सभा को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस देश की बेटियां और बेटे मिलकर 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों में ना केवल सेवा भाव होना चाहिए, बल्कि आजीवन सीखने की प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, जिज्ञासा ही प्रगति का आधार है। चिकित्सा विज्ञान में नये समाधान खोजने की प्रेरणा ना केवल आपको एक उत्कृष्ट डॉक्टर बनाएगी, बल्कि सेवा के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगी।''
उन्होंने युवा चिकित्सकों से नवाचार, अनुसंधान करने और निरंतर सीखते रहने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि चिकित्सा क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने कहा, प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत क्यों ना हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती। करुणा की भावना को हमेशा बनाए रखें, क्योंकि यह आपको ना केवल एक अच्छा डॉक्टर बनाती है, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनाती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले दशक में नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन कल्याण आरोग्य योजना के तहत 43 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए हैं, जो प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1.85 लाख से अधिक 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' स्थापित किए हैं। मुर्मू ने सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों को मानवता की सेवा करने का विशेष अवसर प्राप्त है और उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व करना चाहिए तथा इसे संवेदनशीलता के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि आज डिग्री प्राप्त कर रहे छात्र ना केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि अपने साथी नागरिकों को स्वस्थ रखने में भी योगदान देंगे। ऐसे ही प्रयासों से हम देश की आजादी के 100 साल पूरे होने तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे।
</description><guid>29964</guid><pubDate>16-Apr-2026 10:20:06 am</pubDate></item><item><title> कम ब्याज दर के कारण 2026-27 में बैंक कर्ज पर एनबीएफसी की निर्भरता बढ़ेगी: रिपोर्ट</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29963</link><description>मुंबई. ब्याज दरों में कमी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की बैंक कर्ज पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को यह जानकारी दी। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, बैंक ऋण की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बढ़कर 43 प्रतिशत रहा था। एजेंसी ने इस बदलाव का मुख्य कारण बैंक ऋण बाजार में कम ब्याज दरों को बताया है, जिसके चलते पूंजी बाजार के माध्यम से जारी होने वाले बॉन्ड में कमी आने की संभावना है। एजेंसी ने कहा, ''पिछले वित्त वर्ष के दौरान जहां बैंक ऋण दरों में गिरावट जारी रही, वहीं बॉन्ड प्रतिफल पहली छमाही में गिरने के बाद दूसरी छमाही में बढ़ गया और अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।'' इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण निकट भविष्य में बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की हिस्सेदारी भी कम रहने के आसार हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रतिभूतियों से एनबीएफसी को संसाधन जुटाने में कुछ सहायता मिलने की उम्मीद है। क्रिसिल की निदेशक मालविका भौतिका ने कहा कि अनिश्चित व्यापक आर्थिक वातावरण के कारण सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल के निकट भविष्य में ऊंचा बने रहने की उम्मीद है।
</description><guid>29963</guid><pubDate>16-Apr-2026 10:17:59 am</pubDate></item><item><title>आनंदपुर साहिब से लौट रही बस के पलटने से आठ श्रद्धालुओं की मौत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29962</link><description>चंडीगढ़. आनंदपुर साहिब से श्रद्धालुओं को लेकर लौट रही एक बस पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में पलट गई, जिससे उसमें सवार आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 19 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे बस्सी पठाना के मोरिंडा-चुन्नी रोड क्षेत्र में हिम्मतपुरा के पास हुई। बस में सवार सभी श्रद्धालु फतेहगढ़ साहिब के मेन माजरी के निवासी थे और बैसाखी के अवसर पर रूपनगर जिले के आनंदपुर साहिब से मत्था टेकने के बाद लौट रहे थे। फतेहगढ़ साहिब के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शुभम अग्रवाल ने कहा, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि वाहन में कुछ खराबी आ गई होगी। बस में करीब 40 श्रद्धालु सवार थे।
फतेहगढ़ साहिब के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) राज कुमार ने बताया कि पहले इस घटना में एक महिला सहित छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 21 लोग घायल हो गए थे। ''लेकिन बाद में दो अन्य घायलों ने चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) और मोहाली के फेज 6 स्थित एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।'' घायलों को फतेहगढ़ साहिब, बस्सी पठाना और रूपनगर जिला स्थित मोरिंडा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
दुर्घटना के बाद कई स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्यों में मदद की।
घायलों में से एक महिला ने बताया कि बस मेन माजरी गांव पहुंचने ही वाली थी कि अचानक पलट गई।
बस्सी पठाना के विधायक रूपिंदर सिंह मंगलवार रात घटनास्थल पर पहुंचे।
विधायक ने कहा कि सभी श्रद्धालु मेन माजरी गांव के थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्रद्धालुओं की मौत पर दुख व्यक्त किया और कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में उनके परिजन के साथ खड़ी है। कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आनंदपुर साहिब से श्रद्धालुओं के लौटने के दौरान बस्सी पठाना के पास हुए दुखद बस हादसे से मैं बहुत दुखी हूं। अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। वाहेगुरु इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों को शक्ति प्रदान करें।'' शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कहा, ''बैसाखी के दिन श्री आनंदपुर साहिब से लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ हुई दुखद बस दुर्घटना में लोगों की मौत की खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ है। मैं वाहेगुरु जी से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें, शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दें। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।''</description><guid>29962</guid><pubDate>15-Apr-2026 1:11:32 am</pubDate></item><item><title>महिला आरक्षण को लागू करने संबंधी विधेयक बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29961</link><description>नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने साल 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए तीन विधेयकों को बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया है। बुधवार को जारी एक बुलेटिन से यह जानकारी मिली है। बुलेटिन के मुताबिक, 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026' को बहस के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा। बुलेटिन के अनुसार, पहले दो विधेयक जहां केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, वहीं तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के पटल पर रखेंगे। बुलेटिन में कहा गया है कि लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने बहस के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है और यह (बहस) शुक्रवार को भी जारी रह सकती है। लोकसभा में पारित होने के बाद ये विधेयक राज्यसभा के पास जाएंगे।</description><guid>29961</guid><pubDate>15-Apr-2026 1:09:46 am</pubDate></item><item><title> राज बब्बर ने गुरुग्राम में हड़ताल पर बैठे अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों से मुलाकात की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29960</link><description>गुरुग्राम. पूर्व सांसद राज बब्बर ने मंगलवार को यहां हड़ताल पर बैठे अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया और कहा कि सरकार को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। कांग्रेस नेता हड़ताल के सातवें दिन सेक्टर 29 स्थित विरोध स्थल पर पहुंचे और सरकार से अपनी मांगों को बिना देरी किए पूरा करने का आग्रह किया। उनके साथ सीमा पाहुजा भी थीं, जिन्होंने 2025 में गुरुग्राम महापौर चुनाव लड़ा था। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बब्बर को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें फरीदाबाद के मुजेसर स्थित एक कार्यशाला में आग लगने से जान गंवाने वाले दो दमकलकर्मियों के परिवारों के लिए मुआवजे और पिछले पांच वर्षों में वेतन वृद्धि न किये जाने, जोखिम और चिकित्सा भत्ते से संबंधित मांगें शामिल थीं। बब्बर ने हड़ताल को उचित ठहराया और फरीदाबाद अग्निकांड में शहीद हुए कर्मियों को याद किया। उन्होंने उनकी ओर से सरकार से बात करने का भी वादा किया।
</description><guid>29960</guid><pubDate>15-Apr-2026 11:25:43 am</pubDate></item><item><title> बंगाल को विभाजित किये बिना गोरखा समस्या का संवैधानिक रूप से समाधान करेंगे : शाह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29959</link><description>गंगारामपुर. मानिकचक (पश्चिम बंगाल). केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल की सत्ता में आती है तो दार्जिलिंग पहाड़ियों में निवास करने वाले गोरखा समुदाय के मुद्दे का वह राज्य का विभाजन किए बिना संवैधानिक तरीके से समाधान करेगी। दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में उत्तर बंगाल के लिए घोषित विकास परियोजनाओं का उल्लेख किया। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ''मैं दार्जिलिंग के अपने गोरखा भाइयों से कहना चाहता हूं कि सत्ता में आने पर भाजपा न केवल पहाड़ियों में एक पर्यावरण-अनुकूल रोमांचक खेल केंद्र विकसित करेगी, बल्कि राज्य को विभाजित किए बिना संवैधानिक तरीके से गोरखा मुद्दे का समाधान भी करेगी।''
दार्जिलिंग की पहाड़ियों में रहने वाले नेपाली भाषी लोग करीब एक सदी से गोरखालैंड नाम से अलग प्रदेश की मांग की रहे हैं और कई बार उनका आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। दार्जिलिंग के ऊपरी इलाकों और तराई के कुछ हिस्सों के प्रशासन के लिए 2011 में अर्ध-स्वायत्त गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के गठन के बावजूद, 2017 तक हिंसक आंदोलन होते रहे। इस क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) और गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा (जीएनएलएफ) जैसी स्थानीय गोरखा पार्टियों और भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े दलों के बीच राजनीतिक साझेदारी को लेकर कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इस इलाके में अलग गोरखालैंड की मांग हमेशा से राजनीति के केंद्र में रही है। इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाप में तृणमूल कांग्रेस ने बिमल गुरुंग नीत जीजेएम से अलग हुए गुट, अनित थापा के नेतृत्व वाले भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजेएम) के साथ गठबंधन किया है और दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियोंग की सीटें अपने सहयोगी दल के लिए छोड़ दी हैं।
दूसरी ओर, भाजपा ने एक बार फिर अपने पूर्व सहयोगी गुरुंग का समर्थन प्राप्त किया है। हालांकि इस बार वह इस क्षेत्र से सीधे चुनाव लड़ रही है। पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के मुद्दे को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा राज्य में राजनीतिक हिंसा, 'सिंडिकेट' और रिश्वतखोरी के राज को समाप्त करेगी और घुसपैठियों को प्राथमिकता के आधार पर निष्कासित करेगी। उन्होंने कहा, '' उत्तर बंगाल में कमल के चिह्न के बगल में स्थित ईवीएम बटन को इतनी जोर से दबाएं जिससे पूरे भारत में घुसपैठिए बिजली का झटका महसूस कर सकें।'' शाह ने लोगों से राजनीतिक हिंसा के डर के बिना मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने ''ममता बनर्जी के गुंडों पर लगाम लगाने के लिए'' पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात किए हैं। उन्होंने कहा,''इस बार न तो तृणमूल कांग्रेस के गुंडे और न ही पार्टी द्वारा पनाह दिए गए घुसपैठिए पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को धमका पाएंगे।'' शाह पिछले कुछ हफ्तों से पश्चिम बंगाल का नियमित दौरा कर रहे हैं और 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों से पहले राज्य में कई जनसभाएं कर चुके हैं। उत्तरी बंगाल के जिलों में 23 अप्रैल को मतदान होगा। भाजपा यहां घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में- 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा और मतों की गिनती चार मई को होगी।
शाह ने आरोप लगाया कि आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के 'एजेंट' हैं। उन्होंने दावा किया कि कबीर मुख्यमंत्री की सहमति से बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद का निर्माण कर रहे थे। केंद्रीय गृहमंत्री ने मालदा जिले के मानिकचक में एक अन्य जनसभा में कहा, '' हुमायूं कबीर मेरी बात कान खोलकर सुन लें कि भाजपा मस्जिद का निर्माण नहीं होने देगी। ममता बनर्जी और उनके भतीजे को भी यह पता होना चाहिए कि पांच मई को, मतगणना के एक दिन बाद, उस मस्जिद को बनाने का उनका सपना चकनाचूर हो जाएगा।'' मुर्शिदाबाद के भरतपुर से निवर्तमान विधायक कबीर को पिछले साल दिसंबर में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बेलडांगा में मस्जिद निर्माण की घोषणा के बाद तृणमूल ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। कबीर ने खुद अपनी पार्टी बनाई है और चुनाव लड़ रहे हैं।
शाह ने वादा किया कि पश्चिम बंगाल से अन्य राज्यों को आलू की आपूर्ति करने की अनुमति दी जाएगी ताकि यहां के किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। खबरों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड उत्पादन के कारण आलू किसानों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। यहां आलू की कीमत गिरकर प्रति 50 किलोग्राम 250 से 300 रुपये तक पहुंच गई है, जो उत्पादन लागत 400 रुपये से काफी कम है। इस संकट के चलते हुगली और पश्चिम मिदनापुर जैसे जिलों में भारी नुकसान, कर्ज और किसानों द्वारा आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने अन्य राज्यों में आलू के परिवहन पर रोक लगाई है जिसकी वजह से स्थानीय आपूर्ति में अधिकता और असम और बिहार जैसे पारंपरिक बाजारों में मांग में कमी आई। तृणमूल सरकार के इस फैसले की विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा ने आलोचना की है। शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मार्च में हुई यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और अंतिम समय में कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर राज्य प्रशासन के प्रति जताई गई निराशा का हवाला देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने देश के संवैधानिक प्रमुख का लगातार 'अपमान' किया है। उन्होंने कहा, ''मैं बी आर आंबेडकर की जयंती के अवसर पर यह कहता हूं, पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी द्वारा हमारी आदिवासी राष्ट्रपति के प्रति दिखाए गए अनादर को कभी माफ नहीं करेंगी।'' शाह ने अग्रणी नेता की दलित जड़ों और राष्ट्रपति द्वारा देश के आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधित्व के बीच स्पष्ट समानताएं बताईं।
शाह ने पार्टी के घोषणापत्र में किए गए वादों को भी दोहराया कि उत्तरी बंगाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), 600 बिस्तर के कैंसर अस्पताल, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईएमएम) और खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा लंबे समय से की जा रही मांग का सम्मान करते हुए राजबंशी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा। शाह ने मालदा जिले के गजोले की जनसभा में कहा, ''ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के लोगों के साथ घोर अन्याय किया है। मालदा के आम गुजरात तक के लोगों को पसंद हैं, लेकिन आम उत्पादकों के लिए कोई शीत गृह की सुविधा नहीं है। भाजपा आम उत्पादन वाले हर क्षेत्र में शीत गृह का निर्माण करेगी।'' इससे पहले दिन में, केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज में एक रोड शो किया, जिसमें भारी भीड़ दिखी।
</description><guid>29959</guid><pubDate>15-Apr-2026 11:23:33 am</pubDate></item><item><title> मझोले स्तर पर अधिक भर्तियों की योजना, वेतन पांच-10 प्रतिशत बढ़ने का अनुमानः रिपोर्ट</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29958</link><description>मुंबई. कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर में तेजी से जुड़ी चिंताओं के बीच भारतीय कॉरपोरेट जगत में 2026-27 के दौरान भर्ती मुख्य रूप से मझोले स्तर के पदों पर केंद्रित रहने और वेतन वृद्धि पांच से 10 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। कार्यबल भर्ती से जुड़ी कंपनी जीनियस एचआरटेक की यह रिपोर्ट कहती है कि 49 प्रतिशत कंपनियों ने मझोले स्तर के पेशेवरों की भर्ती पर प्रमुख रूप से ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। कुल कार्यबल विस्तार के संदर्भ में 28 प्रतिशत संगठनों ने 10-15 प्रतिशत से अधिक की भर्ती वृद्धि की योजना जताई, जबकि 43 प्रतिशत ने शून्य से पांच प्रतिशत की सीमित बढ़ोतरी का अनुमान व्यक्त किया। वेतन के मोर्चे पर 46 प्रतिशत कंपनियां पांच से 10 प्रतिशत वृद्धि की योजना बना रही हैं, जबकि 34 प्रतिशत कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का संकेत दिया है।
नए श्रम कानूनों के लागू होने से 57 प्रतिशत कंपनियां अपने वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वेतन वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मध्यम-वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों (48 प्रतिशत) को मिलने की संभावना है, जबकि कनिष्ठ एवं वरिष्ठ स्तर का हिस्सा क्रमश: 26 एवं 22 प्रतिशत रहेगा। कर्मचारियों का नौकरी छोड़ना कंपनियों के लिए चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। करीब 55 प्रतिशत संगठनों ने 10-20 प्रतिशत कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का अनुमान जताया, जबकि 15 प्रतिशत कंपनियों ने इस दर के 20 प्रतिशत से अधिक रहने की आशंका जताई। नौकरी छोड़ने के मामले में मध्यम-वरिष्ठ स्तर के कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित वर्ग के रूप में उभरे हैं, जिन्हें 67 प्रतिशत कंपनियों ने सबसे अधिक संवेदनशील बताया। रिपोर्ट कहती है कि खासकर युवा कर्मचारियों में काम का लचीलापन, उद्देश्य और तेज करियर प्रगति जैसी अपेक्षाएं नौकरी छोड़ने की स्थिति को प्रभावित कर रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 43 प्रतिशत संगठनों का मानना है कि कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने में नौकरी की सुरक्षा की भूमिका सीमित या मध्यम है जबकि वेतन एवं करियर में बेहतर अवसर जैसे कारक अधिक प्रभावी हैं। जीनियस एचआर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आर पी यादव ने कहा, ''2026-27 की भर्ती रणनीति अधिक सतर्क और डेटा-आधारित होगी, जिसमें मझोले स्तर के कर्मचारी, डिजिटल कौशल और बदलती कारोबारी जरूरतों पर जोर रहेगा। नौकरी छोड़ने की दर में तेजी से कंपनियों को बेहतर योजना और कर्मचारियों को बनाए रखने की रणनीतियों की जरूरत है।''
</description><guid>29958</guid><pubDate>15-Apr-2026 11:18:56 am</pubDate></item><item><title> महिला आरक्षण विधेयक समय की जरूरत है : अमित शाह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29956</link><description>नयी दिल्ली. महिला आरक्षण विधेयक को समय की आवश्यकता बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सभी को इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करना चाहिए। शाह ने इसे बेहतरी के लिए एक ऐसा बदलाव बताया, जिसे निश्चित रूप से बिना किसी देरी के होना चाहिए। 'एक्स' पर एक पोस्ट में शाह ने कहा, ''महिला आरक्षण विधेयक समय की आवश्यकता है। हमारी नारी शक्ति को न्यायोचित अधिकार है कि वे नीति-निर्माण में सक्रिय भागीदारी करें और राष्ट्र को सशक्त बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। मोदी सरकार इस विधेयक को प्रस्तुत करने और इसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।'' उन्होंने कहा कि बेहतरी के लिए यह एक ऐसा बदलाव है, जो निश्चित रूप से बिना किसी देरी के होना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी लोग इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करेंगे।
संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया, जिसे आम तौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है। यह विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। मसौदा संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के पारित होने पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाएगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान में संशोधन के माध्यम से किया गया था। वर्तमान कानून के तहत, महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ा था। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी। इसलिए, कानून में संशोधन पारित करने के लिए सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद सत्र आहूत किया है।
</description><guid>29956</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:52:38 am</pubDate></item><item><title> बीते एक दशक में केंद्र ने आधारभूत संरचनाओं के विकास में अभूतपूर्व निवेश किया: प्रधानमंत्री</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29955</link><description>देहरादून. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सड़कों और राजमार्गों को राष्ट्र की ''भाग्यरेखाएं'' बताते हुए मंगलवार को कहा कि बीते एक दशक में केंद्र सरकार ने आधारभूत संरचनाओं के विकास में अभूतपूर्व निवेश किया है। यहां करीब 11,963 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि राष्ट्र की ''भाग्यरेखाएं'' हमारी सड़कें और राजमार्ग होते हैं और बीते एक दशक से उनकी सरकार विकास की ऐसी ही ''भाग्यरेखाओं'' के निर्माण में जुटी हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में देश में आधारभूत संरचनाओं के विकास में अभूतपूर्व निवेश हुआ है।
उन्होंने कहा, ''2014 तक पूरे देश में आधारभूत संरचनाओं के विकास पर दो लाख करोड़ रुपये भी खर्च नहीं होते थे, आज यह निवेश इससे छह गुना अधिक, 12 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो चुका है। केवल उत्तराखंड में ही सवा दो लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि अब सड़कें गांवों तक पहुंच रही हैं और सड़कों के अभाव में पूर्व में वीरान हुए गांव अब जीवंत हो गए हैं। उत्तराखंड की चारधाम बारहमासी सड़क परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि विकास की ये ''रेखाएं'' क्षेत्र के कोने-कोने में फैल रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत जिस गति और पैमाने पर काम कर रहा है, उसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। उन्होंने उत्तराखंड, पश्चिम उत्तर प्रदेश और दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ सप्ताह पहले दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ, मेरठ में मेट्रो सेवा शुरू हुई, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की शुरुआत हुई, हवाई जहाज की रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा पर काम शुरू हुआ और आज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा, ''इतने छोटे से क्षेत्र में इतने कम समय में यह सब हो रहा है। 21वीं सदी का भारत आधुनिक 'इंफ्रास्ट्रक्चर' युग में प्रवेश कर रहा है, जो अभूतपूर्व और अकल्पनीय है।'' मोदी ने कहा कि आज भारत के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले औद्योगिक गलियारों पर काम किया जा रहा है।
दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, बेंगलुरु-मुंबई औद्योगिक गलियारा और अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा आदि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ''आर्थिक गलियारे देश की प्रगति के द्वार हैं और इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है।'' उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है, जिससे कई फायदे होंगे। मोदी ने कहा कि इससे समय की बचत होगी, आवागमन सस्ता और तेज होगा, पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी, रोजगार बढ़ेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। अपने अस्तित्व के 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुके युवा उत्तराखंड के लिए इस एक्सप्रेसवे को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ''डबल इंजन'' सरकार की नीतियों और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से यह राज्य विकास के नए आयाम जोड़ रहा है और यह परियोजना भी राज्य को नयी गति देगी। उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेसवे से गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, सहारनपुर और शामली जैसे उत्तर प्रदेश के शहरों को भी लाभ होगा। बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में उनकी सरकार ने जो नीतियां बनाईं और निर्णय लिए, उनसे संविधान की गरिमा पुनर्स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू है।
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लिए प्रगति, प्रकृति और संस्कृति की त्रिवेणी को जरूरी बताया।
उन्होंने तीर्थस्थलों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने पर भी बल दिया और कहा कि ऐसे पवित्र स्थानों को साफ-सुथरा रखना उत्तराखंड में रहने वाले लोगों के साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भी जिम्मेदारी है। इस संबंध में उन्होंने आगामी चारधाम यात्रा तथा अगले साल हरिद्वार में होने वाले अर्धकुंभ के दौरान विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कार्यक्रम से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे पर बनाए गए एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वन्यजीव गलियारे का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित सिद्धपीठ डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद मोदी ने मंदिर से देहरादून के मुख्य कार्यक्रम स्थल जसवंत ग्राउंड तक 12 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इस दौरान स्कूली बच्चों समेत सड़क के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्पवर्षा भी की और उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया। रोड शो के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
</description><guid>29955</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:49:26 am</pubDate></item><item><title> वर्ष 2023 में दुनियाभर में 1.3 अरब लोग यकृत की बीमारी से पीड़ित थे: लैंसेट का अध्ययन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29954</link><description>नयी दिल्ली. वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 1.3 अरब लोग यकृत (लिवर) की बीमारी से पीड़ित थे, जो 1990 के बाद से 143 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 'द लैंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके अनुसार वर्ष 2023 में 'मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज' (एमएएसएलडी) से करीब 1.3 अरब लोग पीड़ित थे। 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी (जीबीडी)-2023' के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण में यह भी अनुमान लगाया गया है कि जनसंख्या वृद्धि और जीवनशैली में बदलाव (जिसमें मोटापे और उच्च रक्त शर्करा की बढ़ती दरें शामिल हैं) के कारण 2050 तक एमएएसएलडी के वैश्विक मामले बढ़कर लगभग 1.8 अरब हो सकते हैं।
जीबीडी-2023 एमएएसएलडी के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में एमएएसएलडी की दर कहीं अधिक थी। उन्होंने यह भी पाया कि यद्यपि अधिक लोग इस बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य पर समग्र प्रभाव स्थिर बना हुआ है। शोधकर्ताओं ने कहा कि परिणाम से पता चलता है कि उपचार और देखभाल में हुई प्रगति से लोगों को लंबा और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिल रही है और मामलों की संख्या में वृद्धि ज्यादातर बीमारी के शुरुआती चरणों में हो रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मामलों की बढ़ती संख्या का मतलब यह है कि भविष्य में कई लोगों को लीवर सिरोसिस या कैंसर सहित गंभीर जटिलताओं के विकसित होने का खतरा है। टीम ने कहा कि निष्कर्ष इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि शहरीकरण और जीवनशैली में बदलाव के बीच कम और मध्यम आय वाले देशों में युवा वयस्कों को एमएएसएलडी तेजी से प्रभावित कर रहा है।
</description><guid>29954</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:46:27 am</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री का सभी राजनीतिक दलों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का समर्थन करने का आग्रह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29953</link><description>देहरादून. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का समर्थन करें ताकि वर्ष 2029 से इसे लागू किया जा सके । यहां 11,963 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उदघाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है और उनकी सुविधा, सुरक्षा और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी 'डबल इंजन' सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि चार दशकों के इंतजार के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था और अब उसे लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी दलों ने आगे आकर इस महत्वपूर्ण कानून को समर्थन दिया और अब महिलाओं को मिलने वाले इस हक को लागू होने में देर नहीं होनी चाहिए और 2029 में होने वाले लोकसभा चुनावों से इसे लागू हो जाना चाहिए। मोदी ने कहा, ''यह देश की जन भावना है। यह देश की हर बहनबेटी की इच्छा है।''
उन्होंने कहा कि इसी विषय पर संसद में 16 से 18 अप्रैल तक विशेष चर्चा की जाएगी जहां देश की महिलाओं के हक से जुड़े इस काम को सभी राजनीतिक दल मिलकर सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं और उसे पूरा करें ।    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने देश की सभी महिलाओं के नाम एक खुला पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने बहुत आग्रह के साथ उन्हें इस कार्य मे भागीदार बनने के लिए निमंत्रित किया है। उन्होंने कहा, ''मुझे पक्का विश्वास है कि यह पत्र देश की माताएं, बहनें जरूर पढ़ेंगी, एक-एक शब्द पर मनन करेंगी और इतना पवित्र कार्य करने के लिए 16,17 और 18 को संसद में पहुंचने वाले सभी सांसदों को उनके आशीर्वाद मिलेंगे।''    उन्होंने कहा कि वह देवभूमि उत्तराखंड से देश के सभी सभी दलों से फिर अपील करेंगे कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का जरूर समर्थन करें ताकि 2029 में देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या को हम उनका हक देकर रहें। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट के कारण विकसित देशों में भी हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन ऐसे मुश्किल हालात में भी सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को कम से कम परेशानी हो ।
</description><guid>29953</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:42:58 am</pubDate></item><item><title> प्रधानमंत्री मोदी ने देहरादून में रोड शो किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29952</link><description>देहरादून. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देहरादून में मंगलवार को रोड शो किया जिसमें उन्हें देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून-आर्थिक गलियारे का मंगलवार को यहां लोकार्पण करेंगे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित सिद्धपीठ मां डाटकाली मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद प्रधानमंत्री ने देहरादून में मुख्य कार्यक्रम स्थल जसवंत ग्राउंड तक 12 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों समेत अन्य लोग बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री के अभिवादन के लिए उमड़े और मोदी ने भी हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया। लोगों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्पवर्षा की। रोडशो के दौरान भारी सुरक्षा इंतजाम किया गया था और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था।
</description><guid>29952</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:36:05 am</pubDate></item><item><title> नए भारत की नई संभावनाओं का सेतु है दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा: आदित्यनाथ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29951</link><description>लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि दिल्ली-देहरादून-आर्थिक गलियारा औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाने के साथ-साथ पर्यटन के नए आयाम भी स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून-आर्थिक गलियारे का मंगलवार को लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि आज सहारनपुर की धरती विकास, विश्वास और कनेक्टिविटी के ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। उन्होंने पोस्ट में कहा, ''आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आज 12,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दिल्ली-उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि 'नए भारत' की नई गति, नई कनेक्टिविटी और नई संभावनाओं का सेतु है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यह नया मार्ग यात्रा समय में कमी और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाने के साथ-साथ पर्यटन के नए आयाम भी स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इस गलियारे से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे रह जाएगा। राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री देहरादून के पास स्थित जय मां डाट काली मंदिर में दर्शन पूजन करेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मोदी के काली मंदिर में दर्शन-पूजन करने को कुछ लोग विशेष मायने निकाल सकते हैं। बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री पूर्वाह्न लगभग 11 बजकर 15 मिनट पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के ऊंचे खंड पर बने वन्यजीव गलियारे की समीक्षा करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि डाट काली मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 12 बजकर 30 मिनट पर देहरादून में एक सार्वजनिक समारोह में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि 213 किलोमीटर लंबा, छह लेन वाले और पहुंच नियंत्रित दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे की परियोजना के क्रियान्वयन में निर्बाध उच्च गति कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जन सुविधाओं का निर्माण भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों को ध्यान में रखते हुए इस गलियारे को कई विशेषताओं के साथ डिजाइन किया गया है, जिनका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष में अत्यधिक कमी लाना है। उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के लिए कई विशेष सुविधाएं शामिल की गई हैं, जिनमें 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है। अधिकारियों के अनुसार कॉरिडोर में आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क बढ़ाकर और पूरे क्षेत्र में व्यापार और विकास के नए रास्ते खोलकर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
</description><guid>29951</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:33:29 am</pubDate></item><item><title> अमरनाथ यात्रा के लिए अग्रिम पंजीकरण आज से शुरू</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29950</link><description>नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा के लिए अग्रिम पंजीकरण आज से देश भर में 554 नामित बैंक शाखाओं में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से शुरू हो रहा है। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों के लिए विस्तृत प्रक्रिया जारी की है। 57 दिनों की यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को रक्षा बंधन के अवसर पर समाप्त होगी। भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रथम पूजा ज्येष्ठ पूर्णिमा, 29 जून को आयोजित की जाएगी।
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुताबिक पंजीकरण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा और बालटाल व पहलगाम रूट से यात्रा के लिए दैनिक कोटा निर्धारित होगा। 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु यात्रा के लिए पात्र होंगे। छह सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी।
जम्मू में आठ स्थानों पर होगा यात्रा का पंजीकरण
जम्मू शहर में आठ स्थानों पर यात्रा के लिए पंजीकरण लोग करा सकेंगे। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए बैंक शाखाओं में हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। जम्मू शहर में जेके बैंक की बख्शी नगर रेजीडेंसी रोड, अखनूर रोड और गांधी नगर गोल मार्केट, छन्नी हिम्मत शाखा में। एसबीआई की हरी मार्केट शाखा में।
यहां भी होगा पंजीकरण
कठुआ में कॉलेज रोड स्थित पीएनबी शाखा, जेके बैंक की मुख्य बाजार स्थित बिलावर शाखा
किश्तवाड़ में बस स्टैंड के पास शाहीन कॉम्पलेक्स जेके बैंक और जेके बैंक ऊं मेहता रोड
पुंछ में मुख्य बाजार गुरुद्वारा सिंह सभा जेके बैंक
रामबन मेन बाजार जेके बैंक, बटोत थाने के सामने जेके बैंक और एसबीआई बैंक
राजोरी मेन बाजार जेके बैंक और सुंदरबनी मेन बाजार जेके बैंक
रियासी में कटड़ा अंबिका होटल पीएनबी शाखा, मेन बाजार पीएनबी, बस स्टैंड कटड़ा जेके बैंक
सांबा में नैनीताल हाईवे वार्ड नंबर दो पीएनबी, नेशनल हाईवे स्थित एसबीआई बैंक
</description><guid>29950</guid><pubDate>15-Apr-2026 10:31:27 am</pubDate></item><item><title>  टीबी के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम के लिए भारत ने अफगानिस्तान भेजी 13 टन बीसीजी वैक्सीन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29949</link><description>नई दिल्ली। भारत ने मंगलवार को अफगानिस्तान के तपेदिक (टीबी) से लड़ने वाले बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में सहायता के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, भारत ने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय को 13 टन बीसीजी वैक्सीन और उससे जुड़े सूखा सामान भेजा है, ताकि अफगानिस्तान में तपेदिक (टीबी) के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम को बल मिले।
आपको बता दें, बीसीजी वैक्सीन एक फ्रीज-ड्राइड (लायोफिलाइज्ड) सफेद पाउडर के रूप में आती है, जो उपयोग से पहले तरल (डिलुएंट) के साथ मिलाई जाती है। यह 10-20 खुराक वाली शीशियों (वायल्स) में पैक की जाती है। ट्यूबरकुलिन सिरिंज/26जी सुई की आवश्यकता होती है। इसे 2 डिग्री सेल्सियस से 8 डिग्री सेल्सियस पर संग्रहित किया जाता है।
यह पहली बार नहीं है, जब भारत ने अफगानिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। हाल ही में आए बाढ़ और भूकंप के अफगान लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। उस दौरान भी भारत आगे आया और 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) भेजी।
जायसवाल ने अफगानिस्तान के लोगों के साथ भारत की एकजुटता और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता तब भी जताई थी। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, बाढ़ और भूकंप के कारण अफगानिस्तान के लोग जिस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने एचएडीआर सामग्री भेजी है। इसमें किचन सेट, हाइजीन किट, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और भी बहुत कुछ शामिल है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ पूरी तरह से खड़ा है और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता और समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले मार्च में, भारत सरकार ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी।</description><guid>29949</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:09:44 am</pubDate></item><item><title>दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से बेहतर होगी कनेक्टिविटी : नितिन गडकरी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29948</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का उद्घाटन किया। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरता है और इसके चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय लगभग छह घंटे से घटकर सिर्फ ढाई घंटे रह जाएगा।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक विकास को गति देने वाला एक बड़ा माध्यम है। उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
गडकरी ने बताया कि इस दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से प्रमुख पर्यटन स्थलों और आर्थिक केंद्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासतौर पर उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए यह परियोजना एक बड़ी सौगात है। उन्होंने बताया कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से उत्तराखंड में आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास के नए द्वार खुलेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह परियोजना खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी साबित होगी, जो नियमित रूप से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा करते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस एक्सप्रेसवे से देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे राज्य में पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से शुरू होकर अक्षरधाम, शास्त्री पार्क, खजूरी खास, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर लंबे 6-लेन सुपररोड का उद्घाटन भी जून में किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। गडकरी ने कहा, नीति, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी, ये तीनों हमारे समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। एक तरफ हमें विकास करना है तो वहीं दूसरी ओर पारिस्थितिकी और पर्यावरण का संरक्षण भी करना है।
आपको बता दें, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क बढ़ाएगा। चार धाम, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी तक पहुंच आसान कर पर्यटन को नई ऊर्जा देगा। इस परियोजना से बागपत, शामली और सहारनपुर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार सृजन के अवसर निर्मित होंगे। सहारनपुर के लकड़ी नक्काशी और मुजफ्फरनगर के कागज उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही संभव होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य, शिक्षा केंद्रों तक पहुंच आसान होगी और जीवन स्तर में सुधार होगा। यह कॉरिडोर पूरे क्षेत्र में व्यापार और विकास के नए रास्ते खोलकर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</description><guid>29948</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:08:31 am</pubDate></item><item><title>आयकर विभाग ने फॉर्म 141 शुरू किया, चार अलग-अलग टीडीएस फॉर्म का लेगा स्थान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29947</link><description>नई दिल्ली। इनकम टैक्स विभाग ने फॉर्म 141 को शुरू किया है, यह एक कंसोलिडेटेड चालान-कम-स्टेटमेंट है, जो कि चार अलग-अलग टीडीएस फॉर्म का स्थान लेगा। यह नया फॉर्म, फॉर्म 26क्यूबी, फॉर्म 26क्यूसी, फॉर्म 26क्यूडी और फॉर्म 26क्यूई को मिलाकर बनाया गया है, जिनका उपयोग पहले क्रमशः संपत्ति की खरीद पर टीडीएस, किराए पर टीडीएस, ठेकेदारों या पेशेवरों को किए गए भुगतान पर टीडीएस और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के हस्तांतरण पर टीडीएस दाखिल करने के लिए किया जाता था।
नए संशोधित नियमों के मुताबिक, फॉर्म 141 का उपयोग अब 50,000 रुपए प्रति महीने के भुगतान पर टीडीएस और 50 लाख रुपए की संपत्ति की खरीद पर टीडीएस जमा करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, इस फॉर्म का उपयोग उन व्यक्तियों या हिंदू अविभाजित परिवारों द्वारा एक वित्तीय वर्ष में 50 लाख रुपए से अधिक के पेशेवर, कमीशन या कॉन्ट्रेक्ट लेबर भुगतान की रिपोर्ट करने के लिए किया जा सकता है जो टैक्स ऑडिट के अधीन नहीं हैं।
कुछ निश्चित स्तरों के अधीन, क्रिप्टोकरेंसी या एनएफटी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) के लिए किए गए भुगतान भी अनुसूची डी में दिए गए फॉर्म के अंतर्गत आते हैं। फॉर्म भरने वाले करदाताओं को कटौतीकर्ता और कटौती प्राप्तकर्ता के पैन विवरण, पता, मोबाइल नंबर और दोनों पक्षों की ईमेल आईडी की आवश्यकता होगी।
सेवाओं की प्रकृति और भुगतान या हस्तांतरण के तरीके के आधार पर लेन-देन का विवरण भी आवश्यक है। फॉर्म 141 को ई-फाइलिंग पोर्टल पर पैन का उपयोग करके ई-पे टैक्स सेक्शन के अंतर्गत जरूरी अनुसूचियों का चयन करके भरा जा सकता है। फिर आवश्यक विवरण भर ऑनलाइन भुगतान और फॉर्म जमा करके और चालान-सह-विवरण डाउनलोड किया जा सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि फॉर्म 141 में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है  फॉर्म भरने की संख्या विक्रेताओं की संख्या से नहीं बल्कि खरीदारों की संख्या से तय होगी, क्योंकि अब एक ही फॉर्म में कई विक्रेताओं की जानकारी एक साथ दर्ज की जा सकती है।</description><guid>29947</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:07:13 am</pubDate></item><item><title>साइबर और डेटा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू : राष्ट्रपति मुर्मू</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29946</link><description>गांधीनगर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि आधुनिक युग में साइबर सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और कूटनीति राष्ट्रीय सुरक्षा के समान रूप से महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं। मुर्मू गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा, ''पहले सुरक्षा का संबंध केवल सैनिकों और पारंपरिक हथियारों से था। हालांकि, आज औद्योगिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और कूटनीति भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।'' राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल खतरों में वृद्धि के साथ सुरक्षा परिदृश्य तेजी से जटिल होता जा रहा है।
उन्होंने कहा, ''कुछ साल पहले, डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध और फिशिंग हमलों जैसे शब्द व्यापक रूप से ज्ञात नहीं थे, लेकिन आज वे महत्वपूर्ण खतरों के रूप में उभरे हैं।'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों का महत्व और जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है। देश को ऐसे पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है, जो साइबर धोखाधड़ी के अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने में तकनीकी रूप से सक्षम और कुशल हों, ऐसे फॉरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता है, जो अदालतों की जांच में खरे उतर सकें, और साथ ही ऐसे सक्षम पेशेवरों की आवश्यकता है जो भू-राजनीति की बारीकियों को समझ सकें तथा वैश्विक मंच पर भारत के दृष्टिकोण को आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ व्यक्त कर सकें।'' मुर्मू ने न्यायिक मानकों को पूरा करने वाले विश्वसनीय डिजिटल साक्ष्य प्रदान करने में सक्षम फॉरेंसिक विशेषज्ञों के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शक्ति न केवल सैन्य कर्मियों और सुरक्षा बलों के साहस और शौर्य पर निर्भर करती है, बल्कि सुरक्षा के लिए आवश्यक हथियारों और गोला-बारूद के संबंध में गुणवत्ता, उत्पादन, प्रशिक्षण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी निर्भर करती है, और सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ''स्वदेशी क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम की जा रही है।'' उन्होंने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के कार्यों की भी सराहना की और कहा कि इन पहल ने साइबर खतरों के प्रति देश की प्रतिक्रिया को मजबूत किया है और नागरिकों के लिए रिपोर्टिंग तंत्र में सुधार किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे उभरते क्षेत्र देशों की दिशा तय करने में तेजी से अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए तकनीकी रूप से तैयार रहना आवश्यक हो गया है।</description><guid>29946</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:06:11 am</pubDate></item><item><title>सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए सम्राट चौधरी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29945</link><description>पटना. बिहार में मंगलवार को सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि बिहार में बनने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नयी सरकार में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे। पटना स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक के समापन के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि निवर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन निवर्तमान मंत्री दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय ने किया। विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त चौहान ने बताया कि इसके बाद उपस्थित सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से चौधरी को अपना नेता चुन लिया। अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन विधायक दल की बैठक होगी जिसमें चौधरी के नाम पर औपचारिक मुहर लगेगी।
तारापुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक चौधरी ने नेता चुने जाने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। चौधरी ने एक बयान में कहा, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुझ पर विश्वास जताते हुए यह दायित्व सौंपने के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा, उनके विश्वास और सपनों को साकार करने का एक पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि वह पूर्ण निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ जन-जन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेते हैं। चौधरी ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तथा पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में मैं बिहार को विकास, सुशासन और समृद्धि के नए आयामों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहूंगा।'' केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के विकास के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य को 'जंगलराज' से बाहर निकालकर विकास के पथ पर आगे बढ़ाया। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्राट चौधरी उनके पदचिह्नों पर चलते हुए बिहार को आगे ले जाने का कार्य करेंगे।</description><guid>29945</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:03:45 am</pubDate></item><item><title>हरिद्वार अर्धकुंभ के स्नान पर्वों की तिथियां घोषित की गईं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29944</link><description>हरिद्वार. हरिद्वार में अगले साल होने वाले अर्धकुम्भ मेले में तीन अमृत (शाही) स्नान समेत कुल 10 प्रमुख स्नान पर्व होंगे। मेला प्रशासन ने मंगलवार को यह घोषणा की। मेला अधिकारी सोनिका सिंह ने अर्धकुम्भ स्नान की तिथियों का एलान करते हुए कहा कि जनवरी से अप्रैल 2027 तक चार महीने चलने वाले अर्धकुम्भ मेले में पहला स्नान पर्व 14 जनवरी को मकर संक्रांति, दूसरा छह फरवरी को मौनी अमावस्या, तीसरा 11 फरवरी को बसंत पंचमी, चौथा 20 फरवरी को माघ पूर्णिमा तथा पांचवा छह मार्च को महाशिवरात्रि पर होगा। सिंह ने कहा कि अर्ध कुम्भ में छठा स्नान पर्व आठ मार्च को फाल्गुन अमावस्या पर, सातवां स्नान पर्व सात अप्रैल को नव संवत्सर पर, 14 अप्रैल को मेष संक्रांति पर आठवां स्नान पर्व होगा, नौवां स्नान पर्व 15 अप्रैल को तथा अंतिम स्नान पर्व 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर होगा। सिंह ने कहा कि इनमें से छह मार्च को महाशिवरात्रि, आठ मार्च को फाल्गुन अमावस्या तथा 14 अप्रैल को मेष संक्रांति पर होने वाला स्नान अमृत स्नान होगा।</description><guid>29944</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:02:52 am</pubDate></item><item><title> रेलवे बोर्ड का निर्देश: 1,228 फाटकों पर स्वचालित इंटरलॉकिंग प्रणाली लगाने की प्रक्रिया तेज होगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29943</link><description>नयी दिल्ली। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को निर्देश दिया है कि 1,228 फाटकों पर स्वचालित 'क्लोजर' प्रणाली लगाने के कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि जब तक सड़क यातायात के लिए गेट पूरी तरह बंद न हो, तब तक किसी ट्रेन को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं मिल सके। यह स्वचालित प्रणाली समपार फाटकों के 'इंटरलॉकिंग' का हिस्सा है। इसके तहत ट्रेन के आने पर समपार फाटक सड़क यातायात के लिए स्वत: बंद हो जाता है या यदि गेट खुला रह जाए तो ट्रेन को ठहरने का सिग्नल दिया जाता है। यह कदम आठ जुलाई 2025 को तमिलनाडु के कुड्डालोर में एक यात्री ट्रेन और स्कूल वैन की टक्कर के बाद उठाया गया, जिसमें कथित रूप से गेटकीपर की लापरवाही के कारण तीन स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च यातायात घनत्व वाले समपार फाटकों पर 'इंटरलॉकिंग' प्रणाली लगाने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों के अनुसार रेलवे बोर्ड ने 16 जोन में उच्च यातायात घनत्व वाले 1,228 समपार फाटकों की पहचान कर वहां 'इंटरलॉकिंग' प्रणाली लगाने के निर्देश दिए हैं। हालिया निर्देश में बोर्ड ने सभी जोन से कार्य में तेजी लाने और कार्यान्वयन जल्द पूरा करने को कहा है।</description><guid>29943</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:01:54 am</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने मोदी को प. एशिया संकट के बारे में जानकारी दी; गोर बोले- जल्द बडे़ सौदों की उम्मीद</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29942</link><description>नयी दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन करके पश्चिम एशिया संकट के बारे में जानकारी दी और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला एवं सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बीच, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में जल्द कुछ बड़े सौदों पर दस्तखत करने की उम्मीद है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा। ट्रंप के साथ फोन पर हुई लगभग 40 मिनट की बातचीत के बाद मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने और अमेरिकी राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष सभी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ट्रंप और मोदी के बीच फोन पर यह बातचीत ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच हुई है। ऐसी खबरें हैं कि इस्लामाबाद में पहले दौर की शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद वाशिंगटन और तेहरान दूसरे दौर की सीधी बातचीत कर सकते हैं। ट्रंप-मोदी की बातचीत के बाद अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच आने वाले दिनों में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुछ बड़े सौदे होने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने इन सौदों के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। यह ट्रंप और मोदी के बीच इस साल फोन पर हुई तीसरी बातचीत थी। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हाल में हुई शांति वार्ता के बाद यह दोनों नेताओं की पहली बातचीत है। 
ट्रंप और मोदी ने दो फरवरी को एक व्यापार समझौते में हुई प्रगति की घोषणा करने और 24 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करने के लिए फोन पर बातचीत की थी। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, मुझे मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया था। हमने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति का जायजा लिया। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने लिखा, हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला एवं सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया। गोर के मुताबिक, बातचीत के अंत में ट्रंप ने मोदी से कहा, मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सब आपसे प्यार करते हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा, कुछ बड़े सौदे हैं, जिनकी घोषणा अगले कुछ दिनों या हफ्तों में की जाएगी। हमारे रिश्ते मजबूत स्थिति में हैं ...कुछ बहुत ही दिलचस्प और रोमांचक होगा। 
सूत्रों के अनुसार, भारत में ऊर्जा क्षेत्र की कुछ सरकारी कंपनियां आने वाले दिनों में अमेरिकी कंपनियों के साथ साझेदारी की घोषणा कर सकती हैं। मोदी-ट्रंप के बीच पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा को लेकर गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोदी को क्षेत्र की समग्र स्थिति से वाकिफ कराना चाहते थे। उन्होंने कहा, आपके पास एक ऐसा राष्ट्र है, जिसने पूरी दुनिया को बंधक बना रखा है। ये अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हैं। यहां अंतरराष्ट्रीय संधियां हैं। गोर ने यह टिप्पणी ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को अवरुद्ध किए जाने के मद्देनजर की, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है। अमेरिकी राजदूत ने कहा, तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि का केवल एक ही कारण है और वह यह है कि कोई (ईरान) इस क्षेत्र को बंधक बनाए हुए है। उन्होंने कहा, तो जाहिर है कि अमेरिका इस जलमार्ग को खोलना चाहता है और इसलिए मुझे लगता है कि इससे भारत सहित पूरी दुनिया को फायदा होगा। गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी पर भी चर्चा की। उन्होंने इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच नयी बातचीत की संभावनाओं से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, भविष्य में होने वाली किसी भी वार्ता की घोषणा करना मेरा काम नहीं है। उन्होंने नाकेबंदी और इसे (होर्मुज जलडमरूमध्य) जल्द से जल्द फिर से खोलने के महत्व पर चर्चा की। सच कहूं तो, इस वजह से पूरा क्षेत्र, पूरी दुनिया पीड़ित है। उन्होंने कहा, एक देश को दुनिया के किसी भी हिस्से की बत्तियां बुझाने का अधिकार क्यों होना चाहिए? यह अन्यायपूर्ण है। इसे रोकना होगा और अमेरिका इसे सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। ट्रंप और मोदी के बीच फोन पर बातचीत विदेश सचिव विक्रम मिसरी के वाशिंगटन की अपनी तीन-दिवसीय यात्रा संपन्न करने के दो दिन बाद हुई है। दोनों देश अनिश्चितता और तनाव के लंबे दौर के बाद अपने संबंधों को स्थिर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। ट्रंप के रूसी कच्चे तेल की खरीद के विरोध में भारतीय वस्तुओं के आयात पर भारी 'टैरिफ' लगाने और पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष रुकवाने में वाशिंगटन की भूमिका को लेकर विवादित दावे करने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले महीने भारत की यात्रा पर आएंगे। इस दौरान वह विदेश मंत्री एस जयशंकर और सरकार के अन्य पदाधिकारियों के साथ व्यापक वार्ता करेंगे।</description><guid>29942</guid><pubDate>14-Apr-2026 12:59:21 am</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री ने सक्ती ज़िले में विद्युत संयंत्र  दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29941</link><description>-प्रत्येक मृतक के परिजन को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणाकी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में विद्युत संयंत्र में दुखद दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री ने उन लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खो दिया है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है।
श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के निकट परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'X' (ट्विटर) पर पोस्ट किया:
छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में विद्युत संयंत्र में दुर्घटना दुखद है। मैं उन लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। ईश्वर करे कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है।
पीएमएनआरएफ से प्रत्येक मृतक के निकट परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे: PM @narendramodi</description><guid>29941</guid><pubDate>14-Apr-2026 10:12:06 pm</pubDate></item><item><title>बारातियों से भरी बस और ट्रक की भीषण टक्कर : छह लोगों की मौत, सात घायल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29940</link><description>हापुड़ (उप्र). हापुड़ जिले के धौलाना क्षेत्र में सोमवार तड़के बारातियों से भरी एक बस और ट्रक के बीच हुई भीषण टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई तथा सात अन्य जख्मी हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि गाजियाबाद के डासना निवासी यूनुस कुरैशी के बेटे की बारात बुलंदशहर के गुलावटी से 12-13 अप्रैल की रात लौट रही थी, तभी तड़के करीब तीन बजे धौलाना-गुलावटी मार्ग पर सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। उन्होंने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि बस पलट गई और उसका अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सूत्रों ने बताया कि स्थानीय लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर घायलों को बस से बाहर निकाला लेकिन तब तक उनमें से दूल्हे के पिता यूनुस तथा पांच अन्य लोगों मुन्ना, यूसुफ, अख्तर, सोनू और बस चालक अशोक की मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि इस हादसे में सात अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं जिन्हें हापुड़ के मेडिकल कॉलेज और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। 
पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानन्जय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और रात के समय कम दृश्यता को माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं।</description><guid>29940</guid><pubDate>13-Apr-2026 12:46:31 am</pubDate></item><item><title> मोदी के संकल्प ने महिला आरक्षण कानून को हकीकत में बदला : अन्नपूर्णा देवी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29939</link><description>नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने सोमवार को कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' महिलाओं के सशक्तीकरण और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी के लिए एक ''महान लोकतांत्रिक उपलब्धि'' और एक ''क्रांतिकारी बदलाव'' है। देवी ने यहां 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कहा, ''आज का कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण के एक नये और प्रेरणादायी अध्याय का उत्सव है। यह ऐसा पवित्र क्षण है, जब संकल्प, समर्पण और सफलता हमारे सामने एक साथ खड़े हैं।'' इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर और केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर समेत कई लोग मौजूद थे। देवी ने कहा कि यह कानून ''हमारी मातृशक्ति के वर्षों के संघर्ष और धैर्य से उपजी लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि'' है और ''ऐसा क्रांतिकारी बदलाव है, जो महिलाओं की क्षमता, स्वाभिमान और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करता है।'' देवी ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को देते हुए कहा कि पिछले तीन दशक में कई प्रयासों के बावजूद लंबित रहे इस सुधार को उनके ''दृढ़ संकल्प'' ने हकीकत में बदला। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं ''विकास की ध्वजवाहक'' बन रही हैं और वैश्विक स्तर पर नयी पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा, ''यह कानून इस बदलाव की संवैधानिक घोषणा है। इस फैसले को और खास यह बात बनाती है कि पिछले तीन दशक में कई प्रयास हुए, लेकिन आपके (प्रधानमंत्री मोदी के) दृढ़ संकल्प ने ही इस बदलाव को हकीकत में बदला है।'' अन्नपूर्णा देवी ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी कल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों ने महिलाओं को लाभार्थियों से नेताओं में और निर्भर से आत्मनिर्भर में बदला। उन्होंने कहा, ''एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी, दुनिया में सबसे ज्यादा महिला पायलट और पंचायतों में लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि- बदलते भारत की गौरवपूर्ण तस्वीर पेश करती हैं।'' उन्होंने कहा कि यह कानून नीति निर्माण में महिलाओं की आवाज को शामिल करने में मदद करेगा, जिससे शासन अधिक समावेशी और संवेदनशील बनेगा। मंत्री ने कहा, ''पंचायत स्तर से शुरू हुआ महिला नेतृत्व अब विधानसभाओं और संसद तक पहुंचेगा, जिससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक जीवंत, न्यायपूर्ण और सशक्त बनेगा।'' संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन पेश किए जाएंगे, ताकि इसे 2029 में लागू किया जा सके।</description><guid>29939</guid><pubDate>13-Apr-2026 12:44:28 am</pubDate></item><item><title>जेल में बंद माओवादी नेता सव्यसाची पांडा ने समाजशास्त्र में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29938</link><description>ब्रह्मपुर (ओडिशा) . ओडिशा की ब्रह्मपुर जेल में बंद माओवादी नेता सव्यसाची पांडा ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि पांडा ने पिछले साल जून में पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने दिसंबर-जनवरी में जेल के भीतर बनाए गए विशेष केंद्र से द्वितीय वर्ष की परीक्षा दी। हाल ही में इग्नू द्वारा जारी परिणामों में पांडा को पास घोषित किया गया है। एक जेल अधिकारी ने बताया कि पांडा के साथ एक अन्य दोषी ने भी द्वितीय वर्ष की परीक्षा दी थी। जहां पांडा ने सभी विषयों में सफलता हासिल की, वहीं दूसरा कैदी चार में से तीन पेपर ही पास कर सका। माओवादी नेता ने पिछले साल ओडिशा राज्य मुक्त विश्वविद्यालय (ओएसओयू) के तहत एम ए (लोक प्रशासन) में भी दाखिला लिया था। अधिकारी ने बताया कि उसने प्रथम वर्ष के कुछ पेपर पास कर लिए हैं और इस बार वह प्रथम वर्ष के बकाया पेपर के साथ द्वितीय वर्ष की परीक्षा देगा। जेल में रहते हुए ही पांडा ने दिसंबर 2022 में इग्नू से पत्राचार के माध्यम से स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। अधिकारी के अनुसार, पांडा विभिन्न जिलों में माओवादियों से जुड़े 130 से अधिक मामलों में कथित तौर पर शामिल था। उसे 18 जुलाई 2014 को ब्रह्मपुर के बड़ा बाजार इलाके के एक घर से पुलिस दल ने गिरफ्तार किया था। तब से वह ब्रह्मपुर सर्कल जेल में बंद है। उन्होंने बताया कि हालांकि उसे कई मामलों में बरी कर दिया गया है, लेकिन एक स्थानीय अदालत ने उसे देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डी एन बारिक ने कहा कि पांडा ने जेल में उच्च शिक्षा के प्रति रुचि दिखाई और दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद एम ए में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि इग्नू और ओएसओयू ने सर्कल जेल में अपने केंद्र खोले हैं, जिससे पांडा और अन्य कैदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिली है। नामांकन के बाद कैदियों ने स्व-अध्ययन के जरिए परीक्षा की तैयारी की, जबकि जेल प्रशासन ने उन्हें जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए। जेल शिक्षक सनातन खिल्लर ने बताया कि कुल 92 कैदियों ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के तहत कक्षा 10 (38 छात्र) और कक्षा 12 (58 छात्र) की परीक्षाओं के लिए नामांकन कराया है।</description><guid>29938</guid><pubDate>13-Apr-2026 12:37:28 am</pubDate></item><item><title>महिला नेतृत्व से सिस्टम बनता है संवेदनशील : नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29937</link><description>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, तब सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर इसे सर्वसम्मति से पारित किया था। उस समय एक सुर में यह भी मांग उठी थी कि इस कानून को हर हाल में 2029 तक लागू किया जाए।
पीएम मोदी ने कहा कि इस बार भी सरकार की प्राथमिकता यही है कि सभी जरूरी फैसले संवाद, सहयोग और सहभागिता के जरिए लिए जाएं। उन्हें विश्वास है कि जिस तरह पहले इस अधिनियम ने संसद की गरिमा बढ़ाई थी, उसी तरह इस बार भी सामूहिक प्रयास से संसद नई ऊंचाइयों को छुएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री जैसे अहम पद महिलाओं के पास हैं और वे इन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। इससे देश का गौरव लगातार बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को भी एक बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि आज देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। करीब 21 राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि लाखों महिलाओं की यह सक्रियता दुनियाभर के बड़े नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी हैरान करती है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो सिस्टम अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनता है। जल जीवन मिशन की सफलता इसका एक उदाहरण है, जहां पंचायत स्तर पर महिलाओं की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने 2014 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय करोड़ों महिलाएं ऐसी थीं, जिन्होंने कभी बैंक का दरवाजा तक नहीं देखा था। बैंकिंग से जुड़ाव न होने के कारण उन्हें उसका लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन जनधन योजना के जरिए महिलाओं के 32 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
प्रधानमंत्री ने बताया कि आज देश की बेटियां नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं। मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल लोन में से 60 प्रतिशत से अधिक लोन महिलाओं ने लिए हैं। वहीं, देश के स्टार्टअप रिवोल्यूशन में भी महिलाएं आगे हैं। वर्तमान में 42 प्रतिशत से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है।
महिलाओं के करियर को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मैटरनिटी लीव को बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई समृद्ध देशों में भी इतनी लंबी छुट्टी की सुविधा नहीं है, और जब वे इसके बारे में बताते हैं तो लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई गईं।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं। जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास लगातार जारी है। स्किल इंडिया मिशन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ साल पहले शुरू किए गए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का असर अब दिखने लगा है। ड्रोन दीदी जैसी पहल के जरिए महिलाएं कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि शासन में आने के बाद उन्होंने बैंकों में गरीबों की अमीरी और अमीरों की गरीबी दोनों देखी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश की माताएं और बहनें वोकल फॉर लोकल अभियान की ब्रांड एंबेसडर बन रही हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास का विजन न केवल महिलाओं को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि समाज की पुरानी सोच को भी चुनौती दे रहा है। आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पहले ज्यादातर संपत्तियां पुरुषों के नाम पर होती थीं। इस स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों को महिलाओं के नाम पर रजिस्टर करने की पहल की गई।</description><guid>29937</guid><pubDate>13-Apr-2026 9:46:42 pm</pubDate></item><item><title>महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने का समय आ गया है: प्रधानमंत्री मोदी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29936</link><description>नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने का समय आ गया है और 2029 के लोकसभा चुनाव एवं विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे एकजुट होकर महिला आरक्षण कानून में संशोधन पारित करें। संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले लोकसभा और राज्यसभा के सदन के नेताओं को लिखे पत्र में मोदी ने यह भी कहा कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाओं को प्रगति करने, निर्णय लेने और सबसे महत्वपूर्ण बात, नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि महिलाएं इस यात्रा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा, ''विस्तृत विचार-विमर्श के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश भर में उसके सच्चे स्वरूप में लागू करने का समय आ गया है।'' प्रधानमंत्री ने 11 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में कहा, ''यह अनिवार्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाएं।'' मोदी ने कहा कि 2029 में महिला आरक्षण अधिनियम के लागू होने से भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में नयी ऊर्जा का संचार होगा और जनता का विश्वास मजबूत होगा, साथ ही शासन में अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा, ''मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूं ताकि हम सभी एक साथ मिलकर इस संशोधन को पारित करने के लिए एकजुट हो सकें।'' नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
संसद के बजट सत्र की अवधि बढ़ा दी गई है और सदन का एक विशेष तीन दिवसीय सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है। महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के पारित हो जाने से लोकसभा में सीट की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान में संशोधन करके लाया गया था। हालांकि महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो पाता।
इसका मतलब यह था कि यदि वर्तमान कानून यथावत रहता है तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता।
इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी; इसलिए सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह यह पत्र इसलिए लिख रहे हैं ताकि सभी दल 16 अप्रैल से संसद में होने वाली ''ऐतिहासिक चर्चा'' के दौरान इस संशोधन को पारित करने के लिए एकमत होकर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा, ''यह विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को और मजबूत करने का अवसर है। यह एक ऐसा क्षण भी है जब हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहरा सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ''मैं इसी भावना और उद्देश्य के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूं।'' मोदी ने आज कहा कि सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सभी के सामने है। उन्होंने कहा, ''अंतरिक्ष से लेकर खेल तक, सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्टअप तक, भारत की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रही हैं। अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से वे अपनी क्षमताओं को साबित कर रही हैं।'' मोदी ने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा दशकों से चर्चा में है और 2023 में सभी दलों के सांसद संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करने के लिए एकजुट हुए थे। उन्होंने कहा, ''यह एक यादगार क्षण था जिसने हमारी एकता को दर्शाया। पूरी दुनिया ने देखा कि देश की महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए सामूहिक रूप से एक महत्वपूर्ण निर्णय कैसे लिया गया।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और यह राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा, ''मैं उस दिन को भारत की संसदीय यात्रा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक मील का पत्थर मानता हूं। कई सांसदों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई चर्चा में योगदान दिया।'' मोदी ने कहा कि उन विचार-विमर्शों के दौरान इसके कार्यान्वयन के समय पर भी चर्चा हुई और इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि इस ऐतिहासिक कानून के प्रावधान जल्द से जल्द प्रभावी होने चाहिए। उन्होंने कहा, ''कई दलों के नेताओं का यही मत था। हाल में हमने इस विषय पर विशेषज्ञों से परामर्श किया है। हमने संवैधानिक मामलों के जानकारों से सुझाव और मार्गदर्शन मांगा है। हमने राजनीतिक दलों के साथ भी संवाद किया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बहुत अच्छा होगा यदि कई सांसद संसद में इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करें और यह क्षण किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है। उन्होंने कहा, ''यह महिलाओं और हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी प्रदर्शित करने का क्षण है। चूंकि सभी राजनीतिक दलों ने लंबे समय से राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है, इसलिए अब उस आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने का सही समय है।'' मोदी ने कहा कि यह देश की नारी शक्ति और 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर संसद में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने में योगदान देने वाले सांसद इस ऐतिहासिक प्रयास का हिस्सा होने पर हमेशा गर्व महसूस करेंगे। उन्होंने कहा, ''इसलिए, हमें इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए संशोधन को लेकर आपके समर्थन से हमारे देश की महिलाओं के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन होगा।'' उन्होंने कहा, ''आइए हम अपनी महान लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूत करें और एक ऐतिहासिक परिवर्तन की दिशा में निर्णायक कदम उठाएं।</description><guid>29936</guid><pubDate>12-Apr-2026 12:10:41 am</pubDate></item><item><title>तृणमूल ने टुकड़े-टुकड़े गिरोह का समर्थन किया : प्रधानमंत्री </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29935</link><description>सिलीगुड़ी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आरोप लगाया कि ''टुकड़े-टुकड़े'' गिरोह ने पूर्वोत्तर को देश के शेष भाग से अलग करने के लिए रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर को काटने की धमकी दी थी, और तृणमूल कांग्रेस ने अपनी ''तुष्टिकरण की राजनीति'' के कारण सड़कों से लेकर संसद तक उन्हें समर्थन दिया। पश्चिम बंगाल के उत्तरी शहर सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने तृणमूल कांग्रेस को ''आदिवासी विरोधी, महिला विरोधी और युवा विरोधी पार्टी बताया, जिसकी तुष्टिकरण की राजनीति ने राज्य को बदहाल कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया, ''देश में 'टुकड़े-टुकड़े' गिरोह सक्रिय है, जिसने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को काटने की धमकी दी। वे पूर्वोत्तर को देश से अलग करना चाहते हैं। तुष्टिकरण की राजनीति में लिप्त तृणमूल कांग्रेस, सड़कों से लेकर संसद तक ऐसे लोगों का समर्थन करती है। यही तृणमूल का असली चेहरा है।'' इसे देश का रक्षा और समृद्धि का गलियारा बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर मजबूत और विकसित करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है। उन्होंने सिक्किम को सिलीगुड़ी से जोड़ने वाली निर्माणाधीन सेवोकरंगपो रेल लाइन का उदाहरण देते हुए इस विकास कार्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''यह परियोजना न केवल बंगाल और सिक्किम के बीच रेल संपर्क सुनिश्चित करेगी, बल्कि यह क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को भी मजबूत करेगी, जिसका सीधा लाभ दार्जिलिंग के युवाओं को मिलेगा।'' मोदी ने लोगों से 'डबल इंजन' सरकार के लिए वोट देने का आग्रह करते हुए कहा कि बंगाल में विकास की गति दोगुनी हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल सरकार ने मदरसों के विकास के लिए 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन पूरे उत्तर बंगाल के लिए अपर्याप्त धनराशि आवंटित की गई। मोदी ने कहा, ''बंगाल की जनता अब तृणमूल से पिछले 15 वर्षों में सत्ता में बिताए हर पल का जवाब मांग रही है।'' उन्होंने कहा कि जब भाजपा सत्ता में आएगी, तो वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को ''उसके कुकर्मों का हिसाब चुकाने'' के लिए मजबूर करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल ने अपने 15 साल के कार्यकाल में राज्य को बर्बाद कर दिया और केंद्र सरकार की योजनाओं का कार्यान्वयन रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप 25 प्रतिशत से भी कम काम पूरा हुआ है। ममता बनर्जी सरकार को निर्मम बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता तृणमूल के भय के शासन से तंग आ चुकी है। उन्होंने तृणमूल सरकार पर उत्तर बंगाल के चाय बागानों पर कहर बरपाने ​​का आरोप लगाया। तृणमूल को ''उत्तर बंगाल विरोधी और चाय बागान विरोधी पार्टी'' बताते हुए, मोदी ने आरोप लगाया कि पार्टी की तुष्टिकरण नीतियों के कारण हो रहे अनियंत्रित अवैध प्रवेश से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहे हैं। उन्होंने भाजपा के चुनाव चिह्न का जिक्र करते हुए कहा, अगर घुसपैठ के खतरे को तुरंत नहीं रोका गया, तो बहुत देर हो जाएगी। 'कमल खिलाओ, घुसपैठियों को भगाओ।'' मोदी ने कहा कि बंगाल की जनता में दिख रहे जोश ने उन्हें आश्वस्त कर दिया है कि आगामी चुनावों में तृणमूल की हार निश्चित है। राज्य में दो चरण में मतदान होगा। सिलीगुड़ी में पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा। दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को होगी। </description><guid>29935</guid><pubDate>12-Apr-2026 12:08:04 am</pubDate></item><item><title>आशा भोसले का निधन पर मुख्यमंत्रियों समेत अन्य नेताओं ने जताया शोक </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/national.php?articleid=29934</link><description>नयी दिल्ली. प्रख्यात गायिका आशा भोसले के निधन पर रविवार को विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, राजनीतिक नेताओं समेत कई लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''संगीत का वह सुनहरा सुर, जिसने पीढ़ियों को जोड़ा और भावनाओं को धुन में पिरोया, आज खामोश हो गया है।'' गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ''प्रसिद्ध गायिका 'सुर सम्राज्ञी' आशा भोसले जी का निधन अत्यंत दुखद है। अपनी ऊर्जावान और बहुमुखी गायकी से उन्होंने संगीत जगत को समृद्ध किया और अनगिनत अमर गीतों के माध्यम से पीढ़ियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।'' उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ''यह सिर्फ एक आवाज नहीं थी... यह एक युग था। हर गीत भावनाओं से भरा था, हर सुर जादू से ओतप्रोत था। आशा भोसले जी ने सिर्फ गीत नहीं गाये, बल्कि उसे जिया।'' केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने लिखा, ''संगीत जगत की मधुरता की महारानी, ​​पूजनीय आशा भोसले जी के निधन की खबर अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।'' छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को कहा कि दिग्गज गायिका आशा भोसले की मधुर और विशिष्ट आवाज ने दशकों तक भारतीय संगीत को समृद्ध किया तथा करोड़ों लोगों के दिलों में उन्हें एक अमिट स्थान दिलाया। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दिग्गज गायिका आशा भोसले जी के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। उनकी आवाज ने भारतीय संगीत के युगों को परिभाषित किया और अनगिनत लोगों के जीवन को छुआ। उनके सदाबहार गीतों के माध्यम से उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।'' केरल में कांग्रेस नेता वी. डी. सतीशन और भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख राजीव चंद्रशेखर भोसले के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारत की सबसे बहुमुखी और चिरस्थायी संगीत हस्तियों में से एक बताया। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''भारत आशा भोसले जी के निधन पर शोक व्यक्त करता है। उनकी आवाज ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को अतुलनीय रूप से समृद्ध किया। उनके गीत अमर रहेंगे। मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।'' कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, भारतीय फिल्म उद्योग की प्रख्यात पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। संगीत जगत को उस मधुर गायिका के खोने से अपार क्षति पहुंची है।'' पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''प्रसिद्ध गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले जी के निधन की खबर बेहद दुखद है। उनके देहांत से संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है।'' कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया, पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने भी शोक व्यक्त किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पोस्ट किया कि भारतीय संगीत जगत की एक प्रख्यात हस्ती - 'मधुरता की कोकिला' और पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले जी का निधन बेहद दुखद है। कांग्रेस नेता व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पार्टी की महासचिव एवं सिरसा से सांसद कुमारी शैलजा ने भी उनके निधन पर दुख जताया। तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा, ''उनकी धुनें हमारे राष्ट्र के ताने-बाने में बुनी हुई हैं और उनकी विरासत लाखों लोगों के दिलों में हमेशा गूंजती रहेगी।'' तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनका निधन देश के सांस्कृतिक और कलात्मक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी पोस्ट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान में कहा, आने वाली पीढ़ियां आशा भोसले को भारतीय संस्कृति की एक ऐसी हस्ती के रूप में याद रखेंगी, जिनमें अपनी मधुर आवाज से लोगों को मंत्रमुग्ध करने की अनूठी क्षमता थी।'' बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा तथा राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रख्यात गायिका के निधन पर दुख व्यक्त किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मैं आशा दीदी से कहना चाहता था...'अभी ना जाओ छोड़कर'...लेकिन आज उनकी आवाज खामोश हो गई है।</description><guid>29934</guid><pubDate>12-Apr-2026 12:06:45 am</pubDate></item></channel></rss>