<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>विदेश - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से फोन पर की बात, कहा- आप पूरी दुनिया के नायक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3662</link><description>दुबई. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की और 'फ्लाईदुबई' के विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की सह-पायलट की साजिश को नाकाम करने के लिए उन्हें पूरी दुनिया का 'नायक' बताया। कैप्टन मच्छार पर बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उस समय विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक अस्पताल में उपचार करा रहे 38 वर्षीय पायलट से बात करके उनका हालचाल जाना। 'लाउडस्पीकर मोड' पर की गई इस कॉल की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा की गई। उन्होंने बातचीत के दौरान मच्छार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। कैप्टन मच्छार से बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कहा, ''यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है, जो हम अपने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदान करते हैं। आमतौर पर यह केवल इजराइल के नागरिकों के लिए है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजराइल का हर नागरिक आपका सम्मान करेगा। हम उम्मीद करते हैं कि आप जल्द ही इजराइल आएंगे।'' इजराइल के स्वतंत्रता दिवस को 'योम हाअत्जमाउत' कहा जाता है और यह हिब्रू कैलेंडर के इयार महीने की पांचवीं तारीख को मनाया जाता है, जो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में पड़ती है। शनिवार को इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आप इजराइल, भारत और पूरी दुनिया के नायक हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं आपको (मच्छार) इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित करता हूं।'' पोस्ट में कहा गया, ''आज शाम हुई इस भावुक बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि यह सब कैसे शुरू हुआ। इस पर मच्छार ने कॉकपिट के उन भयावह पलों के बारे में कई नयी जानकारियां साझा कीं।'' मच्छार ने उन्हें बताया कि हमले से पहले सह-पायलट इबादत करना चाहता था। उन्होंने कहा, ''जब वह इबादत कर रहा था, तो सम्मान के कारण मैं आगे की ओर देख रहा था और पीछे की तरफ नहीं देख रहा था। अचानक, करीब चार-पांच मिनट बाद, मेरे सिर के पीछे जोरदार वार हुआ।'' भारतीय पायलट ने कहा, ''मेरे मन में पहला ख्याल यह आया कि विमान को भारी नुकसान हुआ है और कुछ ठीक नहीं है। लेकिन इसके बाद एक के बाद एक वार होते रहे और तभी मुझे एहसास हुआ कि यह विमान की समस्या नहीं है, बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद दूसरा व्यक्ति है।'' उन्होंने कहा, ''मैंने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती वार के कारण मेरी आंखों के आगे लगभग अंधेरा छा गया था और मुझे सबकुछ धुंधला दिखाई दे रहा था।'' मच्छार ने बताया कि इसके बाद उन्हें अहसास हुआ कि विमान ''तेजी से नीचे की ओर जा रहा है''। उन्होंने कहा कि इस हादसे की केवल ''धुंधली सी यादें'' ही उनके पास बची हैं। उन्होंने कहा कि वह एक बार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, लेकिन सह-पायलट ने उसे फिर से बंद कर दिया, जिससे वह कॉकपिट के फर्श पर पड़े रहे और उन्हें विमान तथा ''लोगों के चीखने'' की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कैप्टन ने कहा, ''मुझमें खुद के लिए और यात्रियों की जान बचाने के लिए एक अंतिम प्रयास करने की ताकत बाकी थी। मैंने मन बना लिया था कि अगर मैंने अभी कदम नहीं उठाया, तो मेरा बचना असंभव है।'' मच्छार ने कहा, ''और उसी पल मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। जान की बाजी लगाकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा और उसे धक्का देकर खोल दिया। गनीमत थी कि बाहर लोग बिल्कुल तैयार थे; (उन्होंने) फौरन मोर्चा संभाल लिया और आगे की कहानी तो आपको मालूम ही है।'' नेतन्याहू ने उनसे कहा कि वह उनके साहस और ''असंभव परिस्थितियों में भी निर्णय लेने की सूझबूझ'' से ''हैरान'' हैं। उन्होंने मच्छार से कहा, ''आपने इतने लोगों की जान बचाई। मुझे लगता है कि आपने इससे भी बड़ी चीज बचाई है। आपने दुनिया की भावना को बचाया... दुनिया भर में उचित रूप से आपकी प्रशंसा की जा रही है। आप इजराइल के नायक हैं। आप भारत के नायक हैं। आप पूरी दुनिया के नायक हैं।'' नेतन्याहू ने कहा, ''आप जानते हैं, मेरा मानना है कि यह किस्मत का खेल और आस्था का भी एक मोड़ है, तथा आपने जो किया वह असाधारण है। मैंने निश्चित रूप से इजराइली यात्रियों से सुना कि उसके बाद क्या हुआ और आप एक महान नायक हैं। आपके साथ भी नायक थे और आपने उस दिन सबको बचा लिया।'' कई समाचार संस्थानों, जिनमें 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' और सीएनएन शामिल हैं, की खबरों के अनुसार, ओमान के नागरिक हमाम अल-हम्मामी की पहचान फ्लाईदुबई के उस सह-पायलट के रूप में हुई है, जिसने मच्छार पर हमला किया और उड़ान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का प्रयास किया। खबरों में मामले से परिचित लोगों के हवाले से कहा गया है कि कट्टरपंथी विचारों को लेकर चिंता के कारण अल-हम्मामी को पहले ओमान में विमान उड़ाने से प्रतिबंधित किया गया था। उसने कॉकपिट में आम तौर पर आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए रखी जाने वाली कुल्हाड़ी से मच्छार पर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इस उड़ान में 174 यात्री सवार थे। विमान ने आपातकालीन संकेत भेजे और 34,000 फुट की ऊंचाई से 17,000 फुट से अधिक नीचे की ओर लुढ़क गया। कैप्टन मच्छार कॉकपिट के फर्श पर घायल अवस्था में पड़े थे। उन्हें जब विमान के नीचे जाने का एहसास हुआ तो उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों को हमलावर पर काबू पाने में मदद मिली। दो रिजर्व पायलटों ने विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। वहां अल-हम्मामी को हिरासत में ले लिया गया, जबकि मच्छार को पास के अस्पताल ले जाया गया और बाद में एयर एंबुलेंस से अबू धाबी पहुंचाया गया। जांच की अगुवाई कर रहे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शनिवार को कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि सह-पायलट ने ''आतंकवादी कृत्य'' को अंजाम देने का प्रयास किया था। शुक्रवार को मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वीडियो कॉल पर बात की और हमले के बाद के भयावह क्षणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन दूसरों को भी नहीं मरने देने के लिए दृढ़ थे। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा कि मच्छार की हालत स्थिर है और वह ''अच्छी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।'' दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने शनिवार को अस्पताल में मच्छार से मुलाकात की और उनके साहस तथा जिम्मेदारी की भावना की सराहना की। यूएई के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री हमदान ने कहा कि फ्लाईदुबई के पायलट ने ''साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति चिंता की सर्वोच्च भावना'' का परिचय दिया। नेतन्याहू ने इससे पहले उन चार इजराइली यात्रियों से मुलाकात की थी, जिन्होंने हमलावर पर काबू पाने में मदद की थी। उन्होंने विमान को बचाने के लिए हुए संघर्ष के बारे में यात्रियों से जानकारी ली। यात्रियों ने बताया कि हमलावर को काबू में करने के बाद उन्होंने हेडफोन की केबल से सह-पायलट को बांध दिया था। इजराइल के प्रधानमंत्री ने उनके ''असाधारण साहस, सूझबूझ और दृढ़ विश्वास'' की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक बड़ी त्रासदी को टालने और कई लोगों की जान बचाने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर ये यात्री नागरिक वीरता की मशाल जलाएंगे। नेतन्याहू ने बुधवार शाम सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि घायल पायलट, यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों ने ''9/11 जैसी त्रासदी को होने से रोकने में सफलता हासिल की।'' इजराइली प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि उड़ान में काबू किए जाने के बाद हमलावर चिल्ला रहा था, ''मुझे मारो, मुझे मारो!'' उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि हमलावर आत्मघाती था और ऐसा प्रतीत होता है कि उसका इरादा विमान को गिराने का था। उन्होंने यह भी कहा कि हमलावर ''इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित'' था। इस बीच, मीडिया में आई खबरों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और इजराइल के अधिकारी ओमानी सह-पायलट के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों और उसके फ्लाईदुबई की तेल अवीव जाने वाली उड़ान के चालक दल का हिस्सा बनने की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। वहीं, यूएई के नेतृत्व में जारी जांच में उसके मकसद और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।</description><guid>3662</guid><pubDate>04-Oct-2026 12:15:30 am</pubDate></item><item><title>कई देश फ्लाईदुबई के सह-पायलट की पृष्ठभूमि की कर रहे जांच</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3661</link><description>दुबई. ऑस्ट्रेलिया और इजराइल के अधिकारी ओमान के सह-पायलट के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों और इस बात की जांच कर रहे हैं कि वह तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान के चालक दल का हिस्सा कैसे बना। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नेतृत्व में जारी जांच में उसके इरादों और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। मीडिया की खबरों से यह जानकारी मिली। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की रविवार को प्रकाशित खबर के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने कहा है कि आतंकवाद रोधी टीम इस व्यक्ति के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने 'एबीसी' और 'बीबीसी' को बताया कि ऑस्ट्रेलिया की जांच विक्टोरिया संयुक्त आतंकवाद रोधी टीम कर रही है, जिसमें संघीय पुलिस, विक्टोरिया पुलिस और सुरक्षा खुफिया संगठन शामिल हैं। सूत्रों ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को बताया कि सह-पायलट को 2014 में छात्र वीजा जारी किया गया था और उसने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी। इसके बाद वह देश छोड़कर चला गया। 'एबीसी' की खबर के अनुसार, उसका वीजा 2019 में रद्द कर दिया गया था। हालांकि, वीजा रद्द किए जाने की वजह उसका आचरण नहीं था, बल्कि वह किसी पाठ्यक्रम में पंजीकृत नहीं था और इसलिए छात्र वीजा के लिए पात्र नहीं रह गया था। जांच का नेतृत्व कर रहे यूएई ने शनिवार को कहा कि उसकी जांच में सामने आया है कि सह-पायलट ने ''आतंकी कृत्य'' करने की कोशिश की। सरकारी समाचार एजेंसी 'डब्ल्यूएएम' के अनुसार, यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि सह-पायलट ने पायलट पर हमला करने के लिए विमान में मौजूद कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया और विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़ी पूरी परिस्थितियों, मकसद और किसी भी संभावित संबंध का पता लगाने के लिए जांच जारी है। कई मीडिया संस्थानों ने सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हमामी के रूप में की है, हालांकि आधिकारिक तौर पर उसकी पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की खबर के अनुसार, अल-हमामी को उसके कट्टरपंथी वैचारिक विचारों को लेकर चिंता के कारण पूर्व में ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था। बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के पीछे का मकसद अभी स्पष्ट नहीं है।</description><guid>3661</guid><pubDate>04-Oct-2026 12:11:37 am</pubDate></item><item><title>दुबई के शहजादे हमदान ने भारतीय पायलट मच्छार की सराहना की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3660</link><description>दुबई/दुबई के शहजादे हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मक्तूम ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार के 'साहस' की शनिवार को प्रशंसा की, जिन्होंने उड़ान के दौरान अपने सह-पायलट के हमले के बाद विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने के प्रयास को नाकाम कर दिया था। कैप्टन मच्छार पर बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में चाकू से हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमदान ने अस्पताल में मच्छार से मुलाकात की और इसकी तस्वीरें 'एक्स' पर साझा कीं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री हमदान ने कहा कि फ्लाईदुबई के पायलट ने ''साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति संवेदनशीलता की सर्वोच्च मिसाल पेश की।'' उन्होंने कहा, ''हम और देश का नेतृत्व उनकी सराहना करते हैं।''
हमदान ने कहा, ''हमें गर्व है कि वह हमारी टीम का हिस्सा हैं...हमारे देश की कहानी का हिस्सा हैं... और उन मूल्यों का हिस्सा हैं, जिनके लिए यूएई जाना जाता है... करुणा, शांति और जीवन को महत्व देने वाला देश।'' यूएई में भारतीय दूतावास ने इससे पूर्व कहा था कि मच्छार की हालत में सुधार हो रहा है और उनका इलाज जारी है। दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कैप्टन स्मित का बेहतरीन इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। हम उनके परिवार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हरसंभव सहयोग दे रहे हैं।'' दूतावास ने मच्छार को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यूएई की सरकार का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनकी सेहत में सुधार के लिए प्रार्थना कर रहा है। जांच का नेतृत्व कर रहे यूएई ने कहा कि सह-पायलट ने ''आतंकवादी कृत्य'' को अंजाम देने की कोशिश की।
सरकारी समाचार एजेंसी 'डब्ल्यूएएम' के अनुसार यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि सह-पायलट ने मच्छार पर हमला करने के लिए विमान में मौजूद कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया और विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की। खबरों के अनुसार, घायल होने के बावजूद मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सह-पायलट पर काबू पाने का मौका मिल गया।</description><guid>3660</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:42:39 am</pubDate></item><item><title>फ्लाईदुबई के विमान में सह-पायलट ने कॉकपिट में रखी कुल्हाड़ी से कैप्टन पर हमला किया था: यूएई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3659</link><description>काहिरा. संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार को बताया कि फ्लाईदुबई की उड़ान के सह-पायलट ने कॉकपिट में रखी कुल्हाड़ी (क्रैश एक्स) से विमान के कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया था। यूएई ने इस घटना को आतंकी हमला करार दिया।विमान में 182 यात्री सवार थे। यूएई के बयान में अटॉर्नी जनरल के हवाले से बताया गया कि सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने बुधवार को इजराइल जा रही उड़ान पर हमले के दौरान विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की भी कोशिश की। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हस्तक्षेप कर सह-पायलट को काबू में किया और विमान को स्थिर किया।</description><guid>3659</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:41:30 am</pubDate></item><item><title>फ्लाईदुबई का पायलट नायक, एक प्लंबर ने गिरते विमान को संभाला: ट्रंप</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3657</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लाईदुबई के पायलट को ''नायक'' बताते हुए उसकी सराहना की, जिसने सह-पायलट के चाकू से किए गए हमले का मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए आवाज लगाई, जिससे विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश नाकाम हो गई। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। ट्रंप के अनुसार नेतन्याहू ने उन्हें बताया कि एक 'प्लंबर', जिसने कभी विमान नहीं उड़ाया था, उसने दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। यह विमान बाद में सऊदी अरब में उतरा। विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश को नाकाम करने वाले पायलट की पहचान भारतीय नागरिक स्मित मच्छार के रूप में हुई है। नेतन्याहू समेत कई अन्य लोगों ने उन्हें ''नायक'' बताया है। ट्रंप ने नेतन्याहू से हुई बातचीत को याद करते हुए कहा, ''पायलट की हालत बहुत खराब थी और मेरा अनुमान है कि अब भी उसकी हालत बहुत खराब है, लेकिन उसने अद्भुत सूझबूझ दिखायी। एक तरह से वह नायक है।'' ट्रंप ने कहा कि पायलट ने पीछे की ओर गिरते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए चिल्लाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''ऐसा लगता है कि सह-पायलट शायद आतंकवादी था या शायद मानसिक रूप से अस्थिर था और उसने पायलट पर चाकू से हमला किया।'' इसके बाद ट्रंप ने एक इजराइली यात्री के ''अद्भुत'' हस्तक्षेप का जिक्र किया, जिसकी पहचान उन्होंने एक प्लंबर के रूप में की। ट्रंप ने कहा कि इस यात्री ने कभी विमान नहीं उड़ाया था, लेकिन वह कॉकपिट में गया, सह-पायलट को उसकी सीट से खींचकर बाहर निकाला और उसे पीछे की ओर धकेल दिया, जिसके बाद अन्य यात्रियों ने उसे काबू करने में मदद की। ट्रंप के अनुसार, उस यात्री ने बाद में बताया कि उसने टेलीविजन कार्यक्रम 'एयर डिजास्टर्स' देखकर विमान उड़ाने से जुड़ी कुछ बुनियादी बातें सीखी थीं। ट्रंप ने कहा, ''उसने बताया कि वह यह कार्यक्रम काफी देखता है और उसे देखकर उसने विमान उड़ाने के बारे में कुछ बातें सीखीं।'' ट्रंप ने कहा कि विमान के पिछले हिस्से में मौजूद अतिरिक्त पायलट और सुरक्षाकर्मी बाद में कॉकपिट तक पहुंचे और विमान का नियंत्रण संभाल लिया। उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि यह सबसे अद्भुत कहानी है।''

हालांकि, ट्रंप ने कहा कि वह केवल उन्हें मिली जानकारी बता रहे हैं और उन्होंने इन तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। उन्होंने कहा, ''अब, यह वो कहानी है जो मैंने सुनी है। मुझे नहीं पता कि यह सच है या नहीं, लेकिन मुझे यह कहानी बीबी (बेंजामिन नेतन्याहू) और संभवत: प्रारंभिक सूत्रों से मिली है।''</description><guid>3657</guid><pubDate>02-Oct-2026 3:08:42 pm</pubDate></item><item><title>फ्लाईदुबई के सह-पायलट के पीछे ईरान का हाथ होने का संकेत, ट्रंप ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3656</link><description>यरुशलम. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि फ्लाईदुबई विमान को कथित तौर पर गिराने की कोशिश करने वाले सह-पायलट का ईरान से संबंध हो सकता है। व्हाइट हाउस में बृहस्पतिवार को संवाददाताओं ने ट्रंप से पूछा कि क्या उन्हें हमले के पीछे रहे सह-पायलट और तेहरान के बीच किसी संबंध के बारे में जानकारी दी गई है।उन्होंने कहा, ''हम इस पर अभी काम कर रहे हैं।'' ट्रंप ने कहा, ''मैं जो सुन रहा हूं, उसके आधार पर कहूंगा कि जवाब हां है, लेकिन हम इस पर अभी काम कर रहे हैं।'' उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
यह पूछे जाने पर कि यदि हमले के पीछे ईरान का हाथ पाया गया तो क्या अमेरिका तेहरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा, ट्रंप ने कहा, ''हां, उन पर बहुत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चिंता मत कीजिए।'' उन्होंने कहा, ''आप उनसे ही पूछिए। वे जानते हैं कि क्या हुआ। उन पर बहुत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।''</description><guid>3656</guid><pubDate>02-Oct-2026 3:02:45 pm</pubDate></item><item><title>रुबियो ने नयी दिल्ली में अमेरिकी राजदूतों की बैठक को संबोधित किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3654</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दक्षिण और मध्य एशिया में पदस्थ अमेरिकी राजदूतों के एक सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर की मेजबानी में मंगलवार को नयी दिल्ली में राजदूतों का क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। रुबियो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज मैंने भारत में राजदूत सर्जियो गोर की मेजबानी में आयोजित हमारे राजदूतों के क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया।'' उन्होंने कहा कि कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में तैनात अमेरिकी राजदूतों तथा दूतावास प्रमुखों से बात करके उन्हें अच्छा लगा। रुबियो ने कहा, ''हमारे राजदूत गर्व के साथ अमेरिका को अधिक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहे हैं।'' रुबियो अक्टूबर के मध्य में 100 से अधिक अमेरिकी कंपनियों के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ उज्बेकिस्तान की यात्रा करने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य अमेरिका और मध्य एशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना तथा द्विपक्षीय कूटनीतिक और वाणिज्यिक सहयोग मजबूत करना है। अमेरिका पिछले एक दशक से उज्बेकिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। सोवियत संघ का हिस्सा रहा यह देश क्षेत्र में अमेरिका के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरा है। समरकंद यात्रा के दौरान रुबियो कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ 'सी5प्लस1' मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लेंगे।</description><guid>3654</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:30:13 am</pubDate></item><item><title>सीतारमण ने सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और अन्य देशों के मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3652</link><description>दोहा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) की सालाना बैठक के दौरान सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड, जॉर्डन और नेपाल के मंत्रियों के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठकें कीं। कतर की अपनी यात्रा के पहले दिन 28 सितंबर को सीतारमण ने सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द लागू किए जाने की उम्मीद कर रहा है। वित्त मंत्रालय ने कहा, ''दोनों मंत्रियों ने भारत-सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत के सफल समापन का स्वागत किया। यह द्विपक्षीय निवेश के लिए एक मजबूत और अधिक भरोसेमंद रूपरेखा प्रदान करेगी और निवेशकों का विश्वास को और मजबूत करेगी।'' वित्त मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी का भी उल्लेख किया। मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की। सऊदी अरब के मंत्री ने भारत से निवेश में रुचि जताई। सीतारमण ने स्विट्जरलैंड से एआईआईबी गवर्नर पिएत्रो लाजेरी से भी मुलाकात की और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) को भारत में अवसर तलाशने वाले विदेशी निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद भागीदार बताया। उन्होंने स्विट्जरलैंड के निवेशकों को भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश का लाभ उठाने के लिए एनआईआईएफ अवसंरचना कोष में अवसर तलाशने का निमंत्रण दिया। राजदूत लाजेरी ने कहा कि भारत में निवेश में विविधता लाने और निवेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने भारत की आगामी यात्रा और नयी दिल्ली में होने वाले दूसरे ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) समृद्धि सम्मेलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में स्विट्जरलैंड के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वृद्धि वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वृद्धि से तेज है। लाजेरी ने द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते को अंतिम रूप देने के लिए समर्थन मांगा।
उन्होंने वित्तीय क्षेत्र और टिकाऊ वित्त के क्षेत्र में सहयोग में भी रुचि जताई।
वित्त मंत्री ने स्विट्जरलैंड के निवेशकों और वित्तीय सेवा क्षेत्र की इकाइयों को भारत के घरेलू वित्तीय सेवा केंद्र गिफ्ट आईएफएससी में निवेश के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। यह केंद्र वित्तीय सेवाएं और उत्पाद, कर लाभ तथा कारोबार के अनुकूल माहौल उपलब्ध कराता है। सीतारमण ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले से मुलाकात की और बाढ़ के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के आकलन तथा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। बातचीत में इस महत्वपूर्ण समय में भारत की ओर से दी जा सकने वाली सहायता के स्वरूप को तय करने के लिए दोनों देशों की टीम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। यूपीआई-एनपीआई संपर्क व्यवस्था को जल्द शुरू करने और उसके उपयोग पर भी चर्चा की गई, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी पहल है। सीतारमण ने जॉर्डन की योजना एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री जेना जैद तौकान से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य का उल्लेख किया।</description><guid>3652</guid><pubDate>29-Sep-2026 12:31:38 am</pubDate></item><item><title>एफबीआई की 10 शीर्ष वांछित अपराधियों की सूची में गोल्डी बराड़, 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3651</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने सोमवार को कुख्यात अपराधी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को 10 शीर्ष वांछित भगोड़े अपराधियों की सूची में शामिल किया और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की। एफबीआई ने कहा, ''लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले संगठित अपराध गिरोह में कथित संलिप्तता के लिए सतिंदरजीत सिंह वांछित है। यह गिरोह दक्षिणी कैलिफोर्निया के साथ-साथ पूरे अमेरिका और कनाडा में कई तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल है।'' जांच एजेंसी ने चेतावनी दी कि गोल्डी बराड़ खतरनाक और हथियारबंद अपराधी है।
एफबीआई के अनुसार, गोल्डी बराड़ राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की हत्या, गोलीबारी, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, मारपीट तथा मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी जैसी गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल है। एफबीआई ने कहा कि गोल्डी बराड़ अमेरिका में है और उत्तरी अमेरिका में इस गिरोह का कथित सरगना है।
अमेरिका के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की डिस्ट्रिक्ट अदालत ने एक जुलाई को गोल्डी बराड़ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उसके खिलाफ 'रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस' (आरआईसीओ) कानून के तहत आपराधिक साजिश, वसूली के जरिए कारोबार को प्रभावित करने और ऐसा करने का प्रयास करने की साजिश तथा मादक पदार्थों की तस्करी और उन्हें तस्करी के इरादे से अपने पास रखने की साजिश के आरोप लगाए गए हैं। गोल्डी बराड़ उन भगोड़े आरोपियों में शामिल है, जिनकी पहचान भारत से संचालित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों के खिलाफ वर्षों तक चली संघीय जांच 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के बाद हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने जुलाई में ऐसे तीन समूहों से जुड़े 37 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे।</description><guid>3651</guid><pubDate>29-Sep-2026 12:25:53 am</pubDate></item><item><title> नेपाल में भारी बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन से 21 लोगों की मौत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3648</link><description>काठमांडू. नेपाल में पिछले कुछ दिनों के दौरान बाढ़, भूस्खलन और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। लगातार हो रही बारिश के कारण देश के कई हिस्सों में फिर बाढ़ आ गई, मकान क्षतिग्रस्त हो गए और सड़क यातायात बाधित हुआ। नेपाल पिछले महीने आई विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ से अभी उबर भी नहीं पाया है। इस बाढ़ में कम से कम 1,453 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। शनिवार रात पाल्पा जिले की माथागढ़ी ग्रामीण नगरपालिका में भूस्खलन के कारण एक मकान मलबे में दब गया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। रविवार सुबह उनके शव बरामद कर लिए गए। अलग-अलग घटनाओं में पिछले चार दिनों के दौरान बाढ़, भूस्खलन, आकाशीय बिजली गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में 16 लोगों की मौत हुई, जिससे मृतकों की कुल संख्या 21 हो गई। देश में पिछले पांच दिनों के दौरान मानसून से जुड़ी 439 घटनाएं हुईं, जबकि सुरक्षा बलों ने बाढ़, भूस्खलन और जलभराव से प्रभावित 1,284 लोगों को बचाया।</description><guid>3648</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:55:31 am</pubDate></item><item><title> भारत-कनाडा संबंधों को नयी ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी: जयशंकर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3647</link><description>संयुक्त राष्ट्र. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा की अपनी समकक्ष अनीता आनंद के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर ''सार्थक वार्ता'' करने के बाद कहा कि भारत और कनाडा अपने संबंधों को ''नयी ऊंचाई'' पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। जयशंकर ने शनिवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात हमेशा सुखद रहती है। उनके साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर मुलाकात की। संबंधों को नयी ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी के बीच सार्थक चर्चा हुई।'' कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस सप्ताह की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संभवत: इस साल दिसंबर के आसपास कनाडा की यात्रा करेंगे।
उन्होंने कहा था कि भारत के साथ व्यापार वार्ता में ओटावा ''अच्छी प्रगति'' कर रहा है। कार्नी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ''भारत के साथ हमारी व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति हो रही है। ये संबंध लोगों के बीच आपसी संबंधों, सुरक्षा और व्यापार एवं अर्थव्यवस्था समेत कई स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण हैं।'' उन्होंने कहा था कि भारत और कनाडा ने पिछले साल जी20 शिखर सम्मेलन में यह प्रतिबद्धता जताई थी कि ''इस साल जी20 तक वार्ता पूरी करने की कोशिश की जाएगी।'' कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कनाडा यात्रा और भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने की दिशा में हुई प्रगति से जुड़े सवालों के जवाब में कही। इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर सालाना 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14-15 दिसंबर को फ्लोरिडा के डोराल स्थित ट्रंप नेशनल डोराल मियामी रिसॉर्ट में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान भारत-कनाडा संबंधों में काफी गिरावट आई थी, खासकर सितंबर 2023 में उनके उस बयान के बाद जब उन्होंने कहा था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां ब्रिटिश कोलंबिया में कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट की संभावित संलिप्तता के आरोपों की जांच कर रही हैं। भारत ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इस राजनयिक विवाद के कारण दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया था और राजनयिक कर्मचारियों की संख्या में कटौती की थी। इस साल जुलाई में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने कहा कि उसे निज्जर की हत्या में भारत सरकार के अधिकारियों को जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं मिला है। मार्च 2025 में कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत दिखे हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री और मोदी ने पिछले साल जून में संबंधों में स्थिरता बहाल करने के लिए संतुलित कदम उठाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद दोनों देशों में उच्चायुक्तों की वापसी हुई और उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। इस साल मार्च में दोनों सरकारों ने कहा था कि द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में ''महत्वपूर्ण प्रगति'' हुई है। भारतीय मूल की आनंद के माता-पिता तमिलनाडु और पंजाब से थे।
उन्होंने 2025 में कनाडा की विदेश मंत्री बनने के बाद से जयशंकर के साथ भी कई बैठकें की हैं। भारत में ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर जारी चर्चा के बीच जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर वेनेजुएला के विदेश मंत्री फेलिक्स प्लासेंसिया गोंजालेज से भी मुलाकात की। जयशंकर ने बैठक के बाद कहा, ''द्विपक्षीय सहयोग के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ हमारे ऊर्जा संबंध भी गति पकड़ रहे हैं। हमने मौजूदा क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।'' जयशंकर ने बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिझेनकोव एवं मेक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज से भी मुलाकात की।
</description><guid>3647</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:39:48 am</pubDate></item><item><title> जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक 29 सितंबर से मिलवॉकी में, पीयूष गोयल होंगे शामिल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3646</link><description>वाशिंगटन. जी20 देशों के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री अमेरिका की बदलती शुल्क नीतियों, लंबे समय से जारी ईरान युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे दबाव के बीच मिलवॉकी में बैठक करेंगे। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर की मेजबानी में होने वाली जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बंधुआ मजदूरी को खत्म करने, 'सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र' (एमएफएन) के सिद्धांत को अद्यतन करने, खाद्य उत्पादों के व्यापार को राजनीतिक हथियार बनाने का विरोध करने तथा औद्योगिक क्षमता और अतिरिक्त उत्पादन से निपटने समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी। यूएसटीआर ने बयान में कहा कि ग्रीर जी20 की चर्चा का नेतृत्व करेंगे। इसमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को खत्म करने और औद्योगिक क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता तथा उत्पादन से निपटने जैसे मुद्दे शामिल हैं। मिलवॉकी अमेरिका का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र है। यहां खाद्य एवं पेय पदार्थ, मशीनरी विनिर्माण, ऊर्जा और जल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों की कई बड़ी कंपनियां हैं। बैठक की शुरुआत मंगलवार शाम बिजनेस राउंडटेबल और नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स की ओर से आयोजित स्वागत समारोह से होगी।
बुधवार सुबह औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत वैश्विक इस्पात अतिरिक्त क्षमता मंच की मंत्रिस्तरीय बैठक से होगी। इस्पात उत्पादन और औद्योगिक क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गई है। अमेरिका लगातार अतिरिक्त उत्पादन को अपने घरेलू विनिर्माताओं और श्रमिकों पर पड़ रहे दबाव से जोड़ता रहा है। इस्पात बैठक के बाद ग्रीर और जी20 देशों के मंत्री मिलवॉकी में 'रॉकवेल ऑटोमेशन' के एक संयंत्र का दौरा करेंगे। यूएसटीआर के बयान के अनुसार, इस दौरान ग्रीर और जी20 देशों के मंत्री कारखाने में श्रमिकों और उद्योग जगत के लोगों से मुलाकात करेंगे और चर्चा करेंगे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति किस तरह अमेरिका में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत कर रही है। गोयल की ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका में शुल्क व्यवस्था में हुए बदलावों के कारण इस समझौते पर आगे बातचीत जारी है। इस दौरान गोयल अमेरिकी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी बातचीत कर सकते हैं।
</description><guid>3646</guid><pubDate>28-Sep-2026 10:25:57 am</pubDate></item><item><title>अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में हनुमान प्रतिमा बनी सियासी बहस का केंद्र</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3641</link><description>वॉशिंगटन. अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बीच टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक रूढ़िवादी यूट्यूबर द्वारा प्रतिमा को हटाने की मांग किए जाने के बाद हिंदू संगठनों और उनसे मिलती-जुलती सोच रखने वाले लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है। शुगर लैंड स्थित 'अष्टलक्ष्मी मंदिर' में स्थापित प्रतिमा की अगस्त 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इसके बाद से ही यह विवाद के केंद्र में है। ईसाई रूढ़िवादी समुदाय के एक वर्ग ने इसे ईसाई विरोधी बताया है। यूट्यूबर जेसी ह्यूज ने मूर्ति की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, वैसे, जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने ह्यूज की टिप्पणी को हिंदू धर्म के खिलाफ धमकी करार दिया।9</description><guid>3641</guid><pubDate>22-Sep-2026 12:39:04 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका में तकनीकी खराबी के कारण सैकड़ों उड़ानें बाधित</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3640</link><description>न्यूयॉर्क. अमेरिका के पूर्वोत्तर इलाके में सोमवार को एक अहम क्षेत्रीय हवाई यातायात नियंत्रण केंद्र में तकनीकी खराबी के कारण सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं। यह व्यवधान ऐसे समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए कई देशों के नेता अमेरिका पहुंच रहे थे। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विमान तय समय अनुसार वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ।
फिलाडेल्फिया में हवाई यातायात केंद्र का एक अहम सर्किट खराब हो गया, जिससे इस शहर के साथ-साथ कैनेडी, ला-गार्डिया और नेवार्क हवाई अड्डों पर आने वाली उड़ानें भी प्रभावित हुईं। बाद में संघीय उड्डयन प्रशासन को पता चला कि कहीं और जारी निर्माण कार्य की वजह से 'बैकअप फाइबर ऑप्टिक लाइन' भी कट गई थी।</description><guid>3640</guid><pubDate>22-Sep-2026 12:31:16 am</pubDate></item><item><title>सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3637</link><description>काहिरा. सूडान के एक सुदूरवर्ती इलाके में सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई। चिकित्सकों के एक समूह और हादसे में बचे लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह हादसा वेस्ट कोर्डोफान प्रांत के नूहूद शहर में अल-जारा सोने की खदान में हुआ। यह इलाका अर्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' के नियंत्रण में है, जो पिछले तीन साल से ज्यादा समय से देश की सेना के साथ लड़ाई लड़ रही है। हादसे में बचे हुए लोगों ने बताया कि खदान ढहने की घटना मंगलवार देर रात हुई और कई लोग अब भी लापता हैं। चिकित्साकर्मियों के समूह ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में दबे लोगों या जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए खोज और बचाव अभियान अभी जारी है।</description><guid>3637</guid><pubDate>16-Sep-2026 12:12:07 am</pubDate></item><item><title>एआई प्रतिद्वंद्वियों में सुरक्षा को लेकर दुर्लभ सहमति, अमल की राह में कई अड़चनें</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3636</link><description>वाशिंगटन. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उद्योग के प्रमुख दिग्गजों के बीच आमतौर पर सहमति कम ही देखने को मिलती है और ऐसे में जब वे किसी मुद्दे पर एक राय बनाते हैं तो उस पर ध्यान जाना स्वाभाविक है। एंथ्रोपिक के दारियो अमोडेई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, स्पेसएक्सएआई के एलन मस्क और उद्योग जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों ने हाल के दिनों में कहा है कि एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत है। यह सहमति एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता के इस्तीफे के बाद सामने आई, जिन्होंने इस तकनीक से मानवता को होने वाले गंभीर खतरों की चेतावनी दी थी। हालांकि, घरेलू और वैश्विक प्रतिस्पर्धा, मुनाफे की प्रेरणा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध जैसे कारक एआई के विकास की गति को लेकर किसी समन्वित प्रयास की राह में बाधा बने हुए हैं। गृह सुरक्षा विभाग में उभरती प्रौद्योगिकी नीति के पूर्व निदेशक और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर निक रीज का कहना है कि फिर भी, यह स्थिति उद्योग को ''सफलता की हमारी परिभाषा को नए सिरे से तय करने'' के लिए मजबूर कर सकती है।
रीज ने कहा, ''अगर हम एआई में सफलता को उसी तरह देखें जैसे विमानन क्षेत्र में सफलता को देखते हैं? विमान समय पर पहुंचे और न जाने कितने समय से कोई दुर्घटना न हुई हो। हम वाणिज्यिक विमानों की दुर्घटनाओं को स्वीकार नहीं करते, लेकिन एआई की बड़ी विफलताओं को स्वीकार कर लेते हैं।'' सैद्धांतिक रूप से प्रमुख एआई स्टार्टअप अपने मॉडल के विकास की गति कभी भी धीमी कर सकते हैं। लेकिन तकनीक में हुई तेज प्रगति के पीछे और अधिक शक्तिशाली मॉडल बनाने की प्रतिस्पर्धा भी एक प्रमुख कारण रही है। व्हाइट हाउस भी इस प्रयास का समर्थन करता रहा है ताकि अमेरिका एआई के क्षेत्र में चीन से अपनी बढ़त न खोए। एंथ्रोपिक और ओपनएआई संभावित रूप से रिकॉर्ड स्तर के सार्वजनिक शेयर निर्गम की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, ओपनएआई ने कहा है कि वह इस साल सार्वजनिक होने की योजना को टाल रहा है और फिलहाल सुरक्षा प्रयासों पर ध्यान दे रहा है। इसी वजह से उद्योग की ओर से सामने रखे गए प्रस्ताव आपसी सहयोग और कुछ हद तक सरकारी नियमन पर निर्भर हैं। अमोडेई ने हाल में एक विस्तृत लेख प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने उन्नत एआई के विकास को धीमा करने की योजना सामने रखी। उनके एक प्रस्ताव के अनुसार, एआई के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों, जिन्हें आम तौर पर 'फ्रंटियर लैब्स' कहा जाता है, को स्वतंत्र बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं को ''लगातार, कर्मचारी जैसे स्तर का पहुंच अधिकार'' देने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। इन मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों के पास कंपनियों के कार्यालयों में काम करने, प्रवेश कार्ड और कंपनी के लैपटॉप इस्तेमाल करने जैसी सुविधाएं होनी चाहिए, ताकि वे सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की निगरानी कर सकें। अमोडेई ने लिखा कि एंथ्रोपिक इस कदम के लिए अभी ''एकतरफा प्रतिबद्धता'' जता रही है। ऑल्टमैन ने सोशल मीडिया पर इसे ''बहुत अच्छा विचार'' बताया और कहा कि ओपनएआई भी इसका अनुसरण करेगी। ऑल्टमैन ने उन्नत एआई के लिए सुरक्षा मानक तय करने वाले ''संघीय ढांचे'' का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने कहा कि एआई सुरक्षा पर काम करने के लिए कंपनी को कानून बनने या प्रतिस्पर्धा-विरोधी नियमों से छूट मिलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अमोडेई ने सरकार द्वारा नियमन और हस्तक्षेप की भी वकालत की। इसमें अमेरिका और अन्य लोकतांत्रिक देशों की सरकारों की मदद से अग्रणी एआई कंपनियों के बीच समन्वय शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रमुख प्रयोगशालाएं ''साझा सुरक्षा मानक और अनियंत्रित एआई विकास की रफ्तार की सीमाएं'' तय कर सकती हैं। अमोडेई की योजना में अमेरिका और अन्य देशों द्वारा ''सत्तावादी सरकारों'' के साथ भी समन्वय का प्रस्ताव है। उन्होंने माना कि चीन से सहयोग हासिल करने सहित इसमें कई कठिनाइयां हैं।</description><guid>3636</guid><pubDate>16-Sep-2026 12:07:02 am</pubDate></item><item><title>एआई के जोखिमों पर बहस के बीच चीन और अमेरिका के बीच तकनीकी अंतर कम हुआ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3635</link><description>हांगकांग. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से विकास के संभावित जोखिमों पर दुनिया में बहस तेज होने के बीच अमेरिका और चीन अधिक शक्तिशाली एआई मॉडल विकसित करने की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका कई वर्षों तक एआई मॉडल की क्षमता, शोध और अन्य क्षेत्रों में चीन सहित अन्य देशों से आगे रहा है। हालांकि, चीन अब तेजी से इस अंतर को कम कर रहा है। अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रतिबंधों के कारण चीन को अत्याधुनिक चिप और उन्हें बनाने वाली मशीनों सहित कुछ उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच नहीं है। स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन-सेंटर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक जानकार सहित विशेषज्ञों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन एआई के क्षेत्र में अमेरिका के लिए मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरा है और इस साल उसने अमेरिकी बढ़त को काफी हद तक कम कर दिया है। जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज के सैम सैक्स ने कहा, ''अमेरिकी और चीनी मॉडलों के बीच अंतर कम और अस्थिर है।'' एआई को लेकर यह बहस ऐसे समय हो रही है जब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए वाशिंगटन आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और चीन क्या कदम उठाते हैं और किन कदमों से बचते हैं। बीजिंग स्थित स्टार्टअप मूनशॉट एआई ने 'किमी के3' मॉडल जारी कर सिलिकॉन वैली का ध्यान आकर्षित किया। एआई बेंचमार्किंग मंच 'आर्टिफिशियल एनालिसिस' के अनुसार, जुलाई में जारी होने के कुछ समय बाद यह वैश्विक स्तर पर मॉडल की क्षमता के मामले में तीसरे स्थान पर था। हालांकि, अब यह नौवें स्थान पर है और एंथ्रोपिक, ओपनएआई, मेटा तथा स्पेसएक्सएआई के नए मॉडलों से पीछे है। डीपसीक ने जनवरी 2025 में अपना 'आर1' 
मॉडल जारी कर वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी थी। यह समान अमेरिकी मॉडलों की तुलना में कम लागत वाला था। अप्रैल में कंपनी ने अपने 'वी4' मॉडल का पूर्वावलोकन किया और ज्ञान, तर्क क्षमता तथा सीमित मानवीय मार्गदर्शन में जटिल कामों की योजना बनाकर उन्हें पूरा करने की क्षमता में सुधार का दावा किया। चीनी स्टार्टअप जेड.एआई के 'जीएलएम-5.2' मॉडल ने जून में सिलिकॉन वैली में ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद अगस्त में जारी 'जीएलएम-5.3' में कोडिंग और स्वायत्त रूप से कार्य करने की क्षमता में सुधार किया गया, जिससे इसकी वैश्विक रैंकिंग में बढ़ोतरी हुई। अलीबाबा ने जुलाई में 'क्यूवेन3.8-मैक्स' मॉडल का पूर्वावलोकन किया। कंपनी ने इसे शृंखला का अपना सबसे शक्तिशाली मॉडल बताया। चीन के सुरक्षा राज्य मंत्री चेन यीशिन ने चेतावनी दी है कि एआई देश की राजनीतिक और वैचारिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर हमलों, डेटा लीक और शासन व्यवस्था के लिए कई तरह के खतरे पैदा कर सकता है। रविवार को प्रकाशित एक लेख में चेन ने कहा कि ''शत्रुतापूर्ण ताकतों और गलत मंशा वाले व्यक्तियों'' द्वारा इस्तेमाल किए जाने पर एआई चीन की राजनीतिक, संस्थागत और वैचारिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि एआई से तैयार नकली ऑडियो और वीडियो का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ''राजनीतिक अफवाहें'' फैलाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने एंथ्रोपिक के क्लॉड और ओपनएआई के जीपीटी जैसे मॉडलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। चीनी नेताओं ने एआई के विकास में तेजी लाने और तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने जोखिमों पर नियंत्रण और एआई के वैश्विक नियमन के लिए एक ढांचा बनाने की आवश्यकता भी बताई है। अमेरिका ने चीन की एआई कंपनियों पर ''औद्योगिक स्तर पर डिस्टिलेशन'' का आरोप लगाया है। इसमें अपेक्षाकृत शक्तिशाली एआई मॉडलों की क्षमताओं की नकल या उन्हें दोहराने के लिए उनका इस्तेमाल करना शामिल है। 
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की लिजी ली के अनुसार, डिस्टिलेशन एआई उद्योग में इस्तेमाल होने वाली सामान्य तकनीक है। हालांकि, अमेरिकी एजेंसियों ने विशेष रूप से आरोप लगाया है कि चीनी कंपनियों ने अमेरिकी अग्रणी मॉडलों की प्रतिबंधित क्षमताएं हासिल करने के लिए अनधिकृत पहुंच और अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया। एफबीआई, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी और साइबर सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचा सुरक्षा एजेंसी ने आठ सितंबर को जारी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि चीनी एआई डेवलपर्स ने ''आक्रामक, दुर्भावनापूर्ण और लक्षित डिस्टिलेशन गतिविधियों'' के जरिये अमेरिका के कुछ सबसे उन्नत एआई मॉडलों की क्षमताएं हासिल कीं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी आठ सितंबर को एक कार्यक्रम में कहा था, ''चीनी हमारे मॉडलों से डिस्टिल करते हैं और वे हमसे कभी आगे नहीं निकल सकते।'' चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि डिस्टिलेशन का इस्तेमाल कई एआई कंपनियां करती हैं। उसने अमेरिका से ''बेबुनियाद आरोप'' लगाने से बचने को कहा और उस पर ''एआई उद्योग पर एकाधिकार'' कायम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।</description><guid>3635</guid><pubDate>16-Sep-2026 12:00:54 am</pubDate></item><item><title>विडोज़ बे ने 14 पुरस्कार जीतकर एमी में बनाया रिकॉर्ड, द पिट ने सर्वश्रेष्ठ ड्रामा का खिताब जीता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3634</link><description>लॉस एंजिलिस. सोमवार रात आयोजित एमी पुरस्कार समारोह में 'एप्पल टीवी' के धारावाहिक 'विडोज बे' की धूम रही जिसने कॉमेडी श्रेणी में एक ही सत्र में सबसे ज्यादा पुरस्कार जीतने का नया रिकॉर्ड बना दिया। धारावाहिक ने सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी सीरीज और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार समेत कुल 14 पुरस्कार अपने नाम किए। धारावाहिक के मुख्य अभिनेता मैथ्यू रीस ने अकेले तीन पुरस्कार जीते।
'द पिट' ने लगातार दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ ड्रामा सीरीज का पुरस्कार अपने नाम किया। इसके मुख्य अभिनेता नोआ वाइल भी लगातार दूसरी बार ड्रामा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुने गए। 'प्लुरिबस' के लिए रिया सीहॉर्न ने ड्रामा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। वहीं 'हैक्स' के पांचवें और अंतिम सीजन के लिए जीन स्मार्ट ने पांचवीं बार कॉमेडी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार अपने नाम किया। स्मार्ट, एमी के इतिहास में ऐसी पहली अभिनेत्री बन गई हैं, जिन्होंने तीन से अधिक सीजन तक चलने वाली किसी सीरीज के हर सीजन में अभिनय के लिए पुरस्कार जीता है। कॉमेडी की बाकी सभी प्रमुख श्रेणियों में 'विडोज बे' का दबदबा रहा। शो ने समारोह की रात लगभग हर बड़े पुरस्कार पर कब्जा जमाया और कॉमेडी सीरीज के एक ही सीजन में सबसे ज्यादा एमी पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उसने पिछले साल 'द स्टूडियो' के बनाए 13 पुरस्कारों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। दिलचस्प बात यह है कि 'द स्टूडियो' भी 'एप्पल टीवी' का धारावाहिक था। दो एमी पुरस्कार हाथ में लिए रीस ने समारोह के बाद कहा, ''जश्न लंबे समय तक चलेगा, अलग-अलग अंदाज में होगा और उम्मीद है कि कभी-कभी काफी जोरदार भी होगा।'' 'द पिट' 25 नामांकनों के साथ इस साल ड्रामा श्रेणी में सबसे आगे थी, जबकि अंतिम सीजन के लिए 'हैक्स' को 24 नामांकन मिले थे और वह कॉमेडी श्रेणी में सबसे आगे थी। लेकिन जब पुरस्कार जीतने की बारी आई तो दोनों ही सीरीज खास असर नहीं छोड़ सकीं। सोमवार रात 'हैक्स' के लिए जीन स्मार्ट की जीत ही एकमात्र पुरस्कार रही। पुरस्कार लेते समय भावुक स्मार्ट ने दर्शकों की तालियों के बीच कहा, ''यह सफर कितना शानदार रहा है।''
75 वर्षीय स्मार्ट अब तक कुल आठ एमी पुरस्कार जीत चुकी हैं।
रिया सीहॉर्न ने 'एप्पल टीवी' की 'प्लुरिबस' में अहम भूमिका निभाने के लिए अपने करियर का पहला एमी पुरस्कार जीता। सीहॉर्न को 'ब्रेकिंग बैड' के निर्माता विंस गिलिगन की सीरीज 'बेटर कॉल शॉल' में अपनी शानदार भूमिका के लिए दो बार नामांकित किया गया था, लेकिन तब वह पुरस्कार नहीं जीत पाई थीं। गिलिगन ने ही 'प्लुरिबस' में सीहॉर्न को मुख्य भूमिका में रखा। उन्होंने इस सीरीज के लेखन के लिए अपने करियर का पांचवां एमी पुरस्कार जीता। एलिसन जेनी ने 'द डिप्लोमैट' के लिए ड्रामा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और टॉम पेल्फ्रे ने 'टास्क' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार जीता। दोनों ने 'द पिट' के कई नामांकित कलाकारों को पीछे छोड़ा। सीबीएस द्वारा प्रसारण से हटाए गए 'द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट' ने सर्वश्रेष्ठ विविधतापूर्ण कार्यक्रम का पुरस्कार जीता। इस साल यह शो छह एमी पुरस्कार जीत चुका है। सीबीएस ने इसके बंद होने की वजह आर्थिक कारण बताई थी। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि ट्रंप प्रशासन की आलोचना करने के कारण शो को निशाना बनाया गया। पुरस्कार समारोह के दौरान कोलबर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा, ''अगर आपको आज रात की कॉमेडी पसंद आ रही है, तो इसका श्रेय मेरे पुराने लेखकों को जाता है।''
-</description><guid>3634</guid><pubDate>15-Sep-2026 12:42:05 am</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने गॉड ब्लेस द यूएसए के गायक ली ग्रीनवुड की पत्नी को अमेरिकी राजदूत के तौर पर नामित किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3633</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'गॉड ब्लेस द यूएसए' के गायक ली ग्रीनवुड की पत्नी किम्बर्ली ग्रीनवुड को बारबाडोस और पूर्वी कैरिबियाई देशों के लिए अमेरिकी राजदूत के तौर पर सोमवार को नामित किया। किम्बर्ली ग्रीनवुड उन नामित लोगों की सूची में शामिल हैं, जिनके नामों को पुष्टि के लिए ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सीनेट (उच्च सदन) के पास भेजा है। किम्बर्ली ने सोमवार को बाद में इंस्टाग्राम पर अपने पति और ट्रंप के साथ एक तस्वीर साझा की और उन्हें नामित करने के लिए राष्ट्रपति का आभार जताया। उन्होंने पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रपति जी, मुझ पर विश्वास जताने और मुझे सेवा का यह असाधारण अवसर देने के लिए धन्यवाद।'' किम्बर्ली के पति ली ग्रीनवुड राष्ट्रपति ट्रंप के पसंदीदा गायकों में से एक हैं। उनका लोकप्रिय देशभक्ति गीत वर्षों से ट्रंप के राजनीतिक कार्यक्रमों में उनके मंच पर आने के दौरान बजाया जाता रहा है। ट्रंप ने ली ग्रीनवुड के साथ कारोबारी साझेदारी भी की थी। दोनों ने मिलकर 59.99 अमेरिकी डॉलर की 'गॉड ब्लेस द यूएसए बाइबल' बेची थी। ली ग्रीनवुड ने अपनी पत्नी की सराहना और उनके नामांकन का स्वागत करते हुए इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी पत्नी ने ट्रंप के साथ 18 वर्षों तक काम किया था जब ट्रंप 'मिस यूनिवर्स संगठन' के मालिक थे और किम्बर्ली ग्रीनवुड विभिन्न राज्यों में होने वाली सौंदर्य प्रतियोगिताओं का संचालन करती थीं।</description><guid>3633</guid><pubDate>15-Sep-2026 12:40:02 am</pubDate></item><item><title>अमेरिकी सांसद ने रूस पर प्रतिबंध संबंधी विधेयक में भारत के नाम के उल्लेख के लिए संशोधन पेश किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3632</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के एक सांसद ने रूस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव वाले विधेयक में एक संशोधन पेश किया है जिसमें भारत समेत रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के नाम कानून में शामिल करने की मांग की गई है। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोट) से पारित किया था। इस विधेयक का मकसद न सिर्फ रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है, बल्कि उन जहाजों के 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाना है जिनकी मदद से मॉस्को तेल आपूर्ति पर लगी पाबंदियों से बचता है। अमेरिका का मानना ​​है कि रूस के कच्चे तेल व्यापार से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए धन जुटाया जा रहा है। इस विधेयक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन और भारत समेत रूस के प्रमुख तेल व्यापार साझेदार देशों पर शत प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। गत सात अगस्त को अमेरिकी सीनेट से पारित हुए विधेयक में रूस के व्यापारिक साझेदारों के नाम नहीं हैं, लेकिन इसमें मात्रा के हिसाब से तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों का जिक्र है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस विधेयक का 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' (प्रतिनिधि सभा) में पारित होना जरूरी है। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले सदन में कामकाज के लिए चार दिन बचे हैं। डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए संशोधन में चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य को उन देशों के रूप में नामित करने की मांग की गई है जिन पर शत प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप को शुल्क लगाने की और अधिक शक्तियां देने का कड़ा विरोध करते डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने 'प्रावधान-113' को पूरी तरह खत्म करने का संशोधन पेश किया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक द्वितीयक शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।</description><guid>3632</guid><pubDate>15-Sep-2026 12:38:00 am</pubDate></item><item><title> नेपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त रसुवागढ़ी सड़क के पुनर्निर्माण के लिए चीन से मदद मांगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3631</link><description>काठमांडू. नेपाल ने पिछले महीने आई भयावह बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी सड़क को फिर से बनाने के लिए चीन से मदद मांगी है। चीन के साथ व्यापार के लिये अहम माने जाने वाले इस मार्ग को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से काफी नुकसान पहुंचा था। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में करीब 1,400 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5,000 से अधिक लोग लापता हैं। 'द काठमांडू पोस्ट' अखबार की खबर के मुताबिक, स्याफ्रुबेसी को रसुवागढ़ी से जोड़ने वाली लगभग 16 किलोमीटर लंबी सड़क का 6.5 अरब नेपाली रुपये की चीनी निधि वाली परियोजना के तहत उन्नयन किया जा रहा था।
लेकिन बाढ़ ने इसके बड़े हिस्से को बहा दिया, जिससे सड़क को भारी नुकसान पहुंचा और दोनों देशों के बीच व्यापार का एक अहम संपर्क टूट गया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, रसुवागढ़ी और गल्छी के बीच क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में कुल मिलाकर लगभग 55 अरब नेपाली रुपये (करीब 36.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का खर्च आएगा। अवसंरचना विकास मंत्री सुनील लमसाल ने शनिवार को अखबार को बताया, चीन ने हमें मदद देने का मौखिक भरोसा दिया है, हालांकि अभी तक कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है। लमसाल ने कहा, यह रास्ता न सिर्फ नेपाल और चीन के बीच व्यापार का गलियारा है, बल्कि इसके किनारे कई बस्तियां भी हैं। उन्होंने कहा, फिलहाल, हम रसुवागढ़ी जाने वाले रास्ते को खुला रखने के लिए एक अस्थायी मार्ग का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं। लंबे समय के लिए हमें एक सुरक्षित सड़क बनाने की जरूरत है, लेकिन अभी हम अस्थायी मार्ग से ही काम चला लेंगे।
</description><guid>3631</guid><pubDate>15-Sep-2026 1:28:51 pm</pubDate></item><item><title>  बाढ़ प्रभावित नेपाल को प्रतिदिन 18 घंटे बिजली का निर्यात करेगा भारत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3630</link><description>काठमांडू. से नेपाल विद्युत प्राधिकरण को रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात करने की मंजूरी दे दी है। भारतीय दूतावास के सूत्रों ने भारत के बिजली मंत्रालय के एक नोटिस का हवाला देते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर-ढलकेबार 400 केवी लाइन के जरिये 600 मेगावाट तक और टनकपुर-महेंद्रनगर 132 किलोवाट पारेषण लाइन के जरिये 54 मेगावाट तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी 31 दिसंबर तक दी गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को नेपाल में आई भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ से सात चालू पनबिजली परियोजनाओं और पांच सौर संयंत्रों को नुकसान पहुंचा, जिससे कुल मिलाकर लगभग 275 मेगावाट बिजली आपूर्ति में रुकावट आई। एक सरकारी बयान में कहा गया, ''इस मंजूरी से नेपाल को इस मुश्किल समय में अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और भारत व नेपाल के बीच गहरे और लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को और मजबूती मिलेगी।'' बयान में आगे कहा गया, ''भारत, नेपाल का समर्थन करने और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।''
</description><guid>3630</guid><pubDate>15-Sep-2026 12:01:46 pm</pubDate></item><item><title>लंदन में टेम्स नदी के तट पर पहली बार हुई गंगा आरती</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3629</link><description>लंदन. लंदन में टेम्स नदी के तट पर रविवार को पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। 'टेम्स तट पर गंगा आरती : प्रकाश उत्सव' नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन 'चिन्मय मिशन यूके' ने 'टोटली टेम्स' के वार्षिक उत्सव के सहयोग से किया। यह आयोजन 'चिन्मय मिशन' की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दुनियाभर में हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था। भारत में गंगा के तट पर होने वाली प्रसिद्ध आरती की परंपरा से प्रेरित इस आयोजन की परिकल्पना प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवनदायी प्रवाह के प्रतीक के रूप में की गई थी। 'चिन्मय मिशन यूके' की शिक्षिका ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, पीढ़ियों से श्रद्धालु गंगा के तट पर दीप प्रज्वलित कर मां गंगा की आराधना करते और प्रकृति एवं जीवन को संवारने वाली दिव्य शक्तियों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता दर्शाते आए हैं।'' उन्होंने कहा, टेम्स नदी के तट पर गंगा आरती भी इसी भावना को आगे बढ़ाती है और कृतज्ञता, आशा तथा एकता के साझा भाव में लोगों को एक साथ लाती है। चैतन्य ने बताया कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा ज्ञान के प्रवाह का भी प्रतीक है।
उन्होंने कहा, हमारे संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद ने अपना जीवन वेदांत के शाश्वत ज्ञान और आध्यात्मिक संदेश को हिमालय की पवित्र भूमि से जन-जन तक पहुंचाने और उसे उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए समर्पित कर दिया। हिंदू धर्म की महान दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में से एक वेदांत की इस दिव्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह समारोह ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की उस पवित्र धारा का उत्सव भी है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे निरंतर प्रवाहित हो रही है।'' गंगा आरती हिंदू धर्म का एक प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें बड़ी संख्या में दीयों को प्रज्वलित कर प्रार्थना, भजन-संगीत और मंत्रोच्चार के माध्यम से मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह अनुष्ठान प्रकृति और उसके जीवनदायी स्वरूप के प्रति आस्था तथा सम्मान की भी अभिव्यक्ति है। चिन्मय मिशन के एक प्रवक्ता ने कहा, प्रकृति के प्रति श्रद्धा गंगा आरती का केवल एक हिस्सा नहीं, बल्कि इसकी आत्मा में निहित है। यह मां गंगा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करने का माध्यम है। हिंदू परंपरा में मां गंगा को पवित्र, जीवनदायिनी और समस्त जीवों का पोषण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। टेम्स के तट पर आयोजित इस आरती में परंपरा की पवित्रता के साथ नदी की निर्मलता और पर्यावरण की मर्यादा का भी पूरा ध्यान रखा गया। पूरा अनुष्ठान नदी के तट पर जमीन पर ही संपन्न हुआ। आरती में प्रयुक्त किसी भी वस्तु को टेम्स में प्रवाहित नहीं किया गया। 'टोटली टेम्स' एक न्यास की ओर से आयोजित वार्षिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत 1997 में हुई थी। इस उत्सव के तहत कला, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से टेम्स नदी के महत्व और समृद्ध विरासत को रेखांकित किया जाता है।</description><guid>3629</guid><pubDate>14-Sep-2026 12:27:50 am</pubDate></item><item><title>एस पी हिंदुजा के सम्मान में स्विट्जरलैंड के निजी बैंक का नाम बदलकर हुआ आर्या</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3627</link><description>लंदन/ दिवंगत भारतीय उद्यमी श्रीचंद परमानंद हिंदुजा द्वारा स्थापित स्विट्जरलैंड के निजी बैंक का नाम बदलकर 'आर्या बैंक प्रिवी' कर दिया गया है। बैंक ने यह कदम अपने संस्थापक की स्विट्जरलैंड और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने की विरासत के सम्मान में उठाया है। जेनेवा मुख्यालय वाला यह बैंक अब एक नयी कार्यकारी टीम और नए दृष्टिकोण के साथ कारोबार के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। संस्थापक की बेटी शानू एस. पी. हिंदुजा बैंक की चेयरपर्सन हैं और परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। शानू हिंदुजा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, स्विट्जरलैंड, यूरोप और भारत के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना दशकों से हमारे परिवार के दृष्टिकोण का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, ''यह प्रतिबद्धता श्रीचंद पी. हिंदुजा के दोनों देशों के बीच सेतु बनाने के विश्वास से जुड़ी है। वह स्विट्जरलैंड बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने वाले पहले भारतीय उद्यमी थे। इसलिए हम ऐसे कदमों का स्वागत करता है, जो व्यापार, निवेश और साझा समृद्धि को मजबूत करते हैं।'' शानू ने बताया कि 'आर्या' नाम संस्कृत के उस शब्द से लिया गया है, जो सम्मान, ईमानदारी और श्रेष्ठ आचरण को दर्शाता है।</description><guid>3627</guid><pubDate>12-Sep-2026 12:35:39 am</pubDate></item><item><title> संकट के समय भारत हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा: राजनाथ सिंह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3626</link><description>कोलंबो. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत संकट के समय हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध साझा इतिहास, संस्कृति और आस्था पर आधारित हैं।
तीन दिवसीय श्रीलंका दौरे पर कोलंबो पहुंचे सिंह ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के करीबी सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूत नींव हैं। सिंह ने कहा, जब भी इस द्वीपीय देश पर कोई संकट आएगा, भारत हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को दोनों देशों के बीच ''सेतु'' बताते हुए कहा कि वे मित्रता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सिंह ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि 2026-27 की पहली तिमाही में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 2014 के 45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता भी बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते शामिल हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि यह समझौता विशाल ईयू बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराता है और भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक क्षमताओं को दर्शाता है।
</description><guid>3626</guid><pubDate>09-Sep-2026 12:59:45 pm</pubDate></item><item><title>वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत की 7.8 प्रतिशत वृद्धि उल्लेखनीय : वित्त मंत्री सीतारमण</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3623</link><description>न्यूयॉर्क. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सीतारमण ने बुधवार को न्यूयॉर्क में निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय कारोबारी बैठक में हिस्सा लिया। इसका आयोजन न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने बैंक ऑफ अमेरिका के साथ मिलकर किया था। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि निवेशकों को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, वैश्विक व्यवधानों और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और उसने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। सीतारमण उत्तरी कैरोलाइना के एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद यहां पहुंची थीं। सीतारमण ने कहा कि भारत ने मजबूत सुधारोन्मुखी रुख अपनाते हुए दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) सहित कई सुधारों के जरिये नियामकीय व्यवस्था में अधिक निश्चितता भी प्रदान की है।
'एक्स' पर दी जानकारी में कहा गया, इन सुधारों से अनुपालन को आसान बनाने और कागजी कार्रवाई कम करने में मदद मिली है। एक दशक से अधिक समय पहले केंद्र में सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से यह उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, उनमें पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास के जरिये उद्योग को लगातार समर्थन देना, खासकर विमानन क्षेत्र में निवेश बढ़ाना; अनुकूल व निवेश के लिए सुविधाजनक माहौल तैयार करना; एआई व डेटा केंद्रों के विकास को बढ़ावा देना; वैश्विक क्षमता केंद्रों को समर्थन देना; सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को कम करना शामिल है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन उपायों से बैंकों और उद्योग के लिए कारोबार के अधिक अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिली है जिससे वे आगे बढ़ने, विस्तार करने और अधिक मजबूत होकर उभरने में सक्षम हुए हैं। सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने लगातार बनी चुनौतियों के बावजूद भारत पिछले कई वर्षों से राजकोषीय विवेक और राजकोषीय अनुशासन के रास्ते पर निरंतर प्रतिबद्ध रहा है। ये चुनौतियां कोविड-19 वैश्विक महामारी की शुरुआत के बाद से बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत में निवेश के माहौल में काफी सुधार हुआ है। केंद्र तथा राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने और उसे सुगम बनाने के लिए पहले की तुलना में अधिक उत्सुकता एवं प्रतिस्पर्धी रवैया दिखा रही हैं। मंत्री ने कहा कि ये प्रयास 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा हैं। इससे पहले, स्वागत भाषण में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार एवं निवेश के संबंधों को और मजबूत कर दोनों देश भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक यात्रा का लाभ उठा सकते हैं।</description><guid>3623</guid><pubDate>03-Sep-2026 11:59:26 pm</pubDate></item><item><title>वित्त मंत्री सीतारमण ने आईएमएफ प्रमुख जॉर्जीवा से मुलाकात की, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर की चर्चा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3622</link><description>वॉशिंगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा से मुलाकात की और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तथा भारत के बदलते वृद्धि परिवेश पर चर्चा की। सीतारमण ने मंगलवार को एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर (एफएमसीबीजी) की बैठक से इतर जॉर्जीवा से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, '' बैठक में भारत में जारी संरचनात्मक बदलावों एवं व्यापक आर्थिक आकलन तथा वृद्धि के अनुमानों में इन बदलावों को उचित रूप से शामिल करने के महत्व पर भी चर्चा हुई।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की बदलती विकास यात्रा पर चर्चा की। जॉर्जीवा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ विचार साझा किए। भारत के शानदार वृद्धि प्रदर्शन, वैश्विक परिदृश्य और साथ मिलकर काम करने के हमारे साझा संकल्प पर विचार किया।'' वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन की सराहना की तथा कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती हासिल की है। वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद तथा उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को पर्याप्त रूप से दर्शाने वाले मजबूत और साक्ष्य-आधारित निगरानी ढांचे के महत्व पर जोर दिया। बैठक में उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में संस्थागत क्षमता, व्यापक आर्थिक नीति निर्माण और सांख्यिकीय प्रणालियों को मजबूत करने के लिए समर्थन सहित आईएमएफ की क्षमता विकास पहलों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने विश्लेषणात्मक क्षमताओं को मजबूत करने, मजबूत व्यापक आर्थिक नीतियों को समर्थन देने और वैश्विक आर्थिक मजबूती में योगदान के लिए भारत-आईएमएफ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया।</description><guid>3622</guid><pubDate>02-Sep-2026 12:01:40 am</pubDate></item><item><title>नेपाल के एकमात्र अरबपति ने आपदा के समय त्वरित कार्रवाई के लिए भारत, प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3621</link><description>काठमांडू. नेपाल के एकमात्र अरबपति और समाजसेवी बिनोद चौधरी ने देश में अचानक आई भयानक बाढ़ के बाद त्वरित कार्रवाई के लिये मंगलवार को भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आपदा का दायरा किसी की भी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा था। चौधरी ने फिर से निर्माण के काम को बहुत बड़ा बताया और बताया कि कैसे गांव, बाजार, स्कूल और पुल बह गए और 500 मेगावाट से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई। चौधरी ने 'पीटीआई-वीडियो' को बताया, इस तबाही का पैमाना उतना बड़ा है, जितना किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा। इसी जगह पर पहले भी बाढ़ आई थी, यहां तक कि पिछले साल भी, लेकिन वह मौजूदा हालात के मुकाबले कुछ भी नहीं थी। उन्होंने नुकसान का दायरा बताते हुए कहा, हमने लगभग एक हजार लोगों को खो दिया है। करीब 4,000 लोग लापता हैं... मेरी पिछली गिनती के अनुसार, हमने लगभग 40 पुल खो दिए हैं। चौधरी ने कहा, 500 मेगावाट से ज्यादा क्षमता वाले ऊर्जा संयंत्र ठप हो गए। साथ ही, कई परियोजनाओं - खासकर ऊर्जा परियोजना - जो निर्माणाधीन थीं, उन्हें रोकना पड़ा; वे बह गए या उन्हें नुकसान पहुंचा। इसलिए, यह वाकई बहुत दुखद स्थिति है। मंगलवार को नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई। 
रुक-रुक कर हो रही बारिश और बाढ़ की नयी चेतावनी के बीच बचावकर्मी फंसे हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 583 विदेशियों समेत लगभग 4,000 लोग लापता हैं, जबकि करीब 12,000 लोगों को बचाया जा चुका है। चौधरी ने आपदा के समय नेपाल सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और मित्र पड़ोसी देशों, खासकर भारत की प्रतिक्रिया की तारीफ की। उन्होंने कहा, मुझे यह मानना ​​होगा कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने, और साथ ही हमारे मित्र पड़ोसी देशों-खासकर भारत-ने राहत सामग्री तुरंत उपलब्ध कराकर बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने नेपाल का साथ देने के लिए खास तौर पर नयी दिल्ली और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कीन सिर्फ हालिया आपदा के बाद, बल्कि 2015 के भूकंप के दौरान भारत की मदद को याद करते हुए भी। उन्होंने कहा, मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि भारत भी उतना ही चिंतित है। 
मैंने कई बार ऐसा देखा है। यहां तक कि 2015 के भूकंप के दौरान भी, भारत सबसे आगे था; प्रधानमंत्री मोदी ही सबसे पहले थे जिन्होंने तुरंत बचाव कार्य, मदद, अवसंरचना और साजोसामान का इंतज़ाम किया। उन्होंने कहा कि भारत ने वह अहमियत और वह क्षमता हासिल कर ली है, साथ ही बड़े पैमाने पर जवाब देने की काबिलियत भी पा ली है। चौधरी ने कहा, भारत ने जिस बड़े पैमाने पर काम किया है और अवसंरचना बनायी है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि पिछले 12 सालों में भारत द्वारा तैयार अवसंरचना की गुणवत्ता में जबरदस्त बदलाव आया है। इसलिए, पूरी प्रणाली ही एक अलग स्तर और क्षमता की है। उन्होंने कहा, मैं उम्मीद करता हूं और भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और उन सभी लोगों से अपील करता हूं जो अहम भूमिका निभा सकते हैं, कि वे हर संभव कोशिश करें। मुझे लगता है कि ये ऐसे पल हैं जब भारत बड़ा बदलाव ला सकता है।</description><guid>3621</guid><pubDate>01-Sep-2026 12:22:32 am</pubDate></item><item><title>ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री स्टार्मर लंदन से सांसद पद छोड़ेंगे, उपचुनाव का रास्ता साफ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3620</link><description>लंदन. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने मंगलवार को लंदन से सांसद पद से इस्तीफा देने की योजना की घोषणा की और कहा कि वह अब ''अंतरराष्ट्रीय मामलों'' पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। स्टार्मर ने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एंडी बर्नहम ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री का पद संभाला था। स्टार्मर ने पहले संकेत दिया था कि वह सांसद बने रहेंगे और हाउस ऑफ कॉमन्स में बैठकर सरकार का समर्थन करेंगे। पूर्व वकील स्टार्मर (63) ने संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को उसके दोबारा शुरू होने के दिन सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी की सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे से लंदन की होलबोर्न और सेंट पैनक्रास सीट पर उपचुनाव होगा। स्टार्मर ने कहा, ''गर्मियों के दौरान मुझे अपने भविष्य पर विचार करने का समय मिला। मैंने फैसला किया है कि अब होलबोर्न और सेंट पैनक्रास से सांसद पद छोड़ने और यह जिम्मेदारी किसी और को सौंपने का सही समय है।'' उन्होंने कहा, ''महान फ्रैंक डॉबसन से 11 साल पहले यह जिम्मेदारी संभालने के बाद देश के सबसे अच्छे निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही है।'' स्टार्मर ने कहा कि अब वह अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जिनमें तेजी से बदलती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मामले, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए भी अन्य लोगों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा इस बात पर बेहद गर्व महसूस करूंगा कि मैंने उस जगह का प्रतिनिधित्व किया, जिसे मेरी पत्नी बच्चे और मैं अपना घर कहते हैं।'' उपचुनाव से ग्रीन पार्टी को लंदन की उस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका मिल सकता है, जहां इस वामपंथी दल को लगता है कि उसका अच्छा-खासा समर्थन है। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि यह उपचुनाव ग्रीन पार्टी के नेता जैक पोलांस्की के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स में सीट हासिल करने की परीक्षा बन सकता है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, ''जैक ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वह लंदन से सांसद बनना चाहते हैं। लंदन पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से उनका घर रहा है।'' प्रवक्ता ने इस मुकाबले में उनके उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया।</description><guid>3620</guid><pubDate>01-Sep-2026 12:21:41 am</pubDate></item><item><title>विविधता में एकता भारत के डीएनए में, इसका सम्मान किया जाना चाहिए: भागवत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3618</link><description>न्यूयॉर्क. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और ''इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।'' शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।'' उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने यह बात 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' फोरम द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।'' उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।'' करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।'' 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से लोग शामिल हुए। अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 250 से अधिक छात्र और 250 संगठन भी इसमें शामिल हुए। भागवत ने विविधता को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ''हम एक-दूसरे के हैं''। उन्होंने समुदाय तथा दुनिया के प्रति अपना योगदान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, ''हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, उसमें दूसरों का योगदान होता है। हम दुनिया से बहुत कुछ लेते हैं, इसलिए हमें भी दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए। हम कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि हम उसमें से कितना दूसरों के साथ बांटते हैं।'' भागवत (75) ने अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों से अपनी 'कर्मभूमि' यानी जिस देश में वे रहकर काम कर रहे हैं, उसके प्रति वफादार रहने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''हमारा कर्तव्य क्या है? हम अमेरिका में हैं। हम अमेरिका में रहते हैं। हम अमेरिका में कमाते हैं। इसलिए हम अमेरिका का हिस्सा हैं और हमें अमेरिका के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ व्यवहार करना चाहिए।'' उनकी इस बात पर उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने कहा, ''भारतीय प्रवासियों का अपनी कर्मभूमि के प्रति एक कर्तव्य है। उन्हें इसे पूरा करना चाहिए। उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''चूंकि भारत उनकी जन्मभूमि है, अगर उनके मन में कुछ करने की इच्छा है और वे अपनी कर्मभूमि के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने के बाद ऐसा कर सकते हैं, तो इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन यह अनिवार्य भी नहीं है। आपकी जन्मभूमि आपसे अपेक्षा करती है कि आप उन मूल्यों के अनुसार जीवन जिएं, जो उसने आपको दिए हैं। वह मूल्य है एकता।'' उन्होंने कहा, ''भारत आपसे अपेक्षा करता है कि आप उसी तरह जीवन जिएं, जिस तरह भारत ने आपको जीवन जीने की सोच दी है, क्योंकि यही मनुष्य के लिए संतुलित जीवन जीने का एक आदर्श तरीका है।'' आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि कोई राष्ट्र केवल भौगोलिक जमीन का एक टुकड़ा नहीं होता।
उन्होंने कहा, ''हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है। यही भारत की नियति है। आइए, भारतीयों के रूप में उस नियति के प्रति जागरूक हों और अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ जन्मभूमि के प्रति भी अपने कर्तव्यों को पूरा करें। अगर हम ऐसा करते हैं, तो यह उन सभी समस्याओं से जूझ रही और हर कदम पर मुश्किलों का सामना कर रही दुनिया के लिए वरदान साबित होगा। हमें दुनिया को सहारा देना है। हमें इस दुनिया को किसी न किसी रूप में अपना सहयोग देना है।'' भागवत के मुख्य संबोधन से पहले विभिन्न धर्मों के नेताओं ने एकता, विविधता में एकजुटता, दयालुता, करुणा और एक-दूसरे की मदद करने की जरूरत का संदेश दिया। कार्यक्रम में रब्बियों के अंतरराष्ट्रीय संगठन रब्बिनिकल असेंबली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रब्बी जैकब ब्लुमेंथल, न्यूयॉर्क शहर के ऐतिहासिक रिवरसाइड चर्च की आठवीं वरिष्ठ मंत्री और इस पद पर पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला एड्रिएन थॉर्न और वाशिंगटन डीसी स्थित ऐतिहासिक मस्जिद मुहम्मद के अध्यक्ष एवं इमाम तालिब एम शरीफ भी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इनमें भारतीय-अमेरिकी बच्चों ने भी प्रस्तुति दी और गीत-संगीत व नृत्य के जरिए भारत तथा दुनिया की संगीत विविधता को प्रदर्शित किया। प्रस्तुतियों में अफ्रीका, लातिन अमेरिका, चीन, यूरोप और पश्चिम एशिया समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृतियों को प्रदर्शित किया गया। इनके जरिए एकता और विविधता तथा 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) का संदेश दिया गया। दर्शकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और उत्साह बढ़ाने के तौर पर तालियां बजाईं। इनमें ढोल-ताशा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के जरिए संगीत प्रस्तुतियां भी शामिल थीं। इस अवसर पर 30 देशों के करीब 180 धार्मिक नेताओं ने पांच सूत्रीय 'कार्रवाई का आह्वान' जारी किया। इसमें कहा गया कि हमें ''शुरुआत खुद से करनी चाहिए'', ''एक-दूसरे के लिए खड़ा होना चाहिए'', ''जरूरत पड़ने से पहले रिश्ते बनाने चाहिए'', ''मिलकर सेवा करनी चाहिए'' और ''भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'' भागवत ने ''एकता की भावना के साथ विविधता को अपनाने और उससे समाज को समृद्ध बनाने'' के संदेश पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''विविधता स्वाभाविक है और एकता सत्य है। हमें इसे समझना होगा और इसी के अनुरूप अपने जीवन को ढालना होगा।</description><guid>3618</guid><pubDate>30-Aug-2026 12:31:46 am</pubDate></item><item><title>नासा की नयी अंतरिक्ष दूरबीन 16 लाख किलोमीटर लंबे सफर पर रवाना, ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाएगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3617</link><description>केप कैनावेरल (अमेरिका). नासा की सबसे नयी और अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन रविवार को अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गई। इसका उद्देश्य दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, रहस्यमयी 'डार्क एनर्जी' का अध्ययन करना और ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है। 'नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (नासा) में विज्ञान मिशन निदेशक निक्की फॉक्स ने कहा, ''यह दूरबीन हजारों सुपरनोवा, दसियों हजार ग्रहों, अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों की खोज करने में सक्षम होगी। अपने विशाल दृश्य क्षेत्र के कारण यह ऐसे काम कर पाएगी, जो हम पहले कभी नहीं कर सके।
स्पेसएक्स ने केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4.3 अरब डॉलर की लागत वाले 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' (रोमन अंतरिक्ष दूरबीन) को अत्यधिक शक्तिशाली फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया। यह दूरबीन 16 लाख किलोमीटर दूर उस स्थान के लिए रवाना हुई जहां नासा की एक अन्य प्रमुख अंतरिक्ष दूरबीन 'जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप' पहले से मौजूद है। बस के आकार वाली इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री दिवंगत नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। इसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा। वहां पहुंचने के बाद यह अंतरिक्ष के छिपे हुए हिस्सों की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीर पेश करेगी और ब्रह्मांड के अनजाने रहस्यों का पता लगाएगी। 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' का दृश्य क्षेत्र नासा की 'हबल स्पेस टेलीस्कोप' की तुलना में 100 गुना से भी अधिक बड़ा है। हबल 36 वर्षों से कक्षा में रहते हुए अंतरिक्ष की शानदार तस्वीरें भेज रही है। वहीं, जेम्स वेब दूरबीन ने कुछ वर्षों पहले इस अभियान में शामिल होकर ब्रह्मांड की शुरुआत से जुड़े बेहद पुराने खगोलीय पिंडों का अध्ययन शुरू किया था। ये तीनों अंतरिक्ष दूरबीनें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड अंतरिक्ष यान और चिली स्थित वेरा सी. रुबिन वेधशाला के साथ मिलकर ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को उजागर करने में मदद करेंगी। रोमन परियोजना की वरिष्ठ वैज्ञानिक जूली मैकएनेरी ने कहा, ''रोमन की विशाल पहुंच हमें अजीब, दुर्लभ और असामान्य चीजों को खोजने में मदद करेगी। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने की हमारी परिभाषा को बदल देगी।'' वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोमन दूरबीन ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से को बनाने वाले 'डार्क मैटर' और 'डार्क एनर्जी' के बारे में भी नयी जानकारी देगी। ये दोनों अब तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं। रोमन द्वारा तैयार आकाशगंगाओं की सूची से वैज्ञानिक को यह समझने में मदद मिलेगी कि इन अदृश्य शक्तियों के कारण ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैल रहा है। रोमन की सबसे बड़ी खासियत उसकी गति होगी। मैकएनेरी के अनुसार, रोमन जितने मिल्की वे (आकाशगंगा) के अवलोकन एक महीने में कर लेगी, उन्हें पूरा करने में हबल को करीब एक सदी लग सकती है। उन्होंने कहा कि रोमन हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद हिस्से का अब तक का सबसे गहरा अध्ययन कर सकेगी। इस दूरबीन में एक अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरा लगाया गया है, जिसकी संवेदनशीलता हबल जैसी है, लेकिन यह हबल से करीब 1,000 गुना तेजी से काम करेगा। इसके अलावा इसमें ऐसा उपकरण भी है, जो तारों की रोशनी को रोक सकेगा। इससे रोमन उन बेहद हल्के ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने में सक्षम हो सकती है, जो किसी तारे की परिक्रमा कर रहे हों। इस दूरबीन को भविष्य में ईंधन भरने के लिए भी डिजाइन किया गया है। यदि आने वाले दशक में कोई रोबोटिक ईंधन टैंकर उपलब्ध होता है, तो इससे रोमन का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।</description><guid>3617</guid><pubDate>30-Aug-2026 12:28:17 am</pubDate></item><item><title>वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत मजबूती से डटा रहा, किसानों और परिवारों को सुरक्षित रखा: सीतारमण</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3616</link><description>वाशिंगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशों में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखते हुए और देश की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर मजबूती से स्थिति का सामना किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, ''इसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों, भारतीय परिवारों और भारत की रसद व्यवस्था को नुकसान नहीं उठाना पड़ा।'' उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं गड़बड़ा गईं, लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण माहौल में अपने नागरिकों की रक्षा करने में सफलता हासिल की। सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारत ने सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है और इस साल भी वृद्धि इसी दायरे में रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, शुल्क संबंधी अनिश्चितताओं और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच हासिल हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखने के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को समझने की भारत की क्षमता ने देश को अनिश्चित माहौल में मजबूती से आगे बढ़ने में मदद की। राजकोषीय अनुशासन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''हमने एक लक्ष्य तय किया है कि 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 50 प्रतिशत के स्तर तक लाना है। इसलिए मैं उसी दिशा में काम करूंगी।'' उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं का कर्ज अभी भी उनके जीडीपी के 200 प्रतिशत से अधिक है। भारत ने राजकोषीय घाटे को लेकर भी अनुशासन का रास्ता अपनाया है और उसने तय लक्ष्य की दिशा में प्रगति की है। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके राजकोषीय अनुशासन को दुनिया ने देखा है। क्रेडिट रेटिंग के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें सुधार हो रहा है। यह सुधार सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों में कटौती करके नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से हो रहा है। सीतारमण ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इसके लिए करीब 20 वर्ष ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि जिस गति और स्तर पर सुधार हो रहे हैं, उसके लिए अधिक समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों से अधिक सहयोग चाहिए, जो आगे की दिशा के लिए सुझाव दे सकें। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अलावा देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूंजी के रूप में समर्थन भी बेहद जरूरी है।</description><guid>3616</guid><pubDate>30-Aug-2026 12:27:06 am</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने आईएसएस के अंतरिक्ष यात्रियों से बातचीत की, अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की घोषणा की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3615</link><description>वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नयी सैन्य अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की घोषणा की और ह्यूस्टन स्थित नासा के मिशन नियंत्रण केंद्र के दौरे के दौरान अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (स्टेशन) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों से बातचीत की, जिनमें अनिल मेनन भी शामिल हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को 'जॉनसन स्पेस सेंटर' के मिशन नियंत्रण केंद्र से आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्षयात्रियों से फोन पर बात करते हुए कहा, ''यह बहुत बड़े सम्मान की बात है, आपके साथ होना बहुत बड़ा सम्मान है और मैं बस जेसिका, अनिल तथा जैक का धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूँ - ये महान अमेरिकी, महान देशभक्त और बहादुर लोग हैं।'' नासा के अंतरिक्ष यात्री जैक हैथवे, अनिल मेनन और जेसिका मीर आईएसएस के लिए एक्सपिडिशन 75' का हिस्सा हैं। ट्रंप ने अंतरिक्ष खोज में प्रयासों के लिए संबंधित अंतरिक्षयात्रियों को ''अग्रदूतों का समूह'' करार दिया। उन्होंने नयी अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की भी घोषणा की।</description><guid>3615</guid><pubDate>30-Aug-2026 2:46:06 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल बाढ़: भारत की विशेषज्ञ टीम ने बचाव अभियान के लिए जलविद्युत सुरंगों का आकलन किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3614</link><description>काठमांडू. नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद के लिए भारत की 11 सदस्यीय तकनीकी टीम ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में मौके पर जाकर निरीक्षण किया। शुक्रवार को काठमांडू पहुंची इस टीम में चिकित्सक, चिकित्सा सहायक और अभियंता शामिल थे।
यह टीम शनिवार को नुवाकोट जिले के त्रिशूली पहुंची, ताकि एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के प्रयासों में मदद की जा सके। भारतीय दूतावास ने शनिवार को काठमांडू में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज भारत की विशेषज्ञ तकनीकी टीम ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में जलविद्युत सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया, ताकि वहां फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद की जा सके।'' राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चिलीमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण पूरा करने के बाद भारतीय टीम ने सुरंग के आसपास बचाव कार्य से जुड़े आवश्यक काम शुरू कर दिए। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने और मलबा हटाने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 82 सदस्यीय संयुक्त सुरक्षा दल ने शुक्रवार रात अभियान शुरू किया। सुरंग के प्रवेश द्वार पर जमा मिट्टी व मलबे और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने अब तक विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
</description><guid>3614</guid><pubDate>30-Aug-2026 2:37:23 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल में बाढ़ राहत व बचाव कार्यों में मदद के लिए 11 सदस्यीय भारतीय टीम काठमांडू पहुंची</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3612</link><description>काठमांडू. नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय टीम शनिवार को काठमांडू पहुंची। इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार के अनुरोध पर इस टीम को भेजा गया है, जिसमें चिकित्साकर्मी और बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम को नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण 500 से अधिक लोगों की जान चली गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने सुरक्षाबलों की अधिकतम तैनाती को ''प्राथमिकता'' देना चाहता है, जो स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार उन जटिल मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने के लिए तैयार है, जहां अत्यंत कठिन संरचनाओं के लिए विशेष तकनीकी कौशल की आवश्यकता है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल ऐसे होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।</description><guid>3612</guid><pubDate>29-Aug-2026 12:09:16 am</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर उज्बेकिस्तान पहुंचे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3611</link><description>ताशकंद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान पहुंचे। अपने दौरे के दौरान वह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा के दौरान हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। मोदी दो देशों उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा के पहले चरण में ताशकंद पहुंचे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना और इस क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंधों को और गहरा करना है। प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे। मोदी ने रवाना होने से पहले कहा, ''मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने तथा 'विकसित भारत' और 'नया उज्बेकिस्तान' के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए उत्सुक हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ताशकंद में शास्त्री स्मारक और 'ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ऑरिएनटल स्टडी' स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच कायम घनिष्ठ सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों के प्रति सम्मान के प्रतीक हैं। ताशकंद से प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।</description><guid>3611</guid><pubDate>29-Aug-2026 12:06:53 am</pubDate></item><item><title>वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण के लिए अमेरिका ने किया समझौता : ट्रंप</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3610</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उनके देश ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस समझौते के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बातचीत की थी। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला के साथ एक समझौता किया है जो दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा है!'' वेनेजुएला सरकार के प्रेस कार्यालय से संपर्क किया गया लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाने और उन पर मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े संघीय आरोपों में मुकदमा चलाने के लिए की गई कार्रवाई के करीब नौ महीने बाद इस समझौते की घोषणा हुई है। ट्रंप ने शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि वेनेजुएला के साथ हुआ यह समझौता एक निजी साझेदारी का हिस्सा है। 'व्हाइट हाउस' (अमेरिकी राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास एवं कार्यालय) ने इस सौदे में शामिल निजी क्षेत्र के साझेदारों के बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। साथ ही, यह व्यवस्था किस तरह काम करेगी, इसके बारे में भी कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शुक्रवार को 'एक्स' पर कहा कि यह समझौता वेनेजुएला में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निजी निवेश का रास्ता खोलेगा और अमेरिका में गैस की कीमतों में कमी लाएगा। रूबियो ने पोस्ट में कहा, यह समझौता अमेरिकी और वेनेजुएला के लोगों, दोनों के लिए एक बड़ी जीत है।</description><guid>3610</guid><pubDate>29-Aug-2026 12:06:09 am</pubDate></item><item><title>नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 675 हुई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3609</link><description>काठमांडू/ मध्य नेपाल में और शव बरामद होने के बाद अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है, जबकि आपदा के बाद 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। नेपाल पुलिस ने बताया कि तलाश एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी रहने के दौरान, प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किये गये। नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट हिमनद के टूटने के बाद हिमस्खलन जैसी घटना से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया, जिससे बुधवार को मध्य नेपाल में कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और जलविद्युत केंद्रों को नष्ट कर दिया। नेपाल पुलिस के एक बयान के अनुसार, अब तक भोटेकोशी बाढ़ के पीड़ितों के 675 शव आठ जिलों से बरामद किए जा चुके हैं। बयान के मुताबिक, बचावकर्मियों ने चितवन से 246, नवलपरासी पूर्व से 165, नवलपरासी पश्चिम से 63 और गोरखा से 57 शव बरामद किए हैं। इसके अनुसार इसी तरह, धादिंग जिले से 45, नुवाकोट से 51, तनहूं से 35 और रसुवा जिले से 13 शव बरामद किए गए हैं। शनिवार तक 2,400 से अधिक लोग लापता थे। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार नेपाल में बचाव दलों ने शनिवार को अभियान के चौथे दिन लगभग 2,500 फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। बचाव अभियान के लिए 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें 5,000 से अधिक नेपाली सेना के जवान शामिल हैं।</description><guid>3609</guid><pubDate>29-Aug-2026 12:05:38 am</pubDate></item><item><title>नेपाल में बाढ़ में मरने वालों की संख्या 359 हुई: पुलिस</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3608</link><description>काठमांडू. नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि बचाव दलों ने प्रभावित जिलों से अन्य शवों को बरामद किया, जिसके बाद मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ। तिब्बत से अचानक आयी भीषण बाढ़ ने बुधवार को मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ के तेज बहाव में महत्वपूर्ण पुल बह गए और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गईं।
बाढ़ का पानी कई जिलों में फैल गया। नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन समेत बाढ़ प्रभावित जिलों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभि नारायण काफले के अनुसार, चितवन जिले से सबसे अधिक 132 शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ रसुवा और अन्य जिलों से होते हुए त्रिशूली और नारायणी नदी के रास्ते निचले इलाकों में पहुंची, जिससे जलविद्युत परियोजनाओं, बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में करीब 826 लोग लापता हैं, जिनमें से 590 पर्यटक हैं। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बताया कि लापता लोगों में 288 भारतीय शामिल हैं।
नेपाल के अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के संशोधित विश्लेषण के अनुसार, ग्लेशियर के ढहने या हिमस्खलन के कारण यह विनाशकारी बाढ़ आई। हिमस्खलन के कारण भोटे कोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद यह बाढ़ आई और सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित तिमुरे इलाके में बाढ़ का कहर टूटा।</description><guid>3608</guid><pubDate>27-Aug-2026 12:04:53 am</pubDate></item><item><title>नेपाल में अचानक आई बाढ़ से करीब 160 लोगों की मौत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3605</link><description>-133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता
काठमांडू/ तिब्बत की सीमा के निकट मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, कई महत्वपूर्ण पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। 
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी। अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि अचानक आई बाढ़ में 157 लोगों की मौत हुई है।
नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं, जबकि चीन के सरकारी न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए। एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया, जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। 
एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की और उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नयी दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए। 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है। 
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं।
गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। इसके संस्थापक सद्गुरु ने कहा, आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों में से किसी के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।'' उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं।
उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में बारिश की वजह से नहीं आई।
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने दोपहर में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''चीन से मिली जानकारी के मुताबिक, नदी के बहाव में रुकावट वाली जगह पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह से नहीं निकला है, इसलिए भोटे कोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है।'' उसने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा।
एनडीआरआरएमए ने बाद में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''भोटे कोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है। लोगों से अपील की जाती है कि वे नदी से दूर रहें और अगली सूचना मिलने तक सुरक्षित जगहों पर ही रहें।'' 'काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए।
हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया। सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई, साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।
नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। नेपाल सेना ने त्रिशूली स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र संख्या एक में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्साकर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सहायता दे रहे हैं। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया। आपातकालीन राहत कार्यों में मदद के लिए पीपुल्स आर्म्ड पुलिस की शिगाजे टुकड़ी के कुल 145 अधिकारियों और जवानों को प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र में भेजा गया है। शी ने खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने और घायलों को समय पर इलाज मुहैया कराने को कहा ताकि जनहानि कम से कम हो। उन्होंने निगरानी और अग्रिम चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने, वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने और बाढ़ के बाद पैदा होने वाली अन्य आपदाओं से बचाव पर भी जोर दिया।</description><guid>3605</guid><pubDate>26-Aug-2026 1:07:56 am</pubDate></item></channel></rss>