<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>विदेश - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>पेंटागन ने ईरान से समझौता करने की अपील की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3335</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बृहस्पतिवार को ईरान से समझौता करने की अपील की। हेगसेथ ने पेंटागन में संवाददाताओं से कहा, ''आखिरकार, उन्हें (ईरान को) मेज पर आना ही होगा और समझौता करना ही होगा।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान के पास भविष्य में भी कभी परमाणु हथियार न हो।
हेगसेथ ने कहा, ''हम इसे अपने महान उपराष्ट्रपति और बातचीत करने वाली टीम के नेतृत्व में एक समझौते के माध्यम से अच्छे तरीके से करना पसंद करेंगे, अन्यथा हम इसे दूसरे तरीके से कर सकते हैं।'' ईरान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा है और उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। बाद में प्रेसवार्ता में, हेगसेथ ने ईरान की सरकार से कहा, ''मैं प्रार्थना करता हूं कि आप एक ऐसा समझौता चुनें, जो आपके लोगों की भलाई और दुनिया की भलाई के लिए आपकी समझ में हो।</description><guid>3335</guid><pubDate>16-Apr-2026 12:46:23 am</pubDate></item><item><title> बीबीसी में दो हजार नौकरियां जाएंगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3332</link><description>लंदन. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अगले दो वर्षों में अपने वार्षिक बजट का करीब 10 प्रतिशत, यानी लगभग 50 करोड़ पाउंड (करीब 67.7 करोड़ डॉलर) बचाने के लिए लगभग 2,000 नौकरियां खत्म करने की योजना बना रही है। कर्मचारियों के साथ हुई एक बैठक में घोषित योजना बीते एक दशक से अधिक समय में संस्था की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है। कार्यवाहक महानिदेशक रोडरी टालफन डेविस ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा, मुझे पता है कि इससे अनिश्चितता पैदा होगी, लेकिन हम इस चुनौती को लेकर पारदर्शी रहना चाहते हैं। डेविस ने कहा कि यह कटौती महंगाई, लाइसेंस शुल्क और वाणिज्यिक आय पर बढ़ते दबाव, तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के कारण की जा रही है। बीबीसी ने इस साल की शुरुआत में ही संकेत दिया था कि वह काफी वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है और 2029 तक अपने बजट में लगभग 10 प्रतिशत की कटौती करना चाहता है।
</description><guid>3332</guid><pubDate>16-Apr-2026 10:22:16 am</pubDate></item><item><title>सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए वीटो शक्ति वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार जरूरी: भारत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3331</link><description>संयुक्त राष्ट्र. भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई भी सुधार, यदि वीटो शक्ति वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी में विस्तार के साथ नहीं किया जाता है, तो संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई में मौजूदा असंतुलन और असमानताएं बनी रहेंगी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वीटो के साथ या उसके बिना एक नयी श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से जारी चर्चा जटिल हो जाएगी। उन्होंने कहा, ''दो मूलभूत कारण हैं, जिनकी वजह से संरचना असंतुलित बनती है और परिषद की वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं-ये हैं सदस्यता और वीटो अधिकार।'' हरीश ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर व्यापक सहमति है। 80 साल से अधिक पहले बनी इसकी संरचना आज की बदलती वैश्विक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।'' भारतीय राजदूत ने याद किया कि 1960 के दशक में परिषद में किये गए उस एकमात्र सुधार से वीटो का अधिकार रखने वाले देशों की ताकत और बढ़ गई जिसके तहत केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार किया गया था। तुलनात्मक रूप से देखें तो पहले वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 था, जिसे बाद में बदलकर 5:10 कर दिया गया। इससे वीटो का अधिकार रखने वाले देशों को अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा, कोई भी सुधार जिसके साथ वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार नहीं किया जाता, वह इस अनुपात को और बिगाड़ देगा और इस प्रकार मौजूदा असंतुलन और असमानताओं को कायम रखेगा। इसलिए, वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हरीश ने यह भी कहा कि वीटो अधिकार के साथ या उसके बिना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के ढांचे के तहत एक नई श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से चल रही चर्चा जटिल हो जाएगी। उन्होंने कहा, सुधारों के मार्ग को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के लिए सुधारों के दायरे को मौजूदा ढांचे तक सीमित रखना महत्वपूर्ण है। भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि वह परिषद में स्थायी सीट का हकदार है। उन्होंने कहा, अतीत में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां निर्वाचित सदस्यों ने केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करने के लिए अपने प्रभावी वीटो का प्रयोग करके बाधाएं उत्पन्न की हैं।</description><guid>3331</guid><pubDate>15-Apr-2026 1:12:18 am</pubDate></item><item><title>ईरान को हथियारों की आपूर्ति नहीं करने पर सहमत हुआ चीन : ट्रंप</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3330</link><description>काहिरा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि चीन, ईरान को हथियार नहीं देने पर सहमत हो गया है। उनका दावा ऐसे समय आया है जब खबरें है कि चीन हथियारों की आपूर्ति पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि चीन ''मेरे द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने से बहुत खुश है।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''उन्होंने(चीन ने) ईरान को हथियार न भेजने पर सहमति जताई है।'' ऐसा प्रतीत होता है कि वह इन दोनों बातों को आपस में जोड़ना चाह रहे थे। राष्ट्रपति ने मंगलवार को एक साक्षात्कारकर्ता को बताया था कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ईरान को हथियार भेजने से इनकार किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने हाल के दिनों में कई बार इन दावों का खंडन किया है कि देश ईरान को किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है।</description><guid>3330</guid><pubDate>15-Apr-2026 1:10:55 am</pubDate></item><item><title>ईरान युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी : ट्रंप</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3329</link><description>वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी। ट्रंप ने रविवार को 'फॉक्स न्यूज' की संवाददाता मारिया बार्टिरोमो के साथ साक्षात्कार में कहा था कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के चुनावों तक तेल-गैस की कीमतें समान रह सकती हैं या शायद थोड़ी बढ़ सकती हैं। हालांकि, मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' में बार्टिरोमो के साथ एक अन्य साक्षात्कार में ट्रंप ने दावा किया कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया। इस साक्षात्कार का प्रसारण बुधवार को किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि तेल की कीमत 92 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। उन्होंने ईरान युद्ध का जिक्र करते हुए कहा, जैसे ही यह खत्म होगा, इसमें (तेल की कीमतों) भारी गिरावट आएगी। और मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि गैस की कीमतें, जो मौजूदा समय में औसतन चार अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन से थोड़ी अधिक हैं, चुनाव तक काफी कम हो जाएंगी। उन्होंने ईरान युद्ध का फिर से जिक्र करते हुए कहा, जब यह मामला सुलझ जाएगा, तो गैस की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आएगी।</description><guid>3329</guid><pubDate>15-Apr-2026 1:10:08 am</pubDate></item><item><title>यूएन प्रमुख ने अमेरिका और ईरान से बातचीत जारी रखने की अपील की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3327</link><description>नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रखने की अपील की है। यह जानकारी उनके प्रवक्ता ने दी। प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक ने बताया कि पाकिस्तान में आयोजित इस्लामाबाद वार्ता में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हो सका, लेकिन बातचीत से यह साफ हुआ कि दोनों पक्ष गंभीरता से संवाद कर रहे हैं। इसे आगे की बातचीत के लिए एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना गया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं, इसलिए कोई समझौता तुरंत नहीं हो सकता। ऐसे में बातचीत को जारी रखना जरूरी है ताकि धीरे-धीरे समाधान निकल सके। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कई हफ्तों से चल रही तबाही और तनाव के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है।
प्रवक्ता ने कहा कि हफ्तों की तबाही और संकट के बाद, अब यह साफ हो गया है कि मौजूदा संघर्ष का कोई भी सैन्य समाधान नहीं है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, दुजारिक ने यह भी कहा कि संघर्ष-विराम (सीजफायर) को हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए, और इसका उल्लंघन करने वाली सभी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि महासचिव इस बात पर जोर देते हैं कि इस संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य सहित सभी समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।
प्रवक्ता ने बताया कि इस जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार में रुकावट आने का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक और उसके कच्चे माल की आपूर्ति में आई रुकावटों के कारण दुनिया भर में लाखों कमजोर लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का संकट और भी गहरा गया है; इसके अलावा, ईंधन, परिवहन और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के चलते जीवन-यापन की लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की योजना लागू करने का ऐलान किया, जो सोमवार से लागू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, फारस की खाड़ी में करीब 20,000 नाविक अभी भी जहाजों पर फंसे हुए हैं और उन्हें हर दिन बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।</description><guid>3327</guid><pubDate>14-Apr-2026 1:03:26 am</pubDate></item><item><title>भारतीय अर्थव्यवस्था के 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावनाः आईएमएफ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3326</link><description>वाशिंगटन.  अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में  बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में 6.5 प्रतिशत की  दर से बढ़ने की संभावना है। आईएमएफ ने अपनी 'वैश्विक आर्थिक परिदृश्य'  रिपोर्ट में यह अनुमान जताते हुए कहा कि इस साल 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर  के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली  अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मुद्राकोष ने भारत के संदर्भ में कहा, ''वर्ष 2026  के लिए वृद्धि अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की हल्की बढ़ोतरी की गई है।  इसके पीछे 2025 के मजबूत प्रदर्शन का असर और भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी  शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने जैसे कारक हैं। इन  कारकों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित  कर दिया है।'' रिपोर्ट के मुताबिक, यदि पश्चिम एशिया संघर्ष अपेक्षाकृत  अल्पकालिक रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में हल्की गिरावट  आ सकती है। इसके साथ ही मुद्राकोष ने वर्ष 2027 में भी भारतीय  अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान जताया।  साथ ही आईएमएफ ने 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.2  प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025 के अनुमानित 3.4 प्रतिशत से कम है।  बाजार विनिमय दरों के आधार पर वैश्विक उत्पादन 2026 और 2027 दोनों वर्षों  में 2.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। आईएमएफ ने कहा कि जनवरी,  2026 की तुलना में इस बार वैश्विक वृद्धि के अनुमान में सीमित कटौती करने  का यह कारण है कि संघर्ष से उत्पन्न नकारात्मक झटकों का असर कुछ हद तक  सकारात्मक कारकों- जैसे कम शुल्क, पहले से लागू नीतिगत समर्थन और 2025 के  अंत एवं 2026 की पहली तिमाही में अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन से  नियंत्रित हो रहा है।</description><guid>3326</guid><pubDate>14-Apr-2026 12:57:21 am</pubDate></item><item><title>भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है : चीन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3325</link><description>बीजिंग. चीन ने अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए नए नाम प्रकाशित करने के अपने कदम का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को काल्पनिक नाम देने के प्रयासों को रविवार को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि इस तरह के बेबुनियाद विमर्श गढ़ने की कोशिशें वास्तविकता को नहीं बदल सकतीं और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को पटरी से उतार सकती हैं। भारत की तीखी प्रतिक्रिया बीजिंग द्वारा अक्साई चिन में एक तीसरा नया प्रशासनिक क्षेत्र स्थापित करने की पृष्ठभूमि में आई है। इस इलाके को भारत अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''चीन की ओर से भारत के क्षेत्रों का काल्पनिक नाम देने के किसी भी प्रयास को भारत सिरे से खारिज करता है।'' जायसवाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में कहा कि जांगनान चीन का क्षेत्र है, और चीन ने कभी भी ''तथाकथित अरुणाचल प्रदेश'' को मान्यता नहीं दी है। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। गुओ ने कहा कि जांगनान क्षेत्र में कुछ स्थानों के नामों को मानकीकृत करना पूरी तरह से चीन की संप्रभुता के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा, ''वर्तमान में चीन-भारत संबंध सामान्यतः स्थिर हैं। चीन-भारत संबंधों को बेहतर बनाने और विकसित करने के लिए चीन की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।'' गुओ ने कहा, ''हम आशा करते हैं कि दोनों पक्ष एक ही दिशा में काम करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के लिए अधिक अनुकूल कदम उठाएंगे। चीन के शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र ने 26 मार्च को सेनलिंग काउंटी के गठन की घोषणा की, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और अफगानिस्तान के निकट स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पश्चिमी क्षेत्र के भी करीब है। काराकोरम पर्वत श्रृंखला के निकट स्थित सेनलिंग, मुख्य रूप से मुस्लिम उइगुर बहुल क्षेत्र शिनजियांग में चीन द्वारा स्थापित तीसरा नया काउंटी है। भारत ने पिछले साल हेआन और हेकांग काउंटी के गठन को लेकर चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके अधिकार क्षेत्र का कुछ हिस्सा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत आता है। चीन वर्ष 2017 से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अपने नाम प्रकाशित करता रहा है, जिस पर भारत लगातार आपत्ति जताता आया है। भारत का कहना है कि भारतीय क्षेत्र को दिए गए ''काल्पनिक नाम'' ''वास्तविकता'' को नहीं बदल सकते।</description><guid>3325</guid><pubDate>14-Apr-2026 12:53:15 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करने की घोषणा की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3324</link><description>इस्लामाबाद. अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। 'यूएस सेंट्रल कमांड' ने कहा कि यह नाकेबंदी ''सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी'' जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। युद्धविराम के बाद भी जलडमरूमध्य में यातायात सीमित रहा है। जानकारों के अनुसार युद्धविराम शुरू होने के बाद से 40 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया है।</description><guid>3324</guid><pubDate>13-Apr-2026 12:51:15 am</pubDate></item><item><title>रूस के विदेश मंत्री ईरान-अमेरिका संघर्ष, होर्मुज नाकेबंदी पर बातचीत के लिए चीन का दौरा करेंगे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3323</link><description>बीजिंग. वैश्विक ऊर्जा संकट के गहराने के बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पश्चिम एशिया संघर्ष के बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी पर चीनी नेतृत्व के साथ वार्ता के लिए मंगलवार को बीजिंग आएंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में बताया कि लावरोव चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग का दौरा करेंगे। उनकी दो-दिवसीय यात्रा चीन और अन्य देशों को ईरान की तेल आपूर्ति को बाधित करने के प्रयास के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में हो रही है। चीन वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता रहा है। ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कदम का बीजिंग पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका है। चीन, रूस के तेल और गैस का भी एक बड़ा आयातक है।
गुओ ने कहा कि लावरोव की यात्रा के दौरान, दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के साथ ही अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</description><guid>3323</guid><pubDate>13-Apr-2026 12:45:47 am</pubDate></item><item><title>राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की चेतावनी दी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3321</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद, अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के प्रवेश या निकास को रोकने के लिए ''तत्काल'' नाकेबंदी शुरू करेगी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ''नौसेना को निर्देश दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान को शुल्क (टोल) चुकाने वाले प्रत्येक जहाज की तलाश करे और उसे रोके। अवैध टोल चुकाने वाले किसी को भी समुद्र में सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं होगी।'' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हुई वार्ता में कोई समझौता नहीं होने के बाद अमेरिका ''उपयुक्त समय'' पर ईरान को ''खत्म करने'' को तैयार है।</description><guid>3321</guid><pubDate>12-Apr-2026 12:07:21 am</pubDate></item><item><title>आशा भोसले के निधन पर ब्रिटेन में संगीतकारों ने जताया शोक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3320</link><description>लंदन. मुंबई में रविवार को दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन की खबर के बाद उनके सम्मान में श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है। ब्रिटेन में प्रवासी समूहों और कलाकारों ने उनकी संगीत विरासत को याद किया। ब्रिटेन की मीडिया ने 92 वर्षीय गायिका को बॉलीवुड की आवाज बताते हुए आठ दशक से अधिक लंबे करियर और हजारों यादगार गीतों के जरिए उनके सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित किया। बीबीसी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा,  आशा भोसले की मखमली आवाज ने बेशुमार फिल्मी गीतों में जान डाली । बॉलीवुड में उनके व्यापक प्रभाव के कारण 1997 का हिट गीत ब्रिमफुल ऑफ आशा बना, और उन्हें ब्रिटिश संगीतकार बॉय जॉर्ज के साथ काम करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पहचान मिली। बीबीसी ने लिखा, उनकी आवाज में एक ऐसा आकर्षण था जो प्रशंसकों को नाचने और गुनगुनाने पर मजबूर कर देता था, जिसकी वजह से उनकी गायकी पीढ़ियों की पहचान बन गई। शुक्रवार को लंदन के एलेक्जेंड्रा पैलेस में अपने हालिया कॉन्सर्ट का समापन 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' जैसे गीतों के साथ करने वाले लंदन बॉलीवुड ऑर्केस्ट्रा (एलबीओ) ने बताया कि वह अपने आगामी ब्रैडफोर्ड, मैनचेस्टर और लीसेस्टर दौरे में भोसले के गीतों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि देगा। एलबीओ के संगीत निर्देशक टिम पोटियर ने कहा, आशा के गीत कॉन्सर्ट हॉल के माहौल को भावनात्मक रूप से बदल देते थे। हम उन्हें प्रस्तुति देते समय दर्शकों के और करीब महसूस करते थे।</description><guid>3320</guid><pubDate>12-Apr-2026 12:05:15 am</pubDate></item><item><title>ईरान के साथ 21 घंटे की वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हुई : अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3319</link><description>इस्लामाबाद. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने रविवार को बताया कि अमेरिका और ईरान इस्लामाबाद में हुई लंबी वार्ता के बाद पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। वेंस ने कहा कि 21 घंटे से अधिक समय के अथक प्रयासों के बावजूद दोनों पक्ष मतभेदों की खाई पाटने में असमर्थ रहे। वेंस ने कहा, ''हम 21 घंटे से इस पर काम कर रहे हैं और अच्छी खबर यह है कि हमारे बीच कई सार्थक चर्चाएं हुई हैं।'' उन्होंने कहा, ''बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।''
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने कहा, ''हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं कि हम किन बातों पर समझौता करने को तैयार हैं और किन पर नहीं।'' उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ''हमारी शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना है।''
जब उनसे यह बताने को कहा गया कि विवाद के प्रमुख मुद्दे क्या थे और ईरानियों ने किन बातों को ठुकराया तो उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। वेंस ने कहा, ''मैं अधिक विस्तार से नहीं बताऊंगा क्योंकि 21 घंटे तक बंद कमरे में बातचीत करने के बाद मैं सार्वजनिक रूप से बात नहीं करना चाहता लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें उनकी ओर से इस बात की स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे साधन हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिनसे वे बहुत जल्दी परमाणु हथियार हासिल कर सकें।'' वेंस ने कहा, ''हमने अभी तक ऐसा नहीं देखा है, हमें उम्मीद है कि हम ऐसा देखेंगे।'' ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को ''अत्यधिक मांगें और अनुचित अनुरोध'' नहीं करने चाहिए।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई इस वार्ता पर दुनिया भर की नजर थी। अमेरिका और ईरान के बीच यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली प्रत्यक्ष, उच्च स्तरीय बातचीत थी। वेंस ने कहा, ''हमने कई मुद्दों पर चर्चा की लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों।'' अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ''काफी लचीला और सहयोगी'' था लेकिन ''दुर्भाग्य से, हम आगे नहीं बढ़ सके।'' उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में थे।
वेंस ने कहा, ''हम नेक नीयत से बातचीत कर रहे थे और हम अपनी टीम के साथ लगातार संपर्क में थे। हम एक बहुत ही सरल प्रस्ताव के साथ विदा लेते हैं: आपसी सहमति का एक तरीका जो हमारा अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ''मुख्य लक्ष्य'' ईरान को ''परमाणु हथियार'' हासिल करने से रोकना है और ''हमने इन वार्ताओं के जरिये यही हासिल करने की कोशिश की है।'' वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की और उन्हें ''बेहतरीन मेजबान'' बताया। उन्होंने कहा, ''वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं। उन्होंने शानदार काम किया और हमारे एवं ईरानियों के बीच मतभेदों को पाटकर समझौते तक पहुंचने में मदद करने की वाकई कोशिश की।'' वेंस वार्ता के बाद वाशिंगटन रवाना हो गए और उन्होंने चर्चा को आगे बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया।
ईरान और अमेरिका दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद शनिवार को बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया। ईरानी पक्ष में विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत अन्य लोग शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि विशेषज्ञ स्तर की बातचीत में आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मुद्दों पर चर्चा हुई तथा लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि विवाद के प्रमुख मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, संपत्ति फ्रीज करना और लेबनान में इजराइली हमले के मुद्दे शामिल रहे। ईरान ने बातचीत के लिए 10 सूत्री योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी बलों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांग शामिल थी। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की अगुवाई की।
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद हुई थी जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार ठप पड़ गए हैं और व्यापक पैमाने पर व्यापार प्रभावित हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी 'एक्स' पर एक संदेश में पुष्टि की कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और ''दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों'' का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने लिखा, ''पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दे, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंध हटाने और ईरान के खिलाफ एवं क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विरोधी पक्ष की गंभीरता एवं सद्भावना, अत्यधिक मांगों और अनुचित आग्रहों से परहेज करने तथा ईरान के वैध अधिकारों एवं हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है।'' बकाई ने वार्ता की मेजबानी करने और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में किए गए सद्भावनापूर्ण प्रयासों के लिए ''पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य की सरकार और गर्मजोशी से भरे उसके नेक लोगों'' के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
-</description><guid>3319</guid><pubDate>12-Apr-2026 12:01:14 am</pubDate></item><item><title>भारत की आर्थिक विकास यात्रा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए एक बड़ा अवसर है: क्वात्रा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3318</link><description>न्यूयॉर्क/ह्यूस्टन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए एक बड़ा अवसर है और इस बात पर बल दिया कि अमेरिका इस साझेदारी में ''सबसे आगे और केंद्र में'' है तथा भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है। क्वात्रा ने ये टिप्पणियां शनिवार को कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स (एसआईपीए) के 'दीपक और नीरा राज सेंटर ऑन इंडियन इकोनॉमिक पॉलिसीज' द्वारा आयोजित कोलंबिया इंडियन इकोनॉमी समिट 2026: 'द क्वेस्ट फॉर ए डेवलप्ड इंडिया' में एक विशेष संबोधन के दौरान कीं। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और भारतीय प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ''भारत का आर्थिक विकास हमारी अपनी यात्रा है जो न केवल आर्थिक विकास और समृद्धि के हमारे मूलभूत सिद्धांतों के लिए है बल्कि यह हमारे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। अमेरिका हमारे सबसे महत्वपूर्ण व अहम साझेदारों में से एक है।'' द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए क्वात्रा ने कहा कि साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बदलते वैश्विक परिवर्तनों से निपटने में भारत-अमेरिका साझेदारी ''सबसे महत्वपूर्ण और सबसे निर्णायक'' साझेदारियों में से एक है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए अपने लोगों के लिए आर्थिक विकास और समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेगा। राजदूत ने कहा, ''हम भारत में अपनी यात्रा, अपने आर्थिक विकास, अपने समाज के विकास के एक परिवर्तनकारी दौर में हैं... साथ ही, हम वैश्विक बदलावों के संबंध में सीखने के लिहाज से एक अनूठे दौर में भी जी रहे हैं।'' उन्होंने यह दोहराया कि भारत अपनी प्राथमिकताओं को लेकर आश्वस्त है और 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करने पर दृढ़ता से केंद्रित है। मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के ''महत्व और सार'' पर बल देते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी में सरकार-से-सरकार, सरकार-से-व्यापार, व्यापार-से-व्यापार और लोगों-से-लोगों के संबंध शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''इन चार श्रेणियों के भीतर क्षेत्रीय विस्तार के संदर्भ में हमारे लिए एक प्रमुख खंड रणनीतिक राजनीतिक और सुरक्षा है।'' उन्होंने क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद), भारत-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारे और अमेरिका के साथ व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी जैसी पहलों के माध्यम से चुनौतियों और अवसरों की पुनर्कल्पना करने के प्रयासों का उल्लेख किया। क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में ''नेतृत्व स्तर का ध्यान'' रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को मौजूदा वैश्विक बदलावों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विकास यात्रा घरेलू स्तर पर संचालित होती है लेकिन यह एक बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के भीतर आगे बढ़ रही है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि क्वात्रा ने पिछले एक दशक में भारत के शासन सुधारों पर प्रकाश डाला है, जिन्होंने पारदर्शिता, व्यापार सुगमता और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। सम्मेलन को कई प्रख्यात अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने संबोधित किया। इनमें अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और राज सेंटर के निदेशक अरविंद पनागरिया, विश्व बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और विकास अर्थशास्त्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदरमित गिल, वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और कोलंबिया के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर विज्ञान के आरकेएस फैमिली प्रोफेसर विशाल मिश्रा शामिल थे। इससे पहले, भारतीय वाणिज्य दूतावास ने क्वात्रा और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और समुदाय के नेताओं के बीच एक विशेष संवाद का आयोजन किया। क्वात्रा ने व्यापार, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी पर अपने विचार साझा किए और भारत के निरंतर आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला। भारतीय दूतावास ने बताया कि उन्होंने ''समुदाय को एकजुट करने में'' प्रवासी संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशंस (एफआईए) के कार्यों की सराहना की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को स्वीकारा। 'द ग्रोथ ट्रायंगल' शीर्षक से एक सत्र में भाग लेते हुए ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत डी सी मंजुनाथ ने कहा कि सरकार, व्यापार और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के माध्यम से भारत-अमेरिका संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने भारत और टेक्सास के बीच बढ़ते सहयोग को व्यापक द्विपक्षीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस कार्यक्रम में भारत के बदलते नीतिगत परिदृश्य और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई जो देश की विकास गाथा में अकादमिक रुचि में वृद्धि को दर्शाता है।</description><guid>3318</guid><pubDate>12-Apr-2026 11:59:39 pm</pubDate></item><item><title>चंद्रमा के चारों ओर आर्टेमिस-2 की यात्रा पूरी, पृथ्वी पर हुई वापसी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3317</link><description>ह्यूस्टन । आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्रियों के शुक्रवार को प्रशांत महासागर में उतरने के साथ ही आधी सदी से अधिक समय बाद मनुष्य की पहली चंद्र यात्रा पूरी हो गई। चार अंतरिक्ष यात्रियों वाला दल सफल चंद्र मिशन के बाद पृथ्वी पर लौटा। इस मिशन के दौरान उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को देखा, जिसे पहले कभी इतने करीब से नहीं देखा गया था और इसने मानव इतिहास में सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। इस दौरान पूर्ण सूर्य ग्रहण भी दिखाई दिया। आर्टेमिस-2 चंद्रमा पर नहीं उतरा और न ही उसकी परिक्रमा की लेकिन उसने अपोलो 13 के दूरी के रिकॉर्ड को तोड़ दिया और पृथ्वी से मानव द्वारा की गई अब तक की सबसे लंबी यात्रा का उस समय रिकॉर्ड बनाया, जब चालक दल 252,756 मील (406,771 किमी) की दूरी तक पहुंचा। कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन 'मैक 33' यानी ध्वनि की गति से 33 गुना अधिक रफ्तार से वायुमंडल में दाखिल हुए। 'इंटीग्रिटी' नामक उनका ओरियन कैप्सूल स्वचालित प्रणाली के सहारे समुद्र में उतरा। मिशन नियंत्रण कक्ष में उस समय तनाव बढ़ गया जब अत्यधिक ताप के दौरान कैप्सूल लाल गर्म प्लाज्मा से घिर गया और तय योजना के अनुसार कुछ समय के लिए उससे संपर्क टूट गया। सबकी निगाहें कैप्सूल की जीवनरक्षक ऊष्मा-रोधी ढाल पर थीं, जिसे पुन: प्रवेश के दौरान हजारों डिग्री तापमान सहना था। मिशन नियंत्रण कक्ष के दर्शक कक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों के परिजन भी मौजूद थे। संचार अवरोध की अवधि समाप्त होने के बाद जब कैप्सूल फिर दिखाई दिया और करीब 2,000 मील (3,219 किलोमीटर) दूर समुद्र में उतरा तो लोग खुशी से झूठ उठे।
</description><guid>3317</guid><pubDate>11-Apr-2026 11:42:33 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली व पूर्व गृह मंत्री लेखक जमानत पर रिहा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3315</link><description>काठमांडू, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को बृहस्पतिवार को निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष ओली और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लेखक को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए 'जेन जेड' आंदोलन को दबाने में कथित संलिप्तता के लिए पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। इस आंदोलन के दौरान 76 लोग मारे गये थे। 'जेन जेड' उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है।

उच्चतम न्यायालय की एक संयुक्त पीठ ने सोमवार को अधिकारियों को आदेश दिया कि वे ओली और लेखक के खिलाफ जांच बृहस्पतिवार तक पूरी करें या उन्हें हिरासत से रिहा कर दें। इस पीठ में न्यायमूर्ति बिनोद शर्मा और न्यायमूर्ति सुनील कुमार पोखरेल शामिल थे।

काठमांडू पुलिस के प्रवक्ता पवन कुमार भट्टराई ने बताया कि ओली (75) और लेखक (62) को इस शर्त पर रिहा किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर वे जांच अधिकारियों के समक्ष पेश होंगे। रिहाई के तुरंत बाद ओली ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, ''अधिकारियों द्वारा पूर्वाग्रह और प्रतिशोधात्मक हिरासत में रखे जाने के 13 दिनों के बाद अंततः मुझे रिहा कर दिया गया है। मेरे खिलाफ कानूनी मामला चलाने के लिए कोई उचित आधार और सबूत न होने के कारण मुझे रिहा किया गया है।''</description><guid>3315</guid><pubDate>10-Apr-2026 2:16:08 pm</pubDate></item><item><title> डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी: होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर शुल्क वसूली बर्दाश्त नहीं होगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3314</link><description>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल शिपमेंट को सीमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन हो रहा है। साथ ही, ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों से किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा, ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे बेईमानी भी कह सकते हैं। हमारा समझौता बिल्कुल ऐसा नहीं था।
उनकी यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि संघर्षविराम शुरू होने के बाद से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सिर्फ कुछ ही जहाज गुजर पाए, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा गया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों से शुल्क वसूल सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क वसूल रहा है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो इसे तुरंत बंद करना होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप की इन टिप्पणियों से संघर्ष-विराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस मामले में कोई सीधा कदम उठाएगा या नहीं।
गौरतलब है कि इससे पहले खुद राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी टोल लगाने का विचार भी व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा कथित शुल्क वसूली की जानकारी उन्हें हाल ही में मिली है।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि कुछ शर्तों के तहत सुरक्षित मार्ग संभव है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जहाजों का आवागमन तभी होगा जब ईरान की सेना के साथ समन्वय किया जाए और तकनीकी सीमाओं का ध्यान रखा जाए। विश्लेषकों का मानना है कि यह रुख पहले जैसा ही है।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे भारत समेत ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए कोई भी रुकावट एक बड़ी चिंता बन जाती है।
भारत, जो कच्चे तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है, पारंपरिक रूप से खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी मानता रहा है। होर्मुज ट्रैफिक में कोई भी लंबे समय तक रुकावट तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर डाल सकती है, जिसका असर महंगाई और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
</description><guid>3314</guid><pubDate>10-Apr-2026 11:29:25 am</pubDate></item><item><title>अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दिसंबर तिमाही में धीमी पड़कर 0.5 प्रतिशत पर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3312</link><description>वाशिंगटन. अमेरिकी अर्थव्यवस्था अक्टूबर-दिसंबर, 2025 की तिमाही में सुस्त पड़कर सिर्फ आधा प्रतिशत की दर से बढ़ी जो 0.7 प्रतिशत के सरकारी पूर्वानुमान से कम है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 0.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा जबकि जुलाई-सितंबर तिमाही में यह 4.4 प्रतिशत और अप्रैल-जून तिमाही में 3.8 प्रतिशत बढ़ा था। इस तरह, वर्ष 2025 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि दर धीमी होकर 2.1 प्रतिशत पर आ गई जबकि 2024 में यह 2.8 प्रतिशत और 2023 में 2.9 प्रतिशत थी। छह सप्ताह तक सरकारी कामकाज बंद होने (शटडाउन) से संघीय सरकार के खर्च और निवेश में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि में 1.16 प्रतिशत अंक की कमी आई है। इस दौरान उपभोक्ता खर्च 1.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा जो पिछले अनुमान और दूसरी तिमाही की 3.5 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले कम है। वैश्विक व्यापार पर असर डालने वाले पश्चिम एशियाई तनाव और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से चालू वर्ष के आर्थिक परिदृश्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा रोजगार बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है। जनवरी 2026 में 1.60 लाख नौकरियां जुड़ीं, फरवरी में 1.33 लाख नौकरियां घटीं, जबकि मार्च में 1.78 लाख नई नौकरियां सृजित हुईं। श्रम विभाग ने कहा कि चार अप्रैल को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या 16,000 बढ़कर 2,19,000 हो गई, जो एक सप्ताह पहले 2,03,000 थी।</description><guid>3312</guid><pubDate>09-Apr-2026 12:41:21 am</pubDate></item><item><title>ईरान के साथ अमेरिका के युद्धविराम का इजराइल समर्थन करता है : नेतन्याहू</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3309</link><description>तेल अवीव. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश ईरान के साथ अमेरिका के युद्धविराम का समर्थन करता है, लेकिन इस समझौते में लेबनान में हिज्बुल्ला के खिलाफ लड़ाई शामिल नहीं है। नेतन्याहू के कार्यालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इजराइल ईरान के खिलाफ दो सप्ताह तक हमले रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का समर्थन करता है, बशर्ते ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दे और अमेरिका, इजराइल तथा क्षेत्र के देशों पर सभी हमले बंद कर दे। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि इजराइल भी यह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करता है कि ईरान अब परमाणु या मिसाइल का खतरा न बने।</description><guid>3309</guid><pubDate>08-Apr-2026 12:07:11 am</pubDate></item><item><title>यह क्षण पश्चिम एशिया के लिए नए स्वर्ण युग की शुरुआत का संकेत हो सकता है: ट्रंप</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3308</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में युद्धविराम समझौते को ''विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन'' घोषित किया और कहा कि अमेरिका ''होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के यातायात की भीड़ को कम करने में मदद करेगा।'' ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ''बहुत सारे सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे!''
उन्होंने कहा, ''इससे खूब आय होगी। ईरान पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू कर सकता है। हम हर तरह की आपूर्ति लेकर जाएंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए वहीं मौजूद रहेंगे कि सब कुछ ठीक से चले। मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा ही होगा।'' ट्रंप की 'ट्रुथ सोशल' वेबसाइट पर दिए गए संदेश से वाशिंगटन की इस चिंता का संकेत मिलता है कि ईरान फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जिससे शांति काल में कुल तेल और प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।</description><guid>3308</guid><pubDate>08-Apr-2026 11:58:33 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति जताई, इस्लामाबाद में वार्ता की संभावना</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3306</link><description> वाशिंगटन/तेहरान । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद की निर्धारित की हुई समय-सीमा खत्म होने से करीब 90 मिनट पहले घोषणा की कि अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति जताई है।ट्रंप ने मंगलवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा की। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ईरानी सभ्यता को खत्म करने की ट्रंप की धमकी को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बातचीत कर अनुरोध किया कि मैं आज रात ईरान के खिलाफ होने वाली विनाशकारी कार्रवाई को रोक दूं लेकिन इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने पर सहमत हो।ट्रंप ने कहा, मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने पर सहमत हूं। उन्होंने कहा कि यह दोनों पक्षों का संघर्षविराम होगा।
तेहरान में, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि उसने दो सप्ताह के संघर्षविराम को स्वीकार कर लिया है और वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत करेगा।इस्लामाबाद में, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया, ताकि सभी विवादों के समाधान के लिए आगे बातचीत की जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि आमने-सामने बातचीत को लेकर चर्चा जारी है, लेकिन जब तक राष्ट्रपति या व्हाइट हाउस आधिकारिक घोषणा नहीं करते, तब तक कुछ भी तय नहीं है।ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका को ईरान से 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव मिला है, जिसे वह बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार मानते हैं।
उन्होंने कहा कि दो सप्ताह के संघर्षविराम का उपयोग एक बड़े समझौते पर बातचीत के लिए किया जाएगा, जिससे युद्ध को समाप्त किया जा सके।
ट्रंप ने कहा, ऐसा करने का कारण यह है कि हमने सभी सैन्य लक्ष्यों को पहले ही हासिल कर लिया है और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति तथा पश्चिम एशिया में शांति को लेकर एक ठोस समझौते के काफी करीब हैं।उन्होंने कहा, हमें ईरान से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है और हम मानते हैं कि यह बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले के लगभग सभी विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो सप्ताह का समय समझौते को अंतिम रूप देने में मददगार साबित होगा।ट्रंप ने कहा, अमेरिका की ओर से, राष्ट्रपति के रूप में और पश्चिम एशिया के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि यह लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा समाधान के करीब है।ट्रंप ने पोस्ट में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का बयान भी साझा किया, जिसमें संघर्षविराम की पुष्टि की गई थी।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, अगर ईरान के खिलाफ हमले रोके जाते हैं, तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं भी अपने रक्षात्मक अभियान रोक देंगी।
उन्होंने कहा कि अगले दो हफ्तों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना ईरानी सैन्य समन्वय के तहत संभव होगा।ईरान द्वारा फारसी में जारी 10 सूत्री संघर्षविराम योजना में उसके परमाणु कार्यक्रम के लिए संवर्धन की स्वीकृति का जिक्र किया गया है, लेकिन यह वाक्यांश अंग्रेजी संस्करण में नहीं था, जो ईरानी राजनयिकों ने पत्रकारों के साथ साझा किया।
एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान और ओमान दोनों को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की अनुमति होगी। अधिकारी ने कहा कि ईरान इस धन का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए करेगा।संघर्षविराम के बदले ईरान की मांगों में क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और उसकी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाना है।व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, इजराइल भी संघर्षविराम के लिए सहमत हो गया है।इस बीच, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बुधवार तड़के मिसाइल अलर्ट जारी हुए।
अधिकारियों ने बताया कि यूएई की राजधानी अबू धाबी में एक गैस प्रोसेसिंग संयंत्र में ईरान के हमले के बाद आग लग गई।
इजराइल में किस जगह को निशाना बनाया गया, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका, जबकि युद्ध के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों का सबसे ज्यादा असर वहीं देखा गया था।
बुधवार सुबह सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में भी मिसाइल अलर्ट जारी हुए, जो कूटनीतिक प्रयासों के बीच बनी अव्यवस्था की स्थिति को दर्शाते हैं।</description><guid>3306</guid><pubDate>08-Apr-2026 5:29:29 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप  का बड़ा बयान: विश्व शांति की दिशा में ऐतिहासिक दिन, ईरान अब पुनर्निर्माण कर सकता है</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3305</link><description> वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे दुनिया में शांति के लिए बड़ा दिन बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब इस स्थिति से थक चुका है और वह भी शांति चाहता है, ऐसे में अब तेहरान पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के ट्रैफिक को संभालने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिक वहां मौजूद रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ सही तरीके से चलता रहे।
ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, यह दुनिया की शांति के लिए बड़ा दिन है। क्योंकि वे अब काफी कुछ झेल चुके हैं। अमेरिका इस दौरान हर तरह की मदद करेगा। हम हर तरह की जरूरी सप्लाई पहुंचाएंगे और वहां मौजूद रहेंगे ताकि हालात सामान्य बने रहें। मुझे पूरा भरोसा है कि सब ठीक होगा। जैसे अमेरिका में हम गोल्डन एज देख रहे हैं, वैसे ही यह मध्य पूर्व के लिए भी एक नया दौर साबित हो सकता है।
इससे पहले, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमले से पीछे हटते हुए दो हफ्ते का अस्थायी विराम घोषित किया था। यह फैसला उस शर्त पर लिया गया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह, सुरक्षित और तुरंत खोलेगा। इस घोषणा से पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिली है।
बताया जा रहा है कि यह निर्णय ट्रंप द्वारा तय किए गए रात 8 बजे (ईएसटी) के डेडलाइन से महज 90 मिनट पहले लिया गया। इसके पीछे पर्दे के पीछे की कूटनीति की अहम भूमिका रही। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के बाद दोनों तरफ से सीजफायर की स्थिति बनी है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जो बातचीत के लिए एक मजबूत आधार है।
ट्रंप ने कहा कि अधिकांश विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और यह दो हफ्तों का समय समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बेहद अहम होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सीजफायर पूरी तरह शर्तों पर आधारित है और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर निर्भर करेगा।
वहीं, सईद अब्बास अरागची ने भी संकेत दिए हैं कि अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो उसकी सेनाएं भी अपनी कार्रवाई रोक देंगी। उन्होंने कहा कि दो हफ्तों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय जरूरी होगा। गौरतलब है कि इससे पहले हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है। ऐसे में यह सीजफायर वैश्विक स्तर पर राहत की खबर बनकर सामने आया है।</description><guid>3305</guid><pubDate>08-Apr-2026 5:17:58 pm</pubDate></item><item><title>ईरान युद्ध विराम की घोषणा : ट्रंप के फैसले पर अमेरिका में मिली-जुली प्रतिक्रिया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3304</link><description>वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्ष-विराम की घोषणा ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में तीखी और बंटी हुई प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। कुछ सांसद कूटनीति का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ ने इसे लेकर सचेत रहने के लिए कहा है।
घोषणा के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर काम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति देने पर सहमति जताई है। रिपब्लिकन लॉमेकर मॉर्गन ग्रिफ़िथ ने इस कदम का स्वागत किया और बातचीत के लिए मजबूर करने का श्रेय सैन्य दबाव को दिया। उन्होंने कहा, ईरान के साथ संघर्ष-विराम समझौता करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना की जानी चाहिए। अमेरिकी सशस्त्र बलों के बेहतरीन प्रयासों की बदौलत, ईरान पंगु हो गया है और उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
ग्रिफ़िथ ने अमेरिका के एक प्रमुख उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा: मैं ऐसी बातचीत का समर्थन करता हूं जिसका परिणाम यह हो कि ईरान के पास कभी भी परमाणु क्षमताएं न हों। साथ ही, मैं उन अमेरिकियों के लिए प्रार्थना कर रहा हूं जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान दे दी, और उनके परिवारों के लिए भी। उनकी सेवा की सराहना की जानी चाहिए।
पेन्सिलवेनिया के लॉमेकर ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने इस संघर्ष-विराम को एक सतर्क लेकिन आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा, कूटनीति हमेशा हमारा उद्देश्य होनी चाहिए। यह अस्थायी संघर्ष-विराम समझौता उस दिशा में एक रचनात्मक कदम है, और हम घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखना जारी रखेंगे। कोई भी ऐसा कदम जो अमेरिकी नागरिकों की जान बचाता हो और गंभीर शांति वार्ता के लिए जगह बनाता हो, वह सही रास्ता है। हालांकि सावधानी बरतना अभी भी जरूरी है।
उन्होंने ईरान को लेकर अपनी पुरानी चिंताओं को दोहराते हुए कहा: इस शासन से पैदा होने वाले खतरे को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं हो सकती। इसे कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने निगरानी पर भी ज़ोर दिया और कहा कि कांग्रेस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़े, कांग्रेस द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाए।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कूटनीति के प्रति सतर्क समर्थन का संकेत दिया, लेकिन जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, अगर कूटनीति से ईरान के आतंकवादी शासन के संबंध में सही परिणाम निकलता है, तो मैं उसे ही प्राथमिकता दूंगा। कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश में शामिल सभी लोगों की कड़ी मेहनत की मैं सराहना करता हूं। हालांकि अभी मैं इस बात को लेकर बेहद सतर्क हूं कि क्या सच है और क्या मनगढ़ंत। हर पहलू को अच्छी तरह से परख लेना चाहिए।
इंडियाना के लॉमेकर फ्रैंक मृवान ने प्रशासन पर बिना किसी स्पष्ट औचित्य के काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ईरान में राष्ट्रपति के एकतरफ़ा कदम गलत हैं, और उनकी खतरनाक बयानबाजी एक बुरी स्थिति को और भी बदतर बना रही है। हालांकि मैं प्रशासन द्वारा युद्ध विराम की घोषणा को स्वीकार करता हूं, लेकिन सच तो यह है कि कोई ऐसा खतरा नहीं मंडरा रहा था। युद्ध में हमारे कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं थे। इसका कोई अंत नज़र नहीं आ रहा था और हमारे सैनिक अभी भी खतरे में बने हुए हैं। मर्वान ने आगे कहा कि अमेरिकी लोग पहले से ही गैस पंप और किराने की दुकानों पर इसके नतीजे भुगत रहे हैं।
ऐसे ही कैलिफ़ोर्निया के कांग्रेसी केविन काइली ने अमेरिका के आचरण और कांग्रेस के अधिकार को लेकर व्यापक चिंताएं जताईं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, अमेरिका सभ्यताओं को नष्ट नहीं करता। और न ही हम किसी तरह की बातचीत की रणनीति के तौर पर ऐसा करने की धमकी देते हैं। चल रहे सैन्य अभियानों के संबंध में निगरानी करना कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है।
वहीं, सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने राष्ट्रपति की बयानबाजी की आलोचना करते हुए चेतावनी दी। उन्होंने कहा, इस तरह की बयानबाजी उन आदर्शों का अपमान है जिन्हें हमारा देश लगभग 250 वर्षों से दुनिया भर में बनाए रखने और बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। यह विदेशों और देश के भीतर, दोनों जगहों पर अमेरिकियों को सीधे तौर पर खतरे में डालता है।
एरिज़ोना के सीनेटर रूबेन गैलेगो ने भी इसी चिंता को दोहराया। उन्होंने कहा, ट्रंप का पूरी सभ्यता को खत्म करने की धमकी देना उन सभी मूल्यों का अपमान है जिनके लिए हम खड़े हैं और यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है। बता दें कि यह युद्ध विराम खाड़ी क्षेत्र में बढ़े हुए तनाव के बीच आया है, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग बना हुआ है। वहां किसी भी तरह की रुकावट का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर तत्काल असर पड़ता है, जिसमें भारत भी शामिल है, जो इस क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।</description><guid>3304</guid><pubDate>08-Apr-2026 5:14:52 pm</pubDate></item><item><title>जेलेंस्की ने रूस को ईस्टर अवकाश के दौरान हमले रोकने का प्रस्ताव दिया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3302</link><description>कीव. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि उनके देश ने रूस को आगामी सप्ताहांत में ईस्टर अवकाश के दौरान एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का प्रस्ताव दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया, जो रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोमवार देर रात एक सार्वजनिक संबोधन में कहा, ''अगर रूस हमारे ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने के लिए तैयार है, तो हम भी उसी तरह कदम उठाने के लिए तैयार रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ''अमेरिका के माध्यम से भेजा गया यह प्रस्ताव पहले ही रूसी पक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है।'' रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल ईस्टर के दौरान एकतरफा रूप से 30 घंटे के युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इस बीच, यूक्रेन के अधिकारियों ने कहा कि दक्षिणी शहर खेरसोन में एक आवासीय इमारत पर हुए हमले में तीन लोग मारे गए और तीन अन्य घायल हो गए। वहीं, पूर्वी शहर सिनेलनिकोव के पास एक ड्रोन हमले में 11 वर्षीय लड़के की मौत हो गई।</description><guid>3302</guid><pubDate>08-Apr-2026 1:08:44 pm</pubDate></item><item><title>ईरान के शासन को कुचल रहा है इजराइल, हमला ईरानी जनता के खिलाफ नहीं: नेतन्याहू</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3301</link><description>यरूशलम.इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि उनका देश ''ईरान में शासन को पूरी ताकत से कुचल रहा है'' और यह भी कहा कि तेहरान के खिलाफ इजराइली हमला वहां के लोगों के खिलाफ नहीं है। नेतन्याहू ने कहा, ''मैं आपको लगातार बताता रहता हूं कि हम ईरान में आतंकवादी शासन को कुचल रहे हैं। लेकिन हम यह और भी अधिक जोरदार तरीके से कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''कल हमारे पायलटों ने ईरानी वायुसेना के अड्डे पर परिवहन विमानों और दर्जनों हेलीकॉप्टरों को नष्ट कर दिया। आज उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रेल पटरियों और पुलों पर हमला किया। वे इनका इस्तेमाल हथियारों के लिए कच्चे माल, हथियारों और उन लोगों को ले जाने के लिए करते हैं जो हम पर, अमेरिका पर और इस क्षेत्र के देशों पर हमला करते हैं। ये वही लोग हैं जो ईरानी जनता पर भी अत्याचार करते हैं।'' नेतन्याहू ने कहा, ''ये कार्रवाइयां, जिन्हें मैंने रक्षा मंत्री के साथ मिलकर मंजूरी दी है, ईरानी जनता पर हमला करने के इरादे से नहीं की गई हैं।''</description><guid>3301</guid><pubDate>08-Apr-2026 1:07:07 pm</pubDate></item><item><title>आर्टेमिस-2 ने अपोलो 13 के दूरी के रिकॉर्ड को तोड़ा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3299</link><description>ह्यूस्टन. नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की ओर उड़ान के दौरान पृथ्वी से सबसे दूर तक जाने वाले मानव बनने का सोमवार को रिकॉर्ड बना दिया। यह मिशन चांद के दूरस्थ पक्ष के अद्भुत दृश्य पेश करता है, जिन्हें कभी भी पहले नहीं देखा गया। छह घंटे की यह उड़ान अपोलो युग के बाद चंद्रमा पर जाने के नासा मिशन का मुख्य आकर्षण है। उड़ान में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। यह मात्र दो वर्षों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पदचिह्न छोड़ने की दिशा में एक कदम है। आर्टेमिस-2 के कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और हैनसेन चंद्रमा के पास से घूमकर सीधे पृथ्वी पर लौटेंगे। वे अपोलो-13 के 1970 के दूरी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए पृथ्वी से सबसे दूर जाने वाले मानव बन गए हैं। उड़ान के अंत में 10 अप्रैल को पृथ्वी के वायुमंडल में वापसी के दौरान वे सबसे तेज गति से लौटने वाले इंसान भी बन सकते हैं। </description><guid>3299</guid><pubDate>07-Apr-2026 6:20:50 pm</pubDate></item><item><title>ईरान युद्ध लाखों लोगों तक भोजन, दवा की पहुंच बाधित कर रहा: सहायता समूहों की चेतावनी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3297</link><description>तेल अवीव. सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने दुनिया भर में लाखों जरूरतमंद लोगों तक भोजन और दवा पहुंचाने के उनके प्रयासों को पूरी तरह से बाधित कर दिया है, और यदि हिंसा जारी रहती है तो पीड़ा और भी बढ़ जाएगी। इस संघर्ष ने न केवल महत्वपूर्ण नौवहन मार्गों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, बल्कि इसने सहायता समूहों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी बाधित कर दिया है, जिससे उन्हें अधिक महंगे और समय लेने वाले मार्गों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख जल मार्ग लगभग पूरी तरह से बंद हो गए हैं और दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे रणनीतिक केंद्रों से आने वाले जल मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। ईंधन और बीमा दरों में वृद्धि के कारण परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसका अर्थ है कि उतने ही खर्च पर कम आपूर्ति होगी। विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि उसके पास हजारों मीट्रिक टन भोजन सामग्री परिवहन मार्ग में फंसी है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी के पास युद्धग्रस्त सूडान के लिए 1,30,000 अमेरिकी डॉलर मूल्य की दवाएं दुबई में फंसी हुई हैं और सोमालिया में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए खाद्य सामग्री की लगभग 670 पेटियां भारत में फंसी हुई हैं। विदेशी सहायता में अमेरिका द्वारा की गई भारी कटौती पहले ही कई सहायता समूहों को पंगु कर चुका है।</description><guid>3297</guid><pubDate>05-Apr-2026 9:53:46 pm</pubDate></item><item><title>भारतवंशी रिनी संपत वाशिंगटन डीसी की मेयर बनने की दौड़ में शामिल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3295</link><description>वाशिंगटन. तमिलनाडु में जन्मीं रिनी संपत वाशिंगटन डीसी के मेयर पद के चुनाव में हिस्सा लेने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन गई हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की 31 वर्षीय सरकारी अनुबंधक का चुनाव अभियान 'बुनियादी चीजों को ठीक करो' के विषय और 'एक नए डीसी' के वादे पर आधारित है। संपत ने अपनी चुनावी वेबसाइट पर कहा, ''मैं कोई नेता नहीं हूं। मेरा किसी विशेष हित समूह से कोई संबंध नहीं है। अब समय आ गया है कि कोई बाहर का व्यक्ति हमारे शहर की बुनियादी सेवाओं को सुधारने पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करे।'' तमिलनाडु के थेनी में जन्मीं संपत सात साल की उम्र में अमेरिका आ गईं और एक दशक से अधिक समय से वाशिंगटन डीसी में रह रही हैं। उन्होंने कहा, ''यह स्पष्ट है कि हमारे पास जीत की एक वास्तविक राह है। महज चार हफ्तों में मैं वाशिंगटन डीसी के इतिहास में मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन चुकी हूं। यही वह उपलब्धि है जो एक सीमित संसाधनों वाला, जन-समर्थित अभियान हासिल कर सकता है। कल्पना कीजिए कि अगर हमारे पास पूरे शहर के हर मतदाता तक पहुंचने के लिए संसाधन हों, तो हम क्या कर सकते हैं।'' वॉशिंगटन डीसी में डेमोक्रेट्स का दबदबा है और 1975 में चुनाव शुरू होने के बाद से शहर में कभी रिपब्लिकन पार्टी से कोई मेयर नहीं रहा है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त आयुक्तों का एक बोर्ड वाशिंगटन डीसी के प्रशासन का जिम्मा संभालता था। डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया का प्रशासन जनता द्वारा चुने गए मेयर और 13 सदस्यीय जिला परिषद द्वारा किया जाता है। संपत ने कहा, ''डीसी के मेयर के रूप में मेरी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा शहर अपने निवासियों के प्रति अपनी बुनियादी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे। सड़कों के गड्ढे भरें। पोटोमैक नदी में विनाशकारी अपशिष्ट जल रिसाव को रोकें। कीमतें कम करें। पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर प्रतीक्षा समय में सुधार करें।'' प्राइमरी चुनाव 16 जून को निर्धारित हैं, जबकि आम चुनाव तीन नवंबर को होंगे। मेयर पद की दौड़ में जेनीस लुईस जॉर्ज, केनियन मैकडफी, गैरी गुडवेदर, रॉबर्ट एल ग्रॉस और रोंडा हैमिल्टन शामिल हैं। </description><guid>3295</guid><pubDate>04-Apr-2026 12:53:27 am</pubDate></item><item><title>भूकंप और बारिश से राज कपूर की ऐतिहासिक हवेली का हिस्सा ढहा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3294</link><description>पेशावर. बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राज कपूर की हवेली का एक हिस्सा पेशावर में कथित तौर पर हाल ही में हुई भारी बारिश और उसके बाद शुक्रवार रात आए भूकंप के कारण ढह गया। अधिकारियों एवं स्थानीय निवासियों ने इसकी जानकारी दी। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित सदी पुरानी कपूर हवेली को पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था। खैबर पख्तूनख्वा हेरिटेज काउंसिल के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने बताया कि भूकंप के झटकों के बाद हवेली की दीवार का एक हिस्सा ढह गया, जिससे शेष ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
वहीदुल्लाह ने पुरातत्व विभाग और प्रांतीय सरकार से ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की और चेतावनी दी कि लापरवाही जारी रही तो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति हो सकती है। कपूर हवेली पेशावर शहर के प्रसिद्ध किस्सा ख्वानी बाजार के मध्य स्थित है। यह पाकिस्तान के प्रमुख स्मारकों में से एक है, लेकिन संरक्षण की मांगों के बावजूद लंबे समय से जर्जर हालत में है। यह हवेली अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का पैतृक घर है, जो कपूर परिवार के फिल्म उद्योग में प्रवेश करने वाले पहले सदस्य थे। इस मकान का निर्माण उनके पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918 से 1922 के बीच कराया था। अभिनेता राज कपूर और त्रिलोक कपूर का जन्म भी इसी हवेली में हुआ था। अपने समय में यह हवेली उत्कृष्ट वास्तुकला का उदाहरण मानी जाती थी, जिसमें लगभग 40 कमरे थे। भवन के अग्रभाग को जटिल पुष्प आकृतियों और झरोखों से सजाया गया था। हालांकि अब यह इमारत बेहद जर्जर अवस्था में है, फिर भी वर्षों से परित्यक्त रहने के बावजूद इसकी सुंदरता अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसी हवेली में राज कपूर के दो छोटे भाई-बहनों का भी जन्म हुआ था, जिनका 1931 में निधन हो गया था। राज कपूर के भाई शम्मी कपूर और शशि कपूर का जन्म भारत में हुआ था।
इस इमारत में कपूर परिवार की शुरुआती पीढ़ियों का जीवन बीता, लेकिन विभाजन के बाद परिवार ने 1947 में इस इमारत को छोड़ दिया। कई अन्य परिवारों की तरह, राज कपूर भी विभाजन के बाद भारत आ गए।
उनके बेटे ऋषि कपूर और रणधीर कपूर ने 1990 के दशक में इस जगह का दौरा किया था।</description><guid>3294</guid><pubDate>04-Apr-2026 12:40:52 am</pubDate></item><item><title> पाकिस्तान ने पेट्रोल 80 रुपये सस्ता किया, जनता के गुस्से के आगे झुकी सरकार</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3292</link><description>इस्लामाबाद।: पाकिस्तान में तेल की कीमतों को लेकर शहबाज सरकार का बड़ा यू-टर्न देखने को मिला है. । सरकार ने अचानक पेट्रोल के दाम में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान कर दिया है. । अब पेट्रोल की कीमत घटकर 378 रुपये प्रति लीटर हो गई है।. यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार देर रात घोषित किया.। चौंकाने वाली बात यह है कि यह राहत उस बड़े झटके के ठीक एक दिन बाद आई है, जब सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी थी.। इससे पहले पेट्रोल की कीमत 458.40 रुपये और डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था।.
पाकिस्तान में पेट्रोल का दाम अब कितना है?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार देर रात देश को संबोधित करते हुए पेट्रोल की कीमत 458 रुपये से घटाकर 378 रुपये (125.84 भारतीय रुपया) प्रति लीटर करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि यह राहत पेट्रोलियम लेवी घटाकर दी जा रही है और इसका पूरा बोझ सरकार उठाएगी. सरकार का कहना था कि अमेरिका-ईरान और इजराइल युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बेकाबू हो गए हैं.। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने साफ कहा था कि दाम बढ़ाना मजबूरी थी. लेकिन इस फैसले के बाद जनता में गुस्सा देखने को मिला।. पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और लोग सड़कों पर उतर आए।. पहले से आर्थिक संकट झेल रही जनता के लिए यह झटका भारी पड़ गया.। जनता के दबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा.। अब न सिर्फ पेट्रोल सस्ता किया गया, बल्कि राहत पैकेज की झड़ी लगा दी गई.।
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</description><guid>3292</guid><pubDate>04-Apr-2026 11:49:45 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका ने ईरान के अहम पुल पर किया हमला, ट्रंप ने चेतावनी दी- अभी बहुत कुछ होना बाकी है</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3291</link><description>नई दिल्ली। अमेरिकी सेना ने ईरान में एक अहम हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी के साथ ईरान से समझौता करने की अपील की है। उन्होंने कहा ईरान को समझौता करना चाहिए वर्ना आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।
यह हमला बी1 पुल पर हुआ, जो तेहरान को पास के शहर करज से जोड़ता है। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन सेना के लिए सामान ले जाने का एक तय रास्ता था, इसलिए इसे निशाना बनाया गया।
वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि यह पुल अभी चालू नहीं था और सेना इसका इस्तेमाल नहीं कर रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, जिनमें नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद आम नागरिक भी शामिल थे।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस हमले की सराहना की। उन्होंने लिखा, ईरान का सबसे बड़ा पुल गिरा दिया गया है, अब इसका कभी इस्तेमाल नहीं होगा। अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है! उन्होंने ईरान को यह चेतावनी भी दी कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, एक समझौता कर लो।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य व्यवस्था को कमजोर करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद देश के भीतर मिसाइल और ड्रोन से जुड़े सामान की आवाजाही को रोकना था। ईरान के नेताओं ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा, जब देश की रक्षा की बात आएगी, तो हम में से हर व्यक्ति सैनिक बन जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग तैयार हैं और डटे हुए हैं।
तेहरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है।
इस हमले के साथ ही अन्य जगहों पर भी हमले हुए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, एक हवाई हमले में पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान को निशाना बनाया गया, जो एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला बताया। यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैलता नजर आ रहा है। इजरायल ने कहा कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी। राजनयिक स्तर पर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। रूस, चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया।</description><guid>3291</guid><pubDate>03-Apr-2026 12:27:28 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिका ने पेटेंट वाली दवाओं पर लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3290</link><description> नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है। जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।
आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।
फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।
अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है। उन्होंने कहा, मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं। ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।
इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।</description><guid>3290</guid><pubDate>03-Apr-2026 12:28:14 pm</pubDate></item><item><title>ईरान में अमेरिकी बल काम खत्म करेंगे: ट्रंप</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3289</link><description>वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी बल ईरान में जल्द ही ''काम खत्म करेंगे क्योंकि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य लगभग पूरे होने वाले हैं।'' ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध में उनके लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ये लक्ष्य हैं ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता एवं नौसेना को नष्ट करना तथा यह सुनिश्चित करना कि उसके लिए काम करने वाले छद्म संगठन अब क्षेत्र को अस्थिर नहीं कर सकें और ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सके। ट्रंप ने ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में कहा कि यह सैन्य कार्रवाई तेल समेत ईरान के किसी विशाल संसाधन को हासिल करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि यह अमेरिका के सहयोगियों की मदद के लिए की गई है। उन्होंने कहा, ''हम पश्चिम एशिया से पूरी तरह अलग हैं लेकिन फिर भी हम मदद करने के लिए वहां हैं। उन्होंने कहा, ''हमें वहां रहने की जरूरत नहीं है। हमें उनके तेल की जरूरत नहीं है। उनके पास जो कुछ भी है, उसकी हमें जरूरत नहीं है लेकिन हम अपने सहयोगियों की मदद करने के लिए वहां हैं।'' ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' के क्रॉस हॉल में बुधवार रात कहा कि पिछले एक महीने में ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' की कार्रवाई से ईरान की ''मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता में उल्लेखनीय कमी आई है और हथियार बनाने वाली उसकी फैक्टरी एवं रॉकेट प्रक्षेपक तहस-नहस किए जा रहे हैं।'' ट्रंप ने कहा कि ईरान की ''नौसेना खत्म हो चुकी है, उसकी वायु सेना तबाह हो चुकी है और उस देश के नेता ''अब मारे जा चुके हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ''इस वक्त हमारी कार्रवाई में बुरी तरह तबाह किया जा रहा है।'' ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर करीब एक महीने पहले ईरान पर हमला करने के बाद 'प्राइम टाइम' पर पहली बार देश को संबोधित किया है। ट्रंप ने कहा, ''पिछले सप्ताह हमारे सशस्त्र बलों ने युद्धक्षेत्र में कई तेज, निर्णायक और जबरदस्त जीत हासिल की हैं।''</description><guid>3289</guid><pubDate>02-Apr-2026 12:20:30 am</pubDate></item><item><title>अमेरिका के नेब्रास्का राज्य ने दीपावली उत्सव को मान्यता दी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3288</link><description>न्यूयॉर्क. अमेरिका के नेब्रास्का राज्य की विधायिका ने दीपावली उत्सव को मान्यता देने वाला एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसे सिएटल स्थित भारतीय मिशन ने राज्य के हिंदू समुदाय के लिए एक ''ऐतिहासिक'' कदम बताया है। यह प्रस्ताव राज्य सीनेटर जॉन फ्रेडरिकसन द्वारा प्रायोजित किया गया था और 31 मार्च को स्पीकर जॉन आर्च ने इस पर हस्ताक्षर किए। सिएटल स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक बयान में कहा कि इस प्रस्ताव को अपनाया जाना अमेरिका के मध्य पश्चिमी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक ''ऐतिहासिक'' घटना है और ''कॉर्नहस्कर स्टेट'' (नेब्रास्का का आधिकारिक उपनाम) में रहने वाले लगभग 9,000 हिंदुओं के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। महावाणिज्य दूतावास ने बताया कि फ्रेडरिकसन लंबे समय से हिंदू समुदाय के समर्थक रहे हैं और मंदिरों के कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र में 1993 में स्थापित 'हिंदू टेम्पल ऑफ ओमाहा' स्थित है। इस प्रस्ताव के तहत इस वर्ष 20 अक्टूबर को राज्यपाल जिम पिलेन द्वारा गवर्नर हाउस में भव्य दीपावली समारोह आयोजित करने की भी योजना है। भारतीय मिशन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नेब्रास्का में दीपावली की ऐतिहासिक विधायी मान्यता। नेब्रास्का ने राज्य विधायी प्रस्ताव (एसएलआर)-424 को अंगीकार किया है, जो दीपावली के उत्सव और उसके महत्व को मान्यता देता है।'' महावाणिज्य दूतावास ने इस कानून को आगे बढ़ाने के लिए फ्रेडरिकसन का आभार जताया और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''दीपावली पर्व एकता का प्रतीक है, क्योंकि इसे भारत के अधिकतर लोग मनाते हैं, चाहे उनका कोई भी धर्म हो और दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग इस उत्सव को मनाते हैं।'' इसमें यह भी कहा गया कि यह पर्व अच्छाई, प्रकाश और ज्ञान की बुराई और अंधकार पर विजय का ''स्थायी'' प्रतीक है।</description><guid>3288</guid><pubDate>02-Apr-2026 12:13:08 am</pubDate></item><item><title>ऑस्ट्रेलिया के पीएम अल्बनीज की चेतावनी आने वाले महीने आसान नहीं, जनता से अपील फ्यूल बचाएं</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3286</link><description>नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने जनता से खास अपील की है। चेतावनी भी दी कि मिडिल ईस्ट के वर्तमान हालात की वजह से तेल संकट गहराएगा और आने वाले महीने आसान नहीं रहने वाले हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, आने वाले महीने आसान नहीं हो सकते। मैं इस बारे में साफ-साफ कहना चाहता हूं। कोई भी सरकार इस युद्ध से पैदा हो रहे दबाव को खत्म करने का वादा नहीं कर सकती।
ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि वह देश से सीधे बात करना चाहते हैं कि सरकार इस मुश्किल समय में ऑस्ट्रेलिया को बचाने के लिए क्या कर रही है, और वे (जनता) देश की मदद के लिए क्या कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, पक्ष-विपक्ष सभी ऑस्ट्रेलिया को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ताकि अगर दुनिया भर में हालात और खराब होते हैं और लंबे समय में हमारी फ्यूल सप्लाई में बहुत ज्यादा रुकावट आती है, तो हम अगले कदम मिलकर तय कर सकें।
अल्बनीज ने जनता को बताया कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रख फ्यूल एक्साइज आधा कर दिया गया है और अगले तीन महीनों के लिए हेवी रोड यूजर चार्ज जीरो कर दिया गया है। पीएम ने भरोसा दिलाया, हम फ्यूल की कीमत कम करने के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही यहां अधिक ईंधन लाने और अपने मजबूत ट्रेडिंग रिश्तों का इस्तेमाल कर ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा पेट्रोल, डीजल और फर्टिलाइजर लाने के लिए काम कर रहे हैं।
3 मिनट 17 सेकंड के संबोधन में अल्बनीज ने आगे कहा, मैं वादा कर सकता हूं कि हम ऑस्ट्रेलिया को इसके सबसे बुरे असर से बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों से अपील की कि वे घबराकर फ्यूल न खरीदें और जहां तक ​​हो सके, कार की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा, अगर आप सड़क पर निकल रहे हैं, तो जरूरत से ज्यादा फ्यूल न लेंबस वैसे ही भरवाएं जैसे आप आम तौर पर भरवाते हैं। अपने समुदाय, दूरदराज के इलाके में रहने वाले लोग और जरूरी इंडस्ट्रीज से वास्ता रखने वालों के बारे में सोचें।</description><guid>3286</guid><pubDate>01-Apr-2026 5:25:33 pm</pubDate></item><item><title>रूसी उप विदेश मंत्री ने मोदी के इस साल रूस की यात्रा करने की उम्मीद जताई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3285</link><description>मॉस्को. रूसी उप विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि रूस और भारत को ''नियमित, व्यवस्थित'' संपर्क बनाए रखना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस साल अपनी सुविधा के हिसाब सरकारी यात्रा पर आएंगे। उप विदेश मंत्री एंद्री रुदेंको ने सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही।

रुदेंको ने कहा, ''रूस और भारत के लिए विभिन्न स्तर पर नियमित और व्यवस्थित संपर्क बनाए रखना बहुत जरूरी है।'' उन्होंने कहा, ''हमें उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर उपयुक्त समय पर रूस की सरकारी यात्रा करेंगे।'' रुदेंको ने यह भी कहा कि इस वर्ष रूस-भारत शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना मॉस्को की बारी है।
इससे पहले, पुतिन ने नयी दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिसंबर 2025 में भारत की यात्रा की थी।</description><guid>3285</guid><pubDate>01-Apr-2026 1:42:22 pm</pubDate></item><item><title>भारतीय मूल की मंगला कुप्पा अमेरिका के श्रम मंत्रालय की सीआईओ नियुक्त</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3284</link><description>ह्यूस्टन. भारतीय मूल की प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ मंगला कुप्पा को अमेरिका के श्रम मंत्रालय का मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) नियुक्त किया गया है। वह पिछले वर्ष अक्टूबर से कार्यवाहक के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं और अब औपचारिक रूप से उनकी नियुक्ति कर दी गई है। कुप्पा मंत्रालय की मुख्य कृत्रिम मेधा (एआई) अधिकारी भी हैं। उनकी नियुक्ति इसी महीने की शुरुआत में की गई। वह एजेंसी में सूचना प्रौद्योगिकी रणनीति, डिजिटल रूपांतरण और एआई के उपयोग की निगरानी जारी रखेंगी। अपनी नियुक्ति की पुष्टि करते हुए कुप्पा ने पेशेवर मंच 'लिंक्डइन' पर लिखा कि वह '' सेवा जारी रखने व बदलाव लाने का अवसर मिलने के लिए आभारी'' हैं। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वरिष्ठ अधिकारी कुप्पा के पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मंत्रालय के आधुनिकीकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह 2010 में श्रम मंत्रालय से जुड़ी थीं और तब से वह मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और 'बिजनेस एप्लीकेशन सर्विसेज' की निदेशक सहित कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं। इससे पहले वह एक दशक से अधिक समय तक श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के साथ काम कर चुकी हैं। कुप्पा ने एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है। उनकी नियुक्ति अमेरिका की सरकार में प्रौद्योगिकी नेतृत्व के प्रमुख पदों पर भारतीय मूल के पेशेवरों की बढ़ती उपस्थिति को भी दर्शाती है।</description><guid>3284</guid><pubDate>31-Mar-2026 12:39:08 am</pubDate></item><item><title>जेन जेड आंदोलन के दमन में भूमिका के लिए काठमांडू के पूर्व सीडीओ गिरफ्तार</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3283</link><description>काठमांडू. नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए 'जेन जेड' आंदोलन के दमन में कथित भूमिका के लिए काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) छवि रिजाल को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। नेपाल पुलिस के अनुसार, रिजाल उन उच्च अधिकारियों की सूची में शामिल हैं जिन्हें इस आंदोलन को दबाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इस आंदोलन के दौरान 76 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें काठमांडू के सुबिधानगर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। यह घटनाक्रम पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद सामने आया है। 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और लेखक समेत अन्य के खिलाफ आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस बीच, ओली की हिरासत को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बावजूद नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। काठमांडू जिला अदालत ने रविवार को ओली और लेखक को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
ये गिरफ्तारियां बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनी नयी सरकार द्वारा अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने के फैसले के बाद हुई हैं। 'जेन जेड' वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ। युवाओं के नेतृत्व में हुए 'जेन जेड' आंदोलन में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए थे, जिसके कारण ओली को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था।</description><guid>3283</guid><pubDate>31-Mar-2026 12:34:06 am</pubDate></item><item><title> अमेरिका कुछ हफ्तों में ईरान ऑपरेशन कर देगा खत्म: मार्को रुबियो</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3281</link><description>नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार की तरह से बार-बार इस बात को दोहराया जा रहा है कि वह लक्ष्य पूरा करने में तय समय से आगे चल रहे हैं और जल्द ही खत्म कर देंगे। अब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।
इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव ने लड़ाई खत्म करने के लिए वाशिंगटन की शर्तें बताईं और तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।
स्थानीय समयानुसार, सोमवार को अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन जारी रहने के बावजूद, ईरान और अमेरिका के अंदर कुछ लोगों के बीच खासकर बिचौलियों के जरिए मैसेज और कुछ सीधी बातचीत चल रही थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की मुख्य मांगें वैसी ही हैं, ईरानी सरकार के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और उन्हें आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद करना होगा और उन्हें ऐसे हथियार बनाना बंद करना होगा जो उनके पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकते हैं।
रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए मकसद को पाने में बहुत आगे या तय समय से आगे है, जिसमें ईरान की एयर फोर्स और नेवी को खत्म करना और उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चर की संख्या में काफी कमी शामिल है। उन्होंने कहा, हम ये मकसद, हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं। उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता है।
रुबियो ने चेतावनी दी कि ऐसा कदम दूसरे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर दावा करने का एक उदाहरण बनेगा। रुबियो ने आगे कहा, अमेरिका यह शर्त नहीं मानेगा। वे जो मांग रहे हैं, वह एक गैर-कानूनी शर्त है। ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट किसी न किसी तरह से खुला रहेगा, या तो ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून मानने से या देशों के एक साथ आकर कार्रवाई करने से।
रुबियो ने ईरान पर पूरे इलाके में आवासीय और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, उन्होंने दूतावास, डिप्लोमैटिक फैसिलिटी, एयरपोर्ट, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है।
ईरान को 10 सालों में सबसे कमजोर बताते हुए, उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े खतरों को रोकने के लिए अभी उसकी सैन्य क्षमताओं को कम करना जरूरी है। डिप्लोमेसी को लेकर रुबियो ने कहा कि तेहरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की किसी भी इच्छा को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने और मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम छोड़ने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, अगर ईरान ऐसा करता है, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। दशकों से उस देश की सरकार ने इस रास्ते को नहीं अपनाया है।
इस दौरान रुबियो ने ऑपरेशन के दौरान एयरस्पेस और बेस एक्सेस न देने का जिक्र करते हुए कुछ नाटो सहयोगियों से भी निराशा जताई और कहा, अगर नाटो का मकसद सिर्फ यूरोप की रक्षा करना है, लेकिन फिर जब हमें जरूरत हो तो हमें बुनियादी अधिकार देने से मना करना, तो यह बहुत अच्छा इंतजाम नहीं है। इन संबंधों को फिर से देखना होगा।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका के मकसद में ईरान में शासन बदलना शामिल नहीं था। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को माना कि अगर ईरान के नेतृत्व में बदलाव होता है तो वाशिंगटन इसका विरोध नहीं करेगा। उन्होंने कहा, इस ऑपरेशन का मकसद यह नहीं था।</description><guid>3281</guid><pubDate>31-Mar-2026 1:25:53 pm</pubDate></item><item><title>नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली जेन जेड के विरोध-प्रदर्शनों पर कार्रवाई के सिलसिले में गिरफ्तार</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/international.php?articleid=3278</link><description>काठमांडू/नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए 'जेन जेड' विरोध-प्रदर्शनों की जांच करने वाले उच्चस्तरीय आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने के नवगठित सरकार के फैसले के एक दिन बाद शनिवार को देश के पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 'बालेन' की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई नवगठित मंत्रिमंडल की बैठक में आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला किया गया था। पुलिस ने बताया कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष ओली को शनिवार तड़के काठमांडू से 12 किलोमीटर पूर्व भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि पूर्व गृह मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के नेता रमेश लेखक को भी भक्तपुर जिले की सूर्यविनायक नगरपालिका के कटुंजे स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। ओली और लेखक को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए 'जेन जेड' आंदोलन को दबाने में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस आंदोलन में कई युवाओं सहित 76 लोग मारे गए थे। 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और लेखक सहित अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नवगठित सरकार ने शुक्रवार को अपनी पहली मंत्रिमंडल बैठक में जांच आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने ओली की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ''कानून से ऊपर कोई नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''हमने पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को हिरासत में ले लिया है। ऐसा किसी से बदला लेने के लिए नहीं किया गया बल्कि यह न्याय की शुरुआत है।'' उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि अब देश को एक नयी दिशा मिलेगी।''
पुलिस ने कहा कि ओली और लेखक को भद्रकाली स्थित काठमांडू जिला पुलिस सर्किल में हिरासत में रखा गया है। जांच आयोग ने इस अपराध के लिए तीन से 10 साल तक की जेल की सजा की सिफारिश की है।
काठमांडू जिला पुलिस सर्किल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि शनिवार को अवकाश होने के कारण उन्हें रविवार को काठमांडू जिला अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। ओली को हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद चिकित्सकीय जांच के लिए त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल ले जाया गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह जांच की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
इस बीच, सीपीएन-यूएमएल ने स्थिति पर चर्चा के लिए ललितपुर स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में सचिवालय की आपात बैठक बुलाई है।</description><guid>3278</guid><pubDate>29-Mar-2026 3:16:08 pm</pubDate></item></channel></rss>