<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>खेल - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>एशियाई खेलों में स्वर्णिम प्रदर्शन के बाद तीरंदाजों ने कहा, अब दबाव हट गया है...</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5176</link><description>नयी दिल्ली. एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करके इतिहास रचने वाले भारतीय कंपाउंड और रिकर्व तीरंदाजों ने कहा कि उन पर से बहुत बड़ा दबाव हट गया है और वह राहत महसूस कर रहे हैं। भारतीय तीरंदाजों ने एशियाई खेलों में पांच स्वर्ण पदक जीते और दो ओलंपिक कोटा भी हासिल किए। उसने तीरंदाजी में सबसे ताकतवर टीम दक्षिण कोरिया को भी हराया। भारत के कंपाउंड तीरंदाजी कोच डेव कजिन्स ने कहा कि पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदकों की इस उपलब्धि से आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद हो जाना चाहिए। रिकर्व तीरंदाजी टीम ने पांच और कंपाउंड तीरंदाजों ने चार पदक हासिल किए। कजिन्स ने भारतीय टीम के स्वदेश लौटने पर कहा, ''आलोचक शुरू से ही हमसे यह अनुमान लगाने को कह रहे थे कि हम कितने पदक जीत सकते हैं। हम केवल इस पर ध्यान दे रहे थे कि हमारे खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।'' उन्होंने कहा, ''जब प्रशिक्षण सही हो, तैयारी सही हो और वातावरण अनुकूल हो, तो ऐसे परिणाम मिलते हैं। इसलिए हम इससे बहुत खुश हैं। 
ओलंपिक खेलों के लिए कंपाउंड तीरंदाजी में पहला कोटा हासिल करना हमारे लिए बेहद खुशी की बात है। यह हमारे लिए इस समय बहुत बड़ी उपलब्धि है।'' साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थू ने मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक कोटा हासिल किया। साहिल ने पुरुषों की कंपाउंड टीम स्पर्धा में भी हिस्सा लिया, जिसमें टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि चिकिता ने अनुभवी ज्योति सुरेखा वेन्नम और प्रथिका प्रदीप के साथ मिलकर महिलाओं की कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। जाधव ने कहा, ''बहुत अच्छा लग रहा है और इस भव्य स्वागत को देखकर हमें और भी अधिक खुशी मिली है। हमने विशेष रूप से ऐसी स्थितियों के लिए अभ्यास किया था। हमने अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया। अब दबाव हट गया है।'' चिकिता ने कहा, ''यह सुखद अहसास है। इससे हमें प्रेरणा मिलेगी कि हमें और अधिक जीत हासिल करनी है और अधिक मेहनत करनी है।'' 
रिकर्व में कुमकुम मोहद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता और महिला टीम वर्ग में स्वर्ण पदक के साथ-साथ मिश्रित वर्ग में रजत पदक हासिल करने में भारत की मदद की। उनके व्यक्तिगत स्वर्ण पदक ने भारत के लिए ओलंपिक कोटा भी सुनिश्चित किया। कुमकुम ने कहा कि यह परिणाम महीनों की तैयारी और टीम वर्क का नतीजा है। उन्होंने कहा, ''जैसा हमने सोचा था, वही हुआ। यह टीम की कड़ी मेहनत, पूरी टीम के उत्साह और भारतीय तीरंदाजी संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग का नतीजा था।'' महिला रिकर्व टीम का हिस्सा रही कीर्ति शर्मा ने फाइनल में 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया पर 5-3 से जीत को भारतीय तीरंदाजी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। कीर्ति ने कहा, ''इस स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण पदक। हमने कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता, इसलिए यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं उस टीम का हिस्सा था जिसने यह इतिहास रचा।''
--</description><guid>5176</guid><pubDate>05-Oct-2026 12:12:27 am</pubDate></item><item><title>चमकदार रोशनी और संगीतमय शो से हुआ आइची-नागोया एशियाई खेलों का समापन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5175</link><description>नागोया. जापान की संस्कृति और मेहमाननवाजी की शानदार झलक के साथ संगीत और रोशनी से सजे भव्य कार्यक्रम के बीच रविवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों का समापन हो गया। दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद एशिया के 45 देशों के खिलाड़ी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में खेलों के समापन समारोह में शामिल हुए। इन खेलों के दौरान 350 से अधिक रिकॉर्ड बने जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। हालांकि खेल आयोजन से पहले लॉजिस्टिक समस्याओं और कुप्रबंधन से प्रभावित रहे। समापन समारोह करीब 90 मिनट तक चला।
भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण से 21 कम है। चीन लगातार 12वें चरण में तालिका में शीर्ष पर रहा उसने 169 स्वर्ण, 89 रजत और 83 कांस्य सहित कुल 341 पदक जीते जो विदेश में आयोजित एशियाई खेलों में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। मेजबान जापान 269 पदकों (83 स्वर्ण, 95 रजत और 91 कांस्य) के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उसके बाद दक्षिण कोरिया के 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य पदक थे। एशिया ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने खेलों के समापन की घोषणा की। बाद में ओसीए ध्वज 2030 एशियाई खेलों के आयोजन समिति के एक प्रतिनिधि को सौंपा गया। ओसीए ध्वज को दोहा को सौंपने से संबंधित खंड में कतर के ओलंपिक और विश्व चैंपियन मुताज बाशिम शामिल थे। ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा (दो स्वर्ण और एक रजत पदक विजेता) के नेतृत्व में भारतीयों ने भी उत्सवी माहौल में हिस्सा लिया। सफेद और नीले रंग की पोशाक पहने लगभग 30 भारतीय खिलाड़ियों और अधिकारियों ने एथलीट परेड में हिस्सा लिया और तिरंगा लहराया। 'वन एशिया' की समापन समारोह की अवधारणा को व्यक्त करने के लिए स्टेडियम के केंद्र में एक षट्भुजाकार मंच बनाया गया था और यह शो का मुख्य आकर्षण था। भव्य समापन के दौरान इसे लालटेन से सजाया गया था जो जापानी गर्मियों का एक विशिष्ट प्रतीक है। ओसीए अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने कहा कि आइची-नागोया एशियाई खेलों ने एशियाड के लिए मानक ऊंचा किया है। अल थानी ने कहा, ''मैं आइची-नागोया एशियाई खेलों को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित करता हूं। ''
उन्होंने कहा, ''आज रात हम आइची-नागोया 2026 का ध्वज उतारते हुए हम इन खेलों का समापन करते हैं। लेकिन हम एशियाई खेलों के लिए मानक ऊंचा करते हैं। लौ बुझ सकती है, लेकिन इसने जिन उम्मीदों को प्रज्वलित किया है, वे हमारे महाद्वीप में उज्ज्वल रूप से जलती रहेंगी। '' उन्होंने कहा, ''हमने शानदार वापसी, अंतिम सेकेंड में मिली जीत और नाटकीय रूप से मामूली अंतर से मिली हार देखी है। हमने नए किशोर सुपरस्टारों और अनुभवी चैंपियनों के उभरने का जश्न मनाया है जिन्होंने अपनी प्रभावशाली विरासत में और उपलब्धियां जोड़ी हैं। '' उन्होंने कहा, ''हमने खिलाड़ियों को विपरीत परिस्थितियों और चोटों से जूझते हुए जीत हासिल करते देखा है और प्रतिद्वंद्वियों को अविश्वसनीय खेल भावना और सम्मान का प्रदर्शन करते देखा है। '' उन्होंने कहा, ''पहली प्रतियोगिता से लेकर आखिरी तक, एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से हमें मंत्रमुग्ध किया। 350 से अधिक रिकॉर्ड टूटे हैं जिनमें 50 से अधिक विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। यह हमारे एशियाई खेलों के लिए एक रिकॉर्ड है। '' परंपरा के अनुसार ओसीए प्रमुख ने एशिया के युवाओं से इस भावना को आगे बढ़ाने और चार साल बाद 2030 में दोहा में होने वाले 21वें एशियाई खेलों में फिर मिलने का आह्वान किया। 19 सितंबर को उद्घाटन समारोह में विभिन्न एशियाई देशों और क्षेत्रों के विविध खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व इंद्रधनुषी रंगों वाले दिलों की कई परतों द्वारा किया गया था। समापन समारोह के लिए दिल के केंद्र में खाली स्थान को भावनाओं और एकता की भावना से खूबसूरती से भर दिया गया। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को एकजुट करना था ताकि वे एशियाई देशों के लिए कई वर्षों तक शांतिपूर्ण वातावरण में मिलकर काम करते रहने के उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकें। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'बोन-ओडोरी' नृत्य रहा जिसकी शुरुआत जापान में हुई थी और अब यह एशिया के कई अन्य देशों में भी लोकप्रिय है। यह नृत्य पीढ़ियों और देशों की सीमाओं से परे लोगों को जोड़ता है। इस नृत्य को 'मत्सुकेन सांबा-2' गीत के जरिए पेश किया गया जिसमें नागोया की खास संस्कृति और आकर्षण की झलक देखने को मिली। यह गीत जापान के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। गणमान्य व्यक्तियों के आगमन के बाद एक चमकदार लेजर लाइट शो हुआ जिसमें नागोया के कलाकारों ने 'चेरी ब्लॉसम' से सजी पोशाकें पहनकर प्रस्तुति दी। इसके बाद खिलाड़ियों की परेड हुई। भारत की नीरू ढांडा सहित केवल ध्वजवाहकों ने मार्च किया। 45 देशों के दल फिर रोशनी और संगीत की संगत में मैदान में प्रवेश कर गए। इसके बाद खेलों के दौरान हुए कुछ यादगार प्रदर्शनों और मुकाबलों के दृश्य दिखाए गए।
ओसीए अध्यक्ष ने पहले एशियाई खेलों की मशाल, ओसीए का झंडा और मौजूदा ओसीए का झंडा कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी को सौंप दिया। कतर के सबसे सफल खिलाड़ी बाशिम ने केंद्र मंच संभाला। उन्होंने ओसीए ध्वज लिया और विशाल स्क्रीन पर उन्हें ऊंची कूद स्पर्धा में प्रतिस्पर्धा करते हुए दिखाया गया। उन्हें घोड़े की सवारी करते और कड़ाही जलाते हुए भी दिखाया गया। कतर के घुड़सवार खिलाड़ी जासिम अल कुवारी फिर घोड़े पर सवार होकर स्टेडियम में दाखिल हुए और बाशिम से ओसीए ध्वज ले लिया। बाहर जाने से पहले उन्होंने घोड़े पर सवार होकर मंच के दो चक्कर लगाए। रचनात्मक थीम 'अल मकान मकानुकुम' (यह जगह आपकी है) में मेहमान के आने से पहले उसके लिए जगह तैयार करने की परंपरा को दर्शाया गया। 'हैंडओवर' समारोह में ओसीए का झंडा दोहा 2030 का पहला मेहमान बना जो एशियाई खेलों के आयोजन से चार साल पहले ही वहां पहुंच गया।</description><guid>5175</guid><pubDate>04-Oct-2026 12:10:24 am</pubDate></item><item><title>एशियाई खेलों के अंतिम दौर में भारत की जोरदार वापसी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5174</link><description>- पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहने की संभावना
नागोया/निशानेबाजी और एथलेटिक्स में मिली निराशा से उबरते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी, तीरंदाजी, कुश्ती और हॉकी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी जिससे एशियाई खेलों में खराब शुरुआत के बावजूद भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया। हांग्झोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों में भी भारत इसी पायदान पर था लेकिन तब पदकों की संख्या इस बार से काफी ज्यादा थी। 
एशियाई खेलों का पहला सप्ताह भारत के लिए निराशाजनक रहा। चीन में सात स्वर्ण पदक जीतने वाले निशानेबाज इस बार व्यक्तिगत राइफल और पिस्टल स्पर्धाओं में एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत सके। भारत एशियाई खेलों का अभियान 21 स्वर्ण सहित 85 पदकों के साथ समाप्त करने की स्थिति में है। 2023 में आयोजित एशियाई खेलों में भारत ने 28 स्वर्ण सहित कुल 106 पदक जीते थे। भारत तब भी चौथे स्थान पर ही था। इस बार का प्रदर्शन भारत के लिए सम्मानजनक चौथा स्थान हासिल करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया उससे काफी आगे हैं। चीन तो पदक तालिका में अलग ही स्तर पर है। एथलेटिक्स में कुछ शानदार प्रदर्शन देखने को मिले जिसमें लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने तीन पदक जीते, लेकिन भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या हांग्झोउ में जीते गए छह स्वर्ण से घटकर इस बार केवल एक रह गई। इसके चलते भारत एक समय पदक तालिका में शीर्ष 10 से बाहर बना हुआ था। शुरुआती 10 दिनों की निराशा के बाद हालांकि भारतीय दल के लिए अप्रत्याशित खुशियों का दौर आया। 
भारतीय खेमे में सबसे बड़ी खुशियों में से एक निशानेबाज नीरू ढांडा ने दी। उन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा। नीरू की खुशी तब दोगुनी हो गई, जब उन्होंने काइनान चेनाई के साथ मिलकर ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीता। एशियाई खेलों में कंपाउंड तीरंदाजी भारत के लिए हमेशा पदकों की झड़ी लगाती रही है, लेकिन इस बार रिकर्व तीरंदाजों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिला रिकर्व टीम ने मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को हराकर पहली बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद कुमकुम मोहोद ने व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को और यादगार बना दिया। स्वर्ण पदकों की बात करें तो मुक्केबाजी में भी भारत ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलोग्राम, परवीन ने महिलाओं के 65 किलोग्राम और अंकुश ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। हांगझोउ में कुश्ती में एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने वाले भारत ने इस बार प्रतियोगिता के अंतिम दौर में अमन सहरावत (पुरुष फ्रीस्टाइल 57 किग्रा) और सुजीत कलकल (पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा) के जरिए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। शनिवार के प्रदर्शन के बाद भारत स्वर्ण पदकों की संख्या के मामले में उज्बेकिस्तान के बराबर पहुंच गया। इसमें सबसे अहम योगदान महिला गोल्फर प्रणवी उर्स का रहा, जिन्होंने एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा। उनके शानदार प्रदर्शन ने टीम के लिए रजत पदक पक्का किया। इसके बाद पुरुष क्रिकेट टीम ने दबाव से भरे फाइनल में पाकिस्तान को हराकर एक और स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया। 
पुरुष हॉकी टीम ने उम्मीद के मुताबिक स्वर्ण पदक जीता, लेकिन महिला टीम ने भी स्वर्ण पदक हासिल कर हॉकी दल के लिए इस आयोजन को यादगार बना दिया। यह पहली बार था जब एशियाई खेलों में भारत की पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमों ने स्वर्ण पदक जीते। क्रिकेट और कबड्डी में भी भारत के लिए नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे और इन दोनों खेलों के खिलाड़ियों ने पदक तालिका में चार स्वर्ण पदक जोड़े। उज्बेकिस्तान रविवार को अपने एशियाई खेलों के अभियान का समापन करेगा लेकिन प्रतियोगिता के अंतिम चरण में भारत की तेज वापसी को देखते हुए उसके पदक तालिका में अपना स्थान बरकरार रखने की संभावना है।</description><guid>5174</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:43:40 am</pubDate></item><item><title> शेर की तरह मैदान पर उतरो : फाइनल से पहले कोच मारिन का भारतीय महिला हॉकी टीम को मंत्र</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5173</link><description>नयी दिल्ली. भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन ने चीन के खिलाफ एशियाई खेल फाइनल से पहले टीम को स्पष्ट संदेश दिया था कि एक शेर के गुणों को आत्मसात करके मैदान पर उतरना है और नतीजा खुद ब खुद मिलेगा । भारतीय महिला टीम ने गत चैम्पियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 1 . 0 से हराकर एशियाई खेलों में 44 साल में पहली बार स्वर्ण पदक जीता । मारिन ने एक इंटरव्यू में कहा ,'' मैने भारतीय शेरों का उदाहरण दिया । शेर की आंख, प्रतीक और वह पत्थर जो मैने लड़कियों को दिया था । मैने उनसे कहा कि जैसे शेर शिकार करता है, एकाग्र होकर शिकार को देखता है और कैसे झटके से उबरकर फिर वापसी करता है । भारत में शेर सबसे बड़ा प्रतीक है । मैने मैच से पहले उनसे यही सब कहा ।'' एशियाई खेलों में वह पदक जीतकर ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने के इरादे से ही आये थे और उन्हें यकीन था कि टीम ऐसा कर सकेगी । उन्होंने कहा ,'' पिछले महीने विश्व कप के दौरान पूरे समय मुझे यह भरोसा था । हमने चीन को पहले मैच में ड्रॉ पर रोका और पहली बार बड़े टूर्नामेंट में हम ऊंची रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ खेल रहे थे । वहां टीम का प्रदर्शन देखकर मुझे विश्वास जगा था कि हम एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत सकते हैं ।'' मारिन ने कहा ,'' हमने एफआईएच नेशंस कप में अच्छा प्रदर्शन किया था और विश्व कप क्वालीफायर में भी लेकिन वह अलग था । विश्व कप में बेहतर टीमें थी और वही मुझे लगा कि हम एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत सकते हैं ।'' उन्होंने कहा ,'' और सबसे अहम बात यह है कि मुझे ही ऐसा नहीं लगा, बल्कि टीम को भी यह महसूस हुआ ।''
इस स्वर्ण पदक से पूरे भारत में जश्न का माहौल है और एक बार फिर महिला हॉकी ने सभी का ध्यान खींचा है । कोच ने कहा ,'' मैं अतीत के बारे में नहीं सोच रहा था और यह भी नहीं कि इस जीत के मेरे लिये क्या मायने हैं । मुझे यह अच्छा लग रहा है कि इस जीत ने भारत के लोगों को कितनी खुशी दी है । वे कितने उत्साहित और भावुक हैं और कितने बच्चों को इससे प्रेरणा मिलेगी ।'' तोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम को ऐतिहासिक चौथे स्थान तक ले जाने वाले कोच ने कहा ,''हम सभी टीम को खुलकर खेलने का मौका देते हैं , दबाव नहीं डालते और साथ में मनोरंजन भी करते हैं । बहुत सारी चीजों को मिलाकर यह उपलब्धि हासिल हुई है । सिर्फ एक चीज नहीं है ।'' हॉकी पिच से इतर भी मारिन का भारत से जुड़ाव ऐसा हो गया है कि वह इस देश को अपना दूसरा घर मानते हैं । बेंगलुरू में बाइक राइड से लेकर फिल्टर कॉफी तक और हिन्दी के कुछ शब्द सीखने तक । उन्होंने कहा ,'मैं भारत से करीब से जुड़ गया हूं । लोग हमारी कितनी हौसलाअफजाई करते हैं । सोशल मीडिया पर अच्छे कमेंट आते हैं और कितना सम्मान मिलता है । मैं इससे अभिभूत हूं ।'' तोक्यो ओलंपिक, विश्व कप और एशियाई खेलों में से अपना पसंदीदा पल चुनना मारिन के लिये मुश्किल है लेकिन उन्होंने कहा ,'' ओलंपिक खास था , कोविड की वजह से । मैं डेढ साल तक घर नहीं जा सका लेकिन इस साल विश्व कप और एशियाई खेल भी मेरे शीर्ष तीन अनुभव में से हैं ।''</description><guid>5173</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:39:47 am</pubDate></item><item><title>ओडिशा सरकार ने भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों के लिये 11.11 लाख रूपये पुरस्कार का ऐलान किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5172</link><description>भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के हर खिलाड़ी के लिये 11 लाख रूपये नकद पुरस्कार का ऐलान किया है । प्रत्येक सहयोगी स्टाफ को साढे पांच लाख रूपये दिये जायेंगे । भारत ने चीन को 1 . 0 से हराकर 44 साल बाद एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई भी किया । ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा ,'' मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझा ने भारतीय महिला हॉकी टीम के हर सदस्य को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर 11 लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को साढे पांच लाख रूपये देने का फैसला किया है ।'' ओडिशा सरकार 2018 से भारतीय पुरूष और महिला हॉकी की प्रायोजक है और यह करार 2036 तक है ।</description><guid>5172</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:32:58 am</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स  : प्रणवी उर्स ने रचा इतिहास, गोल्फ में भारत को दिलाया ऐतिहासिक गोल्ड; महिला टीम ने जीता सिल्वर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5171</link><description>नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय गोल्फर प्रणवी उर्स ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए महिला व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया। कासुगाई कंट्री क्लब ईस्ट कोर्स में चार दिन तक चले मुकाबले में प्रणवी ने कुल 15-अंडर 265 के स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय महिला टीम ने भी 14-अंडर 546 के कुल स्कोर के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। प्रणवी उर्स एशियन गेम्स के महिला व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गई हैं। अंतिम दौर में उन्होंने ईवन पार 70 का स्कोर किया और पूरे टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
अंतिम दौर की शुरुआत में प्रणवी के पास दूसरे स्थान पर चल रही सिंगापुर की शैनन टैन पर तीन स्ट्रोक की बढ़त थी। तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के कारण वह कुछ समय के लिए दूसरे स्थान पर खिसक गईं, लेकिन उन्होंने दबाव में शानदार वापसी की। छठे, 10वें और 13वें होल पर तीन बर्डी लगाकर प्रणवी ने फिर बढ़त हासिल कर ली।
प्रणवी ने अंतिम 18वें होल पर ईवन पार स्कोर करते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी और 15-अंडर 265 के कुल स्कोर के साथ गोल्ड मेडल पक्का किया। अंतिम दौर से पहले भी वह मजबूत स्थिति में थीं और हांगकांग की चौथे स्थान पर चल रही सोफी हान से नौ स्ट्रोक आगे थीं। प्रणवी के शानदार प्रदर्शन का असर भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ा। भारत ने चार दिनों में 14-अंडर 546 के कुल स्कोर के साथ सिल्वर मेडल जीता। महिला टीम स्पर्धा में यह एशियन गेम्स के गोल्फ इतिहास में भारत का पहला मेडल है, जिससे भारतीय गोल्फ के लिए यह प्रतियोगिता ऐतिहासिक बन गई।
भारत की अनुभवी गोल्फर अदिति अशोक ने अंतिम दौर में 3-अंडर 67 का स्कोर किया। हालांकि, उनका कुल स्कोर 2-ओवर 282 रहा और वह 14वें स्थान पर रहीं। पिछले एशियन गेम्स में अदिति तीसरे दौर के बाद शीर्ष पर थीं, लेकिन अंतिम दिन बढ़त बरकरार नहीं रख सकीं और उन्हें गोल्ड की जगह सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था।
दीक्षा डागर का अंतिम दौर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने चौथे दिन 7-ओवर पार का स्कोर किया, जिससे उनका कुल स्कोर 12-ओवर हो गया। वह संयुक्त रूप से 23वें स्थान पर रहीं।
चीन की यिन रुओनिंग और सिंगापुर की शैनन टैन ने 14-अंडर पार के समान स्कोर के साथ संयुक्त रूप से सिल्वर मेडल हासिल किया। प्रणवी की अंतिम दौर की चुनौती के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने पूरे मुकाबले में मजबूत प्रदर्शन किया। अंतिम दौर से पहले भारत को प्रणवी और महिला टीम से दो मेडल की उम्मीद थी। प्रणवी ने व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड और भारतीय महिला टीम ने सिल्वर जीतकर इन उम्मीदों को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया। इस प्रदर्शन ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय गोल्फ के लिए एक यादगार अध्याय जोड़ दिया।</description><guid>5171</guid><pubDate>03-Oct-2026 3:53:31 pm</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स 2026: भारत ने लगातार दूसरी बार जीता गोल्ड, फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5170</link><description>नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 211 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम 20 ओवर में 6 विकेट पर 192 रन ही बना सकी। भारत की जीत में अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा की तूफानी अर्धशतकीय पारियों के बाद गेंदबाजों ने भी अहम भूमिका निभाई।
भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और 51 रन तक टीम ने वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन के विकेट गंवा दिए। वैभव ने 9 गेंदों पर 15 और सैमसन ने 4 गेंदों पर 2 रन बनाए। इसके बाद अभिषेक शर्मा ने कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ तीसरे विकेट के लिए 42 रन की साझेदारी कर पारी को संभाला। अभिषेक शर्मा ने महज 28 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 7 छक्के और 3 चौके लगाए। वह 93 के स्कोर पर तीसरे विकेट के रूप में आउट हुए। इसके बाद श्रेयस अय्यर ने 24 गेंदों पर 21 और ईशान किशन ने 18 गेंदों पर 20 रन बनाए।
उपकप्तान तिलक वर्मा ने भारतीय पारी के अंतिम हिस्से में आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने 21 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए। उनकी पारी में 4 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। तिलक ने शिवम दुबे के साथ छठे विकेट के लिए 30 गेंदों में 62 रन की साझेदारी की। शिवम ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए।
शिवम दुबे के आउट होने के बाद तिलक ने पारी को तेजी से आगे बढ़ाया। उनके साथ अक्षर पटेल एक रन बनाकर नाबाद रहे। भारत ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 211 रन बनाए। पाकिस्तान की ओर से अहमद दानियाल और अराफात मिन्हास ने 2-2 विकेट लिए, जबकि सईम अयूब और अबरार अहमद को एक-एक सफलता मिली।
212 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही। साहिबजादा फरहान 11 गेंदों पर 10 रन बनाकर आउट हुए, जबकि उस्मान खान सिर्फ 3 रन बना सके। माज सदाकत ने 18 गेंदों पर 23 रन बनाए, लेकिन वह भी बड़ी पारी नहीं खेल सके। पाकिस्तान ने 39 रन तक अपने तीन विकेट गंवा दिए थे।
तीन विकेट जल्दी गिरने के बाद हसन नवाज और सईम अयूब ने पाकिस्तान की पारी को संभाला। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 48 गेंदों में 87 रन की साझेदारी की। सईम अयूब 29 रन बनाकर शिवम दुबे का शिकार बने। इसके बाद भी हसन नवाज ने आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी और तेजी से अपना अर्धशतक पूरा किया।
हसन नवाज ने 51 गेंदों में 96 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 5 चौके और 7 छक्के लगाए, लेकिन उनकी यह पारी पाकिस्तान को लक्ष्य तक नहीं पहुंचा सकी। अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा और पाकिस्तान 192 रन तक ही पहुंच सका।
भारत की ओर से अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे ने दो-दो विकेट लिए। भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान को 20 ओवर में 6 विकेट पर 192 रन तक सीमित रखा और 19 रन से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। पाकिस्तान को हराने के साथ ही भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष क्रिकेट का गोल्ड मेडल लगातार दूसरी बार जीत लिया। फाइनल में हार के बावजूद पाकिस्तान को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम के लिए यह जीत अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा की विस्फोटक बल्लेबाजी तथा गेंदबाजों के संतुलित प्रदर्शन का नतीजा रही।</description><guid>5170</guid><pubDate>03-Oct-2026 3:48:46 pm</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स 2026: कुमकुम मोहोद का ऐतिहासिक गोल्ड, अंतिम और अमन फाइनल में पहुंचे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5169</link><description>नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में शनिवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद ने दक्षिण कोरिया की येजिन ओह को शूट-ऑफ में हराकर महिला इंडिविजुअल रिकर्व में गोल्ड मेडल जीता और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वहीं, कुश्ती में अंतिम पंघाल और अमन सहरावत ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर भारत के दो और मेडल पक्के कर दिए, जबकि सागर जगलान और दीपक पूनिया ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला करेंगे।
कुमकुम और येजिन ओह के बीच फाइनल पांच सेट के बाद 5-5 से बराबर था। गोल्ड मेडल का फैसला शूट-ऑफ में एक ही तीर से हुआ। ओह ने 8 का स्कोर किया, जबकि कुमकुम ने दबाव के बीच 10 का निशाना लगाकर 6-5 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। फाइनल में कुमकुम की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही। ओह ने पहला सेट 29-27 से जीतकर 2-0 की बढ़त बनाई। दूसरा सेट 29-29 से बराबर रहने के बाद दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी 3-1 से आगे हो गईं। इसके बाद कुमकुम ने तीसरे सेट में लगातार तीन 10 लगाकर परफेक्ट 30 का स्कोर बनाया और 29 के स्कोर पर रुकी ओह के खिलाफ मुकाबला 3-3 से बराबर कर दिया।
ओह ने चौथा सेट 28-27 से जीतकर 5-3 की बढ़त बना ली और गोल्ड से सिर्फ एक सेट दूर थीं। कुमकुम ने पांचवें सेट में शानदार संयम दिखाया। उन्होंने लगातार तीन 10 लगाकर 30 का परफेक्ट स्कोर बनाया, जबकि ओह 28 का स्कोर ही कर सकीं। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में गया, जहां कुमकुम ने 10 का निशाना लगाकर इतिहास रच दिया।
कुमकुम ने एशियन गेम्स के इंडिविजुअल अभियान की शुरुआत रैंकिंग राउंड में 10वें स्थान पर रहते हुए की थी। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक टीम गोल्ड मेडलिस्ट कांग चाएयंग को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इसके बाद उन्होंने 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट चीन की जिंगी झू को 6-2 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
सेमीफाइनल में जगह बनाने के साथ ही कुमकुम एशियन गेम्स के इंडिविजुअल रिकर्व फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। अब गोल्ड जीतकर उन्होंने इस स्पर्धा में भारत के लिए पहली बार स्वर्ण पदक भी सुनिश्चित कर दिया है। ब्रॉन्ज मेडल चीन की युवेई हुआंग ने हमवतन जिंगी झू को 6-4 से हराकर जीता। कुमकुम की इस जीत के साथ भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक गेम्स के लिए महिला इंडिविजुअल रिकर्व में एक कोटा भी हासिल हुआ। कुमकुम और येजिन ओह ने अपने-अपने देशों के लिए एक-एक ओलंपिक कोटा हासिल किया।
कुश्ती में अंतिम पंघाल ने महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर गोल्ड मेडल की दावेदारी कायम रखी। उन्होंने नॉकआउट राउंड में कजाकिस्तान की शुगिला ओमीरबेक को 9-0 और क्वार्टर फाइनल में उज्बेकिस्तान की साकिबजमल एस्बोसीनोवा को 8-0 से हराया। सेमीफाइनल में उन्होंने चीन की जिन झांग को 6-1 से शिकस्त दी।
सेमीफाइनल में अंतिम शुरुआत में 0-1 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने लगातार छह अंक हासिल कर मुकाबला अपने नाम किया। फाइनल में उनका सामना जापान की मो कियोका से होगा। फाइनल मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 4:02 बजे शुरू होना है। फाइनल में पहुंचकर अंतिम एशियन गेम्स कुश्ती फाइनल में पहुंचने वाली चुनिंदा भारतीय महिला पहलवानों में शामिल हो गई हैं।
पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग में अमन सहरावत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश किया। उन्होंने जापान के यामातो ओगावा को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर 20-9 से हराया और क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान के नुरदनात ऐतानोव को 12-1 से शिकस्त दी। ताजिकिस्तान के आइयाल बेलोल्युब्स्की के खिलाफ सेमीफाइनल में अमन पहले हाफ के बाद 2-6 से पीछे थे। हालांकि, दूसरे हाफ में उन्होंने जोरदार वापसी की और 12 अंक हासिल किए, जबकि विरोधी पहलवान सिर्फ दो अंक बना सके। अमन ने मुकाबला 14-8 से जीतकर फाइनल में जगह बनाई। अब गोल्ड के लिए उनकी भिड़ंत उत्तर कोरिया के चोंग सोंग हान से होगी।
पुरुषों के 74 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में सागर जगलान को क्वार्टर फाइनल में ईरान के योनेस एमामिचोगाई से 0-10 से हार मिली। इससे पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया के तुल्गा तुमुर-ओचिर को 8-1 से हराया था। इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल की दौड़ में सागर ने उज्बेकिस्तान के रजाम्बेक जमालतोव को 7-3 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जगह बनाई।
97 किग्रा फ्रीस्टाइल में दीपक पूनिया ने चीन के झोउ जुनपेंग को 12-2 से हराकर अभियान की शुरुआत की। क्वार्टर फाइनल में हांगकांग चीन के ली वुई फंग विंसेंट के मुकाबले के लिए नहीं पहुंचने के कारण दीपक को वॉकओवर मिला और वह सेमीफाइनल में पहुंचे। हालांकि, सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के शेरजोड पोयोनोव से उन्हें 8-9 से हार का सामना करना पड़ा। अब दीपक के पास ब्रॉन्ज मेडल जीतने का मौका है।</description><guid>5169</guid><pubDate>03-Oct-2026 3:47:33 pm</pubDate></item><item><title> एशियन गेम्स में भारत की बेटियों ने जीता गोल्ड, पीएम मोदी बोले- भारतीय हॉकी के लिए बहुत खास पल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5168</link><description>नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन को फाइनल में 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। भारत ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में महिला हॉकी का खिताब अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई भी कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रियों ने टीम को इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत को भारतीय हॉकी के लिए खास पल बताया। पीएमओ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा कि देश महिला हॉकी टीम की सफलता का जश्न मना रहा है। उन्होंने टीम के कौशल, टीमवर्क और जज्बे की सराहना करते हुए खिलाड़ियों को भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह सफलता देशभर में हॉकी की लोकप्रियता बढ़ाने में योगदान देगी।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने आखिरी बार 1982 में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद टीम ने 1998 में सिल्वर मेडल हासिल किया था, जबकि 2018 में भी भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी। 2026 में चीन को हराकर टीम ने 44 साल के अंतराल के बाद फिर से एशियन गेम्स का खिताब अपने नाम किया।
फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही चीन पर दबाव बनाने की कोशिश की। छठे मिनट में बलजीत कौर को ग्रीन कार्ड मिला, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद भारत ने बढ़त हासिल कर ली। अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहीं लालरेम्सियामी ने 10वें मिनट में शानदार गोल कर भारत को 1-0 से आगे कर दिया।
भारत को बढ़त के बाद स्कोर दोगुना करने का मौका मिला, लेकिन टीम पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील नहीं कर सकी। इसके बावजूद भारतीय डिफेंस ने मजबूती बनाए रखी और पहले क्वार्टर के अंत तक चीन को बराबरी का मौका नहीं दिया।
दूसरे क्वार्टर में चीन ने आक्रामक रुख अपनाया और भारतीय गोल पर दबाव बनाया। चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, लेकिन अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार बचाव करते हुए भारत की बढ़त कायम रखी। चीन ने लगातार हमले किए, लेकिन भारतीय डिफेंस को भेदने में कामयाब नहीं हो सका।
तीसरे क्वार्टर में भारतीय कप्तान सलीमा टेटे के चोटिल होने के बावजूद टीम ने चीन को हावी होने का मौका नहीं दिया। भारतीय डिफेंस ने लगातार मजबूत खेल दिखाया और चीन के हमलों को नाकाम किया। चौथे क्वार्टर में सलीमा टेटे मैदान पर वापस लौटीं और उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने अपनी बढ़त बरकरार रखी।
मैच के अंतिम क्वार्टर में चीन ने बराबरी के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने संयम और मजबूत रक्षात्मक खेल का परिचय दिया। चीन को गोल करने का कोई मौका नहीं मिला और अंतिम सीटी बजते ही भारत ने 1-0 की जीत के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भारतीय महिला हॉकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि 44 साल बाद महिला हॉकी में गोल्ड जीतना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने टीम के हुनर, दृढ़ संकल्प और टीमवर्क की सराहना करते हुए खिलाड़ियों को चैंपियन बताया।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारतीय महिला टीम की जीत को भारतीय खेलों के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा चैंपियन चीन को हराकर भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1982 के बाद 44 साल के इंतजार को खत्म किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस जीत के साथ टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय महिला हॉकी टीम को बधाई देते हुए लालरेम्सियामी के निर्णायक गोल और सविता पूनिया के पेनल्टी स्ट्रोक बचाव की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इन दोनों मौकों पर टीम के कौशल, संयम और लड़ने के जज्बे की झलक दिखाई दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि 44 साल बाद हासिल यह खिताब आने वाली पीढ़ियों को भारतीय हॉकी की विरासत आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।
ओलंपिक 2028 का टिकट भी हुआ पक्का
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है। इस उपलब्धि से भारतीय टीम के लिए अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य की राह भी साफ हो गई है।
</description><guid>5168</guid><pubDate>03-Oct-2026 12:02:21 pm</pubDate></item><item><title>मुक्केबाजी छोड़ना चाहती थी, लेकिन अब स्वर्ण पदक जीतकर खुश हूं: लवलीना</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5167</link><description>नई दिल्ली। लवलीना बोरगोहेन ने 2024 ओलंपिक के बाद मुक्केबाजी से संन्यास लेने की योजना बनाई थी, लेकिन पेरिस खेलों में पदक से चूकने के कारण उन्होंने अपना इरादा बदल दिया जो उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि भारतीय स्टार ने शुक्रवार को यहां एशियाई खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ने अपने जन्मदिन पर 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की ज़ियी बाओ को 5-0 से हराकर एशियाई खेलों की महिला मुक्केबाजी में भारत के 12 साल से चले आ रहा स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म किया। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था।
लवलीना ने अपने मुकाबले के बाद कहा, मेरे लिए यह वर्ष काफी मुश्किल रहा। पहले मैं मुक्केबाजी छोड़ना चाहती थी। लेकिन मैंने जारी रखा। मैं एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलना चाहती थी। यह बहुत महत्वपूर्ण था। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मैंने खेलना जारी रखा।
असम की रहने वाली इस मुक्केबाज ने तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था लेकिन पेरिस ओलंपिक से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने एक साल के लिए ब्रेक लिया और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी की। वह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई थी। उन्होंने कहा, राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने से मैं खुश नहीं थी। लेकिन एक खिलाड़ी के जीवन में बहुत सी चीजें होती हैं, जैसे हार, चोट। आपको बहुत सी चीजों का सामना करना पड़ता है। यह स्वर्ण पदक मेरे लिए बहुत महत्व रखता है।लवलीना ने कहा, मैं अच्छा महसूस कर रही हूं। मुझे नहीं पता कि स्वर्ण पदक का जश्न कैसे मनाऊं। मुझे अपनी इस जीत को स्वीकार करने के लिए कुछ समय चाहिए। मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं।
इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, मुझे मजबूत रहना होगा और जीतना होगा। मैं हर चीज को लेकर बहुत सकारात्मक थी। जापान मेरे लिए बहुत भाग्यशाली है। मैं हमेशा जीतने के बारे में सोचती हूं। लवलीना से जब पूछा गया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद वह सबसे पहले किसे फोन करेंगी, उन्होंने कहा, मैं सबसे पहले अपनी मां को फोन करूंगी। वह मेरे मैच नहीं देखतीं क्योंकि वह बहुत चिंतित रहती हैं।</description><guid>5167</guid><pubDate>02-Oct-2026 5:08:30 pm</pubDate></item><item><title>वनडे विश्व कप 2027: भारत सात अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया और 10 अक्टूबर को पाकिस्तान से भिड़ेगा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5166</link><description>दुबई. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अगले साल अफ्रीकी महाद्वीप में होने वाले पुरुष वनडे विश्व कप का कार्यक्रम बृहस्पतिवार को घोषित कर दिया जिसके अनुसार पिछली बार का उपविजेता भारत अपने अभियान की शुरुआत सात अक्टूबर को केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगा। शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम 10 अक्टूबर को जोहानिसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से भिड़ेगी। भारत 14 अक्टूबर को सेंचुरियन (प्रिटोरिया, जिसे अब तशवाने के नाम से जाना जाता है) में अफगानिस्तान से भिड़ेगा, जिसके बाद 24 अक्टूबर को नवनिर्मित विक्टोरिया फॉल्स स्टेडियम में पानीसह-मेजबान जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच खेलेगा। भारत का मुक़ाबला 17 अक्टूबर को ब्लूमफ़ोनटेन में एक क्वालिफ़ायर से होगा।

दोनों सेमीफाइनल मैच क्रमशः 17 और 18 नवंबर को केपटाउन और सेंचुरियन में खेले जाएंगे जबकि फाइनल 21 नवंबर को वांडरर्स स्टेडियम में खेला जाएगा। किसी भी टीम को फाइनल तक पहुंचने से पहले 11 मैच खेलने होंगे। फाइनल 12वां मैच होगा।

भारत को ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, सह-मेजबान जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और क्वालीफाई करने वाली टीमों में से एक के साथ रखा गया है। ग्रुप बी में इंग्लैंड, सह-मेजबान दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका और दूसरा क्वालीफायर शामिल हैं। ग्रुप लीग के चरण समाप्त होने के बाद, सुपर 7 टूर्नामेंट 25 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष तीन टीमें और दोनों ग्रुपों में से बेहतर स्थिति वाली चौथी टीम अगले चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी। भारत को ए1 श्रेणी में, ऑस्ट्रेलिया को ए2 श्रेणी में और पाकिस्तान को ए3 श्रेणी में रखा गया है।

इंग्लैंड बी4 श्रेणी में है जबकि न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका क्रमशः बी1, बी2 और बी3 श्रेणी में हैं। यदि इनमें से कोई भी टीम क्वालीफाई करने में विफल रहती है, तो क्वालीफाई करने वाली टीम को स्वत: ही वह श्रेणी मिल जाएगी। मौजूदा आईसीसी वनडे रैंकिंग के अनुसार भारत को ए1 और पाकिस्तान को ए3 श्रेणी में रखा गया है, इसलिए यदि दोनों टीमें सुपर 7 के लिए क्वालीफाई करती हैं, तो वे सात नवंबर को केपटाउन में एक बार फिर आमने-सामने होंगी। उससे पहले भारत को 28 अक्टूबर को जिम्बाब्वे के विक्टोरिया फॉल्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका भी मिलेगा।</description><guid>5166</guid><pubDate>02-Oct-2026 3:19:44 pm</pubDate></item><item><title>ईशान के नाबाद 80 रन से श्रीलंका को हराकर भारत फाइनल में, पाकिस्तान से सामना</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5165</link><description>निशिन.  कठिन पिच पर ईशान किशन के 46 गेंद में नाबाद 80 रन की मदद से भारत ने  एशियाई खेलों के पुरूष क्रिकेट सेमीफाइनल में बृहस्पतिवार को श्रीलंका को  124 रन से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बना ली जहां सामना चिर  प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा । ईशान के 80 रन और वैभव सूर्यवंशी के 21  गेंद में 38 रन की मदद से भारत ने पहले बल्लेबाजी के लिये भेजे जाने पर सात  विकेट पर 169 रन बनाये । जवाब में श्रीलंका ने पावरप्ले के भीतर ही छह  विकेट 31 रन पर गंवा दिये थे और पूरी टीम 9 . 5 ओवर में 45 रन पर आउट हो गई  । जसप्रीत बुमराह ने पहली दो गेंदों पर ही दो विकेट ले लिये जिसके बाद  अक्षर पटेल ने भी दो विकेट लिये । श्रीलंका के दो बल्लेबाज रन आउट भी हुए ।  श्रीलंका अब कांस्य पदक के लिये बांग्लादेश से खेलेगा जबकि भारत का सामना  फाइनल में पाकिस्तान से होगा । दोनों मैच शनिवार को खेले जायेंगे । भारत और  पाकिस्तान के मैच से पहले फिर चर्चा है कि दोनों टीमें हाथ मिलायेंगी या  नहीं । पिछले साल आपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय सेना के प्रति एकजुटता  दिखाने के लिये भारतीय खिलाड़ियों ने एशिया कप और आईसीसी टूर्नामेंटों में  पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया है । श्रीलंका के खिलाफ स्पिनरों  की मददगार पिच पर भारत ने सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में शामिल करने का  फैसला किया । अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन भी टीम में थे लेकिन बायें हाथ के  तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को बाहर रखा गया । तेज गेंदबाजी का जिम्मा सिर्फ  जसप्रीत बुमराह पर रहेगा । श्रीलंका ने भी भारतीय बल्लेबाजों के लिये  फिरकी का जाल बुना और कुछ हद तक कामयाब भी रहे। सूर्यवंशी और ईशान की  पारियों के बिना भारत का स्कोर काफी कम रहता । धूप खिलने के कारण आज दोनों  टीमें इन खेलों में पहली बार मैदान पर उतरी । पावरप्ले में गेंद काफी टर्न  ले रही थी जिससे साबित हो गया कि स्पिनरों का दबदबा रहेगा । श्रीलंका ने  तेज गेंदबाजों से दो ही ओवर डलवाये । अभिषेक (तीन गेंद में सात रन) ने  श्रीलंका के कप्तान साहन अराछिगे को छक्का लगाया लेकिन उसके बाद ऊंचा शॉट  खेलने के प्रयास में शॉर्ट थर्डमैन पर कैच दे बैठे । सैमसन ने नौ गेंद में  सात रन बनाये और स्पिनर थारिंडु रत्नायके की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे ।
तीन  ओवर स्पिनरों से कराने के बाद बायें हाथ के तेज गेंदबाज बिनुरा फर्नांडो  को चौथे ओवर में गेंद सौंपी गई । सूर्यवंशी ने उन्हें लगातार चौके जड़कर  दबाव में ला दिया । थारिंडु के तीसरे ओवर में सूर्यवंशी ने उन्हें लांग आन  पर छक्का लगाया । पावरप्ले के बाद भारत का स्कोर दो विकेट पर 58 रन था । 15  वर्ष के सूर्यवंशी को अराछिगे ने शॉर्ट थर्डमैन पर लपकवाकर पवेलियन भेजा ।  कप्तान श्रेयस अय्यर और अक्षर पटेल बीच के ओवरों में आउट हो गए जिससे  रनगति धीमी पड़ी । ईशान ने हालांकि चार चौकों और चार छक्कों की अपनी पारी  के दम पर भारत को अच्छे स्कोर तक पहुंचाया ।</description><guid>5165</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:24:13 am</pubDate></item><item><title>एशियाड हॉकी : आखिरी मिनट में अभिषेक के गोल से पाकिस्तान को हराकर भारत फाइनल में</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5164</link><description>काकामिगाहारा. दूसरे हाफ में तीन गोल गंवाने वाली गत चैम्पियन भारतीय टीम लचर प्रदर्शन के बावजूद आखिरी मिनट में अभिषेक के गोल की मदद से बृहस्पतिवार को एशियाई खेलों की पुरूष हॉकी स्पर्धा के फाइनल में पहुंच गई। भारत ने पहले हाफ में तीन गोल करके 3 . 0 से बढत बना ली थी लेकिन दूसरा हाफ पाकिस्तान के नाम रहा जिसने तीन गोल करके स्कोर 3 . 3 कर दिया । ऐसा लग रहा था कि मैच पेनल्टी शूटआउट तक जायेगा लेकिन आखिरी सीटी बजने से कुछ सेकंड पहले अभिषेक ने गोल करके भारत को फाइनल में पहुंचाया । फाइनल शनिवार को खेला जायेगा जिसमें भारत का सामना मलेशिया या कोरिया से होगा ।
भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह (पांचवां और 13वां मिनट ) ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किये जबकि सुखजीत सिंह (23वां) और अभिषेक (60वां) ने फील्ड गोल दागे । पाकिस्तान के लिये कप्तान अबू बकर ने 30वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर पहला गोल किया जबकि शाहिद हन्नान (45वां) और राणा वाहिद (49वां) ने पांच मिनट के भीतर दो गोल दागे ।</description><guid>5164</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:22:33 am</pubDate></item><item><title>भारत के फ्रांसिस और नोबल ने एशियाई खेलों में पुरुष स्किफ में रजत पदक जीता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5163</link><description>गामागोरी सिटी (जापान). भारतीय जोड़ी मनु फ्रांसिस और कुरिसिंकल नोबल ने बृहस्पतिवार को यहां एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुष स्किफ की नौवीं रेस में रजत पदक जीता। फ्रांसिस और नोबल ने नौ रेस के बाद कुल 23 अंक जुटाए और दूसरे स्थान पर रहे। दोनों भारतीय खिलाड़ी जो एर्नाकुलम के रहने वाले और आपस में ममेरे भाई हैं। चीन की जोड़ी ने 16 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में सबसे कम कुल अंक हासिल करने वाली टीम विजेता बनती है। चीन की टीम में वेन जैडिंग और लियू तियान शामिल थे।
पुरुष स्किफ सेलिंग में प्रत्येक रेस में हासिल किए गए स्थान के आधार पर अंक दिए जाते हैं। पहला स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ी को एक अंक मिलता है और कुल अंक सबसे कम होने पर जीत दर्ज होती है। स्किफ छोटी और हल्की नौकाएं होती हैं। हांगकांग चीन के अकिरा ल्यूक साकाई और रसेल आयल्सवर्थ ने 24 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।
भारतीय जोड़ी ने तीसरी रेस जीती जबकि पहली, पांचवीं और नौवीं रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। दूसरी ओर चीन ने चार रेस में पहला स्थान हासिल करके शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया। केरल में 2018 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान जान गंवाने वाले मछुआरे के बेटे नोबल ने कहा कि अपने पहले एशियाई खेलों में पदक जीतना विशेष एहसास है। नोबल ने फाइनल के बाद पीटीआई से कहा, ''यह हमारे पहले एशियाई खेल थे और पदक जीतना बहुत विशेष है। यह कड़ी प्रतियोगिता थी और हमने रजत पदक जीत लिया।'' दोनों मुंबई स्थित आर्मी यॉटिंग नोड में प्रशिक्षण लेते हैं।
फ्रांसिस ने कहा, ''यह बहुत कठिन था। हवा तेज थी। हम तेज हवा वाली परिस्थितियों में ज्यादा सहज नहीं हैं। लेकिन हम टिके रहे और किसी तरह रजत पदक जीत लिया।'' उन्होंने कहा, ''हल्की हवा की परिस्थितियों में हम काफी अच्छे हैं। हम भारत में प्रशिक्षण लेते हैं और भारत में लगभग हर समय हवा हल्की रहती है।'' फ्रांसिस के लिए यह मिश्रित भावनाओं वाला दिन रहा क्योंकि उन्हें लगा कि वे स्वर्ण पदक जीत सकते थे। उन्होंने कहा, ''हम इसे लेकर बहुत ज्यादा कुछ महसूस नहीं कर रहे हैं। खुशी भी है और उतनी खुशी भी नहीं है क्योंकि हम स्वर्ण पदक जीत सकते थे।'' उन्होंने कहा, ''शुरुआत में हमें पता नहीं था कि हम रजत पदक की स्थिति में हैं। हमें लगा कि हम कांस्य के लिए मुकाबला कर रहे हैं इसलिए यह हमारे लिए भाग्यशाली रहा। इस तरह की तेज हवा वाली परिस्थितियों में हमारी तकनीक उतनी अच्छी नहीं है। पानी बहुत उथल-पुथल वाला था। लेकिन अंतिम रेस में नाव बहुत तेजी से चली। इसलिए हम उससे खुश थे।'' अपनी जोड़ी के तालमेल के बारे में फ्रांसिस ने कहा, ''हम आपस में भाई हैं। हमारी माताएं और हम साथ-साथ बड़े हुए हैं। हम एक-दूसरे को समझते हैं और इससे तालमेल बिठाना आसान हो जाता है।'' महिला स्किफ स्पर्धा में भारत की हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा की जोड़ी 26 अंक के साथ चौथे और अंतिम स्थान पर रही। जापान ने 11 अंक के साथ इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता जबकि हांगकांग चीन 16 अंक के साथ दूसरे और चीन 23 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारतीय जोड़ी नौ में से किसी भी रेस में जीत दर्ज नहीं कर सकी। हालांकि उसने तीसरी और चौथी रेस में दूसरा स्थान हासिल किया।</description><guid>5163</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:20:02 am</pubDate></item><item><title>गिल का रिकॉर्ड दोहरा शतक, रोहित का शतक, भारत ने सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बनाई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5162</link><description>गुवाहाटी। कप्तान शुभमन गिल (नाबाद 233 रन) के रिकॉर्ड सबसे तेज दोहरे शतक और रोहित शर्मा (101 रन) के शतक से भारत ने बुधवार को यहां दूसरे वनडे में वेस्टइंडीज पर आठ विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। दो पीढ़ियों के इन सुपरस्टार बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन से भारत ने 50 ओवर के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सफल 'रन चेज' पूरा किया। वेस्टइंडीज ने शायद उम्मीद की होगी कि 405 रन का लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजों के लिए बहुत मुश्किल साबित होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। गिल ने अपनी ही टीम के साथी ईशान किशन के 126 गेंद में दोहरे शतक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 117 गेंद में 200 रन पूरे किए और वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक जड़ दिया। वहीं पूर्व कप्तान रोहित ने वनडे में अपना 35वां शतक पूरा किया। दोनों ने मिलकर सिर्फ 26.2 ओवर में पहले विकेट के लिए 255 रन की साझेदारी कर दी और भारत ने 43.3 ओवर में दो विकेट पर 406 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस रात काफी रिकॉर्ड टूटे जिसमें भारत ने वनडे में अपना सबसे बड़ा लक्ष्य भी हासिल। अब भारत से आगे सिर्फ दक्षिण अफ्रीका है जिसने 2006 में जोहानिसबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 435 रन के लक्ष्य का सफल पीछा किया था।
बारसापारा की पिच बल्लेबाजी के अनुकूल रही जिस पर 811 रन बने जो एक मैच में सबसे ज्यादा कुल रन का रिकॉर्ड रहा। वेस्टइंडीज ने जॉन कैंपबेल (101 रन), शाई होप (104 रन) और आमिर जांगू (114 रन) के शतकों की बदौलत 50 ओवर के प्रारूप में 400 रन से अधिक का पहला स्कोर खड़ा किया। लेकिन मेजबान टीम ने 2013 में जयपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक विकेट पर 362 रन के अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य का पीछा करने के रिकॉर्ड को बेहतर कर दिया। हालांकि भारत के सामने शुरुआती चुनौती अपना पहला 400 से अधिक के लक्ष्य का सफल पीछा करना था। रोहित और गिल ने शानदार शॉट्स की झड़ी लगाकर इसे एक पायदान और ऊपर उठा दिया। इस दौरान रोहित ने 12,000 वनडे रन पूरे किए जिससे वह ऐसा करने वाले केवल सातवें क्रिकेटर तथा सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के बाद तीसरे भारतीय बने। इसके बाद उन्होंने एक और वनडे शतक पूरा किया और अपने अंदाज से हटकर हल्की उछल-कूद के साथ जश्न मनाया। गिल ने इससे पहले केवल 62 गेंदों में अपना 11वां वनडे शतक पूरा किया, यह इस प्रारूप में उनका सबसे तेज शतक था। दोनों ने शुरुआत से ही आक्रमण किया और बेहतरीन टाइमिंग से शॉट लगाए। गिल विशेष रूप से सहज दिखे, उन्होंने अपनी कलाइयों का इस्तेमाल करके गेंदों को गैप में रखा और फिर आगे निकलकर स्पिनरों को ऊपर से ड्राइव करके शॉट लगाए। दूसरी ओर, रोहित ने अपने पुल और पिक-अप शॉट्स के साथ ही ऑफ साइड में शानदार ड्राइव लगाकर बाउंड्री लगाई। भारत ने इस तरह 12 ओवर के अंदर 100 रन पार कर लिए। गिल ने 38 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया जबकि रोहित ने केवल 32 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। इस जोड़ी के आक्रमण ने जल्द ही 406 के कठिन लक्ष्य को एक वास्तविक संभावना में बदल दिया।
भारत 22वें ओवर तक बिना कोई विकेट गंवाए 200 रन तक पहुंच गया था, यह पहली बार था जब किसी वनडे में 350 से अधिक के लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी सलामी जोड़ी ने ऐसा किया। पर यह साझेदारी 254 पर समाप्त हुई जब रोहित 75 गेंद पर 101 रन बनाकर आउट हुए। लेकिन तब तक भारत को 24 ओवरों में केवल 151 रन चाहिए थे जो मेजबान बल्लेबाजों की बल्लेबाजी को देखते हुए बहुत छोटा दिखने लगा। इससे पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने के बाद कैंपबेल ने 65 गेंदों में शतक जड़कर लय तय की और वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारत के अनुभवहीन तेज गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाईं। कैंपबेल ने 68 गेंदों पर 101 रन की पारी के दौरान भारतीय आक्रमण की धुनाई की जिसमें नौ चौके और पांच छक्के जड़े थे। इसके बाद होप और जांगू ने बीच के और अंतिम ओवरों में दबदबा बनाते हुए करीब आठ रन प्रति ओवर की दर से स्कोर में इजाफा किया। होप ने सूत्रधारक के साथ आक्रामक बल्लेबाज की भूमिका बखूबी निभाई। उन्होंने विराट कोहली द्वारा 27 रन के निजी स्कोर पर मिले जीवनदान का पूरा फायदा उठाया। शॉर्ट मिडविकेट पर कोहली के हाथों से उनका कैच छूट गया था। कप्तान ने 94 गेंदों पर 104 रन की शानदार पारी खेली जिसमें आठ चौके और तीन छक्के शामिल थे। इससे भारत को वापसी करने का मौका नहीं मिला। जांगू ने भी होप का बखूबी साथ दिया। उन्होंने आक्रामकता के साथ सोच-समझकर शॉट खेलते हुए सिर्फ 69 गेंदों में अपना दूसरा वनडे शतक पूरा किया। वह 13 चौके और तीन छक्के की मदद से 114 रन बनाकर नाबाद रहे। इससे पहली बार वेस्टइंडीज के लिए वनडे में तीन शतक बने। यह स्कोर 2019 में इंग्लैंड के खिलाफ उसके पिछले 389 रन के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से बेहतर रहा। एशियाई खेलों की टीम में शामिल जसप्रीत बुमराह और बाहर चल रहे मोहम्मद सिराज की अनुपस्थिति में भारत 2027 विश्व कप से पहले युवाओं को आजमा रहा है। लेकिन तेज गेंदबाजी आक्रमण के प्रदर्शन ने काफी सवाल खड़े किए क्योंकि इससे तेज गेंदबाजी में उसकी अनुभवहीनता उजागर हो रही है। भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को लगातार नजरअंदाज किए जाने के बीच भारत की विकल्प तलाशने की कोशिश प्रभावशाली नहीं दिखी। जम्मू कश्मीर से भारतीय टीम में प्रतिनिधित्व करने वाले तीसरे क्रिकेटर बने औकीब नबी ने अपने 8.5 ओवर में 84 रन लुटाए, उन्हें सपाट पिच पर वेस्टइंडीज को रोकने में संघर्ष करना पड़ा। गुरनूर बरार ने 96 रन देकर दो जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने पांच ओवर में 45 रन देकर एक विकेट लिया। भारत की चिंता और बढ़ गई जब बल्लेबाजी ऑलराउंडर नमन धीर का टखना मुड़ गया जिससे उन्हें 6.1 ओवर गेंदबाजी करने के बाद 36वें ओवर में मैदान छोड़ना पड़ा। भारत के लिए सकारात्मक पहलू दो स्पिनर रहे जिसमें कुलदीप यादव (65 रन देकर दो विकेट) ने वनडे में 200 विकेट के क्लब में प्रवेश किया जबकि रविंद्र जडेजा ने 75 रन देकर दो विकेट झटके। 
</description><guid>5162</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:28:33 am</pubDate></item><item><title>परवीन हुड्डा और अंकुश पंघाल स्वर्ण पदक से एक जीत दूर, नरेंद्र बेरवाल को कांस्य</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5161</link><description>निशियो (जापान). अंकुश पंघाल ने एशियाई खेलों में पुरुष मुक्केबाजी के फाइनल में पहुंचकर भारत का आठ साल का इंतजार खत्म किया, वहीं परवीन हुड्डा ने शानदार जीत के साथ महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में खिताबी मुकाबले में जगह बनाई लेकिन नरेंद्र बेरवाल को 90 किलोग्राम से अधिक वर्ग के सेमीफाइनल में बाहर होने के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। परवीन ने 65 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में चीन के ली शू को 5-0 से हराया। इसके बाद अंकुश ने 80 किलोग्राम वर्ग पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए उज्बेकिस्तान के फजलुद्दीन एरकिनबोएव को 4-1 से हराया। एरकिनबोएव 75 किलोग्राम भार वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन हैं। अनुभवी मुक्केबाज बेरवाल को सेमीफाइनल में कजाखस्तान के मौजूदा सुपर हैवीवेट विश्व चैंपियन आइबेक ओरलबाय के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा। बेरवाल ने इसके साथ ही एशियाई खेलों में एक और कांस्य पदक अपने नाम किया। वह 2023 में चीन में हुए पिछले एशियाई खेलों में भी सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। अंकुश आठ साल में एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बन गए हैं। अमित पंघाल ने 2018 में 49 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर आखिरी बार यह उपलब्धि हासिल की थी। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अंकुश ने एरकिनबोएव के खिलाफ जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। उन्होंने धीमी शुरुआत से उबरते हुए अंतिम दौर में दबदबा बनाया और यादगार जीत हासिल की। अंकुश ने बाद में 'पीटीआई' से कहा, ''मैं एशियाई जूनियर चैंपियनशिप के दौरान भी इस प्रतिद्वंदी के खिलाफ खेल चुका था और मैं वह मुकाबला हार गया था। हमने उसके मुकाबलों के वीडियो देखे और अपनी रणनीति बनाई। मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है।'' अंकुश को अपनी लय पाने में समय लगा क्योंकि एरकिनबोएव ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। भारतीय मुक्केबाज ने कुछ जवाबी हमले किए, लेकिन उज्बेक मुक्केबाज यह राउंड 4-1 से जीत गया। अंकुश ने दूसरे राउंड में अपनी रणनीति बदल दी। उन्होंने अधिक आक्रामक रवैया अपनाया और 3-2 से जीत हासिल की। अंकुश ने अंतिम राउंड में जोरदार शुरुआत की और मुकाबले का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करते हुए 4-1 से जीत दर्ज की। परवीन दिग्गज एमसी मैरी कॉम (जिन्होंने 2014 में खिताब जीता था) और लवलीना बोरगोहेन (जिन्होंने पिछले खेलों में रजत पदक जीता था) के बाद एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज भी बन गई हैं। परवीन का पिछले एशियाई खेलों में जीता गया कांस्य पदक अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (आईटीए) द्वारा 22 महीने के निलंबन के बाद छीन लिया गया था। परवीन पर यह कार्रवाई अपने ठिकाने की जानकारी (व्हेयरअबाउट्स) से जुड़ी विफलता के कारण हुई थी। अब उन्होंने हांगझोउ में अपने प्रदर्शन से आगे निकलते हुए एशियाई खेलों में कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है। परवीन ने कहा, ''मुकाबला अच्छा रहा। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, क्योंकि उसने क्वार्टर फाइनल में विश्व चैंपियन को हराया था। मैं उसी खिलाड़ी का सामना करने की तैयारी कर रही थी, इसलिए मुझे अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। मैंने जवाबी मुक्कों के जरिए अच्छा प्रदर्शन किया।'' रोहतक की रहने वाली इस मुक्केबाज ने ली के खिलाफ संयमित शुरुआत की लेकिन जल्द ही मुकाबला रोमांचक हो गया क्योंकि दोनों मुक्केबाज करीब से एक-दूसरे पर हमला करने लगे, और परवीन ने तीखे जवाबी मुक्कों के दम पर पांच में से तीन जजों का फैसला अपने पक्ष में किया। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा। जब ली ने आक्रमण शुरू करने की कोशिश की, तो परवीन ने सही समय पर पलटवार किया और दूसरा राउंड सर्वसम्मति से अपने नाम किया। ली ने तीसरे राउंड में दबदबा बनाने की कोशिश की, वहीं परवीन ने मौकों का फायदा उठाया और यह राउंड 4-1 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया जहां उनका मुकाबला शुक्रवार को चीनी ताइपे की पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता चेन निएन चिन से होगा। परवीन ने कहा, ''मुझे स्वर्ण पदक की उम्मीद है और इसे जीतने के लिए मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।'' भारत के अग्रणी सुपर हेवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र को ओरलबाय के खिलाफ शुरू से ही संघर्ष करना पड़ा। भारत के 31 वर्षीय खिलाड़ी ने जवाबी हमलों पर भरोसा किया लेकिन इससे उन्हें खास फायदा नहीं मिला। तीसरे राउंड में नरेंद्र को भी स्टैंडिंग काउंट का सामना भी करना पड़ा। नरेंद्र ने कहा, ''मैं पहली बार उसके खिलाफ खेल रहा था। हमने उसके पिछले मुकाबलों का विश्लेषण किया और कोच ने बताया कि क्या करना है। कोच ने मुझे अपने प्रतिद्वंदी पर अधिक बॉडी पंच मारने के लिए कहा, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया। वह विश्व का नंबर एक खिलाड़ी है। यह मेरा एशियाई खेलों में दूसरा पदक है, इसलिए मैं इसे स्वीकार करूंगा।'' भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले एशियाई खेलों की तुलना में अपना बेहतर प्रदर्शन कर लिया है। पिछली बार उसने चार पदक जीते थे लेकिन यहां छह मुक्केबाजों ने पदक राउंड में प्रवेश किया है।</description><guid>5161</guid><pubDate>29-Sep-2026 12:30:32 am</pubDate></item><item><title>भारतीय क्रिकेट टीम एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में श्रीलंका से भिड़ेगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5160</link><description>निशिन. श्रीलंका और नेपाल का क्वार्टर फाइनल खराब मौसम के कारण रद्द होने के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में श्रीलंका से भिड़ेगी। श्रीलंका को अपनी बेहतर रैंकिंग के आधार पर सेमीफाइनल में जगह मिली। टीम रैंकिंग में श्रीलंका नौवें, जबकि नेपाल 14वें स्थान पर है। नागोया में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण भारत के क्वार्टर फाइनल समेत अंतिम आठ के सभी मुकाबले बारिश की भेंट चढ़ गए। दूसरे सेमीफाइनल में पाकिस्तान का सामना बांग्लादेश से होगा।
दोनों सेमीफाइनल मुकाबले बृहस्पतिवार को खेले जाएंगे।
श्रेयस अय्यर की अगुआई वाली भारतीय पुरुष टीम ने अभी तक कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में कोई मुकाबला नहीं खेला है। इसी मैदान पर महिला क्रिकेट प्रतियोगिता भी आयोजित हुई थी, जिसमें हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीता था।</description><guid>5160</guid><pubDate>29-Sep-2026 12:26:56 am</pubDate></item><item><title>भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने आखिरी ग्रप मैच में बांग्लादेश को 10 . 0 से हराया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5159</link><description>काकामिगाहारा. भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में अपना अजेय फॉर्म बरकरार रखते हुए सोमवार को पूल ए के आखिरी ग्रुप मैच में बांग्लादेश को 10 . 0 से हराया । भारत पूल ए में शीर्ष पर रहा और अब एक अक्टूबर को सेमीफाइनल में सामना चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा । भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह ( 27वां और 40वां मिनट), शिलानंद लाकड़ा ( 44वां और 45वां) ने दो दो गोल किये जबकि अभिषेक ( तीसरा मिनट), जुगराज सिंह (22वां), सुखजीत सिंह (32वां), संजय (59वां) और मनदीप सिंह (60वां) ने एक एक गोल दागा । भारत ने इससे पहले इंडोनेशिया को 13 . 1, दक्षिण कोरिया को 8 . 2, सिंगापुर को 7 . 0 और जापान को 2 . 0 से हराया था ।</description><guid>5159</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:55:39 am</pubDate></item><item><title>ईशा, श्रीशंकर और गुलवीर ने जीते रजत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5158</link><description>नागोया. युवा निशानेबाज ईशा सिंह ,लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह और लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर ने एशियाई खेलों में सोमवार को भारत की झोली में रजत पदक डाले हालांकि स्वर्णिम सफलता के करीब पहुंचकर चूकने का सिलसिला जारी रहा । भारत के नाम पर अभी भी चार स्वर्ण पदक ही दर्ज हैं। इसके अलावा उसने 19 रजत और 20 कांस्य पदक सहित कुल 43 पदक हासिल कर लिए हैं और वह पदक तालिका में 12वें स्थान पर है। चीन 130 स्वर्ण, 53 रजत और 45 कांस्य सहित कुल 228 पदक जीतकर शीर्ष पर बना हुआ है। पहले ही 10000 मीटर में रजत पदक जीत चुके गुलवीर ने पुरुषों की 1500 मीटर प्रतियोगिता में 3:36.72 सेकंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ एक और रजत पदक अपने नाम किया। इससे पहले 21 वर्षीय निशानेबाज ईशा ने पांच शूट-ऑफ में से गुजरने के बाद रजत पदक जीता। श्रीशंकर ने लंबी कूद में हांगझोउ खेलों का अपना रजत पदक बरकरार रखा । उन्होंने दूसरे प्रयास में 8 . 07 मीटर की कूद लगाई लेकिन चौथे प्रयास में टखने में चोट लगने के कारण आखिरी दो प्रयास नहीं कर सके । चीन के युहाओ शि ने 8 . 17 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता । उजबेकिस्ताकन के अनवर अनवारोव को कांस्य पदक मिला । पारूल चौधरी ने महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया ।
कुराश खिलाड़ी पिकी बलहारा ने 78 किलोग्राम से कम के वर्ग में कांस्य पदक जीतकर सबको चौंका दिया। एशियाई खेलों में उनका यह दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 2018 में रजत पदक जीता था। इस तरह से वह इन खेलों में सबसे सफल भारतीय कुराश खिलाड़ी बन गईं। महिला 400 मीटर बाधा दौड़ में विथ्या रामराज का प्रदर्शन भी शानदार रहा। उन्होंने दिग्गज पीटी उषा के चार दशक से अधिक पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते हुए कांस्य पदक जीता। रामराज ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर उषा के 1984 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में बनाए गए 55.42 सेकंड के रिकॉर्ड को तोड़ा। मुक्केबाजी में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा) और कपिल पोखरिया (90 किग्रा) ने सेमीफाइनल में पहुंच कर पदक पक्का किया। भारत के तीन मुक्केबाज पहले ही सेमीफाइनल में जगह बना चुके थे। तीरंदाजी में हालांकि भारत को झटका लगा क्योंकि महिला व्यक्तिगत कंपाउंड चैंपियन ज्योति सुरेखा वेम्मन क्वार्टर फाइनल में बाहर हो गई। अनुभवी ट्रैक एथलीट अविनाश साबले पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में अपना खिताब बरकरार रखने में नाकाम रहे। उन्होंने 8:21.67 सेकंड के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बावजूद पांचवां स्थान हासिल किया। इसके अलावा मनु भाकर 25 मीटर महिला पिस्टल प्रतियोगिता में टीम या व्यक्तिगत वर्ग में अच्छा प्रदर्शन करने में विफल रहने के बाद बिना पदक के ही टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। निशानेबाजी में काफी रोमांचक मुकाबले देखने को मिला जिसमें ईशा ने रजत पदक जीता।
हैदराबाद की 21 वर्षीय ईशा इस वर्ग की मौजूदा विश्व नंबर एक हैं। उन्होंने रजत की दौड़ में बने रहने के लिए उत्तर कोरिया की किम हियोन सुक के खिलाफ तीन शूट-ऑफ जीते। इसके बाद स्वर्ण पदक के मुकाबले में उन्हें चीन की शियाओ जियारुईशुआन के साथ दो और शूट-ऑफ से गुजरना पड़ा। निर्धारित सीरीज के बाद दोनों के 38-38 अंक थे, लेकिन अंतिम निशाने में ईशा चूक गईं और उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। कंधे के दर्द और करीबी एलिमिनेशन से उबरते हुए ईशा ने बेहद नाटकीय फाइनल में अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। मनु 579 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहीं, जो फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। ईशा ने क्वालीफिकेशन में 580 अंक जुटाए थे। भारतीय महिला टीम भी पदक की दौड़ में थी, लेकिन अहम समय पर राही सरनोबत की एक चूक टीम पर भारी पड़ी। सरनोबत ने चौथी सीरीज (प्रत्येक सीरीज में पांच निशाने लगाने होते हैं) में 39 अंक का निराशाजनक स्कोर किया। इसके बाद भारत की पदक की उम्मीदें समाप्त हो गईं। सरनोबत 568 अंक के साथ 30वें स्थान पर रहीं। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम बारिश के कारण अफगानिस्तान के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मैच रद्द होने के बाद सेमीफाइनल में पहुंच गई। श्रेयस अय्यर की टीम विश्व रैंकिंग में पहले स्थान पर होने के कारण आगे बढ़ी, जबकि अफगानिस्तान 10वें स्थान पर है। स्क्वाश में दो व्यक्तिगत रजत पदक और मिश्रित युगल में एक कांस्य पदक जीतने के बाद भारत ने टीम प्रतियोगिता में भी अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। भारतीय पुरुष और महिला टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंच गईं, जहां महिला टीम ने जापान पर एक कठिन जीत हासिल की। तीसरी वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने जापान को 2-1 से हराया, हालांकि शीर्ष खिलाड़ी अनाहत सिंह विश्व की छठे नंबर की खिलाड़ी सतोमी वातानाबे से पांच गेम में हार गईं। अनाहत ने व्यक्तिगत सेमीफाइनल में विश्व की छठे नंबर की जापानी खिलाड़ी को हराया था और ऐतिहासिक रजत पदक जीता था। पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम ने अपने पहले मैच में चीन को 3-0 से हराया था। चीन में स्वर्ण पदक जीतने वाली पुरुष टीम ने दक्षिण कोरिया को 3-0 से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की की। भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम ने भी पूल सी के प्रारंभिक दौर के मैच में हांगकांग को हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। भारत ने इससे पहले वियतनाम पर 3-0 की जीत के साथ शुरुआत की और अब वह मंगलवार को कतर से भिड़ेगा।</description><guid>5158</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:52:29 am</pubDate></item><item><title>सर्वेश कुशारे और एंसी सोजन को रजत, हरिता और पारुल ने कांस्य पदक जीता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5157</link><description>नागोया. भारत के सर्वेश कुशारे और एंसी सोजन ने रविवार को यहां एशियाई खेलों में क्रमश: पुरुष ऊंची कूद और महिला लंबी कूद फाइनल में अधिकांश समय बढ़त बनाए रखी लेकिन अंत में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा जबकि पारुल चौधरी ने महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज में कांस्य पदक जीता। सर्वेश स्पर्धा में काफी समय तक शीर्ष पर रहे लेकिन 2.25 मीटर की ऊंचाई को पहली कोशिश में पार नहीं कर पाने के बाद दूसरे स्थान पर खिसक गए। चीनी ताइपे के चाओ शुआन फू ने यह ऊंचाई अपनी पहली कोशिश में पार कर ली। हालांकि कुशारे ने दूसरी कोशिश में 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर ली।
महिला लंबी कूद फाइनल में एंसी ने 6.53 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और दूसरे स्थान पर रहीं। चीन की हुआंग यिंगयिंग ने आखिरी प्रयास में 6.55 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। इससे पहले भारत की हरिता भद्रा ने महिला 200 मीटर में 23.20 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। भद्रा तीसरे स्थान पर रहीं। वह जापान की इडो अबिगेइरुफुका से मामूली अंतर से आगे रहीं जिन्होंने 23.21 सेकेंड का समय निकाला। हालांकि एंसी की हमवतन शैली सिंह के लिए महिला लंबी कूद फाइनल में निराशा हाथ लगी। चीन की मेंगयी तान ने 6.46 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ दिया जिससे शैली कांस्य पदक से चूक गईं। एंसी ने पांचवें प्रयास में 6.53 मीटर की कूद लगाई थी लेकिन यिंगयिंग ने 6.55 मीटर की कूद के साथ अंतिम प्रयास में उन्हें पीछे छोड़ दिया। शैली का दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 6.42 मीटर रहा।
महिला 200 मीटर फाइनल में सिंगापुर की शांति परेरा ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ 22.78 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि चीन की चेन युजी ने 22.93 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। फाइनल में शामिल एक अन्य भारतीय उन्नति अयप्पा बोलैंड 23.48 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं।
पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली पारुल ने नौ मिनट 8.67 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ लगातार दूसरी बार कांस्य पदक अपने नाम किया। बहरीन की विनफ्रेड यावी ने नौ मिनट 4.36 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाखस्तान की नोराह जेरुतो तनुई ने नौ मिनट 06.82 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया। स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली एक अन्य भारतीय एथलीट अंकिता नौ मिनट 19.24 सेकेंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहीं।</description><guid>5157</guid><pubDate>27-Sep-2026 12:27:10 am</pubDate></item><item><title>भारतीय महिला हॉकी टीम ने सिंगापुर को 7-0 से हराया, सेमीफाइनल में कोरिया से होगा मुकाबला</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5156</link><description>काकामिगाहारा. सुनेलिता टोप्पो के दो गोल की मदद से भारतीय महिला हॉकी टीम ने रविवार को यहां एशियाई खेलों के अपने अंतिम पूल बी मैच में सिंगापुर को 7-0 से रौंद दिया जिससे अब सेमीफाइनल में उसका सामना कोरिया से होगा। भारत ने पांच मैच में पांच जीत के साथ पूल बी में शीर्ष स्थान हासिल किया। अब सेमीफाइनल 30 सितंबर को होगा। भारत के लिए कप्तान सलीमा टेटे (17वें मिनट), सुनेलिता (22वें, 24वें), लालरेमसियामी (26वें), रुतुजा दादासो पिसाल (29वें), निक्की प्रधान (35वें) और दीपिका (55वें) ने गोल किए। गत चैंपियन और मौजूदा ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन दूसरे सेमीफाइनल में मेजबान जापान से भिड़ेगा।
सिंगापुर ने पहले क्वार्टर में भारत को कड़ी टक्कर दी, लेकिन भारत ने दबदबा बनाए रखा। सिंगापुर ने भारत के शुरुआती आठ पेनल्टी कॉर्नर नाकाम किए। दूसरे क्वार्टर में सलीमा ने मैदानी गोल से भारत का खाता खोला। इसके बाद सुनेलिता ने दो गोल किए जबकि ललरेमसियामी और रुतुजा ने भी गोल कर भारत को 5-0 से आगे कर दिया। तीसरे क्वार्टर में निक्की ने भारत की बढ़त 6-0 कर दी। भारत को लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन टीम उन्हें गोल में बदलने में नाकाम रही। मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले दीपिका ने शानदार फ्लिक से सातवां गोल किया। पहले तीन क्वार्टर में भारत को 24 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन इनमें से केवल तीन को ही गोल में बदला जा सका। मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले भारत को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले जिसमें दीपिका ने टीम का सातवां गोल किया।</description><guid>5156</guid><pubDate>27-Sep-2026 12:22:13 am</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स: महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3पी में भारत को सिल्वर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5154</link><description>-तिलोत्तमा-विदरसा ने व्यक्तिगत फाइनल में बनाई जगह
नई दिल्ली। भारत की तिलोत्तमा सेन, विदरसा विनोद कोचलुमकल और आशी चौकसे ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। तीनों ने क्वालिफिकेशन राउंड में कुल 1763 पॉइंट्स बनाए। चीन ने 1773 पॉइंट्स के साथ टीम गोल्ड, जबकि कजाकिस्तान ने 1754 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज जीता।
भारतीय तिकड़ी पूरे क्वालिफिकेशन में मेडल की दौड़ में बनी रही। नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग पोजीशन में उनके स्कोर ने एक मजबूत टीम टोटल बनाया। तिलोत्तमा और आशी शुरुआती स्टेज में लीडिंग शूटर्स में से थीं, जबकि विदरसा ने नीलिंग में मुश्किल शुरुआत के बाद काफी रिकवरी की। तिलोत्तमा खास तौर पर कंसिस्टेंट थीं। नीलिंग और प्रोन स्टेज के बाद वह टॉप तीन में पहुंच गईं। आखिरकार उन्होंने इंडिविजुअल क्वालिफिकेशन में 590 पॉइंट्स के साथ तीसरा स्थान हासिल किया और आठ-शूटर फाइनल में जगह बनाई।
विदरसा ने भी आखिर में अहम बढ़त हासिल की। नीलिंग के दौरान स्टैंडिंग में नीचे गिरने के बाद उन्होंने प्रोन और स्टैंडिंग में मजबूती से वापसी की और 588 पॉइंट्स के साथ छठे स्थान पर क्वालिफिकेशन पूरा किया। वह फाइनल में तिलोत्तमा के साथ शामिल हुईं। इस बीच, आशी एक मुश्किल स्टैंडिंग सीरीज़ के बाद इंडिविजुअल फाइनल में जगह नहीं बना पाईं। वह 585 पॉइंट्स के साथ 15वें स्थान पर रहीं, लेकिन टीम स्टैंडिंग में भारत के सिल्वर मेडल जीतने में उनका योगदान अहम रहा।
क्वालिफिकेशन फॉर्मेट में शूटर्स को नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग में 20-20 शॉट पूरे करने थे। तीनों एथलीट्स के कुल स्कोर से टीम मेडल पोजीशन तय हुई, जबकि टॉप आठ इंडिविजुअल परफॉर्मर फाइनल में पहुंचे। हर देश से ज्यादा से ज्यादा दो शूटर ही क्वालिफाई कर सकते थे। चीन की हान जियायू ने इंडिविजुअल क्वालिफिकेशन में 594 पॉइंट्स के साथ टॉप किया, जबकि तिलोत्तमा के 590 पॉइंट्स ने उन्हें तीसरा स्थान दिलाया। विदरसा का 588 स्कोर छठे स्थान के लिए काफी था। टीम सिल्वर पहले ही पक्का हो चुका है। अब ध्यान इंडिविजुअल फाइनल पर है। तिलोत्तमा और विदरसा का ध्यान एक और पदक पर होगा।</description><guid>5154</guid><pubDate>26-Sep-2026 1:50:45 pm</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स: भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता गोल्ड, फाइनल में ईरान को 37-34 से हराया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5153</link><description>नई दिल्ली। भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में देश को तीसरा गोल्ड मेडल दिला दिया है। भारतीय टीम ने फाइनल मुकाबले में ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय महिला टीम ने हांगझोऊ 2023 एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। बेहद रोमांचक और करीबी रहे इस मुकाबले में भारत ने आखिरी समय तक अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी थी। ईरान भी वापसी के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था। मैच के आखिरी मिनट में ईरान को मुकाबले में बने रहने के लिए पॉइंट्स की जरूरत थी। भारत के डिफेंस ने आयनाज पर एक जरूरी टैकल करके मुकाबला आसानी से जीत लिया। 37-34 से मैच जीतकर भारतीय टीम ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
पूरे टूर्नामेंट में भारत की तरफ से शानदार प्रदर्शन करने वाली संजू देवी ने एक बार फिर अहम भूमिका निभाई। भारतीय महिला कबड्डी टीम में पूजा, राज रानी, सोनाली विष्णु शिंगटे, पुष्पा, भावना देवी, रितु, संजू देवी, रितु नेगी, मनीषा कुमारी, पिंकी रॉय, ज्योति और निकिता शामिल थीं। भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का भी शनिवार को ही फाइनल मुकाबला होने वाला है। भारतीय पुरुष टीम भी ईरान से ही भिड़ेगी। भारतीय टीम भी गत चैंपियन है और ईरान के खिलाफ अपने खिताब का बचाव करने उतरेगी।
भारतीय दल के लिए शनिवार का दिन अच्छा रहा है। सावन बरवाल ने पुरुषों की मैराथन में 2:11:37 के नेशनल रिकॉर्ड टाइम के साथ सिल्वर मेडल जीता। बरवाल ने एशियन गेम्स मैराथन में पदक के लिए भारत का 44 साल का इंतजार समाप्त किया। भारत ने महिलाओं के 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में आशी चौकसे, तिलोत्तमा सेन और विदरसा विनोद की मदद से सिल्वर मेडल भी जीता। स्क्वैश में, जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार ने हांगकांग के टैंग मिंग होंग और ली का यी के खिलाफ मिक्स्ड डबल्स सेमीफाइनल हारने के बाद ब्रॉन्ज मेडल जीता।</description><guid>5153</guid><pubDate>26-Sep-2026 1:49:08 pm</pubDate></item><item><title>एशियन गेम्स: सावन बरवाल ने 44 साल बाद पुरुष मैराथन में भारत को दिलाया रजत पदक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5152</link><description>नई दिल्ली। भारत के सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष मैराथन में रजत पदक जीता। उनके इस पदक के साथ एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन में भारत का 44 साल का पदक इंतजार समाप्त हो गया। नेशनल रिकॉर्ड धारक बरवाल ने नागोया में आयोजित 42.195 किलोमीटर की मैराथन में कड़े मुकाबले के बीच लगातार पदक की दौड़ में बने रहते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। उनका रजत पदक 1982 के एशियन गेम्स के बाद इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक है। साथ ही, यह विदेशी धरती पर एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में किसी भारतीय एथलीट का पहला पदक भी है।
मैराथन सुबह 4 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू हुई, जिसमें बरवाल और साथी भारतीय धावक कार्तिक करकेरा सहित 19 प्रतिभागी शामिल थे। बरवाल शुरुआती स्टेज में लीडिंग ग्रुप में मजबूती से बने रहे, फिर जैसे-जैसे रेस आगे बढ़ी, उन्होंने सबसे आगे अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आधे रास्ते तक, बरवाल पहले ही दूसरे स्थान पर थे। इसके बाद, जब रेस आगे बढ़ने लगी, तो वह मेडल की दौड़ में बने रहे और 35 किलोमीटर के निशान पर 1:49:29 की रिपोर्टेड टाइमिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
रेस के लगभग सात किलोमीटर बाकी रहने पर बरवाल जापान के इचिताका यामाशिता का पीछा कर रहे थे। जापानी धावक ने एक बड़ा गैप बना लिया, लेकिन बरवाल ने आखिरी स्टेज तक अपनी जगह बनाए रखी और सिल्वर मेडल की दौड़ में बने रहे। बरवाल की इस कामयाबी से भारत के ऐतिहासिक एशियन गेम्स मैराथन मेडल की गिनती में चौथा मेडल जुड़ गया है। छोटा सिंह ने पहले 1951 एशियन गेम्स में गोल्ड जीता था, जबकि सूरत सिंह माथुर ने उसी एडिशन में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने 1982 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। बरवाल का सिल्वर मेडल अब 44 सालों में कॉन्टिनेंटल इवेंट में भारत का पहला मैराथन मेडल बन गया है। रेस में दूसरे भारतीय कार्तिक करकेरा 2:22:41 में मैराथन पूरी करके 17वें स्थान पर रहे।</description><guid>5152</guid><pubDate>26-Sep-2026 1:45:13 pm</pubDate></item><item><title>सतनाम-सलमान की जोड़ी ने एशियाई खेलों की पुरुष युगल स्कल्स स्पर्धा में जीता कांस्य पदक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5151</link><description>नागोया. भारतीय रोवर सतनाम सिंह और सलमान खान ने बृहस्पतिवार को यहां एशियाई खेलों की पुरुष युगल स्कल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। भारतीय जोड़ी 1,500 मीटर तक दूसरे स्थान पर रही लेकिन आखिरी 500 मीटर में वह तीसरे स्थान पर खिसक गई। दोनों ने 'नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स' पर छह मिनट 13.25 सेकंड का समय लिया। चीन के यी शूडी और यीदे नी ने छह मिनट 09.37 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। उज्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव ने छह मिनट 10.49 सेकंड में रेस पूरी कर रजत पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी स्वर्ण पदक विजेताओं से 3.88 सेकंड पीछे रही।
सतनाम ने इससे पहले हांगझोउ एशियाई खेलों में पुरुष क्वाड्रपल स्कल्स स्पर्धा में भी कांस्य पदक जीता था। इससे पहले भारत रोइंग में एक और पदक से मामूली अंतर से चूक गया। बलराज पंवार पुरुष सिंगल स्कल्स के फाइनल में चौथे स्थान पर रहे। उन्होंने छह मिनट 54.80 सेकंड का समय लिया। पंवार 500, 1,000 और 1,500 मीटर तक दूसरे स्थान पर बने हुए थे लेकिन अंतिम 500 मीटर में वह फिसलकर चौथे स्थान पर पहुंच गए। चीन के देंग झीवेई ने छह मिनट 38.98 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। पंवार स्वर्ण पदक विजेता से 15.82 सेकंड पीछे रहे.</description><guid>5151</guid><pubDate>24-Sep-2026 12:29:39 am</pubDate></item><item><title>एशियाई खेलों में पुरुषों की कयाक फोर 500 मीटर के फाइनल में भारतीय रोइंग टीम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5150</link><description>नागोया/वरिंदर सिंह, नाओचा सिंह लैटोनजाम, ओइनाम अरुण सिंह और हर्षवर्धन सिंह शक्तावत की भारतीय टीम ने बुधवार को यहां एशियाई खेलों के कैनो स्प्रिंट स्पर्धा में पुरुषों की कयाक फोर 500 मीटर रेस के फाइनल (ए) के लिए क्वालीफाई किया। भारतीय टीम 1:29.447 के समय के साथ चीन और किर्गिस्तान के पीछे तीसरे स्थान पर रही।
महिला कैनो सिंगल 200 मीटर में मेघा प्रदीप ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया। वह छह रोअर्स में 49.675 के समय के साथ पांचवें स्थान पर रहीं। इस वर्ग में शीर्ष तीन ने फाइनल के लिए जगह बनाई।
सोनिया देवी फाइरेम्बम और पार्वती गीता की जोड़ी महिला कयाक डबल 500 मीटर की हीट 1 में 2:03.538 के समय के साथ छठे स्थान पर रही और सेमीफाइनल में प्रतिस्पर्धा करेगी। इसी तरह, पुरुषों की कयाक डबल 500 मीटर में प्रसन्ना कुमार सत्यप्रकाश चेम्पाडियिल और प्रोहित बरई की भारतीय जोड़ी ने हीट 2 में 1:41.141 का समय दर्ज करते हुए पांचवें स्थान पर रहकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। महिला कैनो डबल 500 मीटर में मेघा और नेहा देवी लीचोनबाम की भारतीय जोड़ी ने हीट 2 में 2:08.713 के समय के साथ पांचवें स्थान पर रहकर सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया।
</description><guid>5150</guid><pubDate>24-Sep-2026 11:58:29 pm</pubDate></item><item><title>मीराबाई ने रजत जीतकर एशियाई खेलों में पदक का सूखा खत्म किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5149</link><description>नागोया. भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को यहां महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में पदक के 12 साल के लंबे इंतजार खत्म किया। तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम भार के साथ कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। यह 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के रजत पदक के बाद एशियाई खेलों में भारोत्तोलन में भारत का पहला पदक है। मीराबाई ने बाद में कहा, ''एशियाई खेलों में पदक जीतना सपना सच होने जैसा है। मैं पिछले 12 वर्षों से, 2014 के एशियाई खेलों से ही इस पदक के लिए कोशिश कर रही थी। इस पदक के साथ मेरा जीवन पूर्ण हो गया है। अब मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। ये मेरे सपनों के एशियाई खेल हैं।'' उत्तर कोरिया की दो बार की विश्व चैंपियन री सोंग गम ने उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कुल 215 किलोग्राम (94 और 121 किलोग्राम) वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेलों में खिताबी हैट्रिक पूरी की। उन्होंने कुल वजन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रिविजयाना ने 191 किलोग्राम (88 और 103 किलोग्राम) भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया। 
मीराबाई ने अभी तक ओलंपिक से लेकर विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीते थे लेकिन वह एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई थी। मीराबाई ने ओलंपिक में रजत पदक, विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक तथा राष्ट्रमंडल खेलों और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के अलावा एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता है। मीराबाई ने 2014 में अपने पहले एशियाई खेलों में नौवां स्थान हासिल किया था। वह पीठ की चोट के कारण 2018 के एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाई थी जबकि पिछले एशियाई खेलों में वह चौथे स्थान पर रही थी। अपनी मां के उपहार में दिए गए ओलंपिक रिंग की तरह के सोने के झुमके पहने और बालों में तिरंगे का रिबन लगाए मीराबाई पदक जीतने के दृढ़ लक्ष्य के साथ मंच पर पहुंची। मीराबाई ने स्नैच में 83 किलोग्राम के साथ शुरुआत की और फिर अपने अगले दो प्रयासों में 85 किलोग्राम और 87 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता के पहले चरण में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाकर एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीता। रजत पदक पक्का होने के बाद उन्होंने अपना आखिरी प्रयास नहीं लिया। उन्होंने कहा, ''जब से मैंने भारोत्तोलन में कदम रखा तब से मेरा सपना एशियाई खेलों में पदक जीतना रहा है। एशियाई खेलों से पहले या उसके दौरान कुछ न कुछ होता रहा, लेकिन इस बार मैंने अपना सपना पूरा कर लिया।'' मीराबाई यह पदक जीतने के लिए इतनी प्रतिबद्ध थी कि पिछले महीने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अगले दिन बाद ही वह अभ्यास में लग गई थी। अब उनका लक्ष्य 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतना होगा। उन्होंने कहा, ''मैंने अभी तक लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए अपनी रणनीति तय नहीं की है। क्वालिफिकेशन प्रक्रिया दिसंबर में शुरू होगी। मैं कुछ समय तक इस पदक का जश्न मनाऊंगी और फिर फैसला करूंगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीराबाई को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनके 'दृढ़ संकल्प और निरंतर अच्छा प्रदर्शन' करने से देश की युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। मोदी ने कहा, ''मीराबाई चानू के लिए एक विशेष रजत पदक। भारोत्तोलन में महिला 49 किलोग्राम वर्ग में पदक जीतने पर उन्हें हार्दिक बधाई। उनका दृढ़ संकल्प और निरंतरता पूरे देश को प्रेरित करती है। भारत को उन पर गर्व है। उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं।'' राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 किग्रा वर्ग में निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए आठवां स्थान हासिल किया। तेइस वर्षीय ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 108 किग्रा वजन उठाया। उनका कुल स्कोर 195 किग्रा रहा जो जुलाई में ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक दिलाने वाले उनके 199 किग्रा के प्रदर्शन से चार किग्रा कम था।</description><guid>5149</guid><pubDate>23-Sep-2026 12:32:21 am</pubDate></item><item><title>मनु महिला 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में, लेकिन टीम पदक से चूकी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5148</link><description>नागोया. दो बार की ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने बुधवार को यहां एशियाई खेलों में क्वालीफाइंग राउंड में तीसरा स्थान हासिल करने के बाद महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वाली भाकर ने 579 का स्कोर बनाकर तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि ईशा सिंह 572 के स्कोर के साथ 15वें स्थान पर रहीं और फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। सुरुचि सिंह 568 के स्कोर के साथ 26वें स्थान पर रहीं। भारत महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में वियतनाम से पदक से चूक गया। दोनों टीमों के समान 1719 अंक रहे लेकिन भारत ने 10 अंक पर कम शॉट लगाए थे जिससे उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। भारत ने अभी तक निशानेबाजी में पांच पदक जीते हैं जिनमें चार रजत और एक कांस्य पदक शामिल है।</description><guid>5148</guid><pubDate>23-Sep-2026 12:27:36 am</pubDate></item><item><title>एथलेटिक्स में फिर से पदक बटोरने उतरेगा भारत, तूर की निगाह स्वर्णिम हैट्रिक पर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5147</link><description>नागोया. भारत एशियाई खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में बृहस्पतिवार से अपने अभियान की शुरुआत करेगा जिसमें शॉट पुट के स्टार खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह तूर स्वर्ण पदक की ऐतिहासिक हैट्रिक बनाने की कोशिश करेंगे, जबकि लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर और लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह पिछली बार जीते गए पदक के रंग को बेहतर करने का लक्ष्य रखेंगे। एशियाई खेलों में एथलेटिक्स में भारत अच्छा प्रदर्शन करता रहा है और उम्मीद है कि इस बार भी वह पदक बटोरने में किसी तरह की कोताही नहीं बरतेगा। उसे हालांकि भाला फेंक के सुपर स्टार नीरज चोपड़ा की कमी खलेगी जो चोट के कारण बाहर हो गए हैं। भारत की 75 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम का लक्ष्य 25 से 30 पदक जीतना है। पिछली बार चीन के हांगझोऊ में टीम ने 29 पदक जीते थे, जिनमें छह स्वर्ण, 14 रजत और नौ कांस्य पदक शामिल थे। ट्रिपल जम्पर आशा इलांगो बृहस्पतिवार को भारतीय अभियान की शुरुआत करेंगी। उनके बाद सीमा 10,000 मीटर दौड़ में उतरेंगी। 
बृहस्पतिवार को ही होने वाली अन्य पदक स्पर्धा चार गुणा 400 मीटर मिश्रित रिले में भारत पदक का प्रबल दावेदार है। स्प्रिंटर अनिमेष कुजुर और गुरिंदरवीर सिंह भी अपनी 100 मीटर हीट दौड़ में भाग लेंगे। अगर तूर स्वर्ण पदक जीतते हैं तो उनका नाम इतिहास की किताबों में दर्ज हो जाएगा क्योंकि वह एक ही स्पर्धा में लगातार तीन एशियाई खेलों में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले पहले भारतीय ट्रैक एवं फील्ड एथलीट बन जाएंगे। महान थ्रोअर प्रद्युमन सिंह बराड़ ने 1954 और 1958 के एशियाई खेलों में शॉट पुट में दो स्वर्ण पदक जीते थे और अगर तूर जीत जाते हैं तो वह उनसे आगे निकल जाएंगे। हालांकि, बराड़ के नाम तीन स्वर्ण पदक हैं, जिनमें 1954 के खेलों में डिस्कस थ्रो में जीता गया एक और स्वर्ण पदक शामिल है। किसी भारतीय ट्रैक एवं फील्ड एथलीट द्वारा सबसे अधिक स्वर्ण और कुल पदक जीतने का रिकॉर्ड दिग्गज पीटी उषा के नाम है। उनके नाम पर चार स्वर्ण (सभी 1986 सियोल में) और सात रजत पदक दर्ज हैं। श्रीशंकर ने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था और यह 27 वर्षीय खिलाड़ी इस बार स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखेगा। इस सत्र में उन्होंने जिन सात प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, उन सभी में उन्होंने आठ मीटर से अधिक की छलांग लगाई है। उन्होंने इस सत्र में 8.38 मीटर की छलांग लगाई है जो एशियाई खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ है। उन्हें चीन के युआन चेनलोंग और उज्बेकिस्तान के अनवर अनारोव से कड़ी चुनौती मिल सकती है। भारत ने डेविड सोलोमन को भी मैदान में उतारा है, जिन्हें चोटिल शाहनवाज खान की जगह अंतिम समय में टीम में शामिल किया गया है। गुलवीर तीन स्पर्धाओं 1500 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर में भाग लेंगे और वह कम से कम दो पदक जीतने की कोशिश करेंगे। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में 10,000 मीटर में कांस्य पदक जीता था तथा 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड उनके नाम है। गुलवीर का 5000 मीटर दौड़ में मुकाबला इथियोपिया में जन्मे बहरीन के बिरहानु बलेव से होगा, जो मौजूदा चैंपियन हैं। गुलवीर को 10,000 मीटर दौड़ में भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि जापान के शीर्ष धावक मेबुकी सुजुकी भी मुकाबले में हैं। अविनाश साबले पर भी सबकी निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि इस सत्र में एक ही प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की बावजूद वह पिछले एशियाई खेलों में जीता हुआ 3000 मीटर स्टीपलचेज़ का स्वर्ण पदक बरकरार रखने की कोशिश करेंगे। पिछले साल एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट की सर्जरी के बाद उन्हें चोट के चलते लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा था। उन्हें आखिरी समय में 5000 मीटर दौड़ में भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली लंबी कूद खिलाड़ी एंसी सोजन ने इस सत्र में एशियाई खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और वह स्वर्ण पदक की दावेदार हैं। 
पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में चोपड़ा की अनुपस्थिति के बावजूद भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह पदक के दावेदार हैं। स्वर्ण पदक जीतने के प्रबल दावेदार श्रीलंका के रुमेश पथिरागे हैं, जिन्होंने इस सत्र में तीन बार 90 मीटर से अधिक की दूरी तय की है और उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 92.62 मीटर रहा है। पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम भी दौड़ में हैं। राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक डेकाथलॉन खिलाड़ी तेजस्विन शंकर को जापान के युमा मारुयामा के खिलाफ कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना होगा, जो 10 स्पर्धाओं में 8321 अंकों के साथ एशियाई सत्र के चार्ट में शीर्ष पर हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता ऊंची कूद के खिलाड़ी सर्वेश कुशारे भी पदक के दावेदार हैं हालांकि वह भी मामूली चोट से जूझ रहे हैं। उन्हें कई खिलाड़ियों की चुनौती का सामना करना पड़ेगा जिनमें कतर के कई ओलंपिक और विश्व पदक विजेता मुताज़ ईसा बरशिम भी शामिल हैं। ट्रिपल जम्पर प्रवीण चित्रवेल और 100 मीटर बाधा दौड़ की धाविका ज्योति याराजी ने पिछले एशियाई खेलों में क्रमशः कांस्य और रजत पदक जीते थे, लेकिन हाल ही में दोनों को मामूली चोटों से जूझना पड़ा था। विशाल टीके (400 मीटर), पारुल चौधरी (3000 मीटर स्टीपलचेज़), हरिता भद्रा (200 मीटर) और पूजा सिंह (ऊंची कूद) पदक जीतने के अन्य दावेदार हैं।</description><guid>5147</guid><pubDate>23-Sep-2026 12:26:51 am</pubDate></item><item><title>शेफाली के शतक से गत चैंपियन भारत महिला क्रिकेट के फाइनल में, पदक पक्का</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5146</link><description>निशिन (जापान) . गत चैंपियन भारत ने रविवार को यहां एशियाई खेलों की महिला टी20 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल में लगातार दूसरी बार जगह बनाकर पदक पक्का किया। भारत ने निशानेबाजी में पहले ही दो रजत पदक जीतने के अलावा मिश्रित मार्शल आर्ट में एक कांस्य पदक पक्का कर लिया है। महिला क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश को 114 रन से करारी शिकस्त देकर स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह बनाकर भारत के लिए एक और पदक सुनिश्चित किया। शेफाली वर्मा ने 49 गेंद में नाबाद 100 रन की पारी खेलकर टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपना पहला शतक जड़ा जिससे भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट पर 195 रन का मजबूत स्कोर बनाया। इसके जवाब में बांग्लादेश ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और पूरी टीम 15.4 ओवर में 81 रन पर आउट हो गई। बांग्लादेश के खिलाफ रन के लिहाज से यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी जीत है। भारत की तरफ से दीप्ति शर्मा ने सात जबकि नंदनी शर्मा ने 25 रन देकर तीन-तीन विकेट चटकाए। श्री चरणी ने भी सात रन देकर दो विकेट हासिल किए। भारत अब मंगलवार को स्वर्ण पदक के मुकाबले में श्रीलंका से भिड़ेगा। पिछले एशियाई खेलों में भी फाइनल इन्हीं दोनों टीम के बीच हुआ था। दोनों टीम पिछले रविवार को महिला टी20 एशिया कप के फाइनल में भी आमने-सामने थीं जिसमें भारत ने 72 रन से जीत दर्ज की थी। श्रीलंका ने रविवार को पहले सेमीफाइनल में पाकिस्तान को आठ विकेट से हराया। पाकिस्तान अब मंगलवार को कांस्य पदक के लिए बांग्लादेश से भिड़ेगा। बांग्लादेश की ओर से सलामी बल्लेबाज दिलारा अख्तर ने 23 गेंद पर चार चौकों और एक छक्के की मदद से सर्वाधिक 27 रन बनाए। उनके अलावा सुल्ताना खातून (नाबाद 12) और शर्मिन अख्तर (10) ही दोहरे अंक में पहुंच पाईं। इससे पहले शेफाली ने अपने नाबाद शतक के दौरान नौ छक्के और तीन चौके लगाए। अपना 118वां मैच खेल रही शेफाली का यह सबसे छोटे प्रारूप में पहला शतक है। शेफाली टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक जड़ने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय महिला बल्लेबाज हैं।
दाएं हाथ की इस आक्रामक सलामी बल्लेबाज को दूसरे छोर पर अनुभवी स्मृति मंधाना (37) और कप्तान हरमनप्रीत कौर (40) का अच्छा साथ मिला। दोनों भारतीय सलामी बल्लेबाजों शेफाली और स्मृति ने शुरूआत से ही आक्रामक रुख अपनाते हुए पहले विकेट के लिए 72 रन जोड़े। शेफाली और स्मृति ने बांग्लादेशी गेंदबाजों पर लगातार प्रहार किए और रन गति बनाए रखी। बांग्लादेशी गेंदबाजों के पास उनके आक्रामक तेवर का कोई जवाब नहीं था। हालांकि पावरप्ले की अंतिम गेंद पर यह साझेदारी टूट गई। नाहिदा अख्तर की गेंद पर स्मृति ने स्लॉग स्वीप खेलने की कोशिश में शोभना मोस्तरी को कैच थमा दिया। तीसरे नंबर पर उतरीं गुनालन कमालिनी बल्लेबाजी की अनुकूल पिच पर 10 गेंद में सिर्फ तीन रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। दूसरे छोर पर शेफाली ने आक्रामक रुख जारी रखा। उन्होंने नौ छक्के और तीन चौके लगाकर सहजता से गेंद को सीमा रेखा के पार भेजा लेकिन शतक पूरा करने के लिए उन्हें भारत की पारी के अंतिम ओवर तक इंतजार करना पड़ा। कप्तान हरमनप्रीत ने बीच के ओवरों में शेफाली का अच्छा साथ देते हुए 33 गेंद में 40 रन बनाए। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 55 गेंद में 94 रन की साझेदारी की। भारत 200 से अधिक रन बनाने की स्थिति में दिख रहा था लेकिन पारी के अंतिम चरण में विकेट गिरने से उसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई। 18वें ओवर में हरमनप्रीत को बांग्लादेश की कप्तान निगार सुल्ताना ने राबिया खान की गेंद पर स्टंप किया जिसके बाद ऋचा घोष भी दो रन बनाकर सस्ते में पवेलियन लौट गईं।</description><guid>5146</guid><pubDate>20-Sep-2026 11:56:22 pm</pubDate></item><item><title>इलावेनिल के रजत पदकों और सुचिका के एमएमए सफर से भारत के एशियाड अभियान की शानदार शुरुआत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5145</link><description>नागोया. इलावेनिल वलारिवान के शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शन की बदौलत भारत ने रविवार को यहां एशियाई खेलों में अपने पदकों का खाता निशानेबाजी में दो रजत के साथ खोला जबकि 'मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स' में अप्रत्याशित रूप से पदक पक्का किया और लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट में स्वर्ण पदक जीतने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया। दिन के कुछ अन्य उल्लेखनीय प्रदर्शनों में पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीम की शुरुआती मुकाबले में बड़ी जीत के साथ-साथ बैडमिंटन और टेबल टेनिस की टीम स्पर्धाओं में शानदार शुरुआत शामिल रही। हालांकि 27 वर्षीय वलारिवान दिन की स्टार रहीं। अपने पिछले दो एशियाई खेलों में पदक से चूकने वाली वलारिवान ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया। 2025 विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता वलारिवान ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में 252.4 अंक हासिल कर रजत पदक जीता। वह स्वर्ण पदक जीतने वाली जापान की हिनाता ताइची से महज 0.6 अंक पीछे रहीं। ताइची ने 253.0 अंक के साथ एशियाई खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले वलारिवान ने सोनम उत्तम मस्कर और एशियाई खेलों में पदार्पण कर रहीं विदर्सा विनोद के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में भी दूसरा स्थान हासिल किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उनके शानदार प्रदर्शन का जिक्र करते हुए 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''एशियाई खेलों में 10 मीटर एयर राइफल महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर इलावेनिल वलारिवान को बधाई। यह दिन का उनका दूसरा पदक था, जिससे यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है। उनके आगामी प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं। '' उन्होंने कहा, ''कड़ी मेहनत और 'टीमवर्क' शानदार नतीजे देते हैं। एशियाई खेल 2026 की महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली सोनम उत्तम मस्कर, इलावेनिल वलारिवान और विदर्सा के विनोद पर गर्व है। '' वलारिवन का शानदार प्रदर्शन 36 वर्षीय सुचिका तारियाल के महिला 60 किग्रा वर्ग के 'मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स' (एमएमए) सेमीफाइनल में पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद आया। इस खेल विधा को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया है। तारियाल ने क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लिया। तारियाल ने जूडो में भी हाथ आजमाया है और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उन्होंने 12 साल की उम्र में सड़क पर होने वाली छेड़छाड़ के सदमे से निपटने के लिए इस मार्शल आर्ट को सीखना शुरू किया था। वहीं निशिन शहर में गत चैंपियन भारत ने महिला टी20 क्रिकेट प्रतियोगिता के फाइनल में लगातार दूसरी बार जगह बनाकर पदक पक्का किया। टीम ने बांग्लादेश को 114 रन से करारी शिकस्त देकर स्वर्ण पदक के मुकाबले में जगह बनाकर भारत के लिए एक और पदक सुनिश्चित किया। शेफाली वर्मा ने 49 गेंद में नाबाद 100 रन की पारी खेलकर टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपना पहला शतक जड़ा जिससे भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट पर 195 रन का मजबूत स्कोर बनाया। इसके जवाब में बांग्लादेश ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और पूरी टीम 15.4 ओवर में 81 रन पर आउट हो गई। बांग्लादेश के खिलाफ रन के लिहाज से यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी जीत है। भारत अब मंगलवार को स्वर्ण पदक के मुकाबले में श्रीलंका से भिड़ेगा। पिछले एशियाई खेलों में भी फाइनल इन्हीं दोनों टीम के बीच हुआ था। वहीं काकामिगाहारा मेंभारत की पुरुष और महिला हॉकी टीम ने पूल के शुरूआती मैच में बड़ी जीत दर्ज की।
दीपिका ने शानदार खेल का नमूना पेश करते हुए आठ गोल दागे जिससे भारतीय महिला हॉकी टीम ने पूल बी में अपने पहले मैच में कमजोर उज्बेकिस्तान को 19-0 से करारी शिकस्त दी जबकि पुरुष टीम ने दिलप्रीत सिंह के चार गोल की मदद से इंडोनेशिया को 13-1 से शिकस्त दी। टेबल टेनिस में भारतीय महिला टीम ने ग्रुप एफ के अपने दूसरे मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए सिंगापुर को 3-2 से हराया जबकि पुरुष टीम को ग्रुप एफ के अपने दूसरे मुकाबले में ईरान के हाथों 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले भारत की पुरुष और महिला टीम ने अपने अभियान की शुरुआत अपने-अपने ग्रुप एफ मुकाबलों में इंडोनेशिया पर 3-0 की समान जीत के साथ की। अब भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीम का सामना सोमवार को पाकिस्तान से होगा। भारत ने बैडमिंटन की महिला टीम स्पर्धा में निचली रैंकिंग पर काबिज कजाखस्तान को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली जहां उसके सामने मेजबान जापान की कड़ी चुनौती होगी जिसमें पीवी सिंधू, उन्नति हुड्डा और तन्वी शर्मा ने एक भी गेम गंवाए बिना अपने मुकाबले जीते। वहीं भारत की क्विम्सी डिसूजा को टेकबॉल में दोहरा झटका लगा जब वह महिला एकल में कांस्य पदक से चूक गईं और कुछ ही मिनटों बाद मोहम्मद अनस बेग के साथ मिश्रित युगल में तीसरे स्थान के मुकाबले में भी हार गईं। क्विम्सी ने महिला एकल के कांस्य पदक के मैच में कड़ी चुनौती पेश की लेकिन आखिर में वह स्थानीय खिलाड़ी युइना सकामोटो से 0-2 (11-12 11-12) से हार गईं। इसके बाद मिश्रित युगल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को वियतनाम के होआंग मिन्ह टैन गुयेन और जिया न्गिह ट्रिन्ह से 0-2 (9-12 6-12) से हार का सामना करना पड़ा। भारत को एक और निराशा मिली जब एमएमए फाइटर वरुण सान्याल को प्रतिस्पर्धा किए बिना ही एशियाई खेलों से हटने के लिए बाध्य होना पड़ा क्योंकि वह क्रूज जहाज पर 'सौना बाथ' सत्र के दौरान अत्यधिक थकान और 'डिहाइड्रेशन' (शरीर में पानी की कमी) के कारण बेहोश हो गए। तैराक ऋषभ दास ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा के फाइनल में 54.77 सेकेंड का समय निकालकर छठा स्थान हासिल किया। ऋषभ स्वर्ण पदक विजेता चीन के शू जियायु से 2.79 सेकेंड पीछे रहे। शू ने 51.98 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। सूरज सिंह मयांगलांबम पुरुषों के चांगक्वान वुशु फाइनल में 11वें स्थान पर रहे। सूरज ने ऐची प्रीफेक्चरल मार्शल आर्ट्स हॉल में 21 प्रतिभागियों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए कुल 9.683 अंक हासिल किए।
</description><guid>5145</guid><pubDate>20-Sep-2026 11:53:56 pm</pubDate></item><item><title>अलीगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाने की उम्मीद: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5144</link><description>लंदन. अलीगढ़ से क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में खेलने वाले एकमात्र क्रिकेटर रिंकू सिंह को उम्मीद है कि वह अपने शहर की पहचान दुनिया भर में बढ़ा सकेंगे और इसके लिए उन्होंने बृहस्पतिवार को लंदन में ब्रिटेन की एक 'स्पोर्ट्स मार्केटिंग' एजेंसी के साथ करार किया। 'ईएमडब्ल्यू ग्लोबल' ने टी20 विश्व कप विजेता बल्लेबाज रिंकू को अपना पहला क्रिकेट खिलाड़ी बनाया है। इसके साथ ही रिंकू ऐसे वैश्विक करार पर हस्ताक्षर करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स के इस स्टार ने एजेंसी के मुंबई मुख्यालय के उद्घाटन समारोह में नेट्स पर बल्लेबाजी भी की। रिंकू ने कहा, ''मैं अलीगढ़ का पहला खिलाड़ी हूं जो आईपीएल और भारतीय टीम के लिए खेला है। यह मेरे लिए गर्व की बात है। '' उन्होंने कहा, ''अब जब मैं ईएमडब्ल्यू ग्लोबल के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रख रहा हूं, तो उम्मीद है कि इससे न केवल मुझे, बल्कि उस जगह को भी फायदा होगा, जहां से मैं आता हूं। '' रिंकू ने बताया कि वह ईएमडब्ल्यू के साथ इसलिए जुड़े क्योंकि यह एजेंसी लियोनेल मेसी और नेमार जूनियर जैसे बड़े फुटबॉल सितारों के साथ काम कर चुकी है। साथ ही, यह खिलाड़ियों की असली पहचान बनाए रखने पर जोर देती है। उन्होंने कहा, ''मैं अपनी संघर्ष की कहानी को वैश्विक मंच तक ले जाना चाहता था। मेरी कहानी एक साधारण परिवार से निकलकर आगे बढ़ने की है।</description><guid>5144</guid><pubDate>18-Sep-2026 1:01:33 pm</pubDate></item><item><title> फीफा अंडर-15 विश्व कप 2026: भारत के ग्रुप में बहरीन, कैमरून, ग्रेनाडा, लाओस और सेनेगल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5143</link><description>नयी दिल्ली.भारत को अक्टूबर में बाकू में होने वाले पहले फीफा अंडर-15 विश्व कप और महोत्सव अजरबैजान 2026 के 'ग्रुप के' में बहरीन, कैमरून, ग्रेनाडा, लाओस और सेनेगल के साथ रखा गया है। भारतीय अंडर-15 पुरुष टीम बाकू में क्वालीफिकेशन चरण के दौरान तीन दिन में पांच मुकाबले खेलेगी।भारत 24 अक्टूबर को लाओस के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। इसके अगले दिन 25 अक्टूबर को भारत दो मुकाबले खेलेगा। पहले उसका सामना कैमरून से होगा और फिर ग्रेनाडा के खिलाफ मैच होगा। फिर 26 अक्टूबर को एक और 'डबल-हेडर' के साथ क्वालीफिकेशन चरण पूरा करेगा जिसमें पहले वह बहरीन से भिड़ेगा और इसके बाद सेनेगल के खिलाफ खेलेगा।
कोच बिबियानो फर्नांडिस के मार्गदर्शन में भारतीय टीम फिलहाल बेंगलुरु स्थित खेल उत्कृष्टता केंद्र में ट्रेनिंग कर रही है। अजरबैजान रवाना होने से पहले टीम घरेलू मैदान पर अंतरराष्ट्रीय मैत्री मुकाबले भी खेलेगी। इसके बाद 14 खिलाड़ियों की टीम अजरबैजान की यात्रा करेगी। इस टूर्नामेंट में सभी फीफा सदस्य संघों को भाग लेने की अनुमति है। कुल 191 राष्ट्रीय टीम को 32 ग्रुप में बांटा गया है। प्रतियोगिता के छह दिन में 20 मैदानों पर कुल 943 मैच खेले जाएंगे। फीफा अंडर-15 विश्व कप और महोत्सव के मुकाबले आठ खिलाड़ियों वाली टीम के प्रारूप में खेले जाएंगे। मैच में 20-20 मिनट के दो हाफ होंगे जिनके बीच पांच मिनट का ब्रेक होगा। मैदान का आकार 68 मीटर गुणा 50 मीटर होगा। पूरे मैच के दौरान खिलाड़ियों को बदलने की अनुमति होगी।
</description><guid>5143</guid><pubDate>18-Sep-2026 12:43:57 pm</pubDate></item><item><title>भारत में होगी आईपीएल नीलामी : लीग चेयरमैन अरूण धूमल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5142</link><description>नयी दिल्ली. पिछले तीन सत्र विदेश में कराने के बाद आईपीएल 2027 सत्र के लिये खिलाड़ियों की नीलामी भारत में होगी । आईपीएल चेयरमैन अरूण धूमल ने यह जानकारी दी । पिछले तीन सत्र में नीलामी दुबई, जेद्दा और अबुधाबी में हुई है । धूमल ने कहा ,हर साल हम कोशिश करते हैं कि यह भारत में हो लेकिन शादियों के समय के कारण हमें जगह नहीं मिलती । इस बार हम भारत में ही करायेंगे क्योंकि यह छोटी नीलामी होगी और हमें वेन्यू मिल जायेगा। बीसीसीआई की 18 सितंबर को होने वाली एजीएम के दौरान धूमल का आईपीएल चेयरमैन फिर चुना जाना तय है ।
नीलामी कहां होगी, यह बीसीसीआई के पसंदीदा शहरों में उपलब्धता पर निर्भर करेगा ।
संचालन परिषद की हाल ही में हुई बैठक में 'इंपैक्ट खिलाड़ी ' के विवादित नियम पर भी चर्चा की गई । बीसीसीआई ने टीमों से ताजा फीडबैक मांगा था हालांकि यह नियम 2027 तक लागू रहने वाला है । भारत के वनडे और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल, पूर्व कप्तान रोहित शर्मा, स्टार हरफनमौला हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल ने इस नियम पर ऐतराज जताया है । आईपीएल 2026 से पहले अधिकांश कप्तानों ने इसे लेकर बीसीसीआई से ऐतराज जताया है जिससे नियम को खत्म करने की मांग सामने आई है । धूमल ने कहा कि बीसीसीआई इसकी समीक्षा के लिये तैयार है । उन्होंने कहा ,'' इस मसले पर बातचीत हो रही है । हम सभी पक्षों से फीडबैक लेंगे जिसके बाद ही फैसला लिया जायेगा ।'' इस नियम के तहत टीमें मैच में किसी भी समय एक स्थानापन्न खिलाड़ी ला सकती हैं । एजीएम में धूमल के अलावा खैरूल मजूमदार भी आईपीएल संचालन परिषद में फिर चुने जायेंगे ।</description><guid>5142</guid><pubDate>16-Sep-2026 12:09:53 am</pubDate></item><item><title>भारतीय टीम ने रिकॉर्ड 8वीं बार जीता विमेंस एशिया कप का खिताब</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5141</link><description>दुबई। क्रिकेट में भारत ने महिला एशिया कप 2026 जीत लिया है। फाइनल में उसने श्रीलंका को 72 रन से हराकर 8वीं बार एशिया कप अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही भारत ने 2024 के फाइनल में श्रीलंका से मिली हार का बदला भी ले लिया। 
एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय और T20 प्रारूपों में एशिया कप के फाइनल में श्रीलंका पर भारत की यह छठी जीत है, जिसमें 2004 का संस्करण भी शामिल है। जिसमें भारत ने दो टीमों के टूर्नामेंट में श्रीलंका को 5-0 से हराया था। 
सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की रिकॉर्ड 129 रनों की साझेदारी की बदौलत भारत ने 5 विकेट पर 183 रन बनाए। इसके बाद गेंदबाजों ने श्रीलंका को 19 ओवर और 4 गेंदों में 111 रन पर समेट दिया, जिसमें श्री चरणी ने चार विकेट और दीप्ति शर्मा ने तीन विकेट लिए। शेफाली वर्मा को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकष्णन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला टी20 एशिया कप चैम्पियनशिप 2026 जीतने पर भारतीय टीम के सभी सदस्यों को बधाई दी है। सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रपति ने कहा कि खिलाड़ियों ने पूरी प्रतियोगिता के दौरान शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने सभी मैच जीते और देश का नाम रोशन किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ये खिलाड़ी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि टीम सफलता और उत्कृष्टता के कई और प्रेरणादायक अध्याय लिखेगी।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में टीम के अपराजित अभियान, असाधारण टीम वर्क और अटूट दृढ़ संकल्प ने देश को अपार गौरव दिलाया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों का आत्मविश्वास, निरंतरता और अद्भुत जज्बा साफ तौर पर दिखाई दिया। महिला टीम को बधाई देते हुए श्री मोदी ने कामना की कि यह जीत देश भर के लाखों युवाओं को और अधिक खेलने और चमकने के लिए प्रेरित करे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महिला टी20 एशिया कप 2026 की चैंपियन बनने पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बधाई दी है। सोशल मीडिया पर श्री बिरला ने टूर्नामेंट में अपराजित रहने और आठवीं बार एशिया कप जीतने के लिए टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्रिकेटरों ने टूर्नामेंट में अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का शानदार प्रदर्शन किया और यह जीत भारत की बेटियों की ताकत, मेहनत और सपनों की जीत है। 
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह उपलब्धि देश के युवाओं को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।</description><guid>5141</guid><pubDate>13-Sep-2026 12:31:37 am</pubDate></item><item><title>भारत ने जूनियर एशिया कप में लगाई खिताबी हैट्रिक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5140</link><description>-विश्व कप का टिकट पक्का
मोकी (चीन) . सानिका चंद्रकांत माने के गोल की बदौलत भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर लगातार तीसरी बार एएचएफ जूनियर एशिया कप का खिताब अपने नाम करते हुए जूनियर हॉकी विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। गत चैंपियन भारत के लिए सानिका ने 17वें मिनट में निर्णायक गोल किया।
खिताबी मुकाबले की शुरुआत में दोनों टीमें गेंद पर पकड़ बनाने के लिए संघर्ष करते दिखी। चीन ने अधिक समय तक गेंद अपने कब्जे में रखते हुए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने धैर्य बनाए रखा और शुरुआती दबाव को अच्छी तरह झेला। पहले क्वार्टर के आगे बढ़ने के साथ भारत की रक्षापंक्ति और मजबूत होती गई। मेजबान टीम भारतीय सर्किल में कोई स्पष्ट मौका बनाने में नाकाम रही। दूसरे क्वार्टर के शुरू होने के दो मिनट बाद भारत ने अपने पहले बड़े मौके को गोल में बदल दिया। सानिका ने शानदार सूझबूझ दिखाते हुए चीन की डिफेंडर के पीछे जगह बनाई और गोल से करीब पांच मीटर की दूरी पर पहुंच गईं। उन्होंने चीन की सर्किल में आए लंबे स्लैप-पुश पर अपनी स्टिक लगाकर खूबसूरत डिफ्लेक्शन किया, जिससे गेंद गोलकीपर शू मेंगजियाओ को छकाते हुए नेट में चली गई। चीन के पास बराबरी करने का एकमात्र मौका पेनल्टी कॉर्नर से मिला।चीन का सीधा शॉट निर्धारित ऊंचाई से ऊपर गोल में पहुंचा और नियमों के तहत उसे अमान्य करार दिया गया। इससे भारतीय खेमे ने राहत की सांस ली, जबकि घरेलू दर्शकों को निराशा हाथ लगी। हाफ टाइम से दो मिनट पहले भारत बढ़त को दोगुना करने का मौका गंवा दिया। कप्तान खैदेम शिलेमैमा चानू ने गोल पर शानदार शॉट लगाया, लेकिन चीन की गोलकीपर ने तेजी से गेंद को बाहर कर दिया। तीसरे क्वार्टर में चीन ने अधिक आक्रामक रुख अपनाया और सात मिनट बाद बराबरी के करीब पहुंच गया। बेसलाइन से चीन के खिलाड़ी ने बेहतरीन मूव बनाते हुए गोल के सामने खतरनाक कट-बैक दिया, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने खतरे को भांपते हुए समय रहते गेंद को नियंत्रित कर लिया। अंतिम क्वार्टर पूरी तरह भारतीय रक्षा के धैर्य और दृढ़ता की परीक्षा बन गया। गत चैंपियन टीम ने अपने सर्किल के आसपास अनुशासित और मजबूत रक्षात्मक ढांचा बनाए रखा और चीन को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। चीन ने आखिरी मिनटों में बराबरी के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी संरचना नहीं टूटने दी और संयम के साथ 1-0 की बढ़त बचाकर यादगार जीत दर्ज की। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया। एलीट पूल में तीन जीत और एक ड्रॉ के साथ शीर्ष पर रहने के बाद भारत ने सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-1 से करारी शिकस्त दी और फिर फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर लगातार तीसरी बार खिताब बरकरार रखा। इस शानदार उपलब्धि पर हॉकी इंडिया ने प्रत्येक खिलाड़ी को तीन लाख रुपये और सहयोगी स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 1.5 लाख रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की।</description><guid>5140</guid><pubDate>13-Sep-2026 12:37:03 am</pubDate></item><item><title>एशियाई खेलों से पहले धीरज की नजरें विश्व कप फाइनल में पहले पदक पर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5139</link><description>साल्टिलो (मेक्सिको) . भारत के शीर्ष रैंकिंग वाले रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मदेवरा इस साल सत्र के अंत में होने वाले विश्व कप फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाले देश के एकमात्र तीरंदाज हैं और उनका लक्ष्य रविवार को यहां इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पहला पदक जीतने का होगा। एक दिन की यह प्रतियोगिता सीधे नॉकआउट प्रारूप में होगी और क्वार्टर फाइनल से शुरू होगी। इसका मतलब है कि किसी तीरंदाज के लिए दो जीत पदक पक्का करने के लिए काफी होंगी। धीरज अपना अभियान तुर्की के बर्किम तुमेर के खिलाफ शुरू करेंगे। धीरज ने अंताल्या में विश्व कप का तीसरा चरण जीतकर आठ सदस्यों के बीच होने वाले फाइनल में जगह बनाई। पुरुष और महिला वर्गों में रिकर्व तथा कंपाउंड दोनों वर्गों को मिलाकर कोई अन्य भारतीय तीरंदाज इस प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका। ड्रॉ की बात करें तो 25 वर्षीय सेना के जवान धीरज के लिए यह अपेक्षाकृत अनुकूल है। उनका पहला मुकाबला तुमेर से होगा जिन्हें उन्होंने जुलाई में मैड्रिड में हुए अपने पिछले विश्व कप में प्री-क्वार्टर फाइनल में हराया था। हालांकि इसके बाद वह क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। अगर वह शुरुआती चुनौती पार कर लेते हैं तो विजयवाड़ा के इस तीरंदाज का सेमीफाइनल में अमेरिकी दिग्गज ब्रैडी एलिसन से सामना होने की संभावना है। कई बार के विश्व चैंपियन और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता एलिसन मेक्सिको में अपने पुरुष रिकर्व खिताब का बचाव करने उतरेंगे। उन्होंने 2025 में नानजिंग में अपना छठा विश्व कप फाइनल खिताब जीता था। धीरज हालांकि पहले ही साबित कर चुके हैं कि वह इस अमेरिकी दिग्गज को हरा सकते हैं। उन्होंने 2023 में अंताल्या में विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में एलिसन को हराया था। इस जीत से उन्हें विश्व कप में अपना पहला पदक (कांस्य) हासिल करने में मदद मिली थी। इसके बाद धीरज ने अपने विश्व कप पदकों की संख्या में दो और कांस्य तथा एक स्वर्ण पदक जोड़ा है।

साल्टिलो का फाइनल अगले सप्ताह जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले धीरज के लिए महत्वपूर्ण अंतिम प्रतियोगिता भी होगी। विश्व कप के बाद भारतीय तीरंदाज सीधे आइची-नागोया के लिए रवाना होंगे। हांगझोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों में धीरज ने पुरुष टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता था और अब उनकी नजरें अपना पहला व्यक्तिगत एशियाई खेल पदक जीतने पर होगी। भारतीय तीरंदाज इससे पहले दो बार विश्व कप फाइनल में हिस्सा ले चुका है, लेकिन अभी तक पदक नहीं जीत पाया है। विश्व कप फाइनल में पदक जीतने वाले आखिरी भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज जयंत तालुकदार थे जिन्होंने 2010 में एडिनबर्ग में कांस्य पदक जीता था। डोला बनर्जी विश्व कप फाइनल के इतिहास में सबसे सफल भारतीय तीरंदाज हैं। उन्होंने 2007 में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद से किसी भारतीय ने स्वर्ण नहीं जीता है, लेकिन दीपिका कुमारी विश्व कप फाइनल में सबसे अधिक पदक जीतने वाली भारतीय हैं, उन्होंने आठ बार के अपने प्रदर्शन में पांच रजत और एक कांस्य पदक जीता है। साल्टिलो में चार व्यक्तिगत विजेताओं को 'ह्यूनदई आर्चरी वर्ल्ड कप चैंपियंस' का खिताब दिया जाएगा और प्रत्येक को 36,000 अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी। उपविजेता को 18,000 अमेरिकी डॉलर जबकि तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को प्रत्येक वर्ग में क्रमशः 9,800 और 1,800 अमेरिकी डॉलर मिलेंगे।</description><guid>5139</guid><pubDate>13-Sep-2026 1:38:18 pm</pubDate></item><item><title>यूएस ओपन: गॉफ को हराकर पहली बार फाइनल में पहुंचीं रायबाकिना, सबालेंका से होगा मुकाबला</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5138</link><description>नई दिल्ली। कजाकिस्तान की एलेना रायबाकिना ने अमेरिका की कोको गॉफ को रोमांचक मुकाबले में हराकर यूएस ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में जगह बना ली है। आर्थर ऐश स्टेडियम में एक सेट से पिछड़ने के बाद रायबाकिना ने शानदार वापसी करते हुए गॉफ को 3-6, 6-4, 6-4 से मात दी। यह पहली बार है जब रायबाकिना यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची हैं। अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी एरिना सबालेंका से होगा।
गॉफ ने मुकाबले की अच्छी शुरुआत की और शुरुआत से ही रायबाकिना पर दबाव बनाए रखा। अमेरिकी खिलाड़ी ने आक्रामक खेल दिखाते हुए पहला सेट 6-3 से अपने नाम किया। एक सेट गंवाने के बाद रायबाकिना के लिए मुकाबला मुश्किल नजर आ रहा था, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखते हुए अपने खेल का स्तर बढ़ाया।
दूसरा सेट काफी करीबी रहा, लेकिन रायबाकिना को वह अहम ब्रेक मिला जिसकी उन्हें जरूरत थी। उन्होंने मौके का फायदा उठाते हुए सेट 6-4 से अपने नाम किया और मुकाबले को निर्णायक तीसरे सेट में पहुंचा दिया। इस दौरान रायबाकिना ने अपनी सर्विस और रिटर्न दोनों में बेहतर नियंत्रण दिखाया।
तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। रायबाकिना जीत के करीब पहुंचीं तो गॉफ ने वापसी की कोशिश करते हुए उनका सर्विस ब्रेक कर दिया। हालांकि, रायबाकिना ने तुरंत जवाब दिया और दबाव में शानदार खेल दिखाते हुए मुकाबला 6-4 से अपने नाम कर लिया।
मैच के बाद रायबाकिना ने गॉफ की सर्विस की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मैच में एक ब्रेक मिलने के बाद भी दबाव बना रहता है। रायबाकिना के मुताबिक, गॉफ की पहली सर्व भले ही कभी-कभी प्रभावी न हो, लेकिन उनकी दूसरी सर्व इतनी मजबूत होती है कि रैली को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि तीसरे सेट में वह गॉफ की सर्विस पर कुछ अच्छे रिटर्न खेलने में सफल रहीं और गॉफ की एक गलती का भी उन्हें फायदा मिला।
यूएस ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में अब रायबाकिना का सामना दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी एरिना सबालेंका से होगा। रायबाकिना पहली बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची हैं और उनके पास न्यूयॉर्क में अपना पहला खिताब जीतने का मौका है। दूसरी ओर, सबालेंका लगातार चौथी बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची हैं। सबालेंका ने 2024 और 2025 में लगातार दो यूएस ओपन खिताब जीते थे। अब वह लगातार तीसरी बार यह प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम करने से सिर्फ एक जीत दूर हैं। ऐसे में रायबाकिना और सबालेंका के बीच होने वाला फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।
रायबाकिना के लिए 2026 का सत्र पहले ही शानदार रहा है। साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीतने वाली रायबाकिना के पास अब न्यूयॉर्क में भी ट्रॉफी अपने नाम करने का मौका है। यूएस ओपन का खिताब जीतकर वह अपने शानदार सत्र को और खास बनाना चाहेंगी। (</description><guid>5138</guid><pubDate>11-Sep-2026 5:03:11 pm</pubDate></item><item><title>रोहित ने विश्व कप में खेलने की संभावना पर कहा, अक्टूबर 2027 अभी बहुत दूर है, तब देखेंगे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5137</link><description>मुंबई. भारत के स्टार क्रिकेटर रोहित शर्मा ने अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप में खेलने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर बृहस्पतिवार को यहां कहा कि अक्टूबर 2027 अभी बहुत दूर है। यहां एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व कप्तान ने एक पंक्ति में जवाब दिया। टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट में नहीं खेलने के कारण रोहित के वनडे प्रारूप में भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रहे हैं। रोहित ने कार्यक्रम के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा, '' अक्टूबर 2027 अभी बहुत दूर है, तब देखेंगे।'' वनडे विश्व कप 2027 की सह-मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया करेंगे।

उनसे यह भी पूछा गया कि क्या भारत के खिताब जीतने पर प्रशंसकों के साथ जश्न मनाने के लिए खुली बस में परेड आयोजित की जाएगी, ठीक उसी तरह जैसे 2024 में रोहित के नेतृत्व वाली टीम ने वेस्टइंडीज में टी20 विश्व कप जीतने के बाद मुंबई में विजय परेड निकाली थी। रोहित ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि अब बस परेड संभव होगी।''

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव देवजीत सैकिया ने कुछ दिन पहले स्पष्ट कर दिया था कि रोहित को लेकर अटकलों की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि वह अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। रोहित ने वनडे में भारत के लिए अपने आखिरी मैच में शतक बनाया था।</description><guid>5137</guid><pubDate>11-Sep-2026 12:16:36 pm</pubDate></item><item><title>पाकिस्तान को 19-0 से रौंदकर भारत महिला जूनियर एशिया कप के सेमीफाइनल में</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/sport.php?articleid=5136</link><description>मोकी (चीन). भारत ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए बृहस्पतिवार को यहां पाकिस्तान को 19-0 से करारी शिकस्त देकर महिला जूनियर एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। भारत ने शुरू से लेकर आखिर तक दबदबा बनाए रखा और आक्रामक खेल का नजारा पेश करते हुए टूर्नामेंट की सबसे बड़ी जीत में से एक दर्ज की। भारत ने जहां 19 गोल किए, 18 पेनल्टी कॉर्नर और एक पेनल्टी स्ट्रोक हासिल किया, वहीं पाकिस्तान एक भी गोल, पेनल्टी कॉर्नर या पेनल्टी स्ट्रोक हासिल नहीं कर पाया। भारत शनिवार को सेमीफाइनल में कोरिया और मलेशिया के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगा।

भारत ने पहले क्वार्टर में पांच, दूसरे क्वार्टर में भी पांच, तीसरे क्वार्टर में तीन और अंतिम क्वार्टर में छह गोल करके बड़ी जीत दर्ज करके शान से सेमीफाइनल में जगह बनाई। भारत को शुरुआती पांच मिनट के भीतर दो पेनल्टी कॉर्नर मिले, हालांकि वह इनका फायदा नहीं उठा पाया। भारत ने छठे मिनट में गोल दाग दिया था, लेकिन रेफरल के बाद गोल को अमान्य घोषित कर दिया गया। भारत ने अपना दबाव बनाए रखा और एक मिनट बाद ही उसे एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस बार पूजा साहू ने कोई गलती नहीं की और भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। भारत ने नौवें मिनट में रोशनी ऐंद के मैदानी गोल से अपनी बढ़त को तुरंत दोगुना कर दिया।

इस क्वार्टर में भारत को मिले चौथे पेनल्टी कॉर्नर पर तनुश्री काडू ने 11वें मिनट में डिफ्लेक्शन के जरिए गोल करके स्कोर 3-0 कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने सर्कल के अंदर फाउल किया, जिससे भारत को 13वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक मिला जिसे सुखवीर कौर ने गोल में बदला। सानिका माने ने इसके तुरंत बाद मैदानी गोल दागकर पहले क्वार्टर के बाद स्कोर 5-0 कर दिया।

मधु सिदार ने 16वें मिनट में मैदानी गोल किया, जिसके दो मिनट बाद गीता यादव ने एक और गोल करके भारत की बढ़त को 7-0 तक पहुंचा दिया। सानिका ने 23वें मिनट में अपना दूसरा गोल किया। इसके बाद तनुजा टोप्पो ने 25वें मिनट में मैच का अपना पहला गोल दागा। भारत ने लगातार पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। पूजा मलिक ने 27वें मिनट में पेनल्टी को गोल में बदलकर हाफ टाइम से पहले स्कोर 10-0 कर दिया। तीसरे क्वार्टर के शुरू में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला जिस पर पूर्णिमा यादव ने डिफ्लेक्शन से गोल करके स्कोर 11-0 कर दिया। मधु ने 39वें मिनट में और सुप्रिया ने 40वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला। कृष्णा शर्मा ने 48वें मिनट में मैदानी गोल किया। यह उनका टूर्नामेंट में पहला गोल था। इसके एक मिनट बाद पूजा ने अपना दूसरा गोल किया और फिर 51वें मिनट में एक और गोल दागकर अपनी हैट्रिक पूरी की। भारत को 54वें मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे सुप्रिया ने गोल में बदला। इसके बाद बिनिमा धन ने 55वें मिनट में मैदानी गोल किया जबकि रोशनी ने 60वें मिनट में अपना दूसरा गोल करके स्कोर 19-0 कर दिया।</description><guid>5136</guid><pubDate>10-Sep-2026 1:24:27 am</pubDate></item></channel></rss>