<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>बिजनेस - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>जीएसटी पर आईटीसी का दावा कर सकेंगे नियोक्ता</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7417</link><description>नयी दिल्ली. नियोक्ता अपने कर्मचारियों को बीमा आवरण देने के लिए जो प्रीमियम चुकाते हैं, जल्द ही वे उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकते हैं। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद सात अक्टूबर को होने वाली अपनी बैठक में इससे संबंधित एक प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। जीएसटी कानून के तहत व्यक्तियों द्वारा अपने या अपने परिवार के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने पर जीएसटी से छूट प्राप्त है। हालांकि, जब कोई कारोबारी संस्थान अपने कर्मचारियों के लिए जीवन या स्वास्थ्य बीमा खरीदता है, तो उस पर कर लगाया जाता है और अब तक कंपनियां इस पर आईटीसी का दावा नहीं कर सकती हैं। इस समय ऐसी सभी समूह बीमा पॉलिसियों पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाता है। जीएसटी परिषद अब कारोबारों को कर्मचारियों के लिए बीमा कवर खरीदने पर क्रेडिट का दावा करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार करेगी। सूत्रों ने कहा, ''इससे हर नियोक्ता के लिए कर्मचारियों को बीमा उपलब्ध कराना सस्ता हो जाएगा।'' सूत्रों ने आगे बताया कि लगभग हर संगठित नियोक्ता अपने कर्मचारियों को बीमा कवर देता है, इसलिए यह सुविधा उपलब्ध कराने की लागत कम होगी। इससे बीमा का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी और स्वयं बीमा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।</description><guid>7417</guid><pubDate>04-Oct-2026 12:13:00 am</pubDate></item><item><title>दूरसंचार कंपनियां अपनी वेबसाइट, ऐप पर अनिवार्य रिचार्ज प्लान प्रमुखता से प्रदर्शित करें: ट्राई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7416</link><description>नयी दिल्ली. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार कंपनियों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और विशेष बिक्री केंद्रों पर अनिवार्य रिचार्ज प्लान तथा विशेष शुल्क (टैरिफ) वाउचर प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक आदेश में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी गई। उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद यह निर्देश जारी किया गया है। नियामक ने जांच में पाया कि दूरसंचार कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ये प्लान ऐसे प्रदर्शित किए गए थे, जिससे उन्हें आसानी से देखा नहीं जा सकता था। ट्राई ने अपने आदेश में कहा, ''सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अलग और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला एक खंड बनाना होगा, जिसका शीर्षक 'ट्राई-अनिवार्य पैक्स' होगा। इसमें ट्राई द्वारा अनिवार्य किए गए विभिन्न प्रकार के वाउचर शामिल होंगे। दूरसंचार कंपनियों को इस निर्देश का पालन आदेश जारी होने की तारीख से 30 दिन के भीतर करना होगा।'' ट्राई ने हाल ही में दूरसंचार कंपनियों के लिए 'वॉयस कॉल' और 'एसएमएस' की अलग से सुविधा वाले विशेष टैरिफ वाउचर जारी करना भी अनिवार्य किया था। इन वाउचर के साथ डेटा यानी इंटरनेट प्लान लेने की जरूरत नहीं होंगी और ये सस्ते भी होंगे। विशेष शुल्क वाउचर मोबाइल ग्राहकों के लिए अतिरिक्त रिचार्ज की तरह काम करता है। इसके जरिये ग्राहक अतिरिक्त राशि का भुगतान कर कुछ अतिरिक्त सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। ट्राई ने कहा कि विभिन्न दूरसंचार कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप की जांच में पाया गया कि ट्राई द्वारा अनिवार्य वाउचर न तो प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे और न ही उन तक आसानी से पहुंचा जा सकता था। नियामक के अनुसार, कुछ मामलों में इन वाउचर को अलग-अलग श्रेणियों के तहत रखा गया था या उन्हें खोजने के लिए उपभोक्ताओं को कई पेज या स्क्रीन पर जाना पड़ता था। इसके कारण ग्राहकों को अपनी जरूरत के मुताबिक वाउचर ढूंढने और उन्हें लेने में परेशानी हो रही थी। ट्राई ने प्रत्येक दूरसंचार कंपनी के लिए कम से कम एक प्लान वाउचर, एक विशेष शुल्क वाउचर और एक कॉम्बो वाउचर 30 दिन की वैधता के साथ उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है।</description><guid>7416</guid><pubDate>01-Oct-2026 12:26:36 am</pubDate></item><item><title>क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7415</link><description>नयी दिल्ली. घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया। इससे पहले, उसने 6.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था। एजेंसी ने यह संशोधन अप्रैल-सितंबर की पहली छमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद को देखते हुए किया है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी.के. जोशी ने कहा कि पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पहली छमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद को देखते हुए वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया गया है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। हमें उम्मीद है कि पहली छमाही में तेज वृद्धि होगी, जबकि दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार धीमी होगी।'' जोशी ने कहा कि वृद्धि के अनुमान में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 87-93 डॉलर प्रति बैरल मानी गई है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 70 डॉलर प्रति बैरल थी। उन्होंने कहा कि दूसरा प्रमुख कारक मानसून होगा। फिलहाल मानसून दीर्घकालिक औसत से 12 प्रतिशत कम है और इसका असर सर्दियों की फसल पर भी पड़ सकता है। जलाशयों में पानी का स्तर और मिट्टी में नमी की स्थिति रबी फसल को प्रभावित करेगी, जिसका असर आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है। जोशी ने रुपये के बारे में कहा कि भारतीय मुद्रा अपने उचित मूल्य से नीचे है और मार्च, 2027 तक डॉलर के मुकाबले यह 93.5 रुपया तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि रुपये में पहले भी गिरावट के दौर के बाद मजबूती देखी गई है।
एजेंसी को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर और दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25-0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि कर सकता है। हालांकि, इससे निजी क्षेत्र के पूंजी निवेश पर असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि कंपनियों के पास पर्याप्त नकदी है और उनकी देनदारियां कम हुई हैं। जोशी ने कहा कि आरबीआई आगे भी व्यवस्था में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों का उपयोग करता रहेगा। उन्होंने कहा कि वृद्धि की प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। कृत्रिम मेधा कुछ कामों को स्वचालित कर सकती है, लेकिन पिछली तकनीकी क्रांतियों की तरह यह नए रोजगार के अवसर भी सृजित कर सकती है।</description><guid>7415</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:48:43 am</pubDate></item><item><title>विदेशी कर्ज जून तिमाही में बढ़कर 778.2 अरब डॉलर पर: आरबीआई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7414</link><description>मुंबई. भारत का बाह्य यानी विदेशी कर्ज मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में 15.4 अरब डॉलर बढ़कर 778.2 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। हालांकि, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में बाह्य ऋण जून, 2026 के अंत में घटकर 20.8 प्रतिशत रहा, जो 31 मार्च, 2026 को 20.9 प्रतिशत था। आरबीआई ने कहा, ''येन और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मूल्यांकन लाभ 90 करोड़ डॉलर रहा। मूल्यांकन प्रभाव को हटाने पर जून, 2026 के अंत में बाह्य ऋण में 15.4 अरब डॉलर के बजाय 16.4 अरब डॉलर की वृद्धि होती।'' जून तिमाही में एक साल से अधिक की मूल परिपक्वता अवधि वाला दीर्घकालिक ऋण 624.7 अरब डॉलर रहा। यह मार्च, 2026 के मुकाबले 11.2 अरब डॉलर अधिक है। वहीं, कुल बाह्य ऋण में एक साल तक की मूल परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक ऋण की हिस्सेदारी जून, 2026 के अंत में बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही के अंत में 19.6 प्रतिशत थी। इसी तरह, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में अल्पकालिक ऋण का अनुपात जून, 2026 के अंत में बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया, जो मार्च, 2026 के अंत में 21.6 प्रतिशत था। आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में ऋण भारत के बाह्य ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। जून, 2026 के अंत में इसकी हिस्सेदारी 54.8 प्रतिशत थी। इसके बाद भारतीय रुपये में ऋण की हिस्सेदारी 29.8 प्रतिशत, येन 6.9 प्रतिशत, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.1 प्रतिशत और यूरो की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत रही। केंद्रीय बैंक ने कहा, ''जून, 2026 के अंत में सरकार और गैर-सरकारी, दोनों क्षेत्रों का बकाया ऋण मार्च, 2026 के मुकाबले बढ़ गया।'' विदेशी ऋण में कर्ज सबसे बड़ा घटक रहा, जिसकी हिस्सेदारी 34.3 प्रतिशत थी। इसके बाद मुद्रा एवं जमा (22.2 प्रतिशत), व्यापार ऋण एवं अग्रिम (19.1 प्रतिशत) और ऋण प्रतिभूतियों (16.5 प्रतिशत) का स्थान रहा। मूलधन और ब्याज भुगतान जून, 2026 के अंत में चालू प्राप्तियों का 5.6 प्रतिशत रहा। मार्च, 2026 में भी यह अनुपात इतना ही था।</description><guid>7414</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:44:36 am</pubDate></item><item><title>नए सीएएफई मानक जारी, पांच साल में ईंधन दक्षता 16.7 प्रतिशत सुधारने का लक्ष्य</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7413</link><description>नयी दिल्ली. सरकार ने यात्री वाहन विनिर्माताओं के लिए सीएएफई-3 के कड़े ईंधन दक्षता मानक अधिसूचित किए हैं, जिनका लक्ष्य पांच साल में वाहनों की औसत ईंधन खपत में 16.7 प्रतिशत सुधार करना है। इसके लिए वाहन कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड, वैकल्पिक ईंधन और ईंधन बचाने वाली प्रौद्योगिकियों के जरिये लक्ष्य हासिल करने के अधिक विकल्प भी दिए गए हैं। बिजली मंत्रालय की तरफ से अधिसूचित नए 'कॉरपोरेट औसत ईंधन अर्थव्यवस्था' (सीएएफई-3) मानक एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगे और 31 मार्च, 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इसके तहत औसत ईंधन खपत का मानक 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटकर 2031-32 में 3.327 लीटर प्रति 100 किलोमीटर हो जाएगा। नए ईंधन दक्षता मानक मौजूदा सीएएफई व्यवस्था की जगह लेंगे। इनमें वाहनों के औसत वजन को भी अधिक महत्व दिया गया है। संदर्भ वाहन का वजन मौजूदा 1,082 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है। इससे हल्के वाहनों के लिए अपेक्षाकृत नरम लक्ष्य और भारी वाहनों के लिए अधिक ईंधन दक्षता सुधार की जरूरत होगी। नए मानकों के तहत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को कंपनी के औसत ईंधन दक्षता लक्ष्य की गणना में उनकी वास्तविक संख्या से अधिक भार दिया जाएगा। इसके तहत बैटरी इलेक्ट्रिक और रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 3.0, प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल एथनॉल आधारित मजबूत हाइब्रिड वाहनों के लिए 2.5, मजबूत हाइब्रिड वाहनों के लिए 1.6 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 1.1 का गुणक तय किया गया है। मसलन, 3.0 के गुणक के तहत एक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन को अनुपालन गणना में तीन वाहनों के बराबर माना जाएगा। मानकों में ईंधन बचाने वाली मान्य प्रौद्योगिकियों की संख्या भी चार से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। प्रत्येक पात्र प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में एक ग्राम प्रति किलोमीटर की कमी का लाभ मिलेगा, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा नौ ग्राम प्रति किलोमीटर होगी। इनमें स्टार्ट-स्टॉप प्रणाली, टायर प्रेशर निगरानी, रीजनरेटिव ब्रेकिंग, अधिक दक्षता वाले अल्टरनेटर, माइक्रो-हाइब्रिड प्रणाली और एलईडी लाइटिंग जैसी प्रौद्योगिकी शामिल हैं। वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहनों को भी सीएएफई-3 के तहत कार्बन निरपेक्षता घटक के जरिये अनुपालन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इसके तहत ई20 या इससे अधिक एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के टेलपाइप सीओ2 उत्सर्जन पर आठ प्रतिशत का कार्बन निरपेक्षता घटक लागू होगा। फ्लेक्स-फ्यूल एथनॉल वाहनों के लिए यह घटक 22.3 प्रतिशत होगा। सीएनजी वाहनों के मामले में पांच प्रतिशत या अधिसूचित सीबीजी मिश्रण के प्रतिशत, जो भी अधिक हो, का कार्बन तटस्थता घटक लागू होगा। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां अनुपालन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगी, जबकि लक्ष्य से पीछे रहने पर डेबिट जमा होगा। क्रेडिट को संबंधित अनुपालन अवधि में आगे ले जाने के साथ कंपनियों के बीच उनका कारोबार या विनिमय किया जा सकेगा। कंपनियां ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) से भी क्रेडिट खरीदकर डेबिट की भरपाई कर सकेंगी। नए नियमों के अनुपालन की पहली अवधि वित्त वर्ष 2027-28 से तीन साल की होगी, जबकि दूसरी अवधि वित्त वर्ष 2030-31 से दो साल की होगी। किसी भी अवधि के अंत में निपटान नहीं किए गए क्रेडिट समाप्त हो जाएंगे। अप्रैल, 2027 से वाहन कंपनियों को संशोधित भारतीय ड्राइविंग चक्र (एमआईडीसी) और विश्व स्तर पर सामंजस्यपूर्ण हल्के वाहनों की परीक्षण प्रक्रिया (डब्ल्यूएलटीपी) दोनों के तहत वाहनों के प्रदर्शन की जानकारी देनी होगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय वाहनों के परीक्षण, प्रमाणन और रिपोर्टिंग से जुड़ी व्यवस्था की निगरानी करेगा, जबकि बीईई क्रेडिट और अनुपालन ढांचे का संचालन करेगा। सरकार ने कहा कि इन मानकों को वाहन कंपनियों, उद्योग संगठनों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है। इसका उद्देश्य भारत में जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, एथनॉल और अन्य स्वच्छ वाहन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है। एक हजार से कम पात्र वाहनों का सालाना उत्पादन या आयात करने वाली कंपनियां किसी विशिष्ट औसत ईंधन दक्षता लक्ष्य को पूरा करने से मुक्त रहेंगी। हालांकि, उन्हें ईंधन खपत से जुड़े आंकड़ों की जानकारी देनी होगी।</description><guid>7413</guid><pubDate>30-Sep-2026 12:31:09 am</pubDate></item><item><title>सैमसंग की गैलेक्सी एस26 सीरीज के फोन 17 प्रतिशत तक महंगे हुए</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7412</link><description>नयी दिल्ली. दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमसंग ने अपने प्रमुख स्मार्टफोन गैलेक्सी एस26 सीरीज की कीमतें 17 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं। मोबाइल फोन उद्योग पर नजर रखने वाले सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, सैमसंग ने अपने प्रमुख स्मार्टफोन के दाम मेमोरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की बढ़ती लागत के बीच बढ़ाए हैं। अब 256 जीबी स्टोरेज वाला गैलेक्सी एस26 का बेस मॉडल 1,02,999 रुपये का हो गया है, जो जनवरी में पेश किए जाने के समय 87,999 रुपये का था। इस तरह इस मॉडल की कीमत में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस साल जनवरी में जब गैलेक्सी एस26 सीरीज को पेश किया गया था तो उसके दाम गैलेक्सी एस25 सीरीज की तुलना में 8-15 प्रतिशत अधिक रखे गए थे। उस समय गैलेक्सी एस26 अल्ट्रा की शुरुआती कीमत 1,39,999 रुपये, गैलेक्सी एस26 प्लस की 1,19,999 रुपये और बेस एस26 मॉडल की 87,999 रुपये थी। हालांकि, कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद गैलेक्सी एस26 सीरीज के सभी मॉडल एक लाख रुपये से अधिक कीमत के हो गए हैं। वहीं, एक टीबी (टेराबाइट) स्टोरेज वाला गैलेक्सी एस26 अल्ट्रा अब 2,14,999 रुपये में उपलब्ध होगा। कीमत बढ़ोतरी के बारे में सैमसंग को भेजे गए ईमेल का कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। उद्योग सूत्रों ने कीमत बढ़ोतरी के लिए इस साल मेमोरी चिप, मदरबोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की बढ़ती लागत को जिम्मेदार बताया है। सैमसंग का यह कदम ऐसे समय आया है जब प्रतिद्वंद्वी कंपनी एप्पल ने भी इस साल आईफोन 18 सीरीज को पिछली आईफोन 17 सीरीज की तुलना में अधिक कीमत पर पेश किया है। भारत में आईफोन 18 सीरीज की कीमतें पिछली सीरीज के मुकाबले 20-43 प्रतिशत अधिक घोषित की गई हैं।</description><guid>7412</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:51:00 am</pubDate></item><item><title>जियो ने अगस्त में 24 लाख, एयरटेल ने 21 लाख मोबाइल ग्राहक जोड़े : ट्राई</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7411</link><description>नयी दिल्ली. रिलायंस जियो ने अगस्त में सबसे अधिक करीब 24 लाख मोबाइल ग्राहक जोड़े। वहीं इस दौरान जबकि भारती एयरटेल ने करीब 21.1 लाख नए कनेक्शन जोड़े हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। ट्राई के अनुसार, जियो के वायरलेस मोबाइल ग्राहकों की संख्या जुलाई के अंत में 50.60 करोड़ थी जो अगस्त के अंत में बढ़कर 50.84 करोड़ हो गई। इस दौरान कंपनी ने 24 लाख ग्राहक जोड़े। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान एयरटेल के ग्राहकों की संख्या 48.94 करोड़ से बढ़कर 49.16 करोड़ हो गई, यानी उसने करीब 21.1 लाख ग्राहक जोड़े। वोडाफोन आइडिया ने अगस्त में करीब 5.06 लाख और सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने करीब 4.93 लाख वायरलेस मोबाइल ग्राहक जोड़े। वहीं, एमटीएनएल के ग्राहकों की संख्या करीब 5,900 घट गई। ट्राई के अनुसार, मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सहित कुल वायरलेस ग्राहकों की संख्या अगस्त के अंत में बढ़कर 131.22 करोड़ हो गई। जुलाई की तुलना में इसमें 0.46 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई। शहरी क्षेत्रों में वायरलेस ग्राहकों की संख्या जुलाई में 75.38 करोड़ थी जो अगस्त में बढ़कर 75.91 करोड़ हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या 55.24 करोड़ से बढ़कर 55.31 करोड़ हो गई। अगस्त के अंत में निजी दूरसंचार कंपनियों की वायरलेस मोबाइल ग्राहकों में कुल हिस्सेदारी 92.75 प्रतिशत रही, जबकि सरकारी कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल की संयुक्त हिस्सेदारी 7.25 प्रतिशत थी। ट्राई के अनुसार, प्रमुख दूरसंचार कंपनियों में एयरटेल के सक्रिय मोबाइल ग्राहकों का अनुपात सबसे अधिक रहा। अगस्त में पीक विजिटर लोकेशन रजिस्टर (वीएलआर) के दिन एयरटेल के वायरलेस मोबाइल ग्राहकों में 99.01 प्रतिशत सक्रिय थे। वायरलाइन कनेक्शन सहित कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या अगस्त के अंत में बढ़कर 136.07 करोड़ हो गई। इसमें जुलाई की तुलना में 0.47 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई।</description><guid>7411</guid><pubDate>28-Sep-2026 12:20:50 am</pubDate></item><item><title>SBI का बड़ा फैसला, 28 से 30 सितंबर तक सभी एटीएम ट्रांजैक्शन होंगे मुफ्त</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7410</link><description>नई दिल्ली। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि हड़ताल की अवधि के दौरान सभी एटीएम ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। बैंक का कहना है कि यह फैसला ग्राहकों को निर्बाध बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने और हड़ताल के संभावित प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में एसबीआई ने कहा कि प्रस्तावित हड़ताल के दौरान भी ग्राहकों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए उसकी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इसी के तहत 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच ग्राहकों से किसी भी बैंक के एटीएम पर किए गए लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बैंक ने यह भी बताया कि ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उसकी सभी शाखाएं रविवार, 27 सितंबर को भी खुली रहेंगी। इसके अलावा यूपीआई, आईएमपीएस, आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी ऑनलाइन भुगतान सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी, जिससे डिजिटल माध्यम से लेनदेन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
सरकार ने भी आम लोगों की बैंकिंग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रविवार को खुला रखने का निर्देश दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 सितंबर को सभी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को पूर्ण रूप से संचालित रखने की अनुमति दे दी है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को सामान्य रूप से कार्य करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) द्वारा 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल ऐसे समय रखी गई है, जब उससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां भी हैं। ऐसे में यदि विशेष व्यवस्था नहीं की जाती, तो बैंकिंग गतिविधियां लगातार पांच दिनों तक प्रभावित हो सकती थीं।
सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की सुविधा और बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित करने की अपील भी की है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं कि आवश्यक बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें।</description><guid>7410</guid><pubDate>26-Sep-2026 2:24:52 pm</pubDate></item><item><title>त्योहारी सीजन से पहले मिंत्रा ने 26,000 से अधिक अस्थायी रोजगार के अवसर सृजित किए</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7408</link><description>नयी दिल्ली. ई-कॉमर्स मंच मिंत्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने त्योहारी मौसम और अपने 'बिग फैशन फेस्टिवल' से पहले 26,000 से अधिक अस्थायी रोजगार के अवसरों का सृजन किया है। यह संख्या पिछले साल की तुलना में दोगुने से अधिक है। कंपनी ने बयान में कहा कि इन अस्थायी नौकरियों में 350 से अधिक पद दिव्यांगजनों के लिए रखे गए हैं, जबकि उसके ऑर्डर पूर्ति केंद्रों में तैनात कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत होगी। त्योहारी भर्तियों में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े काम, जैसे छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग शामिल हैं। इसके अलावा 8,000 डिलिवरी साझेदार और 2,700 ग्राहक सेवा कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। मिंत्रा ने बताया कि इन कर्मचारियों की भर्ती ओडिशा, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों से की गई है। ये कर्मचारी बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, बिलासपुर और बिनोला स्थित पांच ऑर्डर पूर्ति केंद्रों में काम करेंगे। कंपनी के मुताबिक, चुनिंदा स्थानों पर 24 से 48 घंटे में डिलिवरी देने वाली 'एम-एक्सप्रेस' सेवा के लिए भी इनकी तैनाती होगी। अतिरिक्त कर्मचारियों से त्योहारी अवधि में परिचालन और डिलिवरी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। मिंत्रा के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी गोविंदराज एमके ने कहा, ''इस साल त्योहारों के मौसम में कार्यबल बढ़ाने के साथ कंपनी रोजगार और आय के अवसर पैदा करने के अलावा कर्मचारियों को सहयोग और प्रोत्साहन देने पर भी ध्यान दे रही है।''</description><guid>7408</guid><pubDate>25-Sep-2026 3:46:37 pm</pubDate></item><item><title>पूर्वी भारत का आगे बढ़ना जरूरी, भारत के अगले विकास चरण के लिए बंगाल अहम: गौतम अडाणी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7407</link><description>कोलकाता. अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल को देश के अगले विकास चरण के लिए एक अहम इंजन के तौर पर उभरना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की रणनीतिक स्थिति इसे 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए जरूरी बनाती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार का ज्यादातर हिस्सा देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से आया है, लेकिन विकास के अगले चरण में विकास के नए केंद्र बनने चाहिए। अदाणी ने यहां इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में कहा, ''भारत के अगले ट्रिलियन (एक हजार अरब) डॉलर के विकास के लिए पूर्वी भारत का आगे बढ़ना जरूरी है। यहीं पर 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने के लिए बंगाल अहम हो जाता है।'' उन्होंने कहा कि पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के खनिज और औद्योगिक क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के जरिये तेजी से बढ़ते दक्षिण-पूर्व एशियाई और हिंद-प्रशांत बाजारों तक पहुंच के कारण, देश में कोई दूसरी जगह इस राज्य के फायदों के मेल का मुकाबला नहीं कर सकती।</description><guid>7407</guid><pubDate>25-Sep-2026 3:41:26 pm</pubDate></item><item><title>निर्यातकों की मदद के लिए जिला, राज्य स्तर पर 1,000 लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा: गोयल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7406</link><description>नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि जिला और राज्य स्तर पर मौजूदा तथा संभावित निर्यातकों की मदद के लिए करीब 1,000 लोगों को व्यापार से जुड़े विषयों पर क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कारोबार सुगमता और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अवसरों पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हर स्थान पर प्रत्येक विभाग के अलग-अलग कार्यालय स्थापित करने के बजाय प्रमुख शहरों में एकीकृत वाणिज्य एवं उद्योग कार्यालय बनाने की योजना है। इन कार्यालयों के जरिये कारोबारियों को कई विभागों और एजेंसियों तक पहुंच के लिए एक साझा केंद्र उपलब्ध कराया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि मंत्री ने जिला और राज्य स्तर पर निर्यातकों तथा संभावित निर्यातकों की सहायता के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का ज्ञान रखने वाले करीब 1,000 प्रशिक्षित स्थानीय कर्मियों का नेटवर्क तैयार करने की घोषणा की है। मंत्रालय ने कहा, ''इन कर्मियों को प्रशिक्षण देने के बाद तैनात किया जाएगा, ताकि वे उद्योग मंडल और क्षेत्रीय संगठनों के माध्यम से कारोबारियों को मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध करा सकें।</description><guid>7406</guid><pubDate>23-Sep-2026 3:27:11 pm</pubDate></item><item><title>आरबीआई ने नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये बैंकों से निकाले</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7405</link><description>मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को एक दिन की परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामी के जरिये 71,971 करोड़ रुपये की नकदी बैंकों से निकाली। बैंकों में भारी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी के बीच यह कदम उठाया गया है। परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) आरबीआई का एक मौद्रिक नीति उपाय है, जिसका उपयोग बैंकों में मौजूद अतिरिक्त नकदी को एक निश्चित अवधि के लिए निकालने के लिए किया जाता है। इसमें ब्याज दर नीलामी के जरिये तय होती है। आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 75,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 71,971 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त कीं और पूरी राशि स्वीकार कर ली। बोली 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ यानी ब्याज और भारांश औसत दर पर स्वीकार की गईं। आरबीआई पिछले महीने से बैंकों में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को निकालने और एक दिन की मुद्रा बाजार दर को रेपो दर के अनुरूप रखने के लिए परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो नीलामी आयोजित कर रहा है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर तक बैंकों में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी होने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक ने खुले बाजार परिचालन के तहत 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये और 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियां बेचीं। खुले बाजार परिचालन के तहत बैंकों और अन्य निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने के लिए आरबीआई को भुगतान करना पड़ता है। इससे बैंकों से रुपये की अतिरिक्त नकदी निकल जाती है। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा नकदी स्थिति को संभालने के लिए तीन चरणों में कुल एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने की घोषणा की थी। अंतिम चरण में 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री 28 सितंबर को होनी है।
बैंकों में अतिरिक्त नकदी की बड़ी मात्रा का एक कारण विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमा में भारी वृद्धि है। इससे बैंकों में विदेशी मुद्रा आई, जबकि बाद में आरबीआई के साथ किए गए अदला-बदली सौदों से बैंकों को रुपये की नकदी मिली। इसके अलावा महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन समेत विभिन्न मदों में किए गए खर्च से भी बैंकों में नकदी बढ़ी।</description><guid>7405</guid><pubDate>22-Sep-2026 12:15:53 am</pubDate></item><item><title>चाय उद्योग के दिग्गज वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का निधन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7404</link><description>अहमदाबाद. वाघ बकरी टी ग्रुप के चेयरमैन पीयूषभाई देसाई का 15 सितंबर को निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। चाय कारोबार को गांधीवादी मूल्यों, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने वाले देसाई के निधन की जानकारी वाघ बकरी टी ग्रुप ने एक बयान में दी। ग्रुप की ओर से जारी शोक संदेश के अनुसार, देसाई छह दशक से अधिक समय से चाय कारोबार से जुड़े थे और उन्होंने वाघ बकरी को गुजरात से बाहर कई राज्यों में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रुप ने कहा कि देसाई को चाय की गहरी समझ थी।
गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति सुदर्शन अयंगर ने उन्हें ऐसे उद्यमी के रूप में याद किया, जिनके जीवन में महात्मा गांधी के आदर्शों की झलक मिलती थी। अयंगर के अनुसार, देसाई का गांधी से जुड़ाव उनके दादा के जरिये था, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी से मुलाकात की थी। इस पारिवारिक संबंध के कारण गांधी के 'ट्रस्टीशिप' के विचार के अनुरूप लोगों की मदद करना और सादगी से जीवन जीना देसाई की प्राथमिकताओं में शामिल था। अयंगर ने वाघ बकरी नाम के पीछे देसाई द्वारा बताई गई व्याख्या को भी याद किया।
उनके अनुसार, देसाई कहा करते थे कि ऐसी जगह जहां बाघ और बकरी एक साथ पानी पी सकें, वह अहिंसक समाज का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ब्रांड प्रसिद्ध हुआ, लेकिन उसके पीछे अहिंसक समाज की अवधारणा थी, जिसके माध्यम से देसाई गांधी का संदेश आगे बढ़ा रहे थे। शोक संदेश के अनुसार, देसाई गुजरात विद्यापीठ से गहराई से जुड़े रहे और गांधीवादी विचारों से संबंधित पहल में योगदान देते रहे। अयंगर ने बताया कि देसाई 'अनुवाद फाउंडेशन' के संस्थापक निदेशक थे। यह संस्था गुजरात विद्यापीठ के तत्कालीन कुलाधिपति नारायण देसाई के साथ मिलकर स्थापित की गई थी। अयंगर भी इस फाउंडेशन के निदेशक रहे। इसके दो प्रमुख उद्देश्य महात्मा गांधी की शेष रचनाओं और महादेवभाई देसाई की डायरी का अनुवाद करना तथा अच्छी साहित्यिक और ज्ञानवर्धक सामग्री का एक भारतीय भाषा से दूसरी भारतीय भाषा में सीधे अनुवाद को बढ़ावा देना था, जिसमें अंग्रेजी या हिंदी को माध्यम न बनाया जाए। अयंगर के अनुसार, 2002 के गुजरात दंगों के दौरान देसाई कॉरपोरेट जगत की उन चुनिंदा आवाज में शामिल थे, जिन्होंने हिंसा के खिलाफ खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि देसाई ने चुनी काका और अन्य लोगों द्वारा आयोजित कोचरब आश्रम से गांधी आश्रम तक शांति मार्च में हिस्सा लिया था और वह हिंसा के पूरी तरह खिलाफ थे। अयंगर ने देसाई को याद करते हुए कहा कि उनका मानना था कि हिंसा पूरे समाज की विफलता है।
उन्होंने कहा कि देसाई सरकार की गलतियों की ओर भी इशारा करते थे, लेकिन अहिंसक तरीके से अपनी बात रखते थे। देसाई ने 2016 से 2020 तक ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन (बीपीए) के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। संस्था के महासचिव भूषण पुनानी ने उन्हें महान इंसान और परोपकारी बताया।</description><guid>7404</guid><pubDate>20-Sep-2026 11:54:53 pm</pubDate></item><item><title>एनटीपीसी ने जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को दिया 400 करोड़ रुपये का ठेका रद्द किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7403</link><description>नयी दिल्ली. एनटीपीसी ने महाराष्ट्र के मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन में 400 मेगावाट-घंटा क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) परियोजना के लिए जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को दिया गया ठेका निरस्त कर दिया है। बिजली क्षेत्र की कंपनी ने शनिवार को बयान में कहा कि ठेकेदार अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियां पूरी करने और परियोजना में अपेक्षित प्रगति हासिल करने में विफल रहा। एनटीपीसी ने कहा, ठेकेदार की संविदात्मक जिम्मेदारियां पूरी करने और परियोजना में अपेक्षित प्रगति हासिल करने में विफलता के कारण 400 मेगावाट-घंटा बीईएसएस परियोजना के लिए जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को दिया गया ठेका समाप्त कर दिया गया है। परियोजना मार्च 2026 में दी गई थी और इसका कुल मूल्य 413.37 करोड़ रुपये था। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बीईएसएस परियोजना थी और राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप इसे 15 महीने में पूरा किया जाना था। लेकिन परियोजना की महत्वपूर्ण गतिविधियों में काफी देरी हुई। एनटीपीसी ने कहा कि उसने जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के लिए संविदात्मक नोटिस जारी किया था, लेकिन वह कदम उठाने में विफल रही। इसके बाद एनटीपीसी ने ठेका तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया और संविदात्मक प्रावधानों के तहत करीब 91 करोड़ रुपये की उपलब्ध प्रतिभूतियों को भुना लिया। एनटीपीसी विद्युत मंत्रालय के अधीन है और यह देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी है।</description><guid>7403</guid><pubDate>19-Sep-2026 12:53:25 am</pubDate></item><item><title>सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर घटाया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7402</link><description>नयी दिल्ली. सरकार ने 16 सितंबर से शुरू हुए पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले 'अप्रत्याशित लाभ कर' (विंडफॉल) में कटौती की है। डीजल के निर्यात पर सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर समेत विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) की दर अब 25 रुपये से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर एसएईडी 19 रुपये से घटाकर 15 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क घटाकर 0.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पिछले पखवाड़े में 1.5 रुपये प्रति लीटर था। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि शुल्क की नयी दरें 16 सितंबर से प्रभावी होंगी।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था। इन शुल्क दरों में हर पखवाड़े संशोधन किया जाता है। पेट्रोल के निर्यात पर भी 16 मई से यह शुल्क लागू किया गया था। मंत्रालय ने यह भी कहा कि घरेलू खपत वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था।</description><guid>7402</guid><pubDate>18-Sep-2026 1:06:26 pm</pubDate></item><item><title>इंडिगो ने शिशु यात्रा, अतिरिक्त सामान समेत कई सेवाओं के शुल्क बढ़ाए</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7401</link><description>मुंबई. देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो ने हाल में शिशु यात्रा और अकेले यात्रा करने वाले नाबालिगों समेत विभिन्न सहायक सेवाओं के शुल्क बढ़ा दिए हैं। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। हालांकि, शुल्क में बदलाव पर इंडिगो की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
सूत्रों ने कहा कि इंडिगो की शिशु यात्रा, अकेले यात्रा करने वाले नाबालिगों और अतिरिक्त सामान समेत कई सेवाओं के शुल्क में संशोधन किया गया है। घरेलू उड़ानों में शिशु यात्रा का शुल्क बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 2,200 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर यह शुल्क अलग-अलग है। तीन दिन से अधिक और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिशु की श्रेणी में रखा जाता है।

इंडिगो की वेबसाइट के अनुसार, अकेले यात्रा करने वाले नाबालिगों के लिए घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का शुल्क क्रमशः 5,999 रुपये और 12,999 रुपये है। हालांकि, इन सेवाओं के पुराने शुल्क का तत्काल पता नहीं चल सका। वेबसाइट के अनुसार, फास्ट-फॉरवर्ड सेवा का शुल्क 650 रुपये और यात्रा प्रमाणपत्र का शुल्क 300 रुपये है। एक सूत्र ने कहा कि परिचालन लागत बढ़ने, खासकर ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बीच हाल के सप्ताहों में कुछ सहायक सेवाओं के शुल्क बढ़ाए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत थी।</description><guid>7401</guid><pubDate>18-Sep-2026 12:46:04 pm</pubDate></item><item><title>बड़े यूपीआई भुगतान पर शुल्क: छह साल बाद क्यों बदली मुफ्त लेनदेन की व्यवस्था</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7400</link><description>नयी दिल्ली. किसी व्यापारी के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) यानी शुल्क लगाना उस व्यवस्था में बदलाव है, जिसमें पिछले छह वर्षों से यूपीआई भुगतान मुफ्त रखने की लागत मुख्य रूप से बैंकों, भुगतान कंपनियों और सरकार के बजटीय प्रोत्साहन से उठाई जा रही थी। मंगलवार शाम जारी आधिकारिक बयान में 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर लगाए जाने की बात कही गई। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक की जगह व्यापारी से वसूला जाएगा और दो व्यक्तियों के बीच होने वाले लेनदेन को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य एमडीआर व्यवस्था बदल गई। 
पुरानी व्यवस्था का मकसद डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा देना था। उस समय यह मॉडल समझ में आता था क्योंकि यूपीआई अभी विस्तार के दौर में था। लेकिन आज इसका पैमाना बिल्कुल बदल चुका है। अगस्त, 2026 में यूपीआई पर 2,451 करोड़ लेनदेन किए गए और उनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। इतने बड़े पैमाने पर भुगतान नेटवर्क को 24 घंटे चलाने, उसकी क्षमता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने की लागत भी बढ़ी है। यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले के पीछे यही आर्थिक वजह बताई जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने उद्योग जगत के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा है कि यूपीआई को चलाने की सालाना लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने यूपीआई के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ऐसे में सिर्फ सरकारी प्रोत्साहन के सहारे बढ़ते नेटवर्क की लागत उठाने का मॉडल लंबे समय तक पर्याप्त नहीं रह गया था। 
हालांकि, सरकार ने एमडीआर को सभी भुगतानों पर लागू करने के बजाय बड़े कारोबारी लेनदेन तक सीमित रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम (व्यक्तियों द्वारा दुकानदारों को भुगतान) लेनदेन कुल पी2एम संख्या का केवल करीब चार प्रतिशत है, लेकिन उनका हिस्सा कुल यूपीआई भुगतान मूल्य में करीब दो-तिहाई है। यह आंकड़ा बताता है कि इस नीति का निशाना रोजमर्रा के यूपीआई इस्तेमाल पर नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत बड़े वाणिज्यिक भुगतानों पर है। नई व्यवस्था के तहत 5,000 रुपये के पी2एम भुगतान पर 20 रुपये और 50,000 रुपये पर 200 रुपये का एमडीआर लगेगा। यह 75,000 रुपये पर 300 रुपये तक पहुंच जाएगा और उसके बाद इसी स्तर पर स्थिर रहेगा। रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर पांच रुपये का एकसमान शुल्क और पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत की दर रखी गई है। इस शुल्क व्यवस्था में छोटे व्यापारियों को अलग रखा गया है। क्यूआर कोड के जरिये महीने में एक लाख रुपये तक का यूपीआई भुगतान लेने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में व्यापारियों के क्यूआर भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। यानी जिस छोटे व्यापारी के लिए यूपीआई कम मूल्य वाले दैनिक लेनदेन का माध्यम है, उसकी मौजूदा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ग्राहकों पर यह शुल्क नहीं लगेगा। एमडीआर व्यापारी पर लगेगा और एनपीसीआई के मुताबिक इसका बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। फिर भी इसका अंतिम आर्थिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी इस लागत को अपने मार्जिन में समाहित करता है या अपनी कीमतों में किसी तरह समायोजित करता है। एमडीआर दरअसल यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर शुल्क लगाने से ज्यादा यूपीआई से जुड़ी लागत का बोझ उठाने के तरीके में बदलाव है। सरकार ने छोटे और रोजमर्रा के भुगतान को मुफ्त रखते हुए बड़े वाणिज्यिक लेनदेन से नेटवर्क के रखरखाव की लागत का एक हिस्सा सीधे जुटाने की व्यवस्था की है।</description><guid>7400</guid><pubDate>16-Sep-2026 12:07:48 am</pubDate></item><item><title>सोना 500 रुपये टूटा, चांदी स्थिर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7399</link><description>नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमत 500 रुपये टूटकर 1,55,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर में तेजी के बीच वैश्विक बाजारों में बिकवाली से सोने में गिरावट आई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना शुक्रवार को 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, इस गिरावट के रुख के उलट चांदी की कीमत 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर स्थिर रही। वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोना 57.22 डॉलर या 1.3 प्रतिशत टूटकर 4,291.71 डॉलर प्रति औंस रह गया और चांदी की कीमत लगभग तीन प्रतिशत टूटकर 62.82 डॉलर रह गई। निवेश मंच मुडरेक्स के लीड क्वांट विश्लेषक अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना टूटकर लगभग 4,300 डॉलर प्रति औंस और चांदी 64 डॉलर प्रति औंस रह गई, जो लगातार तीसरी साप्ताहिक गिरावट है क्योंकि निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी को ध्यान में रखा है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है, जिससे सोने और चांदी की मांग पर और दबाव पड़ा है।</description><guid>7399</guid><pubDate>14-Sep-2026 12:25:21 am</pubDate></item><item><title>चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत का डीओसी निर्यात 13 प्रतिशत घटकर 9.57 लाख टन पर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7398</link><description>नयी दिल्ली. सोयाबीन डीओसी के निर्यात की खेप में भारी गिरावट के कारण भारत का डी-आयल्ड केक या तेल रहित खल (डीओसी) निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटकर 9.57 लाख टन रह गया। उद्योग के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने बृहस्पतिवार को कहा कि जून, 2026 में डीओसी का निर्यात 31 प्रतिशत घटकर 2,17,757 टन रह गया, जबकि एक साल पहले यह 3,13,404 टन था। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में डीओसी का कुल निर्यात 9,57,224 टन रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 10,94,593 टन था। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोयाबीन डीओसी का निर्यात 66 प्रतिशत घटकर 1,69,502 टन रह गया, जो एक साल पहले 4,93,439 टन था। एसईए ने बताया, ''दक्षिण अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों (अर्जेंटीना और ब्राजील) से सस्ती आपूर्ति की तुलना में भारतीय सोयाबीन डीओसी को वैश्विक स्तर पर कीमतों के मामले में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा, जिससे कुल निर्यात की मात्रा कम हो गई।'' एसोसिएशन ने निर्यात में गिरावट का कारण घरेलू स्तर पर ऊंची कीमतों और पशु आहार व पशुपालन क्षेत्र से स्थानीय मांग में तेजी को भी बताया। एसईए ने कहा, ''लाल सागर में जहाज की आवाजाही में लगातार रुकावट और माल ढुलाई के ऊंचे खर्चों का असर कुल कृषि निर्यात से होने वाली कमाई पर पड़ता रहा...।'' अप्रैल-जून, 2026 के दौरान, चीन, बांग्लादेश और वियतनाम भारतीय डीओसी के प्रमुख आयातक देश बनकर उभरे।
चीन ने अप्रैल-जून, 2026 के दौरान 3,13,384 टन डीओसी का आयात किया, जबकि एक साल पहले यह 1,87,361 टन था। बांग्लादेश ने 1,43,013 टन का आयात किया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1,26,351 टन था।</description><guid>7398</guid><pubDate>11-Sep-2026 12:50:36 pm</pubDate></item><item><title>नए दौर की अर्थव्यवस्था का राजस्व 2031 तक तीन गुना होकर 300 अरब डॉलर परः रिपोर्ट</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7397</link><description>नयी दिल्ली. भारत में नए दौर की अर्थव्यवस्था का राजस्व वित्त वर्ष 2030-31 तक तीन गुना होकर करीब 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, इस वृद्धि के बावजूद मुनाफे का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित रहने का अनुमान है। रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। नए दौर की अर्थव्यवस्था से आशय ऐसी अर्थव्यवस्था से है जो कृत्रिम मेधा (एआई), ज्ञान-आधारित पूंजी और डिजिटल नवाचार से संचालित होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए दौर की घरेलू कंपनियों का संयुक्त राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 के 33 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 100 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। इसके सालाना 25 प्रतिशत की दर से बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। रेडसीर ने कहा कि उपभोक्ता वस्तुएं, खुदरा और मनोरंजन जैसे उपभोग आधारित क्षेत्र इस विस्तार की आधारशिला बने रहेंगे। इनके सालाना 25 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 150 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है, जो कुल बाजार का करीब आधा हिस्सा होगा। वहीं, प्रौद्योगिकी, मीडिया एवं दूरसंचार, एआई और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्र सालाना 26 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों का सामूहिक मुनाफा वित्त वर्ष 2024-25 में पहली बार सकारात्मक होकर 1.4 अरब डॉलर रहा। हालांकि, मुनाफा कुछ क्षेत्रों में ही केंद्रित है। वित्त वर्ष 2024-25 के कुल लाभ में अकेले बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र का योगदान 140 प्रतिशत रहा। बीएफएसआई को हटाने पर बाकी सभी क्षेत्रों को मिलाकर भी घाटे की स्थिति रहती है। वित्त वर्ष 2030-31 तक 300 अरब डॉलर का राजस्व हासिल होने पर कुल मुनाफा 5-10 अरब डॉलर रह सकता है, जो दो-तीन प्रतिशत मार्जिन के बराबर होगा। इसकी तुलना में रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) सूचीबद्ध कंपनियों का मार्जिन 12-18 प्रतिशत और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनियों का 20-25 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता वस्तुओं के नए ब्रांडों को बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करने में लगने वाला समय भी कम हुआ है। सीधे ग्राहक को बिक्री (डी2सी) और त्वरित वाणिज्य के विस्तार से 100 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने में लगने वाला समय 6.8 साल से घटकर 3.4 साल रह गया है। इसी तरह, 500 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का समय 7.9 साल से घटकर चार साल रह गया है। रेडसीर का अनुमान है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व वाले नए दौर के उपभोक्ता ब्रांडों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के करीब 90 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 230 और वित्त वर्ष 2030-31 तक करीब 500 हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार 500 करोड़ रुपये से आगे बढ़ना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए मजबूत ऑफलाइन वितरण नेटवर्क, आधुनिक खुदरा कारोबार की क्षमता और पर्याप्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। पूंजी उपलब्धता के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी बाजार से नए दौर की कंपनियों के लिए वित्तपोषण कैलेंडर वर्ष 2026 में सालाना 25 प्रतिशत बढ़कर 17 अरब डॉलर हो सकता है। वर्ष 2030 तक सार्वजनिक और निजी बाजार से इन कंपनियों के लिए सालाना 50 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटाने का अनुमान है।</description><guid>7397</guid><pubDate>11-Sep-2026 12:44:50 pm</pubDate></item><item><title>जिंदल सुप्रीम का आईपीओ 16 सितंबर को खुलेगा, मूल्य दायरा 88-93 रुपये प्रति शेयर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7396</link><description>नयी दिल्ली. जिंदल सुप्रीम (इंडिया) लिमिटेड ने अपने 125 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का मूल्य दायरा 88-93 रुपये प्रति शेयर तय किया है। सार्वजनिक घोषणा के अनुसार, आईपीओ बोली के लिए 16 सितंबर को खुलेगा और 18 सितंबर को बंद होगा। बड़े (एंकर) निवेशक 15 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। आईपीओ 1.07 करोड़ नए शेयर और 26.86 लाख शेयर की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का मिश्रण होगा। इस तरह कुल आईपीओ का आकार करीब 124.88 करोड़ रुपये बैठता है। नए शेयर से प्राप्त राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और सामान्य कामकाज के लिए किया जाएगा।
कंपनी के शेयर को 23 सितंबर को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किए जाने का प्रस्ताव है।
जिंदल सुप्रीम विभिन्न अवसंरचना और औद्योगिक उपयोगों के लिए स्टील पाइप तथा ट्यूब का विनिर्माण और आपूर्ति करती है।</description><guid>7396</guid><pubDate>09-Sep-2026 12:30:59 am</pubDate></item><item><title>कच्चे तेल में उछाल से पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल पर पांच, डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर नुकसान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7395</link><description>नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों ने बुधवार को यह जानकारी दी। 
कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले 23 जुलाई को इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.5 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल करीब दो प्रतिशत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा एक-दूसरे के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद आई है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता देश भारत पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात खर्च बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर खुदरा स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता है, तो पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को इनकी बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ता है। इक्रा लिमिटेड के कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण बुधवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल हो गई। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन महीने से अधिक समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार 25 मई को कीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। ब्रिकवर्क रेटिंग्स के शोध प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण आई है, न कि मांग बढ़ने से। उन्होंने कहा कि महंगा कच्चा तेल विमानन, पेंट, टायर, रसायन, लॉजिस्टिक और उपभोक्ता सामान जैसे तेल पर निर्भर क्षेत्रों के मुनाफे पर दबाव डालेगा।</description><guid>7395</guid><pubDate>09-Sep-2026 12:23:11 am</pubDate></item><item><title>टाटा-बोइंग ने अपाचे का 400वां भारत निर्मित फ्यूजलेज तैयार किया</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7394</link><description>नयी दिल्ली.  टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) ने हैदराबाद स्थित अपनी  अत्याधुनिक सुविधा से एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर के लिए 400वें ढांचे  (फ्यूजलेज) का सफलतापूर्वक निर्माण पूरा कर लिया है। टीबीएएल ने आधिकारिक  बयान में सोमवार को यह जानकारी दी। टीबीएएल, बोइंग और टाटा एडवांस्ड  सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) का संयुक्त उद्यम है।
टीबीएएल के बयान के  अनुसार, इन ढांचों का निर्माण भारत में किया जाता है और दुनिया भर में  आपूर्ति किए जाने वाले अपाचे हेलिकॉप्टर में लगाए जाते हैं। इनमें अमेरिकी  सेना को आपूर्ति किए जाने वाले हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ 2025 में भारतीय  सेना को सौंपे गए छह अपाचे हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के  पास 22 एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टर हैं।
बयान में कहा गया, टीबीएएल ने  हैदराबाद में 52,000 वर्ग मीटर के अपने संयंत्र से दुनिया के सबसे उन्नत और  प्रमाणित लड़ाकू हेलिकॉप्टर एएच-64ई अपाचे के लिए 400वें ढांचे को  सफलतापूर्वक तैयार कर लिया है। वर्ष 2016 में स्थापित टीबीएएल में 750 से  अधिक इंजीनियर और तकनीशियन कार्यरत हैं। ये कर्मचारी अपाचे हेलिकॉप्टर के  लिए ढांचा बनाने के लिए उन्नत रोबोटिक्स, स्वचालन और एयरोस्पेस विनिर्माण  तकनीकों का उपयोग करते हैं। कंपनी ने कहा कि करीब 1,300 अपाचे हेलिकॉप्टर  19 देशों में परिचालन में हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।</description><guid>7394</guid><pubDate>07-Sep-2026 12:38:40 am</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स सम्मेलन के कारण जीएसटी परिषद की बैठक अब सात अक्टूबर को होगी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7393</link><description>नयी दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 12 सितंबर को होने वाली बैठक अब सात अक्टूबर को होगी। यह बदलाव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण किया गया है। भारत 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभाव सहित कई महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ब्रिक्स में पहले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को इसमें शामिल किया गया। इंडोनेशिया 2025 में ब्रिक्स का सदस्य बना। सूत्रों ने बताया कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक अब सात अक्टूबर को होगी। इससे पहले पांच और छह अक्टूबर को अधिकारियों की बैठक होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद की बैठक एक साल से अधिक समय बाद होगी। परिषद की 56वीं बैठक तीन-चार सितंबर, 2025 को हुई थी। उस बैठक में केंद्र और राज्यों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों और श्रेणियों में बड़े बदलाव का फैसला किया था।</description><guid>7393</guid><pubDate>07-Sep-2026 2:33:49 pm</pubDate></item><item><title>दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी, नई दरें आज से लागू</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7391</link><description>नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है। संशोधित दरें शनिवार सुबह 6 बजे से प्रभावी हो गई हैं। यह वृद्धि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रमुख शहरी गैस वितरक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) द्वारा घोषित की गई है। हालिया बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली में सीएनजी की कीमत 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। संशोधित दरें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम सहित कई पड़ोसी शहरों में भी लागू होंगी।
नोएडा और गाजियाबाद में अब सीएनजी की कीमत 95.59 रुपये प्रति किलोग्राम होगी, जबकि गुरुग्राम में नई कीमत 92.01 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है। इस नवीनतम वृद्धि से सीएनजी पर अत्यधिक निर्भर वाहन चालकों और वाणिज्यिक वाहन संचालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, ऐप-आधारित कैब सेवाएं और अन्य वाणिज्यिक परिवहन संचालकों को इस संशोधन के बाद ईंधन पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सीएनजी का उपयोग करने वाले निजी कार मालिकों को भी ईंधन पर अधिक खर्च करना पड़ेगा।
हाल के महीनों में सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि के बाद यह ताजा बढ़ोतरी हुई है। मई 2026 में, आईजीएल ने दिल्ली में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की एक और वृद्धि की घोषणा की थी। यह संशोधन 26 मई से लागू होने वाली 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि के कुछ ही दिनों बाद किया गया था, क्योंकि सीएनजी की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। सार्वजनिक क्षेत्र की गैस वितरण कंपनी आईजीएल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतें काफी अधिक बनी हुई हैं और बढ़ती लागत का असर तेजी से महसूस किया जा रहा है।
कंपनी ने कहा कि सीएनजी की कीमतों में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि आवश्यक थी ताकि इनपुट गैस की लागत में वृद्धि की आंशिक रूप से भरपाई की जा सके और उपभोक्ताओं को सीएनजी की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। बार-बार हो रही मूल्य वृद्धि ने परिवहन संचालकों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर महानगरीय क्षेत्रों में जहां सीएनजी से चलने वाले वाहन सार्वजनिक और वाणिज्यिक परिवहन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।</description><guid>7391</guid><pubDate>29-Aug-2026 1:49:01 pm</pubDate></item><item><title>दिल्ली-एनसीआर में प्याज सिर्फ 35 रुपये किलो, केंद्र ने महंगाई पर कसी लगाम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7390</link><description> नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। सरकारी एजेंसियां अब रियायती दर पर प्याज उपलब्ध करा रही हैं। महज 35 रुपये प्रति किलो की कीमत पर यह सस्ता प्याज दिल्ली-एनसीआर के 13 स्थानों पर बिक रहा है। जल्द ही बिक्री केंद्रों की संख्या बढ़ाकर करीब 40 कर दी जाएगी।
बृहस्पतिवार को कृषि भवन परिसर में उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने नेफेड और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ(एनसीसीएफ) की मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी परिसर में लोगों को 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेचा गया। पहले दिन करीब 400 किलो प्याज की बिक्री हुई। निधि खरे ने बताया कि देश में प्याज का उत्पादन और उपलब्धता पर्याप्त है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के कई कदम उठा रही है।
दिल्ली में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नासिक से चली पहली कांदा एक्सप्रेस नई दिल्ली के आदर्श नगर रेलवे स्टेशन पहुंच गई है। इस ट्रेन के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज भेजा गया है, जिसकी रियायती दर पर बिक्री की जाएगी। आने वाले दिनों में और ट्रेनें पहुंचने की उम्मीद है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के निर्देश पर मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत बनाए गए बफर स्टॉक से 840 टन प्याज दिल्ली भेजने का फैसला लिया गया है। इसमें करीब 450 टन प्याज पहली कांदा एक्सप्रेस के जरिए पहुंच चुका है। लासलगांव स्टेशन प्रबंधक प्रितेश दुबे ने बताया कि ट्रेन को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, ताकि राजधानी के उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। सरकार का मानना है कि रियायती दर पर बिक्री और अतिरिक्त आपूर्ति से दिल्ली-एनसीआर में प्याज की कीमतें नियंत्रित होंगी। त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं को महंगे प्याज से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</description><guid>7390</guid><pubDate>28-Aug-2026 10:31:44 pm</pubDate></item><item><title>देश का ईवी बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये का होगा, पांच करोड़ रोजगार भी पैदा होंगेः गडकरी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7389</link><description>नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार वर्ष 2030 तक बढ़कर 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा और इससे पांच करोड़ रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। गडकरी ने 'सीआईआई-आईटीसी टिकाऊ विकास उत्कृष्टता केंद्र' की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि देश में फिलहाल 57 लाख बिजलीचालित वाहन पंजीकृत हैं और कुल वाहन बाजार में ईवी की पहुंच सात प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ''भारत का ईवी बाजार वर्ष 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये मूल्य का हो जाएगा। ऐसे में यह क्षेत्र 2030 तक पांच करोड़ रोजगार भी पैदा करेगा।'' गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बस की मांग है, लेकिन देश में सालाना केवल 50,000-60,000 ईवी बस का ही विनिर्माण हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में पहले स्थान पर पहुंचाना है। उन्होंने कहा, ''यह मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है।'' सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि भारत में निर्मित वाहनों की गुणवत्ता अच्छी और लागत कम होने के कारण दुनिया की प्रमुख वाहन कंपनियां देश में मौजूद हैं। गडकरी ने कहा कि जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके मुकाबले अमेरिका का वाहन उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये और चीन का 47 लाख करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है और इसके कारण प्रदूषण की समस्या भी पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन भविष्य का महत्वपूर्ण विकल्प है। गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश की लॉजिस्टिक लागत को घटाकर आठ प्रतिशत करना है।
उन्होंने आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु की हाल में आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।</description><guid>7389</guid><pubDate>27-Aug-2026 12:45:09 am</pubDate></item><item><title>एनटीपीसी का 2037 तक 244 गीगावाट क्षमता, 16.86 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य: चेयरमैन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7388</link><description>नयी दिल्ली. एनटीपीसी का 2037 तक 244 गीगावाट की परिचालन क्षमता विकसित करने और 16.86 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का लक्ष्य है। कंपनी पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। एनटीपीसी के चेयरमैन गुरदीप सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगला दशक कंपनी के इतिहास में वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण दौर में से एक होगा। अर्थव्यवस्था के विस्तार और जीवन स्तर में सुधार के साथ भारत की बिजली की जरूरत लगातार बढ़ती रहेगी। उन्होंने कंपनी की 50वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि इसी के साथ बिजली व्यवस्था की संरचना में भी तेजी से बदलाव आएगा। सिंह ने कहा, ''हमने दीर्घकालिक क्षमता के अपने लक्ष्य बढ़ाए हैं और अब 2032 तक 149 गीगावाट उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है। 2037 तक भंडारण क्षमता को छोड़कर 244 गीगावाट तक पहुंचने का हमारा लक्ष्य है।'' फिलहाल एनटीपीसी की क्षमता करीब 91 गीगावाट है।
चेयरमैन ने कहा कि कंपनी की वित्त वर्ष 2036-37 तक ताप, जलविद्युत एवं पंप स्टोरेज, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी भंडारण, खनन तथा परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में कुल करीब 16.86 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करने की भी योजना है। यह किसी भारतीय बिजली कंपनी द्वारा किए जाने वाले सबसे बड़े निवेश कार्यक्रमों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी का बदलाव केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। सिंह ने कहा कि कंपनी पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में अपनी क्षमताएं विकसित कर रही है।
परमाणु ऊर्जा के बारे में उन्होंने कहा कि यह एनटीपीसी की भविष्य की वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। कंपनी परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक सरकार के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है। राजस्थान में एनपीसीआईएल के साथ संयुक्त उद्यम में 2.8 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना विकसित कर रही एनटीपीसी अलग-अलग परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की भी इच्छुक है। सिंह ने कहा, ''परमाणु परियोजनाओं एवं प्रौद्योगिकियों के लिए 13 राज्यों में 34 अतिरिक्त स्थानों को लेकर अध्ययन तथा चर्चा आगे बढ़ रही है।'' उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा विश्वसनीय, कम कार्बन उत्सर्जन वाली और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराकर नवीकरणीय तथा ताप विद्युत, दोनों की पूरक होगी। चेयरमैन ने बताया कि एनटीपीसी की कोयला गैसीकरण आधारित कृत्रिम प्राकृतिक गैस परियोजना पर काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ''हम 5.75 लाख टन सालाना क्षमता वाली परियोजना पर भी अच्छी प्रगति कर रहे हैं। इसके स्थापित होने के बाद यह भारत में अपनी तरह का पहला संयंत्र होगा और सीधे तौर पर आयातित प्राकृतिक गैस का स्थान लेगा।'' एनटीपीसी समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 27,546 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। समूह की कर पूर्व आय भी बढ़कर 60,564 करोड़ रुपये हो गई जबकि समूह का नेटवर्थ भी बढ़कर करीब 2.03 लाख करोड़ रुपये रहा।</description><guid>7388</guid><pubDate>27-Aug-2026 12:01:26 am</pubDate></item><item><title>यामाहा ने वाईजेडएफ-आर2 उतारी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7387</link><description>देखें क्या है कीमत...
चेन्नई. इंडिया यामाहा मोटर ने बृहस्पतिवार को अपनी सुपरस्पोर्ट मोटरसाइकिल श्रृंखला का विस्तार करते हुए नई 'वाईजेडएफ-आर2' को वैश्विक स्तर पर पेश किया। चेन्नई संयंत्र में निर्मित इस मोटरसाइकिल की कीमत 2.30 लाख रुपये रखी गई है।
कंपनी ने बताया कि इस मोटरसाइकिल में 200 सीसी का इंजन दिया गया है, जो 26.5 हॉर्सपावर की अधिकतम शक्ति और 19.1 एनएम का अधिकतम टॉर्क पैदा करता है। कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में 10,000 रुपये की टोकन राशि के साथ इसकी बुकिंग शुरू की थी। यह राशि मोटरसाइकिल की अंतिम कीमत में समायोजित की जाएगी। यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड के कार्यपालक अधिकारी और यामाहा मोटर इंडिया समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हाजिमे आओटा ने संवाददाताओं से कहा कि 200 सीसी का इंजन किसी मौजूदा इंजन में बदलाव करके नहीं, बल्कि पूरी तरह नए सिरे से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि 200 सीसी इंजन का चुनाव घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली नजर में 'वाईजेडएफ-आर2' और आर15 एक जैसी दिख सकती हैं, लेकिन दोनों की संरचना और निर्माण प्रक्रिया अलग है। उन्होंने दोनों मॉडल के बीच अंतर को आईफोन-4 से आईफोन-5 के विकास जैसा बताया।
आओटा के मुताबिक, नई मोटरसाइकिल को वैश्विक स्तर के कड़े उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है। इसे मुख्य रूप से जापान, यूरोप और ताइवान जैसे विकसित बाजारों में निर्यात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी को नई मोटरसाइकिल की बिक्री में घरेलू बाजार की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत और निर्यात की 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है कंपनी ने पूरे साल के लिए करीब 50,000 इकाइयों के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सितंबर से दिसंबर के बीच शुरुआती चरण में 15,000 से 20,000 इकाइयों के उत्पादन की उम्मीद है।</description><guid>7387</guid><pubDate>27-Aug-2026 12:00:35 am</pubDate></item><item><title>सरकार कल से दिल्ली में 35 रुपये किलो के भाव बेचेगी प्याज, कीमतों में तेजी के बीच उठाया कदम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7386</link><description>नयी दिल्ली. प्याज की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार बृहस्पतिवार से दिल्ली में बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचेगी। देश के कई शहरों में प्याज का खुदरा भाव 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी बृहस्पतिवार को दिल्ली में रियायती दर पर प्याज की बिक्री की शुरुआत करेंगे। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकार ने 2026 के लिए प्याज का 1.21 लाख टन का 'बफर स्टॉक' तैयार किया है। इसी भंडार से प्याज बाजार में उतारा जाएगा। इस खुदरा बिक्री का संचालन तीन एजेंसियां भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड), भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और केंद्रीय भंडार करेंगी। एनसीसीएफ के प्रबंध निदेशक अनीस जोसेफ चंद्रा ने पीटीआई-भाषा को बताया, ''हम कल दिल्ली में बिक्री शुरू करेंगे और सप्ताहांत तक इसे एनसीआर क्षेत्र में भी शुरू कर दिया जाएगा।'' एनसीसीएफ के पास प्याज का करीब 62,000 टन बफर स्टॉक है। इसमें से महाराष्ट्र के नासिक से 400 टन प्याज रेल के जरिये दिल्ली भेजा जा रहा है। इसके लिए 'कांदा एक्सप्रेस' नाम से चलाई गई विशेष रेलगाड़ी के बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। एनसीसीएफ दिल्ली में केंद्रीय भंडार के 100 स्टोर के जरिये प्याज बेचेगा। इसके अलावा मदर डेयरी के करीब 300 बिक्री केंद्रों के जरिये प्याज बेचने को लेकर भी बातचीत चल रही है। एनसीसीएफ शुरुआत में 15 मोबाइल वैन के जरिये भी प्याज बेचेगा। इनकी संख्या शुक्रवार से बढ़ाकर 40 की जाएगी। चंद्रा ने कहा कि रेल के जरिये आने वाली प्याज की खेप का इस्तेमाल चंडीगढ़, लुधियाना, वाराणसी और अन्य शहरों में भी बिक्री के लिए किया जाएगा। नाफेड के पास 55,000 टन से कम प्याज का बफर स्टॉक है। वह भी दिल्ली के अलावा कोच्चि और गुवाहाटी समेत अन्य केंद्रों पर रियायती दर पर प्याज बेचेगा। पहली विशेष रेलगाड़ी 800 टन प्याज लेकर नासिक से दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी है।</description><guid>7386</guid><pubDate>26-Aug-2026 1:05:21 am</pubDate></item><item><title>भारत के 26 बाजारों में चावल निर्यात में वृद्धि, मांग विविधीकरण के संकेत</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7385</link><description>नयी दिल्ली. भारत के प्राथमिकता वाले 26 बाजारों में चावल का निर्यात 2025 के भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) के बाद के पांच महीनों में पिछले तीन वर्ष के औसत से अधिक रहा। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय खान-पान के अनुरूप भारतीय चावल की किस्मों को बढ़ावा देने की रणनीति से विदेशों में मांग के विविधीकरण में मदद मिल सकती है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) द्वारा वाणिज्यिक आसूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 26 बाजारों को मिलाकर चावल का निर्यात 23,476 करोड़ रुपये और 47.9 लाख टन रहा। इसमें बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह के चावल शामिल हैं। निर्यात मूल्य पिछले तीन वर्ष में नवंबर-मार्च की इसी अवधि के औसत से 1.1 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि इसकी मात्रा 5.6 प्रतिशत अधिक रही। इन 26 बाजारों में से 11 में मूल्य एवं मात्रा दोनों के लिहाज से सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। ये नतीजे ऐसे समय आए हैं जब भारत घरेलू स्तर पर चावल की पर्याप्त उपलब्धता के बीच अपने निर्यात आधार को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में जोर अधिक चावल के लिए बाजार तलाशने के बजाय ऐसी विशिष्ट किस्मों की पहचान पर है जो उपयुक्तता, गुणवत्ता में निरंतरता और पकने के गुणों के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को निर्यात मूल्य में 65 प्रतिशत और मात्रा में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बेल्जियम में क्रमश: 53.8 प्रतिशत और 44.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जर्मनी में निर्यात मूल्य 33.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मात्रा 24.6 प्रतिशत बढ़ी। ब्रिटेन में निर्यात मूल्य 26.9 प्रतिशत और मात्रा 25.6 प्रतिशत बढ़ी। दक्षिण अफ्रीका में मूल्य 26 प्रतिशत, जबकि मात्रा 42.9 प्रतिशत बढ़ी। केन्या में दोनों में क्रमश: 22.3 प्रतिशत और 34.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फ्रांस में निर्यात मूल्य 31.3 प्रतिशत और मात्रा 32.9 प्रतिशत बढ़ी। ब्रिटेन को निर्यात मूल्य में 26.9 प्रतिशत और मात्रा में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मैक्सिको को निर्यात मूल्य 22.1 प्रतिशत और मात्रा 50.9 प्रतिशत बढ़ी। नीदरलैंड को निर्यात मूल्य 20.5 प्रतिशत और मात्रा 13.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कनाडा को निर्यात मूल्य 10.2 प्रतिशत और मात्रा 9.1 प्रतिशत बढ़ी। सेनेगल को निर्यात मूल्य 5.3 प्रतिशत और मात्रा 29.9 प्रतिशत बढ़ी। व्यापार आंकड़े यह भी बताते हैं कि निर्यात वृद्धि का आकलन केवल मात्रा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, मैक्सिको को चावल की खेप में 50.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निर्यात मूल्य 22.1 प्रतिशत बढ़ा। केन्या और दक्षिण अफ्रीका में भी मात्रा की वृद्धि मूल्य की तुलना में काफी अधिक रही। यह विभिन्न बाजारों में कीमत, उत्पाद मिश्रण और मांग में अंतर को दर्शाता है। इससे उद्योग अधिक लक्षित रणनीति अपना रहा है। निर्यातक चावल को केवल एक जिंस के रूप में पेश करने के बजाय यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारतीय चावल की अलग-अलग किस्में संभावित बाजारों के उपभोक्ताओं के परिचित व्यंजनों में किस तरह बेहतर उपयोग की जा सकती हैं। इस रणनीति को 23 से 25 अक्टूबर को नयी दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 में आगे बढ़ाया जाएगा।</description><guid>7385</guid><pubDate>26-Aug-2026 1:02:33 am</pubDate></item><item><title>प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा कदम, दिल्ली आएगी 800 टन की कांदा एक्सप्रेस</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7384</link><description>नई दिल्ली। 800 टन प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेगी। यहां प्याज को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी वाली दर पर बेचा जाएगा। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने मंगलवार को यह जानकारी दी। खरे ने सोशल मीडिया मंच पर बताया कि दिल्ली में प्याज की खुदरा बिक्री नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार की दुकानों के जरिए की जाएगी।उन्होंने बताया कि चार अन्य केंद्रों-चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी के लिए भी समर्पित रेलवे रेक के जरिए थोक प्याज भेजा जा रहा है। इन उपभोग केंद्रों के लिए भेजा जा रहा प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे गए बफर स्टॉक का हिस्सा है। कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए इस स्टॉक को बाजार में उतारा जा रहा है।उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक साल पहले यह 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी तरह औसत थोक कीमत 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी।प्रमुख शहरों में सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत चेन्नई में 60 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक साल पहले यह 33 रुपये थी। दिल्ली में कीमत 55 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले 35 रुपये थी। वहीं, कोलकाता में प्याज 53 रुपये प्रति किलोग्राम बिका।बड़े पैमाने पर प्याज की आवाजाही में लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से कांदा एक्सप्रेस पहल 2024-25 में शुरू की गई थी और तब से इसका विस्तार किया गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12,000 टन बफर स्टॉक प्याज लेकर 14 रेलवे रेक पांच शहरों में भेजे गए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 86 रेक हो गई, जिनके जरिए देश के 16 प्रमुख शहरों में करीब 88,000 टन प्याज भेजा गया।प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है, जिसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बाजार को बचाने के लिए तैयार किया जाता है। सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत विभिन्न उत्पादक राज्यों में प्याज का भंडार रखती है।सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बनाए रखा है।
सरकार के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। प्याज की कीमतों में आमतौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान मौसमी बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसम संबंधी व्यवधान, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और मांग के बदलते पैटर्न जैसे कारक प्रमुख हैं।</description><guid>7384</guid><pubDate>25-Aug-2026 6:21:21 pm</pubDate></item><item><title>मिसाइल निर्माण में बड़ी छलांग, भारतीय उद्योगों को मिलेगी डीआरडीओ की तकनीक</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7383</link><description>नई दिल्ली। भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है। इसके बाद निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाली भारतीय कंपनियां देश में ही इन मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन कर सकेंगी। इस फैसले से भारतीय सेनाओं की युद्धक तैयारी मजबूत होने और उन्हें आवश्यक मिसाइलों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्रालय के इस फैसले को भारत के मिसाइल निर्माण क्षेत्र में अनुसंधान से औद्योगिक उत्पादन तक की यात्रा को तेज करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीक को उद्योगों तक पहुंचाने से प्रमाणित प्रणालियों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल स्वदेशी हथियारों का विकास और इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि उनके उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को भी देश के भीतर विकसित करना है। मिसाइल तकनीक के हस्तांतरण से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, विदेशी निर्भरता कम करने और भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब तक उन्नत मिसाइल प्रणालियों के विकास में डीआरडीओ की प्रमुख भूमिका रही है। नई व्यवस्था के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित तकनीक निर्धारित योग्यता, प्रमाणन और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित की जाएगी। इससे विकास और परीक्षण के बाद मिसाइल प्रणालियों को औद्योगिक स्तर पर उत्पादन में बदलने की प्रक्रिया आसान होगी।
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय रक्षा उद्योग में छोटी और मध्यम कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना भी है। मिसाइल निर्माण की आपूर्ति श्रृंखला में विभिन्न उपकरणों, कलपुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, विशेष सामग्रियों और तकनीकी घटकों की जरूरत होती है। ऐसे में भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य रक्षा उत्पादन के लिए ऐसा मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार तैयार करना है, जिसमें बड़ी कंपनियों के साथ एमएसएमई और अन्य तकनीकी भागीदार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भारत अपने रक्षा उत्पादन को लगातार बढ़ाने और उन्नत सैन्य प्रणालियों के निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तकनीक हस्तांतरण से डीआरडीओ अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा, जबकि प्रमाणित तकनीकों को भारतीय उद्योगों के माध्यम से उत्पादन के स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे नई तकनीक विकसित करने और उसे सेनाओं के लिए उपलब्ध कराने के बीच का समय कम करने में भी मदद मिल सकती है।
रक्षा मंत्री की मंजूरी को भारत के मिसाइल क्षेत्र में डीआरडीओ की प्रयोगशाला से भारतीय कारखानों तक तकनीक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति मिलने के साथ भारतीय कंपनियों, एमएसएमई और तकनीकी भागीदारों के लिए रक्षा क्षेत्र में भागीदारी के नए रास्ते खुलेंगे।</description><guid>7383</guid><pubDate>25-Aug-2026 6:11:54 pm</pubDate></item><item><title>सोना पांच महीने के उच्चतम स्तर 1.64 लाख रुपये पर, चांदी चार माह के शीर्ष पर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7382</link><description>नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतें पांच महीने से अधिक के उच्चतम स्तर 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गईं। ऐसा वैश्विक रुख और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण मांग बढ़ने से हुआ। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 900 रुपये बढ़कर 1,64,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) हो गई, जो शुक्रवार को 1,63,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रही थी। सोने की कीमत आखिरी बार नौ मार्च को इस स्तर के आसपास थी। उस समय यह 1,64,300 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी में भी लगातार तीसरे सत्र में बढ़त देखी गई और यह 3,500 रुपये बढ़कर चार महीने से अधिक के उच्चतम स्तर 2,53,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर पहुंच गई। पिछले सत्र में चांदी 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। आखिरी बार यह 17 अप्रैल को इस स्तर के आसपास थी, जब इसकी कीमत 2,53,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि सोमवार को घरेलू बाजारों में सोने में तेजी आई, जबकि अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की मजबूत मांग से चांदी की कीमतें भी ऊंची बनी रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 42.45 डॉलर या एक प्रतिशत बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस हो गया और चांदी 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही। कोटक सिक्योरिटीज की जिंस शोध विभाग की एवीपी, कायनात चैनवाला ने कहा कि सोमवार को वैश्विक बाजार में हाजिर सोने की तेजी जारी रही और यह 4,650 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि सर्राफा में अगली चाल भू-राजनीति पर कम और महंगाई पर ज्यादा निर्भर हो सकती है।</description><guid>7382</guid><pubDate>24-Aug-2026 12:16:56 am</pubDate></item><item><title>चीनी की देश में कोई कमी नहीं, कीमतों में आगे कमी आने की उम्मीदः इस्मा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7381</link><description>नयी दिल्ली. चीनी की कीमतों में अचानक आए उछाल के बीच उद्योग संगठन इस्मा ने सोमवार को कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने तथा कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं पर भंडारण सीमा लगाने से आने वाले दिनों में खुदरा कीमतें घटने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये से 29 प्रतिशत अधिक है। अधिकतम खुदरा कीमत 75 रुपये और मॉडल कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम रही। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं की ओर से कीमत बढ़ने की उम्मीद में की गई खरीदारी और अनुमान से कम उत्पादन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, ''भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। हमारा उत्पादन और भंडार बुनियादी रूप से संतोषजनक स्थिति में है।'' उन्होंने कहा कि अक्टूबर, 2025-सितंबर, 2026 के मौजूदा चीनी सत्र में एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुई चीनी को घटाने के बाद शुद्ध उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। सत्र की शुरुआत में 50 लाख टन का भंडार था और घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगाने से पहले आठ लाख टन चीनी का निर्यात भी किया जा चुका था। शिरगांवकर ने सितंबर के अंत में करीब 35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान जताया। उन्होंने कहा, ''एथनॉल में इस्तेमाल की गई चीनी को ध्यान में रखने के बाद भी यह सामान्य घरेलू मांग के लिहाज से पर्याप्त सुरक्षित भंडार है।'' उन्होंने कहा कि 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति, कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा, कुछ राज्यों में विशेष पेराई तथा नए सत्र की जल्दी शुरुआत से घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों से बिक्री की कीमतें घटकर फिलहाल करीब 55-56 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं। शिरगांवकर ने कहा कि हालिया तेजी मौसम संबंधी प्रभाव, त्योहारी मांग, वैश्विक आपूर्ति में कमी और सबसे महत्वपूर्ण रूप से कीमत बढ़ने की उम्मीद में भंडारण के कारण आई है, न कि वास्तविक आपूर्ति की कमी से। मिल स्तर की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उद्योग को जिम्मेदार ठहराए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उद्योग कृत्रिम कमी पैदा करने और कीमतें बढ़ाने में शामिल नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि कुछ मिलों ने भंडार रोककर रखा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को देख रही है। उन्होंने कहा कि सकल चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान 345 लाख टन था, लेकिन मौसम संबंधी कारणों, गन्ने की कम पैदावार और गन्ने से चीनी निकलने की कम दर के कारण इसे घटाकर करीब 309 लाख टन कर दिया गया। शिरगांवकर ने कीमतों में वृद्धि के लिए एथनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि 2025-26 सत्र में अब तक करीब 29 लाख टन चीनी एथनॉल के लिए इस्तेमाल हुई है और पूरे सत्र में यह करीब 30 लाख टन रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ब्राजील में चीनी उत्पादन के अनुमान में कमी से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें जून में करीब 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अगस्त में करीब 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह दाम बढ़ने की उम्मीद में की गई खरीदारी रही है। शिरगांवकर ने कहा, ''कुछ कारोबारियों ने बाजार में आपूर्ति कम होने की भ्रामक धारणा पैदा की, जिसके बाद बड़े थोक खरीदारों ने भी डेढ़-दो महीने की जरूरत का चीनी भंडार पहले ही जमा करना शुरू कर दिया। इससे चीनी बाजार में उपलब्ध रहने के बजाय गोदामों में चली गई और कृत्रिम रूप से कमी जैसी स्थिति पैदा हो गई।'' उन्होंने कारोबारियों के लिए मौजूदा 400 टन की भंडारण सीमा को घटाकर 200 टन करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इस्मा और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) आगामी चीनी सत्र की पेराई 10-15 दिन पहले शुरू करने पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई शुरू हो चुकी है। इससे अक्टूबर में करीब 10 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है, जबकि सामान्य उत्पादन करीब चार लाख टन रहता है। शिरगांवकर ने कहा कि सरकार के कदमों से पिछले कुछ दिनों में कीमतों में नरमी आई है और त्योहारों के मौसम में पर्याप्त आपूर्ति के साथ आगे भी कीमतों में नरमी की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कच्ची चीनी का आयात आर्थिक रूप से व्यावहारिक है और इसके अक्टूबर तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।</description><guid>7381</guid><pubDate>24-Aug-2026 12:13:46 am</pubDate></item><item><title>सरकार ने चीनी के थोक उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की भंडारण सीमा तय की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7380</link><description>नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच थोक उपभोक्ताओं के लिए बृहस्पतिवार को भंडारण सीमा तय कर दी। इसके तहत महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले उपभोक्ता 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे। खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि खाद्य मंत्रालय ने इस संबंध में 'चीनी (थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा) आदेश, 2026' को अधिसूचित कर दिया है। इस आदेश के दायरे में कन्फेक्शनरी, शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार आएंगे। खाद्य मंत्रालय का यह आदेश एक सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले सरकार ने एक अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी कारोबारियों के पास 30 दिन के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल स्टॉक रखने की सीमा तय की थी। चीनी मिलों के स्तर पर बिक्री कीमतों में तेज वृद्धि होने के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। चीनी उद्योग के एक संगठन के मुताबिक, मंगलवार को देशभर में चीनी की औसत मिल-स्तरीय बिक्री कीमत बढ़कर 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो एक साल पहले 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 18 अगस्त को चीनी का खुदरा दाम सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया, जो एक साल पहले 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम था। चीनी की मांग आमतौर पर अगस्त से नवंबर महीनों के दौरान बढ़ती है क्योंकि इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। नए सरकारी आदेश के तहत प्रत्येक मिल द्वारा किसी थोक उपभोक्ता को सीधे या कारोबारियों के जरिये बेची गई चीनी की मासिक मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। खपत का निर्धारण विक्रेता और/या खरीदार द्वारा दाखिल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न में चीनी के लिए लागू एचएसएन कोड के आधार पर किया जाएगा। आदेश में थोक उपभोक्ता का मतलब ऐसे कन्फेक्शनरी निर्माता, शीतल पेय विनिर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाई, मिठाई विक्रेता या अन्य संस्थागत खरीदार से है, जिसकी औसत मासिक खपत पिछले एक साल में औसत कम-से-कम 10 टन रही हो। इसमें मौजूदा महीने की खपत शामिल नहीं होगी। हालांकि, केंद्र या राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थानों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। चीनी का पेराई सत्र 2026-27 एक अक्टूबर से शुरू होने वाला है। उद्योग का अनुमान है कि नया सत्र शुरू होते समय चीनी का शुरुआती स्टॉक 40-42 लाख टन रह सकता है। कुछ शोधकर्ताओं ने इसके 32-35 लाख टन रहने का अनुमान जताया है। दोनों ही अनुमान करीब 50 लाख टन की अनुमानित घरेलू जरूरत से कम हैं।</description><guid>7380</guid><pubDate>20-Aug-2026 11:45:05 pm</pubDate></item><item><title>आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान : इंडिया रेटिंग्स</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7378</link><description>नयी दिल्ली. देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत थी। इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च (इंड-रा) ने पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता, ईंधन एवं खाद्य महंगाई, कमजोर मुद्रा तथा कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव का हवाला देते हुए मंगलवार को भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान जारी किया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 प्रतिशत का जीडीपी वृद्धि अनुमान मई में इंडिया रेटिंग्स के पहले लगाए गए 6.7 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है। इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था। घरेलू रेटिंग एजेंसी ने अब वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जबकि मई, 2026 में उसने 95 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया था। एजेंसी को वित्त वर्ष 2026-27 में रुपये-डॉलर विनिमय दर औसतन 93.98 रुपये रहने की उम्मीद है, जो मई, 2026 के 94.28 रुपये के अनुमान से कम है। फिच समूह की अनुषंगी इंड-रा ने विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर-बी) और विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के तहत 70 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स ने बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में जीडीपी वृद्धि में कमी पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता, कमजोर मुद्रा और कृषि पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से ईंधन तथा खाद्य महंगाई बढ़ने की वजह से होगी। एजेंसी ने अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर और जनवरी-मार्च तिमाहियों के लिए जीडीपी वृद्धि दर क्रमशः 6.9, 6.6, 6.7 और 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, आरबीआई ने इन तिमाहियों के लिए क्रमशः 7, 6.4, 6.5 और 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। इंड-रा के मुख्य अर्थशास्त्री एवं सार्वजनिक वित्त प्रमुख देवेंद्र पंत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत के आयातित कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल और अप्रैल-जुलाई 2026 में 96.49 डॉलर प्रति बैरल रही। इंड-रा ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह दो प्रतिशत थी। चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। पंत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे का 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य एलपीजी और उर्वरक पर सब्सिडी के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रत्यक्ष कर संग्रह और गैर-कर राजस्व से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है लेकिन अप्रत्यक्ष कर संग्रह चुनौती पैदा कर सकता है।</description><guid>7378</guid><pubDate>18-Aug-2026 12:35:27 am</pubDate></item><item><title>2030 तक भारत में कोयले की मांग 1.6 अरब टन पहुंचने का अनुमान: कोयला सचिव</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7377</link><description>नई दिल्ली।कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने शुक्रवार को कहा कि 2030 तक भारत में कोयले की मांग लगभग 1.6 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है। देश अब कोयले की कमी वाली स्थिति से सरप्लस (अतिरिक्त आपूर्ति) की ओर बढ़ चुका है, इसलिए कोयले के व्यापार के लिए ज्यादा कुशल, पारदर्शी और मार्केट-बेस्ड तरीकों की जरूरत बढ़ गई है।
ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 में दत्त ने बताया कि कोयला एक्सचेंज खरीदारों और विक्रेताओं के लिए एक पारदर्शी बाजार तैयार करेगा। इससे आगे चलकर कोयला डेरिवेटिव्स मार्केट की नींव भी पड़ेगी। उन्होंने कहा, 2030 तक कोयले की मांग बढ़कर 1.6 अरब टन होने का अनुमान है। ऐसे में जब देश सरप्लस स्थिति में आ गया है, तो ज्यादा कुशल और मार्केट-बेस्ड ट्रेडिंग की जरूरत है।
सचिव ने जानकारी दी कि 2024-25 में घरेलू कोयला उत्पादन पहली बार एक अरब टन के पार पहुंच गया और 2025-26 में भी लगातार दूसरे साल इसी स्तर से ऊपर बना रहा। यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की क्षमता को दर्शाती है।
सरकार मौजूदा वन-टू-मेनी (एक से कई) सेल्स मॉडल से आगे बढ़कर मेनी-टू-मेनी (कई से कई) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ना चाहती है। कोयला एक्सचेंज के जरिए खरीदार और विक्रेता एक साथ बोली लगा सकेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धी कीमतें तय होंगी और कोयला बिक्री के कई चैनल एक स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क के तहत आ जाएंगे। इससे कमर्शियल और कैप्टिव कोयला माइनर्स को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी। उपभोक्ता कई घरेलू उत्पादकों से कोयला खरीद सकेंगे, जिससे किसी एक सप्लायर पर निर्भरता कम होगी।एक्सचेंज क्लियरिंग और सेटलमेंट के लिए सेंट्रल काउंटर पार्टी के रूप में भी काम करेगा, जिससे दोनों पक्षों के लिए रिस्क मैनेजमेंट बेहतर होगा। साथ ही, अचानक या कम समय की जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाएगा।
दत्त ने कहा कि आगे चलकर यह प्लेटफॉर्म डेरिवेटिव्स मार्केट के विकास में भी मदद करेगा, जिससे उत्पादक और उपभोक्ता कीमतों से जुड़े जोखिमों को मैनेज कर सकेंगे। आने वाले महीनों में जब कोयला एक्सचेंज का ढांचा काम करना शुरू करेगा, तो सरकार एक्सचेंज, रेगुलेटर, मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों, वित्तीय मध्यस्थों और उद्योग से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम करेगी। इस बड़े सुधार का मकसद ज्यादा पारदर्शिता, तेज प्रोजेक्ट पूरा होना, प्राइवेट सेक्टर की अधिक भागीदारी और एक कुशल व आत्मनिर्भर कोयला इकोसिस्टम तैयार करना है।</description><guid>7377</guid><pubDate>14-Aug-2026 12:24:57 pm</pubDate></item><item><title>टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू की</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7376</link><description>मुंबई. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस का नेतृत्व करने के लिए एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया बृहस्पतिवार को शुरू कर दी है। टाटा संस, विविध कारोबार वाले टाटा ट्रस्ट्स समूह की होल्डिंग कंपनी है।
टाटा संस की करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने बयान में कहा, ''सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) चंद्रशेखरन के टाटा संस में फिर से नियुक्ति नहीं लेने के फैसले का सम्मान करता है। हम टाटा संस और टाटा समूह के नेतृत्व में पिछले एक दशक के दौरान उनके योगदान और मार्गदर्शन के लिए आभार जताते हैं।'' चंद्रशेखरन ने अचानक लिए गए फैसले में बुधवार को कहा कि निदेशक मंडल में आम सहमति न होने के कारण वह टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्ति नहीं चाहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के न्यासियों ने जल्द से जल्द चयन समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया है। यह समिति टाटा संस के निदेशक मंडल के नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए उपयुक्त व्यक्ति के नाम की सिफारिश करेगी। रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने थे। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का भी नेतृत्व कर रहे हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा, ''हम टाटा संस और टाटा समूह के मूल्यों तथा हितों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारू, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में पूरा सहयोग देंगे। </description><guid>7376</guid><pubDate>13-Aug-2026 12:24:54 am</pubDate></item><item><title>ग्रीन स्टील एवं माइनिंग समिट में जिंदल स्टील की प्रभावी भागीदारी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/business.php?articleid=7375</link><description>-  सीआईआई के दो दिवसीय समिट में प्राइम स्पॉन्सर के रूप में शामिल हुई कंपनी,  ग्रीन स्टील और सस्टेनेबल भविष्य की योजनाओं का प्रदर्शन
रायपुर।  भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा रायपुर में आयोजित 5वें ग्रीन स्टील  एवं माइनिंग समिट में जिंदल स्टील लिमिटेड प्राइम स्पॉन्सर के रूप में  सहभागी रहा। दो दिवसीय समिट का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण  साव एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। 
समिट  के एग्जीबिशन एरिया में जिंदल स्टील द्वारा स्थापित आकर्षक स्टॉल प्रमुख  आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्टॉल में जिंदल समूह का परिचय, कंपनी की  उत्पादन क्षमताओं, वर्तमान परियोजनाओं तथा भविष्य की विस्तार योजनाओं को  प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही ग्रीन स्टील, ग्रीन एनर्जी तथा कार्बन  फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में कंपनी की भावी योजनाओं और पहलों को भी  विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। जिंदल स्टील के विभिन्न उत्पादों का  प्रदर्शन भी स्टॉल पर किया गया है, जिसे आगंतुकों और उद्योग जगत के  प्रतिनिधियों द्वारा सराहा जा रहा है। सेल्स एवं मार्केटिंग टीम के सदस्य  आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं एवं उपयोग से संबंधित जानकारी दे रहे  हैं।

जिंदल स्टील के बिजनेस हेड-रायपुर श्री निलेश शाह एवं  हेड-कॉरपोरेट अफेयर्स, रायपुर श्री एस.एस. बजाज ने स्टॉल पर उपमुख्यमंत्री,  उद्योग मंत्री सहित अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और कंपनी की  वर्तमान परियोजनाओं एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। अतिथियों ने  राज्य के औद्योगिक एवं समग्र विकास में जिंदल स्टील के योगदान की सराहना  की। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनी क्षेत्र के बाहर जिंदल स्टील लिमिटेड के  मशीनरी डिवीजन, रायपुर के उत्पादों का एक अलग स्टॉल भी लगाया गया है, जो  आगंतुकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पैनल एवं तकनीकी सत्र में जिंदल स्टील की सक्रिय भागीदारी
समिट  के दौरान जिंदल स्टील लिमिटेड की ओर से श्री नवीन अहलावत ने वर्ष 2047 के  लिए इस्पात उद्योग जगत की तैयारी विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में सहभागिता  की। उन्होंने जिंदल स्टील द्वारा अपनाई जा रही उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों,  हरित एवं सतत विनिर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों तथा समूह की  भविष्य की योजनाओं को साझा किया। उन्होंने भारत के इस्पात क्षेत्र को  भविष्य के लिए तैयार करने में तकनीक, नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय  स्थिरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार रखे। उनके विचारों और कंपनी की  भावी योजनाओं ने उपस्थित उद्योग प्रतिनिधियों एवं श्रोताओं को प्रेरित  किया।
वहीं, श्री निलेश शाह, बिजनेस हेडरायपुर, जिंदल स्टील लिमिटेड  ने ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग इन हेवी इक्विपमेंट विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र  में भाग लिया। उन्होंने हरित विनिर्माण, ऊर्जा दक्षता एवं पर्यावरण-अनुकूल  औद्योगिक प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं तथा जिंदल स्टील के  अनुभवों को साझा किया। उनके संबोधन को सत्र में उपस्थित उद्योग विशेषज्ञों  एवं प्रतिभागियों ने सराहा और इसकी प्रशंसा की।

</description><guid>7375</guid><pubDate>13-Aug-2026 12:18:26 am</pubDate></item></channel></rss>