<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>आलेख - Chhattisgarh Aaj Feed</title><link>https://chhattisgarhaaj.com</link><description>Chhattisgarh Aaj Feed Description</description><item><title>पंखों को मिली रफ्तार: सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों की शिक्षा की राह हुई आसान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=834</link><description>- दूरस्थ गांवों की छात्राओं के लिए साइकिल बनी स्कूल तक पहुंच का साधन, समय की बचत के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
-सेदम की छात्राओं ने कहाअब पैदल नहीं तय करनी पड़ती लंबी दूरी, समय पर पहुंच रहे स्कूल और पढ़ाई के लिए भी मिल रहा अतिरिक्त समय
रायपुर / गांव की पगडंडियों और लंबी सड़कों से होकर स्कूल पहुंचने वाली बेटियों के लिए एक साइकिल केवल दो पहियों का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा तक पहुंचने की राह आसान करने वाली साथी बन सकती है। घर से विद्यालय की दूरी, आने-जाने में लगने वाला समय, बदलता मौसम और परिवहन साधनों की कमी जैसी चुनौतियों के बीच सरस्वती साइकिल योजना दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में मदद कर रही है।सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित शासकीय हाई स्कूल सेदम की छात्राएं रजनी एक्का, गायत्री यादव, सोनिया, रजनी साहू और नीतू यादव भी इस बदलाव को अपने जीवन में महसूस कर रही हैं। कभी स्कूल पहुंचने के लिए पैदल लंबी दूरी तय करने वाली इन छात्राओं के लिए साइकिल मिलने के बाद आवागमन आसान हुआ है। समय की बचत हो रही है और किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भरता भी कम हुई है।
छत्तीसगढ़ शासन की सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से कक्षा 9वीं में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिल प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा देने के साथ बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।
योजना का महत्व विशेष रूप से उन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में अधिक दिखाई देता है, जहां घर और विद्यालय के बीच दूरी अधिक है तथा सार्वजनिक परिवहन के साधन सीमित हैं। ऐसी परिस्थितियों में प्रतिदिन पैदल स्कूल आना-जाना छात्राओं के लिए समय और श्रम दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। साइकिल मिलने से यही दूरी कम समय में तय की जा सकती है।
शासकीय हाई स्कूल सेदम की छात्राएं बताती हैं कि साइकिल मिलने से पहले उन्हें स्कूल आने-जाने के लिए पैदल चलना पड़ता था। इससे काफी समय लगता था और थकान भी होती थी। गर्मी, बारिश और ठंड के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती थी।अब साइकिल से वे कम समय में विद्यालय पहुंच रही हैं। समय पर स्कूल पहुंचने के साथ घर लौटने में भी कम समय लग रहा है। छात्राओं का कहना है कि आने-जाने में बचने वाला समय अब पढ़ाई और घर के अन्य जरूरी कार्यों में उपयोग हो रहा है।
रजनी एक्का, गायत्री यादव, सोनिया, रजनी साहू और नीतू यादव का अनुभव बताता है कि आवागमन की एक सुविधा छात्राओं की रोजमर्रा की पढ़ाई को कितना आसान बना सकती है। अब उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हुई है।
छात्राओं ने बताया कि साइकिल मिलने के बाद विद्यालय तक आने-जाने में काफी सुविधा हुई है। पहले पैदल चलने में अधिक समय और श्रम लगता था। अब कम समय में स्कूल पहुंचने से नियमित पढ़ाई में मदद मिल रही है।उनका कहना है कि साइकिल से आने-जाने में समय की बचत होने के कारण पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिलता है। घर के जरूरी काम और पढ़ाई के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी आसानी हुई है। इस सुविधा से विद्यालय जाने का उत्साह भी बढ़ा है और वे आगे मन लगाकर पढ़ाई करते हुए उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं।
सरस्वती साइकिल योजना का प्रभाव केवल स्कूल तक की दूरी कम करने तक सीमित नहीं है। स्वयं साइकिल चलाकर विद्यालय जाना छात्राओं को अपने दैनिक आवागमन में अधिक आत्मनिर्भर भी बना रहा है। पहले जहां कई छात्राओं को पैदल चलना पड़ता था या किसी परिजन पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे स्वयं स्कूल पहुंच रही हैं।
छात्राओं के लिए यह अनुभव आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी है। अपनी राह स्वयं तय कर स्कूल तक पहुंचना उन्हें आगे बढ़ने और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
किसी भी समाज की प्रगति में बालिका शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालय तक पहुंच जितनी आसान होगी, छात्राओं के लिए नियमित रूप से शिक्षा से जुड़े रहना उतना ही सुविधाजनक होगा। दूरस्थ क्षेत्रों में साइकिल जैसी व्यक्तिगत आवागमन सुविधा इसी आवश्यकता को पूरा करने में मदद करती है।
स्कूल की दूरी और परिवहन की परेशानी कम होने से छात्राओं को अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलता है। माध्यमिक शिक्षा से लगातार जुड़ी रहने वाली छात्राएं आगे उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।
एक बेटी की शिक्षा का प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत भविष्य तक सीमित नहीं रहता। शिक्षित बालिका आगे चलकर परिवार में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और आर्थिक निर्णयों के प्रति अधिक जागरूक भूमिका निभा सकती है। इस तरह बेटियों की शिक्षा में किया गया सहयोग आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की नींव भी तैयार करता है।
शिक्षा बालिकाओं को अपने अधिकारों और अवसरों के प्रति जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पढ़ाई से लगातार जुड़ाव उन्हें अपने भविष्य के लक्ष्य निर्धारित करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है।
बालिकाओं का लगातार विद्यालय और शिक्षा से जुड़े रहना उनके सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा उन्हें अपने अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और जीवन में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देती है। इससे कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जब बेटियां अपनी पढ़ाई जारी रखती हैं और उच्च शिक्षा तथा भविष्य के लक्ष्य तय करती हैं, तब शिक्षा उनके जीवन में प्राथमिकता के रूप में मजबूत होती है। इसलिए विद्यालय तक उनकी सुगम पहुंच केवल आवागमन का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भर भविष्य से भी जुड़ी है।
शासकीय हाई स्कूल सेदम की छात्राओं के लिए सरस्वती साइकिल योजना से मिली साइकिल स्कूल आने-जाने का साधन होने के साथ समय की बचत, आत्मविश्वास और आगे पढ़ने की आकांक्षा से भी जुड़ गई है। छात्राओं का कहना है कि स्कूल तक पहुंच आसान होने से पढ़ाई जारी रखने का उत्साह बढ़ा है और वे उच्च शिक्षा हासिल कर अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं।
सेवा संकल्प अभियान के बीच इन छात्राओं का अनुभव बताता है कि शिक्षा की राह में आने वाली छोटी-छोटी व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने वाली पहल किस तरह बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर दे सकती है। आज साइकिल के पैडल के साथ स्कूल की ओर बढ़ते उनके कदम शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर भी बढ़ रहे हैं।</description><guid>834</guid><pubDate>05-Oct-2026 11:01:07 pm</pubDate></item><item><title>हमारे पितर और हम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=833</link><description>स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
बचपन की मीठी गोलियों के साथ जुड़ी हैं दादी - नानी की यादें ....उनका सुनहरा बटुआ हम बच्चों के आकर्षण का विशेष केंद्र होता था क्योंकि मम्मी पापा के मना करने के बाद मीठी गोली , लेमनचूस , बरफ का गोला इन सब के लिए पैसे उसी से मिलते थे । मम्मी की सख्ती पर वो चुपके से हमारी फरमाइशें पूरी कर देती थीं । बड़ा प्यारा था उनका बटुआ...सुनहरे कपड़े का बना हुआ जिसकी डोरी में दो फुँदने लटकते रहते । उनके पोपले मुँह की झुर्रियों की तरह चुन्नटें बन जाती जब वो डोरियों को खींचती । उस बटुए से हमारे काम की और भी चीजें निकलती रहती... जड़ी बूटी , इलायची दाना , और उनका अतीत । हमारे खाँसने पर हर्रे के टुकड़े जिन्हें आग में भुना गया होता मिलता , वह कसैला लगता पर उनको मना भी नहीं करते बनता क्योंकि हमारा सुरक्षा कवच थी दादी...माँ या पिताजी की डाँट ,मार से बचने के लिए हम उन्हीं की गोद में शरण लेते । माँ उनका लिहाज भी करतीं तो सीधे कुछ बोल नहीं पाती। हाँ , पापा के द्वारा बच्चों को बिगाड़ने के लिए सन्देशा जरूर भिजवाती पर दादी उनके बचपन की कोई बात छेड़ कर...कि तू भी तो ऐसा था कहते उनकी पोल खोलने लगती तो पापा जी चलते बनते । दादी तुम कितनी अच्छी हो कहकर हम उनकी पीठ पर चढ़ जाते ...कितनी खूबसूरत मुस्कान आ जाती थी उस झुर्रीदार चेहरे में...उन झुर्रियों में मानो उनके अनुभवों की कहानियाँ थीं । रिश्तों को बाँधे रखने की अपूर्व आभा थी ...परिवार के प्रति लगाव था... अपने बच्चों के लिए दुआएँ थीं । नानी की बातें उनके अनुभवों की पोटली से निकले अनमोल नगीने होते थे। उनमें जीवन की सीख होती थी, अपनी संस्कृति का सम्मान करने की मनुहार होती थी। उनके हानों में जीवन-सार छुपा होता था जो तब समझना मुश्किल होता था पर अब उनकी कीमत समझ आई है। उनके किस्सों में सही-गलत का ज्ञान भरा होता था। जो संतुष्टि मिल-बाँटकर खाने, सरलता , स्नेहिल व्यवहार, सादगी में थी वह आधुनिक सुख-सुविधाओं से भरे आज के युग में नहीं है क्योंकि हमने बाहरी सुख को सब कुछ माना । हमारे पुरखों के आंतरिक सुख के कारणों को समझते और उसके अनुरूप खान-पान, रहन-सहन, जीवन-शैली रखते तो आज अवसादों में नहीं पड़ते। तरह-तरह के रोगों का सामना नहीं करना पड़ता। हमारे बुजुर्ग किसी वैज्ञानिक से कम नहीं थे जो यह जानते थे कि किस मौसम में क्या लाभ व हानि करता है। आज जिन बातों को हम व्हाट्सएप में पढ़-पढ़ कर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं , वह उनकी सहज जीवन शैली थी। यह सब वे कई वर्षों से आजमा रहे हैं।
   बुजुर्ग हमारे आदरणीय हैं...हम पर खुशियाँ लुटाने वाले , सिर्फ और सिर्फ देने वाले पूर्वज यदि आप हमसे बिछड़ कर पुनः धरती पर आए हैं तो आपका स्वागत है दिल से । आपकी दुआओं के उजाले में जी रहे हैं हम और आपकी स्मृतियों की मिठास हमारे जीवन की अनमोल धरोहर है । सादर प्रणाम</description><guid>833</guid><pubDate>04-Oct-2026 2:24:18 pm</pubDate></item><item><title> सेवा संकल्प अभियान 2026 : बस पहुंची तो गांवों में लौटी नई उम्मीद</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=832</link><description>-मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से दूरस्थ अंचलों में आसान हुई जिंदगी की राह, 850 गांव पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़े
-बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर दौड़ रहीं 107 बसें, शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर हाट-बाजार और प्रशासनिक मुख्यालय तक पहुंच हुई आसान
 विशेष लेख श्री सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक
 श्रीमती नूतन सिदार, सहायक संचालक
रायपुर। गांव की सड़क पर दूर से आती बस और उसके हॉर्न की आवाज...। बच्चे उत्साह से हाथ हिलाते हैं, ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जिन गांवों के लोगों के लिए कभी बस का आना ही बड़ी बात थी, वहां आज नियमित बस सेवा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही है। यह बदलाव केवल आवागमन आसान होने का नहीं है, बल्कि दूरस्थ गांवों के शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और प्रशासनिक केंद्रों से जुड़ने का है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने पहले वर्ष में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 04 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया। आज 13 जिलों के 106 चयनित मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं और 850 ऐसे नए गांवों तक पहली बार नियमित यात्री बस सेवा पहुंची है, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
योजना के अंतर्गत संचालित 107 बसों ने एक वर्ष में लगभग 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। ये बसें प्रतिदिन करीब 17,500 किलोमीटर का सफर कर रही हैं। इन आंकड़ों के पीछे उन ग्रामीण परिवारों की बदलती जिंदगी है, जिन्हें कभी हाट-बाजार, अस्पताल, स्कूल, तहसील, ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता था अथवा निजी और वैकल्पिक वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था।
नियमित बस सेवा मिलने से अब विद्यार्थी समय पर विद्यालय पहुंच पा रहे हैं। ग्रामीणों के लिए अस्पताल और बाजार तक जाना आसान हुआ है। शासकीय कार्यों के लिए ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भी सुविधा हुई है। इस तरह बस गांव और शहर के बीच केवल दूरी ही कम नहीं कर रही, बल्कि आवश्यक सेवाओं और अवसरों तक पहुंच को भी आसान बना रही है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का असर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। जिले में 16 चयनित मार्गों पर 16 बसों का संचालन किया जा रहा है। ऐसे अनेक गांव अब नियमित सार्वजनिक परिवहन से जुड़ रहे हैं, जहां लोगों को पहले आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज इस बदलाव को अपने रोजमर्रा के जीवन में महसूस कर रही हैं। पहले उन्हें पास के गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने के लिए किसी से लिफ्ट मांगनी पड़ती थी। कई बार निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता था और वाहन नहीं मिलने पर पैदल भी जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह सफर और कठिन हो जाता था।अब ग्रामीण बस सेवा शुरू होने के बाद उनकी राह आसान हुई है। श्रीमती सुनीता कहती हैं, यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है। उनकी यह छोटी-सी बात बताती है कि दूरस्थ अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता कामकाजी महिलाओं के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।
ग्राम मरंगी निवासी श्री दशरथ भगत भी उन ग्रामीणों में शामिल हैं, जिनकी दिनचर्या बस सेवा शुरू होने से आसान हुई है। वे बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी। आवश्यक कार्य से बाहर जाने के लिए कई बार पैदल सफर करना पड़ता था। अब बस शुरू होने से बगीचा तक आना-जाना सहज हो गया है।श्री भगत कहते हैं, अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।
इसी तरह यात्री श्री मंगलराम बताते हैं कि पहले उन्हें छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाना पड़ता था। अब बस मिलने से सफर की परेशानी काफी कम हुई है। वे कहते हैं, अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।ग्रामीणों के ये अनुभव बताते हैं कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का महत्व केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की सुविधा में नहीं है। यह लोगों का समय बचा रही है और उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए बेहतर परिवहन विकल्प उपलब्ध करा रही है।
योजना की खासियत यह भी है कि बस सेवा का विस्तार प्रदेश के अत्यंत दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक किया गया है। सुकमा एवं बीजापुर जैसे अंदरूनी क्षेत्रों और नियद नेल्लानार के गांवों में भी ग्रामीण बसों का संचालन किया जा रहा है। सुकमा के गोलापल्ली, भेज्जी, किस्ताराम, मिनपा, चिंतलनार, बुरकापाल, चिंतागुफा, कोंटा, पुवर्ती और जगरगुंडा तथा बीजापुर के आवापल्ली, बासागुड़ा, सारकेगुड़ा, पामेड़, भैरमगढ़ और नेलासनार सहित अनेक दुर्गम क्षेत्रों को नियमित सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की पहल की गई है।
इन क्षेत्रों में बस की पहुंच का अर्थ ग्रामीणों के लिए हाट-बाजार और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच का एक नियमित साधन उपलब्ध होना है। लंबे समय तक सीमित परिवहन सुविधाओं वाले इन अंचलों में नियमित बसों का संचालन गांवों को ब्लॉक एवं जिला मुख्यालयों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
दूरस्थ और कम यात्री संख्या वाले ग्रामीण मार्गों पर नियमित बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता भी दे रही है। योजना में प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर और तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता का प्रावधान है। यह सहायता तीन वर्ष तक दी जाएगी। साथ ही अधिकतम तीन वर्ष तक मासिक मोटरयान कर में छूट का प्रावधान भी किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम यात्री संख्या के कारण दूरस्थ ग्रामीण मार्गों पर बस सेवा प्रभावित न हो और लोगों को नियमित एवं निर्बाध सार्वजनिक परिवहन मिलता रहे।
योजना को तकनीक से भी जोड़ा गया है। बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी के लिए पृथक डडळठल् पोर्टल विकसित किया गया है। टस्ज्क् (ळच्ै) के जरिए परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से बसों की निगरानी की जा रही है। बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता का भुगतान भी ऑनलाइन टस्ज्क् रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है।
यात्रियों की सुविधा के लिए बस संगवारी ऐप के माध्यम से बसों की समय-सारिणी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को केवल विस्तारित ही नहीं, बल्कि तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के एक वर्ष की उपलब्धि को केवल बसों और किलोमीटर के आंकड़ों में नहीं देखा जा सकता। इसकी वास्तविक तस्वीर उस विद्यार्थी की सुविधा में दिखाई देती है, जो अब समय पर स्कूल पहुंच सकता है; उस महिला के अनुभव में दिखाई देती है, जिसे कार्यस्थल तक जाने के लिए अब लिफ्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता; और उस ग्रामीण की मुस्कान में दिखाई देती है, जो हाट-बाजार या जरूरी काम पूरा कर उसी दिन आसानी से अपने गांव लौट सकता है।
850 गांवों का पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़ना ग्रामीण कनेक्टिविटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही ये बसें गांवों और शहरों के बीच की भौगोलिक दूरी के साथ सुविधाओं और अवसरों की दूरी भी कम कर रही हैं।
सेवा मेरा योगदान की भावना के साथ मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना दूरस्थ गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़कर सेवा संकल्प को जमीन पर आकार दे रही है। गांव की सड़क पर दौड़ती हर बस के साथ आज एक नई सुविधा ही नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, आसान आवागमन और आगे बढ़ने की नई उम्मीद भी गांव तक पहुंच रही है।</description><guid>832</guid><pubDate>03-Oct-2026 8:57:46 am</pubDate></item><item><title>सेवा संकल्प अभियान  : जनसेवा से जनकल्याण तक-सुशासन के संकल्प से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=831</link><description>-सुरक्षित आवास, सुलभ सेवाएं, सशक्त महिलाएं, स्वस्थ बचपन, समृद्ध किसान और आत्मनिर्भर पशुपालक
-जनकल्याणकारी योजनाएं बन रहीं जीवन में बदलाव का माध्यम, अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने पर जोर
 विशेष लेख : श्री सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक जनसंपर्क,श्री विशाल कुमार जायसवाल, सहायक सूचना अधिकारी
रायपुर । आमजन का जीवन तब आसान होता है, जब शासकीय योजनाएं कागजों और कार्यालयों से निकलकर उनके जीवन का हिस्सा बनती हैं। किसी जरूरतमंद परिवार को पक्की छत मिलती है, किसी महिला के हाथ में अपनी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल आता है, किसी किसान के खेत तक सिंचाई पहुंचती है, किसी कुपोषित बच्चे की सेहत सुधरती है और किसी नागरिक की वर्षों से अटकी समस्या का समाधान होता है- तब जनसेवा का वास्तविक अर्थ सामने आता है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं और नागरिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई अनेक कहानियां बताती हैं कि शासन की किसी योजना की सार्थकता केवल उसके प्रावधानों में नहीं, बल्कि उससे नागरिक के जीवन में आए बदलाव में होती है।
विकास का अर्थ केवल बड़ी अधोसंरचनाओं का निर्माण नहीं है। विकास तब व्यापक और समावेशी बनता है, जब गांव, गरीब, किसान, महिला, बच्चा, युवा और दूरस्थ अंचल में रहने वाला परिवार उसका सहभागी बनता है। नागरिक को यह अनुभव हो कि उसकी जरूरत को समझा जा रहा है, उसकी समस्या सुनी जा रही है और उसके समाधान के लिए व्यवस्था उसके साथ खड़ी है- यही सुशासन की बुनियाद है।सेवा संकल्प अभियान के दौरान सरगुजा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सामने आई बदलाव की कहानियां इसी सोच को अभिव्यक्त करती हैं। सुरक्षित आवास से लेकर डिजिटल सेवाओं तक, महिला सशक्तिकरण से लेकर बच्चों के सुपोषण तक और खेती से लेकर पशुपालन आधारित आजीविका तक जनकल्याण की अलग-अलग धाराएं मिलकर बेहतर जीवन की नई तस्वीर बना रही हैं।
कच्ची दीवारों से पक्के सपनों तक-आवास ने दिया सुरक्षा और सम्मान
अपना पक्का घर किसी परिवार के लिए केवल ईंट, सीमेंट और छत का निर्माण नहीं होता। यह सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के प्रति स्थायित्व का भरोसा होता है। विशेष रूप से दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पक्का आवास जीवन की कई कठिनाइयों से एक साथ राहत लेकर आता है।सरगुजा के पहाड़ी कोरवा परिवारों तक पीएम जनमन के माध्यम से आवास की सुविधा पहुंचने से इसी बदलाव की तस्वीर सामने आई है। मोहन राम जैसे परिवार लंबे समय तक कच्चे मकान में बारिश के दौरान टपकती छत और परिवार की सुरक्षा की चिंता के बीच जीवन बिताते रहे। पक्का आवास मिलने के बाद उनके जीवन में सुरक्षा का नया भरोसा जुड़ा है।
मोटू राम के लिए पक्का घर बार-बार होने वाली लिपाई-पुताई और मरम्मत की परेशानी से राहत लेकर आया। उदयपुर क्षेत्र के हुडकू राम, बिरझु, रतन साय और छन्दू जैसे परिवारों के गृह प्रवेश की खुशी बताती है कि आवास किसी योजना की केवल भौतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव है।पक्की छत बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण, महिलाओं को सुरक्षित स्थान और पूरे परिवार को मौसम की कठिन परिस्थितियों से बचाव देती है। इस तरह एक आवास परिवार के जीवन में सुरक्षा के साथ सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी जोड़ता है।
सेवा के लिए कार्यालय नहीं, नागरिक के करीब पहुंच रहा शासन
सुशासन की दिशा में तकनीक शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। सेवा सेतु के जरिए विभिन्न शासकीय सेवाओं को एक डिजिटल मंच पर लाकर नागरिकों तक उनकी पहुंच आसान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।ऑनलाइन आवेदन, आवेदन की स्थिति जानने की सुविधा, डिजिटल प्रमाण पत्र, क्यूआर आधारित सत्यापन और डिजिटल माध्यम से सूचना जैसी व्यवस्थाएं नागरिकों के लिए सेवा प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में सहायक हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इन सेवाओं की पहुंच बढ़ने से लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बार-बार कार्यालयों तक जाने की आवश्यकता कम हो रही है।अम्बिकापुर की डॉली गंधर का अनुभव इसकी उपयोगिता को सामने लाता है। आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि के कारण उनका बैंक खाता खुलवाने और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। सेवा सेतु के माध्यम से समस्या का निराकरण होने के बाद उनके लिए आगे की प्रक्रिया आसान हुई।इसी तरह सीएम हेल्पलाइन 1076 नागरिकों को अपनी समस्या शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम दे रही है। सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह के आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार से जुड़ी समस्या का समाधान होने से उनकी उच्च शिक्षा से संबंधित आगे की प्रक्रिया सुगम हुई।इन उदाहरणों में समस्या भले ही किसी एक दस्तावेज से जुड़ी हो, लेकिन उसका समाधान नागरिक के लिए शिक्षा, बैंकिंग और अन्य अवसरों का रास्ता खोल सकता है। यही डिजिटल सुशासन की सार्थकता है- तकनीक नागरिक के लिए प्रक्रिया को कठिन बनाने के बजाय समाधान तक पहुंच आसान करे।
महतारी वंदन से महिला के हाथ में आर्थिक संबल
महिला सशक्तिकरण परिवार और समाज के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों में सहयोग का माध्यम बन रही है।बच्चों की शैक्षणिक सामग्री हो, पोषण की जरूरत हो, घर की आवश्यक वस्तुएं हों अथवा छोटे स्वरोजगार के लिए जरूरी सामग्री- महिलाएं अपनी परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुसार इस राशि का उपयोग कर रही हैं।
सरगुजा की राखी की कहानी इसका संवेदनशील उदाहरण है। पति के निधन के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहीं राखी खेती के साथ सिलाई का काम भी करती हैं। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता का उपयोग वे बच्चों के पोषण और सिलाई सामग्री के लिए करती हैं।यहां आर्थिक सहायता का महत्व केवल उसकी राशि में नहीं, बल्कि उस भरोसे में भी है जो महिला को परिवार की जरूरतों के लिए स्वयं निर्णय लेने का अवसर देता है। आर्थिक निर्णय की यही छोटी-छोटी स्वतंत्रताएं महिला के आत्मविश्वास को मजबूत करती हैं।
बिहान से आत्मनिर्भरता, मेहनत से लखपति दीदी की पहचान
आर्थिक सहायता से आगे बढ़कर महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने में स्व-सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के माध्यम से महिलाएं बचत, ऋण, प्रशिक्षण और विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।अम्बिकापुर की कल्पना सिंह ने समूह के माध्यम से ऋण लेकर खीरे की खेती शुरू की और इसके साथ बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित विभिन्न फसलों के उत्पादन को आगे बढ़ाया। इस सफर ने केवल उनकी आय के अवसर नहीं बढ़ाए, बल्कि बैंक, बाजार और कृषि संबंधी गतिविधियों को स्वयं संभालने का आत्मविश्वास भी दिया।उदयपुर की मति बाई ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया। कभी मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर परिवार के लिए आज मुर्गी पालन आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
सरगुजा में छेरी बैंक जैसे नवाचार भी महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़ रहे हैं। ऐसी पहलों का मूल उद्देश्य महिलाओं को संसाधन देकर उन्हें आय अर्जित करने और आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।लखपति दीदी केवल आय का आंकड़ा नहीं, बल्कि निर्भरता से आत्मनिर्भरता और संकोच से आत्मविश्वास तक पहुंचने की यात्रा का प्रतीक बन रही है।
कुपोषण से सुपोषण तक-बच्चों को लौट रहा स्वस्थ बचपन
जनकल्याण का सबसे संवेदनशील चेहरा बच्चों के स्वास्थ्य में दिखाई देता है। शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास के माध्यम से उन्हें स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज जैसे बच्चों के उपचार के दौरान दर्ज वजन में वृद्धि इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करती है। बच्चे का बढ़ता वजन केवल तराजू पर बदलती संख्या नहीं, बल्कि बेहतर पोषण और उपचार के प्रति उसकी प्रतिक्रिया का महत्वपूर्ण संकेत भी है।कुपोषण से लड़ाई अस्पताल के बिस्तर तक सीमित नहीं है। बच्चे के उपचार के साथ माता-पिता को उचित पोषण, स्वच्छता, स्तनपान, पूरक आहार और नियमित वृद्धि निगरानी की जानकारी देना भी आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और परिवार का समन्वय इस व्यवस्था को मजबूत बनाता है।स्वस्थ बच्चा खेल सकता है, सीख सकता है, विद्यालय जा सकता है और अपने सपनों को आकार दे सकता है। इसलिए किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालने का प्रयास केवल उसके वर्तमान स्वास्थ्य में सुधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य में निवेश भी है।
वैज्ञानिक पशुपालन से मजबूत हो रही ग्रामीण आजीविका
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। पारंपरिक पशुपालन के साथ वैज्ञानिक तकनीक, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य और विभागीय मार्गदर्शन जुड़ने से आय बढ़ाने की नई संभावनाएं बनती हैं।सीतापुर विकासखंड के दयासागर ने पशुपालन विभाग की सलाह से कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार को अपनाया। बेहतर नस्ल, पशु पोषण और देखभाल पर ध्यान देने से उनके यहां दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई और पशुपालन से नियमित आय का आधार मजबूत हुआ।
लुण्ड्रा के जयनाथ राम ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत मिले सहयोग से बकरी पालन को आगे बढ़ाया और इसे आजीविका का माध्यम बनाया। ऐसे प्रयास बताते हैं कि शासकीय सहायता के साथ हितग्राही की मेहनत, तकनीकी मार्गदर्शन और बेहतर प्रबंधन जुड़ जाए तो पशुपालन ग्रामीण परिवार के लिए स्थायी आय का मजबूत आधार बन सकता है।
अन्नदाता के खेत में सिंचाई, समृद्धि की नई संभावनाएं
ग्रामीण विकास की तस्वीर किसान और खेती के बिना पूरी नहीं हो सकती। सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और कृषि विविधीकरण खेती को अधिक टिकाऊ तथा लाभकारी बनाने के महत्वपूर्ण आधार हैं।सरगुजा में सौर सुजला योजना के माध्यम से किसानों तक सौर सिंचाई पंप की सुविधा पहुंचने से सिंचाई के साधनों का विस्तार हुआ है। इससे किसानों के लिए एक से अधिक फसल लेने और खेती को विविध गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं।लबेद सिंह जैसे किसान सौर सिंचाई की सुविधा के आधार पर धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियां, फलदार पौधे और फूलों की खेती जैसी गतिविधियों को अपना रहे हैं। खेती के साथ मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ना आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करने का रास्ता भी खोलता है।मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत की वास्तविक पोषण आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जल संरक्षण संरचनाओं से सिंचाई क्षमता बढ़ाने और डबरी के माध्यम से खेती के साथ मछली पालन को जोड़ने जैसे प्रयास कृषि को अधिक वैज्ञानिक, विविध और आयोन्मुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
योजनाओं से आगे, जीवन में बदलाव ही सुशासन की पहचान
आवास, डिजिटल सेवा, महिला सशक्तिकरण, आजीविका, पोषण, पशुपालन और कृषिकृपहली नजर में ये सभी अलग-अलग क्षेत्र दिखाई देते हैं, लेकिन इनके केंद्र में एक ही उद्देश्य हैकृनागरिक के जीवन को बेहतर बनाना।किसी परिवार के लिए सुशासन पक्के घर की सुरक्षित छत है। किसी छात्रा के लिए समय पर सुधरा हुआ दस्तावेज है। किसी मां के लिए अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करने का आर्थिक संबल है। किसी स्व-सहायता समूह की महिला के लिए अपनी मेहनत से अर्जित आय और आत्मसम्मान है। किसी कुपोषित बच्चे के परिवार के लिए उसकी लौटती सेहत है। किसी पशुपालक के लिए बढ़ता दुग्ध उत्पादन और किसी किसान के लिए खेत तक पहुंचा सिंचाई का पानी है। यही वे छोटे-बड़े बदलाव हैं, जिनसे जनकल्याण की व्यापक तस्वीर बनती है।
सेवा से विश्वास, सुशासन से जनकल्याण
सेवा संकल्प अभियान में सामने आ रही ये कहानियां बताती हैं कि शासन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना नागरिक के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव है। जब सेवा समय पर मिले, प्रक्रिया सरल हो, जरूरतमंद को योजना का लाभ मिले और उपलब्ध संसाधन व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर दें, तभी जनसेवा अपने वास्तविक उद्देश्य तक पहुंचती है। एक ओर तकनीक के माध्यम से शासन नागरिक के करीब पहुंच रहा है, तो दूसरी ओर योजनाओं के जरिए आवास, आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और आजीविका की जरूरतों को संबोधित किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में हितग्राही केवल सहायता पाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने बेहतर भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन रहा है।
</description><guid>831</guid><pubDate>03-Oct-2026 8:43:23 am</pubDate></item><item><title>  मुन्नी का हौसला, एम हेल्प वॉटर की धार, महालक्ष्मी समूह से रोजगार की बहार</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=830</link><description>-पीएमईजीपी से शुरू किया पैक्ड पेयजल प्लांट, खुद बनीं आत्मनिर्भर और 10 लोगों को दिया रोजगार

विशेष लेख- एल.डी. मानिकपुरी सहायक जनसंपर्क अधिकारी
कोरिया / सेवा संकल्प अभियान केवल सेवा कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी है। इसी भावना को ग्राम डुमरिया की श्रीमती मुन्नी बाई राजवाड़े अपने उद्यम के माध्यम से साकार कर रही हैं। कभी खेतों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके परिवार चलाने वाली मुन्नी बाई आज सरकारी योजनाओं के सहयोग से सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं। बिहान योजना से स्वयं सहायता समूह का संबल मिला, प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ने उनके सपने को कारोबार में बदलने का आर्थिक आधार दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर हैं और करीब 10 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।
मुन्नी बाई बिहान योजना के अंतर्गत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण मिला। रायपुर में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पीएमईजीपी की जानकारी मिली। योजना से प्रभावित होकर उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र पहुंचकर विस्तृत जानकारी ली और अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पेयजल प्लांट स्थापित करने का फैसला किया। कई महीनों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण एवं उपलब्ध सहायता से शेड, बाउंड्री और बोरवेल सहित आवश्यक व्यवस्था तैयार की गई। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने एम हेल्प वॉटर पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया।
मुन्नी बाई का व्यवसाय अब केवल उनके परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं है। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तथा अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है और कर्मचारियों को 6 से 9 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच से लेकर बोतल भरने और पैकेजिंग तक के कार्य के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार और नए कौशल का अवसर मिला है।
मुन्नी बाई के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है। बैकुण्ठपुर के साथ मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में एम हेल्प वॉटर की आपूर्ति की जा रही है।महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिली वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के अभिसरण से पीएमईजीपी का सहयोग उनके उद्यम की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
मुन्नी बाई प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाओं ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। सरकारी सहयोग और मार्गदर्शन से आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और दूसरों को भी रोजगार दे पा रही हैं।मुन्नी बाई की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जब जनभागीदारी, संकल्प और मेहनत से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव एक परिवार से आगे बढ़कर पूरे समाज तक पहुंचता है। एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहभागी बनती है।
सेवा के साथ जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता विकसित समाज के निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी। मुन्नी बाई इसी संकल्प की एक प्रेरक तस्वीर हैं।</description><guid>830</guid><pubDate>30-Sep-2026 8:55:14 pm</pubDate></item><item><title>मेरा और तुम्हारा मन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=829</link><description>स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
फोन-9424132359
मौन अधर की बातें पढ़ता, सुन लेता है क्रंदन।
प्रीति-डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
दीप-ज्योति सम अपना नाता, दूर करें मिल अँधियारा।
मलय-गंध ज्यों घुले पवन में, पावन है साथ हमारा।
दरस-परस पाकर प्रियता की, तन-मन होता मधुबन।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
नैन देखते सपन सुहाने, आनंदित भावी पल के।
मेरे मन में उपजी पीड़ा , तेरी आँखों में छलके।
तृषित हृदय की शुष्क धरा पर, बरसा है सुख का सावन ।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
जाति-वर्ग की छोड़ केंचुली, नया जन्म हमने पाया।
कलुष-कपट की दुनिया छोड़ी, प्रेम-मार्ग को अपनाया।
अग्नि-परीक्षा जग की देकर, दमका मन जैसे कुंदन ।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
ओस-बूँद ठहरी पातों पर, क्षणभंगुर जीवन पाए।
ठहर सके पा कड़ी चुनौती, बस प्रेम वही कहलाए।
घिस-घिस पाहन शिव हो जाए, माँजें यूँ अपना जीवन।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
</description><guid>829</guid><pubDate>27-Sep-2026 6:13:01 pm</pubDate></item><item><title>मेरा और तुम्हारा मन</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=827</link><description>स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
फोन-9424132359
मौन अधर की बातें पढ़ता, सुन लेता है क्रंदन।
प्रीति-डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
दीप-ज्योति सम अपना नाता, दूर करें मिल अँधियारा।
मलय-गंध ज्यों घुले पवन में, पावन है साथ हमारा।
दरस-परस पाकर प्रियता की, तन-मन होता मधुबन।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
नैन देखते सपन सुहाने, आनंदित भावी पल के।
मेरे मन में उपजी पीड़ा , तेरी आँखों में छलके।
तृषित हृदय की शुष्क धरा पर, बरसा है सुख का सावन ।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
जाति-वर्ग की छोड़ केंचुली, नया जन्म हमने पाया।
कलुष-कपट की दुनिया छोड़ी, प्रेम-मार्ग को अपनाया।
अग्नि-परीक्षा जग की देकर, दमका मन जैसे कुंदन ।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।
ओस-बूँद ठहरी पातों पर, क्षणभंगुर जीवन पाए।
ठहर सके पा कड़ी चुनौती, बस प्रेम वही कहलाए।
घिस-घिस पाहन शिव हो जाए, माँजें यूँ अपना जीवन।।
प्रीति -डोर में बँधा हुआ यह, मेरा और तुम्हारा मन।।</description><guid>827</guid><pubDate>27-Sep-2026 3:17:27 pm</pubDate></item><item><title>सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=826</link><description>श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े
मंत्री, महिला एवं बाल विकास, छत्तीसगढ़ शासन
रायपुर/ विकास का अर्थ केवल नई सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब एक महिला अपने भविष्य के निर्णय आत्मविश्वास से ले सके, एक मां को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता में सहयोग मिले और हर बच्चे को पोषण, शिक्षा तथा सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। सेवा संकल्प अभियान इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का अवसर है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ उन परिवारों तक भी पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
महिलाओं का आत्मविश्वास ही समाज की शक्ति
छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। आज वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से उद्यमिता तथा सामाजिक नेतृत्व में भी नई पहचान बना रही हैं। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार के खर्च से जुड़े निर्णय लेने में संबल दिया है। किसी ने इस राशि से बचत शुरू की है, तो किसी ने इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बनाया है।
स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल और उद्यम से जुड़ रही हैं। हमारा प्रयास है कि उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने के अवसर भी मिलें। जब महिला आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है।
आँगनवाड़ी से जुड़ें परिवार और समुदाय
एक स्वस्थ और सक्षम समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आँगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं को आवश्यक जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन केंद्रों की सफलता में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों के साथ परिवार और समुदाय का सहयोग भी जरूरी है। हमारी आँगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी इसी साझा दायित्व की भावना को व्यक्त करता है।
25 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला आँगन मिलन इस भागीदारी को और मजबूत करेगा। इस दौरान अभिभावकों और समुदाय के लोगों को आँगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ने, बच्चों के भोजन और स्वच्छता की व्यवस्था को समझने तथा पोषण पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। घर में बच्चों को क्या खिलाया जाए, भोजन में विविधता कैसे लाई जाए और स्वच्छता की अच्छी आदतें कैसे विकसित हों-इन विषयों पर संवाद पोषण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाएगा।
पोषण केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। बच्चे को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार मिले, उसकी वृद्धि पर ध्यान दिया जाए और परिवार उसकी देखभाल में सक्रिय रहे-यह हम सबकी जिम्मेदारी है। बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी का संदेश इसी सोच को हर घर तक ले जाने का आह्वान है।
सुरक्षित बचपन के लिए साझा संकल्प
हर बच्चे को भय और शोषण से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना केवल कानून के भरोसे नहीं किया जा सकता। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आँगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर सजग रहना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर समय से सहायता पहुंचाना सुरक्षित बचपन की दिशा में आवश्यक कदम हैं।
सेवा संकल्प अभियान हमें याद दिलाता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण संबंधी सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिलना-यही इस अभियान की सार्थक उपलब्धियां होंगी।
आइए, आँगन मिलन से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को निरंतर बनाए रखें। जब परिवार, समुदाय और शासन साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित, सुरक्षित बचपन के संकल्प से विकसित छत्तीसगढ़ का आधार मजबूत होगा।</description><guid>826</guid><pubDate>24-Sep-2026 3:10:17 pm</pubDate></item><item><title>संपत्ति विक्रय में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रचा नया कीर्तिमान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=825</link><description>-2 वर्ष 8 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय, वार्षिक औसत में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी
-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था को मिली नई गति
-1,609.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 से 1,584 संपत्तियों का हुआ निराकरण
विशेष लेख-श्री सुनील त्रिपाठी
 सहायक संचालक, जनसंपर्क

रायपुर । छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग
मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।
वित्त एवं आवास मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विभागीय संस्थाओं में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गृह निर्माण मंडल की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के विक्रय में तेजी के साथ-साथ बकाया मामलों के निराकरण और हितग्राहियों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण वन टाइम सेटलमेंट-2 (ओटीएस-2) योजना है।
ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण
मंडल द्वारा बकाया राशि के मामलों के समाधान और संपत्तियों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से लागू की गई वन टाइम सेटलमेंट-2 छूट योजना को भी व्यापक सफलता मिली है। योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2025 से वर्तमान दिनांक तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 238.67 करोड़ रुपये है।
ओटीएस-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के निराकरण का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के समाधान का अवसर मिला, वहीं मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।
हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव का आधार
गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में हुई वृद्धि के पीछे केवल अधिक संपत्तियों को बाजार में उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों की सुविधा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय में पारदर्शिता, सरलता और सुविधा पर जोर दिए जाने से नागरिकों के लिए संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक सहज हुई है।मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के साथ उनकी मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंडल की उपलब्ध संपत्तियों का उपयोग बढ़ा है और नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप संपत्ति प्राप्त करने के अवसर भी मिले हैं।
आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर
यदि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान अवधि के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो मंडल की उपलब्धि स्पष्ट रूप से सामने आती है। वर्ष 2019 से 2023 के दौरान जहां पांच वर्षों में 7,793 संपत्तियों का विक्रय हुआ, वहीं वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक केवल 32 माह में 7,650 संपत्तियां विक्रय की जा चुकी हैं। इसी तरह संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि भी पांच वर्षों के 1,362.21 करोड़ रुपये की तुलना में वर्तमान 32 माह में 1,609.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस तरह कम अवधि में लगभग पिछले पांच वर्षों के बराबर संपत्तियों का विक्रय और उससे भी अधिक मूल्य की संपत्तियों का विक्रय मंडल की कार्यप्रणाली में आए बदलाव को रेखांकित करता है।
आवास और अधोसंरचना विकास के लिए मजबूत आधार
गृह निर्माण मंडल का मूल उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आवासीय एवं अधोसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। संपत्ति विक्रय में आई तेजी से मंडल के संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने के साथ भविष्य की आवासीय एवं विकास परियोजनाओं के लिए भी बेहतर आधार तैयार हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और वित्त एवं आवास मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्ति प्रबंधन से विकास की गति की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। संपत्तियों का बेहतर उपयोग, लंबित मामलों का निराकरण, हितग्राहियों को सुविधाजनक सेवाएं और पारदर्शी विक्रय व्यवस्थाकृइन सभी प्रयासों का सम्मिलित प्रभाव मंडल के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है।
गृह निर्माण मंडल की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि जब सरकारी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन, सरल प्रक्रिया और हितग्राही-केंद्रित दृष्टिकोण एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों और विकास गतिविधियों को मिलता है। आने वाले समय में भी मंडल द्वारा पारदर्शी एवं सुविधाजनक व्यवस्था को और मजबूत करते हुए संपत्ति विक्रय को गति देने तथा प्रदेश में आवास एवं अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाई देने के प्रयास जारी रहेंगे।</description><guid>825</guid><pubDate>21-Sep-2026 9:14:10 pm</pubDate></item><item><title>छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नई भोर: हुनर, शोध और स्वावलंबन से गढ़ा जा रहा युवाओं का भविष्य</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=824</link><description>विशेष लेख- विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक
रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अब केवल किताबों और कक्षाओं के पारंपरिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर रही है।
 ​राज्य सरकार ने 'सेवा का संकल्प' निभाते हुए शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 'छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन' की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष बजटीय संबल दिया जा रहा है। पारदर्शी और सख्त मॉनिटरिंग तंत्र यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी सहायता का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे।
   ​शैक्षणिक गुणवत्ता को शीर्ष पर ले जाने के लिए 3,000 से अधिक छात्र संख्या वाले उत्कृष्ट कॉलेजों को चिन्हित कर 36 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अध्यापन व्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्राध्यापकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उद्योग जगत के व्यावहारिक विशेषज्ञों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में परिसरों से जोड़ा जा रहा है।
  ​'सेवा आपके द्वार' की भावना को चरितार्थ करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी और दूरस्थ वनांचल अंचलों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। अब बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उनके अपने अंचल में ही उपलब्ध हो रही है। चार वर्षीय बी.एड. (ITEP) और बी.पी.एड. जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
 ​यह बदलाव केवल व्यवस्थागत नहीं, बल्कि हर उस युवा की 'कहानी बदलाव की' है जो कल तक केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित था। स्वावित्तीय पाठ्यक्रम नीति के तहत अब स्थानीय और वैश्विक मांग के अनुसार युवाओं को तैयार किया जा रहा है।
​ भविष्य में उपयोगी विभिन्न तकनीकों और कौशल को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग जैसे विषयों को प्रमुखता से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह ​स्थानीय व कृषि-आधारित उद्योग के तहत रेशम कीट पालन, टसर टेक्नोलॉजी, फिशरीज, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन की शिक्षा युवाओ को आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे।
   ​इन व्यावहारिक विषयों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग जगत के साथ MoU किए गए हैं, जिससे युवाओं को सीधी इंटर्नशिप, व्यावहारिक अनुभव और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा मिल रही है।
    रिसर्च, कौशल विकास, उद्योग समन्वय और वनांचल तक शिक्षा के विस्तार के इस संगम से छत्तीसगढ़ तेजी से देश के अग्रणी 'एजुकेशन हब' के रूप में स्थापित हो रहा है।</description><guid>824</guid><pubDate>21-Sep-2026 7:48:31 pm</pubDate></item><item><title>गणपति वंदना </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=823</link><description>स्वरचित - डॉ. दीक्षा चौबे 
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
विघ्न विनाशक गौरी नन्दन ।
 गणपति को करते हम वंदन ।
एकदन्त लम्बोदर काया ।
 मोदक लड्डू भोग लगाया ।
रिद्धि सिद्धि हैं साथ बिराजे । 
 हास सदा ही मुख पर साजे । 
अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता ।
 निरख मुदित हो गौरी माता ।
घर में आये गौरीनंदन ।
 पावन होता घर का आँगन ।
सुंदर पूजन थाल सजाओ । 
 ढोल शंख घण्टा बजवाओ ।
तोरण बन्दनवार सजाओ ।
 पुष्पों की माला पहनाओ ।
विघ्न हमारे सब हर लेना ।
 घर सबका सुख से भर देना ।
कृपा दृष्टि प्रभु जग पर रखना । 
 दया वृष्टि सब जन पर करना । 
धन्य भाग जो आप पधारे ।
 दर्शन देकर भाग्य सँवारे ।</description><guid>823</guid><pubDate>20-Sep-2026 9:53:44 pm</pubDate></item><item><title>डिजिटल पंख: क्रेडिट बैंक और डिजीलॉकर से गढ़ी कहानी बदलाव की, पूरा हुआ सेवा का संकल्प</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=822</link><description>विशेष लेख- विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक
रायपुर। ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से शुरू हुई 'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य में शिक्षा का परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया है। सत्र 2023-24 से लागू हुई यह व्यवस्था वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है, जिससे राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य सुरक्षित और सुगम हो गया है।
​यह पहल छत्तीसगढ़ में सुदूर वनांचल से लेकर शहरी क्षेत्रों तक सुशासन और 'सेवा आपके द्वार' की अवधारणा को चरितार्थ कर रही है।
 नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD) से जुड़े विश्वविद्यालयों के माध्यम से अब डिग्रियां और अंकसूचियां सीधे डिजीलॉकर में सुरक्षित हो रही हैं, जिससे प्रमाणपत्रों के गुम या खराब होने का जोखिम खत्म हो चुका है। डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से मूल हार्ड कॉपी के समान मान्य हैं। इससे युवाओं को अब नौकरियों या प्रवेश के लिए यूनिवर्सिटी के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
 यह योजना विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट की स्वतंत्रता देती है। यदि बस्तर का कोई छात्र पारिवारिक परिस्थितियों के कारण दो वर्ष की पढ़ाई के बाद कॉलेज छोड़ता है, तो उसके कमाए हुए क्रेडिट उसकी ABC ID में सुरक्षित रहते हैं। कुछ वर्षों बाद वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी विश्वविद्यालय में सीधे तीसरे वर्ष में दाखिला लेकर अपनी शिक्षा पूरी कर सकता है। पहले जहाँ पढ़ाई छूटने पर मेहनत 'जीरो' मानी जाती थी, वहीं अब क्रेडिट बैंक युवाओं के सपनों को टूटने से बचा रहा है।
 इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता से यह पूरी डिजिटल अवसंरचना राज्य को निःशुल्क प्राप्त हुई है।
    ​पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर) और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित राज्य के सभी 33 जिलों के शासकीय व निजी महाविद्यालय इस अभियान से जुड़ चुके हैं। सुकमा और बीजापुर से लेकर सरगुजा तक के छात्रों को देशव्यापी स्तर पर क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा देकर इस व्यवस्था ने डिजिटल फासले को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।</description><guid>822</guid><pubDate>19-Sep-2026 1:02:16 am</pubDate></item><item><title>आधुनिक भारत के शिल्पकार मोदी जी </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=821</link><description>विकसित भारत के शिल्पकार मोदी जी 
- अरुण साव, उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 25 वर्षों की जनसेवा की यात्रा सेवा, सुशासन और संकल्प की प्रेरणा है। वे आधुनिक भारत के शिल्पकार हैं। किसी भी योजना के प्रारम्भिक विचार से लेकर उसके क्रियान्वयन से जुड़े सभी पहलुओं पर अन्त्योदय की उनकी दृष्टि अनुकरणीय है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी संगठन के किसी दायित्व में रहे हों या फिर प्रधानमंत्री के वर्तमान दायित्व में हों, वे सदैव समाज के वंचित वर्ग के उत्थान को वरीयता देते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने बीते वर्षों में अधोसंरचना को विकास और रोजगार का मजबूत आधार बनाया है। देश में हर दिन लगभग 34 किलोमीटर से अधिक नए राजमार्ग बन रहे हैं। केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 35,766 करोड़ तथा राज्य मार्गों और प्रमुख पुलों के निर्माण के लिए 4,468 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है। रायपुर-विशाखापट्टनम, रायपुर-बिलासपुर-कटघोरा, नागपुर-संबलपुर और रायपुर-दुर्ग बायपास जैसे महत्वपूर्ण मार्गों के निर्माण से प्रदेश की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हो रहा है।
प्रदेश में 51 हजार करोड़ रुपए की लागत से रेलवे सुविधाओं के विस्तार पर काम हो रहा है। जगदलपुर-रावघाट रेल प्रोजेक्ट बस्तर के जनजातीय समाज के लिए केन्द्र सरकार का अमूल्य उपहार है। छत्तीसगढ़ के विकास के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी। मोदी जी के नेतृत्व में वर्ष 2030 तक प्रदेश में रेल नेटवर्क दोगुना बढ़कर 2200 रूट किलोमीटर हो जाएगा।
सड़कें विकास की जीवनरेखा हैं। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से हमारा प्रयास है कि अच्छी और सुरक्षित सड़कें केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि गाँव, कस्बे, औद्योगिक क्षेत्र और दूरस्थ अंचल भी बेहतर सम्पर्क से जुड़ें। प्रधानमंत्री जी ने सड़क और रेल सम्पर्क को जिस तरह आर्थिक प्रगति से जोड़ा है, उसी सोच के अनुरूप छत्तीसगढ़ में भी सड़क, पुल और भवन निर्माण के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
हमारा दूसरा बड़ा संकल्प है, हर घर तक स्वच्छ पेयजल। प्रधानमंत्री जी ने जल जीवन मिशन के माध्यम से देश में पेयजल को जनआंदोलन का रूप दिया है। छत्तीसगढ़ में भी ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुँचाने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है। अब हमारी प्राथमिकता केवल नल कनेक्शन देना नहीं, बल्कि नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल सुनिश्चित करना है। जलस्रोतों की स्थिरता, जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को भी हम इसके साथ जोड़ रहे हैं।
शहर बदलेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का सपना पूरा होगा। प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और अमृत मिशन के माध्यम से देश के शहरों के विकास की नई सोच दी है। छत्तीसगढ़ में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग इसी दिशा में साफ-सफाई, पेयजल, सड़क, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। हमारा प्रयास है कि छोटे नगरों में भी अच्छी और आधुनिक नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध हों।
प्रधानमंत्री जी की नागरिकों के जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने की दूरदृष्टि के साथ हम छत्तीसगढ़ के शहरों में समावेशी बनाने में जुटे हैं। 
युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के युवाओं को खेल, कौशल, नवाचार और नेतृत्व से जोड़कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखा है। छत्तीसगढ़ में भी खेल और खिलाड़ियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना हमारी प्राथमिकता है। प्रतिभाओं को अवसर देने, खेल अधोसंरचना मजबूत करने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
हमारी कोशिश है कि खेल प्रतिभाएँ केवल बड़े शहरों से नहीं, बल्कि गाँवों और जनजातीय अंचलों से भी सामने आएँ। बस्तर जैसे क्षेत्रों में खेलों के प्रति युवाओं का बढ़ता उत्साह इसका उदाहरण है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है।
प्रधानमंत्री जी का मानना है कि देश का युवा केवल अवसर पाने वाला नहीं, बल्कि नए अवसर पैदा करने वाला भी बने। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में युवाओं को कौशल, स्टार्टअप, नई तकनीक और रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बाहर जाने की मजबूरी न हो, बल्कि उन्हें छत्तीसगढ़ में ही आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व, दृढ़ संकल्प एवं प्रभावी रणनीति के परिणामस्वरूप भारत तथा छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य दिया है। विकसित भारत के इस संकल्प को विकसित छत्तीसगढ़ की कार्ययोजना के साथ हम साकार करेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्पों को छत्तीसगढ़ की धरती पर साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हमें विश्वास है कि छत्तीसगढ़ अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित भारत की यात्रा का अगुवा बनेगा। </description><guid>821</guid><pubDate>19-Sep-2026 6:18:26 pm</pubDate></item><item><title>कौशल, रोजगार, स्टार्टअप और आधुनिक शिक्षा पर सरकार का जोर, 18 हजार से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=820</link><description>- 9 हजार सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया
-छत्तीसगढ़ सरकार की रोजगार और कौशल विकास पहल से युवाओं को मिल रहे अवसर
विशेष लेख- धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसम्पर्क (रायपुर)
रायपुर / युवाओं को विकास के केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ की श्री विष्णु देव साय की सरकार कौशल विकास, रोजगार, उच्च शिक्षा, उद्यमिता और खेल क्षेत्र में अवसरों का विस्तार कर रही है। पिछले करीब तीन वर्षों में जब से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभाली है, युवाओं को सक्षम, रोजगारपरक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं और पहल शुरू की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा और प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ते हुए राज्य की युवा आबादी को विकास की नई ताकत में बदलना है। लक्ष्य केवल युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें कुशल, आत्मनिर्भर, नवाचारी और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार मानव संसाधन के रूप में विकसित करना है।
 प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत राज्य के 26 जिलों में करीब 18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, 35 हजार और युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है, ताकि प्रशिक्षण को उद्योगों और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, युवा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की उम्मीद हैं। हमारा प्रयास है कि हर युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध हो। युवा सशक्तीकरण विकसित छत्तीसगढ़ के हमारे विजन का केंद्र है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप है।
 युवा केंद्रित एजेंडे में रोजगार के साथ सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। राज्य में करीब 9 हजार रिक्त सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा क्लास-3 और क्लास-4 के पदों पर भर्ती को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया गया है।
सरकार ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर देने के लिए CG-ACE पहल शुरू की है। इसके तहत NEET, CLAT, JEE, UPSC, CGPSC, बैंकिंग, SSC और रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
 युवा विकास की रणनीति में विष्णु देव साय सरकार ने उच्च शिक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उच्च शिक्षा के बजट में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में इसे बढ़ाकर 1,822.75 करोड़ रुपये किया गया है। राज्य के पांच सरकारी कॉलेजों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें जशपुर, रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार और रायगढ़ के कॉलेज शामिल हैं। इसी तरह, आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तर्ज पर कवर्धा, जशपुर, रायगढ़ और जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CGIT) विकसित किए गए हैं। आने वाले समय में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी इनके विस्तार की योजना है।
</description><guid>820</guid><pubDate>18-Sep-2026 12:01:43 am</pubDate></item><item><title>सेवा संकल्प अभियान  : कोर्ट के चक्करों से मुक्ति और सुशासन की नई राह</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=819</link><description>- छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में सुधार से बदला जमीन मालिकों का जीवन
-प्रशासनिक जटिलताओं और तारीखों का दौर हुआ खत्म
विशेष लेख- विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक
 रायपुर ।राजस्व विभाग से जुड़े काम हमेशा से पेचीदा, समय लेने वाले और आम नागरिक के लिए भारी मानसिक तनाव का कारण रहे हैं। भूमि के नामांतरण और सीमांकन में होने वाली लंबी देरी के कारण नागरिकों को अक्सर राजस्व न्यायालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे उनके समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। ऐसी ही प्रशासनिक जटिलताओं और कोर्ट-कचहरी के फेर से जमीन मालिक वर्षों से जूझ रहे थे,जिन्हें अपनी पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार और सीमांकन को लेकर भारी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा था। भूमि के नक्शों से जुड़ी विवादित स्थितियों और फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने से जमीन मालिकों की चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं, और उन्हें डर था कि भावी पीढ़ी को भी यही पारिवारिक विवाद विरासत में मिलेंगे।
 राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में किए गए युगांतरकारी और जनोन्मुख संशोधनों के माध्यम से जब जन-राहत की यह व्यवस्था सीधे जनता तक पहुँची, तो जमीन मालिकों के जीवन में एक नया सवेरा आ गया। इन सुधारों के तहत सबसे बड़ी राहत स्वतः नामांतरण (Auto e-Mutation) की व्यवस्था के रूप में सामने आई। धारा 110 में किए गए क्रांतिकारी संशोधनों के चलते अब पंजीयन विभाग को ही नामांतरण का वैधानिक अधिकार मिल जाने से रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया बेहद सुगम हो गई। जमीन मालिकों को यह बड़ा अधिकार मिल गया कि वह अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में सूचीबद्ध करा सके, जिससे भावी पीढ़ी के लिए पारिवारिक विवादों की गुंजाइश हमेशा के लिए खत्म हो गई।
 इसके अलावा, प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण ने जमीन मालिकों की बची-खुची परेशानियों को भी पूरी तरह दूर कर दिया। धारा 33 के तहत नोटिस और आधिकारिक सूचना प्रेषित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानूनी मान्यता मिलने से सूचनाएं समय पर मिलने लगीं, वहीं धारा 30 के अंतर्गत राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल प्रेषण को अनिवार्य किए जाने से मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो गया। भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़े पुराने विवादों का समाधान धारा 107 के तहत अधिसूचित जिओ-रेफ्रेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों की अधिमान्यता से हो गया, जिससे जमीन के सटीक आंकड़े और पारदर्शी सीमांकन तुरंत उपलब्ध हो गए। इसके साथ ही, धारा 70 के प्रावधानों ने यह सुनिश्चित किया कि कृषि जोत का आकार व्यावहारिक बना रहे और अनावश्यक विखंडन पर रोक लगे।
अब जमीन मालिकों को न तो तारीख-पर-तारीख के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं और न ही किसी जटिल प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। तकनीक-संचालित, पारदर्शी और जन-हितैषी राजस्व व्यवस्था ने इस परिवार के वर्षों के मानसिक तनाव, समय और धन को बचाते हुए उन्हें एक सुशासन और पूर्ण राहत से भरा जीवन प्रदान किया है।</description><guid>819</guid><pubDate>18-Sep-2026 10:15:07 pm</pubDate></item><item><title>एआई क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार छत्तीसगढ़</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=818</link><description>-500 करोड़ के मुख्यमंत्री एआई मिशन से संवरेगा युवाओं और तकनीक का भविष्य
  विशेष लेख- धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर / दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में छत्तीसगढ़ भी अब एक नई छलांग लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार एआई को विकास, रोजगार और सुशासन के नए अवसरों से जोड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। खेती-किसानी से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन तक हर क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग से रोजगार और नवाचार के नए अवसर सृजित करते हुए हम विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 500 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री एआई मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल एआई तकनीक अपनाने वाला राज्य नहीं, बल्कि इसके उपयोग और नवाचार में सिरमौर बनाना है। इस मिशन के तहत प्रदेश में 100 एआई लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे।
योजना के अंतर्गत लगभग 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख शासकीय अधिकारी- कर्मचारियों को एआई के उपयोग से जोड़ा जाएगा। साथ ही, शासन की 50 से अधिक सेवाओं को एआई के जरिए अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। युवाओं को जॉब सीकर (नौकरी तलाशने वाला) की बजाय जॉब क्रिएटर (नौकरी पैदा करने वाला) बनाने के लिए मशीन लर्निंग और डेटा साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस मिशन का दायरा केवल आईटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर आम जनता के जीवन को आसान बनाने के लिए उतारा जा रहा है। कृषि मौसम, फसल, कीट और रोगों के आंकड़ों के विश्लेषण से किसानों को समय पर सटीक सलाह मिल सकेगी। एआई आधारित तकनीक से जांच, रोग पहचान और स्वास्थ्य संसाधनों के प्रबंधन में सुधार होगा।
सरकारी पोर्टलों (जैसे सेवा सेतु) के विस्तार और एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाया जा रहा है। वहीं उद्योगों में उत्पादकता और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। कारखानों में रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के उपयोग से उत्पादन की गति बढ़ती है और त्रुटियाँ कम होती हैं। AI सेंसर मशीनों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और खराबी आने से पहले ही चेतावनी दे देते हैं, जिससे लागत बचती है। उद्योगों में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को समझने और 24X7 सहायता प्रदान करने के लिए AI संचालित टूल का उपयोग किया जाता है।
 नवा रायपुर को आईटी, एआई और डाटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 1 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डाटा सेंटर और एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। एनआईटी रायपुर और ट्रिपल आईटी (IIIT) नवा रायपुर में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से खनन, इस्पात, स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।
नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा। प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा।</description><guid>818</guid><pubDate>17-Sep-2026 9:13:18 pm</pubDate></item><item><title>सेवा संकल्प अभियान :प्रदेशभर में होंगे जनसेवा के कार्यक्रम</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=817</link><description>विशेष लेख -: धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, (जनसंपर्क) रायपुर
सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक महीने का देशव्यापी अभियान है। इसका मकसद श्री मोदी के सेवा और विकास से जुड़े कामों को लोगों तक पहुंचाने के साथ जनसेवा के कार्यक्रमों को बढ़ाना है। इन कार्यक्रमों में रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, स्कूलों में प्रतियोगिताएं आदि शामिल हैं।
इस अभियान का उद्देश्य जनसेवा के प्रति आभार व्यक्त करना, विकसित भारत 2047 का सामूहिक संकल्प लेना, केन्द्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाना तथा प्रत्येक परिवार की सहभागिता के साथ व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।
 सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में) निरंतर जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यकाल के सम्मान में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। सेवा गतिविधियां में नागरिकों को रक्तदान, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य परीक्षण, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसी 25 सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। श्रमदान के रूप में नागरिकों से कम से कम 25 मिनट श्रमदान करने की अपील की गई है, जिसकी फोटो या वीडियो माई भारत पोर्टल पर अपलोड करने पर डिजिटल प्रमाण-पत्र मिलेगा।
 विशेष कार्यक्रम के रूप में 17 सितम्बर 2026 को आशीर्वाद का दीया, नमो सेवा गाथा के तहत संभागीय मुख्यालय रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर (सरगुजा), और जगदलपुर (बस्तर), के आडिटोरियम में संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन से समन्वय कर प्रस्तावित तिथि अनुसार कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। नमो सेवा गाथा अंतर्गत नुक्कड नाटक, नृत्य नाटिका जिले केस्थानीय कलाकार के माध्यम से सांस्कृतिक आयोजन किया जाएगा। सेवा सेतु अभियान (विकासखंडों में बहुउद्देशीय शिविर) और सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज जैसी अभिनव गतिविधियां आयोजित होंगी।
इन गतिविधियों का संचालन शासकीय विभागों के साथ-साथ नागरिकों तथा सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से भी किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में सभी आयु वर्ग की महिलायें, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रतिष्ठित व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों, स्वैच्छिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाएँ, स्वयं-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं एवं आम नागरिकों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।
यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन है, जबकि 7 अक्टूबर को उनके सार्वजनिक पद पर 25 साल पूरे होंगे। 17 अक्टूबर 2026 को अभियान का समापन बड़े कार्यक्रम के साथ किया जाएगा।
 अभियान के तहत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच स्कूल और कॉलेजों में ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा किये गए सेवा कार्यो और विकसित भारत की संकल्पना पर जानकारी दी जाएगी और ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा रक्तदान शिविर, सफाई अभियान, प्रदर्शनियां, सेमिनार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जागरूकता गतिविधियां होंगी। ब्लॉक स्तर पर सेवा सेतु शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद दी जाएगी।
 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनवाड़ी केंद्रों में आंगन का उत्सव आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों को दी जाएगी। कार्यक्रमों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उनका सम्मान भी किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और परिवारों को स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान के दौरान कहानी बदलाव की पहल के तहत शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियों का संकलन किया जाएगा। इन कहानियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव किस तरह आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। हितग्राहियों की सफलता की कहानियां अन्य पात्र नागरिकों को भी योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।
 स्कूलों में विकसित भारत 2047 विषय पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। नमो सेवा के तहत नुक्कड़ नाटक और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगन मिलन सेवा जैसे कार्यक्रम भी रखे गए हैं। पिछले 25 वर्षों के सेवा कार्यो में, प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं और देश में आए बदलावों की कहानी को एक सरल, भावनात्मक और संगीतपूर्ण नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से गाँव - गाँव तक पहुंचाया जाएगा। यह कार्य प्रदेशभर के स्कूलों, कॉलेजों, पंचायत, सामुदायिक केंद्र एवं अन्य सार्वजानिक स्थलों पर आयोजित किया जाएगा ।
विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत करीब 50 ऐसे स्थान चुने जाएंगे, जिन्हें बीजेपी मोदी सरकार के दौर में हुए बदलाव का उदाहरण मानती है। इनमें गुजरात की GIFT City और बस्तर जैसे स्थान शामिल हैं। सोशल मीडिया क्रिएटर्स को भी इन जगहों पर ले जाने की योजना है।
 अभियान के अंतिम दिन जनसेवक महाकुंभ में पंचायत से संसद तक के करीब 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना है। इस दौरान सामूहिक रूप से वंदे मातरम की सभी छह कड़ियां गाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।</description><guid>817</guid><pubDate>15-Sep-2026 1:20:46 am</pubDate></item><item><title>जब हुनर को मंच और अनुभव को अवसर मिलता है, तब बदलता है भविष्य</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=816</link><description>-एनएसटीआई से मिलेगी कौशल को नई पहचान, 45 वर्ष की आयु सीमा से अनुभव को लाभ-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में अवसरों का विस्तार
रायुपर /छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय तक धान के कटोरे के रूप में रही है। खेतों में लहलहाती फसलें प्रदेश की समृद्धि की कहानी कहती हैं, लेकिन बदलते समय के साथ छत्तीसगढ़ ने विकास की अपनी यात्रा में नए आयाम जोड़े हैं। अब कृषि के साथ उद्योग, तकनीक के साथ कौशल और रोजगार के साथ उद्यमिता भी प्रदेश की नई पहचान बन रही है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत प्रदेश के युवा और अनुभवी मानव संसाधन हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद के हालिया निर्णय इसी सोच को आगे बढ़ाते दिखाई देते हैं। एक ओर नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई) की स्थापना होने से युवाओं को आधुनिक कौशल का मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विभिन्न शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किया जाना अनुभव और क्षमता को नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय है। आज का युवा केवल शिक्षा नहीं, रोजगारपरक कौशल चाहता है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के बीच ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व बढ़ गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्राम तेंदुवा में एनएसटीआई की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
 करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं होंगी। यहां दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष करीब एक हजार तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। हजारों युवाओं के सपनों से जुड़ा अवसर है। इससे कोई तकनीकी कौशल हासिल करेगा, कोई उद्योग से जुड़ेगा, तो कोई अपना उद्यम शुरू कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
 एनएसटीआई की स्थापना होने से युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। आज कौशल केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की क्षमता है। गांव और कस्बे के युवा को भी उद्यमशील बनने का अवसर मिलेगा। एक प्रशिक्षित युवा नौकरी तलाशने वाला बनने के साथ नौकरी देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। यही कौशल से उद्यमिता और रोजगार से आत्मनिर्भरता की यात्रा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के युवाओं से अक्सर कहते हैं कि ऐसा कार्य करें जो युवाओं को रोजगार देने वाला बने, ताकि उनकी नई पहचान बन सके।
अधिकतम आयु सीमा को 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष करने का निर्णय उन लोगों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है, जिनके पास अनुभव, कार्यकुशलता और जिम्मेदारियों का व्यावहारिक ज्ञान है। उम्र बढ़ने के साथ अनुभव बढ़ता है और अनुभव किसी भी व्यवस्था की महत्वपूर्ण पूंजी है। वर्षों तक काम कर चुके लोगों ने व्यवस्था को करीब से समझा है और चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे अनुभव का बेहतर उपयोग नई जिम्मेदारियों में किया जाना संस्थाओं को अधिक सक्षम बना सकता है।
 विकास की मजबूत तस्वीर तब बनती है, जब युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच साथ आती है। युवा नई तकनीक और नए विचार लाते हैं, जबकि अनुभवी वर्ग व्यावहारिक समझ और परिस्थितियों से निपटने का अनुभव देता है। एनएसटीआई युवाओं के हुनर को मंच देगा, तो आयु सीमा में वृद्धि अनुभवी वर्ग की क्षमता को अवसर। दोनों निर्णय मिलकर प्रदेश की मानव पूंजी को मजबूत करने की दिशा दिखाते हैं।छत्तीसगढ़ का भविष्य केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि उसके लोगों की क्षमता से तय होगा। जब हुनर को मंच, अनुभव को अवसर और सपनों को सही दिशा मिलेगी, तब विकास आंकड़ों से निकलकर लोगों की जिंदगी में दिखाई देगा। यही नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर है, जहां कौशल से रोजगार, अनुभव से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता की राह तैयार हो रही है। इसी तरह के निर्णयों से छत्तीसगढ़ सरकार सेवा करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।</description><guid>816</guid><pubDate>15-Sep-2026 8:04:19 pm</pubDate></item><item><title>हिंदी प्यारी भाषा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=815</link><description>- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
14 सितंबर हिंदी दिवस विशेष
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।
बाँध लिया मन स्नेह-सूत्र में , जन-जन की प्रत्याशा है ।
सरल-सहज यह पावन धारा , लेकर सबको साथ चली ।
राष्ट्र-धर्म की सीमा लाँघी , प्रचलित होती गाँव-गली ।
जीत लिया मन सबका इसने ,सुखदायी अभिलाषा है ।।
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।।
देवनागरी लिपि अद्भुत है , सुंदर सुगढ़ शिल्प-शैली ।
अनुपम शब्द-नाद अनुशासित , अंतर्मन तक जड़ फैली ।
अर्थ नवल संदर्भ शुभोचित , गढ़े नई परिभाषा है ।।
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।।
उन्नत रूप व्याकरणसम्मत ,दृष्टिकोण है वैज्ञानिक ।
शब्दकोश समृद्ध अति व्यापक , भावमयी यह वैधानिक ।
संस्कारों की बनी वाहिका , जागृत ज्ञान-पिपासा है ।।
विश्व रहा स्वीकार इसे अब , हिंदी प्यारी भाषा है ।।</description><guid>815</guid><pubDate>13-Sep-2026 3:19:12 pm</pubDate></item><item><title>सीख मिली जिनसे सदा</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=814</link><description>- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
जानें क्या अच्छा-बुरा, बनें सही इंसान।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
माता होती गुरु प्रथम, सिखलाती जग-रीति।
झूठ-कपट से दूर रह, कर लें सच से प्रीति।
अनुशासन की डोर में, पिता बाँधते हाथ।
जीवन के हर मोड़ पर, सदा निभाते साथ।
कठिन परिश्रम कर्म कर, करें लक्ष्य संधान।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
शिक्षा का दीपक जला, फैलाते उजियार।
कलुष हृदय का मेट कर, भरते शुद्ध विचार।
खेतों में जा ज्यों कृषक, छाँटे खरपतवार।
शिक्षक कमियाँ जान कर, करते हैं उपचार।
सही दिशा जीवन मिले, देते ऐसा ज्ञान।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
बड़े-बुजुर्गों से मिले, सबको आशीर्वाद।
अनुभव की वे पोटली, करना है संवाद।
परंपरा संस्कृति सुलभ, देते शुचि संस्कार।
किस्सों की दुनिया करें, जिज्ञासा विस्तार।
स्वर्ग बड़ों की छाँव में, मानें घर की शान ।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
देना सीखें वृक्ष से, देते हैं फल-फूल।
मीठा जल देती नदी, बादल को मत भूल।
सूरज सम बनना प्रखर, सागर हृदय विशाल।
कहती शीतल चाँदनी, शांत रहें हर हाल।
जंतु-जीव पंछी सभी, देते हैं अवदान।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।</description><guid>814</guid><pubDate>06-Sep-2026 2:51:36 pm</pubDate></item><item><title>नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=813</link><description>छत्तीसगढ़ में नक्सलमुक्त क्षेत्रों में स्कूलों में बजने लगी घंटी
धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर/छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं।
5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षक दिवस की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।
बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।
शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण
नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।
  *स्थानीय भाषा में अध्यापन:* दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
  *समुदाय से संवाद:* शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।
तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन
बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:
  *स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट:* कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
  *खेलकूद और न्योता भोजन:* स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।
  *सुरक्षित माहौल:* नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।
शिक्षक दिवस पर संदेश
छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में 'शिक्षादूत' बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।</description><guid>813</guid><pubDate>04-Sep-2026 2:06:25 pm</pubDate></item><item><title> ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ में जल-क्रांति, समृद्ध किसान - सशक्त को कर रहा है साकार</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=812</link><description>'विकसित भारत-जी राम जी' योजना से संवर रही किसानों की तकदीर
​ विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक
रायपुर/पानी को जीवन का पर्याय माना गया है, लेकिन मानसून में यही पानी जब खेतों से बहकर व्यर्थ निकल जाता है, तो किसानों के हाथ केवल सूखी मिट्टी और निराशा ही लगती है। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने इस निराशा को आशा में बदलने की ठानी है। जिला प्रशासन की दूरदर्शिता और 'विकसित भारत-जी राम जी' (VBGRJ) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब गाँव-गाँव में पानी सहेजने की एक मौन क्रांति आकार ले रही है। कभी बह जाने वाला वर्षा जल अब डबरियों (कच्चे तालाबों) में सिमटकर किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया आधार बन चुका है।
प्रशासनिक प्रतिबद्धता से धरातल पर उतरी योजना
प्रशासनिक सजगता और स्पष्ट कार्ययोजना के बल पर जिले के ग्रामीण अंचलों में जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका संवर्धन के प्रयासों को नई दिशा मिल रही है। प्रशासन के कुशल निर्देशन में 'डबरी निर्माण' को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि जिले में कुल 319 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें से 200 डबरियों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष 119 डबरियों का कार्य अंतिम चरणों में है। क्षेत्रवार स्थिति पर नज़र डालें तो बिलाईगढ़ में 132, बरमकेला में 103 तथा सारंगढ़ में 84 डबरियाँ स्वीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संवर्धन को मजबूती दी जा रही है।
​25 करोड़ लीटर वर्षा जल का संचयन और 300 एकड़ भूमि की सिंचाई
​इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैवर्षा जल का विशाल संचयन। पूर्ण और निर्माणाधीन डबरियों के माध्यम से जिले में लगभग 25 करोड़ लीटर वर्षा जल को सहेजने का लक्ष्य है।​ संचित जल से जिले की लगभग 300 एकड़ कृषि भूमि को प्रत्यक्ष सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा डबरियों में जल ठहरने से आसपास का भू-जल स्तर (Groundwater level) तेजी से रीचार्ज हो रहा है, जिससे कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी सुधरा है।
​सिंचाई के साथ मछली पालन
  ​डबरी अब केवल पानी रोकने की संरचना नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के लिए एक बहुआयामी आजीविका मॉडल बन चुकी है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसान अब केवल खरीफ (धान) की फसल तक सीमित नहीं हैं। वे गर्मी और रबी के मौसम में हरी सब्जियों तथा नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं।
​  संचित जल का उपयोग न केवल फसल अपितु मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इससे किसान अपनी ही जमीन पर बिना किसी बड़े अतिरिक्त निवेश के हर साल अच्छी-खासी पूरक आय अर्जित कर रहे हैं। ​इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोहरे तरीके से मजबूती प्रदान की है। एक तरफ जहाँ निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को उनके ही गाँव और खेतों में रोजगार प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ उनके पास एक ऐसी टिकाऊ परिसंपत्ति तैयार हो गई, जो आने वाले कई दशकों तक उनकी आजीविका को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।
​   ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत हुआ यह जल-संवर्धन कार्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि सही नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए, तो प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह जल-क्रांति न केवल जल संकट का स्थायी समाधान प्रस्तुत कर रही है, बल्कि 'समृद्ध किसान - सशक्त जिला' की सोच को भी साकार कर रही है।</description><guid>812</guid><pubDate>03-Sep-2026 2:53:33 pm</pubDate></item><item><title>मात-पिता को नहीं भुलाना</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=811</link><description>-विश्व वरिष्ठता दिवस
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
स्नेह-सलिल की बहती धारा, आशीषों की छाया है।।
मात-पिता को नहीं भुलाना, जिनसे यह तन पाया है।
अपने सब सुख भूल त्याग कर, संतानों को वे पालें।
नहीं जरावस्था में उनकी, जिम्मेदारी को टालें।
सेवा कर लें मात-पिता की,पावन अवसर आया है।।
मात-पिता को नहीं भुलाना, जिनसे यह तन पाया है।
थाम उँगलियाँ चलना सीखा, पाई ममता लोरी में।
हर चाहत को पंख लगाए, अनुशासन की डोरी में।
शिक्षा के दृढ़ आधारों ने, जीवन सफल बनाया है।।
मात-पिता को नहीं भुलाना, जिनसे यह तन पाया है।
कहाँ जोड़ते धन सुख-साधन, सारी आय लुटाते हैं।
अभिभावक बच्चों की माँगें, पूरी करते जाते हैं।
उनकी छोटी जरूरतों को, सुत ने क्यों ठुकराया है ?
मात-पिता को नहीं भुलाना, जिनसे यह तन पाया है।
बच्चों के बचपन की यादें, लातीं मुख पर मुस्कानें।
नहीं अकेलापन वे झेलें, मिले वक्त की सौगातें।
थाम काँपते हाथों को लो, अनुभव सार समाया है।।
मात-पिता को नहीं भुलाना, जिनसे यह तन पाया है।।</description><guid>811</guid><pubDate>30-Aug-2026 2:09:41 pm</pubDate></item><item><title> तिहारू भी जान गया है, क्या है सुराज </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=809</link><description>-सुशासन तिहार - जनविश्वास, जनकल्याण और विकास की नई पहचान
विशेष लेख -छगन लाल लोन्हारे,  संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर / सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य गाँवों और शहरों के द्वार पर पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना और शासन-प्रशासन के प्रति जनविश्वास को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गत माह आयोजित इस अभियान के तहत जनता से सीधे संवाद और विकास कार्यों को गति दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन पोर्टल पर जा सकते हैं।
 बस्तर का आयतु हो या सरगुजा जिले का तिहारू, धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार अपनी बात बेबाकी से प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय के समक्ष खड़े होकर कह सकता है कि साहब हमारे यहां पीडीएस यानी सरकारी उचित मूल्य की दुकान का अनाज एवं अन्य खाद्यान सामग्री किफायती दर पर और सही समय पर मिल रहा है अथवा नहीं ? सुशासन जो कि गुड गवर्नेस कहने पर आसानी से लोगों के जहन में बसता है इसका वास्तविक अर्थ है ऐसा शासन जो लोक-केंद्रित हो, पारदर्शी हो और जिसमें जनता की आवाज सर्वाेपरि हो।
 पिछले दिनों सफलता पूर्वक सम्पन्न सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने औचक ग्रामीणों के बीच पहुँचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि शासन को इस प्रकार संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है कि उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचे। सुशासन तिहार इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। इसी मंशा से प्रदेश के सुदूरवर्ती इलाकों के लोगों ने भी गाँव की चौपाल में अपने मुखिया के समक्ष विभिन्न सार्वजनिक जरूरतों के बारे में प्रमुखता से अपनी बात रखी। चाहे वह हेण्डपम्प की हो या तालाब में घाट का निर्माण, सामुदायिक भवन, आंगनबाडी भवन, पहुंचमार्ग का निर्माण अथवा विद्युत लाईन का विस्तार, मध्यान्ह भोजन की बात हो या स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के संबंध में अपनी बातें रखीं। सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की छोटी-छोटी सार्वजनिक जरूरतों को मौके पर ही तुरन्त अपनी मंजूरी प्रदान की। गांव वालों के बीच हेलीकॉप्टर का अचानक उतरना लोगों के लिए कौतूहल का विषय होता है, उनके बीच प्रदेश के मुखिया उनके दुःख-दर्द का हालचाल जानने आए हैं, वह भी बैशाख-जेठ महिने की तपती दोपहरी में। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीण भी सहज होकर आत्मीयता से अपनी बात रखते। मुख्यमंत्री भी उनकी सार्वजनिक जरूरतों की मांग को मौके पर ही पूरा कर देते। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गांव, गरीब और किसानों की विभिन्न समस्याओं का यथा संभव तुरन्त समाधान करने इस वर्ष पूरे प्रदेश में 01 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार संचालित किया गया।
छत्तीसगढ़ में सरकार और जनता के बीच परस्पर संवाद के एक प्रभावी माध्यम के रूप में सुशासन तिहार संचालित हुआ जो सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया। इस वर्ष भी प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखण्डों में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के अभियान दलों का गठन कर उन्हें गांवों में भेजा गया। राज्य में कुल 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत गांव की संख्या 19 हजार 820 के आसपास हैं। अभियान के तहत् विभिन्न विभागों के हजारों अधिकारी और कर्मचारी अलग-अलग जत्थों में पैदल भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गांवों में रात रूक कर ग्रामीणों से चौपाल में उनकी समस्याओं तथा जरूरतों की जानकारी भी ली।
 त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी इस अभियान में भाग लिया। मुख्यमंत्री और सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों तथा प्रभारी सचिवों ने इस दौरान विभिन्न जिलों के गांवों का आकस्मिक दौरा कर सुशासन तिहार का सुचारू संचालन सुनिश्चित करते हुए शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का मूल्यांकन भी किया। अभियान के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अन्त्योदय अन्न योजना, अनाज भण्डारण और वितरण की स्थिति, भौगोलिक दृष्टि से पहुंचविहीन क्षेत्रों में मानसून के पहले आवश्यक वस्तुओं के समुचित भण्डारण, बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अमृत नमक वितरण की भी समीक्षा की गई।
 महात्मा गांधी नरेगा तथा अन्य रोजगार मूलक कार्यों की प्रगति और उनमें लगे श्रमिकों के मजदूरी भुगतान, राजस्व - प्रकरणों के निराकरण के अंतर्गत आविवादित नामांतरण, बटवारा और सीमांकन के मामलों की स्थिति, पेयजल व्यवस्था और पेयजल स्त्रोंतो की साफ-सफाई सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान, निर्मल ग्राम योजना, विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाईनों के समुचित रख-रखाव, कृषि पम्पों के विद्युतिकरण और एकल बत्ती कनेक्शन से संबंधित शासकीय प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।</description><guid>809</guid><pubDate>24-Aug-2026 1:24:24 pm</pubDate></item><item><title>  अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप : छात्राओं के सपनों को मिलेगी नई उड़ान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=808</link><description>-हर पात्र छात्रा को मिलेगी प्रतिवर्ष 30हजार रुपएकी आर्थिक सहायता    
लेख- एस.आर. पाराशर, उपसंचालक
धमतरी।आर्थिक परिस्थितियां अब बेटियों की उच्च शिक्षा के रास्ते में बाधा न बनें, इसी उद्देश्य से अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस पहल के तहत पात्र छात्राओं को स्नातक शिक्षा पूरी करने तक प्रतिवर्ष 30 हजार रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। छात्राएं इस राशि का उपयोग ट्यूशन फीस सहित शिक्षा से जुड़े अन्य आवश्यक खर्चों के लिए कर सकेंगी।यह छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि बेटियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई प्रतिभाशाली छात्रा अपनी कॉलेज शिक्षा बीच में न छोड़े।
अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप के अंतर्गत चयनित छात्राओं को उनकी स्नातक शिक्षा की अवधि के अनुसार 2 से 5 वर्षों तक प्रतिवर्ष ₹30,000 की सहायता मिलेगी। इस तरह पात्र छात्रा को पूरी अवधि में अधिकतम ₹1.50 लाख तक की छात्रवृत्ति प्राप्त हो सकती है।इस छात्रवृत्ति की एक विशेषता यह है कि इसका चयन मेरिट, जाति, आय या धर्म के आधार पर नहीं किया जाता। सरल पात्रता मानदंड और आसान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र छात्राओं तक इस योजना का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है।17 अगस्त को कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने भी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पात्र छात्राओं की पहचान कर विशेष अभियान चलाने, आवेदन में मार्गदर्शन देने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि आर्थिक कठिनाई के कारण किसी छात्रा की पढ़ाई बाधित न हो।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण किसी भी छात्रा की उच्च शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप जैसी पहल छात्राओं को कॉलेज शिक्षा जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल प्रदान करती है। जिले के महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे पात्र छात्राओं की पहचान कर उन्हें इस योजना की जानकारी दें, आवेदन प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं और अधिक से अधिक पात्र छात्राओं को योजना से जोड़ें। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में कोई भी पात्र छात्रा छात्रवृत्ति जैसे महत्वपूर्ण अवसर से वंचित न रहे।कलेक्टर ने छात्राओं और अभिभावकों से अपील की है कि वे उच्च शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आगे आएं और निर्धारित समय-सीमा में अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करें। महाविद्यालयों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्राओं को आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों और प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराते हुए उनका सहयोग करें।
वर्ष 2026-27 में अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप का तीसरा कोहोर्ट शुरू किया जा रहा है। इसमें 19 राज्य और 2 केंद्रशासित प्रदेश, अर्थात कुल 21 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए वे छात्राएं आवेदन कर सकती हैं, जिन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों की पढ़ाई किसी पात्र राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के सरकारी स्कूल या कॉलेज से नियमित छात्रा के रूप में पूरी की हो। साथ ही, उन्होंने 2026-27 में भारत के किसी सरकारी संस्थान अथवा विश्वसनीय एवं मान्यता प्राप्त निजी कॉलेज/विश्वविद्यालय में 2 से 5 वर्ष की अवधि वाले मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में नियमित छात्रा के रूप में प्रवेश लिया हो।
छात्राओं को आवेदन के लिए दो चरणों में अवसर दिया गया है। पहला आवेदन चरण 10 से 31 अगस्त 2026 तक है, जबकि दूसरा चरण 10 से 31 जनवरी 2027 तक रहेगा। आवेदन केवल अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकता है।आवेदन के लिए छात्राओं को पासपोर्ट आकार का फोटो, आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, कक्षा 10वीं एवं 12वीं की मूल अंकतालिका तथा प्रवेश का प्रमाण जैसे बोनाफाइड प्रमाणपत्र या शिक्षण शुल्क रसीद की स्पष्ट, रंगीन और बिना संपादन की गई प्रतियां तैयार रखनी होंगी।
फाउंडेशन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि छात्रवृत्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया के किसी भी चरण में कोई शुल्क नहीं लिया जाता। फाउंडेशन फोन कॉल या संदेश के माध्यम से बैंक खाते की जानकारी अथवा OTP नहीं मांगता और छात्रवृत्ति के लिए किसी प्रकार का साक्षात्कार भी आयोजित नहीं किया जाता। छात्राओं को किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या व्यक्ति से सावधान रहने की सलाह दी गई है।
अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना 9 मार्च 2001 को हुई थी। शिक्षा की गुणवत्ता और समानता के क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत फाउंडेशन ने वर्ष 2024 में अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप की शुरुआत की। इस पहल के माध्यम से आर्थिक बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाने वाली छात्राओं को आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।अब हर लड़की कॉलेज जाएगी की भावना के साथ यह छात्रवृत्ति बेटियों के सपनों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ परिवारों में उच्च शिक्षा के प्रति विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। धमतरी जिले की पात्र छात्राओं से अपील है कि वे निर्धारित अवधि में आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठाएं और उच्च शिक्षा के माध्यम से अपने उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करें।
आधिकारिक वेबसाइट: अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की वेबसाइट पर Azim Premji Scholarship अनुभाग में जाकर आवेदन किया जा सकता है।</description><guid>808</guid><pubDate>22-Aug-2026 7:03:25 pm</pubDate></item><item><title>श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर: छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण को मिल रही नई गति</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=807</link><description>-सुरक्षित श्रम, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार
विशेष लेख- छगल लाल लोन्हारे- संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर / राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना विकसित राज्य की कल्पना संभव नहीं है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से सेवाओं को सरल बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार के ढाई साल में श्रम विभाग की उपलब्धियाँ राज्य सरकार की श्रमिक हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन का परिचायक हैं।
 श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पाँच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए हैं। मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि पाँच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय एवं 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और योजनाओं के प्रभावी संचालन को नई गति मिली है।
 औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के माध्यम से श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र अब 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सरल एवं पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध होंगी तथा ष्ईज ऑफ डूइंग बिजनेसष् को भी बढ़ावा मिलेगा।
श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक लगभग 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।
वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया है। इन योजनाओं पर लगभग 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत आवास निर्माण अथवा घर खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। यह निर्णय निर्माण श्रमिकों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
 इसी प्रकार दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों एवं उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता राशि भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। इससे महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं।
राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से अटल कैरियर निर्माण योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इस पहल से बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप वर्ष 2026-27 से इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। यह पहल श्रमिक परिवारों के बच्चों के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी।
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण, संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केन्द्र संचालित हैं, जो हजारों श्रमिकों के लिए राहत का माध्यम बने हुए हैं।
 श्रम विभाग द्वारा विकसित 'ई-श्रम साथी मोबाइल एप' श्रमिकों और नियोजकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। इस एप के माध्यम से स्वयं पंजीयन, श्रमिक एवं नियोजक के बीच सीधा संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है।
राज्य सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, विभिन्न योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी उनके आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
 इसी प्रकार असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
 राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों एवं सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं में कमी और उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।
छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे व्यापक सुधार यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी मानती है। प्रशासनिक ढाँचे का विस्तार, श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं का विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक रोजगार जैसी पहलें श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। श्रमिकों के कल्याण और सशक्तिकरण के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ समावेशी और संवेदनशील विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।</description><guid>807</guid><pubDate>21-Aug-2026 5:51:50 pm</pubDate></item><item><title>मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे...</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=806</link><description>

-गुलजार साहब का पहलाफिल्मीगीत- मोरा गोरा अंग लइ ले, मोहे शाम रंग देइ दे, छुप जाऊंगी रात ही में , मोहे पी का रंग दइदे
गुलजार- जन्मदिन (18 अगस्त) विशेष
आलेख-प्रशांत शर्मा
जाने-माने शायर, गीतकार, लेखक और निर्देशक गुलजार साहब का 18 अगस्त को जन्मदिन है। आज भी समझ नहीं आता कि वे ऐसे-ऐसे शब्द कहां से उठा लाते हैं और इतने सलीके से उसे गीतों के रूप में खूबसूरत मोतियों की माला तरह पिरो देते हैं, कि सुनने वाला बस सुनता ही रह जाता है। उनके गाने सुनो तो लगता है जैसे शब्द किसी झरने से झर रहे हैं बिना किसी अतिरिक्त शोर के अविरल। बस आप उसकी प्राकृतिक आवाज को सुनते रहिए , आवाज दिल तक ही उतरेगी। गुलजार साहब पुराने जमाने को याद करते हुए लिखते हैं- उस वक्त तस्वीरें दिल से बनती थी, कैमरों से नहीं।
यू ट्यूब पर उनकी शायरी उन्हीं की आवाज में सुनी, खासकर जगजीत सिंह के साथ उनकी जुगलबंदी , लगा ही नहीं, कि कोई शायर या गीतकार अपनी रचनाएं पढ़ रहा है, बल्कि ऐसे लगा जैसे कोई हमारी देखी सुनी कहानी ही सुना रहा है । उन्हें सुनने वाला नि:शब्द डूबता चला जाता है, आंखों के सामने तब गुलजार साहब नहीं, बल्कि एक जीती जागती तस्वीर किसी फिल्म की तरह सेल्युलाइट पर चलने लगती है। यह उनके शब्दों, आवाज के माड्यूलेशन और सहजता का जादू ही है।
सफ़ेद पैरहन के भीतर धड़कता एक शायर दिल जिसकी ज़ुबान में शीरे की महक आती हैं। जो नज़्मों की ऊंगलियां पकड़ कभी बादलों पर सैर करता है तो कभी गज़़लों के साथ दिल बहलाने के लिए चांद-तारों को निहारता है। एक लेख़क जिसकी कलम शब्दों के साथ ऐसे ख़ेलती है कि देखने और पढऩे वाले दोनों का दिल बहल जाए। जो हिन्दी की किताबों में उर्दू की जिल्द चढ़ाते हैं वो ग़ुलज़ार हैं।
जायकेदार हवा, मासूम पानी, गुनगुनाती निगाहें, रंगीली सांसें... चांद, तारे, आकाश, नदियों और इंसानी अहसास, दिल का पड़ोसी होना, और कभी दिल की तरह बीड़ी जलाइले, जैसे शब्द वे ही गढ़ सकते हैं। वे बच्चों के लिए लिखते समय चड्डी पहनकर फूल भी खिला सकते हैं । कहते हैं कि किसी शायर के मन की थाह लेना वैसे भी मुश्किल है , लेकिन गुलजार के शब्दों और आवाज की गहराई का भी कोई सिरा ही नहीं नजर आता है। आप कितनी भी कोशिश करें उनके शब्दों के जादू से दूर नहीं भाग सकते। शायर, लेखक, निर्देशक गुलजार ने करीब छह दशकों के अपने कॅरिअर में कविता, गीत, शेर, टीवी सीरियल, फिल्में समेत उर्दू और हिंदी साहित्य की कई विधाओं के लिए कलम चला रहे हैं।
उर्दू के प्रति उनका प्रेम आज भी उनके हिन्दी गीतों में झलकता है। बहुत कम लोगों को मालूम है कि वे आज भी गीतों को उर्दू शब्दावली में ही लिखना पसंद करते हैं, फिर उसे हिन्दी में लिखा जाता है।
आज 86 साल की उम्र में भी उनका रिश्ता लेखनी के साथ पूरे दम खम के साथ जारी है और हर गुजरते वक्त के साथ नए -नए मोती गढ़ रहा है। गंभीर अहसास और रूमानियत भरे गीतों के साथ ही कजरारे कजरारे और बीड़ी जलइले जैसे गीत भी उनकी कलम ने लिखे हैं। हिंदी फिल्मों के वो अकेले शायर हैं जिनके हिस्से में भारत के सारे बड़े फिल्मी पुरस्कारों के अलावा अंतरराष्ट्रीय जगत का ऑस्कर और ग्रैमी पुरस्कार भी हासिल है। पद्म भूषण दादा साहेब फाल्के जैसे सम्मान के भी वे हकदार बने हैं।
उन्होंने जाने-माने डायरेक्टर बिमल रॉय और ऋषिकेश मुखर्जी के सहायक के रूप में अपना कॅरिअर शुरु किया था। शायद इसीलिए उनमें सहजता के साथ अपनी बात कहने वाला अंदाज और परिपक्वहोता गया। बिमल रॉय ने उनकी किताब रावी पार पढ़ी और उन्होंने अपनी फिल्म बंदिनी में गीत लिखने के लिए कहा। गुलजार साहब ने लिखा- मोरा गोरा अंग लइ ले, मोहे शाम रंग देइ दे, छुप जाऊंगी रात ही में , मोहे पी का रंग दइदे। सचिन देव बर्मन ने इस गाने को बहुत ही खूबसूरती के साथ सुरों में ढाला। लता मंगेशकर की प्यारी आवाज और ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों का जादू, नूतन की सहजता, गाने को और भी खूबसूरती बना गई। यह सबसे हिट गाना साबित हुआ। हालांकि फिल्म के गाने उस दौर के मशहूर गीतकार शैलेन्द्र लिख रहे थे। उन्होंने भी गुलजार को गाने लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। इस गाने ने लता मंगेशकर और सचिन देव बर्मन के बीच का झगड़ा भी खत्म कराया था। गुलजार साहब के 74 वें जन्मदिन पर लता मंगेशकर ने इस वाकये को याद किया था।
लता ने बताया था, बर्मन दादा के साथ मेरा झगड़ा चल रहा था। इस बीच एक दिन उनका फ़ोन आया कि एक नया लड़का आया है उसने फि़ल्म बंदिनी के लिए ये गाना लिखा है मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे। मुझे ये गाना इतना पसंद आया कि मैं गाने के लिए मान गई। यही गाना गुलज़ार के फि़ल्मी कॅरिअर का पहला गाना था। लता मंगेशकर के मुताबिक गुलज़ार की शायरी बाकी शायरों से बिलकुल अलग होती है। उनके सोचने का ढंग बिलकुल जुदा होता है। वो कहती हैं - कई बार मैं उनसे पूछती कि आपने ये शब्द क्यों लिखा है या ये लाइन क्यों लिखी है, तो वो सिर्फ़हंस देते और कहते मुझे अच्छा लगा तो मैंने लिख दिया। वो उसकी कोई वजह नहीं बताते। उन्हें जो अच्छा लगता है वो वही लिखते हैं। गुलज़ार के लिखे लता के पसंदीदा गाने हैं -नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा, यारा सीली-सीली और पानी-पानी रे। उन्होंने बताया था -मैं भगवान की शुक्रगुज़ार हूं कि मुझे गुलज़ार के लिखे ढेर सारे गाने गाने का मौका मिला। उन्होंने आरडी बर्मन से लेकर विशाल भारद्वाज और आज की पीढ़ी के संगीतकारों के लिए भी गाने लिखे और खूब लिखे।
गोरा गोरा अंग लई ले ....गाना लोकप्रिय हुआ था और इसके लिए गुलजार को प्रशंसा भी मिली, लेकिन उस दौर में गुलजार फिल्मों में गाने लिखने के लिए उत्सुक नहीं थे। गुलजार साहब ने खुद एक साक्षात्कार में बताया था कि जब उन्होंने अपने कॅरिअर का पहला फि़ल्मी गीत मोरा गोरा अंग लई ले.. लिखा तो वो फि़ल्मों के लिए गाने लिखने को लेकर बहुत ज़्यादा उत्सुक नहीं थे, लेकिन फिर एक के बाद एक गाने लिखने का मौका मिलता गया और वो गाने लिखते चले गए।
गुलजार जाने-माने शायर गालिब के मुरीद रहे हैं। इसलिए शेरो शायरी के प्रति उनका झुकाव शुरू से रहा है। गालिब के लिए उनके मन में इतनी इज्जत है कि वो खुद को गालिब का एक नौकर ही मानते हैं। वो गालिब से इतने प्रभावित थे कि उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बनाना चाहते थे। इस फिल्म में पहले वो संजीव कुमार को लेना चाहते थे। लेकिन किसी ना किसी वजह से ये प्रोजेक्ट टलता गया और आखिर में इस प्रोजेक्ट में गालिब बनने का मौका नसीरुद्दीन शाह को मिला। वो तब तक जमाना था जब दूरदर्शन बढ़ रहा था। ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने के लिए फिल्म मेकर्स दूरदर्शन की तरफ बढऩे लगे थे। ऐसे में गुलजार ने भी अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए दूरदर्शन को चुना और फिल्म की जगह एक टीवी सीरियल की शुरुआत की। इस वक्त तक नसीर इंडस्ट्री में अच्छी पहचान बना चुके थे। इस रोल के लिए गुलजार ने नसीर को चुना था। इसके साथ ही गुलजार और नसीर दोनों का एक पुराना सपना सच हुआ। जब पहले गुलजार ने गालिब के रोल के लिए संजीव को चुना था तो नसीर ने उनके इस फैसले पर सवाल उठाते हुए एक चिट्ठी लिखी थी। वो चिट्ठी तो गुलजार साहब तक नहीं पहुंची थी। लेकिन कुदरती कुछ ऐसे हालात बनते गए कि यह फिल्म एक सीरियल के रूप में सामने आई। नसीर को उनका पसंदीदा कैरेक्टर मिला और गुलजार के लिए उनका सपना सच हो गया था। गालिब की गक़ालों को जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने आवाज दी।
गालिब के प्रति गुलजार साहब की दीवानगी उनके लिखे गानों में नजर आ ही जाती है। जैसे कि गालिब ने लिखा... दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन, बैठे रहें तसव्वर-ए-जानां किए हुए
इसी शेर पर गुलज़ार ने यह नज़्म लिखी जिसे फिल्म मौसम में शामिल किया गया।
दिल ढूँढ़ता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन
बैठे रहें तसव्वर-ए-जानां किए हुए
जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेट कर
आँखों पे खींचकर तेरे आँचल के साये को
औंधे पड़े रहें, कभी करवट लिये हुए ..
या गर्मियों की रात जो पुरवाइयाँ चलें
ठंडे सफ़ेद बिस्तर पर जागें देर तक
तारों को देखते रहें छत पर पड़े हुए
 बर्फीली सर्दियों में किसी रात में कभी
वादी में गूँजती हुई ख़ामोशियाँ सुनें
आँखों में भीगे भीगे से लम्हे लिये हुए
दिल ढूँढ़ता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन
इस गाने को मदनमोहन साहब ने ऐसे सुरों में ढाला किबरसों बाद भी इसकी रुमानियत दिल धड़का जाती है। जाते-जाते गुलजार साहब की रिश्तों के ताने-बाने पर लिखी एक प्यारी सी नज्म, तो मुझे बहुत पसंद है-
मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे
अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते
जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ
फिर से बाँध के
और सिरा कोई जोड़ के उसमें
आगे बुनने लगते हो
तेरे इस ताने में लेकिन
इक भी गाँठ गिरह बुनतर की
देख नहीं सकता है कोई
मैंने तो इक बार बुना था एक ही रिश्ता
लेकिन उसकी सारी गिरहें
साफ़ नजऱ आती हैं मेरे यार जुलाहे


</description><guid>806</guid><pubDate>18-Aug-2026 6:22:24 pm</pubDate></item><item><title>  सुदृढ़ कृषि व्यवस्था और पारदर्शी सुशासन से बदल रहा छत्तीसगढ़ के किसानों की तकदीर</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=805</link><description>15 अगस्त पर विशेष आलेख-डॉ. ओम प्रकाश डहरिया-सहायक जनसम्पर्क अधिकारी
रायपुर । देश 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहा है। यह अवसर केवल स्वतंत्रता के गौरव का नहीं, बल्कि विकास की उस सतत् यात्रा का भी है, जिसने भारत के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में खेती-किसानी को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित बनाने का व्यापक अभियान चलाया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन तथा कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के निर्देशन में कृषि विभाग ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने, उर्वरकों की सतत् निगरानी, पारदर्शी वितरण व्यवस्था तथा गुणवत्ता नियंत्रण के माध्यम से ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। छत्तीसगढ़ के किसानों को आत्मनिर्भर, समृद्ध बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है कि किसानों को समय पर प्रमाणित खाद-बीज उपलब्ध हो और किसी भी स्थिति में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा नकली उर्वरकों का नुकसान किसानों को न उठाना पड़े। इसी सोच के परिणामस्वरूप खरीफ 2026 में प्रदेश में 48.69 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 11 अगस्त तक 45.62 लाख हेक्टेयर अर्थात लगभग 94 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। किसानों को अब तक 11.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरक तथा 4.55 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जा चुके हैं। उर्वरकों के 15.55 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 15.83 लाख मीट्रिक टन का भंडारण कर राज्य ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वयं अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सुगमता से प्रमाणित खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कठोर कार्रवाई हो। इसके साथ ही किसानों को खेती किसानी करने में किसी प्रकार की समस्या न हो, इस उद्देश्य से ठोस रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में तरल नैनो उर्वरक के प्रति किसानों को जागरूक करने का काम भी विभाग के माध्यम से किया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि उर्वरकों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के नेतृत्व में विभाग ने नकली एवं अमानक उर्वरकों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया। वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में प्रवर्तन कार्रवाइयों में 11.20 गुना वृद्धि दर्ज हुई और कुल कार्रवाई 44 से बढ़कर 493 मामलों तक पहुंच गई। न्यायालयीन प्रकरण 4 से बढ़कर 65, जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 107, लाइसेंस निलंबन 3 से बढ़कर 106, लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 15 तथा विक्रय प्रतिबंध 33 से बढ़कर 189 मामलों तक पहुंचा। पहली बार ग्यारह एफआईआर दर्ज होना विभाग की शून्य सहिष्णुता नीति का प्रमाण है। इन कठोर कदमों ने किसानों का भरोसा मजबूत किया और कृषि आदानों की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया।
 सरकार की किसान हितैषी नीतियों का प्रभाव केवल उर्वरकों तक सीमित नहीं है। कृषक उन्नति योजना के माध्यम से खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। किसानों की सुविधा के लिए एग्रीस्टैक, ई-केवाईसी और डिजिटल सेवाओं का विस्तार कर योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है।
कृषि को आधुनिक स्वरूप देने के लिए राज्य सरकार ने कृषि यंत्रीकरण, सूक्ष्म सिंचाई और प्राकृतिक खेती पर विशेष बल दिया है। अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत लगभग 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। वहीं 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण और कम लागत वाली खेती को प्रोत्साहित किया गया है।
उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्रों में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। ऑयल पाम और बांस रोपण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि हाईटेक नर्सरी, पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज जैसी अधोसंरचनाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं। पशुपालन में दुग्ध उत्पादन, डेयरी भुगतान व्यवस्था और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हुआ है, वहीं मत्स्य उत्पादन लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन तक पहुंच गया है, जिससे छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।
कृषि विपणन और अधोसंरचना के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां सामने आई हैं। राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से प्रदेश की 21 मंडियां जुड़ चुकी हैं तथा कृषि अवसंरचना निधि के अंतर्गत 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि प्राप्त हुई है। बीज उत्पादन एवं प्रमाणीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है तथा रायपुर की शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता मिलना राज्य की वैज्ञानिक कृषि व्यवस्था का प्रमाण है।
स्वतंत्रता के 79 वर्षों की इस ऐतिहासिक बेला पर छत्तीसगढ़ का कृषि परिदृश्य स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार की योजनाबद्ध नीति, प्रभावी प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और किसानों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण ने खेती-किसानी को नई ऊर्जा प्रदान की है। गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता, कठोर गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का समावेश और किसान-केंद्रित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्रदेश के कृषि विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के प्रशासनिक नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध कृषि व्यवस्था की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।</description><guid>805</guid><pubDate>13-Aug-2026 1:21:23 am</pubDate></item><item><title>विष्णु सरकार ने बढ़ाया किसानों का मान-खेती किसानी को मिला नया संबल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=804</link><description>छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति परंपरा व आस्था से जुड़ा है हरेली तिहार
छगन लाल लोन्हारे
संयुक्त संचालक जनसंपर्क
रायपुर/प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन ढाई साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 141.05 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा। 
 परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के गुड़ी में ठाकुरदेव की पूजा की जाती है।
 हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।
 सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत, लोहार व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।
 पिहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद रहता था। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के खेल मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।
 हरेली तिहार सामाजिक समरसता का प्रतीक है यह केवल धार्मिक या कृषि पर्व नहीं है यह समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ने का माध्यम है। गांव के लोग मिल-जुलकर पूजा और कार्यक्रमों का आयोजन करते है। इस दिन परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के साथ ही प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।</description><guid>804</guid><pubDate>10-Aug-2026 12:25:00 am</pubDate></item><item><title>सावन मनभावन आया प्रिय </title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=803</link><description>- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
सावन मनभावन आया प्रिय, याद तुम्हारी आई है।
जग पुलकित हर्षित पर मेरी, देह-लता मुरझाई है ।।
ताल दे रहीं बूँदें छम-छम, मौन हुई मेरी पायल।
प्रेमी युगल प्रणय क्रीड़ा रत, देख हुआ अंतस् घायल।
छवि-दर्शन कर तस्वीरों में, आती मुझे रुलाई है ।।
सावन मनभावन आया प्रिय, याद तुम्हारी आई है।।
नेह-मेह आराधन करते, उमड़-घुमड़ गरजें बादल।
अश्रु-धार की झड़ी लगी है, बिखरा नैनों का काजल ।
खिल-खिल बेला इठलाती पर, मन को नहीं लुभाई है।।
सावन मनभावन आया प्रिय, याद तुम्हारी आई है।।
प्रेम-रंग में मन अनुरंजित, रंग नहीं देखे दूजा ।
शिव भक्तों पर करें अनुग्रह, करती हूँ मन से पूजा।
निविड़ निशा कारा पीड़ा की, दिवस लगे दुखदाई है।।
सावन मनभावन आया प्रिय, याद तुम्हारी आई है।।</description><guid>803</guid><pubDate>09-Aug-2026 3:02:36 pm</pubDate></item><item><title>ढाई साल की उपलब्धियाँ- छत्तीसगढ़ का श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=802</link><description>श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता

 विशेष लेख :छगन लाल लोन्हारे , संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
रायपुर । पिछले ढाई साल में श्रम विभाग ने गढ़ी सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि की मिसाल। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक ऐतिहासिक पहल की हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार से जोड़ते हुए श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। वहीं श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में विभाग ने श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ तेज़ी और सरलता से पहुंचाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है, इन योजनाओ के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के हितों के संरक्षण के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। श्रमिकों के पंजीयन, सहायता और योजनाओं के लाभ को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाने के लिए श्रम विभाग ने नई यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट
https://shramevjayate.cg.gov.in/
श्रमेव जयते मोबाइल एप विकसित किया है, जिससे श्रमिक अब ऑनलाइन आवेदन, पंजीयन और अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर रहे हैं।  ढाई वर्षों में श्रम विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत किया है। 5 नए जिलों (मोहला-मानपुर-अंबागढ़,चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, ,सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं सक्ती) में श्रम अधिकारी कार्यालय की स्थापना हेतु 20 पदों का सृजन किया गया है। वर्तमान में 10 जिलों के सहायक श्रमायुक्त कार्यालय तथा 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित है। इस प्रकार राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न पदों पर नियुक्तियां कर विभागीय क्षमता को भी बढ़ाया गया है। उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से श्रम कानूनों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की सुविधा, फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने जैसे अनेक निर्णयों ने रोजगार सृजन के साथ श्रमिक अधिकारों को भी मजबूत किया है। श्रम विभाग की उपलब्धियों में सबसे उल्लेखनीय सफलता श्रमिक पंजीयन और हितलाभ वितरण रही है। 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच लगभग 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। लगभग 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया गया, जिन पर लगभग 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई। निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये तथा असंगठित श्रमिकों को लगभग 187 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। लाभ वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली लागू की गई है।
मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केंद्रों की स्थापना श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र 24 घंटे, सात दिन संचालित किया जा रहा है। संचालित राज्यभर में मोबाइल शिविर आयोजित कर लाखों श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों को भी सरकारी सेवाओं का लाभ घर के समीप मिल रहा है। राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों के सामाजिक सुरक्षा कवच को भी मजबूत किया है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की गई है। मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति, श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिला है।
महिला श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता प्रदान की गई। वहीं शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रमिकों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए मेधावी शिक्षा सहायता, निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग तथा छात्रवृत्ति योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। हजारों विद्यार्थियों को इन योजनाओं का लाभ मिला है, जिससे श्रमिक परिवारों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में श्रमिक कल्याण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का जो संकल्प लिया गया है, उसे श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में श्रम विभाग प्रभावी रूप से जमीन पर उतार रहा है। पारदर्शी व्यवस्था, तकनीकी नवाचार, त्वरित सेवा, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सम्मान की भावना ने छत्तीसगढ़ को श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान दी है। ढाई वर्षों की यह यात्रा केवल योजनाओं और आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में आए विश्वास, सुरक्षा और समृद्धि की नई शुरुआत है।</description><guid>802</guid><pubDate>07-Aug-2026 8:36:58 pm</pubDate></item><item><title> जरूरतमंदो की संजीवनी बना छत्तीसगढ़ का समाज कल्याण मॉडल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=801</link><description>-सामाजिक सुरक्षा से आत्मनिर्भरता की राह पर
आलेख- डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर (उप संचालक )
रायपुर । भारत जब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह स्पष्ट हो चुका है कि वास्तविक विकास वही है जिसमें समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन, सुगम अवसर और आत्मनिर्भरताकृये चार स्तंभ किसी भी आधुनिक कल्याणकारी राज्य की पहचान होते हैं। छत्तीसगढ़ ने पिछले ढाई वर्षों में इन्हीं मूल्यों को केंद्र में रखकर समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन प्रस्तुत किया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में राज्य ने दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं, उभयलिंगी व्यक्तियों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए ऐसी व्यवस्थाएँ विकसित की हैं, जिन्होंने सामाजिक न्याय को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। दिसंबर 2023 से जून 2026 के बीच की उपलब्धियाँ इस परिवर्तन की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करती हैं।
राज्य की पेंशन योजनाएँ आज लाखों परिवारों के लिए आर्थिक संबल बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या 7.10 लाख से बढ़कर 7.56 लाख हो गई है। वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजन, सामाजिक सुरक्षा और सुखद सहारा जैसी योजनाओं को मिलाकर 21.73 लाख से अधिक नागरिक नियमित सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल सशक्तीकरण है। लगभग 96 प्रतिशत हितग्राहियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है और आधार सीडिंग का कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है। ई-केवाईसी आधारित सत्यापन ने अपात्र प्रविष्टियों को हटाकर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाया है।
छत्तीसगढ़ ने दिव्यांगजन कल्याण को दान या सहायता की दृष्टि से नहीं, बल्कि अधिकार और समान अवसर के दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) धारकों की संख्या 2.44 लाख से बढ़कर 2.77 लाख हो गई है।कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना में लाभार्थियों की संख्या 1,161 से बढ़कर 17,038 तक पहुँचना राज्य की सक्रिय पहुँच और प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। सामर्थ्य विकास योजना के माध्यम से कौशल, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया गया है।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार विशेष रूप से उल्लेखनीय है। राज्य छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 14 हजार से अधिक हो गई है। इससे स्पष्ट है कि राज्य शिक्षा को दिव्यांगजन सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मान रहा है।फिजिकल रिफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर, स्पेशल पाली क्लिनिक और विशेष विद्यालयों के विस्तार ने स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं को एकीकृत स्वरूप प्रदान किया है।
बढ़ती वृद्धजन आबादी के बीच छत्तीसगढ़ ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए संवेदनशील सहायता तंत्र विकसित किया है। वृद्धाश्रमों, आश्रय गृहों और देखरेख संस्थाओं की क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ सियान हेल्पलाइन (155326) को प्रभावी सहायता मंच के रूप में विकसित किया गया है।इस हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉलों की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख तक पहुँच गई है। यह केवल आँकड़ा नहीं, बल्कि बुजुर्ग नागरिकों के बढ़ते विश्वास और प्रशासन की सक्रिय पहुँच का संकेत है।
समाज कल्याण विभाग ने नशामुक्ति को स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्वास दोनों से जोड़कर देखा है। भारत माता वाहिनी योजना के अंतर्गत संचालित नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़कर 29 हो गई है, जबकि लाभार्थियों की संख्या 1,967 से बढ़कर 5,220 तक पहुँच गई है।
इन केंद्रों में उपचार के साथ परामर्श, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को पुनः सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल रहा है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम और एक्सेसिबल इंडिया अभियान की भावना को आगे बढ़ाते हुए राज्य ने सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान प्रारंभ किया है। सार्वजनिक भवनों, कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सरकारी परिसरों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने की दिशा में व्यवस्थित कार्य किया जा रहा है।यह पहल केवल रैंप या भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन सेवाओं को सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाने की व्यापक सोच का हिस्सा है। दिव्यांगजनों के अधिकारों की प्रभावी निगरानी के लिए आयुक्त राज्य के नवीन पद की स्वीकृति इस दिशा में दूरदर्शी प्रशासनिक पहल मानी जा रही है।
कल्याणकारी योजनाओं की स्थिर सफलता के लिए मजबूत संस्थागत ढाँचा आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने विशेष विद्यालय, माना कैंप रायपुर के भवन निर्माण, दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालयों के उन्नयन, फिजिकल रिहैबिलिटेशन सेंटर के विस्तार, दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के माध्यम से ऋण वितरण तथा नशामुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण निवेश किए हैं।वित्तीय वर्ष 2023-24 में समाज कल्याण विभाग का बजट 1,512 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 1,600 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि राज्य सरकार सामाजिक कल्याण को व्यय नहीं, बल्कि मानव पूंजी और सामाजिक स्थिरता में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रही है।
छत्तीसगढ़ मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ डिजिटल प्रशासन और मानवीय संवेदनशीलता एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य कर रहे हैं। डीबीटी, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी, डिजिटल डेटा प्रबंधन और हेल्पलाइन आधारित सहायता प्रणाली ने योजनाओं की दक्षता बढ़ाई है।साथ ही पुनर्वास, परामर्श, आश्रय, सामुदायिक सहयोग और व्यक्तिगत सहायता जैसी सेवाओं को समान महत्व देकर यह सुनिश्चित किया गया है कि तकनीक मानव केंद्रित शासन का माध्यम बने, उसका विकल्प नहीं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह प्रमाणित किया है कि प्रभावी समाज कल्याण केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि संवेदनशील नीति, पारदर्शी क्रियान्वयन और सतत संस्थागत निर्माण से संभव होता है।
पिछले ढाई वर्षों की उपलब्धियाँ लाखों वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षित वृद्धावस्था, हजारों दिव्यांगजनों की बढ़ती आत्मनिर्भरता, जरूरतमंद महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा, नशामुक्त जीवन की ओर बढ़ते युवाओं और सम्मानजनक पुनर्वास की नई संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज हैं।
छत्तीसगढ़ का यह समावेशी समाज कल्याण मॉडल सामाजिक न्याय, तकनीकी नवाचार और मानवीय गरिमा के संतुलित समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह केवल राज्य की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस विकसित और संवेदनशील भारत की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है, जहाँ हर नागरिक को सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने का समान अवसर प्राप्त हो सके।</description><guid>801</guid><pubDate>06-Aug-2026 9:32:34 pm</pubDate></item><item><title> नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=800</link><description>-माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है
-अमृत तुल्य है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध
विशेष लेख - धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क                                                          
रायपुर / विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध ही देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।
 हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुछ श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी आम बचपन की बीमारियों का खतरा कम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लाखों शिशु मृत्यु को रोकने की क्षमता रखता है।
 जन्म के पहले कुछ घंटों में, माँ का दूध सिर्फ़ भोजन नहीं होता, बल्कि यह नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होती है, जो सीधे माँ के शरीर से बच्चे तक पहुँचती है। जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर गोल्डन आवर कहा जाता है, स्तनपान शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से सतर्क रहते हैं और सहज रूप से स्तन की तलाश करते हैं। त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क न केवल सफल स्तनपान की दर को बढ़ाता है, बल्कि बच्चे के तापमान, हृदय गति और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
 शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है, बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं और उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या शहद जैसी चीजें देने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की प्यास और भूख बुझाने के लिए सही अनुपात में पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 6 महीने पूरे होने के बाद, स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।
 शिशु के लिए स्वास्थ्य वरदान है, स्तनपान कराने से बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। यह आगे चलकर बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अस्थामा जैसी क्रोनिक बीमारियों की संभावना को घटाता है।
 स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को पुनः सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। मां और बच्चे के बीच एक भावनात्मक और अटूट संबंध स्थापित होता है। स्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों, या कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं। प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और आराम मिलना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी तनाव के बच्चे को स्तनपान करा सके। कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थलों में क्रैच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए।
 विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार मां का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी हम एक कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार कर सकते हैं।</description><guid>800</guid><pubDate>05-Aug-2026 9:33:09 pm</pubDate></item><item><title> सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=799</link><description>-बच्चों के पोषण, संरक्षण और सर्वांगीण विकास का नया अध्याय
-पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर
आलेख  डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर(उप, संचालक)
रायपुर / किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति उसके बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से मापी जाती है। छत्तीसगढ़ ने इसी सोच को आधार बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास को शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी नीतियों और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सक्रिय नेतृत्व में प्रदेश में बच्चों के पोषण, संरक्षण और भविष्य निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। आईसीडीएस, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन ने राज्य को बाल विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
प्रदेश में 11 हजार 490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम और आकर्षक बनाने का कार्य तेजी से जारी है। इन केंद्रों में बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड (BaLA) पेंटिंग, पोषण वाटिका, खेल एवं शिक्षण आधारित गतिविधियों जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बच्चे सीखने के साथ आनंदमय वातावरण में विकसित हो सकें। मनरेगा अभिसरण के माध्यम से 2 हजार 337 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को स्वीकृति मिली है। वहीं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 191 नए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा चुके हैं। नियद नेल्ला नार 2.0 के तहत 10 जिलों में 12 हजार 964 आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों तक सेवाएं पहुंचा रहे हैं।
मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 51 हजार 45 से बढ़कर 52 हजार 258 तथा सहायिकाओं की संख्या 44 हजार 826 से बढ़कर 51 हजार 548 हो गई है, जिससे सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार आया है। छत्तीसगढ़ राज्य में बच्चों में कुपोषण कम करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों के अनुसार 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में स्टंटिंग में 7.82 प्रतिशत की कमी, वेट में 4.36 प्रतिशत की कमी, अंडरवेट में 2.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। दिसंबर 2023 में जहां बौनापन की दर 30.27 प्रतिशत थी, वह जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत रह गई। यह उपलब्धि पोषण प्रबंधन, नियमित मॉनिटरिंग, सामुदायिक सहभागिता और आंगनबाड़ी आधारित सेवाओं के प्रभावी संचालन का परिणाम है।
राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों में प्रथम स्थान पर रहा। अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह के दौरान 71 हजार 887 गतिविधियां और अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़ा में 34 लाख 93 हजार 474 गतिविधियां आयोजित की गईं। साथ ही स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए रेडी टू ईट इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल शुरू हो चुकी है।
अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मिशन वात्सल्य प्रभावी सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है।
मुख्यमंत्री बाल उदय योजना के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को शिक्षा, देखभाल और पुनर्वास का लाभ मिला है। चाइल्ड हेल्पलाइन में प्राप्त 1 लाख 65 हजार 979 कॉलों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हजारों मामलों का निराकरण किया गया। बाल संरक्षण सेवाओं के विस्तार का प्रभाव दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप योजनाओं में भी स्पष्ट दिखाई देता है। दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चे 42 से बढ़कर 234 और स्पॉन्सरशिप से लाभान्वित बच्चे 767 से बढ़कर 2 हजार 37 हो गए हैं। यह वृद्धि बच्चों को पारिवारिक वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान ने सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सक्रियता दोनों को नई दिशा दी है। बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़कर 1 हजार 382 हो गई है। इसके परिणामस्वरूप रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है। यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बेटियों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का संकेत है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में संचालित ये प्रयास छत्तीसगढ़ के लाखों बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षा, शिक्षित और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण सुधार, बाल संरक्षण सेवाओं का विस्तार और बाल विवाह उन्मूलन जैसे बहुआयामी प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को बाल विकास के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी और आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया है।
सशक्त बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है और राज्य सरकार उसी नींव को और अधिक मजबूत बनाने के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।</description><guid>799</guid><pubDate>05-Aug-2026 7:55:19 pm</pubDate></item><item><title>कृष्ण-राधा-प्रेम ने जग को अचंभित कर दिया...</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=798</link><description>सजल
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
कृष्ण-राधा-प्रेम ने जग को अचंभित कर दिया।
छोड़कर अधिकार सब प्रिय को समर्पित कर दिया।।
आज की पीढ़ी न जाने त्याग करना प्रेम में।
स्वार्थ का विष घोल रिश्तों को कलंकित कर दिया।।
प्रेम है विश्वास का घर क्यों भला संशय वहाँ?
दंभ के वातास ने प्रियता तिरोहित कर दिया।।
दूसरों की थाल लगती है सदा व्यंजन भरी।
मूल्य संस्कृति भूल बैठे आत्म प्रवंचित कर दिया।।
दीप के नीचे अँधेरा पल रहा था रात भर।
रोशनी को दोष देकर व्यर्थ दंडित कर दिया।।</description><guid>798</guid><pubDate>02-Aug-2026 1:38:06 pm</pubDate></item><item><title>सुहानी रात ढल चुकी, न जाने तुम कब आओगे...</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=796</link><description>मोहम्मद रफी- पुण्यतिथि पर विशेष-31 जुलाई
आलेख प्रशांत शर्मा
सुहानी रात ढल चुकी , न जाने तुम कब आओगे, यह गाना मोहम्मद रफी साहब ने गाया है और आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर इसी गाने और इस फिल्म तथा इसके कलाकारों की चर्चा हम यहां कर रहे हंै।
फिल्म थी दुलारी और इसका निर्माण 1949 में हुआ था। फि़ल्म के मुख्य कलाकार थे सुरेश, मधुबाला और गीता बाली। फि़ल्म का निर्देशन अब्दुल रशीद कारदार साहब ने किया था। 1949 का साल गीतकार शक़ील बदायूनी और संगीतकार नौशाद के लिए ढेर सारी खुशियां लेकर आया। 1949 में महबूब ख़ान की फि़ल्म अंदाज़ , ताजमहल पिक्चर्स की फि़ल्म चांदनी रात , तथा ए. आर. कारदार साहब की दो फि़ल्में दिल्लगी और दुलारी प्रदर्शित हुई थीं और ये सभी फि़ल्मों का गीत संगीत बेहद लोकप्रिय सिद्ध हुआ था। फिल्म दुलारी 1 जनवरी 1949 को प्रदर्शित हुई थी। पूरी फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट है।
आज जब दुलारी के इस गाने की चर्चा हो रही है, तो हम बता दें कि इसी फिल्म में लता मंगेशकर और रफ़ी साहब ने अपना पहला डुएट गीत गाया था और यह गीत था-मिल मिल के गाएंगे दो दिल यहां, एक तेरा एक मेरा । फिल्म में दोनों का गाया एक और युगल गीत था -रात रंगीली मस्त नज़ारे, गीत सुनाए चांद सितारे । लता और रफी की यह जोड़ी काफी पसंद की गई और उसके बाद तो उन्होंने ऐसे- ऐसे यादगार गाने दिए हैं कि यदि उनका जिक्र करते जाएं तो न जाने कितने ही दिन गुजर जाएंगे, लेकिन बातें खत्म नहीं होंगी।
फिल्म में मोहम्मद रफ़ी की एकल आवाज़ में नौशाद साहब ने सुहानी रात ढल चुकी गीत.. -राग पहाड़ी पर बनाया । इसी फि़ल्म का गीत तोड़ दिया दिल मेरा.. भी इसी राग पर आधारित है। राग पहाड़ी नौशाद साहब का काफी लोकप्रिय शास्त्रीय राग रहा है और उन्होंने इस पर आधारित कई गाने तैयार किए हैं। इसमें से जो गाने रफी साहब की आवाज में हैं, वे हैं-
1.. आज की रात मेरे दिल की सलामी ले ले (फिल्म-राम और श्याम)
2. दिल तोडऩे वाले तुझे दिल ढ़ूंढ रहा है (सन ऑफ़ इंडिया)
3. दो सितारों का ज़मीं पर है मिलन आज की रात (कोहिनूर)
4. कोई प्यार की देखे जादूगरी (कोहिनूर)
5. ओ दूर के मुसाफिऱ हम को भी साथ ले ले (उडऩ खटोला)
फिल्म दुलारी में कुल 12 गाने थे। 14 रील की इस फिल्म में ये गाने कहानी की तरह ही चलते हैं । नायिका मधुबाला के लिए लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। वहीं गीता बाली के लिए शमशाद बेगम ने दो गाने गाए थे। जिसमें से शमशाद बेगम का गाया एक गाना - न बोल पी पी मोरे अंगना , पक्षी जा रे जा...काफी लोकप्रिय हुआ था। नायक सुरेश के लिए रफी साहब ने आवाज दी थी। इसमें से 9 गाने लता मंगेशकर ने गाए जिसमें रफी साहब के साथ उनका दो डुएट भी शामिल है। रफी साहब ने केवल एक गाना एकल गाया और वह है -सुहानी रात ढल चुकी जिसे आज भी रफी साहब के सबसे हिट गानों में शामिल किया जाता है। पूरा गाना इस प्रकार है-
सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जहां की रुत बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
अंतरा-1. नज़ारे अपनी मस्तियां, दिखा-दिखा के सो गये
सितारे अपनी रोशनी, लुटा-लुटा के सो गये
हर एक शम्मा जल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल...
अंतरा- 2- तड़प रहे हैं हम यहां, तुम्हारे इंतज़ार में
खिजां का रंग, आ-चला है, मौसम-ए-बहार में
हवा भी रुख बदल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल......
गाने में नायक की नायिका से मिलने की बैचेनी और इंतजार का दर्द शकील साहब ने अपनी कलम से बखूबी उतारा है, तो रफी साहब ने अपनी आवाज से इस गाने को जीवंत बना दिया है। गाने में शब्दों का भारी भरकम जाल नहीं है बल्कि बोल काफी सिंपल हैं, जो बड़ी सहजता से लोगों की जुबां पर चढ़ जाते हैं। गाने की यही खासियत इसे आज तक जिंदा रखे हुए है। गाने के शौकीन आज भी किसी कार्यक्रम में इसे गाना नहीं भूलते हैं। राग पहाड़ी के अनुरूप इसका फिल्मांकन भी हुआ है और दृश्य में नायक चांदनी रात में सुनसान जंगल में नायिका का इंतजार करते हुए यह गाना गाता है। दृश्य में एक टूटा फूटा खंडहर भी नजर आता है, तो नायक की विरान जिंदगी को दर्शाता है, जिसे बहार आने का इंतजार है।
दुलारी फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार थी-प्रेम शंकर एक धनी व्यावसायिक का बेटा होता है जिसकी शादी उसके माता-पिता रईस खानदान में करना चाहते हंै। प्रेम शंकर को एक बंजारन लड़की दुलारी से प्यार हो जाता है। यह लड़की बंजारन नहीं बल्कि एक रईस खानदान की बेटी शोभा रहती है, जिसे बंजारे लुटेरे बचपन में उठा लाए थे। यह रोल मधुबाला ने निभाया है। प्रेमशंकर इस लड़की को इस नरक से निकालने के लिए उससे शादी करने का फैसला लेता है। बंजारन की टोली में एक और लड़की रहती है कस्तूरी जिसका रोल गीता बाली ने निभाया है। वह इसी टोली के एक बंजारे लड़के से प्यार करती है, लेकिन उसकी नजर दुलारी पर होती है। प्रेमशंकर के पिता इस शादी के खिलाफ हैं। काफी जद्दोजहद के बाद प्रेमशंकर , दुलारी को इस नरक से निकालने में कामयाब हो जाता है और उनके पिता को भी इस बात का पता चल जाता है कि दुलारी और कोई नहीं उनके ही मित्र की खोई हुई बेटी है जिसे वे बचपन से ही अपनी बहू बनाने का फैसला कर चुके थे। फिल्म के अंत में सब कुछ ठीक हो जाता है और नायक को अपना सच्चा प्यार मिल जाता है। फिल्म में मधुबाला से ज्यादा खूबसूरत गीता बाली नजर आई हैं, लेकिन उनके हिस्से में सह नायिका की भूमिका ही थी। लेकिन फिल्म के प्रदर्शन के एक साल बाद ही उन्हें फिल्म बावरे नैन में राजकपूर की नायिका बनने का मौका मिला और इसके कुछ 5 साल बाद उन्होंने शम्मी कपूर के साथ शादी कर ली। दुलारी फिल्म मधुबाला की प्रारंभिक फिल्मों में से है। मधुबाला ने जब यह फिल्म की उस वक्त उनकी उम्र मात्र 16 साल की थी।
फिल्म की पूरी कहानी चंद पात्रों के इर्द-गिर्द ही घूमती है। सुरेश के पिता के रोल में अभिनेता जयंत थे जिनका असली नाम जकारिया खान था, लेकिन उन्हें जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक विजय भट्ट ने जयंत नाम दिया था। विजय भट्ट आज की फिल्मों के निर्माता-निर्देशक विक्रम भट्ट के दादा थे। जयंत के बेटे अमजद खान हैं जिन्हें आज भी गब्बर सिंह के रूप में पहचाना जाता है। फिल्म दुलारी में नायक सुरेश की मां का रोल प्रतिमा देवी ने निभाया था, जो ज्यादातर फिल्मों में मां का रोल में ही नजर आईं। उनकी फिल्मों में अमर अकबर एंथोनी, पुकार प्रमुख हैं। आखिरी बार वे वर्ष 2000 में बनी फिल्म पलकों की छांव में दिखाई दी थीं। मधुबाला के पिता के रोल में अभिनेता अमर थे। अभिनेता श्याम कुमार ने खलनायक का रोल निभाया था, जो बाद में रोटी, जख्मी जैसी कई फिल्मों में खलनायक के रूप में नजर आए।
कभी फुरसत मिले तो इस फिल्म को जरूर देखिएगा, अपने दिलकश गानों की वजह से यह फिल्म दिल तो सुकून देती है। हालांकि अब इसके प्रिंट काफी धुंधले पड़ गए हैं। फिल्म की तकनीक और कहानी आज की पीढ़ी को भले ही पुरानी लगे, लेकिन अपने दौर की यह हिट और क्लासी फिल्म है।</description><guid>796</guid><pubDate>31-Jul-2026 3:09:08 pm</pubDate></item><item><title>सबका वक्त बदलते देखा...</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=795</link><description>सजल
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
सबका वक्त बदलते देखा।
खोटा सिक्का चलते देखा।।
कंटक मध्य सुमन मुस्काते।
पीड़ा में सुख पलते देखा।।
सब कुछ देकर कुछ न माँगते।
पावस बनकर ढलते देखा ।।
अनजानों से मिला सहारा।
अपनों को भी छलते देखा।।
सूर्य अस्त हो गया साँझ को।
दीप रात भर जलते देखा।।</description><guid>795</guid><pubDate>26-Jul-2026 3:04:08 pm</pubDate></item><item><title>  विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास की नई पहल</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=794</link><description>-धमतरी में बनेंगे व्यवसायिक परिसर, बोरई बनेगा अंतर्राज्यीय व्यापार एवं परिवहन का नया केंद्र
लेख एस.आर.पाराशर, उप संचालक
धमतरी । राज्य शासन एवं भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के समग्र विकास के लिए संचालित योजनाओं को धमतरी जिले में प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है। विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने, आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा कई महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। इसी कड़ी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कमार समुदाय के लिए आधुनिक व्यवसायिक परिसरों (कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स) का निर्माण कराया जाएगा, ताकि वे स्वरोजगार स्थापित कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
 जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तावित इन व्यवसायिक परिसरों का निर्माण जिले के बेलरगांव, कसपुर, बोरई, कुकरेल, सिंगपुर, दुगली एवं केरेगांव में किया जाएगा। इन परिसरों में कमार समुदाय के हितग्राही अपनी आवश्यकता एवं रुचि के अनुसार दुकानें संचालित कर सकेंगे। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई मजबूती मिलेगी।
 भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जनमन (PM JANMAN - Pradhan Mantri Janjati Adivasi Nyaya Maha Abhiyan) योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों तक मूलभूत सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, बिजली, आजीविका एवं अन्य विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। धमतरी जिले में इस योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप जिले को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जो जिले के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि जनजातीय विकास के प्रति जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है।
 शिक्षा के क्षेत्र में भी कमार समुदाय के बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में संचालित कमार विद्यालय को उच्चीकृत कर कक्षा दसवीं से बारहवीं तक संचालित करने की प्रक्रिया जारी है। इससे विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेगी। यह पहल नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों तथा जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
 इसी प्रकार जिले के औद्योगिक एवं व्यापारिक विकास को गति देने के उद्देश्य से बोरई में अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल स्थापित करने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं कांकेर जिले को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु के रूप में विकसित हो रहे बोरई में बस टर्मिनल के निर्माण से यातायात सुविधाएं बेहतर होंगी, यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा व्यापार एवं पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। बस टर्मिनल के साथ विकसित होने वाला व्यवसायिक परिसर स्थानीय युवाओं एवं जनजातीय हितग्राहियों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। बस टर्मिनल के लिए स्थल चयन कर लिया गया है ।
राज्य शासन की जनजातीय कल्याण संबंधी योजनाओं तथा भारत सरकार की पीएम जनमन, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय आजीविका मिशन एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से धमतरी जिले के दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर उभर रही है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि विकास की मुख्यधारा का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी आजीविका और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जा सके।कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय के समग्र विकास के लिए जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। हमारा उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। विभिन्न क्षेत्रों में बनाए जा रहे व्यवसायिक परिसर कमार समुदाय के लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेंगे। साथ ही कमार विद्यालय को उच्च माध्यमिक स्तर तक विकसित करने तथा बोरई को अंतर्राज्यीय परिवहन एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए जिले को प्राप्त राष्ट्रपति पुरस्कार हमारी पूरी टीम और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। आने वाले समय में भी जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।मालूम हो कि धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत संकरा के आश्रित गाँव मसानडबरा में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय के लिए पक्के मकान बनाए गए हैं, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके। यह पहल कमार जनजाति के रहन-सहन और मूलभूत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है |
यह देश की दूसरी और छत्तीसगढ़ की पहली पीएम जनमन आवास कॉलोनी है । यह कॉलोनी विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय के लिए बनाई जा रही है। आधुनिकता के दौर में कमार समुदाय की परम्परा,सांस्कृतिक से जुड़े रहने का भी पूरा ख्याल रखा गया है । ताकि नई पीढ़ी को भी अपनी समुदाय की परम्परा, सांस्कृतिक से जुड़े रहे। मसानडबरा में पीएम जनमन आवास कॉलोनी में. पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से की कार्य योजना बनाई जा रही है । ये आवास पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली से जगमग होंगे ।
जिले में 1481 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 1046 आवास पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 435 आवास निर्माणाधीन हैं। अधिकारियों ने बताया कि शेष आवास अगले चार माह में पूर्ण कर लिए जाएंगे। ग्रामीणों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
पीएमजनमन योजना के तहत 36 सड़कों का निर्माण स्वीकृत किया गया है। इन सड़कों की कुल स्वीकृति लागत 1341.60 लाख रुपए है। अधिकांश निर्माण कार्य प्रगति पर है। सड़कें बन जाने से दूरस्थ बसाहटों को बाजार, स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक सेवाओं से बेहतर जोड़ मिलेगा।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत सभी घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करा दिया गया है। साथ ही हर घर का विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है। गांवों में रोशनी पहुँचने से बच्चों की पढ़ाई, आजीविका कार्यों और सुरक्षा की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है।
जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित बहुउद्देश्यीय केंद्र ग्रामीण अंचलों में नई संभावनाएँ तैयार कर रहे हैं।
नगरी ब्लॉक के बोईरगांव में निर्मित नया बहुउद्देश्यीय केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आजीविका संबंधी गतिविधियों का केंद्र बन रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों को ज्ञानवर्धक शिक्षण सामग्री और खिलौने उपलब्ध कराए गए हैं। ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ, प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन भी यहीं प्राप्त होगा।
  50-सीटर बालक छात्रावास निर्माण नगरी विकासखंड के बाजार कुर्रीडीह में 50-सीटर बालक छात्रावास का निर्माण जारी है। इसका कार्य जनवरी तक पूर्ण हो जाएगा। छात्रावास तैयार होने के बाद कमार जनजाति के बच्चों को सुरक्षित आवास, भोजन और अध्ययन की सभी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
ग्राम पिपरहीभर्री में एकीकृत ग्राम योजना एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत सामाजिक एवं संसाधन मानचित्र, गैप एनालिसिस, लघुवनोपज प्रबंधन और आजीविका कार्ययोजनाओं का दस्तावेजीकरण किया गया है।
यह कार्य ग्रामीण समुदाय को अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और टिकाऊ विकास की दिशा में सशक्त आधार प्रदान करता है।
133 बसाहटों में त्वरित गतिविधियों की सौ फीसदी संतृप्ति
 जिले की 133 बसाहटों में त्वरित गतिविधियों की पूर्ण संतृप्ति हासिल की गई है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि प्रत्येक कमार परिवार तक योजना का लाभ समय पर पहुँचे। पीएमजनमन योजना के माध्यम से विकास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की रोशनी अब जिले की हर जनजातीय बसाहट तक पहुँच रही है।
दूरस्थ अंचलों में रहने वाले परिवार अब मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं और सुरक्षित, स्वस्थ तथा बेहतर जीवन की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहे हैं।</description><guid>794</guid><pubDate>25-Jul-2026 4:33:18 pm</pubDate></item><item><title> प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम है नंदनवन जंगल सफारी</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=793</link><description>-320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र
आलेख -धनंजय राठौर , संयुक्त संचालक, जनसंपर्क,अशोक कुमार चंद्रवंशी ,सहायक जनसंपर्क अधिकारी
 नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है। नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में नंदनवन मिनी जू के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से मिनी जू की मान्यता दी।
इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया। नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है। 30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं। 20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।
20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं। 20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।
50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं। नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा दीपाशा जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।
वनमंडलाधिकारी श्री थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। नंदनवन जंगल सफारी में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है। नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी मिलता है l</description><guid>793</guid><pubDate>24-Jul-2026 9:36:52 pm</pubDate></item><item><title>कॉमेडी को एक नया आयाम देने वाले महमूद, कभी ड्राइवर हुआ करते थे</title><link>https://chhattisgarhaaj.com/document.php?articleid=792</link><description>मेहमूद की पुण्यतिथि पर विशेष-23 जुलाई
_आलेख- प्रशांत शर्मा
लोगों को हंसाने की विलक्षण प्रतिभा के धनी प्रख्यात हास्य कलाकार महमूद को कॉमेडी को भारतीय फिल्मों का अभिन्न अंग बनाने का श्रेय जाता है। हंसी-मजाक में बड़ी खूबसूरती से जिंदगी का फलसफा बयान करने का हुनर रखने वाले इस कलाकार ने हास्य भूमिका को नए आयाम और मायने दिये।
महमूद ने भारतीय फिल्मों में महज औपचारिकता मानी जाने वाली कॉमेडी को एक अलग और विशेष स्थान दिलाया। उन्होंने कॉमेडी को एक नया स्तर और ऊंचाई देने के साथ-साथ यह भी साबित किया कि फिल्म का हास्य कलाकार उसके नायक पर भी भारी पड़ सकता है।
महमूद को भारतीय फिल्मों में कॉमेडी के नए युग की शुरुआत करने वाला कलाकार माना जाता है। इस फनकार ने कॉमेडी को भारतीय फिल्मों के कथानक का अंतरंग हिस्सा बनाया। उन्हीं के प्रयासों का नतीजा था कि 60 के दशक में फिल्मों पर कॉमेडी हावी होने लगी थी और महमूद अभिनय की इस विधा के बेताज बादशाह बन गए थे। महमूद ने 60 के दशक में अपने अभिनय की विशिष्ट शैली के जादू से हिन्दी फिल्मों में कॉमेडियन की भूमिका को विस्तार दिया और एक वक्त ऐसा भी आया जब महमूद दर्शकों के लिये अपरिहार्य बन गए।
महमूद का जन्म 29 सितम्बर 1932 को मुम्बई में हुआ था। अपने माता-पिता की आठ में से दूसरे नम्बर की संतान महमूद ने शुरुआत में बाल कलाकार के तौर पर कुछ फिल्मों में काम किया था।
बॉलीवुड में कदम रखने के लिए महमूद सभी तरह के प्रयास करते थे। महमूद ने इसके लिए ड्राइविंग तक सीख ली और निर्माता ज्ञान मुखर्जी के ड्राइवर बन गए। महमूद ने सोचा की अब उन्हें कलाकारों और निर्माता, निर्देशक के करीब जाने का मौका मिलेगा और हुआ भी कुछ ऐसा ही। यही से खुली महमूद की किस्मत और उन्हें दो बीघा जमीन , प्यासा जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने शुरू हो गए। 1958 में आई फिल्म परवरिश से महमूद को बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म में उन्होंने राजकपूर के भाई की भूमिका निभाई थी। महमूद के अभिनय को हर किसी ने पसंद किय। इसके बाद छोटी बहन फिल्म उनके करिअर की अहम फिल्म साबित हुई। इन फिल्मों की सफलता के बाद तो महमूद के लिए बॉलीवुड के दरवाजे पूरी तरह से खुल गए। महमूद ने फिल्म गुमनाम में एक दक्षिण भारतीय रसोइये का कालजयी किरदार अदा किया। उसके बाद उन्होंने प्यार किये जा, प्यार ही प्यार, ससुराल, लव इन टोक्यो और जिद्दी जैसी हिट फिल्में दीं।
बॉलीवुड में महमूद की धाक का अंदाज आप इस तरह से लगा सकते हैं कि उन्होंने अमिताभ बच्चन को पहला सोलो रोल दिया था। ये वही महमूद हैं जिन्होंने आर.डी बर्मन और पंचम दा जैसे संगीत के धुरंधरों को पहला ब्रेक दिया था। अपनी अनेक फिल्मों में महमूद नायक के किरदार पर भारी नजर आए। यह उनके अभिनय की खूबी थी कि दर्शक अक्सर नायक के बजाय उन्हें देखना पसंद करते थे।
फिल्मों में अपनी बहुविविध कॉमेडी से दर्शकों को दीवाना बनाने के बाद महमूद ने अपनी फिल्म निर्माण कम्पनी पर ध्यान देने का फैसला किया। उनकी पहली होम प्रोडक्शन फिल्म छोटे नवाब थी। बाद में उन्होंने बतौर निर्देशक सस्पेंस-कॉमेडी फिल्म भूत बंगला बनाई। जिसमें उन्होंने अपने दोस्त और संगीतकार आर. डी. बर्मन को भी अभिनय करने का मौका दिया। उसके बाद उनकी फिल्म पड़ोसन 60 के दशक की जबरदस्त हिट कॉमेडी फिल्म साबित हुई। पड़ोसन को हिंदी सिने जगत की श्रेष्ठ हास्य फिल्मों में गिना जाता है। इसमें सुनील दत्त भी एक अच्छे कॉमेडी कलाकार बनकर उभरे।
अभिनेता, निर्देशक, कथाकार और निर्माता के रूप में काम करने वाले महमूद ने बॉलीवुड के मौजूदा किंग शाहरुख खान को लेकर वर्ष 1996 में अपनी आखिरी फिल्म दुश्मन दुनिया बनाई , लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही। अपने जीवन के आखिरी दिनों में महमूद का स्वास्थ्य काफी खराब हो गया। उन्हें अनेक बीमारियां हो गई थी। वह इलाज के लिये अमेरिका गए जहां 23 जुलाई 2004 को उनका निधन हो गया। उनकी बीमारी का एक कारण उनका अत्यधिक धूम्रपान करना भी था।</description><guid>792</guid><pubDate>24-Jul-2026 9:05:32 pm</pubDate></item></channel></rss>