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- हर इंसान अपनी त्वचा को हेल्दी और खूबसूरत रखना चाहता है और इसी चाहत के ऊपर पूरी ब्यूटी इंडस्ट्री चल रही है. लेकिन हम कुछ देसी चीजों को इस्तेमाल करके भी त्वचा का स्वास्थ्य बरकरार रख सकते हैं और यह तरीका बजट फ्रेंडली भी होता है. इसी कड़ी में आपको बता दें कि सूरजमुखी के बीज का तेल कई ब्यूटी बेनिफिट्स देता है. जिनके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते हैं.सूरजमुखी के बीज के तेल के फायदे -अगर आप सूरजमुखी के बीज का तेल इस्तेमाल करते हैं, तो उससे आपको निम्नलिखित फायदे प्राप्त होंगे.सूरजमुखी के बीज का तेल मुंहासों से छुटकारा दिलाने के लिए फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण मुंहासों की इंफ्लामेशन को कम करते हैं और यह रोमछिद्रों को पोषण देकर टाइट बनाता है.सनफ्लावर सीड ऑयल में कई विटामिन, मिनरल्स और पोषक तत्व मौजूद होते हैं. जो त्वचा को पोषण देने के साथ रंगत निखारते हैं. इनमें प्रमुख रूप से कॉपर, जिंक, आयरन, फैटी एसिड, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन ई आदि शामिल हैं.अगर आपकी त्वचा से नमी खो गई है या फिर आपकी स्किन ड्राई है, तो आपके लिए भी सनफ्लावर सीड ऑयल मददगार हो सकता है. यह त्वचा को नमी प्रदान करता है, जिससे वह हाइड्रेट रहती है.इस तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ती उम्र के लक्षण जैसे झुर्रियां, झाइयां आदि से राहत दिलाते हैं.इस्तेमाल करने का तरीका---सूरजमुखी के बीज का तेल इस्तेमाल करने के लिए इसकी कुछ बूंदें लें और हथेलियों में रगड़कर त्वचा पर मसाज करें.
- बचपन में आपने कई बार अमरूद और आम की पत्तियों को चबाया होगा। आपको तब शायद मालूम न हो कि अमरूद की पत्तियों को चबाने से आपके पेट की ऐंठन ठीक हो जाती है तो, आम की पत्तियों को चबाने से डायबिटीज नहीं होता। जबकि ये सब औषधीय गुणों से भरपूर हैं और इन पत्तों से निकलने वाला अर्क कई बीमारियों का रामबाण इलाज है। दरअसल, आयुर्वेद में कुछ जड़ी बूटियां औषधीय पेड़ों और पौधों की पत्तियों से बना करती हैं। आज हम आपको ऐसी 10 पत्तियों के बारे में बताएंगे जो कि आपके आस-पास ही मिलती हैं और जिन्हें खाली पेट चबा कर आप कई बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं।1. नीम की पत्तियांनीम की पत्तियां अपने आप में एंटीबैक्टीरियल और एंटी एलर्जिक गुणों से भरपूर हैं। रोजाना इनका खाली पेट सेवन करने से पेट में कीड़े नहीं होंगे। ये खून की साफ करती हैं और त्वचा को अंदर से स्वस्थ बनाती हैं। साथ ही नीम की पत्तियों का खाली पेट सेवन करने से ब्लड वेसेल्स हेल्दी रहती हैं और दिल की बीमारियां नहीं होतीं। साथ ही ये बुखार, डायबिटीज, मसूड़ों की बीमारी और लिवर की समस्याओं से भी बचाव में मदद करती हैं।2. तुलसी की पत्तियांतुलसी की पत्तियों में एंटीवायरल गुण होते हैं जो कि मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं। साथ ही इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन को कम करने में मदद करती है। यहां तक कि जोड़ों के दर्द से भी इसकी पत्तियां आपको बचाती हैं। इसके अलावा इसके एंटीबैक्टीरियल गुण श्वसन रोगों, मूत्र रोगों, पेट और त्वचा के संक्रमण से भी लडऩे में मदद करते हैं। साथ ही रोजोना तुलसी की 4 पत्तियों को खाना इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करते हैं।3. पुदीनापुदीने के पत्ते में एंटीएसिडिक गुण होते हैं यानी कि ये एसिडिटी को कम करता है। इसलिए जिन लोगों को रेगुलर गैस की समस्या रहती हैं उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही पुदीना पेट का पीएच सही करता है और मेटाबोलिज्म तेज करता है। इसे सुबह-सुबह चबाने से मौसमी एलर्जी, अस्थमा और सर्दी-जुकाम को कम करने में मदद करता है।4. करी पत्ताकरी पत्ता खाली पेट चबाने का सबसे ज्यादा फायदा डायबिटीज के मरीजों को होता है। दरअसल, ये शरीर में शुगर को कम करता है और पेनक्रियाज को हेल्दी रख कर इंसुलिन के प्रोडक्शन में मदद करता है। ये कब्ज और डायरिया को भी ठीक करने में मदद करता है। करी पत्ता खाने से वजन संतुलित करता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है और स्किन और बालों को भी हेल्दी बनाने में मदद करता है।5. अजवाइन के पत्तेतेज पेट दर्द हो रहा है या फिर खाने के बाद एसिडिटी महसूस हो रही है तो, अजवाइन के पत्तों का सेवन करना चाहिए। इन पत्तों में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं जिस चबा कर खाने से पेट के इंफेक्शन को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही सर्दी-जुकाम में इसकी पत्तियों को शहद के साथ मिला कर खाने से आपको सर्दी-जुकाम से छुटकारा मिल सकता है। इसके अलावा आर्थराइटिस के दर्द को दूर करने और सूजन से बचाव के लिए भी आप अजवाइन के पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं।6. जामुन के पत्तेजामुक के पत्ते का सेवन कर आप शुगर को कंट्रोल कर सकते हैं। दरअसल, इसके पत्ते का अर्क इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे शुगर तेजी से पचाता है डायबिटीज में ये बहुत फायदेमंद है। साथ ही मुंह के छालों में भी इसे चबा कर खाना माउथ इंफेक्शन को कम कर सकता है। इसके अलावा अपच और कमजोर पाचनतंत्र को मजबूत बनाने में भी जामुन के पत्ते मददगार हैं।7. पान के पत्तेपान के पत्ते एंटी डायबिटिक गुणों से भरपूर है। साथ ही ये हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करने में मदद करता है। पान के पत्ते एंटी बैक्टीरियल से भी भरपूर है जो कि इंफेक्शन को रोकने में मदद करता है। पान के पत्ते माउथ फ्रेशनर की तरह काम करते हैं और मुंह को साफ रखते हैं।8. धनियाधनिया ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है। ये कुछ ऐसे एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है जो कि इम्यूनिटी बढ़ाता है। साथ ही धनिया के पत्ते कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मददगार है। ये दिल की सेहत बनाता है। इसके अलावा ये वेट लॉस करने वाले के लिए भी मददगार है क्योंकि ये बॉवेल मूवमेंट तेज करता है और फैट पचाने में मददगार है।9. जिन्कगोजिन्कगो लीफ एक्सट्रेक्ट का उपयोग अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, थकान और टिनिटस जैसी विभिन्न स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है। इसका उपयोग स्मृति में सुधार और मेमोरी लॉस जैसे अन्य मस्तिष्क विकारों को रोकने के लिए भी किया जाता है। पर ध्यान रहे कि इसके ज्यादा इस्तेमाल से बचें नहीं तो ये नुकसानदायक हो सकता है।10. सौंफ का पत्तासौंफ के पत्ते पित्त को शांत करता है। ये भूख बढ़ाता है और भोजन को पचाता है। साथ ही ये मूड भी फ्रेश करता है। ये हृदय, मस्तिष्क तथा शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी होता है। गठिया आदि वात रोगों को कम करता है और अपच और कब्ज की समस्या में भी फायदेमंद है।
- पपीता सेहत के लिहाज से हमेशा से ही फायदेमंद माना गया है। पपीते में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा होती है, जिसकी वजह से ये डायबिटीज, दिल की बीमारियों और यहां तक कि अल्जाइमर में भी खाना फायदेमंद है। इसके अलावा पपीते के कुछ खास गुण होते हैं जैसे कि इसमें ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन कैरोटिनॉयड्स होते हैं, तो वहीं इसमें विटामिन सी और विटामिन ई भी होता है जो कि इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ त्वचा और बालों के लिए भी कई प्रकार से लाभदायक है। ये त्वचा के लिए फायदेमंद है। दरअसल, ये शरीर को डिटॉक्स करता है और खून को साफ रखता है जिससे त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है। सुबह-सुबह नाश्ते से पहले लगभग 1 कटोरी पपीता काला नमक मिला कर खाने से शरीर को ज्यादा लाभ पहुंचता है।1. पेट फूलने की समस्या में फायदेमंदखाली पेट पपीता खाने से आप पेट फूलने की समस्या से बच सकते हैं। खराब पाचन वाले लोगों के लिए रोजाना पपीता खाना जरूरी है। दरअसल, ब्लोटिंग कई बार स्ट्रेस के कारण भी होता है। पपीता पाचन तंत्र पर तनाव को दूर करती है और भोजन को तेजी से मेटाबोलाइज करने में मदद करती है। पपीते में पपैन नामक एंजाइम होता है, जो भोजन को तेजी से तोडऩे में मदद करता है और एसिडिटी को रोकता है। साथ ही इसके कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स पेट में सूजन को कम करने में भी मदद करते हैं। इस तरह खाली पेट पपीता खाना ब्लॉटिंग का इलाज कर सकता है।2. कब्ज दूर करता हैपपीता कब्ज के मरीजों के लिए रामबाण इलाज है। इसमें फाइबर होता है जो कि बॉवेल मूवमेंट को तेज करता है और मल को सॉफ्ट करता है जिससे आप आसानी से मल त्याग कर सकें। इसके अलावा पपीता एक ऐसा फल है जिसमें पानी की मात्रा अधिक होती है जो कब्ज की समस्या को रोकता है और एक स्वस्थ पाचन तंत्र को बढ़ावा देता है। पपीते में मौजूद एक और एंजाइम काइमोपापेन सूजन का इलाज करता है और चयापचय में सुधार करता है। इसके अतिरिक्त, खाली पेट पपीता खाने से अपच, सूजन, कब्ज और पेट खराब होने जैसी पाचन संबंधी कई समस्याएं ठीक हो जाती हैं।3. पीरियड्स के दर्द और ब्लॉटिंग को कम करता हैपीरियड्स के दर्द और ब्लॉटिंग को कम करने में पपीता आपकी मदद कर सकता है। दरअसल, पपीता एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है और पीरियड्स के दर्द और ब्लॉटिंग को आसानी से कम कर सकता है। ये ऐंठन को कम कर सकता है। पपीते में मौजूद कैरोटीन गर्भाशय के संकुचन को प्रोत्साहित करता है और पीरियड्स को प्रेरित करता है जिस वजह से आप अनियमित पीरियड्स से बच सकते हैं। साथ ही कैरोटीन एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्पादन को भी बढ़ाता है, जिससे पीरियड्स और प्रेग्नेंसी दोनों ही हेल्दी तरीके से रेगुलेट होते हैं।4. डायबिटीज में फायदेमंदडायबिटीज के मरीजों के लिए खाली पेट पपीता खाना बहुत फायदेमंद है। दरअसल, पपीता लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड्स में से है जो कि शुगर को कम करने में मदद करता है। इसे खाली पेट खाने से शरीर में शुगर की मात्रा अचानक से नहीं बढ़ती और पूरा दिन शुगर रेगुलेट रहता है। रेगुलर इसे खाली पेट खाने से आप पाएंगे कि डायबिटीज के कई लक्षण कम होने लगते है। इसके अलावा ये डायबिटीज में कब्ज की समस्या को भी दूर करता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट डिसफंक्शन को भी रोकता है।5. कोलेस्ट्रॉल कम करता हैकोलेस्ट्रॉल मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का कारण बनता है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपना कोलेस्ट्रॉल कट्रोल करें। खाली पेट पपीता खाने से इसका फाइबर आंतों में जमे बैड कोलेस्ट्रॉल और फैट को कम करने में मदद करता है। साथ ही ये लिपोप्रोटीन को भी कम करता है और हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव में मदद करता है।
- शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सभी लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ और पौष्टिक आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। असल में इसके पीछे का उद्देश्य शरीर को प्रोटीन, विटामिन और आवश्यक खनिज की पूर्ति करना होता है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण कई प्रकार के गंभीर रोगों का खतरा हो जाता है, शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाना भी उन्हीं में से एक है। हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का प्रोटीन है, जिसके कमी के कारण शरीर में खून की मात्रा घट जाती है। इस स्थिति में एनीमिया रोग होने का खतरा हो सकता है, कई स्थितियों में एनीमिया जानलेवा भी हो सकती है।गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में हीमोग्लोबिन की कमी होने का खतरा अधिक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अगर स्वस्थ आहार का रोजाना सेवन किया जाए तो हीमोग्लोबिन की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि हीमोग्लोबिन की कमी कितनी खतरनाक हो सकती है, साथ ही किन चीजों का सेवन करके इस समस्या से बचे रह सकते हैं?हीमोग्लोबिन की कमी बन सकती है गंभीर समस्याओं का कारणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हीमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिया का खतरा हो सकता है। यदि परीक्षण में हीमोग्लोबिन की मात्रा पुरुषों में 13.5 ग्राम/ डीएल और महिलाओं में 12 ग्राम/ डीएल से कम आती है तो इस स्थिति को एनीमिया माना जाता है। एनीमिया कई अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकती है, जैसे कि किडनी की बीमारी और कैंसर के लिए की गई कीमोथेरेपी (जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है) आदि।हीमोग्लोबिन की कमी के लक्षणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को इसके प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है। समस्या का अगर जल्दी निदान हो जाए तो रोग को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि आप में लंबे समय से यह समस्याएं बनी हुई हैं तो सावधान हो जाएं।कमजोरी या थकान।सास लेने में दिक्कत।सिर चकरानातेज़ या अनियमित दिल की धड़कनसिरदर्द, हाथ और पैर का ठंडा होना।त्वचा में पीलेपन की समस्या।छाती में दर्द।हीमोग्लोबिन की कमी को कैसे दूर करें?स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सभी लोगों को आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आहार में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि मांस, गहरे हरे पत्ते वाली सब्जियां, सूखे मेवे और नट्स को जरूर शामिल करना चाहिए। मांस और डेयरी उत्पाद विटामिन-बी12 के अच्छे स्रोत हैं वहीं फोलिक एसिड के लिए खट्टे फलों के रस, फलियां और अनाज का सेवन किया जा सकता है। यह सभी शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
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आलूबुखारा एक कम कैलोरी वाला फल है, जो फाइबर, विटामिन (ए, के और सी), कॉपर, मैंगनीज, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता हैै। ये पोषक तत्व एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण प्रदान करते हैै। इससे हृदय और पाचन तंत्र स्वस्थ रहता हैै। स्वाद में खट्टा-मीठा आलूबुखारा गर्मियों में आने वाला मौसमी फल हैै।
आलुबुखारा गहरे बैंगनी-लाल या हरे-पीले रंग में पाया जा सकता हैै। यह फल कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, फोलेट और विटामिन जैसे ए, सी, और के का एक अच्छा स्रोत है, जो कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ देता हैै। आलूबुखारा में पाए जाने वाले फाइबर्स, शरीर के अंगों के सुचारू बनाते हैं और पाचन क्रिया को भी दुरूस्त करते हैंै। इसके साथ ही यह सौंदर्य बढ़ाने के भी काम आता हैै। इस फल को अंग्रेजी में प्लम कहते हैं।
वजन कम करने में मददगार
आलूबुखारा वजन कम करने में मददगार होता हैै। आलूबुखारे के 100 ग्राम में लगभग 46 कैलोरी होती हैै। इसमें अन्य फलों की तुलना में कैलोरी काफी कम पाई जाती हैै। इस कारण से यह वजन नियंत्रित करने में भी सहायक होता है।
आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद
आलूबुखारे में मौजूद विटामिन-सी आंखों और त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता हैै। इसके इलावा इसमें विटामिन-के एवं बी 6 भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैै।
स्वस्थ हृदय के लिए फायदेमंद
आलूबुखारा कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता हैै। इसमें ओमेगा -3 भरपूर मात्रा में होता हैै। ये हृदय से जुड़ी कई बीमारियों को दूर करने में मदद करता हैै। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता हैै।
हड्डियों को बनाता है मजबूत
एक अध्ययन के अनुसार, आलूबुखारा ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया जैसी हड्डियों के जोखिम को कम करने में मदद करता हैै। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैंै। ये हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
दिमाग को रखे स्वस्थ
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स आपकी त्वचा के साथ ही दिमाग को भी स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं। यह मानसिक तनाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाता हैै। - मुंबई। बॉलीवुड एक्टर अरशद वारसी ने अपने लेटेस्ट बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से फैंस को चौंका दिया है। अरशद ने हाल ही में अपनी दो तस्वीरों का कोलॉज पोस्ट किया, जिसमें उनके बाइसेप्स और मसल्स इतने सुडौल दिख रहे हैं कि फैंस ने उनकी तुलना जॉन सीना से करनी शुरू कर दी। अरशद ने पोस्ट किया है कि ये ट्रांसफॉर्मेशन उन्होंने अपने नए प्रोजक्ट के लिए किया है। उन्होंने लिखा, " अभी लंबा रास्ता तय करना है, लेकिन अगले प्रोजेक्ट के लिए शेप में आना है।" अरशद के इस बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन की कई अन्य एक्टर्स ने भी तारीफ की है। हालांकि अरशद ने ये साफ नहीं किया है कि उनका अगला प्रोजक्ट क्या होने वाला है।गौरतलब है कि 5 महीने पहले ही अरशद ने लॉकडाउन के दौरान बढ़े वजन को लगभग 6 किलो तक कम किया था। इसकी जानकारी भी उन्होंने सोशल मीडिया पर दी थी कि उन्होंने एक महीने में ही काफी वजन कम किया था। 52 साल की उम्र में अरशद जिस तरह से अपने रोल्स के मुताबिक अपने बॉडी को ढाल रहे हैं, वो तमाम फिटनेस फ्रीक्स के लिए प्रेरणा हैं।अरशद वारसी को पिछले वेस लॉस के बारे में पढ़कर जब बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन चौंक गई थीं। जब रवीना ने अरशद से पूछा कि उन्होंने ऐसा कैसे किया? तो अरशद वारसी ने रवीना को ट्वीट कर बताया "एक महीने के लिए बहुत सख्त आहार पर था। जीरो काब्र्स, कार्डियो और वजन प्रशिक्षण से 30 दिनों में 6 किलोग्राम वजन कम कर पाया।बता दें कि अरशद वारसी का वेट लॉस सीक्रेट सबसे मुख्य अंग है केटोजेनिक आहार और इंटरमिटेंट डाइट प्लान । उन्होंने बताया कि इन दोनों डाइट को उन्होंने एक साथ जोड़ कर इसका सख्ती से पालन किया। साथ ही अरशद बताते हैं कि उन्होंने इसके साथ विशेष प्रकार के कार्डियो व्यायाम के साथ रुक-रुक किया और कीटो डाइट में रहने के दौरान ट्रेडमिल पर कुछ खास व्यायाम किए।क्या आप भी कीटो डाइट और इंटरमिटेंट डाइट प्लान को एक साथ मिला सकते हैं?भले ही केटोजेनिक आहार और इंटरमिटेंट डाइट प्लान दो अलग-अलग योजनाएं हैं, जो वजन घटाने-हानि को बढ़ावा देने वाले परिणामों के साथ आते हैं, पर क्या इन्हें एक साथ भी फॉलो किया जा सकता है। तो जी हां, बिलकुल किया जा सकता है। दरअसल दो आहार योजनाओं का संयोजन बहुत से लोग तेजी से वजन घटाने का परिणाम पाने के लिए करते हैं। केटोजेनिक आहार एक कम कार्ब आहार है, जो आपके कार्ब सेवन को दिन में 20-50 काब्र्स तक सीमित करता है, वहीं इंटरमिटेंट डाइट प्लान में निर्धारित भोजन और उपवास शामिल होते हैं, जो कई स्वरूपों में किया जा सकता है।कैसे फॉलो करें कीटो डाइट और इंटरमिटेंट डाइट प्लान को एक साथकेटोजेनिक आहार और इंटरमिटेंट डाइट प्लान दो आहार योजनाओं का संयोजन एक प्रभावी संभावना की तरह लगता है, लेकिन केवल सही ढंग से किया जाए, तभी आप इसका फायदा उठा सकते हैं। दरअसल ऐसा करने से इसका सबसे बड़ा अंतर आपकी भूख पर पड़ता है। दरअसल इसमें आपको इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान कीटो डाइट फॉलो करना होता है। ऐसे में आप अपने प्रोटीन और वसा के सेवन को नियंत्रित करते हुए अपने आहार में कार्ब सेवन को प्रतिबंधित करते हैं, जिससे आपको फास्ट के दौरान बहुत भूख न लगे। इसका एक और फायदा ये होता है कि आपका फैट आसानी से बर्न होता है। क्योंकि इंटरमिटेंट फास्टिंग , थर्मोजेनेसिस या गर्मी उत्पादन को बढ़ावा देकर चयापचय बढ़ाता है, जो शरीर में जिद्दी वसा भंडार का उपयोग करके उसे जलाता है। वहीं कीटो-समृद्ध खाद्य पदार्थों के साथ, आपका शरीर वेट लॉस करने के लिए भी ऊर्जा देता है, जिसकी मदद से आप कार्डियो व्यायाम आदि भी अच्छे से कर पाते हैं। इन तरह ये सभी संयोजन आपको आसानी से वजन घटाने में मदद करते हैं।
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भारत में चाय के शौकीनों की भरमार है और इन शौकीनों में ऐसे भी कई लोग हैं, जो शरीर की चर्बी से छुटकारा पाना चाहते हैं। इन लोगों के लिए इससे बड़ी खुशी की कोई बात नहीं होगी, अगर इनकी मनपसंद चाय ही वेट लॉस में मदद करने लगे। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी एक चीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे चाय में मिलाकर पीने से तेजी से आपका फैट बर्न होने लगता है। फैट बर्न करने वाली इस जड़ी-बूटी का नाम दालचीनी है। जिसे रोजाना चाय में मिलाकर पीने से शरीर की चर्बी घटाई जा सकती है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं....
वजन घटाने में दालचीनी कैसे मदद करती है?
शरीर का वजन और चर्बी घटाने के लिए दालचीनी को सहायक माना जाता है। साथ ही यह जड़ी-बूटी कई तरह से इस्तेमाल की जा सकती है। साल 2012 के दौरान जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल साइंस एंड विटामिनोलॉजी में प्रकाशित स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया था। स्टडी में दालचीनी को चूहों की आंत की चर्बी घटाने में मददगार पाया गया। वहीं, दालचीनी डायबिटीज से राहत दिलाने में भी फायदेमंद देखी गई है।
फैट बर्न करने के लिए चाय कैसे बनाएं
अगर आप चर्बी घटाने वाली चाय बनाना चाहते हैं, तो अपनी चाय को इस तरह बनाएं। सबसे पहले एक बर्तन में दो कप पानी डालकर उसे गर्म करें। अब इसमें एक इंच अदरक और एक इंच ही दालचीनी डालकर पानी को उबलने दें। पानी जब उबालें, तो बर्तन को ढंक दें। थोड़ी देर बाद इस पानी में आधा चम्मच ग्रीन टी डालकर गैस बंद कर दें। इस चाय को करीब 3-4 मिनट के लिए रखा रहने दें और फिर छानकर एक चम्मच शहद और नींबू का रस डालकर सेवन करें।
- कंदमूल को कई जगहों पर रामफल भी कहा जाता है। इसके पीछे कहानी है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान इसे ही खाया था। दरअसल, ये एक जंगली फल है जिसे लोग अपने खेतों में लगाते तो नहीं है, पर कहीं-कहीं इसका पेड़ अपने आप ही उग आता है। पर इस जंगली फल में कई ऐसे आयुर्वेदिक लाभ छिपे हैं जो कि आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। कंदमूल फल विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन और कुछ फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर हैं। इसे वे लोग ज्यादा खाते हैं जिन्हें जोड़ों में दर्द व गठिया जैसी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा ये इम्यूनिटी बू्स्टर फल भी है जिसे आप सर्दी-जुकाम में भी खा सकते हैं। इसी तरह कंदमूल फल खाने के फायदे कई हैं, आइए हम आपको बताते हैं इनके बारे में विस्तार से।1. वजन घटाने में मददगारकंदमूल फल में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। साथ ही इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है जिसकी वजह से भूख को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। ये दोनों ही चीजें वजन घटाने के लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, फाइबर मेटाबोलिज्म को तेज करता है और पाचन क्रिया को सक्रिय रखने में मदद करता है। इससे फैट आसानी से पचता है और वजन तेजी से घटाया जा सकता है।2. बालों के लिए फायदेमंदकंदमूल फल बालों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। दरअसल, जिन लोगों के बाल तेजी से झड़ रहे हैं या सफेद हो रहे हैं उन लोगों के लिए इसे खाना बहुत फायदेमंद है। दरअसल, कंदमूल फल में कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि सफेद बालों को काला करने में मददगार है। इसके अलावा इसका विटामिन सी बालों को मजबूत बनाने के साथ स्कैल्प को हेल्दी रखने में मदद करता है। साथ ही जिन लोगों में आयरन की कमी से बाल झड़ रहे हैं उनके बालों को भी ये झडऩे से रोकता है।3. कोलेस्ट्रॉल कम करता हैकंदमूल फल हृदय संबंधी समस्याओं के विकास के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। फल में विटामिन सी होता है जो कि बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है। साथ ही ये ब्लड वेसेल्स को भी हेल्दी रखता है और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में ब्लड वेसेल्स को फैलाने और ब्लड सर्कुलेशन को आरामदायक बनाने में मदद करता है।4. विटामिन बी6 से भरपूर हैकंदमूल फल में विटामिन बी6 होता है जो कि शरीर में फैट के पाचन को सही रखने में मदद करता है। इस तरह ये शरीर में फैट के बढऩे से होने वाली बीमारियों जैसे कि मोटापा और दिल की बीमारियों से बचाता है। साथ ही ये विटामिन किडनी में पथरी की समस्या को भी रोकता है।5. हीमोग्लोबिन बढ़ाता हैजिन लोगों के शरीर में आयरन की कमी होती है उनमें हीमोग्लोबिन की कमी भी पाई जाती है। ऐसे में आयरन से भरपूर कंदमूल फल खाने से शरीर मे आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है और हीमोग्लोबिन के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इस तरह ये कोशिकाओं को हेल्दी रख कर शरीर में ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन पहुंचाने में मदद करता है। इसके अलावा आयरन की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है जिसे भी इसके सेवन से कम किया जा सकता है।कंद मूल फल से आप दूध, मेवा और दालचीनी मिला कर एक स्मूदी तैयार कर सकते हैं और इसे हफ्ते में तीन बार पी सकते हैं। ये एक वेट लॉस ड्रिंक की तरह काम करेगा। साथ ही आप कंदमूल मूल फल की सब्जी बना कर या फिर भजिया बन कर भी खा सकते हैं। इसके अलावा आप वेट लॉस के लिए इसे उबाल कर और अपने सलाद में शामिल करके भी खा सकते हैं। साथ ही इसे उबाल कर और नमक मिला कर खाने से भी शरीर को सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी परेशानियों से भी बचाया जा सकता है।
- हमारे आसपास मौजूद लगभग हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से ग्रसित है, बस अंतर ये है कि कोई काफी गंभीर बीमारी का शिकार है, तो कोई किसी नॉर्मल बीमारी का। लेकिन आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में आपको हार्ट के मरीज काफी संख्या में मिल जाएंगे। दिल से जुड़ी बीमारियां काफी घातक होती हैं और ये अंदर ही अंदर मरीज पर अटैक करती हैं। हर साल 29 सितंबर के दिन विश्व हार्ट डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य होता है कि लोगों को दिल से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करना, उन्हें बताना कि वे कैसे अपने दिल का ख्याल रख सकते हैं क्योंकि जब दिल सुरक्षित रहेगा, तभी व्यक्ति स्वस्थ रह पाएगा। आमतौर पर लोग जानते हैं कि जब सीने में दर्द होता है, तभी हार्ट अटैक आने का खतरा हो सकता है। लेकिन हार्ट के कई और संकेत भी हो सकते हैं, जिन्हें जानना बेहद जरूरी है।सांस का फूलनाये तो हम सभी जानते हैं कि सीने में दर्द होना और सांस लेने में तकलीफ होना, हार्ट के फेल होने का सबसे आम लक्षण है। लेकिन अगर आप कुछ सीढ़ियां चढ़ते ही थक जाते हैं और आपको सांस लेने में दिक्कतें पैदा होती हैं और यहां तक कि बैठने पर भी आपको तकलीफ होती है, तो ऐसे में ये संकेत हो सकता है कि आपको दिल की बीमारी हो सकती है।पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्दजब दिल का दौरा पड़ता है, तो मरीज को पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द होता है। लेकिन अगर आपको इसके साथ ही सीने में किसी तरह की बेचैनी हो रही है, भारीपन महसूस हो रहा है, मितली या उल्टी करने का मन कर रहा है, तो ये भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।भूख कम होना, सूजन होनाजब व्यक्ति के हार्ट फेल की स्थिति बढ़ने लगती है, तो उसे भूख कम लगने लगती है, बार-बार पेशाब आने लगता है और साथ ही दिल भी बहुत तेजी से धड़कना शुरू कर देता है। कई बार हम इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये हार्ट के फेल होने के संकेत हो सकते हैं। इसलिए इनका ध्यान रखना चाहिए।ऐसे रखें अपना ध्यान-हार्ट अटैक से बचने के लिए ज्यादा कैलरी वाले खाने से बचना चाहिए।-दिल को स्वस्थ रखने के लिए अखरोट, बादाम, अलसी, सोयाबीन और साल्मन मछली का सेवन किया जा सकता है।
- दांतों में दर्द की समस्या कभी भी किसी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. कई बार ठंडी या गर्म चीजें खाने से दांतों में दर्द शुरू हो जाता है. ऐसा होने पर मसूड़ों में दर्द और सूजन की समस्या हो सकती है. कई बार दांतों का दर्द इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि खानेपीने में दिक्कत होने लगती है. हालांकि इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए कुछ टिप्स हैं, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं.आयुर्वेद डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसारद, दांतों के दर्द को कम करने के लिए आप घर में मौजूद चीजों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आपको किसी भी चीजें से इंफेक्शन होने का डर रहता है तो किसी भी उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. नीचे जानिए दांत दर्द से राहत दिलाने वाले घरेलू उपचार.1. लहसुन का इस्तेमाल करेंदांतों के दर्द के मामले में भी लहसुन किसी औषधी से कम नहीं है. इसके लिए आपको 2 से 3 लहसुन की कलियों को लेकर अच्छे से पीसकर एफेक्टेड एरिया में लगाना है. इस उपाय को तब तक करना है जब तक आपके दांतों का दर्द नहीं चला जाता है.2. कोल्ड कंप्रेस का इस्तेमाल करेंइसके लिए तौलिए में थोड़ी सी आईस डालकर रख लें और अपने दांतों के जबड़ों पर रखें. इससे आपको दांतों के झझनाहट और दर्द से आराम मिलेगा.3. लौंग का तेल लगाएंलौंग में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है. इसके लिए आपको लौंग के तेल में कॉटन के बॉल्स को डूबाकर एफेक्टेड एरिया में लगाना है. कुछ देर बाद आपको दांतों के दर्द से आराम मिल जाएगा.4. नमक के पानी से मुंह धोनाएक कप गुनगुना पानी लें और उसमें थोड़ा सा नमक मिलाएं और गरारे कर लें. ये मुंह के इंफेक्शन को कम कर दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है. हालांकि अगर दर्द के बाद सूजन आ जाती है तो नमक वाला पानी का इस्तेमाल करने से बचें. ऐसा करने की बजाय अपने डॉक्टर की सलाह लें.
- छोले भटूरे से लेकर फ्रेंच फ्राइज तक, सभी तले हुए फूड्स स्वादिष्ट होते हैं और हम अक्सर ज्यादा खा लेते हैं जो आगे चलकर बहुत ज्यादा परेशानी की वजह बनते हैं। अगर आप अपने पसंदीदा डीप-फ्राइड भोजन की सिनफुल सर्विंग में शामिल हो जाते हैं, तो यहां 6 उपाय हैं जो आप कर सकते हैं इससे आपको आराम मिलेगा....1. गुनगुना पानी पिएंजब भी आपको लगे कि आपका पेट भर गया है, भोजन के 30-45 मिनट बाद गुनगुना पानी पीना शुरू कर दें। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी पोषक तत्वों और वेस्ट प्रोडक्ट्स के लिए भी कैरियर का काम करता है। गुनगुना पानी पोषक तत्वों को सुपाच्य रूप में तोडऩे में मदद करता है और आप हल्का महसूस करने लगते हैं।2. डिटॉक्स ड्रिंकशरीर को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है नींबू पानी पीना। ये डिटॉक्स ड्रिंक ऑयली फूड्स के सेवन के बाद जमा हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। ये वजन घटाने में भी मदद करता है।3. एक छोटी सी सैर करेंविशेषज्ञों के अनुसार, भारी भोजन के 20 मिनट बाद चलने से पाचन में सुधार होता है और ये बेहतर पेट की मोटिलिटी को बढ़ावा देता है और वजन घटाने में मदद करता है।4. प्रोबायोटिक्स खाएंये तय करें कि आप भारी भोजन के 20-25 मिनट के बाद कुछ प्रोबायोटिक्स खाते हैं। प्रोबायोटिक्स डाइजेस्टिव हेल्थ को बैलेंस करने में मदद करते हैं और गट फ्लोरा और इम्युनिटी में भी सुधार करते हैं। सबसे प्रभावी प्रोबायोटिक जो आपके पास हो सकता है वो है दही।5. फल खाएं60 मिनट के अंतराल के बाद, फाइबर वाले फलों का एक छोटा सा हिस्सा लें। वो कब्ज से बचने में मदद करते हैं और पाचन तंत्र को भी बढ़ावा देते हैं। साथ ही, पाचन तंत्र के कामकाज में सुधार के लिए अगले कुछ भोजन में ज्यादा फल और सब्जियां खाने का सुझाव दिया जाता है।6. अपने भोजन को कैलक्यूलेट करेंएक बार जब आप शरीर से ज्यादा भर जाते हैं, तो ये तय करें कि आपके अगले दो भोजन बहुत हल्के और पचाने में आसान हो । शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए लिक्विड डाइट का पालन करने और फाइबर वाले फूड आइटम्स का सेवन करने का सुझाव दिया जाता है जो पाचन तंत्र को सुचारू कर सकते हैं।--
- शरीर की सफाई और तरोताजा महसूस करने के लिए नहाना काफी फायदेमंद है, लेकिन आप ने राजा-रानियों के बारे में भी सुना होगा कि वो दूध से नहाते थे। आप भी मिल्क बाथ ले सकते हैं यानी दूध से नहा सकते हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कि दूध से नहाने पर आपको कई बेहतरीन फायदे प्राप्त होंगे। इन फायदों को पाने के लिए आपको सिर्फ अपने नहाने के पानी में एक कटोरी दूध मिलाना है। इसके लिए आप सामान्य दूध, नारियल का दूध, बकरी का दूध, सोया मिल्क आदि में से कुछ भी इस्तेमाल कर सकते हैं।-दूध में मौजूद प्रोटीन, फैट, विटामिन, मिनरल और लैक्टिक एसिड ड्राई स्किन को नमी पहुंचाते हैं और डेड सेल्स साफ करने में मदद करते हैं।- एक स्टडी के मुताबिक मिल्क बाथ से एक्जिमा जैसे स्किन इंफेक्शन से राहत मिल सकती है।-नहाने के पानी दूध मिलाने से सोरायसिस के लक्षणों में कमी आ सकती है। इन लक्षणों में खुजली, त्वचा पर चकत्ते पडऩा आदि शामिल हैं।-अगर आप पॉइजन इवी पौधे के संपर्क में आए हैं और उससे खुजली, लालिमा या इंफ्लामेशन हो रही है, तो मिल्क बाथ लेने से राहत मिल सकती है।-दूध में मौजूद विटामिन ए, विटामिन डी, प्रोटीन, फैट, अमिनो एसिड सनबर्न से प्रभावित त्वचा को शांत करने में मदद कर सकते हैं।- नहाने के लिए रखें दूध पानी में यदि लाल देसी गुलाब की पंखुडिय़ां भी डाल दी जाएं, तो पानी में इसकी खूशबू रच-बस जाएगी और आपको एक अलग तरह की ताजगी महसूस होगी। आप इसमें गुलाब जल भी डाल सकते हैं।-----
- कलौंजी यानी करायत खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है पर ये बालों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। कलौंजी में फैटी एसिड मौजूद होता है जिससे बालों को पोषण मिलता है। कलौंजी में मौजूद जरूरी पोषक तत्व और विटामिन बालों को मजबूत बनाते हैं और बाल झडऩे की समस्या को दूर करते हैं। कलौंजी में आयरन, सोडियम, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं। जिन लोगों को बाल झडऩे की समस्या होती है उन्हें कलौंजी का हेयर पैक लगाकर इस्तेमाल करना चाहिए।कलौंजी हेयर पैक कैसे बनाएं?कलौंजी का हेयर पैक बनाने के लिए कलौंजी को पीसकर रख लें।अब एक बाउल में मेथी दाने को पीसकर उसका पाउडर डालें। अब बाउल में एलोवेरा जेल, दही को एड करें। अगर आपको नींबू से एलर्जी नहीं है तो एक चम्मच नींबू का रस भी एड करें। अब इस मिश्रण में पीसी हुई कलौंजी का पाउडर मिला दें।कलौंजी का हेयर पैक कैसे लगाएं?बालों को शैम्पू करके साफ करके सुखा लें। कलौंजी का हेयर पैक लगाने के लिए बालों को खोलकर सुलझा लें। एक-एक लट को अलग करके उसकी जड़ों से हेयर पैक को लगाना शुरू करें। जब पूरे बालों में हेयर पैक लग जाए तो उसे 4 घंटों के लिए छोड़ दें। जब हेयर पैक सूख जाए तो साफ पानी से बालों को धो लें। हेयर पैक लगाने के बाद आपको बालों पर शैम्पू या कंडीशनर नहीं लगाना है।कलौंजी हेयर पैक के फायदेकलौंजी का हेयर पैक लगाने से बाल घने बनते हैं, बाल झडऩे की समस्या दूर होती है। गर्भावस्था के बाद अक्सर महिलाएं बाल झडऩे की शिकायत करती हैं वो भी इस हेयर पैक को लगा सकती हैं। कलौंजी का हेयर पैक लगाने से बालों में नैचुरल शाइन बढ़ती है।अगर आपके बाल फ्रिजी हैं तो आपको कलौंजी का हेयर पैक लगाना चाहिए। बालों में रूखेपन की समस्या को दूर करने के लिए आप कलौंजी हेयर पैक का इस्तेमाल करें। अगर आपके बाल हीटिंंग के कारण बेजान हो गए हैं तो भी कलौंजी का हेयर पैक लगाना फायदेमंद होगा।जिन लोगों को डैंड्रफ की समस्या होती है उन्हें कलौंजी का हेयर पैक लगाना चाहिए। अगर स्कैल्प में खुजली है तो भी आप कलौंजी के हेयर पैक को सिर पर लगाकर खुजली से छुटकारा पा सकते हैं।कलौंजी हेयर पैक को स्टोर कैसे करें?कलौंजी हेयर पैक को स्टोर करने के लिए आप एयर टाइट कंटेनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये हेयर पैक एक हफ्ते तक खराब नहीं होगा, अगर आप इसमें दही का इस्तेमाल कर रहे हैं तो तीन दिन तक फ्रिज में रखकर स्टोर कर सकते हैं। आप कलौंजी में आंवला पाउडर, नीलगिरी का तेल, कोकोनट ऑयल मिलाकर उसे और हेल्दी बना सकते हैं।बाजार में मिलने वाले हेयर पैक में ढेरों कैमिकल्स होते हैं जिससे बाल खराब हो सकते हैं इसलिए आपको घर पर ही आसान तरीके से हेयर पैक तैयार करने चाहिए।
- मेकअप लगाना ज्यादातर लड़की को पसंद होता है. ये आपकी खूबसूरती को निखारने का काम करता है. अगर आप मेकअप (Makeup) की शौकीन हैं तो आंखों में भी मेकअप करना पसंद करती होंगी. आंखों में चमक लाने के लिए आईलाइनर, काजल, मस्कारा, आईशैडो का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स होते हैं जिनका इस्तेमाल रोज नहीं करते हैं.मेकअप इस्तेमाल करते समय हम कई कई सारी छोटी- छोटी गलतियां कर देते हैं, जिसकी वजह से नुकसान हो सकता है. खासतौर पर कोरोना (Corona) काल में जहां संक्रमण का डर सबसे अधिक है. ऐसे में मेकअप को लेकर कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है. आइए जानते हैं आईमेकअप के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.हाईजीन का रखें ध्यानमेकअप के दौरान अगर आप साफ- सफाई का ध्यान नहीं रखती हैं तो आंखों को नुकसान हो सकता है. ऐसे में मेकअप करते समय अपने चेहरे और हाथों को अच्छी तरह से धो लें और इसके बाद मेकअप अप्लाई करें. अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो हाथ के बैक्टीरियां आंख के संपर्क में आ सकते है. मेकअप को खुले में न रखें.दूसरों का मेकअप न यूज करेंकभी भी अपना मेकअप किसी दूसरों से शेयर न करें. क्योंकि ऐसा करने से संक्रमण फैलने का डर रहता है. अगर आपके पास कोई प्रोडक्ट नहीं हैं तो सबसे पहले खरीद लें. कोरोना के समय में किसी दोस्त या अन्य किसी व्यक्ति का मेकअप इस्तेमाल करना बिलकुल सुरक्षित नहीं है.रात को मेकअप हटाकर सोएअक्सर ब्यूटीशियन सलाह देती हैं कि रात के समय में मेकअप हटाकर सोना चाहिए. अगर आप बिना मेकअप रिमूव किए सोए तो आंखों में खुजली, जलन और इरिटेशन हो सकता है. इसके अलावा पलक भी झड़ जाते हैं. मेकअप लगाकर सोने से त्वचा ड्राई हो जाती है. ऐसे में रात को मेकअप उतारना बहुत जरूरी है.किसी भी ट्रेंड को फॉलो न करेंहर रोज नए मेकअप ट्रेंड आते है. आप आंख बंदकर किसी भी ट्रेंड को फॉलो मत करें. किसी भी तरह के कलर और मेकअप को अप्लाई करने से पहले उसके बारे में जानकारी लें. आईमेकअप करने से पहले प्रोडक्ट्स का पेच टेस्ट जरूर कर लें. ताकि आपको किसी तरह की कोई एलर्जी न हों.
- टमाटर केपअच या सॉस हम में से कई लोगों को काफी ज्यादा पसंद होता है। लेकिन मार्केट के टमाटर केचअप बनाने को बनाने के लिए इसमें ढेर सारे प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया जाता है ताकि केचअप जल्दी खराब न हो। इसके अलावा इसमें कई तरह केमिकल युक्त कलर एड किए जाते हैं, ताकि इसका लुक अच्छा लगे। इतना ही नहीं, इसकी कन्सिटेंसी को बरकरार रखने के लिए इसमें स्टार्च का इस्तेमाल किया जाता है। लगातार टमाटर केचअप के इस्तेमाल से सेहत को कई सारे नुकसान हो सकते हैं। चलिए जानते हैं विस्तार से इसके बारे में-1. शरीर में नमक की अधिकताअगर आप रोजाना 1 चम्मच (5 ग्राम) टमाटार केचअप ले रहे हैं, तो इससे आपके शरीर में नमक की अधिक मात्रा जा रही है। क्योंकि टमाटर केचअप को तैयार करने के लिए इसमें ढेर सारे नमक मिलाए जाते हैं। हालांकि, इसमें शुगर होने के कारण आपको स्वाद में ज्यादा नमक का अनुभव नहीं होता है।2. सड़े टमाटर होने की आशंकामार्केट के टमाटर केचअप बनाने के लिए हमेशा फ्रेश टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है, यह जरूरी नहीं है। अधिक मात्रा में टमाटर बनाने के लिए कई मशहूर ब्रांड्स भी सड़े टमाटर का इस्तेमाल करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।3. मोटापा बढऩे का खतराकेचअप की कन्सिटेंसी बरकरार रखने के लिए इसमें काफी ज्यादा स्टार्च का इस्तेमाल होता है, जो आपके शरीर में कैलोरी इनटेक की मात्रा को बढ़ा सकता है। शरीर में कैलोरी की अधिकता होने से मोटापा होने का खतरा ज्यादा रहता है। साथ ही इसमें शुगर की भी अधिकता होती है, जो आपका वजन बढ़ा सकती है।4. डायबिटीज होने की संभावनाटमाटर केचअप में नमक के साथ-साथ ढेर सारी चीनी का भी इस्तेमाल किया जाता है। शरीर में शुगर की मात्रा बढऩे से डायबिटीज होने का खतरा रहता है। साथ ही इसमें स्टार्च और सोडियम की अधिकता होती है, जिसके कारण ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर पर असर पड़ता है।5. एसिड रिफ्लेक्शन की संभावनाटमाटर में सिट्रिक एसिड की अधिकता होती है। जिसके कारण एसिड रिफ्लेक्शन होने का खतरा रहता है। अगर आप या आप अपने बच्चों को केचअप ज्यादा दे रहे हैं, जो एसिड रिफ्लेक्शन की वजह से हार्ट बर्न की संभावना होती है। साथ ही इसकी वजह से उल्टी और मतली होने का खतरा भी रहता है।6. फेस एडिमा होने का खतराकेचअप टमाटर रिच होता है, जिसके कारण इसमें हेक्सा माइन की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। शरीर में हेक्सा माइनिक की अधिकता से फेस एडिमा होने का खतरा ज्यादा रहता है। साथ ही इसके कारण जीभ में भी सूजन हो सकती है।7. डायरिया होने का खतराटमाटर में साल्मोनेला बैक्टीरिया मौजूद होता है। शरीर में जब साल्मोनेला बैक्टीरिया की अधिकता होने लगती है, तो यह हमारे पेट को प्रभावित करने लगती है। जिसके कारण पाचन से जुड़ी परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण डायरिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है। क्योंकि कई टोमाटो केचअप में सड़े हुए टमाटर का इस्तेमाल काफी ज्यादा मात्रा में किया जाता है, जो हमारे गट हेल्थ को प्रभावित करता है।8. किडनी स्टोन होने का खतराअगर आप जिन लोगों को किडनी स्टोन या फिर अन्य तरह का स्टोन होता है, उन्हें टमाटर कम खाने की सलाह दी जाती है। इसका कारण होता है टमाटर में मौजूद ऑक्सलेट। शरीर में अगर ऑक्सीलेट की मात्रा बढ़ जाती है, तो स्टोन बढऩे का खतरा रहता है।9. कैंसर होने का खतराअगर आप प्रिजर्वेटिव चीजों का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो इससे कैंसर होने का खतरा बढ़ता है। जरूरी नहीं है कि 1-2 महीने इसका सेवन करने से कैंसर हो जाए। लेकिन अगर आप लगातार प्रिजर्वेटिव चीजों का सेवन कर रहे हैं, तो कैंसर की संभावना बढ़ सकती है।
- बहुत लोग ऐसे हैं जिनको अक्सर ही जुकाम (Cold) होता रहता है. साथ ही ये दिक्कत लंबे समय तक भी बनी रहती है. इसकी वजह से सिर दर्द, नाक और गले में बलगम, हल्का बुखार और आवाज में बदलाव जैसी परेशानी हो जाती है. ऐसे में ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि ये मामूली सा जुकाम है, जो मौसम में बदलाव की वजह से हो गया होगा. कुछ लोग जुकाम को छोटी सी दिक्कत समझकर अनदेखा (Ignore) कर देते हैं लेकिन आपको बता दें कि कभी-कभी ये केवल मामूली जुकाम नहीं होता, बल्कि साइनोसाइटिस (Sinusitis) भी हो सकता है. आइये जानते हैं इसके बारे में.क्या है साइनस?साइनस के संक्रमण का कारण साइनस की झिल्ली में सूजन आना है. जिसकी वजह से हवा की जगह में मवाद या बलगम भर जाता है, जिससे साइनस ट्रैक्ट बंद हो जाते हैं. जब साइनस का रास्ता बंद हो जाता है यानी बलगम के बाहर निकलने का रास्ता रुक जाता है, तब साइनोसाइटिस का खतरा पैदा हो जाता है. इस वजह से स्वाद और सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाती है और सिर में, गालों व ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है. साथ ही शरीर की एनर्जी डाउन होने लगती है और इसका नींद पर भी बुरा असर पड़ता है.साइनोसाइटिस के ये हो सकते हैं लक्षणअगर आपको अकसर या लंबे समय तक सिर में दर्द और भारीपन, आवाज में बदलाव, नाक और गले में बलगम, हल्का बुखार, दांतों में दर्द, जबड़ों में दर्द, माथे, आंखों, गाल और नाक के आसपास दर्द रहना, चेहरे पर सूजन, शरीर में थकान और कमजोरी महसूस होती हो तो ये साइनोसाइटिस के लक्षण हो सकते हैं. इनको हल्का जुकाम समझ कर अनदेखा न करें और डॉक्टर से संपर्क करें.ये वजह हो सकती हैसाइनोसाइटिस की दिक्कत होने की खास वजह प्रदूषण, धूम्रपान और इंफेक्शन है. लेकिन बच्चों में ये दिक्कत एलर्जी और बोतल से दूध या पानी पीने की वजह से भी हो सकती है. साथ ही घर में अगर कोई धूम्रपान करता है, तो इसकी वजह से भी साइनस की परेशानी बच्चों को हो सकती है.
- कटहल की सब्जी तो ज्यादातर लोगों ने टेस्ट की होगी. उसका स्वाद कई लोगों को बहुत भाता है. आमतौर पर कटहल के बीजों (Kathal Beej)को फेंक दिया जाता है लेकिन कम ही लोगों को मालूम है कि यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. कटहल के बीज आपकी सेहत को कई फायदे पहुंचाते हैं. यह स्किन, आंखों और बालों की हेल्थ में भी फायदेमंद होते हैं. कटहल के बीजों में आयरन, जिंक, कॉपर, कैल्शियम, पोटेशियम जैसे मिनरल्स भी कुछ मात्रा में होते हैं. आइए जानते हैं कि सेहत के लिए कैसे फायदेमंद होते हैं कटहल के बीज.अगर आप किसी स्किन समस्या से जूझ रहे हैं तो कटहल के बीज आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट तत्वों में एंटी एजिंग प्रॉपर्टी होती हैं.आयरन की कमी को करते हैं दूरकटहल के बीज एनीमिया में काफी फायदेमंद होते हैं. ये आयरन का अच्छा सोर्स होते हैं. अगर आप एनीमिया में इसे खाते हैं तो यह इस बीमारी का खतरा कम करते हैं.यह कई फूड डिसऑर्डर के जोखिम को भी कम करते हैं.आंखों और बालों में फायदेमंदकटहल के बीजों में विटामिन ए होता है जो कि आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है. इसे खाने से रतौंधी की समस्या नहीं होती है. इसके अलावा बालों की सेहत भी इसे खाने से अच्छी रहती है.पाचन में फायदेमंदकटहल के बीज पाचन क्रिया में भी फायदेमंद होते हैं. पहले इन बीजों को धूप में सुखा लें और फिर इन्हें पीसकर इस्तेमाल करें तो यह पाचन संबंधी कई समस्याओं में भीराहत पहुंचा सकते हैं. इससे कब्ज दूर करने में भी मदद मिलती है.कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज में देता है राहतकटहल के बीज में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर होते हैं जिसे कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है. कटहल बीज में मौजूद डायट्री फाइबर्स कार्बोहाइट्रेड्स के अवशोषण को स्लो कर देता है. जिससे खाने के बाद एकदम से ब्लड शुगर नहीं बढता है.
- बहुत सारे लोगों को पहाड़ों पर घूमने का शौक होता है. वहां जा कर नई-नई डिश ट्राई करना या वहां के खास पकवान की रेसिपी जानना भी उन्हें पसंद होता है. अगर आप हिमाचल घूम चुके हैं तो आपने वहां की पारंपरिक फेमस डिश सिड्डू का स्वाद भी चखा होगा. कोरोना काल में बेशक आप इस बार मनाली-कसोल की ताजी हवा का आनंद न ले पाए हों लेकिन लजीज सिड्डू को घर पर ही बना कर इसका लुत्फ तो उठा ही सकते हैं. आइए, जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान रेसिपी.सिड्डू बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?2 कप आटा1 छोटी चम्मच एक्टिव ड्राई यीस्ट2 चम्मच घीआधा कप बिना छिलके वाली उड़द दाल2 चम्मच बारीक कटा हरा धनिया1 चुटकी हींगआधी छोटी चम्मच हल्दी पाउडरआधी छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर1 छोटी चम्मच धनिया पाउडरएक छोटी चम्मट अदरक का पेस्ट2 बारीक कटी हरी मिर्चस्वादानुसार नमकसिड्डू बनाने का आसान तरीका----------सबसे पहले उड़द दाल लें और अच्छे से धोकर 2 घंटे के लिए भिगो कर रख दें. इसके बाद एक परात में 2 कप आटा निकालें और उसमें 2 छोटे चम्मच घी, यीस्ट और आधा छोटी चम्मच नमक डालें और मिक्स करने के बाद मुलायम आटा गूंथ लें. अब इसके ऊपर घी लगाएं और ढक कर 1 घंटे के लिए रख दें. अब भीगी हुई दाल में से एक्स्ट्रा पानी निकाल दें. इसके बाद दाल को मिक्सी के जार में डाल कर दरदरा पीस लें. अब पिसी हुई दाल को एक कटोरे में निकाल लें और इसमें 1 छोटी चम्मच नमक, लाल मिर्च पाउडर, अदरक का पेस्ट, हरी मिर्च, हल्दी, हींग, धनिया पाउडर और हरा धनिया डाल कर मिक्स कर लें. इसके बाद आटा लें और उसकी लोई बना लें.अब लोई को चपटा कर लें. इसके बाद इसे सूखे आटे या परोथन में लपेटकर चकले पर रख कर हल्की लंबी में थोड़ी मोटी रोटी बेल लें. अब इसके ऊपर 2 चम्मच तैयार की दाल की स्टफिंग रखें. इसके बाद आटे को उठाकर आधे चांद के आकार का शेप दे दें और स्टफिंग को बंद कर दें. इसके किनारों को अच्छे से चिपका दें. इसी तरह सारे सिड्डू तैयार कर लें.अब इन्हें भाप में पकाने के लिए एक पैन में 2 कप पानी डालें और गैस पर तेज आंच पर ढक कर उबलने के लिए रख दें. इसके बाद छलनी को घी लगाकर चिकना कर लें. इसके बाद पानी में उबाल आने पर, छलनी को बर्तन के ऊपर रख दें. इस पर तैयार किए हुए सिड्डू रखें और ढक कर 20 मिनिट तक भाप में मध्यम तेज आंच पर पकने दें. अब इन्हें चेक कर लें. जब सिड्डू पक जाएं, तब गैस बंद कर दें और छलनी इन्हें से निकालकर एक प्लेट में रख दें. इनके ऊपर हल्का घी लगा दें. अब धनिये चटपटी चटनी मोमोज़ की चटनी के साथ खाएं.
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भारतीय रसोई में मसालों की कोई कमी नहीं है। एक से बढ़कर एक ऐसे मसाले हैं, जो जड़ी-बूटी का काम करते हैं और ये मसाले स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होते हैं। दरअसल, खाने में कुछ मसालों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है कि वो इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी कुछ मसाले बेहद ही फायदेमंद होते हैं। इस बीमारी से पीडि़त मरीजों को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल (नियंत्रण) में रहे, क्योंकि शुगर लेवल का बढऩा बहुत ही खतरनाक साबित होता है। इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि आहार में अगर कुछ मसालों को शामिल किया जाए तो शुगर लेवल को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
लौंग
लौंग के औषधीय गुण सिर्फ पाचन शक्ति को ही मजबूत नहीं बनाते हैं, बल्कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि डायबिटीज के मरीज अगर लौंग के पानी का सेवन करें तो इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।
काली मिर्च
यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लोकप्रिय मसालों में से एक है। इसे मसालों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता है। इसके सेवन से न केवल पाचन शक्ति बढ़ती है, बल्कि यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में भी उपयोगी होती है।
दालचीनी
विशेषज्ञ कहते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए दालचीनी किसी वरदान से कम नहीं है। यह ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में शरीर की मदद करता है। डायबिटीज के मरीजों को इसे अपने दैनिक आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। दालचीनी वाले दूध को भी शुगर लेवल यानी शर्करा का स्तर नियंत्रण में रखने का एक आसान घरेलू उपाय माना जाता है
मेथी दाना
मेथी के बीज को डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद ही फायदेमंद माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले गुण ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हैं। आप खाली पेट मेथी का पानी पी सकते हैं या उसे चबाकर भी खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि मेथी के बीजों का सेवन करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। - केले को पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है. इसमें विटामिन A, B, B6, C, आयरन, कैल्शियम, मैगनीशियम, रिबोफ्लेविन, नियासिन, फोलिक एसिड, पोटैशियम आदि ऐसे तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं, तो इंसान की बेहतर सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं. यदि व्यक्ति एक केले का सेवन नियमित रूप से करे, तो शरीर की तमाम परेशानियों से बच सकता है.महिलाओं को तो खासतौर पर एक केला हर रोज खाना चाहिए क्योंकि दूसरों का खयाल रखने के चक्कर में महिलाएं खुद का ठीक से ध्यान नहीं रख पातीं. वहीं पीरियड्स, प्रेगनेंसी, मेनोपॉज आदि के कारण भी उनके शरीर में आयरन, कैल्शियम आदि पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. जिसके कारण उनका शरीर कमजोर हो जाता है और कई तरह की समस्याएं उन्हें घेर लेती हैं. यहां जानिए नियमित रूप से एक केला खाने के तमाम फायदों के बारे में.1. एनीमिया से बचाव करताभारत में अधिकतर महिलाएं खून की कमी के कारण एनीमिया की शिकार हो जाती हैं. आंकड़े बताते हैं कि करीब 80 फीसदी महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं. खून की कमी और एनीमिया की समस्या शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयरन न मिलने की वजह से होती है. केले में आयरन की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है. ऐसे में रोजाना एक केला खाने से महिला के शरीर में खून की कमी नहीं हो पाती और उसका एनीमिया से बचाव होता है.2. दिल की हिफाजत करतारोजाना एक केला खाने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित होता है. साथ ही बीपी की समस्या कंट्रोल होती है. इन दोनों के नियंत्रित रहने से दिल की सेहत दुरुस्त रहती है और दिल का दौरा, स्ट्रोक और हृदय रोगों से बचाव होता है. इसलिए अगर आप अपने दिल को बीमारियों से महफूज रखना चाहती हैं, तो रोजाना एक केला जरूर खाएं.3. हड्डियों को करता मजबूतमहिलाओं के शरीर में अक्सर कैल्शियम की कमी पाई जाती है, इस कारण समय से पहले ही उन्हें जोड़ों में दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस की समस्याएं घेर लेती हैं. केले में भरपूर कैल्शियम होता है. रोजाना एक केला खाने से शरीर में कैल्शियम की कमी दूर होती है और हड्डियां मजबूत होती हैं व हड्डियों से जुड़े रोगों से बचाव होता है.4. डिप्रेशन से करता बचावआज के समय में अधिकतर लोग डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं महिलाओं पर दो दोहरी जिम्मेदारी है, साथ ही उनके साथ शारीरिक चुनौतियां भी बहुत हैं. ऐसे में महिलाएं बहुत तेजी से डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं. केला विटामिन-बी6 से समृद्ध होता है, जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने का काम करता है, साथ ही इसमें एक ऐसा प्रोटीन होता है, जो दिमाग को रिलैक्स फील कराता है. ऐसे में रोजाना केले का सेवन करने से दिमाग बेहतर महसूस करता है और डिप्रेशन की स्थिति से बचाव होता है. केले में मौजूद मैगनीशियम नर्वस सिस्टम पर प्रभावी असर डाल सकता है. इसलिए दिमाग की सेहत के लिए रोजाना केला खाएं.5. पाचन तंत्र के लिए अच्छाकेले में पाए जाने वाले फाइबर से पाचन तंत्र दुरुस्त होता है. इसके नियमित सेवन से भोजन सही तरीके से पच जाता है और कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी परेशानियों से बचाव होता है. केले में रेसिस्टेंट स्टार्च भी पाया जाता है, जो पेट के लिए फायदेमंद माना जाता है.
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नाश्ता में रोटी खाने के फायदे की बात करें तो, इनमें फाइबर के साथ प्रोटीन और कॉपलेक्स फैट होते हैं जो कि एनर्जी देने के साथ शरीर के हर अंग को एक कीक स्टार्ट देते हैं। आज हम नाश्ते में रोटी से बनने वाली ये हेल्दी रेसिपीज बताने जा रहे हैं, जो कि बहुत टेस्टी है।
1. रोटी सैंडविच रेसिपीब्रेड सैंडविच तो आपने बहुत खाई होगी पर रोटी सैंडविच के बारे में आपने कम ही सुना होगा। पर यकीन मानें रोटी सैंडविच आपके ब्रेड सैंडविच से ज्यादा टेस्टी होती है। साथ ही इस बनाने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की भी जरूरत नहीं है। इसे बनाने के लिए-सबसे पहले आपको सैंडविच वाली स्टफींग तैयार करनी है। स्टफींग के लिए आप प्याज, शिमला मिर्च, गाजर और हरी मिर्च काट कर रख लें। अब इन सब्जियों को मेयोनेज डाल कर मिलाएं। नमक, चार्ट मसाला, हल्का सा लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च पाउडर मिला लें। आप चाहें तो उबले हुए आलू में प्याज, हरी मिर्च और धनिया पत्ता काट कर भी स्टफींग तैयार कर सकते हैं। फिर हमेशा की तरह रोटी बनाएं। अब दो रोटियों के बीच इन स्टफींग को भरे और तवे पर रख दें। अब इनमें बीच से 4 भाग में कट लगाएं। रोटी के चारों तरफ बटर लगाएं। जैसे जैसे रोटी पकेगी चारों भाग अलग हो जाएंगे। सब को थोड़ा कड़क करें, गैस ऑफ कर लें और चटनी के साथ सर्व करें।2. रोटी पनीर रोल रेसिपीअगर आपको एक प्रोटीन से भरपूर नाश्ता चाहिए तो रोटी पनीर रोल रेसिपी पर्फेक्ट है। इसे बनाने में बहुत ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती और ये फटाफट तैयार हो जाता है। इस रोल बनाने के लिए एक पैन में बटर डाल कर उसमें बारीक कटे हुए प्याज, टमाटर, गाजर, शिमला और हरी मिर्च डाल कर भूनें। आप इसमें अपने और समय के हिसाब से सब्जियां डालें या मत डालें। कुछ ना हो तो प्याज, टमाटर और मिर्च डालें। फिर इनमें हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर और नमक डाल करें भूनें। अब पनीर को क्रश करके डालें और सबको अच्छे से मिला लें। चाहें तो धनिया पत्ता काट कर मिला लें। अब तवे पर रोटी बना कर रखें और रोटी पकने के बाद उसमें ये पनीर स्टफींग डालें। रोटी को रोल करें। थोड़ा और पकाएं। अब इस रोटी पनीर रोल को सर्व करें।नाश्ते में रोटी खाने के फायदे1. पोषक तत्वों से भरपूर है रोटीनाश्ते में रोटी खाने से शरीर को एक बड़ी मात्रा में पोषक तत्व मिल जाते हैं। इसमें विटामिन बी1, बी2 और बी6 होता है। साथ ही ये आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे पोषक तत्वों से भी भरपूर है। रोटी घुलनशील फाइबर से भी भरपूर है जो कि कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार है और दिल को हेल्दी रखता है।2. प्रोटीन से भरपूरइन रोटी रेसिपीज में पनीर का इस्तेमाल किया है जो कि प्रोटीन से भरपूर हैं और नाश्ते में प्रोटीन खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। नाश्ते में प्रोटीन के सेवन से शरीर को एनर्जी मिलती है, दिन भर भूख नहीं लगती है और ये वेट लॉस करने वालों के लिए फायदेमंद है।3. फाइबर से भरपूररोटी और इन रसिपीज में इस्तेमाल होने वाली सब्जियां फाइबर से भरपूर हैं। ये सभी जटिल कार्बोहाइड्रेट हैं जो कि कब्ज की समस्या को रोकता है और हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।---------- -
आज हम आपके लिए लेकर आए हैं इलायची पानी के फायदे, जी हां, इलायची का पानी सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है। आमतौर पर इलायची का उपयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन आपक जानकर हैरान हो जाएंगे कि इलायची के सेवन से आप कई बीमारियों से दूर रह सकते ह।
आयुर्वेद में इलायची का अपना महत्व है। माना जाता है कि रोजाना इलायची का पानी पीने से सेहत को कई तरह से फायदे पहुंचते हैं। यह पाचन में सुधार करता है और गैस की समस्या से छुटकारा दिलाता है।इस तरह तैयार करें इलायची पानी1 लीटर पानी में 5 इलायची छीलकर रातभर के लिए भिगो दें। सुबह उठकर सबसे पहले इस पानी को गर्म करके पी लें। एक बार की जगह आप इस पानी को दिन में 2 से 3 बार पी सकते हैं.इलायची का पानी पीने के फायदे1. वजन करे कंट्रोलइलायची वजन कम करने में भी मददगार है। यह विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों और एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर होती है, जो शरीर में जमे एक्सट्रा फैट को कम करने में मदद करते हैं। इससे बढ़ते वजन को कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।2. ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता हैइलायची का पानी पीने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए।3. कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता हैइलायची में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। लिहाजा यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मददगार है। इसके अलावा इलायची का पानी शरीर में खून के थक्के बनने का खतरा कम होता है और हार्ट की बीमारियों से बचाता है।4. पाचन करे दुरुस्तअगर आप रोज खाली पेट इलायची का पानी पीते हैं तो पाचन तंत्र मजबूत होता है। ऐसे में आपको पेट संबंधी कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। - ज्यादार लोग चाय के साथ अपने दिन की शुरुआत करते हैं. इसका लाजवाब स्वाद हम में से ज्यादातर लोगों को पसंद होता है. चाय एक इंसान को दूसरे से जोड़ने का काम करता है. चाय में कई तरह के प्राकृतत्व होते हैं जिसे पीने का बाद हम तरोताजा महसूस करते हैं. ये हमारी एनर्जी को बढ़ाने का कम करते हैं. अक्सर ऑफिस में काम की थकान को दूर करने के लिए चाय पीते हैं. हालांकि कुछ लोगों को जरूरत से ज्यादा चाय पीने की आदत होती है. ऐसे में कई बार हम लोग चाय बनाने में आलस करते हैं जिसकी वजह से एक बार में अधिका मात्रा मे चाय बनाकर रख लेते हैं और उसे समय- समय पर गर्म करके पीते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बार- बार चाय को गर्म करके पीना सेहत को काफी नुकसान पहुंचता है. आइए जानते हैं चाय को बार- बार गर्म करके क्यों नहीं पीना चाहिए.स्वाद और स्मेल खराब होता हैबार- बार चाय को गर्म करने से उसका स्वाद और खूशबू उड़ जाती है. ये दोनों चीजें चाय की खासियल होती है. इसके अलावा बार- बार चाय गर्म करने से इसके पौषक तत्व भी कम हो जाते है.बैक्टीरियल ग्रोथ बढ़ जाता हैज्यादा देर बाद बनी हुए चाय को दोबारा पीना सेहत के लिए हानिकारक होता है. क्योंकि चाय में माइक्रोबियल बनने लगते हैं. ये माइल्ड बैक्टीरिया सेहत के लिए हानिकारक होते हैं. ज्यादातर घरों में दूध वाली चाय बनती हैं जिसमें दूध की मात्रा अधिक होती है. इस वजह से माइक्रोबियल खतरा बढ़ जाता है. वहीं, हर्बल चाय को बार- बार गर्म करने से उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं.सेहत के लिए हानिकारकचाय को बार- बार गर्म करके पीना सेहत के लिए खतरनाक होता है. क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. अगर आप अपनी इस आदत को नहीं बदलते हैं तो लंबे समय बाद पेट खराब होने पेट दर्द. इंफ्लामेशन आदि बीमारियां हो सकती हैं. ये आदत आपके सेहत के लिए नुकसानदायक होता है.चाय से जुड़ी ये बातें जान लें1. चाय बनने के 15 मिनट बाद उसे गर्म करते हैं तो उससे आपको कोई नुकसान नहीं होता है.2. लंबे समय बाद चाय को गर्म करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है.3. हमेशा उतनी ही चाय बनानी चाहिए जितना आप उस समय में खत्म कर लें ताकि बाद के लिए चाय बचनी ही नहीं चाहिए.-
- करेला बाजार में मौजूद सबसे कड़वी सब्जियों में से एक के रूप में जाना जाता है, लेकिन ये अपने सभी हेल्थ बेनेफिट्स के लिए भी जाना जाता है. करेला कई विटामिन और मिनरल्स जैसे फोलेट, जिंक, आयरन और मैग्नीशियम और विटामिन बी 1, बी 2, बी 3 और विटामिन सी और ऐसी अन्य चीजों का सोर्स है. ये कैल्शियम और पोटेशियम और प्रोटीन में भी रिच है. यही मुख्य वजह है कि लोग इस कड़वे करेले के रस का सेवन करते रहे हैं.दिन में एक बार एक गिलास ताजा करेले का जूस हमारे हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. ये पोषक तत्वों से भरपूर है और उस परेशानी के लायक है जिससे हम गुजरते हैं लेकिन करेले का रस वजन घटाने में कैसे मदद करता है? क्या इसका हकीकत में आपके शरीर और वजन पर प्रभाव पड़ता है? इन सवालों के जवाब जानने से आपको ये तय करने में मदद मिल सकती है कि आप करेला को अपने वजन घटाने के तरीके का हिस्सा बनाना चाहते हैं या नहीं.यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे करेला जूस वजन घटाने में मदद करता है :1. करेला इंसुलिन को कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है और ब्लड शुगर के लेवल को बनाए रखने में मदद करता है. ये आपके इंसुलिन को एक्टिव करता है और चीनी को फैट में बदलने से रोकता है जिसका मतलब है कि आपका शरीर कम फैट पैदा करेगा जिससे आपके शरीर में फैट लॉस होगी.2. करेले में बहुत कम कैलोरी, फैट और कार्बोहाइड्रेट होते हैं. इससे आपका फैट, कैलोरी और कार्ब्स का सेवन कम हो जाता है और आपको एक्स्ट्रा वजन बढ़ने की चिंता करने की जरूरत नहीं है. 100 ग्राम करेले में सिर्फ 34 कैलोरी होती है.3. करेले में ढेर सारे फाइबर होते हैं जो आपके शरीर के लिए अच्छे होते हैं. एक हाई फाइबर डाईट आपको लंबे समय तक फुल महसूस करने में भी मदद करता है जो बदले में क्रेविंग्स को कम करता है और आपको ज्यादा खाने या ओवर खाने से रोकता है. इसमें पानी की मात्रा भी ज्यादा होती है जो इसे आपके आहार में शामिल करने के लिए एक बहुत ही हेल्दी सब्जी बनाती है.4. करेला फैट सेल्स के निर्माण और बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए जाना जाता है जो आपके शरीर में फैट को कम करने में मदद करता है और आपको वजन कम करने और साइज में रहने में मदद करता है.-
- भोजन से जुड़े कुछ मिथक हमेशा से ही हमारे बीच प्रचलित रहे हैं। पर क्या कभी आपने थोड़ा सा वक्त निकाल कर इस बारे में सोचा है कि इनमें आखिर कितनी सच्चाई ङै। जी हां, ज्यादातर लोग खाने से जुड़े मिथकों को बिना सोचे समझे मानते हैं और कभी इस पर प्रश्न नहीं करते। जिससे कई बार इससे उनके स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है। आइये जानते हैं इस बार में विशेषज्ञों की क्या राय है....1. ज्यादा खाना खाने से वजन बढ़ता हैहम में से ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर हम ज्यादा खाना खाएंगे तो, हमारा वजन बढ़ जाएगा। इस चक्कर में हम लोग सही से खाना नहीं खाते और इससे हमारे शरीर में स्वस्थ पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। सच्चाई ये है कि हम ज्यादा खाना खाने से मोटे नहीं होते बल्कि गलत समय पर, गलत चीज खाने और गलत मात्रा में खाने से मोटापे के शिकार हो जाते हैं। इसलिए सही समय पर और स्वस्थ मात्रा में भोजन करें। बार-बार छोटे-छोटे भोजन करें जो संतुलित होते हैं। इससे मेटाबोलिज्म तेज होता है जिससे आप जो भी और जितना भी खाएंगे, सब पचा ले जाएंगे। तो, मोटापे के डर से खाना खाना ना छोड़ें।2. चुकंदर हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता हैचुकंदर खाने के फायदे की बात करते ही ज्यादातर लोग यही कहते हैं कि ये शरीर में खून बढ़ता है और हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। इसके पीछे लोगों को तथ्य होता है कि ये लाल रंग का है तो खून बढ़ता है। जबकि ये एक मिथक है। दरअसल, चुकंदर में एंटीऑक्सिडेंट, फोलेट, पोटैशियम आदि होते हैं जो दिल के लिए अच्छे होते हैं, कैंसर रोधी गुणों के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को भी कम करते हैं।3. अंडे की जर्दी कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती हैअंडे की जर्दी में 16 महत्वपूर्ण पोषक तत्व, 3 ग्राम प्रोटीन और कोलेस्ट्रॉल-300 मिलीग्राम होता है। अंडे की जर्दी बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के स्तर का कारण नहीं है, बल्कि अंडे के साथ हाई फैटी फूड्स को खाना कोलेस्ट्रॉल बढऩे का कारण है। साथ ही अगर आप ज्यादा मात्रा में अंडा खाते हैं तो कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इसलिए पूरा अंडा खाएं और प्रोसेस्ड फूड्स जैसे ज्यादा तेल-मसाले वाले खाने और हाई शुगर वाले फूड्स को खाने से बचें।4. डायबीटीज के मरीजों के लिए उबले चावल और साबूदाना खाना हेल्दी हैसाबूदाना शुद्ध स्टार्च के दाने हैं। इसमें कोई फाइबर नहीं होता है और इससे शुगर बढ़ता है। इसलिए डायबिटीज के मरीज को साबूदाना खाने से बचना चाहिए। साथ ही कुछ लोग कहते हैं चावल को उबाल कर और उसका पानी निकाल कर खाना डायबिटीज में चावल खाने का हेल्दी तरीका है। जबकि ये गलत है। दरअसल, किसी भी विधि द्वारा पकाए गए चावल ग्लाइसेमिक इंडेक्स के समान ही रहते हैं क्योंकि चावल में स्टार्च होता है। डायबिटीज रोगियों के लिए सलाद और सब्जियों के साथ संतुलित नियंत्रित हिस्से में चावल खाने की अनुमति है पर ज्यादा मात्रा में चावल खाने की अनुमति नहीं है।5. डायबिटीज में गुड़ और शहद लें पर चीनी नहींडायबिटीज में शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों की सही पहचान करना बेहद जरूरी है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि डायबिटीज में चीनी की जगह गुड़ और शहद लेना ज्यादा हेल्दी है। पर ये मिथक है। क्योंकि शुगर तो शुगर है,चाहे वो चीनी में हो या शहद में। सैद्धांतिक रूप से ये सभी ग्लूकोज से भरपूर हैं और शरीर इसे केवल ग्लूकोज के रूप में ही संसाधित करेगा। इसलिए इनमें से किसी को भी डायबिटीज में लेना फायदेमंद नहीं है।6. थायराइड में पत्ता गोभी, ब्रोकली और फूलगोभी नहीं खाना चाहिएगोभी, ब्रोकली और फूलगोभी तीनों ही क्रूसिफेरस वेजिटेबल हैं। ऐसा माना जाता है कि थायराइड की समस्या होने पर क्रूसिफेरस वेजिटेबल को खाने से बचना चाहिए। जो कि गलत है। इनमें कुछ हेल्दी तत्व भी होते हैं और कभी कभार इन्हें खाने से आपको नुकसान नहीं होगा। हालांकि, उन्हें अच्छी तरह से पका कर खाना चाहिए और इस परिवार की कच्ची सब्जियों को खाने से बचना चाहिए।7. सर्जरी के बाद झींगा और मछली खाने से बचेंसर्जरी के बाद कई बार झींगा और मछली खाने से बचने के लिए कहा जाता है। खास कर जब आपको टांके लगे हों। पर सर्जरी के बाद टिशूज के उपचार और पुनर्जनन के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। झींगा और मछली प्रथम श्रेणी के प्रोटीन हैं और उपचार में मदद करते हैं। अगर अच्छी तरह से पका कर इसे खाया जाए तो, इससे आपको कोई नुकसान नहीं होगा।


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