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नई दिल्ली। पुणे एयरपोर्ट से विमान सेवाओं का परिचालन फिर से शुरू हो गया है। भारतीय वायु सेना के एक विमान से जुड़ी घटना के बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। भारतीय वायु सेना ने बताया कि पुणे हवाई अड्डे पर शुक्रवार रात करीब 22:25 बजे लैंडिंग के दौरान एक लड़ाकू विमान के अंडरकैरिज में खराबी आ गई और वह रनवे पर ही फंस गया। इस तकनीकी खराबी के कारण रनवे पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया और हवाई अड्डे पर विमानों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
भारतीय वायु सेना एटीसी के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया था कि रनवे से रुकावट हटाने और सामान्य विमान परिचालन फिर से शुरू करने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगेगा। इस घटना के बाद, रनवे कुछ समय के लिए पूरी तरह से बंद रहा। इस बीच, मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया और पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इसके बाद शनिवार सुबह 07:30 बजे से विमानों की रवानगी फिर से शुरू हो गई। जबकि विमानों का आगमन सुबह 08:00 बजे से शुरू हुआ।गौरतलब है कि पुणे हवाई अड्डा, जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के विमानों के संचालन का केंद्र है। महाराष्ट्र के प्रमुख विमानन केंद्रों में से एक है। रनवे की उपलब्धता में किसी भी तरह की रुकावट से आमतौर पर व्यस्त समय (पीक आवर्स) के दौरान कई विमानों के आगमन और प्रस्थान पर असर पड़ता है।गुरुवार को हुई एक अलग घटना में दिल्ली हवाई अड्डे पर स्पाइसजेट का एक विमान अकासा एयर के एक खड़े विमान से टकरा गया। इस टक्कर से दोनों विमानों को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। यह घटना दोपहर लगभग 2:15 बजे हुई। उस समय लेह से आया स्पाइसजेट का विमान अपने निर्धारित ‘बे’ (पार्किंग स्थल) की ओर बढ़ रहा था, तभी वह अकासा एयर के विमान के संपर्क में आ गया। अकासा एयर का वह विमान उस समय हैदराबाद के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था।शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, स्पाइसजेट विमान का दाहिना ‘विंगलेट’ क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि टक्कर के कारण अकासा एयर विमान के बाएं ‘हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर’ (विमान को संतुलित रखने वाला हिस्सा) को क्षति पहुंची। अकासा एयर के एक प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली उसकी उड़ान (फ्लाइट क्यूपी 1406) घटना के बाद वापस अपने ‘बे’ पर लौट आया। प्रवक्ता ने कहा, “शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि अकासा का विमान उस समय स्थिर (खड़ा) था, जब किसी अन्य एयरलाइन का विमान उससे टकरा गया।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े एक संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोक दिया और लोकसभा में इसे रोके जाने का ‘जश्न’ मनाया।
कल शुक्रवार को सदन में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि वे “बेहद परेशान करने वाली और शर्मनाक” थीं, और आरोप लगाया कि विपक्ष ने न सिर्फ बिल का विरोध किया, बल्कि उसे रोककर नारे भी लगाए।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, गोयल ने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन के दूसरे सहयोगी बहस करने के लिए नहीं, बल्कि बिल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए एक साथ आए थे। उन्होंने लिखा, “आज, लोकसभा में एक बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक नज़ारा देखने को मिला। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडी’ गठबंधन बहस करने के लिए नहीं, बल्कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लिए एक अहम संविधान संशोधन बिल को पास होने से रोकने के लिए एक साथ आए। एक ऐसा बिल जो महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की गारंटी देना चाहता था, उसे न सिर्फ खारिज किया गया, बल्कि हैरानी की बात यह है कि जीत के नारों के साथ उसका जश्न भी मनाया गया।”उन्होंने पोस्ट में कहा, “यह विरोध की राजनीति नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं के साथ सोच-समझकर किया गया विश्वासघात है।” विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए, गोयल ने कहा कि यह साफ नहीं था कि आखिर किस बात का जश्न मनाया जा रहा था; उन्होंने आगे कहा कि ऐसे काम पितृसत्ता का समर्थन करने और महिलाओं के अधिकारों को दबाने के बराबर हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि बिल को रोककर, विपक्ष ने महिलाओं को विधायी निकायों में उनका सही प्रतिनिधित्व देने से मना कर दिया है। गोयल ने पोस्ट में कहा कि ये घटनाएँ एक बड़े पैटर्न को दिखाती हैं, और उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध करने और राष्ट्रीय प्रगति से ऊपर राजनीतिक हितों को रखने का आरोप लगाया।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। यह एक पैटर्न है।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष का रवैया न तो महिलाओं के हितों के अनुरूप था और न ही देश की आकांक्षाओं के।गोयल ने आगे कहा कि इस मुद्दे के राजनीतिक नतीजे होंगे, और जोर देकर कहा कि महिला वोटर इन घटनाओं को याद रखेंगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “उनकी सोच सबके सामने आ गई है, जो न तो महिलाओं के हितों के साथ है और न ही एक उभरते भारत की आकांक्षाओं के साथ। हमारी नारी शक्ति का यह अपमान न तो भुलाया जाएगा और न ही माफ़ किया जाएगा। यह बात दूर-दूर तक फैलेगी, हर निर्वाचन क्षेत्र, हर राज्य और हर चुनाव में इसकी गूंज सुनाई देगी। भारत की महिलाएं याद रखेंगी कि कौन उनके साथ खड़ा था और कौन उनके खिलाफ।”केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष के इन कामों की ‘राजनीतिक कीमत’ न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि अन्य चुनावी मुकाबलों में भी देखने को मिलेगी।उन्होंने कहा, “इस धोखे की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी, न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि पूरे भारत में हर चुनाव में।” -
नई दिल्ली। मनोनीत सदस्य हरिवंश लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुन लिए गए हैं। उन्हें निर्विरोध चुना गया। राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने श्री हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा। श्री हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के राज्यसभा से सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त हुए राज्यसभा के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें मनोनीत किया था।
तीसरी बार उपसभापति चुने जाने के बाद श्री हरिवंश कहा कि मतभेद और स्वस्थ बहस लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय कामकाज में व्यवधान के लिए कोई जगह नहीं है।इससे पहले, राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री हरिवंश को तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। श्री मोदी ने कहा कि उनकी बुद्धिमत्ता ने सदन के वातावरण को अधिक परिपक्व और रचनात्मक बनाने में योगदान दिया है।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी श्री हरिवंश को बधाई दी। हालांकि श्री खरगे ने चिंता व्यक्त की कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद वर्ष 2019 से रिक्त है।राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि श्री हरिवंश का राज्यसभा के उपसभापति के रूप में एक बार फिर निर्विरोध निर्वाचित होना संतोष की बात है। श्री नड्डा ने कहा कि उनके नेतृत्व में सदन की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है। सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। -
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान में परिसीमन के प्रावधान किए गए हैं और इससे प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का तर्कसंगत वितरण होगा। उन्होंने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की संख्या में वृद्धि होगी। जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की संख्या में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। श्री शाह लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न हों।
इन विधेयकों का उद्देश्य नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को लागू करना है। 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाने वाला संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम लागू हुआ। इस कानून के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं।विपक्षी गठबंधन की आलोचना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण के संवैधानिक संशोधन का किसी ने विरोध नहीं किया, लेकिन विपक्ष के सभी सदस्यों ने खुलकर महिला आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही 1971 में परिसीमन प्रक्रिया को सीमित किया था और अब वही इसका विरोध कर रही है। -
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की कथित दोहरी (ब्रिटिश) नागरिकता से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम आदेश जारी करते हुए रायबरेली के कोतवाली थाना पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस को पूरे मामले की जांच करने को कहा गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने पारित किया। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। मामले के याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे “ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है और यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा व जनहित से जुड़ा है। विग्नेश शिशिर ने दावा किया कि अदालत के समक्ष ऐसे दस्तावेज पेश किए गए, जिनमें कथित तौर पर ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े तथ्य शामिल हैं। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। याचिकाकर्ता के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत से मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आग्रह किया था, जिस पर अदालत ने जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी। विग्नेश शिशिर ने कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाते समय उन्हें सुरक्षा से जुड़े खतरे महसूस हो रहे हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय से अपनी सुरक्षा बढ़ाने और सीआरपीएफ के माध्यम से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने देशवासियों और समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना इस मामले को आगे बढ़ाना संभव नहीं होता। साथ ही उन्होंने आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भी समर्थन की अपेक्षा जताई।
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नई दिल्ली। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी। विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े। संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 के सदन में खारिज होने के कारण परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 सहित अन्य दो विधेयकों को पारित करने के लिए पेश नहीं किया गया।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार लोकसभा और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। वे लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ संपन्न हों।उन्होंने कहा कि देश को उत्तर-दक्षिण के आधार पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लक्षद्वीप जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश को भी उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार के समान अधिकार प्राप्त हैं।विपक्षी गठबंधन की आलोचना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए संवैधानिक संशोधन का किसी ने विरोध नहीं किया, लेकिन विपक्ष के सभी सदस्यों ने स्पष्ट रूप से महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही 1972 में परिसीमन प्रक्रिया को बाधित किया था और अब वही इसका विरोध कर रही है। श्री शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता है।लोकसभा और विधानसभा में एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 आज सदन में पारित नहीं हो सका। लोकसभा में उपस्थित कुल 489 सदस्यों में से विधेयक को दो तिहाई बहुमत 326 सांसदों का समर्थन नहीं मिल सका। विधेयक पर मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान के परिणाम घोषित करते हुए कहा कि इस विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं होने के कारण इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 सहित अन्य दो विधेयक संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन दोनों विधेयकों को पारित करने के लिए पेश नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने का ऐतिहासिक अवसर गवां दिया है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति भवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि 18 अप्रैल को रक्षकों की अदला-बदली का समारोह नहीं होगा। यह समारोह एक सैन्य परंपरा है, जो हर हफ्ते आयोजित की जाती है, ताकि राष्ट्रपति के अंगरक्षकों का एक नया समूह कार्यभार संभाल सके। एक बयान में कहा गया, ''कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति की आगामी राजकीय यात्रा के संबंध में आयोजित होने वाले औपचारिक स्वागत समारोह के पूर्वाभ्यास के कारण 18 अप्रैल को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में रक्षकों की अदला-बदली का कार्यक्रम नहीं होगा।'' दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग रविवार से भारत की तीन-दिवसीय यात्रा पर आने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य बढ़ते भूराजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर व्यापार, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।
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नई दिल्ली। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा लगाए गए वीटो के मुद्दे पर भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन करने से परहेज करते हुए तटस्थ रुख अपनाया है।
गुरुवार को जनरल असेंबली की मीटिंग में वीटो पर बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने इस मुद्दे पर कहा, “हमने सभी देशों से बातचीत और डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने और तनाव कम करने और असल मुद्दों को सुलझाने की अपील की है।” उन्होंने कहा, “हमने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की भी अपील की है।”यह मीटिंग असेंबली के एक प्रोसेस के तहत बुलाई गई थी, जिसके तहत जो स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव पर वीटो करते हैं, उन्हें दस दिनों के अंदर अपने कामों के बारे में बताने के लिए उसके सामने पेश होना होता है।7 अप्रैल को रूस और चीन ने काउंसिल के चुने हुए सदस्य बहरीन के पेश किए गए प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया। इस प्रस्ताव में ईरान से कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोकने और नेविगेशन की आजादी में रुकावट न डालने की मांग की गई थी।रूस और चीन ने असेंबली में अपने वीटो का बचाव किया, जबकि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों ने कई दूसरे देशों के साथ मिलकर वीटो की आलोचना की। अपने छोटे, 90-सेकंड, 198-शब्दों के बयान में, हरीश दोनों पक्षों से दूर रहे, लेकिन स्ट्रेट में नेविगेशन की आजादी पर भारत की स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा, “भारत के लिए अपनी एनर्जी और आर्थिक सुरक्षा के लिए खास चिंता की बात होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग है।” यह स्ट्रेट दुनिया भर के तेल ट्रैफिक के 20 फीसदी के लिए चोकपॉइंट है और इसके रुकने से भारत पर असर पड़ा है।उन्होंने आगे कहा, “भारत इस बात पर दुख जताता है कि इस लड़ाई में कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया। इस लड़ाई के दौरान जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की कीमती जानें गईं।” उन्होंने कहा, “हम फिर से कहते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है। इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए।”28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट में जहाजों पर हमला किया, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरानी पोर्ट्स पर नेवल ब्लॉकेड लगा दिया। भारत ने वीटो को लेकर भले ही तटस्थ रुख अपनाया हो, लेकिन उसने 11 मार्च को बहरीन द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनने का फैसला किया था, जिसमें ईरान के मध्य पूर्व के पड़ोसी देशों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 13-0 मतों से पारित किया गया, जबकि रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लेते हुए इसे बिना वीटो के पास होने दिया।पिछले हफ्ते प्रस्ताव पर वीटो को लेकर रूस की उपस्थायी प्रतिनिधि एना एम इवेस्टिग्नीवा ने कहा कि यह एकतरफा था और इसने इजरायल और अमेरिका की उन कार्रवाइयों को अनदेखा कर दिया जिनकी वजह से लड़ाई शुरू हुई। उन्होंने कहा कि इससे लड़ाई जारी रखने और उसे बढ़ाने के लिए बिना शर्त मंजूरी मिल जाती है। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कांग ने कहा कि बीजिंग बहरीन और खाड़ी देशों की बड़ी चिंताओं को समझता है, लेकिन उसने प्रस्ताव पर वीटो इसलिए किया क्योंकि इससे अनऑथराइज्ड सैन्य ऑपरेशन को सही साबित करने का दिखावा होता।खाड़ी देशों और जॉर्डन की तरफ से बोलने वाले कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि तारिक एम. ए. एम. अल्बनई ने उस प्रस्ताव पर वीटो लगाने की आलोचना की, जो “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक साफ और सीधे खतरे से जुड़ा था।” उन्होंने कहा कि खाड़ी देश आम सहमति के लिए बड़े पैमाने पर बातचीत के आधार पर एक और प्रस्ताव पेश करेंगे। अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि चीन और रूस ने जानबूझकर आंखें बंद कर ली और इससे भी बुरा, ईरान की ओर से अपने पड़ोसियों पर हमलों, अपने ही लोगों के खिलाफ उसके आतंक और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके जानलेवा कब्जे को रोकने की कोशिश को होने दिया। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह फर्टिलाइजर समेत जरूरी शिपमेंट को बुआई के मौसम में दक्षिण एशिया पहुंचने से रोककर खाद्य संकट पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि किसने जिम्मेदारी के बजाय रुकावट को चुना।” -
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अवैध रसायनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आम, केला और पपीता जैसे फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय निदेशकों को फल मंडियों, गोदामों और भंडारण स्थलों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
खासतौर पर ‘मसाला’ नाम से प्रचलित कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर नजर रखने को कहा गया है, जिसका उपयोग व्यापारी फलों को जल्दी पकाने के लिए करते हैं।प्राधिकरण ने कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (प्रतिबंध और बिक्री पर रोक) विनियम, 2011 के तहत कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग पूरी तरह गैरकानूनी है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है और इससे निगलने में दिक्कत, उल्टी, त्वचा पर घाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसके अलावा, FSSAI ने एथिफोन (ethephon) के गलत इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। हालांकि एथिलीन गैस को सुरक्षित तरीके से सीमित उपयोग की अनुमति है, लेकिन फलों को सीधे रासायनिक घोल में डुबोना नियमों का उल्लंघन है।नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए FSSAI ने थोक बाजारों और वितरण केंद्रों में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी स्थान पर प्रतिबंधित रसायन पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत कानूनी कार्रवाई का आधार माना जाएगा।प्राधिकरण ने यह भी कहा कि यदि फल के साथ कैल्शियम कार्बाइड पाया जाता है, तो इसे सबूत मानते हुए संबंधित कारोबारियों के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।जांच के दौरान अधिकारी स्ट्रिप पेपर टेस्ट के जरिए एसीटिलीन गैस की मौजूदगी का पता लगा सकेंगे। साथ ही, ताजे फलों पर अवैध रूप से वैक्स या सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल पर भी सख्ती बरती जाएगी। FSSAI का यह कदम उपभोक्ताओं की सेहत को सुरक्षित रखने और बाजार में सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में अहम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शुक्रवार को एक बार फिर देश की माता-बहन और बेटियों का स्मरण करते हुए उनसे आशीर्वाद बरसाने की कृपा की। इस संबंध में पीएम मोदी ने एक्स पर साझा सुभाषितम् में कहा, ”हमारी नारी शक्ति एक सशक्त भारत की पहचान है। आज देश की माताएं, बहनें और बेटियां अपने अटूट संकल्प, निष्ठा और सेवा-भाव से हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं।”
दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ अध्याय शाकम्भरी स्तुति का श्लोक का किया जिक्रउन्होंने श्री दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ अध्याय (शाकम्भरी स्तुति) के श्लोक ”देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्ति समूहमूत्र्या।तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:॥” का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ही शक्ति से इस ब्रह्मांड की रचना की। वह समस्त देवताओं की शक्तियों के सामूहिक स्वरूप के रूप में अवतरित हुईं हैं।पीएम मोदी ने लिखा- ‘मां की आराधना सभी देवता और महान ऋषि समान रूप से करते हैं’प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, ”मां की आराधना सभी देवता और महान ऋषि समान रूप से करते हैं और उनके समक्ष हम श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे देवी हम पर अपना मंगल आशीर्वाद बरसाएं।” उल्लेखनीय है यह श्लोक देवी के सर्वव्यापी, शक्ति स्वरूपा रूप की स्तुति करता है। इसकी स्तुति से ज्ञान, बल और शक्ति प्रदान होती है। -
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती के अवसर पर देशभर के नेताओं ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें एक सच्चा जननेता बताया, जो अपने साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा के लिए जाने जाते थे।
पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। इस वर्ष उनकी 100वीं जयंती वर्ष की शुरुआत हो रही है और यह एक समृद्ध एवं न्यायपूर्ण भारत के उनके स्वप्न को साकार करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।”उन्होंने कहा, “चंद्रशेखर जी को एक ऐसे जननेता के रूप में याद किया जाता है, जो साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा से परिपूर्ण थे। भारत की माटी से गहराई से जुड़े हुए और आम नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सादगी और स्पष्टता का संचार किया।”उन्होंने आगे कहा, “मुझे वे अवसर भली-भांति याद हैं, जब मुझे उनसे मिलने और हमारे राष्ट्र के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मैं भारत के युवाओं से आह्वान करता हूं कि वे भारत की प्रगति की दिशा में उनके विचारों और प्रयासों के बारे में अधिक से अधिक पढ़ें।”इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी उन्हें याद करते हुए विनम्र अभिवादन किया। उन्होंने अपने संदेश में चंद्रशेखर के योगदान को नमन किया। वहीं, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें एक लोकप्रिय राजनेता और प्रखर वक्ता बताया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “लोकप्रिय राजनेता, प्रखर वक्ता, पूर्व प्रधानमंत्री, श्रद्धेय चंद्रशेखर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों एवं वंचितों के समग्र उत्थान हेतु समर्पित आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा, “जनसंघर्षों से निकले प्रखर समाजवादी नेता, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। स्पष्टवादी व्यक्तित्व, सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली आपकी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।” -
नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार आज का दिन बेहद खास है क्योंकि आज वैशाख अमावस्या है। वैशाख अमावस्या के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व होता है। माना जाता है कि आज के दिन मिट्टी का मटका पानी से भरकर दान करने से 100 गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। वैशाख अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के संगम पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए हैं और तीर्थयात्री संगम में पवित्र स्नान कर रहे हैं।
संगम के तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रात: काल से ही स्नान कर रही है। तटों पर पितरों को शांति प्रदान करने के लिए पूजा-पाठ का आयोजन भी हो रहा है। संगम किनारे बैठे एक पुजारी ने बताया कि वैशाख अमावस्या सिर्फ खुद के कल्याण का जरिया नहीं है, बल्कि इस दिन पितरों की शांति और पिंडदान जैसे कार्यों का भी महत्व है। वैशाख महीने में जो एक बार भोजन करते हैं, वो निरोगी और भगवान के प्रिय हो जाते हैं और उनकी हर मुराद पूरी होती है। इसके साथ ही वैशाख के महीने में ब्राह्मण को दिया दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ब्राह्मणों को माला, कपड़े और गौ दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन सुखमय होता है।स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु ने बताया कि पुराणों में वैशाख के महीने में गंगा स्नान और दान का बहुत महत्व बताया गया है, जो अपने परिवार और घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ गंगा स्नान करता है, उसे आजीवन जन्म और मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। हम पूरे परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए आए हैं।श्रद्धालु ने आगे बताया, “हम अपने पूर्वजों की शांति के लिए गंगा स्नान के लिए आए हैं। उनके नाम से ही दान किया जाएगा। सुबह से ही गंगा नदी के किनारे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा हैं और लोग दूर-दूर से गंगा स्नान के लिए आ रहे हैं। घाटों पर पितृ पूजा भी करवा सकते हैं और आज का दिन पिंडदान के लिए बहुत शुभ है।” -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। राज्यसभा में सदन की कार्रवाई प्रारंभ होने के कुछ देर बाद ही राज्यसभा में नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। शपथ लेने वालों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, असम से प्रमोद बोरो व बिहार से उपेंद्र कुशवाहा शामिल रहे।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का बतौर सांसद यह पहला कार्यकाल है। वह बिहार से राज्यसभा के सांसद चुने गए हैं। बिहार से ही भाजपा के शिवेश कुमार ने भी राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। बिहार से निर्वाचित जनता दल यूनाइटेड के रामनाथ ठाकुर ने भी सांसद के तौर पर शपथ ली। असम से भाजपा के तेराश गोवाला, जोगेन मोहन, यूपीपी (एल) के प्रमोद बोरो ने शपथ ली। हरियाणा से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने राज्यसभा सदस्य की शपथ ली।इसके अलावा, तेलंगाना से कांग्रेस के वेम नरेंद्र रेड्डी और अभिषेक मनु सिंघवी और हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के अनुराग शर्मा ने राज्यसभा की शपथ ली। महाराष्ट्र से भाजपा के विनोद तावड़े, ओडिशा से भाजपा के सुजीत कुमार, छत्तीसगढ़ से भाजपा की लक्ष्मी वर्मा व कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम ने शपथ ली। गौरतलब है कि गुरुवार को संसद में देश की महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन का उल्लेख किया गया। सांसदों ने पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई के निधन पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की।राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को बताया कि विख्यात गायिका आशा भोसले ने अपने आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और भारतीय संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाई। उन्हें पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। आशा भोसले का 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था।सदन को यह भी बताया गया कि मोहसिना किदवई का 8 अप्रैल 2026 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह राज्यसभा की सदस्य रहीं और छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने राज्यसभा में दो कार्यकाल पूरे किए। उनका जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हुआ था। करीब छह दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों में सेवा दी। वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहीं और केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उनके निधन को देश ने एक अनुभवी जननेता, कुशल प्रशासक और प्रतिष्ठित सांसद की क्षति बताया। सदन ने दोनों महान हस्तियों के निधन को देश की अपूरणीय क्षति बताया। अंत में सभी सदस्यों ने खड़े होकर दिवंगत आत्माओं की स्मृति में मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति की ओर से नामित हरिवंश नारायण सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय में उपसभापति पद के लिए नामांकन किया। वे जनता दल(यू) से सदन में दो बार निर्वाचित एवं दोनों बार राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं।
राज्यसभा में शुक्रवार को उपसभापति का निर्वाचन होगा। विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर आपत्ति जाहिर करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसका अर्थ है कि बिना विरोध हरिवंश फिर से उपसभापति बन जायेंगे।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में कहा कि विपक्ष ने शुक्रवार को निर्वाचन प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है। हालांकि इसके पीछे हरिवंश का निरादर करने का कोई ईरादा नहीं है। विपक्ष को उम्मीद है कि हरिवंश अपने तीसरे कार्यकाल में विपक्ष के अनुरोधों के प्रति अधिक सहिष्णु और ग्रहणशील होंगे।जयराम रमेश ने तीन आपत्तियां जताई है। उनका कहना है कि 7 सालों से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है। राज्यसभा में राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत किसी व्यक्ति को इससे पहले कभी भी उपसभापति पद के लिए विचार नहीं किया गया है। वहीं, उन्हें तीसरी बार मौका देते समय विपक्ष से विचार भी नहीं किया गया।पिछले माह राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित किया था। हरिवंश नारायण सिंह का 9 अप्रैल को उपसभापति के तौर पर कार्यकाल समाप्त हो गया। तब से यह पद खाली है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति सदन का संचालन करते हैं। -
नई दिल्ली। उत्तरी रेलवे के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि शुक्रवार से नई दिल्ली के आदर्श नगर से कश्मीर के बडगाम के बीच संयुक्त पार्सल प्रोडक्ट रैपिड कार्गो सर्विस (जेपीपी-आरसीएस) ट्रेन चलाई जाएगी। उत्तरी रेलवे के बयान के अनुसार, यह ट्रेन नई दिल्ली के आदर्श नगर स्टेशन और मध्य कश्मीर के बडगाम के बीच संचालित होगी।
अधिकारियों ने कहा कि इससे घाटी के व्यापारियों, खासकर फल उत्पादकों और हस्तशिल्प कारीगरों को बड़ी राहत मिलेगी। आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह सेवा फिलहाल 31 मई तक ट्रायल आधार पर नियमित रूप से चलाई जाएगी। इसके बाद यात्रियों और माल की मांग (ऑक्यूपेंसी) संतोषजनक रहने पर इसे स्थायी सेवा में शामिल किया जा सकता है।ट्रेन संख्या 00462 बडगाम से सुबह 6:15 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 5 बजे दिल्ली के आदर्श नगर पहुंचेगी। रास्ते में माल चढ़ाने और उतारने की सुविधा के लिए ट्रेन बाड़ी ब्राह्मण और अंबाला कैंट स्टेशन पर भी निर्धारित ठहराव करेगी। बयान में कहा गया कि बाड़ी ब्राह्मण रेलवे स्टेशन पर ट्रेन 00462 का समय व्यापारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बदला गया है।वापसी यात्रा में ट्रेन संख्या 00461 आदर्श नगर से सुबह 5 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 10:45 बजे बडगाम पहुंचेगी। इस विशेष पार्सल ट्रेन में आठ पार्सल वैन और एक सीटिंग-कम-लगेज कोच होंगे। रेलवे के अनुसार, यह सेवा सड़क परिवहन की तुलना में ज्यादा तेज होगी और 23-24 घंटे में दूरी तय करेगी, जिससे सेब और चेरी जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान ताजे बने रहेंगे।बयान में कहा गया कि इस पहल का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और केसर, अखरोट, पश्मीना शॉल और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों को देश भर के बाजारों तक तेजी से पहुंचाना है। सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर उचित सिंघल ने पत्रकारों को बताया कि व्यापारियों और किसानों की लगातार मांग को देखते हुए 17 अप्रैल से 31 मई तक इस पार्सल ट्रेन को नियमित रूप से चलाने का फैसला लिया गया है। -
नई दिल्ली। परिसीमन बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में स्पष्ट और सख्त संदेश देते हुए कहा कि देश में होने वाली यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह निर्णय देश की एकता और संविधान की भावना के अनुरूप होगा।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम, छोटे राज्य हों या बड़े, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले हुए परिसीमन के दौरान जो अनुपात तय किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और आगे की वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।उन्होंने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अगर किसी को भरोसा चाहिए तो वह गारंटी देने को भी तैयार हैं। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। जब नीयत साफ होती है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं होती। कुछ लोग इस प्रक्रिया को उनके राजनीतिक स्वार्थ से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे मिल सकता है, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी का नुकसान नहीं होगा। हमें किसी क्रेडिट की जरूरत नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि बिल पारित होने के बाद वह सभी दलों को श्रेय देने के लिए तैयार हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश को क्षेत्रीय नजरिए से बांटकर नहीं देखा जा सकता। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हम एक देश हैं। हमें देश को टुकड़ों में सोचने का कोई अधिकार नहीं है।पीएम मोदी ने नारी सशक्तीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका हक है। हम यह न सोचें कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं, यह उनका अधिकार है, जिसे दशकों से रोका गया है। आज हमें उस गलती का प्रायश्चित करने का अवसर मिला है। लोकतंत्र की जननी होने के नाते, यह भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता है। इसी प्रतिबद्धता के कारण पंचायतों में ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने में अनुभव और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पंचायत स्तर पर किए गए प्रयोगों ने यह साबित किया है कि सही नीयत और अनुभव से बड़े बदलाव संभव हैं। मैंने लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। मेरा अनुभव यह है कि संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने की प्रतिबद्धता लाभकारी सिद्ध होती है। जैसे-जैसे अनुभव गहराता है, उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। -
नई दिल्ली। संसद में एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसे क्षण बार-बार नहीं आते। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अवसर केवल एक विधेयक पारित करने का नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में लाने का है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” कहा जाता है और हजारों वर्षों की लोकतांत्रिक परंपरा में यह एक नया आयाम जोड़ने का समय है। उन्होंने माना कि यह कदम 25-30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था, जिससे यह व्यवस्था अब तक और परिपक्व हो चुकी होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का मतलब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक आंकड़े नहीं हैं, बल्कि नीति-निर्धारण में सभी की समान भागीदारी जरूरी है। देश की 50% आबादी को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीति के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विषय पूरे देश और समाज से जुड़ा है, इसलिए सभी दलों को एकजुट होकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में पंचायत स्तर पर महिलाओं की मजबूत नेतृत्व क्षमता विकसित हुई है। लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में काम कर चुकी हैं और अब वे नीति-निर्धारण में भागीदारी चाहती हैं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को खुद यह तय करने का अवसर मिलना चाहिए कि प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान की शक्ति के कारण ही वे इस पद तक पहुंचे हैं। उनका दायित्व है कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना उनके सामर्थ्य के साथ अन्याय होगा।उन्होंने कहा कि 2023 में इस विधेयक को व्यापक समर्थन मिला था और अब इसे लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए। 2029 तक इसे लागू करने का अवसर है, जिसे गंवाया नहीं जाना चाहिए।पीएम नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में किसी राज्य या क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा और परिसीमन में संतुलन बनाए रखा जाएगा।उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका अधिकार है, जिसे लंबे समय तक टाला गया है। अब समय है कि इस ऐतिहासिक कमी को दूर किया जाए।प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसले का श्रेय किसी एक दल या व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे सदन और देश का सामूहिक निर्णय होगा।उन्होंने बताया कि देशभर में पंचायत, ब्लॉक और शहरी निकायों में बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं और प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं। उनका अनुभव संसद की कार्यक्षमता को और बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया जाए, ताकि देश की नारी शक्ति को मजबूत संदेश दिया जा सके। -
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन पर चल रही बहस के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत घटेगी नहीं, बल्कि और मजबूत होगी।
गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश की 25 सीटें बढ़कर 38 हो जाएंगी, जबकि तेलंगाना की 17 सीटें बढ़कर 26 होंगी। केरल की 20 सीटें बढ़कर 30 और कर्नाटक की 28 सीटें बढ़कर 42 हो जाएंगी।उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की 39 सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी और उसकी हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। ऐसे में यह कहना गलत है कि दक्षिण भारत को परिसीमन से नुकसान होगा।अमित शाह ने बताया कि वर्तमान 543 सदस्यीय लोकसभा में दक्षिण भारत के 129 सांसद हैं, जो 23.76% हिस्सेदारी रखते हैं। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी और हिस्सेदारी 23.87% तक पहुंच जाएगी, यानी दक्षिण की ताकत में स्पष्ट वृद्धि होगी। गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि दक्षिण भारत को लेकर जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर गलतफहमी फैलाने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है और वर्तमान जनगणना प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ रही है। इस पर भी किसी तरह का भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग से संबंधित कानून पहले की तरह ही है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का मौजूदा चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। - नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया एक 'बेहद तनावपूर्ण' स्थिति से गुजर रही है, जिससे सभी देश प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति लाने की अपील की, क्योंकि सैन्य संघर्ष से किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता। मोदी ने ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ व्यापक वार्ता के बाद यह टिप्पणी की, जिसमें व्यापार, रक्षा और अवसंरचना के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। अपनी वार्ता में, मोदी और स्टॉकर ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में संघर्षों के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की और उन्हें कम करने के लिए संयुक्त रूप से काम करने का संकल्प लिया।ऑस्ट्रिया के चांसलर विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से चार दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को नयी दिल्ली पहुंचे। भारत की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मीडिया बयान में कहा, ''पूरी दुनिया बहुत ही गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रही है। और यह स्थिति हम सब को प्रभावित कर रही है।'' उन्होंने कहा, ''ऐसे तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में, भारत और ऑस्ट्रिया इस बात पर एकमत हैं कि सैन्य संघर्ष से समस्याओं का हल नहीं हो सकता। चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम एक स्थिर, टिकाऊ और स्थायी शांति का समर्थन करते हैं।" मोदी ने कहा, "हम इस बात पर भी सहमत हैं कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है और आतंकवाद का उन्मूलन हमारी साझा प्रतिबद्धता है।'' मोदी-स्टॉकर वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें एक समझौता भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों को एक-दूसरे के यहां निवेश करने में सहायता के लिए एक त्वरित तंत्र स्थापित करने से संबंधित है। सैन्य क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक समझौता किया गया। भारत और ऑस्ट्रिया ने आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना को सुगम बनाना भी शामिल है। स्टॉकर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया द्विपक्षीय व्यापार में "बहुत सकारात्मक" वृद्धि हो रही है और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा। पश्चिमी एशियाई संकट का जिक्र करते हुए चांसलर ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय से निपटने के लिए स्थिरता, विश्वास और भरोसेमंद साझेदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक चुनौतियां और गंभीर होती जा रही हैं, ऐसी साझेदारियां अधिक मूल्यवान हो जाती हैं। साथ मिलकर, हम ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें हम स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ रह सकते हैं। हम नियमों पर आधारित विश्व व्यवस्था के पक्षधर हैं।"प्रधानमंत्री मोदी ने स्टॉकर की यात्रा को "अत्यंत महत्वपूर्ण" बताया और भारत में रेलवे के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा पहल सहित कई इंजीनियरिंग परियोजनाओं में ऑस्ट्रियाई कंपनियों की भागीदारी का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत-यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता होने के बाद, भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू हो गया है। चांसलर स्टॉकर की यात्रा के साथ, हम भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को भी एक नए युग में ले जा रहे हैं।" मोदी ने कहा कि चांसलर की यात्रा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों में "नयी ऊर्जा का संचार" करेगी। उन्होंने कहा, "हमें खुशी है कि वह एक व्यापक दृष्टिकोण और एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं। ऑस्ट्रिया की विशेषज्ञता को भारत की गति और व्यापकता के साथ मिलाकर, हम पूरी दुनिया के लिए विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करेंगे।" उन्होंने कहा, "हम रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपनी साझेदारी को मजबूत करेंगे।" विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों की स्पष्ट रूप से निंदा की। दोनों नेताओं ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले और नवंबर में लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की भी "कड़ी शब्दों में" निंदा की। जॉर्ज ने कहा कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद से व्यापक तरीके से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुजरात के धोलेरा में भारत का पहला चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) को अधिसूचित कर मंजूरी दे दी है। इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, यह एसईजेड करीब 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से लगभग 21,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह संयंत्र इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और आईटी/आईटीईएस सेवाओं को समर्थन देगा और इसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ आसान लॉजिस्टिक्स व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।यह परियोजना देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (चिप निर्माण) प्लांट होगी, जो भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।सरकार ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए एसईजेड नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। 3 जून 2025 को जारी अधिसूचना के तहत न्यूनतम भूमि आवश्यकता 50 हेक्टेयर से घटाकर 10 हेक्टेयर कर दी गई है।इन सुधारों में जमीन उपयोग में लचीलापन, फ्री सप्लाई को नेट फॉरेन एक्सचेंज में शामिल करना और घरेलू बाजार (डीटीए) में बिक्री की अनुमति जैसे प्रावधान शामिल हैं। इनका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और कारोबार को आसान बनाना है।सुधारों के बाद कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग प्लांट शामिल है, जिसमें करीब 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इसके अलावा, एक्वस समूह कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसईजेड स्थापित कर रहा है।सीजी सेमी, कायन्स सेमीकॉन और हुबली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है, जो देश में सप्लाई चेन को मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।सरकार का लक्ष्य इन एसईजेड के माध्यम से एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है। मंत्रालय ने कहा कि उद्योग की भागीदारी और नीतिगत समर्थन से भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण केंद्र बनाने में यह पहल अहम साबित होगी। -
नई दिल्ली। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।
राष्ट्रपति ने डॉ. स्टॉकर की पहली भारत यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच संबंध लोकतंत्र और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं, जो दोनों देशों को और करीब लाते हैं।उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रिया यात्रा ने संबंधों को नई दिशा दी। इससे नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, जल प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।राष्ट्रपति ने कहा कि यह यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के निष्कर्ष के बाद हो रही है, जिससे व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए भारत में निवेश के व्यापक अवसर हैं, खासकर सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया दोनों ही ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं और विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। 2024 में शुरू किया गया ‘इंडिया-ऑस्ट्रिया स्टार्टअप ब्रिज’ इस क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत कर रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यह यात्रा भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सभी महत्वपूर्ण आयामों को और गति प्रदान करेगी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फोन किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तुरंत सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने हालात को लेकर चिंता जताई और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर दिया।पश्चिम एशिया संकट के बीच यह दूसरी बार है जब राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की। इससे पहले 19 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय हालात पर चिंता व्यक्त की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा स्थिति में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और फ्रांस मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रयास जारी रखेंगे। इससे पहले 14 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा की थी। ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी संघर्ष की स्थिति के बाद वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक संपर्क तेज हुए हैं। ऐसे में भारत, फ्रांस और अमेरिका के बीच संवाद क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। - नागपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को युवा चिकित्सकों से नवाचार, अनुसंधान करने और निरंतर सीखते रहने का आग्रह करते हुए इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा में नैतिक मूल्य सर्वोपरि हैं और प्रौद्योगिकी करुणा का स्थान नहीं ले सकती। राष्ट्रपति मुर्मू नागपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह में एक सभा को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस देश की बेटियां और बेटे मिलकर 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों में ना केवल सेवा भाव होना चाहिए, बल्कि आजीवन सीखने की प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जिज्ञासा ही प्रगति का आधार है। चिकित्सा विज्ञान में नये समाधान खोजने की प्रेरणा ना केवल आपको एक उत्कृष्ट डॉक्टर बनाएगी, बल्कि सेवा के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगी।''उन्होंने युवा चिकित्सकों से नवाचार, अनुसंधान करने और निरंतर सीखते रहने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि चिकित्सा क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत क्यों ना हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती। करुणा की भावना को हमेशा बनाए रखें, क्योंकि यह आपको ना केवल एक अच्छा डॉक्टर बनाती है, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनाती है।" उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले दशक में नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन कल्याण आरोग्य योजना के तहत 43 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए हैं, जो प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1.85 लाख से अधिक 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' स्थापित किए हैं। मुर्मू ने सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों को मानवता की सेवा करने का विशेष अवसर प्राप्त है और उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व करना चाहिए तथा इसे संवेदनशीलता के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि आज डिग्री प्राप्त कर रहे छात्र ना केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि अपने साथी नागरिकों को स्वस्थ रखने में भी योगदान देंगे। ऐसे ही प्रयासों से हम देश की आजादी के 100 साल पूरे होने तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे।"
- मुंबई. ब्याज दरों में कमी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की बैंक कर्ज पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को यह जानकारी दी। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, बैंक ऋण की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में बढ़कर 43 प्रतिशत रहा था। एजेंसी ने इस बदलाव का मुख्य कारण बैंक ऋण बाजार में कम ब्याज दरों को बताया है, जिसके चलते पूंजी बाजार के माध्यम से जारी होने वाले बॉन्ड में कमी आने की संभावना है। एजेंसी ने कहा, ''पिछले वित्त वर्ष के दौरान जहां बैंक ऋण दरों में गिरावट जारी रही, वहीं बॉन्ड प्रतिफल पहली छमाही में गिरने के बाद दूसरी छमाही में बढ़ गया और अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।'' इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण निकट भविष्य में बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की हिस्सेदारी भी कम रहने के आसार हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रतिभूतियों से एनबीएफसी को संसाधन जुटाने में कुछ सहायता मिलने की उम्मीद है। क्रिसिल की निदेशक मालविका भौतिका ने कहा कि अनिश्चित व्यापक आर्थिक वातावरण के कारण सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल के निकट भविष्य में ऊंचा बने रहने की उम्मीद है।
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चंडीगढ़. आनंदपुर साहिब से श्रद्धालुओं को लेकर लौट रही एक बस पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में पलट गई, जिससे उसमें सवार आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 19 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे बस्सी पठाना के मोरिंडा-चुन्नी रोड क्षेत्र में हिम्मतपुरा के पास हुई। बस में सवार सभी श्रद्धालु फतेहगढ़ साहिब के मेन माजरी के निवासी थे और बैसाखी के अवसर पर रूपनगर जिले के आनंदपुर साहिब से मत्था टेकने के बाद लौट रहे थे। फतेहगढ़ साहिब के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शुभम अग्रवाल ने कहा, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि वाहन में कुछ खराबी आ गई होगी। बस में करीब 40 श्रद्धालु सवार थे।
फतेहगढ़ साहिब के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) राज कुमार ने बताया कि पहले इस घटना में एक महिला सहित छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 21 लोग घायल हो गए थे। ''लेकिन बाद में दो अन्य घायलों ने चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) और मोहाली के फेज 6 स्थित एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।'' घायलों को फतेहगढ़ साहिब, बस्सी पठाना और रूपनगर जिला स्थित मोरिंडा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
दुर्घटना के बाद कई स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्यों में मदद की।
घायलों में से एक महिला ने बताया कि बस मेन माजरी गांव पहुंचने ही वाली थी कि अचानक पलट गई।
बस्सी पठाना के विधायक रूपिंदर सिंह मंगलवार रात घटनास्थल पर पहुंचे।
विधायक ने कहा कि सभी श्रद्धालु मेन माजरी गांव के थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्रद्धालुओं की मौत पर दुख व्यक्त किया और कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में उनके परिजन के साथ खड़ी है। कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आनंदपुर साहिब से श्रद्धालुओं के लौटने के दौरान बस्सी पठाना के पास हुए दुखद बस हादसे से मैं बहुत दुखी हूं। अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। वाहेगुरु इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों को शक्ति प्रदान करें।'' शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कहा, ''बैसाखी के दिन श्री आनंदपुर साहिब से लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ हुई दुखद बस दुर्घटना में लोगों की मौत की खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ है। मैं वाहेगुरु जी से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें, शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति दें। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।''


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