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मालदा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधने के लिए घुसपैठ को मुख्य मुद्दा बनाया और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन ने राज्य की जनसांख्यिकी को बदल दिया है एवं इसके कारण दंगे हुए हैं। मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के ‘‘संरक्षण और सिंडिकेट राज'' के चलते घुसपैठ में वृद्धि हुई है। मोदी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद को लेकर जारी विवाद के बीच मतुआ समुदाय जैसे शरणार्थियों को भी आश्वस्त किया, जो पड़ोसी बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण पलायन कर भारत आए हैं। मोदी ने मुस्लिम बहुल जिले मालदा में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कहा कि घुसपैठ पश्चिम बंगाल के सामने "एक बहुत बड़ी चुनौती" है। उन्होंने कहा कि विकसित और समृद्ध देश भी अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें बाहर करने के लिए ठोस कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आने पर पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों पर नकेल कसने और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए "बड़े कदम" उठाएगी। उन्होंने कहा, दुनिया में ऐसे विकसित और समृद्ध देश हैं जिनके पास धन की कोई कमी नहीं है, फिर भी वे घुसपैठियों को बाहर निकाल रहे हैं। पश्चिम बंगाल से घुसपैठियों को निकालना भी उतना ही आवश्यक है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि घुसपैठ का असर जमीन पर दिखायी दे रहा है और राज्य के कई हिस्सों में जनसांख्यिकीय संतुलन बदल गया है। उन्होंने कहा, ‘‘लोग मुझे बताते हैं कि कई जगहों पर तो बोली जाने वाली भाषा भी बदलने लगी है। भाषा और बोली में अंतर उभरने लगे हैं। घुसपैठियों की बढ़ती आबादी के कारण पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद सहित कई इलाकों में दंगे होने लगे हैं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की ‘सिंडिकेट' व्यवस्था राज्य में घुसपैठियों को बसाने का काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि घुसपैठियों और सत्तारूढ़ दल के बीच ‘‘सांठगांठ'' है। उन्होंने कहा, ‘‘आपको इस सांठगांठ को तोड़ना होगा। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जैसे ही भाजपा की सरकार बनेगी, घुसपैठ और घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'' प्रधानमंत्री ने शरणार्थियों, खासकर राजनीतिक रूप से अहम मतुआ समुदाय को आश्वस्त किया।
संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत नागरिकता के वादे के बीच मतुआ समुदाय 2019 से भाजपा का प्रमुख वोट बैंक रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने वाले मतुआ समुदाय जैसे शरणार्थियों को मैं आश्वस्त करना चाहता हूं: आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की ‘‘गुंडागर्दी'' और ‘‘गरीबों को धमकाने व डराने की राजनीति'' का जल्द ही अंत होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों से घिरा पश्चिम बंगाल अब बदलाव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘पश्विम बंगाल चारों ओर से भाजपा सरकारों से घिरा हुआ है, जिन्होंने सुशासन सुनिश्चित किया है। अब पश्चिम बंगाल में भी सुशासन का समय आ गया है।'' बिहार में भाजपा की चुनावी जीत को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तब उन्होंने टिप्पणी की थी कि अब बंगाल की बारी है।'' उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को प्रचंड जनादेश मिलेगा। राज्य में विधानसभा चुनाव तीन महीने बाद होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं को रोकने और केंद्रीय योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंचने देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए या नहीं? पश्चिम बंगाल के लोगों का वास्तविक कल्याण तभी होगा जब यहां कोई बाधक सरकार नहीं हो, बल्कि जनता के पक्ष में काम करने वाली भाजपा सरकार हो।'' बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘‘निर्दयी और क्रूर'' तृणमूल कांग्रेस सरकार जनता का पैसा लूट रही है और गरीबों के लिए केंद्र द्वारा भेजा गया कोष हड़प रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल के हर गरीब परिवार को अपना स्थायी घर मिले। जिन लोगों का हक है, उन्हें मुफ्त राशन मिले। मैं चाहता हूं कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई कल्याण योजनाओं का पूरा लाभ आप तक पहुंचे, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा क्योंकि केंद्र से भेजे गए पैसे को तृणमूल कांग्रेस नेता हड़प रहे हैं।'' मोदी ने राज्य में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के लागू नहीं होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां आयुष्मान भारत लागू नहीं हुआ है। तृणमूल कांग्रेस सरकार बंगाल में मेरे भाइयों और बहनों को इसके लाभ से वंचित कर रही है। ऐसी निर्दयी सरकार को बंगाल से विदाई देना जरूरी है।'' क्षेत्र के विकास का वादा करते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार मालदा और पश्चिम बंगाल का "पुराना गौरव और वैभव" बहाल करेगी और किसानों व युवाओं के लिए नये अवसर लाएगी। उन्होंने जिले के प्रसिद्ध आम का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘जब भाजपा सत्ता में आएगी, हम मालदा की आम अर्थव्यवस्था को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे'' हालिया चुनावी सफलताओं का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा को अब उन क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है, जहां इसे पहले कमजोर माना जाता था। उन्होंने महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों क परिणाम और केरल में पार्टी की बढ़त का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी का विकास मॉडल मतदाताओं, खासकर युवाओं का विश्वास जीत रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज आपका उत्साह देखकर मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कह रहा हूं कि इस बार पश्चिम बंगाल के लोग भी भाजपा को विजयी बनाएंगे।'' -
मालदा (पश्चिम बंगाल) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को हावड़ा एवं गुवाहाटी के बीच देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा पश्चिम बंगाल में 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की रेल एवं सड़क परियोजनाओं की शुरुआत की। मोदी ने यहां एक कार्यक्रम में चार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाई, जो न्यू जलपाईगुड़ी को नागरकोइल और तिरुचिरापल्ली तथा अलीपुरद्वार को एसएमवीटी बेंगलुरु और मुंबई (पनवेल) से जोड़ेंगी। प्रधानमंत्री ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच देश की सबसे उन्नत और पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की पहली जोड़ी का उद्घाटन किया। उन्होंने गुवाहाटी-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भी यहीं से डिजिटल तरीके से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूरी तरह वातानुकूलित स्लीपर ट्रेन से हावड़ा-गुवाहाटी मार्ग पर यात्रा समय लगभग 2.5 घंटे कम होने की उम्मीद है। फिलहाल ट्रेन से हावड़ा से गुवाहाटी जाने में 18 घंटे लगते हैं। मोदी ने उद्घाटन समारोह में कहा कि नयी परियोजनाएं, विशेष रूप से नयी ट्रेन क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाएंगी। मोदी ने कहा, “एक समय था जब हम दूसरे देशों में विकास देखते थे और हमारा सपना होता था कि काश हमारे देश में भी ऐसी आधुनिक ट्रेन चलें। आज वह सपना साकार हो गया।” उन्होंने कहा, “नयी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने मां काली की पावन भूमि को और मां कामाख्या की पवित्र धरती से जोड़ दिया है।” मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी परिवहन सुविधाओं को आधुनिक बनाया है तथा भारत को आत्मनिर्भर भी बनाया है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि आज भारत अमेरिका और यूरोप से अधिक डिब्बों का निर्माण कर रहा है।
मोदी ने कहा, ‘‘आधुनिक भारत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने आज से अपनी यात्रा शुरू की है। यह नई ट्रेन देश के लोगों के लिए लंबी दूरी की यात्रा को आसान और सुगम बनाएगी।'' मालदा टाउन स्टेशन पर कुछ यात्रियों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने नई वंदे भारत ट्रेन को लेकर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं देख रहा हूं कि विदेशी लोग भारत में मेट्रो और अन्य ट्रेन के वीडियो बना रहे हैं ताकि वे दुनिया को बता सकें कि भारत में ट्रेन यात्रा में किस तरह क्रांति आ रही है।'' मोदी ने कहा कि आधुनिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन निकट भविष्य में पूरे देश में चलेंगी और भारतीय रेलवे का पुनरुद्धार हो रहा है, जिसमें रेल लाइनों का विद्युतीकरण एवं स्टेशनों का आधुनिकीकरण शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘इस समय देशभर में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेन चल रही हैं। इनके साथ ही आधुनिक और तेज गति वाली ट्रेन का एक नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि शनिवार को पश्चिम बंगाल को अमृत भारत एक्सप्रेस की चार और ट्रेन मिल गईं, जिससे राज्य, विशेष रूप से उत्तरी बंगाल, पश्चिमी और दक्षिणी भारत से बेहतर ढंग से जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा, “देश के अन्य हिस्सों से बंगाल और पूर्वी भारत आने वाले, गंगासागर, दक्षिणेश्वर और कालीघाट घूमने आने वाले तथा तमिलनाडु और महाराष्ट्र जाने वाले लोगों को इन अमृत भारत ट्रेन से यात्रा में आसानी होगी।” आधुनिकीकरण के साथ-साथ भारतीय रेलवे के आत्मनिर्भर बनने पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि भारत में बने इंजन, डिब्बे और मेट्रो ट्रेन देश की पहचान बन रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व भर के कई देशों को यात्री और मेट्रो ट्रेनों के लिए डिब्बे निर्यात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होता है। उन्होंने कहा, ‘‘देश को जोड़ना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है और दूरियों को कम करना हमारा मिशन है।''
इस अवसर पर मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत जल्द ही वंदे भारत ट्रेन का निर्यात करेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “क्षेत्र के व्यंजनों के स्वाद को ध्यान में रखते हुए कोलकाता से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में बंगाली भोजन और गुवाहाटी से चलने वाली ट्रेन में असमिया भोजन परोसा जाएगा।” प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नयी परियोजनाएं लंबी दूरी की सस्ती और विश्वसनीय रेल ‘कनेक्टिविटी' को बढ़ावा देंगी। समारोह में मोदी ने राज्य में चार प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें बालुरघाट से हिली तक नयी रेल लाइन, न्यू जलपाईगुड़ी में माल ढुलाई संबंधी आधुनिक केंद्र, सिलीगुड़ी लोको शेड का उन्नयन और जलपाईगुड़ी जिले में वंदे भारत ट्रेन रखरखाव इकाई के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। बयान में कहा गया है, “ये परियोजनाएं यात्री और माल ढुलाई सेवाओं को सशक्त बनाएंगी, उत्तर बंगाल में लॉजिस्टिक दक्षता को सुधारेंगी, और क्षेत्र में रोजगार के अवसर उत्पन्न करेंगी।” बयान में कहा गया है, “ये परियोजनाएं आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और बेहतर कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिनसे पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों को देश के प्रमुख विकास इंजन के रूप में मजबूत किया जाएगा।” प्रधानमंत्री मोदी इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वी भारत की दो दिवसीय यात्रा के दौरान इन परियोजनाओं की शुरुआत कर रहे हैं। मोदी मालदा के बाद असम जाएंगे और फिर रविवार को पश्चिम बंगाल लौटेंगे। वह गुवाहाटी में रात्रि विश्राम करेंगे और अगली सुबह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। -
जयपुर. जयपुर लिटरेचर फेस्विटल (जेएलएफ) में आए लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी आध्यात्म से जुड़ रही है। त्रिपाठी ने कहा कि आजकल लोग करुणा का प्रदर्शन करने में लगे हैं और इसकी सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट कर रहे हैं। त्रिपाठी ने कहा कि उनके हिसाब से करुणा प्रदर्शन नहीं होना चाहिए बल्कि कर्म का प्रदर्शन होना चाहिए। वह जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शनिवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। अमीश ने कहा, ‘‘हमारी युवा पीढ़ी का कहीं न कहीं पश्चिमीकरण हो रहा है। मोबाइल में पता नहीं क्या-क्या देखते रहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि सारे युवा ऐसे हैं। मेरी किताबें अधिकतर युवा ही पढ़ते हैं। हमारी युवा पीढ़ी हमारी संस्कृति से अपने ही अंदाज में जुड़ रही है। अब युवा आध्यात्म से भी जुड़ रहे हैं।' शिव मंत्र 108 बार पढ़ने के महत्व का जिक्र करते हुए अमीष त्रिपाठी ने कहा, ‘‘हमारे पूर्वज आध्यात्म को विज्ञान से जोड़ते थे। हमारी संस्कृति में विज्ञान और वेद में भेद नहीं है। हमारे पूर्वज चाहते थे कि हमारी संस्कृति ऋतु से जुड़ी रहे। हमारी परंपरा रही है कि विज्ञान का सहारा लेकर प्रकृति के अनुकूल चला जाए।'' उन्होंने कहा,‘‘हमारे देवी-देवताओं की कहानियां सुनने से हम उबते नहीं हैं। यही कारण है कि हमारी संस्कृति जिंदा है।'' अमीश ने कहा, ‘‘यदि मुझे शिवलिंग की पूजा करनी है और मुझे ऐसा करना अच्छा लगता है, तौ मैं कर रहा हूं। लेकिन अंधविश्वास अच्छी बात नहीं हैं। मैं अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखता हूं। हमें यह हक नहीं है कि किसी की अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा दें।
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जयपुर. कवि, संपादक और संगीत अध्येता यतींद्र मिश्र को यहां 19वें जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) में 11वें महाकवि कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जेएलएफ के आयोजक एवं ‘टीमवर्क आर्ट्स' के संजय के. रॉय ने यहां एक सत्र में यतींद्र मिश्र को सर्वसम्मति से इस पुरस्कार के लिए चुने जाने की घोषणा की। इसके बाद इस्कॉन से जुड़े गौर गोपाल दास ने उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया। यतींद्र मिश्र को उनके काव्य संग्रह 'बिना कलिंग विजय' के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
मिश्र के अब तक तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हुए हैं— ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएं', ‘यदा-कदा', और ‘ड्योढ़ी पर आलाप'। इसके अलावा उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर एक ‘गिरिजा' नामक पुस्तक भी लिखी है। उन्होंने रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की ग्रंथावली का वर्ष 2000 में सह-संपादन किया था। उन्होंने कुंवर नारायण पर आधारित दो पुस्तकों और 'स्पिक मैके' के लिए विरासत 2001 के कार्यक्रम के लिए भी संपादन किया है। लता मंगेशकर पर ‘लता सुर गाथा' पुस्तक उनकी एक और चर्चित कृति है, जिसके लिए उन्हें 64वां राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। पुरस्कार चयन समिति में नमिता गोखले, संजय के. रॉय, सुकृत पाल कुमार, रंजीत होसकोटे सिद्धार्थ सेठिया और जयप्रकाश सेठिया शामिल रहे। इससे पहले अरुंधती सुब्रमण्यम, के. सच्चिदानंदन और रंजीत होसकोटे को कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार मिल चुका है। कन्हैयालाल सेठिया का जन्म राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ शहर में हुआ था। प्रसिद्ध राजस्थानी गीत ‘आ तो सुरगा नै सरमावै, ई पै देव रमण नै आवे' इन्हीं की रचना है। उनका 11 नवम्बर 2008 को निधन हो गया था। वह राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि थे। उन्हें 2004 में पद्मश्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 1988 में ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी साहित्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। -
नई दिल्ली। भारत के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक ट्रेन हावड़ा और गुवाहाटी के बीच चलेगी और पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस सेवा से न केवल यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर मिलेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।पूरी तरह वातानुकूलित इस ट्रेन में कुल 16 कोच लगाए गए हैं, जिनमें 823 यात्रियों के एक साथ यात्रा करने की क्षमता है। ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि यह लगभग 958 से 968 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 14 घंटे में तय करेगी, जो मौजूदा ट्रेनों के मुकाबले करीब 2.5 से 3 घंटे कम समय है। इसकी अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जिससे भविष्य में इसे और तेज बनाया जा सकेगा।यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम, ऑटोमैटिक दरवाजे और बेहतर बर्थ की व्यवस्था की गई है। खास बात यह भी है कि सफर के दौरान यात्रियों को क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद मिलेगा, जिसमें बंगाली और असमिया खान-पान शामिल होगा। यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी।कोचों की बात करें तो इस स्लीपर वंदे भारत में 11 एसी थ्री टियर, 4 एसी टू टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच शामिल है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस ट्रेन में आरएसी यानी वेटिंग सीट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है, ताकि यात्रियों को पूरी तरह आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।किराए को लेकर भी सरकार ने मिडिल क्लास को ध्यान में रखा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, हावड़ा-गुवाहाटी के बीच हवाई यात्रा का किराया जहां लगभग 6 से 8 हजार रुपए तक होता है, वहीं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में थर्ड एसी का किराया भोजन सहित करीब 2,300 रुपए, सेकंड एसी का लगभग 3,000 रुपए और फर्स्ट एसी का करीब 3,600 रुपए तय किया गया है। - अहमदाबाद। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान को स्थापित किया और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में खूब ऊंचा फहराता रहे। शाह ने आदि शंकराचार्य की ‘ग्रंथावली' के गुजराती संस्करण का विमोचन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास जताया कि अद्वैत वेदांत के आठवीं शताब्दी के विद्वान के संपूर्ण ग्रंथ, जिन्हें 15 खंडों में प्रकाशित किया गया है, गुजरात के युवाओं को इन्हें समझने में मदद करेंगे और उनके जीवन तथा कार्यों पर प्रभाव छोड़ेंगे। शाह ने कहा, “इन ग्रंथों में आपको उस समय के समाज में मौजूद सभी प्रश्नों के समाधान मिलेंगे।”शंकरचार्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतने कम जीवनकाल में इतना कुछ हासिल कर पाने वाले लोग बहुत कम हैं। शाह ने कहा कि शंकराचार्य ने पैदल ही पूरे देश की यात्रा की और एक तरह से उन्होंने चलते-फिरते विश्वविद्यालय की भूमिका अदा की। गृह मंत्री ने कहा, “उन्होंने केवल पैदल यात्रा ही नहीं की, बल्कि भारत की पहचान स्थापित की, चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की, ज्ञान के केंद्र बनाए और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में ऊंचा फहराता रहे।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने जीवनकाल में आदि शंकराचार्य ने बौद्ध, जैन, कपालिक और तांत्रिक परंपराओं सहित विभिन्न दार्शनिक धाराओं के उदय के बीच सनातन धर्म को लेकर उत्पन्न संदेहों का समाधान किया। शाह ने कहा कि शंकराचार्य ने सभी प्रश्नों और शंकाओं के तार्किक उत्तर दिए। उन्होंने कहा, “आदि शंकराचार्य ने केवल विचार ही नहीं दिए, बल्कि भारत को विचारों का समन्वय भी दिया। उन्होंने केवल ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उसे एक रूप भी दिया, उन्होंने केवल मुक्ति का विचार ही प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उसका मार्ग भी प्रशस्त किया।”
- नयी दिल्ली। दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने बृहस्पतिवार को भारतीय स्टार्टअप फर्मों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद देने के लिए ‘बाजार पहुंच कार्यक्रम' की शुरुआत की। इसके साथ ही कंपनी ने अपने मुक्त-स्रोत मॉडल के समूह 'जेम्मा' में नए एआई मॉडल जोड़ने की भी घोषणा की। गूगल ने कहा कि यह पहल भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) संबंधी ढांचे से जुड़े उसके निवेश को आगे बढ़ाती है। कंपनी पहले ही आंध्र प्रदेश में एआई बुनियादी ढांचा केंद्र के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर चुकी है। विशाखापत्तनम में स्थापित वैश्विक एआई केंद्र को हरित ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है और इसमें गूगल के उन्नत एआई चिप का इस्तेमाल होगा, जिससे भारतीय स्टार्टअप फर्मों को उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाएं मिल सकेंगी। गूगल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि 'बाजार पहुंच कार्यक्रम' का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप फर्मों को स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयोगों से सीधे वैश्विक स्तर पर विस्तार करने में मदद करना है। यह कार्यक्रम उन एआई-आधारित स्टार्टअप फर्मों के लिए है जो शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुके हैं और अब बड़े स्तर पर काम करना चाहते हैं। गूगल ने जेम्मा एआई मॉडल परिवार के तहत मेडजेम्मा 1.5 और फंक्शनजेम्मा जैसे नए मॉडल भी पेश किए।मेडजेम्मा 1.5 मॉडल स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली उन्नत एआई जरूरतों को पूरा करेगा जबकि फंक्शनजेम्मा हल्का मॉडल है जो मोबाइल या उपकरणों पर सुरक्षित तरीके से एआई आधारित काम करने में मदद करेगा। इस मौके पर गूगल की क्षेत्रीय प्रबंधक (भारत) प्रीति लोबाना ने कहा, "एआई अब सिर्फ अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग तक पहुंच चुका है।" उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप अब एआई का सिर्फ प्रयोग नहीं कर रहे बल्कि वे अब अपनी क्षमता को भरोसेमंद उत्पादों और कारोबार में भी बदल रहे हैं।
- कोलकाता। गंगा नदी में गत 11सालों में मछलियों की प्रजातियों में विविधता में करीब 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह खुलासा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय अंतरस्थलीय मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) के अध्ययन में हुआ है। अध्ययन में कहा गया है कि यह सरकार के नेतृत्व में किए गए प्रयासों के तहत निरंतर पारिस्थितिक सुधार को दर्शाती है। अनुसंधान के मुताबिक नदी में लगभग पांच दशकों में मछलियों की सबसे अधिक विविधता दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों ने इसके विभिन्न हिस्सों में 230 मछली प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया है। सीआईएफआरआई के निदेशक बीके दास ने कहा,‘‘यह कई वर्षों से चल रही नमामि गंगा सहित कई पुनरुद्धार योजनाओं का परिणाम है।'' उन्होंने बताया कि मछली की प्रजातियों की संख्या 2012 में 143 से बढ़कर 2023 में 230 हो गई, जो 60.83 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अलावा, 2023 में किए गए नवीनतम सर्वेक्षण में प्रजातियों की संख्या 230 दर्ज की गई, जो आधी सदी से भी अधिक समय में सबसे अधिक विविधता है। ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक 1822 में नदी में मछली की 271 प्रजातियां पाई जाती थीं, लेकिन प्रदूषण, पर्यावास के क्षरण और अत्यधिक दोहन के कारण समय के साथ यह विविधता लगातार कम होती गई।
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नयी दिल्ली. यूरोपीय संघ (ईयू) की शीर्ष नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। अमेरिका की व्यापार और टैरिफ (शुल्क) नीतियों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच, दोनों पक्ष 27 जनवरी को बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। वैश्विक व्यवस्था के अस्थिर प्रतीत होने के बीच, 25 जनवरी से कोस्टा और वॉन डेर लेयेन की नयी दिल्ली की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान ईयू और भारत द्वारा एक व्यापक वैश्विक एजेंडा तैयार करने पर विचार किए जाने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) से व्यापारिक संबंधों के काफी मजबूत होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आमंत्रण पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा करेंगे और 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, वे 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। हर साल गणतंत्र दिवस समारोह में विश्व के नेताओं को आमंत्रित किया जाता है।
यूरोपीय संघ ने एक वक्तव्य में कहा कि शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यूरोपीय संघ-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना तथा प्रमुख नीतिगत क्षेत्रों में सहयोग को और प्रगाढ़ करना है। इसमें कहा गया है कि व्यापार, सुरक्षा और रक्षा, स्वच्छ परिवर्तन और जन सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा के शीर्ष एजेंडे में शामिल रहेंगे। कोस्टा ने कहा, ‘‘भारत यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। हम मिलकर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। यह बैठक हमारी साझेदारी को मजबूत करने और हमारे सहयोग में प्रगति लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।'' शीर्ष सूत्रों के अनुसार, शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है। ऐसे समय में जब दुनिया वाशिंगटन की टैरिफ नीति के मद्देनजर व्यापार में व्यवधान का सामना कर रही है, प्रस्तावित समझौते से कई क्षेत्रों में समग्र द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने में गुणात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के अलावा, दोनों पक्ष शिखर सम्मेलन में रक्षा समझौता और रणनीतिक एजेंडा तय कर सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। पंद्रहवां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन जुलाई 2020 में वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया था। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘विशेष रूप से फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के आयुक्तों की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद, द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में विस्तारित और प्रगाढ़ हुए हैं।'' शिखर सम्मेलन में अपनाई जाने वाली नयी रणनीतिक कार्ययोजना में साझा हितों के पांच क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें सुरक्षा और रक्षा, संपर्क और वैश्विक मुद्दे, समृद्धि, स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. एक भारतीय रक्षा कंपनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन रोधी प्रणाली के लिए थल सेना और भारतीय नौसेना से “ऑर्डर हासिल किए हैं”। यह प्रणाली दुश्मन ड्रोन को बाधित और निष्क्रिय करने के साथ-साथ उभरते हवाई खतरों से निपटने की सेना की क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि ‘आईजी टी-शुल पल्स एंटी-ड्रोन सिस्टम' हल्का और तेजी से तैनात किये जाने योग्य है और इसका उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के सैनिकों, परिधि सुरक्षा, सैन्य ठिकानों और “महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्तियों” की सुरक्षा करना है। नोएडा स्थित कंपनी ‘आईजी डिफेंस' ने कहा, “यह सीधी दृष्टि रेखा और हस्तक्षेप-मुक्त परिस्थितियों में दो किलोमीटर तक की प्रभावी जैमिंग रेंज प्रदान करता है, जिससे सामरिक इकाइयों को उभरते हवाई खतरों के खिलाफ तत्काल प्रतिक्रिया का विकल्प मिलता है।” यह रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी उन्नत मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस), लघु दूरी की मिसाइल प्रणालियों और मानव-रोधी समाधानों के डिजाइन, विकास और तैनाती में विशेषज्ञता रखती है। बयान में कहा गया है कि आईजी डिफेंस को भारत में निर्मित ‘आईजी टी-शुल पल्स एंटी-ड्रोन सिस्टम' के लिए सेना और नौसेना दोनों से ऑर्डर मिल चुके हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि इसकी आपूर्ति और तैनाती लगभग एक महीने में होने की उम्मीद है।
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नयी दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक समिति ने बड़े संस्थानों में प्रति 500 विद्यार्थियों और छोटे संस्थानों में प्रति 100 विद्यार्थियों पर एक परामर्शदाता के प्रस्ताव समेत बच्चों के लिए सहायता प्रणाली को मजबूत करने, तनाव और चिंता पर समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ये सिफारिशें यूजीसी समिति के उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पर एकसमान नीति संबंधी मसौदा दिशानिर्देशों में शामिल हैं। सिफारिशों के अनुसार, “उच्च शिक्षा संस्थानों को सभी आवश्यक भौतिक बुनियादी ढांचे से युक्त एक समर्पित मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करना होगा। तनाव और चिंता पर समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया है।” भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति तैयार करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2025 के निर्देशों के बाद यूजीसी ने दिल्ली स्थित मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) के निदेशक राजिंदर के. धामिजा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। मसौदा मानदंडों के तहत, यूजीसी को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति के कार्यान्वयन की निगरानी और समर्थन करने की केंद्रीय भूमिका सौंपी गई है।
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जयपुर. गीतकार एवं लेखक जावेद अख्तर ने बृहस्पतिवार को यहां 19वें जयपुर साहित्योत्सव (जेएलएफ) के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि धर्मनिरपेक्षता का पाठ क्रैश कोर्स के जरिये नहीं पढ़ाया जा सकता, यह ‘जीवन जीने की शैली' है, जो स्वाभाविक रूप से आती है। जावेद अख्तर ने यहां कहा कि हालिया समय में धर्मनिरपेक्षता ‘चार अक्षरों वाला शब्द' बनकर रह गयी है, लेकिन धर्मनिरपेक्ष मूल्य औपचारिक दिशानिर्देशों या सैद्धांतिक पाठों के जरिये जड़ें नहीं जमा सकते। उन्होंने कहा, ‘‘धर्मनिरपेक्षता जीवन जीने का एक तरीका होना चाहिए, क्योंकि आपके आसपास सभी इस तरीके से जी रहे हैं और उसी से यह अपने आप आपके भीतर समाहित हो जाती है। यदि एक दिन आपको भाषण दिया जाए और आप उसे सुनने के बाद उसके क, ख, ग, घ बिंदुओं को रट लें तो यह फर्जी है, यह कृत्रिम है। यह ज्यादा लंबा नहीं चलेगा।'' अख्तर ने कहा, ‘‘लेकिन यदि यह आपके जीवन जीने का तरीका है- वैसा तरीका जो आपने अपने बुजुर्गों को जीते हुए देखा है, उन लोगों को देखा है, जिनका आप सम्मान करते हैं- तो यह स्वाभाविक रूप से आपके भीतर आ जाता है।'' उन्होंने ‘जावेद अख्तर : प्वाइंट्स आफ व्यू' सत्र में दर्शकों की भारी भीड़ के बीच ये बातें कही।
स्वभाव से नास्तिक अख्तर ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनका पालन-पोषण ऐसे घर में हुआ जहां धर्म बिरले ही रोजमर्रा के जीवन में प्रवेश करता था। उन्होंने अपने घर में केवल अपने नाना नानी को पूजा करते देखा था। उन्होंने अपनी नानी का एक किस्सा सुनाया जो अशिक्षित महिला थीं, लेकिन उनमें गजब की संवेदनशीलता थी। जावेद अख्तर ने कहा कि काश! ‘आजकल के नेताओं में उसका दसवां हिस्सा भी संवेदनशीलता होती। बचपन में एक बार उनके नाना ने उनपर दबाव डाला कि यदि वह मजहबी आयतों को याद कर लेंगे तो वह उन्हें पचास पैसे देंगे जो कि उस जमाने में किसी खजाने से कम नहीं था। इस पर उनकी नानी ने गुस्से से मामले में दखल देते हुए कहा कि किसी को भी किसी दूसरे पर धर्म को जबरन थोपने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘वह दिन मेरी मजहबी तालीम का आखिरी दिन था। हां, उस समय तो मैं नानी के रवैये से खुश नहीं हुआ, क्योंकि पचास पैसे हाथ से जाते रहे। लेकिन आज पलटकर देखता हूं तो उस औरत के बारे में सोचता हूं, जिसे अपना नाम तक लिखना नहीं आता था, लेकिन उसकी संवेदनशीलता गजब की थी। काश! हमारे आज के नेताओं में इसका दसवां हिस्सा ही होता।'' जावेद अख्तर ने इस सोच पर भी चुटकी ली कि आज की युवा पीढ़ी में खासतौर पर कमियां हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें बहुत पुराने समय से चली आ रही हैं: “वर्तमान कभी भी स्वर्ण युग नहीं होता।” उन्होंने कहा, ‘‘आप बेशक गूगल खंगाल लें। यहां तक कि अरस्तु भी युवा पीढ़ी से खुश नहीं थे। ईसा के 360 या 350 साल पहले ये लिखा गया था कि युवा पीढ़ी में कोई एकाग्रता नहीं है। उन्हें कोई तमीज नहीं है। वे पूरी तरह से बर्बाद हैं। ये शिकायत हमेशा से रही है।'' जावेद अख्तर ने बीते समय और वर्तमान के बीच तुलना के संबंध में कहा, ‘‘आज फिल्म इंडस्ट्री में चीजें पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गई हैं... मुझे याद है जब मैं असिस्टेंट डायरेक्टर था और पहली बार फिल्म इंडस्ट्री में आया था, तो असिस्टेंट डायरेक्टर का पद बहुत बेइज़्ज़ती वाला होता था। हमारा काम क्या था? मैडम के जूते जल्दी से लाओ। हीरो का कोट कहां है? जैकेट कहां है? हम ये सब करते थे। हम कहते थे, 'मैं असिस्टेंट डायरेक्टर हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘‘लेकिन, आजकल के ‘असिस्टेंट', फिल्मी सितारों को उनके नाम से बुलाते हैं। जब मैं उन्हें देखता हूं तो डर जाता हूं। असिस्टेंट डायरेक्टर हीरो को उसके नाम से बुला रहा है, हमने कभी सोचा भी नहीं था।'' पांच दिन के इस साहित्योत्सव में 350 से ज़्यादा मशहूर लेखक और विद्वान शामिल हो रहे हैं, जिनमें बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक, शतरंज के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद, ब्रिटिश एक्टर और लेखक स्टीफन फ्राई और पूर्व नौकरशाह एवं लेखक गोपाल कृष्ण गांधी, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अनुराधा रॉय, जानी-मानी फिल्म आलोचक भावना सोमाया और मशहूर लेखक मनु जोसेफ, रुचिर जोशी, और के.आर. मीरा शामिल हैं। साहित्योत्सव 19 जनवरी को खत्म होगा। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवा करेंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान करेंगे, जबकि कई अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करेंगे या शिक्षण में अपना भविष्य बनाएंगे। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। ये गुण हैं सीखने की निरंतर इच्छा और लगन, विपरित और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ पालन, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प, टीम वर्क और सहयोग की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग और ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना है।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ये गुण न केवल उन्हें एक अच्छा पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने उन्हें शिक्षा प्रदान की है, उसके प्रति वे ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है। पिछले दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और आंत्रप्रेन्योर संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर एआई और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करके और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित युवा हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य उन युवाओं पर निर्भर करता है, जो वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिम्मेदारी से कार्य करते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपने छात्रों में इन मूल्यों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे जो भी पेशा चुनें, उनका योगदान राष्ट्र को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक हो। - नयी दिल्ली. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जैतपुर पुश्ता इलाके में आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा पीछा किए जाने के दौरान बचने की कोशिश में 20 वर्षीय युवक की उस वक्त मौत हो गयी जब उसकी मोटरसाइकिल एक गड्ढे में गिर गई। बाइक की हेडलाइट खराब थी। पुलिस ने बताया कि घटना 10 जनवरी की है जिसमें फार्मेसी में कंपाउंडर के रूप में काम करने वाले तुषार कुमार (20) की मौत हो गई जबकि बाइक पर पीछे बैठे उनके दोस्त फार्मासिस्ट सुधाकर सिंह (29) घायल हो गए। वे बाइक पर नशे में धुत एक रिश्तेदार की तलाश में निकले थे। सिंह ने बताया, "रात के करीब 10 बजे थे, जब हमने अपने मामा के बेटे उद्धम की तलाश शुरू की, जो एक विवाद के बाद नशे की हालत में घर से निकल गया था।" उन्होंने बताया कि चूंकि उद्धम अक्सर मदनपुर इलाके में जाता था, इसलिए हमने वहीं से अपनी खोज शुरू की। उन्होंने बताया कि एक कॉलोनी से लौटते समय बाइक की हेडलाइट काम नहीं कर रही थी और दृश्यता कम थी, तभी आवारा कुत्तों के एक झुंड ने हमारे वाहन को घेर लिया। बेहतर दृश्यता के लिए, सिंह ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट चालू कर दी, और तुषार ने कुत्तों से बचने के लिए गाड़ी की गति बढ़ा दी, लेकिन वह सड़क के पास लगभग 1.5 फुट गहरे गड्ढे को नहीं देख सका। सिंह के अनुसार, तुषार ने मोटरसाइकिल पर से नियंत्रण खो दिया और वह गड्ढे में गिर गया। वाहन के अगले हिस्से से टकराने के बाद तुषार के सिर में गंभीर चोट आई और बहुत अधिक खून बहने लगा। सिंह ने बताया कि उसे तत्काल पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।सिंह ने बताया कि उन्हे भी चोटें आईं और बाद में उसे मोती नगर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके हाथ में लिगामेंट फटने का पता लगाया। यह घटना तब और भी भयावह हो गई जब मृतक के परिवार के सदस्यों ने सिंह पर कथित तौर पर हमला किया और तुषार की मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि तुषार के भाई ने कथित तौर पर उनपर हमला किया और बाद में उनके मामा ने उन्हें बचाया, जो उनके फोन करने के बाद मौके पर पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, उन्हें घटना के बारे में पीसीआर कॉल मिली और तुरंत एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया।पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमने पीड़ित का बयान दर्ज कर लिया है। उनके अनुसार, वे अपने एक रिश्तेदार की तलाश कर रहे थे, तभी कुत्तों ने उनका पीछा किया।" उन्होंने कहा कि वे पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं ताकि घटना का पुनर्निर्माण किया जा सके और बेहतर ढंग से समझा जा सके कि वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस ने सिंह के बयान के आधार पर 11 जनवरी को मामला दर्ज किया और कहा कि विस्तृत जांच चल रही है।
- जयपुर. राजस्थान के जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर फतेहपुर के हरसावा गांव के निकट बुधवार को एक अनियंत्रित कार की सामने से आ रहे एक ट्रक से टक्कर में एक ही परिवार की छह महिलाओं की मौत हो गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान रघुनाथपुरा निवासी मोहिनी देवी (80), उनकी बेटी इंद्रा (60) बहू तुलसी (45) व चंदा देवी (55), संतोष (45) और आशा (60) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि मोहिनी की पोती सोनू, बहू बरखा और कार चालक मांडेला निवासी वसीम को गंभीर घायल होने पर सीकर स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और मृतकों के शव भी बड़ी मुश्किल से निकाले जा सके। पुलिस ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार को कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार, कार में सवार लोग लक्ष्मणगढ़ में एक संबंधी की मौत होने पर दाह संस्कार में शामिल होने गये थे और वापस लौटते समय यह हादसा हो गया। पुलिस ने बताया कि दाह संस्कार में करीब दो दर्जन लोग चार गाड़ियों में गए थे और वापसी में एक गाड़ी में परिवार की आठ महिलाएं बैठी थीं।
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सागर द्वीप .पश्चिम बंगाल. मकर संक्रांति के अवसर पर पश्चिम बंगाल में हुगली नदी और सागर द्वीप में बंगाल की खाड़ी के संगम पर लगने वाले वार्षिक गंगासागर मेले में बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। तड़के ही श्रद्धालुओं की भीड़ सागर द्वीप के ठंडे पानी में स्नान करती,भजन और प्रार्थनाएं करती हुई दिखाई दी। मान्यता है कि इस शुभ दिन यहां स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कपिल मुनि आश्रम की ओर जाने वाले रास्ते पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जहां हजारों लोग धैर्यपूर्वक पूजा करने के लिए इंतजार कर रहे थे। भीड़ इतनी थी कि खड़े होने के लिए स्थान कम पड़ रहा था। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को अपराह्न 1.19 बजे सबसे शुभ ‘महा मुहूर्त', जिसे महेंद्रक्षण के नाम से जाना जाता है, शुरू हुआ और 24 घंटे तक चलेगा। उन्होंने बताया कि पवित्र मुहूर्त शुरू होने के कारण तीर्थयात्रियों की और भी अधिक भीड़ आने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देशभर से तीर्थयात्री आए हैं, जिनमें से कई लोगों ने ठंड से बचने के लिए कंबल ओढ़कर खुले आसमान के नीचे भजन गाते हुए रात बिताई। राज्य सरकार ने कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित इस द्वीप पर व्यापक व्यवस्था की है, जहां हजारों पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों को भारी भीड़ को संभालने के लिए तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था न केवल मेले के मैदानों पर बल्कि कोलकाता और आसपास के जिलों के रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी कड़ी कर दी गई है। पहली बार, उन्नत ‘वाटर ड्रोन' जिन्हें ‘बचाव ड्रोन' भी कहा जाता है, को तटरेखा के साथ निरंतर निगरानी के लिए तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ये ड्रोन कपिल मुनि आश्रम और मुख्य स्नान घाटों के पास तैनात हैं। प्रत्येक ड्रोन 100 किलोग्राम तक का भार ले जा सकता है और संकट में फंसे तीर्थयात्रियों को शीघ्रता से निकालने में सक्षम है।'' उन्होंने बताया कि नागरिक सुरक्षा दल, आपदा राहत इकाइयां और नौसेना कर्मी भी स्नान घाटों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चौबीसों घंटे गश्त कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के ऊर्जा मंत्री अरूप बिस्वास ने बताया कि मंगलवार तक अनुमानित 60 लाख तीर्थयात्री गंगासागर पहुंच चुके थे और दिनभर में इनकी संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है। गंगासागर तीर्थयात्रा हिंदू पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित है। इस धार्मिक आयोजन में कई तीर्थयात्रियों ने भीड़भाड़ वाले मेला क्षेत्र में जेब कटने और चोरी की शिकायतें की हैं। पुलिस ने बताया कि अब तक जेब कटने के 25 मामले दर्ज किए गए हैं और विभिन्न अपराधों के लिए 112 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। भीड़भाड़ के दौरान लापता हुए 889 तीर्थयात्रियों में से 835 को पुलिस और स्वयंसेवकों की मदद से ढूंढकर उनके परिवारों से मिला दिया गया है। हालांकि, अधिकतर भक्तों के लिए, असुविधा और जोखिम आस्था के आगे फीके पड़ गए।
मध्य प्रदेश से आए एक बुजुर्ग तीर्थयात्री ने डुबकी लगाने के बाद कांपते हुए लेकिन मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘आज ठंड कोई मायने नहीं रखती। अगर किसी दिन सब कुछ सहने की क्षमता है, तो वह संक्रांति पर गंगासागर का दिन है।'' -
नयी दिल्ली. सहायक प्रोफेसर डॉ चंदन तिवारी को उनके शोध प्रबंध के लिए प्रथम ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध' सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट' ने यहां जारी एक बयान में बताया कि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय निर्णायक मंडल ने डॉ तिवारी के शोध प्रबंध ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का भाषा चिंतन' को शोध सम्मान के लिए चयनित किया है। बयान के मुताबिक, ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ अपर्णा द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गाजीपुर के रहने वाले तिवारी ने ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भाषा चिंतन' विषय पर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से वर्ष 2022 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी और वह राजस्थान के सलूंबर जिले के राजकीय महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर (अतिथि संकाय) के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि मार्च में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कार स्वरूप एक पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा तथा राजकमल प्रकाशन चयनित शोध प्रबंध को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करेगा।
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अहमदाबाद. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और लोगों की आस्था को मिटाना आसान नहीं है, क्योंकि ये सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर हैं। सदियों से सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के बार-बार प्रयासों के बावजूद इसके पुनर्निर्माण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमला करने वाले लोग अंततः मिट गए, लेकिन मंदिर आज भी शान से खड़ा है। गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद शाह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्घाटन किया था। महमूद गजनी ने 1,000 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर पर पहला हमला किया था।
शाह ने कहा कि 1000 साल बाद और कई बार नष्ट होने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर अब भी शान से खड़ा है और उसका ध्वज आसमान में लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां एक भव्य सोमनाथ कॉरिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है। शाह ने कहा, ‘‘यह पूरी दुनिया को संदेश है कि भारत के सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और भारतीय लोगों की आस्था को मिटाना इतना आसान नहीं है। यह सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर है। यह सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक है।'' शाह ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे एक वर्ष तक मनाया जाएगा। इस दौरान देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य भारत की आत्मा को झकझोरना, उसकी चेतना को जागृत करना और सनातन धर्म की जड़ों को समाज के सबसे गहरे स्तर तक मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग एक हजार वर्ष पहले हमारे भव्य सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनी ने ध्वस्त किया था। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब जैसे अन्य आक्रमणकारियों ने भी इस पर बार-बार हमले किए। लेकिन हर बार इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘विनाश करने वालों की सोच विनाश में विश्वास रखने वाली थी, जबकि निर्माण करने वालों की आस्था सृजन में थी। आज एक हजार वर्ष बाद वे विनाशक इतिहास में विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र के सामने गर्व से खड़ा है।'' शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल, के एम मुंशी, जामनगर के महाराज और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से किया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्स्थापन का संकल्प लिया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उस संकल्प के पीछे भावना यह थी कि सोमनाथ पर हुआ हमला केवल मंदिर पर हमला नहीं था, बल्कि वह हमारी आस्था, हमारे धर्म और हमारे आत्मसम्मान पर प्रहार था। इसका उत्तर किसी और हमले में नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने में निहित है।'' अन्य परियोजनाओं के तहत शाह ने अपने गृह नगर मानसा में एक खेल परिसर का उद्घाटन किया। गांधीनगर से सांसद शाह ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों को ध्यान में रखते हुए इस खेल परिसर में कुछ और सुविधाएं जोड़े जाने की आवश्यकता है। शाह ने कहा, ‘‘इसलिए मैंने इस परिसर में सभी आवश्यक सुविधाएं जोड़ने के लिए सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व) कोष के माध्यम से 15 करोड़ रुपये एकत्र करने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी होगी कि आसपास के इलाकों के बच्चे इन सुविधाओं का उपयोग करें।'' शाह ने कहा कि गुजरात सरकार अहमदाबाद को ‘स्पोर्ट्स हब सिटी' के रूप में विकसित कर रही है, जो पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करेगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 में राष्ट्रमंडल खेल में भाग लेने के लिए कई देशों के खिलाड़ी अहमदाबाद आएंगे और 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के अधिकार हासिल करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। -
नयी दिल्ली। मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल का त्योहार बुधवार को देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने नदियों और जलाशयों में डुबकी लगाई तथा सामुदायिक भोज में भाग लिया, वहीं रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान छाया रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मकर संक्रांति पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह उत्सव देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और नागरिकों को एकजुटता की भावना की याद दिलाता है जो सभी को एक सूत्र में पिरोता है। मोदी ने असम के लोगों को माघ बिहू की भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आनंद, स्नेह और भाईचारे का अवसर है जो असमिया संस्कृति की सर्वोत्तम विशेषताओं को दर्शाता है।
दिल्ली में मोदी ने पोंगल समारोह में भाग लिया और इसे दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक का प्रतिनिधित्व करने वाला एक वैश्विक त्योहार बताया। मोदी केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित समारोह में तमिल समाज की प्रमुख हस्तियों के साथ मौजूद थे, जिनमें हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘पराशक्ति' के कलाकार भी शामिल थे। ‘पोंगल' उत्सव से पहले मनाया जाने वाला भोगी त्योहार पूरे तमिलनाडु में मनाया गया। केरल और पुडुचेरी में भी पोंगल उत्सव की शुरुआत हुई। असम में माघ बिहू उत्सव मंगलवार रात को उरुका (सामुदायिक भोज) के साथ शुरू हुआ, जहां लोग फसल की कटाई का त्योहार मनाने के लिए एक साथ खाना पकाते और खाते हैं। उत्सव का एक मुख्य आकर्षण ‘भेलाघर' है, जो फूस का बना होता है। इन्हीं संरचनाओं के अंदर और आसपास अधिकांश सामुदायिक भोज आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति उत्सव के तहत नौ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सुबह प्रयागराज में गंगा और संगम में डुबकी लगाई। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा, जबकि देश के कई हिस्सों में बुधवार को यह त्योहार मनाया गया। वर्तमान माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान उत्सव मकर संक्रांति बृहस्पतिवार को है।
राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व बुधवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। लोग मंदिरों में दर्शन करने पहुंचे और दान किया। राजस्थान में, तड़के से लोग अजमेर के पुष्कर सरोवर और जयपुर के गलता धाम में स्नान करने के लिए उमड़ पड़े। एकादशी के साथ यह दिन पड़ने के कारण इस वर्ष यह त्योहार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। गोविन्द देवजी मंदिर, ताड़केश्वरजी मंदिर और राज्य के अन्य तीर्थ स्थलों को फूलों और पतंगों से सजाया गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों तीर्थयात्रियों ने सागर द्वीप में वार्षिक गंगासागर मेले में हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्नान किया। सूर्योदय से काफी पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ सागर द्वीप के ठंडे पानी में उतर गई और भजन-कीर्तन करने लगी। मकर संक्रांति के अवसर पर ओडिशा में लोगों ने विभिन्न जलाशयों में स्नान किया। इस अवसर पर सैकड़ों लोग पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पहुंचे, जहां सुबह से ही विशेष अनुष्ठान किए जा रहे थे। भगवान बलभद्र, भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा को मकर चौरासी वेश में सजाया गया था।
रंग-बिरंगे फूलों और तुलसी की मालाएं त्रिमूर्ति के इस दिन के वस्त्र का हिस्सा रहीं। देवताओं को विशेष मिठाई ‘मकर चौला' अर्पित की जाती है जो ताजे चावल, गुड़, नारियल और केले से तैयार की जाती है। सूर्योदय का दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग चंद्रभागा तट और कोणार्क के सदियों पुराने सूर्य मंदिर भी गए। ओडिशा में बुधवार तड़के रायगड़ा जिले में पटाखों में हुए विस्फोट में चार लोग झुलस गए। यह घटना रायगा कस्बे के येदुसाही में हुई, जो तेलुगु भाषी लोगों की बस्ती है और जहां मकर संक्रांति से पहले ‘भोगी पोड़ी' मनाई जा रही थी। गुजरात में मकर संक्रांति (जिसे उत्तरायण के नाम से जाना जाता है) पर आसमान हजारों रंग-बिरंगी पतंगों से पट गया और ‘काई पो चे' के नारे गूंज रहे थे। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तीन दिवसीय फसल उत्सव भोगी के साथ शुरू हुआ। इस उत्सव के उपलक्ष्य में राज्य भर में सुबह-सुबह अलाव जलाए गए। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह तीन दिवसीय उत्सव भोगी, मकर संक्रांति और कनुमा के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में मंगलवार को लोहड़ी मनाई गई। - गुवाहाटी/ दिग्गज गायक भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई और प्रख्यात असमिया संगीतकार समर हजारिका का मंगलवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। समर हजारिका कुछ समय से बीमार थे और हाल में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। वह 75 वर्ष के थे और उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। वह 10 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उन्होंने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए गीत गाए थे और संगीत दिया था। उन्होंने परिवार की समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ाने में, विशेष रूप से भारत रत्न से सम्मानित अपने बड़े भाई की विरासत को, मानवता और सार्वभौमिक भाईचारे के गीतों के माध्यम से आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने समर हजारिका के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “उनकी भावपूर्ण आवाज हर अवसर को रोशन कर देती थी और उन्होंने असम के सांस्कृतिक परिदृश्य में अमिट योगदान दिया। उन्होंने सुधाकांत डॉ. भूपेन हजारिका की समृद्ध विरासत को भी आगे बढ़ाया और उनकी जन्म शताब्दी मनाने के हमारे प्रयासों में व्यापक योगदान दिया।” मुख्यमंत्री ने कहा, “उनके निधन से असम ने एक और स्वर्णिम आवाज खो दी है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।” केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ उरुका (माघ बिहू पर्व का दिन) के दिन प्रख्यात गायक के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों और आत्माओं को मोह लिया थ।” मंत्री ने कहा कि असमिया संगीत में उनका योगदान अमर रहेगा और हमेशा याद रखा जाएगा।
- नयी दिल्ली/ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के राजनयिक सलाहकार इमैनुएल बोन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मैक्रों के जल्द ही भारत आने की संभावना है।मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में बोन के साथ मुलाकात पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, भारत–फ्रांस के बीच मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी की फिर से पुष्टि की गई, जो विभिन्न क्षेत्रों में करीबी सहयोग से परिलक्षित होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग का नवाचार, प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विस्तार होना उत्साहजनक है, विशेषकर ऐसे समय में जब दोनों देश ‘नवाचार वर्ष' मना रहे हैं। उन्होंने कहा, प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। निकट भविष्य में राष्ट्रपति मैक्रों का भारत में स्वागत करने को लेकर उत्सुक हूं।'
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नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि छोटे कारोबारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का फायदा उठाना चाहिए और उत्पादकता बढ़ाने के लिए दैनिक कार्य में एआई का इस्तेमाल करना चाहिए।
साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में खासकर युवाओं को एआई की बेसिक समझ होनी चाहिए और पता होना चाहिए यह कैसे काम करता है, कहां इसका इस्तेमाल हो सकता है और पूरी जिम्मेदारी के साथ इसका इस्तेमाल करना चाहिए। आईटी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी बयान के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हुए कहा, “इसी मकसद से नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम लॉन्च किया गया है और उम्मीद है कि यह प्रोग्राम अगले एक साल में 10 लाख स्टूडेंट्स को जोड़ेगा।”सरकार ने नए लॉन्च किए गए नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम और इसके फ्लैगशिप ‘युवा एआई फॉर ऑल’ कोर्स पर जोर देकर युवा सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत किया है, जो स्वामी विवेकानंद के युवाओं को आगे बढ़ाने के विजन को एआई-संचालित भविष्य के लिए जरूरी टूल्स से जोड़ता है। इस इवेंट में, ‘युवा एआई फॉर ऑल’ फाउंडेशन कोर्स पर जोर दिया गया, ताकि एआई साक्षरता को एक जरूरी लाइफ स्किल बनाया जा सके, जो नेशनल यूथ डे के युवा शक्ति पर फोकस के साथ मेल खाता है।यह कोर्स चार घंटे से थोड़ा अधिक समय का है, युवा एआई फॉर ऑल को एआई सीखने के लिए एक आसान एंट्री पॉइंट के तौर पर डिजाइन किया गया है, जिसके लिए किसी पिछले टेक्निकल बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है। यह ‘युवा एआई फॉर ऑल’ कोर्स 11 भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु) में उपलब्ध होगा। यह कोर्स बिल्कुल मुफ्त है और फ्यूचरस्किल्स प्राइम, आईजीओटीकर्मयोगी, दीक्षा और दूसरे पॉपुलर एड-टेक पोर्टल्स जैसे लीडिंग लर्निंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।कोर्स पूरा होने पर, हर सीखने वाले को भारत सरकार की तरफ से एक ऑफिशियल सर्टिफिकेट मिलेगा। आईटी मंत्रालय ने कहा, “युवा एआई फॉर ऑल,नेशनल एआई लिटरेसी प्रोग्राम एआई तक पहुंच को आसान बनाने और भारत के नागरिकों, खासकर युवाओं को एआई-आधारित भविष्य के अवसरों और जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक अहम संगठनात्मक बदलाव होने वाला है, क्योंकि इसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन फाइल करने वाले हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक के तौर पर मौजूद रहने की उम्मीद है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच नबीन के नेतृत्व में मजबूत समर्थन और विश्वास को दिखाता है।
प्रधानमंत्री की मौजूदगी को भाजपा की संगठनात्मक और वैचारिक दिशा में निरंतरता और स्थिरता पर जोर देने के तौर पर देखा जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के लिए उसके स्थापित आंतरिक संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है। कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय नेतृत्व के सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, जिससे यह पार्टी के संगठनात्मक कैलेंडर में एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम बन जाएगा।नामांकन प्रोसेस पूरा होने के बाद, नए भाजपा अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को होने वाली है। उम्मीद है कि इस घोषणा से आने वाली चुनावी चुनौतियों से पहले पार्टी के नेतृत्व संरचना के बारे में स्पष्टता मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की संगठनात्मक रणनीति को आकार मिलेगा।राजनीतिक जानकार इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह नियुक्ति ऐसे अहम समय पर हो रही है जब भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने और अपनी नेतृत्व को लंबे समय के शासन और चुनावी लक्ष्यों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रही है। 20 जनवरी को आधिकारिक घोषणा के बाद और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को 14 दिसंबर को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन खरमास (अशुभ समय) के कारण पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनका औपचारिक पदभार ग्रहण रुका हुआ था, जो 14 जनवरी को खत्म हो रहा है।कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से, नबीन अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और पार्टी के साथियों से मिल रहे हैं। नवीन पहले पार्टी में कई अहम संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष का पद भी शामिल है।( -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है।
राजीव चंद्रशेखर ने पत्र में यह भी बताया कि जून 2024 में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें राज्य के नाम को आधिकारिक दस्तावेजों में ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की गई है। चंद्रशेखर ने यह भी बताया कि उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से इस महान राज्य को, जो अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है, ‘केरलम’ के रूप में ही देखती आई है। पार्टी की विचारधारा पारंपरिक, भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सम्मान पर आधारित है।प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राजीव चंद्रशेखर ने उम्मीद जताई कि राज्य का नाम बदलने के बाद सभी राजनीतिक दल मिलकर केरलम की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और पुनर्जीवित करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से एक विकसित और सुरक्षित केरलम का निर्माण संभव होगा, जहां सभी मलयाली (चाहे वे किसी भी धर्म से हों) अपनी आस्था और परंपराओं को लेकर सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें। राजीव चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि राज्य का नाम ‘केरलम’ रखने से उन कट्टरपंथी तत्वों के प्रयासों को कमजोर किया जा सकेगा, जो धर्म के आधार पर राज्य को बांटने और अलग-अलग जिले बनाने की मांग करते रहते हैं।उनके अनुसार, अपनी ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा केरलम, समाज को जोड़ने का काम करेगा।पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि मलयालम भाषा में निहित और विशिष्ट नाम ‘केरलम’ को ही राज्य का आधिकारिक नाम सुनिश्चित किया जाए।राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया कि अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ा ‘केरलम’ भविष्य में सभी मलयालियों के लिए एक उज्ज्वल, समृद्ध और सुरक्षित राज्य के रूप में आगे बढ़ेगा। -
नई दिल्ली। मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की गई है, जो आध्यात्मिक पर्यटन का नया मानक स्थापित कर रही है। देश-दुनिया से संगम स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संगम क्षेत्र की रेत पर अत्याधुनिक टेंट कॉलोनी बसाई गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना के अनुरूप विकसित यह टेंट सिटी माघ मेला को केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और रोजगार से जोड़ने का सशक्त माध्यम बना रही है।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पूर्व विकसित टेंट कॉलोनी में कुल 50 आधुनिक कॉटेज तैयार किए गए हैं। श्रद्धालु इन कॉटेज की ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। टेंट सिटी को तीन श्रेणियों- प्रीमियम, लग्जरी और डीलक्स में विभाजित किया गया है।प्रीमियम कॉटेज का किराया 15 हजार रुपये, लग्जरी का 11 हजार 500 रुपये और डीलक्स कॉटेज का किराया 7 हजार 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इनमें क्रमशः 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टेंट शामिल हैं। पर्यटन मंत्री ने बताया कि टेंट सिटी में ठहरने वाले श्रद्धालुओं को उसी शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है।परिसर में यज्ञशालाओं का निर्माण किया गया है, जहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। साथ ही, सांस्कृतिक वातावरण को सजीव बनाने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय लोककला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है।जयवीर सिंह ने बताया कि माघ मेला 2026 में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है। संगम टेंट कॉलोनी परिसर में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के स्टॉल लगाए गए हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेला अब केवल आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए एक बड़े व्यावसायिक मंच के रूप में उभर रहा है।देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी उत्पादों को विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे वर्षों से स्थानीय कारीगर आगे बढ़ा रहे हैं, अब आधुनिक स्वरूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि प्रदेश का हर बड़ा आयोजन आस्था के साथ-साथ रोजगार, पर्यटन और स्थानीय कला को सशक्त करे। संगम टेंट सिटी इस सोच का सजीव उदाहरण है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा अनुभव श्रद्धालुओं को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि माघ मेला 2026 प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव और आर्थिक संभावनाओं को एक साथ आगे बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है।

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