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- नयी दिल्ली. इतिहास में दस अगस्त का दिन कई घटनाओं के साथ दर्ज है। इनमें एक दिलचस्प घटना यह है कि बच्चों का चहेता आभासी चरित्र स्पाइडरमैन पहली बार कॉमिक बुक में नजर आया। इसे बच्चों ने इतना पसंद किया कि बाद में यह कार्टून और फिर फिल्मों के पर्दे पर भी नजर आया। गरीबों और मजलूमों का मसीहा स्पाइडरमैन लंबे वक्त तक दुनियाभर में बच्चों का पसंदीदा चरित्र रहा। देश-दुनिया के इतिहास में दस अगस्त की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:- 1809 : इक्वाडोर को स्पेन से आजादी मिली।1822 : सीरिया में विनाशकारी भूकंप से 20 हजार लोगों की मौत।1831: कैरेबियाई द्वीप समूह बारबाडोस में चक्रवाती तूफान से डेढ़ हजार लोगों की मौत।1894 : देश के चौथे राष्ट्रपति वी वी गिरि का जन्म।1966 : अमेरिका ने अंतरिक्ष में रॉकेट उतारने की लिए उपयुक्त स्थान का चित्र लेने पहला अंतरिक्ष यान भेजा। 1962 : आज ही के दिन बच्चों का चहेता स्पाइडरमैन कॉमिक बुक अमेजिंग फैंटेसी में नजर आया।1979 : उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 प्रक्षेपित।2000 : पड़ोसी देश श्रीलंका में सिरिमावो भंडारनायके का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, आर. विक्रमनायके नये प्रधानमंत्री नियुक्त। 2000 : आत्मनिर्णय के अधिकार पर जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।2001 : रूस ने अमेरिकी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली को सशर्त समर्थन दिया।2004 : संयुक्त राष्ट्र और सूडान के बीच दारफुर कार्ययोजना पर हस्ताक्षर।2006 : तमिल विद्रोहियों पर फ़ौजी कार्रवाई में श्रीलंका में 50 नागरिक मारे गये।2008 : चेन्नई के एक लैब में एंटी एड्स वैक्सीन का सफल परीक्षण किया गया।2022: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नीत राजग से नाता तोड़कर प्रदेश में 'महागठबंधन' की सरकार के गठन के तहत मुख्यमंत्री के तौर पर रिकॉर्ड आठवीं बार शपथ ली। 2024: गाजा के एक स्कूल में इजराइली हवाई हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत।2025: तुर्किये में 6.1 तीव्रता का भूकंप, कई इमारतें ढही गईं।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर राष्ट्रध्वज फहराकर बड़ी संख्या में 'हर घर तिरंगा' अभियान में शामिल हों। पार्टी ने कहा कि यह पहल देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करेगी। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से लोगों से नौ से 17 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में भाग लेने और तिरंगे को हर घर व हर दिल का हिस्सा बनाने की अपील की। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि तिरंगा भारत के गौरव, एकता और आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह हर भारतीय को देश की सेवा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है।नवीन ने कहा, "तिरंगा हमारे गौरव, एकता और आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का प्रतीक है, जो हर भारतीय को देश की सेवा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में 'हर घर तिरंगा' अभियान हर व्यक्ति में देशभक्ति की भावना जगाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है।" केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने लोगों से अपील की कि वे तिरंगे को हर घर और हर दिल का हिस्सा बनाएं।उन्होंने कहा, "इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए, हम तिरंगे को हर घर और हर दिल का हिस्सा बनाएं। 'हर घर तिरंगा' अभियान से जुड़ें, अपने घर पर तिरंगा फहराएं।" केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि तिरंगा भारत के गौरव व वैभव का प्रतीक बनना चाहिए और हर घर की पहचान होना चाहिए। गोयल ने कहा, "हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा... आइए, राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर 'हर घर तिरंगा 2026' अभियान से जुड़ें और देशभक्ति के इस उत्सव का जश्न मनाएं।" भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने लोगों से अपील की कि वे 9 से 17 अगस्त तक चलाए जा रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत अपने घरों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं। उन्होंने कहा, "इसके साथ सेल्फी लें और हर घर तिरंगा की वेबसाइट पर अपलोड करें।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है और यह 13 अगस्त से प्रभावी होगा। एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई। भारतीय राजस्व सेवा के आयकर कैडर के 1993 बैच के अधिकारी नवीन(59)धनशोधन रोधी संघीय एजेंसी का 14 अगस्त 2024 से पूर्णकालिक निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे हैं। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी)ने शनिवार को जारी आदेश में नवीन के ईडी के निदेशक के तौर पर कार्यकाल को 13 अगस्त 2026 से एक साल यानी 13 अगस्त, 2027 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दी। इसमें उनके सेवानिवृत्ति की तारीख (31 जुलाई, 2027) के बाद भी सेवा का विस्तार शामिल है, या फिर अगले आदेश तक इनमें से जो भी पहले हो का विस्तार भी शामिल है। नियमों के अनुसार, किसी अधिकारी को दो साल के कार्यकाल के लिए ईडी का निदेशक नियुक्त किया जा सकता है, जिसके बाद उन्हें एक-एक साल के लिए तीन बार सेवा विस्तार दिया जा सकता है। सितंबर 2023 में, नवीन को एजेंसी का कार्यवाहक निदेशक बनाया गया था।नवीन के कार्यकाल के दौरान, ईडी ने कई चर्चित मामलों की जांच शुरू कीं, जिनमें राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक, रिलायंस अनिल अंबानी समूह और कई ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों से जुड़ी जांच शामिल हैं। उनके कार्यकाल में ईडी ने घर खरीदारों के साथ रियल एस्टेट की बड़ी कंपनियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के कई मामलों पर संज्ञान लिया है। एजेंसी ने धनशोधन रोधी कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके पीड़ितों को करोड़ों रुपये की संपत्ति वापस दिलाई। नवीन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर से बीटेक और एमटेक और मेलबर्न की स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी से एमबीए किया है। उन्होंने प्रत्यक्ष कर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कराधान और अंतरण प्रक्रिया के कई मुद्दों पर किताबें और पत्रिकाओं में लेख भी लिखे हैं।
- अयोध्या. राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति ने आगामी सावन झूला उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत दर्शन का समय बढ़ाने, संतों के लिए विशेष व्यवस्था करने और पुजारियों की वेशभूषा में बदलाव समेत कई निर्णय लिए गए हैं। समिति के सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने रविवार को बताया कि शृंगार आरती के बाद रामलला और उनके तीनों भाइयों को झूले पर विराजमान किया जाएगा। श्रद्धालुओं को पूरे दिन दर्शन की अनुमति होगी, हालांकि दोपहर के भोग के समय कुछ देर के लिए दर्शन बंद रहेगा। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त से 28 अगस्त तक प्रतिदिन शाम को दो से तीन घंटे के लिए विशेष झूलनोत्सव और दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद रामलला की छोटी प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर पारंपरिक उत्सव के लिए कुबेर टीला ले जाया जाएगा और बाद में वापस मंदिर लाया जाएगा। समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि पुजारी रामानंद परंपरा के अनुसार वेशभूषा और श्रृंगार का पालन करेंगे। शरण ने बताया कि उत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान को पूरी, सब्जी, खीर और मालपुआ का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संतों और साधु-संतों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उन्हें एक दिन पहले अपनी जानकारी देनी होगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या के निवासियों और संतों के लिए नियमित दर्शन पास भी जारी किए जाएंगे और दर्शन की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। राम मंदिर परिसर में हुई इस बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के प्रतिनिधि कमल नयन दास, ट्रस्टी जिनेंद्र दास, विश्व प्रसन्न तीर्थ, रामानंद दास, धार्मिक समिति के सदस्य डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण और समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।
- माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल लौट रहे बागपत के दो भाईबागपत. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के चिरचिटा गांव के दो भाई हरिद्वार से करीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर वापस लौट रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। माता-पिता के प्रति सेवा और सम्मान के इस अनोखे भाव को देखकर लोग और राहगीर दोनों भाइयों की सराहना कर रहे हैं और उन्हें 'कलयुग का श्रवण कुमार' बता रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, चिरचिटा गांव निवासी संजीव कुमार और अनिल कुमार हरिद्वार गए थे। वहां उन्होंने हर की पौड़ी से गंगाजल लिया और कांवड़ की दोनों टोकरियों में अपने पिता वेदराम और मां राजेंद्र को बैठाकर बागपत के लिए पैदल यात्रा शुरू की। दोनों भाई बारी-बारी से अपने कंधों पर कांवड़ उठाकर करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। रास्ते में श्रद्धालु उनकी कांवड़ को देखकर रुक जाते हैं और दोनों भाइयों की सेवा भावना की प्रशंसा करते हैं। दोनों भाइयों ने कहा, ''हमने भगवान से कोई विशेष वरदान नहीं मांगा है। हमारे लिए माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा कर्तव्य और तीर्थ यात्रा है।'' उन्होंने कहा कि जीवन में सच्चा आशीर्वाद माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करने से मिलता है।दोनों भाइयों ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करना बेहद जरूरी है।
- गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम (जीएमसी) ने आवारा व बेसहारा कुत्तों की 'माइक्रोचिपिंग' के लिए एजेंसी के चयन को लेकर चौथी बार निविदा जारी की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले छह महीनों में तीन बार निविदा जारी करने के बावजूद किसी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई थी। नगर निकाय को उम्मीद है कि इस परियोजना के लिए 14 अगस्त तक एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा।यह परियोजना पशु प्रबंधन और कल्याण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवारा कुत्ते के शरीर में एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी, जिसमें एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी। निकाय ने बताया कि यह चिप एक डिजिटल डेटाबेस से जुड़ी होगी, जिसमें कुत्ते की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, स्वास्थ्य स्थिति और व्यवहार संबंधी इतिहास की जानकारी दर्ज होगी। अधिकारियों ने बताया कि इस डेटाबेस से नगर निगम को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन कुत्तों की नसबंदी या टीकाकरण पहले ही हो चुका है। उन्होंने बताया कि इससे एक ही प्रक्रिया दोबारा किए जाने से बचा जा सकेगा और पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों की निगरानी बेहतर होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से जुड़ी घटनाओं का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा और इससे अधिकारियों को उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां कुत्तों के हमले अधिक होते हैं तथा वहां लक्षित उपाय किए जा सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली से नगर निगम को टीकाकरण, उपचार, भोजन उपलब्ध कराने और आश्रय गृहों के प्रबंधन की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि माइक्रोचिप के रिकॉर्ड के जरिए उन पालतू कुत्तों के मालिकों का भी पता लगाया जा सकेगा, जिन्हें सड़क पर छोड़ दिया गया है। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी रॉबिन चंद्रा ने बताया कि डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली से आवारा कुत्तों के स्वास्थ्य, संख्या और व्यवहार का व्यापक रिकॉर्ड रखा जा सकेगा, जिससे उनका प्रबंधन अधिक व्यवस्थित अधिक प्रभावी हो जाएगा।
- हरदा .मध्यप्रदेश के हरदा रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान रविवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के एक कॉन्स्टेबल की कथित तौर पर प्लेटफार्म पर फिसलने के बाद ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी यह जानकारी दी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) चौकी प्रभारी कमलेश सिंह रघुवंशी ने बताया कि आरपीएफ का कॉन्स्टेबल लोकेश कुमार (30) प्लेटफार्म क्रमांक संख्या-दो पर तैनात था तभी यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि कुमार का अचानक से प्लेटफार्म पर पैर फिसल गया और वह वहां से गुजर रही रेलगाड़ी (20103 संत कबीर धाम एक्सप्रेस) की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। रघुवंशी ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है और शव को जिला अस्पताल की शवगृह में रखवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों के आने पर शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। जीआरपी के मुताबिक मृतक लोकेश कुमार राजस्थान के भरतपुर जिले के रहने वाले थे और वे हरदा में पिछले तीन वर्षों से पदस्थ थे।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को शिक्षा सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने, परीक्षा प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने और एजेंसी को छात्रों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। जोशी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से जुड़े मामलों पर शिक्षा मंत्रालय के सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।'' उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही संस्थागत व्यवस्थाओं को और मजबूत करने, प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने और छात्रों के प्रति अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे उठाए जाने वाले कदमों पर विचार-विमर्श किया गया।'' मंत्री ने कहा, ''हमारा ध्यान एक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था तैयार करने पर बना हुआ है, जो हर छात्र की आकांक्षाओं को पूरा कर सके।'' धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद 26 जुलाई को जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था। नीट पेपर लीक विवाद पर देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।
- इंदौर/ देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पिछले दो साल के दौरान एक ही जगह बड़े पैमाने पर पौधे रोपे जाने के बाद उनके संरक्षण के जरिये 13.10 लाख पेड़ तैयार करने का रिकॉर्ड बनाया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि डॉ. एके जैन ने रविवार को संवाददाताओं को बताया, "हमने शहर के रेवती रेंज क्षेत्र में पेड़ों की गिनती की है। बीते दो साल में पौधारोपण के बाद इस जगह 13,10,012 पेड़ जीवित पाए गए हैं। हमने इसे एक ही स्थान पर सबसे ज्यादा पौधे रोपे जाने के बाद उन्हें संरक्षित करने के रिकॉर्ड के तौर पर मान्यता दी है।" पहाड़ी और पठारी भू-भाग वाली रेवती रेंज में वर्ष 2024 के दौरान 13 से 14 जुलाई 2024 के बीच 12,41,017 पौधे लगाए गए थे और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे एक टीम द्वारा 24 घंटों में सबसे ज्यादा पौधे लगाने के विश्व कीर्तिमान के तौर पर मान्यता दी थी। अधिकारियों के मुताबिक पिछले दो वर्षों से रेवती रेंज में मानसून के मौसम में पौधारोपण जारी है जिससे इसमें तैयार वृक्षों की संख्या बढ़कर 13.10 लाख हो गई है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधियों ने रेवती रेंज में एक कार्यक्रम में राज्य के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को कीर्तिमान का प्रमाणपत्र सौंपा। यह प्रमाण पत्र इंदौर नगर निगम के नाम जारी किया गया जिसने रेवती रेंज में बड़े पैमाने पर पौधे रोपे जाने के बाद इनकी सुरक्षा, सिंचाई और निगरानी की जिम्मेदारी ली। अधिकारियों के मुताबिक रेवती रेंज में रविवार को करीब 51,000 नये पौधे लगाए गए। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष पौधारोपण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कहा,''जन भागीदारी से लगाए गए पौधों के संरक्षण के कारण रेवती रेंज की पथरीली जमीन हरियाली से भर गई है।'' संतोष ने कहा कि इंदौर स्वच्छता के क्षेत्र में देश के सामने उदाहरण पेश कर चुका है और अब हरित शहर बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शहर में मानसून के जारी मौसम में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सतत पौधारोपण के जरिये शहर के हरित क्षेत्र को नौ प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की कोशिश की जा रही है।
- बेंगलुरु. अपने दूसरे स्थापना दिवस के करीब पहुंच चुका भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) का अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई)' पूर्व सचिव जय शाह के नेतृत्व में बोर्ड अधिकारियों के युद्धस्तर पर किए गए प्रयासों का नतीजा है। मौजूदा सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के वर्तमान प्रमुख शाह ने इस परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए और सभी अधिकारियों को एकजुट किया। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चुनिंदा मीडिया से बातचीत में सैकिया ने कहा, ''उन्होंने बीसीसीआई की शीर्ष परिषद के सभी सदस्यों को साथ लिया और दृढ़ निर्णय किया कि इस परिसर का निर्माण युद्धस्तर पर किया जाना चाहिए। हमें राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी की पुरानी और अस्थायी व्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत थी।'' सैकिया ने बताया, ''काम शुरू करने के लिए जरूरी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए शाह कई बार व्यक्तिगत रूप से यहां आए।'' उन्होंने कहा, ''जब कोई बड़ी परियोजना शुरू करनी होती है तो कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके अलावा जमीन को नियमित कराना भी जरूरी था। इन सभी कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए जय कई मौकों पर खुद यहां आए।'' सैकिया ने कहा, ''यह सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि 40 एकड़ की यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी और कई लोग इसे वापस लेना चाहते थे। इसलिए 14 फरवरी 2022 को काम शुरू होने से पहले हर चीज को मंजूरी दिलाना जरूरी था।'' उन्होंने कहा, '' बदलाव का दौर चुनौतीपूर्ण था। उस समय रोजर बिन्नी अध्यक्ष थे और हमने वीवीएस लक्ष्मण की भी मदद ली, जो उस समय इस पूरी योजना का हिस्सा बन चुके थे।'' लक्ष्मण ने भी उस लंबे सफर को याद किया, जिसके लिए वह हैदराबाद से बेंगलुरु आए थे। उन्होंने बताया कि 2021 में जय शाह और तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने उनसे संपर्क किया था। उस समय राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के मुख्य कोच बनने जा रहे थे और बोर्ड राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में निरंतरता बनाए रखना चाहता था। लक्ष्मण ने कहा, ''मेरे लिए यह कठिन फैसला था। लेकिन एक क्रिकेटर के तौर पर मेरा हमेशा मानना रहा है कि जिन पूर्व खिलाड़ियों को इस महान खेल से लाभ मिला है, उनकी जिम्मेदारी है कि वे खेल के लिए अपना योगदान वापस दें। इसी सोच के साथ मैं दिसंबर 2021 में बेंगलुरु आ गया।'' पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने पूरी परियोजना के दौरान शाह के मार्गदर्शन को याद करते हुए कहा, ''करीब दो साल के भीतर पूरा बुनियादी ढांचा तैयार होकर काम करने लगा। इसका बड़ा श्रेय जय शाह को जाता है। वह उस समय बीसीसीआई सचिव थे और मैंने खुद देखा कि वह आर्किटेक्ट और एलएंडटी की टीम के साथ होने वाली हमारी विभिन्न बैठकों में कितनी दिलचस्पी लेते थे। उनका प्रयास रहता था कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के हर पहलू का ध्यान रखा जाए।'' लक्ष्मण ने कहा, ''यह देखकर अच्छा लगता है कि जो दृष्टिकोण था, उसे हकीकत में बदला गया। मेरा मानना है कि सभी नेतृत्व करने वालों के पास विजन होता है, लेकिन वह विजन तभी सार्थक होता है जब उसे वास्तविकता में बदला जाए। हमने नवंबर 2024 में उस विजन को वास्तविकता के रूप में देखा।''
- नयी दिल्ली. दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुये निर्देश दिया कि 2021 में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटना मारे गए एक दंपति के पांच बच्चों को 44 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जाये। पीठासीन अधिकारी अपर्णा स्वामी ने 'इफ़्को तोक्यो जनरल इंश्योरेंस' कंपनी को निर्देश दिया कि याचिकाएं दायर करने की तारीख से 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ कुल 44.09 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। न्यायाधिकरण ने 30 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ''प्रतिवादी संख्या-एक दुर्घटना के समय लापरवाही और तेज गति से वाहन चला रहा था। दुर्घटनाग्रस्त वाहन की 'मेकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट' भी याचिकाकर्ताओं के बयान की पुष्टि करती है।'' न्यायाधिकरण ने बृजनंदन और उनकी पत्नी राजकुमारी की मृत्यु के लिए क्रमशः 19.86 लाख रुपये और 24.23 लाख रुपये के अलग-अलग मुआवजे का आदेश दिया। दावा याचिकाओं के अनुसार, यह दंपति दो जुलाई 2021 को बुलंदशहर जिले में मोटरसाइकिल से जा रहे थे तभी एक कार ने तेज गति से उनकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी जिससे वे सड़क पर गिर गए और कार उन्हें कुचलते हुए निकल गई। अस्पताल में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। वाहन चालक, मालिक और बीमा कंपनी ने इस दावे का विरोध किया था।बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पंजीकरण नंबर शुरुआत में प्राथमिकी और जांच रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। इस तर्क को खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि जांच में बाद में वाहन का पता लगा लिया गया था और 'मेकेनिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट', पंजीकरण प्रमाणपत्र व बीमा पॉलिसी के माध्यम से दुर्घटना में उसकी संलिप्तता साबित हुई। अदालत ने एक प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर भरोसेमंद माना जिसने कहा कि उसने कार को अपनी मोटरसाइकिल से आगे निकलते, दंपति की मोटरसाइकिल को पीछे से जोरदार टक्कर मारने के बाद मौके से फरार होते देखा था। न्यायाधिकरण ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई। उसने कहा कि जांच में मामूली खामियां विश्वसनीय मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को खारिज नहीं कर सकतीं।
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पुडुचेरी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पुडुचेरी पुलिस को 'राष्ट्रपति ध्वज' (प्रेसिडेंट्स कलर) प्रदान किया। उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में बल की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना की। शाह ने अंग्रेजों के जमाने के रद्द किए गए आपराधिक कानूनों का जिक्र किया, जिनमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आईपीसी की जगह लागू की गई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) का उद्देश्य नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करना है। पुडुचेरी के पुलिस बल को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने के बाद अपने संबोधन में शाह ने कहा कि नये आपराधिक कानून तीन स्तंभों 'प्रौद्योगिकी, समयसीमा और विश्वास' पर आधारित हैं। पुडुचेरी के विकास के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता रेखांकित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दृष्टिकोण इस केंद्र-शासित प्रदेश को मजबूत करना रहा है। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी को मजबूत बनाने के लिए कई विकास योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें पिछले नौ वर्षों में 39,000 करोड़ रुपये का निवेश और हजारों करोड़ रुपये की लागत से सड़कों के विस्तार से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। शाह ने कहा कि 1950 से 2014 के बीच पुडुचेरी को केंद्र की ओर से करीब 3,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने केंद्र-शासित प्रदेश को 13,762 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी, उज्ज्वला और प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और शौचालयों के निर्माण जैसी विभिन्न सरकारी पहलों से पुडुचेरी के सात लाख नागरिकों को लाभ मिला है। शाह ने कहा, ''पुडुचेरी पुलिस को निशान (राष्ट्रपति ध्वज) मिला है। इस स्वर्णिम अवसर पर मैं प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार केंद्र-शासित प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने पुडुचेरी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की। शाह ने कहा कि भौगोलिक रूप से पुडुचेरी दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है और इसके कुछ हिस्से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के यानम और केरल के माहे में स्थित हैं। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ध्वज मिलना किसी भी पुलिस बल के लिए सबसे सम्मानजनक पल होता है। पुडुचेरी पुलिस की संख्या करीब 5,000 है और वह केंद्र-शासित प्रदेश की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा बनाए रख रही है। आप यह काम किसी फाइल या आदेश के कारण नहीं, बल्कि अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण की भावना से करते हैं।'' गृह मंत्री ने कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय वह राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की स्थिति की समीक्षा किया करते थे। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी पुलिस ने लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सेवा के लिए अतिरिक्त प्रयास किए। शाह ने गोरिमेडु स्थित पुडुचेरी सशस्त्र पुलिस मैदान में आयोजित आधिकारिक समारोह में बल के 'एनसाइन ऑफीसर' को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान किया। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक शालिनी सिंह भी मौजूद थीं। उपराज्यपाल के कैलाशनाथन, मुख्यमंत्री एन रंगासामी और गृह मंत्री ए नमस्सिवायम समेत कई गणमान्य लोग भी समारोह में उपस्थित थे। पुडुचेरी और वहां के लोगों की प्रशंसा करते हुए शाह ने कहा कि करीब 230 वर्षों तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहने के बावजूद पुडुचेरी ने अपनी ''भारतीयता और आध्यात्मिक ऊर्जा'' को बनाए रखा है। उन्होंने इस आध्यात्मिक ऊर्जा का श्रेय ऑरबिंदों और मदर को दिया तथा कहा कि अब यह ऊर्जा पूरे देश में फैल चुकी है। शाह ने कहा, ''पुडुचेरी दक्षिण भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।''
मुख्यमंत्री रंगासामी ने अपने संबोधन में केंद्र-शासित प्रदेश प्रशासन को लगातार सहयोग देने और उसके लिए धनराशि मंजूर करने को लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्रालय का आभार जताया। इस अवसर पर पुलिसकर्मियों का अभिनंदन करते हुए रंगासामी ने कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश की पुलिस ने अपराधों की रोकथाम और उनका पता लगाने के साथ-साथ दोषसिद्धि का अच्छा रिकॉर्ड कायम करने में भी उपलब्धियां हासिल की हैं। रंगासामी ने कहा कि पुडुचेरी पुलिस को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान किया जाना ''वर्दीधारी जवानों की ईमानदारी, समर्पण और अनुशासन को उचित मान्यता देना'' है। उपराज्यपाल कैलाशनाथन ने कहा कि केंद्र ने इंडिया रिजर्व बटालियन (आईआरबीएन) की एक और इकाई स्थापित करने को मंजूरी दी है। इस दूसरी इकाई में करीब 1,000 युवाओं को भर्ती किया जाएगा। उन्होंने पुलिस से प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप पुडुचेरी को नशामुक्त बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। पुलिस महानिदेशक शालिनी सिंह ने साइबर अपराध और कानून-व्यवस्था समेत पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं के कामकाज और उपलब्धियों का विवरण दिया। उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शांतिपूर्ण माहौल के कारण पुडुचेरी को यहां के लोगों और पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान के रूप में पहचाना जाए। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से रविवार को मुलाकात की और प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें बधाई दी। मोदी ने 'इंस्टाग्राम' पर खिलाड़ियों से हुई मुलाकात का एक छोटा वीडियो साझा किया। उन्होंने इस मुलाकात को खास बताया और देश का मान बढ़ाने के लिए खिलाड़ियों की प्रशंसा की। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों के साथ हुई मुलाकात के बारे में ट्वीट भी किया। उन्होंने ने 'एक्स' पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ''मुझे 7, लोक कल्याण मार्ग पर राष्ट्रमंडल खेल 2026 के पदक विजेताओं की मेजबानी करके बहुत प्रसन्नता हुई। उनके खेलों के अनुभवों के बारे में जाना। हर खिलाड़ी ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता कई युवाओं को प्रेरित करेगी। '' इस दौरान खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री से मिलने वाले खिलाड़ियों में मुक्केबाज साक्षी चौधरी भी शामिल थीं जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की 51 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। ग्लास्गो में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा और देश ने कुल 39 पदक जीते जिनमें 13 स्वर्ण पदक शामिल थे। साक्षी ने कहा, ''हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्रमंडल खेलों के सभी पदक विजेताओं का स्वागत किया और हमें इस बात पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। उनसे मिलकर हमें बहुत अच्छा लगा। वह बहुत विनम्र हैं। खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''जो खेलेगा, वो खिलेगा। हमेशा भारत का हौसला बढ़ाइए। '' प्रधानमंत्री ने सभी पदक विजेताओं से बातचीत की और उनके शानदार प्रयासों के लिए उन्हें बधाई दी। भारत की मुक्केबाजी टीम का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने ग्लास्गो खेलों में रिकॉर्ड 10 पदक जीते। साक्षी उन सात भारतीय मुक्केबाजों में शामिल थीं, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीता। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2025 के पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के लिए सर्दियों के कपड़ों और उपकरणों के लिए एक खास कोष मंजूर किया है। आधिकारिक सूत्रों ने एक न्यूज़ एजेंसी' को बताया कि कुछ सप्ताह पहले अर्द्धसैन्य बल को 4.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से करीब 600 जवानों के लिए ठंड से बचाव वाले विशेष कपड़े और उपकरण खरीदे जाएंगे। इनमें पैर को ढकने वाले सुरक्षा आवरण, स्लीपिंग बैग, बर्फीले मौसम के लिए चश्मे, जूते, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित अत्यधिक ठंड वाले मौसम के कपड़े (हिमसुरक्षा ब्रांड), गर्मी रोकने वाली चटाइयां, बैग, दस्ताने, तंबू, थर्मल इनसोल, कंबल और बचाव बैग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर सामान पिछले साल से ही अस्थायी अभियान ठिकानों (टीओबी) पर तैनात जवानों को उपलब्ध कराए जा रहे थे। हालांकि, गृह मंत्रालय ने जुलाई में सीआरपीएफ के उस प्रस्ताव को ''पूर्ण मंजूरी'' दे दी, जिसमें इन वस्तुओं की खरीद का अनुरोध किया गया था। सूत्रों के अनुसार, इन उपकरणों की खरीद का उद्देश्य ऊंचाई वाले इलाकों में लंबे समय तक चलने वाली गश्त, कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने और आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों के दौरान जवानों को बेहतर तरीके से तैयार करना है। सूत्रों ने बताया कि इन वस्तुओं की उपयोग अवधि लगभग दो साल होती है और नयी खरीद के लिए जरूरत पड़ने पर धनराशि को बढ़ाया भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि 6,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर बनाए गए अस्थायी अभियान ठिकानों में सीआरपीएफ के कमांडो तैनात रहते हैं। इन ठिकानों से उन इलाकों में तलाशी और हमले की कार्रवाई शुरू की जाती है, जहां आतंकवादी 'ढोक' (मिट्टी और पत्थर से बनी झोपड़ियों) में छिपे होते हैं। यह पाया गया है कि आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके और दुर्गम पर्वतीय इलाकों का इस्तेमाल मैदानी क्षेत्रों में हिंसा करने से पहले या बाद में छिपने के लिए किया। इसी को देखते हुए अब इन ऊंचाई वाले इलाकों में सीआरपीएफ और सेना के जवानों को तैनात किया गया है। सीआरपीएफ ने जुलाई 2025 में इस तरह का पहला अस्थायी अभियान ठिकाना बनाया था। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सीआरपीएफ ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दोनों क्षेत्रों में अब तक 55 टीओबी स्थापित किए हैं। इन टीओबी में करीब 15 से 25 हथियारबंद जवानों की एक टीम तैनात रहती है। यहां जवानों के आराम और पुनः तैयार होने के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सीआरपीएफ के ऐसे ही एक टीओबी का इस्तेमाल सुरक्षा बलों ने जुलाई 2025 में पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार तीन आतंकवादियों को मार गिराने के अभियान के दौरान आधार के रूप में किया था। इस अभियान को 'ऑपरेशन महादेव' नाम दिया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना की तर्ज पर सीआरपीएफ कमांडो के लिए अस्थायी अभियान ठिकाने बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2022-23 से ही विचाराधीन था, लेकिन इन्हें अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सक्रिय रूप से संचालित किया गया।
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नयी दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस के 'एट होम' कार्यक्रम के लिए इस वर्ष हस्तनिर्मित निमंत्रण किट तैयार करने वाले 130 शिल्पकारों की टीम में कभी नक्सल प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के करीब 50 कलाकार शामिल हैं। इस कार्यक्रम की मेजबानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की जाएगी।
इस निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की समृद्ध शिल्पकला, परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों और अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की एक टीम ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप इसकी परिकल्पना की है। यह किट स्थिरता, समावेशिता और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एनआईडी के निदेशक अशोक मंडल ने बताया, ''निमंत्रण किट करीब 130 लोगों ने तैयार की है, जिनमें छत्तीसगढ़ के कभी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र के करीब 50 शिल्पकार शामिल हैं। यह समावेशी विकास और आजीविका के अवसरों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।'' उन्होंने बताया कि तीन महीने से अधिक समय तक इन शिल्पकारों ने एनआईडी के शिक्षकों, डिजाइनर और विद्यार्थियों के साथ मिलकर अपनी पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल शिल्प तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति की ओर से भेजी जाने वाली इस अनूठी निमंत्रण किट को तैयार किया। मंडल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''पूरी तरह हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल यह किट भारत की कलात्मक उत्कृष्टता, सतत प्रथाओं और पारंपरिक शिल्पकार समुदायों के सशक्तीकरण का प्रतीक है।'' निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण व सतत पर्यावरणीय तौर-तरीकों के प्रेरणादायक उदाहरणों को दर्शाया गया है। ये क्षेत्र पहाड़ियों, घुमावदार नदी प्रवाह और भरपूर हरियाली वाले समृद्ध प्राकृतिक परिदृश्य के लिए जाने जाते हैं। इन राज्यों की जीवंत लोक कला परंपराओं का इस्तेमाल करते हुए तैयार की गई यह निमंत्रण किट समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच गहरे परस्पर संबंध की झलक प्रस्तुत करती है। मंडल ने बताया कि निमंत्रण किट में छत्तीसगढ़ की ढोकरा ढलाई कला को शामिल किया गया है, जो भारत की सबसे पुरानी धातु शिल्प की परंपराओं में से एक है। उन्होंने बताया कि इसमें समुदाय की पवित्र उपवनों के संरक्षण की परंपरा को भी दर्शाया गया है, इसके अलावा लोहे से तैयार की जाने वाली 'पिटवा' शिल्पकला का इस्तेमाल किट के डिस्प्ले फ्रेम और घंटी बनाने में किया गया है। अधिकारी ने बताया, ''यह निमंत्रण किट उन कुशल शिल्पकारों और कारीगरों को समर्पित है, जो क्षेत्र की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा व विविध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।' - नयी दिल्ली। भारतीय बायोगैस संघ (आईबीए) का मानना है कि सरकार की 23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन' योजना आने वाले वर्षों में देश के प्राकृतिक गैस आयात बिल को करीब पांच अरब डॉलर तक कम करने में मदद कर सकती है। यह योजना कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने पर केंद्रित है। आईबीए के अनुसार, हाल में मंजूर की गई गोबरधन (गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना को केवल सरकारी खर्च के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश के तौर पर देखा जाना चाहिए। इससे ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता, रोजगार और पर्यावरण के क्षेत्र में भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। संघ ने कहा कि इस योजना से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ प्राकृतिक गैस के आयात में कमी के रूप में सामने आ सकता है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आईबीए के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में एलएनजी का आयात बिल करीब 15.2 अरब डॉलर रहा था। संघ का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यदि करीब 1,500 कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र पूरी क्षमता के साथ संचालित होते हैं, तो प्राकृतिक गैस आयात से जुड़े व्यापार घाटे में करीब एक-तिहाई की कमी लाई जा सकती है। इससे लगभग पांच अरब डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) की बचत संभव है। आईबीए ने कहा कि योजना से उर्वरक आयात और सरकार पर सब्सिडी के बोझ को कम करने में भी मदद मिल सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 में उर्वरक आयात का बिल करीब 18 अरब डॉलर रहा था। आईबीए का अनुमान है कि 1,500 सीबीजी संयंत्रों के संचालन और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने से उर्वरक आयात में कम से कम पांच प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इससे चालू खाते के घाटे में करीब एक अरब डॉलर की कमी आ सकती है। संघ ने कहा कि गोबरधन योजना से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे कुशल और अर्द्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
- श्री विजय पुरम। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से 'हर घर तिरंगा अभियान' की शुरुआत करते हुए कहा कि 'भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।' उन्होंने इस ऐतिहासिक द्वीप समूह से जुड़ी राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और बलिदान की भावना पर जोर दिया।यहां डीबीआरएआईटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने तमिल राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों को याद करते हुए कहा, ''मेरा सिर कभी नहीं झुकेगा, मेरा सिर केवल भारत माता के राष्ट्रीय ध्वज के सामने झुकेगा।'' उन्होंने कहा कि 'हर घर तिरंगा' अभियान इसी भावना को आगे बढ़ाता है और हर नागरिक को राष्ट्रीय ध्वज, एक मातृभूमि और एक साझा भविष्य के संकल्प के साथ जोड़ता है। कार्यक्रम में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) डी. के. जोशी , मुख्य सचिव चंचल यादव, श्री विजयपुरम नगर परिषद की अध्यक्ष एम. वसंता और दक्षिण अंडमान जिला परिषद के अध्यक्ष पी. उमर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। राधाकृष्णन ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से यह शुरुआत बहुत महत्वपूर्ण है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह से इस अभियान की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आठ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान की याद में मनाए जाने वाले भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के साथ हो रही है। उपराष्ट्रपति ने 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत श्री विजयपुरम के फ्लैग प्वाइंट पर राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की विशेष पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह "लघु भारत" है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोग आबादी वाले 31 द्वीपों में मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश "विविधता में एकता" और "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की भावना का उदाहरण है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसमें हिस्सा लेने वाले राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को याद किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में भाग लेने वालों का साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं। उनका साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रेरित होकर ‘भारत छोड़ो’ के आह्वान ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने के हमारे लोगों के अटूट संकल्प को दर्शाया।”लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पोस्ट किया, “‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर उन सभी राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी का ‘करो या मरो’ का आह्वान उस दौर में करोड़ों भारतीयों के लिए साहस और संकल्प की आवाज बना।”उन्होंने लिखा, “इस आंदोलन में असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल यातनाएं सहीं, संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं था, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए था, जिसकी नींव सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर हो। स्वतंत्रता के अमृतकाल में उन महान सेनानियों का स्मरण हमें यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए हम अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों को निरंतर मजबूत करते रहें।”केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा, “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में आज ही के दिन अगस्त 1942 में प्रारंभ हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय बना। इस ‘अगस्त क्रांति’ ने देशभर में नई चेतना का संचार किया और असंख्य भारतीयों को स्वाधीनता के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।”उन्होंने आगे लिखा, “‘अगस्त क्रांति’ का इतिहास असंख्य गुमनाम योद्धाओं के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की अमर गाथाओं से समृद्ध है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करती रहेंगी। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और उन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि व सादर नमन, जिनके त्याग, साहस और संघर्ष से स्वतंत्र भारत की नींव सुदृढ़ हुई।” -
नई दिल्ली । भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी जनक्रांतियों में से एक था। महात्मा गांधी ने इसी आंदोलन में “करो या मरो” का नारा दिया था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।
गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “महात्मा गांधी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ हमारे स्वाधीनता संग्राम का वह ऐतिहासिक अध्याय है, जिसने देशवासियों को एकजुट कर अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिए ‘करो या मरो’ का संकल्प और अदम्य साहस प्रदान किया। देश को आजाद कराने के इस महान संघर्ष में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं। अगस्त क्रांति का यह दिन हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए स्वदेशी को अपनाने, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की प्रेरणा देता है।”नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, “सन 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतवासियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की थी। स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध इस अगस्त क्रांति दिवस के स्मरण में आजादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले अमर बलिदानियों को शत-शत नमन।”केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “अगस्त क्रांति स्वतंत्रता संग्राम का वह ऐतिहासिक अध्याय है, जिसने देशवासियों में आजादी की लौ और संघर्ष का संकल्प जगाया। 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा देकर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की, जो विदेशी शासन के विरुद्ध एक बड़ा जनआंदोलन बना। मां भारती की स्वतंत्रता के इस महायज्ञ में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी अमर वीर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान को राष्ट्र सदैव स्मरण करता रहेगा।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, “मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने हेतु अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (अगस्त क्रांति) की वर्षगांठ पर विनम्र श्रद्धांजलि। ‘करो या मरो’ के उद्घोष से राष्ट्र चेतना का जागरण करने वाले स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान ने स्वाधीनता आंदोलन को निर्णायक दिशा प्रदान की, उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वाभिमान का संदेश प्रत्येक भारतवासी के लिए सदैव प्रेरणापुंज बना रहेगा।”राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल यादव ने एक्स पोस्ट में कहा, “अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले सभी अमर क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को कोटिशः नमन! उनका संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और अटूट संकल्प हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।”दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, “अगस्त क्रांति मां भारती की स्वाधीनता के लिए धधकते राष्ट्र संकल्प की वह हुंकार थी, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। ‘करो या मरो’ के मंत्र और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के उद्घोष ने जन-जन में स्वाधीनता की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले असंख्य राष्ट्रनायकों को अगस्त क्रांति दिवस पर कोटिशः नमन।”हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारत छोड़ो आंदोलन की गौरव गाथा को स्मरण करते हुए ‘अगस्त क्रांति दिवस’ पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का मंत्र देकर देशवासियों में स्वतंत्रता का अदम्य संकल्प जगाया। यह आंदोलन भारत की आजादी के संघर्ष में जनशक्ति और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय प्रतीक बना। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को कोटिशः नमन।”बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “अगस्त क्रांति दिवस पर मां भारती की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर वीर स्वतंत्रता सेनानियों को कोटि-कोटि नमन। उनका अदम्य साहस, त्याग और बलिदान सदैव देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा, “भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों एवं महान स्वतंत्रता सेनानियों को कोटिशः नमन। स्वतंत्रता संग्राम में भारत छोड़ो आंदोलन ने देशवासियों में आजादी की लौ प्रज्वलित करने के साथ ही स्वतंत्रता के अंतिम संघर्ष को निर्णायक दिशा दी। इस ऐतिहासिक आंदोलन के वीर सेनानियों का त्याग और साहस हमें सदैव राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।”( -
नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पुडुचेरी पुलिस को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ प्रदान किए जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों के बावजूद पुडुचेरी पुलिस ने मेहनत, वीरता, सेवा और समर्पण से यह सम्मान अर्जित किया है।पुडुचेरी में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने पुलिस को राष्ट्रपति का चिह्न भेंट किया। इस दौरान, अमित शाह ने कहा कि 5,000 से कम कर्मियों वाली पुडुचेरी पुलिस ने कड़ी मेहनत, वीरता, सेवा भाव और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। इसी वजह से उसे यह सम्मान मिला। साथ ही पुलिस ने पुडुचेरी की आध्यात्मिक विरासत की रक्षा भी की है।केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, “आज आप सभी को ‘राष्ट्रपति कलर’ का बड़ा सम्मान मिलने पर बहुत-बहुत बधाई। हमारा पुडुचेरी दक्षिण भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है।”
गृह मंत्री ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ किसी फाइल या सरकारी आदेश से नहीं मिला है। यह पुलिस के कठिन परिश्रम, वीरता, सेवा और समर्पण से मिला है। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी पुलिस की बहादुरी और समर्पण पुलिस के इतिहास में ‘स्वर्णिम अध्याय’ के रूप में याद रखा जाएगा। अमित शाह ने कहा कि पुडुचेरी की आध्यात्मिक चेतना को श्री अरबिंदो और श्री मां के आश्रम से ताकत मिली है। इसी ने देश को आध्यात्मिक दिशा दी है।उन्होंने कहा, “230 साल तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहने के बावजूद पुडुचेरी ने अपनी भारतीयता और आध्यात्मिक ऊर्जा को बचाकर रखा है।”अमित शाह ने कोरोना महामारी के दौरान पुडुचेरी पुलिस के काम की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “जब कोरोना पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन गया था, तब मैं गृह मंत्रालय से सभी राज्यों और खासकर केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति की नियमित समीक्षा करता था। उन मुश्किल दिनों में पुडुचेरी पुलिस सबसे आगे खड़ी रही। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं की सेवा में उसने बड़ी बहादुरी दिखाई। मैं हमेशा आपकी निष्ठा और समर्पण को याद रखूंगा।”गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ब्रिटिश कालीन कानूनों को बदलकर तीन नए भारतीय आपराधिक कानून लागू किए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि नागरिकों को न्याय देना है। उन्होंने कहा, “नए कानून तीन स्तंभों पर आधारित हैं, जिनमें टेक्नोलॉजी, टाइमलाइन और ट्रस्ट शामिल हैं। अब न्याय प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।” बता दें कि ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ भारत में किसी पुलिस बल या सैन्य इकाई को मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान है। इसे ‘निशान’ भी कहा जाता हैं। यह पुरस्कार बेहतरीन काम, बहादुरी, अनुशासन और अच्छी सेवा के लिए दिया जाता है। -
नई दिल्ली । उच्च शिक्षा युवाओं को सार्थक करियर बनाने और एक स्थिर एवं आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर होने के अवसर प्रदान करती है। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए शिक्षण शुल्क, पुस्तकों, यात्रा और अन्य शैक्षिक आवश्यकताओं से जुड़े खर्चों को वहन करना कठिन हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली अनु प्रिया को उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों को वहन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके परिवार की वार्षिक आय पहले 99,000 रुपये थी, जिससे ट्यूशन फीस, किताबें, यात्रा और अन्य अध्ययन संबंधी आवश्यकताओं के लिए नियमित रूप से धन जुटाना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। ग्रामीण परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों और उचित मार्गदर्शन की सीमित उपलब्धता ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया।इन कठिनाइयों के बावजूद, अनु प्रिया अपनी पढ़ाई और करियर के लक्ष्यों पर केंद्रित रहीं। उनकी आकांक्षा थी कि वे अपनी शिक्षा सफलतापूर्वक पूरी करें, एक स्थिर करियर बनाएं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, अपने परिवार का सहारा बनें और अपने पेशे के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान दें।ओबीसी श्रेणी की 20 वर्षीय बी.टेक द्वितीय वर्ष की छात्रा अनु प्रिया, 2024-2026 के दौरान प्रदान की गई 7,50,000 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता से अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ अपनी शिक्षा जारी रखने में सक्षम रही हैं। एनएसपी छात्रवृत्ति के माध्यम से प्राप्त 7,50,00 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता ने अनु प्रिया को शैक्षणिक शुल्क, किताबें, अध्ययन सामग्री और अन्य अध्ययन संबंधी आवश्यकताओं सहित महत्वपूर्ण शैक्षिक खर्चों को पूरा करने में मदद की। इस सहायता से उनके परिवार पर वित्तीय बोझ काफी कम हो गया और उन्हें बिना किसी रुकावट के अपनी शिक्षा जारी रखने में सहायता मिली।वित्तीय सहायता ने अनु प्रिया को शैक्षिक खर्चों के प्रबंधन की चिंता करने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर के लक्ष्यों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाया। इस सहायता ने उन्हें बी.टेक की पढ़ाई जारी रखने के दौरान अधिक आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास प्रदान किया।वर्तमान में अनु प्रिया बी.टेक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं और पूरे आत्मविश्वास और प्रेरणा के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखे हुए हैं। उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 1,20,000 रुपये है, जो उच्च शिक्षा के खर्चों को वहन करने के लिए सीमित है। इसलिए छात्रवृत्ति सहायता ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।वहीं, जनरल-ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 21 वर्षीय बी.टेक द्वितीय वर्ष के छात्र यारा महेश ने 2025 में प्रदान की गई 52,540 रुपये की छात्रवृत्ति सहायता से अधिक आत्मविश्वास और एकाग्रता के साथ अपनी शिक्षा जारी रखने में सफलता प्राप्त की है। छात्रवृत्ति से प्राप्त सहायता ने कॉलेज शुल्क, छात्रावास खर्च, भोजन खर्च, यात्रा खर्च, अध्ययन सामग्री, इंटरनेट और शैक्षणिक संसाधन, पंजीकरण शुल्क और अन्य विविध शैक्षिक आवश्यकताओं सहित कई शैक्षिक और रहने के खर्चों को पूरा करने में मदद की। इस सहायता से उनके परिवार पर वित्तीय बोझ कम हुआ और महेश को अपनी पढ़ाई और कौशल विकास पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।उच्च शिक्षा प्राप्त करने से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, महेश ने अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक सफल करियर बनाने का दृढ़ संकल्प बनाए रखा। उनकी शैक्षणिक यात्रा ने उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों का पता लगाने के अवसर भी प्रदान किए हैं।यारा महेश को मिली छात्रवृत्ति सहायता से उन्हें महत्वपूर्ण शैक्षिक और जीवन निर्वाह संबंधी खर्चों को पूरा करने में मदद मिली और उनकी पढ़ाई से जुड़े वित्तीय दबाव में काफी कमी आई। इस छात्रवृत्ति की बदौलत महेश लैपटॉप खरीद सके, जो उनकी पढ़ाई, प्रोग्रामिंग, प्रोजेक्ट वर्क, कौशल विकास और ऑनलाइन लर्निंग के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन गया। इस साधन की उपलब्धता ने उसे डिजिटल लर्निंग के अवसरों का बेहतर उपयोग करने और अपने तकनीकी कौशल को विकसित करते रहने में मदद की।अपनी द्वितीय वर्ष की इंटर्नशिप के दौरान, महेश ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करके त्वचा कैंसर के वर्गीकरण पर एक शोध पत्र पर कार्य किया। शोध कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में प्रकाशन प्रक्रिया में है। इस अनुभव ने स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के अनुप्रयोग में उनके शोध ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाया है।मिली सहायता के कारण महेश अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पा रहा है और साथ ही प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर विकास और उभरती प्रौद्योगिकियों में अपने कौशल को लगातार बेहतर बना रहा है। इस सहायता ने उसे आत्मविश्वास के साथ उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक सफल करियर बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया है।यारा महेश और अनु प्रिया की कहानी यह दर्शाती है कि समय पर मिलने वाली शैक्षिक सहायता किस प्रकार छात्रों को वित्तीय बाधाओं को दूर करने और अपने शैक्षणिक एवं करियर संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। -
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लेने और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराने का आग्रह किया है।
संस्कृति मंत्रालय की एक्स की पोस्ट को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमारा तिरंगा हमारा गौरव है और देश के लिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की निरंतर प्रेरणा है। आइए, हम ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लें और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं। खुशी है कि इस वर्ष के प्रयास ‘वंदे मातरम’ को समर्पित हैं, और वह भी ऐसे समय में जब हम इसकी 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।”संस्कृति मंत्रालय ने अभियान के वेबसाइट ‘हर घर तिरंगा डॉट कॉम’ लॉंच करते हुए कहा कि पिछले 150 सालों से ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष ने देश की आत्मा को झकझोरा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर, जब भारत ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत तिरंगा यात्राओं, रैलियों, संगीत कार्यक्रमों और सामूहिक गायन के लिए एकजुट हो रहा है, तो आइए वही भावना हर गली और हर घर तक पहुंचाएं।आज से शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा अभियान’ इस महीने की 17 तारीख तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य लोगों को अपने घरों पर तिरंगा फहराने और देशभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह अभियान 2022 में शुरू हुआ था और अब एक बड़े जनभागीदारी अभियान का रूप ले चुका है। इस वर्ष अभियान का विशेष महत्व है, क्योंकि यह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के साथ मनाया जा रहा है। देशभर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन भी होगा। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। दुनिया भर में 200 से अधिक भारतीय दूतावास, उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास भी अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इस वर्ष ‘सूर्य पथ तिरंगा’ डिजिटल रिले भी आयोजित होगी। इसमें 54 भारतीय राजनयिक मिशन और केंद्र हिस्सा लेंगे। यह रिले 15 अगस्त को फिजी से शुरू होकर सैन फ्रांसिस्को में समाप्त होगा। - नयी दिल्ली. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन किया और प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। मोदी ने वेंस और उनकी पत्नी उषा को उनके बेटे के जन्म पर बधाई दी।प्रधानमंत्री मोदी को वेंस का यह फोन तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद आया है। इस समझौते को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक नए क्षेत्रीय गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बात हुई। हमने प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।'' मोदी ने कहा, ''मैंने वेंस और उनकी पत्नी को उनके बेटे के जन्म पर बधाई दी तथा पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।'' अमेरिकी पक्ष ने अभी तक बातचीत के बारे में कोई विवरण नहीं दिया है।
- नयी दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री संग्रहालय एक प्रदर्शनी आयोजित कर रहा है, जिसमें कई तरह की वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इनमें वंदे मातरम् पर जारी स्मृति डाक टिकट, वर्ष 1976 में इसके रचयिता के सम्मान में जारी विशेष प्रथम दिवस आवरण और चंदन की लकड़ी पर नक्काशी करके बनाई गई भारत माता की मूर्ति शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार से शुरू हुई पांच दिवसीय प्रदर्शनी में एक पुराने तिरंगे को भी प्रदर्शित किया गया है, जिसके बीच में देवनागरी लिपि में वंदे मातरम् लिखा हुआ है। यह आयोजन 15 अगस्त को मनाए जाने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोहों के तहत तीन मूर्ति भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय के नए खंड में आयोजित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी आठ से 12 अगस्त तक आयोजित की जा रही है।प्रदर्शनी वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान का भी उत्सव मना रही है। इसमें प्रदर्शित अन्य वस्तुओं में सजावटी बटन का एक सेट भी शामिल है, जिन पर पृष्ठभूमि में पुराने तिरंगे के साथ देवनागरी लिपि में वंदे मातरम् अंकित है। प्रदर्शनी में वंदे मातरम् पर जारी स्मृति डाक टिकट और इसके रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के सम्मान में वर्ष 1976 में जारी विशेष प्रथम दिवस आवरण के साथ-साथ भारतीय डाक द्वारा नवंबर 2025 में जारी स्मृति डाक टिकट भी प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनी में 'आनंदमठ' की प्रतियां भी प्रदर्शित की गई हैं, जिसमें वर्ष 1882 में पहली बार वंदे मातरम् को पूरी तरह बांग्ला भाषा में प्रकाशित किया गया था। इसके साथ ही वर्ष 1909 में अरविंद घोष द्वारा किए गए इसके अंग्रेजी अनुवाद की एक प्रति भी प्रदर्शनी का हिस्सा है। इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनी में शामिल कुछ वस्तुएं प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) के तोशाखाना संग्रह से ली गई हैं। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा वर्ष 1875 में रचित वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक प्रमुख नारे के रूप में उभरा और इसने आंदोलन को नयी ऊर्जा दी।
- चेन्नई । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को प्रसिद्ध मंदिर नगरी तिरुवन्नामलाई का दौरा किया और श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंत्री ने तिरुवन्नामलाई स्थित भगवान शिव के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके अलावा, उन्होंने वहां स्थित श्री रमणाश्रम का भी दौरा किया और पूजा की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने वरिष्ठ नेता का स्वागत किया।अमित शाह मुंबई से विमान द्वारा यहां पहुंचे और फिर चेन्नई से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित तिरुवन्नामलाई हेलीकॉप्टर से गए। शाह नौ अगस्त को पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक सरकारी कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे और पुडुचेरी पुलिस को राष्ट्रपति का रंग निशान प्रदान करेंगे। यह कार्यक्रम पुडुचेरी के गोरिमेडु स्थित पुलिस मैदान में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री पुडुचेरी में "हर घर तिरंगा यात्रा" का उद्घाटन भी करेंगे। पुडुचेरी और तिरुवन्नामलाई के बीच की दूरी लगभग 110 किलोमीटर है।












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