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नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश के इरादे से 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई वृद्धि कोष स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। इसका मकसद भविष्य के दिग्गज उद्यम तैयार करने में मदद करना है। एसएमई वृद्धि कोष (एसजीएफ) भारत के लघु और मझोले उद्यमों के लिए वृद्धि आधारित पूंजी को बढ़ावा देगा। साथ ही यह विनिर्माण, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, नवाचार आधारित क्षेत्रों और रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं में अग्रणी भारतीय उद्यम तैयार करेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने ''भविष्य के दिग्गज उद्यम तैयार करने के लिए लघु एवं मझोले उद्यमों में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड की स्थापना'' को मंजूरी दी है। इस कोष की घोषणा आम बजट 2026-27 में की गई थी। इस पहल के तहत सरकार एसजीएफ ढांचे के तहत स्थापित वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) में कुल 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस कोष का विवरण साझा किया। दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराकर यह पहल भारतीय एसएमई को परिचालन का दायरा बढ़ाने, प्रौद्योगिकी तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश करने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने, वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ने और रणनीतिक निवेश करने में सक्षम बनाएगी।
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली और लांचर की खरीद के लिए करीब 661 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। ब्रह्मोस शस्त्र प्रणाली अनेक युद्धपोतों में होती है। यह समुद्री अभियानों के लिए सतह से सतह पर वार करने वाली नौसेना की प्राथमिक मिसाइल प्रणाली है। यह सुपरसोनिक गति से पूरी सटीकता के साथ समुद्री और जमीनी लक्ष्यों पर लंबी दूरी से निशाना साधने में सक्षम है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली और भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए लांचर की खरीद के लिए 'भारतीय आईडीडीएम' श्रेणी में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (बीएपीएल) के साथ अनुबंध पर हस्तारक्षर किए गए थे। आईडीडीएम से आशय 'स्वदेशी तौर पर डिजाइन किए गए, विकिसत और बनाए गए' से संबंधित है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में 661.50 करोड़ रुपये मूल्य का अनुबंध किया गया।
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मॉस्को और कीव के साथ की जा रही वार्ता
नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत ने यूक्रेन संकट को सुलझाने के लिए सिर्फ पैरोकारी करने के बजाय हाल के महीनों में कीव और मॉस्को, दोनों के साथ वार्ता करके अपने प्रयास तेज कर दिए हैं तथा यह लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में नयी दिल्ली की हालिया पहल की पहली उद्घोषणा है। एक कार्यक्रम में जयशंकर की ये टिप्पणियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस बयान के कुछ दिनों बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास इस विवाद का पारस्परिक रूप से स्वीकार्य होने वाला एक समाधान तलाशने के लिए ''अच्छे विचार'' हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने शुक्रवार को कहा कि कीव को संभावित युद्धविराम के लिए भारत और तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले हैं। नयी दिल्ली की कोशिशों के बारे में जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है। पिछले चार साल से अधिक समय से भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए यूक्रेन विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। नयी दिल्ली में 'म्यूनिख लीडर्स मीटिंग' में जयशंकर ने कहा, ''उस टकराव पर हमारा रुख बहुत स्पष्ट रहा है कि हम इसे खत्म होते देखना चाहते हैं। इसके लिए बातचीत और कूटनीति की जरूरत होगी। इस मामले में बातचीत होनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''हम कई साल से इसकी हिमायत कर रहे हैं, और हाल के महीनों में हम सिर्फ इससे कहीं आगे बढ़कर इसमें थोड़ा और शामिल हुए हैं। इस मामले में हमारी रूस और यूक्रेन, दोनों से बातचीत हो रही है। हम मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत काला सागर में पोत परिवहन की सुरक्षा के मुद्दे से हो रही है।'' जयशंकर ने कहा कि भारत इससे आगे बढ़कर कुछ ऐसी तात्कालिक चिंताओं पर भी ध्यान दे रहा है जो दोनों (रूस और यूक्रेन) को अनाज और ऊर्जा के निर्यात तथा हमले न होने की संभावनाओं से संबंधित हैं। इन विषयों पर अभी बातचीत जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि अंतहीन युद्ध को अब समाप्त करना चाहिए। विदेश मंत्री ने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर भी बात की।
उन्होंने कहा, ''भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रहे हैं, खासकर 1950 के दशक से। उस इतिहास को भुलाया नहीं गया है।'' विदेश मंत्री ने कहा कि जब भारत की सुरक्षा और हमारी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब तत्कालीन सोवियत संघ कई तरह से देश के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा, ''ऐसे समय में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोसी देश में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा था, रूस एक ऐसा देश था जिसके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे थे, और उस विरासत का हम पर कई तरह से असर पड़ा है।'' जयशंकर ने कहा कि अब यह जुड़ाव काफी व्यापक हो गया है।
उन्होंने कहा, ''आज यह रिश्ता काफी हद तक आर्थिक भी हो गया है। इसमें सैन्य और परमाणु पहलू हैं, साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र भी है। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश के साथ-साथ ऊर्जा और संसाधनों का भी लेन-देन होता है।'' विदेश मंत्री ने बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बारे में कहा, ''बैठक में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज के हालात में अमेरिका ने अपनी स्थिति में एक बड़ा बदलाव किया है। यह स्थिति में बदलाव उसकी अपनी पसंद का नतीजा है।'' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एक तरह से, वह ''जान-बूझकर'' एक ''अकेली पड़ती हुई महाशक्ति'' बन गया है। जयशंकर ने कहा, ''इस परिदृश्य की दूसरी विशेषता निश्चित रूप से चीन का उदय है। चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है--और एक तरह से, यह उसकी अपनी सोच भी है और कई मायनों में हकीकत भी। और हम बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा देख रहे हैं।'' जयशंकर ने कहा, ''आज यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण हर देश के पास मौजूद किसी भी तरह के प्रभाव या ताकत का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जाने लगा है। और यह प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे पर निर्भरता की जटिलता के साथ-साथ जारी रहती है।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन के लिए उन्हें रविवार को बधाई दी और खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने दृढ़ संकल्प, जुनून और खेल भावना के साथ देश का प्रतिनिधित्व किया। भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण के पदकों की तुलना से 21 कम है। मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ''एशियाई खेल 2026 के समापन के साथ ही मैं भारतीय दल के हर सदस्य को बधाई देता हूं जिन्होंने दृढ़ संकल्प, जुनून और शानदार खेल भावना के साथ हमारे देश का प्रतिनिधित्व किया। '' उन्होंने सभी भारतीय पदक विजेताओं को भी बधाई दी और कहा कि उनके प्रदर्शन ने 'देश को अपार खुशी' दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''उम्मीद है कि ये खेल आने वाले वर्षों में और बड़ी उपलब्धियों के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही, ये जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में भी योगदान देंगे। '' दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद रविवार को नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भव्य समापन समारोह के साथ एशियाई खेलों का समापन हुआ। इन खेलों में 350 से अधिक रिकॉर्ड बने जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। एशिया के 45 देशों के खिलाड़ियों ने इन खेलों में हिस्सा लिया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की मेजबानी की और इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, आवागमन और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को मजबूत करने के नए अवसरों पर व्यापक बातचीत की। पार्मेलिन सोमवार सुबह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचे, जो उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा है। हालांकि, इस वर्ष वह दूसरी बार भारत आए हैं। वह इससे पहले फरवरी में आयोजित 'एआई इंपैक्ट समिट' में हिस्सा लेने पहुंचे थे। राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद स्विस राष्ट्रपति का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''दोनों नेताओं के समक्ष एक व्यापक एजेंडा है, जिसके तहत वे भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी के विभिन्न आयामों पर चर्चा करने के साथ-साथ इसे और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार करेंगे।'' प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि वह भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के आधार पर भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को गहरा करने की राष्ट्रपति पार्मेलिन की प्रतिबद्धता की "सराहना" करते हैं। मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि वह भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को आगे बढ़ाते हुए भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को गहरा करने की राष्ट्रपति पार्मेलिन की प्रतिबद्धता की ''सराहना'' करते हैं। करीब 16 वर्षों तक चली बातचीत के बाद मार्च 2024 में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच इस महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस व्यापक व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य देश आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की योजना बना रहे हैं। पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रभावी हुए इस व्यापार समझौते से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। वर्तमान में इंजीनियरिंग, सेवा, रसायन और दवा जैसे क्षेत्रों में 330 से अधिक स्विस कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में स्विट्जरलैंड में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। अपनी यात्रा के दौरान पार्मेलिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।
- नयी दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार ने इस सप्ताह 'फ्लाईदुबई' की एक उड़ान को बचाने में असाधारण बहादुरी का परिचय दिया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हर भारतीय को मच्छार पर गर्व है। उन्होंने जो किया, वह असाधारण बहादुरी थी। उन्होंने अदम्य शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया।'' बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान एफजेड1073 के कॉकपिट में उनके सह-पायलट ने मच्छार पर चाकू से हमला किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। हालांकि, मच्छार ने घायल अवस्था में भी हमलवार का वीरता से मुकाबला करते हुए विमान गिराने के उसके प्रयास को विफल कर दिया।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता अब 'स्थायी स्थिति' बन गई है और ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है, जो आर्थिक मजबूती बढ़ाएं। उन्होंने देशों से खुले और भरोसेमंद आर्थिक संबंध बनाए रखने का आह्वान किया। सीतारमण ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगले दशक के झटकों से निपटने के लिए भारत की चार प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने में आत्मनिर्भरता पर ध्यान देने और निजी क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) समेत निवेश का नेतृत्व करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कामकाज की बदलती दुनिया के बीच कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण और उसे लागू करने में उद्योग को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। वित्त मंत्री ने यहां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026 में कहा, ''वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब लगातार बनी रहने वाली स्थिति है और नीतियां इसी को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। हमें आगे बढ़ते हुए लगातार मजबूती बढ़ाते रहना होगा। यह एक बार किया जाने वाला प्रयास नहीं है। आने वाले वर्षों के लिए तैयारी जरूरी है और भारत इनका सामना मजबूती के साथ कर रहा है।'' खुले, भरोसेमंद और नियम आधारित वैश्विक आर्थिक संबंधों की बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि देशों को एक-दूसरे के साथ संवाद और बातचीत के जरिये हुए समझौतों के माध्यम से जुड़ना चाहिए, न कि भू-राजनीतिक मतभेदों को व्यापार और निवेश में बाधा बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में कारोबार के लिए अधिक निश्चितता होनी चाहिए, देशों की विकास संबंधी प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाना चाहिए और बाजारों को विभाजित करने वाले अनावश्यक प्रतिबंधों से बचना चाहिए।'' सीतारमण ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में संरचनात्मक आत्मनिर्भरता की जरूरत बताते हुए कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को इस तरह बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक ही स्रोत पर निर्भरता कम हो और घरेलू स्तर पर उत्पादन एवं आपूर्ति की क्षमता बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.83 प्रतिशत है, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों में यह 2.7 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च में निजी क्षेत्र का योगदान केवल 36 प्रतिशत है। निजी क्षेत्र से निवेश का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए सीतारमण ने कहा, ''निवेश का स्तर और निजी क्षेत्र की भागीदारी, दोनों बढ़ाना हमारी नवोन्मेष क्षमता को मजबूत करने के लिए जरूरी है।'' मंत्री ने कहा कि भारत के लिए मजबूती का अर्थ पिछले एक दशक में तैयार की गई बुनियादी संरचना पर आगे बढ़ते हुए आर्थिक वृद्धि को तेज और व्यापक बनाना है। उन्होंने कहा, ''आने वाले वर्षों में भारत की मजबूती की परीक्षा इस बात से भी होगी कि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना किस तरह करता है और इनका असर परिवारों और कारोबारी गतिविधियों पर कितना कम पड़ता है।'' 'बदलाव के दौर में मजबूती' विषय पर सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि मजबूती का प्रमाण उन संभावित नतीजों में निहित है, जो सामने नहीं आए। इनमें महंगाई का ऐसा दौर शामिल है, जिसने जोर नहीं पकड़ा, ईंधन केंद्रों पर लंबी कतारें नहीं लगीं, बैंकिंग क्षेत्र में तनाव नहीं उभरा और राजकोषीय सुधार के लिए दबाव नहीं बना। उन्होंने कहा, ''इन संभावित लेकिन सामने नहीं आए परिणामों पर अर्थशास्त्रियों को उतना ही ध्यान देना चाहिए जितना मुख्य आर्थिक वृद्धि दर पर।'' सीतारमण ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने देशभर में आर्थिक गतिविधियों को सरल, अधिक भरोसेमंद और अधिक उत्पादक बनाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता, चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों के जरिये राष्ट्रीय स्तर की रूपरेखा को आगे बढ़ाया है।
- नयी दिल्ली। प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) सम्मेलन का अगला संस्करण जनवरी में कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह तीन-दिवसीय सम्मेलन सात जनवरी से शुरू होगा और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।विदेश मंत्रालय ने कहा, ''प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का 19वां संस्करण सात से नौ जनवरी 2027 तक कोलकाता में आयोजित किया जाएगा।'' इसका आयोजन विदेश मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार करेगी।प्रवासी भारतीय दिवस महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से नौ जनवरी 1915 को भारत लौटने की स्मृति में मनाया जाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान करेंगी और समापन सत्र की अध्यक्षता करेंगी। मंत्रालय ने कहा, ''सम्मेलन में 'युवा प्रवासी भारतीय दिवस' का आयोजन भी होगा। इस आयोजन में दुनियाभर से भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य, युवा प्रवासी नेता, उद्यमी, पेशेवर, शिक्षाविद, नवोन्मेषक और अन्य हितधारक भाग लेंगे।''
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भोपाल. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी। शाह ने राज्य की राजधानी भोपाल के भेल क्षेत्र स्थित दशहरा मैदान में आयोजित गोपालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ऐसी विस्तृत योजना पर काम कर रही है, जिससे 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में ''नशे के लिए कोई जगह'' नहीं बचेगी। शाह ने कहा, ''भारत की न्याय व्यवस्था कभी 'तारीख पर तारीख' के तानों के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष में न्याय दिलाने का पूरा काम हो जाएगा।'' उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून उनके शासन को बचाने के लिए थे, जबकि तीन नए आपराधिक कानून भारत के नागरिकों के सम्मान, संपत्ति और शरीर की रक्षा के लिए हैं। शाह ने कहा, ''इन कानूनों का मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं। दंड का प्रावधान केवल अपराधियों को अपराध करने से रोकने के लिए है। इन कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी।'' शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आजादी के बाद से कृषि व्यवस्था, ग्रामीण विकास और सहकारिता से जुड़े लोगों की अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग थी, लेकिन तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी ने 75 वर्षों तक अलग सहकारिता मंत्रालय नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर सहकारिता क्षेत्र को नयी दिशा दी। इसका सबसे बड़ा लाभ हमारे गोपालकों को मिलेगा। खुले बाजार में दूध बेचने पर बिचौलिए लाभ का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं, लेकिन सहकारिता मॉडल में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है।'' शाह ने बड़ी संख्या में सम्मेलन में पहुंचे गोपालकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश में 'श्वेत क्रांति 2.0' के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन से सबसे अधिक लाभ गोपालकों को होगा। उन्होंने कहा, ''गोपालकों की यह भागीदारी पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नए संकल्प और नयी ऊर्जा का प्रतीक है।'' शाह ने कहा कि देश में 2013-14 में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 307 ग्राम थी, जो बढ़कर 485 ग्राम हो गई है। उन्होंने कहा, ''भारत आज दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला देश है। देश के पांच प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भाजपा की सरकारें हैं। कांग्रेस ने अपने शासन में पशुपालकों के कल्याण के लिए क्या किया, इसका जवाब उसे देना चाहिए। हमारी सरकारों का ध्यान पशुपालकों की आय बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर है।'' केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार का विरोध करने वाले कांग्रेस नेताओं के सवालों का हिसाब देने वह यहां आए हैं। उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के 75 वर्षों के शासन में देश का दूध उत्पादन 14.60 करोड़ टन तक पहुंचा, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में यह बढ़कर 25 करोड़ टन तक पहुंचा है। इसके पीछे भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों की निरंतर मेहनत है।'' शाह ने कहा कि सरकार ऐसी विस्तृत योजना बना रही है, जिससे 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्यप्रदेश में नशे के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। शाह ने इससे पहले नए आपराधिक कानूनों पर केंद्रित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और उसका अवलोकन भी किया। शाह कार्यक्रम के बाद भोपाल के भौंरी क्षेत्र स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के विस्तारित 'अत्रि' परिसर का शिलान्यास करेंगे और परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
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नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को जोर देकर कहा कि समावेशिता ही विकास को टिकाऊ बना सकती है और उन्होंने आम सहमति के आधार पर फैसले लेने पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने यहां पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अल्पविकसित से विकासशील और अब विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हम खुद को विकसित अर्थव्यवस्था तभी कह सकते हैं जब यह सभी का समावेशी विकास हो और इसके लाभ हर कोने-कोने तक पहुंचें। राधाकृष्णन ने यह भी रेखांकित किया कि तेजी से हो रहे बदलावों के इस दौर में, जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और वैश्विक व्यापार बदल रहा है, हमें आम सहमति से फैसले लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम बहस कर सकते हैं, चर्चा कर सकते हैं और एक ऐसे अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं जो सभी को स्वीकार्य हो। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उनका दृढ़ विश्वास है कि केवल स्वतंत्र और पारदर्शी बहस ही लोकतंत्र को मजबूत करती है। नीति निर्माताओं को हमेशा जमीनी तथ्यों से अवगत रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, ''नीति निर्माण में इतना लचीला होना चाहिए कि वह नीति अपने आप में एक बड़ी सफलता बन जाए।''
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों कुमकुम अनिल मोहोद, प्रणवी शरथ उर्स और नीरज चौहान को बधाई दी है। उन्होंने कुमकुम और प्रणवी के गोल्ड मेडल तथा नीरज के ब्रॉन्ज मेडल को भारतीय खेलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए तीनों खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
राष्ट्रपति ने कुमकुम अनिल मोहोद को एशियन गेम्स 2026 के रिकर्व विमेंस इंडिविजुअल इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुमकुम का पूरे गेम्स में अभियान शानदार रहा और उन्होंने टीम इवेंट्स में भी दो मेडल जीतकर अपनी उपलब्धियों में इजाफा किया।द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि कुमकुम के गोल्ड मेडल जीतने के बाद एशियन गेम्स का आयोजन स्थल भारत के नेशनल एंथम से गूंज उठा। उन्होंने भारतीय महिला तीरंदाजों की इस संस्करण में शानदार सफलता में कुमकुम के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि उनका प्रदर्शन खासकर देश की युवा लड़कियों को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणवी शरथ उर्स को विमेंस इंडिविजुअल स्ट्रोक प्ले में गोल्ड मेडल जीतने और एशियन गेम्स में इंडिविजुअल गोल्फ गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि ओपनिंग टी से लेकर फाइनल पुट तक प्रणवी ने अपनी निरंतरता बनाए रखी और भारतीय गोल्फ के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।राष्ट्रपति ने प्रणवी के गोल्ड मेडल को भारतीय महिला गोल्फ को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता देश में महिला गोल्फ के लिए एक नया माइलस्टोन है और प्रणवी को भविष्य में भी कई उपलब्धियां हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दीं। द्रौपदी मुर्मु ने आर्चरी के रिकर्व मेंस इंडिविजुअल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले नीरज चौहान को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में दोनों तीरंदाज भारतीय थे, जो इंडियन रिकर्व आर्चरी के लिए एक खास पल रहा।राष्ट्रपति ने कहा कि नीरज का ब्रॉन्ज मेडल एशियन गेम्स में इंडिविजुअल रिकर्व पोडियम पर भारत की मजबूत मौजूदगी को और बढ़ाता है। उन्होंने इसे भारतीय आर्चरी के लिए गर्व का विषय बताते हुए नीरज को भविष्य की उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दीं। - नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6.0’ के कार्यान्वयन चरण का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अब महज साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन, सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, लंबित मामलों में कमी और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की स्थायी संस्कृति बन चुकी है। अभियान के तहत पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपए की कमाई हुई है, जबकि 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक कार्यालयी जगह खाली कराई गई है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2014 में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल धीरे-धीरे जन-आंदोलन और फिर सरकारी कार्यालयों में संस्थागत प्रक्रिया में बदल गई। उन्होंने कहा कि शौचालय और साफ-सफाई से शुरू हुआ अभियान अब पुरानी फाइलों, बेकार फर्नीचर, ई-फाइलों, ई-कचरे और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार निपटान तक पहुंच गया है।जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा निर्धारित स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में श्रमदान किया। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधे लगाए और पुराने रिकॉर्ड हटाने की प्रक्रिया की प्रतीकात्मक शुरुआत की। इस दौरान सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाइयां देकर सम्मानित भी किया गया। डीएआरपीजी इस अभियान के लिए नोडल विभाग है।इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने सीएसआईआर मुख्यालय पहुंचकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी इकोसिस्टम में विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 को आगे बढ़ाया। उन्होंने व्यापक सफाई अभियान का नेतृत्व किया और ‘स्वच्छता सिग्नेचर कैंपेन’ तथा पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। सफाई मित्रों को भी सम्मानित किया गया। सीएसआईआर में पुराने रिकॉर्ड और कबाड़ की समीक्षा, उनके निपटान, कार्यस्थल में सुधार तथा कार्यालयी स्थान के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया।डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक जगह खाली कराकर उसका बेहतर उपयोग संभव बनाया गया। इसके अलावा 180.48 लाख से अधिक फाइलों को बंद या हटाया गया और देशभर में 24.20 लाख सफाई स्थलों की पहचान कर उनकी सफाई की गई।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कबाड़ और अनावश्यक रिकॉर्ड हटाकर खाली हुई जगह का उपयोग ग्रीन एरिया विकसित करने या लंबे समय से अवरुद्ध और कम उपयोग वाली जगहों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष स्वच्छता अभियान ने स्वच्छता को केवल वार्षिक गतिविधि के बजाय सरकारी संस्थानों की कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने में मदद की है।जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का भी दौरा किया। वहां ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत पृथ्वी भवन और मौसम भवन से ई-कचरे तथा अनुपयोगी उपकरणों को हटाने और निपटान की प्रक्रिया शुरू की गई। इस अभियान के तहत कुल 705 वस्तुओं की पहचान की गई है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने केंद्रीय मंत्री को निपटान के लिए चुनी गई वस्तुओं की जानकारी दी।डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की गतिविधियां वैज्ञानिक इकोसिस्टम में चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा हैं। पृथ्वी विज्ञान, सीएसआईआर और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले 100 से अधिक विज्ञान संस्थानों ने 2 अक्टूबर से इस अभियान में भाग लेना शुरू किया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों में स्वच्छता और अनुपयोगी सामान के व्यवस्थित निपटान की संस्कृति को मजबूत करना है।केंद्रीय मंत्री ने विशेष स्वच्छता अभियान को वैज्ञानिक इकोसिस्टम की ‘कचरे से संपदा’ अवधारणा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल कचरे का निपटान करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिनके माध्यम से कचरे को उपयोगी उत्पादों, सामग्री, ऊर्जा और आर्थिक अवसरों में बदला जा सके।सीएसआईआर के तकनीकी पोर्टफोलियो में नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण, ई-कचरे से महत्वपूर्ण धातुओं और दुर्लभ खनिजों की पुनर्प्राप्ति, लिथियम-आयन बैटरी का पुनर्चक्रण, बायोमेथेनेशन, कृषि अपशिष्ट से जैव-अपघटित उत्पादों का निर्माण, अपशिष्ट जल से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और औद्योगिक कचरे से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों को उपयोग और आगे के विकास के लिए उद्योग जगत तथा अन्य संगठनों को उपलब्ध कराया गया है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष अभियानों के अनुभव बताते हैं कि स्वच्छता अभियान किस तरह प्रशासनिक सुधार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और संस्थागत दक्षता बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। वैज्ञानिक क्षेत्र में यह सोच कचरे की पहचान और निपटान से आगे बढ़कर संसाधनों की पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण, नवाचार और संपदा सृजन तक पहुंच रही है।विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा सितंबर में की गई तैयारियों के बाद विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान में स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी, रिकॉर्ड की समीक्षा और छंटाई, कार्यालयी स्थान का बेहतर उपयोग, ई-कचरे एवं अनुपयोगी सामान का वैज्ञानिक निपटान तथा बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के संस्थागत लक्ष्यों के साथ समग्र सरकारी प्रयास के रूप में लागू किया जा रहा है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) देशभर में स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के साथ समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की इस प्रमुख योजना को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) लागू करता है। योजना के तहत खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गैर-कृषि क्षेत्र के नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमियों को बैंक से स्वीकृत ऋण पर मार्जिन मनी (MM) सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता दी जाती है। वित्त वर्ष 2014-15 से PMEGP के तहत करीब 8.12 लाख सूक्ष्म उद्यमियों को 24,398.61 करोड़ रुपए की मार्जिन मनी सब्सिडी के साथ सहायता दी गई है। योजना के माध्यम से लगभग 73.08 लाख लोगों के लिए टिकाऊ रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसका उद्देश्य नौकरी तलाशने वालों को उद्यम स्थापित कर रोजगार देने वालों में बदलने के लिए जरूरी वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना है।PMEGP के तहत मार्जिन मनी सब्सिडी के साथ बैंक ऋण की सुविधा उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने में मदद करती है। पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए यह सहायता शुरुआती पूंजी की चुनौती को कम करती है और उन्हें अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्यम में बदलने का अवसर देती है।हिमाचल प्रदेश के परवाणू की पूजा शर्मा द्वारा शुरू की गई स्किनकांती आयुर्वेद PMEGP से लाभान्वित उद्यम की सफलता का उदाहरण है। 25 लाख रुपए की परियोजना लागत से भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से शुरू हुई यह इकाई आज सालाना 30 करोड़ रुपए का कारोबार कर रही है और करीब 300 लोगों को रोजगार दे रही है। इनमें 95% महिलाएं हैं।स्किनकांती आयुर्वेद ने आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़कर हाथ से बने साबुन के उत्पादन में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी ने विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और लागत कम करने जैसी तकनीकी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके उत्पाद विभिन्न रिटेल और संस्थागत माध्यमों के जरिए देशभर में उपलब्ध हैं।पंजाब के मोहाली में सुरेंद्र पाल सिंह नागी द्वारा स्थापित M/s Ess Pee Quality Products ने भी PMEGP के सहयोग से स्थानीय उद्यम से वैश्विक बाजार तक का सफर तय किया है। बैंक ऑफ बड़ौदा से 21 लाख रुपए की शुरुआती परियोजना लागत के साथ शुरू हुई यह इकाई अब करीब 38 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार वाले व्यवसाय में बदल चुकी है और लगभग 130 लोगों को रोजगार दे रही है।कंपनी शहद, कुकीज और फ्रूट जैम जैसे खाद्य उत्पाद तैयार करती है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा फ्रांस समेत 26 देशों में इनका निर्यात करती है। कंपनी का AA+ BRCGS सर्टिफिकेशन हासिल करना वैश्विक गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप उसके उत्पादन को दर्शाता है। PMEGP से जुड़े उद्यमियों की सफलता की कहानियां सूक्ष्म उद्यमों के विस्तार, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में योजना की भूमिका को सामने लाती हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसर बढ़ने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।PMEGP के संभावित लाभार्थी योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आवेदन प्रक्रिया के लिए आधिकारिक PMEGP पोर्टल पर जा सकते हैं।
- नई दिल्ली। अमेरिका के मिलवॉकी में 2 अक्टूबर को आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन दिवस पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक व्यापार में विकृतियों को दूर करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुरूप नियम-आधारित और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता एवं उत्पादन, सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।पीयूष गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की घरेलू मांग पर आधारित है। भारत डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है।गोयल ने कहा कि भारत कई सदस्य देशों की इस चिंता से सहमत है कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाला समर्थन डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण को बढ़ावा दे सकता है। ऐसी चिंताओं के समाधान के लिए WTO के अनुरूप उपाय उपलब्ध हैं, जिनमें साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटी शामिल हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित होने पर व्यापार विकृतियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसका इस्तेमाल WTO नियमों से बाहर के उपायों के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही, समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर नहीं डाला जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें औद्योगीकरण के लिए नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत है।सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत को अद्यतन करने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि जी20 सदस्यों के साथ भारत का व्यापार पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली पर निर्भर करता है। उन्होंने MFN सिद्धांत को इस व्यवस्था की प्रमुख गारंटी बताते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों तक सभी के लिए समान शर्तें लागू हों।गोयल ने WTO में आम सहमति को सर्वोपरि बताते हुए विकासशील देशों के लिए विशेष एवं भिन्न व्यवहार (Special and Differential Treatment) बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को विकसित देशों के साथ बराबरी की स्थिति तक पहुंचने में मदद मिलती है। उन्होंने WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने का भी आह्वान किया।वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जबरन श्रम पर रोक लगाता है और इसे सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से लागू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन 29 और 105 की पुष्टि की है तथा जुलाई 2026 में जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया।गोयल ने कहा कि सीमा पर उठाए जाने वाले कदम पूरे देशों, क्षेत्रों या वर्गों के बारे में अनुमानों के बजाय विशिष्ट और सत्यापन योग्य साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने उचित प्रक्रिया और WTO नियमों के सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन श्रम मानकों के लिए सक्षम, सार्वभौमिक और त्रिपक्षीय निकाय है। उन्होंने जी20 सदस्यों के बीच जबरन श्रम उन्मूलन और अच्छी प्रथाओं के स्वैच्छिक आदान-प्रदान के उद्देश्य का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग में सदस्यों की निगरानी, नए दायित्वों का सृजन या किसी जानकारी का एकतरफा व्यापार कार्रवाई के आधार के रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।गोयल ने WTO को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, निष्पक्ष, समान, गैर-भेदभावपूर्ण, पारदर्शी, खुले, समावेशी और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विकासशील देशों के लिए अपने लोगों के विकास और पोषण से जुड़ी नीतियों को लागू करने की स्वतंत्रता तथा सर्वसम्मति से निर्णय लेने के महत्व पर जोर दिया।केंद्रीय मंत्री ने मिलवॉकी में आयोजित कार्यक्रमों और आतिथ्य के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की जी20 अध्यक्षता और राजदूत ग्रीर को धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार का उल्लेख किया कि जिन मुद्दों का समाधान मिलकर नहीं हो सकता, उन्हें उन मुद्दों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए, जिनका समाधान मिलकर किया जा सकता है। गोयल ने कहा कि भारत ने इसी भावना के साथ बैठक में भाग लिया और चारों विषयों पर अपनी चिंताओं तथा रचनात्मक सुझावों को साझा किया। उन्होंने 2027 में जी20 की अध्यक्षता के लिए यूनाइटेड किंगडम को भारत के पूर्ण समर्थन की भी घोषणा की।बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार एवं पर्यटन मंत्री, सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री, फ्रांस के विदेश व्यापार एवं आर्थिक आकर्षण के प्रतिनिधि मंत्री, दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
- नई दिल्ली। एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों एवं टीमों को बधाई दी है। भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 में शुक्रवार का दिन शानदार रहा। प्रधानमंत्री ने पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाले सुजीत, पुरुषों की 80 किग्रा मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक विजेता अंकुश और महिलाओं की 65 किग्रा मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली परवीन को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने पुरुष क्वाड्रेंट सेपकटकरा में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम और महिलाओं की डिंगी स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल करने वाली नेत्रा कुमानन की उपलब्धियों की भी सराहना की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेलों में पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा के रोमांचक फाइनल में जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक जीतने पर सुजीत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में अपने पदार्पण पर सुजीत ने भारत को इस संस्करण में कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक दिलाया है। प्रधानमंत्री ने उनकी जीत को यादगार बताते हुए आगामी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।प्रधानमंत्री ने पुरुषों की 80 किग्रा मुक्केबाजी के फाइनल में शानदार जीत के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाले अंकुश को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि अंकुश का जुनून और समर्पण सराहनीय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता ने एशियाई खेलों में भारत के मुक्केबाजी अभियान का समापन शानदार अंदाज में सुनिश्चित किया है।महिलाओं की 65 किग्रा मुक्केबाजी स्पर्धा के कड़े मुकाबले के फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाली परवीन को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी उपलब्धि को भारतीय मुक्केबाजी में एक और शानदार अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि परवीन की सफलता बेहद प्रेरणादायक है और यह खेल में उत्कृष्टता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने उन्हें भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।प्रधानमंत्री ने पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष क्वाड्रेंट टीम को भी बधाई दी। उन्होंने इसे भारतीय सेपकटकरा के लिए ऐतिहासिक पल बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि एशियाई खेलों के इस पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में यह भारत का पहला पदक है। उन्होंने टीम के दृढ़ संकल्प और लड़ने के जज्बे की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि देश में सेपकटकरा को और बढ़ावा देगी।प्रधानमंत्री ने महिलाओं की डिंगी स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली नेत्रा कुमानन को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए बड़ी कामयाबी है। प्रधानमंत्री ने नेत्रा के लिए भविष्य में और सफलता की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह देश में एथलीटों की नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेंगी।प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट के जरिए इन उपलब्धियों की जानकारी साझा की। सुजीत को बधाई देते हुए पीएमओ ने कहा कि उन्होंने अपने एशियाई खेलों के पदार्पण पर भारत को कुश्ती में इस संस्करण का पहला स्वर्ण पदक दिलाया और यह वास्तव में यादगार जीत है।अंकुश की जीत पर पीएमओ ने कहा कि पुरुषों की 80 किग्रा मुक्केबाजी में फाइनल की शानदार जीत के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। पोस्ट में उनके जुनून और समर्पण की सराहना की गई और कहा गया कि उनकी सफलता ने भारत के मुक्केबाजी अभियान का समापन शानदार मोड़ पर किया।परवीन को बधाई देते हुए पीएमओ ने उनकी उपलब्धि को भारतीय मुक्केबाजी में एक और शानदार अध्याय बताया। वहीं, भारतीय पुरुष क्वाड्रेंट टीम के कांस्य पदक को पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में भारत का पहला पदक बताते हुए टीम के दृढ़ संकल्प और लड़ने के जज्बे की सराहना की गई।नेत्रा कुमानन को बधाई देते हुए पीएमओ ने कहा कि महिलाओं की डिंगी स्पर्धा में उनका कांस्य पदक भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। पीएमओ ने उनके भविष्य में नई ऊंचाइयां हासिल करने और देश में एथलीटों की नई पीढ़ी को प्रेरित करने की कामना की।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार से फोन पर बात की है। उन्होंने स्मित मच्छार से उनका हालचाल जाना और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पीएम मोदी ने कहा कि आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी से बात करते हुए पायलट स्मित भावुक गए। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना सबसे बड़ा ‘आइडल’ बताया। स्मित मच्छार ने कहा, “आप मेरे सबसे बड़े ‘आइडल’ हैं। आप कॉल करके मेरी हौसला अफजाई कर रहे हैं, मुझे बहुत गर्व हो रहा है।” स्मित ने पीएम मोदी से कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि आपसे मेरी बात होगी।”स्मित के भावुक होने पर पीएम मोदी ने कहा, “आपने इतना बड़ा काम किया है कि हर देशवासी और पूरी दुनिया लोग आपको देखने, आपसे बात करने के लिए आतुर हैं। आपने सचमुच में पूरे देश का नाम रौशन किया है।”वीडियो कॉल पर पर बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने स्मित से कहा कि पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है। महामृत्युंजय के जाप चल रहे हैं। आपकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने लोगों की जान बचाई है। आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम हिंदुस्तानी जान लेने वाले लोग नहीं है, बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा, “आपके शरीर पर इतना बड़ा घाव हुआ और स्वयं जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे थे। उस समय भी आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि यात्रियों के जीवन की परवाह की। सबसे बड़ी बात यह है कि आपने 140 करोड़ देशवासियों का मान बढ़ाया है। इसलिए मैं हृदय से गर्व अनुभव करता हूं।”स्मित के परिजनों से बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे कल भूपेंद्र भाई और गीताबेन से बात करने का अवसर मिला। मैंने गीताबेन को बोला कि आपका नाम गीता है, लेकिन आपने कृष्ण की गीता को पूरी तरह बचा दिया। आपने साक्षात गीता के संस्कारों से स्मित का जीवन बनाया।”पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपका स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक है। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा (आप सभी की जान न बचाते) न करते तो पता नहीं, पूरे देश और भारत के पायलटों पर क्या-क्या बीतती। सभी पायलटों को किस तरह से देखा जाता। आपने सभी को बचा लिया है।”इस दौरान, पीएम मोदी ने सऊदी और यूएई सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने स्मित की बहुत देखभाल की। मैं उनका बहुत आभारी हूं। -
नई दिल्ली। गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो गया है। गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है और राज्य में कानून को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था। यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान करता है। विधेयक के अनुसार कानून को प्रभावी करने की तारीख राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। इसमें विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है।
यूसीसी में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को लेकर बेटियों और बेटों के बीच समानता का प्रावधान किया गया है। यानी पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटी को भी बेटे के समान अधिकार मिलेगा। बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकार भी कानून के तहत निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा सरोगेसी और गोद लेने से जुड़े बच्चों को भी कानूनी अधिकारों के मामले में समान सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी कानून के तहत संरक्षित किया गया है।गुजरात यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू किया गया है। इसके तहत पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने पर प्रतिबंध रहेगा। विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी एक समान कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यूसीसी की प्रमुख व्यवस्थाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी शामिल है। राज्य में ऐसे संबंधों को निर्धारित समय-सीमा और प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। इससे संबंधित कानूनी अधिकारों और दायित्वों को भी कानून के तहत निर्धारित किया गया है।गुजरात यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके प्रावधानों से छूट दी गई है। इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना बताया गया है।गुजरात में यूसीसी की दिशा में पहल 2022 में शुरू हुई थी। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की थी। इसके बाद फरवरी 2024 में गुजरात सरकार ने यूसीसी की जरूरत और उसके संभावित स्वरूप का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की। समिति ने राज्य में व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया और यूसीसी के स्वरूप को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की।मार्च 2026 में समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया। गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को विधेयक पारित किया। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी विधेयक के पारित होने के बाद गुजरात सरकार और विधायकों को बधाई दी गई थी। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून को अपनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है। अब राज्य सरकार द्वारा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी अधिसूचनाओं और नियमों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) ने कक्षा-9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है और ईमानदारी से कर चुकाने को नागरिकों का एक महत्वपूर्ण दायित्व बताने वाला संदेश भी दिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद, मंगलवार को 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' शीर्षक से किताब जारी की गई। पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था। एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी के अनुसार, अब छात्र नयी व्यवस्था के तहत कर स्लैब के हिसाब से आयकर की वास्तविक गणना को समझ सकते हैं – इस आयु के बच्चों (कक्षा 9) के लिए यह पहली बार है – और इसके साथ ही उन्हें यह संदेश भी दिया गया है कि ''ईमानदारी से और समय पर'' कर चुकाना ''हर नागरिक का एक अहम दायित्व'' है, जिससे देश का विकास होता है। 'अपनी व्यक्तिगत आय को प्रबंधित करना' शीर्षक वाला अध्याय कहता है कि पैसे को प्रबंधित करने का सफ़र बचपन से ही शुरू हो जाता है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, पैसे का समझदारी से प्रबंधन करने का मतलब सिर्फ़ ज़्यादा कमाना नहीं है, बल्कि हर चरण पर सोच-समझकर वित्तीय फ़ैसले लेना है-चाहे वह खर्च करना हो, बचत करना हो, निवेश करना हो, जोखिमों से सुरक्षा हो, ज़िम्मेदारी से उधार लेना हो या कर चुकाना हो। इसमें कहा गया है कि आज लोग जो फ़ैसले लेते हैं, वे उनके आर्थिक भविष्य को आकार देते हैं और आर्थिक अवसरों व चुनौतियों को प्रबंधित करते हुए आर्थिक स्थिरता पाने की उनकी क्षमता तय करते हैं। इस अध्याय में नयी आयकर व्यवस्था के तहत कर संबंधी स्लैब की एक सारणी दी गई है और इसमें बताए गए स्लैब के अनुसार कर की देनदारी का हिसाब लगाने के तरीके भी विस्तार से बताए गए हैं। इसमें पुरानी कर व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं है। पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भारत आयकर की गणना के लिए स्लैब प्रणाली का पालन करता है, जैसा कि सारणी में दिखाया गया है। इसके बाद नयी कर व्यवस्था के तहत कर स्लैब का एक चार्ट दिया गया है।
इसे एक अप्रैल, 2023 से 'डिफ़ॉल्ट' कर व्यवस्था बना दिया गया, जिसका मतलब है कि करदाताओं को अपने-आप इसमें शामिल कर लिया जाता है, जब तक कि वे खास तौर पर पुरानी व्यवस्था को न चुनें। इस अध्याय में ''व्यक्तिगत वित्त स्तंभों'' पर एक और खंड है, जिसमें हर स्तंभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है- जैसे आय, खर्चों की योजना, बचत, निवेश और सुरक्षा व जोखिम प्रबंधन। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश को ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाना चाहिए, जो सरकारी पद पाने के लिए आकर्षित न हों, बल्कि जनसेवा से प्रेरित हों। यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भर्ती परीक्षा में केवल यह न परखा जाए कि अभ्यर्थी को कितना ज्ञान है, बल्कि यह भी देखा जाए कि ''वह युवा सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है।'' उन्होंने कहा, ''हमारा मंत्र है... नागरिक देवो भव। यानी हमारे लिए देश का नागरिक किसी देवता से कम नहीं है। हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है।'' मोदी ने कहा कि ''हमें हमेशा दो बातों को कसौटी के रूप में याद रखना चाहिए। पहला- राष्ट्र प्रथम। दूसरा- नागरिक प्रथम।'' उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएएसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ''हमें ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाना चाहिए, जो सरकारी पद से नहीं, बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों। इसलिए यह जरूरी है कि भर्ती परीक्षा में केवल यह न परखा जाए कि अभ्यर्थी को क्या पता है, बल्कि यह भी देखा जाए कि वह युवा सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है।'' मोदी ने इस अवसर पर एक स्मारक सिक्का, डाक टिकट और '100 लैंडमार्क जजमेंट्स : शेपिंग द पॉलिसीज ऑफ यूपीएससी एंड पब्लिक सर्विस कमीशंस इन इंडिया' शीर्षक वाली पुस्तक भी जारी की। बृहस्पतिवार का कार्यक्रम उन सालभर चले समारोहों के समापन के अवसर पर आयोजित किया गया, जो एक अक्टूबर 2025 को शुरू हुए थे। इन समारोहों का आयोजन 1926 में यूपीएससी की हुई स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'फ्लाईदुबई' की इजराइल जा रही उड़ान को सह-पायलट द्वारा कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश को नाकाम करने के लिए बृहस्पतिवार को भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की। जोशी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''कैप्टन स्मित मच्छार ने संकट के महत्वपूर्ण क्षण में असाधारण साहस और उल्लेखनीय संयम का परिचय दिया, जिससे सैकड़ों लोगों की जान बचाने और उस त्रासदी को टालने में मदद मिली, जो विनाशकारी हो सकती थी।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''मैं दुनिया भर के लोगों के साथ कैप्टन मच्छार के शौर्य को सलाम करता हूं और उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करता हूं।'' बुधवार को मच्छार ने 'फ्लाईदुबई' की एक उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की अपने सह-पायलट की कोशिश को नाकाम कर दिया था। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। दुबई से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे। इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में उसका मार्ग सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। सह-पायलट के हमले में गंभीर रूप से घायल मच्छार का सऊदी अरब के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कैप्टन स्मित मच्छार की पत्नी और माता-पिता से फोन पर बात की और उनकी बहादुरी की सराहना की। कैप्टन मच्छार ने 'फ्लाईदुबई' उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की अपने सह-पायलट की कोशिश को नाकाम कर दिया था, जिससे सैकड़ों लोगों की जान बची। पायलट की पत्नी और उनके माता-पिता के साथ फोन पर बातचीत में मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय मिशन घायल पायलट को हर संभव मदद मुहैया करा रहे हैं। पायलट का सऊदी अरब के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फोन पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने पायलट की बहादुरी की तारीफ की, जिसकी वजह से सैकड़ों लोगों की जान बची। इससे पहले, मोदी ने भारतीय पायलट की प्रशंसा करते हुए उन्हें ''नायक'' बताया था और कहा था कि देश को उनकी बहादुरी पर गर्व है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे। इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में उसका मार्ग सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे।
- श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा श्रीनगर में गुरुवार को कश्मीर मैराथन 2026 का आयोजन किया गया। इस मैराथन को एडीजी जम्मू-कश्मीर पुलिस नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौड़ में समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि मैराथन में उम्मीद से ज्यादा भीड़ उमड़ी, खासकर इसलिए क्योंकि यह आयोजन एक वर्किंग डे पर रखा गया था। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के बाहर से भी कई धावक और खेल प्रेमी इस मैराथन में हिस्सा लेने के लिए आए हैं।उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ मैराथन में उम्मीद से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, खासकर यह देखते हुए कि आज काम का दिन है। कई धावक और खेल प्रेमी जम्मू-कश्मीर के बाहर से भी इसमें भाग लेने आए हैं।”एडीजी ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों की भागीदारी उत्साहजनक रही। उन्होंने कहा, “हम देख रहे हैं कि हर वर्ग के लोग-छोटे बच्चे, दिव्यांगजन, महिलाएं और लड़कियां इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जो वास्तव में दिल को छू लेने वाला है।”नीतीश कुमार ने बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने में खेलों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “खेल हमारे बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। हमारे युवाओं की उत्साही भागीदारी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वे कश्मीर में नशे के खतरे को सफलतापूर्वक हरा रहे हैं।” मैराथन में शामिल एक प्रतिभागी ने कहा कि हर युवा को इस एकता मैराथन में भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “हर युवा को इस मैराथन फॉर यूनिटी में भाग लेना चाहिए। यह हमारे लिए बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण है। मैं बारामूला जिले की उरी तहसील से बुधवार रात यहां पहुंचा और गुरुवार सुबह इसमें शामिल हुआ। यह मैराथन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर उन युवाओं के लिए जो नशे की ओर झुक रहे हैं। मेरा उनसे संदेश है कि वे इन गलत गतिविधियों को छोड़ दें और अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।”--
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है। फ्लाईदुबई की फ्लाइट के दौरान पायलट पर हमला हुआ था, लेकिन इसके बावजूद स्मित यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटे। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कैप्टन स्मित मच्छार एक हीरो हैं। बेहद गंभीर खतरे के बीच और खुद बुरी तरह घायल होने के बावजूद उन्होंने जबरदस्त हिम्मत दिखाई और दूसरों की जान बचाने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटे। उनकी बहादुरी की वजह से सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी और एक बड़ी त्रासदी टल गई।”उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, ”भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है। उनके जल्द ठीक होने, फिर से पूरी ताकत हासिल करने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।” वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने असाधारण हिम्मत दिखाई। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की असाधारण बहादुरी को मेरा सलाम।” घायल पायलट को लेकर चिंता जताते हुए नेतन्याहू ने उनके ‘जल्द और पूरी तरह ठीक होने’ की कामना की और उन्हें ‘सच्चा हीरो’ भी बताया।इजरायली प्रधानमंत्री के मुताबिक, घटना के दौरान कैप्टन मच्छार को चाकू मारा गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने हमलावर का मुकाबला किया और उसे रोकने की कोशिश की। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने हमलावर को काबू करने में मदद की। नेतन्याहू ने कहा कि पायलट के इन कदमों से एक बड़ी विमान दुर्घटना टल गई।उन्होंने कहा कि इजरायली नागरिकों और दूसरे देशों के लोगों समेत 174 लोगों की जान बचाई जा सकी। ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड 1073 में पैदा हुए खतरे को टालने में कैप्टन मच्छार की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी तारीफ हो रही है। इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने भी भारतीय पायलट के साथ उन यात्रियों और क्रू मेंबर्स की तारीफ की, जिन्होंने खतरे को खत्म करने में मदद की। अजार ने ‘एक्स’ पर कहा कि वह कैप्टन मच्छार के ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने उन्हें एक अनुभवी और प्रतिभाशाली पायलट बताया।अजार ने लिखा, “दूसरे देशों के लोगों के साथ मैं भी फ्लाई दुबई की उड़ान एफजेड 1073 के अनुभवी और प्रतिभाशाली भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं। वह एक हीरो हैं।” इजरायली राजदूत ने कहा कि पायलट के साथ-साथ इजरायली और अमीराती यात्रियों तथा क्रू मेंबर्स की हिम्मत की वजह से विमान में सवार लोगों की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा, “उनकी हिम्मत और दूसरे इजरायली व अमीराती यात्रियों और क्रू मेंबर्स की बहादुरी ने 180 लोगों की जान बचाई।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर धैर्य और दृढ़ निश्चय का संदेश देते हुए सुभाषित साझा किया गया। पीएम की ओर से बताया गया कि धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति भी अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्। सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीराः॥” साझा किया गया। इसका भावार्थ है कि जिस प्रकार देवताओं ने समुद्र से रत्नों को प्राप्त करने के बाद भी अमृत की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयत्न किया, उसी प्रकार धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति भी अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं।प्रधानमंत्री की ओर से यह श्लोक महर्षि भर्तृहरि के प्रसिद्ध ग्रंथ नीतिशतकम् से साझा किया गया है। इस श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान मूल्यवान रत्नों को पाकर देवता संतुष्ट नहीं हुए, भयंकर विष से डरे नहीं और अमृत मिलने तक वे नहीं रुके; इसी प्रकार धैर्यवान (धीर) लोग अपने निश्चित लक्ष्य को प्राप्त किए बिना कभी पीछे नहीं हटते।पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उससे सबसे पहले कई प्रकार की बहुमूल्य वस्तुएं और रत्न निकले। रास्ते में भयंकर विष हलाहल भी निकला और अंत में अमृत निकला। मंथन में मणियां और सुंदर वस्तुएं मिलीं, जिन्हें देखकर कोई भी सामान्य व्यक्ति लालच में आ सकता था लेकिन देवताओं का लक्ष्य सिर्फ अमृत पाना था। वे छोटे-छोटे लाभों या प्रलोभनों में फंसकर संतुष्ट नहीं हुए।इस श्लोक का भावार्थ है कि जीवन में बड़ी सफलता पाने के लिए प्रलोभनों से ऊपर उठना होगा, संकटों का सामना करना होगा और अपने ध्येय के प्रति अडिग रहना होगा। जब भयानक विष निकला, तो सारा संसार भयभीत हो सकता था लेकिन देवताओं ने उस संकट से घबराकर अपने कदम पीछे नहीं खींचे। जब तक उन्हें अमृत नहीं मिल गया, तब तक उन्होंने अपने प्रयासों को नहीं रोका।
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नयी दिल्ली. केंद्र ने 'मूल्य समर्थन योजना' (पीएसएस) के तहत तीन राज्यों -- उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में चालू खरीफ सत्र में 5.21 लाख टन दलहन और 1.90 लाख टन तिलहन की 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' (एमएसपी) पर खरीद को मंजूरी दी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा लागू पीएसएस अभियान तब शुरू होते हैं जब अधिसूचित जिंस (जिन चीज़ों के लिए एमएसपी तय है) की बाजार कीमत सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से नीचे गिर जाती है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में 5,547.99 करोड़ रुपये मूल्य के दलहन और तिलहन की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी है। उन्होंने बयान में कहा, ''इस फैसले का मकसद किसानों को बाजार की कीमतों में गिरावट से बचाना और उनकी उपज के लिए अच्छा लाभ सुनिश्चित करना है, खासकर दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों के लिए।'' मंज़ूर की गई खरीद योजना के तहत, तीन राज्यों के किसानों को एमएसपी पर मुख्य दलहनों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर खरीद से फायदा होगा। उत्तर प्रदेश में लगभग 4,66,000 टन अरहर (तुअर) और 6,250 टन मूंग की खरीद की जाएगी, जबकि कर्नाटक में 1,15,500 टन सोयाबीन, 13,413 टन सूरजमुखी के बीज और 38,250 टन मूंग की खरीद होगी। तेलंगाना में पीएसएस के तहत 62,000 टन सोयाबीन और 10,766 टन मूंग की एमएसपी पर खरीद की जाएगी।
चौहान ने कहा कि इस फैसले से किसानों को ज़्यादा आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, साथ ही दलहनों और तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी तय केंद्रों पर खरीद की व्यवस्था पारदर्शी रहेगी और किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में समय पर मिल जाएगा।























