- Home
- छत्तीसगढ़
-
*सर्वाधिक पंजीयन कराने वाले जिलों में शामिल हुआ बिलासपुर*
बिलासपुर/स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बिलासपुर जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले में अब तक 106 संस्थानों का बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) के रूप में पंजीयन किया जा चुका है। यह संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ऑनलाइन पोर्टल पर किए गए इस पंजीयन से जिले में कचरे के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन को नई मजबूती मिली है।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ बिलासपुर के निर्माण में सभी संस्थानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने पंजीयन कराने वाले संस्थानों की सराहना करते हुए अन्य पात्र संस्थानों से भी अभियान से जुड़ने और कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करने की अपील की। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप कुमार अग्रवाल ने कहा कि कचरे का पृथक्करण और उसका उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने संस्थानों से गीले और सूखे कचरे को अलग रखने तथा जैविक कचरे के प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया। जिले में शासकीय एवं निजी अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा बड़े आवासीय परिसरों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। नियमानुसार प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा निकलने वाले संस्थानों के लिए बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीयन आवश्यक है।जिला प्रशासन ने शेष पात्र संस्थानों से भी शीघ्र पंजीयन कराने तथा कचरे के पृथक्करण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है। जिला प्रशासन का मानना है कि संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से बिलासपुर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी। -
*प्रति एकड़ सालाना दो लाख रुपये की आमदनी, आधा एकड़ में एप्पल की खेती से भी बनाई अलग पहचान*
बिलासपुर/मस्तुरी विकासखंड के नगर पंचायत मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक खेती अपनाकर यह साबित कर दिया है कि खेती में नवाचार और वैज्ञानिक सोच से बेहतर आय के साथ मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रखी जा सकती है। पिछले लगभग दस वर्षों से वे अपनी खेती पूरी तरह जैविक और प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं। आज उन्हें प्रति एकड़ सालाना लगभग दो लाख रुपये की आमदनी हो रही है। उनकी सफलता से आसपास के किसान भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।जदुनंदन वर्मा बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी सोच के साथ उन्होंने जैविक खेती को अपनाया। वे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत तथा अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर खेती करते हैं। इससे उत्पादन लागत में कमी आई है, फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और मिट्टी की उर्वरता भी लगातार बढ़ी है। उनकी खेती की एक विशेष पहचान आधा एकड़ में एप्पल की खेती भी है। यह नवाचार क्षेत्र के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और यह दर्शाता है कि नई तकनीकों और सही प्रबंधन से विविध फसलों की सफल जैविक खेती की जा सकती है।जदुनंदन वर्मा को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों से भी लाभ मिला है। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से उन्होंने जैविक खाद निर्माण, जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की, जिसका सकारात्मक परिणाम उनकी खेती में देखने को मिल रहा है।उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नियमित रूप से मिल रहा है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग वे जैविक आदानों, कृषि उपकरणों एवं अन्य आवश्यक कृषि कार्यों में करते हैं, जिससे खेती की लागत कम करने और समय पर कृषि कार्य करने में सहायता मिलती है।श्री जदुनंदन वर्मा का मानना है कि जैविक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर भविष्य की नींव है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन, नवाचार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती को लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक व्यवसाय बना सकते हैं। आज वे जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। -
*बच्चों को पिलाएं जाएंगे, दो बूंद जिंदगी की पोलियो खुराक*
बिलासपुर/जिले में 28 जून 2026 को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का आयोजन किया जाएगा। अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई जाएगी। इसके बाद 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगे।जिले में अभियान के सफल संचालन के लिए 1530 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। ये बूथ जिला चिकित्सालय, सिम्स, सभी शासकीय अस्प्ताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित होंगे। जिले के 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 2 लाख 78 हजार 149 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ईंट-भट्ठों, कोयला भट्ठों, निर्माण स्थलों, बस्तियों एवं अन्य क्षेत्रों के लिए विशेष मोबाइल टीमों का गठन किया गया है, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रहे।विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन पड़ोसी देशों में अभी भी पोलियो वायरस की मौजूदगी के कारण सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पल्स पोलियो अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. शुभा गढ़ेवाल ने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे 28 जून को अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को निकटतम पोलियो बूथ पर अवश्य ले जाएं। -
रायपुर/प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah तथा छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता मंत्री Kedar Kashyap के मार्गदर्शन एवं “सहकार से समृद्धि” की परिकल्पना के अनुरूप कलेक्टर रायपुर श्री गौरव सिंह के मार्गदर्शन में रायपुर जिले में 29 जून से 06 जुलाई 2026 तक सहकारी सप्ताह का आयोजन किया जाएगा।
सहकारी सप्ताह का उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, सहकारी संस्थाओं का विस्तार करना तथा आमजन को सहकारी योजनाओं से जोड़ना है। इस अवसर पर जिले की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS), मत्स्य सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), महिला स्व-सहायता समूहों तथा अन्य सहकारी संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।सप्ताह भर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सदस्यता विस्तार अभियान, सहकारिता जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं, स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान, मॉडल पैक्स भ्रमण, जनऔषधि केंद्रों में स्वास्थ्य परीक्षण, सहकारी उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार तथा उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं एवं व्यक्तियों का सम्मान शामिल रहेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।सहकारी सप्ताह के अंतर्गत कृषि मंडपम, रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली संस्थाओं एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं उपलब्धियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।रायपुर जिले के सभी सहकारी संस्थानों, किसानों, महिला समूहों, युवाओं एवं आम नागरिकों से सहकारी सप्ताह के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता कर सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाने तथा “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को सफल बनाने की अपील की गई है। - 0- 297 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित, 164 को मिले मोटराइज्ड ट्राइसायकल0- सहायक उपकरण वितरण समारोह में दिलाई गई नशामुक्ति की शपथबिलासपुर. जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया (एआईसी) एवं एलिम्को के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय तिफरा में दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में सीएसआर मद के अंतर्गत जिले के 297 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण एवं 164 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसायकल का वितरण किया गया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। समारोह के दौरान विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत लोगों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।बतौर मुख्य अतिथि विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 85 लाख 33 हजार रुपये की लागत से 164 हितग्राहियों को मोटराइज्ड ट्राइसायकल सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों से दिव्यांगजन आम लोगों की तरह अपने दैनिक कार्यों का संचालन कर सकेंगे तथा शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसरों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। श्री कौशिक ने कहा कि सीएसआर के माध्यम से भविष्य में भी दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने के प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से आग्रह किया कि जो पात्र हितग्राही अभी तक योजनाओं से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी चिन्हांकित कर लाभान्वित किया जाए, ताकि शत-प्रतिशत पात्र दिव्यांगजनों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके।सहायक उपकरणों से दिव्यांगजनों का जीवन होगा अधिक सुगम : महापौर श्रीमती पूजा विधानीमहापौर श्रीमती पूजा विधानी ने लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं अन्य सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सरल और सुगम बनाएंगे। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों की सहायता से दिव्यांगजन अपनी दैनिक गतिविधियों का संचालन अधिक आत्मनिर्भरता के साथ कर सकेंगे तथा अपने जीवन को नई दिशा दे पाएंगे।प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों को सम्मान की नई पहचान दी : जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशीजिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं अन्य सहायक उपकरणों से दिव्यांगजनों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा वे अधिक आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी सहभागिता निभा सकेंगे। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया।समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक श्री टी.पी. भावे ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं सहायक उपकरण वितरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में किए गए सर्वेक्षण एवं आवश्यकता आकलन के आधार पर पात्र हितग्राहियों का चयन किया गया था। कार्यक्रम में एआईसी की सहायक प्रबंधक श्रीमती निधि मिश्रा एवं श्री ब्रूस वागे, एलिम्को जबलपुर के मैनेजर श्री नितिन माहौर तथा एलिम्को छत्तीसगढ़ के मैनेजर श्री वंशीलाल साकेत ने भी योजना एवं सहायक उपकरणों के उपयोग संबंधी जानकारी दी।समारोह में सभापति श्री हरीश साहू, श्री श्याम कार्तिक वर्मा, एसडीएम श्री मनीष साहू, उपनियंत्रक ब्रेल प्रेस श्रीमती बबीता कमलेश, सहायक सांख्यिकी अधिकारी श्री प्रशांत मोकासे, श्री उत्तमराव माथनकर, श्रीमती सरस्वती रामेश्वरी, सुश्री बीना दीक्षित, श्रीमती राजकुमारी सोनी, श्रीमती सरस्वती जायसवाल, स्नेहलता वैष्णव, अशोक अग्रवाल, लीलाधर भांगे, अनिश मानिकपुरी, सौरभ दीवान, श्रीमती उमा पाण्डेय, श्री प्रशांत द्विवेदी, श्री संजय खाना, श्रीमती ज्याति तिवारी, श्री वैभव गुप्ता, विजय केशकर, श्रीमती रेखा चौहान, कु. नीतू दीवान, श्री राजेश सिंह, श्री मनीष डागौर, उपेन्द्र सिंग, कृष्णा वामशी, मुरली निर्मलकर, आकाश लहसे उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रशांत मोकासे ने किया।सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रशांत मोकासे ने किया।
- बिलासपुर. सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने तथा पीएम राहत योजना एवं ई- डार (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) प्रणाली के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्टोरेट बिलासपुर के मंथन सभाकक्ष में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में संभाग के सभी जिलों के परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नोडल अधिकारी शामिल हुए।कार्यशाला में अधिकारियों को पीएम राहत योजना के नवीन दिशा-निर्देशों, पात्र हितग्राहियों के चयन, राहत राशि के त्वरित भुगतान तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन एवं सत्यापन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही पोर्टल पर दुर्घटना संबंधी प्रकरणों की ऑनलाइन प्रविष्टि, सत्यापन एवं त्रुटि सुधार की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।प्रशिक्षण के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जा सके। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसी भी पात्र हितग्राही को प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण योजना के लाभ से वंचित न होना पड़े तथा सभी प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।कार्यशाला में परिवहन आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता करते हुए योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पीएम राहत योजना का उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों और जरूरतमंदों तक शीघ्र सहायता पहुंचाना है तथा इसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। संभाग स्तरीय इस प्रशिक्षण से सभी जिलों में योजना के संचालन में एकरूपता, पारदर्शिता और गति आने की अपेक्षा की गई।कार्यशाला में श्री एम.आर. आहिरे, डीआईजी यातायात रायपुर, श्री मनोज धुव, उप परिवहन आयुक्त रायपुर, श्री शिवकुमार बनर्जी, अपर कलेक्टर बिलासपुर, श्री अरविंद यादव, एनआईसी, श्री रामगोपाल करियारे, अति पुलिस अधीक्षक (यातायात) बिलासपुर तथा श्री असीम माथुर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी बिलासपुर सहित संभाग के सभी जिलों के जिला परिवहन अधिकारी, यातायात पुलिस विभाग के अधिकारी, थाना प्रभारी, विवेचना अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- 0- महापौर पूजा विधानी ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में जनभागीदारी पर दिया जोर, 350 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया भागबिलासपुर। नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक जनजागरूकता के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, बिलासपुर द्वारा देवकीनंदन सभागृह में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों तथा विभिन्न विभागों के लगभग 350 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महापौर श्रीमती पूजा विधानी उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों का सफल क्रियान्वयन स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने सभी संस्थाओं और नागरिकों से कचरा प्रबंधन के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।कार्यशाला में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की क्षेत्रीय अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, मुख्य रसायनज्ञ श्री सुरेश कुमार धुर्वे, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन विभाग की नोडल अधिकारी श्रीमती हर्षा तिवारी तथा डिविजनल कोऑर्डिनेटर श्री विनीत साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।विशेषज्ञों द्वारा नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। बताया गया कि अब ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण गीला, सूखा, सैनिटरी तथा विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट के रूप में किया जाएगा। साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर की नई परिभाषा, पंजीयन प्रक्रिया, अपशिष्ट प्रसंस्करण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तथा वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यशाला में प्रतिभागियों को नियमों में किए गए नवीन संशोधनों एवं पुराने प्रावधानों से उनके अंतर की जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर मेसर्स राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड द्वारा इको-फ्रेंडली जूट बैग वितरित किए गए तथा उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नए नियमों के पालन की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
- बिलासपुर. श्रम विभाग द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना के तहत इच्छुक विद्यार्थी 3 जुलाई 2026 तक ऑनलाईन आवेदन कर सकते है।योजना के अंतर्गत श्रम विभाग में एक वर्ष पूर्व से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं में प्रवेश दिलाकर 12वीं तक चयनित उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों का चयन कक्षा 5वीं की परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाने वाली प्रावीण्य सूची के अनुसार किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया 3 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी। आवेदन के लिए श्रमिक पंजीयन कार्ड, मूल निवास प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, कक्षा 5वीं की अंकसूची, वर्तमान अध्ययन प्रमाण-पत्र, टीसी तथा स्व-घोषणा पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।आवेदन स्वयं श्रमेव जयते मोबाइल ऐप, विभागीय पोर्टल, मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केंद्र, जिला श्रम कार्यालय अथवा नजदीकी लोक सेवा केंद्र के माध्यम से किए जा सकते हैं। श्रम विभाग ने पात्र पंजीकृत निर्माण श्रमिकों से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है।
- फाइल फोटो
0- वैज्ञानिक खेती और नमी संरक्षण पर दें विशेष ध्यानबिलासपुर. अल-नीनो के संभावित प्रभाव और खरीफ मौसम में वर्षा के विलंबित आगमन की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक खेती एवं उर्वरक प्रबंधन अपनाने की अपील की है। विभाग ने कम पानी की स्थिति में भी फसलों की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तकनीकी उपाय सुझाए हैं।कृषि विभाग के उप संचालक के अनुसार किसानों को सभी फसलों की बुवाई कतार पद्धति से करनी चाहिए। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की समुचित वृद्धि में सहायता मिलती है। साथ ही फसलों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित होती हैं, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।विभाग ने सलाह दी है कि बुवाई के 3 से 5 दिनों के भीतर अनुशंसित मात्रा में अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी का उपयोग किया जाए तथा बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पुनः खरपतवार नियंत्रण किया जाए। इससे मिट्टी में उपलब्ध नमी का बेहतर संरक्षण संभव होगा।बीज उपचार को अनिवार्य बताते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फफूंदनाशी एवं कीटनाशी दवाओं से बीज उपचार करने की सलाह दी है। इसके साथ ही धान में एजोस्पिरिलम तथा दलहनी फसलों में राइजोबियम जैसे जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।उप संचालक ने बताया कि यदि बुवाई के बाद 15 जुलाई तक पर्याप्त अंकुरण नहीं होता है तो पुनर्बुवाई की जाए तथा सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग किया जाए।कम वर्षा अथवा नमी की कमी की स्थिति में नत्रजनयुक्त उर्वरकों के सीमित उपयोग तथा 2 प्रतिशत यूरिया घोल के पर्णीय छिड़काव को अधिक प्रभावी बताया गया है।दलहनी एवं तिलहनी फसलों में डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव से पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता में सुधार होता है। कृषि विभाग ने किसानों को आवश्यकता अनुसार मल्चिंग तकनीक अपनाने की भी सलाह दी है, जिससे मिट्टी में नमी संरक्षित रहती है और सूखे का प्रभाव कम होता है। विभाग ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी समस्या या तकनीकी मार्गदर्शन के लिए निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।कृषि विभाग का कहना है कि समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन और नमी संरक्षण के उपाय अपनाकर किसान कम वर्षा की परिस्थितियों में भी फसलों को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। - 0- पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का दिया संदेश, विद्यार्थियों को पौधरोपण के लिए किया प्रेरितबिलासपुर. पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल ने प्राथमिक शाला तारबाहर के विद्यार्थियों के साथ सीड बॉल निर्माण गतिविधि में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर सीड बॉल तैयार किए तथा उन्हें प्रकृति संरक्षण और पौधरोपण के महत्व की जानकारी दी। इस अवसर पर संयुक्त संचालक श्री अनिल तिवारी भी मौजूद थे।श्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि सीड बॉल प्रकृति को हरित बनाने का एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है। वर्षा ऋतु के दौरान इन सीड बॉल को खुले स्थानों पर डालने से बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकते हैं, जिससे हरित क्षेत्र का विस्तार होता है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल निर्माण की प्रक्रिया में भाग लिया। बच्चों को मिट्टी, गोबर खाद एवं बीजों के मिश्रण से सीड बॉल तैयार करने की विधि बताई गई। इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर संवाद भी किया और उन्हें जल संरक्षण, स्वच्छता तथा जैव विविधता के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही बच्चे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के सशक्त वाहक बनेंगे। विद्यालय स्तर पर इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं तथा संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। विद्यार्थियों ने सीड बॉल निर्माण गतिविधि में रुचिपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
- बालोद. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बालोद विकासखंड के ग्राम पंचायत खैरतराई और जुंगेरा सहित विभिन्न पंचायतों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सीईओ श्री चंद्रवंशी ने शासन की विभिन्न योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों के हितग्राहियों से सीधे बातचीत की। उन्होंने हितग्राहियों को आवास निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा, साथ ही शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने हितग्राहियों की समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए उनके त्वरित निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सीईओ श्री चंद्रवंशी ने जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया कि जिन ग्राम पंचायतों में आवास निर्माण की प्रगति धीमी है, वहां निर्वाचित सरपंच, पंच एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग लें। उन्होंने जनमानस में एक सकारात्मक माहौल तैयार कर हितग्राहियों से समन्वय स्थापित करने और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।इसी क्रम में जिला पंचायत सीईओ ने विभिन्न ग्रामों में आयोजित ग्राम सभाओं में उपस्थित होकर स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, वी.बी.जी. रामजी योजना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत ’आवास प्लस 2.0’ के कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम-जनरेटेड प्रतीक्षा सूची के सार्वजनिक वाचन, अवलोकन एवं सत्यापन प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपस्थित अधिकारियों, पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों को शासन द्वारा निर्धारित 12 मापदंडों के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीईओ श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए अपील की कि वे आवास प्लस 2.0 की प्रतीक्षा सूची का भली-भांति अवलोकन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतीक्षा सूची पूरी तरह सिस्टम आधारित एवं एआई जनरेटेड है। सूची में नाम जोड़ने, काटने, अवलोकन या सत्यापन में यदि किसी भी स्तर पर राशि की मांग या अवैध वसूली की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- 0- ऑनलाईन दावा आपत्ति की अंतिम तिथि 03 जुलाईबालोद. गुण्डरदेही विकासखण्ड के आंगनबाड़ी परसतराई केन्द्र क्रमांक 02 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति हेतु ऑनलाईन आवेदन उपरांत ऑनलाईन दावा आपत्ति 03 जुलाई 2026 तक आमंत्रित की गई है। एकीकृत बाल विकास परियोजना गुण्डरदेही की परियोजना अधिकारी ने बताया कि गुण्डरदेही विकासखण्ड के आंगनबाड़ी परसतराई केन्द्र क्रमांक 02 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति हेतु आॅनलाइन आवेदन 12 मई से 27 मई 2026 तक आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदन पत्रों के मूल्यांकन उपरांत पत्रक तैयार कर दावा आपत्ति 03 जुलाई 2026 तक ऑनलाईन पोर्टल https://aww.e-bharti.in/ के माध्यम से आमंत्रित की गई है।
- बालोद. अपर कलेक्टर ने आदेश जारी कर राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 06 क्रमांक 04 के तहत् जिले में प्राकृतिक आपदा नैसर्गिक विपत्तियों के कारण जिले के मृत व्यक्ति के परिवार (निकटतम वारिस) को आर्थिक सहायता अनुदान दिए जाने के प्रावधानों अनुसार 04 लाख रूपए आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया है। अपर कलेक्टर ने संबंधित तहसीलदार को निर्देशित किया है कि वे स्वीकृत राशि का आहरण एवं भुगतान मृतकांे के निकटतम वारिस को करने के निर्देश दिए हैं। जारी आदेश में डौण्डी तहसील के मृतक सविता रावटे के पति श्री योगेश कुमार ग्राम कुसुमकसा को 04 लाख रूपये स्वीकृत किया गया है।
- बालोद. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में जनकल्याणकारी योजनाओं और मैदानी स्तर पर उनके बेहतर क्रियान्वयन से वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव आ रहा है। जिले के डौण्डी विकासखण्ड के सुदूर वनांचल में स्थित ग्राम नर्राटोला की निवासी बिंदा बाई को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अपना स्वयं का पक्का मकान मिल गया है। कभी कच्चे और जर्जर मकान में रहकर कठिनाइयों का सामना करने वाली बिंदा बाई आज अपने नए पक्के घर में बेहद खुश और सुरक्षित महसूस कर रही हैं।बिंदा बाई बताती हैं कि पहले वे एक कच्चे घर में रहने को मजबूर थीं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकना, सीलन और जहरीले जीव-जंतुओं का डर हमेशा बना रहता था। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पक्का मकान बनाना एक सपने जैसा था। इस बीच उन्होंने ग्राम पंचायत के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवेदन किया। आवेदन की मंजूरी मिलने के बाद, मुझे प्रशासन की ओर से समय-समय पर मकान की किस्तें मिलती रहीं। बिना किसी रुकावट के राशि मिलने से मैंने अपने सपनों के आशियाने को समय पर पूरा करा लिया। आवास निर्माण के दौरान बिंदा बाई को मनरेगा के तहत किए गए कार्य की मजदूरी राशि का भुगतान भी समय पर हुआ। इससे उन्हें निर्माण कार्य के दौरान आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ा और वे पूरे उत्साह के साथ अपने घर को पूरा कराने में जुट सकीं।नया पक्का घर मिलने की खुशी तब दोगुनी हो गई, जब सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ भी सीधे उनके घर तक पहुँचा। बिंदा बाई ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि नए आवास के साथ-साथ जल जीवन मिशन के तहत घर में ही नल कनेक्शन मिल गया है, जिससे अब प्रतिदिन सुबह और शाम पीने का साफ पानी घर पर ही मिल जाता है, पानी के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ता। उज्ज्वला योजना के तहत रसोई में गैस कनेक्शन और चूल्हा मिला है। महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर महीने नियमित रूप से सहायता राशि प्राप्त हो रही है।पक्का मकान और बुनियादी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलने से उत्साहित बिंदा बाई ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की इन योजनाओं ने न सिर्फ उनके सिर पर पक्की छत दी है, बल्कि उनका जीवन स्तर भी ऊंचा उठाया है। वनांचल क्षेत्र में इस तरह का सकारात्मक बदलाव यह साबित करता है कि विकास की किरणें अब अंतिम छोर तक पहुँच रही हैं।
- 0- महाराष्ट्र मंडल के प्ले स्कूल में तेजी से हो रहे नौनिहालों के प्रवेश से और भी महिला समाजसेवियों की पड़ सकती है जरूरतरायपुर। नगर पालिक निगम की ओर से निर्मित और महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित हाइटेक आंगनबाड़ी (प्ले स्कूल) के आगामी कार्यक्रमों व अभियान को मूर्तरूप देने के लिए शुक्रवार को अति आवश्यक बैठक आहूत की गई है। बैठक में प्ले स्कूल में नि:स्वार्थ भाव से काम अथवा सहयोग करने वालों सहित मंडल के टाटीबंध और कोटा केंद्र के सभासदों को बैठक में आमंत्रित किया गया है।हाइटेक आंगनबाड़ी की प्रभारी डॉ. शुचिता शचींद्र देखमुख ने बताया कि 20 जून को बड़े समारोह में स्थानीय विधायक राजेश मूणत के हाथों से उद्घाटित प्ले स्कूल में प्रतिदिन बच्चों का प्रवेश जारी है और जल्दी ही स्थिति क्षमता से अधिक नौनिहालों के प्रवेश की स्थिति हो सकती है। ऐसी स्थिति में आसपास रहने वाली समाजसेवी महिला कार्यकर्ताओं की प्ले स्कूल में आवश्यकता हो सकती है। इसी संदर्भ में होने वाली बैठक में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर और सह प्रभारी नवीन देशमुख बैठक में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। साथ ही प्ले स्कूल की भावी योजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।--
- बालोद. संयुक्त जिला कार्यालय में आज कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, अपर कलेक्टर एवं प्रभारी जिला खेल अधिकारी श्री चंद्रकांत कौशिक , डिप्टी कलेक्टर एवं सहायक जिला खेल अधिकारी श्रीमती प्राची ठाकुर ने वेटलिफ्टिंग में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले 02 खिलाड़ियों को मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र, श्रीफल एवं साल के साथ सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया।उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ में आयोजित ऑल इंडिया सिविल सर्विस 2026 में बालोद जिले की वेटलिफ्टिंग महिला खिलाड़ी अनीता शिंदे ने 86 किग्रा वेट केटेगरी में स्वर्ण पदक जीता एवं उनके द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ी कुमारी विनीता ठाकुर ने रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में वेंटलिफ्टिंग में 77 किग्रा वेट केटेगरी में स्वर्ण पदक जीतकर बालोद जिले का नाम रोशन किया है।
- 0- महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के अभियान को यथावत लागू करते हुए गणपति वंदना व हनुमान चालीसा पाठ से हुई बैठक की शुरुआतरायपुर। महाराष्ट्र मंडल की सभी 17 महिला केंद्रों में मंडल के सेवाभावी कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी रहता है। इसी कड़ी में मंडल के शंकर नगर महिला केंद्र की महिलाओं ने 23 जून को शंकर नगर बाल वाचनालय में बैठक आहूत कर मंडल के सेवाभावी कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा की गई।केंद्र की संयोजिका आयुषी विठालकर ने बताया कि वर्ष 2026-27 की पहली बैठक की शुरुआत गणपति वंदना और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ की गई। इस दौरान आने वाले महीनों में होने वाले मंडल के कार्यक्रमों में सहभागिता और केंद्र द्वारा किए जाने वाले सेवाभावी कार्यों पर चर्चा की गई। अंत में सभी ने उत्साह के साथ हाउजी खेला और महाराष्ट्र मंडल मेस के स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया। बैठक में आयुषी विठालकर, अनुराधा शिवलकर, निर्मला पिंपले, अदिति जोशी, मधुरा भागवत, सुरेखा पाटिल, श्रद्धा विठालकर, पुष्पा जावलेकर, अर्चना दशपुत्रे, शुभदा गिजरे, सुजाता देशपांडे, कविता लांजेवार, वैशाली निमजे, रैना पुराणिक, कंचन केलकर, लीना मुजुमदार, मंजूषा कावड़कर, योगिनी वरेटवार सहित अनेक महिला सभासद उपस्थित रहीं।
-
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा मकानहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए गुरूवार को निगम सभागार में लॉटरी पद्धति के माध्यम से 55 हितग्राहियों को आवास आबंटित किए गए। सभी आवास मोर मकान-मोर आस एवं मोर मकान-मोर चिन्हारी घटक से निर्मित है। आवास आबंटन कार्यक्रम में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन, निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा एवं पार्षद हरिओम तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
निगम सभागार में लॉटरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई, जिसमें विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के तहत कुल 55 मकानहीन परिवारों को आवास आबंटित किए गए। इनमें ग्रीन वैली खम्हरिया में 20, माइल स्टोन स्कूल के पीछे स्थित आवासों में 17, रजत बिल्डर्स शांति नगर में 3, आम्रपाली हाउसिंग बोर्ड फेस-01 में 2 तथा सूर्य विहार के पीछे स्थित आवासीय परिसर में 13 हितग्राहियों को आवास प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दौरान हितग्राहियों में उत्साह का माहौल रहा। निगम प्रशासन ने बताया कि आवास आबंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से की गई है, जिससे पात्र परिवारों को स्थायी आवास की सुविधा मिल सके। इस अवसर पर आवास प्रभारी विद्याधर देवांगन, सीएलटीसी किरण चतुर्वेदी, आवास विभाग की नम्रता ठाकुर, जागेश्वर साहू, थलेश्वर जोशी, जी मोहन राव एवं नूतन साहू सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। निगम प्रशासन ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। - भिलाईनगर। हाल ही में लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनीमेशन एवं कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 विद्यार्थियों की मृत्यु की घटना के बाद नगर पालिक निगम भिलाई ने शहर के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर निगम की टीम ने भिलाई के एजुकेशन हब कहे जाने वाले सिविक सेंटर स्थित विभिन्न कोचिंग सेंटरों में दबिश देकर सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान निगम अधिकारियों ने कोचिंग संस्थानों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास द्वार, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य सुरक्षा सुविधाओं सहित मापदण्ड का जायजा लिया। टीम द्वारा संचालकों को निर्धारित प्रपत्र (फार्म) वितरित किए गए हैं, जिसमें संस्थानों की सुरक्षा संबंधी पूरी जानकारी भरकर 20 दिनों के भीतर निगम को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान कुछ कोचिंग संस्थानों में आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं पाई गईं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए निगम ने ऐसे संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें सीलबंद कर दिया। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।आयुक्त ने कहा कि शहर में संचालित सभी कोचिंग एवं शिक्षण संस्थानों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही विद्यार्थियों के जीवन को खतरे में डाल सकती है, इसलिए सभी संस्थान समय सीमा के भीतर सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएं तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।
- दुर्ग. जिले के धमधा तहसील अंतर्गत ग्राम माटरा में राजस्व प्रशासन द्वारा त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करते हुए भूमि संबंधी वास्तविक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है। आवेदक पंचराम साहू पिता स्व. कार्तिक राम साहू, की ग्राम माटरा (पटवारी हल्का नंबर 24) स्थित खसरा नंबर 575, कुल रकबा 0.35 हेक्टेयर भूमि का राजस्व निरीक्षक और पटवारी की टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। जांच प्रतिवेदन में यह पुष्टि हुई है कि उक्त क्रयशुदा भूमि की चतुर सीमा, पंजीकृत बैनामा और पटवारी नक्शे के अनुसार धरातल पर पूरी तरह सुसंगत एवं त्रुटिहीन है।प्रशासनिक जांच के अनुसार, संबंधित भूमि के उत्तर दिशा में खसरा नंबर 572 और दक्षिण दिशा में बरसाती नाला (576) स्थित है, जो शासकीय राजस्व अभिलेखों के सर्वथा अनुरूप है। इसके साथ ही, जल निकासी के लिए बनाई गई नाली भी आवेदक की स्वयं की भूमि की सीमा के भीतर निर्मित पाई गई है और मौके पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या विसंगति नहीं है। राजस्व विभाग की इस प्रामाणिक और समयबद्ध स्थलीय जांच से स्पष्ट है कि क्षेत्र में भूमि संबंधी सभी रिकॉर्ड पूर्णतः व्यवस्थित हैं, जिससे वास्तविक सीमाओं को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।
- 0- आपदा प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नायकों की पहचान और नामांकन को मिलेगा बढ़ावादुर्ग. आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दिए जाने वाले ’सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार’ के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में भारत सरकार के गृह सचिव श्री गोविंद मोहन द्वारा राज्य में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के दिशा-निर्देश दिए गए है। उल्लेखनीय है कि यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रतिवर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर प्रदान किया जाता है। पुरस्कार दो श्रेणियों - व्यक्तिगत (प्रशस्ति पत्र एवं पदक) तथा संस्थागत (प्रशस्ति पत्र एवं पट्टिका) में दिया जाता है, जिसके नामांकन पूरे वर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से खुले रहते हैं।इसमें स्व-नामांकन और तृतीय पक्ष नामांकन दोनों की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और तीव्र शहरीकरण के कारण बाढ़, सूखा, लू (हीट वेव), शीत लहर, बिजली (लाइटनिंग), शहरी बाढ़ और औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी आपदाओं के जोखिम लगातार जटिल होती जा रही हैं। इन चुनौतियों के बीच जन-जीवन, आजीविका और अवसंरचना की सुरक्षा के लिए राज्य सरकारों तथा जिला प्रशासनों द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण, शमन और तैयारियों के क्षेत्र में सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने आग्रह किया है कि पुरस्कार से संबंधित जानकारी को राज्य के सभी विभागों, जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों तक प्रसारित किया जाए। साथ ही, आपदा प्रबंधन, पूर्व चेतावनी प्रसार, जलवायु अनुकूलन, आपदा-रोधी अवसंरचना और सामुदायिक आपदा जोखिम न्यूनीकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नायकों की पहचान कर उनके नामांकन को प्रोत्साहित किया जाए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के आपदा लचीलेपन को मजबूत पहचान मिल सके।
- 0- टोल फ्री नंबर 1070 और 112 भी जारीदुर्ग. बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, आकाशीय बिजली गिरने, वनीय आग तथा भीषण लू (ताप-घात) से नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष तकनीक आधारित जीवन रक्षक पहल की गई है। भारत सरकार द्वारा आम नागरिकों को आपदाओं की समय पूर्व सटीक चेतावनी और अलर्ट देने के लिए तीन महत्वपूर्ण मोबाइल ऐप्स-’सचेत’, ’दामिनी’ और ’मेघदूत’ विकसित किए गए हैं। इन ऐप्स को नागरिक अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर से आसानी से डाउनलोड कर मौसम के खतरों की एडवांस जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, किसी भी आपातकालीन स्थिति या आपदा के समय त्वरित सहायता और बचाव के लिए शासन द्वारा आपदा टोल फ्री नंबर 1070 और 112 भी जारी किया गया है, जिस पर कॉल करके तुरंत मदद पाई जा सकती है।इस महत्वपूर्ण तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस, नगर सेना, मैदानी स्तर के शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों, पटवारियों, सरपंचों, सचिवों, शिक्षकों और आशा कार्यकर्ताओं को भी इन ऐप्स के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वज्रपात (बिजली गिरने) की सटीक लोकेशन बताने वाले ’दामिनी’ ऐप, मौसम व खेती की जानकारी देने वाले ’मेघदूत’ और आपदा अलर्ट देने वाले ’सचेत’ ऐप के माध्यम से नागरिक समय रहते सुरक्षित कदम उठा सकते हैं। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं की और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए इन ऐप्स को अपने मोबाइल में अवश्य डाउनलोड करें और टोल फ्री नंबरों की जानकारी अपने पास रखें।
- दुर्ग. छत्तीसगढ़ शासन श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों हेतु अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना प्रारंभ किया गया है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुंणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए है। योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीयन निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में पूर्णतः निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि 3 जुलाई निर्धारित की गई है।सहायक श्रमायुक्त कार्यालय दुर्ग से मिली जानकारी अनुसार योजना का लाभ ऐसे निर्माण श्रमिकों की प्रथम दो संतानों को मिलेगा जिनका मंडल मे कम से कम एक वर्ष पूर्व से वैध पंजीयन हो तथा छात्र-छात्रा वर्तमान सत्र में कक्षा 6वीं में प्रवेश ले रहें हों। पात्र विद्याथियों का चयन शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया जाएगा चयनित विद्यार्थियों को आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा के साथ आवास भोजन अध्ययन सामग्री और बेहतर शैक्षणिक वातावरण की सुविधा मिलेगी। इससे श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतिस्पर्धी माहौल प्राप्त होगा। आवेदन श्रमेव जयते ऐप एवं श्रम विभाग के वेबसाईट के माध्यम से ऑनलाइन किए जा सकते हैं। इसके अलावा श्रम संसाधन केन्द्र, चॉइस सेंटर में ऑनलाईन आवेदन जमा किए जा सकते है। आवेदन के लिए श्रमिक पंजीयन कार्ड, आधार कार्ड एवं अन्य दस्तावेज अनिवार्य है।
- 0- अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग का जागरूकता अभियानदुर्ग. नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के खिलाफ में आज अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में 25 जून को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा श्री महावीर जैन पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के पांच न्यायाधीश श्रीमती श्वेता पटेल, श्री रवि कुमार कश्यप, श्रीमती अंजली सिंह, श्रीमती महिमा शर्मा एवं सुश्री आरती ध्रुव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सुनाली पातरा सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।कार्यक्रम के प्रारंभ में न्यायाधीशों का विद्यालय परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात न्यायाधीशों ने विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करते हुए उन्हें कानून, न्याय व्यवस्था एवं नागरिक कर्तव्यों के संबंध में सरल एवं सहज भाषा में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।शिविर के दौरान विद्यार्थियों को NDPS अधिनियम (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। न्यायाधीशों ने नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा एवं भविष्य को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी देते हुए बिना हेलमेट एवं बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन न चलाने की समझाइश दी गई। साथ ही मोबाइल एवं इंटरनेट के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक एवं ओटीपी साझा करने के खतरों के बारे में भी जागरूक किया गया तथा साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय बताए गए।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका न्यायाधीशों ने अत्यंत सरल, स्पष्ट एवं प्रेरणादायक ढंग से उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। अंत में विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार तथा कानून के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया। यह विधिक जागरूकता शिविर विद्यार्थियों में कानूनी समझ, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं अनुशासन की भावना विकसित करने की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं सफल सिद्ध हुआ।
- 0- खरीफ 2026 से धान के स्थान पर अन्य फसल लगाने वाले कृषकों को दी जाएगी 15 हजार रूपए की राशि आदान सहायता राशिदुर्ग. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक बदलाव लाने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना के क्रियान्वयन हेतु नवीन दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार विगत खरीफ में धान की फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया हो, उन्हें एग्रीस्टेक पर पंजीयन तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राशि 15,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से तथा पूर्व से ही खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर पूर्ववत् राशि 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।जिन क्षेत्रों में रकबे की पुष्टि हेतु डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा उपलब्ध नहीं है, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति पर गिरदावरी से सत्यापित रकबे पर आदान सहायता राशि दी जाएगी। योजनांर्गत आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) के माध्यम से की जाएगी।उप संचालक कृषि संदीप कुमार भोई द्वारा बताया गया है कि नए नियम खरीफ वर्ष 2026 से प्रभावी रूप से लागू होंगे। शासन का यह कदम राज्य में पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर अन्य लाभकारी खरीफ फसलों को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत निर्णय है। जिले का अधिकांश कृषि क्षेत्र वर्षा आधारित होने के कारण मौसम की अनिश्चितता और कृषि आदान लागत में लगातार हो रही वृद्धि से किसानों की आय प्रभावित होती रही है। इसके फलस्वरूप कई बार किसान उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि यांत्रिकीकरण जैसी आवश्यक तकनीकों में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते हैं। इसी समस्या को दूर करने और किसानों की काश्त लागत को कम करने के लिए राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2023-24 से कृषक उन्नति योजना संचालित की जा रही है, जिसके स्वरूप में अब फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक परिवर्तन किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य फसल आच्छादन, उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि करना और कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में पुर्नस्थापित करना है। साथ ही जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना (पीएम-आशा योजना) के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन फसलेें अरहर 8000 रुपये प्रति क्वि., उड़द 7800 रुपये प्रति क्वि., मूंग 8768 रुपये प्रति क्वि., सोयाबीन 5328 रुपये प्रति क्वि., मूंगफल्ली 7263 रुपये प्रति क्वि. की दर से खरीदी की जाती है।कृषि विभाग किसान भाईयो से अपील करता है कि वर्तमान मौसमी परिस्थिति को देखते हुए धान के बदले अन्य वैकल्पिक फसल दलहन, तिलहन और पोषक अनाज (मिलेट्स) जैसी फसलों को अपनाएं। इससे न केवल आपकी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी बल्कि आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल विविधीकरण के माध्यम से आपकी आय में भी वृद्धि होगी। योजना का लाभ सभी छोटे, सीमांत एवं बड़े किसानों को मिलेगा, बशर्ते उनकी भूमि का वैध रिकॉर्ड दर्ज हो। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज बी-1, पी-2, डी.बी.टी सक्रिय बैंक खाता पासबुक व चालू मोबाइल नंबर आवश्यक होंगा। किसान फसल प्रविष्टि में संशोधन या एकीकृत पोर्टल में पंजीयन संबंधी जानकारी के लिए अपने निकटतम प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति एवं ग्रामीण कृषि विस्तार से तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन हेतु निकटतम लोक सेवा केन्द्र, से संपर्क कर सकते हैं।























