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लेह. लद्दाख मैराथन की पुरस्कार राशि एक करोड़ रुपये कर दी गई है। आयोजकों ने शनिवार को यह घोषणा की। लद्दाख मैराथन 10 से 13 सितंबर तक आयोजित की जाएगी और इसमें लगभग 10000 धावकों के भाग लेने की संभावना है। आयोजकों ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा,, ''इस वर्ष इस प्रतियोगिता में भारत के 28 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों के धावक भाग लेंगे। इसके अलावा दुनिया भर के धावक भी इसमें अपने-अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।'' केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रशासनिक सचिव संजीत रोड्रिग्स ने कहा, ''केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल ने पुरस्कार राशि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने का फैसला किया है जो इस प्रतियोगिता की वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत करने, खेल पर्यटन को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के लिए अधिक अवसर पैदा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'' इस प्रतियोगिता में फुल मैराथन, हाफ मैराथन, 11.2 किमी दौड़ और पांच किमी की दौड़ 'रन फॉर फन' के साथ-साथ दुनिया की दो सबसे चुनौतीपूर्ण लंबी दूरी की दौड़ 72 किमी खारदुंग ला चैलेंज और 122 किमी सिल्क रूट अल्ट्रा भी शामिल हैं।
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यूजीन. आशीष यादव ने विश्व एथलेटिक्स अंडर 20 चैम्पियनशिप में पुरूषों के भालाफेंक में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला जबकि राष्ट्रीय सीनियर रिकॉर्डधारी पूजा सिंह ने महिलाओं की ऊंची कूद के फाइनल में जगह बना ली । यादव ने तीसरे दौर में 74 . 09 मीटर का थ्रो फेंककर रजत पदक हासिल किया । वहीं भारत के टी धरणीधरन 72 . 35 मीटर के थ्रो के साथ छठे स्थान पर रहे । यादव अपने सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन से 40 सेमी पीछे रह गए । उन्होंने मार्च में पटियाला में इंडियन ओपन थ्रो प्रतिस्पर्धा में 74 . 49 मीटर का थ्रो फेंका था । 19 वर्ष के यादव दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा के बाद इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए । चोपड़ा ने 2016 में पोलैंड में 86 . 48 मीटर के विश्व जूनियर रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था । यह रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है । दक्षिण अफ्रीका के जान हेंड्रिक हेमैंस ने 80 . 50 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता । वहीं डोमिनिका के एडिसन जेम्स को कांस्य पदक मिला जिन्होंने 73 . 89 मीटर का थ्रो फेंका था । एक दिन पहले पुरूषों की 400 मीटर हीट के पहले दौर में अंडर 20 राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाले मोहम्मद अशफाक फाइनल में 46 . 20 सेकंड का समय निकालकर आठवें स्थान पर रहे । अमेरिका के जेडेन डेलोन ने 44 . 47 सेकंड के साथ स्वर्ण और उनके हमवतन किंसी विल्सन ने 44 . 62 मीटर के साथ रजत पदक जीता । दक्षिण अफ्रीका के लीन्डर्ट के को कांस्य पदक मिला । महिलाओं की ऊंची कूद में पूजा ने 1 . 79 मीटर के साथ फाइनल में जगह बनाई । दोनों क्वालीफिकेशन ग्रुप से 1.79 मीटर की बाधा पार करने वाले को फाइनल में जगह मिली । पुरूषों की लंबी कूद में शाहनवाज खान और जितिन अर्जुन ने फाइनल में जगह बना ली। शाहनवाज क्वालीफिकेशन ग्रुप ए में 7.79 मीटर की कूद के साथ चौथे और कुल पांचवें स्थान पर रहे जबकि जितिन 7 . 57 मीटर की कूद लगाकर 12वें स्थान पर रहे । महिलाओं की भालाफेंक स्पर्धा में पूनम अपने क्वालीफिकेशन ग्रुप में आठवें और कुल 13वें स्थान के साथ फाइनल में जगह नहीं बना सकी .
- नयी दिल्ली। आयुष शेट्टी के कोच सागर चोपड़ा का मानना है कि विश्व चैंपियनशिप के पहले दौर में जब यह युवा शटलर चीन के शी यु ची का सामना करेगा तो दबाव विश्व में नंबर एक खिलाड़ी पर होगा और इसलिए यह मैच भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में जा सकता है। चोपड़ा का मानना है कि शी यु ची इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं है और आयुष को इसका फायदा मिल सकता है। शेट्टी ने इस साल की शुरुआत में बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में उपविजेता बनकर बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई और वह इस समय अच्छी लय में हैं। चोपड़ा ने कहा, ''अगर आप देखें तो यह शायद सबसे मुश्किल ड्रॉ में से एक है जो किसी को भी मिल सकता है। लेकिन शी यु ची के खिलाफ खेलने से आयुष के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''दरअसल, वह भारत में और हमारे घरेलू मैदान पर खेल रहा है, इसलिए दबाव शी यु ची पर ही रहेगा। शी यु ची कुछ महीने पहले की तरह अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं दिख रहे हैं। वहीं आयुष हर टूर्नामेंट के साथ बेहतर होते जा रहे हैं। वह काफी अच्छा खेल रहे हैं।''
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नयी दिल्ली. दो बार के ओलंपिक पदक विजेता भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप के सह-मालिक बन गए हैं। चोपड़ा पिछले दो सत्र से बच्चों से जुड़े इस कार्यक्रम के ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम कर चुके हैं। यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप जमीनी स्तर की उन पहल में से एक है, जिसका उद्देश्य बच्चों को मनोरंजक, समावेशी और सुलभ प्रतियोगिताओं के माध्यम से खेलों से परिचित कराना है। इसने पांच शहरों के 2,500 से अधिक स्कूलों में 250,000 से अधिक बच्चों को इस पहल से जोड़ा है। चोपड़ा ने विज्ञप्ति में कहा, ''पिछले दो सत्र में मैंने देखा है कि यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप ने विभिन्न स्कूलों के बच्चों पर कितना प्रभाव डाला है। प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलना चाहिए। हमारा लक्ष्य दस लाख बच्चों तक पहुंचना और युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करना है।
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कोलंबो. भारतीय कप्तान शुभमन गिल शुक्रवार को यहां एसएलसी इलेवन के खिलाफ अभ्यास क्रिकेट मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरेंगे क्योंकि अभ्यास के दौरान उनकी दाहिनी उंगली में चोट लग गई है। गिल को बृहस्पतिवार को यहां अभ्यास सत्र के दौरान चोट लग गई थी। उनकी अनुपस्थिति में केएल राहुल टीम की कप्तानी कर रहे हैं। एसएलसी इलेवन ने इस तीन दिवसीय अभ्यास मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक्स पर पोस्ट किया, ''कप्तान शुभमन गिल की दाहिनी अनामिका उंगली में बृहस्पतिवार को भारत के अभ्यास सत्र के दौरान चोट लग गई। एहतियात के तौर पर वह एसएलसी इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरेंगे।'' बोर्ड ने कहा, ''बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी स्थिति पर नजर रख रही है। गिल की अनुपस्थिति में केएल राहुल टीम की कप्तानी करेंगे।'' भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गॉल में दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला का पहला मैच खेला जाएगा। दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के इसी मैदान पर होगा।
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नई दिल्ली। हॉकी इंडिया ने शुक्रवार को एएचएफ जूनियर एशिया कप 2026 के लिए भारतीय पुरुष टीम का ऐलान कर दिया है। चीन के मोकी में 30 अगस्त से 13 सितंबर तक होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए 18 खिलाड़ियों का चुनाव किया गया है, जबकि दो वैकल्पिक प्लेयर्स को भी टीम में रखा गया है। टीम की कमान अनमोल एक्का के हाथों में सौंपी गई है।
डिफेंडर अनमोल एक्का की कप्तानी वाली यह टीम अभी बेंगलुरु में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) सेंटर में नए कोच फ्रेडरिक सोयेज की देखरेख में ट्रेनिंग कर रही है। टूर्नामेंट की तैयारी के हिस्से के तौर पर टीम ने हाल ही में बेल्जियम का एक शानदार एक्सपोजर दौरा पूरा किया, जहां टीम की भिड़ंत मजबूत इंटरनेशनल टीमों से हुई थी। इस दौरे से खिलाड़ियों को मैच का कीमती अनुभव और अहम सीख मिली, जिससे टीम अपनी प्रगति का आकलन कर सकी, अपने कॉम्बिनेशन को बेहतर बना सकी और एएचएफ जूनियर एशिया कप से पहले अपनी तैयारियों को और मजबूत कर सकी।टीम बेंगलुरु में साई सेंटर पर मलेशियाई अंडर 21 टीम के साथ फ्रेंडली मैच खेलकर और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी अनुभव हासिल कर रही है। टीम के चयन पर बात करते हुए कोच सोयेज ने कहा, “हम जूनियर एशिया कप के लिए चुनी गई टीम के संतुलन और गहराई से खुश हैं। खिलाड़ियों ने पिछले कुछ महीनों में कड़ी मेहनत की है और प्रतिबद्धता, अनुशासन और सुधार की जबरदस्त इच्छाशक्ति दिखाई है। चयन लगातार अच्छे प्रदर्शन, रवैये और दबाव में हमारे गेम प्लान को लागू करने की क्षमता के आधार पर किया गया है।”एएचएफ जूनियर एशिया कप एशिया की प्रमुख जूनियर हॉकी प्रतियोगिताओं में से एक है, जो महाद्वीप की शीर्ष उभरती टीमों को एक बेहद प्रतिस्पर्धी माहौल में एक साथ लाती है। यह टूर्नामेंट भारत की युवा टीम को एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ खुद को परखने और अपनी मजबूत छाप छोड़ने का मौका देगा।सोयेज ने आगे कहा, “यह एक बहुत ही प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट होगा और हम सभी टीमों का सम्मान करते हैं। हमारा ध्यान अपने स्ट्रक्चर पर कायम रहते हुए अनुशासित और अटैकिंग हॉकी खेलने पर होगा।” खिलाड़ियों के विकास में टूर्नामेंट के महत्व पर जोर देते हुए कोच ने कहा, “यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के विकास की दिशा में भी एक अहम कदम है, और हमें भरोसा है कि इस ग्रुप में जबरदस्त प्रदर्शन करने और देश का नाम रोशन करने की क्षमता है।”जूनियर एशिया कप के लिए भारतीय पुरुष टीम:गोलकीपर: विवेक लाकड़ा, कुणाल तेवतियाडिफेंडर: अनमोल एक्का (कप्तान), रोहित कुल्लू, चिराग, रविंदर, आशु मौर्य, संजीत टिर्की, सुखविंदरमिडफील्डर: अड्रोहित एक्का, हरपाल, जीतपाल, मनमीत सिंह रायफॉरवर्ड: अजीत यादव, प्रभदीप सिंह, गुरसेवक सिंह, आर्यन जेस, लोवेनूर सिंहवैकल्पिक खिलाड़ी: अर्जुन संतोष हरगुडे, रितिक लाकड़ा। -
नयी दिल्ली. फिटनेस से जुड़ी परेशानियों से करीब एक साल तक जूझने के बाद भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने कहा कि पिछले 10 महीने उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे और उन्होंने ऐसे दौर का सामना किया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता 28 साल के इस खिलाड़ी ने पिछले सप्ताह राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर अपने पदकों के संग्रह में एक और उपलब्धि जोड़ी। वह मुख्य रूप से जांघ की मांसपेशियों की चोट और कुछ अन्य शारीरिक परेशानियों से प्रभावित रहे थे। चोट के कारण नीरज का सत्र देर से शुरू हुआ, लेकिन उन्होंने ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 85.83 मीटर के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ अपनी लय हासिल कर ली। नीरज ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर राष्ट्रमंडल खेलों के प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, ''कुछ भाले लंबी दूरी तय करते हैं और कुछ पल पूरी यात्रा का भार अपने साथ लेकर आते हैं। पिछले 10 महीने ने मेरी ऐसी परीक्षा ली, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।'' उन्होंने कहा, ''कई चोटों से उबरना, अपने शरीर को दोबारा मजबूत बनाना, फिर से लय हासिल करना और उस समय धैर्य रखना जब मैं केवल प्रतियोगिता में उतरना चाहता था। मैं हर दिन अभ्यास कर रहा था, लेकिन यह भी नहीं पता था कि इस साल मुझे खेलने का मौका मिलेगा या नहीं।'' नीरज ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन चोट के कारण 2022 के सत्र में हिस्सा नहीं ले सके थे। पिछले साल सितंबर में विश्व चैंपियनशिप से ठीक पहले उन्हें कमर के निचले हिस्से में चोट लगी थी और राष्ट्रमंडल खेलों से पहले उन्होंने केवल एक प्रतियोगिता में भाग लिया था। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में खराब मौसम के कारण मुश्किल परिस्थितियों के बीच नीरज को श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराजे 89.75 मीटर के थ्रो के साथ पीछे छोड़ा। पथिराजे मौजूदा सत्र में सबसे अधिक दूरी तक भाला फेंकने वाले खिलाड़ी है। पूर्व विश्व चैंपियन नीरज ने अपनी वापसी में मदद करने वाले सहयोगी दल के प्रति आभार जताते हुए कहा, ''इस स्तर पर दोबारा प्रतिस्पर्धा करना अच्छा लग रहा है। यह सब कुछ अकेले संभव नहीं था। मैं उन लोगों का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा विश्वास बनाए रखा।" उन्होंने अपने फिजियो ईशान मारवाहा और कोच जय चौधरी का विशेष रूप से धन्यवाद किया। नीरज ने कहा, "ईशान जी चोट से उबरने के दौरान हर कदम पर मेरे साथ रहे और मुझे फिर से वह करने में मदद की, जिसे मैं सबसे ज्यादा पसंद करता हूं। मेरे कोच जय चौधरी उस समय से मेरे साथ हैं, जब मैंने पहली बार भाला उठाया था।" उन्होंने कहा, '' मेरा परिवार हर परिस्थिति में मेरे साथ मजबूती से खड़ा रहा। सत्र अभी जारी है और मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हूं।
- नयी दिल्ली ।' राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका अस्मिता डे ने कहा कि उन्हें शुरू से पूरा भरोसा था कि वह देश के लिए इतिहास रचेंगी और यही अटूट आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। अस्मिता ने मंगलवार को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के आवास पर आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेताओं के सम्मान समारोह के दौरान कहा, ''ग्लास्गो रवाना होने से पहले मेरे मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि मुझे स्वर्ण पदक जीतना है। मैं खुद से लगातार कहती रही कि मैं स्वर्ण पदक के साथ भारत लौटूंगी।'' अपने सफल अभियान पर अस्मिता ने कहा कि फाइनल मुकाबले में एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि स्वर्ण पदक हाथ से निकल सकता है, लेकिन कोच यशपाल सोलंकी के उत्साहवर्धन ने उनका आत्मविश्वास लौटाया। उन्होंने कहा, ''फाइनल में मेरा मुकाबला कनाडा की खिलाड़ी से था। वह रैंकिंग में मुझ से थोड़ी नीचे है इसलिए मुकाबला बेहद कड़ा था। जब उसने मेरे खिलाफ अंक हासिल किया तो कुछ क्षण के लिए लगा कि शायद मैं हार जाऊंगी।'' अस्मिता ने बताया, '' मेरे कोच यशपाल सोलंकी लगातार कहते रहे कि यह स्वर्ण पदक हमारा है और मुझे हर हाल में जीतना है। उनके शब्दों से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। मैंने अधिक आक्रामक खेल दिखाया, स्कोर बराबर किया और मुकाबला 'गोल्डन स्कोर' तक पहुंच गया। वहां मैंने पहला अंक हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।'' अपनी सफलता के सबसे बड़े कारण पर अस्मिता ने कहा कि जूडो जैसे तकनीकी खेल में शारीरिक क्षमता से अधिक मानसिक मजबूती निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, ''हम सभी खिलाड़ी लगभग एक जैसी ट्रेनिंग करते हैं। मेरे भार वर्ग में भारत की कई खिलाड़ी समान स्तर का अभ्यास करती हैं। असली अंतर मानसिकता का होता है। प्रतियोगिता के दबाव को कौन बेहतर ढंग से संभालता है, किसमें अधिक आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा होता है, यही सफलता तय करता है। शारीरिक रूप से दूसरे खिलाड़ी भी मेरे जितने मजबूत हो सकते हैं, लेकिन अंततः मजबूत मानसिकता ही जीत दिलाती है।''
- बेंगलुरु। शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच की श्रृंखला के लिए मंगलवार को कोलंबो पहुंची लेकिन टीम में शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी साई सुदर्शन शामिल नहीं थे। सुदर्शन यहां भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में मेडिकल स्टाफ की देखरेख में चोट से उबर रहे हैं। भारतीय टीम 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट के लिए गॉल जाने से पहले सात अगस्त से कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब में तीन दिन का अभ्यास मैच खेलेगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया, ''सुदर्शन सीओई में ट्रेनिंग कर रहे हैं और पैर की अंगुली की चोट से उबरने की प्रक्रिया के दौरान एक घंटे से अधिक समय तक नेट पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। उनके खेलने पर अंतिम फैसला लेने से पूर्व अगले तीन-चार दिन तक उनकी स्थिति की जांच जारी रहेगी।'' सुदर्शन को हाल ही में भारत ए के श्रीलंका दौरे के दौरान यह चोट लगी थी।सूत्र ने कहा, ''यह पक्का करना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटने से पहले वह पूरी तरह फिट हो जाएं। हम ऐसी स्थिति नहीं चाहते जैसी (हर्षित) राणा के साथ हुई थी जो शीर्ष स्तर के क्रिकेट में लौटने के तुरंत बाद फिर से चोटिल हो गए थे।'' दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा और मेडिकल स्टाफ को उम्मीद है कि सुदर्शन उस मैच के लिए टीम के साथ जुड़ सकेगा क्योंकि उन्होंने सीओई में नेट पर बल्लेबाजी शुरू कर दी है।
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नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भारत दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया-ए महिला टीम की घोषणा कर दी है। अनुभवी तेज गेंदबाज डार्सी ब्राउन और टायला व्लामिंक टीम की अगुवाई करेंगी। यह दौरा 12 सितंबर से शुरू होगा।
तीन सप्ताह के इस दौरे में न्यू चंडीगढ़ में तीन टी20 मुकाबले, मोहाली में तीन एकदिवसीय मैच और धर्मशाला में एक चार दिवसीय मुकाबला खेला जाएगा।यह दौरा टायला व्लामिंक के लिए शीर्ष स्तर की क्रिकेट में वापसी का अवसर होगा। पिछले कुछ वर्षों में वह लगातार चोटों से जूझती रही हैं। वहीं, डार्सी ब्राउन दौरे के सीमित ओवरों के मुकाबलों में हिस्सा लेंगी।टीम की कप्तानी अलग-अलग प्रारूपों में अलग खिलाड़ियों को सौंपी गई है। तहलिया विल्सन मोहाली में खेले जाने वाले 50 ओवर के मैचों में टीम की कप्तानी करेंगी। निकोल फाल्टम टी20 टीम की कप्तान होंगी, जबकि रेचल ट्रेनामन चार दिवसीय मुकाबले में टीम का नेतृत्व करेंगी।व्लामिंक को 2024 टी20 विश्व कप के दौरान पहले ही मैच में फील्डिंग करते समय कंधे में गंभीर चोट लगी थी। लगातार चोटों के कारण अप्रैल में उनका क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का केंद्रीय अनुबंध भी समाप्त हो गया था।वहीं, डार्सी ब्राउन को 2024 टी20 विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह नहीं मिली थी। उनकी जगह लूसी हैमिल्टन को शामिल किया गया था।राष्ट्रीय चयनकर्ता शॉन फ्लेगलर ने कहा कि ब्राउन और व्लामिंक जैसी अनुभवी गेंदबाजों की मौजूदगी युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने का बेहतरीन अवसर होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय परिस्थितियों में खेलने का अनुभव खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।ऑस्ट्रेलिया-ए टीम के मुख्य कोच गैवन ट्वाइनिंग होंगे। उनके साथ मिक डिलेनी और कैमरून बॉयस सहायक कोच की भूमिका निभाएंगे।भारत दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया-ए महिला टीम:डार्सी ब्राउन, मेटलन ब्राउन, निकोल फाल्टम, टेस फ्लिंटॉफ, सियाना जिंजर, चार्ली नॉट, अनिका लिरॉयड, केटी मैक, लिली मिल्स, फ्रेंकी निक्लिन, हेले सिल्वर-होल्म्स, रेचल ट्रेनामन, कोर्टनी वेब, तहलिया विल्सन और टायला व्लामिंक। -
नयी दिल्ली. जम्मू कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब नबी को चोटिल जसप्रीत बुमराह की जगह सोमवार को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। इस तरह से वह भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाने वाले कश्मीर घाटी के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
बुमराह को फिटनेस के आधार पर टेस्ट टीम में शामिल किया गया था लेकिन वह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे श्रृंखला के दौरान बाएं घुटने में लगी चोट से अभी तक पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर हो गए हैं। नबी को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक बयान में कहा, ''पुरुष चयन समिति ने बुमराह के स्थान पर औकिब नबी को टीम में शामिल किया है। जम्मू और कश्मीर के इस तेज गेंदबाज को पहली बार सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है।'' कश्मीर के बारामूला के एक गांव के रहने 29 वर्षीय नबी जम्मू कश्मीर के तीसरे खिलाड़ी हैं जिन्हें भारत की सीनियर टीम में चुना गया है। उनसे पहले परवेज़ रसूल और उमरान मलिक को सीमित ओवरों के लिए सीनियर राष्ट्रीय टीम में चुना गया था। रसूल और मलिक सीमित ओवरों के प्रारूप में भारत के लिए खेल चुके हैं। नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में कुल 104 विकेट लिए थे, जिनमें 2025-26 सत्र में लिए गए 60 विकेट भी शामिल हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। वह बल्लेबाजी में भी उपयोगी योगदान देने में सक्षम हैं। वह हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई भारत ए टीम का भी हिस्सा थे, जहां उन्होंने दो प्रथम श्रेणी मैचों में छह विकेट लिए थे। तेज गेंदबाज बुमराह को इस श्रृंखला से बाहर होना पड़ा क्योंकि उनके घुटने में सूजन ज्यादा गंभीर निकली। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्पोर्ट्स साइंस टीम ने भारतीय टीम के आगामी व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए इस अनुभवी तेज गेंदबाज की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी में किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने से परहेज किया। यह 32 वर्षीय तेज गेंदबाज चोट लगने के कारण पिछले महीने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में नहीं खेल पाए थे। शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बी साई सुदर्शन को भी श्रीलंका दौरे के लिए फिटनेस के आधार पर टीम ने चुना गया है क्योंकि वह अभी भी उस पैर की चोट से उबर रहे हैं। श्रीलंका में दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला 15 अगस्त को गॉल में शुरू होगी।
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के लिए भारतीय टीम: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जड़ेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन, औकिब नबी। -
नयी दिल्ली. भारत के शीर्ष तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण श्रीलंका के दो टेस्ट मैचों के दौरे से बाहर रह सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को भारतीय सीनियर टीम में पहली बार शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। नबी सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले जम्मू-कश्मीर के तीसरे खिलाड़ी होंगे। इससे पहले परवेज रसूल और उमरान मलिक को सीमित ओवरों की भारतीय टीम में बुलावा मिल चुका है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा, ''बुमराह फिट नहीं हैं और उनकी जगह आकिब नबी के नाम को मंजूरी दे दी गई है। '' आकिब ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में 100 से अधिक विकेट लिए हैं और जम्मू-कश्मीर के लाल गेंद के क्रिकेट में शानदार सफलता के सूत्रधार रहे हैं। वह निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने में भी सक्षम हैं। बुमराह के घुटने में सूजन शुरुआत में जितनी सामान्य लग रही थी उससे अधिक गंभीर प्रतीत हो रही है। ऐसे में बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की खेल विज्ञान टीम इस अनुभवी तेज गेंदबाज को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कड़ी चुनौती में जल्दबाजी में उतारने के पक्ष में नहीं है क्योंकि आगे का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया, '' सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का संचालन करने वाले धनंजय और तुलसी ने फैसला किया है कि बुमराह को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। हालांकि शुरुआत में टीम प्रबंधन और चयन समिति को यह विश्वास दिलाया गया था कि बुमराह कम से कम दो टेस्ट मैच में से एक के लिए उपलब्ध रह सकते हैं। '' श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला की शुरुआत 15 अगस्त से गॉल में होगी।
इंग्लैंड के खिलाफ 32 वर्षीय बुमराह लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे एकदिवसीय मैच में चोटिल होने के बाद नहीं खेल पाए थे। वह हाल ही में बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे थे और उम्मीद थी कि दो सप्ताह बाद शुरू होने वाली श्रृंखला तक वह मैच के लिए फिट हो जाएंगे। हालांकि पता चला है कि बुमराह को अब भी कुछ परेशानी महसूस हो रही है। अगर वह 15 अगस्त या 23 अगस्त से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट से पहले फिट भी हो जाते हैं तो भी चिकित्सा टीम इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि धीमी पिचों पर गेंदबाजी के अधिक बोझ को देखते हुए टेस्ट क्रिकेट उनके लिए सही प्रारूप होगा। टीम में बुमराह की जगह के लिए नबी को हालांकि विदर्भ के यश ठाकुर से चुनौती मिलती दिख रही है।
नितीश कुमार रेड्डी (पैर की मांसपेशियों में खिंचाव), हर्षित राणा (पैर की मांसपेशियों में खिंचाव) और वाशिंगटन सुंदर (पैर की मांसपेशियों में खिंचाव) पहले ही चोटों से जूझ रहे हैं। वाशिंगटन कम से कम पहले टेस्ट में नहीं खेल पाएंगे। बी साई सुदर्शन के मामले में वह फिलहाल सीओई में रोज़ाना करीब 75 मिनट तक नेट्स में बल्लेबाजी कर रहे हैं और हाल में श्रीलंका में भारत ए की श्रृंखला के दौरान लगी पैर की चोट से धीरे-धीरे उबर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के लिए उपलब्ध रहेंगे या नहीं। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका (रात 08:40 बजे तक) में भारत 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य सहित कुल 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है। भारत कुल पदकों की संख्या में मेजबान स्कॉटलैंड के साथ बराबरी पर है, लेकिन अधिक रजत पदकों के आधार पर वह आगे है। ऑस्ट्रेलिया 69 स्वर्ण, 43 रजत और 54 कांस्य सहित कुल 166 पदकों के साथ शीर्ष है। इंग्लैंड 29 स्वर्ण, 43 रजत और 36 कांस्य सहित 108 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कनाडा 18 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। पदक तालिका में शीर्ष-10 देश इस प्रकार हैं:
स्थान देश स्वर्ण रजत कांस्य कुल पदक--
1 ऑस्ट्रेलिया 69 43 54 166
2 इंग्लैंड 29 43 36 108
3 कनाडा 18 20 23 61
4 भारत 13 17 9 39
5 स्कॉटलैंड 13 9 17 39
6 नाइजीरिया 10 7 7 24
7 जमैका 10 4 5 19
8 न्यूजीलैंड 9 13 10 32
9 वेल्स 8 10 12 30
10 मलेशिया 8 3 5 16 -
नयी दिल्ली. अंकुर भट्टाचार्जी ने रविवार को 22वीं राष्ट्रमंडल टेबल टेनिस चैंपियनशिप का पुरुष और यशस्विनी घोरपड़े ने महिला एकल खिताब अपने नाम किया। अंकुर ने जहां कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की, वहीं यशस्विनी ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए खिताब पर कब्जा जमाया। पुरुष एकल फाइनल में अंकुर ने रोमांचक मुकाबले में पायस जैन को 4-3 (11-8, 9-11, 7-11, 11-8, 4-11, 11-4, 11-9) से हराकर खिताब जीता। निर्णायक गेम में पायस ने 7-4 की बढ़त बनाकर जीत की ओर कदम बढ़ा दिए थे, लेकिन अंकुर ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर 8-8 से बराबर किया और फिर 10-9 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद पायस का रिटर्न बाहर जाने से अंकुर ने निर्णायक गेम 11-9 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। महिला एकल फाइनल में यशस्विनी ने एकतरफा अंदाज में श्रीजा अकुला को 4-1 (11-6, 11-1, 8-11, 11-7) से हराया। भारत ने इस चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग सभी स्वर्ण पदक अपने नाम किए। मेजबान टीम को एकमात्र निराशा पुरुष युगल वर्ग में मिली, जहां मलेशिया के शेन क्यू वोंग और जावेन चोंग की जोड़ी ने फाइनल में भारत के मानव ठक्कर और मनुष शाह को 11-9, 12-10, 11-7 से हराकर खिताब जीता। महिला युगल का फाइनल पूरी तरह भारतीय रहा, जिसमें श्रीजा अकुला और सिंड्रेला दास ने यशस्विनी घोरपड़े और दिव्यांशी भौमिक को 3-1 (11-8, 11-13, 11-8, 11-6) से हराकर खिताब जीता। मिश्रित युगल फाइनल में भारत के मानव ठक्कर और तनीषा कोटेचा ने शानदार वापसी करते हुए मलेशिया की ऐ जिन और रिचर्ड रुई की जोड़ी को 3-2 (11-8, 10-12, 10-12, 11-9, 11-5) से हराकर खिताब अपने नाम किया।
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नयी दिल्ली. स्टार भारोत्तोलक सेखोम मीराबाई चानू और लवप्रीत सिंह सहित राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों के पहले दल का रविवार को यहां स्वदेश लौटने पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सैकड़ों प्रशंसकों ने जोरदार स्वागत किया। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में राष्ट्रमंडल खेलों का लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता। मीराबाई ने हवाई अड्डे पर पीटीआई से कहा, ''मणिपुर से होने के नाते मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मैं अपने देश के लिए कुछ अच्छा कर सकी।'' पुरुषों के 109 किग्रा से अधिक वर्ग में एक किग्रा के मामूली अंतर से स्वर्ण पदक से चूककर रजत पदक जीतने वाले लवप्रीत सिंह ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य जापान में होने वाले एशियाई खेल हैं। पंजाब के 28 वर्षीय लवप्रीत ने कहा, ''मैं भारतीय नौसेना, अपने कप्तान विजय कुमार और यहां स्वागत के लिए आए सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं।'' उन्होंने कुल 388 किग्रा वजन उठाया जिसमें 'स्नैच' में राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड 176 किग्रा वजन भी शामिल है। लवप्रीत ने कहा, ''ऐसा हो जाता है (स्वर्ण से चूकना) लेकिन मैंने कड़ी मेहनत की और उसका परिणाम मिला। जब दो खिलाड़ी मुकाबला करते हैं तो एक को हारना पड़ता है। अब मैं एशियाई खेलों की अच्छी तैयारी करूंगा।'' भारतीय भारोत्तोलकों ने अपने अभियान का समापन एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक के साथ किया। महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाली बिंदयारानी देवी सोरोखेबम ने कहा, ''जिस तरह सभी ने हमारा स्वागत किया है, उससे बहुत अच्छा लग रहा है। सभी का धन्यवाद, आपने घर जैसा अहसास कराया।'' उन्होंने कहा, ''आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए मैं पहले से भी अधिक कड़ी मेहनत करूंगी।''
पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले ऋषिकांत सिंह ने कहा कि अगली बार वह स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए पदक जीतकर अच्छा लग रहा है। मैं अपने प्रदर्शन के बारे में पहले ही बात कर चुका हूं, लेकिन अगली बार और मजबूत वापसी करूंगा तथा बेहतर प्रदर्शन करूंगा।'' इम्फाल में जन्मे भारतीय सेना के भारोत्तोलक ऋषिकांत ने अपने गृह राज्य मणिपुर में शांति की अपील करते हुए कहा कि इससे राज्य से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलेंगे। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए नौसेना और मैतेई दोनों समान हैं। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मणिपुर में शांति होनी चाहिए ताकि वहां से मुझसे भी बेहतर खिलाड़ी निकल सकें।'' भारतीय भारोत्तोलन टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा ने कहा, ''यहां जिस तरह हमारा स्वागत किया गया, उससे हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है। सभी लोग बहुत खुश हैं। मैं अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बेहद खुश हूं।'' उन्होंने कहा, ''कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम पीछे रह गए और हमें उन पर काम करने की जरूरत है ताकि अपने रजत पदक का रंग स्वर्ण में बदला जा सके। लेकिन खेलों में ऐसा होता है। कुल मिलाकर परिणाम अच्छे रहे हैं और हम खुश हैं।'' शर्मा ने मीराबाई चानू की लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने के लिए जमकर प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, ''मीराबाई एक असाधारण खिलाड़ी हैं। अपने अनुशासन के कारण वह इस तरह के परिणाम हासिल कर पाती हैं। हम एशियाई खेलों की तैयारी कर रहे हैं और मुझे लगता है कि वहां भी हम पदक जीतेंगे।'' महिलाओं के 69 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर ने कहा कि उनका लक्ष्य अगले राष्ट्रमंडल खेलों में अपने रजत पदक को स्वर्ण में बदलना है। उन्होंने कहा, ''मेरा लक्ष्य अहमदाबाद में होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक को स्वर्ण पदक में बदलना है।'' पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले राजा मुथुपांडी ने कहा कि पोडियम पर जगह बनाना कई सर्जरी और लंबे संघर्ष के बाद वर्षों की मेहनत का परिणाम है। मुथुपांडी ने कहा, ''मैं 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी उतरा था लेकिन तब पदक नहीं जीत पाया। उस समय मुझे बहुत बुरा लगा था। इसके बाद मैंने इस पदक के लिए काफी मेहनत की।'' उन्होंने कहा, ''मैं स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश कर रहा था लेकिन उस दिन मेरा प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। फिर भी मुझे खुशी है कि मैंने पहली बार भारत के लिए पदक जीता।'' उन्होंने कहा, ''एक खिलाड़ी के तौर पर मेरी दो-तीन सर्जरी हुई हैं। हर सर्जरी के बाद मैंने और मेरे कोच ने वापसी की योजना बनाई और चरणबद्ध तरीके से काम किया। इतने संघर्ष के बाद वापसी करके पदक जीतने का अहसास बेहद खास होता है।'' मुथुपांडी ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है। उन्होंने कहा, ''एशियाई खेल आने वाले हैं और उसके बाद ओलंपिक है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू होगी। हम अपने कोच विजय शर्मा सर के साथ बैठकर पूरी योजना बनाएंगे और सभी क्वालीफिकेशन प्रतियोगिताओं तथा चरणों की तैयारी करेंगे।'' एक अन्य रजत पदक विजेता वल्लुरी अजय बाबू ने कहा कि कड़े मुकाबले के दबाव से निपटने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उनका लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। उन्होंने कहा, ''मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। यह मेरे पहले राष्ट्रमंडल खेल थे और मेरे लिए शानदार अनुभव रहा। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा। मैं स्वर्ण पदक से चूक गया, लेकिन कोई बात नहीं। मैं अच्छी तैयारी करूंगा और कड़ी मेहनत करूंगा।'' अजय बाबू ने कहा, ''मुकाबला केवल एक किग्रा के अंतर से तय हुआ, इसलिए दबाव था। लेकिन मैंने उस दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया और मुझे अच्छा लगा। मैं यह पदक अपने कोच और अपने पिता को समर्पित करना चाहता हूं। मैं 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने का प्रयास करूंगा।'' महिलाओं के 86 किग्रा से अधिक वर्ग में पांचवें स्थान पर रहीं मार्टिना देवी ने अपने पहले राष्ट्रमंडल खेल अभियान को सीखने वाला अनुभव बताया। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रमंडल खेल मेरे लिए सीखने का अच्छा अवसर रहे। मैं भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगी। हवाई अड्डे पर जिस गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया जा रहा है, उसे देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।'' भारत फिलहाल पदक तालिका में 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य सहित कुल 39 पदक के साथ चौथे स्थान पर है। -
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 10वां दिन ऐतिहासिक रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में बॉक्सिंग के 10 मेडल समेत कुल 16 मेडल अपने नाम किए। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने मेडल टैली में छह पायदान की लंबी छलांग लगाई और 13 गोल्ड, 17 सिल्वर तथा 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया। भारत के कुल मेडल की संख्या अब 39 हो गई है।
मेडल टैली में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर बना हुआ है। उसके खाते में 61 गोल्ड, 38 सिल्वर और 50 ब्रॉन्ज समेत कुल 149 मेडल हैं। इंग्लैंड 25 गोल्ड, 40 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज के साथ कुल 99 मेडल लेकर दूसरे स्थान पर है, जबकि कनाडा 18 गोल्ड समेत कुल 57 मेडल के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है। भारत की शानदार छलांग का असर मेजबान स्कॉटलैंड की रैंकिंग पर भी पड़ा है। 12 गोल्ड, 8 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज समेत कुल 37 मेडल के साथ स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। नाइजीरिया 10 गोल्ड समेत कुल 21 मेडल के साथ छठे, वेल्स 8 गोल्ड, 10 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज समेत 30 मेडल के साथ सातवें स्थान पर है। न्यूजीलैंड 8 गोल्ड के साथ कुल 27 मेडल लेकर आठवें स्थान पर मौजूद है।10वें दिन भारतीय मुक्केबाजों ने सबसे दमदार प्रदर्शन किया। बॉक्सिंग में भारत ने कुल 10 मेडल जीते, जिनमें 7 गोल्ड शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने गोल्ड मेडल अपने नाम किए। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने स्वर्ण पदक जीते। भारतीय बॉक्सरों के शानदार प्रदर्शन में तीन सिल्वर मेडल भी शामिल रहे। जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में रजत पदक जीतकर भारत की मेडल संख्या में इजाफा किया।एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में प्रवीण चित्रावेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज पदक अपने नाम किया। दोनों के प्रदर्शन से भारत की एथलेटिक्स में पदक संख्या को मजबूती मिली।शॉट पुट में भी भारत को दो पदक मिले। सोमन राणा ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में एक और स्वर्ण जोड़ा, जबकि शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस तरह 10वें दिन बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। 10वें दिन 16 मेडल जीतने के बाद भारत ने प्रतियोगिता में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज के साथ भारत के कुल 39 मेडल हो गए हैं। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता के अंतिम चरण में देश की पदक उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है। ( - बेंगलुरु. भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा आगामी दलीप ट्रॉफी में दक्षिण क्षेत्र की अगुआई करेंगे जबकि आंध्र के अनुभवी बल्लेबाज रिकी भुई को उपकप्तान बनाया गया है। भारतीय टीम से बाहर चल रहे करुण नायर को भी टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा उभरते हुए भारत 'ए' के बल्लेबाज एसके रशीद भी टीम का हिस्सा हैं। कर्नाटक के आर स्मरण और हैदराबाद के के हिमतेजा को भी टीम में जगह मिली है।भारत 'ए' के पूर्व विकेटकीपर एन जगदीशन भी टीम में शामिल हैं।दलीप ट्रॉफी के लिए दक्षिण क्षेत्र की टीम:तिलक वर्मा (कप्तान), रिकी भुई (उपकप्तान), अभिनव तेजराना, एसके रशीद, के हिमतेजा, आर स्मरण, एन जगदीशन, करुण नायर, टी त्यागराजन, श्रेयस गोपाल, के साई तेजा, टी विजय, वी कावेरीप्पा और अमन खान।
- नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस जैवलिन थ्रो के बाद मेंस ट्रिपल जंप में भी भारत ने दो मेडल अपने नाम किए। शनिवार को स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में हुए फाइनल में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रवीण चित्रवेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि युवा एथलीट सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने 16.52 मीटर की सीजन की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में महज तीन सेंटीमीटर से मेडल से चूके प्रवीण ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम फिनिश हासिल किया। जमैका के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ गोल्ड मेडल जीता और प्रवीण से 14 सेंटीमीटर आगे रहे। प्रवीण ने प्रतियोगिता की शुरुआत 16.05 मीटर की छलांग से की। उनका दूसरा प्रयास 15.64 मीटर का रहा, जबकि तीसरे प्रयास में उन्होंने 16.31 मीटर तक सुधार किया। चौथे प्रयास में 16.58 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर उन्होंने सिल्वर मेडल की स्थिति मजबूत की। उनका पांचवां प्रयास 16.40 मीटर का रहा, जबकि अंतिम प्रयास फाउल रहा।21 वर्षीय सेल्वा प्रभु ने भी प्रतियोगिता के दौरान लगातार सुधार किया।उन्होंने 15.87 मीटर से शुरुआत की और दूसरे प्रयास में 16.17 मीटर तक पहुंचे। तीसरे राउंड में उन्होंने 16.43 मीटर की छलांग लगाई। चौथे प्रयास में फाउल के बाद सेल्वा ने पांचवें राउंड में 16.52 मीटर की शानदार छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल पक्का किया। उनका अंतिम प्रयास 16.08 मीटर का रहा। इससे पहले शुक्रवार देर रात भारतीय समयानुसार मेंस जैवलिन थ्रो में भी भारत ने दो मेडल हासिल किए थे। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।प्रवीण ने 2018 में खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में गोल्ड और उसी साल यूथ ओलंपिक गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया। एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतने के साथ नेशनल इंडोर रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 17.37 मीटर की छलांग के साथ भारतीय आउटडोर नेशनल रिकॉर्ड बेहतर किया और हांग्जो एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। मदुरै में जन्मे सेल्वा प्रभु ने 2022 वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। 2023 में वह एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के ‘बेस्ट एशियन अंडर-20 मेल एथलीट ऑफ द ईयर’ चुने जाने वाले पहले भारतीय बने। इसी दौरान उन्होंने 16.79 मीटर की छलांग के साथ भारतीय अंडर-20 रिकॉर्ड भी तोड़ा।इस साल की शुरुआत में सेल्वा ने 17.05 मीटर की अपनी पर्सनल बेस्ट छलांग के साथ 17 मीटर का अहम आंकड़ा पार किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल उनके तेजी से आगे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और अहम उपलब्धि बन गया है।
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ग्लास्गो/ भारतीय महिला मुक्केबाजों ने अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए पांच स्वर्ण पदक जीते जबकि पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने खिताब अपने नाम किये जिसके दम पर भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में शनिवार को अपने अभियान का समापन अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ किया । मौजूदा विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया (57 किलो) , प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) , अरूंधति चौधरी (70 किलो) , प्रिया घंघास (60 किलो) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वजन वर्गों में स्वर्ण पदक जीते । वहीं ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा ।
पुरूष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किलो) और अंकुश (70 किलो) ने स्वर्ण पदक जीते जबकि 55 किग्रा वर्ग में जादूमणि सिंह और 90 प्लस किलो स्पर्धा में नरेंदर बेरवाल ने रजत पदक जीता । इससे पहले भारत ने गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेल 2018 में मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण समेत सात पदक जीते थे । 'भारत माता की जय' और 'इंडिया इंडिया' के नारों के बीच एसएसी एरेना में भारतीय मुक्केबाजों को घर जैसा समर्थन मिला । अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वजन वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के दिमेजी शिट्टू को हराकर भारत को सातवां स्वर्ण पदक दिलाया। अंकुश ने शिट्टू के खिलाफ 4-1 के विभाजित फैसले से जीत दर्ज की। सचिन सिवाच ने इससे पहले पुरुषों के 60 किग्रा वजन वर्ग के रोमांचक फाइनल में नामीबिया के ट्रायागेन मॉर्निंग एनडेवेलो को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का छठा स्वर्ण पदक रहा। सचिन ने शुरुआती दो राउंड में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए जीत हासिल की। उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में एनडेवेलो को 'स्टैंडिंग काउंट' के लिए मजबूर कर दिया जिसके बाद भारतीय मुक्केबाज ने 3-2 के विभाजित फैसले में जीत दर्ज की। हालांकि ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिलाओं के 70 किलोवर्ग के फाइनल में आस्ट्रेलिया की एम्मा सू ग्रीनट्री से खंडित फैसले में 4 . 1 से मिली हार से रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अरूंधति ने इंग्लैंड की शेंटेले रीड को महिलाओं के 70 किलोवर्ग के फाइनल में 5 . 0 से हराया । नरेंदर को पुरूषों के 90 प्लस किलो में इंग्लैंड के डामार थॉमस ने 5 . 0 से हराया ।
प्रीति ने महिलाओं के 54 किग्रा फाइनल में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद मौजूदा विश्व चैंपियन जैसमीन ने भी महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में उत्तरी आयरलैंड की गत चैंपियन माइकेला वॉल्श को 5-0 के समान अंतर से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। साक्षी ने फिर महिलाओं के 51 किग्रा फाइनल में इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से हराकर दिन में भारत को मुक्केबाजी का तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया। प्रिया को महिलाओं के 60 किग्रा में कनाडा की मैरी बाथोल अल अहमदिएह से कड़ी चुनौती मिली लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने 4-1 के विभाजित फैसले से पहला स्थान हासिल किया। इससे पहले भारत के दिन के तीसरे मुकाबले में जादूमणि सिंह को ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ कड़े संघर्ष के बाद 0-5 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक मिला। लंबे कद के ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ शुरुआत में संघर्ष करने के बाद जादूमणि ने शानदार वापसी करते हुए पहला राउंड 3-2 से अपने नाम किया। डिक्सन ने हालांकि दूसरे राउंड में जोरदार वापसी की और सभी जज के सर्वसम्मत फैसले से 5-0 से जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज ने इस बढ़त को बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम किया और भारत की स्वर्णिम लय को रोक दिया। महिलाओं के 57 किग्रा फाइनल में जैसमीन और वॉल्श के बीच पहला राउंड बेहद करीबी रहा, जिसमें दोनों मुक्केबाजों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी। जैसमीन ने यह राउंड विभाजित फैसले से अपने नाम किया। उन्होंने दूसरे राउंड में शानदार पंच लगाए और सर्वसम्मत फैसले से जीत दर्ज की।
प्रीति ने स्वर्ण पदक मुकाबले में आक्रामक शुरुआत की। उन्होंने पहला राउंड सर्वसम्मत फैसले से जीता, जिसमें पांचों जज ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में 10-8 का स्कोर दिया। बैंथमवेट वर्ग की विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज प्रीति ने दूसरे राउंड में भी अपना दबदबा कायम रखा और शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। -
ग्लास्गो. भारतीय जूडो खिलाड़ी उन्नति शर्मा ने शनिवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 63 किग्रा से कम भार वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली जबकि हमवतन हर्ष टोकस और करणजीत सिंह मान क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद रेपेचेज राउंड खेलेंगे। उन्नति ने अपने अभियान की शुरुआत प्री-क्वार्टर फाइनल में लामुलेला मगागुला पर एक मिनट 39 सेकेंड में इप्पोन के जरिए शानदार जीत के साथ की। क्वार्टर फाइनल में उन्नति ने न्यूजीलैंड की कोना क्रिस्टी को कड़े मुकाबले में हराया। उन्होंने पहले एक युको अंक अर्जित किया और फिर वाजा-आरी के दम पर जीत दर्ज कर अंतिम चार में जगह बनाई। पुरुषों के 90 किग्रा से कम भार वर्ग में करणजीत ने न्यूजीलैंड के एलियट कोनोली को तीन मिनट 29 सेकेंड में इप्पोन के जरिए हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। लेकिन अंतिम आठ के मुकाबले में वह कनाडा के गियोम गॉलिन से तीन मिनट और 29 सेकेंड में हार गए। अब रेपेचेज राउंड में उनका सामना घरेलू प्रबल दावेदार स्कॉट क्यूसाक से होगा।
पुरुषों के 81 किग्रा वर्ग में टोकस को क्वार्टर फाइनल में साइप्रस के ओडिसियस जॉर्जाकिस के खिलाफ 0-1 से करीबी हार का सामना करना पड़ा। अब टोकस रेपेचेज मुकाबले में समोआ के पेनियामिना पर्सिवल का सामना करेंगे। महिलाओं के 70 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में इनुंगानबी तकेल्लाम्बम कनाडा की चार्ली थिबॉल्ट से तीन मिनट 23 सेकेंड में इप्पोन से हार गईं। -
ग्लास्गो. मुरली श्रीशंकर ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक और अध्याय जोड़ दिया जब वह राष्ट्रमंडल खेलों में लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक के साथ लगातार दो पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए और घुटने की चोट से दो साल जूझने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की । बर्मिंघम 2022 में रजत पदक जीतने वाले 27 वर्षीय श्रीशंकर ने इस बार 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ कूद लगाकर एक और रजत पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले साल गंभीर घुटने की चोट के बाद उनके करियर पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। श्रीशंकर से पहले इस स्पर्धा में भारत के लिए केवल सुरेश बाबू (पुरुष कांस्य, 1978), अंजू बॉबी जॉर्ज (महिला कांस्य, 2002) और एम प्रजुषा (महिला रजत, 2010) ही पदक जीत पाए थे। श्रीशंकर ने कहा ,'' मैं बहुत खुश हूं कि इन खेलों में भाग ले रहा हूं । विश्व स्तर पर फिर भारत के लिये खेलकर काफी खुशी महसूस कर रहा हूं । दो साल पहले मुझे लगा नहीं था कि ग्लास्गो में खेल पाऊंगा ।'' स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने की निराशा हालांकि उनकी बातों में नजर आई । उन्होंने कहा ,'' मैं बर्मिंघम के रजत को स्वर्ण में बदलना चाहता था । अपने प्रदर्शन से खुश नहीं हूं और लगातार बेहतर करने का प्रयास करता रहूंगा ।'' उन्होंने कहा ,'' मुझे अपनी तकनीक पर काम करना होगा लेकिन इस पदक से एशियाई खेलों के लिये मेरा आत्मविश्वास बढेगा ।'' जमैका के पूर्व विश्व चैंपियन ताजे गेले ने 8.15 मीटर की कूद के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि मेजबान स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक हासिल किया। यह पदक श्रीशंकर के लिए इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि अप्रैल 2024 में उनके घुटने की 'पैटलर टेंडन' फट गई थी। इसके बाद उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और वह पेरिस ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले सके। उस समय उनके करियर में वापसी को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। हालांकि, श्रीशंकर ने शानदार वापसी करते हुए इन आशंकाओं को गलत साबित कर दिया।
अपने दूसरे राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले रहे श्रीशंकर ने पहले प्रयास में 8.03 मीटर की कूद लगाई। दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर का प्रदर्शन कर बढ़त बना ली। हालांकि यह बढ़त ज्यादा देर नहीं रही। जमैका के ताजे गेले ने 8.15 मीटर की कूद लगाकर पहला स्थान हासिल कर लिया। इसके बाद श्रीशंकर के तीसरे और चौथे प्रयास फाउल रहे। पांचवें प्रयास में उन्होंने 7.94 मीटर की कूद लगाई। यह पदक इस सत्र में उनके लगातार शानदार प्रदर्शन का भी प्रमाण है। श्रीशंकर इस साल लगातार आठ मीटर से अधिक की कूद लगाते रहे हैं। उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय अंतरराज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 8.38 मीटर के प्रयास से सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसी प्रतियोगिता में भारत के दूसरे खिलाड़ी लोकेश सत्यनाथन ने पहले प्रयास में 7.97 मीटर की कूद लगाई और पांचवें स्थान पर रहे। -
ग्लास्गो. दो साल पहले मुरली श्रीशंकर की गंभीर चोट का इलाज कर रहे सर्जन ने कहा था कि वह शायद दोबारा कभी दौड़ नहीं सकेंगे, लंबी कूद प्रतियोगिता में उतरना तो दूर की बात है । उनके पिता एस मुरली घबरा गए थे क्योंकि अप्रैल 2024 में पलक्कड़ में नियमित अभ्यास सत्र के दौरान एक हादसे में उनका बेटा चोटिल हो गया था । पदक और आठ मीटर की कूद के बारे में तो भूल जाइये । पेरिस ओलंपिक 2024 भी भूल जाइये । श्रीशंकर के पिता और कोच बस अपने बेटे को बैसाखियों के बिना अपने पैरों पर फिर खड़े होते देखना चाहते थे । मुरली ने कहा ,'' मैं सिर्फ इतना चाहता था कि वह बैसाखियों के बिना चल सके ।
श्रीशंकर ने तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ते हुए बुधवार को राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार दूसरा रजत पदक जीता तो ये यादें ताजा हो गई । बर्मिंघम में उपविजेता रहने के चार साल बाद उन्होंने 8 . 09 मीटर की कूद लगाकर वापसी के बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता । मुरली ने कहा ,'' यह चमत्कार ही है कि वह वापसी कर सका और पदक जीत रहा है । ऐसी चोट के बाद कोई यह कमाल नहीं कर सकता था ।'' चोट के बाद वह 2024 में पूरे सत्र से बाहर रहे और ओलंपिक में पदार्पण भी नहीं कर पाये ।
मुरली ने कहा ,'' उसने धीरे धीरे अभ्यास शुरू किया । अप्रैल 2025 में उसने तीन मीटर की कूद लगाई । मैं उसे देख नहीं पाता था । मैं डर गया था । वह मानसिक रूप से बहुत मजबूत है। उसने सिर्फ अपनी वापसी पर फोकस रखा ।'' वहीं श्रीशंकर ने कहा ,'' मैं यह नहीं कहूंगा कि यह चमत्कार था । लेकिन मैं कृतज्ञ हूं कि वापिस देश के लिये खेल सका । यह पदक उन सभी के लिये है जिन्होंने पिछले दो साल के कठिन दौर में मेरा साथ दिया । उन सभी के लिये जिन्होंने कहा था कि मैं फिर कभी कूद नहीं सकूंगा ।'' -
नयी दिल्ली. यह पांच साल पहले की बात है जब अजिंक्य रहाणे ऑस्ट्रेलिया में कई स्टार खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण कमजोर पड़ी भारतीय टीम को टेस्ट श्रृंखला में अप्रत्याशित टेस्ट जीत दिलाने के बाद मुंबई में अपनी आवासीय सोसायटी में लौटे, तो उनके पड़ोसियों ने कंगारू के आकार के टॉपिंग वाले केक से उनका स्वागत किया। रहाणे ने उसे एक नज़र देखा और केक के ऊपर से टॉपिंग हटाने के बाद ही उसे काटने के लिए राजी हुए। कंगारू ऑस्ट्रेलियाई गौरव का प्रतीक है और अपनी जीत के बावजूद वह प्रतिद्वंद्वी टीम के राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान नहीं करना चाहते थे। इस घटना से उस व्यक्ति के चरित्र का पता चलता है जिन्होंने शांत रहकर पूरी ईमानदारी और साहस के साथ अपना काम किया। रहाणे ने 85 टेस्ट मैचों में 12 शतकों सहित 5000 से अधिक रन बनाए। उन्होंने भारत की तरफ से अपना अंतिम मैच दो साल पहले खेला था और अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया। इससे हालांकि एक सवाल अब भी जवाब की तलाश में है कि क्या रहाणे अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी थे या भारतीय क्रिकेट ने उन्हें कम आंका? अपने करियर में अधिकतर समय रहाणे भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज खिलाड़ियों विराट कोहली और रोहित शर्मा के साए में खेलते रहे जिससे भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान पर ज्यादा चर्चा नहीं हो पाई। इसके बावजूद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में नियमित कप्तान कोहली की अनुपस्थिति और कुछ खिलाड़ियों के चोटिल हो जाने के बाद साबित किया कि वह एक कुशल और प्रेरणादायी कप्तान हैं। उन्होंने तब न सिर्फ कप्तान बल्कि एक बल्लेबाज के रूप में भी अच्छा प्रदर्शन करके भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। लेकिन सभी शांत स्वभाव वाले खिलाड़ियों की तरह रहाणे ने कभी कोई शिकायत नहीं की जबकि उन्हें लंबे समय तक कप्तान नहीं रखा गया था। उन्होंने संकट के समय बखूबी टीम की कमान संभाली और दिखाया कि वह ड्रेसिंग रूम को शांत बनाए रखकर अपने काम को अंजाम देने में माहिर हैं। उन्होंने कैमरे के सामने कभी दिखावटी भावनाएं नहीं दिखाई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला जीतने के बाद उनके चेहरे पर संतुष्ट स्पष्ट नजर आ रही थी। इसके बाद नियमित कप्तान की वापसी पर वह बिना किसी शिकायत के अपनी दूसरी भूमिका निभाते रहे। शिकायत करना उनके स्वभाव में नहीं था। जब वे आठ साल के थे, तब उनके पिता मधुकर ने उन्हें उपनगरीय डोम्बिवली से अकेले मुंबई मैदान जाने को कहा, तब भी उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाई और सीमित अवसरों में भी भारत का शानदार नेतृत्व किया। अपने नाम के अनुरूप वह उन सभी छह टेस्ट मैचों में अजेय रहे जिनमें उन्होंने कप्तानी की थी। लॉर्ड्स की घास वाली पिच पर पहले दिन बनाया गया शतक एक ऐसी पारी थी जिसने उनके धैर्य और तकनीक दोनों को समान रूप से प्रदर्शित किया। लेकिन वाहवाही इशांत शर्मा को मिली जिन्होंने आखिरी दिन सात विकेट लिए थे। रहाणे पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह संतुष्ट थे कि उन्होंने अपने काम को अच्छी तरह से निभाया। 2021 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी। एडिलेड में 36 रन पर ऑल आउट होने की शर्मनाक हार के बाद, मेलबर्न में रहाणे के शतक ने सीरीज बराबर करने वाली जीत की नींव रखी। उनकी कप्तानी रणनीति के लिहाज से बेहतरीन थी। यह अभिव्यक्ति में सरल और क्रियान्वयन में उत्कृष्ट थी।
मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, टी नटराजन और वाशिंगटन सुंदर जैसे गेंदबाजों का शानदार उपयोग करके उन्होंने भारत को श्रृंखला में जीत दिलाई थी। यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी लेकिन उन्होंने ऋषभ पंत को भारत का ध्वज लेकर विजय जुलूस का नेतृत्व करने के लिए कहा और स्वयं दूसरी पंक्ति में चले गए। मेलबर्न में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे विश्व कप में भी उन्होंने एक शानदार पारी खेली थी, लेकिन वह जल्द ही लोगों की यादों से धुंधली पड़ गई। उस पारी के डेढ़ साल के भीतर ही उन्हें वनडे टीम से बाहर कर दिया गया। स्पिनरों का सामना करने में रहाणे को दिक्कतें आती थीं, जो उनकी कमजोरी बन गई और अंततः उनके टीम से बाहर होने का कारण बनी। लेकिन रहाणे मैदान पर हों या मैदान के बाहर, हर जगह अपनी शालीनता का परिचय देते थे।
इसका एक उदाहरण यह है जब एक घरेलू मैच के दौरान विपक्षी बल्लेबाज को अपशब्द कहने पर उन्होंने यशस्वी जायसवाल को मैदान से 'बाहर निकल जाने' का आदेश दे दिया था। उन्होंने अंपायर का इंतजार नहीं किया। सीधे जायसवाल को मैदान छोड़ने को कह दिया। वह भारतीय टीम से अंदर बाहर होते रहे लेकिन उन्होंने कभी अपना जज्बा नहीं खोया। उन्होंने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में वापसी की, जहां वह ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक बनाने से चूक गए, लेकिन वेस्टइंडीज में कुछ असफलताओं ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को समाप्त कर दिया। -
मुंबई. आस्ट्रेलिया में 2020 . 21 दौरे पर सिताराहीन भारतीय टीम को टेस्ट श्रृंखला में अपनी कप्तानी में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले भारत के सीनियर बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को यह कहकर अलविदा कह दिया कि आगे बढने का सही समय आ गया है । भारत के लिये 2013 में पदार्पण करने वाले 38 वर्ष के रहाणे ने 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 खेले हैं । वह 2023 में वेस्टइंडीज में टेस्ट श्रृंखला के बाद भारत के लिये नहीं खेले हैं । उन्होंने इस साल आईपीएल के दौरान भी हालांकि कहा था कि उन्होंने वापसी की उम्मीद छोड़ी नहीं है । उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो संदेश में कहा , जीवन का सत्य यही है कि हर शुरूआत का एक अंक होता है । जब समय आ जाये तो आपको उसका सम्मान करके आगे बढ जाना चाहिये । मैने बल्लेबाजी में हमेशा टाइमिंग पर भरोसा किया है और मुझे इसका महत्व पता है ।'' उन्होंने कहा , मुझे आज लग रहा है कि आगे बढने का सही समय है इसलिये मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से विदा ले रहा हूं ।'' रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में 12 शतक और 26 अर्धशतक के साथ 38 . 46 की औसत से 5077 रन बनाये। इसके अलावा 90 वनडे में 35 . 26 की औसत से तीन शतक और 24 अर्धशतक के साथ 2962 रन जोड़े । टी20 में उन्होंने 375 रन बनाये हैं । रहाणे के लिये सबसे बड़ी उपलब्धि 2021 का आस्ट्रेलिया दौरा थी जब नियमित कप्तान विराट कोहली की गैर मौजूदगी में उन्होंने सितारों के बिना खेल रही भारतीय टीम की अगुवाई की और तमाम कयासों को धता बताते हुए आस्ट्रेलिया को उसकी धरती पर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में 2 . 1 से हराया । एडीलेड में पहला टेस्ट बुरी तरह हारने के बाद कोहली पितृत्व अवकाश पर भारत लौट आये थे । एडीलेड में भारतीय टीम दूसरी पारी में 36 रन पर आउट हो गई थी । उसके बाद रहाणे ने कप्तानी की और जसप्रीत बुमराह तथा रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की गैर मौजूदगी में भी श्रृंखला जीती । दूसरे टेस्ट में रहाणे ने आस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण का डटकर सामना करते हुए 223 गेंद में 112 रन बनाये । भारत ने ब्रिसबेन में चौथा और आखिरी टेस्ट तीन विकेट से जीता । वहीं मेलबर्न टेस्ट आठ विकेट से जीतकर श्रृंखला में बराबरी की थी । रहाणे ने अपने संदेश में कहा ,'' शुरूआत में अभ्यास के लिये डोम्बिवली से ट्रेन से सफर करने के दिनों से आज तक मैने खेल को सब कुछ दिया । हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी के हर मौके पर मेरा सपना हमेशा से भारत के लिये खेलने का था ।'' दुनिया भर में विभिन्न भाषाओं में क्रिकेट कमेंट्री करने वाले रहाणे ने कहा कि वह खेल से जुड़े रहेंगे । उन्होंने कहा ,'' मैने हमेशा से एक ही नियम माना है कि अपने से पहले टीम और देश को रखना है । मैने पूरी ईमानदारी से क्रिकेट खेला है। प्रथम श्रेणी क्रिकेटर के तौर पर मेरे पदार्पण से आज तक भारतीय क्रिकेट ने काफी प्रगति की है । मुझे गर्व है कि मैं पिछले 20 साल से इसका हिस्सा रहा हूं ।'' रहाणे ने कहा ,'' भारतीय क्रिकेट के साथ मेरा अध्याय खत्म हो रहा है लेकिन खेल के साथ नहीं । मैं अगली पीढी की मदद करना चाहता हूं और उन मूल्यों को साझा करना चाहता हूं जो क्रिकेट ने मुझे सिखाये हैं ।'' रहाणे ने आईपीएल में मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजाइंट, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिये खेला है । केकेआर ने उन्हें कप्तानी से फारिग कर दिया है । रहाणे ने कहा कि उनके नाम का आशय होता है 'जिसे हराया नहीं जा सके' लेकिन क्रिकेट ने उन्हें सिखाया कि हार से बचा नहीं जा सकता । उन्होंने कहा ,'' इस सफर में कई बार हारे और कई बार जीते लेकिन क्रिकेट खेलने का आनंद, जीवनभर की यादें मेरे कैरियर का सबसे बड़ा संतोष रहा ।'' उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा ,'' अजिंक्य मतलब जिसे हराया नहीं जा सके लेकिन क्रिकेट ने कई बार हार का अनुभव कराया । क्रिकेटर के तौर पर हम कामयाबी से ज्यादा नाकामी देखते हैं ।मेरी टीम मैच हारी । मैने गलतियां की लेकिन एक जगह है जहां मैं कभी नहीं हारा और वह है आपके दिल में । आपने मुझे अपनों सा समझा । आपके प्यार, भरोसे और सहयोग के लिये धन्यवाद । कैप नंबर 278 अब विदा लेता है ।'' रहाणे ने 2024 . 25 सत्र में मुंबई की कप्तानी की । उनकी कप्तानी में मुंबई ने 2023 . 24 में रणजी ट्रॉफी जीती थी ।
- नयी दिल्ली। भारत ने जापान के आइची नागोया में 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों के लिए बुधवार को घोषित की गई अपनी 20 सदस्यीय पुरुष हॉकी टीम में केवल एक बदलाव करके आदित्य अर्जुन लालागे की जगह मिडफील्डर राज कुमार पाल को शामिल किया है। राज कुमार को अगले महीने होने वाले विश्व कप के लिए टीम में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन वह एशियाई खेलों के लिए वापसी करने में सफल रहे। लालागे नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले विश्व कप के लिए भारत की 20 सदस्यीय टीम में शामिल हैं। भारतीय टीम प्रबंधन और हॉकी इंडिया के चयनकर्ताओं ने इसके अलावा विश्व कप में खेलने वाली टीम में कोई अन्य बदलाव नहीं किया है।स्टार डिफेंडर और ड्रैग-फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह टीम की कप्तानी करना जारी रखेंगे। भारत ने हरमनप्रीत की अगुवाई में ही 2024 में पेरिस ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। भारत की तरफ से सर्वाधिक मैच खेलने वाले अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह सहित कई अनुभवी खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। भारतीय टीम अनुभव और युवा खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है। भारत के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा, ''एशियाई खेलों के लिए चुनी गई भारतीय टीम बेहद अनुभवी है। हम जापान में मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं जहां विजेता टीम 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेगी। यही हमारा अंतिम लक्ष्य है।'' गोलकीपिंग विभाग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा जबकि रक्षापंक्ति में जरमनप्रीत सिंह, कप्तान हरमनप्रीत, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच शामिल हैं। राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत, नीलकांत शर्मा और विवेक सागर प्रसाद मध्य पंक्ति की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि दिलप्रीत सिंह, शिलाानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मनदीप सिंह और अभिषेक अग्रिम पंक्ति में शामिल खिलाड़ी हैं। हरमनप्रीत के नेतृत्व में हांगझोउ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की टीम मौजूदा चैंपियन के रूप में टूर्नामेंट में उतरेगी। उसे मेजबान जापान, कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ पूल ए में रखा गया है। एशियाई खेलों की पुरुष हॉकी में कुल 12 टीम भाग लेंगी।भारतीय कप्तान हरमनप्रीत को एशियाई खेलों में अपनी टीम के अच्छे प्रदर्शन पर पूरा भरोसा है।उन्होंने कहा, ''चाहे युवा खिलाड़ी हों या सीनियर खिलाड़ी, मुझे सभी खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा है कि वे मौकों का पूरा फायदा उठाएंगे। हमारा मुख्य लक्ष्य दबाव में नहीं आना, खेल का आनंद लेना और अपनी जिम्मेदारियों को समझना है।'' भारत एशियाई खेलों में अपने अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगा। इसके बाद वह पूल चरण में 22 सितंबर को श्रीलंका, 24 सितंबर को कोरिया, 26 सितंबर को जापान और 28 सितंबर को बांग्लादेश का सामना करेगा।एशियाई खेलों के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम इस प्रकार है:गोलकीपर: मोहित एचएस, सूरज करकेरा।डिफेंडर: जरमनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच। मिडफील्डर: राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलकांत शर्मा, विवेक सागर प्रसाद। फॉरवर्ड: दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह, अभिषेक।




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