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- नयी दिल्ली। वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भारत ने बिहार से ऑस्ट्रेलिया के लिए 18 टन मिथिला मखाना की खेप भेजी है। दरभंगा जिले के मखाना उत्पादकों से मिली यह खेप बिहार के इस प्रमुख जीआई (भौगोलिक संकेत) उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को मजबूत करेगी। साथ ही निर्यात आधारित बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों के लिए आय के बेहतर अवसर पैदा करेगी। भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है। इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए, जुलाई 2025 से मखाना के लिए एक अलग एचएस (हार्मोनाइज्ड सिस्टम) कोड लागू किया गया था। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने अमेरिका, पश्चिम एशिया और अफ्रीका सहित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को सात हजार टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया।
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नयी दिल्ली .राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त देखी गई। रुपये की कीमत में गिरावट और मजबूत वैश्विक रुख की वजह से सोना 3,800 रुपये महंगा होकर सात सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना बुधवार के 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद स्तर से 3,800 रुपये बढ़कर 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गया। इससे पहले सोना 18 जून को 1,53,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के आसपास बंद हुआ था।
चांदी की कीमत भी पिछले सत्र के 2,32,700 रुपये प्रति किलोग्राम से 2,100 रुपये बढ़कर 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। कारोबारियों ने कहा कि रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू बाज़ार में आयातित सर्राफा महंगा हो गया, जबकि कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी के बीच विदेशी बाज़ार में सोने की कीमतों में बढ़त ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया। बृहस्पतिवार को डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में थोड़ी बढ़ोतरी के कारण रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 95.24 (अस्थायी) पर रहा। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख, गौरव गर्ग ने कहा कि कमज़ोर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और पश्चिम एशिया संघर्ष में कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से कीमती धातु की मांग बढ़ी है, जिससे सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त हुई और यह सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। विदेशी बाज़ारों में, हाजिर सोने की कीमत बढ़कर 4,264.24 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमत 61.80 डॉलर प्रति औंस पर रही। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि ईरान के यह कहने के बाद कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ समझौते पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है, हाजिर सोने की कीमत बढ़कर 4,260 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। -
नयी दिल्ली. सरकारी स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह ओडिशा के गदाधरपुर लौह अयस्क ब्लॉक के लिए तरजीही बोलीदाता बनकर उभरी है। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी ने लौह अयस्क खनन क्षेत्र में भी कदम रख दिया है। सीआईएल मुख्य रूप से कोयले के खनन एवं उत्पादन में सक्रिय है और देश में कोयले के घरेलू उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है। कोल इंडिया का अब लौह अयस्क खनन में उतरने का कदम दीर्घकालिक ऊर्जा बदलाव के बीच कंपनी की व्यापक विविधीकरण योजना का संकेत माना जा रहा है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसे यह खनन पट्टा प्रेषित खनिज के मूल्य के 114.05 प्रतिशत नीलामी प्रीमियम पर प्रदान किया गया है। सीआईएल को यह ब्लॉक ओडिशा सरकार ने आवंटित किया है। गदाधरपुर ब्लॉक जी-3 अन्वेषण चरण में है, जहां कुल अयस्क संसाधन लगभग 28.8 करोड़ टन आंका गया है। जी-3 चरण वह प्रारंभिक अन्वेषण में सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित क्षेत्रों में विस्तृत नमूने, मानचित्रण और खुदाई के जरिये खनिज भंडार का आकलन किया जाता है। नीलामी की शर्तों के मुताबिक, कोल इंडिया को सफल बोलीदाता घोषित होने के लिए एक वर्ष में औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जबकि खनन पट्टा समझौते को अंजाम देने के लिए तीन वर्ष तक का समय मिलेगा। लौह अयस्क खनन में सीआईएल का प्रवेश सरकार की उस रणनीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य इस्पात क्षेत्र के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक भारत वर्ष 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लौह अयस्क उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि जरूरी होगी। सीआईएल ने चालू वित्त वर्ष में 81.5 करोड़ टन कोयला उत्पादन और 85 करोड़ टन आपूर्ति का लक्ष्य रखा है। जुलाई में कंपनी का उत्पादन 8.4 प्रतिशत बढ़कर 5.03 करोड़ टन रहा। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में कंपनी की कुल कोयला आपूर्ति 6.9 प्रतिशत बढ़कर 26.20 करोड़ टन हो गई, जो इस अवधि का अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बुधवार को उम्मीद के अनुरूप प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इस साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने के साथ 'तटस्थ' रुख को भी बरकरार रखा। इसके साथ ही आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक का ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के रुख पर अगला फैसला आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, वैश्विक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य मध्यम अवधि में खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाना है। आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया। इसके साथ ही आरबीआई ने ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ी लागत के साथ भविष्य में महंगाई के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता को लेकर इंतजार करने का विकल्प चुना। इसके साथ आरबीआई ने अपने तटस्थ रुख को भी बरकरार रखा जिसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा। चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत किया गया है।
मल्होत्रा ने कहा कि निकट अवधि में खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है और यह वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। इसकी मुख्य वजह खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी होगी, जिसके बाद महंगाई में नरमी आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि महंगाई का दबाव अभी व्यापक स्तर पर नहीं फैला है। कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई (खाद्य और ईंधन की महंगाई को छोड़कर) अब भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है। मल्होत्रा ने कहा, ''मौद्रिक नीति को सख्त करने की तत्काल जरूरत नहीं है। आरबीआई महंगाई को अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लाने के लिए प्रतिबद्ध है और महंगाई के भविष्य के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता आने का इंतजार कर रहा है।'' आरबीआई ने कहा कि अब तक महंगाई दबाव सीमित बना हुआ है। हालांकि, खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण महंगाई का दबाव व्यापक स्तर पर फैलने का जोखिम बना हुआ है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष और व्यापार तनावों के कारण बढ़ी वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग में मजबूती, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों तथा मजबूत निर्यात से आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, आरबीआई आर्थिक परिदृश्य को लेकर सतर्क भी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, वैश्विक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़े जोखिमों के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। मल्होत्रा ने कहा, ''पश्चिम एशिया संघर्ष के तेजी से बदलते घटनाक्रम के कारण वैश्विक आर्थिक हालात और बाजार धारणा प्रभावित हो रही है। इन घटनाओं का असर भारत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान पर पड़ा है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की वृहद-आर्थिक बुनियाद ऐसे वैश्विक झटकों से निपटने में मदद कर रही है।'' उन्होंने कहा, ''मौजूदा स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था को भविष्य के झटकों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाने वाले कदम तेज करने का अवसर प्रदान करती है। आरबीआई आर्थिक मजबूती बढ़ाने वाली नीतियों को आगे भी लागू करता रहेगा।
उन्होंने कहा, ''चाहे सतत आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना हो, उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना हो, कीमतों की स्थिरता बनाए रखना हो या वित्तीय प्रणाली और मुद्रा की स्थिरता सुनिश्चित करनी हो, केंद्रीय बैंक अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।'' आरबीआई ने कहा है कि बैंकों में अधिशेष नकदी की स्थिति बनी हुई है और वह पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना जारी रखेगा। विदेशी क्षेत्र की स्थिति पर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का चालू खाता मजबूत बना हुआ है। इसे मजबूत सेवा निर्यात और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे से समर्थन मिल रहा है। उन्होंने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा योजना के संदर्भ में कहा कि पूंजी प्रवाह मजबूत बना हुआ है। सीमित अवधि वाली इस योजना के समाप्त होने तक धन प्रवाह के बेहतर बने रहने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि चूंकि विदेशी पूंजी आकर्षित करने की लागत केंद्रीय बैंक वहन कर रहा है, ऐसे में क्या आरबीआई इस योजना को समय से पहले बंद करने पर विचार कर रहा है, मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। रुपये की मजबूती को लेकर उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी प्रवाह अधिक होने के बावजूद रुपये में अपेक्षित तेजी नहीं आई है। यदि वैश्विक तनाव कम होते हैं तो रुपये में और मजबूती आना संभव है।
मल्होत्रा ने कहा, आरबीआई का यह प्रयास होगा कि रुपये की गति व्यवस्थित और स्थिर बनी रहे। मल्होत्रा ने यह भी कहा कि आरबीआई अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट जारी करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों में पॉलिमर नोट का 30 वर्षों से अधिक समय तक चलने का रिकॉर्ड हैं। ये नोट खासतौर पर कम मूल्य वर्ग के नोटों के लिए उपयोगी होंगे, क्योंकि इनका इस्तेमाल और चलन अधिक होता है। आरबीआई ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है। इनमें शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लाइसेंस दोबारा शुरू करने के लिए मसौदा दिशानिर्देश और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ऋण निगरानी व्यवस्था (सीएमए) से जुड़े संशोधित मसौदा निर्देश शामिल हैं। इसके अलावा, ऋण पर ब्याज दरों में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों पर लागू ब्याज दर संबंधी नियामकीय रूपरेखा में एकरूपता लाने और उसे मानकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक पांच से सात अक्टूबर को होगी। -
नयी दिल्ली. देश के सेवा क्षेत्र की वृद्धि जुलाई में घटकर करीब साढ़े चार साल के निचले स्तर पर आ गई। घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों में नए कारोबार के ऑर्डर धीमे पड़ने, कड़ी प्रतिस्पर्धा और मांग कमजोर होने के कारण कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार सुस्त रही।
एक मासिक सर्वेक्षण में बुधवार को यह जानकारी दी गई। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक) के अनुसार, कारोबारी गतिविधियां पिछले 53 महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ीं। मांग कमजोर रहने और प्रतिस्पर्धी दबाव के बीच नए कारोबार में केवल मध्यम वृद्धि दर्ज की गई। मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव के आधार पर समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक जून के 57.4 से घटकर जुलाई में 53.3 पर आ गया। यह करीब साढ़े चार साल में वृद्धि की सबसे धीमी दर है। हालांकि, सूचकांक 50 के तटस्थ स्तर से ऊपर बना रहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि सेवा क्षेत्र में उत्पादन का विस्तार लगातार जारी है। एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "भारत का सेवा क्षेत्र जुलाई में भी बढ़ा, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ धीमी रही। कई महीनों के मजबूत प्रदर्शन के बाद घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों में नए कारोबार की वृद्धि कमजोर पड़ी।" सर्वेक्षण के अनुसार, नए कारोबार में वृद्धि फरवरी, 2022 के बाद सबसे धीमी रही। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि कड़ी प्रतिस्पर्धा, मांग में कमी, बाजार की कमजोर परिस्थितियों और ऑर्डर टाले जाने से वृद्धि प्रभावित हुई।
रोजगार के मोर्चे पर जून में छह महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद जुलाई में नियुक्तियों की रफ्तार में कुछ सुधार हुआ। हालांकि, यह सुधार सीमित रहा। केवल छह प्रतिशत कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जानकारी दी, जबकि 92 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनके कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ। भंडारी ने कहा कि नियुक्तियों में मध्यम सुधार हुआ, जबकि लागत दबाव कम होने और कंपनियों द्वारा बिक्री मूल्य बढ़ाने से लाभ मार्जिन में भी सुधार आया। सर्वेक्षण के अनुसार, जुलाई में ईंधन, श्रम, कच्चे माल, प्रौद्योगिकी और परिवहन लागत बढ़ने से सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव बना रहा। हालांकि, निर्यात से मिलने वाले नए कारोबार ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका से कारोबार बढ़ने की जानकारी दी। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में भी वृद्धि जारी रखी। सर्वेक्षण के अनुसार, बेहतर मांग और बाजार परिस्थितियों की उम्मीद, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण की रणनीति तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना से कंपनियों का कारोबारी भरोसा बना रहा। हालांकि, समग्र कारोबारी विश्वास जुलाई में घटकर सात महीने के निचले स्तर पर आ गया। इस बीच, एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई उत्पादन सूचकांक जून के 57.1 से घटकर जुलाई में 54.3 पर आ गया। यह मार्च, 2022 के बाद विस्तार की सबसे धीमी रफ्तार को दर्शाता है। सर्वेक्षण के अनुसार, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में उल्लेखनीय सुस्ती रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन की वृद्धि में मामूली तेजी आई।
- नयी दिल्ली/लंदन। दक्षिण कोरियाई प्रौद्योगिकी कंपनी सैमसंग ने कहा है कि वह भारत में बढ़ती लागत के बीच उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए ब्याज-मुक्त मासिक किस्त (ईएमआई) और त्योहारी छूट जैसे विकल्प देगी। सैमसंग के दक्षिण-पश्चिम एशिया क्षेत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जे. बी. पार्क ने लंदन में भारतीय पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से चालू वर्ष की पहली छमाही में भारतीय बाजार में करीब 15 प्रतिशत गिरावट आई है और दूसरी छमाही भी चुनौतीपूर्ण रह सकती है। उन्होंने कहा कि मेमोरी चिप की किल्लत और आपूर्ति बाधाओं से कारोबार के लिए स्थिति और मुश्किल हो गई है। पार्क ने कहा, "हम बढ़ी हुई लागत के बोझ को यथासंभव अपने स्तर पर ही समाहित करने की कोशिश करेंगे और उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य देंगे। आने वाले त्योहारी मौसम में ग्राहकों को ब्याज-मुक्त ईएमआई और छूट जैसे किफायती विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएंगे।" कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते उपयोग और सीमित उत्पादन क्षमता के कारण मेमोरी चिप की उपलब्धता एक समस्या बनी हुई है। भू-राजनीतिक कारणों से कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे पिछले छह महीनों में स्मार्टफोन समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। उद्योग जगत का अनुमान है कि मेमोरी की लागत अगले 12-18 महीनों तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।पार्क ने कहा कि भारत में एआई का उपयोग केवल फोटो या वीडियो के संपादन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि सैमसंग 'ऑन-डिवाइस' एआई पर ध्यान दे रही है ताकि उपयोगकर्ता क्लाउड के बजाय सीधे अपने फोन पर ही एआई सुविधाओं का उपयोग कर सकें और गोपनीयता भी बेहतर बनी रहे।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा के बाद मंगलवार को कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान LIC का शेयर करीब 8 प्रतिशत तक टूट गया। बीएसई पर LIC का शेयर शुरुआती कारोबार में 7.92 प्रतिशत गिरकर 390.70 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गया। सुबह करीब 10:40 बजे शेयर 397.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्शाता है।
सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए LIC की 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है। इसके साथ ही ग्रीनशू विकल्प के तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का भी प्रावधान रखा गया है। यदि यह विकल्प पूरी तरह लागू होता है तो सरकार कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 31,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है।निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण OFS का 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस भी रहा, जो सोमवार के बंद भाव से लगभग 11 प्रतिशत कम है। रियायती मूल्य और बाजार में बड़ी मात्रा में शेयर आने की संभावना के चलते LIC के शेयरों पर दबाव बना रहा।OFS मंगलवार को गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशकों के लिए खुला, जबकि खुदरा (Retail) निवेशकों के लिए यह बुधवार से खुलेगा।सरकार की इस हिस्सेदारी बिक्री का उद्देश्य LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना और सेबी (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) नियमों का पालन करना है।फिलहाल LIC में केंद्र सरकार की 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि आम निवेशकों के पास केवल 3.5 प्रतिशत शेयर हैं। यदि 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह बिक जाती है तो सरकार की हिस्सेदारी घटकर 90 प्रतिशत रह जाएगी। सेबी ने LIC को मई 2027 तक न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों का पालन करने के लिए सरकार की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत तक लाने की समय-सीमा दी है। -
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए त्रिपुरा की मातृ ड्रिंकिंग वाटर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पंजाब के मोहाली स्थित नोबल हेल्थकेयर के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करते हुए उसके उत्पाद वेनोलेक्स फोर्टे पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों कंपनियों के खिलाफ गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते यह कार्रवाई की गई है। नियामक संस्था ने दोहराया कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए खाद्य क्षेत्र में निगरानी और प्रवर्तन लगातार जारी रहेगा।नोबल हेल्थकेयर के मामले में एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 36(3)(बी) के तहत वेनोलेक्स फोर्टे के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। नियामक संस्था के अनुसार, जांच के दौरान उत्पाद में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। एफएसएसएआई ने कहा कि इस उत्पाद में ऐसे तत्व शामिल थे, जिन्हें मौजूदा खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत अनुमति नहीं दी गई है।जांच में यह भी पाया गया कि उत्पाद में विटामिन-सी की मात्रा 90 मिलीग्राम थी, जो आईसीएमआर-एनआईएन (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन) की 2020 की गाइडलाइन में निर्धारित अनुशंसित दैनिक मात्रा (आरडीए) से अधिक प्रतीत होती है।एफएसएसएआई ने बताया कि वेनोलेक्स फोर्टे में कैल्शियम डोबेसिलेट, डायोसमिन और यूफोर्बिया प्रोस्ट्राटा जैसे औषधीय प्रभाव वाले तत्व मौजूद हैं, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक (हेल्थ सप्लीमेंट, न्यूट्रास्यूटिकल, विशेष आहार उपयोग, विशेष चिकित्सकीय उपयोग, फंक्शनल फूड और नॉवेल फूड) विनियम, 2022 के तहत अनुमत सामग्री की सूची में शामिल नहीं हैं। नियामक संस्था ने यह भी पाया कि उत्पाद को “डायटरी फूड सप्लीमेंट” के रूप में प्रचारित किया जा रहा था और उसके नाम के ठीक नीचे एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था।एफएसएसएआई के अनुसार, इससे उपभोक्ताओं के बीच यह गलत धारणा बन सकती थी कि उत्पाद को खाद्य नियामक की विशेष मंजूरी या समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, उत्पाद की लेबलिंग और प्रस्तुति भी भ्रामक पाई गई। एफएसएसएआई का कहना है कि इससे उत्पाद की कानूनी और नियामकीय स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता था और उपभोक्ताओं को यह गलत संदेश मिल सकता था कि यह सभी एफएसएसएआई मानकों का पूरी तरह पालन करता है। एफएसएसएआई ने कहा कि शुरुआती जांच में वेनोलेक्स फोर्टे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम -
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने डाबर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कथित तौर पर “100 प्रतिशत शुद्ध” जैसे भ्रामक दावे करने वाले खाद्य उत्पादों की बिक्री को लेकर रोक का आदेश जारी किया है। खाद्य नियामक ने एफएमसीजी कंपनी के उन उत्पादों की बिक्री को रोकने का निर्देश दिया हैं, जिन पर “100 प्रतिशत नेचुरल”,”100 प्रतिशत प्योर”,”100 प्रतिशत प्यूरिटी गारंटीड” और “100 प्रतिशत टेंडर कोकोनट वाटर” जैसे दावे किए गए थे। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की उस टिप्पणी के बाद की गई है, जिसमें कहा गया था कि ये दावे अस्पष्ट, अप्रमाणित और उपभोक्ताओं को गुमराह करने की संभावना रखते हैं।
नियामक के अनुसार, ऐसे दावों का उपयोग खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन है। एफएसएसएआई ने कहा कि डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर एफएसएसएआई की वैध ऑर्गेनिक मंजूरी के बिना ‘जैविक भारत’ लोगो दिखाया गया था, जो कथित तौर पर ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (ऑर्गेनिक फ़ूड्स) रेगुलेशंस, 2017’ का उल्लंघन है।इसके अलावा, रेगुलेटर ने कहा कि डाबर होममेड कोकोनट मिल्क को “100 प्रतिशत शुद्धता” के दावे के साथ बेचा गया, जिसकी इजाजत कंपाउंड फूड प्रोडक्ट्स के लिए नहीं है। रेगुलेटर ने यह भी कहा कि कंपनी को गुमराह करने वाले “100 प्रतिशत” दावों को बंद करने का निर्देश देने वाला नोटिस पहले भी दिया गया था, लेकिन कोई संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। एफएसएसएआई ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह पहचाने गए प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत बंद करे और 15 दिनों के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (एटीआर) जमा करें। इस डेवलपमेंट के बाद डाबर इंडिया के शेयर में गिरावट देखने को मिली है। सुबह 11:30 बजे यह 2.85 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 413.65 रुपए पर कारोबार कर रहा था। बीते एक महीने में शेयर 8 प्रतिशत और बीते छह महीने में 17 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क चुका है। -
नयी दिल्ली. सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह जुलाई में 15.4 प्रतिशत बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। घरेलू लेनदेन और आयात से अधिक कर संग्रह के कारण जीएसटी संग्रह बढ़ा है। शनिवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। पिछले वर्ष जुलाई में सकल जीएसटी संग्रह 1.83 लाख करोड़ रुपये रहा था। वहीं, जून 2026 में यह लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये था। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल जीएसटी संग्रह 2,11,205 करोड़ रुपये रहा। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के दौरान केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) से 39,835 करोड़ रुपये, राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) से 47,881 करोड़ रुपये और एकीकृत माल एवं सेवा कर (आईजीएसटी) से 1.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह हुआ। कुल कर वापसी यानी रिफंड इस दौरान 13.1 प्रतिशत बढ़कर 29,968 करोड़ रुपये रहा। कर वापसी समायोजित करने के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एम एस मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह बाहरी माहौल में चुनौतियों के बावजूद निरंतर आर्थिक मजबूती को दर्शाता है। मणि ने कहा, ''घरेलू खपत पर हर महीने जीएसटी संग्रह में स्थिर वृद्धि से पता चलता है कि कुल घरेलू खपत काफी हद तक मौसमी विविधताओं और बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियों से मुक्त हो रही है।'' उन्होंने कहा कि जुलाई में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख विनिर्माण राज्यों में जीएसटी संग्रह बढ़ा है। केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख एवं पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि जुलाई में जीएसटी राजस्व वृद्धि का अधिकांश हिस्सा आयात से आया और यह पता करना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह तैयार माल है या कच्चा माल, तथा इसमें से कितना हिस्सा उच्च मात्रा के बजाय केवल कमजोर रुपये को दर्शाता है। -
मुंबई. सोने की वैश्विक मांग अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर लगभग स्थिर रहकर 1,269 टन दर्ज की गई। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमत के इस वर्ष की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ नरमी आई है। डब्ल्यूजीसी की 2026 की दूसरी (अप्रैल-जून) तिमाही पर आधारित 'क्यू2 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स' रिपोर्ट के अनुसार 2025 की समान तिमाही में सोने की कुल मांग 1,268.6 टन थी। वर्ष 2026 की पहली (जनवरी-जून) छमाही में सोने की मांग सालाना आधार पर दो प्रतिशत बढ़कर अनुमानित 2,522 टन रही, जिसका मूल्य 3,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा। दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड), सोने के बिस्कुट व सिक्कों में निवेश घटकर 262 टन रह गया, क्योंकि सोने की कीमतों में नरमी आने से वर्ष की शुरुआत में देखी गई निवेश की मजबूत रफ्तार धीमी पड़ गई। डब्ल्यूजीसी के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से अप्रैल-जून अवधि में गोल्ड समर्थित ईटीएफ से 45 टन की निकासी के कारण रही, हालांकि पहली छमाही में ईटीएफ की कुल मांग 18 टन के साथ सकारात्मक बनी रही। सोने के बिस्कुट व सिक्कों में निवेश अपेक्षाकृत स्थिर रहा और तिमाही के दौरान यह सालाना आधार पर केवल तीन प्रतिशत घटा। पहली (जनवरी-मार्च) तिमाही के असाधारण प्रदर्शन के कारण पहली छमाही में इसकी मांग पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक रही। वहीं, एशियाई निवेशकों के समर्थन से ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) बाजार में मांग दूसरी तिमाही में 327 टन रही जो पहली छमाही में 571 टन थी। डब्ल्यूजीसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत) सचिन जैन ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान अपने भंडार में शुद्ध 289 टन सोना जोड़ा जो सालाना आधार पर 62 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि पोलैंड, चीन और चेक गणराज्य जैसे देशों की अगुवाई में कई बाजारों में खरीद बढ़ी।उन्होंने कहा, '' भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 200 किलोग्राम सोना खरीदा।''
डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि ऊंची कीमतों का असर दूसरी तिमाही में आभूषणों की मांग पर भी पड़ा। उपभोक्ताओं ने कम सोना खरीदा और हल्के आभूषणों की ओर रुख किया जिससे आभूषणों की मांग सालाना आधार पर 17 प्रतिशत घट गई। इसके परिणामस्वरूप पहली छमाही में मात्रा के लिहाज से आभूषणों की मांग घटी लेकिन मूल्य के आधार पर मांग मजबूत रही। इस दौरान वैश्विक स्तर पर आभूषणों की मांग 22 प्रतिशत बढ़कर 860 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में सोने की कुल वैश्विक आपूर्ति सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही क्योंकि खनन उत्पादन और पुनर्चक्रण की प्रवृत्तियां अलग-अलग रहीं। खदानों से सोने की आपूर्ति सालाना आधार पर अनुमानित दो प्रतिशत बढ़कर 966 टन हो गई। इसमें कनाडा और चिली में नए उत्पादन का योगदान रहा। वहीं, ऊंची कीमतों के बावजूद पुराना सोना देकर सोने का नया सामान लेने (पुनर्चक्रण) की मात्रा सालाना आधार पर छह प्रतिशत घट गई। डब्ल्यूजीसी की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुईस स्ट्रीट ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में सोने की कीमतों में आई तेज वृद्धि दूसरी तिमाही में थम गई और रिकॉर्ड ऊंचाई से सुधार के बाद कीमतें स्थिर होने लगीं। स्ट्रीट ने कहा, '' सोने की कीमतों में नरमी के साथ गोल्ड ईटीएफ में निवेश घटा। हालांकि, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और ओटीसी निवेश में वृद्धि के कारण वर्ष की पहली छमाही में कुल सोने की मांग दो प्रतिशत बढ़ी।'' उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की दूसरी (जुलाई-दिसंबर) छमाही में निवेश मांग वृद्धि का प्रमुख आधार रहने की संभावना है। हालांकि, मांग की संरचना में बदलाव आ सकता है। - नयी दिल्ली. स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी का जून, 2026 में समाप्त चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही का शुद्ध मुनाफा 25 प्रतिशत बढ़कर 550 करोड़ रुपये रहा है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 438 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी ने नियामकीय सूचना में बताया कि इस तिमाही के दौरान उसकी कुल आय एक साल पहले की इसी अवधि के 3,990 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,471 करोड़ रुपये हो गई। निजी स्वास्थ्य बीमा कंपनी का सकल प्रीमियम इस तिमाही में 19 प्रतिशत बढ़कर 4,287 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की अवधि में 3,605 करोड़ रुपये था। स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आनंद रॉय ने कहा, ''पहली तिमाही में हमारा प्रदर्शन हमारी बुनियाद की मजबूती और काम करने के तरीके में निरंतरता को दिखाता है।''
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नयी दिल्ली. फिच रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में रेटिंग वाली कंपनियों की कुल आमदनी में करीब नौ प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जिसके पिछले वित्त वर्ष में पांच प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वृद्धि से भारतीय कंपनियों की कर्ज लेने की क्षमता के स्थिर बने रहने की संभावना है।
हालांकि, फिच ने कहा कि कुछ कंपनियां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ने से प्रभावित हो सकती हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को नुकसान हो सकता है और उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ सकती है, जिससे उनके मुक्त नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ेगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ''रसायन क्षेत्र की कंपनियों को अधिक लागत, कमजोर मांग और महंगी लॉजिस्टिक लागत का सामना करना पड़ सकता है। हमारा मानना है कि इससे जुड़ी महंगाई और कमज़ोर आर्थिक विश्वास के कारण उपभोक्ता खर्च और प्रौद्योगिकी पर होने वाले गैर-ज़रूरी खर्च में भी कमी आएगी।'' फिच ने कहा कि अल नीनो के उभरते जोखिम और कमजोर मानसून से नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में पवन ऊर्जा उत्पादन घट सकता है, जबकि रसायन कंपनियों के फसल सुरक्षा उत्पादों की मांग पर भी असर पड़ सकता है। इससे खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने, ग्रामीण आय घटने और ग्रामीण मांग कमजोर पड़ने की आशंका भी रहेगी। फिच ने अपनी रिपोर्ट 'इंडिया कॉरपोरेट्स क्रेडिट ट्रेंड्स: जुलाई 2026' में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में फिच रेटिंग्स के पोर्टफोलियो में शामिल भारतीय कंपनियों के लिए कर्ज की क्षमता स्थिर रहने की उम्मीद है। कुछ क्षेत्रों में लागत बढ़ने और कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) मार्जिन पर दबाव के बावजूद तेज आय वृद्धि भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सहारा देगी। -
न्यूयॉर्क. अमेरिका और ईरान द्वारा लगातार दूसरे दिन भी फारस की खाड़ी में कोई सैन्य हमला न किए जाने के बाद कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में रविवार को गिरावट दर्ज की गई और पिछले सप्ताह बने दो महीने के उच्चतम स्तर से तेल के दाम और नीचे आ गए। सितंबर की आपूर्ति वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत शुरुआती कारोबार में 4.9 प्रतिशत गिरकर 92.02 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इससे पहले शुक्रवार को भी इसमें 3.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यह महीने की शुरुआत की तुलना में लगभग 30 डॉलर अधिक थी और मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और व्यापक युद्ध की आशंका के कारण तेल की कीमतों में इस महीने उछाल आया। निवेशकों को चिंता थी कि यदि संघर्ष और बढ़ा, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रभावित हो सकती है। अमेरिका और इजराइल की ओर से फरवरी के अंत में ईरान पर किए गए हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। तेल उत्पादक देशों ने वैकल्पिक मार्ग तलाशने शुरू किए हैं, लेकिन उन पर भी दबाव बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह लाल सागर के रास्ते जा रहे सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर भी हमले हुए। जब बाजार में तेल की उपलब्धता कम होती है, तो उसकी कीमत बढ़ती है और साथ ही पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों के दाम भी बढ़ जाते हैं। मोटर क्लब 'एएए' के अनुसार अमेरिका में रविवार को साधारण तेल की औसत कीमत 4.11 डॉलर प्रति गैलन रही, जो एक महीने पहले 3.90 डॉलर और एक वर्ष पहले 3.15 डॉलर प्रति गैलन थी। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो दुनिया भर में ट्रक, जहाज और हवाई मार्ग से भेजे जाने वाले लगभग सभी सामान महंगे हो सकते हैं।
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नई दिल्ली/ जाने-माने उद्योगपति श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिंदल स्टील लिमिटेड ने निदेशक मंडल की बैठक के बाद महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की। इन निर्णयों पर प्रकाश डालते हुए, बोर्ड ने 24 जुलाई, 2026 से प्रभावी दो साल की अवधि के लिए विद्या रतन शर्मा को कंपनी के अतिरिक्त निदेशक और प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।
श्री शर्मा, जो एक प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञ हैं और जिन्होंने पहले 2019 से 2022 तक प्रबंध निदेशक तथा 2010 से 2014 तक डिप्टी एमडी एवं सीईओ के रूप में कार्य किया है, वे जिंदल स्टील को विकास के अगले चरण में ले जाने के लिए नियुक्त किये गए हैं
अपने कार्यकारी नेतृत्व तंत्र को मजबूत करने और अपने बढ़ते कारोबार को समर्थन देने के व्यापक प्रयास के तहत, जिंदल स्टील लिमिटेड ने 24 जुलाई, 2026 से प्रभावी निम्नलिखित प्रमुख नियुक्तियों की भी घोषणा की:
--संदीप मोदी को मुख्य वित्तीय अधिकारी और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक के रूप में नियुक्त किया गया है। श्री मोदी के पास दो दशकों से अधिक का वित्तीय नेतृत्व का अनुभव है। वे इससे पहले हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड के सीएफओ के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस नियुक्ति के परिणामस्वरूप, अंतरिम सीएफओ के रूप में कार्य कर रहे श्री सुनील अग्रवाल अब वित्त विभाग में ही अन्य महत्वपूर्ण काम देखेंगे।
--राजीव कुमार को मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। श्री कुमार एक धातुकर्म इंजीनियर हैं, जिन्हें स्टील क्षेत्र में नेतृत्व का 35 से अधिक वर्षों का अनुभव है—जिसमें वेदांता एल्युमिनियम के सीईओ और टाटा स्टील में वीपी ऑपरेशन्स (कलिंगनगर) जैसी भूमिकाएं शामिल हैं। वे सभी संयंत्रों और खनन स्थलों के परिचालन की देखरेख करेंगे।
--सुखजीत एस. पसरीचा को मानव संसाधन प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है। इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और एयरटेल जैसे प्रमुख ब्रांडों में लगभग 30 वर्षों का एचआर अनुभव रखने वाले श्री पसरीचा टैलेंट ट्रांसफॉर्मेशन एजेंडे का नेतृत्व करेंगे।
-- एस एस कोठारी मेहता एंड कंपनी एलएलपी को आगामी 47वीं एजीएम के समापन से 52वीं एजीएम तक 5 साल की अवधि के लिए वैधानिक लेखा परीक्षक के रूप में अनुशंसित किया गया है, जो शेयरधारकों के अनुमोदन के अधीन है। -
नई दिल्ली। देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही एनटीपीसी की झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित पकरी-बरवाडीह ओपन कास्ट कोयला खदान को लगातार दूसरे वर्ष फाइव स्टार रेटिंग मिली है। सुरक्षित खनन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के आधार पर कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक कार्यालय (सीसीओ) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यह सम्मान प्रदान किया है। एनटीपीसी की तीन खदानों—झारखंड की पकरी-बरवाडीह, ओडिशा की दुलंगा और छत्तीसगढ़ की तलाईपल्ली—को इस वर्ष फाइव स्टार रेटिंग मिली है। इनमें पकरी-बरवाडीह खदान ने लगातार दूसरे वर्ष देश की ओपन कास्ट खदानों में शीर्ष स्थान हासिल कर अपनी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली का परिचय दिया है।
हजारीबाग स्थित पकरी-बरवाडीह खदान से निकला कोयला देश के कई ताप विद्युत संयंत्रों तक पहुंचता है और करोड़ों लोगों के घरों को रोशन करने में योगदान देता है। एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक (खनन) चंद्रशेखर ने बताया कि एनटीपीसी लगभग 90 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के साथ देश की करीब 24% बिजली जरूरत पूरी करती है। उन्होंने कहा कि देश का हर चौथा बल्ब किसी न किसी रूप में एनटीपीसी की ऊर्जा से रोशन होता है और पकरी-बरवाडीह जैसी खदानें ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। चंद्रशेखर ने बताया कि फाइव स्टार रेटिंग सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और जिम्मेदार खनन के लिए दी गई है। यह उपलब्धि खदान में सुरक्षा मानकों, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का प्रमाण है।पकरी-बरवाडीह में कोयला उत्खनन का कार्य त्रिवेणी सैनिक माइनिंग लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के सीईओ संजय कुमार खटोर ने कहा कि फाइव स्टार रेटिंग केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सतत खनन, तकनीकी प्रबंधन और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का भी प्रमाण है।कोयला नियंत्रक कार्यालय हर वर्ष देशभर की कोयला और लिग्नाइट खदानों का मूल्यांकन करता है। लगातार दूसरी बार फाइव स्टार रेटिंग मिलना न केवल एनटीपीसी, बल्कि हजारीबाग और झारखंड के लिए भी गौरव का विषय है। परियोजना में खनन के बाद भूमि पुनर्वास, हरित क्षेत्र का विकास, जल संरक्षण और धूल नियंत्रण जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके कारण यह परियोजना जिम्मेदार और टिकाऊ खनन के मॉडल के रूप में भी पहचान बना रही है। देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में पकरी-बरवाडीह खदान की लगातार दूसरी फाइव स्टार रेटिंग यह दर्शाती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। बेहतर तकनीक, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार प्रबंधन के बल पर यह परियोजना भारतीय खनन क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है। -
-247 लीटर प्रतिदिन से शुरू हुआ सफर आज 350 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह तक पहुंचा; 36 लाख किसान अमूल सहकारी नेटवर्क से जुड़े
आनंद (गुजरात) । किसानों के शोषण के खिलाफ शुरू हुआ एक छोटा-सा सहकारी आंदोलन आज दुनिया के सबसे बड़े डेयरी सहकारी मॉडलों में शामिल हो चुका है। वर्ष 1946 में महज 247 लीटर प्रतिदिन दूध संग्रह से शुरू हुई अमूल की यात्रा आज गुजरात में 36 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों को जोड़ते हुए प्रतिदिन 350 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह तक पहुंच चुकी है। अमूल की इस ऐतिहासिक यात्रा और सहकारी मॉडल की जानकारी आनंद डेयरी की मानव संसाधन प्रमुख डॉ. प्रीति शुक्ला ने गुजरात के अध्ययन दौरे पर आए छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को दी।डॉ. शुक्ला ने बताया कि 1930 और 1940 के दशक में खेड़ा क्षेत्र दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन दूध के विपणन और आपूर्ति पर निजी डेयरी का नियंत्रण था। किसानों को उनके दूध का उचित लाभ नहीं मिल रहा था और उन्हें लगने लगा था कि इस व्यवस्था में उनका शोषण हो रहा है। किसानों ने इस समस्या को लेकर सरदार वल्लभभाई पटेल से संपर्क किया। उनके मार्गदर्शन में वर्ष 1942 में किसानों की अपनी सहकारी संस्था स्थापित करने की दिशा में पहल शुरू हुई।उन्होंने बताया कि अमूल के संस्थापक अध्यक्ष श्री त्रिभुवनदास पटेल और श्री मोरारजी देसाई ने किसानों को संगठित किया। डेयरी की स्थापना के समर्थन में किसानों ने करीब 15 दिनों तक दूध की हड़ताल की। इसके बाद अंततः किसानों को अपनी सहकारी डेयरी स्थापित करने का मार्ग मिला। इसी आंदोलन के परिणामस्वरूप 14 दिसंबर 1946 को कैरा डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड का पंजीकरण हुआ।247 लीटर से शुरू हुई यात्राडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी। प्रारंभ में प्रतिदिन केवल 247 लीटर दूध का संग्रह होता था। आज अमूल के सहकारी नेटवर्क से गुजरात में 36 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं और प्रतिदिन 350 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि प्रारंभिक दौर में डेयरी का संचालन किराये की सरकारी क्रीमरी के एक हिस्से से किया गया। बाद में अमूल के संस्थापक अध्यक्ष श्री त्रिभुवनदास पटेल द्वारा डेयरी के लिए 50 एकड़ से अधिक भूमि उपलब्ध कराए जाने के बाद इसका विस्तार संभव हुआ।डॉ. वर्गीज कुरियन ने बदली अमूल की दिशाडॉ. प्रीति शुक्ला ने बताया कि वर्ष 1949 में डॉ. वर्गीज कुरियन के आनंद आगमन ने अमूल की विकास यात्रा को नई दिशा दी। इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में आनंद आए डॉ. कुरियन बाद में अमूल के सहकारी आंदोलन से इतने गहराई से जुड़े कि उन्होंने अपना पूरा जीवन किसानों के इस आंदोलन को समर्पित कर दिया। उन्हें आगे चलकर 'भारत का मिल्कमैन' कहा गया।वर्ष 1952 में बॉम्बे स्टेट सरकार द्वारा पोल्सन डेयरी के स्थान पर कैरा यूनियन को दूध आपूर्ति का आदेश दिए जाने के बाद अमूल को मुंबई के एक सुनिश्चित बाजार तक पहुंच मिली। इससे दूध संग्रह और प्रसंस्करण क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ।भैंस के दूध से मिल्क पाउडर बनाने की तकनीक बनी मील का पत्थरअमूल की विकास यात्रा में डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. एच. एम. दलाया के योगदान को भी डॉ. शुक्ला ने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया में उपलब्ध तकनीक मुख्य रूप से गाय के दूध से मिल्क पाउडर बनाने के लिए विकसित थी। भारत में भैंस के दूध की उपलब्धता अधिक थी, लेकिन उससे मिल्क पाउडर बनाना संभव नहीं था।डॉ. दलाया ने भैंस के दूध से मिल्क पाउडर बनाने की तकनीक विकसित की। इस नवाचार से अतिरिक्त दूध को संरक्षित करना संभव हुआ और दूध की अधिक उपलब्धता वाले मौसम में किसानों से दूध लेना जारी रखा जा सका। इससे अमूल के विस्तार को महत्वपूर्ण गति मिली और दूध की बर्बादी रोकने में भी मदद मिली।1955 में शुरू हुआ अमूल-1 संयंत्रअमूल के पहले बड़े संयंत्र का उद्घाटन 31 अक्टूबर 1955 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। करीब एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यह संयंत्र आज भी संचालन में है और इसे अमूल-1 के नाम से जाना जाता है।डॉ. शुक्ला ने बताया कि जब अमूल ने मक्खन का उत्पादन शुरू किया तो उसे बाजार में स्थापित करने के लिए एक ब्रांड की आवश्यकता महसूस हुई। इसी क्रम में 'अमूल' नाम सामने आया। 'अमूल' शब्द संस्कृत के 'अमूल्य' शब्द से प्रेरित माना जाता है, जिसका अर्थ है—अनमोल। बाद में इसे Anand Milk Union Limited के संक्षिप्त रूप के रूप में भी जाना गया।GCMMF ने अमूल को बनाया वैश्विक ब्रांडउन्होंने बताया कि गुजरात में अलग-अलग जिला दुग्ध संघ स्थापित होने के बाद यह महसूस किया गया कि यदि प्रत्येक डेयरी अपने अलग ब्रांड के तहत उत्पाद बेचती है तो आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इसी उद्देश्य से गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) की स्थापना की गई।GCMMF को अमूल ब्रांड के तहत विभिन्न दुग्ध उत्पादों के विपणन की जिम्मेदारी दी गई। आज अमूल ब्रांड भारत के साथ-साथ दुनिया के 50 से अधिक देशों में अपनी पहचान बना चुका है।आनंद मॉडल से देशभर में फैला सहकारी डेयरी आंदोलनडॉ. शुक्ला ने बताया कि वर्ष 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आनंद दौरे ने भारतीय डेयरी क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी। उन्होंने आनंद के सहकारी मॉडल को समझने के बाद यह महसूस किया कि देश के अन्य राज्यों के किसानों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।इसी सोच से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की स्थापना हुई और आनंद मॉडल को देशभर में लागू करने का प्रयास शुरू हुआ। डॉ. वर्गीज कुरियन इसके प्रथम अध्यक्ष बने। आनंद में NDDB का मुख्यालय बनाए जाने के कारण यह क्षेत्र आगे चलकर भारत की 'दुग्ध राजधानी' के रूप में प्रसिद्ध हुआ।किसान मालिक, पेशेवर प्रबंधन संचालकअमूल की सफलता के पीछे किसान और पेशेवर प्रबंधन के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. शुक्ला ने कहा कि अमूल के तीन प्रमुख स्तंभों में संस्थापक अध्यक्ष श्री त्रिभुवनदास पटेल, डॉ. वर्गीज कुरियन और डॉ. एच. एम. दलाया का योगदान उल्लेखनीय है।उन्होंने बताया कि अमूल की सहकारी व्यवस्था में किसानों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि बोर्ड में शामिल होते हैं, जबकि डेयरी का दैनिक संचालन पेशेवर प्रबंधन द्वारा किया जाता है। इस मॉडल में किसान ही सहकारी संस्था के मालिक हैं और पेशेवर अधिकारी उसके संचालन की जिम्मेदारी निभाते हैं।तीन-स्तरीय सहकारी मॉडल है अमूल की ताकतडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल का तीन-स्तरीय सहकारी मॉडल इसकी सफलता का आधार है। इसके तहत ग्राम स्तर पर दुग्ध सहकारी समितियां, जिला स्तर पर दुग्ध संघ और राज्य स्तर पर विपणन संघ कार्य करते हैं।गांवों में किसान सुबह और शाम दूध जमा करते हैं। दूध की गुणवत्ता की तत्काल जांच स्वचालित प्रणालियों से की जाती है और किसानों को उनके दूध की गुणवत्ता की जानकारी दी जाती है। दूध का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाता है और सामान्यतः 10 दिन के दूध चक्र के भीतर भुगतान कर दिया जाता है।इसके बाद दूध को बल्क मिल्क कूलर में 4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर जिला दुग्ध संघों तक पहुंचाया जाता है। गुजरात में 18 जिला दुग्ध संघ विभिन्न क्षेत्रों से दूध संग्रह कर उसका प्रसंस्करण करते हैं। इसके बाद तैयार दुग्ध उत्पादों का विपणन GCMMF के माध्यम से देश और विदेश में किया जाता है।आय का बड़ा हिस्सा किसानों को वापसडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल मॉडल में किसानों को केवल दूध का भुगतान ही नहीं मिलता, बल्कि वर्ष के अंत में होने वाले लाभ में भी उनकी हिस्सेदारी रहती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एक रुपये की आय में से लगभग 82 से 85 पैसे तक किसानों को वापस पहुंचते हैं।इसके अलावा किसानों को रियायती दरों पर पशु आहार, पशु चिकित्सा सेवाएं, पशुपालन संबंधी सुविधाएं और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाता है।पशु उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोरउन्होंने बताया कि वर्तमान समय में अमूल का जोर पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने पर है। इसके लिए पशु पोषण, स्वास्थ्य और प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।अमूल द्वारा 20 से अधिक प्रकार के पशु आहार तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा हरे चारे, सूखे चारे और पशु आहार को वैज्ञानिक अनुपात में मिलाकर टोटल मिक्स्ड राशन (TMR) उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि पशुओं को संतुलित पोषण मिल सके।पशु स्वास्थ्य के लिए ईयर टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और केंद्रीकृत पशु चिकित्सा कॉल सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। किसान मोबाइल एप के माध्यम से पशु चिकित्सा सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और आपात स्थिति में 2 से 4 घंटे के भीतर पशु चिकित्सक किसान के घर तक पहुंच सकता है।इसी प्रकार कृत्रिम गर्भाधान, गर्भावस्था जांच और पशुओं के जन्म से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जाती है। अधिक संख्या में मादा बछड़ों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए सॉर्टेड सीमेन तकनीक तथा बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।दो वर्षों से पूरी तरह पेपरलेस अमूल डेयरीडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल डेयरी में आधुनिक ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। किसानों से संबंधित डेटा डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध है और कर्मचारियों की गतिविधियों के लिए ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू है।उन्होंने बताया कि अमूल डेयरी पिछले दो वर्षों से पूरी तरह पेपरलेस तरीके से काम कर रही है और दैनिक कार्यों में कागज के उपयोग को समाप्त कर दिया गया है।अमूल गर्ल बनी ब्रांड की पहचानअमूल की ब्रांड पहचान में 'अमूल गर्ल' की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1966 में सिल्वेस्टर डीकुन्हा द्वारा इसकी अवधारणा तैयार की गई थी। तब से अमूल गर्ल अमूल की सबसे लोकप्रिय ब्रांड पहचान बनी हुई है। इससे जुड़ा विज्ञापन अभियान दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले विज्ञापन अभियानों में शामिल है और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।50 से अधिक देशों में पहुंचडॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल आज 50 से अधिक देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करता है। अमेरिका और स्पेन में स्थानीय सहकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी के माध्यम से अमूल ने दूध की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था भी विकसित की है।उन्होंने कहा कि अमूल की पूरी व्यवस्था के केंद्र में 36 लाख से अधिक किसान हैं। किसानों की समितियों के साथ नियमित संवाद और उनकी भागीदारी अमूल के निर्णयों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र महिला सशक्तिकरण का भी प्रभावी माध्यम बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की देखभाल, दूध निकालने और पशुपालन से जुड़े अधिकांश कार्यों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में डेयरी सहकारिता महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।इस प्रकार अमूल की यात्रा केवल एक डेयरी ब्रांड के विकास की कहानी नहीं, बल्कि किसान सहकारिता, तकनीकी नवाचार, पेशेवर प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की एक सफल गाथा है। -
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। आरबीआई के जुलाई मासिक बुलेटिन में कहा गया है कि जून तक आर्थिक गतिविधियां तेज रफ्तार से चल रही हैं। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जबकि मजबूत घरेलू मांग ने बाहरी दबावों का सफलतापूर्वक सामना किया है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:– विदेशी व्यापार में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-जून 2026 में निर्यात और आयात दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई।– भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) और अन्य द्विपक्षीय समझौतों से व्यापार को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।– विदेशी निवेश में रिकवरी देखी गई। अप्रैल-मई में सकल और शुद्ध FDI पिछले साल से ज्यादा रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) भी जून में सकारात्मक हो गया।– मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: जून में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन मुख्य मुद्रास्फीति निम्न स्तर पर बनी रही। खाद्यान्न भंडार पर्याप्त होने से खाद्य मुद्रास्फीति पर असर सीमित रहने की संभावना।– तरलता की स्थिति बेहतर हुई, जिससे ऋण वृद्धि को समर्थन मिला।आरबीआई ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और बिखरे व्यापारिक संबंधों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम साबित हो रही है। बुलेटिन में यह भी उल्लेख किया गया कि मार्च 2026 के अंत तक भारत के प्रमुख बाह्य क्षेत्रीय जोखिम संकेतक मजबूत और संतुलित स्थिति में रहे। -
नई दिल्ली। भारत के ताजे आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। देश से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से संयुक्त अरब अमीरात के दुबई तक सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है। यह निर्यात 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से किया गया, जिसके लिए आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल का उपयोग किया गया। यह खेप अमरोहा स्थित शहनाज एक्सपोर्ट द्वारा अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से खाड़ी क्षेत्र की अग्रणी खुदरा श्रृंखलाओं में से एक, यूएई के लुलु ग्रुप को निर्यात की गई। इसमें आईसीएआर-सीआईएसएच का तकनीकी मार्गदर्शन और एपीईडीए का सहयोग प्राप्त हुआ।ëआमों की तुड़ाई 22 जून को की गई और तुड़ाई के बाद वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित प्रबंधन तरीकों के अनुसार उन्हें संभाला गया। फलों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित मेटवॉश से उपचारित किया गया ताकि उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके, वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत किया गया, अमरोहा पैक हाउस में पैक किया गया, 40 फुट के रेफ्रिजरेटर कंटेनर में लोड किया गया और निरंतर कोल्ड चेन के तहत समुद्र के रास्ते दुबई ले जाया गया।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई देरी की वजह से, खेप 17 जुलाई 2026 को गंतव्य बाजार पहुंची, जिससे तुड़ाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की पारगमन अवधि पूरी हुई। लंबी पारगमन अवधि के बावजूद, पहुंचने पर लगभग 90% आम अच्छी और बिकने लायक हालत में पाए गए, जो इस तकनीक की प्रभावशीलता को दर्शाता है।समुद्री मार्ग प्रोटोकॉल के सफल सत्यापन से किसानों की आय बढ़ाने के लिए किफायती निर्यात का एक स्थायी मार्ग उपलब्ध हो गया है। चूंकि समुद्री माल ढुलाई हवाई माल ढुलाई की तुलना में काफी सस्ती है, इसलिए निर्यातकों ने किसानों को अधिक खरीद मूल्य की पेशकश की। परिणामस्वरूप, आम उत्पादकों को पारंपरिक निर्यात चैनलों की तुलना में प्रति किलोग्राम लगभग ₹15-20 की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे कृषि लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनी रही।उत्तर प्रदेश से दुबई तक दशहरी और लंगड़ा आमों की यह पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है, जिसमें कटाई से लेकर बाजार तक की 25 दिन की लंबी पारगमन अवधि का पालन किया गया है। इससे यह साबित होता है कि अब उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय आमों को समुद्री माल ढुलाई के माध्यम से गुणवत्ता से समझौता किए बिना किफायती तरीके से निर्यात किया जा सकता है। उम्मीद है कि यह उपलब्धि निर्यातकों को समुद्री माल ढुलाई को अधिक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के ताजे आमों के निर्यात का विस्तार होगा। इस तकनीक से उत्तर प्रदेश और अन्य आम उत्पादक राज्यों से समुद्री मार्ग से होने वाले आमों के निर्यात के व्यावसायीकरण में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुलेंगे, साथ ही निर्यात से होने वाली आय में वृद्धि होगी, रसद लागत कम होगी और उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों की आजीविका में सुधार होगा। - नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को एक प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई। इसकी वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ना है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट अपनी पिछली क्लोजिंग 1,42,883 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,44,852 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। सुबह 9:47 पर यह 1,517 रुपए या 1.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,44,400 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।अब तक के कारोबार में सोने ने 1,44,311 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,44,883 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर बनाया है और दिखाता है कि खुलने के बाद सोने एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,23,779 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,26,568 रुपए प्रति किलो पर खुला।फिलहाल यह 2,259 रुपए या 1.01 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,26,038 रुपए प्रति किलो पर खुला। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,25,885 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,26,892 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है। इस तेजी की वजह अमेरिका-ईरान में तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग फिर से बढ़ना है। साथ ही, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से भी कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 1.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.50 प्रतिशत की मजबूती के साथ 60 डॉलर प्रति औंस के करीब था।दूसरी तरफ, अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के चलते मध्य पूर्व में तनाव हुआ है। अमेरिका ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमले किए, जिसमें उसकी ड्रोन भंडारण सुविधाओं, समुद्र में हमला करने की क्षमताओं और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, ईरान भी मध्यू पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।
- नयी दिल्ली. भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 2.3 अरब डॉलर के 39 सौदे हुए, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन भारत की रियल एस्टेट क्षेत्र से संबंधित तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में कुल 39 सौदों में निजी इक्विटी (पीई) का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसने कुल सौदा मूल्य का लगभग आधा हिस्सा दिया। सार्वजनिक बाजार गतिविधियां भी मजबूत रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) खंड में अप्रैल-जून के दौरान 36.7 करोड़ डॉलर के 22 सौदे हुए, जो पिछले साल की समान अवधि के 33.5 करोड़ डॉलर से 10 प्रतिशत अधिक हैं।वहीं, पीई एवं उद्यम पूंजी (वीसी) क्षेत्र में 13 सौदे 115.7 करोड़ डॉलर के रहे, जो एक साल पहले की समान अवधि के 45.8 करोड़ डॉलर से काफी अधिक है। इसके अलावा, जून तिमाही में दो आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और दो पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये कुल 78.2 करोड़ डॉलर जुटाए गए, जिसमें आईपीओ से 38.1 करोड़ डॉलर और क्यूआईपी से 40.1 करोड़ डॉलर शामिल हैं। बैगमाने प्राइम ऑफिस रीट ने 35.5 करोड़ डॉलर के निर्गम के साथ आईपीओ गतिविधियों का नेतृत्व किया, जबकि ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट और बैगमाने प्राइम ऑफिसेज रीट ने क्यूआईपी के जरिये धन जुटाने में प्रमुख भूमिका निभाई। इस तिमाही का सबसे बड़ा सौदा माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट और 360 वन अल्टरनेट्स एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा रेडियल आईटी पार्क लिमिटेड में संयुक्त रूप से 32.3 करोड़ डॉलर का निवेश रहा। ग्रांट थॉर्नटन भारत में साझेदार भाविक वोरा ने कहा, ''ये आंकड़े भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाली आय-सृजन करने वाली परिसंपत्तियों की ओर पूंजी का प्रवाह तेज हुआ है, जिससे पीई निवेश और पूंजी बाजार गतिविधियों में तेजी आई है।''
- नयी दिल्ली। नवीन जिंदल समूह ने भारत में परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वैश्विक परमाणु प्रौद्योगिकी कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी है। समूह फ्रांस की ईडीएफ और अमेरिका की वेस्टिंगहाउस समेत कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रौद्योगिकी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि भविष्य की परमाणु परियोजनाओं के लिए समूह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के साथ भी चर्चा कर रहा है। बातचीत का उद्देश्य 700 मेगावाट और उससे अधिक क्षमता वाले बड़े मॉड्यूलर रिएक्टर (एलएमआर) की प्रौद्योगिकी हासिल करने की संभावनाओं का मूल्यांकन करना है। इस्पात से बंदरगाह क्षेत्र में कार्यरत नवीन जिंदल समूह की योजना देश के विभिन्न राज्यों में करीब 18 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की है। इस पर अनुमानित रूप से दो लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पहल केंद्र सरकार के वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में योगदान देगी। समूह नौ से अधिक राज्यों में संभावित स्थलों का आकलन कर रहा है। इनमें गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य शामिल हैं।परियोजनाओं में 700 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले बड़े रिएक्टर को शामिल करने की योजना है। प्रौद्योगिकी विकल्पों के रूप में समूह ईडीएफ के 1,650 मेगावाट क्षमता वाले यूरोपियन प्रेशराइज्ड रिएक्टर (ईपीआर), वेस्टिंगहाउस के 1,150 मेगावाट क्षमता वाले एपी 1000 रिएक्टर और एनपीसीआईएल की स्वदेशी 700 मेगावाट क्षमता वाली प्रेसराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) प्रौद्योगिकी सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। समूह अंतिम प्रौद्योगिकी का चयन सुरक्षा मानकों, विस्तार की क्षमता, व्यावसायिक व्यवहार्यता और लंबे समय तक परिचालन की क्षमता के आधार पर करेगा। सरकार की ओर से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए किए गए कानूनी बदलावों के बाद नवीन जिंदल समूह उन चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणा की है। नवीन जिंदल समूह की अनुषंगी कंपनी जिंदल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड इस योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा टाटा पावर और एनटीपीसी जैसी कंपनियां भी वर्ष 2047 तक देश में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के विकास की योजनाओं पर काम कर रही हैं।
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नयी दिल्ली. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कॉल प्रबंधन ऐप 'ट्रूकॉलर' द्वारा विशेष नंबर श्रृंखला के तहत आने वाले नंबर पर 'फ्रीक्वेंटली ब्लॉक्ड' (अक्सर ब्लॉक किए जाने वाले) का बैज/टैग दिखाए जाने पर आपत्ति जताई है। नियामक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस तरह की टैगिंग उचित नहीं है, क्योंकि इससे दूरसंचार उपभोक्ता गुमराह और भ्रमित हो सकते हैं। साथ ही 1600 और 140 नंबर श्रेणी से आने वाली वैध कॉल को लेकर अनावश्यक संदेह पैदा हो सकता है, जबकि ये नंबर नियामकीय ढांचे के तहत आते हैं। अधिकारी ने कहा कि इसके बजाय ट्रूकॉलर को उपयोगकर्ताओं को यह जानकारी देनी चाहिए कि वे ट्राई के आधिकारिक 'डू नॉट डिस्टर्ब' (डीएनडी) वरीयता प्रबंधन ऐप के माध्यम से 140 नंबर श्रेणी से आने वाली अवांछित प्रचार कॉल को रोकने का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाधान डीएनडी व्यवस्था के बारे में जागरूकता बढ़ाने में है, ताकि लोग अपने पास उपलब्ध विकल्पों को समझ सकें। ट्राई ने विनियमित बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) संस्थाओं द्वारा सेवा एवं लेन-देन से जुड़ी कॉल और सरकार से नागरिकों तक होने वाले संचार के लिए 1600 श्रृंखला के नंबरों का उपयोग अनिवार्य किया है, जबकि 140 श्रृंखला के नंबर विभिन्न क्षेत्रों की पंजीकृत संस्थाओं द्वारा प्रचार संबंधी (प्रचारक) कॉल के लिए हैं। ट्राई अधिकारी ने कॉल प्रबंधन ऐप और उपभोक्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में 1600 नंबरों को 'फ्रीक्वेंटली ब्लॉक्ड' या किसी अन्य नकारात्मक टैग के रूप में नहीं दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1600 श्रेणी का इस्तेमाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडाई) और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) से नियंत्रित संस्थाओं द्वारा अपने मौजूदा ग्राहकों को सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल करने तथा सरकारी संस्थाओं द्वारा नागरिकों को सूचना देने के लिए किया जाता है। अधिकारी ने कहा कि 1600 नंबर से आने वाली कॉल धोखाधड़ी की चेतावनी, लेनदेन की पुष्टि या अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं से जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे में इन पर किसी तरह का टैग लगाने से उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है। ट्राई और ट्रूकॉलर के बीच 140 और 1600 नंबर श्रेणी पर टैग दिखाने को लेकर मतभेद के बीच नियामक की यह टिप्पणी आई है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने दमन के NAMO एयरपोर्ट से दमन-दिल्ली-दमन मार्ग पर पहली सीधी उड़ान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सरकारी क्षेत्र की एयरलाइन एलायंस एयर ने इस सेवा की शुरुआत की है, जिससे दमन को पहली बार दिल्ली से सीधा हवाई संपर्क मिला है।
सरकार के अनुसार, NAMO एयरपोर्ट का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के तहत किया गया है। यह भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के एयर स्टेशन परिसर में विकसित दोहरे उपयोग (ड्यूल-यूज) वाला हवाई अड्डा है। इसके सिविल टर्मिनल की आधारशिला 25 अप्रैल 2023 को रखी गई थी और प्रधानमंत्री ने 5 जून 2026 को इसका उद्घाटन किया था।करीब 124 करोड़ रुपये की लागत से 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस एयरपोर्ट के निर्माण में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 88 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। 3,700 वर्ग मीटर में फैला यह टर्मिनल फिलहाल प्रतिदिन 14 ATR उड़ानों का संचालन कर सकता है और इसकी वार्षिक क्षमता 3.67 लाख यात्रियों की है।राम मोहन नायडू ने कहा कि इस नई सेवा से अब दमन से दिल्ली की यात्रा, जो पहले सूरत या मुंबई के रास्ते 8 से 10 घंटे में पूरी होती थी, अब करीब ढाई घंटे में पूरी की जा सकेगी। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री की उड़ान (UDAN) योजना को दिया।मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की 450 से ज्यादा विकास परियोजनाएं पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के योगदान के सम्मान में स्थानीय लोगों ने इस हवाई अड्डे का नाम NAMO एयरपोर्ट रखा है।उन्होंने बताया कि दमन, दीव और दादरा एवं नगर हवेली में 7,000 से अधिक उद्योग हैं, जबकि आसपास के वापी और वलसाड क्षेत्रों में 15,000 से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। बेहतर हवाई संपर्क से निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।पर्यटन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि हर साल करीब 20 लाख पर्यटक दमन आते हैं और सीधी उड़ान शुरू होने से यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। सरकार भविष्य में रनवे का विस्तार कर एयरबस A320 जैसे बड़े विमानों का संचालन शुरू करने और मुंबई, सूरत, अहमदाबाद तथा पटना जैसे शहरों से भी हवाई संपर्क बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।उन्होंने कहा कि दमन का मत्स्य उद्योग, समुद्री उत्पाद और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र भी इस हवाई संपर्क से लाभान्वित होंगे, क्योंकि अब इनके उत्पाद कम समय में देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाए जा सकेंगे।मंत्री ने यह भी बताया कि संशोधित उड़ान (UDAN) योजना को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाया गया है। इसके तहत 29,000 करोड़ रुपये के निवेश से देशभर में 100 नए हवाई अड्डे और 200 नए हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। कार्यक्रम में दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि NAMO एयरपोर्ट क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए गेमचेंजर साबित होगा और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और बढ़ेगी। -
नई दिल्ली। देश के छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक हवाई यात्रा को आसान और सुलभ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने संशोधित उड़ान (Modified UDAN) योजना शुरू की है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी, जिसके लिए ₹28,840 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस नई योजना के तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलिपैड विकसित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई मजबूती मिलेगी।सरकार ने उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना की शुरुआत अक्टूबर 2016 में की थी, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों तक सस्ती और सुविधाजनक हवाई सेवाएं पहुंचाना था। पिछले नौ वर्षों में इस योजना ने क्षेत्रीय विमानन क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। 15 जुलाई 2026 तक योजना के तहत 679 हवाई मार्ग शुरू किए जा चुके हैं, जो 95 एयरपोर्ट, हेलिपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम को जोड़ते हैं। अब तक 3.58 लाख से अधिक उड़ानों का संचालन हुआ है और 1.68 करोड़ से ज्यादा यात्री इसका लाभ उठा चुके हैं।
नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भी पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां देश में 74 परिचालित एयरपोर्ट थे, वहीं 15 जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 165 हो गई है। सरकार का कहना है कि इस विस्तार में उड़ान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।संशोधित उड़ान योजना में केवल नए एयरपोर्ट बनाने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि छोटे एयरपोर्टों के संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई अड्डों को तीन वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहायता दी जाएगी। साथ ही, छोटे शहरों में उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइंस को Viability Gap Funding (VGF) भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि शुरुआती वर्षों में कम यात्री संख्या के बावजूद सेवाएं जारी रह सकें। इस मद में अगले दस वर्षों के लिए ₹10,043 करोड़ का प्रावधान किया गया है।योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 200 आधुनिक हेलिपैड का विकास भी है। पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में जहां पारंपरिक एयरपोर्ट बनाना कठिन है, वहां हेलीकॉप्टर सेवाओं के जरिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा राहत, प्रशासनिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।सरकार ने इस योजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी जोड़ा है। इसके तहत स्वदेशी विमानन क्षमता बढ़ाने के लिए पवन हंस को दो HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर को दो HAL डोर्नियर विमान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। इन विमानों को विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए उपयुक्त माना जाता है।सरकार का मानना है कि संशोधित उड़ान योजना से छोटे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इससे पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक तेजी से पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी।


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