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नयी दिल्ली। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन विनिर्माता ओला इलेक्ट्रिक ने मंगलवार को 'होली महोत्सव' की घोषणा करते हुए अपनी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल खंड की नई शुरुआती कीमतों का ऐलान किया। कंपनी ने कहा कि यह भारत में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल की दिशा में एक नई शुरुआत है।
'होली' के अवसर पर कंपनी ने बताया कि उसकी रोडस्टर मोटरसाइकिल श्रृंखला अब 79,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध होगी। कंपनी के अनुसार, इस नई कीमत के साथ इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें अब शुरुआती स्तर की पेट्रोल मोटरसाइकिलों के बराबर आ गई हैं। कंपनी की रोडस्टर एक्स श्रृंखला 2.5 किलोवाट-घंटा, 3.5 किलोवाट-घंटा और 4.5 किलोवाट-घंटा बैटरी विकल्पों में उपलब्ध है, जिनकी कीमतें क्रमशः 79,999 रुपये, 92,999 रुपये और 99,999 रुपये रखी गई हैं। वहीं, रोडस्टर एक्स प्लस 4.5 किलोवाट-घंटा और 9.1 किलोवाट-घंटा बैटरी विकल्पों में उपलब्ध है, जिनकी कीमतें क्रमशः 1,09,999 रुपये और 1,89,000 रुपये तय की गई हैं। होली पेशकश के तहत कंपनी ने आज और कल के लिए 'मुहूर्त महोत्सव' की भी शुरुआत की है। इसके अंतर्गत 90 मिनट की निर्धारित 'शुभ मुहूर्त' अवधि में सीमित समय के लिए विशेष ऑफर दिए जाएंगे। इस दौरान सीमित संख्या में वाहन विशेष मुहूर्त कीमत पर उपलब्ध होंगे, जिसकी जानकारी उसी निर्धारित समय में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ग्राहक एस1 प्रो (3 किलोवाट-घंटा और 4 किलोवाट-घंटा) तथा एस1 प्रो प्लस (4 किलोवाट-घंटा) मॉडल पर आठ वर्ष की विस्तारित वारंटी का लाभ भी आज और कल के बीच ले सकेंगे। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ''रोडस्टर की शुरुआती कीमत 79,999 रुपये होने के साथ इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल अब प्रीमियम विकल्प नहीं रही, बल्कि एक समझदारी भरा सामान्य विकल्प बन गई है। यह मूल्य निर्धारण इलेक्ट्रिक वाहन को पेट्रोल के बराबर खड़ा करता है और अब बदलाव की गति और तेज होगी।" - नयी दिल्ली. अक्टूबर में शुरू हुए चालू विपणन सत्र में फरवरी माह तक भारत का चीनी उत्पादन दो करोड़ 47.5 लाख टन तक पहुंच गया, जो कि महाराष्ट्र और कर्नाटक से अधिक उत्पादन के कारण पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 12.43 प्रतिशत अधिक है। उद्योग निकाय इस्मा ने सोमवार को यह जानकारी दी। विपणन वर्ष 2024-25 (अक्टूबर-सितंबर) की समान अवधि में चीनी उत्पादन 2.2 करोड़ टन रहा था।भारतीय चीनी एवं जैव-ईंधन विनिर्माता संघ (इस्मा) ने बयान में कहा कि देश के शीर्ष चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन चालू विपणन वर्ष में फरवरी तक बढ़कर 95.3 लाख टन हो गया, जो एक साल पहले 75 लाख टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 73 लाख टन से मामूली बढ़कर 74.8 लाख टन हो गया, जबकि देश के तीसरे सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कर्नाटक का उत्पादन उक्त अवधि में 38.2 लाख टन से बढ़कर 44.5 लाख टन हो गया। मौजूदा समय में कुल 305 कारखाने चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 330 मिलें चल रही थीं।इस्मा ने कहा कि दक्षिण कर्नाटक में कुछ मिलों के जून/जुलाई से सितंबर, 2026 तक विशेष सत्र के दौरान परिचालन फिर से शुरू करने की उम्मीद है। इस्मा ने कहा कि उद्योग न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द बढ़ोतरी का इंतजार कर रहा है। उत्पादन लागत बढ़ने और पूर्व-मिल प्राप्तियों में कमी के कारण, मिलों को नकदी-प्रवाह दबाव में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे गन्ना भुगतान बकाया बढ़ गया है। महाराष्ट्र में 15 फरवरी तक बकाया 4,601 करोड़ रुपये था, जो पिछले साल की इसी तारीख के 2,744 करोड़ रुपये से अधिक है। इस्मा ने कहा, ''वर्तमान लागत संरचनाओं के अनुरूप समय पर एमएसपी संशोधन, मिल लाभप्रदता को बहाल करने, किसानों के भुगतान में तेजी लाने और सरकार पर किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना बाजार स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।'' अपने तीसरे अनुमान में, इस्मा ने वर्ष 2025-26 के लिए सकल चीनी उत्पादन 3.24 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के दो करोड़ 96.2 लाख टन के वास्तविक उत्पादन से अधिक है।
- मुंबई. देश का विदेशी मुद्रा भंडार मूल्यांकन प्रभाव सहित बाजार मूल्य पर अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 19.4 अरब डॉलर बढ़ गया, जबकि अप्रैल-दिसंबर 2024 में 10.7 अरब डॉलर की कमी हुई थी। भुगतान संतुलन के आधार पर, मूल्यांकन प्रभावों को छोड़कर, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 30.8 अरब डॉलर की कमी आई, जबकि अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान 13.8 अरब डॉलर की कमी हुई थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत में विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव के स्रोत जारी किए। मूल्यांकन लाभ, जो मुख्य रूप से सोने की ऊंची कीमत, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मूल्यह्रास और कम बांड प्रतिफल को दर्शाता है, अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान 3.1 अरब डॉलर से बढ़कर अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 50.2 अरब डॉलर हो गया। चालू खाते के शेष में अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 30.2 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया, जबकि अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान 36.7 अरब डॉलर का घाटा हुआ था। आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, पूंजी खाता घाटा 0.6 अरब डॉलर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 22.9 अरब डॉलर का अधिशेष था।
- नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष छिड़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर यातायात जल्द बहाल नहीं होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी ने सोमवार को यह अनुमान जताया। इस जलमार्ग के बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति का 15 प्रतिशत और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के सरकारी, सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद ईरान ने जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से दूर रहने की चेतावनी दी। बीमा कंपनियों ने भी मालवाहक जहाजों की कवरेज वापस ले ली है जिससे टैंकर की आवाजाही प्रभावी रूप से रुक गई। हाल में हॉर्मुज के पास कम-से-कम तीन जहाजों पर हमले की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड आठ प्रतिशत से अधिक चढ़कर 78.72 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल 7.6 प्रतिशत बढ़कर 72.20 डॉलर पर पहुंच गया। वुड मैकेंज़ी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एलन गेल्डर ने कहा, "यदि ऊर्जा निर्यात का प्रवाह जल्दी बहाल नहीं हुआ तो कीमतों के ऊपर जाने का भारी जोखिम है।" उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरुआती दौर का हवाला देते हुए कहा कि आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं। मौजूदा हालात में भी 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का स्तर संभव है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से आयात बिल बढ़ेगा और ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह 'ओपेक प्लस' ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, गेल्डर ने कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बहाल नहीं होती तो यह निर्णय अप्रासंगिक हो सकता है। वर्ष 2025 में करीब 8.1 करोड़ टन एलएनजी का निर्यात हॉर्मुज के जरिये हुआ था जो वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत है। वुड मैकेंजी में गैस एवं एलएनजी शोध प्रमुख मासिमो दी ओदोआर्दो ने कहा कि आपूर्ति बाधित होने से एशिया और यूरोप के बीच उपलब्ध खेप के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यूरोप का गैस भंडार मौसमी औसत से नीचे है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि बाधा लंबी चली तो असर 1970 के दशक के पश्चिम एशिया के तेल प्रतिबंध जैसा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पहले की तुलना में तेल पर कम निर्भर है, लेकिन गंभीर आपूर्ति झटका कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है।
- नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष तेज होने से भारत और एशिया के अन्य वस्तु आयातक देशों के लिए जोखिम बढ़ गया है। ऊर्जा और व्यापार मार्ग बाधित होने से आपूर्ति एवं कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मूडीज एनालिटिक्स ने सोमवार को यह आशंका जताई। ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल की साझा सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरान के जवाब हमलों से कच्चे तेल एवं गैस की आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरुमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जहां से दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल निर्यात का लगभग एक-तिहाई और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की करीब 20 प्रतिशत खेप गुजरती है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है। मूडीज ने मौजूदा हालात पर अपनी रिपोर्ट में कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लाल सागर और व्यापक पश्चिम एशिया में और बाधाओं का जोखिम बढ़ गया है। हवाई क्षेत्र बंद होने से यात्री एवं कार्गो उड़ानों पर भी असर पड़ा है।" इस मार्ग के बंद होने से एशिया क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है क्योंकि चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देश इस क्षेत्र से तेल-गैस की बड़े पैमाने पर खरीद करते हैं। सोमवार सुबह एशियाई कारोबार में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो शुक्रवार के बंद भाव करीब 72 डॉलर से बहुत अधिक है। शेयर बाजारों में भी शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट देखी गई। मूडीज ने आगाह किया कि ऊंची जिंस कीमतें उपभोक्ता एवं उत्पादक मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती रोकनी पड़ सकती है या दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। ऐसा होने पर आयात बिल बढ़ेगा, व्यापार घाटा बढ़ेगा और मुद्रा पर भी दबाव पड़ सकता है। एजेंसी ने कहा, "यह संघर्ष भारत के लिए स्थिति को और जटिल बना देता है। वह पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है और उसने अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीद धीरे-धीरे कम करने पर भी सहमति जताई है।" रिपोर्ट कहती है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात या समुद्री यातायात में लंबी बाधा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज संबंधी चिंताओं को फिर जगा सकती है। एजेंसी ने कहा कि वह पश्चिम एशिया के हालात पर नजर रखे हुए है और अगले सप्ताह अपने आधारभूत पूर्वानुमान में इसके प्रभाव का आकलन जारी करेगी।
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नयी दिल्ली. वैश्विक दूरसंचार उद्योग निकाय जीएसएमए ने भारती एंटरप्राइज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल को प्रतिष्ठित 'लाइफटाइम अचीवमेंट' पुरस्कार से सम्मानित किया है। भारती एयरटेल ने सोमवार को बताया कि मित्तल को यह सम्मान वैश्विक दूरसंचार परिदृश्य को नया स्वरूप देने और दुनिया भर में परिचालकों, सरकारों, व्यवसायों और अरबों उपभोक्ताओं के बीच संपर्क के विस्तार में उनके योगदान के लिए दिया गया है। जीएसएमए के इतिहास में यह पुरस्कार अब तक केवल कुछ गिने-चुने उद्योग जगत के दिग्गजों को ही प्रदान किया गया है। मित्तल यह उपलब्धि प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय हैं। कंपनी द्वारा जारी वक्तव्य के अनुसार, "जीएसएमए ने सुनील भारती मित्तल को वैश्विक दूरसंचार क्षेत्र में उनके अनुकरणीय नेतृत्व और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए इस सम्मान से नवाजा है।" यह पुरस्कार बार्सिलोना में आयोजित 'मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस' (एमसीडब्ल्यू) में स्पेन के राजा फेलिप छठे, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, कैटेलोनिया के राष्ट्रपति साल्वाडोर इला और उद्योग जगत के अन्य प्रमुखों की उपस्थिति में प्रदान किया गया। इस अवसर पर मित्तल ने कहा, "मैं यह सम्मान पाकर अत्यंत गौरवान्वित हूं और इसके लिए जीएसएमए का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इसे न केवल अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में बल्कि भारत की दूरसंचार यात्रा, भारती की सामूहिक भावना और वैश्विक पटल पर भारतीय दूरसंचार कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के सम्मान के रूप में स्वीकार करता हूं।" मित्तल से पूर्व, वर्ष 2023 में यह पुरस्कार 'सेल फोन के जनक' के रूप में विख्यात मार्टिन कूपर को प्रदान किया गया था।मित्तल ने 2017 से 2018 तक जीएसएमए के चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।
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नयी दिल्ली. सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह फरवरी में सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। आयात से प्राप्त राजस्व में उच्च वृद्धि और घरेलू बिक्री में सुधार का इस बढ़ोतरी में मुख्य योगदान रहा। इस दौरान सकल घरेलू राजस्व 5.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि आयात से सकल राजस्व 17.2 प्रतिशत बढ़कर 47,837 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कुल शुद्ध जीएसटी संग्रह 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 7.9 प्रतिशत अधिक है। कुल रिफंड 10.2 प्रतिशत बढ़कर 22,595 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध उपकर राजस्व 5,063 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल फरवरी में 13,481 करोड़ रुपये था।
सितंबर, 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती की गई थी। साथ ही पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार कर स्लैब को मिलाकर पांच और 18 प्रतिशत के दो स्लैब बनाए गए थे। इसके अलावा कुछ चुनिंदा अति-विलासिता की वस्तुओं और तंबाकू उत्पादों के लिए अधिकतम 40 प्रतिशत का स्लैब रखा गया था। कर कटौती लागू होने के पहले महीने में जीएसटी संग्रह में शुरुआती गिरावट देखी गई और नवंबर में राजस्व घटकर 1.70 लाख करोड़ रुपये रह गया था। इसके बाद दिसंबर में संग्रह बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये और जनवरी में 1.93 लाख करोड़ रुपये हो गया। डेलॉयट इंडिया के भागीदार एम एस मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह के आंकड़े दर्शाते हैं कि उपभोग में हुई बढ़ोतरी ने कर दरों में की गई कटौती की भरपाई कर दी है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों द्वारा दर्ज की गई नकारात्मक वृद्धि, और पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में राष्ट्रीय औसत से कम एकल अंक की वृद्धि चिंता का विषय है। ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार मनोज मिश्रा ने कहा कि चालू वर्ष में अब तक कुल संग्रह 8.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि उच्च आधार के बावजूद जीएसटी राजस्व मजबूत बना हुआ है। -
साणंद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर में अपनी ताकत के लिए पहचाने जाने के बाद अब देश हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान मजबूती से स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्थित कंपनी के एटीएमपी (संयोजन, परीक्षण, अंकन और पैकेजिंग) संयंत्र का उद्घाटन भारत और अमेरिका के बीच गहरी साझेदारी को दर्शाता है। मोदी ने कहा कि दुनिया तक यह संदेश साफ और स्पष्ट रूप से पहुंच गया है कि भारत सक्षम है, भारत प्रतिस्पर्धी है और भारत प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''सॉफ्टवेयर की ताकत के लिए लंबे समय से पहचाने जाने वाला भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूती से बना रहा है।'' उन्होंने कहा, ''अगर पिछली सदी में तेल की अहमियत थी, तो इस सदी की दिशा तय करने वाले माइक्रोचिप्स होंगे।'' उन्होंने आगे कहा कि भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला का एक अभिन्न अंग बन रहा है। एक सरकारी बयान के अनुसार यह संयंत्र एसएसडी (सॉलिड स्टेट ड्राइव) भंडारण उपकरण के साथ ही रैम प्रकार के डीरैम और एनएएनडी उत्पादों का निर्माण करेगा। माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने इस संयंत्र में 22,516 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
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नयी दिल्ली. ईरान पर अमेरिका-इजराइल द्वारा किये गए हमले और जवाब में उसके द्वारा विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद पैदा हुई स्थिति के मद्देनजर विमानन कंपनी इंडिगो ने शनिवार को पश्चिम एशिया के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। इंडिगो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, '' ईरान और पश्चिम एशिया के आसपास के हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित किये जाने के मद्देनजर इलाके में आने-जाने वाली सभी उड़ानें भारतीय समयानुसार रात 12 बजे तक रद्द कर दी गई हैं।'' एक सूत्र के अनुसार, दुबई, जेद्दा, दोहा, अबू धाबी, दम्माम, बहरीन, शारजाह, कुवैत और रस अल-खैमाह से आने-जाने वाली सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। विमानन कंपनी ने कहा कि उसके लिए यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है इसीलिए ये उपाय लागू किए गए हैं। इसने कहा, ''हमारी टीमें लगातार बदलती स्थिति पर नजर रख रही हैं और व्यवधान को यथासंभव कम करने के लिए परिचालन को पुनर्व्यवस्थित कर रही हैं।'' इस बीच, एअर इंडिया एक्सप्रेस ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में उत्पन्न हो रही स्थिति को देखते हुए, उसने पश्चिम की ओर जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को निलंबित कर दिया है। विमानन कंपनी ने बयान में कहा,''हम बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और जरूरत के हिसाब से अपने परिचालन की समीक्षा और उसमें बदलाव करेंगे।'' बाद में, एअर इंडिया ने एक बयान में कहा कि क्षेत्र में उत्पन्न हो रही स्थिति को देखते हुए उसने पश्चिम एशिया जाने वाली अपनी सभी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। एअर इंडिया ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, '' पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में उत्पन्न हो रही स्थिति को देखते हुए, उस क्षेत्र के सभी गंतव्यों के लिए एअर इंडिया की सभी उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं।'' विमानन कंपनी ने कहा कि वह अपने यात्रियों और चालक दल के लिए सुरक्षा के ''उच्चतम मानकों'' को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें कहा गया, ''हम अपनी उड़ान सेवाओं के लिए सुरक्षा और संरक्षा के माहौल का लगातार आकलन करते रहते हैं और आवश्यकतानुसार सक्रिय रूप से परिचालन में बदलाव करेंगे। हमारी टीमें यात्रियों को हर संभव सहायता कर रही है।'' इससे पहले, एअर इंडिया ने कहा था कि इजराइली हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उसकी दिल्ली-तेल अवीव उड़ान भारत लौट रही है। यह उड़ान मुंबई में उतरेगी।
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नई दिल्ली। फरवरी का महीना अपनी समाप्ति की ओर है और मार्च 2026 की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में अगर आप मार्च में बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले बैंक छुट्टियों की सूची जरूर देख लें। कई बार जरूरी काम के लिए बैंक शाखा में जाना पड़ता है, लेकिन छुट्टी होने पर काम अटक सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आधिकारिक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, मार्च 2026 में अलग-अलग राज्यों में कुल 18 दिन बैंक बंद रहेंगे। इनमें साप्ताहिक अवकाश, दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा विभिन्न राज्यों के त्योहार भी शामिल हैं।मार्च की शुरुआत 1 मार्च (रविवार) से होगी, जो देश भर में साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 2 मार्च (सोमवार) को होलिका दहन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे। 3 मार्च (मंगलवार) को होली के मौके पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब समेत लगभग 15 राज्यों में बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी। वहीं, 4 मार्च (बुधवार) को कुछ राज्यों और शहरों में होली के दूसरे दिन भी बैंक बंद रहेंगे।इसके बाद, 8 मार्च (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 13 मार्च (शुक्रवार) को मिजोरम में चापचर कुट पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। 14 मार्च को दूसरे शनिवार और 15 मार्च को रविवार होने से देश भर में बैंक बंद रहेंगे। 17 मार्च (मंगलवार) को जम्मू और श्रीनगर में शब-ए-कद्र के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। 19 मार्च (गुरुवार) को महाराष्ट्र सहित 11 राज्यों में गुड़ी पड़वा, उगादी और नवरात्रि की शुरुआत के चलते अवकाश रहेगा। 20 मार्च (शुक्रवार) को ईद-उल-फितर पर देश भर में बैंक बंद रहेंगे। 21 मार्च (शनिवार) को रमजान ईद और सरहुल पर्व के अवसर पर भी बैंक बंद रहेंगे।22 मार्च (रविवार) को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। 26 मार्च (गुरुवार) को श्रीराम नवमी के कारण बैंक बंद रहेंगे, जबकि 27 मार्च (शुक्रवार) को कुछ राज्यों में राम नवमी के बाद दशमी के उपलक्ष्य में अवकाश रहेगा। 28 मार्च को चौथा शनिवार और 29 मार्च को रविवार होने से देश भर में बैंक बंद रहेंगे। महीने के अंत में 31 मार्च (मंगलवार) को श्री महावीर जयंती के अवसर पर लगभग 15 राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। हालांकि शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। इन माध्यमों से आप पैसे का लेन-देन, फंड ट्रांसफर और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।मार्च में बैंक छुट्टियों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी कुल 12 दिन बंद रहेगा। 3 मार्च (होली), 26 मार्च (श्रीराम नवमी) और 31 मार्च (श्री महावीर जयंती) को बाजार में कारोबार नहीं होगा। इसके अलावा शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश के चलते कुल 9 दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में, मार्च महीने में बैंक या बाजार से जुड़े किसी भी जरूरी काम की योजना बनाते समय छुट्टियों की सूची अवश्य जांच लें, ताकि आपका काम समय पर और बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके। -
नयी दिल्ली. भारत की 'जेनरेशन एक्स' आबादी वर्ष 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के सामान और सेवाओं की खपत कर सकती है। सलाहकार फर्म रेडसीर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल करीब 45-60 वर्ष आयु वर्ग वाली यह पीढ़ी प्रति व्यक्ति खपत में बढ़ोतरी के चलते प्रीमियम और टिकाऊ उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण उपभोक्ता वर्ग बन रही है। रिपोर्ट कहती है कि निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च 17 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर वित्त वर्ष 2029-30 तक 73 अरब डॉलर पहुंच सकता है। दरअसल, यह पीढ़ी बीमारी के बाद इलाज के बजाय लंबी उम्र और बेहतर जीवन गुणवत्ता पर केंद्रित स्वास्थ्य उपायों को प्राथमिकता दे रही है। इसी तरह, पोषक-तत्व आधारित स्वास्थ्य उत्पादों पर खर्च भी 25 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़कर 2030 तक 20 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। रेडसीर में साझेदार मृगांक गुटगुटिया ने कहा कि जेन एक्स आर्थिक रूप से स्थिर, डिजिटल रूप से आत्मविश्वासी और अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है। यह पीढ़ी अब बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण यात्रा अनुभव, बेहतर घर और टिकाऊ उत्पादों पर सोच-समझकर खर्च करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सौंदर्य एवं व्यक्तिगत देखभाल खंड में इस पीढ़ी की खपत 2030 तक बढ़कर आठ अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। यात्रा के मामले में यह तबका आरामदायक और प्रीमियम अनुभव को प्राथमिकता दे रहा है। लक्जरी विला और बुटीक आवास जैसे विकल्पों की मांग में सालाना 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जेन एक्स पीढ़ी अब भी शिक्षा को 'भविष्य-केंद्रित खर्च' मानती है। शहरी परिवार प्रति बच्चे पर सालाना 10-20 लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं और कैंब्रिज, इंटरनेशनल बोर्ड से पढ़ाई और विदेशी शिक्षा कार्यक्रमों की ओर रुझान बढ़ रहा है।
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मुंबई. उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज एप्पल ने बृहस्पतिवार को यहां एक उपनगरीय शॉपिंग मॉल में एक स्टोर खोला, जिससे उसके फोन और अन्य उत्पादों की स्वीकार्यता में तेजी से वृद्धि के बीच देश में उसके कुल बिक्री केंद्रों की संख्या छह हो गयी है। अमेरिका स्थित आईफोन निर्माता ने बृहस्पतिवार दोपहर वित्तीय राजधानी में अपने दूसरे स्टोर के दरवाजे खोले तो वहां भारी भीड़ थी। कंपनी, जिसे शुरुआत में खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर नियमों को लेकर बाधाओं का सामना करना पड़ा, ने अप्रैल, 2023 में भारत में अपना पहला स्टोर खोला था। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दो बिक्री केंद्र हैं और बेंगलुरु और पुणे में एक-एक है। कंपनी के अनुसार, स्काई सिटी मॉल का नवीनतम स्टोर 70 से अधिक लोगों को रोजगार देगा और अपनी सभी ऊर्जा जरूरतों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करेगा। कंपनी ने कहा, इसमें एप्पल उत्पादों और सेवाओं की पूरी श्रृंखला होगी।
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रायपुर। देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक और महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा निर्मित आईएनएस अंजदीप (INS Anjadip) के लिए ज़रूरत की पूरी मात्रा की स्पेशल ग्रेड स्टील की आपूर्ति की है। आईएनएस अंजदीप भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्वेट है। इससे पहले पिछले साल आईएनएस अरनाला और आईएनएस एंड्रोथ भी शामिल किए जा चुके हैं।
नौसेना के पुराने होते 'अभय-श्रेणी' के जहाजों को बदलने के लिए इन ASW-SWC कार्वेट का निर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। इस रणनीतिक प्रयास में योगदान देते हुए, सेल (SAIL) ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा बनाए जा रहे आठ ASW-SWC कार्वेट के लिए लगभग 3,500 टन विशेष-ग्रेड स्टील की पूरी मात्रा की आपूर्ति की है। इस स्टील की आपूर्ति सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों से की गई है, जो देश की डोमेस्टिक सप्लाई चेन की मजबूती को रेखांकित करता है। यह उपलब्धि रक्षा विनिर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने के प्रति सेल की प्रतिबद्धता को उजागर करती है। पिछले कुछ वर्षों में, सेल ने रक्षा स्वदेशीकरण में देश की विशेष-ग्रेड स्टील की जरूरतों को लगातार पूरा किया है और आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस सूरत जैसी अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए स्टील की आपूर्ति की है। - नयी दिल्ली. ऑनलाइन आवास सुविधा देने वाले मंच एयरबीएनबी ने कहा कि भारत में क्रिकेट आयोजनों ने घरेलू यात्रा को बढ़ावा दिया है। मंच ने कहा कि क्रिकेट मैच की मेजबानी करने वाले शहरों में मांग उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। एयरबीएनबी ने बयान में कहा कि क्रिकेट मैच आयोजनों के दौरान अहमदाबाद, रांची और तिरुवनंतपुरम जैसे महानगरों से इतर शहरों में ठहरने की स्थान की तलाश सालाना आधार पर काफी अधिक बढ़ गई। कंपनी ने कहा कि महानगरों के अलावा उभरते क्रिकेट केंद्रों में सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। रांची में सालाना आधार पर खोज में लगभग 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तिरुवनंतपुरम के लिए यह आंकड़ा 110 प्रतिशत से अधिक रहा। जयपुर और लखनऊ में खोज में क्रमशः 70 प्रतिशत और 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई। इस समय भारत, श्रीलंका के साथ मिलकर आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप की मेजबानी कर रहा है। इसके बाद भारत की घरेलू लीग आईपीएल का आयोजन होगा। एयरबीएनबी के भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के प्रमुख अमनप्रीत सिंह बजाज ने कहा कि लोग अपनी यात्रा की अवधि बढ़ा रहे हैं, और गंतव्यों को अधिक गहराई से महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि निजी सूचीबद्ध गैर-वित्तीय कंपनियों की राजस्व वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 10.1 प्रतिशत रही। इससे पहले लगातार 11 तिमाहियों तक इन कंपनियों की राजस्व वृद्धि इकाई अंक में ही बनी हुई थी।आरबीआई के विश्लेषण में शामिल 3,188 कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर, 2025 की तिमाही में इन कंपनियों की राजस्व वृद्धि में तेजी का श्रेय मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन को जाता है। निजी क्षेत्र की 1,794 सूचीबद्ध विनिर्माण कंपनियों की बिक्री पिछली तिमाही में सालाना आधार पर 11.4 प्रतिशत बढ़ी, जो इसके पहले की तिमाही में 8.5 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से वाहन, बिजली मशीनरी और अलौह धातु उद्योगों में उच्च बिक्री का नतीजा है। सेवा क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों की बिक्री वृद्धि जुलाई-अगस्त तिमाही के 7.8 प्रतिशत से बढ़कर 8.8 प्रतिशत हो गई। वहीं गैर-आईटी सेवा कंपनियों की बिक्री वृद्धि तीसरी तिमाही में 10.8 प्रतिशत पर स्थिर रही। आरबीआई ने कहा कि लाभ कमाने के लिहाज से विनिर्माण कंपनियों का परिचालन लाभ तीसरी तिमाही में 11.8 प्रतिशत बढ़ा, जिसे अन्य परिचालन खर्चों में मध्यम वृद्धि से समर्थन मिला। आलोच्य तिमाही में आईटी कंपनियों के परिचालन लाभ में वृद्धि दर सुधरकर 11.1 प्रतिशत हो गई, जबकि गैर-आईटी सेवा कंपनियों के लिए यह घटकर चार प्रतिशत रह गई। समग्र स्तर पर इन कंपनियों का शुद्ध लाभ अक्टूबर-दिसंबर, 2025 तिमाही में 5.2 प्रतिशत बढ़ा, जो जुलाई-सितंबर तिमाही के 1.5 प्रतिशत से अधिक है। लेकिन यह एक साल पहले की समान अवधि में दर्ज 11.8 प्रतिशत वृद्धि से कम है। आरबीआई के मुताबिक, विनिर्माण कंपनियों का कच्चे माल पर व्यय बिक्री में वृद्धि के अनुरूप 12.7 प्रतिशत बढ़ा। वहीं विनिर्माण और आईटी कंपनियों के कर्मचारियों पर होने वाला खर्च क्रमशः 12.4 प्रतिशत और 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि उच्च, स्थिर और बढ़ती वृद्धि दर के साथ-साथ अधिक अनुकूल आर्थिक परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था की पहचान बन गए हैं। गुप्ता ने 20 फरवरी को सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज़ (सीडीएस) के 14वें स्थापना दिवस पर व्याख्यान में कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिरता, नीतिगत निरंतरता और विविध मांग आधार के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर होती वृद्धि दर की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "यह अधिकांश अन्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक बेहतर स्थिति है, क्योंकि उनमें इन सहायक कारकों में से एक या अधिक की कमी है।" गुप्ता ने कहा कि पिछले साढ़े चार दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि धीमी लेकिन निश्चित गति से बढ़ी है, जो अन्य प्रमुख उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन है। उनके अनुसार, जहां 1980 के दशक के दौरान औसत वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत थी, वहीं अगले दशक में यह सुधरकर 5.8 प्रतिशत हो गई। इसके बाद 2000 और 2010 के दशकों के दौरान यह क्रमशः 6.3 और 6.6 प्रतिशत रही तथा पिछले चार वर्षों के दौरान यह बढ़कर 7.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गुप्ता ने कहा कि वृद्धि के साथ-साथ व्यापक आर्थिक संकेतकों में भी जबर्दस्त सुधार हुआ है। मुद्रास्फीति (महंगाई) 1990 के दशक के लगभग 10 प्रतिशत से घटकर हाल के वर्षों में पांच प्रतिशत से नीचे आ गई है, जिससे भारत और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बीच मुद्रास्फीति का अंतर कम हुआ है।
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नयी दिल्ली. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शुल्क के खिलाफ अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बढ़ती वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच मजबूत सुरक्षित-निवेश की मांग के कारण सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान चांदी 2.7 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई जबकि सोना 1.6 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी शुक्रवार के 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 8,000 रुपये या 3.03 प्रतिशत चढ़कर 2,72,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 3,300 रुपये या 2.06 प्रतिशत बढ़कर 1,62,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। पिछले बाजार सत्र में यह 1,59,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी और सोने में सोमवार को तेजी की गति बनी रही। दोनों धातुएं तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रही थीं, जिसे नए सिरे से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने का समर्थन मिला। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा कि यह तेजी, ट्रंप के शुल्क के खिलाफ अमेरिकी अदालत के ऐतिहासिक फैसले के बाद आई। फैसले के जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को वैश्विक शुल्क दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा करके अपने व्यापार एजेंडा को बनाए रखने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया। गांधी ने कहा कि अचानक नीतिगत बदलाव ने वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, दुनिया भर में कई सरकारें सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया दे रही हैं - कुछ व्यापार समझौतों की पुष्टि कर रही हैं, जबकि अन्य अमेरिका के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.79 या 2.2 प्रतिशत बढ़कर 86.50 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 5,151 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के जिंस शोघ के प्रमुख हरेश वी ने कहा, ''शुल्क और उनकी वैधता को लेकर अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतें बढ़ी हैं। भले ही अदालत शुल्क को अमान्य मानता है, लेकिन चल रहा व्यापार तनाव अभी भी डॉलर पर दबाव डाल सकता है और सर्राफा को समर्थन दे सकते है।''
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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि नियामक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस), लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (एलओडीआर) नियमों और सेटलमेंट ढांचे की समीक्षा करेगा। इन विषयों पर कंसल्टेशन पेपर जून में जारी किया जा सकता है।
पोर्टफोलियो मैनेजर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा कि पीएमएस फ्रेमवर्क में निवेशक सबसे अहम पहलू है। इस सेगमेंट में पारदर्शिता पहले से बेहतर हुई है, लेकिन बाजार में बदलाव और नए निवेश उत्पादों के कारण मौजूदा नियमों की समीक्षा करना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि सेबी बाजार की गड़बड़ियों का वास्तविक समय में पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि तुरंत समाधान किया जा सके।पांडेय ने कहा कि सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक बाजार को गहराई देने के उद्देश्य से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स या उससे जुड़े उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इन्हें एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकेगा, जिससे निवेशकों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। उन्होंने ट्रेडिंग से जुड़ी फंडिंग के नियमों में बदलाव के संकेत भी दिए। आरबीआई के लेंडिंग नियमों की समीक्षा कर सेबी अपनी राय आरबीआई के साथ साझा करेगा। इससे संकेत मिलता है कि मार्जिन ट्रेडिंग या लोन लेकर ट्रेडिंग से जुड़े नियम और सख्त हो सकते हैं। पांडेय ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस तेज आर्थिक वृद्धि से देश में निवेशकों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। मुंबई में आयोजित पोर्टफोलियो मैनेजर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इस तेज आर्थिक वृद्धि से देश में समृद्ध (Affluent) निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। उनके अनुसार, उच्च-नेटवर्थ निवेशक पारंपरिक निवेश विकल्पों से आगे बढ़कर पेशेवर रूप से प्रबंधित और अधिक परिष्कृत निवेश समाधान चाहते हैं, जो मानकीकृत उत्पादों से अलग हों। पांडेय ने बताया कि बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए SEBI LODR, सेटलमेंट और PMS नियमों की समीक्षा कर रहा है। यह समीक्षा उद्योग और निवेशकों से मिले फीडबैक के आधार पर तर्कसंगत (rationalization) ढांचे के लिए की जा रही है, ताकि नियामकीय ढांचा समकालीन और प्रभावी बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि PMS नियमों की समीक्षा 2020 के बाद पहचानी गई कुछ जरूरतों के आधार पर की जा रही है, हालांकि इसकी अंतिम रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है। प्रस्तावित बदलावों पर सार्वजनिक सुझाव लेने के लिए एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया जाएगा। बाजार की स्थिरता और तकनीक के उपयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि SEBI बाजार में गड़बड़ियों की “रियल-टाइम डिटेक्शन” के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि केवल प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई के बजाय त्वरित निगरानी संभव हो सके। उन्होंने बताया कि SEBI और RBI संयुक्त रूप से कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स और उससे जुड़े उत्पाद विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिन्हें स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकेगा। यह कदम डेट मार्केट को गहराई देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, क्योंकि यह उत्पाद दोनों नियामकों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
उद्योग से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि SEBI गिरवी (Collateral) और बैंक गारंटी से संबंधित RBI दिशा-निर्देशों पर ब्रोकरों के प्रतिनिधित्व की समीक्षा करेगा, ताकि प्रोपाइटरी ट्रेडिंग को सुगम बनाने के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा सके। पांडेय के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति निवेश परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव लाने जा रही है, जिसके लिए नियामकीय ढांचे को भी समयानुकूल बनाना आवश्यक है। -
नई दिल्ली। एप्पल का आईफोन 2025 में भारत से सबसे ज्यादा निर्यात किया जाने वाला उत्पाद बन गया है और इस दौरान करीब 23 अरब डॉलर के आईफोन (अधिकतर अमेरिका को) का निर्यात किया गया है। यह जानकारी इंडस्ट्री डेटा से सामने आई। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की ओर से कहा गया कि एप्पल के निर्यात में यह उछाल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम जैसे उत्पादन प्रोत्साहनों और चीनी आपूर्तिकर्ताओं से विविधीकरण के कारण आया।
जनवरी-दिसंबर की अवधि में कुल 30.13 अरब डॉलर के निर्यात के साथ, स्मार्टफोन पहली बार भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बन गई है, जिन्होंने ऑटोमोबाइल डीजल ईंधन को पीछे छोड़ दिया है। कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही। एप्पल की पांच वर्षीय पीएलआई अवधि मार्च 2026 में समाप्त होने वाली है।देश में एप्पल के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में पांच आईफोन असेंबली प्लांट शामिल हैं, जिनमें से तीन टाटा समूह की इकाइयों द्वारा और दो फॉक्सकॉन द्वारा संचालित हैं और इन्हें लगभग 45 कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला का समर्थन प्राप्त है, जिनमें कई एमएसएमई शामिल हैं जो घरेलू और वैश्विक परिचालन के लिए पुर्जे की आपूर्ति करते हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया है, जहां घरेलू स्तर पर बिकने वाले 99 प्रतिशत से अधिक फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैं। इससे विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में भारत का स्थान और भी बढ़ गया है।काउंटरपॉइंट रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं के स्मार्टफोन खरीदने के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है, अब बजट की जगह प्रीमियम फोन अधिक बिक रहे हैं। 2025 में एप्पल का आईफोन 16 का बेस वेरिएंट सबसे अधिक बिकने वाला स्मार्टफोन मॉडल बनकर उभरा है। दिसंबर तिमाही में, एप्पल ने अमेरिका, यूरोप, जापान और शेष एशिया प्रशांत क्षेत्र में राजस्व के सर्वकालिक नए रिकॉर्ड बनाए।एप्पल के सीईओ टिम कुक ने हाल ही में आयोजित अर्निंग्स कॉल में कहा, “हमने उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, में अपनी गति बनाए रखी है, जहां हमने राजस्व में दो अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की है।” कंपनी 26 फरवरी को मुंबई में एक और स्टोर खोलने जा रही है। एप्पल के सीईओ ने कहा कि उन्होंने भारत में दिसंबर तिमाही के दौरान राजस्व का एक नया रिकॉर्ड बनाया।उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार और चौथा सबसे बड़ा पीसी बाजार है।” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी ने “आईफोन, मैक और आईपैड पर राजस्व के नए रिकॉर्ड बनाए हैं, और सेवाओं पर राजस्व का सर्वकालिक नया रिकॉर्ड बनाया है।” - नयी दिल्ली ।अरबपति मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी की अगुवाई वाले उद्योग समूहों ने भारत को कृत्रिम मेधा (एआई) विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से अवसंरचना निर्माण में कुल 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन अंबानी ने यहां आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के दौरान अगले सात वर्षों में गुजरात के जामनगर में गीगावाट-स्तर के एआई-सक्षम डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये (करीब 110 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश की घोषणा की। यह परियोजना 10 गीगावाट तक के हरित ऊर्जा अधिशेष का उपयोग करेगी और दूरसंचार एवं डिजिटल सेवा प्रदाता जियो के नेटवर्क के साथ एकीकृत 'एज-कम्प्यूट' परत के माध्यम से देशभर में बहुत कम देरी वाली एआई सेवाएं उपलब्ध कराएगी।अंबानी ने कहा, ''हमारा संकल्प स्पष्ट है, जिस तरह आज कनेक्टिविटी हर जगह उपलब्ध है, उसी तरह एआई को भी सर्वसुलभ बनाना है। जब कंप्यूटिंग क्षमता एक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो जाएगी, तो नवाचार अपने-आप तेजी से बढ़ेगा।" दूसरी तरफ, अदाणी की अगुवाई वाले अदाणी समूह ने वर्ष 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा आधारित बहुत बड़े स्तर के एआई-सक्षम डेटा सेंटर विकसित करने के लिए 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की योजना पेश की। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत ऊर्जा एवं कंप्यूटिंग प्रतिबद्धता है। इस पहल से सर्वर विनिर्माण, क्लाउड मंच और सहायक उद्योगों में अतिरिक्त 150 अरब डॉलर के निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे भारत में लगभग 250 अरब डॉलर की एआई अवसंरचना पारिस्थितिकी विकसित हो सकती है। अदाणी समूह के कार्यकारी निदेशक जीत अदाणी ने कहा कि भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय अपना खुद का एआई ढांचा विकसित करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई आने वाले समय में राष्ट्रीय संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगा। सम्मेलन के दौरान हुई अन्य प्रमुख घोषणाओं में माइक्रोसॉफ्ट की इस दशक के अंत तक 'वैश्विक दक्षिण' में एआई पहुंच बढ़ाने के लिए 50 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है। कंपनी ने पिछले वर्ष भारत में एआई क्षेत्र में 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इसी क्रम में गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने भारत, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों के बीच एआई संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए एक नया समुद्री केबल बिछाने की घोषणा की। इसके अलावा, योटा डेटा सर्विसेज ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट स्थापित किए जा रहे एआई कंप्यूटिंग हब के लिए एनवीडिया के नवीनतम चिप्स पर दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च करने की योजना बनाई है। साथ ही, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने वैश्विक एआई अवसंरचना पहल 'स्टारगेट' के तहत अपने डेटा सेंटर कारोबार के लिए ओपनएआई को पहला ग्राहक बनाया है। वहीं, बुनियादी ढांचा कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने बड़े पैमाने पर एआई कार्यभार का समर्थन करने के लिए एआई-सक्षम डेटा सेंटर अवसंरचना और उन्नत कंप्यूटिंग मंच विकसित करने हेतु एनवीडिया के साथ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम की घोषणा की है।
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नयी दिल्ली. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में मुख्य भाषण नहीं देंगे। गेट्स फाउंडेशन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर बृहस्पतिवार को जानकारी दी, '' गेट्स फाउंडेशन की ओर से अफ्रीका एवं भारत कार्यालयों के अध्यक्ष अंकुर वोरा प्रतिनिधित्व करेंगे, जो आज बाद में शिखर सम्मेलन में भाषण देंगे।'' फाउंडेशन ने कहा, '' गहन विचार-विमर्श के बाद और यह सुनिश्चित करने के लिए कि एआई शिखर सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रहे, गेट्स अपना मुख्य भाषण नहीं देंगे।'' गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि वह भारत में साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के अपने कार्यों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
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-सोना 1,950 रुपये मजबूत
नयी दिल्ली. देश की राजधानी में बृहस्पतिवार को बहुमूल्य कीमती धातुओं की कीमतों में सात प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। चांदी जहां 2.6 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, वहीं सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उछाल वैश्विक रुख तथा अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग में बढ़ोतरी की वजह से आया। स्थानीय बाजार के जानकारों के मुताबिक, चांदी बुधवार के 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 18,000 रुपये या 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,950 रुपये या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,58,650 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गया। पिछले सत्र में यह 1,56,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.03 प्रतिशत बढ़कर 77.97 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोना थोड़ा बढ़कर 4,991.24 डॉलर प्रति औंस पर था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस), सौमिल गांधी ने कहा, ''ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की बढ़ती अटकलों के बीच भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों की मांग में नई लहर से समर्थन पाकर बृहस्पतिवार को सोने की कीमतें बढ़कर लगभग 5,000 डॉलर प्रति औंस हो गईं।'' उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच नई बातचीत के विफल होने से भी वैश्विक अनिश्चितता फिर से बढ़ गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों में आवंटन बढ़ा रहे हैं। ऑगमोंट में शोध प्रमुख, रेनिशा चैनानी ने कहा कि निवेशक अमेरिकी जीडीपी और व्यक्तिगत खपत खर्च (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े सहित मुख्य वृहद आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों को आकार दे सकता है। -
नयी दिल्ली. दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने बृहस्पतिवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक नहीं पहुंचने पर इसके खिलाफ प्रतिरोध पैदा हो सकता है, जो इस प्रौद्योगिकी की प्रगति को प्रभावित कर सकता है। नीलेकणि ने यहां आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के एक संवाद सत्र में कहा कि फिलहाल एआई के विकास में 'रेस टू द टॉप' (बेहतर प्रौद्योगिकी की होड़) और 'रेस टू द बॉटम' (नकारात्मक उपयोग में तेजी) दोनों तरह की स्थितियां हैं जिनमें दूसरा पहलू ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग समाज के लिए उपयोगी साबित नहीं हुआ तो इसके प्रति लोगों की धारणा नकारात्मक हो सकती है। नीलेकणि ने कहा, ''मेरा मानना है कि हम सभी, जो एआई को मानवता के लिए उपयोगी बनाना चाहते हैं, उन्हें इसके प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास बढ़ाने होंगे और उन्हें दोगुना करना होगा। ऐसा नहीं होने पर इसके नतीजे बहुत मुश्किल हो सकते हैं क्योंकि इसके खिलाफ विरोध पैदा होने की आशंका है।'' उन्होंने कहा कि एआई के कुछ मौजूदा उपयोग जैसे डीपफेक सामग्री या बढ़ती बिजली लागत जैसी चिंताएं लोगों में इसके प्रति असंतोष पैदा कर सकती हैं। नीलेकणी ने कहा, ''जिस तरह शारीरिक श्रम वाले कामगारों में असंतोष ने वैश्वीकरण को झटका दिया था। उसी तरह दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों में उपजा असंतोष एआई की प्रगति को प्रभावित कर सकता है।'' उन्होंने कहा कि एआई को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। भारत के पास आधार और एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) जैसी पहल के जरिये बड़ी आबादी तक प्रौद्योगिकी पहुंचाने का अनुभव है। नीलेकणि ने कहा कि एआई को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। लोगों को कंप्यूटर से अपनी स्थानीय भाषा या बोलियों में संवाद करने की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि प्रौद्योगिकी का उपयोग ज्यादा समावेशी बन सके। इस संवाद सत्र में शामिल एंथ्रोपिक कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डारियो अमोडेई ने कहा कि 'वैश्विक दक्षिण' (दक्षिण गोलार्द्ध के विकासशील देशों) में एआई के लाभ अधिक स्पष्ट हो सकते हैं और भारत की तकनीकी क्षमता तथा इसे अपनाने की तत्परता आर्थिक वृद्धि को गति दे सकती है।
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नयी दिल्ली। ब्रिटेन की बहुराष्ट्रीय उपभोक्ता सामान कंपनी यूनिलीवर ने कहा है कि अमेरिका के बाद उसके दूसरे सबसे बड़े बाजार भारत में कारोबार की बुनियादी स्थिति में सुधार हो रहा है। चौथी तिमाही के नतीजों के दौरान यूनिलीवर ने बताया कि होम केयर खंड में कंपनी ने 4.7 प्रतिशत की अंतर्निहित बिक्री वृद्धि और बिक्री की मात्रा में चार प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कंपनी के अनुसार, इसे भारत में उत्पादों की खपत में निरंतर मजबूती से समर्थन मिला है। यूनिलीवर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फर्नांडो फर्नांडीस ने चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों पर चर्चा के दौरान कहा, ''भारत इस गति में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। होम केयर खंड में फैब्रिक वॉश और घरेलू देखभाल के मजबूत प्रदर्शन के दम पर भारत में बिक्री की मात्रा में वृद्धि मध्यम एकल अंक में रही और कंपनी ने इसमें अब तक की सर्वाधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल की है।'' फर्नांडीस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका और भारत यूनिलीवर के लिए स्पष्ट रूप से 'एंकर मार्केट' (प्रमुख आधार बाजार) हैं।





















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