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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में 2026-2031 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर-राजस्व बंटवारे के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पेश की। संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत स्थापित वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कर राजस्व बंटवारे की सिफारिश करता है। आयोग का गठन समय-समय पर किया जाता है और यह केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देता है। सुश्री सीतारमण ने बजट पेश करने के बाद लोकसभा में वित्त-विधेयक 2026 पेश किया। उन्होंने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 के अन्तर्गत वक्तव्य भी पेश किए। इनमें मध्यम-अवधि राजकोषीय नीति सह राजकोषीय नीति रणनी
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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत ऑरेंज इकोनॉमी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगा। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष सेक्टर को भी नया आयाम मिलेगा।
ऑरेंज इकोनॉमी पर उन्होंने बताया कि एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) सेक्टर देश का एक तेजी से उभरता हुआ उद्योग है। संसद में बजट पेश करते समय वित्त मंत्री ने कहा कि यह वह क्षेत्र है जिसमें वर्ष 2030 तक लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यही कारण है कि पूरे देश में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों इससे जुड़ी लैब्स स्थापित की जाएंगी।वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, “ऑरेंज इकोनॉमी से जुड़ी शिक्षा पर जानकारी दी। भारतीय युवा ऑरेंज इकोनॉमी का लाभ ले सकें इसके लिए बकायदा सुव्यवस्थित शिक्षा प्रदान करने की पहल की गई है। देशभर के कई विश्वविद्यालयों व स्कूलों के छात्रों को इस महा-अभियान में शामिल करने की योजना है। इसके लिए विश्वविद्यालय व कॉलेज में ऑरेंज इकोनॉमी से जुड़ी लैब्स स्थापित की जाएंगी।”केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मैं मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीस को समर्थन देने का प्रस्ताव रखती हूँ, ताकि देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जा सकें।”उन्होंने कहा कि इस पहल से युवाओं को डिजिटल क्रिएटिव स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाएगा। ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा देने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक स्तर पर क्रिएटिव इंडस्ट्री में अपनी पहचान और मजबूत करेगा। शिक्षाविदों के अनुसार ऑरेंज इकोनॉमी के तहत रचनात्मकता, संस्कृति, डिजिटल कंटेंट और इनोवेशन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि युवाओं की प्रतिभा को वैश्विक मंच भी मिलेगा।वहीं, इसके साथ ही वित्त मंत्री ने आयुष सेक्टर को मजबूत करने के लिए बजट भाषण में महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। उन्होंने बताया कि देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर व्यापक स्वीकार्यता और पहचान मिली है। आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार कई ठोस कदम उठाएगी। फार्मेसी और परीक्षण सुविधाओं का उन्नयन होगा।वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ही जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र और अधिक सशक्त बनाया जाएगा, ताकि भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सके। युवाओं, स्वास्थ्य और क्रिएटिव सेक्टर पर जोर देने की बात कही गई है। बजट 2026-27 में सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में युवा शक्ति, क्रिएटिव इंडस्ट्री और पारंपरिक चिकित्सा भारत की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभ होंगे।( -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। इस दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले साल किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद इस बार इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी लोगों को जिस टैक्स सिस्टम के तहत अभी टैक्स देना पड़ रहा है, वही व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।
हालांकि इनकम टैक्स की बुनियादी संरचना पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई कदमों का ऐलान किया।वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। गौरतलब हो, रिटर्न फाइल करने की तारीखों को भी अलग-अलग किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले लोग पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए यह भी कहा गया है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स से मुक्त होगा। साथ ही इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा।भारत की कंपनियों को पूंजीगत सामान देने वाले एनआरआई को भी पांच साल तक इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी।वित्त मंत्री ने स्रोत पर टैक्स वसूली (टीसीएस) की दरों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस को 5 और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है और अब इसमें न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं होगी। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।वहीं, छोटे टैक्स देने वालों के लिए एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम लाया जाएगा। इसके तहत कम या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट लेने के लिए अब टैक्स अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।जिन टैक्सपेयर्स के पास अलग-अलग कंपनियों के शेयर हैं, वे अब फॉर्म 15जी या 15एच सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे। डिपॉजिटरी यह फॉर्म संबंधित कंपनियों तक खुद भेज देगी।शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन में वित्त मंत्री ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। - नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य की दिशा में एक और कदम उठाते हुए बजट 2026 में भारत को कच्चे काजू और कोको उत्पादन व प्रसंस्करण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारतीय काजू और भारतीय कोको को वर्ष 2030 तक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड में प्रवर्तित करने के लिए भारतीय काजू और कोको हेतु एक समर्पित कार्यक्रम की भी पेशकश की गई है।भारतीय चंदन इकोसिस्टम के गौरव को बहाल करने हेतु केंद्र सरकार केंद्रित खेती और कटाई के पश्चात प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के साथ भी भागीदारी करेगी। इसके अलावा, पुराने और कम उपज देने वाले उद्यानों को फिर हरा-भरा बनाने तथा अखरोट, बादाम और खुमानीकी उच्च घनत्व वाली खेती का विस्तार करने के लिए बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने और युवाओं की सहभागिता से मूल्यवर्धन करने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम की पेशकश की गई है।वित्त मंत्री ने आज बजट पेश करते हुए कहा कि तीसरा कर्तव्य प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर को सार्थक प्रतिभागिता के लिए संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों की पहुंच सुनिश्चित कराने के सरकार के सबका साथ, सबका विकास के विजन के साथ संबद्ध है। उन्होंने तीसरे कर्तव्य को हासिल करने का मोटेतौर पर खाका प्रस्तुत किया।निर्मला सीतारमण ने कहा, “इसे हासिल करने के लिए के लिए छोटे और सीमांत किसानों को विशेष पहुंच उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्पादकता बढ़ाने और उद्यमिता के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने, आजीविका के अवसरों, प्रशिक्षण और कुछ गुणवत्ता वाले उपकरणों के जरिए दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने, मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा देखभाल तक पहुंच कायम कर कमजोरों को अधिकार संपन्न बनाने, विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाने के लिए पूर्वोदय राज्यों तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने” की दिशा में लक्षित प्रयास करने की आवश्यकता है।किसानों की आमदनी बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य के अंतर्गत बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास करने, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूती प्रदान करने तथा स्टार्ट अप और महिला प्रेरित समूहों को मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों के साथ शामिल करते हुए बाजार से जोड़ना सक्षम बनाने के प्रावधान किए गए हैं।निर्मला सीतारमण ने कहा कि पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रमुख क्षेत्रों में से एक हैं। ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार उद्यमिता विकास के तहत पशुपालन क्षेत्र को सहायता प्रदान करने के लिए निम्न कदम उठाएगी- (क) ऋण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम (ख) पशुधन उद्यमों का संवर्धन और आधुनिकीकरण (ग) पशुधन. डेयरी और मुर्गीपालन के लिए संकेंद्रित मूल्य श्रृंखला का सृजन को संवर्धित करना और (घ) पशुधन कृषक उत्पादक संगठनों की स्थापना को प्रोत्साहन देना।केंद्रीय वित्त मंत्री ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों में सहायता प्रदान कर उच्च मूल्य वाली खेतीबाड़ी पर जोर दिया। पूर्वोत्तर में अगर वृक्षों और पर्वतीय क्षेत्रों में बादाम, काजू और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को भी सहायता प्रदान करेगा।उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक है। लगभग 10 मिलियन किसानों सहित लगभग 30 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं। नारियल उगाने वाले प्रमुख राज्यों में नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पुराने और गैर-उत्पादक पेड़ों को नए सैपलिंग/ पौधों /किस्मों से बदलने सहित विभिन्न कदमों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और उत्पादकता को संवर्धित करने के जरिए मैं नारियल संवर्धन योजना की पेशकश करती हूं।”इसके अतिरिक्त, सीतारमण ने भारत-विस्तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए आभासी एकीकृत प्रणाली) लॉन्च करने के प्रस्ताव की घोषणा की है। विस्तार की परिकल्पना एक बहुभाषी AI टूल के रूप में की गई है, जिसे एआई प्रणाली सहित कृषि प्रणालियों के लिए आईसीएआर पैकेज सहित एग्रीस्टेक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है। इससे कृषि उत्पादककता बढ़ेगी, किसानों के लिए बेहतर नतीजे संभव होंगे और अनुकूल परामर्श सहायता प्रदान करते हुए जोखिम में कमी लाई जाएगी।
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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को बजट भाषण के दौरान युवाओं के लिए नए अवसर और योगा व डिजाइन उद्योग के विकास को लेकर कई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के लिए कुशल करियर के नए रास्ते बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर फोकस किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (एएचपी) के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नए एएचपी संस्थान खोले जाएंगे। यह योजना 10 चयनित विषयों को कवर करेगी, जिनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ शामिल हैं। अगले पांच वर्षों में इस पहल के तहत एक लाख नए एएचपी तैयार किए जाएंगे।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “प्राचीन भारतीय योग, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में पहले से ही सम्मान मिलता है, उसे तब बड़े पैमाने पर ग्लोबल पहचान मिली जब प्रधानमंत्री इसे यूएन ले गए। बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए, कुछ और कदम उठाए जा रहे हैं। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे। सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम के उच्च मानकों के लिए आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा और अधिक कुशल कर्मियों को उपलब्ध कराया जाएगा। पारंपरिक चिकित्सा के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को अपग्रेड किया जाएगा।”डिजाइन सेक्टर को लेकर भी वित्त मंत्री ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय डिजाइन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन देश में कुशल डिजाइनरों की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन स्थापित किया जाएगा, जिससे डिजाइन शिक्षा और विकास को बढ़ावा मिलेगा।यह बजट निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट है। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बजट पेश करने के रिकॉर्ड के और करीब पहुंच गई हैं। देसाई ने 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार बजट पेश किए थे। वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में क्रमशः नौ और आठ बजट पेश किए हैं। (इनपुट-आईएएनएस) -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए बजट में किसानों की आय बढ़ाने और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के क्षेत्र में बड़े कदम उठाने की घोषणा की है। इन प्रस्तावों का मकसद देश के विकास को संतुलित और टिकाऊ बनाना बताया गया है।
सरकार ने तटीय इलाकों के किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने का ऐलान किया है। इसके तहत नारियल, काजू और कोको जैसी फसलों के साथ-साथ पहाड़ी और अन्य क्षेत्रों में अखरोट और पाइन नट्स जैसी मेवों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।वहीं, पर्यटन के क्षेत्र में सरकार ने कई अहम घोषणाएं की हैं। नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के साथ मिलकर हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में प्रशिक्षण और मानकों को बेहतर बनाएगा।इसके अलावा, देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूर गाइड्स को प्रशिक्षित करने के लिए एक पायलट योजना शुरू की जाएगी। यह 12 हफ्ते का मानकीकृत और उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण हाइब्रिड मोड में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के सहयोग से दिया जाएगा।सरकार एक राष्ट्रीय डिजिटल डेस्टिनेशन नॉलेज ग्रिड भी बनाएगी, जिसमें देश के सभी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत स्थलों को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा।पर्यावरण और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में टिकाऊ पर्वतीय ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही पूर्वी घाट के अराकू घाटी और पश्चिमी घाट के पुडिगई मलै में भी ऐसे ट्रेल्स बनाए जाएंगे। वन्यजीव पर्यटन के लिए ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ नेस्टिंग साइट्स पर टर्टल ट्रेल्स और पुलिकट झील के आसपास बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स तैयार किए जाएंगे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए आज रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि नए इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और आयकर से जुड़े नियमों को पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई स्कीम का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे टैक्स अनुपालन आसान होगा।
वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इससे लाखों वेतनभोगी और छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि फॉर्म को सरल बनाने के साथ-साथ टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को भी डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली किया गया है। हालांकि इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि सरकार ने 2021-22 में किया गया वादा पूरा कर लिया है। बजट अनुमान के अनुसार, 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 में यह घटकर 4.3 प्रतिशत होने की उम्मीद है। सरकार का फोकस वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास को गति देने पर है।बजट में राज्यों के लिए भी बड़ी घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपए की ग्रांट दी जाएगी। वित्त वर्ष 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी रेश्यो 55.6 प्रतिशत, जबकि नेट बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रुपए तय किया गया है।बजट 2026 में सरकार ने टीसीएस दरों में बड़ी राहत दी है। उदारीकृत प्रेषण योजना यानी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजी जाने वाली रकम पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो शिक्षा या मेडिकल कारणों से विदेश पैसा भेजते हैं।टैक्स नियमों में भ्रम दूर करने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानव संसाधन सेवाओं की आपूर्ति को ठेकेदारों को किए गए भुगतानों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके तहत अब इन सेवाओं पर केवल 1 प्रतिशत या 2 प्रतिशत टीडीएस लगेगा, जिससे कारोबारियों और श्रमिकों दोनों को सहूलियत मिलेगी। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। बजट 2026-27 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। रेलवे, विमानन और जल परिवहन क्षेत्रों के लिए कई बड़ी और दूरगामी घोषणाएं की गई हैं, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और आर्थिक विकास को गति देना है।
केंद्रीय बजट 2026 में रेलवे को लेकर एक अहम फैसला लेते हुए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की गई है। इन कॉरिडोरों के जरिए देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को तेज और आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर इस प्रकार हैं– मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी।इसके साथ ही वित्त मंत्री ने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में 20 नए जलमार्ग चालू किए जाएंगे। इसकी शुरुआत ओडिशा के नेशनल वॉटरवे-5 से होगी, जो तालचेर और अंगुल जैसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को कलिंगनगर औद्योगिक केंद्र और पारादीप व धमरा बंदरगाहों से जोड़ेगा। इससे पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत वाले कार्गो मूवमेंट को बढ़ावा मिलेगा।अंतर्देशीय जलमार्गों को मजबूत करने के लिए वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर और मेंटेनेंस से जुड़ा एक आधुनिक इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही समुद्री विमान के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना शुरू करने की भी घोषणा की गई है।बजट 2026 में छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का ग्रोथ फंड लाने का ऐलान किया है। इससे उद्यमियों को अपने कारोबार के विस्तार में मदद मिलेगी। इसके अलावा, टेक्सटाइल सेक्टर को भी विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही गई है, जिससे रोजगार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इंफ्रा रिस्क गारंटी फंड बनाया जाएगा और कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम लॉन्च की जाएगी। साथ ही, जलमार्ग क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि इस सेक्टर में कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा सके। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए करने का ऐलान किया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर फोकस कर देश में विकास दर और रोजगार को बढ़ाना है।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क डेवलपमेंट फंड की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए बजट में राजमार्गों, बंदरगाहों, रेलवे और बिजली परियोजनाओं सहित इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त प्रोत्साहन देने, 7 रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और तेजी से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सृजित करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक निवेश पर मजबूत जोर देते हुए राजकोषीय विवेक और मौद्रिक स्थिरता बनाए रखी है, और आगे कहा कि भारत को वैश्विक बाजारों के साथ गहराई से जुड़ना चाहिए, अधिक निर्यात करना चाहिए और विदेशी निवेश को भी आकर्षित करना चाहिए।इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बजट का आधार को तीन ‘कर्तव्यों’को बताया, जिनसे न सिर्फ अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी, बल्कि गरीब, वंचित और पिछड़े लोगों को भी ताकत मिलेगी। सीतारमण ने कहा कि सरकार के ‘संकल्प’ को पूरा करने के लिए और यह देखते हुए कि यह कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है, हम तीन कर्तव्यों से प्रेरित हैं।केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने कहा कि पहला कर्तव्य प्रोडक्टिविटी और कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाकर और अस्थिर ग्लोबल डायनामिक्स के प्रति लचीलापन बनाकर आर्थिक विकास को तेज करना और बनाए रखना है। हमारा दूसरा कर्तव्य हमारे लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना है, जिससे वे भारत की समृद्धि की राह में मजबूत भागीदार बनें। उन्होंने आगे कहा कि हमारा तीसरा कर्तव्य, जो ‘सबका साथ-सबका विकास’ के हमारे विजन के साथ जुड़ा हुआ है, यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर को संसाधनों तक पहुंच मिले।”उन्होंने आगे कहा कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अपनी राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है और अपने कर्तव्यों को पूरा करने में हमारी मदद करने के लिए अपनी गति बनाए रखेगी। ( -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि वैश्विक हालात में अनिश्चितता के बावजूद सरकार ने हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक दिशा स्थिर रही है और देश 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।
लगातार नौवां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आर्थिक विकास को मजबूत करना और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है। यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर आधारित है।निर्मला सीतारमण ने कहा, “हमारी सरकार ने हमेशा असमंजस की जगह ठोस कदम उठाए हैं। हमने बड़े आर्थिक सुधार किए हैं, वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और मुद्रा स्थिरता के साथ-साथ सार्वजनिक निवेश पर विशेष ध्यान दिया है।”वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि आज दुनिया में व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर संकट है। संसाधनों और आपूर्ति शृंखला में रुकावटें आ रही हैं। नई तकनीकें उत्पादन के तरीकों को बदल रही हैं और पानी, ऊर्जा व जरूरी खनिजों की मांग बढ़ा रही हैं। ऐसे माहौल में भारत संतुलन और समावेशन के साथ विकसित भारत की ओर कदम बढ़ाता रहेगा। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं।यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का 15वां बजट है। इसके साथ ही यह 2024 में एनडीए के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट है। निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं, जिन्होंने संसद में लगातार नौ बार बजट पेश किया है।इस बजट में पूंजीगत खर्च पर खास ध्यान दिए जाने की संभावना है, खासकर उन क्षेत्रों में जो मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए रणनीतिक रूप से अहम माने जाते हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद वित्त मंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 30 कॉलेज छात्रों से बातचीत करेंगी। ये छात्र लोकसभा गैलरी से बजट प्रस्तुति को लाइव देख रहे हैं, जिससे उन्हें संसद की अहम कार्यवाही को समझने का मौका मिला है।बजट तैयार करते समय सरकार ने युवाओं समेत देश के नागरिकों से अलग-अलग मंचों के जरिए सुझाव लिए हैं। इन सुझावों की झलक आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में देखने को मिलेगी। इस तरह यह बजट आत्मनिर्भर भारत, युवाओं की ताकत और विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। - नयी दिल्ली,। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां केंद्रीय बजट 2026-27 में कृत्रिम मेधा (एआई) पारिस्थितिकी तंत्र के विकास, नवाचार और डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाजार में इसके विस्तार के लिए नकदी उपलब्ध कराने के उपायों की उम्मीद कर रही हैं।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को संसद में बजट पेश करेंगी।संसद में 29 जनवरी को पेश की गई आर्थिक समीक्षा में एआई को महज एक प्रौद्योगिकी की होड़ के बजाय एक आर्थिक रणनीति के रूप में मान्यता दी गई है। इसमें सहयोग और साझा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘मुक्त’ और ‘परस्पर क्रियाशील’ प्रणालियों पर आधारित विभिन्न क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाने की पुरजोर वकालत की गई है।एआई कंपनी ‘आयोनोस’ के वाइस-चेयरमैन सी पी गुरनानी ने कहा कि आर्थिक समीक्षा में भारत की प्रौद्योगिकी क्षमता और डेटा संपदा का सही चित्रण किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य इंजीनियरिंग क्षमता का लाभ उठाकर किफायती और मानव-केंद्रित एआई बनाने में है, जो स्थानीय चुनौतियों का समाधान कर सके।लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की सॉफ्टवेयर कंपनी ‘फारआई’ के मुख्य व्यवसाय अधिकारी सूर्यांश जालान ने कहा कि उद्योग को उम्मीद है कि बजट में विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के उपायों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई और उन्नत योजना प्रणालियों के लिए प्रोत्साहन उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक होंगे।जालान ने कहा कि 2027 तक लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में लगभग एक करोड़ नौकरियां जुड़ने का अनुमान है, ऐसे में प्रौद्योगिकी की तैयारी और कौशल विकास पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन आज एक फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। लोकसभा में बजट पेश होने के बाद बजट प्रति राज्यसभा में पेश की जाएगी। यह नरेन्द्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट होगा।
बजट तैयार करने से पहले, वित्त मंत्री ने विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श बैठकें कीं। इनमें अर्थशास्त्री, ट्रेड यूनियन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधि, लघु और मध्यम उद्यम, व्यापार और सेवा क्षेत्र, उद्योग जगत, वित्तीय क्षेत्र तथा पूंजी बाजार से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर व्यापक पूर्व-बजट परामर्श बैठकें कीं और वित्त मंत्री को सुझावों की संकलित रिपोर्ट सौंपी। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 296.59 अंक या 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,269.78 और निफ्टी 98.25 अंक या 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,320.65 पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल स्टॉक्स ने किया। निफ्टी मेटल इंडेक्स 5.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी कमोडिटीज 2.13 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 1.03 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.90 प्रतिशत और निफ्टी सर्विसेज 0.64 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया 1.85 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.43 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.37 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.08 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.84 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।लार्ज कैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 109 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 58,432 अंक और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 54.10 अंक या 0.32 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,879.10 पर था।सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, एसबीआई, आईटीसी, बीईएल, एचयूएल, टाइटन, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट और टीसीएस लूजर्स थे।बाजार के जानकारों ने कहा कि आम बजट से पहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मेटल शेयरों में तेज बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाने का काम किया। डॉलर में मजबूती के चलते सोने और चांदी में तेज गिरावट देखने को मिली।उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सरकार के हालिया कामकाज ठप होने को टालने के लिए हुए समझौते ने अस्थायी राहत प्रदान की, लेकिन नए फेड अध्यक्ष की नियुक्ति से पहले बाजार सतर्क बने हुए हैं, क्योंकि अधिक सख्त रुख से तरलता कम हो सकती है और उभरते बाजारों पर दबाव पड़ सकता है।कमजोर ग्लोबल संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 444 अंक या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,100 और निफ्टी 157 अंक या 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,261 पर था। -
नई दिल्ली। बजट से पहले भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने वाला संकेत सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 23 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.053 अरब डॉलर बढ़कर ऑल-टाइम हाई 709.413 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।
इससे पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 में 704.89 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा था, जो उस समय का सर्वकालिक उच्च स्तर था। ताजा आंकड़ों के साथ यह पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया है।आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 2.367 अरब डॉलर बढ़कर 562.885 अरब डॉलर हो गई है।विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल सोने की वैल्यू में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 23 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में गोल्ड रिजर्व 5.635 अरब डॉलर बढ़कर 123.088 अरब डॉलर पर पहुंच गया।आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) की वैल्यू 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.737 अरब डॉलर हो गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास रिजर्व पोजिशन की वैल्यू 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.703 अरब डॉलर हो गई है।पिछले सप्ताह भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.167 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 701.360 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था, जिससे लगातार मजबूती का रुझान देखने को मिल रहा है।गौरतलब है कि 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी। बजट से पहले विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद अहम होता है। यह न केवल देश की आर्थिक सेहत को दर्शाता है, बल्कि मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर किसी समय डॉलर के मुकाबले रुपए पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपए को संभाल सकता है।विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी निवेश के लिहाज से भी भारत की स्थिति बेहतर होती है। ( -
मुंबई. वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2025 में 5,000 टन से अधिक होकर एक नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। डब्ल्यूजीसी की '2025 की स्वर्ण मांग के रुझान' रिपोर्ट के अनुसार, कुल सोने की मांग 2025 में 5,002 टन के नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 4,961.9 टन थी। रिपोर्ट में कहा गया कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण हुई, जो 2025 में बढ़कर 2,175.3 टन हो गई जबकि यह 2024 में 1,185.4 टन थी। चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मांग दो प्रतिशत बढ़कर 1,345.3 टन हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,318.5 टन थी। डब्ल्यूजीसी की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुईस स्ट्रीट ने कहा, ''वर्ष 2025 में सोने की मांग में जबर्दस्त उछाल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम नई सामान्य स्थिति बन चुके हैं उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों ने सोना खरीदा और उसे अपने पास बनाए रखा।"
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) को लगातार तीसरे साल 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' (काम करने के लिए बेहतरीन जगह) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। इस्पात निर्माता ने एक बयान में बताया कि नवीनतम प्रमाणन फरवरी 2026 से फरवरी 2027 की अवधि के लिए दिया गया है। सेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अमरेंदु प्रकाश ने इस उपलब्धि पर कहा, "यह मान्यता हमारे कर्मचारियों द्वारा संगठन में जताए गए भरोसे और उस कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है, जिसे हम सामूहिक रूप से बना रहे हैं।" इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली सेल देश की शीर्ष पांच इस्पात उत्पादक कंपनियों में शामिल है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 2.1 करोड़ टन है। यह प्रमाणन विभिन्न मानकों के आधार पर कॉर्पोरेट घरानों और अन्य संगठनों को प्रदान किया जाता है। इसमें कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सहित उनके समग्र कल्याण और कार्य संस्कृति का आकलन किया जाता है।
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नई दिल्ली। भारत में औद्योगिक उत्पादन दिसंबर में दो साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन के चलते औद्योगिक गतिविधियों में तेज सुधार देखने को मिला है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) की ग्रोथ 7.8% रही, जो नवंबर में 6.7% थी। इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों, खदानों और बिजली उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में व्यापक तेजी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में औद्योगिक गतिविधियां साल-दर-साल आधार पर 7.8% बढ़ीं, जो पिछले दो साल से अधिक समय में सबसे तेज वृद्धि है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में आईआईपी ग्रोथ 7.2% रही थी, जिससे यह साफ होता है कि अलग-अलग सेक्टरों में उत्पादन में निरंतर मजबूती आई है।
दिसंबर की इस मजबूती के पीछे मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली उत्पादन-तीनों सेक्टरों का अहम योगदान रहा। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 8.1% बढ़ा, माइनिंग सेक्टर में 6.8% और बिजली उत्पादन में 6.3% की वृद्धि दर्ज की गई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर 23 में से 16 उद्योग समूहों में दिसंबर के दौरान सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की गई। कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल प्रोडक्ट्स का उत्पादन 34.9% बढ़ा, जबकि मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर का उत्पादन 33.5% बढ़ा। अन्य परिवहन उपकरणों में 25.1% की वृद्धि दर्ज की गई।दिसंबर में बेसिक मेटल्स का उत्पादन 12.7% बढ़ा, जिसमें एलॉय स्टील, एमएस स्लैब और स्टील पाइप व ट्यूब्स का योगदान रहा। फार्मास्युटिकल उद्योग में भी 10.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे वैक्सीन, पाचन संबंधी दवाओं और विटामिन उत्पादों की मांग से बल मिला। उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े सामानों का उत्पादन दिसंबर में 12.1% बढ़ा। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 12.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेश और उपभोक्ता मांग- दोनों में मजबूती को दर्शाता है।इस दौरान कैपिटल गुड्स का उत्पादन 8.1% और इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 7.5% बढ़ा। प्राइमरी गुड्स में 4.4% की वृद्धि दर्ज की गई, जो नवंबर के मुकाबले बेहतर रही।अप्रैल से दिसंबर 2025-26 की अवधि में कुल औद्योगिक उत्पादन 3.9% बढ़ा। हालांकि वित्त वर्ष की शुरुआत में कुछ उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन साल के अंत तक ग्रोथ की दिशा स्पष्ट रूप से मजबूत नजर आई।उपभोक्ता पक्ष पर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की ग्रोथ 10.3% से बढ़कर 12.3% हो गई, जबकि कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स का उत्पादन 7.3% से बढ़कर 8.3% रहा। इससे स्पष्ट है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।केयरएज रेटिंग की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा के अनुसार, दिसंबर में 7.8% की औद्योगिक वृद्धि दो साल से अधिक समय में सबसे तेज है। उन्होंने कहा कि सरकार के लगातार पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बेहतर जीएसटी कलेक्शन, इनकम टैक्स में राहत, आरबीआई की पिछली ब्याज दर कटौती और महंगाई में नरमी से आगे भी खपत और निवेश को समर्थन मिलेगा।रजनी सिन्हा ने कहा कि आने वाला केंद्रीय बजट आर्थिक रफ्तार के लिए अहम होगा, जबकि अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक जोखिमों पर भी सतर्क नजर रखने की जरूरत है। ( -
नई दिल्ली। भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी ने बुधवार के सेशन को मामूली बढ़त के साथ खत्म किया, और पूरे दिन भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद हरे निशान में बने रहने में कामयाब रहे।
निवेशकों की भावना दिसंबर-तिमाही की कमाई की घोषणाओं और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से प्रभावित हुई।सेंसेक्स 82,345 पर बंद हुआ, जिसमें 487 अंकों या 0.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सेशन के दौरान, इंडेक्स 82,504 के उच्च स्तर और 81,815 के निम्न स्तर के बीच रहा, क्योंकि बाजार लाभ और हानि के बीच झूलता रहा।निफ्टी भी सकारात्मक बंद हुआ, दिन के अंत में 25,343 पर बंद हुआ, जो 167 अंक या 0.66 प्रतिशत ऊपर था। इंडेक्स ने इंट्रा-डे में 25,372 का उच्च स्तर छुआ और बंद होने से पहले 25,188 के निम्न स्तर तक फिसल गया।एक विश्लेषक ने बताया, “हालांकि इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है – जो निकट भविष्य में सावधानी का संकेत देता है – तत्काल प्रतिरोध 25,400-25,450 पर देखा जा रहा है, इसके बाद 25,600-25,650 पर एक मजबूत सप्लाई ज़ोन है, जो 20/50-EMA क्लस्टर के साथ जुड़ा हुआ है।”भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के शेयर 9 प्रतिशत चढ़ गए, जो सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर शीर्ष लाभ कमाने वाले स्टॉक के रूप में उभरे।बाजार को सहारा देने वाले अन्य शेयरों में ONGC, कोल इंडिया, हिंडाल्को, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, अदानी एंटरप्राइज़ेज़, ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, सिप्ला और श्रीराम फाइनेंस शामिल थे।नुकसान वाले शेयरों में, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 4.5 प्रतिशत गिर गया। एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, सन फार्मा, मैक्स हेल्थकेयर, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, इंफोसिस और आइशर मोटर्स जैसे शेयर भी 4.2 प्रतिशत तक के नुकसान के साथ निचले स्तर पर बंद हुए।व्यापक बाजार बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करते रहे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.66 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.26 प्रतिशत की मजबूत बढ़त हुई।सेक्टर के हिसाब से, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने रैली का नेतृत्व किया। निफ्टी CPSE इंडेक्स में 5 परसेंट की तेज़ी आई, जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 3.4 परसेंट की बढ़त हुई।निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2.3 परसेंट और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 1.7 परसेंट की बढ़ोतरी हुई, जिससे बाज़ार पॉजिटिव नोट पर बंद हुआ।एक एक्सपर्ट ने कहा, “इंडिया-EU FTA के सपोर्ट से घरेलू बाज़ारों में लगातार तेज़ी देखने को मिली।” - नयी दिल्ली. सूचना एवं प्रसारण मंत्री मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि सरकार का लक्ष्य 2032 तक आधुनिक स्मार्टफोन और कंप्यूटर जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले 3-नैनोमीटर नोड के उच्च तकनीक वाले छोटे चिप बनाने का है। मंत्री ने कहा कि डिजाइन आधारित प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के दूसरे चरण के तहत सरकार चिप की छह श्रेणियों कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ), नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी पर ध्यान केंद्रित करेगी। इससे देश की कंपनियों को 70–75 प्रतिशत प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास पर प्रमुख नियंत्रण मिल सकेगा। डीएलआई योजना के तहत चयनित 24 चिप डिजाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद मंत्री ने कहा, "2032 तक हमारा लक्ष्य 3-नैनोमीटर चिप के डिजाइन और विनिर्माण के स्तर तक पहुंचना है। डिजाइन का काम तो हम आज भी कर रहे हैं, लेकिन विनिर्माण के स्तर पर 3-नैनोमीटर तक पहुंचना होगा।" वैष्णव ने कहा कि सरकार छह प्रमुख प्रणालियों पर ध्यान देना चाहती है, ताकि देश के पूरे सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र समग्र और व्यापक रूप से विकसित किया जा सके। मंत्री ने कहा, "कंप्यूट, आरएफ, नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी इन छह प्रमुख श्रेणियों में हम शिक्षा जगत और उद्योग को नए विचार, नई सोच और नए समाधान लेकर आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। जैसे-जैसे हम 2029 की ओर बढ़ेंगे, देश में ऐसे चिप के डिजाइन और विनिर्माण की बड़ी क्षमता विकसित हो जाएगी, जिनकी जरूरत हमारे देश में लगभग 70–75 प्रतिशत अनुप्रयोगों में होती है।" उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र को इन छह प्रकार के चिप के किसी न किसी संयोजन की आवश्यकता होगी।
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नयी दिल्ली। भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत आयात शुल्क घटाने पर सहमति जताई है, जिससे आयातित यूरोपीय कारों की कीमतें कम हो सकती हैं। यह रियायत सालाना 2.5 लाख वाहनों के लिए दी गई है, जो पिछले साल ब्रिटेन को दी गई रियायत से छह गुना अधिक है। यूरोपीय आयोग के अनुसार इस समझौते के बाद कारों पर लगने वाला शुल्क मौजूदा 110 प्रतिशत से धीरे-धीरे घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। यह लाभ प्रति वर्ष 2,50,000 वाहनों के कोटे तक सीमित होगा। आयोग ने कहा कि 2024 में यूरोप ने भारत को 1.6 अरब यूरो मूल्य के मोटर वाहनों का निर्यात किया था। भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की।
ईयू को दिया गया यह कोटा भारत द्वारा पिछले साल ब्रिटेन के साथ किए गए अलग व्यापार सौदे में दी गई 37,000 इकाई की तुलना में छह गुना से भी ज्यादा है। इसे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट, लेम्बोर्गिनी और पोर्श जैसे यूरोपीय ब्रांडों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इस समय भारत 40,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक कीमत वाली यात्री कारों की पूरी तरह बनी इकाई (सीबीयू) के आयात पर 70 प्रतिशत बुनियादी सीमा शुल्क और 40 प्रतिशत एआईडीसी (कृषि बुनियादी ढांचा और विकास उपकर) लगाता है, जिससे प्रभावी दर 110 प्रतिशत हो जाती है। इसके अलावा 40,000 डॉलर तक की यात्री कारों के आयात पर 70 प्रतिशत शुल्क लगता है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पहले साल कुछ खंड में शुल्क कटौती 35 प्रतिशत और कुछ में 30 प्रतिशत होगी। इसके बाद यह धीरे-धीरे घटकर 10 प्रतिशत तक आ जाएगी। -
नयी दिल्ली। भारत यूरोपीय संघ को इस्पात निर्यात के लिए तरजीही सुविधाएं प्राप्त करने को लेकर आशावादी है, क्योंकि 27 देशों वाला यह समूह इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ नए इस्पात व्यापार नियमों पर बातचीत कर रहा है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारत ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाले अधिकांश लौह और इस्पात उत्पादों पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति जताई है। समझौते के अनुसार, कुल उत्पाद श्रेणियों में से 6.1 प्रतिशत को विशेष सुविधा दी जाएगी। इन उत्पादों पर या तो आयात शुल्क कम किया जाएगा या फिर गाड़ियों और इस्पात के लिए सीमा शुल्क कोटा के माध्यम से रियायत दी जाएगी। यूरोपीय संघ वर्तमान में एक नई, अधिक कड़ी इस्पात व्यापार व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जो मौजूदा सुरक्षा उपायों की जगह लेगी। इस बदलाव को नियंत्रित करने वाला मुख्य नियम नई इस्पात अधिशेष क्षमता नियमावली है, जिसे अक्टूबर 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित किया गया था और जो एक जुलाई 2026 से लागू होने वाली है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा, "यूरोपीय संघ ने इस्पात को लेकर नए प्रस्ताव पेश किए हैं और हमने ईमानदारी के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है ताकि भारत, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का साझेदार होने के नाते, उन अधिकांश देशों की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल कर सके जिनके साथ यूरोपीय संघ का कोई एफटीए नहीं है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि कुछ समय में इसका संतोषजनक समाधान हो जाएगा।
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वाशिंगटन. मजबूत उपभोक्ता खर्च के दम पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था जुलाई-सितंबर तिमाही में दो साल में सबसे तेज 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने बृहस्पतिवार को जुलाई-सितंबर, 2025 तिमाही के जीडीपी आंकड़े पहले के अनुमान से थोड़ा अधिक रहने की जानकारी दी। सितंबर तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था वार्षिक आधार पर 4.4 प्रतिशत बढ़ी जबकि अप्रैल-जून तिमाही में इसकी वृद्धि दर 3.8 प्रतिशत रही थी। विभाग ने पहले इसके 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पिछली बार इतनी तेजी जुलाई-सितंबर तिमाही, 2023 में दर्ज की गई थी।
जीडीपी में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला उपभोक्ता खर्च आलोच्य तिमाही में 3.5 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा, निर्यात में तेजी और आयात में कमी ने भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क एवं व्यापार नीतियों में अनिश्चितता के बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था काफी हद तक जुझारू बनी हुई है। हालांकि, आम अमेरिकी उच्च जीवन यापन लागत से असंतुष्ट बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'के-आकार' वाली अर्थव्यवस्था का संकेत है जिसमें संपन्न वर्ग की आय निवेश एवं शेयर बाजार लाभ के कारण बढ़ रही है, जबकि निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के घरों की आय स्थिर और महंगाई बढ़ी हुई है। रोजगार क्षेत्र की स्थिति भी तुलनात्मक रूप से कमजोर दिख रही है। पिछले साल मार्च से यहां प्रतिमाह औसतन केवल 28,000 नौकरियां जुड़ी हैं, जबकि 2021-23 के दौर में यह आंकड़ा चार लाख नौकरी प्रति माह था। इसके बावजूद बेरोज़गारी दर 4.4 प्रतिशत पर है जो कंपनियों की 'न भर्ती, न बर्खास्तगी' नीति को दर्शाती है। -
नयी दिल्ली. होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने मंगलवार को कहा कि वह अपनी सीबीआर 650आर मोटरसाइकिल की कुछ इकाइयों को वापस मंगा रही है। दोपहिया वाहन विनिर्माता ने एक बयान में कहा कि वैश्विक बाजार की कार्रवाई के अनुरूप 16 दिसंबर, 2024 से चार मई, 2025 के बीच विनिर्मित कुछ इकाइयां इससे प्रभावित हो सकती हैं। होंडा मोटरसाइकिल ने कहा, ''कंपनी ने पाया है कि कुछ इकाइयों में इंडिकेटर का एक वायरिंग हिस्सा धातु के घटक से रगड़ खा सकता है, और समय के साथ कंपन के कारण इसमें शॉर्ट सर्किट हो सकता है। इससे कुछ लाइट काम करना बंद कर सकती हैं।'' बयान में आगे कहा गया कि एहतियाती कदम के तौर पर ग्राहकों को यह जांचने की सलाह दी जाती है कि क्या उनकी मोटरसाइकिल प्रभावित निर्माण अवधि के भीतर आती है। कंपनी ने कहा कि यदि वाहन प्रभावित श्रेणी में है, तो ग्राहकों से अनुरोध है कि वे वाहन के निरीक्षण के लिए अपने नजदीकी 'बिगविंग' डीलरशिप पर जाएं। अगर जरूरी हुआ तो प्रभावित हिस्सों को मुफ्त में बदला जाएगा, चाहे वाहन की वारंटी की स्थिति कुछ भी हो। हालांकि, एचएमएसआई ने यह नहीं बताया कि कितनी इकाइयों को वापस मंगाया जा रहा है।
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नयी दिल्ली. देश के एक तिहाई से ज्यादा पशुपालक दूध नहीं बेचते और इसके बजाय वे घरेलू पोषण, गोबर और खेती संबंधी अन्य कामकाज में पशुओं के इस्तेमाल पर जोर देते हैं। यह डेयरी उत्पादन से आगे की नीतियों की जरूरत को बताता है। एक अध्ययन रिपोर्ट में मंगलवार यह कहा गया। ‘एनर्जी, एनावायरनमेंट एंड वाटर काउंसिल' (सीईईडब्ल्यू) की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ये नतीजे इस मान्यता को चुनौती देते हैं कि भारत का मवेशी क्षेत्र मुख्य रूप से दूध की बिक्री से चलता है। इसमें 15 राज्यों में 7,350 मवेशी पालने वाले परिवारों का सर्वेक्षण किया, जो देश की 91 प्रतिशत दुधारू आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 38 प्रतिशत पशुपालक या लगभग तीन करोड़ लोग, दूध की बिक्री को मवेशी रखने की प्रेरणा नहीं मानते हैं, झारखंड में यह हिस्सा 71 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में 50 प्रतिशत से ज्यादा है। अध्ययन में कहा गया है, ‘‘पशुपालकों का एक बड़ा हिस्सा पशुपालन जारी रखने की इच्छा रखता है।''
इसमें कहा गया है कि इसलिए, इस क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करना एक जरूरी नजरिया है जिस पर नीतियां बनाते समय विचार किया जाना चाहिए। अध्ययन में पाया गया कि लगभग तीन-चौथाई पशुपालकों को इलाके में ज्यादा दूध होने के बावजूद सस्ता चारा और आहार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सात प्रतिशत पशुपालक, देश भर में लगभग 56 लाख पशुपालक मवेशियों को दूध के अलावा दूसरे कामों के लिए रखते हैं। इसमें गोबर, बैलगाड़ी खींचने या जानवरों को बेचने से होने वाली कमाई जैसे कार्य शामिल हैं। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में, यह लगभग 15 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और असम में, 15 प्रतिशत से ज्यादा पशुपालक मवेशी रखने की अपनी मुख्य वजह सामाजिक-सांस्कृतिक या धार्मिक वजह बताते हैं। जब गायों से जुड़े फायदों की रैंकिंग की गई, तो 34 प्रतिशत पशुपालकों ने घर में इस्तेमाल होने वाले दूध को सबसे पहले रखा, जबकि 20 प्रतिशत ने दूध से अलग वजहों को अपनी मुख्य चिंता बताई। बाजार के अलावा दूसरे इस्तेमाल के लिए मवेशी रखने वाले ज्यादातर घरों में आम तौर पर एक या दो देसी जानवर होते हैं, जो खेती के कामकाज में उनकी अहम भूमिका को दिखाता है। पंजाब में 1,389 जानवरों के अस्पताल हैं, लेकिन सिर्फ 22 मोबाइल डिस्पेंसरी हैं। जबकि आंध्र प्रदेश में 337 अस्पताल और 1,558 मोबाइल डिस्पेंसरी हैं। लगभग 75 प्रतिशत मवेशीपालक गोबर को एक मुख्य प्रेरक मानते हैं। इसलिए अध्ययन में गोबर से मूल्यवर्धन के लिए बेहतर मौकों पर जोर दिया गया, जिसमें घरेलू बायोगैस से लेकर वर्मीकम्पोस्टिंग और मूल्यवर्धित खाद तक शामिल हैं। अध्ययन में सूखे इलाकों में पानी बचाने वाले चारे की खेती को प्राथमिकता देने और आम चरागाहों को अतिक्रमण से बचाने की भी सलाह दी गई। -
कोलकाता. कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने मंगलवार को कहा कि उसे महाराष्ट्र में कवलापुर दुर्लभ खनिज (आरईई) ब्लॉक के लिए खनन मंत्रालय से खनिज रियायत लाइसेंस मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि खननकर्ता के पास ब्लॉक का लाइसेंस पांच साल के लिए होगा।
इस विकासक्रम को खननकर्ता कंपनी के सामरिक दुर्लभ खनिज खंड में विविधीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। खनिज ब्लॉक के ब्यौरे के अनुसार, आरईई ब्लॉक नागपुर जिले की रामटेक तहसील के कवलापुर गांव में है और लगभग 398.23 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस ब्लॉक में दुर्लभ खनिज के भूशास्त्रीय स्रोत लगभग 2 करोड़ 79.5 लाख टन होने का अनुमान है।यह कदम कोल इंडिया की दुर्लभ खनिज स्रोत में विस्तार करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इसका कारण दुर्लभ खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक परिवहन और रक्षा उपयोग के लिए बहुत जरूरी हैं। यह विकासक्रम, रणनीतिक रूप से जरूरी खनिजों के घरेलू स्रोतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयास से भी मेल खाता है।

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