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- नयी दिल्ली. अपनी कंपनी स्पेसएक्स के शेयर बाजार में ऐतिहासिक प्रवेश के बाद दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेयर' (एक हजार अरब डॉलर) बनने का गौरव हासिल करने वाले एलन मस्क की उपलब्धि की हर कोई चर्चा कर रहा है। इस बारे में महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का मानना है कि मस्क की सफलता की असली कहानी उनका वह अटूट विश्वास है जिसके बल पर उन्होंने आज की असंभव लगने वाली कल्पनाओं को कल की वास्तविकता में बदल दिया। स्पेसएक्स की पिछले सप्ताह सार्वजनिक सूचीबद्धता के बाद मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन गए। मस्क पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी टेस्ला और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाप्रदाता स्टारलिंक सहित कई कंपनियों के प्रमुख हैं। महिंद्रा ने वर्ष 2018 में अपने जीवन और कारोबार के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे मस्क का उस समय समर्थन किया था। मस्क ने तब 'न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में ''थका देने वाले, बेहद मुश्किल साल'' जैसी बाते कहीं थीं। महिंद्रा ने कहा कि नवाचार से लोगों को प्रेरित करने वालों को अक्सर उनके सबसे मुश्किल पलों में परखा जाता है, न कि उनके सबसे अच्छे समय में। महिंद्रा ने मस्क की इस कामयाबी पर कहा, ''आज की सुर्खियां उनके 'ट्रिलियन' डॉलर के मुकाम पर पहुंचने के बारे में हैं लेकिन असल कहानी यह है कि उन्होंने (मस्क ने) कभी यह मानना नहीं छोड़ा कि आज जो असंभव है, वह कल हकीकत बन सकता है।'' उन्होंने कहा, ''मैंने 2018 में एलन से इसलिए संपर्क किया था क्योंकि नवाचार को ढाल बनाने वाले का आकलन अक्सर उनके सबसे कठिन समय में किया जाता है, न कि उनके सबसे अच्छे दौर में। उस समय उनकी सबसे बड़ी विशेषता मुझे उनका अद्भुत धैर्य और संघर्षशीलता लगी थी।" महिंद्रा ने उस समय ट्विटर (अब 'एक्स') पर मस्क का हौसला बढ़ाते हुए लिखा था, ''डटे रहिए''।
- नयी दिल्ली. भारत में 2031 के अंत तक 5जी ग्राहकों की संख्या 1.1 अरब को पार कर सकती है, जो कुल कनेक्शन का 81 प्रतिशत होगी। स्वीडन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक 5जी ग्राहकों की संख्या 43 करोड़ तक पहुंच गई थी और कुल मोबाइल कनेक्शन में इनकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी। 'एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट' के अनुसार, भारत प्रति स्मार्टफोन मोबाइल डेटा खपत के मामले में भी वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना हुआ है। औसत मासिक उपयोग 37 जीबी है जिसके 2031 तक लगभग दोगुना होकर 70 जीबी तक पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 5जी को अपनाने की रफ्तार जारी है, जिसे किफायती 5जी स्मार्टफोन और उपकरणों की उपलब्धता, लगभग सभी जिलों में विस्तारित नेटवर्क दायरे और 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सेवाओं के बढ़ते विस्तार से बल मिल रहा है। इसमें कहा गया कि 46 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 4जी अब भी प्रमुख प्रौद्योगिकी बनी हुई है। हालांकि, उपयोगकर्ताओं के 5जी की ओर रुख के कारण 2025 में इसके ग्राहकों के लगभग 57 करोड़ से घटकर 2031 तक करीब 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है। एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल ने कहा कि भारत में 5जी अपनाने की तेज रफ्तार उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड पर आधारित है। उन्होंने कहा, '' देश में मजबूत और सुरक्षित 5जी अवसंरचना समावेशन, सुशासन तथा नवाचार को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ा रही है और डिजिटल इंडिया के लिए एक सशक्त आधार के रूप में काम कर रही है।'' रिपोर्ट में किसी का नाम लिए बिना ''एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम'' की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें भारत में एक सेवा प्रदाता ने हाल ही में अपने पोस्टपेड 5जी ग्राहकों के लिए 'नेटवर्क स्लाइसिंग' आधारित संपर्क सेवाएं शुरू की हैं, जो बाजार में उन्नत 5जी उपयोग मामलों के विकास का संकेत देती हैं। वैश्विक स्तर पर, 2026 की पहली तिमाही में 5जी मोबाइल ग्राहक तीन अरब के आंकड़े के पार पहुंच गए। दूरसंचार सेवाप्रदाताओं द्वारा 5जी स्टैंडअलोन (एसए) नेटवर्क स्लाइसिंग के व्यावसायिक प्रस्तावों में उल्लेखनीय वृद्धि जारी है, जबकि कई सेवा प्रदाताओं के लिए अपलिंक मोबाइल डेटा ट्रैफिक वृद्धि पहले ही डाउनलिंक से अधिक हो चुकी है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतें 2,500 रुपये बढ़कर 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई, जबकि चांदी की कीमत 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की रूपरेखा बनने के बाद वैश्विक बाजार में मजबूत रुख का असर इन कीमतों पर दिखा। बाजार के जानकारों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत शुक्रवार के 1,56,900 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद स्तर से 2,500 रुपये बढ़कर 1,59,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। चांदी की कीमत में भी लगातार दूसरे सत्र में बढ़ोतरी हुई और यह 5,000 रुपये बढ़कर 2,60,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। पिछले सत्र में चांदी की कीमत 2,55,700 रुपये प्रति किलोग्राम थी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी तब आई जब अमेरिका और ईरान ने दुश्मनी खत्म करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक अंतरिम समझौते की घोषणा की। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के कारण सोमवार को सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और हाजिर सोना 4,325 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर चला गया।'' उन्होंने कहा कि इस समझौते से कच्चे तेल की कीमतें कई सप्ताह के निचले स्तर पर आ गईं, महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुईं और ज्यादा सख्त मौद्रिक नीति की संभावना कम हो गई, जबकि कमजोर डॉलर और कम बॉन्ड प्रतिफल ने भी सर्राफा कीमतों को समर्थन दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 121.33 डॉलर या लगभग तीन प्रतिशत बढ़कर 4,340.65 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि चांदी 2.74 डॉलर या 4.04 प्रतिशत बढ़कर 70.74 डॉलर प्रति औंस हो गई। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक (जिंस और मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि 19 जून को होने वाले एक औपचारिक समझौते से महंगाई को लेकर उम्मीदें और कम हो सकती हैं और इससे व्यापक बाजार में स्थिरता को भी मदद मिल सकती है। निवेशक अब अपना ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक पर लगाएंगे।
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (जिंस शोध) कायनात चैनवाला के अनुसार, फेडरज रिजर्व के नजरिए पर बारीकी से नजर रखी जाएगी क्योंकि ऊर्जा की कम कीमतों से सख्ती की उम्मीदें कम हो सकती हैं, डॉलर कमजोर हो सकता है और भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम कम होने के बावजूद सर्राफा की कीमतों को अच्छा समर्थन मिल सकता है। -
नयी दिल्ली. भारत मई, 2026 में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा खरीद बढ़ाए जाने से रूस से कुल कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात बढ़कर अनुमानित 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत रही, जिसका मूल्य 4.8 अरब यूरो था। इसके अलावा तेल उत्पादों और कोयले का आयात क्रमश: 55 करोड़ यूरो और 42.9 करोड़ यूरो रहा। सीआरईए ने कहा कि मई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मासिक आधार पर आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका एक प्रमुख कारण रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी रहा। गुजरात स्थित देश के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी कच्चे तेल की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक रूसी तेल उतारा गया, जबकि जामनगर रिफाइनिंग परिसर में यह वृद्धि 14 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी कंपनियों ने भी इस वर्ष की शुरुआत में आयात दोबारा शुरू करने के बाद खरीद बढ़ाई है। नवंबर, 2025 के अंत में रूसी तेल आयात रोकने वाली न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने मार्च से दोबारा खरीद शुरू की थी। मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति मासिक आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में इसमें 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ओडिशा स्थित पारादीप रिफाइनरी में भी पिछले दो साल में रूसी कच्चे तेल की सर्वाधिक मात्रा उतारी गई है। इससे संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी दबावों के बावजूद रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल भारतीय रिफाइनरी इकाइयों के लिए आकर्षक बना हुआ है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापारिक प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा कारोबार में बदलाव आया था। इसके बाद भारत, रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। भारतीय रिफाइनरी इकाइयों ने रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर ऊर्जा लागत कम करने के साथ रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भी सहारा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही, जबकि भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद तुर्किये (छह प्रतिशत) और यूरोपीय संघ (पांच प्रतिशत) का स्थान रहा।
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नयी दिल्ली. सरकार द्वारा पेट्रोल पंप से डीजल खरीद पर लगाए गए अंकुश ने उन अस्पताल, आईटी पार्क, डेटा सेंटर और औद्योगिक इकाइयों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो बिजली आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर डीजल जनरेटर पर निर्भर हैं। सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंप से डीजल खरीदने पर रोक लगा दी थी। साथ ही खुदरा बिक्री केंद्रों से प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की सीमा तय की गई है। यह कदम ईंधन आपूर्ति के संरक्षण और खुदरा उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित डीजल के अन्यत्र उपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि यह अंकुश उन क्षेत्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, जहां डीजल जनरेटर न केवल आपातकालीन 'बैकअप' बल्कि नियमित बिजली स्रोत के रूप में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। अस्पतालों को इस कदम से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र माना जा रहा है। बड़े अस्पताल परिसरों में कई डीजल जनरेटर सेट लगे होते हैं, जो ग्रिड में बाधा आने पर पूरे परिसर को बिजली उपलब्ध कराते हैं। कई अस्पताल सर्जरी, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) और अन्य संवेदनशील प्रक्रियाओं के दौरान वोल्टेज में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए एहतियातन भी जनरेटर चलाते हैं। एक प्रमुख अस्पताल समूह के अधिकारी ने कहा, "कई अस्पताल महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए केवल ग्रिड बिजली पर निर्भर नहीं रहते। निर्बाध बिजली आपूर्ति हमारी परिचालन योजना का अनिवार्य हिस्सा है और डीजल जनरेटर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।" डेटा सेंटर, आईटी पार्क और दूरसंचार सुविधाएं भी अपनी सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए डीजल आधारित बैकअप प्रणालियों पर काफी निर्भर हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार, कई संस्थान ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आसपास के पेट्रोल पंप से नियमित रूप से डीजल भरवाते रहे हैं। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ राज्यों में अधिकतम मांग (पीक ऑवर) के दौरान बिजली दरें इतनी अधिक हो जाती हैं कि डीजल जनरेटर से बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है। ऐसे में कई आईटी कंपनियां अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा जनरेटर के माध्यम से पूरा करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंकुश कुछ औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की परिचालन लागत भी बढ़ा सकता है। बिजली की मांग बढ़ने के समय ग्रिड से खरीदी गई बिजली महंगी पड़ने पर कई संस्थान लागत नियंत्रण और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए डीजल जनरेटरों का उपयोग करते हैं। सरकार का कहना है कि हाल के दिनों में डीजल और पेट्रोल की खुदरा बिक्री में असामान्य वृद्धि देखी गई, क्योंकि कई औद्योगिक और संस्थागत उपभोक्ता कम कीमत का लाभ उठाने के लिए थोक आपूर्ति चैनल के बजाय पेट्रोल पंप से ईंधन खरीद रहे थे। इससे कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी का जोखिम पैदा हो गया था। सरकारी आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को अब ईंधन की खरीद प्रतिबद्ध उपभोक्ता पंप या थोक आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से करनी होगी। उद्योग के प्रतिनिधियों ने अस्पतालों, दूरसंचार नेटवर्क, डेटा सेंटर और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए छूट तथा परिचालन संबंधी स्पष्टता की मांग की है। उनका कहना है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को हर स्थिति में डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, जिन संस्थानों के पास पहले से थोक ईंधन आपूर्ति अनुबंध हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम दिक्कत होगी, जबकि खुदरा खरीद पर निर्भर संगठनों को अपनी खरीद व्यवस्था में तेजी से बदलाव करना पड़ सकता है। ये अंकुश अधिकतम 90 दिन के लिए लागू किए गए हैं। सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बाद खुदरा और थोक डीजल कीमतों के बीच बढ़े अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता पेट्रोल पंप से ईंधन खरीदने लगे थे। दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक बिक्री मूल्य 134.50 रुपये प्रति लीटर है। मई में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- मुंबई. आतिथ्य क्षेत्र की कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में अपने 'सेलेक्शंस' ब्रांड के तहत 'अयोध्यम' होटल के उद्घाटन की घोषणा की। कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह नया होटल अयोध्या में तेजी से बढ़ रहे आध्यात्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है। इस होटल में 162 कमरें हैं। आईएचसीएल की कार्यकारी उपाध्यक्ष (नए व्यवसाय और होटल उद्घाटन) दीपिका राव ने कहा कि भारत में आध्यात्मिक पर्यटन में मजबूत वृद्धि देखी जा रही है और अयोध्या देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि 'अयोध्यम' होटल को इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है, जहां यात्रियों को शहर की आध्यात्मिक भावना के अनुरूप ठहरने का अनुभव मिलेगा। आईएचसीएल ने कहा कि यह होटल आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक और सांस्कृतिक तत्वों का समावेश करता है, जिससे यात्रियों की बदलती अपेक्षाओं को पूरा किया जा सके।
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नयी दिल्ली. अमेरिकी सरकार के निर्यात नियंत्रण संबंधी निर्देश के बाद कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने उन्नत एआई मॉडल 'फेबल 5' और 'मिथोस 5' की वैश्विक पहुंच पर तत्काल प्रभाव से अस्थायी रोक लगा दी है। अमेरिका स्थित कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह निर्देश राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। इस तरह अमेरिका के भीतर या बाहर के किसी भी विदेशी नागरिक को इन एआई मॉडलों तक पहुंच देने पर रोक लगा दी गई है। एंथ्रोपिक ने कहा, "इस आदेश का समग्र प्रभाव यह है कि अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हमें अपने सभी ग्राहकों के लिए फेबल 5 और मिथोस 5 मॉडलों को तुरंत निष्क्रिय करना पड़ा है। हालांकि, कंपनी के अन्य मॉडलों की उपलब्धता पर इसका असर नहीं पड़ेगा।" इस फैसले से भारत में मौजूद उपयोगकर्ताओं और उद्यमों पर असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत एंथ्रोपिक का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी ने हाल ही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ 50,000 कर्मचारियों को अपने मॉडल उपलब्ध कराने का समझौता किया था, जबकि इन्फोसिस ने भी उन्नत उद्यम एआई समाधान के लिए साझेदारी की घोषणा की थी। सूत्रों का कहना है कि हाल में भारत की कुछ सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों को भी 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' नामक साइबर सुरक्षा पहल के तहत 'मिथोस' मॉडल तक पहुंच दी गई थी। 'फेबल 5' मॉडल को कोड विश्लेषण, सॉफ्टवेयर खामियों की पहचान और उन्हें ठीक करने जैसी क्षमताओं के लिए विकसित किया गया है। इसका उपयोग साइबर सुरक्षा और उद्यम समाधान में किया जाता है। वहीं, 'मिथोस 5' मॉडल जटिल सिस्टम का विश्लेषण करने और संभावित कमजोरियों का आकलन करने में सक्षम है। इसकी क्षमताओं को देखते हुए इसे सीमित और नियंत्रित उपयोग के लिए ही उपलब्ध कराया गया था। एंथ्रोपिक ने कहा कि उसे 12 जून को अमेरिकी सरकार से यह निर्देश मिला था। हालांकि, इस पत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। कंपनी के मुताबिक, सरकार का मानना है कि फेबल 5 मॉडल की सुरक्षा को दरकिनार करने के एक तरीके का पता चल गया है। इसके साथ ही एंथ्रोपिक ने इस आकलन से असहमति जताते हुए कहा कि संबंधित तकनीक सीमित एवं गैर-सार्वभौमिक है और इसी तरह की क्षमताएं अन्य एआई मॉडलों में भी उपलब्ध हैं। कंपनी ने अमेरिकी सरकार के इस कदम को 'गलतफहमी' करार देते हुए कहा कि वह जल्द से जल्द सेवाएं बहाल करने के लिए प्रयासरत है। उसने अपने ग्राहकों से इस गतिरोध के लिए खेद भी जताया।
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नयी दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और आईसीआईसीआई बैंक सहित कई बैंकों ने बृहस्पतिवार को प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए ऊंची ब्याज दरों की पेशकश करने वाली एक नई विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमा योजना शुरू की। एनआरआई सावधि जमा (एफडी) की ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों के लिए 30 सितंबर तक विदेशी मुद्रा अदला-बदली खिड़की की घोषणा के कुछ ही दिन बाद आई है। रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंकों को इन जमाओं पर वहन की जाने वाली मुद्रा की 'हेजिंग' लागत से प्रभावी रूप से राहत मिली है और उनके पास जमा दरों में वृद्धि करने की गुंजाइश बनी है। इस कदम का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जमा योजना के तहत करीब 60 से 70 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी पूंजी भारत आने की संभावना है। आरबीआई के इस कदम के बाद, आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि वह 11 जून से एनआरआई एफडी पर 6.50 प्रतिशत ब्याज की पेशकश कर रहा है। एसबीआई ने अमेरिकी डॉलर में तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली नई 'एसबीआई एडवांटेज एफसीएनआर (बी)' जमा योजना शुरू की है। इस योजना में एक वर्ष की लॉक-इन अवधि होगी। एसबीआई के अनुसार, 10 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की तीन से चार वर्ष की जमा पर 5.50 प्रतिशत, चार से पांच वर्ष की जमा पर 5.75 प्रतिशत और पांच वर्ष की जमा पर छह प्रतिशत ब्याज मिलेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपनी नई एफसीएनआर (बी) योजना के तहत अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, यूरो, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडाई डॉलर में तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली जमाओं पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं। नई दरों के तहत अमेरिकी डॉलर जमा पर अधिकतम छह प्रतिशत, ब्रिटिश पाउंड और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जमा पर 4.75 प्रतिशत, कनाडाई डॉलर जमा पर 5.15 प्रतिशत तथा यूरो जमा पर 3.75 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा। कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा कि 11 जून से तीन से पांच वर्ष की एफसीएनआर (बी) जमा पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर से कम की जमा के लिए छह प्रतिशत और इससे अधिक की जमा के लिए 6.15 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। एचडीएफसी बैंक ने भी 10 जून से तीन से पांच वर्ष की एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर बढ़ाकर छह प्रतिशत कर दी है। यह दर 10 जून से 30 सितंबर, 2026 के बीच खोली गई जमाओं पर लागू होगी। वहीं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अमेरिकी डॉलर में एफसीएनआर (बी) जमा पर अधिकतम ब्याज दर 5.15 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.10 प्रतिशत सालाना कर दी है। नई दरें 10 जून, 2026 से प्रभावी हैं। एफसीएनआर (बी) खाते एनआरआई को विदेशी मुद्रा में भारत में धन जमा करने की सुविधा देते हैं। इन खातों पर मिलने वाला ब्याज और मूलधन विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है, इसलिए ये एनआरआई निवेशकों के बीच लोकप्रिय माने जाते हैं। -
मुंबई. देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से आठ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 13,223 कर्मचारियों की नियुक्ति की है, जिससे उनकी कुल कार्यबल संख्या 6.28 लाख से अधिक हो गई है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सबसे अधिक भर्तियां की हैं। 'पीटीआई-भाषा' द्वारा बैंकों की वार्षिक रिपोर्ट से संकलित आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, इन आठ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कर्मचारी बल 31 मार्च, 2026 को 6,28,203 रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 6,14,980 था। इन आठ बैंकों में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं। चार अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पंजाब एंड सिंध बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक ने अभी तक अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं की है। एसबीआई ने कार्यबल विस्तार में सबसे आगे रहते हुए गत वित्त वर्ष में 8,905 कर्मचारियों की नियुक्ति की। देश के सबसे बड़े बैंक का कर्मचारी बल वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,45,131 हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 2,36,226 था। डिजिटलीकरण और बैंकिंग कार्यों के स्वचालन के बावजूद, कर्मचारियों की संख्या में यह वृद्धि दर्शाती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक विस्तार, ग्राहक सेवा और प्रौद्योगिकी-आधारित बदलावों के लिए अब भी बड़े कार्यबल पर निर्भर हैं। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बेहतर वित्तीय प्रदर्शन, मजबूत बही-खाते और अधिक कारोबार वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। इससे वे प्रौद्योगिकी, जोखिम प्रबंधन, संचालन और शाखा बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में मानव संसाधन बढ़ा रहे हैं। एसबीआई का योगदान इस वृद्धि में सबसे अधिक रहा जिसकी कुल नियुक्ति में 67 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1,685 कर्मचारियों की नियुक्ति की, जिससे इसका कार्यबल 75,008 से बढ़कर 76,693 हो गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 1,005 कर्मचारियों की नियुक्ति की, जिससे इसका कार्यबल 14,591 से बढ़कर 15,596 हो गया। केनरा बैंक ने 567 कर्मचारियों को जोड़ा, जिससे इसका कार्यबल 81,827 हो गया। वहीं पंजाब नेशनल बैंक ने 527 कर्मचारियों की वृद्धि के साथ कर्मचारियों की संख्या 96,738 हो गई। बैंक ऑफ इंडिया का कार्यबल 446 कर्मचारियों की वृद्धि के साथ 51,010 हो गया और इंडियन बैंक के 153 कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ कुल कर्मचारी 40,224 हो गए। - नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल के दौरान देश में इंटरनेट और डिजिटल संपर्क के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2014 में एक जीबी डेटा की कीमत जहां 269 रुपये थी, वहीं अब यह घटकर मात्र 8-10 रुपये रह गई है। यानी डेटा की लागत में करीब 97 प्रतिशत की कमी आई है। इस सस्ते इंटरनेट का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिला है, जहां इंटरनेट उपयोग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे लोगों के लिए जानकारी, शिक्षा, रोजगार और विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। दस्तावेज के मुताबिक, देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2014 के लगभग 25 करोड़ से बढ़कर दिसंबर, 2025 तक 103 करोड़ हो गई है। वहीं ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या भी छह करोड़ से बढ़कर लगभग 100 करोड़ पर पहुंच गई है, जो करीब 17 गुना बढ़ोतरी है। इसमें कहा गया है कि 103 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन देश में डिजिटल पहुंच और सस्ती इंटरनेट सेवाओं का प्रमाण हैं। बढ़ते इंटरनेट उपयोग ने ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार को गति दी है, जिससे रोजगार सृजन और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को भी बल मिला है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की रिपोर्ट 'एस्टिमेशन एंड मेजरमेंट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकॉनमी' के अनुसार, 2022-23 में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय आय में हिस्सा 11.74 प्रतिशत था। यह 31.64 लाख करोड़ रुपये (करीब 402 अरब डॉलर) के बराबर है। रिपोर्ट में कहा गया है 2030 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था समग्र अर्थव्यवस्था की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ेगी और राष्ट्रीय आय में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी हो सकती है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वदेशी 5जी दूरसंचार उपकरणों से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण तक देश ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2014 में देश में कोई चिप निर्माण संयंत्र नहीं था, जबकि अब मोदी सरकार के दौरान 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। देश, जो कभी मोबाइल फोन का आयातक था, अब प्रमुख निर्यातकों में शामिल हो गया है। मोबाइल फोन निर्यात 2014 के 1,600 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो लगभग 163 गुना वृद्धि है। इसके साथ ही मोबाइल विनिर्माण इकाइयों की संख्या 2014 के केवल दो से बढ़कर अब 300 से अधिक हो गई है। आधार के विस्तार में भी बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2014 में जहां 61.01 करोड़ आधार कार्ड बनाए गए थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 144 करोड़ से अधिक हो गई है।
- नयी दिल्ली.। भारतीय रिजर्व बैंक के हाल के कदमों से भारत को चालू वित्त वर्ष में 55 से 65 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आकर्षित करने, रुपये को स्थिर करने और देश के भुगतान संतुलन को अधिशेष में लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक शोध विभाग की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट 'इकोरैप' में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक के फरवरी और जून, 2026 के कदमों को रुपये को स्थिर करने, घरेलू बॉन्ड बाजार को मजबूत करने, अधिक स्थिर विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बाह्य वित्त पोषण में आने वाली बाधाओं को कम करने के एक समन्वित प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। केंद्रीय बैंक ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन कदमों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) को बढ़ावा देने के लिए रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय दर अदला-बदली की सुविधा शामिल है। आरबीआई ने बैंकों को नए तीन से पांच साल के विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) खाता (एफसीएनआर) जमा जुटाने के लिए भी ऐसी ही सुविधा दी है। एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, बाह्य वाणिज्यिक उधारी पर फरवरी के कदम संरचनात्मक और बाजार विकास को ध्यान में रखकर उठाये गये थे, जबकि जून में किये गये उपायों का मकसद विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करना और घरेलू ब्याज दरों को बढ़ाए बिना रुपये को सहारा देना है। रिपोर्ट में कहा गया, ''करीब 55-65 अरब डॉलर का प्रवाह यह सुनिश्चित करेगा कि अनुमानित 16 प्रतिशत कर्ज वृद्धि के मुकाबले बैंक प्रणाली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जमा वृद्धि बढ़कर लगभग 14.5-15 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इसका मतलब यह होगा कि नियामकीय छूट को समायोजित करने के बाद कर्ज- जमा अंतर लगभग एक लाख करोड़ रुपये कम हो जाएगा और ब्याज दरों का ढांचा और नीचे आएगा। आरबीआई ने डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट को थामने के लिए नए एफसीएनआर (बी) जमा के लिए अमेरिका डॉलर-रुपया विदेशी विनिमय अदला-बदली सुविधा शुरू की है। ये जमा कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक पांच साल की अवधि के लिए होंगे। यह सुविधा सोमवार से लागू हुई और 16 अक्टूबर, 2026 तक खुली रहेगी।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी) की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के एक दिन बाद अपने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में परिवारों को रसोई गैस दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सस्ती कीमत पर मिल रही है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 942 हो गई है, जो पहले 913 रुपये थी। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को साल में चार बार 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद सिलेंडर ₹642 में उपलब्ध होगा। हालांकि, पिछले साल यह सब्सिडी साल में नौ बार देने की घोषणा की गई थी। इससे पहले सात मार्च को घरेलू रसोई गैस के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे। इस तरह से 14.2 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर के दाम कुल मिलाकर 89 रुपये बढ़ चुके हैं। ताजा संशोधन से पहले सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर 703 रुपये का नुकसान हो रह था। सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण एलपीजी का वैश्विक बेंचमार्क 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' फरवरी के बाद लगभग 46 प्रतिशत बढ़ गया है। इसके चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की वास्तविक लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ता केवल 942 का भुगतान कर रहे हैं, जबकि शेष लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां और सरकार वहन कर रही हैं। सरकार के मुताबिक, घरेलू एलपीजी पर नुकसान पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग₹60,000 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पहले 41,338 करोड़ थी। इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को 30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति देने को मंजूरी दी है। सरकार ने यह भी कहा कि संकट के दौरान देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई और अमेरिका, कनाडा तथा अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था की गई। सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में अब भी कम हैं। सरकार के अनुसार, कीमतों में यह संशोधन उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के पूरे असर से बचाने और देशभर में रसोई गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
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नासिक. महाराष्ट्र के किसानों ने केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद के मानकों में दी गई ढील का स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि इससे उन्हें बहुत अधिक राहत नहीं मिलेगी। किसानों ने सरकार से प्याज के लिए 3,000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) द्वारा लगभग 1,580 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही खरीद किसानों की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। केंद्र सरकार ने प्याज खरीद के लिए आकार और गुणवत्ता संबंधी मानकों में ढील दी है। इसके तहत स्वीकार्य आकार सीमा को 45-65 मिमी. से बढ़ाकर 35-70. मिमी कर दिया गया है। साथ ही रंग, छिलके की खामियों और हल्की धूप से हुई क्षति जैसी गुणवत्ता संबंधी शर्तों को भी आसान बनाया गया है। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि मुख्य समस्या खरीद मानकों की नहीं, बल्कि कम कीमतों की है।
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाने ने कहा कि नियमों में ढील दी गई है, लेकिन किसान अब भी घाटे में हैं। असली सवाल यह है कि प्याज के दाम कब बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पहले की ग्रेडिंग व्यवस्था में यदि कोई किसान 30 क्विंटल प्याज खरीद केंद्र पर लाता था, तो उसमें से केवल लगभग 25 क्विंटल ही स्वीकार किए जाते थे और शेष प्याज उसे कम कीमत पर बाजार में बेचना पड़ता था। उनका कहना है कि नए नियमों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उनका प्रभावी ढंग से पालन किया जाएगा। भदाने ने दावा किया कि वर्तमान खरीद दर बाजार की अपेक्षाओं से कम है और खेती की लागत को भी पूरा नहीं करती। उन्होंने प्याज के लिए 3,000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की। संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज उत्पादन की औसत लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को इससे कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार, उत्पादन लागत से कम दाम मिलने से किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। किसान संगठन ने खरीद प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि नेफेड और एनसीसीएफ को प्रतिदिन उन किसानों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए, जिनसे प्याज खरीदा गया है। संगठन ने यह भी मांग की कि खरीद प्रक्रिया कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) के माध्यम से कराई जाए, ताकि अनियमितताओं पर रोक लगे और किसानों को प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सके। इसके अलावा, किसानों ने पिछले चार-पांच महीनों के दौरान कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने की मांग भी की है। उनका दावा है कि लाखों किसानों को गिरती कीमतों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उधर, महाराष्ट्र सरकार ने नेफेड और एनसीसीएफ द्वारा की जाने वाली प्याज खरीद पर एपीएमसी शुल्क माफ कर दिया है, ताकि लेन-देन की लागत कम हो और खरीद प्रक्रिया तेज हो सके। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि शुल्क माफी का लाभ मुख्य रूप से खरीद एजेंसियों को मिलेगा।
किसान संगठन ने चेतावनी दी कि केवल खरीद मानकों में ढील देने से प्याज उत्पादकों की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए किसानों को लाभकारी मूल्य, पारदर्शी खरीद व्यवस्था, एपीएमसी के माध्यम से खरीद और पिछले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करनी होगी। -
नयी दिल्ली. भारत ने झारखंड से ब्रिटेन को 1.5 टन ताजा 'आम्रपाली' आम का निर्यात किया है। वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। ये आम झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त किए गए हैं। यह एक पूर्ण महिला किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) है, जो स्थानीय महिला किसानों को संगठित कर कृषि उत्पादन और विपणन का कार्य करती है। आमों की यह खेप चार जून को कोलकाता से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। यह निर्यात झारखंड के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने और महिला किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के प्रसिद्ध हिमसागर आम के निर्यात पर इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने संकट खड़ा कर दिया है। लगातार बारिश और उसके बाद बढ़े तापमान के कारण आमों पर काले धब्बे उभर आए हैं, जिससे बड़ी मात्रा में इस फल का निर्यात करना संभव नहीं है।
निर्यातकों के अनुसार, ये काले धब्बे रोग संक्रमण के शुरुआती संकेत हैं। आमों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपनाई जाने वाली बैगिंग तकनीक भी इस बार मौसम की मार से प्रभावित हुई। बैगिंग के दौरान हुई लगातार वर्षा और बाद में बढ़ी गर्मी ने फलों को नुकसान पहुंचाया। मालदा के प्रमुख निर्यातक सृष्टि फूड प्रोडक्ट्स के सह-संस्थापक प्रसून चितलांगिया ने बताया कि अमेरिका भेजी जाने वाली इस सीजन की पहली खेप को रोकना पड़ा है, क्योंकि धब्बेदार फलों को विदेशी आयातक स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में निर्यात ऑर्डर होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण फल उपलब्ध कराने में कठिनाई आ रही है। हालांकि, मालदा मैंगो मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्ल साहा का मानना है कि स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। उनके अनुसार, केवल लगभग 15 प्रतिशत बैग किए गए फलों में रोग के लक्षण पाए गए हैं, जबकि लाखों अन्य आम अभी भी निर्यात योग्य हैं और विदेशी बाजारों में हिमसागर आम की मांग मजबूत बनी हुई है। इस वर्ष मालदा से आम और लीची के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद थी। राज्य बागवानी विभाग और निर्यातक किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक तुड़ाई और निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके बावजूद रोग की समस्या ने निर्यातकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिर भी निर्यातक प्रभावित न होने वाले बागानों से उच्च गुणवत्ता वाले आमों की पहचान कर विदेशी बाजारों में आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि मालदा के प्रीमियम आमों की अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए निर्यात लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा अब भी हासिल किया जा सकता है।
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नयी दिल्ली. इस सप्ताह सोने की कीमतें पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहेंगी। विश्लेषकों ने यह संभावना जताई है। निवेशक चीन और अमेरिका के व्यापार एवं मुद्रास्फीति के आंकड़ों, मध्य माह में आने वाले अमेरिका के उपभोक्ता धारणा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) के आंकड़ों तथा भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर नजर रखेंगे। विश्लेषकों के अनुसार, इसके साथ ही यूरोपीय केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय पर भी बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि इससे सर्राफा और अन्य जिंस बाजारों पर असर पड़ सकता है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी-जिंस एवं मुद्रा शोध के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, ''सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए गति अब भी सुधारात्मक प्रतीत होती हैं।'' घरेलू जिंस बाजार में सप्ताह का अंत गिरावट के साथ हुआ, जिसमें अगस्त माह में आपूर्ति के लिए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का वायदा भाव 5,317 रुपये या 3.3 प्रतिशत टूटकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। जुलाई आपूर्ति वाली चांदी 18,461 रुपये यानी सात प्रतिशत गिरकर 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जिंस एवं मुद्रा जतिन त्रिवेदी ने कहा, ''तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश विकल्पों से हट गया, जिससे पिछले सप्ताह सोने का प्रदर्शन कमजोर रहा।'' उन्होंने कहा कि रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर अतिरिक्त दबाव डाला, जिससे घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कमजोर रहा। वैश्विक बाजारों में सोने का वायदा भाव 227.7 डॉलर या पांच प्रतिशत गिरकर 4,365 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 6.77 डॉलर यानी करीब नौ प्रतिशत टूटकर 69.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। मेर ने कहा कि विदेशी व्यापार में सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा और सप्ताह के अंत में इसमें लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि औद्योगिक धातुओं में तेजी से आई गिरावट के कारण चांदी की कीमतों में भी भारी कमी आई। विश्लेषकों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष में संभावित समाधान के संकेतों ने भी सर्राफा की मांग को कम किया है। त्रिवेदी ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 4,400–4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बनी रहती हैं, तो कीमती धातुएं दबाव में रह सकती हैं। साथ ही मजबूत रुपया, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और सतर्क निवेश धारणा किसी भी तेज सुधार को सीमित कर सकते हैं।
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नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में हीरो मोटोकॉर्प की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों के लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कंपनी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, आत्मनिर्भर और टिकाऊ परिवहन के विजन के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया वाहन बाजार के रूप में भारत फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 77 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।गडकरी ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी और देश को लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, जैव ईंधन (बायोफ्यूल) की मांग बढ़ाएगी, किसानों की आय में सहयोग करेगी और “वेस्ट टू वेल्थ” यानी कचरे से संपदा बनाने की अवधारणा को भी बढ़ावा देगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।उन्होंने कहा कि हीरो मोटोकॉर्प की फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों का लॉन्च ऑटोमोबाइल क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सभी संबंधित पक्षों के सहयोग और समन्वित प्रयासों का परिणाम है। -
नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को नई दिल्ली में मारुति सुजुकी द्वारा निर्मित भारत के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन नबीन भी उपस्थित रहे। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ई20 से लेकर ई100 तक विभिन्न इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चल सकते हैं। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यात्री वाहन क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का प्रवेश केवल एक नए वाहन का लॉन्च नहीं, बल्कि देश के ऊर्जा परिवर्तन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 37 लाख यात्री वाहन हैं और इस क्षेत्र में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने से इथेनॉल आधारित परिवहन को नई गति मिलेगी।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सैन्य संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के एलपीजी आयात का लगभग 60% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था। इसके बावजूद भारत ने 1.4 अरब की आबादी वाले देश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी तेल की कमी नहीं हुई और लोग सामान्य रूप से सड़क व हवाई यात्रा करते रहे। उन्होंने बताया कि गलत सूचना फैलाकर कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन समय पर नीतिगत हस्तक्षेप और प्रभावी प्रबंधन से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा रणनीति के तीन प्रमुख स्तंभों- उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता- के बीच संतुलन बनाए रखने की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी। देश ने एलपीजी उत्पादन क्षमता को संकट से पहले के स्तर की तुलना में काफी बढ़ाया है और प्राकृतिक गैस व सीएनजी की आपूर्ति विस्तार पर भी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों में दुनिया के कई देशों की तुलना में कम वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती का भी उल्लेख किया।सतत विकास पर बोलते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा परिवर्तन की सबसे सफल पहलों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में इथेनॉल मिश्रण 1.5% से भी कम था, जो 2025-26 में बढ़कर 20% तक पहुंच गया है। यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया गया। इथेनॉल खरीद 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 1,040 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है, जबकि उत्पादन क्षमता 421 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इससे कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत, उत्सर्जन में कमी और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री का 50% हिस्सा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में परिवर्तित हो जाता है, तो इससे 311.8 करोड़ लीटर इथेनॉल की अतिरिक्त मांग पैदा होगी। इससे किसानों को 12,403 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। साथ ही 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी भी आएगी। उन्होंने बताया कि नीति आयोग ने इथेनॉल आधारित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को शून्य-उत्सर्जन वाहन की श्रेणी में रखा है। ई85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहनों से कण पदार्थ (पीएम) का उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, जिससे वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है।केंद्रीय मंत्री ने सरकार के फ्लेक्स-फ्यूल रोडमैप की जानकारी देते हुए कहा कि बीआईएस मानकों के अनुरूप ई85 को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए एकल ईंधन मानक के रूप में निर्धारित करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत शुरुआती चरण में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 फ्लेक्स-फ्यूल अनुकूल ईंधन आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। दिसंबर 2026 तक इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 500 और वर्ष 2027 के अंत तक प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 आउटलेट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार मूल्य सहायता, सड़क कर में छूट, उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम और भंडारण व वितरण अवसंरचना के विकास जैसे उपायों पर भी काम कर रही है।हाल ही में हीरो मोटोकॉर्प द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों और अब मारुति सुजुकी द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन लॉन्च किए जाने का उल्लेख करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत स्वच्छ गतिशीलता के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन देश में ही विकसित तकनीकों, भारतीय किसानों के सहयोग और भारतीय उपभोक्ताओं की भागीदारी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने वाहन निर्माताओं से सभी श्रेणियों में फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल तेजी से लाने और तेल विपणन कंपनियों से देशभर में ई85 की उपलब्धता बढ़ाने का आग्रह किया। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र खनन कंपनी एनएमडीसी ने बुधवार को लौह अयस्क की कीमतें 200 रुपये प्रति टन और फाइन की कीमतें 150 रुपये प्रति टन बढ़ा दीं। यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। मौजूदा तिमाही में यह तीसरी बढ़ोतरी है। देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी एनएमडीसी ने एक नियामकीय सूचना में बताया कि उसने बैला लंप अयस्क की कीमत 5,700 रुपये प्रति टन और फाइन की कीमत 4,850 रुपये प्रति टन तय की है। लंप अयस्क या उच्च-श्रेणी के लौह अयस्क में 65.5 प्रतिशत लौह तत्व होता है, जबकि फाइन निम्न-श्रेणी के अयस्क होते हैं जिनमें 64 प्रतिशत या उससे कम लौह तत्व होता है। तीन जून से प्रभावी नई कीमतों में रॉयल्टी, जिला खनिज कोष (डीएमएफ), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (डीएमईटी) शामिल नहीं हैं; साथ ही इनमें उपकर, वन परमिट शुल्क, पारगमन शुल्क, जीएसटी, पर्यावरण उपकर और अन्य कर भी शामिल नहीं हैं। लौह अयस्क और कोकिंग कोयला दो ऐसे बुनियादी कच्चे माल हैं जिनका उपयोग ब्लास्ट फर्नेस विधि से इस्पात के निर्माण में किया जाता है। इनकी कीमतों में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर इस्पात की दरों पर पड़ता है। इस्पात का व्यापक उपयोग निर्माण, बुनियादी ढांचा, वाहन और रेलवे जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। एनएमडीसी द्वारा की गई यह नवीनतम मूल्य समीक्षा, मौजूदा तिमाही के दौरान लौह अयस्क और फाइन की कीमतों में की गई तीसरी बढ़ोतरी है। छह मई को घोषित पिछली मूल्य समीक्षा में एनएमडीसी ने बैला लंप की दर 5,500 रुपये प्रति टन और फाइन की दर 4,700 रुपये प्रति टन तय की थी। पांच अप्रैल को कंपनी ने लौह अयस्क की कीमतें 5,300 रुपये प्रति टन और फाइन की कीमतें 4,500 रुपये प्रति टन तय की थीं। हैदराबाद स्थित एनएमडीसी (जिसे पहले नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के नाम से जाना जाता था) इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन में इसका योगदान लगभग 20 प्रतिशत है।
- नयी दिल्ली. पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में वृद्धि से अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति-जनित दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे आने वाले महीनों में परिवहन एवं विनिर्माण लागत बढ़ सकती है और आम उपभोग की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया। रिपोर्ट कहती है कि 15 मई के बाद से पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है और अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहते हैं तो यह बढ़ोतरी निकट भविष्य में 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। क्रिसिल ने कहा, "इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था में ढुलाई लागत में बढ़ोतरी के जरिये दिखेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों और अन्य वस्तुओं की महंगाई दोनों बढ़ेंगी।" रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। ईंधन कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से खुदरा मुद्रास्फीति करीब 0.36 प्रतिशत बढ़ सकती है। अगर ईंधन कीमतें 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ जाती हैं तो खुदरा महंगाई में करीब 0.48 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि ईंधन के दाम बढ़ने का सर्वाधिक प्रभाव सड़क परिवहन पर पड़ेगा क्योंकि इसकी लागत का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर निर्भर है। इससे माल ढुलाई महंगी हो जाएगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। देश में करीब 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग के जरिये ही होती है। क्रिसिल के मुताबिक, ढुलाई लागत बढ़ने से दूध, फल, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली जैसे खाद्य उत्पादों की कीमतों में तेजी आ सकती है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर परिवहन नेटवर्क पर निर्भर हैं। रिपोर्ट कहती है कि कपड़ा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी उत्पाद, सीमेंट और सिरेमिक जैसे क्षेत्रों में भी लागत बढ़ेगी। रसायन, कोयला और धातु क्षेत्र भी महंगाई की चपेट में आएंगे। ऐसी स्थिति में कंपनियां लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं या उत्पाद की मात्रा में कटौती कर सकती हैं। सितंबर, 2025 में जीएसटी दरों में की गई कटौती से कुछ राहत मिल सकती है लेकिन ऊंची ऊर्जा लागत के असर को यह पूरी तरह संतुलित नहीं कर पाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल रही है, जो पूरे वर्ष के अनुमान 95 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है। हालांकि, सकल मुद्रास्फीति अभी भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत लक्ष्य से नीचे है, लेकिन आगे चलकर इसके बढ़ने का अनुमान है। फिर भी यह रिजर्व बैंक के दो से छह प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। रिजर्व बैंक महंगाई के रुझान, खासकर घरेलू अपेक्षाओं और व्यापक मूल्य वृद्धि के जोखिम पर नजर बनाए रखेगा। इसके साथ ही रिपोर्ट कहती है कि रिजर्व बैंक की नजर कमजोर मानसून और अल नीनो जैसी मौसम संबंधी स्थितियों पर भी रहेगी जिनकी वजह से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाले व्यापार बोर्ड (बीओटी) में 29 गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया है। इनमें एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी, एप्पल इंडिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) विराट भाटिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा के एमडी अनीश शाह शामिल हैं। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित इस बोर्ड के सदस्य विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं। वाणिज्य मंत्रालय की मंगलवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, 2019 में सरकार ने निर्यात और आयात को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों के साथ परामर्श प्रक्रिया में अधिक सामंजस्य लाने के लिए व्यापार विकास एवं संवर्धन परिषद का व्यापार बोर्ड में विलय कर दिया था। नए गैर-सरकारी सदस्यों में आईएमसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की अध्यक्ष सुनीता रामनाथकर, अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष सतीश गोयल, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया, सोरिन इन्वेस्टमेंट्स के संस्थापक संजय नैयर, एक्सेल के भागीदार प्रशांत प्रकाश, डावर ग्रुप के चेयरमैन एवं संस्थापक पूरन डावर, ऑलकार्गो ग्रुप के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन शशि किरण शामिल हैं। अन्य सदस्यों में कॉन्टिनेंटल कैरियर्स के समूह प्रबंध निदेशक वैभव वोहरा, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील के सीईओ दिलीप ओम्मन, सोमानी इम्प्रेसा ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संदीप सोमानी, सियाम के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ शैलेश चंद्रा शामिल हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में बताया कि इसमें इन-स्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका, ईवाई इंडिया के चेयरमैन और सीईओ राजीव मेमानी और यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक उपासना अरोड़ा भी शामिल हैं। ये उद्योगपति जिला निर्यात केंद्र कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सूत्रधार के रूप में कार्य करेंगे। इन कार्यक्रमों में जागरूकता कार्यशालाएं, चिन्हित उत्पादों की पहचान और प्रचार शामिल हैं। वे राज्य सरकारों को राष्ट्रीय विदेश व्यापार नीति के अनुरूप निर्यात रणनीतियों को विकसित करने और आगे बढ़ाने में सहायता करेंगे। वे निर्यात बढ़ाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन को नीतिगत उपायों पर सरकार को सलाह भी देंगे, विभिन्न क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे, बाधाओं की पहचान करेंगे और निर्यात आय को अधिकतम करने के लिए उद्योग-विशिष्ट उपायों का सुझाव देंगे।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को कहा कि रिजर्व बैंक नामित एजेंसियों, डीजीएफटी अनुमोदित संस्थाओं और इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के माध्यम से पात्र आभूषण विक्रेताओं के जरिये चांदी के आयात को केवल वैध आयात मंजूरी के तहत ही अनुमति दी जाएगी। इस कदम ने चांदी के आयात मानदंडों को और सख्त कर दिया है।आयात मंजूरी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी की जाएगी।पिछले महीने सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने के लिए सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा है। विदेश व्यापार महानिदेशालय की एक अधिसूचना में कहा गया है कि अधिकृत एजेंसियों को चांदी के आयात को लेकर डीजीएफटी से मंजूरी के आधार पर ही अनुमति होगी। इसमें सोने या प्लैटिनम के साथ चढ़ाया हुआ चांदी या पाउडर के रूप में, बिना गढ़े या अर्ध-निर्मित रूप में और वजन के हिसाब से 99.9 प्रतिशत या अधिक के रूप में चांदी शामिल है। चांदी का आयात अप्रैल में सालाना आधार पर 157 प्रतिशत बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर का हो गया। वर्ष 2025-26 में यह लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर का हो गया। भारत चांदी मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और चीन से आयात करता है। कीमती धातु का उपयोग आभूषण बनाने और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।
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नई दिल्ली। टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के सह-संस्थापक झांग यीमिंग ने संपत्ति के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बढ़ते मूल्यांकन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में मजबूत प्रगति के दम पर उन्होंने भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है।
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, झांग यीमिंग की कुल संपत्ति बढ़कर 92.8 अरब डॉलर हो गई है। इसके साथ ही वह चीन के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहे हैं। वर्ष 2019 में जब ब्लूमबर्ग ने उनकी संपत्ति का आकलन शुरू किया था, तब उनकी कुल दौलत करीब 13 अरब डॉलर थी। पिछले सात वर्षों में उनकी संपत्ति में सात गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि बाइटडांस की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता और उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सफलता ने झांग की संपत्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। कंपनी का शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म TikTok दुनियाभर में लोकप्रिय बना हुआ है।वहीं, बाइटडांस का AI चैटबॉट Doubao भी चीन में तेजी से लोगों के बीच जगह बना रहा है। यह प्लेटफॉर्म 30 करोड़ से अधिक मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं के साथ देश का सबसे लोकप्रिय AI चैटबॉट बन चुका है।इस साल की शुरुआत में बाइटडांस ने अपने अमेरिकी कारोबार के कुछ हिस्सों को अमेरिकी निवेशकों को हस्तांतरित किया था। इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कंपनी पर कायम है और इसका असर उसके मूल्यांकन में भी दिखाई दे रहा है।शंघाई स्थित कैपिटल सिक्योरिटीज की विश्लेषक एमी लिन के मुताबिक, कंपनी की मजबूत कारोबारी बुनियाद और Doubao जैसे उत्पादों की सफलता उसके मूल्यांकन में बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। उनका मानना है कि अमेरिका में हुए हालिया बदलावों का कंपनी के प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग यिमिंग की कुल संपत्ति में 24 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह उछाल तब आया जब ब्लूमबर्ग ने बाइटडांस के मूल्यांकन का विश्लेषण किया, जिसमें ब्लैकरॉक, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स और टी. रो प्राइस ग्रुप जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों के आकलन को शामिल किया गया। इसके अलावा, एचएसजी और जनरल अटलांटिक द्वारा पिछले महीने जारी किए गए मूल्यांकन को भी आधार बनाया गया।टिकटॉक को लेकर जोखिम में कमी का असब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स ने मार्च 2024 में बाइटडांस के मूल्यांकन पर 25 प्रतिशत का जोखिम डिस्काउंट लगाया था। उस समय अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया था, जिसके तहत टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने या उसकी अमेरिकी इकाई को बेचने की शर्त रखी गई थी।हालांकि, 2 जून को इस जोखिम छूट को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इसका कारण अमेरिकी कारोबार की बिक्री प्रक्रिया पूरी होना और हाल ही में संस्थागत निवेशकों द्वारा पेश किए गए नए मूल्यांकन रहे। इसी बदलाव का सीधा फायदा झांग यिमिंग की कुल संपत्ति पर पड़ा।ताजा रैंकिंग के अनुसार, झांग यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन Mukesh Ambani 86.9 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।दूसरी ओर, Gautam Adani ने 117.4 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान बरकरार रखा है। बाइटडांस की बढ़ती वैल्यूएशन और टिकटॉक से जुड़ी अनिश्चितताओं में कमी ने एशिया के अरबपतियों की रैंकिंग में बड़ा बदलाव ला दिया है। कंपनी के एआई चैटबॉट Doubao की बढ़ती लोकप्रियता के बाद अब वह इसके लिए सब्सक्रिप्शन शुल्क लेने की तैयारी कर रही है। चीन के इंटरनेट बाजार में यह कदम खास माना जा रहा है, क्योंकि वहां लंबे समय से ऑनलाइन सेवाओं के लिए भुगतान करने को लेकर उपभोक्ताओं की अनिच्छा देखी जाती रही है। -
नयी दिल्ली. मदर डेयरी ने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप एक ऐसा नवोन्मेषी दूध पाउच मंगलवार को पेश किया, जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाता है। भारत के प्रमुख ताजा दूध आपूर्तिकर्ताओं में से एक मदर डेयरी कई राज्यों में प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध बेचती है। यहां एक प्रेस वार्ता में मदर डेयरी ने '' मिट्टी में भारत का पहला प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाला दूध पाउच" पेश किया जो पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ेगा। कंपनी शुरुआत में इस नए जैव-विघटनीय दूध पाउच का उपयोग पांच जून यानी 'विश्व पर्यावरण दिवस' से दिल्ली-एनसीआर में बेचे जाने वाले अपने गाय के दूध के लिए करेगी। मदर डेयरी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है।
मदर डेयरी के अनुसार, उसके नए दूध पाउच में एक तरह का अनूठा विघटित होने वाला पैकेजिंग नवाचार उपयोग किया गया है, जो सामग्री को जैव-उपलब्ध मोम में बदलने में सक्षम बनाता है। यह मोम, मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों द्वारा प्राकृतिक रूप से टूटकर प्राकृतिक तत्वों में बदल जाता है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमैन मीनेश शाह ने कहा, '' नई पैकेजिंग सदियों में नहीं बल्कि कुछ वर्षों में मिट्टी में स्वाभाविक रूप से विघटित होने के लिए तैयार की गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों पर बिना किसी प्रभाव के किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि मदर डेयरी, पृथ्वी की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह ने कहा, '' मदर डेयरी का भारत के पहले प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाले दूध पाउच को पेश करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो इस क्षेत्र की अग्रणी भूमिका और नए मानक स्थापित करने की क्षमता को दर्शाता है। '' मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने कहा, '' हमने ऐसा पाउच बनाने के लिए चार वर्षों से अधिक तक अनुसंधान किया, जो पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ता।'' उन्होंने कहा कि ये दूध पाउच पुनर्चक्रण योग्य (रीसाइक्लेबल) बने रहेंगे, लेकिन इनकी विशेषता यह है कि ये प्राकृतिक तत्वों में टूट सकते हैं, जिससे 'फ्यूजिटिव प्लास्टिक' (पर्यावरण में बिखरा प्लास्टिक) की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। मदर डेयरी की स्थापना 1974 में की गई। यह 'मदर डेयरी' ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों जैसे कल्चर्ड उत्पाद, आइसक्रीम, पनीर, घी आदि का निर्माण, विपणन एवं बिक्री करती है। - नयी दिल्ली. टाटा मोटर्स की कुल वाणिज्यिक वाहन बिक्री मई में 17 प्रतिशत बढ़कर 32,850 इकाई हो गई। मई, 2025 में यह 28,147 इकाई रही थी। मोटर वाहन विनिर्माता कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि घरेलू बिक्री पिछले महीने 19 प्रतिशत बढ़कर 30,784 इकाई हो गई जबकि मई, 2025 में यह 25,872 इकाई थी। अंतरराष्ट्रीय कारोबार नौ प्रतिशत घटकर 2,066 इकाई रह गया जो पिछले साल इसी महीने में 2,275 इकाई था।इसी बीच, घरेलू स्तर पर मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहन और इंटरमीडिएट वाणिज्यिक वाहन (एमएच एंड आईसीवी) की बिक्री मई, 2025 की 12,406 इकाइयों के मुकाबले 10 प्रतिशत बढ़कर 13,679 इकाई हो गई। मई, 2026 में एमएच एंड आईसीवी की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कुल बिक्री सात प्रतिशत बढ़कर 14,596 इकाई रही, जबकि मई, 2025 में यह 13,614 इकाई थी।







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