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- -शैली गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय मत्सोगी-डो चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदकरायपुर । कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला सुकमा आज खेल, शिक्षा और युवा प्रतिभाओं के दम पर अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। जिले की होनहार खिलाड़ी शैली गुप्ता इस परिवर्तन की मिसाल बनी है, जिन्होंने नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में 24 जून से 26 जून तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय मत्सोगी-डो चैंपियनशिप में 49 किलोग्राम सीनियर महिला वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत, छत्तीसगढ़ और सुकमा का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया है।नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए शैली ने फाइनल मुकाबले में एकतरफा जीत दर्ज कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव और सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने शैली की इस शानदार सफलता पर उन्हें बधाई दी है।राज्य शासन द्वारा सुकमा में खेल अधोसंरचना के विकास, खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर तथा सरकार की खेल प्रोत्साहन योजनाओं का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद जिले के युवा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। शैली गुप्ता की उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, प्रशासनिक सहयोग और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय सफलता के बाद शैली गुप्ता ने अपने माता-पिता के साथ सुकमा के कलेक्टर श्री अमित कुमार से मुलाकात की। कलेक्टर ने उन्हें बधाई देते हुए उच्च शिक्षा में प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।शैली गुप्ता का स्वर्ण पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते हुए सुकमा की नई तस्वीर का प्रतीक है। यह सफलता जिले के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देगी। शासन-प्रशासन द्वारा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता ने युवाओं में नया आत्मविश्वास जगाया है। राज्य शासन शिक्षा, खेल और युवा विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते हुए सुकमा सहित प्रदेशभर की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार के इन कार्यों से बस्तर में विकास और उपलब्धियों को नई पहचान मिल रही है।
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रायपुर ।राज्यपाल श्री रमेन डेका रथ यात्रा पर्व के अवसर पर आज गायत्री नगर रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रथ यात्रा महोत्सव में शामिल हुए। राज्यपाल श्री डेका एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर ‘छेरा-पहरा‘ की रस्म निभाई। राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी ने श्री जगन्नाथ जी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। इस दौरान सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
- -किसान निर्धारित तिथि तक करा लें फसल बीमा: कलेक्टर डॉ. गौरव सिंहरायपुर / प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन 2026 के अंतर्गत फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि तक अपने फसलों का बीमा करा लें।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के फसल के बाधित रोपाई, रोपण जोखिम, स्थानीय आपदाओं (ओलावृष्टि, बादल का फटना, प्राकृतिक आकाशीय बिजली) एवं फसल की कटाई के बाद होने वाले नुकसान से फसल को होने वाली क्षति के विरूद्ध आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। योजना का लाभ लेने हेतु किसान नजदीकी बैंक, वित्तीय संस्थान, ग्राहक सेवा केन्द्र (सी.एस.सी) सेंटर में जाकर बीमा करा सकते हैं। खरीफ वर्ष 2026 में मुख्य फसल धान सिंचित के लिए प्रति हेक्टेयर 66 हजार रूपए और धान असिंचित के लिए 49 हजार 500 रूपए प्रति हेक्टेयर की क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई है, जिसकी प्रीमियम राशि 2 प्रतिशत कृषक अंश के रूप में धान सिंचित के लिए 1320 रूपए प्रति हेक्टेयर एवं धान असिंचित के लिए 990 रूपए प्रति हेक्टेयर है। जिले में धान सिंचित, धान असिंचित के साथ-साथ सोयाबीन, मक्का, अरहर, उड़द, रागी एवं कोदो भी अधिसूचना में शामिल है जिसका बीमा करा सकते हैं। उप संचालक कृषि विभाग रायपुर ने बताया कि विगत वर्ष 2025 में जिले अंतर्गत 1,177 किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत कुल 1 करोड़ 28 लाख रूपए का बीमा राशि दी गई है, जो किसानों के लिए लाभदायक साबित हुई है।फसल बीमा हेतु आधार कार्ड की छायाप्रति, भूमि प्रमाण पत्र (बी-1, पी-2), बैंक पासबुक, फसल बोने के आशय का घोषणा पत्र, किसान का वैध मोबाईल नम्बर एवं बटाईदार, कास्तकार, साझेदार किसानों के लिए फसल साझा, कास्तकार का घोषण पत्र दस्तावेज अनिवार्य है। फसल बीमा पोर्टल पर बिना आधार प्रमाणीकरण के बीमा नहीं होगा। अधिक जानकारी के लिए कृषि अधिकारी, राजस्व अधिकारी, बैंक, एच.डी.एफ.सी क्षेत्रीय, जिला, तहसील कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने राज्य के विद्युत पारेषण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए तीन महत्वपूर्ण पारेषण परियोजनाओं से संबंधित 132 केवी लाइनों एवं उनसे संबंधित 132 केवी लाइन बे का सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत एवं चालूकरण किया।इस उपलब्धि पर माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं पावर कंपनीज के अध्यक्ष श्री सुबोध सिंह ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।पहली परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 220/132/33 केवी उपकेंद्र, अहिवारा में 132 केवी भिलाई–बेरला परिपथ के एलआईएलओ कार्य को पूरा किया गया एवं लगभग 7.38 किलोमीटर (14.76 सर्किट किलोमीटर) लंबी लाइन को 15 जुलाई को सायं 6.53 बजे लूप मोड में ऊर्जीकृत किया गया। दूसरी परियोजना के अंतर्गत 132/33 केवी उपकेंद्र, अमलेश्वर में 132 केवी डोमा–पाटन परिपथ-2 के एलआईएलओ कार्य पूर्ण किया गया। इस कार्य के तहत 132 केवी डोमा बे को सायं 6:44 बजे ऊर्जीकृत किया गया तथा लगभग 9.68 किलोमीटर लंबाई के 132 केवी डोमा–अमलेश्वर एवं अमलेश्वर–पाटन परिपथों का ऊर्जीकृत किया गया।तीसरी कार्य के अंतर्गत 132/33 केवी उपकेंद्र, रसमड़ा से एम/एस जेडी इस्पात को 132 केवी वोल्टेज स्तर पर विद्युत आपूर्ति प्रारंभ की गई। इसके लिए संबंधित 132 केवी लाइन-बे तथा लगभग 1.60 किलोमीटर लंबी 132 केवी रसमड़ा – मेसर्स जे डी इस्पात पारेषण लाइन को सायं 7:11 बजे सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया।प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने कहा कि इन तीनों परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के विद्युत पारेषण तंत्र की क्षमता एवं विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही औद्योगिक एवं अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।श्री शुक्ला ने कहा कि इन कार्यों का समयबद्ध एवं सफल क्रियान्वयन राज्य के पारेषण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कंपनी निरंतर आधुनिक तकनीकों के उपयोग एवं बेहतर योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन में कार्यपालक निदेशक (लाइन) श्री संजय पटेल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री पी. पी. सिंह, अधीक्षण अभियंता श्री सुनील भुआर्य, कार्यपालन अभियंता श्री एम. आर. शेरके, कार्यपालन अभियंता श्री हेमंत वरंगे, सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार शुक्ला, सहायक अभियंता श्री एस. पी. मंडावी तथा कनिष्ठ अभियंता श्री शोएब अहमद सहित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- रायपुर । स्मार्ट बिजली मीटर के जरिये उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग, बिजली खपत की रीयल टाइम जानकारी तथा बिजली उपयोग का बेहतर प्रबंधन करने की सुविधा प्रदान की जा रही है। स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाते, बल्कि वास्तविक बिजली खपत के अनुरूप सटीक रीडिंग उपलब्ध कराते हैं। स्मार्ट मीटर होने से उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से अपने घर की बिजली खपत की जानकारी हर आधे घंटे में चेक कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीमसिंह कंवर ने बताया कि स्मार्ट मीटर सटीक एवं वास्तविक समय की रीडिंग सुनिश्चित करते हैं, जिससे बिलिंग में त्रुटि की कोई गुंजाइश नहीं रहती। पुराने मीटर में उपभोक्ता को महीने के अंत में पता लगता था कि उसके घर की खपत कितनी है, लेकिन स्मार्ट मीटर से उन्हें इसकी जानकारी रीयल टाइम हर आधे घंटे में मिल जाती है। इस तकनीक का उपयोग करके उपभोक्ता हर आधे घंटे में अपनी बिजली खपत का विवरण देख सकते हैं और अपनी खपत नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा की बचत के साथ बिजली बिल भी कम किया जा सकता है।वर्तमान में बिजली टैरिफ के स्लैब के अनुसार 0 से 100 यूनिट तक 4.40 रुपये प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक 4.50 रुपये प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक 6.00 रुपये प्रति यूनिट, 401 से 600 यूनिट तक 7.00 रुपये प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 8.80 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू है। जैसे ही बिजली की खपत बढ़ने से उपभोक्ता उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचते हैं, नियमानुसार प्रति यूनिट बिजली की दर भी बढ़ जाती है। यह पूरी तरह निर्धारित टैरिफ व्यवस्था के अनुसार होता है और इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।अप्रैल, मई एवं जून माह में अधिक गर्मी के कारण एसी, कूलर एवं अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली की खपत बढ़ी। ऐसे समय में स्मार्ट मीटर एवं मोर बिजली ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपनी खपत पर लगातार नजर रखकर उसे नियंत्रित कर सकते हैं।एम-ऊर्जा (हाफ बिजली योजना) का लाभ प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं के लिए मासिक बिजली खपत पर नियमित निगरानी रखना विशेष रूप से उपयोगी है। उदाहरण के लिए यदि किसी परिवार की मासिक बिजली खपत 390 यूनिट है तो उसे योजना का पूरा लाभ मिलता है। वहीं अगले माह एसी, कूलर अथवा अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से यदि खपत 400 यूनिट से अधिक, जैसे 410 यूनिट हो जाती है, तो वह योजना की निर्धारित सीमा से बाहर हो जाएगा और उसे सामान्य टैरिफ के अनुसार बिजली बिल का भुगतान करना होगा। इसलिए मोर बिजली ऐप के माध्यम से खपत पर नियमित नजर रखकर उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को नियंत्रित कर योजना का लाभ निरंतर प्राप्त कर सकते हैं।यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर से संबंधित कोई शिकायत हो तो वह 1912 पर संपर्क कर सकता है। प्राप्त शिकायतों की नियमानुसार जांच की जाती है। विभिन्न स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों की जांच में स्मार्ट मीटर से संबंधित शिकायतें सही नहीं पाई गई हैं। श्री कंवर ने उपभोक्ताओं से प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का लाभ लेकर अपने बिजली बिल को और कम अथवा शून्य करने की अपील की है।
- -6 वर्षीय मासूम की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, बची जानरायपुर / छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला। जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया। बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।
- -जोखिम आधारित बिजनेस परमिशन व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा छत्तीसगढ़-छोटे कारोबारों को मिलेगी आसान मंजूरी, सेल्फ सर्टिफिकेशन और ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाएं, हर साल लाइसेंस नवीनीकरण से मिलेगी राहतरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने उद्योग और कारोबार को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026' पारित कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (रिस्क बेस्ड) एवं विश्वास आधारित (ट्रस्ट बेस्ड) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।इस विधेयक का उद्देश्य उद्योगों एवं कारोबार की स्थापना और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालनों को कम करना तथा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक पारदर्शी, तेज और उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है।विधेयक के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर विभिन्न जोखिम श्रेणियों में किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को सरल एवं त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। इससे छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों जैसी जटिल प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।नई व्यवस्था के अंतर्गत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों के स्थान पर सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा लाइसेंसधारी अभियंता, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे अनुमतियों की प्रक्रिया तेज, सरल और अधिक जवाबदेह बनेगी।विधेयक के तहत हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। इससे उद्यमियों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार के विस्तार एवं संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय संबंधी अनुमति स्व-घोषणा के आधार पर, सोसायटी अथवा फर्म का पंजीयन समयबद्ध प्रक्रिया से तथा भवन अनुज्ञा सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रदान की जा सकेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा निर्णय नहीं लेने की स्थिति में पात्र मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत (ऑटो अप्रूवल) मानी जाएगी। हालांकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी परीक्षण एवं भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।विधेयक के अंतर्गत राज्य शासन के 8 विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली के दायरे में शामिल किया गया है। आवश्यकता अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी।विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति इसके क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी निभाएगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी।इस सुधार से राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था कारोबार शुरू करने और संचालित करने में लगने वाले समय एवं लागत को कम करेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और परीक्षण की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026' राज्य में पारदर्शी, सरल, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
- -समयबद्ध समाधान और त्वरित सेवाओं से बढ़ा जनता का भरोसा, राशन कार्ड, आधार सुधार और निवास प्रमाण पत्र जैसी समस्याओं का हो रहा तत्काल निराकरणरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु आम नागरिकों के लिए भरोसेमंद मंच बनकर उभरे हैं। इन माध्यमों से प्रदेशभर में लोगों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। राशन कार्ड, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ अब नागरिकों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और तेज़ी से मिल रहा है।दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम ओरी निवासी श्री अभिषेक चतुर्वेदी लंबे समय से अपनी पत्नी श्रीमती शीतल चतुर्वेदी का राशन कार्ड बनवाने का प्रयास कर रहे थे। संबंधित विभाग में आवेदन देने के बावजूद विभिन्न कारणों से राशन कार्ड जारी नहीं हो पा रहा था, जिससे परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित अन्य शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित था। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और कुछ ही दिनों में राशन कार्ड जारी कर दिया। राशन कार्ड मिलने पर परिवार ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हेल्पलाइन ने उनकी बड़ी समस्या का शीघ्र समाधान कर उन्हें राहत पहुंचाई।इसी तरह खैरागढ़ जिले की श्रीमती शमाबाई कुमुद रामटेके लंबे समय से आधार कार्ड से जुड़ी समस्याओं से परेशान थीं। कई प्रयासों और कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनका कार्य नहीं हो सका था। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के बाद अधिकारियों ने तत्काल संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। उनके आधार कार्ड में पते की त्रुटि का सुधार किया गया, बायोमेट्रिक अपडेट कराया गया और पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर उन्हें राहत प्रदान की गई। श्रीमती शमाबाई ने समय पर समाधान मिलने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और प्रशासन के प्रति संतोष एवं आभार व्यक्त किया।वहीं, खैरागढ़ जिले के ग्राम पचपेड़ी निवासी श्री इन्द्रेश कुमार विश्वकर्मा को इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए तत्काल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। समय पर दस्तावेज नहीं मिलने से उनका प्रवेश प्रभावित होने की आशंका थी। ऐसे में उन्होंने सेवा सेतु के माध्यम से आवेदन किया। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसी दिन आवेदन का परीक्षण कर निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया, जिससे उनका इंजीनियरिंग प्रवेश सुरक्षित हो सका। श्री इन्द्रेश ने कहा कि समय पर मिली प्रशासनिक सहायता उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई।प्रदेश सरकार की ये पहलें सुशासन की अवधारणा को मजबूत करते हुए नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की सहज और त्वरित पहुंच सुनिश्चित कर रही हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु के माध्यम से प्रदेशभर में लोगों की समस्याओं का प्रभावी निराकरण हो रहा है, जिससे शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। शासन का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को बिना अनावश्यक विलंब के पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सरलता से पहुंच सके।
- - बढ़ती है पारदर्शिता और बचत की संभावना-रीयल टाइम खपत की जानकारी से उपभोक्ता खुद कर सकते हैं बिजली उपयोग नियंत्रित-मोर बिजली ऐप उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने में मददगाररायपुर / स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली का बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि केवल वास्तविक खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है तो उसका प्रमुख कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर।स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उपभोक्ता को वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी उपलब्ध कराता है। मोर बिजली ऐप के माध्यम से उपभोक्ता हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन-से विद्युत उपकरण सबसे अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और किन उपायों से खपत कम की जा सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार पहले उपभोक्ताओं को केवल महीने के अंत में बिजली बिल मिलने पर ही खपत का पता चलता था, जबकि स्मार्ट मीटर में उपभोक्ता पूरे महीने अपनी खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग पर नियंत्रण संभव होता है और बिल भी कम किया जा सकता है।बिजली विभाग ने बताया कि प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के अनुसार लागू होती हैं। शून्य से 100 यूनिट तक 4.40रुपये प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक 4.50 रुपये प्रति यूनिट, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये प्रति यूनिट 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये,601 यूनिट से अधिक पर 8.80रुपये प्रति यूनिट दर निर्धारित हैं। जैसे ही बिजली खपत बढ़कर अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।विभाग के अनुसार इस वर्ष अप्रैल, मई और जून में भीषण गर्मी के कारण अधिकांश घरों में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग बढ़ा। इसी वजह से बिजली की खपत बढ़ी और कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह स्थिति मौसम और खपत से जुड़ी है, न कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली से।स्मार्ट मीटर का एक बड़ा लाभ यह भी है कि उपभोक्ता अपनी मासिक खपत को 400 यूनिट से नीचे बनाए रखने की योजना पहले से बना सकते हैं। इससे उन्हें राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहता है। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है तो योजना का लाभ प्रभावित होता है और बिल बढ़ जाता है। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता को समय रहते ऐसी स्थिति से बचने का अवसर देता है।बिजली विभाग ने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच में अधिकांश मामलों में मीटर सही पाया गया। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर संबंधी कोई शिकायत हो तो वह 1912 पर संपर्क कर सकता है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करें, बिजली की खपत पर नियमित निगरानी रखें तथा ऊर्जा संरक्षण अपनाकर बिजली बिल कम करें। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल को और कम अथवा शून्य करने का लाभ भी लिया जा सकता है।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना-वन विभाग की अभिनव पहल से निःशुल्क पौधों का होगा वितरण, पर्यावरण संरक्षण का दिया जाएगा संदेशरायपुर / आमतौर पर एटीएम का नाम सुनते ही लोगों के मन में पैसे निकालने वाली मशीन की तस्वीर उभरती है, लेकिन जशपुर वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए 'ट्री एटीएम' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बगिया हेलीपैड परिसर में इस अनूठे मोबाइल ट्री एटीएम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल आम नागरिकों तक पौधों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को नई गति प्रदान करेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर स्वयं ट्री एटीएम से आंवला का पौधा प्राप्त किया तथा उपस्थित लोगों को भी पौधों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि यह मोबाइल ट्री एटीएम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। इससे अधिक से अधिक लोग पौधरोपण से जुड़ेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को नया विस्तार मिलेगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वन विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'ट्री एटीएम' लोगों को सहज और सरल तरीके से पौधे उपलब्ध कराने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु पौधरोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। ऐसे समय में यह पहल लोगों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे आसानी से उपलब्ध कराएगी, जिससे व्यापक स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान ने पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई चेतना का संचार किया है। इसी अभियान से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया।'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के संदेश के साथ शुरू हुई अनूठी पहलउल्लेखनीय है कि 'एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ट्री एटीएम को 'आज का पौधा, आने वाली पीढ़ियों की छांव' के प्रेरक संदेश के साथ रवाना किया गया। इस अभिनव पहल के तहत केवल निःशुल्क पौधों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पौधा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण की वैज्ञानिक एवं सही विधि, नियमित देखभाल, संरक्षण तथा पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने के उपायों की भी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर को बढ़ाना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का यह अभियान दीर्घकालिक और प्रभावी बन सके।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ (धान का कटोरा) में धान की कटाई के बाद बचने वाले श्पैराश् (पराली/पुआल) से बनाई जाने वाली खूबसूरत हस्तकला को पैरा आर्ट कहते हैं। इसके जरिए वेस्ट पैरा का उपयोग कर महापुरुषों और देवी-देवताओं के 3D पोर्ट्रेट और चित्र बनाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह ग्रामीण आय का भी एक बड़ा साधन बन रहा है। पैरा आर्ट बेहद दिलचस्प कला है, जिसमें धैर्य, कल्पनाशक्ति और बारीकी की समझ जरूरी है. धीरे-धीरे इस कला का क्रेज लोगों के बीच बढ़ता जा रहा है।बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उन्हें आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड बलौदाबाजार के अंतर्गत ग्राम लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान एवं पैरा (पुआल) आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने महिलाओं द्वारा धान और पैरा से तैयार की गईं विभिन्न सुंदर और आकर्षक कलाकृतियों का अवलोकन किया तथा उनके हुनर की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। जिला पंचायत सीईओ बलौदाबाजार-भाटापारा ने बताया कि जिला पंचायत की बिहान टीम के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य के साथ छत्तीसगढ़ महतारी संकुल संगठन लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 दीदियों को इस कला का प्रशिक्षण दिलाया गया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर अनुपयोगी समझे जाने वाले पैरा (पुआल) और धान से कलाकृतियां बनाकर अपनी अतिरिक्त आय सुनिश्चित कर सकेंगी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
- -शहीद अमोल माधव राव महस्के के नाम समर्पित होगा यह पुल-बरसात में उफनते जाटलूर नाला से अब मिलेगी मुक्तिरायपुर।नारायणपुर के दुर्गम क्षेत्र में आईटीबीपी ने ग्रामीणों के साथ मिलकर 250 फीट लंबा पुल किया खड़ाछत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले के अति-दुर्गम इलाके में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर के जाटलूर नाला पर श्रमदान से एक 250 फीट लंबा अस्थायी पुल का निर्माण किया है। इस पुल के बन जाने से कई गांवों का संपर्क आपस में जुड़ गया है, जिससे आवागमन और आपातकालीन सुविधाओं की राह काफी आसान हो गई है।पूर्व के नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में विकास की एक नई इबारत लिखते हुए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) बल ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर सुरक्षा और विश्वास का एक नया सेतु तैयार किया है। आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी ने घोर नक्सल प्रभावित जाटलूर नाला पर 250 फीट लंबे लकड़ी के फुट सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण पूरा कर लिया है। केंद्रीय सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह ने आज एक गरिमामय समारोह में इस पुल का विधिवत लोकार्पण किया। यह नवनिर्मित पुल पिछले वर्ष नवंबर में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर शहीद अमोल माधव राव महस्के की स्मृति में उन्हें समर्पित किया जाएगा।लगभग 250 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊँचा यह पुल सुरक्षा बलों के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों के अटूट विश्वास तथा संयुक्त श्रमदान का परिणाम है। स्थानीय संसाधनों का कुशलता से उपयोग कर बनाए गए इस पुल से अब ग्रामीणों को वर्षा ऋतु में उफनते जाटलूर नाला को पार करने के जोखिम से मुक्ति मिलेगी। यह पुल स्थानीय विद्यार्थियों, ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के लिए सालभर सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करेगा। लोकार्पण समारोह में महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह के साथ 45 वीं वाहिनी के कमांडेंट, 29वीं वाहिनी के कमांडेंट, 38वीं वाहिनी के द्वितीय कमान और 53वीं वाहिनी के द्वितीय कमान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, शिक्षक और स्कूली बच्चे इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।इस अवसर पर आईटीबीपी द्वारा सिविक एक्शन प्रोग्राम (नागरिक कल्याण कार्यक्रम) का आयोजन भी किया गया। इसके तहत जरूरतमंद ग्रामीणों और स्कूली छात्र-छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया गया। जवानों ने ग्रामीणों को स्वरोजगार, कौशल विकास और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।शहीद के बलिदान को सलाम पुल निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जवानों और अधिकारियों को महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह ने प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। पुल का नाम शहीद अमोल माधव राव महस्के के नाम पर रखने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय शहीद महस्के के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के प्रति सर्वाेच्च समर्पण को सच्चा सम्मान है। यह पुल हमारे जवानों और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा देश सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। स्थानीय नागरिकों ने आईटीबीपीकी इस जनहितैषी पहल का आभार जताते हुए कहा कि यह पुल सिर्फ दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि जनता और सुरक्षा बलों के बीच के विश्वास को और मजबूत करता है।
- -समय पर खाद-बीज और कृषि आदानों की उपलब्धता से निर्बाध बढ़ रही खेती-किसानीरायपुर ।छत्तीसगढ़ की पहचान केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि खेतों में पसीना बहाने वाले अन्नदाताओं से भी है। बरसात के मौसम में जब गाँवों के खेत ट्रैक्टरों की गूंज से जीवंत हो उठते हैं और किसान नई फसल की तैयारी में जुट जाते हैं, तब ग्रामीण जीवन की वास्तविक तस्वीर सामने आती है। खेतों में जोताई करते किसानों के चेहरों पर दिखने वाली मुस्कान केवल अच्छी पैदावार की उम्मीद नहीं, बल्कि मजबूत कृषि व्यवस्था, समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अपनी उपज के सर्वाधिक समर्थन मूल्य मिलने के विश्वास का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि से जुड़ी आवश्यक सुविधाएँ सरल, सुलभ और समयबद्ध रूप से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे खेती के प्रति उनका विश्वास और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण समृद्धि निरंतर मजबूत हो रही है।कोरबा जिले के ग्राम सकदुकला के किसान श्री कँवल सिंह अपने तीन एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करते हैं। इन दिनों वे अपने भतीजे के साथ खेतों में धान की रोपाई के कार्य में पूरी लगन और उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। खेत में चल रहे रोपाई कार्य के बीच उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और अच्छी फसल की उम्मीद साफ दिखाई देती है। उनका कहना है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की पहचान और भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।श्री सिंह बताते हैं कि मानसून के आने के बाद खेतों की जोताई और रोपाई का कार्य भी समय पर शुरू हो गया। इससे खेती का पूरा चक्र व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रहा है। वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं और इस बार भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद के साथ रोपाई का कार्य पूरा कर रहे हैं। परिवार के सदस्य भी खेती के कार्य में उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं, जिससे कृषि कार्य समय पर संपन्न हो रहा है।वे बताते हैं कि खेती के लिए आवश्यक कृषि आदान सामग्री समय पर उपलब्ध होने से इस बार किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने भैंसमा सहकारी समिति से डीएपी, यूरिया, सुपर फॉस्फेट सहित आवश्यक उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री आसानी से प्राप्त की। समय पर खाद एवं उर्वरकों की उपलब्धता से खेती की तैयारियाँ बिना किसी रुकावट के पूरी हुईं और फसल की बढ़वार के लिए भी आवश्यक संसाधन सुनिश्चित हो सके।उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर कृषि संसाधनों की उपलब्धता और उपज का उचित मूल्य है। उनका मानना है कि धान का समर्थन मूल्य, अंतर की राशि का एकमुश्त भुगतान तथा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद-बीज की सहज उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों का विश्वास मजबूत किया है। इन सुविधाओं के कारण खेती पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित, सरल और लाभकारी बनी है। वे पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि यदि इसी प्रकार किसानों को समय पर आवश्यक सुविधाएँ मिलती रहें, तो खेती न केवल अधिक समृद्ध होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी और अधिक सशक्त बनेगी।
- रायपुर । राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस (12 अगस्त) के अवसर पर इंडिया स्पेस लैब द्वारा "रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट" विषय पर ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े हितधारकों के बीच भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आपदा प्रबंधन में इसके प्रभावी उपयोग की जानकारी प्रदान करना है। कार्यशाला में रिमोट सेंसिंग, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS), अर्थ ऑब्जर्वेशन टेक्नोलॉजी, जियो-एआई (GeoAI), ड्रोन मैपिंग, मशीन लर्निंग आधारित अनुप्रयोगों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े वास्तविक केस स्टडी पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे।कार्यशाला के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। सफलतापूर्वक कार्यशाला पूर्ण करने वाले सभी प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र (E-Certificate) प्रदान किया जाएगा।आयोजकों ने छत्तीसगढ़ के सभी स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों, राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, शासकीय विभागों, स्वायत्त संस्थाओं, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थानों से कार्यशाला की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का अनुरोध किया है। साथ ही इस सूचना को विभागीय वेबसाइटों, पोर्टलों, सूचना पट्टों, समाचार पत्रिकाओं तथा अन्य संचार माध्यमों के माध्यम से अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की गई है। आयोजकों का कहना है कि इस पहल से विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अधिकारियों में वैज्ञानिक सोच, जियोस्पेशियल शिक्षा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इच्छुक प्रतिभागी 30 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन कर कार्यशाला में भाग ले सकते हैं। उक्त कार्यशाला का पंजीयन लिंकhttps://isl.ac.in/workshop/ है।
- -बुधरी माड़वी के जीवन में आई खुशहाली, मां और शिशु दोनों स्वस्थरायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना सच में मातृशक्ति के लिए एक बड़ा सहारा बन गई है। इसके जरिए राज्य की 66 लाख से अधिक पात्र विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की आर्थिक मदद सीधे डीबीटी (क्ठज्) के माध्यम से दी जा रही है। यह योजना सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह माताओं और बहनों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बीजापुर जिले के विकासखंड कुटरू के सेक्टर कुटरू अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र ताड़मेर की हितग्राही श्रीमती बुधरी माड़वी इस योजना का लाभ लेकर अपने परिवार के बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रही हैं।26 वर्षीय बुधरी माड़वी बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था करना उनके लिए मुश्किल था। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता उनके लिए बड़ी राहत बनकर आई।बुधरी माड़वी बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान से अब तक मुझे दूध, फल, हरी सब्जियां और दवाइयां खरीदने में परेशानी नहीं हुई। बच्चे के जन्म के बाद उसके कपड़े, देखभाल और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था भी इसी राशि से हो जाती है। हर महीने मिलने वाले 1,000 रुपए से घर के खर्च में भी काफी मदद मिलती है। इस योजना ने मुझे आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है और मैं बहुत खुश हूं।महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बुधरी माड़वी को गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकीं। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि आज मां और शिशु दोनों स्वस्थ हैं।महतारी वंदन योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही है, बल्कि उन्हें मातृत्व के दौरान सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार भी प्रदान कर रही है। राज्य शासन की यह जनकल्याणकारी योजना प्रदेश की हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य तथा सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।
- -14.49 लाख से अधिक माताओं को 558.93 रूपये करोड़ की डीबीटी सहायता-मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपीलरायपुर। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहा है। पारदर्शी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली, राज्य सरकार की सतत निगरानी तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पित प्रयासों से प्रदेश की लाखों गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तक समय पर आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने योजना की इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मातृ सुरक्षा, पोषण और महिला कल्याण के क्षेत्र में लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है।मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि प्रदेश में अब तक 14 लाख 49 हजार 309 पात्र हितग्राहियों का सफल पंजीयन किया जा चुका है। इन सभी पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 558.93 करोड़ रूपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के कारण लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना विश्व की सबसे बड़ी डीबीटी आधारित मातृत्व सहायता योजनाओं में से एक है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की केस स्टडी के अनुसार यह योजना गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार लाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है। योजना के सकारात्मक प्रभाव से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में भी सहायता मिली है।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है तथा पात्र हितग्राहियों का समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है।योजना के नाम पर साइबर ठगी से रहें सतर्कयोजना की सफलता के बीच मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने साइबर अपराधियों की सक्रियता को लेकर प्रदेशवासियों को विशेष रूप से सचेत किया। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर फर्जी फोन कॉल कर महिलाओं से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी अथवा राशि की मांग किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा, ष्यदि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम पर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन कर ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या किसी प्रकार की राशि की मांग की जाती है, तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं। ऐसे कॉल साइबर ठगों के हो सकते हैं। किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल अपनी निकटतम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा संबंधित विभाग से संपर्क करें। साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और सतर्कता ही है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से हितग्राही महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही योजना से जुड़ी सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि कोई भी महिला ठगी का शिकार न बने।
- -आवेदन पर त्वरित कार्रवाई, किसान को अनुदान पर मिली रोपा लगाने की आधुनिक मशीन-मरवाही के किसान विनय अभिषेक सिंह की मांग का हुआ समयबद्ध निराकरण, आधुनिक कृषि यंत्रीकरण से खेती होगी आसानरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित किए गए सुशासन तिहार-2026 आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। शासन की मंशा के अनुरूप जिले में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण किया जा रहा है, जिससे पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ शीघ्र पहुंच रहा है। इसी कड़ी में मरवाही विकासखंड के ग्राम उषाड़ निवासी कृषक श्री विनय अभिषेक सिंह की मांग पर कृषि विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें शासन की योजना के अंतर्गत अनुदान पर धान की रोपाई के लिए आधुनिक रोपा लगाने की मशीन उपलब्ध कराई है।श्री विनय अभिषेक सिंह ने सुशासन तिहार के जिला स्तरीय समाधान शिविर में आवेदन प्रस्तुत कर धान की रोपाई को अधिक सरल, तेज, कम श्रमसाध्य और कम लागत वाला बनाने के लिए आधुनिक रोपा लगाने की मशीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की कार्यशैली के अनुरूप आवेदन प्राप्त होते ही कृषि विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ की। विभाग ने सीएचएएमपीएस प्रणाली के माध्यम से किसान का पंजीयन कर पात्रता के अनुसार अनुदान स्वीकृत कराया और शीघ्र ही उन्हें आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा दिया।कृषक श्री विनय अभिषेक सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक रोपा लगाने की मशीन मिलने से धान की रोपाई कम समय में अधिक दक्षता और बेहतर गुणवत्ता के साथ हो सकेगी। इससे मजदूरी पर होने वाला खर्च कम होगा, समय की बचत होगी तथा खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समय पर रोपाई होने से फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा, जिससे उनकी आय में सकारात्मक वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।उप संचालक कृषि श्री सत्यजीत कंवर ने बताया कि राज्य शासन किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और यंत्रीकरण से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पात्र किसानों को अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि खेती को अधिक उत्पादक, सुविधाजनक और लाभकारी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कर किसानों सहित सभी पात्र हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक उनका लाभ समयबद्ध ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों की छोटी-बड़ी आवश्यकताओं का त्वरित समाधान कर उन्हें आधुनिक संसाधनों से जोड़ने की पहल खेती को आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यही कारण है कि सुशासन तिहार प्रदेश में जनविश्वास, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।
- -छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पहल से पर्यटन उद्योग को मिलेगा नया आयाम, भ्रमण के दौरान सरगुजा की पर्यटन संभावनाओं पर हुई सार्थक चर्चारायपुर। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा सरगुजा संभाग के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में आयोजित फेम ट्रिप से एक दिन पूर्व अम्बिकापुर में विशेष होटल भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमंत्रित टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स को सरगुजा में उपलब्ध उत्कृष्ट आवासीय सुविधाओं, आतिथ्य परंपरा तथा पर्यटन के अनुकूल अधोसंरचना से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में अधिक से अधिक पर्यटकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित कर सकें।कार्यक्रम के अंतर्गत देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स का होटल पर्पल आर्किड, अम्बिकापुर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तिलक लगाकर एवं स्वागत पेय के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया गया। स्वागत के पश्चात अतिथियों को होटल की आधुनिक आवासीय व्यवस्था, स्वादिष्ट भोजन की सुविधाएं, बैंक्वेट हॉल तथा अन्य अतिथि सेवाओं का विस्तृत निरीक्षण कराया गया। होटल प्रबंधन ने अपने आतिथ्य और सेवाओं के माध्यम से सरगुजा की मेहमाननवाजी की समृद्ध परंपरा से सभी को परिचित कराया।दोपहर के भोजन के उपरांत सभी अतिथियों को अम्बिकापुर के प्रतिष्ठित होटल माखन विहार ले जाया गया, जहां होटल प्रबंधन ने उन्हें उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं, आवासीय व्यवस्थाओं तथा अन्य सेवाओं का अवलोकन कराया। भ्रमण के दौरान अतिथियों ने होटल की गुणवत्ता, स्वच्छता और पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की।होटल भ्रमण के बाद होटल संचालक द्वारा निशुल्क उच्च स्तरीय हाई-टी का आयोजन किया गया। इस दौरान सरगुजा संभाग के प्रमुख पर्यटन स्थलों, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों, जनजातीय संस्कृति तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स ने क्षेत्र में पर्यटन विकास की व्यापक संभावनाओं पर अपने सुझाव भी साझा किए।कार्यक्रम के अंत में सभी टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल एजेंट्स ने अम्बिकापुर के होटलों में उपलब्ध उत्कृष्ट सुविधाओं और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि सरगुजा संभाग प्रकृति, संस्कृति और विरासत का अनूठा संगम है तथा यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के परिचयात्मक भ्रमण से सरगुजा राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा तथा वे भविष्य में अधिक से अधिक देशी-विदेशी पर्यटकों को इस क्षेत्र की यात्रा के लिए प्रेरित करेंगे।छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की यह पहल सरगुजा संभाग को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे कार्यक्रम पर्यटन उद्योग, स्थानीय होटल व्यवसाय, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- महासमुंद में गायत्री एवं दीपयज्ञ का आयोजन किया गयापोते पार्थ शर्मा ने संपन्न कराया यज्ञमहासमुंद। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अखिल भारतीय गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक एवं समाज सुधारक युगपुरुष पंडित ज्वाला प्रसाद उपाध्याय (शर्मा) की 100वीं जयंती उनके महासमुंद स्थित निवास पर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके पोते पार्थ शर्मा ने गायत्री यज्ञ संपन्न कराया तथा सायंकाल दीपयज्ञ का आयोजन किया गया।वक्ताओं ने पंडित ज्वाला प्रसाद शर्मा के स्वतंत्रता संग्राम, आध्यात्मिक जागरण, समाज सुधार, दहेज-मुक्त एवं सामूहिक विवाह अभियान तथा छत्तीसगढ़ में गायत्री परिवार के विस्तार में दिए गए योगदान को स्मरण किया। उन्होंने युगपुरुष पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के सान्निध्य में समाज सेवा और संस्कार निर्माण का आजीवन कार्य किया तथा महासमुंद में अखंड ज्योति की स्थापना और विराट गायत्री महायज्ञों के माध्यम से जनजागरण का अभियान चलाया।श्रद्धांजलि सभा में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा सेवा, साधना और संस्कार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि उनका जीवन समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
- -अमिता की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए गर्व का विषय, युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा - मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से बुधवार को जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचने वाली अमिता श्रीवास को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर विधायक श्रीमती गोमती साय उपस्थित थीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अमिता श्रीवास ने अपने साहस, अदम्य इच्छाशक्ति, अनुशासन और अटूट संकल्प के बल पर विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर भारत का तिरंगा लहराकर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। अमिता श्रीवास की सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने 22 मई को समुद्र तल से 8,848.86 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाया है।
- -प्रदेश के विकास और जनहित के संकल्पों को साकार करने का सशक्त मंच है विधानसभा - मुख्यमंत्री-छत्तीसगढ़ विधानसभा ने स्थापित की उत्कृष्ट संसदीय परंपराएं, लोकतांत्रिक मूल्यों को किया सशक्त - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह-राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का किया लोकार्पणरायपुर /छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अपने गठन के बाद से लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय गरिमा और अनुशासन की ऐसी उत्कृष्ट परंपराएं विकसित की हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होती है। यह प्रसन्नता का विषय है कि 1 नवंबर 2025 को यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण किया गया था और उसी परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण राज्यपाल श्री रमेन डेका के करकमलों से संपन्न हुआ है। यह विधानसभा की संस्थागत क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित प्रेक्षागृह में उत्कृष्टता अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और उत्कृष्ट जनप्रतिनिधित्व को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया।कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट संसदीय कार्य के लिए बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक तथा अकलतरा विधायक श्री राघवेंद्र कुमार सिंह को उत्कृष्ट विधायक अलंकरण से सम्मानित किया गया। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए दैनिक पत्रिका के संवाददाता श्री संतराम साहू को उत्कृष्ट संसदीय पत्रकार अलंकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए आईबीसी-24 के श्री सौरभ सिंह परिहार एवं डॉ. राजेश राज को उत्कृष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रिपोर्टर अलंकरण प्रदान किया गया।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा लोकसेवा का वह केन्द्र है जहां जनसेवक संसदीय सदन में लोक कल्याण का पावन अनुष्ठान संपादित करते हैं और इसलिए लोकतंत्र में संसदीय सदन को मंदिर की संज्ञा दी गयी है और इस मंदिर की प्रतिष्ठा सभी सदस्यों के आचरण व्यवहार और विचार पर निर्भर करती है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की गणना देश की श्रेष्ठ विधानसभाओं के उदाहरण के रूप में होती है। इस विधानसभा में पक्ष-प्रतिपक्ष के मध्य जो समन्वय है, सामन्जस्य है, और समादर का भाव है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय और अनुकरणीय है।राज्यपाल श्री डेका ने अपने संबोधन में सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों एवं पत्रकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हुए समर्पण भाव से कार्य करें। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि सभी प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करें, तभी राज्य निरंतर प्रगति करेगा। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से संवाद, स्वच्छता अभियान में सहभागिता तथा समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में किसी विधायक के प्रवेश करते ही वे स्वतः निलंबित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। ऐसी विशिष्ट संसदीय परंपराओं ने छत्तीसगढ़ विधानसभा को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।मुख्यमंत्री श्री साय ने लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को जनता से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही, जनहित के मुद्दों और लोकतांत्रिक विमर्श को निष्पक्ष एवं तथ्यपरक ढंग से जनता तक पहुँचाने में संसदीय पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सम्मानित पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है।मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मानित विधायकों की सराहना करते हुए कहा कि श्री धरमलाल कौशिक का सार्वजनिक जीवन अत्यंत समृद्ध और अनुभवपूर्ण रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए संसदीय परंपराओं को समृद्ध किया है। वहीं श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रथम बार विधायक निर्वाचित होने के बावजूद सदन में तथ्यपूर्ण, अध्ययनशील एवं प्रभावी ढंग से अपनी बात रखकर एक सकारात्मक पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि दोनों जनप्रतिनिधियों का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों और उत्कृष्ट संसदीय आचरण के प्रति सम्मान का प्रतीक है।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण के बाद आज नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण विधानसभा के विकास की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की षष्ठम विधानसभा अपने कार्यकाल में उत्कृष्ट संसदीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पक्ष और प्रतिपक्ष राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रदेशहित के विषयों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा करते हैं। यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता अलंकरण केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपराओं को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। ऐसे सम्मान जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक उत्तरदायी तथा उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।समारोह के सांस्कृतिक आयोजन में देश के प्रख्यात भजन गायक श्री अनूप जलोटा ने अपने लोकप्रिय भजनों की मनोहारी प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। उनकी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे प्रेक्षागृह को आध्यात्मिक वातावरण से अनुप्राणित कर दिया और कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष श्री चरणदास महंत, विधायकगण, विधानसभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
- रायपुर । वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के अवसर पर प्रदेशवासियों एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सभी देशवासियों को रथयात्रा की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। रथयात्रा हमारी भारतीय संस्कृति, आस्था और लोक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। भगवान श्री जगन्नाथ का जीवन समरसता, सेवा, करुणा और लोककल्याण का संदेश देता है, जो हमारे सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है।श्री चौधरी ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उनके गांव में भगवान श्री जगन्नाथ का मंदिर है और बचपन से ही वे गांववासियों के साथ रथयात्रा में सहभागी होते आए हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सेवा, सहयोग और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है।वित्त मंत्री ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा हमें समानता, सद्भाव और जनसेवा का संदेश देती है। उन्होंने कामना की कि भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो तथा प्रदेश और देश निरंतर विकास एवं जनकल्याण के पथ पर अग्रसर रहे।
- महासमुंद / तेन्दूपत्ता संग्राहकों का लंबे समय से प्रतीक्षित बोनस का इंतजार अब खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा 03 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह के दौरान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थित कृषि मण्डपम (ऑडिटोरियम) रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में तेन्दूपत्ता संग्रहण वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) वितरण का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री केदार कश्यप, सहकारिता, परिवहन एवं वन मंत्री, के मार्गदर्शन से महासमुन्द जिला के तेन्दूपत्ता संग्रहण वर्ष 2023 के अधिक बोनस राशि प्राप्त करने वाले 02 संग्राहक एवं तेन्दूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 के अधिक संग्रहण पारिश्रमिक राशि प्राप्त करने वाले 02 संग्राहकों को सम्मानित किया गया एवं उनके बैंक खाता में राशि भुगतान के संबंध में प्रमाण पत्र प्रदाय किया गया।जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित के प्रबंध संचालक ने बताया कि जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित महासमुन्द सीजन 2023 के सम्पूर्ण विक्रय उपरांत लाभ पर रहे 65 प्राथमिक लघु वनोपज समितियों के 680 फड़ों के आश्रित ग्रामों के कुल 76,650 संग्राहक परिवारों को 12.40 करोड का बोनस राशि का भुगतान आॅनलाईन साॅफ्टवेयर के माध्यम से उनके बैंक खातों में प्राप्त होगा। 14 जुलाई 2026 की स्थिति में 3.28 करोड़ की राशि संग्राहकों के बैंक खाता में हस्तांतरित की गई है । शेष पात्र संग्राहकों के बैंक खाता में बोनस की राशि हस्तांतरण की कार्यवाही किया जा रहा है। संग्राहकों द्वारा सीजन 2023 में तोड़े गये तेन्दूपत्ता मात्रा के आधार पर उनको बोनस राशि का भुगतान हेतु आॅनलाईन साॅफ्टवेयर में उनके नाम के सम्मुख बोनस राशि की प्रविष्टि की जा रही है। साथ ही 2023 के जिन संग्राहकों का नाम साॅफ्टवेयर में नही है, उनका नाम, बैंक एवं आधार सहित जोड़ने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है। इससे 2023 के सभी संग्राहकों को उनके बैंक खाता से बोनस राशि प्राप्त हो सकेगी। यह सुनिश्चित किया जा रहा है, कि सीजन 2023 के सभी संग्राहकों को बोनस की राशि प्राप्त हो। सभी समितियों को निर्देशित किया गया है, कि वे पात्र सभी संग्राहकों की सूची को पुनः जांच कर आवश्यक सुधार शीघ्र करें ।उन्होंने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्रहण सीजन 2026 के 81,597 संग्राहक परिवारों को संग्रहण पारिश्रमिक 41.52 करोड़ रूपये के साथ ही वर्ष 2023 के 76,650 संग्राहक परिवार को बोनस राशि 12.40 करोड़ रूपये का भुगतान हो रहा है, जिसकी योग राशि 53.92 करोड़ है। इससे उनके दैनिक जीवन यापन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आवश्यक कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगा। file photo
- -पात्र हितग्राहियों को मिली शौचालय निर्माण की स्वीकृतिबालोद । बालोद जिले में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड गुंडरदेही के ग्राम कोटागांव, माहुद, कोडे़वा, चीचा, तिलोदा के ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की मांग संबंधी आवेदन दर्ज कराया गया था। शिकायत प्राप्त होने के उपरांत जनपद पंचायत के अधिकारियों द्वारा प्रकरण का परीक्षण किया गया। हितग्राही की पात्रता एवं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक जाँच पूर्ण की गई। जांच में हितग्राही को योजना के लिए पात्र पाए जाने की स्थिति में कलेक्टर के अनुमोदन उपरांत हितग्राही को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। संबंधित जनपद पंचायत को नियमानुसार आगे की कार्यवाही पूर्ण कर निर्धारित समय-सीमा में शौचालय निर्माण सुनिश्चित करने एवं भारत सरकार के पोर्टल में एंट्री करने के निर्देश दिए गए हैं।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन और आम नागरिकों के बीच एक प्रभावी संवाद का माध्यम है। प्राप्त शिकायतों एवं मांगों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित एवं सम्मानजनक शौचालय सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे खुले में शौच की प्रवृत्ति समाप्त करने, स्वच्छ वातावरण बनाए रखने तथा जनस्वास्थ्य में सुधार लाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। जिला प्रशासन ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि यदि वे शासन की किसी योजना के पात्र हैं अथवा किसी समस्या का समाधान चाहते हैं, तो संबंधित विभाग से संपर्क कर अथवा आवश्यकता होने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी समस्या दर्ज कराएं। सभी पात्र प्रकरणों का नियमानुसार एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
- महासमुंद / विशेष रोजगार कार्यालय (दिव्यांगजनों के नियोजन हेतु) रायपुर द्वारा 17 जुलाई 2026 को पुरूष मूक बधिर दिव्यांगजनों के लिए रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। रोजगार मेला विशेष रोजगार कार्यालय (दिव्यांगजनों के नियोजन हेतु) पुराना पुलिस मुख्यालय परिसर, लोकभवन के बाजू सिविल लाइन्स रायपुर में प्रातः 11ः00 बजे से अपरान्ह 03ः00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। उक्त रोजगार मेले में निजी क्षेत्र के इनोवेटिव रिटेल कांसेप्ट प्राइवेट लिमिटेड रायपुर द्वारा पिकर पैकर के 4 पदों पर 12वीं उत्तीर्ण, उम्र 18-35 वर्ष के पुरुष मूक बधिर दिव्यांग आवेदकों को वेतनमान 10 से 15 हजार रुपए पर भर्ती की जाएगी। इसी तरह इंस्टाकार्ट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा द्वारा सिनियर असिस्टेंट के 15 पद व वेयर हाउस हेल्पर के 15 पदों पर भर्ती की जाएगी। जिसके लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं उत्तीर्ण, उम्र 18-30 वर्ष पुरुष मूक बधिर दिव्यांगजन शामिल हो सकते है। वेतनमान 10 से 12 हजार रुपए प्रदान किया जाएगा। चयनित आवेदकों का कार्यक्षेत्र जिला रायपुर रहेगा। रिक्तियों की विस्तृत जानकारी रोजगार विभाग के पोर्टल http://erojgar.cg.gov.in पर अवलोकन किया जा सकता है।इस रोजगार मेले में सम्मिलित होने के लिए आवेदकों को छत्तीसगढ़ रोजगार पोर्टल http://erojgar.cg.gov.in या आवेदक अपने मोबाईल पर ‘‘छत्तीसगढ़ रोजगार एप’’ के माध्यम से आॅनलाईन आवेदन करना अनिवार्य है। आॅनलाईन आवेदन करने के लिए आवेदक का रोजगार पंजीयन नंबर होना जरूरी होता है। ऐसे आवेदक जिनका रोजगार पंजीयन नहीं हुआ है वे ‘‘छत्तीसगढ़ रोजगार एप’’ के माध्यम से रोजगार पंजीयन कर सकते है। रोजगार मेले में सम्मिलित होने के लिए आवेदकों को निर्धारित स्थल एवं समय पर अपनी समस्त शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज, रोजगार पंजीयन कार्ड, आधार कार्ड, बायोडाटा की छायाप्रति, पासपोर्ट साईज की स्वयं की फोटो सहित उपस्थित होंवें। रोजगार मेला पूर्णतः निःशुल्क है। अधिक जानकारी के लिए कार्यालयीन समय पर कार्यालय के दूरभाष नंबर 0771-4044081 पर संपर्क कर सकते है।



















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