- Home
- छत्तीसगढ़
- -महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद होमियोपैथी डॉक्टर ने कहा- हल्दी वाला दूध, तुलसी, अदरक, आंवला का करें सेवनरायपुर। बारिश का मौसम शुरू होने के साथ हमें अपने और अपनों के लिए थोड़ी सतर्कता और सावधानी रखनी चाहिए। बारिश के मौसम में हमेशा स्वच्छ उबला हुआ और फिल्टर पानी ही चाहिए। पानी के बर्तनों को खुला बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। खाना खाने के पहले, शौचालय से आने के बाद और बाहर से घर आने पर हाथ को साबुन से धोना चाहिए। छत्तीसगढ़ राज्य होम्योपैथिक परिषद और महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद डॉ. दिलीप पिंपले ने आमजनों को मानसून को लेकर सचेत करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए।डॉ. पिंपले रायपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में बतौर प्रोफेसर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बीमारी से बचने के लिए एलोपैथी, आयुर्वेदिक के साथ होम्योपैथी की दवाएं भी कारगर होती हैं। होम्योपैथी दवाएं धीरे, लेकिन बीमारी का जड़ से नाश करतीं हैं। डॉ. पिंपले के अनुसार घर पर ताजा भोजन करें, कटे हुए या खुले में रखे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। घर के आसपास जलभराव न होने दें, इसमें मच्छरों का प्रजनन हो सकता है। कचरा डस्टबीन में ही डाले। बारिश के पानी से भींगने से बचें और सड़कों पर बह रहे नालियों के गंदे पानी के संपर्क में आने से बचने का प्रयास करें।डा. पिंपले ने आगे कहा कि बारिश में जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर पनपने लगते हैं। ऐसे में घरों में मच्छरदानी का उपयोग करें। फूल स्लीव वाले कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाली क्रीम और लिक्विड का भी प्रयोग कर सकते हैं। बारिश में अगर जूता या चप्पल गीली हो जाए, तो उसे पहनने से बचें। बारिश के मौसम में हल्के, सूती और आरामदायक कपड़े पहनने चाहिए। इन सभी चीजों के साथ पर्याप्त नींद जरूर लें, योग और व्यायाम अवश्य करें। हल्दी वाला दूध, तुलसी, अदरक, आंवला जैसे घरेलू उपायों का सेवन करें।इन बातों का रखें विशेष ध्यानडा. पिंपले के मुताबिक बारिश के मौसम में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जैसे बाहर के खुले और तले-भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। ठहरे हुए पानी में बच्चों को बिल्कुल भी खेलने न दें। बारिश में अगर कपड़े गीले हो जाएं, तो उसे ज्यादा देर तक न पहनें बल्कि तत्काल बदलने का प्रयास करें। आंतरिक कपड़े तो बिल्कुल भी गीले नहीं पहनने चाहिए। ठंडे पेय पदार्थ और आइसक्रीम का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा अपने हिसाब या अनुमान से न खाएं।
-
-चार माह से बंद पड़ी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल हुई दुरुस्त, फिर मिली आत्मनिर्भरता
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन प्रदेश के जरूरतमंद नागरिकों के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर उभर रही है। जशपुर जिले के बाबू सजबहार निवासी दिव्यांग प्रफुल्ल बेक की समस्या का त्वरित समाधान इसकी संवेदनशील और प्रभावी कार्यप्रणाली का प्रेरक उदाहरण है।प्रफुल्ल बेक चलने-फिरने में असमर्थ हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें गत वर्ष मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई थी, जिससे उनका दैनिक जीवन काफी आसान हो गया था। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण पिछले चार माह से ट्राइसाइकिल बंद पड़ी थी। इससे उनका घर से बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था और छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।अपनी परेशानी से राहत पाने के लिए प्रफुल्ल बेक ने 28 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही समाज कल्याण विभाग ने बिना विलंब कार्रवाई करते हुए संबंधित एजेंसी को उनके घर भेजा। आवश्यक मरम्मत के बाद कुछ ही दिनों में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल फिर से सुचारु रूप से चलने लगी।प्रफुल्ल बेक ने बताया कि यह ट्राइसाइकिल उनके लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन का आधार है। इसके बंद होने से उनका दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था। अब ट्राइसाइकिल ठीक होने के बाद वे फिर से अपने जरूरी कार्य स्वयं कर पा रहे हैं और पहले की तरह स्वतंत्र रूप से आवागमन कर रहे हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, ष्सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के कुछ ही दिनों में मेरी समस्या का समाधान हो गया। अब मेरी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल फिर से चलने लगी है और मैं दोबारा आत्मनिर्भर महसूस कर रहा हूं। मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील पहल और प्रशासन की तत्परता ने मेरी बड़ी परेशानी दूर कर दी।प्रफुल्ल बेक की यह कहानी बताती है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी मंच बन चुकी है। समयबद्ध कार्रवाई, संवेदनशील प्रशासन और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के साथ शासन आम नागरिकों के जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। - -पक्के घर से मिला सुरक्षित आशियाना, महतारी वंदन योजना की राशि से बच्चों की पढ़ाई को मिल रहा संबलरायपुर। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के मठपारा निवासी श्रीमती फूलमती देवी का परिवार इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत पक्का मकान मिलने और महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने से उनके परिवार के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद का संचार हुआ है। श्रीमती फूलमती देवी ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि का उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। परिवार का मुख्य आधार मेहनत-मजदूरी है, लेकिन सीमित आय के बावजूद वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनके अनुसार यह सहायता राशि बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलना उनके परिवार के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। पहले वे कच्चे और छप्पर वाले मकान में रहते थे, जहां विशेषकर बरसात के मौसम में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सुरक्षित और पक्के आवास में रहने से पूरे परिवार का जीवन अधिक सहज और सम्मानजनक हो गया है। फूलमती देवी के पति श्री संजय चौधरी ने बताया कि उनकी पत्नी के नाम से स्वीकृत आवास मिलने से परिवार की वर्षों पुरानी चिंता समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि पहले शौचालय और स्नानघर जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परिवार, विशेषकर महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब पक्के मकान के साथ सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने से जीवन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन गया है।उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके परिवार को नई पहचान, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित हैं। श्रीमती फूलमती देवी और श्री संजय चौधरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) तथा महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की ऐसी जनहितकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक निरंतर पहुंचना चाहिए।
- -छत्तीसगढ़ की बेटियों की राह अब न तो लंबी होगी और न ही थकाऊरायपुर । सरस्वती साइकिल योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और उन्हें स्कूल तक आवागमन की सुविधा प्रदान करना है। इसके तहत शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की छात्राओं को निःशुल्क साइकिल दी जाती है lमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार ने एक ऐसी पहल की है, जिससे बेटियों के हौसलों को नए पंख मिल गए हैं। शिक्षा सत्र शुरू होने के मात्र एक महीने के भीतर, जुलाई माह में ही, पात्र छात्राओं को सरस्वती सायकल योजना के तहत निशुल्क सायकल का वितरण किया जा रहा है। यह त्वरित फैसला पालकों, शिक्षिकाओं और स्वयं छात्राओं के लिए एक बड़ी सौगात साबित हो रहा है।सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारंगढ़ की कक्षा 9वीं की छात्रा छोटी यादव की कहानी जिले की सैकड़ों बेटियों का प्रतिनिधित्व करती है। छोटी को अपने गांव झरपडीह से 3 किलोमीटर दूर स्कूल आने के लिए हर रोज पैदल सफर तय करना पड़ता था। तपती धूप और बारिश में पैदल चलना थका देने वाला होता था, लेकिन अब उसकी यह परेशानी दूर हो चुकी है। निशुल्क सायकल पाकर छोटी के चेहरे पर आई मुस्कान उसकी खुशी और राहत को साफ बयां करती है। छोटी की तरह ही ग्राम बासीनबहरा की छात्रा आकांक्षा रात्रे और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली दीक्षा सिदार जैसी अनेक बालिकाओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। अब इन्हें 2 से 5 किलोमीटर का सफर पैदल तय नहीं करना पड़ेगा। छात्राओं का कहना है कि सायकल मिलने से समय भी बचेगा और मैं बिना थके अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। सरकार की इस मदद के लिए हम सभी छात्रा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती हूँ।जुलाई का महीना किसानों के लिए खेती-किसानी और धान बोआई का समय होता है। ऐसे वक्त में गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई और सायकल खरीदने का अतिरिक्त खर्च उठाना एक बड़ी चिंता होती थी। सरकार द्वारा सत्र के शुरुआत में ही सायकल उपलब्ध करा देने से पालकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। अब उन्हें बेटी की पढ़ाई या आवागमन के साधनों के लिए कर्ज लेने या अनावश्यक खर्च करने की चिंता से मुक्ति मिल गई है।जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में सारंगढ़, बरमकेला और बिलाईगढ़ ब्लॉक में सायकल के पार्ट्स को असेंबल (फिटिंग) कर स्कूलों के माध्यम से सीधे छात्राओं तक पहुँचाया जा रहा है। इसी कड़ी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारंगढ़ में 150 पात्र बालिकाओं को सायकल का वितरण किया जा चुका है।शासकीय एवं अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 9 वीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीबी रेखा के नीचे (BPL) परिवार की छात्राएं को सायकल वितरण किया जाना है। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को शाला तक आवागमन की सुगम सुविधा प्रदान करना है। इससे स्कूल ड्रॉप-आउट दर में कमी आएगी और बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की इस संवेदनशील पहल से न सिर्फ बेटियां समय पर स्कूल पहुँच रही हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। 'सरस्वती सायकल योजना' छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और सुशासन की एक जीवंत मिसाल बनकर उभर रही है।
- -स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के NSS और इको क्लब के स्वयंसेवकों ने निकाली भव्य जागरूकता रैली-ग्रामीणों को परिवार नियोजन व मातृ स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूकरायपुर । बढ़ती जनसंख्या के प्रति वैश्विक चिंताओं और उसके समाधानों को रेखांकित करने के लिए आज 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' के अवसर पर जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य समुदाय में परिवार नियोजन के साधनों, छोटे परिवार के महत्व तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है lविश्व जनसंख्या दिवस' के अवसर पर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, कोरबा जिले के चैतमा में जन-जागरूकता के कई प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के रासेयो प्रकोष्ठ के मार्गदर्शन में विद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और इको क्लब के स्वयंसेवकों ने 'जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा' के तहत पूरे क्षेत्र में जागरूकता की अलख जगाई।कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में आयोजित एक वृहद चित्रकला प्रतियोगिता से हुई। इसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी तूलिका के माध्यम से बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणामों, जैसे—गरीबी, बेरोजगारी, और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बेहद संजीदगी से चार्ट पेपर पर उकेरा। साथ ही, बच्चों ने छोटे परिवार के लाभ और लैंगिक समानता पर भी सुंदर संदेश दिए।चित्रकला प्रतियोगिता के बाद स्वयंसेवक विद्यार्थी ग्राम पंचायत चैतमा के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र 'बुधवारी बाजार' पहुंचे। यहाँ विद्यार्थियों ने एक बेहद प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। नाटक के माध्यम से परिवार नियोजन के साधन, मातृ स्वास्थ्य (Maternal Health) की महत्ता और अंधविश्वासों को दूर करने की अपील की गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हुए। इसके बाद विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर बाजार चौक पर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई, जो एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनी।छोटा परिवार-सुखी परिवार" और "जनसंख्या पर रोक लगाएं, देश को खुशहाल बनाएं" जैसे गगनभेदी नारों के साथ स्वयंसेवकों ने चैतमा के प्रमुख मार्गों पर भव्य जन-जागरूकता रैली निकाली। रैली में तख्तियां पकड़े बच्चे ग्रामीणों को यह समझाने में सफल रहे कि जनसंख्या स्थिरीकरण केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक का मानवाधिकार और कर्तव्य है।इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों और रासेयो कार्यक्रम अधिकारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस विशेष दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य केवल आबादी की गिनती करना नहीं है, बल्कि बढ़ती जनसंख्या से जुड़े गंभीर मुद्दों जैसे गरीबी, मातृ स्वास्थ्य में कमी और लैंगिक असमानता के प्रति समाज को सचेत करना है। जब तक हर नागरिक जागरूक नहीं होगा, तब तक देश में सतत विकास की कल्पना अधूरी है।इस गरिमामयी और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम के सफल आयोजन पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय रासेयो प्रकोष्ठ, बिलासपुर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय चैतमा के प्राचार्य, NSS टीम और इको क्लब के स्वयंसेवकों की सराहना की है।
- -कृषि विज्ञान केंद्र की अनूठी पहल, 225 एकड़ में रामतिल और तिल के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन-कम लागत, अधिक मुनाफा और फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा-प्राकृतिक परागण बढ़ने से धान उत्पादन को भी होगा लाभरायपुर। बस्तर जिले में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। खरीफ सीजन में जिले के विभिन्न विकासखंडों में 225 एकड़ क्षेत्र में रामतिल (नाइजर) और तिल (सेसमे) के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में कम लागत और अधिक लाभ देने वाली तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार कार्ययोजना के अनुसार बस्तानार, बस्तर, दरभा तथा चित्रकोट के गुरिया क्षेत्र में कुल 200 एकड़ में रामतिल का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम से लगभग 100 से 200 प्रगतिशील किसानों को जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक किसान को न्यूनतम एक एकड़ और अधिकतम दो एकड़ क्षेत्र के लिए उन्नत किस्म के बीज तथा आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। अगस्त माह में बुआई प्रस्तावित है और इसके लिए किसानों का चयन अंतिम चरण में है। इसी प्रकार तोकापाल और बस्तर विकासखंड में 25 एकड़ क्षेत्र में तिल का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 15 से 25 किसानों को शामिल किया गया है तथा अधिकांश क्षेत्रों में बुआई की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है।कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह कार्यक्रम शासन की फसल विविधीकरण नीति के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। रामतिल और तिल ऐसी तिलहनी फसलें हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है तथा कीट एवं रोगों का प्रकोप भी बहुत कम देखने को मिलता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटती है और उन्हें अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।विशेषज्ञों का मानना है कि रामतिल के आकर्षक पीले फूल बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। धान में फूल आने के समय मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ने से प्राकृतिक परागण बेहतर होता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव आसपास के धान के खेतों की उत्पादकता पर भी पड़ता है। इस प्रकार रामतिल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि कृषि पारिस्थितिकी को भी मजबूत बनाता है।खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बाजार में बेहतर मूल्य को देखते हुए बस्तर के किसानों का रुझान एक बार फिर तिलहनी फसलों की ओर बढ़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने, लागत कम करने और आय बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में बस्तर में तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ेगा और जिले में टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि का नया मॉडल विकसित होगा।
- -कलेक्ट्रेट परिसर में शुरू हुई सार्वजनिक ई-व्हीकल चार्जिंग सुविधा, हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा-7.2 किलोवाट क्षमता का चार्जर हुआ स्थापित, मात्र 15 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी चार्जिंग सुविधा-जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 60 किलोवाट के फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की तैयारीरायपुर । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हरित विकास और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के विजन को साकार करने की दिशा में बालोद जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया है। यह पहल जैविक ईंधनों पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा जिले में ई-वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।जिला प्रशासन द्वारा शासकीय कार्यों में वाहनों की पूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 7.2 किलोवाट क्षमता का सार्वजनिक ईवी चार्जर स्थापित किया गया है।जिला खनिज संस्थान न्यास के सहायक नोडल अधिकारी ने बताया कि इस चार्जिंग स्टेशन का उपयोग वाहन स्वामी 'टाटा पावर ईज़ेड चार्ज' मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकेंगे। चार्जिंग की दर मात्र 15 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है, जिससे ई-वाहन चालकों को किफायती एवं सुविधाजनक चार्जिंग सुविधा उपलब्ध होगी।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित यह चार्जिंग स्टेशन जिले में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की शुरुआत है। आगामी चरण में जिले के प्रमुख सार्वजनिक एवं व्यावसायिक स्थलों पर 60 किलोवाट क्षमता वाले फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे ई-वाहनों की आवाजाही और अधिक सुगम होगी तथा जिले में चार्जिंग अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।जिला प्रशासन का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पेट्रोल एवं डीजल जैसे जैविक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी तथा आम नागरिकों के ईंधन व्यय में भी उल्लेखनीय बचत होगी। यह पहल स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- -एक सशक्त पहल जिसने खोला आत्मनिर्भरता का द्वाररायपुर । छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत संचालित 'बिहान' (BIHAN) योजना ग्रामीण महिलाओं को संघर्ष से निकालकर आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन प्रदान कर रही है। स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण और वित्तीय मदद देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे 'लखपति दीदी' बनकर समाज में मिसाल बन रही हैं।जहां हौसलों में उड़ान और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो परिस्थितियाँ बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर विकासखंड के सुदूर ग्राम सहपाल की रहने वाली श्रीमती सुनीता नरवास ने। कभी सीमित आय और आर्थिक तंगहाली से जूझने वाली सुनीता जी आज न केवल अपने परिवार की रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल की सैकड़ों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल बनकर उभरी हैं। कुछ समय पहले तक सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी। आजीविका का पूरा दारोमदार सीमित खेती और अनिश्चित मजदूरी पर टिका हुआ था। दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी और भविष्य को लेकर हमेशा एक असुरक्षा की भावना बनी रहती थी, लेकिन सुनीता ने हार नहीं मानी। वे लगातार अपने परिवार को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए आजीविका के मजबूत साधनों की तलाश में जुटी रहीं।सुनीता के जीवन में टर्निंग पॉइंट तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ('बिहान') के तहत संचालित 'साई बाबा स्व-सहायता समूह' से जुड़ीं। समूह की बैठकों और बचत प्रबंधन के प्रशिक्षण ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया। इसी दौरान उन्हें एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) परियोजना की जानकारी मिली। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने का फैसला किया।परियोजना के तकनीकी सहयोग से सुनीता ने अपने घर के पिछड़े हिस्से (बैकयार्ड) में उन्नत मुर्गीपालन की शुरुआत की। उन्होंने पारंपरिक ढर्रे से हटकर काम किया। मुर्गियों के लिए संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और बेहतर रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया। इस वैज्ञानिक प्रबंधन का असर जल्द ही दिखाई दिया। शुरुआती चरण में ही उन्हें 15 हजार 75 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। इस पहली कमाई ने सुनीता जी के हौसलों को पंख दे दिए और उन्होंने इसे ही अपनी स्थायी आजीविका का मुख्य जरिया बना लिया।आज सुनीता नरवास का परिवार आर्थिक तंगी के दौर से पूरी तरह बाहर आ चुका है। सुनीता जी अब अपने इस व्यवसाय को और बड़े पैमाने पर विस्तार दे रही हैं। प्रतिमाह 20 हजार रुपए का नियमित आमदनी का लक्ष्य लेकर कार्य कर रही है।सुनीता की यह सफलता केवल उनके घर तक सीमित नहीं है। आज उन्हें देखकर सहपाल और आस-पास के गाँवों की कई अन्य महिलाएँ भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और वैज्ञानिक पद्धतियों से आजीविका के साधन अपना रही हैं। श्रीमती सुनीता नरवास कहती है कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर (IFC) ने मुझे सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया, बल्कि समाज में सम्मान से जीने का हौसला भी दिया है। आज मेरा परिवार एक समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ रहा है। मैं चाहती हूँ कि हर महिला इस योजना का लाभ उठाकर अपने सपनों को सच करे।
- महासमुंद / नवोदय विद्यालय समिति द्वारा शैक्षणिक सत्र 2027-28 हेतु कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रारम्भ कर दिए गए है। प्राचार्य पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय सरायपाली ने बताया कि ऑनलाइन पंजीयन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तक निर्धारित है। ऑनलाइन आवेदन वेबसाइट https://navodaya.gov.in, https://cbseitms.rcil.gov.in/nvs पर किया जा सकता है। इस संबंध में अधिक जानकारी एवं सहायता के लिए हेल्प डेस्क नंबर 8770795734 एवं 6264282471 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
- -25 जुलाई को चयन परीक्षा आयोजितमहासमुंद / एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, भोरिंग में शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम के अंतर्गत अंग्रेजी माध्यम की कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं एवं 11वीं में लेटरल एंट्री के माध्यम से रिक्त सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। उच्च कार्यालय के निर्देशानुसार विद्यालय में उपलब्ध रिक्त सीटों की पूर्ति के लिए पात्र विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।प्राचार्य एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय भोरिंग ने बताया कि प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी 20 जुलाई 2026 तक प्रातः 10 बजे से सायं 4 बजे तक एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, भोरिंग में आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। प्रवेश के लिए चयन परीक्षा का आयोजन 25 जुलाई 2026 को प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, भोरिंग में किया जाएगा। चयन परीक्षा में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान विषयों से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रश्न पत्र पांच खंडों में विभाजित होगा तथा प्रत्येक खंड में 20-20 बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। विद्यालय में कक्षा 7वीं में 3 सीटें, कक्षा 8वीं में 2 सीटें, कक्षा 9वीं में 7 सीटें तथा कक्षा 11वीं में 8 सीटें रिक्त हैं। इस प्रकार कुल 20 रिक्त सीटों पर लेटरल एंट्री के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा।
- - लवलीवुड कॉलेज के प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया अवलोकन, आत्मनिर्भरता के लिए प्रशिक्षु महिलाओं को किया प्रेरित- मानपुर आईटीबीपी कैंप में शीघ्र प्रारंभ होगा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय- आईटीआई भवन व ट्रांजिट हॉस्टल की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगीमोहला । कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था, निर्माण कार्यों की प्रगति तथा मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने तथा निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जिला मुख्यालय मोहला स्थित लवलीवुड कॉलेज में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम का अवलोकन किया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा कर प्रथम दिवस पर उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा सिलाई के क्षेत्र में उत्कृष्ट कौशल अर्जित कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।इसके पश्चात कलेक्टर ने मानपुर स्थित आईटीबीपी कैंप के रिक्त भवनों का निरीक्षण किया। उन्होंने भवन के सभी कक्षों का अवलोकन करते हुए साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वहां शीघ्र ही स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय का संचालन प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने बैठक व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।कलेक्टर ने निर्माणाधीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का भी निरीक्षण किया तथा निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस सहायता केंद्र भोजटोला का निरीक्षण किया तथा नवीन भवन में संचालित शासकीय हाई स्कूल भोजटोला पहुंचकर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कक्षाओं में जाकर अध्ययन-अध्यापन की स्थिति देखी तथा विद्यार्थियों से पढ़ाई और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में चर्चा की। साथ ही मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी भी ली।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने भोजटोला में निर्माणाधीन महतारी सदन के कार्यों की गुणवत्ता एवं समय-सीमा की जानकारी ली। इसके उपरांत उन्होंने नक्सल पुनर्वास योजना के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे आवासों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने निर्माणाधीन आईटीआई भवन एवं ट्रांजिट हॉस्टल का भी जायजा लिया। निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसी को कार्यों में तेजी लाने तथा गुणवत्ता के साथ समय पर पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं आधारभूत संरचना से जुड़े सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूर्ण किए जाएं, ताकि जिले के विद्यार्थियों एवं नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।[11:54, 11/07/2026] Manjusha Sharma: 000000
- - लाइवलीहुड कॉलेज का निरीक्षण कर सिलाई प्रशिक्षण बैच का किया शुभारंभमोहला । मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत युवाओं एवं महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज में सिलाई (सेल्फ एम्प्लॉयड टेलर्स) प्रशिक्षण के नवीन बैच का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जिले की कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने लाइवलीहुड कॉलेज का निरीक्षण कर प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा भी की।कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल विकास आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से युवा और महिलाएं न केवल रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि स्वरोजगार स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन सकते हैं। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों से पूरे मनोयोग, अनुशासन एवं नियमितता के साथ प्रशिक्षण पूर्ण करने को कहा। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों एवं प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशिक्षण का संचालन गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर कौशल एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें।प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा के दौरान कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने कौशल का उपयोग आर्थिक सशक्तिकरण के लिए करने को कहा। उन्होंने कहा कि शासन की विभिन्न कौशल विकास योजनाएं युवाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने सभी प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें सफल, आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनने के लिए शुभकामनाएं दीं।
- - मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला ऑटो डायवर्सन प्रकरणों के निराकरण में प्रदेश में चौथे स्थान परमोहला । भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग द्वारा ऑटो डायवर्सन नागरिक पोर्टल की सुविधा प्रारंभ की गई है। इस पोर्टल के माध्यम से अब नागरिक घर बैठे ही भूमि डायवर्सन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे न केवल कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी, बल्कि समय और श्रम की भी बचत होगी।ऑटो डायवर्सन नागरिक पोर्टल पर आवेदक स्वयं अपनी भूमि का भू-भाटक ऑनलाइन गणना कर सकते हैं तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान कर सरलता से डायवर्सन के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। पोर्टल आधारित व्यवस्था से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक हितैषी है। साथ ही, न्यायालयीन प्रक्रिया में लगने वाले समय की भी बचत होगी, जिससे आवेदनों का शीघ्र निराकरण संभव हो सकेगा। जिन लोगों के पास ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वे अपने निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) अथवा संबंधित तहसील कार्यालय के सीएससी केंद्र के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।उल्लेखनीय है कि जिले के मोहला एवं मानपुर अनुभाग में ऑटो डायवर्सन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों के निराकरण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। मोहला अनुभाग में प्राप्त 50 आवेदनों तथा मानपुर अनुभाग में प्राप्त 11 आवेदनों सहित कुल 61 आवेदनों में से अब तक कुल 44 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। बेहतर कार्य निष्पादन के आधार पर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला ऑटो डायवर्सन प्रकरणों के निराकरण में प्रदेश में चौथे स्थान पर है।ऑटो डायवर्सन नागरिक पोर्टल के माध्यम से राजस्व सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है, जिससे नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी सेवाओं का लाभ मिल रहा है।
- महासमुंद / कभी पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर रहने वाला विकासखंड पिथौरा के ग्राम पंचायत ठाकुर दिया खुर्द में जल जीवन मिशन की बदौलत स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीणजनों की दैनिक दिनचर्या आसान हुई है। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी, ग्राम पंचायत के प्रभावी नेतृत्व और जल जीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप 24 अप्रैल 2026 को आयोजित ग्राम सभा में गांव को आधिकारिक रूप से हर घर जल प्रमाणित किया गया।जल जीवन मिशन के तहत गांव के 356 परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 124.65 लाख रुपये की लागत से जल प्रदाय योजना का निर्माण किया गया। योजना के तहत उच्च स्तरीय जलागार का निर्माण, लगभग 5,940 मीटर लंबी पाइपलाइन का विस्तार तथा घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की गई। इसके अतिरिक्त गांव में 15 पावर पंप एवं 4 हैंडपंप उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से निर्बाध जल वितरण किया जा रहा है।जल जीवन मिशन की यह सुविधा घरों के साथ ग्राम पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, तीन विद्यालय, दो आंगनबाड़ी केंद्र तथा सामुदायिक शौचालय में भी नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों, महिलाओं, बच्चों एवं ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की बेहतर सुविधा मिलने लगी है, जिससे स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को भी बढ़ावा मिला है। योजना की दीर्घकालीन सफलता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामसभा द्वारा प्रत्येक परिवार से 60 रुपये प्रतिमाह जलकर लेने का निर्णय लिया गया। यह राशि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के बैंक ऑफ बड़ौदा, पिथौरा स्थित खाते में जमा की जाती है। इसी निधि से योजना का नियमित संचालन, रखरखाव एवं आवश्यक मरम्मत कार्य किए जाते हैं, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था निरंतर सुचारु बनी रहती है।गांव में जलापूर्ति व्यवस्था का संचालन पंप ऑपरेटर श्री तुलेश ध्रुव द्वारा नियमित रूप से किया जा रहा है। वहीं ग्राम पंचायत के सरपंच श्री मनोज सिंह, सचिव श्रीमती दुर्गा डडसेना तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ने योजना के प्रभावी संचालन एवं जनसहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।ग्राम ठाकुरदिया खुर्द की निवासी श्रीमती कुसुम साहू बताती हैं, पहले पीने का पानी लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब हर घर जल योजना के तहत हमारे घर तक नियमित रूप से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। इससे हमारी सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है। अब समय की बचत होती है, परिवार को स्वच्छ पानी मिलता है और बच्चों की देखभाल के लिए भी अधिक समय मिल जाता है। इसके लिए ग्रामीणजनों ने शासन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
- -शाला प्रवेश उत्सव में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का किया आत्मीय स्वागत, अध्ययन सामग्री वितरित कर-उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं, छात्राओं को साइकिल भेंट कर बढ़ाया उत्साहरायपुर । पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार को सरगुजा जिले के पी. एम. श्री स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर, अध्ययन सामग्री वितरित कर तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए नवीन शैक्षणिक सत्र के सफल एवं प्रेरणादायी होने की मंगलकामना की।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आज का विद्यार्थी ही कल के सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माता बनेगा।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का विस्तार कर रही है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, परिश्रम और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करती है। पी. एम. श्री स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।इसके पश्चात शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने छात्राओं को साइकिल वितरित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साइकिल वितरण जैसी योजनाएं बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
- -खल्लारी में प्रबंधन समिति के सदस्यों को बैंक खाता संचालन एवं वन प्रबंधन की दी जानकारीमहासमुंद / वन अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने एफआरए सेल के एमआईएस सहायक श्री लिलेश साहू ने गुरुवार को विकासखंड खल्लारी के ग्राम खल्लारी में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने समिति के सदस्यों को सामुदायिक वन संसाधन क्षेत्र के प्रभावी प्रबंधन, मृदा संरक्षण, वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित जानकारी दी।उन्होंने बताया कि सामुदायिक वन संसाधनों का संरक्षण ग्राम सभा की सहभागिता से किया जाना आवश्यक है। इसके लिए नियमित वृक्षारोपण, मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य तथा वन क्षेत्र के सतत प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही समिति के नाम से बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया एवं इसके महत्व की भी विस्तार से जानकारी दी गई।सहायक आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग श्रीमती शिल्पा साय ने बताया कि जिले में जिन सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों की प्रबंधन योजना जिला कार्यालय द्वारा चयनित की जाएगी, उन संबंधित ग्राम सभाओं को आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा सामुदायिक वन संसाधन क्षेत्र के संपोषणीय विकास हेतु 50 हजार रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन, वृक्षारोपण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों में किया जाएगा।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में आपातकालीन सेवाएं बनीं आमजन का भरोसा-डॉयल-112 टीम की तत्परता से समय पर मिला उपचार, महिला पूरी तरह खतरे से बाहरपेंड्रा । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम नागरिकों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में डॉयल-112 की सतर्क एवं त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर मानव जीवन की रक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया है। डॉयल-112 टीम ने सर्पदंश की शिकार एक महिला को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।जानकारी के अनुसार, रात्रि लगभग एक बजे डॉयल-112 गौरेला फाल्कन-1 को ग्राम जमुनिया टोला, धनौली से एक महिला के सर्पदंश की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डॉयल-112 में तैनात आरक्षक श्री रामदयाल आयाम एवं चालक श्री गोपाल पुरी तत्काल आपातकालीन वाहन लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हुए। टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि ग्राम जमुनिया टोला, धनौली निवासी 55 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर पनिका को रात्रि में जमीन पर सोने के दौरान जहरीले सर्प ने काट लिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉयल-112 टीम ने बिना किसी विलंब के पीड़िता को परिजनों के साथ ईआरवी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार प्रारंभ किया। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से महिला की जान बच गई और वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है।यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित आपातकालीन सहायता प्रणाली केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की प्रत्येक घड़ी में नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। डॉयल-112 की प्रशिक्षित टीमों की त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक संचार व्यवस्था और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिल रही है।उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम धनौली में सर्पदंश की शिकार एक युवती को डॉयल-112 की तत्परता से समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसका जीवन बचाया गया था। लगातार दूसरी सफल कार्रवाई ने जिले में डॉयल-112 के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस ने वर्षा ऋतु के दौरान नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे जमीन पर सोने के बजाय चारपाई या बिस्तर का उपयोग करें, रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा घर एवं आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें ताकि सर्पों के प्रवेश की संभावना कम हो। यदि किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए तो झाड़-फूंक, टोने-टोटके अथवा घरेलू उपचार में समय न गंवाते हुए तत्काल डॉयल-112 अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को संकट की घड़ी में तत्काल सहायता उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से डॉयल-112 सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी आपातकालीन सहायता शीघ्रता से पहुंच सके। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की यह घटना दर्शाती है कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से न केवल आपात स्थितियों का प्रभावी प्रबंधन हो रहा है, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी निरंतर सुदृढ़ हो रही है।
- -25 आत्मसमर्पित युवाओं को मिला स्वरोजगारसुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में राज्य सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास नीति के तहत एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा में मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस 15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम में 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें समाज में एक सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) कराया गया। युवाओं को बेहद सरल तरीके से तकनीकी जानकारियां दी गईं, जिसके तहत धान के पुआल (पैरा) की तैयारी और उपचार रकने के बाद मशरूम के स्पॉन (बीज) का सही उपयोग कर पॉलीबैग तैयार करना और नमी का संतुलन बनाए रखना, फसल की वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार में उसकी बिक्री करना शामिल था ।कृषि विशेषज्ञों ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा लाभकारी व्यवसाय है जिसे बहुत कम लागत, कम जगह और बेहद कम समय में शुरू किया जा सकता है। विशेषकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से इसे अपनाकर युवा हर महीने एक नियमित और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।प्रशिक्षण में मशरूम के पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह एक अत्यंत पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी तथा कई आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम वसा (लो फैट) और कम कैलोरी होने के कारण आज के समय में बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है।इस पहल से न केवल आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि वे एक नए आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपना जीवन बिता सकेंगे।
- -’कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता से लाभकारी फसलों की खेती को मिल रहा प्रोत्साहन’रायपुर ।राज्य शासन द्वारा किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से संचालित कृषक उन्नति योजना के तहत फसल विविधीकरण को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर उद्यानिकी एवं अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इस पहल से प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों का रुझान परंपरागत खेती से हटकर अधिक लाभकारी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।फसल विविधीकरण का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश के कई क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम दरिमा के प्रगतिशील किसान अमित कुमार सिंह ने धान की जगह अदरक की खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि अदरक की खेती से उन्हें धान की तुलना में कई गुना अधिक आय प्राप्त हो रही है। पिछले वर्ष एक एकड़ क्षेत्र में अदरक की खेती से उन्होंने लगभग 5 लाख रुपये की आय अर्जित की। उनका कहना है कि बाजार में अनुकूल मूल्य मिलने पर अदरक की खेती से प्रति एकड़ 10 लाख रुपये तक की आय प्राप्त की जा सकती है।किसान अमित कुमार सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अदरक की खेती शुरू की थी। बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलने के बाद उन्होंने इस वर्ष खेती का रकबा भी बढ़ा दिया है। उनका विश्वास है कि क्षेत्रफल बढ़ने से इस बार उन्हें पिछले वर्ष की तुलना में और अधिक आय प्राप्त होगी।उन्होंने बताया कि अदरक की खेती वैज्ञानिक पद्धति से मेड़ बनाकर की गई है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है। उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की खेती करें तो सीमित भूमि पर भी बेहतर आमदनी अर्जित कर सकते हैं।अमित कुमार सिंह ने राज्य सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए दी जा रही प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता राशि को किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत का बोझ कम होता है और किसानों को नई फसलों को अपनाने का आत्मविश्वास मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के अन्य किसानों से भी धान के साथ-साथ अदरक एवं अन्य लाभकारी फसलों की खेती अपनाने की अपील की।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक परामर्श तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना, खेती की लागत कम करना तथा कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। विभाग द्वारा किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लाभकारी फसलों की खेती के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।
- - 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित सर्वसुविधायुक्त भवन में 38 स्व-सहायता समूहों की 426 महिलाएं कर रही हैं विविध आजीविका गतिविधियांगरियाबंद। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को नई दिशा मिल रही है। जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम पाटसिवनी में लगभग 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित सर्वसुविधायुक्त महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बनकर उभरा है। ग्राम पाटसिवनी में वर्तमान में 38 महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें कुल 426 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें जय मां संतोषी, जय मां लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, शांति समूह, सतनाम समूह, तुलसी समूह, खोपली समूह, राधा रानी समूह सहित अन्य समूह विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं। महिला समूहों द्वारा किराना एवं फैंसी स्टोर का संचालन, मछली पालन, जैविक खेती, ट्रैक्टर के माध्यम से उन्नत कृषि कार्य, पशुपालन, मुर्गी एवं बकरी पालन सहित अन्य कार्यों के लिए सेंटिंªग प्लेट, गैस चूल्हा, टेंट सामग्री एवं कुर्सियां किराये पर उपलब्ध कराने का कार्य संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं की आय में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है तथा वे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।समूह से जुड़ी श्रीमती सत्या दीवान ने बताया कि उन्होंने सिलाई कार्य को आजीविका का माध्यम बनाया है और वर्तमान में प्रतिमाह तीन से पांच हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि महतारी सदन बनने के बाद सभी समूहों को नियमित बैठक, प्रशिक्षण, योजना निर्माण और सामूहिक निर्णय लेने के लिए एक व्यवस्थित स्थान मिला है। जिससे आजीविका गतिविधियों का विस्तार हो पाया है। नवनिर्मित महतारी सदन में विशाल बैठक कक्ष, विद्युत एवं पंखों की व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन, स्वच्छ पेयजल सुविधा तथा आजीविका गतिविधियों के संचालन के लिए शटरयुक्त दुकान उपलब्ध कराई गई है। यह भवन महिलाओं के लिए केवल बैठक की जगह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामूहिक सहयोग और आर्थिक प्रगति का सशक्त केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में गरियाबंद जिले की महिलाएं महतारी सदन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं और ग्रामीण विकास में अपनी सशक्त भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं।
- रायपुर। देश और राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के बीच श्राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजनाश् छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम कचनूर से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती अपनाकर शानदार अतिरिक्त लाभ कमाया है। ग्राम कचनूर के प्रगतिशील किसान श्री पोटाम गणेश ने अपनी 2.20 हेक्टेयर कृषि भूमि पर ऑयल पाम के पौधे लगाए हैं। चूँकि ऑयल पाम के पौधों को पूरी तरह विकसित होकर फल देने में कुछ वर्षों का समय लगता है, तब तक पौधों के बीच की जमीन खाली रहती है। इस खाली भूमि का सही उपयोग करने के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सलाह पर बीच में मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती करने का स्मार्ट फैसला लिया।पोटाम गणेश का यह निर्णय आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हुआ। मूंगफली की इस अंतरवर्तीय फसल से उन्हें जो परिणाम मिला उससे वह उत्साहित है। कुल उत्पादन मूल्य लगभग एक लाख रुपए मिला किन्तु खेती में लागत मात्र 30 हजार रुपये लगा और शुद्ध मुनाफा 70 हजार रुपये मिला।अपनी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हितग्राही पोटाम गणेश ने कहा, ऑयल पाम के शुरुआती वर्षों में जब तक मुख्य फसल तैयार नहीं होती, तब तक अंतरवर्तीय फसल लेने से हमारी नियमित आय बनी रहती है। इससे खेती की लागत निकालना बहुत आसान हो जाता है और आर्थिक मजबूती मिलती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य साथी किसानों से भी अपील की है कि वे इस आधुनिक खेती पद्धति को अपनाएं।उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयलदृऑयल पाम योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक सहयोग और उन्नत खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की व्यक्तिगत आय को बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
- दंतेवाड़ा । कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशानुसार जिला कार्यालय के तृतीय तल स्थित डंकिनी सभाकक्ष में एग्रीस्टैक अंतर्गत बकेट क्लेम संबंधी प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य एग्रीस्टैक से जुड़े कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा मैदानी स्तर पर आ रही तकनीकी एवं प्रक्रियागत समस्याओं का समाधान करना था।प्रशिक्षण में एसडीएम श्री लोकांश एल्मा, डिप्टी कलेक्टर श्री मूलचंद चोपड़ा एवं नायाब तहसीलदार सुश्री गरिमा प्रधान द्वारा एग्रीस्टैक अंतर्गत बकेट क्लेम की संपूर्ण प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में पूर्व में जारी निर्देशानुसार जिले के समस्त पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी, लैम्पस प्रबंधक, खाद्य निरीक्षक, सहकारिता निरीक्षक तथा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के वीएलई (वीएलई) उपस्थित रहे। अधिकारियों ने पोर्टल पर डेटा सत्यापन, किसान पंजीयन, बकेट क्लेम की प्रक्रिया, त्रुटियों के निराकरण तथा दावा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों की शंकाओं एवं तकनीकी समस्याओं का मौके पर समाधान किया। इस प्रशिक्षण के दौरान सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि एग्रीस्टैक से संबंधित लंबित कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। साथ ही किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए बकेट क्लेम की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा निर्धारित समय-सीमा में सभी प्रकरणों का निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
- दंतेवाड़ा । जिले के स्थानीय युवाओं को रोजगारपरक एवं व्यावहारिक कौशल से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन दंतेवाड़ा को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जिला प्रशासन, रोजगार विभाग एवं माई भारत संगठन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को लाइवलीहुड कॉलेज दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंतिम रूप से चयनित जिले के 84 युवाओं को देश की प्रतिष्ठित नवरत्न कंपनी एनएमडीसी में निःशुल्क प्रशिक्षण (इंटर्नशिप) के लिए आधिकारिक नियुक्ति-पत्र प्रदान किए गए।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक श्री चैतराम अटामी ने चयनित युवाओं को नियुक्ति-पत्र वितरित करते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दंतेवाड़ा जिले के लिए गर्व का विषय है कि यहां के ग्रामीण एवं स्थानीय युवाओं को देश की अग्रणी नवरत्न कंपनी में कार्य सीखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और माई भारत संगठन की यह पहल युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगी।इस संबंध में बताया गया कि इस इंटर्नशिप प्रक्रिया की शुरुआत इसी वर्ष मई माह में आयोजित प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना शिविर से हुई थी। शिविर में जिले के 480 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक आवेदन किया था। पारदर्शी चयन प्रक्रिया एवं विभिन्न चरणों के मूल्यांकन के बाद अंतिम रूप से 84 युवाओं का चयन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान सभी चयनित युवाओं को कार्य का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के साथ प्रति माह 9 हजार रुपये का वजीफा भी प्रदान किया जाएगा। जिला प्रशासन, रोजगार विभाग एवं माई भारत संगठन के समन्वित प्रयासों से आवेदन, चयन एवं नियुक्ति-पत्र वितरण की पूरी प्रक्रिया कुछ ही महीनों में पारदर्शी ढंग से पूर्ण की गई। कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि एनएमडीसी जैसी प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्था में प्रशिक्षण प्राप्त करने से युवाओं के लिए निजी एवं शासकीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा और बस्तर अंचल के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इसी उद्देश्य से भविष्य में भी रोजगारोन्मुखी शिविर, कौशल विकास कार्यक्रम एवं इंटर्नशिप योजनाओं का नियमित आयोजन किया जाएगा, ताकि जिले का कोई भी प्रतिभाशाली युवा रोजगार के अवसरों से वंचित न रहे।कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुंजाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर, जिला रोजगार अधिकारी श्री अमित वर्मा, कृषि विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, युवा प्रतिभागी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- रायपुर। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission - NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह कॉलेज पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध है।MARB की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी अनुमति पत्र (Letter of Permission) के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की एमबीबीएस सीटों की संख्या *230 से बढ़ाकर 250*कर दी गई है, यानी कुल *20 नई सीटों* की बढ़ोतरी हुई है।वर्ष 1963 में 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने समय-समय पर अपनी प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। प्रारंभिक 60 सीटों से बढ़कर यह संख्या 100, वर्ष 2009 में 150, वर्ष 2019 में 180, वर्ष 2023 में 230 तथा अब एनएमसी की नवीनतम स्वीकृति के पश्चात 250 सीटों तक पहुँच गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और वे अपने ही राज्य में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।
- -नक्सल मुक्त गांवों की प्राकृतिक खेती बनेगी नई पहचान-एपीडा, कृषि एवं पंचायत विभाग के साथ बनी कार्ययोजना, बस्तर संभाग में होगा विशेष सर्वे और परीक्षणरायपुर। बस्तर संभाग के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बड़े बाजारों तक पहुंचाने तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बस्तर के उन गांवों की पहचान कर उनका जैविक प्रमाणन कराने के निर्देश दिए, जहां आज तक किसानों ने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांव छत्तीसगढ़ की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और इनकी जैविक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त हुए ग्रामों के अपने बस्तर प्रवास के दौरान अनेक किसानों ने उन्हें जानकारी दी थी कि उन्होंने अपने खेतों में कभी भी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ा जाए, ताकि उनके उत्पादों का विधिवत जैविक प्रमाणन कराया जा सके और उन्हें देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ यूरोप सहित अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सके।श्री शर्मा ने कहा कि जैविक प्रमाणन के बाद बस्तर के किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा तथा बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।बैठक में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी), सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के अंतर्गत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए ताकि बस्तर के उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकें। इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का निर्माण कर उत्पादन का हर किसी को भागीदार बनाया जाएगा।उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक श्री अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दल एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जैविक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेंगे तथा जैविक उत्पादों के लिए आवश्यक परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके द्वारा पूरे ग्राम पंचायतों को जैविक प्रमाणन दिलाकर बस्तर के उत्पादों को बिहान के छत्तीसकला ब्रांड द्वारा एक्सपोर्ट किया जाएगा।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एनपीओपी प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन सालों की अवधि की आवश्यकता को बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त वनोत्पादों को प्रमाणन की आवश्यकता ना होने से उसे भी एक्सपोर्ट रेडी करने के लिए तैयारी करने को कहा ताकि बस्तर के लोगों को वनोत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।उप मुख्यमंत्री ने जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को गति देने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रमाणन संस्थाओं की सेवाएं लेने तथा सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी कदम शीघ्र उठाने के निर्देश भी दिए। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव श्री भीम सिंह, सचिव श्री धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक श्री तारन प्रकाश सिन्हा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक श्री अश्विनी देवांगन, एपीडा के अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।























