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- बारिश के मौसम में अक्सर लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। वहीं, इस मौसम में इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसके कारण लोग जल्दी बीमारी पड़ते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों को इम्यूनिटी बूस्ट करने वाले और पोषक तत्वों से युक्त फूड्स को डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। अक्सर लोग शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए दालों और सब्जियों से बने सूप का सेवन करने की सलाह देते हैं। इनका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।मॉनसून में कौन से सूप का सेवन करें?1. मूंग दाल का सूप पिएंमूंग दाल का सूप हल्का, आसानी से पचने वाला और टेस्टी सूप होता है। बारिश के मौसम में अक्सर लोगों की पाचन क्षमता कमजोर हो सकती है। ऐसे में मूंग दाल सूप का सेवन करना एक अच्छा ऑप्शन है। मूंग दाल में भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, कई अन्य पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी के गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को एनर्जी देने और स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं।कैसे बनाएं मूंग दाल सूप?इसको बनाने के लिए कुकर में अच्छे से धोकर 1 कटोरी मूंग दाल, अदरक का एक छोटा टुकड़, छोटी चम्मच हल्दी, स्वादानुसार, नमक, 2-3 लौंग और पानी को डालकर अच्छे से उबाल लें। अब इसको अच्छे से ब्लैंड कर लें। इसके बाद 1 कढ़ाई में आधा छोटी चम्मच में घी डालकर इसमें चुटकीभर हींग, 2-3 मोरिंगा के पत्ते, 3-4 कप पानी, आधा छोटी चम्मच लहसुन और काली मिर्च के पाउडर डालें और फिर इसमें दाल को मिलाकर अच्छे से उबालें। अब इसमें नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन करें।मूंग दाल के सूप के फायदे-पाचन में सुधार करे-प्रोटीन की कमी होती है दूर-पेट को भरा रखने में मिलती है मदद-इम्यूनिटी बूस्ट करे-सर्दी-जुकाम से बचाव करेसाल 2020 में Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, मूंग दाल में अच्छी मात्रा में प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी माइक्रोबियल और एंटी डायबिटीक जैसे कई पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने, पाचन को दुरुस्त करने, वजन कम करने, हार्ट को हेल्दी रखने, इम्यूनिटी को बेहतर करने, पोषक तत्वों की कमी को दूर करने और ब्लड शुगर को मैनेज करने में मदद मिलती है।2. मोरिंगा का सूप पिएंमोरिंगा यानी सहजन के सूप में विटामिन्स और मिनरल्स में भरपूर पोषक तत्व होते हैं। बारिश के मौसम में इसके सूप का सेवन करने से स्वास्थ्य को दुरुस्त करने और इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद मिलती है।कैसे बनाए मोरिंगा सूप?मोरिंगा सूप बनाने के लिए 3-4 सहजन को टमाटर और नमक के साथ कुकर में 2-3 सीटी देकर उबाल लें। उबलने के बाद पानी को बचाकर रखें और फलियों का सारा पल्प चम्मच से निकाल लें। अब एक पैन में थोड़ा सा मक्खन गरम करके जीरा, बारीक कटा लहसुन, अदरक और प्याज भून लें। अब इसमें मोरिंगा का पल्प, बचाया हुआ पानी, हल्दी, काली मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाकर 5 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसका सेवन करें।मोरिंगा सूप के फायदे-पोषक तत्वों की कमी दूर करे-इम्यूनिटी बूस्ट करे-हड्डियों को मजबूती देने-पाचन में सुधार करने-स्किन को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।साल 2020 में Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, सहजन (मोरिंगा ओलिफेरा) में बायोफिनोल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें सूजन को कम करने (एंटी-इंफ्लेमेटरी), शरीर की सेल्स को नुकसान से बचाने (एंटीऑक्सीडेंट) और हमारी इम्यूनिटी को मजबूत करने (इम्यूनो-मॉड्यूलेटरी) के बेहतरीन गुण होते हैं।3. टमाटर का सूप पिएंटमाटर का सूप में अच्छी मात्रा में फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, बीटा कैरोटिन और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं। बारिश के मौसम में गर्म टमाटर का सूप पीने से फ्रेश महसूस करने, इम्यूनिटी को मजबूत करने और स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है।कैसे बनाए टमाटर का सूप?टमाटर का सूप बनाने के लिए कुकर में 4-5 कटे हुए टमाटर, 1 छोटा प्याज, 2-3 लहसुन की कलियां, आधा इंच अदरक और एक छोटा टुकड़ा चुकंदर को आधा कप पानी के साथ 2 सीटी आने तक उबाल लें। ठंडा होने पर इसे मिक्सी में पीसकर छान लें ताकि बीज और छिलके निकल जाएं। अब एक पैन में थोड़ा मक्खन गरम करें, उसमें यह छना हुआ टमाटर का मिश्रण, थोड़ा पानी, स्वादानुसार नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर 5 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसका सेवन करें।साल 2022 में biology में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, टमाटर से भरपूर डाइट लेने से सेहत को कई तरह के बड़े फायदे मिलते हैं। टमाटर में बहुत से बायोएक्टिव कंपाउड होते हैं। यह कैंसर से बचाने में मदद करता है, साथ ही दिल की बीमारियों, दिमाग से जुड़ी समस्याओं (जैसे भूलने की बीमारी) व आंतों की बीमारियों के खतरे को कम करता है, स्किन हेल्दी रहती है और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होती है।टमाटर सूप के फायदे-इम्यूनिटी को बूस्ट करे-शरीर को एनर्जी दे-पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर करे-पाचन में सुधार करे-स्किन को हेल्दी बनाएसाल 2013 में Indian Journal of Clinical Biochemistry में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, विटामिन सी सर्दी-जुकाम से बचाव करने में मदद मिलती है, साथ ही, इससे इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद मिलती है। विटामिन-सी हमारे इम्यून सिस्टम को जरूरत से ज्यादा एक्टिव होने से भी रोकता है, ताकि शरीर के अंगों या टिश्यूज को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।4. अदरक, लहसुन और सब्जियों का सूप पिएंअदरक, लहसुन और सब्जियों के सूप में अच्छी मात्रा में फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन या बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।कैसे बनाएं अदरक, लहसुन और सब्जियों का सूप?अदरक, लहसुन और सब्जियों के सूप को बनाने के लिए एक पैन में 1 चम्मच तेल डालें और फिर इसको गरम करके 1-1 चम्मच बारीक कटा हुआ अदरक और लहसुन डालकर हल्का सा भून लें। अब इसमें अपनी पसंद के अनुसार बारीक कटी सब्जियां (जैसे गाजर, बीन्स, पत्तागोभी और शिमला मिर्च) डालकर 2 मिनट तेज आंच पर पकाएं। इसके बाद 3-4 कप पानी, स्वादानुसार नमक और आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाकर सूप को ढककर 8-10 मिनट तक उबलने दें। अब अगर आप सूप को हल्का गाढ़ा करना चाहते हैं, तो इसमें कॉर्नफ्लोर का घोल (ऑप्शन्ल) मिलाएं और फिर 2 मिनट तक पकाएं। इसके बाद इसका सेवन करें।अदरक, लहसुन और सब्जियों का सूप के फायदे-इम्यूनिटी को बूस्ट करने-सर्दी-खांसी से बचाव करे-पाचन में सुधार करे-वजन कम करे-सूजन कम करेसाल 2024 में BIOINFORMATION में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, अदरक और लहसुन दोनों के अर्क में फिनोलिक नाम के फायदेमंद तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा, इनमें एंटी ऑक्सीडेंट्स होा है। इनका सेवन करने से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और शरीर की इम्यूनिटी बेहतर करने में मदद मिलती है।बारिश में क्या खाना चाहिए?बारिश में अदरक-तुलसी की चाय पिएं, मूंग दाल की खिचड़ी खाएं, मौसमी फल खाएं और गर्म सूप पिएं। इन फूड्स से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने और स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है।सूप पीने के क्या फायदे हैं?
- पेट में कीड़े होना एक आम समस्या मानी जाती है। यह समस्या बच्चों में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन बड़े भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। गंदा खाना, दूषित पानी, साफ-सफाई की कमी और बिना हाथ धोए खाना खाने से पेट में कीड़े पहुंच सकते हैं। ये कीड़े आंतों में जाकर शरीर से पोषण लेने लगते हैं, जिससे कमजोरी और कई दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।पेट में कीड़े होने के आम लक्षणपेट दर्द और मरोड़: अगर बार-बार पेट में दर्द या मरोड़ हो रही हो, तो यह पेट में कीड़ों का संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को पेट में भारीपन भी महसूस हो सकता है।भूख कम या ज्यादा लगना: पेट में कीड़े होने पर कुछ लोगों की भूख कम हो जाती है, जबकि कुछ लोगों को बार-बार भूख लग सकती है।वजन कम होना: अगर सही खाना खाने के बाद भी वजन घट रहा हो, तो यह भी पेट में कीड़ों की वजह से हो सकता है। क्योंकि कीड़े शरीर का पोषण खुद लेने लगते हैं।कमजोरी और थकान: शरीर में जरूरी पोषण की कमी होने लगती है, जिससे कमजोरी और हर समय थकान महसूस हो सकती है।गुदा के आसपास खुजली: खासतौर पर रात के समय गुदा के आसपास खुजली होना पेट में कीड़ों का एक सामान्य संकेत माना जाता है।पेट फूलना और गैस: कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।बच्चों में दिख सकते हैं ये संकेतचिड़चिड़ापनपढ़ाई में ध्यान कम लगनाबार-बार बीमार पड़नाकमजोरीपेट में कीड़े होने के कारणगंदा या दूषित खाना: साफ-सफाई का ध्यान न रखने से कीड़े शरीर में पहुंच सकते हैं।बिना हाथ धोए खाना खाना: खाना खाने से पहले हाथ साफ न करने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।दूषित पानी पीना: गंदा पानी पीने से पेट में कीड़े पहुंच सकते हैं।बाहर का खुला खाना: सड़क किनारे खुले में रखा खाना खाने से भी यह समस्या हो सकती है।बच्चों की सफाई पर खास ध्यान देंबच्चे अक्सर मिट्टी में खेलते हैं और बिना हाथ धोए चीजें खा लेते हैं। इसलिए उनकी सफाई का खास ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।क्या घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं?कुछ लोग घरेलू उपाय भी अपनाते हैं, लेकिन किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।इन चीजों से बचेंबाहर का खुला खाना कम खाएंसाफ पानी पिएंशौचालय इस्तेमाल के बाद हाथ धोएंबच्चों को साफ-सफाई की आदत सिखाएंकब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?पेट में कीड़े होने की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर तेज पेट दर्द हो, उल्टी हो रही हो, मल में कीड़े दिखाई दें या फिर बहुत ज्यादा कमजोरी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी माना जाता है।
- दालचीनी का इस्तेमाल भारतीय रसोई का एक अहम हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने, अचार, चाय, काढ़ा, मिठाइयां आदि तरीकों में इस्तेमाल किया जाता है। दालचीनी में मौजूद सिनामाल्डिहाइड, पॉलीफेनॉल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। दालचीनी का सेवन सीमित मात्रा में करना सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, ज्यादा मात्रा में इसका सेवन आपकी सेहत के लिए हानिकारक भी हो सकता है।ज्यादा दालचीनी खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?दालचीनी का ज्यादा सेवन सेहत के लिए कई तरह से नुकसानदायक साबित हो सकता है। कैसिया दालचीनी में मौजूद कूमारिन नामक का कंपाउंड लिवर पर बुरा असर डाल सकता है, जिसके कारण सीलोन दालचीनी के सेवन की सलाह दी जाती है। साल 2019 में Euroasian Journal Of Hepato-Gastroenterology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, दालचीनी का ज्यादा मात्रा में सेवन लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इसमें कूमरिन नाम का टॉक्सिक तत्व होता है, जो लिवर के लिए हानिकारक माना गया है। इसके ज्यादा सेवन से लिवर का अनियमित रूप से सिकुड़ना और फिर से बढ़ना शामिल है। इसके लक्षणों की बात करें तो पीलिया, गहरे रंग का पेशाब, भूख में कमी और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।ज्यादा मात्रा में दालचीनी का सेवन ब्लड शुगर लेवल पर भी असर डाल सकता है। इसलिए, डायबिटीज के मरीजों को दवा के साथ इसका सेवन करने से बचना चाहिए। इसमें मौजूद सिनामाल्डिहाइड के कारण सेंसिटिव लोगों को मुंह में छाले, जीभ और गले में जलन या एलर्जी की समस्या हो सकती है। इतना ही नहीं, ज्यादा मात्रा में दालचीनी का सेवन ब्लड थिनर, डायबिटीज और लिवर की दवाओं के असर को भी प्रभावित कर सकता है।आयुर्वेद के अनुसार ज्यादा दालचीनी के नुकसानज्यादा दालचीनी का सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। दालचीनी वैसे तो खून को पतला करती है और आयुर्वेद में इसे ठंडी तासीर का माना जाता है, लेकिन अगर आप इसे बहुत ज्यादा मात्रा में खाएंगे तो यह पेट में गर्मी को बढ़ा देगी। फिर यह शरीर को गर्म करने लगती है। लोग अक्सर इसे पानी में मिलाकर पीना पसंद करते हैं, लेकिन फिर भी बहुत ज्यादा लेने से शरीर में पित्त बढ़ सकता है, जिससे पेट की गर्मी और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल के दौरान मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।-दालचीनी की चाय: दिन में 1 से 2 कप दालचीनी की चाय ज्यादातर हेल्दी लोगों के लिए ठीक मानी जाती है, लेकिन इसमें ज्यादा दालचीनी की मात्रा बढ़ाने से यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।-पाउडर: ज्यादा मात्रा में रोजाना दालचीनी का पाउडर खाने से सेहत के लिए इसका जोखिम बढ़ सकता है।-मसाले के रूप में: भोजन में सीमित मात्रा में दालचीनी का इस्तेमाल सेहत के लिए फायदेमंद और सुरक्षित माना जाता है।दालचीनी की कितनी मात्रा सुरक्षित मानी जाती है?दालचीनी का सेवन करने की कोई तय सीमा नहीं है क्योंकि यह उसकी किस्म और आपके खाने के कारण पर निर्भर करती है। हालांकि, अगर आप इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं तो कोशिश करें कि पूरे दिन में 3 से 4 ग्राम से ज्यादा दालचीनी अपनी डाइट में बिल्कुल शामिल न करें, क्योंकि इससे ज्यादा मात्रा शरीर में बहुत तेज गर्मी पैदा हो सकती है। इसलिए, आप ध्यान रखें कि रोजाना बड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर लंबे समय तक न लें। अगर स्वास्थ्य फायदों के लिए आप इसका नियमित सेवन कर रहे हैं तो सेवन के तरीके और मात्रा के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।निष्कर्षदालचीनी एक फायदेमंद मसाला है, लेकिन इसका ज्यादा सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। चाहे आप इसे काढ़े, चाय, पाउडर या मसाले के रूप में लें, ध्यान रखें कि आपको इसे संतुलित और सीमित मात्रा में ही लेना है। सही मात्रा और इसके सेवन का तरीका आपके सेहत पर इसके प्रभाव निर्भर करता है।
- हम में से बहुत से लोग अपनी स्किन और बालों को हेल्दी रखने के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं। लेकिन भूल जाते हैं कि जितना हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल होगा, उतना ही त्वचा और बालों को नुकसान होगा। ऐसे में हम सभी के मन में एक ही ख्याल आता है कि “आखिर इन्हें हेल्दी रखें तो कैसे रखें?”- रोजाना सुबह खाली पेट करी पत्तियां चबाएं ।करी पत्ता हेल्दी बालों और पाचन को बेहतर बनाने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें नेचुरल आयरन, एंटीऑक्सीडेंट और प्लांट कंपाउंड होते हैं जो बॉडी को अंदर से पोषण देते हैं।करी पत्ता स्किन और हेयर के लिए कैसे फायदेमंद है?-यह बालों के नेचुरल रंग यानी कि पिगमेंटेशन को बनाए रखने में मदद कर सकता है।एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जिससे स्किन सेल्स को प्रोटेक्शन मिलती है।-पाचन में मदद कर सकता है, जिसे आयुर्वेद साफ स्किन से जोड़ता है।-नोट- 5–7 ताजी करी पत्तियों को अच्छी तरह धो लें और एक गिलास पानी के साथ चबाएं। अगर ताजी पत्तियां न मिलें, तो उन्हें अपने नाश्ते में शामिल करें।चेहरे पर खस वाले पानी का इस्तेमालसादे पानी से चेहरा धोने के बजाय, रात भर खस की जड़ों को पीनी में भिगोकर रखें और फिर उस पानी का इस्तेमाल करें। आयुर्वेद में, खस अपनी नेचुरल ठंडक देने और आराम पहुंचाने वाली खूबियों के लिए जाना जाता है। इसे इस्तेमाल करने के कई फायदे हैं। जैसे--डल स्किन को फ्रेश और ग्लोइंग बना सकता है।-गर्मी से होने वाली स्किन की जलन को शांत करने में मदद कर सकता है।-चेहरे को नेचुरली हाइड्रेटेड रखने में मददगार हो सकता है।-बता दें कि इसे इस्तेमाल करने के लिए आप साफ खस की जड़ों को पीने के पानी में रात भर भिगो दें। सुबह चेहरा धोने के लिए उस छने हुए पानी का इस्तेमाल करें।फिंगर टिप से स्कैल्प की मासज करेंबहुत से लोग सोचते हैं कि स्कैल्प की मालिश सिर्फ तेल से ही होती है। लेकिन आयुर्वेद में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने के लिए उंगलियों की टिप से बिना तेल के मसाज करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से हेयर फॉलिकल्स तक ब्लड फ्लो बढ़ता है, स्कैल्प के कड़ेपन को कम करने में मदद मिलती है और बालों की जड़ों तक पोषक तत्वों को पहुंचाने में सुधार होता है।एक चम्मच भुने हुए तिल खाएंतिल को आयुर्वेद में हड्डियों, बालों और स्किन के लिए सबसे ज़्यादा पोषण देने वाले खाद्य पदार्थों में से एक माना जाता है। इसमें कैल्शियम, जिंक, हेल्दी फैट्स और विटामिन E भरपूर मात्रा में होते हैं। यह रूखी त्वचा को पोषण देने में मदद कर सकता है। साथ ही बालों को अंदर से मजबूत बनाता है। आप सुबह एक चम्मच भुने हुए काले या सफेद तिल खाएं या उन्हें अपने नाश्ते पर छिड़कें। ये दोनों ही तरीके आपके बालों और स्किन के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।गुलाब जल का इस्तेमाल करेंसिर्फ गुलाब जल स्प्रे करने के बजाय, ठंडे प्योर गुलाब जल में कॉटन पैड भिगोकर अपनी बंद आंखों और गालों के ऊपरी हिस्से पर रखें। ऐसा करने से सूजी हुई आंखों को ताजगी मिलती है, चेहरे को आराम मिलता है, गर्मी में स्किन को ठंडक पहुंचाता है और ऑयल सीक्रेशन कम होता है, जिससे थकी हुई त्वचा को आराम मिलता है और वह फ्रेश नजर आती है। आप सबसे अच्छे नतीजों के लिए बिना खुशबू या अल्कोहल वाला शुद्ध गुलाबजल चुनें।
- बस अपनाएं डॉक्टर का बताया रूलऑफिस के काम के लिए लोगों को घंटों तक एक ही जगह पर बैठना पड़ता है। हालांकि, लगातार बैठे रहना हमारे शरीर के लिए एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है। जब हम लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहते हैं, तो शरीर के कई हिस्सों पर असर होता है। खासतौर से पैरों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुमित कपाड़िया (वैरिकोज वेन स्पेशलिस्ट) ने 30-60-5 रूल शेयर किया है। जिसे अपनाकर पैरों की समस्या से बचा जा सकता है। जानिए क्या है ये रूल।ज्यादा देर बैठने पर जम जाता है खून30 मिनट तक बैठने पर खून जमा होने लगता है। आपकी पिंडली की पंपिंग बंद हो जाती है। नस के वॉल्व खुल जाते हैं। खून का बहाव धीमा हो जाता है। नुकसान चुपचाप शुरू हो जाता है।क्या है 5 मिनट के लिए पिंडली व्यायाम?घंटों तक एक जगह पर बैठने से जब पैर जाम हो जाते हैं तो 5 मिनट की एक्सरसाइज आराम दे सकती है। इस एक्सरसाइज में अपनी पिंडलियों को स्क्वीज करें। ऐसा करने से खून 30 से 40 एमएल ऊपर की तरफ जाता है। 5 बार स्क्वीज करने पर आपके पैरों से 150-200 ml डीऑक्सीजनेटेड ब्लड (ऑक्सीजन-रहित रक्त) पैरों से हटाया जा सकता है।क्या है रूल?हर 30 मिनट के बाद कम से कम 60 सेकेंड के लिए खड़े रहें। 5 काफ रेजेज करें। 60 सेकेंड के लिए खड़े रहना और 5 मिनट की मूवमेंट से ब्लड फ्लो फिर से रिस्टार्ट हो सकता है।क्या होता है जब आप ऐसा नहीं करते?ऑफिस के काम के लिए जब आप लगातार 8 घंटे के लिए बैठते हैं या फिर 6 से ज्यादा घंटे के लिए बैठते हैं तो खून जमना शुरू हो जाता है। ऐसा ना करने पर एक महीने में नसे थकना शुरू हो जाती हैं। 6 महीने में वेरिकोज वेंस दिखने लगती हैं। 2 साल में स्किन डैमेज होने लगती है और रंगत खराब होने लगती है। 5 साल बाद अल्सर और डीवीटी रिस्क की समस्या हो सकती है।ये ट्रिक आएगी कामकाम में व्यस्त हो जाने के बाद हो सकता है कि आप खड़े होना और एक्सरसाइज करना भूल जाएं। इसलिए सबसे अच्छा है कि आप अलार्म सेट करें। हर 30 मिनट बाद का एक अलार्म लगाएं। ये भले ही एक छोटी आदत है लेकिन इसका असर बड़ा दिखाई देगा।ऐसा करने पर-ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगासूजन और थकान कम होगीदिल और नसों को सपोर्ट मिलता हैएनर्जी और फोकस बढ़ता है।
- शरीर में विटामिन्स, प्रोटीन की कमी होने पर कई गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं, जिसमें ज्यादातर लोगों में Vitamin B12 की कमी पाई जाती है। विटामिन B12 खासतौर पर लीवर, खून, हड्डियों के भीतर बोन मैरो और शरीर की कोशिकाओं में पाया जाता है। शरीर में विटामिन B12 की कमी होने पर गुड ब्लड सेल्स कम बनने लगती हैं, जिससे कमजोरी, थकान और सांस फूलने जैसी दिक्कत हो सकती है। इससे हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन या संतुलन बिगड़ना। वैसे तो विटामिन B12 की कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स आते हैं लेकिन डाइट में कुछ चीजों को शामिल करने से भी बी12 की कमी को पूरा करने में सपोर्ट मिल सकता है। कुछ ऐसी हरी सब्जियां हैं, जिन्हें हर किसी को अपनी प्लेट में शामिल करना चाहिए।कौन सी हैं 5 सब्जियां-1- पालकपालक में फोलेट, आयरन और क्लोरोफिल होते हैं, जो रेड ब्लड सेल्स को बनाने में मददगार होते हैं। इसे खाने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है, थकान कम लगती है और विटामिन B12 की कमी को पूरा करने में सपोर्ट भी मिलता है। पालक की सब्जी या फिर दाल आप डाइट में शामिल कर सकते हैं।2- सहजन के पत्तेसहजन की फली के साथ उसके पत्ते भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। सहजन की पत्तियों में विटामिन, कैल्शियम, आयरन, फोलेट जैसे तत्व होते हैं। इसे खाने से शरीर में एनर्जी आती है और कमजोरी दूर होती है। साथ ही विटामिन B12 की कमी पूरी करने में भी ये मददगार होते हैं। इसमें मौजूद फोलेट रेड ब्लड सेल्स को बनाने में हेल्प करता है।3- चुकंदरचुकंदर अगर आप सलाद में खाते हैं, तो समझ लीजिए आपके शरीर में खून की कमी नहीं होगी। चुकंदर में फोलेट, मैंगनीज, नैचुरल नाइट्रेट्स होते हैं, जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। साथ ही स्टैमिना भी बढ़ाते हैं। Vitamin B12 की कमी पूरा करने में भी चुकंदर सपोर्ट करता है।4- मेथी के पत्तेमेथी के पत्तेमेथी के पत्ते की भी सब्जी बनाकर लोग खूब खाते हैं और ये सेहत के लिए फायदेमंद भी होती है। इसे खाने से पाचन तंत्र अच्छा रहेगा, मेटाबॉलिज्म बढ़ेगा, विटामिन B12 की कमी पूरा करने में मदद मिलेगी। इसमें आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम जैसे जरूर पोषक तत्व होते हैं।5- ग्वार फलीग्वार फलीग्वार फली थोड़ी सेम की तरह दिखती है और ये सब्जी भी लोग सूखी बनाकर खाना पसंद करते हैं। ग्वार फली में फोलेट, फाइबर, मिनरल्स, विटामिन्स का अच्छा स्रोत होता है। ग्वार फली खाने से पाचन बेहतर रहेगा, ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है, इम्यूनिटी मजबूत होगी और B12 की कमी को भी सपोर्ट मिलेगा।
- सुबह वाली नींद हर किसी को प्यारी होती है और यही कारण है कि हम अलार्म को बार-बार बंद करते रहते हैं। सुबह कहीं जाना हो तब भले ही हम जल्दी उठ जाए लेकिन वैसे अलार्म को 5 मिनट बढ़ाते हुए करीब 1-2 घंटे और सो लेते हैं। आजकल की लाइफस्टाइल में सुबह देर से उठना काफी नॉर्मल हो चुका है लेकिन पहले लोग सुबह 4-5 बजे उठना सही मानते थे। सुबह जल्दी उठने पर दिमाग फ्रेश रहता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है। साथ ही कई प्रोडक्टिव काम भी कर सकते हैं। अगर आप किसी सफल व्यक्ति के बारे में जानें तो पाएंगे कि वह सभी लोग सुबह जल्दी उठते हैं। आप भी जल्दी उठने की कोशिश रोजाना करते हैं लेकिन उठ नहीं पाते तो आज हम आपको जल्दी उठने के 3 सरल तरीके बताने जा रहे हैं। सात्विक मूवमेंट यूट्यूब चैनल पर वीडियो में इसके बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने सुबह जल्दी उठने और मॉर्निंग रूटीन के बारे में सलाह दी है।क्यों नहीं खुलती नींदआजकल लोग देर से खाना खाते हैं और फिर बिस्तर पर लेटने के बाद मोबाइल चलाने लगते हैं। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के निर्माण को रोकती है और यही कारण है कि नींद देर से आती है। फिर सुबह कई अलार्म बजने के बाद भी आंख नहीं खुलती। रील्स, फिल्म या किसी से देर रात तक बातें करने से दिमाग सक्रिय रहता है, जिससे नींद पूरी नहीं होती और सुबह उठने पर भारीपन लगता है।जल्दी उठने के 3 तरीके क्या है1- रात से ही कर लो तैयारसात्विक मूवमेंट के अनुसार, अगर आपको सुबह जल्दी उठना है तो रात से ही तैयारी करनी होगी। सुबह के 10 अलार्म लगाने के बजाय रात के 9-10 बजे का अलार्म सेट करें। जैसे ही रात में ये अलार्म बजे, आप अपने बिस्तर पर सोने के लिए चले जाए। अगर आप देर रात तक जगेंगे तो सुबह नींद खुलना नामुमकिन है। ऐसे में जरूरी है कि आप रात को जल्दी सोएं, जिससे दिमाग शांत रहे और नींद पूरी हो जाए। अगर आप 9 बजे नहीं सो सकते तो 10 बजे तक जरूर सोने की कोशिश करें।रात की अच्छी नींद2- सुबह का प्लान बनाएंअगली सुबह अगर आपको कहीं बाहर जाने के लिए ट्रेन-फ्लाइट पकड़ना हो, ऑफिस की जरूरी मीटिंग अटेंड करनी हो तो आपकी नींद खुद ही खुल जाती है। अलार्म बाद में बजता है लेकिन रोजाना ऐसा नहीं होता। ऐसा इसलिए होता है कि जब आपके दिमाग में पहले से कोई प्लान होता है, तो सब-कॉन्शियस माइंड में वह चलता रहता है और इसी वजह से सुबह नींद जल्दी खुल जाती है। इसिलए सुबह के लिए प्रोडक्टिव प्लान बनाकर सोएं- जैसे सुबह एक्सरसाइज करनी है, बुक पढ़नी है, टहलने जाना है या जो भी आपके लिस्ट में हो।3- डिनर को बनाइये हल्काअगर आपका डिनर हैवी रहेगा, तो पेट को उसे पचाने के लिए करीब 5-6 घंटे की मेहनत लगेगी। ऐसे में नींद भी भरपूर आएगी और आप सुबह नहीं उठ पाएंगे। साइंस भी कहता है कि दिन में हैवी लंच करो लेकिन डिनर हमेशा लाइट ही रखो। डिनर में अनाज कम खाएं और सलाद-सब्जियां ज्यादा खाएं। अगर आप डिनर में राजमा-चावल, दाल-चावल जैसी चीजें खाते हैं, तो सुबह नींद खुलना मुश्किल है। ध्यान रखें कि अगर 10 बजे सो रहे हैं, तो डिनर सोने से करीब 2 घंटे पहले यानी 8 बजे कर लें।हेल्दी सैलेड कैसे बनाएं3 M को करें फॉलोसुबह जल्दी उठना है तो आपको 3 M वाले नियम को जरूर फॉलो करना चाहिए। यही आपका मॉर्निंग रूटीन भी होना चाहिए, इसमें पहले M का मतलब है मेडिटेशन करना। सुबह उठने पर सबसे पहले योगा, एक्सरसाइज या फिर मेडिटेशन करें। दूसरे M का मतलब है कि मूवमेंट। उठने के बाद अपने शरीर को चलाएं, आप टहल सकते हैं या फिर कोई फिजिकल एक्टिविटी कर सकते हैं। तीसरे M का मतलब है मास्टरी। मतलब ऐसा काम करें, जो आपके दिमाग को तेज करने में मददगार हो। जैसे कोई किताब पढ़ें, नई स्किल्स सीखें या फिर कोई क्रिएटिव काम करें।
- किशमिश एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो ज्यादातर भारतीय घरों में आसानी से मिल जाता है। लेकिन बहुत ही कम लोग होते हैं, जो इन्हें रेगुलर बेसिस पर खाते हैं। ऐसा इसलिए क्यों छोटे से दिखने वाले इस ड्राई फ्रूट के फायदे ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं हैं। आमतौर पर हम बादाम-अखरोट को तो फायदेमंद समझते हैं, लेकिन किशमिश ज्यादातर लोग सिर्फ मिठाई या खीर-हलवे में डालने को ही यूज करते हैं।. ज्यादातर भारतीय किशमिश के फायदे जानते नहीं हैं। अगर वो इसे रोजाना अपनी डाइट में शामिल कर लें तो बहुत से लोगों की कब्ज की समस्या दूर हो जाए। आइए जानते हैं किशमिश के फायदों के बारे में डॉक्टर का और क्या कहना है।कब्ज की समस्या में बहुत फायदेमंद है किशमिशभारत में बहुत से लोगों को कब्ज की समस्या बनी रहती है। इसपर डॉक्टर कहते हैं कि अगर लोग नियमित रूप से किशमिश खाना शुरू कर दे, तो आधे लोगों की ये समस्या ठीक हो सकती है। दरअसल किशमिश नेचुरली आपके गट के वाटर बैलेंस को इंप्रूव करने का काम करते हैं। इसमें 'सोर्बिटोल' नामक तत्व मौजूद होता है, जो मल में नमी बनाए रखने का काम करता है। किशमिश में मौजूद फाइबर मल को सॉफ्ट और आसानी से निकलने वाला बनाता है। डॉक्टर बताते हैं कि कब्ज में हमेशा किसी दवा की जरूरत नहीं होती है, कई मामलों में खानपान में छोटे-छोटे बदलाव भी काफी फायदेमंद हो सकते हैं।एसिडिटी और भारीपन को कम करने में सहायकडॉ शुभम कहते हैं कि किशमिश गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया को पोषण देने का काम करती है। इससे एसिडिटी और पेट फूलना या भारीपन जैसी समस्याओं में भी मदद मिलती है। कब्ज की वजह से मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने की समस्या कम होने पर पाइल्स (बवासीर) और एनल फिशर का रिस्क भी कम हो जाता है।हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है किशमिशकिशमिश सिर्फ आपके गट के लिए ही नहीं, बल्कि हार्ट हेल्थ के लिए भी काफी फायदेमंद है। डॉक्टर कहते हैं कि किशमिश में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और पोटैशियम मौजूद होता है, जो हार्ट हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद है। नियमित रूप से इनका सेवन आपकी ओवरऑल हार्ट हेल्थ और पाचन के लिए काफी अच्छा साबित हो सकता है।कब और कितनी मात्रा में किशमिश का सेवन करेंडॉक्टर कहते हैं कि आप रोजाना 8-10 किशमिश खा सकते हैं। इन्हें रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दें, फिर सुबह चबा चबाकर अच्छी तरह खा लें। अगर आप इन्हें लगातार एक हफ्ते तक कंज्यूम करें तो फर्क साफ महसूस किया जा सकता है।--
- शाम के समय चाय की चुस्कियों के साथ कुछ गरम और कुरकुरा खाने का मन हर किसी का होता है. अमूमन हमारे घरों में आलू के कटलेट, ब्रेड रोल या समोसे ही बनाए जाते हैं. स्वाद में लाजवाब होने के बावजूद ये स्नैक्स हैवी और हाई-कैलोरी होते हैं जिसके चलते फिटनेस का ध्यान रखने वाले लोग इनसे दूरी बना लेते हैं.अगर आप भी शाम की छोटी-मोटी भूख के लिए कोई ऐसा विकल्प ढूंढ रहे हैं जो जुबान को चटपटा स्वाद दे और शरीर को भरपूर प्रोटीन भी तो मूंग दाल के क्रिस्पी कटलेट्स आपके लिए बेस्ट चॉइस हैं. मूंग दाल न सिर्फ पचाने में आसान होती है बल्कि यह फाइबर और जरूरी विटामिन्स का पावरहाउस भी है. जब इसमें बारीक कटी सब्जियां और देसी मसालों का तड़का लगता है तो इसका क्रंच हर किसी को दीवाना बना देता है. आइए जानते हैं इसे बनाने का आसान तरीका.सामग्री ---मूंग दाल: 1 कप (3 घंटे पानी में भिगोई हुई)पोहा (बाइंडिंग के लिए): 1/2 कप (धोकर साफ किया हुआ) या 2 बड़े चम्मच सूजीबारीक कटी सब्जियां: 1/4 कप गाजर, 1/4 कप शिमला मिर्च, 1/4 कप प्याजबारीक कटी हरी मिर्च: 2अदरक का पेस्ट: 1 छोटा चम्मचबारीक कटा हरा धनिया: 1/2 कपमसाले: 1/2 छोटी चम्मच चाट मसाला, 1/2 छोटी चम्मच भुना जीरा पाउडर, 1/2 छोटी चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, 1/4 छोटी चम्मच हल्दी, एक चुटकी हींग.तेल/घी: कटलेट्स को शैलो-फ्राई या सेंकने के लिएनमक: स्वादानुसारबनाने का तरीका---भीगोई हुई मूंग दाल का पूरा पानी निकाल दें. अब इसे मिक्सी में बिना पानी डाले (या सिर्फ 1 चम्मच पानी के साथ) दरदरा पीस लें. ध्यान रहे कि इसका पेस्ट बिलकुल महीन नहीं होना चाहिए, थोड़ा दानेदार रहना चाहिए.इस दरदरी पिसी दाल को एक बड़े मिक्सिंग बाउल में निकालें. इसमें भीगा हुआ पोहा (या सूजी) डालकर अच्छी तरह मैश करें, यह बाइंडिंग का काम करेगा. अब इसमें बारीक कटी गाजर, शिमला मिर्च, प्याज, अदरक का पेस्ट, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें.इस मिश्रण में चाट मसाला, भुना जीरा पाउडर, लाल मिर्च, हल्दी, हींग और स्वादानुसार नमक डालकर चम्मच या हाथों की मदद से एक स्मूथ डो तैयार कर लें.अपनी हथेलियों पर थोड़ा सा तेल लगाएं. मिश्रण का छोटा हिस्सा लें और उसे अपनी पसंद के अनुसार टिक्की, ओवल या हार्ट शेप में कटलेट तैयार कर लें.एक नॉन-स्टिक पैन या तवे पर 2 चम्मच तेल या घी गर्म करें. तैयार कटलेट्स को तवे पर रखें और धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से अलट-पलट कर क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन होने तक शैलो-फ्राई कर लें. आपके गरमा-गरम, बाहर से कुरकुरे और अंदर से सॉफ्ट मूंग दाल कटलेट तैयार हैं. इन्हें पुदीने की तीखी चटनी और टोमैटो केचप के साथ सर्व करें.
- आजकल के समय में खराब स्लीप साइकिल काफी बड़ी समस्या बन चुका है. अक्सर माना जाता है कि जो जितनी लंबी और गहरी नींद सोएगा वह सुबह उतना ही फ्रेश महसूस करेगा. लेकिन हाल ही में नींद को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया है. रिसर्च में कहा गया है कि महिलाएं पुरुषों से अधिक बेहतर और लंबी नींद लेती हैं फिर भी वे सुबह उठकर अनरेस्टेड यानी थकी हुई महसूस करती हैं. वहीं दूसरी तरफ पुरुष कम सोने के बावजूद अपनी नींद से अधिक संतुष्ट रहते हैं. ऐसा क्यों होता है, इसका कारण जान लीजिए.क्या कहती है जर्नल न्यूरोसाइंस की रिसर्च?स्लीप साइकिल को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने नींद की क्वालिटी और उसके समय का गहराई से एनालिसिस किया. जर्नल न्यूरोसाइंस में पब्लिश रिसर्च का कहना है, नींद की क्वालिटी सिर्फ इस बात पर डिपेंड नहीं करती कि आपने कितने घंटे की नींद ली या आपकी नींद कितनी गहरी थी. बल्कि इस बात पर तय होती है कि आपकी 'परसीव्ड क्वालिटी ऑफ स्लीप' यानी नींद को लेकर आपकी खुद की सोच कैसी है.स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि क्लिनिकल इंसोम्निया (अनिद्रा) के दो-तिहाई मामलों में लोग भरपूर सोने के बाद भी यही शिकायत करते हैं कि उनकी नींद पूरी नहीं हुई. वैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं रात में भले ही कम बार जागती हैं लेकिन जब भी उनकी आंख खुलती है वे पुरुषों से ज्यादा देर तक जागती रहती हैं.रात की यादें और पुरुषों का ओवरएस्टीमेशनइंटरनेशनल पब्लिकेशन द कन्वर्सेशन के डेटा के मुताबिक, अगर रात में किसी महिला की नींद टूटती है तो वह औसतन 9 मिनट तक जागती रहती है जबकि पुरुष सिर्फ 6 से 7 मिनट में दोबारा सो जाते हैं.मेडिकल साइंस कहता है कि यदि कोई व्यक्ति रात में 5 मिनट से ज्यादा समय तक जागता है तो उसके ब्रेन को वह घटना पूरी तरह याद रह जाती है. महिलाओं को रात में बार-बार जागने और देर तक जागने की यह बात सुबह तक याद रहती है जिससे उन्हें लगता है कि वे रातभर ठीक से सो नहीं पाईं.वहीं दूसरी ओर पुरुष अपनी रात की छोटी-मोटी जागने की आदतों को भूल जाते हैं और सुबह उठकर अपनी नींद को ओवरएस्टीमेट करते हैं यानी सोचते हैं कि वे बहुत अच्छी नींद सोए.हॉर्मोन्स और फिजिकल प्रॉब्लम्स भी वजहनींद के इस जेंडर गैप के पीछे सिर्फ मेंटल परसेप्शन ही नहीं बल्कि कई फिजिकल और बायोलॉजिकल कारण भी जिम्मेदार हैं. महिलाओं के शरीर में मेन्स्ट्रुअल साइकिल (पीरियड्स) के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी के समय बैक पेन या यूरिन की समस्या और मेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैशेस जैसी दिक्कतें उनकी स्लीप क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.इन वजहों से उनकी स्लीप एफिशिएंसी कम हो जाती है. यही कारण है कि स्लीप ट्रैकर या गैजेट्स में भले ही महिलाओं का स्लीप टाइमिंग पुरुषों से ज्यादा दिखाई दे, लेकिन इंटरनल थकावट के चलते वे खुद को रीफ्रेश महसूस नहीं कर पाती हैं.--
- अगर लोगों को थोड़ा थका हुआ महसूस हो भी रहा है, तो वे चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक के रूप में कैफीन का सेवन कर रहे हैं। इससे टायर्डनेस तो कम होती ही है, साथ ही काम में फोकस बढ़ाने में भी मदद मिलती है। हालांकि सीमित मात्रा में कैफीन का सेवन सतर्कता और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर के कई अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। कैफीन एक तरह का नेचुरल स्टिमुलेंट है, जो दिमाग और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है। कुछ हद तक यह फायदेमंद है, लेकिन अगर आप ज्यादा मात्रा में कैफीन लेते हैं, तो सबसे पहले इसका असर आपकी नींद पर पड़ता है। इसलिए आपने देखा होगा कि पढ़ाई करने वाले बच्चे अक्सर रात को जागे रहने के लिए कॉफी पीते हैं। कैफीन हमारे शरीर को और किन तरीकों से नुकसान पहुंचाता है, आइए विस्तार से जानते हैं।हार्ट हेल्थ को करता है प्रभावितडॉक्टर बताती हैं कि ज्यादा कैफीन लेने से दिल की धड़कनें तेज हो सकती हैं, कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। वहीं जिन लोगों को पहले से ही हार्ट से जुड़ी समस्याएं या हाई बी.पी है, उन्हें कैफीन कम मात्रा में लेना चाहिए।डाइजेशन पर असर डालता हैचाय, कॉफी या किसी भी रूप में लिया गया कैफीन पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। यहां तक कि अगर आप ज्यादा मात्रा में कैफीन का इनटेक कर लेते हैं तो पेट में एसिड बनने लगता है, जिससे एसिडिटी, सीने में जलन, गैस और इंडाइजेशन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुछ लोगों में बार-बार कैफीन लेने से पेट खराब या दस्त की शिकायत भी हो सकती है।अधिक कैफीन से बढ़ सकती है घबराहट और बेचैनीभले ही कैफीन लेने से फोकस बढ़ता है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है। जैसे घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, हाथ कांपना और एंग्जायटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं सेंसिटिव लोगों में इससे पैनिक अटैक के लक्षण बढ़ने की संभावना हो सकती है। इसके अलावा शरीर धीरे-धीरे कैफीन का आदी हो सकता है।बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती हैकैफीन शरीर में डाइयूरेटिक की तरह काम करता है, जिससे बार-बार पेशाब आ सकती है। अगर कैफीन लेने के बाद आप जरूरी मात्रा में पानी नहीं पीते हैं तो बॉडी में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। खासकर हम गर्भवती महिलाओं को कैफीन का सेवन सीमित रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि अत्यधिक कैफीन भ्रूण के विकास पर प्रभाव डाल सकता है।कितना कैफीन लेना सुरक्षित है?हेल्दी वयस्कों के लिए रोजाना लगभग 400 मिलीग्राम तक कैफीन का सेवन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। आसान भाषा में समझें तो यह लगभग 3–4 कप कॉफी के बराबर हो सकता है। हालांकि हर किसी के लिए कैफीन की यह मात्रा व्यक्ति की उम्र और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हार्ट पेशेंट्स को सावधानी बरतनी चाहिए।
- प्रोटीन हमारे शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है। यह शरीर की वृद्धि, मांसपेशियों को मजबूत बनाने, टिश्यू को रिपेयर करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए बहुत जरूरी है। अक्सर यह माना जाता है कि सिर्फ अंडे, मांस या डेयरी प्रोडक्ट्स ही प्रोटीन का अच्छा सोर्स हैं, लेकिन शाकाहारी लोग भी सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर अपनी डाइट में हाई क्वालिटी प्रोटीन शामिल कर सकते हैं। अनाज और दालों का सही मेल शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी करने के साथ जरूरी अमीनो एसिड देने में मदद करता है, जिसे कम्प्लीट प्रोटीन कहा जाता है। प्रोटीन अमीनो एसिड से मिलकर बनता है, जिनमें से कुछ खुद नहीं बनते हैं। इसलिए, इन्हें फूड्स से पाना जरूरी है। ज्यादातर दालें और अनाज अपने आप में सभी जरूर अमीनो एसिड पर्याप्त मात्रा में नहीं देते हैं, लेकिन जब इन्हें एक साथ खाया जाता है तो वे एक दूसरे की कमी पूरी कर सकते हैं।अनाज और दालों को एक साथ खाना क्यों फायदेमंद है?अनाज जैसे गेहूं, चावल, बाजरा और ज्वार में लाइसिन कम मात्रा में पाया जाता है, जबकि दालों में इसकी मात्रा काफी अच्छी पाई जाती है। वहीं दूसरी ओर, दालों में मेथियोनिन जरूरी मात्रा से कम होता है, जो अनाज में अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसलिए, इन दोनों का मिश्रण कम्प्लीट प्रोटीन माना जाता है।अनाज और दाल मिलाकर कम्प्लीट प्रोटीन कैसे बनाएं?भारत के फूड्स अनाज और दालों का बेहतरीन मेल होते हैं। यह कॉम्बिनेशन शरीर को जरूरी अमीनो एसिड का बेहतर संतुलन देने में मदद करता है। इसलिए, आप इन कॉम्बिनेशन को ट्राई कर सकते हैं-1. दाल और चावलदाल और चावल भारतीय घरों का सबसे आम और कंफर्टिंग फूड माना जाता है। चावल में लाइसिन की मात्रा कम होती है, जबकि दालें इसकी कमी को पूरा करने का काम करती हैं। वहीं, दालों में मेथियोनिन कम होता है, जो चावल से मिल जाता है। इसलिए, यह एक संतुलित प्रोटीन कॉम्बिनेशन माना जाता है।2. राजमा-चावलराजमा प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं, जबकि चावल इसके साथ मिलकरप प्रोटीन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी काफी मददगार है।3. खिचड़ीमूंग दाल और चावल से बनी खिचड़ी हल्की, आसानी से पचने वाली औऱ पौष्टिक होती है। बीमारी के दौरान भी इसे खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह शरीर को एनर्जी देने और प्रोटीन की कमी को दूर करने में मदद करती है।4. इडली और सांभरइडली और संभार हल्का और आसानी से पचने वाला फूड माना जाता है, जिसे अक्सर लोग ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर किसी भी समय अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह कम्प्लीट प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। इडली चावल और उड़द दाल से तैयार की जाती है, जबकि सांभर में भी दाल का इस्तेमाल होता है। यह मिश्रण प्रोटीन के साथ विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होता है।5. रोटी और दालगेंहू की रोटी के साथ अरहर, मसूर, मूंग या चना दाल का सेवन उत्तर भारत का एक ट्रेडिशनल फूड है। यह न सिर्फ पेट को देर तक हुआ महसूस कराने में मदद करता है, बल्कि शरीर को जरूरी अमीनो एसिड का अच्छा संतुलन भी होता है।6. बाजरे या ज्वार की रोटी और दालबाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज फाइबर, आयरन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। जब इन्हें दाल के साथ मिलाकर खाया जाता है तो भोजन की प्रोटीन क्वालिटी और पोषक तत्व दोनों बढ़ जाते हैं।निष्कर्षनॉनवेज फूड्स के अलावा शाकाहारी भोजन से भी आप पर्याप्त मात्रा में और अच्छी क्वालिटी वाला प्रोटीन पा सकते हैं। अनाज और दालों का सही कॉम्बिनेशन शरीर को जरूरी अमीनो एसिड देने में मदद करता है और संतुलित पोषण देता है। दाल-चावल, खिचड़ी, राजमा-चावल, इडली-सांभर और रोटी-दाल जैसे फूड्स न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि प्रोटीन की गुणवत्ता बढ़ाने का भी एक अच्छा सोर्स है।
- बदलते मौसम, वायरल इंफेक्शन और मौसमी संक्रमण के कारण बुखार होना एक आम समस्या है। अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर घरेलू इलाज या खुद से दवाइयों के सहारे ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हर बुखार साधारण नहीं होता, कुछ स्थितियों में यह गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।बुखार तब खतरनाक हो जाता है जब यह लंबे समय तक बना रहे, बहुत अधिक तापमान तक पहुंच जाए या इसके साथ अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें। सही समय पर डॉक्टर से सलाह न लेने पर स्थिति बिगड़ सकती है और संक्रमण शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि बुखार कब सामान्य है और कब तुरंत अस्पताल जाने की आवश्यकता है। आइए समझते हैं ऐसे संकेत जिनमें देरी करना आपकी सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।3 दिन से ज्यादा बुखार रहनाअगर बुखार 2 से 3 दिनों में ठीक नहीं हो रहा है और लगातार बना हुआ है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।सामान्य वायरल बुखार अक्सर 2–3 दिनों में कम हो जाता है।अगर इससे ज्यादा समय तक बुखार बना रहे तो यह किसी बैक्टीरियल इंफेक्शन, डेंगू, मलेरिया या अन्य गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है ताकि सही कारण का पता चल सके और समय पर इलाज शुरू किया जा सके।बहुत तेज बुखार (102°F से ऊपर)जब शरीर का तापमान 102°F या उससे अधिक हो जाता है और दवाइयों के बाद भी कम नहीं होता, तो यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है।तेज बुखार शरीर के अंदर गंभीर संक्रमण का संकेत देता है।लगातार उच्च तापमान से शरीर में डिहाइड्रेशन और कमजोरी बढ़ सकती है, इसलिए तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।सांस लेने में दिक्कत--अगर बुखार के साथ सांस फूलने लगे, छाती में दर्द हो या सांस लेने में परेशानी हो, तो यह एक गंभीर संकेत हो सकता है।यह स्थिति फेफड़ों के संक्रमण या अन्य गंभीर बीमारियों की ओर इशारा कर सकती है।ऐसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए अस्पताल जाना चाहिए।लगातार कमजोरी और चक्कर--बुखार के दौरान हल्की कमजोरी सामान्य है, लेकिन अगर मरीज को लगातार चक्कर आ रहे हों, बहुत ज्यादा थकान हो या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो यह खतरनाक हो सकता है।यह शरीर में पानी की कमी, लो ब्लड प्रेशर या गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।अस्पताल कब जाना चाहिए--बुखार 3 दिन से ज्यादा रहेदवा से आराम न मिलेबच्चे, बुजुर्ग या गर्भवती महिला को तेज बुखार होशरीर में रैश, दर्द या गंभीर लक्षण दिखेंमरीज की हालत तेजी से खराब हो रही हो
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बारिश के मौसम में कई बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर डाइजेस्टिव सिस्टम पर ज्यादा दबाव भी पड़ सकता है। कई बार तो लोग सुबह पेट से जुड़ी कई समस्याएं जैसे ब्लोटिंग, अपच और पेट साफ न होने और दर्द का सामना करते हैं। जिसका एक मुख्य कारण मौसमी बदलाव में गलत सब्जियां खाना है। आइए इन सब्जियों के बारे में जानते हैं।
हरी पालक, मेथी, सरसोंबारिश के इस मौसम में आपको पालक, सरसों, मेथी, चौलई आदि पत्तेदार सब्जियां अक्सर पसंद की जाती हैं और खाई जाती हैं। लेकिन इनमें मिट्टी, कीड़े और माइक्रोऑर्गेनिज्म के मिलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि अगर आप इन्हें खा रहे हैं तो सही तरीके से साफ करते खाएं वरना संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं इन पत्तेदार सब्जियों को रात के समय खाने से कुछ लोगों का डाइजेशन स्लो हो सकता है।फूलगोभी खाने से बचेंवैसे तो फूलगोभी में फाइबर और कुछ जटिल कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जिन्हें पचाने में समय लग सकता है। ऐसे में अगर आप रात को इसका सेवन करते हैं तो खाने के बाद या सुबह तक आपको अपना पेट फूला-फूला सा, गैस और भारीपन सा महसूस हो सकता है। गोभी में कीड़े भी हो सकते हैं, इसलिए अगर आपको पहले से ही गैस या अपच की समस्या रहती है, तो इसे मानसून में रात के समय खाने से बचें और अगर खा रहे हैं तो थोड़ा सीमित मात्रा में लेना ही बेहतर है।पत्तागोभी खाने से हो सकती है ये समस्यापत्तागोभी भी गैस बनाने वाली सब्जियों में गिनी जाती है। इसमें रैफिनोज नाम का एक कार्बोहाइड्रेट और हाई फाइबर होता है, जिसे पचाने में हमारे पेट को थोड़ी दिक्कत हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि सुबह या दिन में ही पत्तागोभी की सब्जी खा लें और रात को खाने से बचें। थोड़ी सी भी चूक मानसून में आपको बीमार कर सकती है।सही तरीके से खाएं मशरूममशरूम बारिश के मौसम में अधिक होते हैं। नमी और उमस वाली जगहों पर पनपने के कारण यह जल्दी खराब भी हो जाते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि "यह पचाने के लिए यह थोड़े भारी होते हैं, जिन्हें पचाना हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए मुश्किल हो सकता है। इसलिए रात के समय मशरूम खाने से बचें और अलग खा रहे हैं तो अच्छे से साफ करके और पकाकर खाएं। उन्हें लंबे समय के लिए बचाकर न रखें। मार्केट के जब भी लाएं तो फ्रिज में स्टोर करके रखें, क्योंकि नॉर्मल टैम्प्रेटर में यह एक दिन में ही खराब हो जाते हैं।"कच्ची या आधी-पकी सब्जियां खाने से बचेंडॉक्टर मानसून में कच्ची सब्जियों और सलाद खाने को लेकर अधिक सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। नमी के कारण इन पर बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं। ऐसे में रात के समय कच्ची या आधी पकी हुई सब्जियां खाना पेट खराब कर सकता है, दस्त या इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है और पेट में दर्द भी पैदा कर सकता है। इसलिए मानसून में अच्छी तरह पकी हुई सब्जियां अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं।रात को खाने में क्या खाएं?मानसून में डिनर हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए। जैसे लौकी, तोरी, टिंडा, कद्दू और परवल। ये वह सब्जियां हैं तो बाकी सब्जियों की तुलना में पचाने में आसान होती हैं और सेहत के लिए फायेदमंद भी होती है। इसके अलावा बरसात के इन नमी वाले मौसम में खूब पानी पिएं, देर रात हेवी मील लेने से बचें और खाने के तुरंत बाद सोने की बजाय कुछ समय टहलें। ताकि पाचन बेहतर बने। - आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग दोपहर में थोड़ी देर की झपकी लेना पसंद करते हैं। दोपहर की थोड़ी देर की नींद कुछ लोगों को इतनी पसंद होती है कि मौका मिलते ही वह झपकी ले लेते हैं। कई लोगों का मानना है कि दोपहर में थोड़ी देर की नैप सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। आयुर्वेद में भी दोपहर में सोने को लेकर अलग राय देखने को मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना हर किसी के लिए सही नहीं होता है। यह व्यक्ति की प्रकृति, मौसम, स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए, आइए जानते हैं कि आयुर्वेक के अनुसार दिन में सोना किसके लिए सही और किसे लिए नुकसानदायक है?आयुर्वेद के अनुसार कुछ परिस्थितियों में दिन के समय आराम करना या थोड़ी देर सोना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। गर्मी के मौसम में शरीर में ड्राईनेस और थकान बढ़ सकती है। ऐसे में सीमित समय की झपकी शरीर को एनर्जी देने और संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, जो लोग ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करते हैं, नियमित रूप से सख्त एक्सरसाइज करते हैं या ट्रैवल के कारण थक जाते हैं, उनके लिए दिन में थोड़ी देर आराम करना फायदेमंद हो सकता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमारी से उबर रहे लोग और ज्यादा कमजोरी महसूस करने वाले लोग भी जरूरत पड़ने पर दोपहर में सोना सही माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति की रात की नींद पूरी नहीं हुई हो तो भी सीमित समय के लिए दोपहर में झपकी लेना शरीर को आराम दिला सकता है।किन लोगों को दिन में सोने से बचना चाहिए?आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा का कहना है कि आयुर्वेद के अनुसार हेल्दी व्यक्ति को नॉर्मल स्थिति में दिन में सोने से बचना चाहिए, खासकर सर्दियों और वसंत के मौसम में। इस समय शरीर में कफ दोष बढ़ा रहता है। दिन में सोने से कफ और ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे आलस, भारीपन, सुस्ती और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों की कफ प्रकृति होती है या जिन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम, वजन बढ़ना, सुस्ती या धीमा पाचन जैसी समस्याएं रहती हैं, उन्हें भी दिन में सोने से बचने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार दोपहर में भोजन करने के तुरंत बाद भी सोना सही नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।अगर दोपहर में सोना है तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा ने बताया कि अगर दिन में आराम करना जरूरी हो तो झपकी बहुत लंबी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, भोजन के तुरंत बाद सोने के स्थान पर कुछ समय का अंतर रखना बेहतर माना जाता है। अगर सिर्फ थकान महसूस हो रही है तो पूरी नींद लेने के बजाय कुछ देर योग निद्रा, मेडिटेशन या पैरों को दीवार पर टिकाकर आराम करने जैसे उपाय भी फायदेमंद हो सकते हैं। दोपहर में हल्की वॉक करने से भी शरीर में ताजगी महसूस हो सकती है।निष्कर्षआयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना न तो पूरी तरह अच्छा है और न ही पूरी तरह बुरा माना जाता है। इसका फायदा या नुकसान व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति, मौसम, उम्र और हेल्थ पर निर्भर करता है। अगर आप हेल्दी हैं और आपकी रात की नींद पूरी होती है तो नियमित रूप से दिन में सोने से बचना बेहतर माना जाता है। वहीं, गर्मी के मौसम, बीमारी, कमजोरी या ज्यादा थकान की स्थिति में सीमित समय तक आराम करना फायदेमंद हो सकता है।दोपहर को कितने घंटे सोना चाहिए?दोपहर में 10 से 20 मिनट की छोटी झपकी लेना सबसे अच्छा माना जाता है। यह समय दिमाग को आराम देने और एनर्जी वापस पाने के लिए काफी है, जिससे आप तरोताजा महसूस करते हैं।दोपहर में ज्यादा देर सोने के क्या नुकसान हैं?दोपहर में ज्यादा देर सोने से रात की नींद खराब होती है, जागने पर सुस्ती या चिड़चिड़ापन महसूस होता है और लंबे समय तक मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
- आज के समय में व्यस्त लाइफस्टाइल होने के कारण वजन कम करना किसी भी व्यक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। वजन घटाने के लिए पैदल चलना या वॉक करना सबसे आसान तरीका माना जाता है। किसी भी जिम में वर्कआउट करने या क्रैश डाइट फॉलो करने के मुकाबले रोज सुबह-शाम लोग टहलना ज्यादा पसंद करते हैं। हालांकि, फिटनेस की दुनिया में अक्सर यह बहस छिड़ी रहती है कि क्या सिर्फ कुछ किलोमीटर पैदल चलने से वजन कम किया जा सकता है। हां वजन कम करने के लिए रोजाना पैदल चलना जरूरी है, लेकिन सीमित मात्रा में। टहलना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है और वजन कम करने के लिए भी, लेकिन वजन घटाने के लिए इसे सही तरीके और सही उम्मीदों के साथ अपनाना जरूरी है।टहलना वजन घटाने में कैसे मदद करता है?रोजाना चलने से शरीर की कैलोरी बर्न होती है, जिससे धीरे-धीरे वजन कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, यह कमी बहुत तेज नहीं होती है। रोजाना 30 मिनट की तेज वॉक करने से औसतन 150 कैलोरी बर्न होती है, शरीर का वजन जितना ज्यादा होगा, कैलोरी उतनी ही ज्यादा खर्च भी होती है और चलने की गति बढ़ाने से कैलोरी खर्च में भी बढ़ोतरी होती है। साल 2022 में NCBI में Nutrients में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अगर आप रोज वॉक करने के साथ-साथ खाने में से 500 कैलोरी कम कर देते हैं, तो आप हर हफ्ते आधा किलो यानी महीने में 2 किलो तक सुरक्षित और परमानेंट वजन कम कर सकते हैं।क्या सिर्फ टहलना काफी है?ज्यादातर मामलों में सिर्फ टहलना पर्याप्त नहीं होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका वजन काफी ज्यादा है। टहलना वजन बढ़ने को रोकने और वजन को स्थिर बनाए रखने में बहुत कारगर है, लेकिन बड़े स्तर पर वजन घटाने के लिए इसके साथ खानपान में बदलाव जरूरी है।- कुछ स्थितियों में टहलने का असर कम दिखता है, जैसे--ज्यादा मोटापे में शरीर एक्सरसाइज के दौरान कम कैलोरी खर्च करता है।-धीमी या हल्की चाल से चलने पर शरीर को पर्याप्त तीव्रता नहीं मिल पाती है।-खानपान में बदलाव न करने पर असर सीमित रह जाता है।-ऐसी स्थितियों में टहलने के साथ हल्का स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या एक्सरसाइज जोड़ने से मांसपेशियां बनी रहती हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।टहलने के अन्य स्वास्थ्य फायदेचलने से सिर्फ वजन कम करने में मदद नहीं मिलती है, बल्कि ये हमारी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। टहलने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल होता है, ब्लड शुगर लेवल बेहतर होती है, तनाव और एंग्जायटी कम होती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।टहलना सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन वजन कम करने के लिए इसे अकेला उपाय मानना सही नहीं होगा। तेज चाल, नियमितता, संतुलित खानपान और जरूरत पड़ने पर हल्के एक्सरसाइज को साथ करने से वजन कम करना आसान हो सकता है।
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फल खाना लगभग हर एक सीजन में फायदेमंद होता है, लेकिन क्या कटे हुए फलों का सेवन करना बारिश में सुरक्षित होता है? हम में से कई लोगों को कटे हुए फल को खरीदकर खाना काफी सुलभ लग सकता है, लेकिन सेहत के लिहाज से यह हमेशा सुरक्षित नहीं होता। दरअसल, बरसात के सीजन में मौसम में नमी और गर्म वातावरण के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के तेजी से बढ़ने की संभावना होती है। इसी वजह से इस मौसम में फूडबोर्न इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जब फल काटा जाता है, तो उसकी बाहरी सुरक्षा परत यानि छिलके हट जाते हैं। ऐसे में इससे अंदर का हिस्सा सीधे हवा, धूल, हाथों और उपकरणों के संपर्क में आ जाता है। इस स्थिति में अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो कई तरह के बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, असुरक्षित भोजन हर साल करोड़ों लोगों को बीमार करता है और इसका बड़ा हिस्सा खराब हैंडलिंग और स्टोरेज से जुड़ा होता है।
मानसून में खतरा क्यों बढ़ जाता बैक्टीरिया पनपने का खतरा?बरसात में अन्य मौसम की तुलना में कटे हुे फलों में बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा रहता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे--हवा में नमी का ज्यादा होना।-तापमान 25–35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना, यह तापमान बैक्टीरिया ग्रोथ के लिए अच्छा होता है।-खुले में रखे फल जल्दी खराब होते हैं-मच्छर और धूल का काफी ज्यादा बढ़ना-CDC की रिपोर्ट के मुताबिक, फूड बोर्न जर्म्स कमरे के तापमान पर तेजी से मल्टीप्लाई करते हैं और कुछ ही घंटों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं।- कटे हुए फल तभी सुरक्षित हैं, जब आप कुछ बातों पर ध्यान देकर खाते हैं, जैसे--साफ पानी और सैनिटाइज टूल्स से तैयार किया गया हो।-ठंडे तापमान यानि 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे में फल रखा गया हो-खुले में लंबे समय तक न रखा गया हो-बिना हाथों के सीधे संपर्क के पैक किया गया हो।-अगर फल पर चिपचिपापन, बदबू या रंग बदलना दिखे, तो उसे तुरंत नहीं खाना चाहिए।-: मानसून में कटे हुए फल आपके काम को जरूर आसान बना देते हैं, लेकिन हाइजीन में थोड़ी भी लापरवाही हेल्थ रिस्क बढ़ा सकती है। इसलिए जब भी शक हो, पूरा और ताजा फल ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। - जामुन एक ऐसा मौसमी फल है जिसे न केवल इसके स्वाद के लिए पसंद किया जाता है, बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी इसे खास स्थान प्राप्त है। यह फल गर्मियों और बरसात के मौसम में आसानी से उपलब्ध होता है और शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है। जामुन में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र यानी डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाने, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी भी हेल्दी फूड की तरह जामुन का सेवन भी सही मात्रा में करना बेहद जरूरी है।1 दिन में कितने जामुन खाने चाहिए?जामुन खाने की सही मात्रा हर व्यक्ति के लिए अलग होती है। यदि किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति यानी अग्नि बहुत मजबूत है और वह शारीरिक रूप से भी स्वस्थ और एक्टिव है, तो वह एक बार में ज्यादा जामुन खा सकता है। ऐसे लोग लगभग 20 से 30 जामुन तक एक दिन में आराम से खा सकते हैं। वहीं, जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती है या जिन्हें बार-बार गैस, अपच या भारीपन की समस्या रहती है, उन्हें सीमित मात्रा में जामुन खाना चाहिए। जामुन खाने की मात्रा केवल उम्र या ताकत पर ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करती है। जो लोग नियमित एक्सरसाइज करते हैं, समय पर भोजन लेते हैं और जिनकी दिनचर्या संतुलित होती है, उनकी पाचन क्षमता बेहतर होती है। ऐसे लोग ज्यादा जामुन खा सकते हैं। वहीं, अनियमित लाइफस्टाइल, कम फिजिकल एक्टिविटी और गलत खानपान वाले लोगों को जामुन सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।कमजोर पाचन और अलग-अलग आयु वर्ग के लिए मात्राजिन लोगों की अग्नि कमजोर है, उनके लिए जामुन का सेवन 5 से 10 जामुन तक सीमित रखना चाहिए। यह मात्रा डाइजेस्टिव सिस्टम पर ज्यादा दबाव नहीं डालती और शरीर इसे आसानी से पचा सकता है। बच्चों के लिए 10 से 12 जामुन तक का सेवन सामान्य माना जाता है, जबकि बुजुर्गों के लिए भी लगभग यही सीमा उपयुक्त रहती है। वयस्क व्यक्ति, जिनका स्वास्थ्य सामान्य है, वे 20 जामुन तक खा सकते हैं, लेकिन यह संख्या भी उनकी दिनचर्या, व्यायाम और पाचन क्षमता पर निर्भर करती है।ज्यादा जामुन खाने के नुकसानजामुन सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका ज्यादा सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। ज्यादा जामुन खाने से कुछ लोगों को पेट दर्द, गैस, अपच या भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमजोर पाचन वाले लोगों में यह समस्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा ज्यादा मात्रा में सेवन करने से शरीर में असंतुलन भी हो सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।आयुर्वेद के अनुसार जामुन का सेवन व्यक्ति की पाचन शक्ति, उम्र और जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। मजबूत पाचन वाले लोग 20 से 30 जामुन तक खा सकते हैं, जबकि कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए 5 से 10 जामुन पर्याप्त हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सीमित मात्रा सुरक्षित मानी जाती है। ज्यादा जामुन खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इसका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में और शरीर की क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
- वजन घटाने के दौरान लोग अक्सर ऐसी चीजों की तलाश में रहते हैं जो कम कैलोरी वाली होने के साथ-साथ पेट भी भरें और शरीर को पोषण भी मिले। फलों को हमेशा से हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाता है, लेकिन जब बात वेट लॉस की आती है तो कई लोग यह जानना चाहते हैं कि पपीता और तरबूज में से कौन सा फल ज्यादा फायदेमंद है। दोनों ही फल स्वादिष्ट, पौष्टिक हैं, लेकिन इनके गुण एक-दूसरे से काफी अलग हैं।वजन घटाने में किसी एक फूड की बजाय पूरा खानपान और लाइफस्टाइल अहम भूमिका निभाती है। पपीता और तरबूज दोनों ही हेल्दी डाइट का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन इनके गुण अलग-अलग हैं, इसलिए चुनाव व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। अगर वजन घटाने के दौरान लक्ष्य लंबे समय तक पेट भरा रखना और भूख को कंट्रोल करना है, तो पपीता थोड़ा बेहतर विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा होता है। वहीं, यदि आप कम कैलोरी में ज्यादा मात्रा में फल खाना चाहते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखना चाहते हैं, तो तरबूज एक बेहतरीन विकल्प है। जिन लोगों को बार-बार भूख लगती है या जो अपनी क्रेविंग्स को कंट्रोल करना चाहते हैं, उनके लिए पपीता एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसे सुबह के नाश्ते या शाम के स्नैक के रूप में शामिल किया जा सकता है। वहीं जो लोग वजन कम करते समय बार-बार कुछ खाने की इच्छा महसूस करते हैं, वे तरबूज को हेल्दी स्नैक के रूप में चुन सकते हैं।कोई भी एक फल अपने आप वजन कम नहीं कर सकता। वेट लॉस के लिए कैलोरी डेफिसिट, बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज और अच्छी लाइफस्टाइल जरूरी है। पपीता और तरबूज दोनों ही पोषण से भरपूर हैं और सही मात्रा में सेवन करने पर वेट मैनेजमेंट में मदद कर सकते हैं। इसलिए किसी एक फल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी डाइट में कई तरह के फलों को शामिल करें, पोर्शन कंट्रोल का ध्यान रखें और नियमित फिजिकल एक्टिविटी को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं।निष्कर्षवजन घटाने के लिए पपीता और तरबूज दोनों ही फल अच्छे हैं, पपीता लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जबकि तरबूज अपनी हाइड्रेशन बनाए रखने और भूख को कंट्रोल करने में सहायक हो सकता है। किसी एक फल को वेट लॉस का सबसे अच्छा विकल्प कहना सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों के अपने-अपने फायदे हैं।
- आयुर्वेद में हल्दी को एक खास औषधि की तरह देखा जाता है। इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसमें पाया जाने वाला एक्टिव कंपाउंड करक्यूमिन (Curcumin)। यही तत्व हल्दी को उसका चमकीला पीला रंग देता है और कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। आधुनिक शोधों में भी करक्यूमिन की एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी सपोर्ट करने वाली खूबियों पर ध्यान दिया गया है। आइए जानते हैं कि करक्यूमिन को इतना खास क्यों माना जाता है और यह शरीर को किस तरह फायदा पहुंचा सकता है?हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंंद है करक्यूमिनकुछ अध्ययनों में पाया गया है कि करक्यूमिन हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंंद है। साल 2025 में Food And Chemical Toxicology नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, करक्यूमिन धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है जिससे धमनियांं सख्त नहीं होतींं। साथ ही यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है।इम्यूनिटी मजबूत होती हैहल्दी में मौजूद करक्यूमिन इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह इम्यूनिटी सेल्स की कार्यप्रणाली को संतुलित करने में मदद करता है। इसलिए हल्दी को हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाया जाता है ताकि सेहत अच्छी रहे।सूजन कम करने में मदद मिलती हैकरक्यूमिन में एंंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। जोड़ों की समस्या या त्वचा रोग में हल्दी को बहुत उपयोगी माना जाता है।फ्री रेडिकल्स से बचाता है करक्यूमिनहमारे शरीर में रोजाना फ्री रेडिकल्स बनते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह नुकसान समय के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। करक्यूमिन एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, जो फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।करक्यूमिन का सेवन कैसे करें?हल्दी को भोजन में शामिल करने का सबसे आसान तरीका है कि आप इसे दाल, सब्जी, सूप या दूध में मिला सकते हैं। हालांकि करक्यूमिन की शरीर में एब्जॉर्ब होने की क्षमता सीमित होती है, लेकिन फिर भी एक्सपर्ट इसे हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं।सेहत के लिए हल्दी के नुकसान क्या हैं?जरूरत से ज्यादा मात्रा में हल्दी लेने से पेट में गड़बड़ी, मतली, दस्त या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- आजकल लोगों का खानपान काफी खराब होता जा रहा है, जिसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। देखा जा रहा है कि लोगों को अक्सर खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट में दर्द और यहां तक कि सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। सही आहार, नियमित दिनचर्या और कुछ आसान उपायों से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। लेकिन कुछ आसान और घरेलू ड्रिंक्स आपकी इस परेशानी को कम कर सकते हैं, जिनके बारे में हम आपको कुछ खास होममेड ड्रिंक्स के खास फायदों के बारे में बताने वाले हैं।गुनगुना नींबू पानीअगर आप सुबह हल्का गुनगुना पानी नहीं पीते हैं तो आज से ही पीना शुरू कर दीजिए। नींबू पानी पीने के फायदे आमतौर पर पाचन क्रिया को अच्छा बनाने के लिए सबसे ज्यादा होते हैं। क्योंकि हल्का गुनगुना और नींबू वाला पानी पाचन तंत्र को सक्रिय करने में बेहद असरदार होता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर को डिटॉक्स करते हैं और गैस व एसिडिटी को कम कर देते हैं। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पेट हल्का रहता है और सूजन में राहत मिलती है।अदरक का पानीअदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह दोनों की तत्व पेट की सूजन और गैस को कम करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अदरक का पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और भोजन भी आसानी से पच जाता है। यह मतली और भारीपन की समस्या को भी दूर करने में मददगार साबित होता है।जीरा वॉटरजीरा पाचन के लिए बहुत फायदेमंद है। ऐसे में जीरा वॉटर पेट में गैस बनने की समस्या को कम कर सकता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे पेट की सूजन और अपच में राहत मिलती है। अगर आप चाहें तो सुबह भी जीरे का पानी पी सकते हैं क्योंकि खाली पेट जीरे का पानी पीने के फायदे भी कई अलग-अलग हो सकते हैं।अजवाइन का पानीअजवाइन का पानी भी पेट की गैस और सूजन से राहत दिलाता है। इसमें थाइमोल नामक तत्व होता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत करता है। अजवाइन का पानी गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग से तुरंत राहत दिलाता है। अगर आप हैवी डाइट लेते हैं को उसके बाद इसे पीना बहुत लाभकारी साबित होता है।शहद व पुदीने वाला पानीशहद और पुदीने का पानी स्वादिष्ट होने के साथ ही पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है। पुदीना पेट को ठंडक देता है और पेट की जलन व सूजन को कम करने का काम करता है, जबकि शहद पाचन को सुधारता है। इन दोनों का मिश्रण गैस और ब्लोटिंग से राहत दिलाने का काम करता है। साथ ही शरीर को ताजगी भी देता है।
- 0- निखरी-साफ त्वचा के लिए करें इस्तेमाल, कंटेंट क्रिएटर रावत ने बताया तरीकाचेहरा चमकाने के लिए हम अपनी स्किन पर फेस वॉश, क्रीम और सीरम समेत ना जाने क्या-क्या लगाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इससे त्वचा को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है? इस स्थिति से बचने के लिए आप चेहरे पर कंटेंट क्रिएटर शेफ रावत के बताए नीम की पत्तियों वाले घरेलू नुस्खे को अपना सकते हैं। इससे चेहरे की त्वचा साफ हो सकती है और मुंहासे जैसी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है।आमतौर पर चेहरा साफ करने के लिए लोग बाजार में बिकने वाले प्रोडक्ट्स और दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि ये तरीके चाहे कितने ही कारगर क्यों ना नजर आते हो। मगर इनसे लॉन्ग टर्म में त्वचा को नुकसान ही हो सकता है। अगर आप इस स्थिति से बचना चाहते हैं, तो नीम का घरेलू नुस्खा त्वचा के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है।चेहरा साफ क्यों नहीं दिखता है?प्रदूषणधूल-मिट्टीबंद पोर्सएक्स्ट्रा ऑयल प्रोडक्शनजैसे कई कारण शामिल हैं। कई मामलों में लोगों के चेहरे का कालापन मेकअप नहीं हटाने और सही तरह से स्किन केयर पर ध्यान नहीं देने की वजह से होता है।साफ त्वचा के लिए नुस्खाकंटेंट क्रिएटर शेफ रावत ने एक इंस्टाग्राम वीडियो बनाई है। इस वीडियो में उन्होंने त्वचा को साफ करने वाले 2 बहुत ही बेहतरीन नुस्खों के बारे में बताया है। ये नुस्खे त्वचा को साफ करने के लिए नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं। यहां हम आपको नीम की पत्तियां इस्तेमाल करने के दो तरीके बताएंगे, जिनसे असल में त्वचा को लाभ हो सकता है। आइए अब दोनों नुस्खे जान लेते हैं।नीम की स्टीम के फायदेइसके लिए आपको एक कटोरे में पानी गर्म कर लेना है। इसमें नीम की पत्तियां डालें और कुछ देर उबाल लें। आपको टॉवल की मदद से चेहरे पर नीम की भाप लेनी है। बता दें कि नीम के पत्तों की भाप लेने से त्वचा और सांस दोनों को बहुत फायदा होगा। ये एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंहासे कम करने, स्किन पोर्स को गहराई से साफ करने, त्वचा की जलन शांत करने, बंद नाक खोलने और सांस की समस्या से राहत दिलाने में मददगार है।नीम की स्टीम के फायदेइसके लिए आपको एक कटोरे में पानी गर्म कर लेना है। इसमें नीम की पत्तियां डालें और कुछ देर उबाल लें। आपको टॉवल की मदद से चेहरे पर नीम की भाप लेनी है। बता दें कि नीम के पत्तों की भाप लेने से त्वचा और सांस दोनों को बहुत फायदा होगा। ये एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण मुंहासे कम करने, स्किन पोर्स को गहराई से साफ करने, त्वचा की जलन शांत करने, बंद नाक खोलने और सांस की समस्या से राहत दिलाने में मददगार है।नीम के त्वचा को फायदेबता दें कि नीम त्वचा के लिए नेचुरल उपाय है, जो अपने एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण मुंहासे, दाग-धब्बों और संक्रमण को कम कर सकता है। ये त्वचा को गहराई से साफ कर, सूजन को कम करने, एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करने और रंगत सुधारने में मदद करती है।--
- बच्चे बार-बार कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह संतुलित और फाइबर से भरपूर डाइट न लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी होती है। हालांकि यह समस्या आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर बच्चे को बेचैनी, चिड़चिड़ापन और भूख कम लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे शुरुआत से ही बच्चों में हेल्दी आदतें विकसित करें, जैसे समय पर खाना खाना और रोजाना शारीरिक गतिविधि करना, जिससे उनकी पाचन बेहतर बना रहे।कब्ज के लक्षणों में आमतौर पर पॉटी का अनियमित होना, सख्त या सूखी पॉटी आना और पॉटी करते समय दर्द या परेशानी होना शामिल है। बच्चों को पेट दर्द, पेट फूलना या पेट ठीक से साफ न होने जैसा महसूस हो सकता है। कुछ बच्चे दर्द के डर से वॉशरूम जाने से बचते हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। वहीं, गंभीर मामलों में भूख कम लगना या थोड़ा-थोड़ा पॉटी लीकेज जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।कब्ज से बचाने के लिए पेरेंट्स को बच्चों की डाइट का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्हें संतुलित और फाइबर से भरपूर खाना देना जरूरी है। इसके लिए ओट्स, ब्राउन राइस और गेहूं जैसे साबुत अनाज रोज के आहार में शामिल करें। साथ ही पपीता, सेब (छिलके सहित), नाशपाती और केला जैसे फल भी दें, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, पालक, गाजर और बीन्स जैसी हरी सब्जियां भी बच्चों के पाचन के लिए फायदेमंद होती हैं। दही जैसे प्रोबायोटिक फूड आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे पाचन मजबूत होता है।साथ ही, बच्चों को दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और पॉटी नरम बनी रहे।कब्ज बढ़ाने वाले किन फूड्स से रहें दूर-तले-भुने खाने, रिफाइंड आटा, चॉकलेट, कैफीनयुक्त ड्रिंक्स और पैकेटबंद स्नैक्स का ज्यादा सेवन करने से बचें, क्योंकि ये कब्ज के साथ-साथ एसिडिटी को भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बच्चों को इन चीजों का सेवन कम से कम कराएं और उनकी डाइट में हेल्दी विकल्प शामिल करें।कब्ज से बचाव के एक्टिविटी जरूरी -पाचन को स्वस्थ रखने में फिजिकल एक्टिविटी अहम भूमिका निभाती है। नियमित मूवमेंट से आंतें बेहतर तरीके से काम करती हैं, जिससे खाना आसानी से पचता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को दौड़ने, साइकिल चलाने, बाहर खेलने या हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें, जिससे पेट की समस्याएं कम हो सकें। वहीं, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से कब्ज और आंतों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, इसलिए इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।ये उपाय भी आएंगे काम-बच्चों को समय पर भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करें और खाना छोड़ने की आदत से बचाएं। इसके अलावा, उन्हें धीरे-धीरे खाना खाने और भोजन को अच्छी तरह चबाने की आदत सिखाएं। इसके साथ ही, नियमित समय पर टॉयलेट जाने की आदत विकसित करना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नींद की कमी पाचन और मेटाबॉलिज्म दोनों को प्रभावित कर सकती है। स्क्रीन टाइम सीमित करें और बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।डॉक्टर से जरूर सलाह लें-अगर कब्ज दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, बच्चे को तेज पेट दर्द, उल्टी, पॉटी में खून या वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।पेरेंट्स ध्यान रखें ये बात:बच्चों को कब्ज से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि पेरेंट्स को उनकी दिनचर्या को ठीक रखें। उन्हें समय पर खाना खिलाएं, पर्याप्त पानी पिलाएं और रोज एक्टिविटी करने की आदत डालें। इन आदतों को बचपन से अपनाने से पाचन बेहतर रहता है। ध्यान रखें कि दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय शुरू से ही अच्छी आदतें डालना सबसे आसान और असरदार तरीका है।--
- 0- पानी में 3 चीजों को मिलाकर पैरों को भिगोएंबॉडी के टॉक्सिंस निकालने के लिए डिटॉक्स ड्रिंक पीने के बारे में तो कई बार सुना होगा। लेकिन क्या कभी सुना है पैरों को अगर खास तरह के मिक्सचर में डुबोया जाए तो ये शरीर में जमा टॉक्सिंस को निकालने में मदद करेंगे। पैरों के पोर्स ब्लड वेसल्स खुलते हैं। जिससे खास इंग्रीडिएंट्स शरीर में घुल रहे टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद मिलती है। हेल्थ कोच शिवांगी देसाई ने शरीर को टॉक्सिन फ्री बनाने के लिए डिटॉक्स करने का तरीका शेयर किया है। जिसकी मदद से बॉडी के साथ माइंड को हील करने का भी मौका मिलता है। हेल्थ कोच ने बताया कि 20 मिनट गुनगुने पानी में 3 चीजों को मिलाकर पैरों को भिगोने से बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है। जानें क्या हैं वो 3 चीज और किस तरह से बॉडी डिटॉक्स में हेल्प करेंगी।पानी में इन चीजों को मिलाकर पैरों को भिगोएंपैरों को मात्र 20 मिनट अगर गुनगुने पानी में भिगोया जाए तो इससे बॉडी डिटॉक्स होगी। गुनगुने पानी में ये 3 चीजों को मिलाएं।गुनगुना पानीएप्सम सॉल्टएप्पल साइडर विनेगररोजमेरी या लेवेंडर या अदरक (जो उपलब्ध हो)गर्म पानी में एक कप एप्सम सॉल्ट डालें। साथ ही एप्पल साइडर विनेगर आधा कप डालकर पैरों को करीब 20 मिनट तक भिगोएं। इस पानी में अदरक के टुकड़े डाल दें। अगर हो सके तो रोजमेरी या लेवेंडर भी डाल सकते हैं।कैसे काम करता है ये तरीकागर्म पानी में पैरों को भिगोने से पैर के पोर्स ओपन होते हैं। जिससे लिम्फ एक्टिवेट होते हैं।वहीं एप्सम सॉल्ट को जब पानी में डालकर उसमे पैरों को भिगोते हैं तो एप्सम में मौजूद मैग्नीशियम शरीर से हैवी मेटल्स को बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही शरीर में हो रही इंफ्लेमेशन को भी कम करता है।पानी में साथ में जब एप्पल साइडर विनेगर को डालते हैं तो ये स्किन के पीएच लेवल को बैलेंस करने में मदद करता है। साथ ही टॉक्सिंस को निकालता है। टिश्यू में फंसे टॉक्सिन को लूज करता है। जिससे वो बाहर निकल सकें।जब इस पानी में एप्सम सॉल्ट के साथ रोजमेरी, लैवेंडर या फिर अदरक के टुकड़े डालते हैं तो इससे ब्लड सर्कुलेशन को रेगुलेट करता है। जो लिम्फ रुके हुए होते हैं उन्हें मूव करने में हेल्प करता है।इस प्रोसेस से बॉडी रिलैक्स होने के साथ डिटॉक्स भी होती है। साथ ही माइंड को फील होता है कि वो खुद की केयर कर रहा है।--
- सिर में दर्द होना बहुत आम समस्या है, पर हर सिरदर्द आम हो ये जरूरी नहीं है। कुछ प्रकार का सिरदर्द, माइग्रेन हो सकता है। सिर के एक हिस्से तेज दर्द, आंखों में चुभन हो, तेज रोशनी बर्दाश्त न होने के साथ मितली जैसा महसूस होना माइग्रेन का संकेत हो सकता है। माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, बढ़ता स्क्रीन टाइम, नींद की कमी, खराब खानपान और लगातार तनाव जैसी स्थितियों ने माइग्रेन की समस्या बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ माइग्रेन को न्यूरोलॉजिकल या साइकोसोमेटिक समस्या मानते हैं। माइग्रेन का दर्द कई घंटों से लेकर 2-3 दिन तक भी रह सकता है।विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके कारणों को समझना जरूरी है। वहीं आपको अगर माइग्रेन की दिक्कत है तो इसे ट्रिगर करने वाली स्थितियों से बचाव जरूरी है। क्या आपको भी थोड़ी देर धूप में रहने से माइग्रेन हो जाता है?माइग्रेन की समस्या के बारे में जान लीजिए---स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दिमाग की नसों, केमिकल्स और नर्व सिग्नल्स में असामान्य बदलाव होने लगते हैं।माइग्रेन के लिए आनुवंशिक कारकों, मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक परिवर्तन और पर्यावरणीय कारणों को जिम्मेदार माना जाता है।परिवार में किसी को माइग्रेन है तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है।कुछ प्रकार के हार्मोनल बदलाव, खासकर महिलाओं में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के दौरान माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।बहुत ज्यादा तनाव लेना, नींद पूरी न होना, बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम, शरीर में पानी की कमी और अनियमित खानपान माइग्रेन का कारण बन सकता है।माइग्रेन के दौरान व्यक्ति को रोशनी, आवाज और गंध के प्रति अधिक संवेदनशीलता हो जाती है।धूप में हो सकता है माइग्रेन अटैक--स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूप को माइग्रेन का एक बहुत आम ट्रिगर माना जाती है। तेज धूप या बहुत अधिक चमकदार रोशनी आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे ब्रेन की संवेदनशील नसें एक्टिव हो जाती हैं और माइग्रेन अटैक हो सकता है। माइग्रेन के शिकार लोगों में 'फोटोफोबिया' (प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता) की समस्या बहुत आम है।माइग्रेन से पीड़ित लोगों का नर्वस सिस्टम सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए तेज रोशनी उनके लिए परेशानी पैदा कर सकती है।गर्मियों में तेज धूप के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन भी हो सकता है जिसे पहले से माइग्रेन को ट्रिगर करने वाला बड़ा कारण माना जाता रहा है।धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स फैलती हैं और माइग्रेन दर्द बढ़ सकता है।माइग्रेन से बचाव कैसे करें?माइग्रेन से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने ट्रिगर्स को पहचाने और इससे बचाव करते रहें। अगर धूप से माइग्रेन बढ़ता है तो बाहर निकलते समय सनग्लासेस पहनें, छाता इस्तेमाल करें और सिर को ढककर रखें ताकि तेज रोशनी सीधे आंखों पर न पड़े।शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना चाहिए।नींद का एक नियमित शेड्यूल बनाना चाहिए क्योंकि पर्याप्त और तय समय पर नींद लेने से माइग्रेन का खतरा कम होता है।तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने वाली एक्सरसाइज फायदेमंद मानी जाती हैं।खानपान समय पर करें और लंबे समय तक खाली पेट न रहें, क्योंकि भूख माइग्रेन ट्रिगर कर सकती है।अगर माइग्रेन बार-बार हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह से दवाइयां ले सकते हैं।--











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