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   बीते सप्ताह सरसों में गिरावट, सोयाबीन तेल और पाम-पामोलीन में सुधार

नयी दिल्ली।  बीते सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजारों में ऊंचे भाव पर लिवाली प्रभावित रहने से सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई जबकि साधारण मांग के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन, सटोरियों द्वारा ऊंचा दाम बोले जाने से कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल में सुधार आया। नमकीन बनाने वाली कंपनियों की फुल्की फुल्की मांग के कारण बिनौला तेल के दाम में भी मामूली सुधार रहा। सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम अपरिवर्तित रहे। बाजार सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से सरसों की बिकवाली की जा रही है जो एक उचित कदम है। क्योंकि सरसों का स्टॉक किसानों, सरकारी संस्थाओं और स्टॉकिस्टों के पास बचा है। आगामी फसल भी आने की तैयारी में है और इसकी खरीद करने के लिए पुराने स्टॉक को बाजार में निकालना जरूरी है। सरसों का हाजिर दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 7-8 प्रतिशत अधिक है। सरसों की नयी फसल कुछ समय में बाजार में आना शुरु हो जाएगी है। मात्रा भले ही कम हो पर इसका असर बाजार पर आता है। इन परिस्थितियों के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम समीक्षाधीन सप्ताह में गिरावट दर्शाते बंद हुए। सूत्रों ने कहा कि दूसरी ओर, सर्दियों के मौसम में स्थानीय स्तर पर सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा सूरजमुखी (145 रुपये किलो) के मुकाबले सोयाबीन तेल (लगभग 124 रुपये किलो) सस्ता होने से सोयाबीन तेल की मांग भी है। ऐसे में बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में अपने विगत सप्ताहांत के मुकाबले सुधार आया। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताहांत के मुकाबले स्थानीय मांग होने से सोयाबीन तेल-तिलहन में सुधार है मगर हकीकत में एमएसपी से मुकाबले सोयाबीन का दाम कमजोर बना हुआ है। अपने एमएसपी वाले दाम पर सोयाबीन का बाजार ही नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि यही हाल मूंगफली का है क्योंकि इसके एमएसपी के हिसाब से बाजार नहीं है और एमएसपी वाले दाम पर मूंगफली कभी खपेगा नहीं। इस परिस्थिति के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्व सप्ताहांत के स्तर पर ही स्थिर बने रहे। उन्होंने कहा कि आयातक एक ओर बैंकों में अपना ऋण साखपत्र (लेटर आफ क्रेडिट या एलसी) घुमाने के लिए लागत से कम दाम पर सोयाबीन डीगम तेल काफी समय से बेचना जारी रखे हैं वहीं दूसरी ओर वे अपना आयकर भी दाखिल कर फायदा दिखाते हैं। इस घाटे का सीधा असर यह होगा कि आगे जाकर आयात और घटेगा और इस गिरावट के असर से बाकी तेल-तिलहन भी दवाब में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह अजीब विरोधाभास है कि जिस देश में खाद्यतेलों की लगभग 60 प्रतिशत की कमी हो, वहां आयातकों को लागत से नीचे दाम पर खाद्यतेल बेचना पड़े। सूत्रों ने कहा कि मलेशिया में सट्टेबाज विगत कुछ कारोबारी सत्रों में पाम-पामोलीन तेल के दाम ऊंचा लगा रहे हैं। वहां स्टॉक रखने की जगह नहीं है।
भारत जैसे विशाल उपभोक्ता देश में जाड़े में पाम-पामोलीन की मांग भी घट जाती है लेकिन मलेशिया के कारोबारी फिर भी दाम ऊंचा लगाने में कसर नहीं छोड़ते। इस सट्टेबाजी के कारण पाम-पामोलीन के दाम में सुधार है। उन्होंने कहा कि नमकीन बनाने वाली कंपनियों की हल्की फुल्की मांग के कारण बीते सप्ताह बिनौलातेल के दाम में भी मामूली सुधार है। बीते सप्ताह सरसों दाना 75 रुपये की गिरावट के साथ 6,900-6,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 225 रुपये की गिरावट के साथ 14,250 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 40-40 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,390-2,490 रुपये और 2,390-2,535 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 100-100 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 4,800-4,850 रुपये और 4,500-4,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए। इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 125 रुपये के सुधार के साथ 13,550 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 125 रुपये के सुधार के साथ 13,150 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 135 रुपये के सुधार के साथ 10,325 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सुस्त कामकाज तथा एमएसपी से काफी नीचा हाजिर दाम रहने के बीच समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली। मूंगफली तिलहन 6,450-6,825 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 15,500 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,485-2,785 रुपये प्रति टिन के पूर्व सप्ताहांत के भाव पर स्थिर बने रहे। दूसरी ओर, समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 175 रुपये के सुधार के साथ 11,375 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 100 रुपये के सुधार के साथ 13,100 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव 100 रुपये के सुधार के साथ 12,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। तेजी के आम रुख के बीच, समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल के दाम भी 75 रुपये सुधार के साथ 12,275 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बंद हुए। 

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