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 कांच, पीतल, स्टील कौन से ट‍िफ‍िन में खाना रखना सुरक्ष‍ित है?

 चाहे ऑफि‍स हो या स्‍कूल लोग या बच्‍चे घर से न‍िकलते समय टि‍फ‍िन जरूर ले जाते हैं, लेक‍िन क्‍या कभी आपने सोचा है क‍ि टिफिन बॉक्स का मटेरियल आपकी सेहत पर क्‍या असर डाल सकता है? हमारी भागदौड़ भरी जि‍ंंदगी में, खासकर ज्‍यादा ह्रयूम‍िड‍िटी वाले शहरोंं में, लंच पैक करने का सही तरीका आजमाना बहुत जरूरी है, लेकिन गलत डिब्बे में खाना रखने से खाने में हानिकारक केमिकल मिल सकते हैं, जिससे हार्मोन असंतुलन, पाचन की समस्या और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।  
 सबसे अच्छे टिफिन बॉक्स मटेरियल- 
  1. स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8- 
  खाने के ल‍िए वे सबसे अच्‍छे मटेर‍ियल के तौर पर स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8 को देखते हैं। ये नींबू चावल या करी जैसे खट्टे खाने के साथ भी रिएक्शन नहीं करते, बीपीए-फ्री होते हैं और कोई जहरीला तत्व नहीं छोड़ते। स्‍टील के ट‍िफ‍िन में खाने का स्वाद नहीं बदलता, जंग नहीं लगती और साफ करना भी आसान होता है। जर्नल ऑफ फूड साइंंस की रिसर्च के अनुसार, अगर स्‍टील के ट‍िफ‍िन को ठीक से इस्‍तेमाल क‍िया जाए, तो इनमें से भारी धातुएं नहीं निकलतीं। भारतीय खाने के लिए लीक-प्रूफ और इंसुलेटेड स्टील टिफिन चुनें।
 2. कांच के डिब्बे- 
 इनमें खाना साफ दिखाई देता है और ये नॉन-पोरोस होते हैं यानी इस मटेर‍ियल में पानी, तेल या खाने के कण अंदर नहीं जाते, जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते। बोरोसिलिकेट ग‍िलास  माइक्रोवेव में सुरक्षित रहता है। सलाद या सब्जी दोबारा गर्म करने के लिए ये बेहतरीन हैं क्योंकि इनमें कोई केमिकल नहीं निकलता।
  3. फूड ग्रेड सिलिकॉन- 
फूड ग्रेड सिलिकॉन हल्का, लचीला और 220°C तक गर्मी सहने वाला मटेर‍ियल होता है। इस मटेर‍ियल के ट‍िफ‍िन का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह नॉन-टॉक्सिक होता है, दाग नहीं पकड़ता और छोटे हिस्सों में खाना रखने के लिए अच्छा है। हमेशा 100% प्लैटिनम क्योर सिलिकॉन  ही लें।
 सबसे खराब टिफिन मटेरियल 
1. प्लास्टिक-  
अक्सर प्लास्टिक वाले ट‍िफ‍िन में बीपीए, थैलेट्स या स्टाइरीन होते हैं, जो गर्म करने या ऑयली और खट्टी चीजों के साथ भोजन में मिल जाते हैं।  एंडोक्राइन सोसाइटी  की स्टडी बताती है कि गर्मी से ये केमिकल जल्दी निकलते हैं जिससे मोटापा, बांझपन और हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं। सिंगल-यूज प्लास्टिक को रीसायकल करने से भी वह सुरक्षित नहीं बनता।
 2. बिना कोटिंग वाला एल्युमिनियम 
बिना कोटिंग वाला एल्युमिनियम खट्टे खाने के साथ रिएक्शन करके धातु जैसा स्वाद देता है और शरीर में एल्युमिनियम जमा हो सकता है। यह अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़ा माना जाता है। जरूरी हो तो केवल एनोडाइज्‍ड या कोटेड एल्युमिनियम ही लें।
 3. मेलामाइन- 
दिखने में यह मटेर‍ियल सिरेमिक जैसा लगता है, लेकिन गर्म खाने पर इसमें से फॉर्मेल्डिहाइड (CH₂O) या रासायनिक यौगिक निकलता है, जो अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के मुताब‍िक संभावित कैंसरकारक है। सस्ते टिफिन में इसका मौजूद होना आम बात है इसल‍िए इससे पूरी तरह से बचें।
 न‍िष्‍कर्ष:
  खाने में ट‍िफि‍न के जर‍िए टॉक्सिन कम होने से पाचन और एनर्जी दोनों में सुधार आता है। इसल‍िए अच्‍छी सेहत के ल‍िए प्लास्टिक, ब‍िना कोट‍िंग वाले एल्युमिनियम, मेलामाइन से बचें और स्टेनलेस स्टील या ग‍िलास जैसे मटेर‍ियल के ट‍िफ‍िन का इस्‍तेमाल करें। 

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