अक्ती तिहार के हार्दिक बधाई
-लेखिका- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
कहिथें वेद पुरान, हवय शुभ मुहुरत अक्ती।
करना चाही दान, बढ़य सतयुग के शक्ती।।
पावन तीज तिहार, बिहावँय पुतरी पुतरा।
सुग्घर साज-सँवार, नवा पहिरावँय लुगरा।।
भरे सकोरा टाँग दव, घाम मा पंछी मरथें ।
मिटय भूख अउ प्यास हर, खा लँय दाना जी भर के।।
करसी भर के राख, पी लँय प्यासा पानी।
बइठ जुड़ा लँय छाँव, पुन्न मिलय हर दानी।।
गर्मी भर बइसाख, भोंभरा अब्बड़ तीपय।
कान तिपावय झाँझ, लपट जब आगी झींपय।
बेटी दुखिया होय ता, कर दव आज बिहाव जी।
भुँखहा ला कौरा खवा, लेही तोरे नाव जी ।।
अवतारी भगवान, परशुराम ल कहिथे जी।
शुक्ल पक्ष बैशाख, तीज बड़ पावन रहिथे जी ।
लिये अवतरण खास, विष्णु के रूप जनाथे।
अक्षय मिलथे पुण्य, काज मंगल करवाथे।
शुभ तिथि लेके आय हे, अक्ती सुघर तिहार हा।
मुहुरत बने बिहाव के, माड़े शुभ संस्कार गा।।
होही गंगा स्नान, दीन के आँसू पोंछव।
सफल जिंदगी मान, मदद ला तीरथ सोंचव।।
भेदभाव सब मेट, भाव समता के जागय।
होय दरिद्रता दूर, शोक दुख जग ले भागय।।
करज चुका माटी सबो, कारज जग-कल्यान कर।
झोली मा भर दे खुशी, मरत जीव मा प्रान भर।।


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