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भारत की आर्थिक विकास यात्रा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए एक बड़ा अवसर है: क्वात्रा

न्यूयॉर्क/ह्यूस्टन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए एक बड़ा अवसर है और इस बात पर बल दिया कि अमेरिका इस साझेदारी में ''सबसे आगे और केंद्र में'' है तथा भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है। क्वात्रा ने ये टिप्पणियां शनिवार को कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स (एसआईपीए) के 'दीपक और नीरा राज सेंटर ऑन इंडियन इकोनॉमिक पॉलिसीज' द्वारा आयोजित कोलंबिया इंडियन इकोनॉमी समिट 2026: 'द क्वेस्ट फॉर ए डेवलप्ड इंडिया' में एक विशेष संबोधन के दौरान कीं। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और भारतीय प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ''भारत का आर्थिक विकास हमारी अपनी यात्रा है जो न केवल आर्थिक विकास और समृद्धि के हमारे मूलभूत सिद्धांतों के लिए है बल्कि यह हमारे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। अमेरिका हमारे सबसे महत्वपूर्ण व अहम साझेदारों में से एक है।'' द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए क्वात्रा ने कहा कि साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बदलते वैश्विक परिवर्तनों से निपटने में भारत-अमेरिका साझेदारी ''सबसे महत्वपूर्ण और सबसे निर्णायक'' साझेदारियों में से एक है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए अपने लोगों के लिए आर्थिक विकास और समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेगा। राजदूत ने कहा, ''हम भारत में अपनी यात्रा, अपने आर्थिक विकास, अपने समाज के विकास के एक परिवर्तनकारी दौर में हैं... साथ ही, हम वैश्विक बदलावों के संबंध में सीखने के लिहाज से एक अनूठे दौर में भी जी रहे हैं।'' उन्होंने यह दोहराया कि भारत अपनी प्राथमिकताओं को लेकर आश्वस्त है और 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करने पर दृढ़ता से केंद्रित है। मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के ''महत्व और सार'' पर बल देते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी में सरकार-से-सरकार, सरकार-से-व्यापार, व्यापार-से-व्यापार और लोगों-से-लोगों के संबंध शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''इन चार श्रेणियों के भीतर क्षेत्रीय विस्तार के संदर्भ में हमारे लिए एक प्रमुख खंड रणनीतिक राजनीतिक और सुरक्षा है।'' उन्होंने क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद), भारत-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारे और अमेरिका के साथ व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी जैसी पहलों के माध्यम से चुनौतियों और अवसरों की पुनर्कल्पना करने के प्रयासों का उल्लेख किया। क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में ''नेतृत्व स्तर का ध्यान'' रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को मौजूदा वैश्विक बदलावों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विकास यात्रा घरेलू स्तर पर संचालित होती है लेकिन यह एक बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के भीतर आगे बढ़ रही है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि क्वात्रा ने पिछले एक दशक में भारत के शासन सुधारों पर प्रकाश डाला है, जिन्होंने पारदर्शिता, व्यापार सुगमता और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। सम्मेलन को कई प्रख्यात अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने संबोधित किया। इनमें अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और राज सेंटर के निदेशक अरविंद पनागरिया, विश्व बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और विकास अर्थशास्त्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदरमित गिल, वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और कोलंबिया के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर विज्ञान के आरकेएस फैमिली प्रोफेसर विशाल मिश्रा शामिल थे। इससे पहले, भारतीय वाणिज्य दूतावास ने क्वात्रा और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और समुदाय के नेताओं के बीच एक विशेष संवाद का आयोजन किया। क्वात्रा ने व्यापार, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी पर अपने विचार साझा किए और भारत के निरंतर आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला। भारतीय दूतावास ने बताया कि उन्होंने ''समुदाय को एकजुट करने में'' प्रवासी संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशंस (एफआईए) के कार्यों की सराहना की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को स्वीकारा। 'द ग्रोथ ट्रायंगल' शीर्षक से एक सत्र में भाग लेते हुए ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत डी सी मंजुनाथ ने कहा कि सरकार, व्यापार और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के माध्यम से भारत-अमेरिका संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने भारत और टेक्सास के बीच बढ़ते सहयोग को व्यापक द्विपक्षीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस कार्यक्रम में भारत के बदलते नीतिगत परिदृश्य और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई जो देश की विकास गाथा में अकादमिक रुचि में वृद्धि को दर्शाता है।

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