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ठाणे. महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 18 वर्षीय एक युवक ने प्रेमिका से झगड़े के बाद अपने घर में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। घटना शुक्रवार को मुम्ब्रा क्षेत्र के अमृत नगर में हुई।
मुम्ब्रा थाने के एक अधिकारी ने बताया कि युवक अपनी प्रेमिका से मोबाइल फोन पर बात कर रहा था और इस दौरान दोनों के बीच विवाद हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद युवक ने अपने घर में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया और इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 90 वर्ष पूरा होने पर आयोजित समारोह में शामिल होंगी। राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति 31 मार्च से एक अप्रैल तक मुंबई का दौरा करेंगी। इस दौरान वह आरबीआई के 90 साल पूरा होने पर आयोजित समारोह में शिरकत करेंगी। भारत के केंद्रीय बैंक के तौर पर आरबीआई की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुरूप एक अप्रैल, 1935 को हुई थी। -
अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को ‘गरीबी उन्मूलन' कार्यक्रम ‘पी4-मार्गदर्शी बंगारू कुटुम्बम' की शुरुआत की। पी4 या ‘सार्वजनिक निजी जन भागीदारी' कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के संपन्न व्यक्तियों के सहयोग से वंचित परिवारों का उत्थान करना है। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दो वंचित परिवारों को अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री ने बच्चों को शिक्षित करने की एक परिवार की आकांक्षा को सुनने के बाद तीन सफल उद्यमियों से पूछा कि वे परिवार के उत्थान में कैसे मदद कर सकते हैं। इन तीन उद्यमियों में ‘ग्रीनको' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक अनिल कुमार चालमालासेट्टी और ‘मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' (एमईआईएल) के प्रबंध निदेशक पीवी कृष्ण रेड्डी शामिल थे। चालमालासेट्टी ने सुझाव दिया, “अगर बच्चों को पास के निजी स्कूल में दाखिला दिलाया जा सके और परिवहन की सुविधा दी जा सके, तो उनके सपने पूरे हो सकते हैं।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पी4 वंचित परिवारों की सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। नायडू ने पी4 जैसी पहल गरीबी उन्मूलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पी4 कार्यक्रम के माध्यम से लाखों वंचित लोगों का उत्थान करना है।
- भदोही. उत्तर प्रदेश के भदोही में 22 वर्षीय युवती को उसके मंगेतर के छोटे भाई ने कथित तौर पर अगवा कर लिया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शादी मई में होनी थी।पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को युवती की मां गीता देवी की शिकायत के आधार पर कोइरौना थाने में अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया। भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया, “गीता देवी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी 24 मार्च को आभूषण और नकदी के साथ लापता पाई गई।” उन्होंने बताया कि युवती का कथित तौर पर अपहरण योगेश के छोटे भाई आरोपी राजा ने किया। युवती की योगेश से सगाई हुई थी। मांगलिक ने बताया, “युवती को ढूंढने और आरोपी को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
- लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चैत्र रामनवमी के उपलक्ष्य में सभी जिलों के मंदिरों में 24 घंटे का श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ कराने के निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि पांच अप्रैल दोपहर से प्रारंभ अखण्ड मानस पाठ की पूर्णाहुति छह अप्रैल को श्रीरामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्री रामलला के सूर्य तिलक के साथ होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सभी जिलों के मंदिरों में आवश्यक व्यवस्थाएं प्रारम्भ कर दी गई हैं।एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ श्रीरामनवमी से संबंधित तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), शाकुम्भरी देवी मंदिर (सहारनपुर), विंध्यवासिनी देवी धाम (मिर्जापुर) आदि प्रमुख देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होगा। उन्होंने कहा कि सूर्य तिलक का दर्शन करने के लिए अयोध्या में पूरे देश से लोगों के आगमन की संभावना है। आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रबन्ध किये जाने चाहिए और कतारबद्ध श्रद्धालुओं को तेज धूप में खड़े होने में समस्या न हो, इसके लिए ‘जूट मैटिंग' कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी मंदिरों में पेयजल के पुख्ता प्रबंध होने चाहिए और छाजन की व्यवस्था कराई जाए।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चैत्र नवरात्र के दिनों में पूरे प्रदेश में समान रूप से निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों के आसपास अंडा-मांस आदि की दुकानें नहीं होनी चाहिए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, रविवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी गोलवलकर की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सुरेश उर्फ भैयाजी जोशी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार संघ के स्मृति मंदिर का किया है दौराप्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार संघ के स्मृति मंदिर का दौरा किया है। संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती वर्ष प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) को मनाई जाती है। इसी अवसर पर संघ के स्वयंसेवक हर वर्ष नागपुर के शुक्रवारी इलाके में स्थित डॉ. हेडगेवार के निवास पर जाकर उन्हें नमन करते हैं। जिसके बाद पथ संचलन करते हुए रेशीमबाग स्थित स्मृति मंदिर में उनकी समाधि का दर्शन करते हैं।यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने रेशीमबाग परिसर का अवलोकन किया और संघ पदाधिकारियों के साथ औपचारिक चर्चा कीस्वयंसेवकों और संघ प्रचारकों के रूप में पहचाने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस वर्ष प्रतिपदा के मुहूर्त पर नागपुर जाकर ‘आद्य सरसंघचालक’ को प्रणाम किया, जिसे स्वयंसेवकों ने विशेष रूप से सराहा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने रेशीमबाग परिसर का अवलोकन किया और संघ पदाधिकारियों के साथ औपचारिक चर्चा की। उन्होंने संघ कार्यालय की पुस्तिका में एक संदेश भी लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि “रेशीमबाग स्मृति मंदिर राष्ट्र सेवा को समर्पित स्वयंसेवकों के लिए एक ऊर्जा स्रोत है। हमारे प्रयासों से भारत माता की गौरव गाथा निरंतर बढ़ती रहे।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर (महाराष्ट्र) में एक मराठी देशस्थ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आरएसएस की स्थापना का उद्देश्य हिंदू समुदाय को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के लिए एकजुट करना थाहेडगेवार ने 1925 में आरएसएस की स्थापना करने से पहले स्वतंत्रता-पूर्व भारत के अशांत काल के दौरान चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। उनका दृष्टिकोण हिंदू समुदाय को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के लिए एकजुट करना था, जो अंततः राष्ट्र की पूर्ण स्वतंत्रता और एकता की दिशा में काम करना था।डॉ. हेडगेवार ने युवाओं में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम की भावनाओं को किया जागृतअमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हेडगेवार के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से युवाओं में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम की भावना का प्रसार करने वाले परम पूज्य डॉ. हेडगेवार ने मां भारती के स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए डॉ. हेडगेवार ने जिस आरएसएस रूपी बीज को बोया था, वह आज वट वृक्ष बनकर सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक बन गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक स्वर्गीय डॉ. हेडगेवार की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने डॉ. हेडगेवार को जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कीकेंद्रीय मंत्री और नागपुर के सांसद नितिन गडकरी ने भी हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती (तिथि अनुसार) पर उन्हें कोटि-कोटि अभिवादन।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. हेडगेवार और आरएसएस के दूसरे प्रमुख एमएस गोलवलकर को समर्पित स्मारकों पर पुष्पांजलि अर्पित कीवहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर नागपुर स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर का दौरा किया, जहां उन्होंने हेडगेवार और आरएसएस के दूसरे प्रमुख एमएस गोलवलकर को समर्पित स्मारकों पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इस मौके पर पीएम मोदी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित दीक्षाभूमि का दौरा किया और डॉ. बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां उन्होंने 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी थे। पीएम मोदी का स्वागत दीक्षाभूमि के अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन शुरेई ससाई ने किया। पीएम मोदी ने महात्मा बुद्ध की पूजा-अर्चना भी की।
दीक्षाभूमि हमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करता हैपीएम नरेंद्र मोदी ने दीक्षाभूमि की रिकॉर्ड बुक में खास संदेश लिखा। उन्होंने बुक में लिखा, “बाबा साहेब के पंच तीर्थों में से एक नागपुर स्थित दीक्षाभूमि में आने का सौभाग्य पाकर अभिभूत हूं। इस पवित्र स्थल के वातावरण में बाबा साहेब के सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के सिद्धांतों का सहज अनुभव होता है। दीक्षाभूमि हमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान करता है।”एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही बाबा साहेब को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगीपीएम मोदी ने यह भी लिखा, “मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अमृत कालखंड में हम बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं और मूल्यों पर चलते हुए देश को प्रगति के नए शिखर पर लेकर जाएंगे। एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही बाबा साहेब को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।” पीएम मोदी डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि देने के बाद दीक्षाभूमि पहुंचे थे।दीक्षाभूमि मूल रूप से बौद्ध वास्तुकला की तर्ज पर बनाई गई है, जो मध्य प्रदेश के सांची में महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध स्तूप की प्रतिकृति हैदीक्षाभूमि पिछले कई सालों से विश्व स्तर पर प्रसिद्ध स्थान रही है। यह लाखों लोगों के लिए विचारों और कार्यों के परिवर्तन का स्थान है। दीक्षाभूमि मूल बौद्ध वास्तुकला की तर्ज पर बनाई गई है, जो मध्य प्रदेश के सांची में महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध स्तूप की प्रतिकृति है। यह एशियाई महाद्वीप का अब तक का सबसे बड़ा स्तूप है। इसका उद्घाटन 18 दिसंबर, 2001 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने किया था। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से फूलों की खास यात्रा की बात की। उन्होंने बताया कि फूल सिर्फ मंदिरों की शोभा या घर की सजावट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब इनसे नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। पीएम ने महुआ के फूलों से बनी कुकीज और गुजरात के कृष्ण कमल की कहानी साझा की, जो लोगों को प्रेरित कर रही है।
महुआ के फूल गांवों और आदिवासी समुदायों के लिए हैं खासपीएम ने कहा कि महुआ के फूल गांवों और आदिवासी समुदायों के लिए खास हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के राजाखोह गांव में चार बहनों ने महुआ से कुकीज बनाना शुरू किया। उनकी मेहनत से ये कुकीज इतनी पसंद की जा रही हैं कि मांग बढ़ती जा रही है। एक बड़ी कंपनी ने इन बहनों को फैक्ट्री में काम करने की ट्रेनिंग दी। इससे प्रेरित होकर गांव की कई महिलाएं भी इस काम में जुट गईं। तेलंगाना के आदिलाबाद जिले की दो बहनों की कहानी भी कम रोचक नहीं है। उन्होंने महुआ के फूलों से तरह-तरह के पकवान बनाए, जिनमें आदिवासी संस्कृति की झलक है। लोग इन पकवानों को खूब पसंद कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि ये महिलाएं अपने जज्बे से फूलों की यात्रा को नई दिशा दे रही हैं।पीएम ने कहा, “आप भी अपने आसपास फूलों की ऐसी खास कहानियां देखें और मुझे लिखें ।”इसके बाद पीएम ने गुजरात के एकता नगर में खिलने वाले ‘कृष्ण कमल’ का जिक्र किया। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास यह फूल पर्यटकों को खूब भा रहा है। एकता नगर के आरोग्य वन, एकता नर्सरी, विश्व वन और मियावाकी जंगल में लाखों कृष्ण कमल के पौधे लगाए गए हैं। ये फूल वहां की सुंदरता बढ़ा रहे हैं और लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। पीएम ने कहा, “आप भी अपने आसपास फूलों की ऐसी खास कहानियां देखें और मुझे लिखें।” उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने अनुभव और विचार साझा करें। पीएम ने कहा, “हो सकता है, आपके आसपास कुछ ऐसा हो जो आपको आम लगे, लेकिन दूसरों के लिए नया और रोचक हो।”‘मन की बात’ में फूलों की अनोखी यात्रा ने इस बार सबका ध्यान अपनी ओर खींचाउन्होंने अगले महीने फिर ‘मन की बात’ में मिलने का वादा किया और कहा कि ऐसी कहानियां हमें प्रेरणा देती हैं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सबका धन्यवाद किया और नमस्कार कहा। इस बार ‘मन की बात’ में फूलों की अनोखी यात्रा ने सबका ध्यान खींचा। महुआ से कुकीज और कृष्ण कमल की कहानी न सिर्फ नए प्रयोगों को दिखाती है, बल्कि मेहनत और स्थानीय संस्कृति की ताकत को भी सामने लाती है। - लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चैत्र रामनवमी के उपलक्ष्य में सभी जिलों के मंदिरों में 24 घंटे का श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ कराने के निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि पांच अप्रैल दोपहर से प्रारंभ अखण्ड मानस पाठ की पूर्णाहुति छह अप्रैल को श्रीरामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्री रामलला के सूर्य तिलक के साथ होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सभी जिलों के मंदिरों में आवश्यक व्यवस्थाएं प्रारम्भ कर दी गई हैं।एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ श्रीरामनवमी से संबंधित तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), शाकुम्भरी देवी मंदिर (सहारनपुर), विंध्यवासिनी देवी धाम (मिर्जापुर) आदि प्रमुख देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होगा। उन्होंने कहा कि सूर्य तिलक का दर्शन करने के लिए अयोध्या में पूरे देश से लोगों के आगमन की संभावना है। आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रबन्ध किये जाने चाहिए और कतारबद्ध श्रद्धालुओं को तेज धूप में खड़े होने में समस्या न हो, इसके लिए ‘जूट मैटिंग' कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी मंदिरों में पेयजल के पुख्ता प्रबंध होने चाहिए और छाजन की व्यवस्था कराई जाए।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चैत्र नवरात्र के दिनों में पूरे प्रदेश में समान रूप से निर्बाध 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों के आसपास अंडा-मांस आदि की दुकानें नहीं होनी चाहिए।
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के सुकुमा जिले में शनिवार को सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 16 नक्सलियों के मारे जाने के बाद, इसे 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार के संकल्प का हिस्सा बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्टम एक्स पोस्ट में कहा, “नक्सलवाद पर एक और प्रहार! हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने सुकमा में एक अभियान के दौरान 16 नक्सलियों को ढेर कर दिया और स्वचालित हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है। हथियार रखने वालों से मेरी अपील है कि हथियार और हिंसा से बदलाव नहीं आ सकता; केवल शांति और विकास ही बदलाव ला सकता है।”आपको बता दें कि सुकमा जिले के केरलापाल इलाके में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान में अब तक 16 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं। यह अभियान 28 मार्च से जारी है, जब जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीम ने नक्सलवादियों की उपस्थिति की सूचना पर ऑपरेशन शुरू किया। 29 मार्च को सुबह 8 बजे से नक्सलवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ लगातार जारी है।सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए हैं, जिनमें एके-47, एसएलआर, इंसास राइफल, पॉइंट 303 राइफल, रॉकेट लॉन्चर, बीजीएल लॉन्चर और विस्फोटक पदार्थ शामिल हैं। मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है, और सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन में अभी और नक्सलियों के मारे जाने या घायल होने की आशंका जताई है। इस ऑपरेशन के दौरान, डीआरजी के दो जवान घायल हो गए। हालांकि, घायल जवानों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं। मुठभेड़ स्थल के आस-पास के इलाके में फिलहाल गश्त और सर्चिंग अभियान जारी है। 25 मार्च को ही सुरक्षाबलों ने इनामी नक्सली सुधीर उर्फ सुधाकर समेत 3 नक्सलियों को ढेर कर दिया था। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि देश ऊर्जा आपूर्ति और खपत दोनों में स्थिर और स्वस्थ वृद्धि का अनुभव कर रहा है। इसी के साथ भारत में रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन की अपार संभावनाएं हैं, जो मार्च 2024 तक 21,09,655 मेगावाट थी।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, पवन ऊर्जा से ऊर्जा उत्पादन की क्षमता का प्रमुख हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत 11,63,856 मेगावाट था। इसके बाद सौर ऊर्जा का 7,48,990 मेगावाट और लार्ज हाइड्रो से 1,33,410 मेगावाट हिस्सा है। रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन की आधी से अधिक क्षमता चार राज्यों 20.3 प्रतिशत राजस्थान, 11.8 प्रतिशत महाराष्ट्र, 10.5 प्रतिशत गुजरात और 9.8 प्रतिशत कर्नाटक में केंद्रित है।इसके अलावा, बिजली उत्पादन में भी पिछले कुछ वर्षों में शानदार वृद्धि हुई है, 31 मार्च, 2015 तक 81,593 मेगावाट से बढ़कर यह 31 मार्च, 2024 तक 1,98,213 मेगावाट हो गया है, जो पिछले कुछ वर्षों में 10.36 प्रतिशत की सीएजीआर वृद्धि है।रिन्यूएबल रिसोर्सेस (उपयोगिता और गैर-उपयोगिता दोनों को मिलाकर) से बिजली का सकल उत्पादन भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है।आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान उत्पादित 2,05,608 गीगावॉट बिजली से यह वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान बढ़कर 3,70,320 गीगावॉट हो गया है, जो पिछले कुछ वर्षों में 6.76 प्रतिशत की सीएजीआर वृद्धि है।भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा की प्रति व्यक्ति खपत में भी पर्याप्त वृद्धि देखी है। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान यह 14,682 मेगा जूल/व्यक्ति से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 18,410 मेगा जूल/व्यक्ति हो गया है, जो पिछले वर्षों में 2.55 प्रतिशत की सीएजीआर वृद्धि है।ट्रांसमिशन और वितरण के कारण होने वाले नुकसान को कम करके पिछले वर्षों में बिजली के उपयोग में सुधार हुआ है। मंत्रालय ने कहा, “ट्रांसमिशन और वितरण के कारण होने वाला नुकसान, जो वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान लगभग 23 प्रतिशत था, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान घटकर लगभग 17 प्रतिशत रह गया है।”सभी प्रमुख ऊर्जा खपत वाले क्षेत्रों में, उद्योग क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान अधिकतम विस्तार देखा है। वाणिज्यिक और सार्वजनिक सेवा, आवासीय, कृषि और वानिकी जैसे अन्य सभी क्षेत्रों ने भी इस अवधि में लगातार वृद्धि दर्ज की है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘पर्यावरण–2025’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण की विरासत देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। इसके लिए हमें पर्यावरण के प्रति जागरूक और संवेदनशील जीवनशैली अपनानी होगी ताकि पर्यावरण न केवल संरक्षित हो बल्कि उसका संवर्धन भी हो और पर्यावरण अधिक जीवंत बन सके। स्वच्छ पर्यावरण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाना एक अवसर भी है और चुनौती भी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु कहा, “हमारे बच्चों और युवा पीढ़ी को व्यापक स्तर पर पर्यावरण परिवर्तन का सामना करना होगा और उसमें योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि हर परिवार में बड़े-बुजुर्गों को इस बात की चिंता होती है कि उनके बच्चे किस स्कूल या कॉलेज में पढ़ेंगे और कौन सा करियर चुनेंगे। यह चिंता जायज है। लेकिन, हम सभी को यह भी सोचना होगा कि हमारे बच्चे किस तरह की हवा में सांस लेंगे, उन्हें किस तरह का पानी पीने को मिलेगा, वे पक्षियों की मधुर आवाज सुन पाएंगे या नहीं, वे हरे-भरे जंगलों की खूबसूरती का अनुभव कर पाएंगे या नहीं।”द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हमारा मानना है कि प्रकृति एक माँ की तरह हमारा पोषण करती है और हमें प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करना चाहिए। विकास की भारतीय विरासत का आधार पोषण है, शोषण नहीं, संरक्षण है, उन्मूलन नहीं। इसी परंपरा का पालन करते हुए हम विकसित भारत की ओर आगे बढ़ना चाहते हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हमारे देश के पर्यावरण शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।राष्ट्रपति मुर्मु ने आगे कहा कि हमारे देश और पूरे विश्व समुदाय को पर्यावरण के अनुकूल मार्ग पर चलना होगा, तभी मानवता वास्तविक प्रगति कर सकेगी। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी हरित पहलों के माध्यम से विश्व समुदाय के समक्ष कई अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों की भागीदारी से भारत वैश्विक स्तर पर हरित नेतृत्व की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि हम सभी को वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, जहां वायु, जल, हरियाली और समृद्धि पूरे विश्व समुदाय को आकर्षित करे। - रायपुर। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र में असाधारण योगदान और उत्कृष्टता के लिए जिंदल पावर लिमिटेड को सम्मानित किया गया हैं।जो कि देश का लगभग 90%कमर्शियल उत्पादन वाणिज्य कोयले उत्पादन किया हैं,जो देश में सबसे अधिक राजस्व योगदान कर्ता के रूप में उभरा हैं,यह पुरस्कार दिल्ली में माननीय केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री श्री किशन रेड्डी द्वारा प्रदान किया गया।जे पी एल ने केवल मांग को पूरा करने के लिए आबंटित खदानों से कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया हैं बल्कि इन परियोजनाओं की शुरुआत कर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास भी किया हैं,इसके साथ ही स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहा हैं।जे पी एल के अथक प्रयासों का ही नतीजा हैं कि वो आज इस मुकाम को हासिल कर पाया है जे पी एल क्षेत्र के सामाजिक विकास और आजीविका के लिए हमेशा से समर्पित रहा है और कई सीएसआर संचालित कर स्थानीय लोगों का विकास भी कर रहा है।
- रायपुर। पीएचडीसीसीआई ने लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के विकास आयुक्त कार्यालय के सहयोग से "एक दिवसीय बौद्धिक संपदा (IP) जागरूकता कार्यक्रम" (नेशनल IP आउटरीच मिशन - विकसित भारत) का आयोजन 28 मार्च 2025 को IGKV डायरेक्टर रिसर्च सर्विसेज, IGKV, कृषक नगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) में किया। इस कार्यशाला में डॉ. हुलास पाठक (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर एवं CEO, RKVY RAFTAAR एग्री-बिजनेस इनक्यूबेटर, IGKV) एवं डॉ. अमित दुबे (वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, छत्तीसगढ़ सरकार) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पीएचडीसीसीआई छत्तीसगढ़ राज्य चैप्टर के सदस्य श्री निखिल अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) का आज के आधुनिक युग में विशेष महत्व है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ज्ञान और विचार आज के उद्योगों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए बौद्धिक संपदा की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और व्यापारिक रहस्य (ट्रेड सीक्रेट्स) नवाचारों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे व्यवसायियों, उद्यमियों, कलाकारों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलता है।
- आदिवासी समुदायों के लिए वन आधारित जीविकोपार्जन के अवसर विषय पर कार्यशाला को मुख्यमंत्री श्री साय ने किया संबोधितवनोपज से समृद्धि पर नीति आयोग और सरकार की साझा पहल:वन संसाधनों के समुचित उपयोग और रोजगार सृजन पर जोररायपुर/जनजातीय समाज और वनों के मध्य गहरा संबंध है और दोनों एक दूसरे के पूरक के रूप में संरक्षित - संवर्धित हो रहे हैं। प्रकृति की गोद में ही जनजाति समाज का पीढ़ी दर पीढ़ी विकास हुआ है। यह कार्यशाला आदिवासियों और वनों के सहअस्तित्व को केंद्र में रखकर उनके उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर में आदिवासी समुदायों के लिए वन आधारित जीविकोपार्जन के अवसर विषय पर नीति आयोग तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला में सभी प्रबुद्धजनों, विषय विशेषज्ञों और अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज को जीविकोपार्जन के समुचित अवसर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी हम सभी पर है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत जनजाति समुदाय निवासरत है और 44 प्रतिशत इलाका वन आच्छादित है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले 35 वर्षों से अधिक के सार्वजनिक जीवन में मैने प्रदेश के जनजाति समुदाय और विशेष पिछड़ी जनजातियों के संघर्ष और पीड़ा को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की व्यथा को समझा और एक आदिवासी बहुल नए राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। श्री साय ने कहा कि अटल जी ने आदिवासियों के कल्याण के लिए पृथक मंत्रालय का भी गठन किया और आदिवासियों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजी जा रही राशि का सही उपयोग हो पाया। अटल जी के प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ में विकास के नए आयाम स्थापित हुए।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में कोई भी भूखा न रहे, इस उद्देश्य से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश में व्यापक स्तर पर पीडीएस सिस्टम लागू कर लोगो को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराया। उन्होंने समर्थन मूल्य पर वनोपज की खरीदी प्रारंभ की, जिसने आदिवासियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज पर्याप्त मात्रा में है। कुल 67 प्रकार के लघु वनोपजों का संग्रहण, प्रसंस्करण और विक्रय महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वनोपजों से जुड़ी प्रोत्साहक नीतियों का लाभ उठाकर स्व सहायता समूह की बहनें आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के आजीविका और उत्थान के लिए संचालित पीएम-जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस मौके पर श्री साय ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजाति समुदायों के उत्थान के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नीति आयोग और वन विभाग की इस संयुक्त कार्यशाला से जनजातीय समाज को तकनीक और नवाचार से जोड़ने के साथ ही आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि नीति आयोग के सहयोग से एक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण विषय पर आज एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है। वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि जनजातीय समुदाय के लिए संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन अब तेजी से हो रहा है और वनवासी क्षेत्रों में व्यवस्थाएं अब सुदृढ़ हुई है। उन्होंने पर्यावरण संतुलन के साथ वन संसाधनों के समुचित उपयोग पर जोर देने और रोजगार सृजन की बात कही।कार्यशाला में नीति आयोग के सलाहकार श्री सुरेंद्र मेहता, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा और वन बल प्रमुख श्री व्ही श्रीनिवास राव ने अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर एपीसीसीएफ श्रीमती शालिनी रैना, नीति आयोग के निदेशक श्री अमित वर्मा, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण और झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों से आए प्रबुद्धजन, विषय विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद रहे।मुख्यमंत्री श्री साय ने वनोपज आधारित स्टालों का किया अवलोकनमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अरण्य भवन परिसर में वन उत्पादों पर आधारित स्टालों का भी अवलोकन किया। लीफ प्लेट टेक्नोलॉजी, हैदराबाद की टीम ने मुख्यमंत्री श्री साय को लीफ से तैयार डिनर सेट भेंट किया। इस दौरान भोपालपट्टनम, बीजापुर जिले से आये श्री बी. आर. राव ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि वे पिछले 35 वर्षों से वनौषधीय पौधों के बीजों का संरक्षण कर रहे हैं। वे अपने 'गमलों से जंगल की ओर' अभियान के तहत निःशुल्क बीजों का वितरण भी करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने श्री राव के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। बलौदाबाजार जिले के अमरवा बांस प्रसंस्करण केन्द्र के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बांस शिल्प से बना गुलदस्ता भेंट करते हुए केन्द्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। श्री साय ने लाख उत्पादक किसान समिति कांकेर, छत्तीसगढ़ हर्बल और जशप्योर एफपीसी जशपुर के स्टालों का अवलोकन कर समूह के सदस्यों के साथ चर्चा की।
- मुख्यमंत्री श्री साय ने “सौगात-ए-मोदी” के तहत मुस्लिम बहनों को बांटी खुशियाँरायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम समाज की जरूरतमंद बहनों को सौगातें भेंट कर सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल “सौगात-ए-मोदी” के तहत मुख्यमंत्री श्री साय ने गरीब महिलाओं को गिफ्ट पैकेट वितरित किए जिसमें लेडीज़ सूट का कपड़ा, सेवइयां, खजूर और मिठाइयां शामिल थीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी को ईद की बधाई देते हुए कहा कि ईद का पर्व प्रेम, सद्भाव और एकजुटता का प्रतीक है।डॉ. सलीम राज ने बताया कि इसके पहले रायपुर में अल्प संख्यक मोर्चे और छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में 500 महिलाओं को गिफ्ट पैकेट वितरित किए गए।इस अवसर पर अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जमाल सिद्दीकी, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, प्रदेश अध्यक्ष श्री शकील अहमद, श्री एम. इकबाल, श्री संजय श्रीवास्तव, शाहिद खान, रजिया खान, आबिदा खान सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।
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नयी दिल्ली/ भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की अंतिम (फाइनल) परीक्षाएं साल में तीन बार आयोजित करने का निर्णय लिया है। मौजूदा समय में यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है।
आईसीएआई ने बृहस्पतिवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है और इससे छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे। पिछले वर्ष आईसीएआई ने फाउंडेशन और इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम की परीक्षाएं वर्ष में तीन बार आयोजित करने का निर्णय लिया था। अब अंतिम परीक्षा भी प्रतिवर्ष तीन बार आयोजित की जाएगी। विज्ञप्ति के मुताबिक अंतिम परीक्षाएं जनवरी, मई और सितंबर में आयोजित की जाएंगी।
आईसीएआई में 10 लाख से अधिक छात्र और लगभग चार लाख सदस्य हैं।
आईसीएआई द्वारा बृहस्पतिवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा में योग्यता-पश्चात पाठ्यक्रम के लिए मूल्यांकन परीक्षा वर्ष में तीन बार - फरवरी, जून और अक्टूबर में आयोजित की जाएगी। मौजूदा समय में यह परीक्षा साल में दो बार होती है। -
चेन्नई/दक्षिण रेलवे ने बताया कि बृहस्पतिवार को एनएमजी रेक के तीन खाली माल डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। दक्षिण रेलवे ने कहा, "आज, शाम छह बजकर 52 मिनट पर, एनएमजी (न्यू मॉडिफाइड गुड्स) रेक के तीन खाली माल डिब्बे (8वां, 9वां और 10वां डिब्बा) तांबरम यार्ड में स्थानांतरित किए जाने के दौरान पटरी से उतर गए। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।'' एनएमजी रेक का इस्तेमाल गाड़ियों के परिवहन के लिए किया जाता है। रेलवे अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के सुदूर जंगली इलाके में दिनभर चली भीषण मुठभेड़ में तीन आतंकवादी ढेर हो गए और इतनी ही संख्या में पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा एक पुलिस उपाधीक्षक समेत सात अन्य सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ सुबह करीब आठ बजे शुरू हुई, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के एक समूह के खिलाफ अभियान तेज किया। माना जा रहा है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान में स्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान भीषण गोलीबारी और विस्फोट हुए। कई स्थानीय युवक भारी हथियारों और गोला-बारूद को जंगल के अंदर ले जाने में सुरक्षा बलों की मदद करते देखे गए।
अधिकारियों ने बताया कि राजबाग के घाटी जूथाना क्षेत्र में जखोले गांव के पास हुई मुठभेड़ में लगभग पांच आतंकवादियों का एक समूह शामिल था और शुरुआती गोलीबारी में तलाशी दल का नेतृत्व कर रहे उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के नेतृत्व में सेना और सीआरपीएफ की सहायता से की गई कार्रवाई में तीन आतंकवादी ढेर हो गए। इस दौरान एक उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) समेत तीन सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर मुठभेड़ स्थल के पास फंस गए, जो घने पेड़ों से घिरे एक नाले के पास है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एसडीपीओ (डीएसपी रैंक के अधिकारी) को देर शाम घटनास्थल से निकाल लिया गया, जबकि उनके तीन निजी सुरक्षा अधिकारी मृत पाए गए। उन्होंने बताया कि एक अन्य लापता पुलिसकर्मी के बारे में तत्काल पता नहीं चल पाया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलिसकर्मियों की मौत की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है।
पुलिस ने कहा है कि शुक्रवार सुबह घटनास्थल पर पहुंचने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने रात में अभियान रोक दिया है, इसलिए अभी तक आतंकवादियों के शव बरामद नहीं किए जा सके हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुबह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा, क्योंकि माना जा रहा है कि इलाके में दो और आतंकवादी घिरे हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि माना जा रहा है कि वे भी मारे गए हैं, लेकिन ड्रोन से उनके शव नहीं मिल पाए हैं। एसडीपीओ के अलावा दो और पुलिसकर्मियों को कठुआ अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। सेना के दो जवान भी घायल हुए हैं और उन्हें सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। -
संसद में नवीन जिंदल ने उठाया अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड तेलों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों का मुद्दा
स्वस्थ भारत की ओर...रिफाइंड तेलों और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड पर सख्त नियम जरूरी : नवीन जिंदल
जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा जरूरी : संसद में नवीन जिंदल ने की रिफाइंड तेल और प्रोसेस्ड फूड पर कानूनों को और सख्त करने की अपील
रायपुर। सांसद नवीन जिंदल ने संसद में रिफाइंड तेलों और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सख्त नियमन, पारदर्शिता, और उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि जनता को स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार मिले।
श्री नवीन जिंदल द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु:
✅ रिफाइंड बीज तेलों के दुष्प्रभाव: कई अध्ययनों से पता चला है कि बार-बार किए गए रिफाइनिंग प्रोसेस के कारण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और हानिकारक ट्रांस फैट उत्पन्न होते हैं, जिससे हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
✅ अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का खतरा: इन खाद्य उत्पादों में अत्यधिक कैमिकल प्रिसरवेटिव, और हानिकारक फैट होते हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देते हैं।
✅ स्पष्ट लेबलिंग की कमी: उपभोक्ता अक्सर भ्रामक पैकेजिंग और लेबलिंग के कारण यह समझ ही नहीं पाते कि वे क्या खा रहे हैं।
कानूनों को और सख्त करना जरूरी
???? स्पष्ट खाद्य लेबलिंग अनिवार्य की जाए: श्री जिंदल ने सरकार से आग्रह किया कि खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट रूप से बताया जाए कि वे रिफाइंड तेलों का उपयोग करते हैं या अल्ट्रा प्रोसेस्ड श्रेणी में आते हैं।
???? ‘White Paper’ जारी करने की मांग: उन्होंने सरकार से रिफाइंड तेल और अल्ट्रा प्रोसेस्ड पदार्थों के स्वास्थ्य पर प्रभावों को लेकर एक वाईट पेपर प्रकाशित करने की मांग की, ताकि इस विषय पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गहन अध्ययन हो सके।
???? स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा: पारंपरिक और कोल्ड-प्रेस्ड तेलों, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
श्री नवीन जिंदल ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नागरिकों का स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरकार से उपभोक्ताओं को छिपे हुए स्वास्थ्य खतरों से बचाने और एक प्रभावी खाद्य नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।
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बेंगलुरु/ छत्तीसगढ़ को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए Keynes Technology के प्रमुख राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की और आईटी व इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश की योजना प्रस्तुत की। कंपनी उन्नत तकनीक, डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर काम करती है। राजेश शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सरकार की नई औद्योगिक नीति और अनुकूल वातावरण के कारण राज्य में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने यहां नवाचार (Innovation) और स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा देने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने Keynes Technology के इस प्रस्ताव का स्वागत किया और राज्य में नई तकनीकी इकाइयों को स्थापित करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया। इससे छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई नौकरियों और आधुनिक तकनीक सीखने के अवसर मिलेंगे, जिससे राज्य तकनीकी क्षेत्र में एक नया केंद्र बन सकेगा।
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बेंगलुरु/ छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख उद्योगपति मनोज अग्रवाल, जो Punit Creations के प्रमुख हैं, ने राज्य में निवेश का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ को टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
मनोज अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में श्रमशक्ति (लेबर) और अनुकूल औद्योगिक माहौल की वजह से टेक्सटाइल उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार की नीतियों के तहत यदि किसी उद्योग में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है, तो सरकार अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान करेगी। इस पहल से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में काम करने के बेहतर अवसर मिलेंगे। -
बेंगलुरु/छत्तीसगढ़ में हरित ईंधन के क्षेत्र में निवेश को लेकर उद्योग जगत की दिलचस्पी बढ़ रही है। बेंगलुरु में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से GPRS Arya Pvt. Ltd. के दीपक अग्रवाल ने मुलाकात कर बताया कि उनकी कंपनी राज्य में पराली से Compressed Bio-Gas (CBG) बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में CBG प्लांट लगाने की योजना है, जिससे किसानों को फसल अवशेषों से अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
कंपनी ने हाल ही में बेमेतरा जिले में इंडियन ऑयल के साथ मिलकर एक CBG प्लांट स्थापित किया है, जो अब पूरी तरह से कार्य करने की दिशा में है। दीपक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस परियोजना के सफल होने के बाद वे छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को अपनाना चाहते हैं। इस पहल से जैविक ईंधन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के तहत जैविक ईंधन और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस बैठक में उद्योग जगत के अन्य प्रतिनिधियों ने भी छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर उत्सुकता जताई। -
छत्तीसगढ़ सरकार ने नैसकॉम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा
नई दिल्ली/ छत्तीसगढ़ जल्द ही आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार और नैसकॉम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ है, जिससे छत्तीसगढ़ में कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में नैसकॉम के उपाध्यक्ष श्रीकांत श्रीनिवासन व अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की और राज्य की कौशल विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि रायपुर देश का ऐसा प्रमुख शहर है, जहां आईआईटी, एनआईटी, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, जो उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल युवा तैयार कर रहे हैं।
नया रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां कई आईटी कंपनियों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। सरकार बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर नया रायपुर को एक प्रमुख टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत आईटी और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्किलिंग प्रोग्राम के माध्यम से कॉलेज के विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि अभी तक 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की औद्योगिक नीति की सफलता को दर्शाता है। इस बैठक के दौरान दिल्ली, मुंबई और रायपुर में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में मिले सकारात्मक प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई।










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