महाराष्ट्र मंडल के समर कैंप में जुंबा डांस, गीत- संगीत, गेम्स सहित सभी कुछ
0 संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में 18 से शुरू हो रहा 10 दिवसीय ग्रीष्मकालीन बाल शिविर
रायपुर। ग्रीष्मकालीन अवकाश का बच्चों के लिए बेहतरीन उपयोग हो सके और उन्हें उनकी पसंद की विभिन्न विधाओं में पारंगत बनाया जा सके, इसी उद्देश्य से महाराष्ट्र मंडल अपनी संत ज्ञानेश्वर शाला में 18 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन शिविर लगाने जा रहा है। इस 10 दिवसीय शिविर में संत ज्ञानेश्वर स्कूल के अलावा बाहर के शालेय बच्चे भाग ले सकते हैं।
शाला प्रभारी परितोष डोनगांवकर ने बताया कि सुबह 8:30 से 10:30 तक लगने वाले शिविर में बच्चे आर्ट एंड क्राफ्ट, ड्राइंग एंड पेंटिंग, जुंबा डांस, गीत- संगीत, वैदिक गणित, स्पोकन इंग्लिश, स्पोर्ट्स एंड गेम्स और फायरलैस कुकिंग में से अपनी पसंद के दो सेगमेंट में भाग लेकर उसमें भरपूर एंजॉय कर सकते हैं। परितोष के अनुसार गेम्स में वॉलीबॉल, बास्केट बॉल, क्रिकेट व इनडोर गेम्स में शतरंज, कैरम से लेकर चाइनिस चेकर तक के खेलों की सुविधाएं बच्चों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
समर कैंप प्रभारी अपर्णा आठले ने जानकारी दी कि शिविर में सभी आठ सेगमेंट के अलग- अलग प्रशिक्षक- प्रशिक्षिका होंगे। प्रतिदिन कैंप की शुरुआत बच्चों के मेडिटेशन करने व विविध मंत्रोच्चार के साथ होगी। समापन समारोह में शिविर का हर एक प्रशिक्षार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन ड्राइंग, पेंटिंग, आर्ट- क्राफ्ट, फायरलैस कुकिंग आदि की प्रदर्शनी लगाकर अतिथियों सहित अपने अभिभावकों को बताएंगे कि शिविर में आखिर उन्होंने क्या सीखा है।
प्राचार्य मनीष गोवर्धन के मुताबिक शिविर का प्रियदर्शिनी नगर, राजेंद्र नगर, वल्लभ नगर, टैगोर नगर, अमलीडीह सहित आसपास के क्षेत्रों व सोशल मीडिया में प्रचार- प्रसार जोरशोर से जारी है। समर कैंप को लेकर बच्चों सहित उनके अभिभावकों में उत्सुकता है। इसे लेकर लगातार बढ़ रही पूछताछ के बीच अनेक बच्चों ने शिविर में शामिल होने के लिए अपना पंजीयन करा लिया है। प्राचार्य ने बताया कि शिविर के समापन समारोह में उन्हीं बच्चों की गीत- संगीत, जुंबा डांस आदि की प्रस्तुतियां होंगी, जिन्होंने समर कैंप में शामिल होकर अपने शौक को जुनून में बदला।
शाला के सह प्रभारी नवीन देशमुख ने बताया कि 10 दिवसीय शिविर में यदि खराब मौसम जैसी स्थिति निर्मित होती है, तो भी बच्चों के आउटडोर गेम्स को निरस्त कर इनडोर गेम्स की व्यवस्था पहले से ही तैयार रहेगी। कम ही शिविरों में वैदिक गणित का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह विद्यार्थी व व्यावहारिक जीवन में उपयोगी भी है। समापन कार्यक्रम में ऐसे बच्चों को भी वैदिक गणित को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

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