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पद्म पुरस्कार विजेता समाज सेविका फूलबासन के अपहरण की कोशिश नाकाम

राजनांदगांव/ जिले की पुलिस ने पद्मश्री से सम्मानित समाज सेविका फूलबासन बाई यादव के अपहरण की कथित कोशिश के आरोप में दो महिलाओं समेत तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यादव को कथित तौर पर तीनों आरोपियों ने राजनांदगांव जिले से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सुकुलदैहान गांव में उनके घर से अगवा कर लिया था, लेकिन पुलिस ने राजनांदगांव-खैरागढ़ मार्ग पर नियमित जांच के दौरान उन्हें रोक लिया। उन्होंने बताया कि शुरूआती जांच के अनुसार आज सुबह लगभग 10.30 बजे बेमेतरा निवासी एक महिला अपने दो साथियों के साथ सुकुलदैहान गांव स्थित फुलबासन के घर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि महिला ने घर के बाहर खड़ी एक कार में बैठी दिव्यांग महिला के साथ सेल्फी लेने के बहाने यादव को बाहर बुलाया और उन्हें गाड़ी में बिठा लिया। जैसे ही वह गाड़ी में बैठीं, दरवाजे बंद कर दिए गए और कार तेजी से आगे बढ़ गई। उन्होंने बताया कि कुछ दूरी तय करने के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर उनके हाथ बांध दिए और कपड़े से उनका मुंह बंद कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि इसी बीच, खैरागढ़ सड़क पर चिखली पुलिस चौकी के पास नियमित जांच कर रही ट्रैफिक पुलिस की एक टीम ने कार को रोक लिया। उन्होंने बताया कि हाथ और मुंह बंधे हुए महिला को देखकर पुलिसकर्मियों को शक हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर यह दावा करके पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की कि वह मिर्गी की मरीज है, लेकिन पुलिसकर्मियों में से एक ने यादव को पहचान लिया। बाद में पुरुष वाहन चालक सहित तीनों आरोपियों को पुलिस चौकी लाया गया और बाद में सुकुलदैहान पुलिस चौकी में पुलिस अधिकारियों को सौंप दिया गया। राजनांदगांव के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) अलेक्जेंडर किरो ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ और मामले की जांच जारी है। शुरुआती पूछताछ से पता चला है कि मुख्य आरोपी महिला एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है और पिछले चार से पांच महीनों से यादव के संपर्क में थी। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे संकेत भी मिले हैं कि बेमेतरा क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह समूहों को रोजगार प्रशिक्षण के नाम पर लामबंद किया जा रहा था और उनसे अवैध वसूली की जा रही थी। उन्होंने बताया कि अपहरण के कारणों के बारे में जानकारी जांच के बाद ही मिल सकेगी।
यादव को वर्ष 2012 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2001 में, उन्होंने छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह बनाना शुरू किया और महिलाओं को छोटी बचत करने की आदत अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। अब उनके संपर्क में लगभग दो लाख महिलाएं शामिल हैं, जो समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण की पहलों के साथ-साथ जल और पर्यावरण संरक्षण तथा जैविक खेती जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। उन्हें कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।

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