प्राचीन काल में गणराज्य किसे कहते थे
प्राचीन काल में भारत में राज्यों के साथ-साथ गणों के अधीन राज्यों की भी बड़ी सुदृढ़ परंपरा थी। ये गणराज्य पश्चिम, उत्तर-पूर्व ,तराई और राजस्थान तक फैले हुए थे। क्षुद्रक और मालव गणराज्यों ने सिकंदर का जोरदार विरोध करके उसे घायल कर दिया था। श्रीकृष्ण का जन्म अंधक-वृष्णियों के गणराज्य में हुआ था। गौतम बुद्ध भी शाक्यगण राज्य में पैदा हुए थे। लिच्छवियों का गणराज्य, जिसकी राजधानी वैशाली थी, सबसे शक्तिशाली था। गौतम बुद्ध के समय के प्रमुख गणराज्य थे- लिच्छवि, वृज्जि। विदेह,शाक्य,मल्ल,कोलिय,मोरिय, बलि, भग्ग आदि। धीरे-धीरे राजाधीन राज्यों ने भी इन्हें आत्मसात कर लिया। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के बाद, जो स्वयं मालवगण राज्य का प्रमुख था, गणों का युग समाप्त हो गया।
गणों की इकाई कुल थी जिसका एक व्यक्ति गणसभा का सदस्य होता था। गणसभा में शलाकाओं द्वारा मतदान करके निर्णय लिया जाता था। महाभारत में राजाधीन और गणाधीन शासन का उल्लेख मिलता है। राजाधीन राज्य में सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में रहती थी जबकि गणाधीन राज्य में प्रत्येक परिवार का एक -एक राजा या कुलवृद्ध होता था, जो गणसभा के सदस्य के रूप में शासन व्यवस्था चलाने में भाग लेता था। नियम-निर्माण का दायित्व गणसभा के ऊपर होता था, नियमों को लागू करने के लिए अंतरंग अधिकारी नियुक्त किए जाते थे।






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