डायबिटिक मरीजों को हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा क्यों होता है?
डायबिटीज शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है जिनमें से एक नुकसान है हड्डियों की बीमारी होना या हड्डियों का समय से पहले कमजोर होना। कई बार आपने नोटिस किया होगा कि कुछ लोग 30 या 40 की उम्र में आते-आते हड्डियों के दर्द या गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते हैं। दरअसल इसके पीछे डायबिटीज हो सकती है। डायबिटीज हड्डियों की मजबूती को प्रभावित करती है। स्टडी कहती है कि जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज होता है उनमें बोन मिनरल डेंसिटी सामान्य होने के बाद भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। आगे जानेंगे कि डायबिटीज हड्डियों की सेहत को क्यों और कैसे खराब कर सकती है?
डायबिटिक मरीजों में हड्डियों की समस्या क्यों होती है?
जब शुगर लेवल लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो शरीर के टिशूज में कई तरह के बदलाव होते हैं जिसका असर हड्डियों की संरचना पर पड़ सकता है। साथ ही लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर लेवल से हड्डियों में मौजूद कोलेजन भी प्रभावित हो सकता है जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इंसुलिन की कमी या प्रतिरोध भी हड्डियों पर बुरा असर डालती है। साल 2024 में Metabolism Open में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अगर ब्लड शुगर लेवल लंबे समय तक बढ़ा हुआ है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन से हड्डियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे हड्डियों की संरचना और गुणवत्ता पर बुरा असर होता है और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
क्रॉनिक डायबिटीज से हड्डियां हो सकती हैं कमजोर
साल 2025 में Diabetology में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, क्रॉनिक डायबिटीज यानी जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज है और शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं है, उनमें हड्डियों की समस्याएं होने का खतरा ज्यादा होता है। क्रॉनिक डायबिटीज के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
डायबिटीज में हड्डियों से जुड़ी कॉमन समस्याएं
1. फ्रोजन शोल्डर
डायबिटिक मरीजों में होने वाली कॉमन समस्या में से एक है फ्रोजन शोल्डर। इसमें कंधे के कैप्सूल में शुगर मॉलिक्यूल्स जमा हो जाते हैं। इससे शोल्डर की मोबिलिटी कम हो जाती है जिसके कारण हाथ उठाने में तकलीफ होती है। इससे बचने के लिए शुगर को कंट्रोल करना जरूरी है। मोबिलिटी बढ़ाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।
2. पेरिफेरल न्यूरोपैथी
शुगर लेवल जब कंट्रोल में नहीं होता है, तो नसों पर इसका बुरा असर पड़ता है जिसके कारण झुनझुनी महसूस होती है। पेरिफेरल न्यूरोपैथी से बचाव के लिए सिंकाई या दवाओं का सहारा लेने के बजाय जांच कराएं और शुगर की दवाएं लें।
3. हाथ और पैरों में सूजन
हाई शुगर लेवल के कारण हाथ और पैरों की उंगलियों में सूजन हो जाती है जिसके कारण हाथ या पैर की उंगलियां स्टिफ हो जाती हैं और दिनचर्या प्रभावित होती है।
4. चारकोट न्यूरोपैथी
पैरों के ज्वॉइंट में होने वाली कॉमन समस्या है चारकोट न्यूरोपैथी (Charcot Neuroarthropathy)। यह डायबिटिक मरीजों में अधिक देखी जाती है। जब शुगर लेवल बढ़ता है, तो ज्वॉइंट्स पर इसका बुरा प्रभाव देखने को मिलता है।
5. ऑस्टियोपोरोसिस
डायबिटिक मरीजों में अक्सर हड्डियों के जल्दी-जल्दी घिसने की समस्या देखी जाती है। इसके कारण हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द होता है।
ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना जरूरी है
-डायबिटीज में हड्डियों की समस्याओं से बचने के लिए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना जरूरी है। शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए नियमित जांच कराएं और शुगर लेवल मॉनिटर करें।
-डायबिटीज है, तो दवाओं का सेवन समय पर करें।
-भोजन में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम को शामिल करें।
-नियमित एक्सरसाइज जरूरी है। वॉकिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज करें। इससे मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होंगी।
-धूम्रपान और अल्कोहल के सेवन से बचें। इससे ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है।
-पैरों की सेंसिटिविटी कम होने पर ध्यान दें और तुरंत चेकअप करांए।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
-अगर बार-बार हड्डियों या जोड़ों में दर्द हो।
-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट महसूस हो।
-बार-बार फ्रैक्चर होना।
-चलने या हाथ-पैरों से काम करने में तकलीफ होना।
निष्कर्ष:
फ्रोजन शोल्डर, पेरिफेरल न्यूरोपैथी, हाथ और पैरों में सूजन, चारकोट न्यूरोपैथी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी कंडीशन डायबिटीज में मरीजों में ज्यादा कॉमन होती हैं। डायबिटीज में हाई शुगर लेवल, कोलेजन पर असर, इंसुलिन की कमी या प्रतिरोध से हड्डियों पर बुरा असर पड़ता है। हड्डियों में दर्द, सूजन, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बचाव के लिए समय-समय पर शुगर जांच कराएं और ब्लड शुगर लेवल को मॉनिटर करें। पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम लें और एक्सरसाज को प्राथमिकता दें। डायबिटीज में धूम्रपान और अल्कोहल से पूरी तरह परहेज करें।









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