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  मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन और चटिया मिल से संवरी लच्छंतीन बाई की जिंदगी

-बिहान से बनीं सफल महिला उद्यमी
 कांकेर। बिहान (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जिले के स्व-सहायता समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं तथा उनके जीवन को नई दशा और दिशा दी है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कराठी निवासी श्रीमती लच्छंतीन बाई दरपट्टी आज महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। वह तुलसी स्व सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं, जो महिला शक्ति संकुल संगठन कन्हारगांव से जुड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय से लगभग 08 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में ‘बिहान’ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है।
श्रीमती लच्छंतीन बाई ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में बहुत परेशानी होती थी तथा परिवार को कठिन समय में आर्थिक मदद नहीं मिल पाती थी। थोड़े से पैसे के लिए उन्हें अक्सर दूसरे लोगों से ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था। खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी का अभाव था और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का सपना केवल सपना ही बनकर रह गया। इस दौरान उन्हें बिहान योजना के बारे में पता चला, वहां 10 दीदी मिलकर एक समूह गठन कर बचत करते हैं और जरूरत के समय वहीं से आसानी से ऋण भी मिल जाती है। गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने स्व सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद नियमित बैठक एवं बचत करना शुरू किया। अब जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से समूह के माध्यम से ऋण मिलने लगा, जिससे दूसरों पर निर्भरता समाप्त हो गई। उन्हें चक्रीय निधि एवं प्रोत्साहन राशि का लाभ मिला है। आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने के लिए बैंक से 01 लाख 20 हजार रुपये का ऋण भी प्राप्त हुआ। अब मैं बैंक से लेन-देन आसानी से कर रही हूॅ। इस दौरान बिहान के बीपीएम द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया गया। अधिकारियों के माध्यम से उन्हें मुद्रा ऋण की जानकारी मिली और बैंक से आवश्यक सहायता प्राप्त हुई। आज मैं चटिया मिल (लघु प्रसंस्करण इकाई), मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन, कृषि कार्य जैसे विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हूॅ। इन गतिविधियों से लगभग 12 हजार रुपये प्रतिमाह तथा करीब 01 लाख 45 हजार रूपये वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बच्चों की शिक्षा बेहतर ढंग से हो रही है, इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। लच्छंतीन बाई आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की प्रेरणा स्रोत बन गई है।

 

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