बारिश में पाचन शक्ति कमजोर होने पर पंचकर्म श्रेष्ठ: डॉ. ब्राह्मणे
- महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद डॉ. ब्राह्मणे ने जोर देकर कहा- बारिश में बढ़ता है वात दोष, सावधान रहें
रायपुर। बारिश के दिनों में लोगों का स्वास्थ्य खराब होना आम बात है। ज्यादातर लोग सर्दी, खांसी, बुखार जैसी वायरल बीमारियों से पीड़ित होते हैं और डाॅक्टरी सलाह या तत्काल राहत पाने के लिए खुद ही एलोपैथिक मेडिसिन लेकर खा लेते हैं। उन लोगों को यह बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि बारिश के मौसम में बीमार होने का सबसे बड़ा कारण खानपान में लापरवाही होता है। मानसून में ज्यादा वसायुक्त भोजन कहीं न कहीं बीमारियों को न्यौता देता है। वहीं आयुर्वेद के अनुसार बारिश के दिनों में लोगों में वात दोष की शिकायत बढ़ जाती है और पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है। इस समय शरीर में रोगों की आशंका अधिक रहती है। इसलिए आयुर्वेद में बारिश के मौसम में पंचकर्म, विशेषकर बस्ती कर्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। महाराष्ट्र मंडल की सभासद और जनरल फिजिशियन, आयुर्वेद तज्ञ, गर्भ संस्कार कोच डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने सेहत को लेकर इस आशय कीमत जानकारी दी।
डॉ. पपीता के अनुसार आमतौर पर लोग पंचकर्म के लिए तभी आते हैं, जब उनकी समस्या ज्यादा बड़ी या एलोपैथिक दवायों से मिली राहत से वे संतुष्ट नहीं होते। पंचकर्म आयुर्वेद की एक विशेष शोधन (डिटाॅक्सीफिकेशन) और शुद्धिकरण चिकित्सा है, जिसका उद्देश्य शरीर में संचित दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करना व विषैले पदार्थों (आम) को बाहर निकालना है। पंचकर्म केवल शरीर की सफाई ही नहीं करता, बल्कि रोगों की रोकथाम, उपचार तथा स्वास्थ्य संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. पपीता ने बताया कि पंचकर्म के पांच प्रमुख प्रकार हैं, जैसे वमन यानी कफ दोष का शोधन, विरेचन मतलब पित्त दोष का शोधन, बस्ती से वात दोष का प्रमुख उपचार होता है। वहीं नस्य से नाक के माध्यम से सिर एवं गर्दन के रोगों का उपचार और रक्तमोक्षण के माध्यम से चयनित रोगियों के दूषित रक्त का शोधन किया जाता है। पंचकर्म वात दोष को संतुलित करता है। शरीर से विषैले तत्व (आम) बाहर निकालता है। जोड़ों एवं कमर के दर्द में लाभकारी। इम्युनिटी पावर बढ़ाता है और पाचन शक्ति में सुधार करता है।
मानसून में हल्का व ताजा भोजन ही करें।
डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने कहा लोगों को स्वस्थ्य रहने के लिए बारिश के दिनों में अपने भोज्य पदार्थों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बारिश के दिनों में हल्का और ताज़ा भोजन करें। मूंग दाल की खिचड़ी, गरम सूप, पुराना चावल और गेहूँ, उबला या गुनगुना पानी, अदरक, जीरा, धनिया, हल्दी, काली मिर्च जैसे मसालों का सीमित उपयोग, मौसमी सब्जियां अच्छी तरह पका कर खाना चाहिए। इन दिनों बासी भोजन, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन, ठंडे पेय एवं बर्फ, अत्यधिक दही (विशेषकर रात में), फास्ट फूड एवं जंक फूड, अधिक मिठाई एवं भारी भोजन से परहेज करना चाहिए।











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