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रायपुरवासियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना राष्ट्रीय आम महोत्सव

-आम की विभिन्न किस्मों को देखने उमड़ पड़े लोग

-तीन दिवसीय आम महोत्सव का कल होगा समापन

 रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, छत्तीसगढ़ शासन तथा प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 जून तक आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम की 325 से ज्यादा किस्में प्रदर्शनी हेतु लगाई गई है। महोत्सव में सुगंधित और रसीले आमों की जो प्रदर्शनी लगाई गई है उसे प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से और देश के विभिन्न हिस्सों से लाया गया है। इनमें दशहरी, लंगड़ा, हापुस, केशर, नीलम, चौसा, माल्दा, फजली, सुंदरजा, नूरजहां, हिमसागर, बॉम्बे ग्रीन, गुलाब खास, जंबो रेड, अल्फांजो, कोकोनट क्रीम, बैगनफली जैसे अन्य देसी किस्मों के आम शामिल हैं। इसके अलावा मियाजाकी, थाई बनाना, रैड पामर जैसी आम की विदेशी किस्में भी शामिल हैं। प्रदर्शनी में हाथीझूल किस्म की आम ने लोगों का आकर्षण खींचा। यह सामान्य आम से लगभग 5 गुना बड़ा होता है। इस किस्म के एक आम का वजन ही लगभग तीन किलो तक होता है। इसका उत्पादन ज्यादातर बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर में होता है। इसकी कीमत 150 से 200 रूपये प्रति किलो होती है। इसके अतिरिक्त आम की अनेक देशी किस्मों को भी प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रीय आम महोत्सव में निर्मित सेल्फी जोन युवाओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

राष्ट्रीय आम महोत्सव में 56 प्रकार के आम से बने व्यंजनों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है। इनमें आम सेवई, आम मिलेट खीर, आम मफिन्नस, आम-नारियल का लड्डू, आम पापड़, आम का आचार, आम का कराची हल्वा, कुल्फी, फिरनी, चटनी, लौंजी, कैंडी, आम-साबूदाना की खीर आदि व्यंजन बनाए गए हैं। सजावट प्रतियोगिता में छात्रों ने आम को रोबोट, फूल, घड़ी आदि के रूप में सजाया गया है। कुकिंग प्रतियोगिता में महिला प्रतिभागियों ने आम से कैरी, कटलेट और मैंगो पुडिंग सहित अन्य व्यंजन बनाए। आम महोत्सव में एक आम जिसने हर किसी का ध्यान खींचा वो है मियाजाकी। इसका उत्पादन जापान में होता है, जिसकी कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 2 लाख 70 हजार रूपये प्रति किलो है। मियाजाकी आम का वजन करीब 350 ग्राम होता है। इसमें शरीर के लिए जरूरी एंटी आक्सीडेंट, फोलिक एसिड, बीटा-केरोटिन जैसे तत्व पाए जाते हैं। कापोरेट वर्ल्ड में इसका उपयोग भेंट करने में ज्यादा होता है। महोत्सव में थाई बनाना, रैड पामर जैसी आम की विदेशी किस्में भी प्रदर्शनी में रखी गई है। 

 

महोत्सव के दूसरे दिन गुरूवार को आम उगाने वाले कृषक और आम की खेती में रूचि रखने वालों के लिए 12 बजे से 4 बजे तक तकनीकी कार्यशाला एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया था। कार्यशाला में आम की उन्नत खेती की तकनीक, आम उत्पादन में आने वाली समस्याओं तथा उनके निराकरण के संबंध में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जानकारी दी गई तथा किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। इस तीन राष्ट्रीय आम महोत्सव का कल समापन किया जाएगा। 

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