राम मंदिर ट्रस्ट बनाएगा पुजारियों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन संस्थान
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हिंदू पुजारियों (अर्चकों) के प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए एक स्थायी संस्थान स्थापित करने का फैसला किया है। ट्रस्ट का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत ही नहीं, विदेशों में भी प्रशिक्षित पुजारियों की बढ़ती मांग को पूरा करना है। यह कदम न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी हिंदू समुदायों में योग्य 'अर्चक' (पुजारियों) की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है। अयोध्या में ट्रस्ट की बैठक के बाद 22 जुलाई को लिए गए इस निर्णय के तहत यहां एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा, जहां हिंदू धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और पूजा-पद्धतियों का औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही पुजारियों को ट्रस्ट का प्रमाणपत्र मिलेगा। इसी बैठक में मंदिर के धार्मिक मामलों की निगरानी के लिए नौ सदस्यीय संत समिति गठित करने का भी फैसला किया गया। राम वल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास ने कहा कि देशभर के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ट्रस्ट का यह संस्थान इस कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, "ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा है कि प्रशिक्षण केंद्र लगातार स्थायी रूप से काम करेंगे। देश भर के मंदिरों, मठों और प्रमुख धार्मिक संस्थानों में व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित अर्चकों की ज़रूरत है, चाहे वे देवी भगवती, भगवान राम या भगवान कृष्ण के मंदिर हों।" उन्होंने कहा, "अगर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तहत ऐसा कोई ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाता है, तो यह ज़रूरत पूरी करने में बहुत मददगार साबित होगा। कोशिश यह होगी कि देश के हर हिस्से तक काबिल पुजारी और आचार्य पहुंच सकें।" विदेशों में बसे भारतीयों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय मूल के यशू यादव ने कहा कि अमेरिका समेत कई देशों में हिंदू समुदाय तेजी से बढ़ रहा है और धार्मिक अनुष्ठानों, गृह प्रवेश, नामकरण व अन्य संस्कारों के लिए प्रशिक्षित पुजारियों की मांग लगातार बढ़ रही है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में रहने वाले हर्षित जोशी ने कहा कि वहां हिंदू आबादी बढ़ने के बावजूद प्रशिक्षित पुजारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, अयोध्या ट्रस्ट की पहल भविष्य में विदेशों में भी योग्य पुजारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करेगी। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब कई शिक्षण संस्थान भी कर्मकांड और पुरोहित प्रशिक्षण से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू कर चुके हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय और कानपुर देहात का श्री राम जानकी संस्कृत महाविद्यालय पहले से इस दिशा में प्रशिक्षण दे रहे हैं। ट्रस्ट के अनुसार, प्रस्तावित संस्थान का लक्ष्य प्रशिक्षित और प्रमाणित पुजारियों का ऐसा समूह तैयार करना है, जो भारत और विदेशों में मंदिरों तथा श्रद्धालुओं की धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इससे अयोध्या की पहचान धार्मिक शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में भी मजबूत होगी।


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