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 "जीवन दौड़ने का नहीं, महसूस करने का नाम"

0- मेरी जापान डायरी- डा. अभया जोगेलेकर
रायपुर। हम सब केवल अपनी इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं और संघर्षों में इतने उलझ जाते हैं, जीवन की सरल सुंदरता को भूल जाते हैं। जीवन केवल दौड़ने का नाम नहीं, महसूस करने का भी नाम है। प्रकृति की सुंदरता, अपने भीतर की शांति और उन क्षणों का आनंद जो हमें वास्तव में जीवित महसूस कराते हैं। यह सब मैंने जापान में महसूस किया, क्‍योंकि यहां आकर मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।   
थॉमस कुक के साथ हमारी जापान यात्रा की 22 से होकर 31 मार्च तक थी। 22 मार्च की सुबह जब टोक्यो की गलियों में कदम रखा, तो महसूस हुआ कि यहां की हवा में एक अजीब सी ताजगी थी, जैसे हर सांस में कोई नई शुरुआत छिपी हो। सड़कों के किनारे खिलते चेरी ब्लॉसम (जापानी लोग इसे सकुरा कहते हैं) पेड़ों ने पूरे शहर को गुलाबी और सफेद रंगों से रंग दिया था। ऐसा लग रहा था मानो आसमान ने खुद धरती पर उतरकर फूलों की चादर बिछाई हो।
हर पंखुड़ी हवा में तैरती हुई किसी कहानी का हिस्सा लग रही थी। बच्चे नौजवान, बूढ़े और हम जैसे सैलानी इस अद्भुत नज़ारे को देख रहे थे। हमारे गाइड ने बताया इन पेड़ों पर पहले गुलाबी रंग के फूल लगते हैं। यही बाद में सफ़ेद रंग में बदल जाते है और अंत में सफ़ेद फूलों के झड़ने के बाद इनमें हरी पत्तियां आती हैं। कुछ पेड़ गुलाबी, कुछ सफ़ेद और कुछ ऐसे पेड़ जिनमें पट्टियां आ रही थी, ये दृश्य देखने में मजा आ रहा था। इन पेड़ों के नीचे बच्चे खेल रहे थे और हम जैसे उत्साही लोग सेल्फी लेकर यादें संजोने का काम कर रहे थे और वहां के बुजुर्ग शांत मन से उस सुंदरता को निहार रहे थे। यह सिर्फ एक मौसम का नजारा नहीं था, यह जीवन का उत्सव था। एक तरह से क्षणभंगुरता में भी सुंदरता खोजने का प्रतीक।
यूएनई पार्क, दागोजी टेम्पल, हकोने, क्योटो और हिरोशिमा में बैठकर जब उन फूलों को गिरते देखा, तो मन में केवल एक ही विचार आया शायद यही “अल्टीमेट ब्लॉसम” है। वह क्षण जब फूल अपनी पूरी सुंदरता में खिलता है और फिर बिना किसी पछतावे के हवा में बिखर जाता है। जीवन भी तो कुछ ऐसा ही है... खिलना, मुस्कुराना, और फिर समय के साथ सहजता से आगे बढ़ जाना।
उन सभी स्थानों में जहां- जहां हमने सकुरा को खिलते हुए देखा... सुबह हो या शाम, जब सूरज का उदय हो रहा हो या फिर सूरज ढल रहा था और चेरी ब्लॉसम की पंखुड़ियां सुनहरी रोशनी में चमक रही थीं, तब महसूस हुआ कि जापान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक भावना है सादगी, अनुशासन और क्षणिक सुंदरता की भावना।
यह अध्याय मेरे सफर की शुरुआत था, जहां हर फूल ने मुझे सिखाया कि सुंदरता स्थायी नहीं होती, पर उसकी यादें हमेशा दिल में खिली रहती हैं। जीवन के भाग दौड़ में कुछ पल अपने लिए अपनों के बीच संजोने का अवसर सदा यादगार रहेगा।
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