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सरकार ने सिल्वरलाइन परियोजना रद्द करने का फैसला किया है : मुख्यमंत्री सतीशन

तिरुवनंतपुरम. केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ने सिल्वरलाइन सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है। यह पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना थी।
   सतीशन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचनाएं वापस ले ली जाएंगी। मुख्यमंत्री ने उनकी अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि सरकार सिल्वरलाइन परियोजना का विरोध करने वालों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की सिफारिश भी करेगी। हालांकि यह अदालत के निर्णय के अधीन होगा। सतीशन ने संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में कहा, ''मंत्रिमंडल ने तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक प्रस्तावित सेमी-हाई स्पीड रेल गलियारा परियोजना 'सिल्वरलाइन' को रद्द करने का फैसला किया है।'' वाम मोर्चा सरकार की 530 किलोमीटर लंबी सिल्वरलाइन परियोजना को 'के-रेल' द्वारा तैयार किया गया था, जो केरल सरकार और रेल मंत्रालय का एक संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के दो छोरों पर स्थित जिलों के बीच यात्रा समय को घटाकर केवल चार घंटे करना था। इस परियोजना के खिलाफ पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिनका नेतृत्व कांग्रेस ने किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि परियोजना को अधर में छोड़ दिया गया था और भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचित जमीनों से संबंधित कोई लेनदेन नहीं हो पा रहा था जिससे आम लोग प्रभावित हो रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा परियोजना छोड़ दिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने भी इसे मंजूरी नहीं दी। सतीशन ने कहा कि इसी कारण परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी विज्ञापनों को निरस्त किया जाएगा। परियोजना के विरोध को लेकर विभिन्न अदालतों और पुलिस थानों में लंबित मामलों की जांच गृह विभाग करेगा और उन्हें वापस लेने की सिफारिश करेगा। उन्होंने कहा, ''उन्हें वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति जरूरी होगी।''
 उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पीले कंक्रीट मार्कर हटाए जाएं। सतीशन ने कहा कि यूडीएफ किसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के खिलाफ नहीं है बशर्ते उससे केरल पर वित्तीय या पर्यावरणीय बोझ न पड़े। उन्होंने कहा, ''हमने सिल्वरलाइन का विरोध इसलिए किया था क्योंकि इसके पास उचित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तक नहीं थी। यदि इसे लागू किया जाता तो यह पर्यावरणीय आपदा साबित होती क्योंकि 300 किलोमीटर तक 30 फुट ऊंचे तटबंध और अन्य 200 किलोमीटर तक 10 फुट ऊंची दीवारें बनाने की योजना थी।'' उन्होंने तर्क दिया, ''मानसून के दौरान यह पर्यावरणीय आपदा में बदल जाता। यह टिकाऊ परियोजना नहीं थी।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञों से चर्चा के बाद यूडीएफ इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि यह परियोजना व्यवहारिक नहीं है। सतीशन ने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल ने लोक सेवा आयोग की रैंक सूचियों की वैधता 30 नवंबर तक बढ़ाने का भी फैसला किया है, क्योंकि चुनाव अवधि के दौरान बमुश्किल ही कोई नियुक्ति हुई। उन्होंने कहा कि उन सभी पीएससी रैंक सूचियों की वैधता बढ़ाकर 30 नवंबर तक कर दी जाएगी जिनकी अवधि 31 अगस्त तक समाप्त हो रही है और इस संबंध में केरल लोक सेवा आयोग को निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सामान्यतः रैंक सूची की वैधता नहीं बढ़ाई जाती लेकिन इस बार चुनाव और उससे जुड़े कार्यों के कारण कोई नियुक्तियां नहीं हो सकीं इसलिए इसकी अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया। सतीशन ने कहा, ''नियुक्तियां नहीं होने से कई युवाओं को निराशा हुई और उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।'' उन्होंने यूडीएफ के घोषणापत्र का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें किए गए वादों को उनके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार विभिन्न विभागों के बीच बांटा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ''हमने इसे 'विजन 2031' नाम दिया है। जनता से घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को लागू करने के लिए तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि 2031 में इस सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पहले उन्हें पूरा किया जा सके।'' उन्होंने यह भी कहा कि एक जून से 100 दिनों के भीतर सरकार सबसे पहले घोषणापत्र में किए उन वादों को पूरा करने की कोशिश करेगी जिन्हें कम हस्तक्षेप के साथ जल्दी लागू किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में पद्म पुरस्कारों के लिए केंद्र सरकार को नाम सुझाने हेतु एक उप-समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया। सतीशन ने कहा कि इसके अलावा मंत्रिमंडल ने अधिवक्ता मोहम्मद शाह को केरल उच्च न्यायालय में अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त करने का भी फैसला किया।

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