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आंध्र प्रदेश के जोन्नागिरी फील्ड्स में सोने का उत्पादन औपचारिक रूप से शुरू

  नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में सोने की माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इसके साथ ही राज्य में कमर्शियल स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू हो गया है। नायडू ने जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड द्वारा स्थापित इस फैसिलिटी के विस्तार की योजनाओं के तहत प्रोजेक्ट की दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखी।

देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर का गोल्ड माइनिंग वेंचर माने जाने वाले जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स प्रोजेक्ट को 405 करोड़ रुपए के निवेश से शुरू किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार, जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड प्रोजेक्ट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि शुरुआत में सालाना 400 किलोग्राम उत्पादन होगा, अगले साल से यह बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगा और अंततः इसकी क्षमता दो टन तक पहुंच जाएगी।
 राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1,500 एकड़ जमीन आवंटित की है, जिसमें पहले चरण में 600 एकड़ जमीन पर माइनिंग का काम शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट से लगभग 700 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। राज्य सरकार को खदान से निकाले गए सोने की कीमत पर चार प्रतिशत रॉयल्टी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने एक ट्रेनिंग सेंटर का भी दौरा किया, जहां महिलाओं और युवाओं को माइनिंग साइट पर भारी गाड़ियां चलाने के लिए सिमुलेटर पर ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने मिनरल वाली मिट्टी ढोने वाली भारी गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने जोन्नागिरी में सोने के उत्पादन की प्रक्रिया का खुद निरीक्षण किया, जिसमें कच्चे अयस्क को निकालने से लेकर अंतिम उत्पाद बनने तक के सभी चरण शामिल हैं। उन्होंने प्रोडक्शन यूनिट के अलग-अलग हिस्सों का जायजा लिया और सोने के बिस्कुट समेत तैयार उत्पादों की जांच की। जियो-मैसूर के चेयरमैन प्रभाकरन, एमडी नवीन लाल चंद और अन्य लोगों ने उन्हें पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के इतिहास में आज एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत हुई है, और यह ‘रत्नों की भूमि’ रायलसीमा के केंद्र में हो रहा है। उन्होंने बताया कि देश अभी 800 किलोग्राम सोना आयात करता है और तेल के बाद यह देश का सबसे बड़ा आयात है। उन्होंने कहा कि यहां हर साल एक टन सोने का उत्पादन होगा। एक टन सोने के सालाना उत्पादन से हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जोन्नागिरी का महत्व कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इस इलाके का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है और इसे कभी सुवर्णगिरि’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा कि सुवर्णगिरि सम्राट अशोक की चार राजधानियों में से एक थी। सदियों पहले, यह इलाका सोने और रत्नों की प्रचुरता के लिए मशहूर था। पास में मौजूद अशोक के येर्रागुडी शिलालेख इस इलाके के शानदार अतीत की गवाही देते हैं। उन्होंने कहा कि रायलसीमा ‘रत्नों की भूमि’ के तौर पर जानी जाती है और श्री कृष्णदेवराय के शासनकाल में यहां रत्नों के ढेर बेचे जाते थे।
उन्होंने कहा कि हमारे राज्य को दुनिया को कोहिनूर हीरा देने का गौरव हासिल है। समय के साथ ऐसे हालात बने जिनसे रायलसीमा के रेगिस्तान बनने का खतरा पैदा हो गया था। हमने सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करके और पानी की सप्लाई करके इस इलाके में नई जान फूंकी है; अब सोने की माइनिंग इसकी पुरानी शान को वापस लाएगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस इलाके का नाम फिर से ‘सुवर्णगिरि’ रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस गांव को गोद लिया जाएगा और इसे ‘सुवर्णगिरि मॉडल गांव’ के तौर पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम रायलसीमा को ‘रत्नला सीमा’ (रत्नों/समृद्धि की भूमि) में बदलने का अपना वादा पूरा कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही पूरा देश सुवर्णगिरि गोल्ड फील्ड्स की चर्चा करेगा।  

 

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