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- नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने आज अखबारों में आई उस खबर को लेकर स्पष्टीकरण दिया है, जिसमें कहा गया है कि जिन लोगों ने आधार नंबर उपलब्ध नहीं करवाया है, उन लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे।खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने स्पष्ट किया है कि दिनांक 7 फरवरी 2017 को जारी आधार अधिसूचना के अंतर्गत सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को दी गई समय-सीमा (समय-समय पर संशोधित), जिसके अंतर्गत सभी राशन कार्डों/ लाभार्थियों को आधार नंबर के साथ लिंक करना है, को विभाग द्वारा 30 सितंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है।तब तक, विभाग ने सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को 24 अक्टूबर 2017 और 8 नवंबर 2018 को जारी किए गए पत्रों के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी वास्तविक लाभार्थी/ परिवार को खाद्यान्न के कोटे की प्राप्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आधार नंबर नहीं रखने की स्थिति में उनके नाम/ राशन कार्ड नष्ट/ रद्द नहीं किए जाएंगे।इसके अलावा, यह भी निर्देश जारी किया गया है कि एनएफएसए के अंतर्गत लाभार्थियों की बायोमेट्रिक/ आधार प्रमाणीकरण की विफलता के कारण उन्हें खाद्यान्न देने से इनकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि लाभार्थियों की खराब बायोमेट्रिक्स, नेटवर्क/ कनेक्टिविटी/ लिंकिंग या किसी अन्य तकनीकी कारणों से समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा कि वर्तमान संकट की घड़ी में, एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है जिससे किसी गरीब या पात्र व्यक्ति या परिवार को खाद्यान्न की प्राप्ति से वंचित न किया जा सके। आधार को राशन कार्ड और लाभार्थियों के साथ जोडऩे से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि इस प्रकार के राशन की प्राप्ति के कोई भी पात्र व्यक्ति ऐसा लाभ उठाने से वंचित नहीं हो सकें।केंद्र और राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों के अथक प्रयासों के द्वारा, वर्तमान समय में सभी 23.5 करोड़ राशन कार्डों का लगभग 90 प्रतिशत पहले से ही राशन कार्ड धारकों के आधार नंबर (यानी परिवार के कम से कम एक सदस्य) से जुड़े हुए हैं; जबकि, सभी 80 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 85 प्रतिशत ने अपने संबंधित राशन कार्ड के साथ अपना आधार नंबर भी दर्ज करवाया हुआ है। इसके अलावा, सभी संबंधित राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश एनएफएसए के अंतर्गत शेष राशन कार्डों/ लाभार्थियों के आधार लिंक का काम पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
- नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय ने गांधी शांति पुरस्कार 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 जून तक बढ़ा दी है।वर्ष 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2020 थी। देश भर में लॉकडाउन के कारण गांधी शांति पुरस्कार 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि अब 15 जून तक बढ़ा दी गई है।गांधी शांति पुरस्कार के लिए नामांकन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट: www.indiaculture.nic.in पर उपलब्ध प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए। निर्धारित प्रपत्र में नामांकन/ अनुशंसाएं मेल/ई-मेल के माध्यम से निम्नलिखित को भेजी जानी चाहिए-सुश्री निरुपमा कोटरू, संयुक्त सचिव,संस्कृति मंत्रालय,कमरा संख्या 334-सी, शास्त्री भवन, नई दिल्लीटेलीफैक्स नम्बर- 011-23381198ई-मेल- [email protected]
- नई दिल्ली। मंत्रिमंडल सचिव ने बसों और श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से जाने वाले श्रमिकों को सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा प्रदान की गई सहायता की समीक्षा करने के लिए 10 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये एक बैठक की अध्यक्षता की।इस बैठक के परिणामस्वरूप, गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों /संघ शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा कि वे पलायन करके आए श्रमिकों को उनके मूल स्थानों तक पहुंचने के लिए सड़क और रेलवे पटरियों पर चलने से रोकें। इस बात पर जोर दिया गया कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और बसों को चलने की अनुमति दी जा चुकी है। इसलिए, उन्हें अपने घर जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों या बसों की सुविधा दी जा सकती है और तब तक पलायन करके आए श्रमिकों को परामर्श दिया जा सकता है और उन्हें पास के आश्रयों में ले जाया जा सकता है।इस बात पर भी जोर दिया गया कि सभी राज्य / संघ शासित प्रदेशों की सरकारों को बिना किसी बाधा के और श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने में रेलवे के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि फंसे हुए श्रमिक तेजी से अपने घर तक पहुंच सकें।
- नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के अंतर्गत लॉकडाउन अवधि के बाद विनिर्माण उद्योगों को दोबारा शुरू करने के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।कोविड-19 की शुरूआत में 25 मार्च से देश भर में लॉकडाउन का आदेश जारी कर दिया गया था। चूंकि लॉकडाउन में धीरे-धीरे कुछ क्षेत्रों में ढील दी जा रही है, इसलिए एनडीएमए की आदेश संख्या 1-29/2020-पीपी दिनांक 1 मई 2020 और एमएचए क्रम संख्या 40-3/2020-डीएम-आई(ए) दिनांक 1 मई 2020 के अनुसार कुछ आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी जा रही है।कई हफ्तों के लॉकडाउन और लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के कारण, संभव है कि कुछ संचालकों ने स्थापित एसओपी का पालन न किया हो। इसके परिणामस्वरूप, कुछ विनिर्माण सुविधाओं, पाइपलाइनों, वाल्वों आदि में बचे हुए रसायन हो सकते हैं, जो जोखिम पैदा कर सकते हैं। खतरनाक रसायनों और ज्वलनशील पदार्थों के साथ भंडारण सुविधाओं की भी यही सच्चाई है।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी किया है -1. रासायनिक आपदाओं पर दिशानिर्देश, 20072. रासायनिक (आतंकवाद) आपदाओं के प्रबंधन पर दिशा-निर्देश, 2009 और3. पीओएल टैंकरों, 2010 को ले जाने के लिए रक्षा और सुरक्षा को मजबूत करना, जो रासायनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण कानून,1086के अंतर्गत खतरनाक रासायनों के निर्माण, भंडारण और आयात संबंधी नियम,1989 इन उद्योगों के लिए वैधानिक आवश्यकताएं प्रदान करते हैं।जब लॉकआउट / टैगआउट प्रक्रियाएं नहीं होती हैं, तो अनेक ऊर्जा स्रोत उन संचालकों / पर्यवेक्षकों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं जो विद्युत, यांत्रिक या रासायनिक उपकरणों की सेवा या रखरखाव कर रहे हैं। जब समय-समय पर भारी मशीनरी और उपकरणों का रख-रखाव नहीं किया जाता है, तो वे संचालकों/ इंजीनियरों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।ज्वलनशील तरल पदार्थ, निहित गैसीय पदार्थ, खुले तार, कन्वेयर बेल्ट और स्वचालित वाहन विनिर्माण सुविधाओं में उच्च जोखिम वाला माहौल बनाते हैं। सुरक्षा कोडों को अनुचित तरीके से लागू करने और अनुचित रूप से लेबल किए गए रसायन स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों को और बढ़ा सकते हैं। जब कोई अप्रत्याशित घटना होती है, तो प्रतिक्रिया को तेजी सेसंभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जोखिम को कम करने और औद्योगिक इकाइयों को सफलतापूर्वक दोबारा शुरू करने को प्रोत्साहित करने के लिए, निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।राज्य सरकारें यह भी सुनिश्चित करेंगी कि संबंधित बड़ी दुर्घटनाओं की जोखिम (एमएएच) वाली इकाइयों की घटनास्थल से दूर आपदा प्रबंधन योजना आधुनिक है और उनके कार्यान्वयन की तैयारी अधिक है। यह भी सलाह दी गई है कि जिले के सभी जिम्मेदार अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि औद्योगिक घटना-स्थल परआपदा प्रबंधन योजनाएं अपने मूल स्थान पर होंऔर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद उद्योगों को दोबारा सुरक्षित शुरु करने के लिए मानक परिचालन प्रक्रियाओं को सम्मिलित किया गया हो।
- नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) और रेल मंत्रालय ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही पर आज सुबह एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की। राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रमुख (नोडल) अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।इसकी सराहना की गई कि कल की 101 ट्रेनों सहित 450 से भी अधिक ट्रेनें कई लाख प्रवासी श्रमिकों को लेकर बाकायदा प्रस्थान कर चुकी हैं।वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा की गई एवं उनका निवारण किया गया और इसके साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रवासी श्रमिकों को यह आश्वासन दिया जाए कि घर जाने के इच्छुक सभी लोगों की यात्रा के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रेनें चलाई जाएंगी। अगले कुछ हफ्तों तक प्रति दिन सौ से भी अधिक ट्रेनों के चलने की उम्मीद है, ताकि फंसे हुए श्रमिकों को उनके मूल निवास स्थानों तक जल्द-से-जल्द पहुंचाया जा सके।----
- - केवल कन्फर्म ई-टिकट पर ही यात्रियों की आवाजाही और रेलवे स्टेशन में उनके प्रवेश की अनुमति होगी- केवल ऐसे व्यक्तियों को ही ट्रेन में चढऩे की अनुमति होगी जिनमें कोरोना बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं होगा- यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी यात्री प्रवेश करने और सफर के दौरान फेस कवर/मास्क अवश्य ही पहनेंनई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने ट्रेन से लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए मानक परिचालन प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी किया है।केवल कन्फर्म ई-टिकट पर ही यात्रियों की आवाजाही और रेलवे स्टेशन में उनके प्रवेश की अनुमति होगी। सभी यात्रियों की अनिवार्य चिकित्सा जांच (स्क्रीनिंग) होगी। केवल ऐसे व्यक्तियों को ही ट्रेन में चढऩे की अनुमति होगी जिनमें इस रोग का कोई भी लक्षण नहीं होगा। यात्रा के दौरान और रेलवे स्टेशनों पर स्वास्थ्य/स्वच्छता संबंधी प्रोटोकॉल एवं सामाजिक दूरी बनाए रखने के दिशा-निर्देश का सख्ती से पालन करना होगा।सभी यात्रियों को स्टेशन पर एवं कोचों में प्रवेश और निकासी के स्थानों पर हैंड सैनिटाइजर दिया जाएगा। इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी यात्री प्रवेश करने और यात्रा के दौरान फेस कवर/मास्क अवश्य ही पहनें। अपने गंतव्य पर पहुंचने पर संबंधित यात्रियों को उन स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जो गंतव्य स्थान वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्दिष्ट किए गए हैं।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और गृह मंत्रालय के परामर्श से रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेनों के आवागमन की अनुमति एक क्रमबद्ध तरीके से दी जाएगी।गौरतलब है कि लंबे समय के बाद भारतीय रेलवे मंगलवार से यानी 12 मई से राजधानी दिल्ली से 15 स्पेशल ट्रेन चलेंगी। हालांकि श्रम दिवस से शुरू की गईं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा। 15 शहरों के लिए कल से शुरू होने वाली स्पेशल ट्रेनों के लिए आज शाम से बुकिंग चालू हो गई है।----
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा कि सहकारी संस्था नेफेड ने चालू रबी विपणन सत्र में विभिन्न राज्यों से अब तक 3.40 लाख टन सरसों और 2.74 लाख टन चने की खरीद की है।यह एजेंसी मौजूदा लॉकडाउन के बीच समर्थन मूल्य पर किसानों से दलहन और तिलहन की खरीद जारी रखे हुए है। कृषि मंत्रालय के एक बयान में कहा गया, नौ राज्यों - आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से 2.74 लाख टन चना खरीदा गया। इसके अलावा नेफेड ने पांच राज्यों - राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा से 3.40 लाख टन सरसों खरीदी है।तेलंगाना से लगभग 1,700 टन सूरजमुखी की खरीद की गई है। विज्ञप्ति के मुताबिक आठ राज्यों - तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात और ओडिशा से 1.71 लाख टन अरहर की खरीद की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान किसानों की मदद करने और कृषि गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नियमित रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। नेफेड सरकार की ओर से किसानों से दलहन और तिलहन की खरीद करता है।----
- नई दिल्ली। पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी ने रविवार को मातृ दिवस पर उन्हें याद करते हुए कहा कि मां, मैं आपको हर सांस में याद करती हूं।बांसुरी ने ट्विटर पर अपनी मां के साथ एक तस्वीर साझा किया, जिसमें स्वराज ने उन्हें गले लगा रखा है। बांसुरी ने ट्वीट किया, मां, आपको हर सांस के साथ याद करती हूं।गौरतलब है कि भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज का लंबी बीमारी के बाद पिछले साल छह अगस्त को 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।
- - विधि अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये की बातचीतनई दिल्ली। केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत के अटॉर्नी जनरल की अध्यक्षता में विधि अधिकारियों के एक दल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रविवार को बातचीत की।भारत के अटॉर्नी जनरल, के. के. वेणुगोपाल, सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता, सभी अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल और सहायक सॉलीसिटर जनरल, विधि मामलों के विभाग में सचिव और न्याय विभाग के सचिव ने इस बैठक में भाग लिया। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान आयोजित अपनी तरह की यह पहली वर्चुअल बैठक है।विधि मंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की गंभीर महामारी से निपटना जटिल और संवेदनशील चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए शासन व्यवस्था उत्तरदायी है और यह उचित होगा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों की निर्णय प्रक्रिया पर भरोसा किया जाए। अटॉर्नी जनरल ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन किया और विशेष रूप से प्रकाश डाला कि अदालतों को इसकी सराहना करने की आवश्यकता है। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने दायर किए गए मामलों की प्रकृति और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित किए गए आदेशों की व्याख्या की, जिसने सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और की गई कार्रवाई को बरकरार रखा है।विधि मंत्री ने कहा कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन जैसे मुश्किल दौर में दायर होने वाली अत्यधिक जनहित याचिकाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया की जरूरत है। हालांकि किसी को भी मामला दर्ज करने से नहीं रोका जा सकता है लेकिन इस प्रकार के हस्तक्षेप पर प्रभावी प्रतिक्रिया होनी चाहिए। इसकी अटॉर्नी जनरल और अन्य सभी विधि अधिकारियों ने सराहना की। न्याय विभाग में सचिव ने ई-कोर्ट और अन्य घटनाक्रमों पर प्रकाश डाला जो इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने साझा किया कि लॉकडाउन के दौरान ऐसे अधिवक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जिन्होंने मामलों का ई-फाइलिंग के लिए पंजीकरण कराया है। 1282 अधिवक्ताओं ने लॉकडाउन के दौरान याचिकाओं की ई-फाइलिंग के लिए पंजीकरण कराया है, जिसमें से 543 अधिवक्ताओं ने अकेले पिछले एक सप्ताह में पंजीकरण कराया है। विधि कार्य विभाग के सचिव ने कोविड-19 से जुड़े दायर मामलों को समझने के लिए कानून मंत्रालय में उपलब्ध समन्वय प्रणाली के बारे में बताया। इस बारे में आम सहमति थी कि हमारे दृष्टिकोण में एकरूपता होनी चाहिए और उच्चतम न्यायालय के आदेशों की तुरंत विभिन्न उच्च न्यायालयों को जानकारी दी जानी चाहिए।अटॉर्नी जनरल और अनेक अन्य विधि अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सम्पर्क से जुड़े मुद्दों का समाधान करके और ई-कोर्ट प्रबंधन में वकीलों के प्रशिक्षण द्वारा ई-कोर्ट प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है। विधि मंत्री ने सचिव न्याय को निर्देश दिया जो समिति के समक्ष इन चुनौतियों को लाने और एनआईसी और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने और व्यवस्था में सुधार करने में समन्वय के लिए सुप्रीम कोर्ट की ई-कोर्ट समिति के सदस्य भी हैं। यह महसूस किया गया था कि महामारी की गंभीरता को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत की कार्यवाही आने वाले कुछ समय के लिए एक मानक बन सकती है। विधि मंत्री ने विशेष रूप से लॉकडाउन को न्याय दिलाने में डिजिटल प्रणाली को और मजबूत बनाने के अवसर के रूप में लेने पर जोर दिया।
- नई दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वैधानिक निकाय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से 11मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक उच्च स्तरीय डिजिटल कॉन्फ्रेंस रिबूटिंग द इकॉनोमी थ्रू साइंड एंड टैक्नोलॉजी एंड रिसर्च ट्रांसलेशन्स- रीस्टार्ट का आयोजन किया जाएगा।केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर सम्बोधन करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान सदस्य विज्ञान,नीति आयोग डॉ. वी. के. सारस्वत; प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार प्रो. के. विजयराघवन; डब्ल्यूएचओ में मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन; डीएसटी सचिव डॉ आशुतोष शर्मा और कुछ अन्य के विशेष संबोधन भी होंगे और इसमें और टीडीबी, डीएसटी और सीआईआई के अन्य अधिकारी भाग लेंगे। जैव प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव डॉ. रेणु स्?वरूप, सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडेऔर भारत में इटली के राजदूत महामहिम श्री विन्सेन्ज़ो डी लुका विभिन्न सत्रों में विशेष भाषण देंगे।यह कॉन्फ्रेंस वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, सरकारी अधिकारियों, राजनयिकों, डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय उद्योग, अनुसंधान संस्थाओं और अकादमिक संस्थाओं की गणमान्य हस्तियों को एक मंच पर लाएगी, जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा संकट में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई गई भूमिका पर अपने ज्ञान को साझा करेंगे और ऐसे समाधान तलाशेंगे जो न केवल वर्तमान महामारी को दूर करेंगे बल्कि आगे आने वाली चुनौतियों का सामना करने में भी हमारी मदद करेंगे।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से, टीडीबीदेश में नवाचारों और तकनीकी उत्कृष्टता की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भी है, क्योंकि 11 मई 1998 को ही भारत ने पोखरण में सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षणों को अंजाम देकर बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की थी। इसके अलावा, इसी दिन बैंगलोर में पहले स्वदेशी विमान हंसा-3 ने परीक्षण उड़ान भरी थी; और इसी दिन भारत ने त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण प्रक्षेपण भी किया था। इस दिन को 1999 सेराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाना वैज्ञानिक जांच, प्रौद्योगिकीय रचनात्मकता और नवाचारों भारत की जद्दोजहद तथा राष्ट्रीय सामाजिक-आर्थिक लाभ और वैश्विक उपस्थिति में इन घटनाक्रमों के एकीकरण का प्रतीक है।---
- - शुरुआत 15 जोड़ी ट्रेनों के साथनई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने 12 मई से धीरे-धीरे यात्री (पैसेंजर) ट्रेनों का परिचालन फिर से शुरू करने की योजना बनाई है। इसकी शुरुआत 15 जोड़ी ट्रेनों (वापसी यात्रा सहित कुल 30 ट्रेनें) के साथ की जाएगी। ये ट्रेनें नई दिल्ली स्टेशन से स्पेशल ट्रेनों के रूप में चलाई जाएंगी जो डिब्रूगढ़, अगरतला, हावड़ा, पटना, बिलासपुर, रांची, भुवनेश्वर, सिकंदराबाद, बेंगलुरू, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, मडगांव, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मू तवी को जोड़ेंगी।इसके बाद भारतीय रेलवे नए मार्गों पर और भी अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाएगी, जिनकी कुल संख्या कोविड-19 केयर सेंटर के लिए 20 हजार कोचों को आरक्षित रखने और फंसे हुए प्रवासियों हेतु श्रमिक स्पेशल के रूप में प्रतिदिन 300 ट्रेनों तक का परिचालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में कोचों को आरक्षित रखने के बाद उपलब्ध कोचों पर निर्भर करेगी।इन ट्रेनों में आरक्षण के लिए बुकिंग 11 मई को शाम 4 बजे से शुरू होगी और केवल आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। रेलवे स्टेशनों पर स्थित टिकट बुकिंग काउंटर बंद रहेंगे और बुकिंग काउंटर पर कोई भी टिकट (प्लेटफॉर्म टिकट सहित) जारी नहीं किया जाएगा। केवल वैध कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही रेलवे स्टेशनों में प्रवेश करने की अनुमति होगी। यात्रियों के लिए फेस कवर या मास्क लगाना अनिवार्य होगा और ट्रेन के प्रस्थान करने के समय उन्हें अपनी स्क्रीनिंग करानी होगी तथा केवल उन्हीं यात्रियों को ट्रेन में चढऩे की अनुमति होगी जिनमें इस रोग का कोई भी लक्षण नहीं होगा। ट्रेनों के परिचालन कार्यक्रम सहित विस्तृत विवरण उचित समय पर अलग-अलग जारी किए जाएंगे।---
- - यात्रियों को दिया जा रहा है मुफ्त भोजन और पानीनई दिल्ली। विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और अन्य व्यक्तियों की आवाजाही विशेष रेलगाडिय़ों से सुनिश्चित करने के संबंध में गृह मंत्रालय का आदेश प्राप्त होने के बाद भारतीय रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया था।10 मई (दोपहर 3.00 बजे) तक देश भर के विभिन्न राज्यों से कुल 366 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं, जिनमें से 287 ट्रेनें अपने गंतव्य तक पहुंच भी चुकी हैं, जबकि 79 ट्रेनें फिलहाल अपने-अपने गंतव्यों की ओर तेज गति से अग्रसर हैं।इन 287 ट्रेनों का परिचालन विभिन्न राज्यों में पहुंचने पर समाप्त हुआ, जैसे कि आंध्र प्रदेश (1 ट्रेन), बिहार (87 ट्रेनें), हिमाचल प्रदेश (1 ट्रेन), झारखंड (16 ट्रेनें), मध्य प्रदेश (24 ट्रेनें), महाराष्ट्र (3 ट्रेनें), ओडिशा (20 ट्रेनें), राजस्थान (4 ट्रेनें), तेलंगाना (2 ट्रेनें), उत्तर प्रदेश (127 ट्रेनें), पश्चिम बंगाल (2 ट्रेनें)।इन ट्रेनों ने प्रवासियों को कई शहरों तक पहुंचाया है जिनमें तिरुचिरापल्ली, टिटलागढ़, बरौनी, खंडवा, जगन्नाथपुर, खुर्दा रोड, प्रयागराज, छपरा, बलिया, गया, पूर्णिया, वाराणसी, दरभंगा, गोरखपुर, लखनऊ, जौनपुर, हटिया, बस्ती, कटिहार, दानापुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, इत्यादि शामिल हैं।इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से अधिकतम लगभग 1200 यात्री ही सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम का बाकायदा पालन करते हुए सफर कर सकते हैं। इसी तरह ट्रेन में चढऩे से पहले यात्रियों की समुचित स्क्रीनिंग या जांच सुनिश्चित की जाती है। एक और खास बात यह भी है कि इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से सफर के दौरान यात्रियों को मुफ्त भोजन और पानी दिया जाता है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल, 11 मई को अपराह्न 3 बजे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक करेंगे।प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल दोपहर 3 बजे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 5 वीं बार बैठक करेंगे।गौरतलब है कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ यह प्रधानमंत्री की 5वीं बैठक है। इससे पहले 20 मार्च, 2 अप्रैल, 11 अप्रैल और 27 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी की राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक हो चुकी है। देश में लागू लॉकडाउन का मौजूदा चरण 17 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले आज कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की।
- नई दिल्ली। कैबिनेट सचिव राजीव गाबा, ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में कोविड-19 के इंतजामों की समीक्षा करने के लिए वहां के मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये आज एक बैठक की।बैठक की शुरुआत में, कैबिनेट सचिव ने कहा कि रेलवे ने पलायन करके दूसरे राज्यों में जाने वाले 3.5 लाख से अधिक श्रमिकों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए 350 अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। उन्होंने राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे और अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने में रेलवे के साथ सहयोग करें। उन्होंने वंदे भारत मिशन के अंतर्गत विदेशों से भारतीयों की वापसी पर राज्यों के सहयोग का जिक्र किया।कैबिनेट सचिव ने जोर देकर कहा कि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स का आना-जाना बेरोकटोक होना चाहिए और कोरोना योद्धाओं की मदद करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए सभी कदम उठाए जाने चाहिए।राज्य के मुख्य सचिवों ने अपने-अपने राज्यों की स्थिति की जानकारी दी और कहा हालांकि कोविड से सुरक्षा की आवश्यकता है, लेकिन साथ ही आर्थिक गतिविधियों में भी सुविचारित तरीके से तेजी लाना जरूरी है।----
- नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सीबीएसई बोर्ड एक्जाम 2020 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए देशभर में मूल्यांकन केंद्रों के रूप में सीबीएसई से संबद्ध 3 हजार स्कूलों को खोलने की अनुमति दी।गृह मंत्रालय ने आज सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में सहूलियत के लिए देशभर में मूल्यांकन केंद्रों के रूप में सीबीएसई से संबद्ध 3000 स्कूलों को खोलने की अनुमति दी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इस अनुमति के लिए गृह मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देशभर में मूल्यांकन केंद्रों के रूप में सीबीएसई से संबद्ध 3000 स्कूलों की पहचान कर ली गई है और मूल्यांकन के सीमित उद्देश्य के लिए इन स्कूलों को विशेष अनुमति दी जायेगी।श्री निशंक ने उम्मीद जताई कि इस कदम से हमें 1.5 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का त्वरित गति से मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी।बोर्ड की शेष परीक्षाएं (1 जुलाई से 15 जुलाई, 2020 के बीच निर्धारित) समाप्त होने के बाद परिणाम घोषित किये जायेंगे।

- नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह कोरोना वायरस के संकट से निपटने के मकसद से बने पीएम केयस कोष का ऑडिट सुनिश्चित करें।उन्होंने ट्वीट किया, पीएम केयर्स कोष को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और रेलवे जैसे बड़े सरकारी उपक्रमों से काफी पैसा मिला। यह महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री सुनिश्चित करें कि इस कोष का ऑडिट हो तथा पैसे लेने और खर्च करने का रिकॉर्ड जनता के समक्ष उपलब्ध हो। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से बातचीत के दौरान भी कहा था कि पीएम केयर्स कोष का ऑडिट होना चाहिए।

- कोच्चि। ओमान और कुवैत में फंसे 362 भारतीयों को लेकर दो विमान शनिवार रात यहां अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचे। भारत अपने वंदे भारत अभियान के तहत कोविड-19 लॉकडाउन के कारण विभिन्न देशों में फंसे अपने नागरिकों को वापस ला रहा है। ये यात्री एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमानों से यहां पहुंचे।इन यात्रियों में आठ नवजात शामिल हैं।कोचीन अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन लिमिटेड के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।इन यात्रियों को विशेष टैक्सियों और केएसआरटीसी बसों के द्वारा उनके गंतव्य तक पहुंचाने से पहले हवाईअड्डे पर ही उनकी कोविड-19 संबंधी जांच होगी।
- अहमदाबाद। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस को कलंक न मानकर उसका समय से इलाज कराने की जरूरत है, जिससे मृत्युदर में कमी लाने में मदद मिलेगी।डॉक्टर गुलेरिया के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने गुजरात के अहमदाबाद शहर में स्थित सिविल अस्पताल का शनिवार को दौरा किया और कोविड-19 महामारी से मुकाबला करने में अहम भूमिका निभा रहे चिकित्सकों और कर्मचारियों से मुलाकात की। शहर में कोविड-19 के मरीजों की मौत की दर साढ़े छह प्रतिशत है जो देश में इस बीमारी से होने वाली मौत की दर 3.3 प्रतिशत से लगभग दोगुनी है। एक अधिकारी ने बताया कि एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया और एम्स के चिकित्सा विभाग के डॉ. मनीष सोनेजा भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से शुक्रवार को यहां पहुंचे। एक विज्ञप्ति में बताया गया कि दोनों वरिष्ठ डॉक्टर सिविल अस्पताल गये और कोविड-19 के मरीजों का इलाज और देखभाल कर रहे डॉक्टरों तथा नर्सों से मुलाकात कर उन्हें दिशा निर्देश दिए। दोनों डॉक्टरों ने बाद में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल से भी मुलाकात की।प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि ने भी अस्पताल में चिकित्साकर्मियों से मुलाकात की। डॉक्टर गुलेरिया ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कोरोना वायरस से जुड़ा कलंक मृत्यु दर बढऩे का एक कारक बन रहा है क्योंकि लोग पृथक किये जाने और संक्रमण फैलाने का कलंक लगने के डर से जांच कराने में देरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि कोरोना वायरस से जुड़े कलंक को मिटाया जाए ताकि लोगों को समय पर इलाज मिल सके। डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि कई बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों को भी इसकी चपेट में आने से बचाने की जरूरत है। ऐसे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिये जल्द से जल्द अस्पताल जाना चाहिये। उन्होंने कहा, बदनाम होने और पृथक किये जाने के डर से कुछ रोगी अस्पताल आने या इलाज कराने से बच रहे हैं। वे संक्रमित होते हैं और अस्पताल में देर से आते हैं। इससे मृत्युदर बढऩे की गुंजाइश रहती है। डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि समय रहते ही इलाज कराना कोरोना वायरस के खिलाफ कामयाबी की कुंजी है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने केंद्र से आग्रह किया था कि कोरोना वायरस मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों को दिशा-निर्देश देने के लिए विशेषज्ञों को भेजा जाये।--
- लखनऊ। एयर इंडिया की एक उड़ान से 180 से अधिक भारतीय शनिवार शाम शारजाह से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे । शारजाह से आया विमान यहां चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे पर देर शाम करीब नौ बजे उतरा ।एयर इंडिया की उड़ान संख्या—आई एक्स 184 से आए यात्रियों की संख्या करीब 180 है । हवाई अडडे के निदेशक ए के शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान लखनऊ आने वाली यह पहली उड़ान है, जिससे विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाया गया है । विमान के यहां पहुंचने पर यात्रियों की हवाई अड्डे पर ही चिकित्सकीय जांच की गयी और उसके बाद उन्हें पृथक-वास में भेज दिया गया ।लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि शनिवार यहां पहुंचे यात्रियों को लखनऊ में ही पृथक-वास में रखा गया है । उन्हें भुगतान वाले पृथक-वास केंद्र में रखा गया है । इसके तहत चार श्रेणियां हैं । अधिकतम भुगतान 2000 रूपये प्रतिदिन है जबकि कम से कम भुगतान 400 रूपये प्रतिदिन है । अभिषेक प्रकाश ने बताया कि हमने लखनऊ के सरोजिनीनगर क्षेत्र में सरकारी अस्पताल: ईएसआई अस्पताल की पहचान की है । जिस किसी यात्री में कोरोना वायरस के लक्षण पाये जाएंगे, उसे इसी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा । बाकी सभी लोग भुगतान वाले पृथक-वास केंद्र में रहेंगे और 14 दिन वहीं गुजारेंगे ।विमान के रनवे पर उतरते समय हवाई अडडे पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे । इस बीच सरोजिनीनगर के सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट प्रफुल त्रिपाठी ने बताया कि शनिवार शाम 182 यात्री आये हैं । भारत सरकार ने सोमवार को ऐलान किया था कि वह सात मई से विदेश में फंसे अपने नागरिकों को चरणबद्ध ढंग से लाना शुरू करेगी । सरकार ने कहा है कि एयर इंडिया सात मई से 13 मई के बीच 64 उड़ानों का संचालन करेगी और इनके जरिए लगभग 15 हजार भारतीयों को वापस लाया जाएगा, जो कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के कारण विदेश में फंसे हुए हैं । उक्त उडानें देश के 14 हवाई अड्डों पर आएंगी, जिनमें से दिल्ली में दस उड़ानें, हैदराबाद और कोच्चि में नौ—नौ, कोझिकोड में चार, त्रिवेन्द्रम में एक, कन्नूर में एक, चेन्नई में नौ, त्रिची में एक, अहमदाबाद में पांच, मुंबई में चार, श्रीनगर में तीन, बेंगलूरू में चार, लखनऊ और अमृतसर में एक—एक उड़ानें आएंगी।----
- नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज एक ट्वीट कर अपने स्वास्थ्य को लेकर एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया, जो उनके स्वास्थ्य को लेकर फैलाई जा रही थीं। उन्होंने लिखा -मेरे स्वास्थ्य की चिंता करने वाले सभी लोगों को मेरा संदेश।उन्होंने कहा, पिछले दिनों से कुछ मित्रों की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से मेरे स्वास्थ्य के बारे में कई मनगढ़ंत अफवाहें फैलाई जा रही हैं। यहां तक कि कई लोगों ने मेरी मृत्यु के लिए भी ट्वीट कर दुआ मांगी है।अमित शाह ने आगे कहा, देश इस समय कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ रहा है और देश के गृह मंत्री के नाते देर रात तक अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण मैंने इन सब पर ध्यान नहीं दिया। जब यह मेरे संज्ञान में आया तो मैंने सोचा कि यह सभी लोग अपने काल्पनिक सोच का आनंद लेते रहें, इसलिए मैंने कोई स्पष्टता नहीं की।उन्होंने कहा, परंतु मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं और मेरे शुभचिंतकों ने विगत दो दिनों से काफी चिंता व्यक्त की, उनकी चिंता को मैं नजरअंदाज नहीं कर सकता। इसलिए, मैं आज स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं पूर्ण रुप से स्वस्थ हूं और मुझे कोई बीमारी नहीं है।पढि़ए इस पत्र में केन्द्रीय गृह मंत्री ने आगे क्या कहा है....

- नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 रोगियों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी देने के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार बहुत हल्के, हल्के और मामूली लक्षण वाले रोगियों को उनके स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार बिना कोविड परीक्षण के छुट्टी दे दी जाएगी।कोविड देखभाल केंद्र में भर्ती कराए गए बहुत हल्के, हल्के और पूर्व लक्ष्ण वाले लोगों के तापमान और रक्त में ऑक्सीजन अवशोषण पर नियमित नजर रखी जाएगी। लक्षण उभरने के 10 दिन बाद और तीन दिन से बुखार नहीं रहने पर रोगी को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। डिस्चार्ज करने से पहले इनके परीक्षण की जरूरत नहीं होगी। ऐसे रोगियों को अगले सात दिन तक घर में अलग रहने की सलाह दी जाएगी। अगर बुखार, खांसी या सांस लेने में फिर कठिनाई होती है तो उन्हें कोविड देखभाल केंद्र या राज्य हेल्पलाइन नम्बर या 1075 पर संपर्क करना होगा।संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार मध्यम लक्षण वाले रोगियों के तापमान और ऑक्सीजन अवशोषण क्षमता पर नजर रखी जाएगी। अगर बुखार तीन दिन में ठीक हो जाता है और अगले चार दिन तक रोगी में ऑक्सीजन अवशोषण स्तर 95 प्रतिशत से अधिक बना रहता है तो रोगी को लक्षण उभरने के दस दिन बाद छुट्टी दे दी जाएगी।ऑक्सीजन पर रखे गए जिन रोगियों का बुखार तीन दिन में नहीं उतरता है और कृत्रिम सांस की जरूरत बनी रहती है उन्हें रोग के लक्षण पूरी तरह समाप्त होने और लगातार तीन दिन तक स्वाभाविक ऑक्सीजन अवशोषण क्षमता बने रहने पर डिस्चार्ज किया जाएगा। गंभीर रोगियों को उनके पूरी तरह स्वस्थ होने और आरटी-पीसीआर परीक्षण के बाद ही अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।
- नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अप्रत्याशित मानवीय और आर्थिक संकट को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है कि कुछ संस्थाओं के अनुमोदन/पंजीकरण/अधिसूचना के लिए नई प्रक्रिया पर अमल को 1 अक्टूबर, 2020 तक स्थगित कर दिया जाएगा।तदनुसार, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (23सी), 12एए, 35 और 80जी के तहत अनुमोदित/पंजीकृत/अधिसूचित की गई संस्थाओं को 1 अक्टूबर, 2020 से लेकर तीन माह के भीतर यानी 31 दिसंबर, 2020 तक संबंधित सूचना दर्ज करने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, नई संस्थाओं या निकायों के अनुमोदन/पंजीकरण/अधिसूचना के लिए संशोधित प्रक्रिया भी 1 अक्टूबर, 2020 से लागू होगी।इस संबंध में आवश्यक विधायी संशोधन उचित समय पर प्रस्तावित किए जाएंगे। रिणामस्वरूप किए गए लॉकडाउन के कारण 1 जून, 2020 से नई प्रक्रिया के कार्यान्वयन पर चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्रालय में विभिन्न ज्ञापन प्राप्त हुए थे। नई प्रक्रिया पर अमल को रोकने के लिए बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हुए हैं।उल्लेखनीय है कि वित्त अधिनियम, 2020 ने आयकर अधिनियम की धारा 10(23सी), 12एए, 35 और 80जी में निर्दिष्ट कुछ संस्थाओं के अनुमोदन/पंजीकरण/अधिसूचना से संबंधित प्रक्रिया को तर्कसंगत बना दिया है, जो 1 जून, 2020 से प्रभावी होना था। नई प्रक्रिया के अनुसार, इन धाराओं के तहत पहले से ही अनुमोदित/पंजीकृत/अधिसूचित संस्थाओं को तीन माह के भीतर यानी 31 अगस्त, 2020 तक सूचना दर्ज करने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, नई संस्थाओं के अनुमोदन/पंजीकरण/अधिसूचना के लिए प्रक्रिया को भी 1 जून, 2020 से तर्कसंगत बनाया गया है।----
- नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु और मंझौले उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग के नाम से प्रसिद्ध धारचूला से लिपुलेख (चीन सीमा) तक सड़क सम्पर्क पूर्ण किए जाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रयासों की सराहना की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पिथौरागढ़ से वाहनों के पहले काफिले को रवाना कर आज इस सड़क का उद्घाटन किया।श्री गडकरी ने कहा कि सीमावर्ती गांवों को आखिरकार पहली बार सड़कों से जोड़ा गया है और कैलाश मानसरोवर के यात्री अब 90 किलोमीटर दुर्गम रास्ते से बच सकते हैं और वाहनों के जरिए चीन सीमा तक जा सकते हैं। धारचूला-लिपुलेख मार्ग, पिथौरागढ़-तवाघाट- घटियाबगड़ मार्ग का विस्तार है। यह घटियाबगड़ से शुरु होकर कैलाश मानसरोवर के प्रवेशद्वार लिपुलेख दर्रे पर समाप्त होता है। यह 80 किलोमीटर लम्बा मार्ग है जिसकी ऊंचाई 6000 फुट से 17,060 फुट तक है। इस परियोजना के समाप्त होने के साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के श्रद्धालु अब जोखिम भरी अत्याधिक ऊंचाई से होकर गुजरने वाले दुर्गम रास्ते से बच सकेंगे और यात्रा में लगने वाले समय में भी अनेक दिनों की कमी आएगी।वर्तमान में सिक्किम या नेपाल मार्गों से होने वाली कैलाश मानसरोवर की यात्रा में दो से तीन हफ्ते का समय लगता है। लिपुलेख मार्ग में 90 किलोमीटर का ऊंचाई वाला रास्ता था और बुजुर्ग यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब यह यात्रा वाहनों के माध्यम से पूरी की जा सकती है।इस सड़क का निर्माण कार्य अनेक समस्याओं के कारण बाधित हुआ। निरंतर हिमपात, ऊंचाई पर खड़ी ढाल और अत्यंत कम तापमान ने कार्य को पांच महीने तक सीमित कर दिया। कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अक्टूबर के दौरान की जाती है और इसी समय स्थानीय लोग और उनके लॉजिस्टिक्स साथ ही साथ व्यापारियों की आवाजाही (चीन के साथ व्यापार के लिए) होती है इस तरह निर्माण के दैनिक घंटों में और कमी करनी पड़ी।इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों से कई बार यहां बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं हुईं, जिसके कारण भारी नुकसान हुआ। शुरुआती 20 किलोमीटर में, पहाड़ों में कठोर पथरीले चट्टान हैं और ये चट्टान सीधे खड़े हैं, जिनके कारण बीआरओ को अनेक जवानों को जान गंवानी पड़ी और काली नदी में गिरने से 25 उपकरण भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।---
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों में, भारत में ब्रांड खादी की स्वीकार्यता व्यापक रूप से देखने को मिली है। जबकि खादी का उत्पादन, दीर्घकालिक विकास के लिए सबसे अनुकूल पर्यावरण उत्पाद, पिछले पांच वर्षों में दोगुने से भी ज्यादा हो चुका है, यानी 2015-16 के बाद से; इसी अवधि के दौरान खादी की बिक्री में लगभग तीन गुनी बढ़ोत्तरी देखी गई है।इसी प्रकार, ग्रामोद्योग (वीआई) क्षेत्र के उत्पादन और बिक्री में भी पिछले पांच वर्षों में लगभग 100 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी देखी गई है । पिछले एक वर्ष में खादी के कारोबार के प्रदर्शन का अवलोकन करते हुए, यह 2018-19 में 3215.13 करोड़ रुपये था, जिसमें 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए, यह 2019-20 में 4211.26 करोड़ रुपये हो गया। ग्रामोद्योग उत्पादों का कारोबार 2019-20 में 84,675.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि 2018-19 में 71,077 करोड़ रुपये था।वर्ष 2019-20 में, खादी एवं ग्रामोद्योग का कुल कारोबार 88,887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।केवीआईसी के अध्यक्ष, विनय कुमार सक्सेना ने खादी के अभूतपूर्व विकास के लिए प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी के सतत प्रयासों, एमएसएमई मंत्री, नितिन गडकरी के रचनात्मक विपणन विचारों और विभिन्न मंत्रालयों के सक्रिय सहयोग को श्रेय दिया है।खादी परिधानों के अलावा, ग्राम उद्योग उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला जैसे सौंदर्य प्रसाधन, साबुन और शैंपू, आयुर्वेदिक दवाएं, शहद, तेल, चाय, अचार, पापड़, हैंड सैनिटाइजर, मिष्ठान्न, खाद्य पदार्थ और चमड़े की वस्तुओं ने भी बड़ी संख्या में देश-विदेश के उपभोक्ताओं को आकर्षित किया है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों में ग्रामोद्योग उत्पादों के उत्पादन और बिक्री में लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है।यह बात विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि केवीआईसी ने विभिन्न राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों जैसे एयर इंडिया, आईओसी, ओएनजीसी, आरईसी और अन्य, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, भारतीय रेल और स्वास्थ्य मंत्रालय का समर्थन जुटाने में निरंतर रूप से प्रगति की है। इसके अलावा, ग्रामोद्योग क्षेत्र में, केवीआईसी मधुमक्खी पालन, मिट्टी के बर्तन और बेकरी जैसे 150 से ज्यादा क्षेत्रों में इन-हाउस क्षमता के साथ उत्कृष्ट उत्पादों का दावा करता है।---
- नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने आज घोषणा की है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) लॉकडाउन के कारण स्थगित दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं एक से पंद्रह जुलाई के बीच कराएगा। श्री निशंक ने यह जानकारी आज वीडियो संदेश में दी।मानव संसाधन विकास मंत्री ने ट्वीट कर कहा- लंबे समय से सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाओं की तिथि का इंतज़ार था, आज इन परीक्षाओं की तिथि 1.07.2020 से 15.07.2020 के बीच में निश्चित कर दी गई है। मैं इस परीक्षा में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।उत्तर-पूर्व दिल्ली में हिंसा के कारण परीक्षाओं में न बैठ सकने वाले विद्यार्थियों की दसवीं कक्षा की परीक्षा भी कराई जाएगी। इस बारे में सीबीएसई जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम जारी करेगा।----


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