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नई दिल्ली। भारत की जनगणना 2027 देश की पहली पूरी तरह ‘डिजिटल जनगणना’ होगी। इसमें मोबाइल के जरिए डेटा जुटाया जाएगा, जिससे सही और विस्तृत जानकारी मिलेगी और बेहतर नीति बनाने में मदद मिलेगी। शनिवार को एक आधिकारिक फैक्ट-शीट में यह जानकारी दी गई।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस जनगणना में कई नई सुविधाएं होंगी, जैसे कि सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएमएस) पोर्टल के जरिए लगभग रियल-टाइम निगरानी, खुद से जानकारी भरने का विकल्प और जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक उपयोग।राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को हुई अपनी बैठक में जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया। इससे पहले 2011 की जनगणना तक केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की ही व्यवस्थित गणना होती थी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम किए गए हैं।जनगणना 2027 को दो चरणों में किया जाएगा, ताकि पूरे देश में व्यवस्थित और व्यापक तरीके से डेटा इकट्ठा किया जा सके। सरकार के अनुसार, सुरक्षित डेटा सेंटर और बड़े कार्यबल की मदद से यह जनगणना भरोसेमंद जानकारी देगी, जिससे लक्षित और समावेशी नीति बनाना आसान होगा। बयान में आगे कहा गया है कि जनगणना से जनसंख्या के रुझानों को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है और इससे भोजन, पानी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में बेहतर योजना बनाई जा सकती है। यह स्थानीय स्तर पर भी सटीक जानकारी देता है, ताकि सरकारी योजनाओं को सही जगह तक पहुंचाया जा सके।स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी, जो पहले से ज्यादा अपडेट और विस्तृत जानकारी देगी। इससे बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाना आसान होगा।जनगणना देश या किसी विशिष्ट क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह, संकलन, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है। जनगणना के माध्यम से एकत्रित सूचनाओं का विशाल भंडार इसे योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए आंकड़ों का सबसे समृद्ध स्रोत बनाता है। जनगणना गवर्नेंस के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करती है, जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होगी और डिजिटल तकनीक, मजबूत डेटा सुरक्षा और आसान प्रक्रियाओं के साथ यह डेटा-आधारित नीति निर्माण को और मजबूत बनाएगी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि नीति आयोग देश की नीति-निर्माण व्यवस्था का एक अहम स्तंभ बनकर उभरा है। यह सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने, सुधारों को आगे बढ़ाने और ‘ईज ऑफ लिविंग यानी जीवन की सुगमता’ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पीएम मोदी ने डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष बनने की बधाई देते हुए और अन्य पूर्णकालिक सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्था अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार और लंबे समय की रणनीति बनाने के लिए एक गतिशील मंच के रूप में काम कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है। अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष बनने पर मेरी शुभकामनाएं। साथ ही राजीव गौबा, प्रो. के. वी. राजू, प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. अभय करंदीकर और डॉ. एम. श्रीनिवास को भी पूर्णकालिक सदस्य बनने पर बधाई।”पीएम मोदी ने सभी को उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्रभावी और परिणाम देने वाला कार्यकाल पूरा करें।प्रधानमंत्री मोदी ने लाहिड़ी से मुलाकात भी की और उन्हें उपाध्यक्ष बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति में लाहिड़ी का अनुभव भारत में सुधारों को और मजबूत करेगा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि उनके प्रयास देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया को और अधिक गतिशील बनाएंगे। लाहिड़ी एक अनुभवी नीति निर्माता हैं और इससे पहले वे भारत के 12वें मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं और विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, एशियाई विकास बैंक और राष्ट्रीय लोक वित्त और नीति संस्थान सहित कई प्रमुख शैक्षणिक और नीतिगत संस्थानों से भी जुड़े रहे हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने संसदीय क्षेत्र गुना के प्रवास पर हैं। उन्होंने शनिवार को शिवपुरी के कोलारस प्रवास के दौरान ढाई हजार करोड़ के रक्षा संयंत्र के स्थापना की घोषणा की।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने शनिवार को अपने शिवपुरी-कोलारस प्रवास के पहले दिन कोलारस में जनता को कई विकास कार्यों की सौगात देते हुए एक विशाल औद्योगिक निवेश की घोषणा की और बताया कि अगले दो माह में क्षेत्र को 2500 करोड़ का रक्षा संयंत्र मिलने जा रहा है। यह संयंत्र कोलारस से लगभग 15 किलोमीटर दूर, कोटा हाईवे और बॉम्बे-ग्वालियर हाईवे के संगम पर स्थापित किया जाएगा।यह परियोजना जिले की पिछले दो दशकों से लंबित औद्योगिक मांग को पूरा करेगी। सिंधिया ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 2000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। कोलारस, जो अब तक अपनी कृषि और विशेषकर टमाटर उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है, अब देश की रक्षा शक्ति का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।यहां निर्मित होने वाले रक्षा उपकरण देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे क्षेत्र का गौरव और योगदान दोनों बढ़ेंगे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कोलारस क्षेत्र को विकास की महत्वपूर्ण सौगातें देते हुए 19.68 करोड़ की विभिन्न आधारभूत परियोजनाओं का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने प्रधानमंत्री जन-मन योजना के अंतर्गत बालक एवं बालिका छात्रावास का भूमिपूजन किया, साथ ही जनपद पंचायत भवन, कोलारस का भी शिलान्यास किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने नवीन बस स्टैंड एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण किया, जिससे क्षेत्र में आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। वहीं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के कार्य का भूमिपूजन भी किया गया, जो कोलारस में स्वच्छता और शहरी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। -
मुजफ्फरनगर . उत्तर प्रदेश के शामली जिले के मेरठ -करनाल राजमार्ग पर चार लाख रुपये के भारतीय नोट मिले हैं। हालांकि एक व्यक्ति ने दावा किया है कि यह उसका है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। पुलिस के अनुसार शुक्रवार को जिले के कबरौत गांव के पास चार लाख रुपये सड़क पर बिखरे होने की सूचना एक ग्रामीण ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और सड़क से नोट बरामद किए। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुमित शुक्ला ने बताया कि 500 रुपये के नोटों के छह बंडल, 200 रुपये के नोटों के चार बंडल और 100 रुपये के नोटों के दो बंडल (कुल चार लाख रुपये) मिले जिन्हें आगे की जांच के लिए मालखाना में जमा कर दिए गए हैं। पुलिस ने बताया कि इस बीच, मुजफ्फरनगर जिले के बुढाना कस्बे के एक व्यक्ति ने दावा किया है कि ये नोट उसके थे और जब वह मोटरसाइकिल पर बैंक से नकदी निकालने के बाद हरियाणा से घर लौट रहा था तो सड़क पर गिर गए। एएसपी ने बताया कि पुलिस इस दावे की जांच कर रही है।
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जमालपुर/श्यामपुर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ही अपनी जीत सुनिश्चित कर ली है, और पार्टी 23 अप्रैल को हुए मतदान में 152 में से 110 सीट पर जीत दर्ज करेगी। शाह ने एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को, विशेष रूप से मतुआ समुदाय के लिए, शीघ्रता से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा महिलाओं के लिए ''भय-मुक्त'' बंगाल का निर्माण करेगी।
पूर्वी वर्धमान जिले के जमालपुर और हावड़ा के श्यामपुर में जनसभाओं को संबोधित करते हुए, शाह ने भाजपा के चुनावी अभियान को बंगाल के तीन प्रमुख मुद्दों - मतुआ समुदाय के लिए सीएए सुनिश्चित करने, महिलाओं की सुरक्षा और बांग्लादेश से कथित घुसपैठ के खिलाफ लड़ाई - के इर्द-गिर्द केंद्रित किया। उन्होंने कहा, ''पहले चरण का मतदान हो चुका है। पहले ही चरण में भाजपा 110 सीटें जीतेगी और (ममता) दीदी सत्ता से बेदखल हो जाएंगी। भाजपा यहां सरकार बनाएगी।'' बंगाल की 294-विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हुआ और 92 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। दूसरे चरण में 142 सीट पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। शाह ने सीएए के विरोध को लेकर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर निशाना साधा और उनकी सरकार पर मतुआ समुदाय के सदस्यों को नागरिकता के अधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता ने कहा, ''दीदी सीएए कानून को लागू नहीं होने दे रही हैं। आप कमल (भाजपा का चुनाव चिह्न) की सरकार बनाइए, और पांच मई के बाद भाजपा सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मतुआ समुदाय के हर भाई-बहन को नागरिकता मिले।'' बांग्लादेश से संबंध रखने वाले राजनीतिक रूप से प्रभावशाली शरणार्थी समुदाय का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि मतुआ लोगों को भाजपा सरकार के तहत अब अनिश्चितता में नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ''मतुआ समुदाय के लोगों को अब डर में जीने की जरूरत नहीं है।''
भाजपा नेता ने घुसपैठ को बेरोजगारी और संसाधनों की कमी से भी जोड़ा और तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व पर चुनावी लाभ के लिए अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। शाह ने कहा, ''बंगाल में घुसपैठिए हमारे युवाओं की नौकरियां और गरीबों का राशन छीन रहे हैं। दीदी और उनके भतीजे (तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी) अपने वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को पाल-पोस रहे हैं। पांच मई के बाद, भाजपा सरकार बंगाल से हर एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकालेगी।'' हिंदू वोटों को लामबंद करने के प्रयास में, शाह ने अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से राम मंदिर निर्माण की तुलना तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण के प्रयासों से की। उन्होंने कहा, ''एक तरफ 550 वर्षों के बाद मोदी जी ने अयोध्या में भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बनवाया है। दूसरी तरफ ममता दीदी चाहती हैं कि उनके चेले हुमायूं कबीर बंगाल में बाबरी मस्जिद बनवाएं। जब तक भाजपा का एक भी कार्यकर्ता जीवित है, हम बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण कभी नहीं होने देंगे।'' शाह ने कहा कि भाजपा सरकार सातवें वेतन आयोग को लागू करेगी और सभी राज्य सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने यह भी वादा किया कि जून से महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में मिलेंगे, बेरोजगार युवाओं को 3,000 रुपये की मासिक सहायता मिलेगी और प्रत्येक गर्भवती महिला को बच्चे की देखभाल के लिए 21,000 रुपये दिए जाएंगे। शाह ने आरजी कर अस्पताल मामला, संदेशखलि और कोलकाता के एक विधि कॉलेज में कथित अपराधों जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए तृणमूल कांग्रेस सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ''तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासनकाल में सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को ही उठाना पड़ा है। चाहे आरजी कर मामला हो, संदेशखलि या दक्षिण कोलकाता विधि कॉलेज का मामला हो, हर घटना ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ममता दीदी की सरकार की पूर्ण विफलता को उजागर किया है।'' केंद्रीय मंत्री ने बनर्जी के उन कथित बयानों पर आपत्ति जताई जिनमें उन्होंने महिलाओं को शाम सात बजे के बाद घर से बाहर न निकलने की सलाह दी थी। शाह ने कहा कि ऐसे बयान सरकार की विफलता को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा, ''दीदी कहती हैं कि महिलाओं को शाम सात बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, लेकिन पांच मई के बाद, जब भाजपा की सरकार बनेगी, तो अगर कोई लड़की रात एक बजे भी बाहर निकलने का फैसला करती है, तो कोई उसे आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं करेगा।'' श्यामपुर की रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''ममता दीदी का समय चार मई को समाप्त होगा और पांच मई से हमारी माताओं और बहनों का समय शुरू होगा।'' केंद्रीय मंत्री ने बंगाल में 'सिंडिकेट राज' पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि आम लोगों को बुनियादी निर्माण सामग्री के लिए जबरन वसूली का सामना करना पड़ता है। शाह ने कहा, ''सीमेंट के लिए सिंडिकेट को पैसे देने पड़ते हैं; ईंटों के लिए सिंडिकेट को पैसे देने पड़ते हैं; रेत के लिए सिंडिकेट को पैसे देने पड़ते हैं। भाजपा सरकार इन सिंडिकेट वालों को बंगाल की खाड़ी में फेंक देगी।'' -
श्रीनगर. खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने शनिवार को कहा कि देश को एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने का 10 साल का रोडमैप उसे जमीन पर काम करके ही पूरा किया जाना चाहिए। मांडविया ने देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा मामले और खेल मंत्रियों के 'चिंतन शिविर' की अध्यक्षता की। पंद्रह से ज्यादा राज्यों के खेल मंत्रियों के साथ-साथ आदिल सुमारिवाला, अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग जैसी जानी-मानी खेल हस्तियों ने भी इस चिंतन शिविर में हिस्सा लिया और संबंधित पक्षों के साथ अपने विचार साझा किए। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा, ''एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनने का हमारा 10 साल का रोडमैप सिर्फ कागजों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हर खेल के मैदान, हर जिले और हर युवा के सपने में साकार होना चाहिए। '' मांडविया ने राज्यों से नीतियों को अपनाने से आगे बढ़कर उन्हें सक्रिय रूप से लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली प्रगति जिलों, ट्रेनिंग प्रणालियों और जमीनी स्तर के खेल तंत्र में दिखने वाले परिणामों के आधार पर की जाएगी। उन्होंने कहा, ''खेलो भारत मिशन महज एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारे युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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जयपुर. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका और उससे जुड़ी संस्थाओं में जनता का गहरा विश्वास है और इस विश्वास को बनाए रखना सभी का दायित्व है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां 'एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज' (राजस्थान चैप्टर) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने पूर्व न्यायाधीशों की तुलना 'बावड़ी' से करते हुए उन्हें ज्ञान का भंडार बताया, जो कठिन परिस्थितियों में व्यवस्था का मार्गदर्शन कर सकते हैं। सीजेआई ने कहा, "जिस प्रकार राजस्थान में बावड़ियां बरसात के मौसम में पानी संचित कर सूखे समय में उपयोगी होती हैं, उसी प्रकार सेवानिवृत्त न्यायाधीश हमारे लिए एक बहुमूल्य संसाधन हैं। लोक अदालतों, मध्यस्थता और सलाहकार भूमिकाओं में उनका अनुभव अत्यंत उपयोगी है।" सीजेआई ने कहा कि राष्ट्रीय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सहित सभी न्यायिक संस्थाओं को अधिक सतर्क और जागरूक रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोग न्यायाधीशों के शब्दों को अत्यंत सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं, जो न्यायपालिका पर जनता के गहरे विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस विश्वास को बनाए रखना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने एक शेर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, "जिसको तूफानों से उलझने की हो आदत, ऐसी कश्ती को समंदर भी दुआ देता है।" उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे जनता का विश्वास न केवल बना रहे बल्कि और मजबूत हो। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और यह कानून तथा संविधान की रक्षक है। शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका ने ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायाधीश केवल मुकदमों का निपटारा नहीं करते, बल्कि वे न्याय की आवश्यकता वाले प्रत्येक व्यक्ति की उम्मीद होते हैं। अनुभवी न्यायाधीशों का योगदान आज भी न्याय प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए कानूनों के प्रशिक्षण, अदालतों के आधुनिकीकरण और न्यायालयों की संख्या बढ़ाने पर कार्य कर रही है। राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण आमजन तक न्याय पहुंचाने और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के दौरान उच्च न्यायालय के यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम की शुरुआत की गयी तथा पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए लेखों के संकलन का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज के पदाधिकारी, न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2025 बैच के आठ अधिकारियों को आदिवासी एवं चुनौतीपूर्ण ग्रामीण जिलों में सहायक जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ किया है और उन्होंने इन क्षेत्रों को जमीनी स्तर पर प्रशासन की ''असली पाठशाला'' बताया। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और लोकसेवा की भावना की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''यह महज एक नियुक्ति नहीं, बल्कि सुविचारित, योजनाबद्ध और अत्यंत सार्थक पहल है।'' मंडलोई ने कहा कि मुख्यमंत्री का मानना है कि जो अधिकारी अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, वंचित वर्गों की आकांक्षाओं और आदिवासी क्षेत्रों की जटिल प्रशासनिक चुनौतियों से रूबरू होते हैं, वे भविष्य में संवेदनशील, परिश्रमी और जनोन्मुखी प्रशासक बनते हैं। उन्होंने कहा कि बालाघाट, मंडला, डिण्डौरी, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, अनूपपुर और श्योपुर जैसे आदिवासी जिले प्रशासन के लिए कठिन परीक्षा स्थल हैं। अधिकारी ने कहा कि दुर्गम भौगोलिक स्थिति, वन क्षेत्र, विविध आदिवासी संस्कृति और विकास संबंधी आवश्यकताएं — ये सभी मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जहां युवा अधिकारी केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव से सीखते हैं। सहायक जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ 2025 बैच के अधिकारियों में आयुषी बंसल (झाबुआ), आशी शर्मा (धार), माधव अग्रवाल (बड़वानी), सोम्या मिश्रा (सिंगरौली), श्लोक वैकर (कटनी), शिल्पा चौहान (खंडवा), खोत पुष्पराज नानासाहेब (बैतूल) और शैलेंद्र चौधरी (मंडला) शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। लाहिड़ी को शुक्रवार को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। साथ ही वैज्ञानिक गोवर्धन दास को नीति आयोग का सदस्य बनाया गया है। प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक लाहिड़ी, भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार और 15वें वित्त आयोग के सदस्य रह चुके हैं। दास ने नीति आयोग का सदस्य नियुक्त किए जाने पर प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।
उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज मेरे जीवन का बहुत अहम दिन है। मैं पश्चिम बंगाल के एक सुदूर गांव के दलित वर्ग के एक आम किसान परिवार का बेटा हूं। बचपन से ही मिट्टी की खुशबू, मेहनत की कीमत और संघर्ष की सच्चाई मेरी ज़िंदगी का मुख्य अंग रही है।'' दास ने कहा, ''यह जिम्मेदारी मेरे लिए सिर्फ एक पद नहीं है, (बल्कि) यह मुझ जैसे अनगिनत आम लोगों के सपनों, उम्मीदों और विश्वास की झलक है।'' - लखनऊ. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि बीज और कीटनाशक से जुड़े नए कानून लगभग तैयार हैं और उन्हें संसद के अगले सत्र में पारित कराने के लिए पेश किया जा सकता है। चौहान ने यहां आयोजित उत्तरी राज्यों के क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित 'बीज अधिनियम' और 'कीटनाशक अधिनियम' का मसौदा सुझावों के लिए पहले ही साझा किया जा चुका है। इन कानूनों का उद्देश्य नकली और घटिया कृषि उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति नकली या खराब गुणवत्ता के बीज या कीटनाशक बेचता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मौजूदा दंड बहुत कम और अप्रभावी हैं।" उन्होंने बताया कि राज्यों के सहयोग से ऐसी कुप्रथाओं के खिलाफ देशव्यापी अभियान भी चलाया जाएगा।इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने रबी और खरीफ फसलों पर एक ही राष्ट्रीय सम्मेलन की जगह अब क्षेत्रवार परामर्श की रणनीति अपनाई है, ताकि अलग-अलग जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों के अनुसार बेहतर योजना बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है और भारत अब आयात पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है और गेहूं का प्रमुख निर्यातक भी है।" कृषि मंत्री ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों की आय बढ़ाने और पोषक आहार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता बताते हुए छह-सूत्रीय रणनीति का जिक्र किया, जिसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य दिलाना, फसल नुकसान की भरपाई और फसल विविधीकरण शामिल है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई और कहा कि इसका अंधाधुंध इस्तेमाल मिट्टी की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती और बागवानी व औषधीय फसलों को बढ़ावा देने की बात कही।चौहान ने 'अल नीनो' के कारण सामान्य से कम बारिश के अनुमान का हवाला देते हुए जल संकट की आशंका को ध्यान में रखकर योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि रोडमैप तैयार करने और 'किसान पहचानपत्र' तथा किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अधिक किसानों को जोड़ने का भी आग्रह किया। चौहान ने कहा कि ''मेरे दिल में भी यह हसरत है कि हम अपने देश की कृषि को और उन्नत स्तर पर ले जाएं, ताकि देश की सारी जरूरतें हम पूरी कर सकें। उन्होंने किसान पहचान पत्र बनाने में राज्यों से तेजी लाने का आह़वान करते हुए कहा कि इससे 17 तरह की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि ''पूरे देश में साढ़े सात करोड़ क्रेडिट कार्ड बने हैं लेकिन किसानों की संख्या 13 करोड़ है। इसके लिए राज्य सरकार अभियान चलाएं। हम कम ब्याज पर कर्ज देने की व्यवस्था कर लें तो इसका छोटे किसानों को लाभ मिलेगा। हम आपके साथ मिलकर यह कार्य करना चाहते हैं।'' उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान पिछले साल चलाने के लिए योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया और कहा कि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से किसानों तक पहुंचाना जरूरी है।चौपाल लगाएं, किसान की जिज्ञासा का समाधान करें। उन्होंने बताया कि साठ हजार गांवों में किसानों को सुझाव दिए गये। इस सम्मेलन में उत्तरी क्षेत्र के विभिन्न राज्यों से आये कृषि और उद्यान मंत्रियों समेत प्रमुख लोग मौजूद थे। इसके पहले सात अप्रैल को भी जयपुर में एक क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया था। एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर व भागीरथ चौधरी, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, हिमाचल प्रदेश के उद्यान मंत्री जगत सिंह नेगी, जम्मू कश्मीर के कृषि उत्पादन मंत्री जाविद अहमद डार, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, पंजाब के उद्यान मंत्री मोहिंदर भगत एवं उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी मौजूद थे।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को कहा कि देश के प्रमुख बंदरगाहों ने वर्ष 2025-26 में 91.51 करोड़ टन माल का प्रबंधन किया, जो 90.4 करोड़ टन के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है। सोनोवाल ने कहा कि यह एक साल पहले की तुलना में 7.06 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है, जो क्षेत्र में मजबूत सुधार, दक्षता में वृद्धि और टिकाऊ वृद्धि की पुष्टि करता है। उन्होंने बताया कि 2025-26 में पोत परिवहन मंत्रालय और उससे जुड़े संगठनों का कुल पूंजीगत व्यय 14,953 करोड़ रुपये रहा, जो 2024-25 के 9,708 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने कहा, "वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय ध्वज वाले बेड़े में 94 जहाज जोड़े गए, जिनकी कुल वहन क्षमता 25.67 लाख डेडवेट टन (डीडब्ल्यूटी) है, जबकि एक साल पहले 45 जहाज (7.72 लाख डीडब्ल्यूटी) शामिल किए गए थे।" देश में केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले कुल 12 प्रमुख बंदरगाह हैं जो प्रमुख बंदरगाह प्राधिकार अधिनियम 2021 के प्रावधानों के तहत संचालित होते हैं।उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) के कार्यक्रम में यह बात कही। सोनोवाल ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय समुद्री कार्यबल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और नाविकों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल वैश्विक समुद्री कार्यबल में लगभग 12 प्रतिशत योगदान के साथ शीर्ष तीन देशों में शामिल है और 2030 तक इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में तट-आधारित नौकरियों के लिए कौशल विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है और सरकार उभरते तथा बहु-विषयक क्षेत्रों में समुद्री शिक्षा का विस्तार कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग और प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्गों पर रणनीतिक स्थिति भारत को एक महत्वपूर्ण समुद्री राष्ट्र बनाती है। उन्होंने 'मैरिटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरिटाइम अमृतकाल विजन 2047' का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों का उद्देश्य अगले दो दशकों में भारत को एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। सोनोवाल ने समुद्र आधारित 'ब्लू इकोनॉमी' की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य समुद्री संसाधनों का अंधाधुंध दोहन नहीं, बल्कि उनका टिकाऊ और जिम्मेदार उपयोग कर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन सुनिश्चित करना है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी बनाए रखना है।
- नयी दिल्ली. मच्छरों और कीटों से होने वाली बीमारियों से लड़ने और निवारक स्वास्थ्य देखभाल सेवा को मजबूत करने के लिए जीएसटी परिषद को घरेलू कीटनाशकों पर लगने वाले कर को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने पर विचार करना चाहिए। ईवाई-एचआईसीए ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही। रिपोर्ट के अनुसार लिक्विड वेपोराइजर, कॉइल और एरोसोल जैसे घरेलू कीटनाशक भारत के निवारक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेष रूप से घरेलू स्तर पर जहां इन बीमारियों से सुरक्षा अभी भी असमान है।ईवाई और होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (एचआईसीए) की इस संयुक्त रिपोर्ट में इस बात की पड़ताल की गई है कि वर्तमान 18 प्रतिशत की जीएसटी दर इन उत्पादों की वहनीयता, पहुंच और उपयोग को खासकर संवेदनशील और उच्च जोखिम वाली आबादी के बीच किस तरह प्रभावित करती है। रिपोर्ट में इन उत्पादों पर कर को अन्य आवश्यक स्वच्छता और स्वास्थ्य-सुरक्षा उत्पादों की तर्ज पर पांच प्रतिशत करने का तर्क दिया गया है। ईवाई इंडिया के पार्टनर और राष्ट्रीय प्रमुख (अप्रत्यक्ष कर) बिपिन सप्रा ने कहा, ''जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत कई स्वास्थ्य आधारित एफएमसीजी और दवाओं को कम कर वाले स्लैब में रखा गया है। ऐसे में घरेलू कीटनाशकों पर मौजूदा कर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उनके महत्व के अनुरूप नहीं दिखता है।'' एचआईसीए के निदेशक जयंत देशपांडे ने कहा कि घरेलू कीटनाशकों की जीएसटी दर को पांच प्रतिशत तक युक्तिसंगत बनाने से वहनीयता में सुधार होगा, घटिया उत्पादों के प्रसार पर रोक लगेगी और क्षेत्र के औपचारिककरण को बढ़ावा मिलेगा।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शुक्रवार सुबह हुगली नदी में नौका विहार के दौरान नाव चलाने वाले नाविकों और नाव मालिकों ने इस अनुभव को यादगार और भावुक कर देने वाला क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अंतिम समय तक यह जानकारी नहीं थी कि उनकी नाव पर देश के प्रधानमंत्री सवार होने वाले हैं।
नौका विहार कराने वाले नाविक गौरांग बिस्वास ने कहा- प्रधानमंत्री ने यात्रा के दौरान अपने कैमरे से स्वयं तस्वीरें लींप्रधानमंत्री मोदी को गंगा नदी में नौका विहार कराने वाले नाविक गौरांग बिस्वास ने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि देश के प्रधानमंत्री उनकी नाव पर बैठेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने यात्रा के दौरान अपने कैमरे से स्वयं तस्वीरें लीं और उनके निर्देश पर नाव को गंगा की बीच धारा तक ले जाया गया।गौरांग बिस्वास ने कहा कि प्रधानमंत्री ने केवल एक बार उनका नाम पूछा और शांत भाव से आसपास के दृश्यों का आनंद लेते रहे। उन्होंने कहा कि वह बेहद खुश हैं और यह अनुभव उनके लिए किसी सपने से कम नहीं है।वहीं, प्रधानमंत्री के दौरे के लिए नाव उपलब्ध कराने वाले नाव मालिक मोहम्मद इफ्तिखार अहमद ने भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुबह यहां काम करने वाले एक व्यक्ति ने उनसे सात नावों की मांग की। जब उन्होंने पूछा कि क्या किसी विशेष व्यक्ति के लिए नाव चाहिए, तो उन्हें बताया गया कि कोई बड़ी बात नहीं है।सुबह की सैर के बाद प्रधानमंत्री मोदी घाट पर पहुंचे और नाव पर सवार हुएउन्होंने कहा कि इसके बाद सभी नावों को घाट पर तैयार कर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने से लगभग पांच मिनट पहले उन्हें बताया गया कि देश के प्रधानमंत्री आने वाले हैं। सुबह की सैर के बाद प्रधानमंत्री घाट पर पहुंचे और उनकी नाव पर सवार हुए। मोहम्मद इफ्तिखार अहमद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नाविकों से बातचीत के दौरान कहा कि सभी लोगों को आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ रहना चाहिए।पीएम मोदी के इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरलउल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार सुबह कोलकाता में गंगा नदी तट पहुंचे थे, जहां उन्होंने नौका विहार किया, लोगों से मुलाकात की और मां गंगा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। प्रधानमंत्री के इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। - कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार सुबह यहां हुगली नदी में नौका विहार किया और नाविकों तथा सुबह सैर करने वाले लोगों से मुलाकात की। मोदी ने अपने इस नौका विहार की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें वह हाथ में कैमरा लिए लकड़ी की एक नाव पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में पृष्ठभूमि में हावड़ा ब्रिज और विद्यासागर सेतु नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा, ''इस महान नदी की तस्वीरें लेने की कोशिश की। साथ ही विद्यासागर सेतु और हावड़ा ब्रिज को करीब से देखने का अवसर मिला।'' उन्होंने कहा कि हर बंगाली के लिए गंगा की विशेष अहमियत है।मोदी ने कहा, ''कहा जा सकता है कि गंगा बंगाल की आत्मा में प्रवाहित होती है। इसके पवित्र जल में एक संपूर्ण सभ्यता की शाश्वत भावना बहती है।'' उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ''आज सुबह कोलकाता में मैंने हुगली नदी के तट पर कुछ समय बिताया, जो मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें ''नाविकों से मिलने का अवसर मिला, जिनकी मेहनती प्रकृति प्रशंसनीय है और साथ ही सुबह सैर करने वालों से भी मुलाकात हुई।'' उन्होंने कहा, ''हुगली पर हमने पश्चिम बंगाल के विकास और महान बंगाली जनता की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।'' प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे हैं, जिसका पहला चरण बृहस्पतिवार को संपन्न हुआ। चुनाव का दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को होगी।
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नयी दिल्ली. ईरान के कब्जे में मौजूद एक जहाज पर सवार एक भारतीय नाविक सुरक्षित है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। ईरान ने 22 अप्रैल को जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे दो विदेशी मालवाहक जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया था और तीसरे जहाज पर गोलाबारी की थी। उसने यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी किये जाने के जवाब में की थी।
ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड ने फ्रांसेस्का और एपामिनोंडास नामक मालवाहक जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। फ्रांसेस्का पर कोई भारतीय सवार नहीं है, जबकि एपामिनोंडास पर सवार चालक दल के 21 सदस्यों में एक भारतीय है। तीसरे जहाज, यूफोरिया, जो पनामा का ध्वज वाला एक कंटेनर जहाज है, पर 21 भारतीय नाविक सवार हैं। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक मनदीप सिंह रंधावा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।'' एपामिनोंडास जहाज पर 21 सदस्य सवार हैं, जिनमें ज्यादातर यूक्रेन और फिलीपीन के नागरिक हैं। यह जहाज भारत आ रहा था और इस पर एक भारतीय नाविक भी है। रंधावा ने बताया कि भारतीय नाविक से बात हुई है और वह सुरक्षित है।
ईरानी सैनिकों द्वारा कब्जे में लिए जाने के बाद, जहाज के जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर होने की पहले जानकारी मिली थी। बाद में, इसे पूर्वी किनारे पर ले जाया गया, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। जलडमरूमध्य का पश्चिमी किनारा ईरानी सेना के नियंत्रण में है, और संघर्ष क्षेत्र से बाहर निकलने का प्रयास करने वाले किसी भी पोत को क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए पूर्व की ओर जाना आवश्यक है। तीसरा जहाज, यूफोरिया, जिसपर 21 भारतीय नाविक सवार हैं, पूर्वी हिस्से में है।
रंधावा ने कहा कि पिछले 24 घंटे में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। करीब दो महीने पहले पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय स्वामित्व वाला एक जहाज और भारतीय ध्वज वाले 13 जहाज फंसे हुए हैं। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपीलीय न्यायाधिकरणों से कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिन लोगों का नाम जोड़ने के लिए तत्काल सुनवाई का मामला बनता है, उनकी याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। सुनवाई की शुरुआत में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान पर खुशी जताई। पश्चिम बंगाल में 152 विधानसभा क्षेत्रों के लिए हुए पहले चरण के चुनाव में रिकॉर्ड 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सीजेआई ने कहा, ''भारत के एक नागरिक के रूप में, मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुश हूं। जब लोग मतदान के अधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।'' न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी पीठ में शामिल हैं। पीठ राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी भारी मतदान प्रतिशत की सराहना की और राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने में केंद्रीय बलों की भूमिका की प्रशंसा की। पश्चिम बंगाल में चुनावों में हिंसा का इतिहास रहा है। शीर्ष अदालत ने मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों से कहा कि वे लंबित मुद्दों के निस्तारण के लिए अदालत द्वारा नियुक्त 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों का रुख करें, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले भी शामिल हैं। न्यायालय ने अपीलीय न्यायाधिकरणों से कहा कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए तत्काल सुनवाई का मामला बनता है, उन्हें प्राथमिकता देकर सुनवाई की जाए। मतदाता सूचियों में शामिल किए जाने या न किए जाने के मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश ने पीड़ित व्यक्तियों को प्रशासनिक और न्यायिक दोनों पक्षों से शिकायतों के निवारण के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने की छूट भी प्रदान की। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ''हमारे 13 अप्रैल के आदेश में अधिकांश मुद्दों का व्यापक रूप से जवाब दिया जा चुका है। हालांकि हम समझ सकते हैं कि कुछ समस्याएं रोज़ाना के आधार पर उत्पन्न होती रहेंगी, जिन पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या अपीलीय न्यायाधिकरण का ध्यान आवश्यक हो सकता है। लंबित मामलों के निपटारे के लिए प्रशासनिक पक्ष पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी जाती है।'' इससे पहले शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि जिन लोगों की याचिकाएं अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा 21 अप्रैल या 27 अप्रैल से पहले स्वीकार कर ली गई थीं, उन्हें क्रमशः चुनाव के पहले या दूसरे चरण में मतदान करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल अपील लंबित होने मात्र से किसी को मतदान का अधिकार नहीं मिल जाएगा। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए थे, उनके लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल तथा पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या बाहर किए जाने के खिलाफ अपीलों के निपटारे के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरण गठित किए हैं। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मतदाता सूची में बने रहने के अधिक महत्वपूर्ण अधिकार पर पीठ बाद में विचार करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने भी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान की सराहना की और कहा कि लोग देश के हर कोने से वोट डालने आए क्योंकि उन्हें डर था कि यदि इस बार मतदान नहीं किया तो उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के केवल 139 दावों या अपीलों पर ही अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा अब तक निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे 27 लाख लोग सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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नयी दिल्ली। विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के संदर्भ में शुक्रवार को राज्यसभा को नया नोटिस सौंपा। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने बताया कि संसद के उच्च सदन के 73 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला यह नोटिस राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी को दिया गया है। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''राज्यसभा के 73 विपक्षी सदस्यों ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 15 मार्च, 2026 को और उसके बाद किए गए कृत्यों और चूक के आधार पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के साथ पठित अनुच्छेद 124 (4), धारा 11 (2) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत पद से हटाने की प्रार्थना करते हुए प्रस्ताव का नोटिस राज्यसभा महासचिव को सौंपा है।'' उन्होंने कहा कि सीईसी के खिलाफ अब नौ विशिष्ट आरोप हैं जिन्हें काफी विस्तार से दस्तावेजीकृत किया गया है और इन्हें आसानी से नकारा या खारिज नहीं किया जा सकता । रमेश ने दावा किया, ''सीईसी संविधान पर हमला जारी रखे हुए हैं। यह अत्यंत अपमानजनक है कि वह व्यक्ति प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के आदेशों का पालन करने के लिए पद पर बने हुए हैं।'' इससे पहले लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 विपक्षी सदस्यों ने बीते 12 मार्च को दोनों सदनों में कुमार के खिलाफ नोटिस सौंपा था। हालांकि राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने छह अप्रैल को इसे अस्वीकार कर दिया था। विपक्षी सांसदों ने अपने पहले के नोटिस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार पर ''कार्यपालिका के इशारे पर काम करने'' का आरोप लगाया था। इसके अलावा, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के माध्यम से लोगों को ''बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने'' का भी आरोप लगाया था।
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पटना. बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिजनों को अब कुल आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत चार लाख रुपये बीमा कंपनी की ओर से दिए जाएंगे, जबकि शेष चार लाख रुपये राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि पहले दी जाने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क हादसों के बाद प्रभावित परिवारों को अक्सर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है, इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि पीड़ित परिवारों को शीघ्र राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और नई व्यवस्था लागू होने के बाद सहायता राशि सीधे लाभार्थी परिवारों तक पहुंचाई जाएगी। सरकार ने संबंधित विभागों को प्रक्रिया सरल और त्वरित बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को समय पर सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय राहत देने के साथ-साथ सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
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नई दिल्ली। खान मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष की सफलता के बाद, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) में खनन क्षेत्र सुधारों पर 5,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ एक प्रोत्साहन तंत्र को शामिल किया गया है। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, योजना के इस घटक के लिए परिचालन दिशानिर्देश हाल ही में मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं और राज्यों में खनन क्षेत्र में सुधार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एसएएससीआई योजना के इस घटक का उद्देश्य खदानों के संचालन को सुगम और त्वरित बनाना, खनिज उत्पादन बढ़ाना, खनन क्षेत्र से राज्यों द्वारा राजस्व संग्रह में वृद्धि करना और खनन क्षेत्र के समग्र शासन में सुधार करना है। योजना के तहत प्रोत्साहन राशि तीन सुधार क्षेत्रों के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (विधानसभा वाले) को प्रदान की जाएगी।पहले चरण में खानों के संचालन हेतु राज्य का खान मंत्रालय के एकीकृत खनन पोर्टल के साथ एकीकरण, भूमि निर्धारण संबंधी मुद्दों के सक्रिय समाधान हेतु एक पूर्व-नीलामी समिति का गठन, खानों के संचालन की नियमित निगरानी हेतु राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन, प्रमुख खनिजों के लिए वार्षिक नीलामी कैलेंडर का निर्धारण और यथासंभव उसका अनुपालन, तथा खनिज अयस्क के श्रेणीगत वर्गीकरण में त्रुटियों को रोकने या उनका पता लगाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित उपायों को अपनाना शामिल है। किसी भी राज्य को उपरोक्त सभी पांच सुधारात्मक कार्य 15 दिसंबर, 2026 तक करने होंगे, जिसके बाद वह 100 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन के लिए पात्र होगा।दूसरी योजना के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 में 31 दिसंबर, 2026 तक पूर्व-निर्धारित स्वीकृतियों (जैसे वन, पर्यावरण, भूमि आदि) के साथ प्रमुख खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी के लिए राज्यों को प्रोत्साहन देकर खदानों का संचालन शुरू किया जाएगा (प्रति ब्लॉक 20 करोड़ रुपए, प्रति राज्य अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपए)। साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 (31 दिसंबर, 2026 तक) के दौरान 31 मार्च, 2026 तक सफलतापूर्वक नीलाम किए गए प्रमुख खनिज ब्लॉकों में से कम से कम 10 प्रतिशत का संचालन (अर्थात उत्पादन और प्रेषण की शुरुआत) सुनिश्चित किया जाएगा (प्रति राज्य 250 करोड़ रुपए)।तीसरे चरण में एसएमआरआई-आधारित सुधार शामिल हैं, जिसमें खान मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने वाले राज्य खनन तत्परता सूचकांक (एसएमआरआई) 2026-27 के तहत तीन श्रेणियों ए, बी और सी में से प्रत्येक में शीर्ष तीन राज्यों को पुरस्कृत करना शामिल है (प्रत्येक श्रेणी में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त करने के लिए क्रमशः 100 करोड़ रुपए, 75 करोड़ रुपए और 50 करोड़ रुपए)। -
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफे के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। शुक्रवार को वह भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से हुई। इस दौरान अशोक मित्तल और संदीप पाठक भी उनके साथ मौजूद रहे। नितिन नबीन ने मिठाई खिलाकर सभी नेताओं का स्वागत किया।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि राज्यसभा में आप के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने संवैधानिक प्रावधानों के तहत भाजपा में विलय कर लिया है। उन्होंने बताया कि सात सांसदों ने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर उन्हें राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है।इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार देते हुए आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में नेताओं को तोड़ा गया है।आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए भाजपा पंजाब की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना चाहती है। उन्होंने इसे पंजाब और वहां की जनता के साथ धोखा बताया और कहा कि लोग इसे कभी नहीं भूलेंगे।राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आप के कुल 10 सांसद हैं और उनमें से दो-तिहाई से अधिक इस पहल के साथ हैं। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज, जिनमें हस्ताक्षरित पत्र और अन्य औपचारिक कागजात शामिल हैं, सभापति को सौंप दिए गए हैं और जल्द ही पूरी सूची सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी जैसे अन्य नेता भी शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. हवाई मार्ग से होकर फ्रांस से गुजरने वाले भारतीयों को अब पारगमन वीजा की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि फ्रांसीसी सरकार ने इस आवश्यकता को समाप्त करने के लिए एक समझौते को लागू कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यहां अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यह घोषणा करते हुए कहा कि भारत इस कदम का स्वागत करता है। बाद में विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि फ्रांस के यूरोपीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाले भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त पारगमन की व्यवस्था अब फ्रांसीसी सरकार द्वारा लागू कर दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जायसवाल ने कहा कि यह निर्णय भारत और फ्रांस के बीच स्थायी साझेदारी को दर्शाता है, जिसे राष्ट्रपति मैक्रों की हालिया भारत यात्रा के दौरान 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया गया था, साथ ही लोगों की सुगम आवाजाही को और सुविधाजनक बनाने और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए भी है। जायसवाल ने कहा, "फ्रांस सरकार ने अब इस समझौते को लागू कर दिया है, और 10 अप्रैल, 2026 से भूमि पारगमन फ्रांस से केवल हवाई मार्ग से गुजरने वाले भारतीय नागरिकों को अब मुख्य वीजा की आवश्यकता नहीं होगी।" उन्होंने कहा, "हम फ्रांसीसी हवाई अड्डों से होकर गुजरने वाले भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त पारगमन के संचालन की घोषणा का स्वागत करते हैं। जैसा कि आपको याद होगा, इस साल फरवरी में मुंबई में हुई प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मैक्रों की बैठक के दौरान भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए पारगमन वीजा की आवश्यकता को समाप्त करने पर सहमति बनी थी।"
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नयी दिल्ली. भारत ने अपने हवाई क्षेत्र में पाकिस्तानी विमानों पर लगाए गए प्रतिबंध को मंगलवार को 24 मई तक के लिए बढ़ा दिया। प्रतिबंध में इस नवीनतम विस्तार के साथ, पाकिस्तान के विमानों के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र बंद रहने की अवधि अब एक वर्ष से अधिक हो जाएगी। यह फैसला 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद पहली बार लागू किया गया था। बुधवार को जारी 'नोटिस टू एयरमेन' (नोटम) में कहा गया है कि भारतीय हवाई क्षेत्र पाकिस्तान में पंजीकृत विमानों और पाकिस्तानी एयरलाइंस या ऑपरेटर द्वारा संचालित या स्वामित्व वाले या पट्टे पर लिए गए विमानों, सैन्य विमानों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए थे। पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए विभिन्न कदमों के तहत लगाया गया यह प्रतिबंध शुरू में 24 मई, 2025 तक था और बाद में इसे हर महीने बढ़ाया गया। आम तौर पर, 'नोटम' ऐसा नोटिस होता है जिसमें उड़ान संचालन से जुड़े कर्मियों के लिए आवश्यक जानकारी शामिल होती है। पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण अब भारतीय विमानन कंपनियां विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुंचने के लिए लंबे मार्ग अपना रही हैं।
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भुवनेश्वर. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार राज्य के युवाओं के लिए अगले दशक को स्वर्णिम युग बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। माझी ने यहां 'बिजनेस एमिनेंस अवार्ड्स 2026' में अपने संबोधन में कहा, "दो साल पूरे होने से पहले ही हमारी सरकार को 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इस अवधि के दौरान 2.80 लाख करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, जिनसे दो लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार सृजित होगा।" उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने ओडिशा में निवेश करना शुरू कर दिया है क्योंकि 'वे यहां अवसर और स्थिरता देखती हैं एवं उन्हें स्वच्छ शासन पर भरोसा है।' माझी ने बताया कि सेमी-कंडक्टर क्षेत्र के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर, आधुनिक विनिर्माण और नए बुनियादी ढांचे में भी भारी निवेश हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है – ऐसा निवेश वातावरण बनाना जहां उद्योग का विकास हो, लोगों को लाभ मिले और युवाओं को रोजगार प्राप्त हो।" माझी ने कहा कि उनकी सरकार का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य युवाओं को सशक्त बनाना और उनके लिए पर्याप्त अवसर सृजित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा न केवल नौकरी चाहने वाले होंगे, बल्कि नौकरी देने वाले भी होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, "अगले 10 साल का समय हमारे युवाओं के लिए स्वर्णिम युग होगा। हम इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं।" -
नयी दिल्ली. तंजानिया में खोपड़ी की एक दुर्लभ विकृति के साथ पैदा हुए पांच महीने के बच्चे की राष्ट्रीय राजधानी के एक अस्पताल में जटिल सर्जरी की गई जिसमें उसकी खोपड़ी का पुनर्निर्माण किया गया। डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के एक बयान के अनुसार बच्चे में 'क्रैनियोसिनोस्टोसिस' नाम की बीमारी पाई गई, जिसमें खोपड़ी की हड्डियां समय से पहले जुड़ जाती हैं। इससे सिर का आकार असामान्य हो जाता है और मस्तिष्क के विकास में रुकावट आ सकती है। इस मामले में विकृति के कारण 'स्कैफोसेफली' हो गई थी, जिससे सिर असामान्य रूप से लंबा और पतला दिखाई देता है। बच्चे को ऑपरेशन के तीसरे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह परिवार विशेष उपचार की तलाश में तंजानिया से आया था। बयान के मुताबिक, बच्चे की उच्च जोखिम वाली सर्जरी की गई, जिसे 'क्रेनियल वॉल्ट रिमॉडलिंग (मॉडिफाइड पाई-प्लास्टी)' कहा जाता है और इसमें खोपड़ी को दोबारा बनाकर सही आकार दिया जाता है।
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मुंबई. अदाणी समूह के स्वामित्व वाले नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा (एनएमआईए) से इस वर्ष के अंत तक प्रतिदिन लगभग 50,000 यात्रियों के आने-जाने की उम्मीद है। इसके साथ यहां करीब 380 उड़ान परिचालन (एटीएम) प्रतिदिन होने का अनुमान है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, हवाईअड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें गर्मियों के मौसम से शुरू होने की योजना थी, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण इन्हें फिलहाल टाल दिया गया है। यह नया हवाईअड्डा पिछले वर्ष 25 दिसंबर को घरेलू उड़ानों के साथ शुरू हुआ था। अभी यहां रोजाना लगभग 20,000 यात्री आते-जाते हैं और करीब 150 उड़ानें संचालित होती हैं। सूत्रों ने बताया, "हवाईअड्डा अभी रोजाना 20,000 यात्रियों को संभाल रहा है। उम्मीद है कि दिसंबर तक यह संख्या बढ़कर करीब 50,000 हो जाएगी और उड़ानों की संख्या भी बढ़कर लगभग 380 तक पहुंच सकती है। जिस तरह से यात्री बढ़ रहे हैं, उससे और भी ज्यादा वृद्धि की संभावना है।" सूत्रों के मुताबिक, इंडिगो एयरलाइन इस हवाईअड्डे की सबसे बड़ी भागीदार है और यहां की कुल उड़ानों में इसकी हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है, जो आगे बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत तक हो सकती है। सूत्रों ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत को लेकर इंडिगो की ओर से भी तैयारी दिखाई दे रही है और शुरुआत में करीब 16 आगमन और 16 प्रस्थान वाली उड़ानें चलाने की योजना थी। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की शुरुआत फिलहाल टाल दी गई है। कुछ एयरलाइंस लंबी दूरी की उड़ानों के लिए भी संपर्क कर रही हैं, लेकिन अभी कोई अंतिम समयसीमा तय नहीं की गई है।














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