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कोलंबो. हिंदी फिल्म संगीत को ‘बिनाका गीतमाला' जैसे अनूठे साप्ताहिक कार्यक्रम के जरिये लोकप्रिय बनाने वाली श्रीलंका की रेडियो सेवा ने इस हफ्ते अपने सौ वर्ष पूरे कर लिए। श्रीलंका की यह रेडियो सेवा पूरे भारत में कभी ‘रेडियो सीलोन' के नाम से लोकप्रिय थी। श्रीलंका की रेडियो सेवा आधिकारिक तौर पर 16 दिसंबर, 1925 को शुरू की गई थी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह एशिया का पहला व्यावसायिक ‘शॉर्ट-वेव' स्टेशन था। श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एसएलबीसी) ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक बयान में कहा, ‘‘राष्ट्रीय रेडियो के पास एशिया में रिकॉर्ड किए गए गानों का सबसे बड़ा संग्रह है, जिसमें भारत में भी ना पाए जाने वाले दुर्लभ हिंदी गाने और विश्व नेताओं की आवाजों की रिकॉर्डिंग का एक अनूठा संग्रह शामिल है।'' मूल रूप से दूरसंचार विभाग का हिस्सा रही इस रेडियो सेवा का एक अक्टूबर, 1949 को पुनर्गठन किया गया और इसे ‘रेडियो सीलोन' नाम दिया गया। लेकिन बाद में पांच जनवरी, 1967 को इसका नाम बदलकर श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एसएलबीसी) कर दिया गया। रेडियो सीलोन पर लगभग चार दशकों तक हर सप्ताह ठीक रात आठ बजे हजारों भारतीय अमीन सयानी की सुरीली आवाज सुनने के लिए उत्सुक रहते थे। सयानी के दमदार स्वर में किया गया उद्घोष ‘भाइयो और बहनो' हिंदी फिल्म संगीत के दीवाने भारतीय उपमहाद्वीप में गूंजता था और लाखों श्रोताओं में उस दिन के गानों को लेकर उत्सुकता पैदा करता था। बिनाका गीतमाला का प्रसारण रेडियो सीलोन पर 1952 से 1988 तक हुआ। इसके बाद 1989 में यह ‘ऑल इंडिया रेडियो' की विविध भारती सेवा के तहत प्रसारित किया गया जो 1994 तक जारी रहा। आज एसएलबीसी घरेलू स्तर पर तीन सिंहली, दो तमिल और एक अंग्रेजी सेवा प्रसारित करता है, साथ ही हिंदी, कन्नड़, तेलुगु और मलयालम में विदेशी सेवाएं भी प्रसारित करता है। इस वर्ष 16 दिसंबर को हिंदी उद्घोषक ने यह कहकर शुरुआत की कि 60 और 70 के दशक के गाने, जिन्हें हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्ण युग कहा जाता है, श्रीलंका में इतने लोकप्रिय थे कि उनकी प्रतियां सिंहली भाषा में भी उपलब्ध थीं।
- नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को बड़ा झटका लगा है। संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की विशेष अदालत ने शनिवार को तोशाखाना-2 मामले में दोनों को 17-17 साल की कैद की सजा सुनाई।अदालत ने दोनों पर 1.64 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पाकिस्तानी मीडिया द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक विशेष न्यायाधीश (सेंट्रल) शाहरुख अर्जुमंद ने रावलपिंडी की अदियाला जेल में सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया, जहां इमरान खान पहले से ही बंद हैं।यह मामला मई 2021 का है, जब इमरान खान को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने एक आधिकारिक दौरे के दौरान बुल्गारी ब्रांड का महंगा आभूषण सेट उपहार में दिया था। आरोप है कि बाद में सरकारी खजाने से इस कीमती तोहफे को बेहद कम कीमत पर खरीद लिया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।केस की सुनवाई के दौरान इमरान खान ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 342 के तहत विशेष अदालत में अपना बयान दर्ज कराते हुए अभियोजन पक्ष के आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।उन्होंने तर्क दिया कि वे पाकिस्तान दंड संहिता के तहत लोक सेवक की श्रेणी में नहीं आते, क्योंकि प्रधानमंत्री होने के बावजूद उन्हें उस उपहार के विशिष्ट विवरणों की जानकारी नहीं थी, जो उनकी पत्नी को दिया गया था। पीटीआई के संस्थापक ने कहा कि तोशाखाना नीति 2018 के अनुसार उचित प्रक्रिया का पालन किया गया। दान की सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रोटोकॉल अनुभाग को विधिवत दी गई, उसका मूल्यांकन किया गया और भुगतान राष्ट्रीय खजाने में जमा होने के बाद उसे कानूनी रूप से अपने पास रख लिया गया। उन्होंने कहा कि हमने तोशाखाना नीति का भावना पूर्वक पालन किया है।अदालत ने इमरान खान को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 34 और धारा 409 के तहत 10 साल की कठोर कैद, जबकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 5(2) के तहत 7 साल की सजा सुनाई। इसी तरह बुशरा बीबी को भी उन्हीं धाराओं के तहत कुल 17 साल की सजा सुनाई।अदालत के आदेश में कहा गया कि सजा तय करते समय इमरान खान की उम्र और बुशरा बीबी के महिला होने के पहलू को ध्यान में रखा गया। इसी आधार पर अपेक्षाकृत नरमी बरती गई और कम सजा दी गई। साथ ही अदालत ने कहा कि जेल में बिताई गई अवधि को सजा में जोड़ा जाएगा। फैसले के बाद इमरान खान और बुशरा बीबी के वकीलों ने संकेत दिए हैं कि वे इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इस मामले में दोनों को पिछले साल दिसंबर में आरोपी बनाया गया था। इस साल अक्टूबर में इमरान और बुशरा बीबी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था।
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लॉस एंजिलिस. दशकों तक अपनी जान जोखिम में डालकर युद्ध की आंखों देखी रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार पीटर अर्नेट का निधन हो गया है। ‘पुलित्जर पुरस्कार' से सम्मानित अर्नेट 91 वर्ष के थे। उनके बेटे एंड्रयू अर्नेट ने बताया कि पीटर ने बुधवार को ‘न्यूपोर्ट बीच' में अंतिम सांस ली और उनके आखिरी पलों में उनके परिवार के सदस्य और दोस्त वहीं मौजूद थे। वह प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे और शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अर्नेट पत्रकारिता जगत का एक बड़ा नाम रहे हैं। वर्ष 1966 में 'द एसोसिएटेड प्रेस' (एपी) के लिए वियतनाम युद्ध की कवरेज करने पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग की श्रेणी में ‘पुलित्जर पुरस्कार' से नवाजा गया था। वर्ष 1962 से 1975 तक वियतनाम युद्ध की उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें साथी पत्रकारों के बीच समाचार एजेंसी संवाददाता के तौर पर पहचान दिलाई। हालांकि, पीटर अर्नेट को असली पहचान 1991 में मिली, जब पहले खाड़ी युद्ध के दौरान उन्होंने ‘सीएनएन' के लिए युद्ध के मैदान से लाइव रिपोर्टिंग की थी।
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मस्कट. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) द्विपक्षीय संबंधों को नया विश्वास एवं ऊर्जा प्रदान करेगा और दोनों देशों में वृद्धि के अवसर भी पैदा करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां आयोजित ‘भारत-ओमान व्यापार शिखर सम्मेलन' में यह बात कही।
उन्होंने अपने संबोधन में मांडवी से मस्कट तक दोनों देशों के बीच सदियों पुराने समुद्री व्यापारिक संबंधों का उल्लेख किया जो वर्तमान समय में जीवंत वाणिज्यिक आदान-प्रदान की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के 70 वर्ष पुराने कूटनीतिक संबंध सदियों से निर्मित विश्वास और मित्रता का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में भारत और ओमान ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत वस्त्र, कृषि उत्पाद तथा चमड़े के सामान सहित भारत के 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसे आधिकारिक तौर पर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) कहा गया है। सीईपीए को भारत-ओमान के साझा भविष्य की रूपरेखा करार देते हुए प्रधानमंत्री ने व्यापार जगत के लोगों से इस समझौते की पूरी क्षमता का लाभ उठाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज हम एक ऐसा ऐतिहासिक निर्णय ले रहे हैं, जिसकी गूंज आने वाले कई दशकों तक सुनाई देगी। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) हमारी साझेदारी को 21वीं सदी में नया विश्वास एवं नई ऊर्जा प्रदान करेगा।'' उन्होंने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देगा, निवेश में नया विश्वास उत्पन्न करेगा और हर क्षेत्र में अवसरों के नए द्वार खोलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 11 वर्षों में भारत की आर्थिक सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि अगली पीढ़ी के सुधारों, नीतिगत स्थिरता, सुशासन एवं निवेशकों के उच्च विश्वास के दम पर देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने पिछले 11 वर्ष में न केवल नीतियों में बदलाव किया है, बल्कि अपने आर्थिक स्वरूप को भी बदल दिया है।'' मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में पिछली तिमाही में भारत की आठ प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि इसकी मजबूत प्रकृति और अंतर्निहित शक्तियों को उजागर करती है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत की प्रगति हमेशा से साझा प्रगति की कहानी रही है। भारत जब आगे बढ़ता है, तो वह अपने मित्रों को भी अपने विकास में भागीदार बनाता है। हम आज भी यही कर रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने साथ ही कहा कि भारत की वृद्धि की यात्रा में ओमान के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।
मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक, संपर्क, विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं, विनिर्माण क्षमताओं और हरित विकास को विकसित करने के लिए तेजी से और बड़े पैमाने पर काम कर रहा है ताकि ‘जीवन की सुगमता' एवं ‘कारोबार की सुगमता' को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने हाल के वर्षों में भारत द्वारा लागू किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया जिनमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) शामिल हैं। मोदी ने ओमान की कंपनियों को ऊर्जा, तेल एवं गैस, पेट्रोरसायन और उर्वरकों के पारंपरिक क्षेत्रों से परे देखने और हरित ऊर्जा, सौर पार्क, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट ग्रिड, कृषि-प्रौद्योगिकी, वित्तीय प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने व्यापार साझेदारी को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु भारत-ओमान कृषि नवाचार केंद्र और भारत-ओमान नवाचार सेतु के गठन का भी प्रस्ताव रखा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ये मात्र विचार नहीं हैं बल्कि निवेश करने, नवाचार करने और मिलकर भविष्य का निर्माण करने का निमंत्रण है। प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय यात्रा पर बुधवार को यहां पहुंचे थे। - वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने 20 और देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं जिसमें फलस्तीनी प्राधिकरण भी शामिल है। अमेरिका की यात्रा करने और वहां प्रवास करने को लेकर इस साल पहले घोषित व्यापक प्रतिबंधों से प्रभावित देशों की संख्या ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा के बाद दोगुनी हो जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने उन देशों की सूची में पांच अन्य देशों को शामिल किया है जो यात्रा संबंधी पूर्ण प्रतिबंध झेल रहे हैं। इसके अलावा, फलस्तीनी प्राधिकरण द्वारा जारी दस्तावेजों पर यात्रा करने वाले लोगों को भी इस पूर्ण प्रतिबंध के दायरे में लाया गया है, जबकि 15 अन्य देशों पर नयी पाबंदियां लगाई गई हैं। यह कदम यात्रा और आव्रजन के लिए अमेरिका में प्रवेश के मानकों को और सख्त करने के प्रशासन के जारी प्रयासों का हिस्सा है। आलोचकों का कहना है कि इससे कई देशों के लोगों की यात्रा पर अनुचित रूप से रोक लग रही है। जिन लोगों के पास पहले से वीजा है, जो अमेरिका के वैध स्थायी निवासी हैं, जो राजनयिकों या खिलाड़ियों जैसी कुछ विशेष वीजा श्रेणियां के तहत अमेरिका आते हैं या जिनका अमेरिका में प्रवेश देश के हित में माना जाता है, उन्हें इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। घोषणा में कहा गया है कि ये बदलाव एक जनवरी से प्रभावी होंगे। जून में ट्रंप ने घोषणा की थी कि 12 देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा, जबकि सात अन्य देशों के नागरिकों पर यात्रा संबंधी पाबंदियां लगाई जाएंगी। उस समय प्रतिबंध की सूची में अफगानिस्तान, म्यांमा, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल थे, जबकि बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला से आने वाले आगंतुकों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार घोषणा की कि अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध झेल रहे देशों की सूची का विस्तार करते हुए इसमें बुर्किना फासो, माली, नाइजर, दक्षिण सूडान और सीरिया को भी शामिल किया जा रहा है। प्रशासन ने फलस्तीनी प्राधिकरण द्वारा जारी यात्रा दस्तावेजों के आधार पर यात्रा को भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। इसे फलस्तीनियों के खिलाफ अमेरिका के यात्रा प्रतिबंध के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिण सूडान पहले से ही कड़े यात्रा प्रतिबंधों का सामना कर रहा था। इसके अलावा, आंशिक प्रतिबंधों का सामना करने वाले देशों की सूची में 15 और देशों को जोड़ा गया है। इनमें अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, आइवरी कोस्ट, डोमिनिका, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, तंजानिया, टोंगा, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं। ये प्रतिबंध अमेरिका की यात्रा करने वाले आगंतुकों के साथ-साथ वहां स्थायी रूप से बसने के इच्छुक लोगों पर भी लागू होंगे।
- लॉस एंजिलिस. टेलीविजन के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक में बड़ा बदलाव करते हुए ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज' ने बुधवार को घोषणा की कि ऑस्कर पुरस्कार समारोह वर्ष 2029 से एबीसी से हटकर यूट्यूब पर प्रसारित होगा। एबीसी 2028 तक वार्षिक समारोह का प्रसारण जारी रखेगा। उस वर्ष ऑस्कर पुरस्कार का 100वां संस्करण होगा। वर्ष 2029 से शुरू होकर, यूट्यूब के पास 2033 तक ऑस्कर के प्रसारण के वैश्विक अधिकार बने रहेंगे।
- काठमांडू. नेपाल ने एक दशक से अधिक समय से जारी प्रतिबंध को समाप्त करते हुए अब भारतीय उच्च मूल्य वर्ग की मुद्रा को हिमालयी राष्ट्र में ले जाने संबंधी नियमों में ढील दी है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। कैबिनेट सूत्रों के अनुसार, सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसके तहत अब व्यक्ति 200 रुपये और 500 रुपये के भारतीय नोट अधिकतम 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति की सीमा तक अपने पास रख सकते हैं। संशोधित प्रावधान के तहत नेपाली और भारतीय दोनों नागरिक भारत से नेपाल आते समय या नेपाल से भारत जाते समय उच्च मूल्य वर्ग के भारतीय बैंक नोटों को अपने साथ ला या ले जा सकते हैं। सोमवार को हुआ यह कैबिनेट निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन (मुद्रा का निर्यात और आयात) विनियम, 2015 में किए गए संशोधन के अनुरूप है। यह संशोधन भारतीय, नेपाली और भूटानी नागरिकों को भारत की यात्रा के दौरान उच्च मूल्य वर्ग की भारतीय मुद्रा ले जाने की अनुमति देता है। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि यह दोनों देशों के पर्यटकों और व्यापारियों के लिए यात्रा करना या कारोबार करना आसान बनाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी लंबे समय से चली आ रही मांग थी और भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।''यह कदम उन प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष रूप से मददगार होगा जो भारत में कमाते हैं और प्रतिबंधों के कारण कम मूल्य वर्ग के नोटों में अपनी कमाई घर लाते थे।
- सिंगापुर. भारतीय पर्यटक सिंगापुर में विलासिता की वस्तुओं पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में से हैं। सिंगापुर पर्यटन बोर्ड (एसटीबी) के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय पर्यटकों ने 2025 की पहली छमाही में सिंगापुर में 81.217 करोड़ सिंगापुर डॉलर खर्च किए जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.40 प्रतिशत अधिक है। ऑर्केड रोड बिजनेस एसोसिएशन (ओआरबीए) के चेयरमैन मार्क शॉ ने कहा, ‘‘ भारतीय यात्री, द्वीप राष्ट्र के सबसे व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण बाजारों में से एक बने हुए हैं और वे उन पर्यटकों में शामिल हैं जो सिंगापुर में विलासितापूर्ण खर्च को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।'' ओआरबीए सिंगापुर की प्रमुख संस्था है जो ऑर्केड रोड का प्रबंधन एवं प्रचार करती है जो एक प्रमुख ‘शॉपिंग बेल्ट' है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के अलावा, चीन और इंडोनेशिया के पर्यटक भी विलासितापूर्ण खर्च में वैश्विक गिरावट के बावजूद सिंगापुर में विलासिता पर काफी खर्च कर रहे हैं। शॉ ने कहा, ‘‘ भारतीय यात्रियों का खर्च अधिक होता है और वे औसत से अधिक यानी 6.3 दिन तक ठहरते हैं। इन लंबी यात्राओं के परिणामस्वरूप वे खुदरा, भोजन, मनोरंजन, दर्शनीय स्थलों और आवास पर अधिक खर्च करते हैं।'' एसटीबी के आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर में भारतीय पर्यटकों की संख्या साल के पहले 10 महीनों में 10 लाख तक पहुंच गई जो पिछले साल की तुलना में 2.6 प्रतिशत अधिक है। कुल मिलाकर जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान सिंगापुर में 1425 लाख पर्यटक आए जो 2.5 प्रतिशत की वृद्धि है।
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नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस–यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कई महीनों से चल रही लड़ाई को रोका जा सकता है। ट्रंप ने यह बात बर्लिन में यूरोपीय नेताओं और यूक्रेनी अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत के बाद कही।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने यूरोप के कई बड़े नेताओं से बहुत लंबी और अच्छी चर्चा की। इन बातचीतों में यूक्रेन युद्ध मुख्य विषय रहा। उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय पहले ही यूरोपीय नेताओं के साथ उनकी बातचीत हुई है और हालात सही दिशा में जाते दिख रहे हैं।ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सीधे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और जर्मनी, इटली, नाटो, फिनलैंड, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, पोलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क और नीदरलैंड के नेताओं से बात की। उन्होंने कहा कि ये सभी बातचीत गंभीर और आपसी तालमेल के साथ हुईं। राष्ट्रपति ने युद्ध में हो रही भारी जनहानि पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह युद्ध नहीं होना चाहिए था और इसे कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था। हर महीने हजारों सैनिक और आम लोग मारे जा रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी कई बार बातचीत हुई है और अब शांति समझौते के और करीब पहुंचा जा रहा है। ट्रंप ने कहा, “हमने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ कई बातचीत की है, और मुझे लगता है कि हम अब पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं। उनका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाना है। चुनौती दोनों पक्षों को “एक ही पेज पर” लाना है, और कहा, “मुझे लगता है कि यह काम कर रहा है।”ट्रंप ने कहा कि युद्ध में तबाही का स्तर बहुत बड़ा है और दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप में ऐसा नुकसान पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय नेता भी चाहते हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो और नाटो देशों के साथ सहयोग मजबूत बना हुआ है।सवालों के जवाब में ट्रंप ने यह भी माना कि राष्ट्रपति पुतिन भी अब युद्ध खत्म करना चाहते हैं और सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में दोबारा युद्ध न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा चल रही है, जिसमें यूरोप की बड़ी भूमिका होगी।यूक्रेन में युद्ध अब चौथे साल में पहुंच चुका है और यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा संघर्ष बन गया है। इस युद्ध का असर दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था, खाद्य आपूर्ति और सुरक्षा संबंधों पर पड़ा है। अमेरिका और नाटो देशों ने यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद दी है, वहीं युद्ध रोकने के कूटनीतिक प्रयास भी तेज हुए हैं। इस मामले में भारत ने भी लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर दिया है। भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों से संवाद बनाए रखा है और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर युद्ध तुरंत रोकने और देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की बात दोहराई है। -
सिडनी. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि सिडनी के बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव के दौरान दो बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें एक बच्चे सहित 15 लोगों की मौत हो गई। देश के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इसे यहूदी-विरोधी आतंकवाद का कृत्य बताया। अधिकारियों के अनुसार, हमलावर पिता और पुत्र थे। ऑस्ट्रेलिया के सबसे लोकप्रिय समुद्र तटों में से एक पर हुआ यह नरसंहार पिछले एक साल में देश में लगातार हुईं यहूदी-विरोधी घटनाओं के बाद सामने आया। हालांकि, अधिकारियों ने इन घटनाओं और रविवार की गोलीबारी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं बताया। सख्त बंदूक कानूनों वाले इस देश में यह लगभग तीन दशकों में सबसे वीभत्स हमला था।
न्यू साउथ वेल्स पुलिस आयुक्त माल लैनन ने बताया कि 50 वर्षीय एक हमलावर को पुलिस ने मार गिराया, जबकि उसका 24 वर्षीय बेटा घायल हुआ और अस्पताल में उसका उपचार हो रहा है। पुलिस ने कहा कि एक हमलावर सुरक्षा एजेंसियों के लिए जाना-पहचाना था, लेकिन किसी हमले की पूर्व योजना के संकेत नहीं मिले थे। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिंस ने बताया कि मृतकों की उम्र 10 से 87 वर्ष के बीच थी। सोमवार सुबह तक कम से कम 42 लोग अस्पतालों में भर्ती थे, जिनमें कई की हालत गंभीर थी। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा, ‘‘जो हमने देखा वह पूरी तरह यहूदी-विरोधी आतंकवाद का कृत्य था। यह ऑस्ट्रेलिया के उस महत्वपूर्ण स्थान बॉन्डी बीच पर हुआ, जो खुशी, परिवारों और उत्सवों से जुड़ा है। जो हुआ है, उसने इसे हमेशा के लिए कलंकित कर दिया है।'' यह हमला ऐसे दिन किया गया जब हजारों लोग बॉन्डी बीच पर जुटे थे। इनमें सैकड़ों लोग आठ दिन चलने वाले हनुक्का उत्सव की शुरुआत के अवसर पर आयोजित ‘‘चानुका बाय द सी'' कार्यक्रम में शामिल थे। इजराइल के विदेश मंत्रालय ने एक इजराइली नागरिक की मौत की पुष्टि की, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि मारे गए लोगों में फ्रांसीसी नागरिक डैन एल्कायम भी शामिल था। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने किसी भी पीड़ित या हमलावर का आधिकारिक रूप से नाम जारी नहीं किया। हालांकि, ‘द ऑस्ट्रेलियन अखबार' के अनुसार लारिसा क्लेटमैन नाम की महिला ने बताया कि उनके पति अलेक्ज़ेंडर क्लेटमैन की भी मौत हो गई है। यह दंपति नरसंहार के जीवित बचे लोगों में शामिल था। हनुक्का समारोह में मौजूद वकील आर्सेन ओस्त्रोव्स्की के सिर को गोली छूकर निकल गई। उन्होंने बताया कि ‘‘यह पूरी तरह से नरसंहार था, चारों ओर लाशें बिखरी थीं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऑस्ट्रेलिया में ऐसा होगा।'' सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2.8 करोड़ की आबादी वाले ऑस्ट्रेलिया में लगभग 1.17 लाख यहूदी रहते हैं। सरकार की विशेष दूत जिलियन सेगल के अनुसार, अक्टूबर 2023 के बाद यहूदी-विरोधी घटनाएं तीन गुना से अधिक बढ़ीं। पुलिस ने कहा है कि इस नरसंहार से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति की तलाश नहीं है और घटना की गहन जांच की जाएगी। मौके से दो देसी बम भी बरामद किए गए हैं जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया। ब्रिटेन के महाराज चार्ल्स तृतीय, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे यहूदी-विरोधी आतंकवादी हमला बताया और इसकी कड़ी निंदा की है। -
अम्मान/ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर जॉर्डन पहुंचे, जिसका उद्देश्य अरब देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों का एक विशेष संकेत देते हुए, जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने हवाई अड्डे पर मोदी की गर्मजोशी से अगवानी की और फिर उनका रस्मी स्वागत किया गया। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "अम्मान पहुंच गया हूं। हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए जॉर्डन के हाशमी साम्राज्य के प्रधानमंत्री जाफर हसन का शुक्रगुजार हूं। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा हमारे देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देगी।" जॉर्डन की यह पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा 37 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है और ऐसे वक्त हो रही है, जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75 वर्ष हो रहे हैं। मोदी के तीन देशों के चार दिवसीय दौरे का पहला पड़ाव जॉर्डन है। इसके बाद वह इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे। जॉर्डन के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "आज जॉर्डन में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक सम्मानित अतिथि के रूप में स्वागत करना हमारे लिए सम्मान की बात है। यह यात्रा हमारे 75 वर्षों के घनिष्ठ और स्थायी संबंधों को दर्शाती है।" उन्होंने कहा, "हम दोनों देशों के बीच विशेष रूप से आर्थिक, निवेश और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम तलाशने के इच्छुक हैं।'' जब मोदी होटल पहुंचे, तो भारतीय समुदाय के सदस्यों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने लोगों से हाथ मिलाया और बातचीत की। स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक भारतीय नृत्य प्रस्तुत किए, जो देश की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते थे। मोदी आज बाद में शाह अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन से बातचीत करेंगे, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। प्रधानमंत्री और शाह के मंगलवार को भारत-जॉर्डन व्यापार कार्यक्रम को संबोधित करने की उम्मीद है, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख व्यवसायी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री जॉर्डन में भारतीय समुदाय के साथ भी बातचीत करेंगे और देश के युवराज के साथ पेत्रा शहर का दौरा करेंगे, जो भारत के साथ प्राचीन व्यापारिक संबंधों को साझा करने वाला एक ऐतिहासिक शहर है। हालांकि, उनकी यह यात्रा मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की जॉर्डन की यह पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है। मोदी फरवरी 2018 में फलस्तीन जाते समय जॉर्डन में कुछ देर रुके थे।
विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह दिल्ली में एक विशेष प्रेस वार्ता में कहा कि हालांकि यह एक पारगमन यात्रा थी, लेकिन शाह द्वारा उन्हें विशेष सम्मान दिया गया था, जिससे यह महज एक पारगमन यात्रा से कहीं अधिक बन गई... किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह वर्तमान पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा 37 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है।" भारत और जॉर्डन के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं, और दिल्ली अम्मान का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर है। जॉर्डन भारत को उर्वरकों, विशेष रूप से फॉस्फेट और पोटाश का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता भी है। इस अरब देश में 17,500 से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो कपड़ा, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। -
नई दिल्ली। कांगो के पूर्वी हिस्से में पिछले 15 दिन से भीषण संघर्ष जारी है। इसके कारण दक्षिण किवु प्रांत में पांच लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें लगभग एक लाख बच्चे शामिल हैं। यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फंड (यूनिसेफ) ने यह जानकारी दी। यूनिसेफ ने लाखों लोगों के विस्थापन पर अपनी चिंता जताई। उसने एक बयान में कहा, “वह दक्षिण किवु में बढ़ती शत्रुता से ‘बहुत चिंतित’ है, जिसके कारण लाखों बच्चों और परिवारों को सुरक्षा के लिए ‘डीआरसी’ (पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) के अंदर और पड़ोसी बुरुंडी और रवांडा में सीमाओं के पार भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”यूनिसेफ ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से बच्चों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपने दायित्वों का सम्मान करने का आग्रह किया। यूनिसेफ ने कहा, “जैसे-जैसे हिंसा फैल रही है, विस्थापन के आंकड़ों में और वृद्धि होने की उम्मीद है, क्योंकि दक्षिण किवु में भारी लड़ाई के बीच चार बच्चों सहित सैकड़ों लोग मारे गए हैं।”हिंसा से भागते लोगों का अचानक आगमन पड़ोसी बुरुंडी में भी दर्ज किया गया है। 6 दिसंबर से 11 दिसंबर के बीच 50 हजार से अधिक नए लोग आए, जिनमें से लगभग आधे बच्चे थे। यूनिसेफ ने कहा कि यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी शरण लेने वाले लोगों की पहचान करना जारी रखे हुए हैं।इस सप्ताह की शुरुआत में ‘मार्च 23 मूवमेंट (एम23)’ विद्रोही संगठन ने बुरुंडी सीमा के पास दक्षिण किवु के दूसरे सबसे बड़े शहर उविरा पर कब्जा करने का दावा किया। प्रांतीय राजधानी बुकावु के फरवरी में ‘एम23’ के हाथ में आने के बाद उविरा ने दक्षिण किवु के लिए अस्थायी प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम किया। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया कि बुरुंडी सीमा के पास एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र होने के कारण इस शहर का पूर्वी डीआरसी में महत्वपूर्ण रणनीतिक महत्व है।विशेषज्ञों और स्थानीय सूत्रों ने चेतावनी दी है कि उविरा को खोने से समय के साथ ‘डीआरसी’ के दक्षिण-पूर्वी प्रांतों की ओर एक गलियारा खुल सकता है, जिसमें एक प्रमुख आर्थिक क्षेत्र हाउट-कटंगा भी शामिल है। इसके साथ ही दक्षिण में बाराका और फिजी इलाकों में भी एम-23 लड़ाकों और कांगो सरकार की सेना के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं।(
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न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन. अमेरिका के 19 राज्यों ने नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर शुल्क लगाने के देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के फैसले को “गैरकानूनी” बताते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी और बढ़ जाएगी। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने 18 अन्य अटॉर्नी जनरल के साथ मिलकर शुक्रवार को मैसाचुसेट्स जिले के अमेरिकी जिला न्यायालय में यह मुकदमा दायर किया। उन्होंने कानूनी अधिकार या उचित प्रक्रिया के बिना एच-1बी शुल्क में “भारी” बढ़ोतरी किए जाने को चुनौती दी है। एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने की अस्थायी रूप से अनुमति मिलती है और भारतीय नागरिक इसका व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। मुकदमे में दलील दी गई है कि नए शुल्क से उन सरकारी और गैर-लाभकारी नियोक्ताओं के लिए व्यावहारिक रूप से मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी जो स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए एच-1बी वीजा धारकों पर निर्भर हैं। मुकदमे में कहा गया है, “एच-1बी वीजा से प्रतिभाशाली चिकित्सकों, नर्स, शिक्षकों और अन्य कामगारों को हमारे देश के जरूरतमंद समुदायों की सेवा करने का अवसर मिलता है।” जेम्स ने एक बयान में कहा, “इस कार्यक्रम को बर्बाद करने की प्रशासन की अवैध कोशिश से न्यूयॉर्कवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करना दूभर हो जाएगा, हमारे बच्चों की शिक्षा बाधित होगी और हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। मैं प्रवासी समुदायों को निशाना बनाने वाली इस अव्यवस्था और क्रूरता को रोकने के लिए लड़ाई जारी रखूंगी।” सितंबर में ट्रंप ने घोषणा की थी कि उनका प्रशासन सभी नए एच-1बी आवेदनों पर एकमुश्त 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाएगा।
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नई दिल्ली। विनाशकारी चक्रवात दितवाह से प्रभावित श्रीलंका की जनता को त्वरित मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए भारत ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ चला रहा है। इसी अभियान के तहत भारतीय सेना की एक 48 सदस्यीय इंजीनियर टास्क फोर्स को श्रीलंका में तैनात किया गया है। भारतीय सेना की यह विशेष टीम युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव से जुड़े काम कर रही है। राहत कार्यों के लिए की गई यह पहल भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के अनुरूप है। भारतीय सेना के मुताबिक टास्क फोर्स की प्राथमिक जिम्मेदारी चक्रवात से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण है।
गौरतलब है कि चक्रवात, तेज बारिश और बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है। अब यहां टूटी हुई सड़कों की मरम्मत की जा रही है ताकि राहत सामग्री और आवश्यक सेवाओं की आवाजाही सुचारू रूप से हो सके। भारतीय सेना की इस टीम में विशेष रूप से ब्रिजिंग एक्सपर्ट, सर्वेयर, वॉटरमैनशिप विशेषज्ञ, भारी इंजीनियरिंग उपकरणों, ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम संचालन में दक्ष कर्मी शामिल हैं।सभी विशेषज्ञ मिलकर सटीक, तेज और प्रभावी इंजीनियरिंग सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। इस सहायता में बुरी तरह क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण, टूटे हुए पुलों को जोड़ना और अन्य ढांचागत सुविधाएं बहाल करना शामिल है।भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स के पास यहां श्रीलंका में फिलहाल चार सेट बेली ब्रिज उपलब्ध हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान से श्रीलंका पहुंचाया गया है। इनके माध्यम से कटे हुए इलाकों में त्वरित संपर्क बहाली की जाएगी। इसके अतिरिक्त टास्क फोर्स के पास पन्यूमैटिक नावें, आउटबोर्ड मोटर, हेवी पेलोड ड्रोन, रिमोट-कंट्रोल्ड बोट आदि अत्याधुनिक उपकरण भी उपलब्ध हैं।सेना का कहना है कि इन्हीं संसाधनों के दम पर टीम राहत व बचाव कार्य, अस्थायी आश्रय, सड़कों और पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं के निर्माण में सक्षम है। श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा बताए गए आवश्यक स्थानों के आधार पर, भारतीय इंजीनियर टास्क फोर्स ने श्रीलंका सेना और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर कई पुल स्थलों का रेकी का काम किया है। इन पुलों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई पुलों पर कार्य प्रारंभ भी कर दिया गया है। यहां मॉड्यूलर बेली ब्रिज स्थापित किया जा रहा है, जिसे आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न कॉन्फिगरेशन में लगाया जा सकता है। इसके तैयार होते ही इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी बहाल हो जाएगी। सेना के अनुसार ऑपरेशन ‘सागर बंधु’ सिर्फ राहत कार्य नहीं, बल्कि भारत की पड़ोसी देशों के प्रति प्रतिबद्धता, त्वरित सहायता और मानवीय सहयोग की भावना का प्रतीक है। भारतीय सेना की यह इंजीनियर टास्क फोर्स श्रीलंका के संकटग्रस्त क्षेत्रों में आशा और सहायता दोनों का महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर काम कर रही है। -
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों को अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने गृह देशों में वापस जाना ‘शर्मनाक' है। ट्रंप ने दावा किया कि 'ट्रंप गोल्ड कार्ड' योजना कंपनियों को देश में इस तरह की प्रतिभाओं को नियुक्त करने और बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने बुधवार को दस लाख डॉलर की 'ट्रंप गोल्ड कार्ड' योजना शुरु करने की घोषणा की। यह एक वीजा कार्यक्रम है, जो अप्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करेगा। 'ट्रंप गोल्ड कार्ड' एक ऐसा वीजा है जो अमेरिका को पर्याप्त लाभ प्रदान करने की किसी व्यक्ति की क्षमता पर आधारित है। व्हाइट हाउस में एक बैठक में ट्रंप ने कहा, ‘‘ किसी महान व्यक्ति का हमारे देश में आना एक उपहार के समान है, क्योंकि हमें लगता है कि ये कुछ ऐसे असाधारण लोग होंगे जिन्हें यहां रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कॉलेज से स्नातक करने के बाद, उन्हें भारत वापस जाना पड़ता है, उन्हें चीन वापस जाना पड़ता है, उन्हें फ्रांस वापस जाना पड़ता है। उन्हें वापस वहीं जाना पड़ता है, जहां से वे आए थे। वहां रुकना बहुत मुश्किल है। यह शर्मनाक है। यह एक हास्यास्पद बात है। हम इस पर ध्यान दे रहे हैं।'' ट्रंप ने घोषणा की कि गोल्ड कार्ड वेबसाइट शुरू हो गई है और कंपनियां व्हार्टन, हार्वर्ड और एमआईटी जैसे शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों के छात्रों को अमेरिका में ही रखने के लिए गोल्ड कार्ड खरीद सकती हैं। इस अवसर पर आईबीएम के भारतीय मूल के अमेरिकी सीईओ अरविंद कृष्णा और डेल टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) माइकल डेल भी मौजूद थे।
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वाशिंगटन. अर्थव्यवस्था और आव्रजन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में इस साल काफी गिरावट आई है। ‘एपी-एनओआरसी' के एक नये सर्वेक्षण से यह बात सामने आयी है। यह इस बात का ताजा संकेत है कि जिन दो अहम मुद्दों के आधार पर ट्रंप लगभग एक साल पहले चुनाव जीते थे, वो अब उनके लिए परेशानी बन सकते हैं। उनकी पार्टी 2026 के मध्यावधि चुनावों की तैयारी शुरू कर रही है।
द एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च के सर्वेक्षण में पाया गया है कि अब सिर्फ 31 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क ही ट्रंप के अर्थव्यवस्था संभालने के तरीके से सहमत हैं। मार्च में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था और अब इसमें कमी आ गई है। यह ट्रंप के पहले या दूसरे कार्यकाल में एपी-एनओआरसी सर्वेक्षण में दर्ज की गई सबसे कम आर्थिक स्वीकृति रेटिंग है। -
फेज (मोरक्को). मोरक्को के फेज शहर में रात में दो बहुमंजिला इमारतों के ढहने से 19 लोगों की मौत हो गई। इस साल यहां इमारतों के ढहने की यह दूसरी घातक घटना है। प्राधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। मोरक्को की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रभावित आवासीय इमारतों में आठ परिवार रहते थे। हादसे में 16 लोग घायल हो गए और उन्हें नजदीकी अस्पताल में उपचार के लिए भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि पूरे इलाके को खाली करा लिया गया है और खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
बुधवार सुबह तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि इमारत के ढहने का कारण क्या था या कितने लोग लापता थे।
फेज मोरक्को का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और इस महीने होने वाले अफ्रीका कप ऑफ नेशंस तथा 2030 फीफा विश्व कप के आयोजक शहरों में शामिल है। इसी साल मई में इमारत ढहने की एक घटना में 10 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि सात अन्य घायल हो गये थे। - नयी दिल्ली, अमेरिकी वैमानिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने मंगलवार को कहा कि वह भारत में ‘सी-130जे सुपर हरक्यूलिस हेवी-लिफ्ट' सैन्य परिवहन विमान के सह-उत्पादन के लिए एक प्रतिष्ठान स्थापित करने की योजना बना रही है, जो अमेरिका के बाहर पहला ऐसा वैश्विक केंद्र होगा। भारतीय वायुसेना द्वारा 80 सामरिक परिवहन विमानों की खरीद की शुरुआत के साथ, लॉकहीड मार्टिन ने सी-130जे विमान को बल के लिए सर्वोत्तम विकल्प बताया है, जिसे भारत और 20 से अधिक अन्य देशों में एक विश्वसनीय विमान माना गया है। लॉकहीड मार्टिन एयरोनॉटिक्स के उपाध्यक्ष (व्यावसायिक विकास, वायु गतिशीलता और समुद्री मिशन) रॉबर्ट टोथ ने कहा कि भारतीय वायुसेना का मध्यम परिवहन विमान (एमटीए) कार्यक्रम कंपनी को न केवल भारत में क्षमता लाने का अवसर देता है, बल्कि इसके औद्योगिक आधार को भी आगे बढ़ाने का अवसर देता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम एमटीए से पहले सी-130जे में निवेश जारी रखे हुए हैं और भारत में विमान बनाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।'' टोथ ने कहा, ‘‘वास्तव में, दुनिया भर में उपलब्ध सभी अवसरों में से भारत पहला देश है, जहां हमने वचन दिया है कि हम अमेरिका के बाहर भारत में सह-उत्पादन प्रतिष्ठान स्थापित करेंगे।'' भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 12 सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान हैं।लॉकहीड मार्टिन की सह-उत्पादन प्रतिष्ठान स्थापित करने की योजना काफी हद तक एमटीए सौदे के लिए ठेका प्राप्त करने में सफलता से जुड़ी है। अमेरिकी रक्षा कंपनी ने सी-130जे सुपर हरक्यूलिस कार्यक्रम के लिए बोली लगाने के वास्ते टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ साझेदारी की है। भारतीय वायुसेना ने सोवियत युग के एएन-32 और आईएल-76 विमानों के अपने पुराने बेड़े को बदलने के लिए 2022 में मध्यम परिवहन विमान (एमटीए) खरीदने के वास्ते सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया था। भारतीय वायुसेना लगभग 80 सैन्य परिवहन विमान खरीदने की योजना बना रही है, और अरबों डॉलर की इस खरीद को अगले कुछ हफ्तों में रक्षा खरीद परिषद से मंजूरी मिलने की संभावना है। ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर का केसी-390 मिलेनियम विमान और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का ए-400एम विमान भी एमटीए कार्यक्रम की दौड़ में हैं। सी-130जे सुपर हरक्यूलिस एक अग्रणी विमान है, जो 23 देशों में 28 ऑपरेटरों को सेवा प्रदान करता है। अब तक, 560 से ज़्यादा सी-130जे विमानों की प्रदायगी हो चुकी है और 20 से ज़्यादा उड़ान योग्यता प्राधिकरणों द्वारा इसे प्रमाणित किया जा चुका है। टोथ ने कहा, ‘‘पिछले 15 वर्षों में, भारतीय वायुसेना ने साबित कर दिया है कि सी-130जे भारत के लिए सही मंच है। हमारी विरासत और हमारी क्षमताएं भारत में प्रदर्शित हुई हैं, और इससे हम इस (एमटीए) प्रतियोगिता में काफ़ी मज़बूत स्थिति में आएंगे।'' इस बीच, एक महत्वपूर्ण कदम के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने सोमवार को लॉकहीड मार्टिन के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान के समर्थन के लिए बेंगलुरु में रक्षा रखरखाव, मरम्मत और निरीक्षण (एमआरओ) प्रतिष्ठान की स्थापना शुरू की। एमआरओ का निर्माण 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, और 2027 की शुरुआत में एमआरओ संचालन के लिए पहला सी-130 प्राप्त करने की तैयारी है। लॉकहीड मार्टिन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सी-130जे सुपर हरक्यूलिस 20 से अधिक देशों में उड़ान भर रहा है और यह विमान भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे उपयुक्त है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि यदि आप हमारे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सी-130जे के समग्र मूल्य को देखें तो हम भारत में इस अवसर के लिए अच्छी स्थिति में हैं।'' टोथ ने कहा कि लॉकहीड मार्टिन भारतीय बाजार को लेकर बहुत आशावादी है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह आगे बढ़ने के लिए एक शानदार अवसर प्रदान करता है। भारत 70 साल पहले से लॉकहीड मार्टिन के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है, जब हम पहली बार ‘कॉन्स्टेलेशन' विमान भारत लेकर आए थे।''
- जकार्ता. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में मंगलवार को एक कार्यालय भवन में आग लगने की घटना में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि मृतकों में एक गर्भवती महिला भी शामिल है। मध्य जकार्ता स्थित कार्यालय की सात मंजिला इमारत को आग की लपटों ने अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आसमान में धुएं का गुबार फैल गया और आस-पास रहने वाले लोगों तथा कर्मचारियों में दहशत फैल गई। मध्य जकार्ता के पुलिस प्रमुख सुसात्यो पुर्नोमो कोंड्रो ने बताया कि आग दोपहर के समय लगी और माना जा रहा है कि यह केमायोरन इलाके में स्थित इमारत की पहली मंजिल से शुरू हुई और बाद में अन्य मंजिलों तक फैल गई। कोंड्रो के मुताबिक, आग पर काबू पाने के लिए सैकड़ों कर्मियों और दमकल की 29 गाड़ियों को तैनात किया गया। आग लगने के कारणों की अब भी जांच की जा रही है। कोंड्रो ने कई प्रत्यक्षदर्शियों का हवाला देते हुए बताया कि इमारत में स्थित कार्यालय के कई कर्मचारी दोपहर के भोजन के लिए बाहर गए हुए थे, तभी भंडारण और परीक्षण क्षेत्र में बैटरी में चिंगारी निकलने लगी। उन्होंने बताया कि इमारत को ड्रोन कंपनी के बिक्री और भंडारण कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कोंड्रो के अनुसार, तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई गई। उन्होंने बताया कि इमारत से कम से कम 22 शव बरामद किए गए। कोंड्रो ने बताया कि मृतकों में सात पुरुष और 15 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें से एक गर्भवती थी। उन्होंने बताया कि शवों की शिनाख्त के लिए उन्हें पूर्वी जकार्ता के पुलिस अस्पताल ले जाया गया है। घटना में जीवित बचे दिमित्री नामक शख्स ने स्थानीय टेलीविजन चैनल को बताया, “संदेह है कि शॉर्ट सर्किट या ड्रोन की बैटरी में थर्मल खामी के कारण कार्यालय में विस्फोट हुआ और आग लग गई।” उसने कहा, “ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कुछ सहकर्मियों ने मदद की गुहार लगाते हुए छत पर जाकर बचने की कोशिश की।”
- न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ‘क्वाड' के प्रति ‘‘पूरी तरह प्रतिबद्ध'' है तथा आने वाले वर्षों में इस समूह को और मजबूत करेगा। ‘क्वाड' (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया का एक समूह है। रुबियो ने सोमवार को कहा, ‘‘हम क्वाड के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। आने वाले समय में जापान और भारत के साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाने के लिए और काम करेंगे...।'' ऑस्ट्रेलिया–अमेरिका मंत्रिस्तरीय वार्ताओं से पहले उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स तथा ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में संयुक्त बयान देते हुए यह बात कही। रुबियो के अनुसार, इस साल जनवरी में विदेश मंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक उनकी पहली आधिकारिक बैठक थी। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे नाम पर मुहर लगी, मैंने नीचे शपथ ली और सीधे इसी लिफ्ट से ऊपर आकर इस कमरे में पहुंचा। विदेश मंत्री के रूप में मेरा पहला कार्यक्रम यहीं इसी कमरे में क्वाड के साथ हुआ था।'' रुबियो ने कहा, ‘‘जहां तक मुझे याद है, इस साल हमारी कम से कम तीन बैठकें हुई हैं। हम आने वाले साल में इस सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे तथा ऐसी और बैठकों की उम्मीद करते हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया, रुबियो और वोंग ने 21 जनवरी को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए मुलाकात की थी। यह बैठक ‘व्हाइट हाउस' में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद समूह की पहली बैठक थी। क्वाड विदेश मंत्रियों की जुलाई में वाशिंगटन में फिर से मुलाकात हुई थी।
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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत को अमेरिकी बाजार में चावल ‘‘डंप'' करना (सस्ते दामों पर बेचना) नहीं चाहिए और वह इस मामले से ‘‘निपट लेंगे।'' ट्रंप ने चेतावनी दी कि शुल्क (टैरिफ) लगाकर इस ‘समस्या' का आसानी से हल निकल जाएगा।
ट्रंप ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस' में खेती और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा अपने कैबिनेट के प्रमुख सदस्यों खासकर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स के साथ एक गोलमेज बैठक की। उन्होंने किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की संघीय सहायता की घोषणा की।
लुइसियाना में अपने परिवार के कृषि कारोबार ‘केनेडी राइस मिल' का संचालन करने वाली मेरिल केनेडी ने ट्रंप से कहा कि देश के दक्षिणी हिस्से में चावल उत्पादक ‘‘वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं'' और अन्य देश अमेरिकी बाजार में चावल ‘‘डंप'' कर रहे हैं यानी कि बेहद सस्ते दामों पर चावल बेच रहे हैं। जब ट्रंप ने पूछा कि कौन से देश अमेरिका में चावल सस्ते दामों पर बेच रहे हैं तो राष्ट्रपति के बगल में बैठीं केनेडी ने जवाब दिया, ‘‘भारत और थाईलैंड; यहां तक कि चीन भी प्यूर्टो रिको में चावल सस्ते दामों पर बेच रहा है। प्यूर्टो रिको कभी अमेरिकी चावल का सबसे बड़ा बाजार हुआ करता था। हमने कई वर्षों से प्यूर्टो रिको में चावल नहीं भेजे हैं।'' केनेडी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क काम कर रहे हैं, ‘‘लेकिन हमें इसे और बढ़ाने की जरूरत है''। ट्रंप ने फिर बेसेंट की ओर देखते हुए कहा, ‘‘भारत, मुझे भारत के बारे में बताइए। भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें शुल्क देना होगा। क्या उन्हें चावल पर छूट मिली हुई है?'' इस पर बेसेंट ने कहा, ‘‘नहीं सर, हम अभी उनके साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं।''
केनेडी ने ट्रंप को यह भी बताया कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक मामला चल रहा है। ट्रंप ने कहा कि इसे ‘‘बहुत आसानी से निपटाया जा सकता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह उन देशों पर शुल्क लगाकर बहुत जल्दी हल हो जाएगा, जो अवैध रूप से सामान भेज रहे हैं। आपकी समस्या एक दिन में हल हो जाएगी इसलिए हमें उच्चतम न्यायालय में मुकदमा जीतना है।'' ‘इंडियन राइस एक्सपोर्ट्स फेडरेशन' के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और वैश्विक बाजार में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वह शीर्ष निर्यातक भी है, जिसकी 2024-25 में वैश्विक निर्यात में 30.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत चावल की जो किस्में वैश्विक स्तर पर निर्यात करता है, उनमें ‘सोना मसूरी' अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में पसंद की जाती है। ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। इसमें रूस से तेल खरीद पर 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। -
मॉस्को. रूस ने सोमवार को कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह उन स्रोतों से तेल खरीदने के लिए आजाद है, जिन्हें वह लाभकारी मानता है। इसके साथ ही रूस सरकार ने पूरा भरोसा जताया कि भारत अपने आर्थिक हित सुनिश्चित करने की नीति पर कायम रहेगा। अमेरिका ने रूस से तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद जारी रखने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है। अगस्त के अंत में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर कुल अमेरिकी शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। रूसी शासन मुख्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, ''भारत, एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में विदेशी व्यापार करता है और ऊर्जा संसाधन वहीं से खरीदेगा है, जहां से उसे लाभ मिलेगा।'' वह पिछले शुक्रवार को नयी दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई शिखर वार्ता के संदर्भ में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। ऐसी रिपोर्ट हैं कि भारत पश्चिमी दबाव के चलते अपने तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटा रहा है। क्रेमलिन के आर्थिक सहयोगी मक्सिम ओरेश्किन ने कहा, ''प्रतिबंधों को दरकिनार करने का रूस के पास लंबा अनुभव है। यदि भारत तैयार है, तो हम कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखने का रास्ता खोज लेंगे।
- तोक्यो. चीनी विमानवाहक पोत लियाओनिंग से उड़ान भरने वाले एक सैन्य विमान ने जापान के ओकिनावा के पास जापानी लड़ाकू विमानों पर अपना ‘रडार लॉक' कर दिया जिसे लेकर जापान ने चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराया है। ‘रडार लॉक' का मतलब होता है- किसी सैन्य विमान का अपने रडार को दूसरे विमान या लक्ष्य पर इस तरह केंद्रित करना कि वह उसकी सटीक स्थिति, गति और दिशा पर लगातार नजर रख सके। जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीन के सैन्य विमान जे-15 ने शनिवार को दो बार अलग-अलग समय में जापानी एफ-15 लड़ाकू विमानों पर अपना रडार लॉक किया। मंत्रालय ने कहा कि एक बार दोपहर में लगभग तीन मिनट के लिए और फिर शाम को लगभग 30 मिनट के लिए ऐसा किया गया। मंत्रालय के अनुसार, चीनी विमान से उन जापानी लड़ाकू विमानों पर ‘रडार लॉक' किया जिन्होंने चीन की ओर से हवाई क्षेत्र के संभावित उल्लंघन के खिलाफ प्रतिक्रिया दी थी। मंत्रालय ने कहा कि जापानी हवाई क्षेत्र का कोई उल्लंघन नहीं हुआ और इस घटना से कोई नुकसान होने की भी सूचना नहीं मिली। यह स्पष्ट नहीं है कि ‘रडार लॉक' करने की घटना में दोनों बार वही चीनी जे-15 विमान शामिल था या नहीं।जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने रविवार की सुबह पत्रकारों से कहा कि जापान ने चीन के समक्ष विरोध जताया और इसे ‘एक खतरनाक कृत्य' करार देते हुए कहा कि यह सुरक्षित विमान संचालन के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "ऐसी घटना का होना अत्यंत निंदनीय है। हमने चीनी पक्ष के समक्ष सख्त विरोध जताया है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने मांग की है।"
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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिकी सरकार ने एच-1बी वीजा आवेदकों और उन पर आश्रित एच-4 वीजा धारकों के लिए जांच और सत्यापन प्रक्रियाएं कड़ी कर दी हैं। नए निर्देशों के तहत सभी आवेदकों को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल की निजता ‘सेटिंग्स' ‘‘सार्वजनिक'' (पब्लिक) रखने के लिए कहा गया है। विदेश विभाग ने बुधवार को जारी किए नए आदेश में कहा कि 15 दिसंबर से सभी एच-1बी आवेदकों और उनके आश्रितों की ऑनलाइन उपस्थिति की समीक्षा की जाएगी। इससे पहले छात्र (एफ, एम) और ‘एक्सचेंज विजिटर' (जे वीजा) पहले से ही ऐसी जांच के दायरे में थे, जिसे अब एच-1बी और एच-4 वीजा तक बढ़ा दिया गया है। विदेश विभाग ने कहा, ‘‘इस जांच को सुगम बनाने के लिए सभी एच-1बी, एच-4, एफ, एम और जे वीज़ा आवेदकों को अपने सभी सोशल मीडिया प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग्स सार्वजनिक करने के निर्देश दिए जाते हैं।'' विभाग ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी वीजा कोई ‘‘अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार'' है और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में उपलब्ध सभी सूचनाओं का उपयोग करके आवेदकों की गहन जांच की जाती है। बयान में कहा गया है, ‘‘हर वीजा निर्णय एक राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णय है। यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा आव्रजन नियमों को कठोर बनाने की नवीनतम कार्रवाई है। प्रशासन एच-1बी वीज़ा के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए व्यापक कार्रवाई कर रहा है, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने में करती हैं। भारतीय पेशेवर, विशेषकर प्रौद्योगिकी कर्मी और चिकित्सक एच-1बी वीज़ा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं।
- लंदन. मध्य इंग्लैंड में सड़क पर हुए हमले के दौरान एक 30 वर्षीय व्यक्ति (भारतीय छात्र) को चाकू मार दिया गया और बाद में अस्पताल में गंभीर चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई। वेस्ट मर्सिया पुलिस ने शुक्रवार को वॉर्सेस्टर में इस सप्ताह की शुरुआत में हुए हमले के किसी भी गवाह से जानकारी देने की अपील जारी की। हालांकि ब्रिटिश पुलिस ने अभी तक पीड़ित की औपचारिक पहचान नहीं की है, लेकिन भारत से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित की पहचान हरियाणा के चरखी दादरी जिले के विजय कुमार श्योराण के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि हत्या के संदेह में पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था और जांच जारी रहने तक वे जमानत पर हैं। छठे व्यक्ति को भी हत्या के संदेह में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। वेस्ट मर्सिया के डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर ली होलहाउस ने कहा कि पुलिस बल की संवेदनाएं मृतक के परिवार और मित्रों के साथ हैं। साथ ही उन्होंने घटना के संबंध में लोगों से सूचना देने की अपील भी की। इस बीच, चरखी दादरी के विधायक सुनील सतपाल सांगवान ने सोशल मीडिया पर घटना को लेकर शोक व्यक्त किया और कहा कि वह "दुख की असहनीय घड़ी" में पीड़ित के परिजनों के साथ हैं। उन्होंने कहा, "हम पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की भी अपील करते हैं ताकि न्याय मिल सके और अपराधियों को जवाबदेह ठहराया जा सके।"





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