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यरुशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने बृहस्पतिवार को ''बेहद सार्थक'' और व्यापक वार्ता की, जिसमें उन्होंने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मोदी ने हर्जोग से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने सबसे पहले बगीचे में साथ मिलकर एक 'ओक' का पौधा लगाया, ''जो दोनों देशों के बीच मित्रता, विकास और साझा भविष्य के निर्माण का प्रतीक है।'' मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हमारी बातचीत बेहद सार्थक और व्यापक रही।''
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।'' बैठक के दौरान, मोदी ने इजराइल पहुंचने पर मिले ''अत्यंत गर्मजोशीपूर्ण और भव्य स्वागत'' के लिए हर्जोग को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''यह इजराइल के लोगों का भारत और भारतीयों के प्रति प्रेम दर्शाता है।'' उन्होंने इस बात का भी समर्थन किया कि भारत-इजराइल संबंध, विज्ञान, नवाचार या शैक्षणिक संस्थानों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में, वैश्विक हित के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। मोदी ने कहा, ''हमारे बीच विशेष रूप से जल और कृषि जैसे क्षेत्रों में बहुत सकारात्मक चर्चा हुई। भारत अपने यहां, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में, इजराइल के कई अच्छे समाधानों को लागू कर रहा है, और इसके फलस्वरूप हमें शानदार परिणाम मिले हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''मुझे दुनिया के अन्य हिस्सों में विभिन्न अवसरों पर आपसे मिलने का मौका मिला है। आपके विचार बहुत स्पष्ट रहे हैं। आप भारत का बहुत सम्मान करते हैं। भारत के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और सम्मान के लिए मैं तहे दिल से आपका आभार व्यक्त करता हूं।'' प्रधानमंत्री ने हर्जोग को भारत आने का निमंत्रण भी दिया और कहा कि भारत के 1.4 अरब लोग उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, ''मैं आपको भारत आने का हार्दिक निमंत्रण देता हूं, और जब आप आएं, तो अपनी यात्रा को केवल दिल्ली तक सीमित न रखें, बल्कि भारत के अन्य हिस्सों की यात्रा के लिए भी समय निकालें।'' हर्जोग ने इजराइल की ऐतिहासिक दूसरी यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया और इजराइल के प्रति भारतीय नेतृत्व के दीर्घकालिक और अटूट समर्थन की प्रशंसा की। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों नेताओं ने नवाचार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, व्यापार और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में इजराइल और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर चर्चा की। इसमें यह भी कहा गया है कि उन्होंने दोनों देशों के लोगों के हित में भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा पहल सहित क्षेत्रीय साझेदारी और गठबंधनों के विस्तार के अवसरों पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि की सराहना करते हुए कहा, ''मेरा मानना है कि भारत पश्चिम एशिया के उज्ज्वल भविष्य का एक अभिन्न अंग है, और यह क्षेत्र भारत के उज्ज्वल भविष्य का एक अभिन्न अंग है। मैंने आपके देश की रिकॉर्ड तोड़ आर्थिक वृद्धि देखी है, जो पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। यह शानदार है।'' ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के तरीकों का सुझाव देते हुए, इजराइली नेता ने कहा कि भारतीय और इजराइली विश्वविद्यालयों के पास भविष्य में मिलकर काम करने का "सुनहरा अवसर" है। राष्ट्रपति ने कहा, ''इजराइल और भारत के बीच यह संपर्क ग्लोबल साउथ के लाभ के लिए और पूर्वी गोलार्ध के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया से अमेरिका के संपर्क को मजबूत करने के लिए संपूर्ण भू-रणनीतिक स्थिति को बदल सकता है।'' उन्होंने कहा, ''हम जानते हैं कि आप कई क्षेत्रों में विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं... और अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि अब्राहम समझौता, जो क्षेत्र में शांति की दिशा में सुधार लाने का एक मंच हैं, को अब हमें बस लागू करना है।'' हर्जोग ने भारत की यात्रा के निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ''मैं इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करता हूं। यह मेरा कई वर्षों से सपना रहा है, और भारत के कई हिस्से मुझे आकर्षित करते हैं और आपके अद्भुत इतिहास और संस्कृति में मेरी रुचि जगाते हैं, जिसमें सदियों से भारत के यहूदियों की अविश्वसनीय कहानी भी शामिल है, इसलिए यह एक शानदार अवसर होगा।'' -
यरूशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को इजराइल की अपनी दो दिवसीय यात्रा समाप्त करने से कुछ घंटे पहले भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के प्रमुख सदस्यों से मुलाकात करके उनसे बातचीत की। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, 2023 तक इजराइल में भारतीय मूल के लगभग 85,000 यहूदी रहते थे। मोदी से मिलने वालों में यरूशलम से लगभग 75 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अश्केलोन की एक परिषद सदस्य डॉ. रिकी शाही भी थीं, जिन्होंने प्रधानमंत्री को 'लोगों के लिए बहुत कुछ करने वाला' बताया और कहा कि यह उनके कार्यों में दिखाई देता है। बड़ौदा निवासी माता-पिता की पुत्री शाही ने कहा, ''वे ज्यादा बोलते नहीं हैं, लेकिन बहुत कुछ करते हैं।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने बड़ौदा और अश्केलोन के बीच 'जुड़वां शहर' कार्यक्रम की शुरुआत की है। मणिपुर में जन्मे मानव संसाधन प्रबंधक इसहाक थांगजोन लगभग पांच साल पहले इजराइल आए थे। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा वाकई 'शानदार' है।'' भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (जिन्हें आमतौर पर बनेई मेनाशे कहा जाता है) से शेष सभी 5,800 यहूदियों को अगले पांच वर्षों में इजराइल वापस लाने के इजराइल सरकार के प्रस्ताव में हो रही प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''परिस्थिति अनुकूल होती जा रही है और हालात बहुत अच्छे दिख रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''मेरी कामना है कि प्रधानमंत्री मोदी इजराइल-भारत संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएं।'' बुधवार को मोदी ने दिव्यांग कलाकारों के एक समूह द्वारा 'आई लव माई इंडिया...' गीत की प्रस्तुति को 'यादगार' बताया, जिसने भारतीय मूल के यहूदियों और इजराइली नागरिकों को एक साथ लाने का काम किया। इजराइली संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल में भारतीय मूल के जीवंत यहूदी समुदाय को मान्यता दी और शिक्षा, संस्कृति, सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय सेवा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत से इजराइल में आव्रजन की मुख्य लहर पचास और साठ के दशक में देखने को मिली। इनमें से अधिकांश महाराष्ट्र (बेने इजराइली) से हैं और अपेक्षाकृत कम संख्या में केरल (कोचीनी यहूदी) और कोलकाता (बगदादी यहूदी) से हैं। भारतीय दूतावास के अनुसार, हाल के वर्षों में मिजोरम और मणिपुर (बेने मेनाचे) के कुछ भारतीय यहूदी भी प्रवास के लिए इजराइल पहुंच रहे हैं।
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यरूशलम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बुधवार को इजराइल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने बेन गुरियन हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की। प्रधानमंत्री मोदी की नौ वर्षों में इजराइल की यह दूसरी यात्रा है। जुलाई 2017 में इस देश की उनकी पहली यात्रा के दौरान भारत-इजराइल संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाया गया था। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से गले लगाकर अभिवादन किया। इसके बाद तेल अवीव से 20 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित हवाई अड्डे पर मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी आज इजराइल की संसद को संबोधित करेंगे और नेतन्याहू के साथ वार्ता करेंगे। दोनों नेता बृहस्पतिवार को व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इजराइल यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा था कि उन्हें विश्वास है कि यह यात्रा भारत और इज़राइल के बीच स्थायी संबंधों को और सुदृढ़ करेगी तथा रणनीतिक साझेदारी के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करेगी। मोदी ने कहा, ''भारत और इज़राइल के बीच एक मज़बूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार और गतिशीलता देखी गई है।'' उन्होंने कहा, ''मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ होने वाली चर्चाओं को लेकर आशान्वित हूं जिनका उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश के साथ लोगों के बीच आपसी संबंधों समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों नेता पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-इजराइल संबंध मजबूत हुए हैं, जिनमें रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रक्षा सहयोग दोनों पक्षों के बीच साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें इजराइल भारत को कई सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियां मुहैया करा रहा है। पिछले साल नवंबर में, भारत के रक्षा सचिव की इजराइल यात्रा के दौरान, रक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे। दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में भी लगातार प्रगति देखने को मिल रही है। दोनों पक्षों ने सितंबर में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक द्विपक्षीय निवेश समझौते (बीआईए) पर हस्ताक्षर किये थे।
- नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल को 2024 में मार्शल लॉ लगाने की नाकाम कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। गुरुवार को सोल की एक अदालत ने फैसला सुनाया।योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि इस केस पर पहले फैसले में, सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून को मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का दोषी ठहराया। हालांकि, विशेष अभियोजक ने अपील की थी कि मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जाए।कोर्ट ने साफ किया कि पूर्व राष्ट्रपति की ओर से दिया गया मार्शल लॉ का आदेश बगावत के बराबर था। यून ने संसदीय क्षेत्र में सेना भेजकर नेशनल असेंबली को कमजोर करने की कोशिश की थी।आदेश में इस बात पर ज्यादा जोर दिया कि यून का नेशनल असेंबली में सेना भेजना ही केस की जड़ है। सुनवाई के दौरान जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति को पेश किया गया। इस सुनवाई का सीधा प्रसारण नेशनल टेलीविजन पर किया गया।पिछले साल जनवरी में यून पर 3 दिसंबर, 2024 को छह घंटे तक चले मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का आरोप लगाया गया था। आरोप के मुताबिक, यून ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून और दूसरों के साथ मिलकर संविधान को नुकसान पहुंचाने के मकसद से दंगा करने की साजिश रची और युद्ध या वैसी ही कोई नेशनल इमरजेंसी न होने पर भी गैरकानूनी तरीके से मार्शल लॉ घोषित कर दिया।पिछले महीने ट्रायल की आखिरी सुनवाई के दौरान, स्पेशल वकील चो यून-सुक की टीम ने पूर्व राष्ट्रपति के लिए मौत की सजा की मांग की थी और कहा कि वह न्यायपालिका और विधायिका पर कब्जा करके लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के मकसद से मार्शल लॉ घोषित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सजा के हकदार हैं।टीम ने कहा, “जुर्म की प्रकृति गंभीर है क्योंकि उन्होंने ऐसे फिजिकल रिसोर्स जुटाए जिनका इस्तेमाल सिर्फ देश के हित में होना चाहिए था।” यून ने अपने आखिरी बयान में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा था कि राष्ट्रपति के संवैधानिक स्टेट इमरजेंसी अधिकार का इस्तेमाल बगावत नहीं हो सकता।
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ढाका. बांग्लादेश में आम चुनावों में अपनी पार्टी बीएनपी को शानदार जीत दिलाने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में मंगलवार को पद की शपथ लेंगे। रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीट जीती, जबकि कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 13वें संसदीय चुनाव में 68 सीट हासिल की हैं। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। लंबे समय से चली आ रही एक परंपरा को तोड़ते हुए बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान (60) का शपथ ग्रहण समारोह बंगभवन के बजाय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। सरकारी समाचार एजेंसी 'बीएसएस' ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन मंगलवार दोपहर को जातीय संसद (देश का संसद) के साउथ प्लाजा में नये मंत्रिमंडल सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जातीय संसद सचिवालय की सचिव कनीज मौला ने कहा, ''संसद सचिवालय में कल शाम चार बजे नये मंत्रिमंडल सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।'' इससे पहले, मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन संसद के सभी नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जेएस सचिवालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 13वीं जातीय संसद (जेएस) के सभी 297 नव निर्वाचित सांसद ''पहले संसद सदस्य (एमपी) के रूप में और फिर संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।'' रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह के भी बिरला के साथ उपस्थित रहने की संभावना है। -
केप कैनावेरल. स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण समय से पहले धरती पर वापस लाए गए साथियों की जगह लेने के लिए चार नए अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गए हैं। स्पेसएक्स ने शनिवार को अमेरिकी, फ्रांसीसी और रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के दल को केप कैनावेरल से रवाना किया और एक दिन बाद ये अंतरिक्ष यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचे। पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से नासा ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अंतरिक्ष यात्रियों की वहां से निकासी कराई थी जो 65 वर्षों के मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में पहला मामला था। पिछले साल गर्मियों में स्पेसएक्स ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को रवाना किया था जिनमें से एक को गंभीर स्वास्थ्य समस्या हुई और इसके कारण उन्हें शीघ्र वापस लौटना पड़ा। इससे अंतरिक्ष अभियान के लिए केवल तीन ही सदस्य बचे - एक अमेरिकी और दो रूसी। इन हालात में नासा को अंतरिक्ष में चहलकदमी और अपना अभियान रोकना पड़ा। नासा की जेसिका मीर और जैक हैथवे, फ्रांस की सोफी एडेनोट और रूस के आंद्रेई फेड्यायेव आठ से नौ महीने अंतरिक्ष में रहेंगे। समुद्री जीवविज्ञानी मीर और पूर्व सैन्य पायलट फेड्यायेव पहले भी अंतरिक्ष में रह चुके हैं। 2019 में अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, मीर ने पहली बार पूरी तरह से महिलाओं द्वारा की गई अंतरिक्ष यात्रा में भाग लिया था। सैन्य हेलीकॉप्टर पायलट एडेनोट अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली दूसरी फ्रांसीसी महिला हैं। हैथवे अमेरिकी नौसेना में कप्तान हैं। अंतरिक्ष कैप्सूल जब 277 मील (446 किलोमीटर) ऊपर स्थित अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा तो एडेनोट ने कहा 'बोनजो'। कुछ घंटों बाद 'हैच' खुल गए और सातों अंतरिक्ष यात्रियों ने एक-दूसरे को गले लगाया और हाथ मिलाया।
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ढाका. बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के सत्ता से हटने के बाद भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से स्थापित करने की इच्छा जताई है। बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों को "पारस्परिक लाभ" के लिए मिलकर काम करना चाहिए। बांग्लादेश में बृहस्पतिवार को हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए, जिसमें रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ शानदार जीत दर्ज की। कबीर ने शनिवार को एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत में जोर देकर कहा कि बांग्लादेश में बीएनपी को मिले प्रचंड जनादेश के बाद बदली हुई राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना अब भारत की जिम्मेदारी है। कबीर ने कहा, "बदलाव भारत की सोच में आना चाहिए। शेख हसीना और अवामी लीग आज के बांग्लादेश में मौजूद नहीं हैं। जनता ने स्पष्ट रूप से बीएनपी के पक्ष में फैसला दिया है।" कबीर ने अगस्त 2024 के जनविद्रोह के बाद भारत जा चुकीं हसीना को "आतंकवादी" करार देते हुए उन पर 1,500 से अधिक लोगों की मौत का जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश की स्थिरता को प्रभावित करने के लिए हसीना या अवामी लीग के अन्य नेताओं को अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति न दे। उन्होंने कहा, "भारत बांग्लादेश की संप्रभुता को कमजोर करने वाली किसी भी गतिविधि में सहभागी के रूप में न दिखे। एक बार यह मुद्दा सुलझ जाए, तो सामान्य राजनयिक सहयोग फिर से शुरू हो सकता है। हम पड़ोसी हैं और हमें पारस्परिक लाभ के लिए मिलकर काम करना चाहिए।" भारत ने 26 नवंबर 2025 को कहा था कि वह हसीना के प्रत्यर्पण के बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के अनुरोध पर गौर कर रहा है और बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, "हम शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता समेत बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और इस संबंध में सभी पक्षों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।" कबीर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रहमान के बीच फोन पर हुई सौहार्दपूर्ण बातचीत का भी उल्लेख किया, जिसमें मोदी ने रहमान को सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया। इस यात्रा के समय को लेकर कबीर ने कहा कि घरेलू प्राथमिकताएं पहले हैं।
उन्होंने कहा, "तारिक रहमान देश को समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा के रास्ते पर लाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यहां स्थिति स्थिर होने के बाद वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर विचार करेंगे, जिसमें भारत की यात्रा भी शामिल है।" दक्षिण एशिया में भारत, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर बांग्लादेश के रुख के बारे में कबीर ने कहा कि नयी सरकार संबंधों में संतुलन की नीति अपनाएगी। उन्होंने कहा, " राष्ट्रीय हित और हमारी क्षेत्रीय भलाई हमारी विदेश नीति के केंद्र में रहेगी।"
उन्होंने कहा, "हम संतुलित संबंध चाहते हैं। हम किसी एक देश के साथ विशेष संबंध नहीं रखेंगे और किसी भी समझौते का अनावश्यक खुलासा नहीं करेंगे।" अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के साथ सांप्रदायिक हिंसा संबंधी चिंताओं को कबीर ने खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, "अगस्त विद्रोह के बाद पांच दिन तक बिना सरकार की अभूतपूर्व स्थिति के दौरान भी किसी ने अल्पसंख्यकों पर हमला नहीं किया। यह यहां की सांप्रदायिक सद्भावना को दर्शाता है। समस्या वैसी नहीं है, जैसी कभी-कभी प्रस्तुत की जाती है।" भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। दिसंबर में कट्टरपंथी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद समुदाय पर कई हमले हुए, जिनमें कुछ घातक भी थे। बीएनपी के शनिवार को जारी बयान के अनुसार, बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य क्षेत्रीय नेताओं को 17 फरवरी को होने वाले देश के अगले प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है।
- कराची. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कराची के बाहर सुपर हाईवे पर कुछ गाड़ियों की टक्कर में शुक्रवार को कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। राजमार्ग पर गलत दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार यात्री बस एम9 अंसारी पुल पर एक तेल टैंकर से टकरा गई। इसी दौरान एक अन्य यात्री बस भी टैंकर से टकरा गई। क्षेत्र के पुलिस अधिकारी खालिद समोजो ने बताया कि घटना में 13 लोगों की मौत हो गई और नौ लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा, ''शुरुआती जांच में घटना में यात्री बस चालक की गलती पाई गई है। एक बस सड़क के किनारे से पुल पर आई और तेल टैंकर से टकरा गई।'' मृतकों और घायलों में पैदल यात्री भी शामिल हैं।
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काठमांडू। पशुपतिनाथ मंदिर में रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर करीब आठ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत भारतीय होंगे। बागमती नदी के तट पर स्थित मंदिर को देश-विदेश, विशेषकर भारत से आने वाले हिंदू श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए रंग-बिरंगी रोशनी, कागज़ी झंडों, फूलों, मालाओं और बैनरों से सजाया गया है। मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक सुभाष जोशी ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आगामी पांच मार्च को होने वाले चुनाव के मद्देनज़र इस बार मंदिर की सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं और लगभग 8,000 सुरक्षाकर्मियों, जिनमें नेपाली सेना के जवान भी शामिल हैं, की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा-अर्चना के लिए सैकड़ों नागा बाबाओं सहित लगभग 4,000 साधुओं के मंदिर परिसर में पहुंचने की उम्मीद है। जोशी ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक नृत्य एवं संगीत कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, अलाव और नि:शुल्क भोजन वितरण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि मंदिर रविवार को तड़के दो बजे खोला जाएगा और श्रद्धालु चारों दिशाओं से शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क पेयजल, आपातकालीन चिकित्सीय सेवा, स्वयंसेवक सेवा तथा चंदन टीका वितरण की व्यवस्था की गई है। जोशी ने बताया कि वृद्ध, बीमार और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि वे आसानी से मंदिर में प्रवेश कर सकें। उनके अनुसार, मंदिर परिसर में शराब और अन्य मादक पदार्थों के सेवन पर सख्त प्रतिबंध रहेगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर कम से कम 2,500 स्वयंसेवकों और 26 संगठनों को तैनात किया गया है। जोशी ने बताया कि नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के भी दिन में करीब साढ़े चार बजे दर्शन के लिए पहुंचने की संभावना है।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है। ट्रंप और नेतन्याहू के बीच यह मुलाकात 'व्हाइट हाउस' (अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''यह मुलाकात बहुत अच्छी रही और दोनों देशों के बीच शानदार रिश्ते जारी रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ''कुछ भी निश्चित नहीं हुआ है, सिवाय इसके कि मैंने ईरान के साथ बातचीत पर यह देखने के लिए जोर दिया कि यह समझौता हो सकता है या नहीं।''
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कोलंबो. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को 15 फरवरी को भारत के खिलाफ यहां होने वाले टी20 विश्व कप मैच का बहिष्कार वापस लेने का निर्देश देने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का आभार व्यक्त किया है। बांग्लादेश और श्रीलंका के आग्रह के बाद पाकिस्तान सरकार ने बहिष्कार की अपील वापस लेने का फैसला किया जिसका मतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मैच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगा। इससे इस मैच पर बने संकट के बादल भी छंट गए। दिसानायके ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''यह जानकर बेहद खुशी हुई कि मौजूदा टी20 क्रिकेट विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मैच का कोलंबो में आयोजन किया जाएगा।'' श्रीलंका क्रिकेट ने पीसीबी को लिखे पत्र में अपना निर्णय बदलने का अनुरोध किया था जिसके बाद दिसानायके ने सोमवार रात शरीफ को फोन करके उन्हें मैच खेलने के लिए मनाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार दिसानायके की अपील को स्वीकार कर लिया गया है जिससे उनके देश द्वारा मैच का बहिष्कार प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। इससे पहले पाकिस्तान ने कहा था कि वह भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा। इसे बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने से जुड़ा राजनीतिक विरोध माना जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश के सुरक्षा कारणों से अपने मैच भारत से श्रीलंका में स्थानांतरित करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था।
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कुआलालंपुर. भारत और मलेशिया ने रविवार को व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण तथा सेमीकंडक्टर जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ व्यापक वार्ता के बाद मोदी ने आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा: ''आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है; कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं।'' दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में गहन सहभागिता के लिए एक रूपरेखा समझौते सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कुल 11 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। मोदी शनिवार को कुआलालंपुर पहुंचे। मोदी और इब्राहिम दोनों ने व्यापार निस्तारण के लिए स्थानीय मुद्राओं - भारतीय रुपया और मलेशियाई रिंगिट के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। मोदी ने भारत-मलेशिया संबंधों को ''विशेष'' बताते हुए कहा, ''हम रणनीतिक विश्वास के माध्यम से आर्थिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।'' उन्होंने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ''हम समुद्री पड़ोसी हैं। सदियों से दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे और स्नेहपूर्ण संबंध रहे हैं।'' मोदी ने मलेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने के भारत के निर्णय की भी घोषणा की।
अपने संबोधन में इब्राहिम ने भारत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख किया और कहा कि अगर उनका देश भारत के साथ सहयोग के और अधिक तरीके एवं अवसर तलाश सके तो उसे बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा, ''यह (भारत की आर्थिक वृद्धि) अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और व्यापार के क्षेत्र में एक शानदार उन्नति है।'' उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं का उपयोग करने के निर्णय को ''उल्लेखनीय'' बताया। वार्ता के दौरान मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए मोदी ने कहा कि आतंकवाद विरोधी अभियान, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को मजबूत किया जाएगा, साथ ही दोनों पक्ष रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, ''कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ हम सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे।'' उन्होंने यह भी कहा कि सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) फोरम में हुई चर्चाओं ने व्यापार और निवेश के नए अवसर खोले हैं। प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भारत के रुख और इस क्षेत्र में 10 देशों के समूह वाले आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संघ) की केंद्रीय भूमिका पर भारत के दृढ़ विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व के विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। भारत आसियान के साथ मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।'' उन्होंने कहा, ''मलेशिया जैसे मित्र देशों के सहयोग से भारत आसियान के साथ अपने संबंधों को और अधिक विस्तारित करेगा। हम इस बात से सहमत हैं कि आसियान-भारत व्यापार समझौते (आईटीआईजीए) की समीक्षा शीघ्रता से पूरी की जानी चाहिए।'' मोदी ने कहा कि उन्होंने और इब्राहिम ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी ''सार्थक चर्चा'' की।
उन्होंने कहा, ''वैश्विक अस्थिरता के इस माहौल में भारत और मलेशिया के बीच बढ़ती मित्रता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।'' उन्होंने कहा, ''हम इस बात से सहमत हैं कि आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है। हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे और आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है: कोई दोहरा मापदंड नहीं; कोई समझौता नहीं।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''भारत-मलेशिया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता की हम सराहना करते हैं। आइए, हम मिलकर एक समृद्ध मलेशिया के आपके सपने और विकसित भारत के हमारे संकल्प को साकार करें।'' एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की ''स्पष्ट और कड़ी निंदा'' की और आतंकवाद के प्रति ''बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति'' का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयासों का आह्वान किया तथा कट्टरता और हिंसक चरमपंथ का मुकाबला करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को रोकने की दिशा में काम करने का भी संकल्प लिया। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ (वित्तीय कार्रवाई कार्य बल) सहित आतंकवाद का मुकाबला करने में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मोदी और इब्राहिम ने संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सुधारों का समर्थन करने पर भी सहमति व्यक्त की। संयुक्त बयान में कहा गया है, ''उन्होंने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हुए बहुपक्षवाद को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया, ताकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अधिक प्रतिनिधिक बनाया जा सके।'' बयान में कहा गया है, ''बहुपक्षीय मंचों में आपसी सहयोग की मजबूत भावना को दर्शाते हुए दोनों नेताओं ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सदस्यता प्रस्तावों के लिए आपसी समर्थन पर चर्चा की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद देश की स्थायी सदस्यता के लिए मलेशिया के समर्थन की अत्यधिक सराहना की। - लंदन. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) से हाल ही में मैक्रो-इकोनॉमिक्स में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने वाले केरल के एक छात्र ने रोजी-रोटी कमाने और ब्रिटेन में नौकरी की तलाश में जुटे स्नातकों का मनोबल बढ़ाने के लिए 'थॉमस टूर्स' नाम की अनूठी टूर गाइड सेवा शुरू की है। तिरुवल्ला के मल्लापल्ली गांव के रहने वाले जेम थॉमस मैथ्यू (23) ने अपने दादा के नाम पर 'थॉमस टूर' सेवा शुरूe की है, जो उन्हीं की तरह नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं को अंशकालिक आधार पर रोजगार हासिल करने का मौका देती है। 'थॉमस टूर' के तहत जेम ने ऐसे यात्रा पैकेज तैयार किए हैं, जो आगंतुकों को कम खर्च में बेहतरीन सुविधाओं के साथ किसी स्थानीय व्यक्ति की तरह लंदन के विभिन्न स्थलों का दौरा करने का अवसर प्रदान करेंगे। जेम के मुताबिक, "हमारी खासियत यह है कि हम आगंतुकों की सहूलियत के अनुसार यात्रा कार्यक्रम तैयार करते हैं, जिसके तहत उन्हें स्थानीय लोगों की तरह ट्यूब (लंदन भूमिगत मेट्रो प्रणाली) और रेड बस सेवा के जरिये पूरे शहर में घुमाया जाता है। हम उन्हें पैदल मार्ग से भी लंदन के दिलकश नजारों का दीदार करवाते हैं।" जेम के अनुसार, "लंदन आने के बाद से ही मैं साइकिल से सफर करता आया हूं, जिसके चलते मुझे शहर के लोकप्रिय स्थलों की ओर ले जाने वाले कई शॉर्टकट रास्तों एवं पैदल मार्गों के बारे में जानकारी हो गई। इसलिए, मैं शहर के अन्य 'टूर ऑपरेटर' के मुकाबले लगभग आधे बजट में यात्रा कार्यक्रम बनाना जानता हूं और मेरा उद्देश्य शहर के स्नातकों को सशक्त बनाना है।"
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काठमांडू. नेपाल की बेनी नगरपालिका को भारत की राजधानी नयी दिल्ली से जोड़ने वाली सीधी बस सेवा शुरू की गई है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, इस बस सेवा के जरिये प्रसिद्ध हिंदू और बौद्ध तीर्थस्थल मुक्तिनाथ की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। बेनी को नेपाल के गंडकी प्रांत के मुस्तांग जिले में स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर मुक्तिनाथ का प्रवेश द्वार माना जाता है। मुक्तिनाथ मंदिर, हिंदू और बौद्ध दोनों समुदाय के लोगों के लिए पवित्र है। मुक्तिनाथ को 'मुक्ति के देवता' के रूप में जाना जाता है। हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे क्रमशः हिंदू देवता विष्णु और बौद्ध देवता अवलोकितेश्वर से संबंधित पवित्र स्थान मानकर इसकी पूजा करते हैं। मॉडर्न एरा टूर्स एंड ट्रेवल्स और सृष्टि यातायात प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से नेपाल-भारत मैत्री बस सेवा शुरू की गई है। उपमहापौर ज्योति लामिछाने के अनुसार, बेनी नगरपालिका के महापौर सूरत केसी ने इसका उद्घाटन किया।
लामिछाने ने बताया कि बस सेवा बेनी कालीपुल बस पार्क से शुरू होगी और स्यांगजा, वालिंग, भैरहवा, अयोध्या और आगरा से होते हुए नयी दिल्ली पहुंचेगी। मॉडर्न एरा टूर्स एंड ट्रेवल्स के अध्यक्ष केशव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य म्याग्दी और मुस्तांग के धार्मिक स्थलों को भारत से जोड़ना और भारत से नेपाल में पर्यटन को बढ़ावा देना है। अब तक, मुक्तिनाथ मंदिर की यात्रा करने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों को समय लेने वाली और कई चरणों वाली महंगी यात्राएं करनी पड़ती थीं। अधिकारी ने बताया कि बस सेवा के जरिये नयी दिल्ली से बेनी पहुंचने में करीब 27 घंटे लगेंगे।बेनी से प्रतिदिन सुबह 6:45 बजे और नयी दिल्ली से शाम 4:00 बजे बसें चलेंगी। बेनी-नयी दिल्ली मार्ग का किराया 5,400 नेपाली रुपये जबकि नयी दिल्ली से बेनी का किराया 3,200 भारतीय रुपये निर्धारित किया गया है। -
न्यूयॉर्क. अमेरिका के दोनों दलों के शीर्ष सांसदों और नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों तथा प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह साझेदारी विश्व भर में शांति और स्थिरता के लिए ''बहुत महत्वपूर्ण'' है तथा उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को अधिक मजबूत करने का आह्वान किया। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को यहां एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत बिनय श्रीकांत प्रधान और उप महावाणिज्यदूत विशाल हर्ष ने समारोह में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। इस समारोह में सरकारी अधिकारी, कारोबारी नेता, शिक्षा और संस्कृति जगत के नेता, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख सदस्य, राजनयिक कोर के सदस्य और विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए डेलवेयर के गवर्नर मैट मेयेर ने इस बात पर जोर दिया कि उनके राज्य में भारतीय समुदाय सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय है। उन्होंने डेलवेयर की विदेश सचिव चारुनी पतिबांडा-सांचेज के माता-पिता की प्रवासी यात्रा को याद किया, जो अमेरिका में इस पद को संभालने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी थीं। मेयेर मार्च में भारत की यात्रा करने वाले हैं, जिसमें वह मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद में एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। सफोल्क काउंटी से रिपब्लिकन अमेरिकी प्रतिनिधि निक ला लोटा ने न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में इतालवी और आयरिश समुदायों के बाद बढ़ते भारतीय समुदाय को 'तीसरा समुदाय' बताया। न्यूयॉर्क के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी प्रतिनिधि माइक लॉलर ने 2023 में अमेरिकी कैपिटल में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण को याद किया और इसे एक ''महत्वपूर्ण'' अवसर बताया, जहां ''हमने उनके (मोदी के) अंदाज को देखा। लोग प्रधानमंत्री को देखकर और उनकी आवाज सुनकर बेहद उत्साहित थे।'' नवंबर 2025 के चुनावों में फिर से चुने गए एडिसन के मेयर सैम जोशी ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करते हुए कहा, ''मैं खुले तौर पर, बिना किसी हिचकिचाहट के भारतीय हूं...हालांकि मैं कभी भी राष्ट्रीय या संघीय मुद्दों पर बात नहीं करता, लेकिन मैं इस तथ्य से पीछे नहीं हटूंगा कि अमेरिका को भारत के साथ बेहतर संबंध रखने की जरूरत है।'' सांसद लौरा गिलन, न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने भी अपने संबोधन में भारत के कई महान व्यक्तियों को याद किया।
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ह्यूस्टन (अमेरिका). भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को 'रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज' ने भू-विज्ञान में 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है। ''भू-विज्ञान का नोबेल'' कहे जाने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत रामनाथन को 'सुपर-प्रदूषकों' और वायुमंडलीय 'ब्राउन क्लाउड्स' पर दशकों तक किए गए उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया है, जिसने वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वॉर्मिंग) की समझ को नई दिशा दी। रामनाथन (82) ने 1975 में नासा में काम करते हुए एक ऐतिहासिक खोज की थी। उन्होंने बताया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), जो एरोसोल और रेफ्रिजरेशन में व्यापक रूप से इस्तेमाल होते थे, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 10,000 गुना अधिक प्रभावी तरीके से गर्मी खींचते हैं। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज से बातचीत में रामनाथन ने कहा, ''1975 तक हम मानते थे कि वैश्विक ताप वृद्धि मुख्य रूप से कार्बनडाइऑक्साइड के कारण होती है। मैं यह देखकर स्तब्ध रह गया कि तकनीक और मानव गतिविधियां पर्यावरण को किस हद तक बदल सकती हैं।'' रामनाथन का जन्म मदुरै में हुआ और उनका पालन-पोषण चेन्नई में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद की एक रेफ्रिजरेटर फैक्टरी में इंजीनियर के रूप में की थी, जहां उन्होंने पहली बार सीएफसी पर काम किया। बाद में उन्होंने अन्नामलाई विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
क्रैफोर्ड पुरस्कार के तहत उन्हें लगभग 9 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि और एक स्वर्ण पदक दिया जाएगा। यह पुरस्कार मई 2026 में स्टॉकहोम में आयोजित 'क्रैफोर्ड डेज' के दौरान प्रदान किया जाएगा। रामनाथन का शोध मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों की बुनियाद बना, जिसने वातावरण में लाखों टन हानिकारक उत्सर्जन को जाने से रोका है। - वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के ऊपर कमर्शियल एयरस्पेस फिर से खोलने जा रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए दौर की शुरुआत हो रही है, जिसमें अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में काम के मौके तलाश रही हैं।ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग में कहा कि उन्होंने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति से बात की है और यात्रा बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के ऊपर पूरा व्यावसायिक हवाई क्षेत्र खोला जाएगा और बहुत जल्द अमेरिकी नागरिक वहां जा सकेंगे।उन्होंने कहा कि वहां जाने वाले यात्री सुरक्षित रहेंगे। ट्रंप के अनुसार, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। ट्रंप ने बताया कि अमेरिका में रहने वाले वेनेजुएलावासी इस फैसले को ध्यान से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मियामी के डोरल इलाके में, जिसे ‘लिटिल वेनेजुएला’ कहा जाता है, लोग इस फैसले से बहुत खुश हैं। यह बदलाव एक सफल सुरक्षा अभियान और बेहतर होते रिश्तों का नतीजा है। ट्रंप ने इस काम के लिए जनरल केन और उनकी टीम की तारीफ भी की।उन्होंने इस बदलाव को एक सफल सुरक्षा ऑपरेशन और बेहतर होते संबंधों से जोड़ा। ट्रंप ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, वेनेजुएला के संबंध में एक स्थिति बनी थी। मैं जनरल केन और उनके स्टाफ को उनके काम के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। हम उनके साथ बहुत अच्छे से मिल-जुलकर काम कर रहे हैं। रिश्ते बहुत मजबूत, बहुत अच्छे रहे हैं।”ट्रंप ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच संबंध काफी मजबूत और अच्छे हो गए हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी तेल कंपनियां पहले ही वेनेजुएला जाना शुरू कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी तेल कंपनियां वहां संभावनाएं देख रही हैं और अपने काम की जगह तय कर रही हैं।ट्रंप के मुताबिक, इससे दोनों देशों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इससे वेनेजुएला और अमेरिका, दोनों के लिए बड़ी संपत्ति पैदा होगी और तेल कंपनियां भी अच्छा मुनाफा कमाएंगी।ट्रंप ने कहा कि इस फैसले के बाद वेनेजुएला में लोग सड़कों पर उतर आए। उन्होंने कहा, “वेनेजुएला के लोग सचमुच सड़कों पर अमेरिकी झंडे लहरा रहे थे, वे बहुत खुश थे।”उन्होंने परिवहन मंत्री सीन डफी और अन्य संबंधित विभागों को तेजी से काम करने का निर्देश दिया। ट्रंप ने कहा कि इस फैसले से दोनों तरफ की यात्रा संभव होगी। वेनेजुएला से आए लोग चाहें तो वापस जा सकेंगे या मिलने के लिए वहां जा सकेंगे। वेनेजुएला के पास दुनिया में सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक है। पहले अमेरिकी कंपनियां वहां के ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय थीं, लेकिन प्रतिबंधों और नियमों की वजह से उनका काम काफी कम हो गया था।
- सिंगापुर. सिंगापुर में डॉक्टर बनने के इच्छुक छात्र अब भारत के 'मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन' सहित आठ और विदेशी संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे। सिंगापुर ने उम्रदराज होती आबादी के कारण डॉक्टरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से इन विश्वविद्यालयों की डिग्रियों को मान्यता देने का फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय और सिंगापुर चिकित्सा परिषद (एसएमसी) ने मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि नयी मंजूरी प्राप्त ये संस्थान सिंगापुर को उम्रदराज़ होती जनसंख्या के बीच डॉक्टरों की बढ़ती जरूरत को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद करेंगे। इन आठ विश्वविद्यालयों को शामिल किए जाने के साथ ही एक फरवरी 2026 तक सिंगापुर में मान्यता प्राप्त विदेशी मेडिकल स्कूलों की संख्या 112 से बढ़कर 120 हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि उसने चिकित्सा पंजीकरण अधिनियम, 1997 की दूसरी अनुसूची में आठ मेडिकल स्कूलों को जोड़ने संबंधी एसएमसी की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है। मणिपाल के अलावा जिन विश्वविद्यालयों को सूची में शामिल किया गया है, उनमें ऑस्ट्रेलिया का एडिलेड विश्वविद्यालय, आयरलैंड का यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे, मलेशिया का यूनिवर्सिटी सैन्स मलेशिया, पाकिस्तान का आगा खान यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज, चीन का त्सिंगहुआ विश्वविद्यालय, ब्रिटेन का यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर और ब्रिटेन का ही सिटी सेंट जॉर्ज़, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन शामिल हैं। बयान के अनुसार, 2026 से चिकित्सा डिग्री हासिल करने के इच्छुक छात्र इन विदेशी संस्थानों में आवेदन कर सकेंगे। बयान में कहा गया है कि मूल्यांकन के दौरान कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है, जिनमें विश्वविद्यालयों की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, शिक्षण का माध्यम अंग्रेज़ी होना और इन संस्थानों से निकले डॉक्टरों का प्रदर्शन शामिल है। इसमें कहा गया है कि एसएमसी विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टरों का शुरुआती वर्षों में एक निगरानी ढांचे के तहत मूल्यांकन जारी रखेगा, ताकि चिकित्सा अभ्यास के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
- संयुक्त राष्ट्र. भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अब अंतरराष्ट्रीय शांति सुनिश्चित करने वाली संस्था के रूप में नहीं देखा जा रहा है और शांति एवं सुरक्षा से जुड़े परिणाम हासिल करने के लिए चर्चाएं ''समानांतर बहुपक्षीय ढांचों'' की ओर बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने सोमवार को यहां 'अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन की पुनः पुष्टि: शांति, न्याय और बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने के मार्ग' विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा, ''सार्वभौमिक सदस्यता वाले बहुपक्षवाद, जिसके केंद्र में संयुक्त राष्ट्र है, पर दबाव बढ़ रहा है। इस संगठन के सामने चुनौतियां केवल बजटीय नहीं हैं। संघर्षों से निपटने में जड़ता और प्रभावहीनता इसकी एक बड़ी कमी बनी हुई है।'' हरीश ने कहा कि दुनिया भर के लोग संयुक्त राष्ट्र को ऐसी संस्था के रूप में नहीं देखते जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा प्रदान कर सके। उन्होंने कहा, ''चर्चाएं अब समानांतर बहुपक्षीय ढांचों की ओर बढ़ गई हैं, जिनमें कुछ मामलों में निजी क्षेत्र के भागीदार भी शामिल हैं, ताकि संयुक्त राष्ट्र के ढांचे से बाहर शांति और सुरक्षा से जुड़े परिणाम हासिल किए जा सकें।'' भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब संयुक्त राष्ट्र और उसके सबसे शक्तिशाली अंग सुरक्षा परिषद की वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों को रोकने और सुलझाने में लगातार विफलता सामने आ रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए अपना 'शांति बोर्ड' शुरू किया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प या प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं को अपने 'शांति बोर्ड' में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने और "वैश्विक संघर्षों" को सुलझाने के लिए एक "नए साहसपूर्ण तरीके" पर काम करेगा। पिछले हफ़्ते दावोस में विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के मौके पर एक कार्यक्रम में, ट्रंप ने शांति बोर्ड के घोषणापत्र को आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी दी। ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे, और जिन देशों ने इसके घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और इसमें शामिल हुए हैं, वे अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कज़ाकिस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, मोरक्को, पाकिस्तान, पैराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और उज़्बेकिस्तान हैं। हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन का अनुप्रयोग निरंतरता, वस्तुनिष्ठता और पूर्वानुमेयता पर आधारित होना चाहिए तथा इसमें दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन का उपयोग किसी देश की संप्रभुता पर सवाल उठाने या उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हरीश ने कहा कि भारत अपने संविधान, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय तक पहुंच बढ़ाने वाली पहलों के माध्यम से कानून के शासन को अपने राष्ट्रीय शासन की आधारशिला मानता है और यही प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के दृष्टिकोण को दिशा देती है। भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी कहा कि लागू किए बिना कानून का शासन ''निष्प्रभावी'' है और वैश्विक शासन संरचनाओं, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के ढांचे में व्यापक सुधार की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वह समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सके और अपनी प्रासंगिकता बनाए रखे।
- लंदन। ब्रिटिश संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल ने भारत को ''सभी लोकतंत्रों की जननी'' बताते हुए कहा है कि इसके कुछ पड़ोसी देशों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि लोकतंत्र का सही अर्थ क्या है। लंदन में भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह के दौरान गणतंत्र दिवस के अपने संदेश में, होयल ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा विश्व इतिहास में 'मील का पत्थर' है। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में होयल मुख्य अतिथि थे।उन्होंने कहा, ''हम (ब्रिटेन) संसद की जननी हो सकते हैं, लेकिन जब मैं लगभग 1 अरब लोगों के मतदान करने, मतगणना और परिणाम घोषित होने के बारे में सुनता हूं, तो यह कुछ खास होता है।'' उन्होंने कहा, ''यह बेहद खास बात है कि आपके कुछ पड़ोसी देश लोकतंत्र के मायने समझने लगे हैं। यह हम स्वतंत्र देशों के बारे में है, जो लोकतांत्रिक दुनिया में विश्वास रखते हैं, और मैं कहना चाहूंगा कि जिन लोगों के पास सही मायने में लोकतंत्र नहीं है, वे इस पर विचार करें। लोकतंत्र ही हमारा लक्ष्य है और इसलिए आप (भारत) हमेशा एक मिसाल बने रहेंगे।'' सभा को संबोधित करते हुए, ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी ने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी ''अत्यंत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और आवश्यक'' है।
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वाशिंगटन। मादक पदार्थों की कथित तौर पर तस्करी कर रही नौकाओं पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों में 126 लोग मारे गए हैं। अमेरिकी सेना ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। 'यूएस सदर्न कमांड' ने बताया कि इन लोगों में कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में सितंबर की शुरुआत से अब तक किए गए कम से कम 36 हमलों में तत्काल मारे गए 116 लोग शामिल हैं। हमले के बाद लापता हुए 10 अन्य लोगों को भी मृत माना जा रहा है। अमेरिकी सेना ने कहा कि मृत माने गए आठ लोग उन तीन नौकाओं से कूद गए थे, जिन पर मादक पदार्थों की कथित तस्करी के कारण अमेरिकी बलों ने 30 दिसंबर को हमला किया था। मृत माने गए अन्य दो लोग उन नौकाओं पर सवार थे जिन पर 27 अक्टूबर और पिछले शुक्रवार को हमले किए गए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका लातिन अमेरिका में ''मादक पदार्थों की तस्कारी'' करने वालों के साथ ''सशस्त्र संघर्ष'' में है और उन्होंने मादक पदार्थों के आवागमन को रोकने के लिए इन हमलों को उचित ठहराया है।
- दावोस । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उनका देश ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने के लिए बल प्रयोग नहीं करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि केवल अमेरिका ही खनिज-समृद्ध इस द्वीप की रक्षा कर सकता है। ग्रीनलैंड का मुद्दा अमेरिका के यूरोप के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र में है।ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका में आर्थिक प्रगति हो रही है जबकि यूरोप ‘‘सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है''। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने 70 मिनट लंबे भाषण में कहा, ‘‘ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है, तथा ग्रीनलैंड की रक्षा केवल अमेरिका ही कर सकता है।'' उन्होंने शुल्क, पर्यावरण और आव्रजन सहित कई मुद्दों पर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सहयोगियों पर तीखा हमला किया। उनके भाषण के बाद 20 मिनट का प्रश्नोत्तर सत्र हुआ।ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपना दावा जताते हुए कहा, ‘‘हमने खूबसूरत डेनमार्क के लिए लड़ाई लड़ी, जो एक भूमि नहीं, बल्कि हिमखंड का एक बड़ा टुकड़ा है, जो ठंडे और दुर्गम स्थान पर स्थित है। यह उस चीज की तुलना में बहुत छोटी मांग है जो हमने उन्हें कई दशकों तक दी है। इसे वापस देना हमारी मूर्खता थी।'' उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को लगा कि मैं बल प्रयोग करूंगा। मुझे बल प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है। मैं बल प्रयोग नहीं करूंगा।'' ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क का अर्धस्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका को इसकी रणनीतिक कारणों से जरूरत है, दुर्लभ खनिजों के लिए नहीं।''ट्रंप ने कहा कि केवल अमेरिका ही ग्रीनलैंड की रक्षा कर सकता है, और कई यूरोपीय देशों ने भी कई क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब हमने ग्रीनलैंड को बचाया और डेनमार्क को सौंप दिया, तब हम एक महाशक्ति थे, लेकिन अब हम उससे कहीं अधिक शक्तिशाली हैं।'' ट्रंप ने दावोस में अपने भाषण के दौरान डेनमार्क को ‘कृतघ्न' करार दिया। उन्होंने अमेरिका द्वारा डेनमार्क से ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए तत्काल बातचीत का आह्वान किया। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की अपनी योजना का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी थी। राष्ट्रपति ने अमेरिका की आर्थिक शक्ति और वैश्विक समृद्धि पर भी बात करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका इस ग्रह का आर्थिक इंजन है...हम प्रतिभाशाली लोगों की रक्षा करना चाहते हैं क्योंकि ऐसे लोग बहुत कम हैं।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका को शुल्क से जो पैसा मिल रहा है, उसका उपयोग देश और उसके लोगों के हित में विवेकपूर्ण तरीके से किया जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ‘‘जब अमेरिका आर्थिक रूप से फलता-फूलता है, तो पूरी दुनिया आर्थिक रूप से फलती-फूलती है।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘‘बहुत सारे दोस्तों'' और ‘‘कुछ दुश्मनों'' का अभिवादन करते हुए की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी उन्हें चुनकर बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दो साल पहले हम एक मृत देश थे, लेकिन अब हम फिर से जीवित हो गए हैं।'' ट्रंप ने कहा, ‘‘हम दूसरे देशों पर कर बढ़ा रहे हैं ताकि उनसे हुए नुकसान की भरपाई कर सकें।''वेनेजुएला के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह कई वर्षों तक एक अद्भुत जगह रही है, लेकिन गलत नीतियों के कारण यह बर्बाद हो गई। ट्रंप ने कहा, ‘‘हमला खत्म होने के बाद वेनेजुएला ने कहा कि चलो एक समझौता करते हैं।''उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश अगले छह महीनों में उतना पैसा कमाएगा जितना उसने छह वर्षों में कमाया था। राष्ट्रपति ने ‘पर्यावरण लॉबी' पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि चीन ‘‘यूरोप के मूर्ख लोगों को पवनचक्कियां बेचकर खूब पैसा कमा रहा है।'' ट्रंप ने टिप्पणी की कि चीन में कोई पवनचक्की नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘‘पवनचक्कियां पक्षियों को मारती हैं, और मूर्ख लोग इन्हें खरीदते हैं... ऊर्जा से पैसा कमाना चाहिए, न कि नुकसान करना चाहिए। लोगों को तब नुकसान होता है जब उनकी जमीन पर पवनचक्कियां लग जाती हैं।'' ट्रंप ने कनाडा का जिक्र करते हुए कहा कि उसे अमेरिका से बहुत सी मुफ्त सुविधाएं मिलती हैं और उस देश को अमेरिका का आभारी होना चाहिए। ट्रंप ने कहा, ‘‘मैंने उनसे ऐसा करने को कहा, क्योंकि आप लोग 30 सालों से हमें धोखा दे रहे हैं।''उन्होंने कहा कि वह हर देश के साथ काम करना चाहते हैं और किसी को बर्बाद नहीं करना चाहते, ‘‘लेकिन उन्हें करों का भुगतान न करके पैदा हुए घाटे की भरपाई करनी होगी।''
- दावोस।” विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में जहां वैश्विक नेता सुस्त आर्थिक वृद्धि और बढ़ते जलवायु जोखिमों पर चिंता जता रहे हैं, वहीं भारतीय प्रतिनिधिमंडल देश की मजबूत वृद्धि दर और पर्यावरण अनुकूल उपायों को प्रमुखता से पेश कर रहा है।भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक परिचर्चा में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने सतत विकास और ग्रिड स्थिरता के लिए निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है। जोशी ने बताया कि भारत ने डिजिटलीकरण और स्मार्ट मीटरिंग के जरिए अपने ग्रिड का आधुनिकीकरण शुरू कर दिया है, जिसने व्यवस्था को मजबूत किया है और नागरिकों को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे ही जल्द चौथी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, अब मुख्य आवश्यकता ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने की है। 'ग्रिड स्थिरता' का मतलब बिजली के नेटवर्क (ग्रिड) में उत्पादन (आपूर्ति) और खपत के बीच निरंतर संतुलन बनाए रखना है। मंत्री ने कहा कि भारत निवेश पर शानदार रिटर्न प्रदान करता है, जिसे एक स्थिर नियामक व्यवस्था और सुसंगत नीतियों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इन्हीं नीतियों ने भारत को एक 'नाजुक अर्थव्यवस्था' से बदलकर वैश्विक वृद्धि के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने में मदद की है। जोशी ने कहा कि कम गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए), नियंत्रित मुद्रास्फीति, बढ़ते उत्पादन और तेजी से सुधरते बुनियादी ढांचे के साथ भारत निवेश के लिए आकर्षक अवसर पेश कर रहा है।झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश के 42 प्रतिशत खनिज संसाधन झारखंड में हैं, जो देश के विकास के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ राज्य में समृद्धि लाने पर जोर दिया। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा, "गुजरात बड़े पैमाने पर पर्यावरण अनुकूल उपायों का उदाहरण पेश करता है। इसने अपनी औद्योगिक क्षमता को संतुलित विकास और संसाधन दक्षता के मॉडल में बदल दिया है।" उन्होंने कहा कि गुजरात लंबे समय से भारत का 'विकास इंजन' रहा है, जो राष्ट्रीय जीडीपी, निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान दे रहा है।आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि भविष्य के लिए स्थिरता के हमारे चार प्रमुख स्तंभ हैं पारिस्थितिकी तंत्र को प्राथमिकता, व्यापार करने की गति, तीसरा, पर्यावरण अनुकूल रोजगार और कौशल में निवेश और नीतिगत निश्चितता एवं दक्षता। सीआईआई ‘इंडिया सस्टेनेबिलिटी टास्कोफोर्स' के अध्यक्ष और एलएसई में अतिथि प्रोफेसर जयंत सिन्हा ने सरकार से चार क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, "पहला क्षेत्र रिपोर्टिंग और मानकों से जुड़ा है, दूसरा हरित वित्त एजेंसी का गठन, तीसरा ग्रिड का डिजिटलीकरण और चौथा कार्बन बाजारों का विस्तार करना है।"
- दावोस ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह अपने ‘‘मित्र'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और वह एक अच्छा व्यापार समझौता करने जा रहे हैं। ‘मनीकंट्रोल' ने ट्रंप के हवाले से अपनी खबर में कहा, ‘‘मेरे मन में आपके प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) के लिए बहुत सम्मान है। वह एक शानदार व्यक्ति हैं और मेरे मित्र भी हैं। हम एक अच्छा (व्यापार) समझौता करने जा रहे हैं।'' खबर में कहा गया है कि उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में यह टिप्पणी की। ट्रंप विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए दावोस में थे।
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काठमांडू। नेपाल में ‘जेन जेड' के विरोध प्रदर्शनों के महीनों बाद पांच मार्च को कराए जा रहे आम चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री भी अपनी किस्मत आजमाएंगे। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष और ‘जेन-जेड'आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ने को मजबूर हुए के पी शर्मा ओली ने आगामी चुनाव के लिए झापा-5 सीट से नामांकन दाखिल किया है। वहीं, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल ‘प्रचंड' रुकुम पूर्व से किस्मत आजमा रहे हैं। दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के माधव कुमार नेपाल और प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के बाबूराम भट्टराई ने क्रमशः रौतहट-1 और गोरखा-2 निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन दाखिल किया है।
हालांकि, दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता झाला नाथ खनाल इस दौड़ में शामिल नहीं हैं। नेपाल में ‘जेन-जेड' युवाओं के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ओली ने नौ सितंबर को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद देश में आम चुनाव आवश्यक हो गए थे। वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक दैनिक के संपादक प्रह्लाद रिजाल का कहना है, ‘पिछले साल सितंबर में ‘जेन जेड' के विद्रोह का एक मुख्य कारण यह था कि पिछले 15 वर्षों में, तीन शीर्ष नेताओं, देउबा, प्रचंड और ओली एक के बाद एक प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के लिए जोड़-तोड़ करते रहे।'' उन्होंने कहा, ‘जेन जेड' (1997 से 2012 के बीच जन्में बच्चे) के युवा बदलाव चाहते थे और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे पुराने नेतृत्व से तंग आ चुके हैं। इसके बावजूद, हमारे पास ये चार नेता हैं जिनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है।'' ओली 74 वर्ष के हैं, प्रचंड और भट्टाराई दोनों की उम्र 71 साल है। माधव कुमार नेपाल 72 वर्ष के हैं।
इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे दो पूर्व प्रधानमंत्रियों में से, खनाल ने स्वेच्छा से दौड़ से दूर रहने का विकल्प चुना है, जबकि देउबा को अपनी ही पार्टी के युवा नेताओं के प्रतिरोध के कारण मैदार से बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक धनंजय शर्मा ने कहा, देउबा अपने दादेलधुरा निर्वाचन क्षेत्र से आठवीं बार चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष गगन थापा ने अंततः उन्हें ‘जेन जेड' की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव से दूर रहने के लिए मना लिया।














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