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- नयी दिल्ली. स्थानीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख के बीच पिछले सप्ताह सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से सात के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में सामूहिक रूप से 1,18,328.29 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा लाभ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और भारती एयरटेल को हुआ। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 721.53 अंक या 0.88 प्रतिशत के लाभ में रहा।समीक्षाधीन सप्ताह में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), भारती एयरटेल, एसबीआई, इन्फोसिस और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बाजार मूल्यांकन में बढ़ोतरी हुई। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत घट गई। सप्ताह के दौरान एसबीआई का बाजार मूल्यांकन 35,953.25 करोड़ रुपये बढ़कर 7,95,910 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। भारती एयरटेल की बाजार हैसियत 33,214.77 करोड़ रुपये बढ़कर 11,18,952.64 करोड़ रुपये रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मूल्यांकन 17,389.23 करोड़ रुपये बढ़कर 19,04,898.51 करोड़ रुपये पर और टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 12,952.75 करोड़ रुपये बढ़कर 11,46,879.47 करोड़ रुपये रहा।एलआईसी की बाजार हैसियत 12,460.25 करोड़ रुपये बढ़कर 5,65,612.92 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इन्फोसिस का मूल्यांकन 6,127.73 करोड़ रुपये बढ़कर 6,39,901.03 करोड़ रुपये हो गया। एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 230.31 करोड़ रुपये बढ़कर 14,84,816.26 करोड़ रुपये हो गया। इस रुख के उलट आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 10,707.87 करोड़ रुपये घटकर 10,01,654.46 करोड़ रुपये पर आ गया। बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 6,346.93 करोड़ रुपये के नुकसान के साथ 6,17,892.72 करोड़ रुपये रहा। हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत 5,039.87 करोड़ रुपये घटकर 6,01,225.16 करोड़ रुपये रह गई। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एलआईसी का स्थान रहा।
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नयी दिल्ली. रोजमर्रा की जरूरतों का सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली प्रमुख कंपनियों ने जीएसटी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को देने के लिए अपने उत्पादों की कीमतों में कटौती की है। ऐसे में सोमवार से साबुन, पाउडर, कॉफी, डायपर, बिस्कुट, घी और तेल जैसी दैनिक जरूरत की वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। इस कदम से आगामी त्योहारी सत्र, जो नवरात्रि के साथ शुरू होता है, के दौरान खपत में वृद्धि और बिक्री में उछाल आने की उम्मीद है। एफएमसीजी कंपनियों ने जीएसटी 2.0 के लाभों को बिना किसी देरी के उपभोक्ताओं तक पहुंचाया है। इन कंपनियों ने 22 सितंबर से साबुन, शैम्पू, बेबी डायपर, मंजन, रेजर और आफ्टर-शेव लोशन सहित अपने उत्पादों की अधिकतम खुदरा मूल्य की संशोधित सूची जारी की है। इसका मकसद उपभोक्ताओं को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दर में कटौती का लाभ देना है।
प्रॉक्टर एंड गैंबल, इमामी और एचयूएल जैसी कंपनियों ने नई मूल्य सूची जारी की हैं। इसके बारे में कंपनियों की वेबसाइट के माध्यम से उनके संबंधित वितरकों और उपभोक्ताओं को सूचित किया गया है। प्रॉक्टर एंड गैंबल ने अपने उत्पादों की एक संशोधित सूची जारी की है। इसमें उसने विक्स, हेड एंड शोल्डर्स, पैंटीन, पैम्पर्स (डायपर), जिलेट, ओल्ड स्पाइस और ओरल-बी आदि ब्रांड के उत्पादों की कीमतों में कमी की है। पीएंडजी इंडिया ने बच्चों के देखभाल से जुड़े उत्पादों के दाम भी कम किए हैं। इन उत्पादों में डायपर पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत और बेबी वाइप्स पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत हो जाएगा। नई दरें 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगी। कंपनी जिलेट और ओल्ड स्पाइस की कीमतों में भी कमी करने जा रही है। इमामी बोरोप्लस एंटीसेप्टिक क्रीम, नवरत्न आयुर्वेदिक तेल और झंडू बाम आदि की कीमतें भी कम हो रही हैं। एचयूएल ने भी जीएसटी सुधारों के बाद 22 सितंबर से डव शैम्पू, हॉर्लिक्स, किसान जैम, ब्रू कॉफी, लक्स और लाइफबॉय साबुन सहित अपने उपभोक्ता उत्पाद रेंज की कीमतों में कमी करने की घोषणा की है। जीएसटी परिषद ने इस महीने की शुरुआत में माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया है। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। -
नयी दिल्ली। सोमवार से नई जीएसटी दरों के लागू होने के साथ कुछ जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा उपकरण सस्ते हो जाएंगे, जिससे हर नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवा अधिक किफायती और सुलभ हो जाएगी। फार्मा उद्योग से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित ऐतिहासिक माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार 22 सितंबर से लागू हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक के लिए और अधिक किफायती और सुलभ बन जाएंगी। उन्होंने आगे बताया, "ज्यादातर दवाओं पर पहले 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था, लेकिन अब इन पर केवल पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। इसके अलावा, कैंसर, आनुवंशिक और दुर्लभ बीमारियों तथा हृदय रोगों से जुड़ी 36 महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं को पूरी तरह से कर से मु्क्त कर दिया गया है।" जैन ने बताया कि जीएसटी परिषद ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम, ग्लूकोमीटर और सुधारात्मक चश्मों पर लगने वाली कर की दरों को भी तर्कसंगत बनाया है। उन्होंने आगे कहा, ‘‘ये कदम भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव दर्शाते हैं। इससे मरीजों को सीधी बचत होगी, परिवारों पर खर्च का बोझ कम होगा, जरूरी इलाज तक पहुंच आसान होगी और देश की स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत होगी।'' जैन ने आगे कहा, "भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि इन लाभों का फायदा नागरिकों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचे। हमारा उद्देश्य सभी के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा को आगे बढ़ाना है।'' इससे पहले, ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (ओपीपीआई) के महानिदेशक अनिल मताई ने कहा था कि जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी कम करने का फैसला एक ऐतिहासिक और सहानुभूतिपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह साहसिक कदम मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम करेगा और इलाज को अस्पताल से लेकर घर तक हर स्तर पर सस्ता और सुलभ बनाएगा।
- नयी दिल्ली। नई जीएसटी दरें लागू होने के साथ ही होटल में 7,500 रुपये या उससे कम किराये वाले कमरे सोमवार से 525 रुपये तक सस्ते हो जाएंगे। आतिथ्य क्षेत्र के दिग्गजों ने कहा कि होटल उद्योग के लिए, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बिना माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने से वृद्धि को समर्थन मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे राजस्व में वृद्धि होगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और होटल देश भर में मेहमानों को बेहतर सेवाएं दे सकेंगे। इस समय 7,500 रुपये तक के दैनिक किराये वाले होटल के कमरों पर आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, इस कटौती से कमरे का किराया सात प्रतिशत सस्ता होगा। इसी प्रकार यात्रियों को भोजन पर जीएसटी का लाभ भी मिलेगा। रेडिसन होटल समूह के दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) निखिल शर्मा ने बताया कि सरलीकृत कर संरचना होटल संचालकों और यात्रियों के लिए स्पष्टता लाएगी। रमाडा जैसे ब्रांड के मालिक, विन्धम होटल्स एंड रिजॉर्ट्स के यूरेशिया बाजार के प्रबंध निदेशक राहुल मैकरियस ने कहा कि भारत का यात्रा और आतिथ्य क्षेत्र मजबूती से बढ़ रहा है और जीएसटी सुधार बिल्कुल सही समय पर आया है।
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नयी दिल्ली। देश की प्रमुख वाहन कंपनियों...मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंदै मोटर इंडिया सोमवार से अपनी कारों की कीमतें कम करने जा रही हैं। कल से ही नवरात्रि का शुभ त्योहार शुरू हो रहा है। इससे ग्राहकों को काफी फायदा होगा। लक्जरी कार विनिर्माता मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू के साथ-साथ दोपहिया वाहन कंपनियां भी 22 सितंबर से लागू नए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ कीमतें कम करने जा रही हैं। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने जीएसटी दर में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए अपनी कारों की कीमतों में 1.29 लाख रुपये तक की कटौती की है। कंपनी ने दोपहिया वाहन चलाने वाले ग्राहकों को चार पहिया वाहनों खरीदने में सुगमता के लिए अपनी छोटी कारों की कीमतों में 8.5 प्रतिशत से अधिक की कटौती करने का भी फैसला किया है।
प्रवेश-स्तर के मॉडल एस प्रेसो की कीमत में 1,29,600 रुपये तक की कमी होगी; ऑल्टो के 10 की कीमत में 1,07,600 रुपये तक की कमी होगी; सेलेरियो की कीमत में 94,100 रुपये की कमी होगी; वैगन-आर की कीमत में 79,600 रुपये तक की कमी होगी और इग्निस की कीमत में 71,300 रुपये तक की कमी होगी। प्रीमियम हैचबैक स्विफ्ट की कीमत में 84,600 रुपये तक की कमी; बलेनो की कीमत में 86,100 रुपये तक की कमी; टूर एस की कीमत में 67,200 रुपये तक की कमी; डिजायर की कीमत में 87,700 रुपये तक की कमी; फ्रोंक्स की कीमत में 1,12,600 रुपये तक की कमी; ब्रेजा की कीमत में 1,12,700 रुपये तक की कमी; ग्रैंड विटारा की कीमत में 1.07 लाख रुपये तक की कमी; जिम्नी की कीमत में 51,900 रुपये तक की कमी; अर्टिगा की कीमत में 46,400 रुपये तक की कमी और एक्सएल छह की कीमत में 52,000 रुपये तक की कमी होगी। इसी तरह, इन्विक्टो की कीमत में 61,700 रुपये तक की कमी; इको की कीमत में 68,000 रुपये तक की कमी और सुपर कैरी एलसीवी की कीमत में 52,100 रुपये तक की कमी होगी।
मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन और बिक्री) पार्थो बनर्जी ने कहा, ‘‘भारतीय बाजार में वाहन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता। भारत में प्रति 1,000 लोगों में सिर्फ 34 प्रतिशत के पास कार है, जो बहुत कम है। इसलिए बाजार का अगुवा होने के नाते, हम भारत में मोटर वाहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए यह पहल कर रहे हैं।''
टाटा मोटर्स की यात्री गाड़ियों की कीमतें 22 सितंबर से 75,000 रुपये से 1.45 लाख रुपये तक कम हो जाएंगी। मुंबई की इस कंपनी की कॉम्पैक्ट एसयूवी पंच की कीमत 85,000 रुपये और नेक्सॉन की कीमत 1.55 लाख रुपये कम हो जाएगी। मध्यम आकार के मॉडल कर्व की कीमत भी 65,000 रुपये कम होगी। इसी तरह, कंपनी की प्रीमियम एसयूवी - हैरियर और सफारी की कीमतें क्रमशः 1.4 लाख रुपये और 1.45 लाख रुपये कम होंगी। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने पहले ही अपनी यात्री वाहनों की कीमतों में 1.56 लाख रुपये तक की कटौती कर दी है। कंपनी ने बोलेरो/नियो श्रृंखला की कीमत 1.27 लाख रुपये, एक्सयूवी 3एक्सओ (पेट्रोल) की कीमत 1.4 लाख रुपये, एक्सयूवी 3एक्सओ (डीजल) की कीमत 1.56 लाख रुपये, थार 2डब्ल्यूडी (डीजल) की कीमत 1.35 लाख रुपये, थार 4डब्ल्यूडी (डीजल) की कीमत 1.01 लाख रुपये और स्कॉर्पियो क्लासिक की कीमत 1.01 लाख रुपये कम कर दी है।
हुंदै कारों की कीमतों में 60,640 रुपये (वरना) से लेकर 2.4 लाख रुपये (प्रीमियम एसयूवी टूसों) तक की कटौती की गई है। होंडा 22 सितंबर से कॉम्पैक्ट सेडान अमेज की कीमत 95,500 रुपये, सिटी की कीमत 57,500 रुपये और इलेवेट की कीमत 58,400 रुपये कम करेगी। इसी तरह किआ इंडिया अपनी गाड़ियों की कीमतों में 4.48 लाख रुपये तक की कटौती करेगी। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की गाड़ियों की कीमतें सोमवार से 3.49 लाख रुपये तक कम हो जाएंगी। लक्जरी कार बाजार की अगुवा मर्सिडीज-बेंज ने जीएसटी की दर में बदलाव के कारण ए-क्लास (दो लाख रुपये) से एस-क्लास (10 लाख रुपये) तक की कारों की कीमतों में कटौती की घोषणा की है। बीएमडब्ल्यू मोटर इंडिया ने अपने भारत में उपलब्ध सभी मॉडल की कीमतों में 13.6 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा की है, जिसमें मिनी श्रृंखला भी शामिल है। इसी तरह, ऑडी ने भारत में अपने सभी मॉडल की कीमतों में 2.6 लाख रुपये से 7.8 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा की है। जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ने पहले ही कीमतों में 4.5 लाख रुपये से 30.4 लाख रुपये तक की कटौती कर दी है। दोपहिया वाहनों में, हीरो मोटोकॉर्प की मोटरसाइकिल और स्कूटर की कीमतें 15,743 रुपये तक कम हो जाएंगी। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया के 350सीसी तक के मॉडल की कीमतें 18,800 रुपये तक कम हो जाएंगी।
- नयी दिल्ली। माल एवं सेवा कर कटौती के बाद टेलीविजन (टीवी) विनिर्माता कीमतों में 2,500 रुपये से 85,000 रुपये तक की कमी करने जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को जीएसटी में कटौती का पूरा लाभ मिल सकेगा। साथ ही टीवी विनिर्माताओं को सोमवार से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन में अच्छी बिक्री की उम्मीद है। खपत को बढ़ावा देने के प्रयास में, जीएसटी परिषद ने इस महीने की शुरुआत में 22 सितंबर (नवरात्रि के पहले दिन) से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती करने का फैसला किया था, जिससे टेलीविजन और एसी, वॉशिंग मशीन जैसे कई उत्पादों की कीमतें कम हो गई हैं। 32 इंच से अधिक स्क्रीन साइज वाले टीवी सेट पर शुल्क मौजूदा के 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। टीवी विनिर्माताओं ने स्क्रीन साइज और खूबियों के आधार पर कीमतों में 2,500 रुपये से 85,000 रुपये के बीच कटौती की घोषणा की है, ताकि जीएसटी में 10 प्रतिशत की कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।टीवी उद्योग, जिसने इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (अप्रैल से सितंबर) में लगभग स्थिर बिक्री दर्ज की है। उद्योग इस सप्ताह नवरात्रि से शुरू होने वाले त्योहारों के दौरान बिक्री में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा विनिर्माताओं को उम्मीद है कि कम कीमतों से बचत होने पर उपभोक्ता अतिरिक्त सुविधाओं वाले बड़े स्क्रीन साइज वाले टीवी खरीदेंगे। सोनी, एलजी और पैनासोनिक जैसे प्रमुख टीवी कंपनियां 22 सितंबर, 2025 से कम अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) वाली नई मूल्य सूची लेकर आई हैं। इसके अलावा, विनिर्माताओं को उम्मीद है कि इससे साउंड बार और पार्टी स्पीकर जैसे बंडल वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और इस त्योहारी सीजन में उन्हें दोहरे अंक में वृद्धि की उम्मीद है। सोनी इंडिया अपने 43 इंच से 98 इंच स्क्रीन साइज वाले ब्राविया टीवी मॉडल पर 5,000 रुपये से 71,000 रुपये के बीच एमआरपी में कटौती कर रही है। इसने 43 इंच वाले ब्राविया 2 की कीमत 59,900 रुपये से घटाकर 54,900 रुपये और 55 इंच वाले ब्राविया 7 की कीमत 2.50 लाख रुपये से घटाकर 2.30 लाख रुपये कर दी है। इसी तरह, 98 इंच स्क्रीन साइज वाला इसका टॉप-एंड ब्राविया 5 मॉडल सोमवार से नौ लाख रुपये के मौजूदा मूल्य की तुलना में 8.29 लाख रुपये में मिलेगा।एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने 43 इंच से 100 इंच स्क्रीन साइज वाले अपने टीवी सेट की कीमतों में 2,500 रुपये से 85,800 रुपये तक की कटौती की घोषणा की है। इसने 43 इंच स्क्रीन साइज वाले मॉडल की कीमत 30,990 रुपये से घटाकर 28,490 रुपये कर दी है। कंपनी ने 55 इंच और 65 इंच स्क्रीन साइज वाले दो लोकप्रिय मॉडल की कीमत 3,400 रुपये कम कर दी है, जो अब क्रमशः 42,990 रुपये और 68,490 रुपये में मिलेंगे। एलजी के 100 इंच टीवी की कीमत 5,85,590 रुपये से घटाकर 4,99,790 रुपये कर दी गई है। पैनासोनिक ने भी एमआरपी में 3,000 रुपये से 32,000 रुपये के बीच कटौती की है। इसने 43 इंच के टीवी की कीमत 3,000 रुपये से 4,700 रुपये तक कम कर दी है और उनकी एमआरपी को क्रमशः 36,990 रुपये, 49,990 रुपये और 58,990 रुपये से 33,990 रुपये, 45,990 रुपये और 54,290 रुपये कर दिया है। पैनासोनिक के 55 इंच वाले मॉडल की कीमत अब 65,990 रुपये से 76,990 रुपये के बीच है, जो 7,000 रुपये कम है। पैनासोनिक लाइफ सॉल्यूशंस इंडिया के टॉप-एंड 75 इंच वाले मॉडल की कीमत चार लाख रुपये से घटाकर 3.68 लाख रुपये और 65 इंच वाले टॉप-एंड मॉडल की 3.20 लाख रुपये से घटाकर 2.94 लाख रुपये कर दी गई है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से अपील की है कि 22 सितंबर से लागू होने जा रहे जीएसटी सुधारों का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को मिले। उन्होंने कहा कि टैक्स कटौती का फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए, क्योंकि इससे उद्योगों को भी लंबे समय में लाभ होगा। नए जीएसटी फ्रेमवर्क के तहत अब मौजूदा चार टैक्स स्लैब-5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत घटकर सिर्फ दो स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत रह जाएंगे।
इसके अलावा सरकार ने कई उत्पादों पर टैक्स कम किया है, जिसका सीधा फायदा आम लोगों को 22 सितंबर से मिलना शुरू हो जाएगा। वहीं, सिन और लग्जरी गुड्स पर सरकार ने 40 प्रतिशत टैक्स तय किया है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा, “कृपया सुनिश्चित करें कि टैक्स कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को मिले। इससे उद्योग जगत को भी लाभ होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार व्यापार सुगमता और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसके तहत नई लॉजिस्टिक्स नीति, नए औद्योगिक शहरों का विकास, छोटे विवादों को अपराधमुक्त करना और उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम करने जैसे कदम उठाए गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर जैसे कुछ उद्योग पहले ही टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू कर चुके हैं। उन्होंने आगे बताया कि आज कई देश भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते करना चाहते हैं, जिससे व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने व्यवसायों को निर्देश दिया था कि वे कारों और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं जैसी चीजों की अस्थायी मूल्य सूची प्रदर्शित करें, ताकि ग्राहक समझ सकें कि जीएसटी सुधारों के बाद कीमतों में कितनी कमी आई है।इसके साथ ही केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने भी उद्योग संघों और मंत्रालयों के साथ बैठकें कीं, ताकि जीएसटी परिषद द्वारा घोषित दरों में कटौती को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। उद्योगों के बीच इस बात पर सहमति बन गई है कि टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों तक जरूर पहुंचाया जाएगा। अनुमान है कि इस सुधार से उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की कीमतें करीब 10 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल की कीमतें 12-15 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं।- -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से युवाओं के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का मानना है कि एमएसएमई और स्टार्टअप्स में युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी और परिवारों व कारोबारियों पर वित्तीय बोझ कम होगा। ये बदलाव 22 सितंबर से लागू होंगे।
सरकार के मुताबिक इन सुधारों में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है जहां युवाओं की बड़ी भागीदारी है। इनमें शिक्षा, ऑटोमोबाइल, प्रौद्योगिकी, हस्तशिल्प, फुटवियर, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य प्रसंस्करण और वस्त्र जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे समावेशी विकास, स्थिरता और अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने के भारत के दृष्टिकोण को मजबूती मिलेगी। नए सुधारों में कई प्रमुख क्षेत्रों की जीएसटी दरें घटाई गई हैं। चमड़ा, जूते, कागज, कपड़ा, हस्तशिल्प, खिलौने, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे उद्योगों को इसमें शामिल किया गया है। चमोईस चमड़ा, तैयार चमड़ा और चमड़े से जुड़े कामों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। 2,500 रुपये तक के जूतों पर भी अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा। इसका सीधा फायदा युवाओं और छोटे कारोबारियों को मिलेगा, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।इसी तरह, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लकड़ी के विकल्पों पर भी जीएसटी घटाया गया है। चावल की भूसी के बोर्ड, जिप्सम बोर्ड, सीमेंट बॉन्डेड पार्टिकल बोर्ड, जूट पार्टिकल बोर्ड, बगास बोर्ड और सिसल फाइबर बोर्ड पर टैक्स 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे एमएसएमई को समर्थन मिलेगा और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ेगा।फिटनेस और स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस सुधार का लाभ मिलेगा। जिम और फिटनेस सेंटर पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे सदस्यता शुल्क सस्ता होगा और अधिक लोग, खासकर युवा और मध्यम वर्गीय परिवार, स्वास्थ्य और फिटनेस सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे।सरकार का कहना है कि इन सुधारों का मकसद उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करना, कारोबारियों के लिए नियम सरल बनाना और भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।- - नयी दिल्ली.अमूल ब्रांड के तहत डेयरी उत्पादों का विपणन करने वाली जीसीएमएमएफ ने शनिवार को घी, मक्खन, आइसक्रीम, बेकरी और फ्रोजन स्नैक्स सहित 700 से अधिक उत्पाद पैक की खुदरा कीमतों में कमी की। कंपनी ने जीएसटी दर में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का फैसला किया है। नयी कीमतें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) ने एक बयान में 700 से अधिक उत्पाद पैक की कीमत घटाने की घोषणा की, जिससे उसके ग्राहकों को जीएसटी कटौती का पूरा लाभ मिलेगा। यह संशोधन 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होगा। जीसीएमएमएफ ने कहा, ''यह संशोधन मक्खन, घी, यूएचटी दूध, आइसक्रीम, पनीर, चॉकलेट, बेकरी उत्पादों, फ्रोजन डेयरी और आलू स्नैक्स, कंडेंस्ड मिल्क, पीनट स्प्रेड, माल्ट आधारित पेय जैसी उत्पाद श्रेणियों में किया गया है।'' बयान के मुताबिक, ''मक्खन (100 ग्राम) का अधिकतम खुदरा मूल्य 62 रुपये से घटाकर 58 रुपये कर दिया गया है... घी की कीमत 40 रुपये घटकर 610 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।'' इसी तरह अमूल प्रोसेस्ड चीज ब्लॉक (एक किलो) का अधिकतम खुदरा मूल्य 30 रुपये घटकर 545 रुपये प्रति किलो हो गया है। फ्रोजन पनीर (200 ग्राम) का नया अधिकतम खुदरा मूल्य 95 रुपये होगा, जो अभी 99 रुपये है।बयान में कहा गया, ''अमूल का मानना है कि कीमतों में कमी से डेयरी उत्पादों, खासकर आइसक्रीम, पनीर और मक्खन की खपत बढ़ेगी, क्योंकि भारत में इनकी प्रति व्यक्ति खपत अभी भी बहुत कम है।'' इससे पहले, मदर डेयरी ने भी 22 सितंबर से अपने उत्पादों की कीमत घटाने की घोषणा की थी।
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नयी दिल्ली. शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अबतक 9.18 प्रतिशत बढ़कर 10.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। कंपनियों से अग्रिम कर संग्रह बढ़ने और रिफंड धीमा होने के कारण कर संग्रह में बढ़ोतरी हुई है। शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में व्यक्तिगत आयकर और कॉरपोरेट कर शामिल हैं।
चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल से 17 सितंबर के बीच रिफंड राशि 24 प्रतिशत घटकर 1.61 लाख करोड़ रुपये रही। आयकर विभाग के मुताबिक, इस अवधि में कंपनियों से प्राप्त अग्रिम कर संग्रह 6.11 प्रतिशत बढ़कर 3.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। हालांकि, गैर-कॉरपोरेट अग्रिम कर संग्रह 7.30 प्रतिशत घटकर 96,784 करोड़ रुपये रहा। एक अप्रैल से 17 सितंबर के बीच, शुद्ध कंपनी कर संग्रह बढ़कर 4.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह 2024 की इसी अवधि में 4.50 लाख करोड़ रुपये था। गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह इस वित्त वर्ष में अब तक लगभग 5.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 5.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। गैर-कॉरपोरेट कर में व्यक्ति और एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) शामिल हैं। प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) संग्रह आलोच्य अवधि में 26,306 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले इसी अवधि में 26,154 करोड़ रुपये था। शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह, 17 सितंबर तक सालाना आधार पर 9.18 प्रतिशत बढ़कर 10.82 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 9.91 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। रिफंड समायोजित करने से पहले, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक 12.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 3.39 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष (2025-26) में प्रत्यक्ष कर संग्रह 25.20 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है जो पिछले साल की तुलना में 12.7 प्रतिशत अधिक है। सरकार का लक्ष्य इस वित्त वर्ष में एसटीटी के जरिये 78,000 करोड़ रुपये जुटाना है। -
न्यूयॉर्क/ नयी दिल्ली. ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान के बंदरगाह चाबहार का संचालन करने वाले लोगों पर इस महीने के अंत से प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। इस फैसले का भारत पर भी असर पड़ेगा जो इस रणनीतिक बंदरगाह पर एक टर्मिनल को विकसित कर रहा है। चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। भारत और ईरान इसे व्यापार एवं संपर्क बढ़ाने के लिए विकसित कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रमुख उप प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने सप्ताह की शुरुआत में जारी एक बयान में कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट देने वाले 2018 के आदेश को रद्द किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम ईरानी शासन को अलग-थलग करने के लिए अधिकतम दबाव डालने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति के अनुरूप है। पिगॉट ने कहा, "अमेरिकी विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान पुनर्निर्माण मदद एवं आर्थिक विकास के लिए ईरान स्वतंत्रता एवं परमाणु प्रसार-रोधी अधिनियम (आईएफसीए) के तहत 2018 में जारी प्रतिबंध छूट को रद्द कर दिया है। यह आदेश 29 सितंबर, 2025 से प्रभावी हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के प्रभावी हो जाने के बाद चाबहार बंदरगाह का संचालन करने वाले या संबंधित गतिविधियों में शामिल लोग प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन के इस निर्णय से भारत भी प्रभावित होगा क्योंकि वह ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह पर एक टर्मिनल के विकास से जुड़ा हुआ है। भारत ने 13 मई, 2024 को इस बंदरगाह के संचालन के लिए 10 वर्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। भारत को इससे मध्य एशिया के साथ व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत ने वर्ष 2003 में ही इस बंदरगाह के विकास का प्रस्ताव रखा था ताकि भारतीय माल के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का एक प्रवेश द्वार मुहैया कराया जा सके। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) नामक एक सड़क और रेल परियोजना बनाई जानी है। करीब 7,200 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई के लिए प्रस्तावित है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबहार बंदरगाह के विकास की रफ्तार काफी धीमी रही। अमेरिका ने 2018 में चाबहार बंदरगाह परियोजना को प्रतिबंधों से छूट दी थी। उस समय कहा गया था कि अफगानिस्तान को गैर-प्रतिबंधित वस्तुओं की आपूर्ति और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के लिए यह छूट जरूरी है। हालांकि अब अमेरिकी प्रशासन की नई नीति के तहत यह छूट समाप्त हो जाएगी।
भारत ने 2023 में चाबहार बंदरगाह का उपयोग अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की सहायता भेजने के लिए किया था। इसके पहले 2021 में इसके जरिये ईरान को पर्यावरण के अनुकूल कीटनाशकों की आपूर्ति भी की गई थी। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बृहस्पतिवार को आर्थिक वृद्धि और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए राजकोषीय अनुशासन की जरूरत बतायी। मल्होत्रा ने राज्यों के वित्त सचिवों के 35वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यों द्वारा व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने और बजट के अलावा अन्य स्रोतों से उधारी में सूझबूझ सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की भी आवश्यकता बतायी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक बयान में कहा कि सम्मेलन का विषय ‘राजकोषीय मजबूती के मार्ग से आर्थिक समृद्धि की ओर' था। गवर्नर ने मुद्रा प्रबंधन, वित्तीय समावेश और एकीकृत ऋण इंटरफेस के क्षेत्रों में किए जा रहे विभिन्न उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और रिजर्व बैंक के बीच सक्रिय समन्वय की भी जरूरत बतायी। बैठक में, अन्य बातों के अलावा, राज्यों द्वारा नकदी प्रबंधन और बाजार उधारी तथा राजकोषीय मजबूती से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की गई। इस सम्मेलन में व्यय विभाग (वित्त मंत्रालय) के सचिव और 28 राज्यों तथा दो केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त सचिवों ने भाग लिया। वित्त मंत्रालय, लेखा महानियंत्रक और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
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नयी दिल्ली. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कंपनियों के लिए पैकेजिंग और मूल्य निर्धारण नियमों में ढील दी। 22 सितंबर से प्रभावी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी के बाद, इसका उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना और उपभोक्ताओं को कम करों का लाभ सुनिश्चित करना है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक परामर्श जारी कर निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को 22 सितंबर से पहले उत्पादित बिना बिके माल पर स्वेच्छा से संशोधित मूल्य स्टिकर लगाने की अनुमति दी है, बशर्ते मूल अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दिखाई दे रहे हों। सरकार ने कहा कि पुनः स्टिकर लगाना वैकल्पिक है और कंपनियों के लिए अनिवार्य नहीं है।
विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के नियम 33 के माध्यम से दी गई छूट के तहत, कंपनियों को अब नियम 18(3) के तहत पहले की तरह दो समाचार पत्रों में संशोधित एमआरपी प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, निर्माताओं और आयातकों को संशोधित मूल्य सूची केवल थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को ही भेजनी होगी, जिसकी प्रतियां केंद्रीय और राज्य विधिक माप विज्ञान अधिकारियों को भेजी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, कंपनियां जीएसटी संशोधन से पहले मुद्रित मौजूदा पैकेजिंग सामग्री का उपयोग 31 मार्च, 2026 तक या स्टॉक समाप्त होने तक, जो भी पहले हो, कर सकती हैं। कंपनियाँ ऐसी पैकेजिंग पर स्टाम्पिंग, स्टिकर या प्रिंटिंग के माध्यम से अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को सही कर सकती हैं। मंत्रालय ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया माध्यमों से डीलर, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को संशोधित जीएसटी दरों के बारे में सक्रिय रूप से सूचित करें। परामर्श में कहा गया, ‘‘यह कदम व्यापार करने में आसानी और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाता है,'' यह सुनिश्चित करते हुए कि उद्योगों पर अत्यधिक बोझ न पड़े और उपभोक्ताओं को जीएसटी कटौती का अपेक्षित लाभ मिले।
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नयी दिल्ली/ देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह वाहनों की कीमत में 22 सितंबर से 1.29 लाख रुपये तक की कटौती करेगी। कंपनी ने कहा कि उसने वाहनों को और अधिक किफायती बनाने के लिए 8.5 प्रतिशत के जीएसटी लाभ के अलावा छोटी कारों की कीमतों में भी कटौती की है। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि शुरुआती स्तर के मॉडल एस प्रेसो की कीमतों में 1,29,600 रुपये तक, ऑल्टो के10 की कीमतों में 1,07,600 रुपये तक, सेलेरियो की कीमतों में 94,100 रुपये तक, वैगन-आर की कीमतों में 79,600 रुपये तक और इग्निस की कीमतों में 71,300 रुपये तक की कमी आएगी। कंपनी की प्रीमियम हैचबैक स्विफ्ट की कीमत 84,600 रुपये तक कम हो जाएगी। इसी तरह बलेनो की कीमत 86,100 रुपये, टूर एस की कीमत 67,200 रुपये, डिजायर की कीमत 87,700 रुपये, फ्रोंक्स की कीमत 1,12,600 रुपये और ब्रेजा की कीमत 1,12,700 रुपये तक कम हो गई है। कंपनी ने बताया कि ग्रैंड विटारा की कीमत 1.07 लाख रुपये, जिम्नी की कीमत 51,900 रुपये, अर्टिगा की कीमत 46,400 रुपये और एक्सएल6 की कीमत 52,000 रुपये तक कम हो गई है। इसी तरह, इनविक्टो की कीमतों में 61,700 रुपये, ईको की कीमत 68,000 रुपये और सुपर कैरी एलसीवी की कीमत 52,100 रुपये तक कम हो जाएगी। मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि कंपनी ने दोपहिया वाहन से चलने वालों को कार लेने में मदद करने के लिए 8.5 प्रतिशत के जीएसटी लाभ के अलावा छोटी कारों की कीमतों में अलग से कमी की है। उन्होंने कहा, ''भारतीय बाजार में कार को अपनाने के लिए इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता। चूंकि भारत में कारों की पहुंच बहुत कम, प्रति 1,000 लोगों पर 34 है, इसलिए यह और भी जरूरी है कि बाजार में अग्रणी होने के नाते हम भारत को गतिमान बनाने के लिए यह पहल कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर की कारों की कीमतों में कटौती से पिछले कुछ वर्षों में बिक्री में आई गिरावट के बाद अब इस खंड को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि हाल ही में लागू किए गए नेक्स्ट जेन जीएसटी सुधारों से पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा। उन्होंने यह बयान कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय भाषा भवन में आयोजित ‘नेक्स्ट जेन जीएसटी’ कार्यक्रम में दिया। वित्त मंत्री ने बताया कि 22 सितंबर से लागू नया जीएसटी अनुपालन खासतौर पर बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। शुरुआत में इसे 10 सितंबर से लागू करने का सुझाव था, लेकिन बाद में महालया और नवरात्रि से इसे लागू किया गया ताकि पूजा के समय इसका सीधा असर लोगों तक पहुंचे।
सीतारमण ने कहा कि बंगाल की विशेष सांस्कृतिक और हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए जीएसटी दरें घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई हैं। इनमें शांतिनिकेतन की चमड़े की वस्तुएं, बांकारा टेराकोटा शिल्प, मधुर्कटी माच, पुरुलिया चौ मुखौटे, दिनाजपुर के लकड़ी के मुखौटे, मालदा के प्रसंस्कृत आम, दार्जिलिंग चाय और जूट बैग्स शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन 11 आइटम्स पर कर में कटौती से कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को सीधा लाभ होगा और उनकी आय बढ़ेगी।वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि जीएसटी की दरों की समीक्षा का मकसद मध्यम वर्ग और किसानों को राहत देना था। एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी इन सुधारों से बड़ा फायदा होगा। उन्होंने भविष्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि आने वाले समय में जीएसटी की एक एकल दर भी संभव है। साथ ही उन्होंने बताया कि हाल ही में जैसलमेर में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर कुछ दरों की समीक्षा की गई ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद कठिनाइयों को दूर कर अनुपालन आसान बनाया जा सके।सीतारमण ने स्पष्ट किया कि जीएसटी काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है और इसके फैसलों में सभी राज्यों की सहमति ली जाती है। उन्होंने बताया कि काउंसिल में एक तिहाई हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है, जबकि दो तिहाई विपक्षी राज्यों की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई राज्यों ने भी स्लैब कटौती और स्वास्थ्य योजनाओं पर कर छूट जैसे मामलों में सरकार का समर्थन किया।उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब 90 प्रतिशत जीएसटी रिफंड स्वतः जारी होगा और केवल 10 प्रतिशत मामलों की जांच की जाएगी, ताकि सही लाभार्थी को राशि मिल सके। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में जीएसटी काउंसिल के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करें। सीतारमण ने जोर देकर कहा कि जीएसटी सुधारों का मुख्य उद्देश्य मध्यम वर्ग, किसानों, एमएसएमई और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश की आर्थिक प्रगति में सहायक होंगे और हर नागरिक को सकारात्मक लाभ मिलेगा। - नयी दिल्ली. वाहन विनिर्माता कंपनी हुंदै मोटर इंडिया ने एक अप्रैल, 2024 से 31 मार्च, 2027 तक की अवधि के लिए अपने कर्मचारियों के वेतन में 31,000 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह दीर्घकालिक वेतन समझौता कंपनी और कर्मचारियों की मान्यता प्राप्त यूनियन यूनाइटेड यूनियन ऑफ हुंदै एम्प्लॉइज (यूयूएचई) के बीच हुआ है। यह समझौता मुख्य रूप से तकनीशियन और मजदूर वर्ग के कर्मचारियों के लिए लागू होगा।हुंदै ने बताया कि यह 31,000 रुपये की वेतन वृद्धि तीन साल में 55 प्रतिशत पहले साल, 25 प्रतिशत दूसरे साल और 20 प्रतिशत तीसरे साल के हिसाब से दी जाएगी। हुंदै मोटर इंडिया के पीपल स्ट्रैटेजी प्रमुख यंगम्यांग पार्क ने कहा, "आपसी विश्वास, सम्मान और सकारात्मक संवाद पर आधारित यह समझौता एक ऐसी प्रगतिशील कार्यस्थल संस्कृति को बढ़ावा देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो कर्मचारियों के कल्याण को प्राथमिकता देती है और संगठन के दीर्घकालिक विकास को सशक्त बनाती है।"
- नयी दिल्ली. एयर कंडीशनर (एसी) बनाने वाली कंपनियों और डीलरों ने अगले हफ्ते से लागू होने वाली कम जीएसटी दरों के कारण एसी की बुकिंग शुरू कर दी है। कंपनियों को उम्मीद है कि कीमतों में कटौती के बाद ग्राहकों की मांग में तेजी आएगी। रूम एयर कंडीशनर बनाने वाली कंपनियों ने कहा है कि वे जीएसटी में 10 प्रतिशत की पूरी कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं और इससे ग्राहक, मॉडल के हिसाब से प्रति यूनिट 4,000 रुपये तक की बचत कर पाएंगे। इसी महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया।अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता वस्तुओं के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान पर दरें कम की गयी हैं। एयर कंडीशनर पर वर्तमान में 28 प्रतिशत कर लगता है।22 सितंबर को नवरात्रि के पहले दिन नई दरें लागू होने के बाद इस पर 18 प्रतिशत कर लगेगा। ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी त्यागराजन ने कहा, "ग्राहक अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हमारे डीलर बुकिंग ले रहे हैं और 22 सितंबर को, जब नई जीएसटी दरें लागू होंगी, तब बिलिंग करेंगे।" हायर ने एक रुपये की टोकन राशि से एसी की बुकिंग शुरू की है। इसके ऑफर में कुछ पेमेंट मोड पर 10 प्रतिशत तक कैशबैक, इन्वर्टर स्प्लिट एसी पर मुफ्त इंस्टॉलेशन, गैस चार्जिंग के साथ पांच साल की वारंटी और आसान ईएमआई विकल्प शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि एसी की बुकिंग 10 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक जारी रहेगी, जबकि खरीदारी 22 सितंबर से 30 सितंबर 2025 के बीच की जा सकती है। हायर ने अपने 1.6 टन 5-स्टार एसी की कीमत 3,905 रुपये और 1.0 टन 3-स्टार एसी की कीमत 2,577 रुपये तक कम कर दी है। हायर अप्लायंसेज इंडिया के अध्यक्ष एन एस सतीश ने कहा, "जीएसटी दरों में कमी एक सही समय पर उठाया गया दूरदर्शी कदम है, जो पूरे भारत में चीजों को किफायती बनाएगा और ग्राहकों के बीच उत्साह बढ़ाएगा।" गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेज व्यवसाय के प्रमुख कमल नंदी ने कहा कि कुछ डीलर अपने स्तर पर बुकिंग कर रहे हैं, लेकिन कंपनी अभी ऐसा नहीं कर रही है। हालांकि, कंपनी नई एमआरपी स्टिकर लगाने में मदद कर रही है, जो 22 सितंबर के बाद एसी पर लागू होंगी।
- भिलाई । पूर्वोत्तर भारत की जीवनरेखा मानी जा रही बैराबी–सैरांग रेल परियोजना शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित कर दी गई। इस 51 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग के निर्माण में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने बड़ा योगदान दिया है। कंपनी ने इस परियोजना के लिए करीब 15 हज़ार मीट्रिक टन इस्पात उपलब्ध कराया। इसमें सबसे अहम भूमिका निभाई सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र ने, जिसने लगभग 10 हज़ार टन उच्च गुणवत्ता वाले R-260 प्राइम रेल की आपूर्ति की। वहीं, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर और बर्नपुर संयंत्रों से करीब 5 हज़ार टन प्लेट्स, टीएमटी बार और स्ट्रक्चरल स्टील भेजे गए।विशेषज्ञों का मानना है कि इस रेल परियोजना से न केवल मिजोरम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में संपर्क और व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे। स्थानीय लोगों के लिए यह रोज़गार, व्यवसाय और आवागमन को आसान बनाएगी। सेल ने बयान में कहा, “बैराबी–सैरांग रेल परियोजना भारत की हर कोने को जोड़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हमें गर्व है कि देश की इस महत्त्वपूर्ण परियोजना में हमारा इस्पात इस्तेमाल हुआ।” यह पहली बार नहीं है जब सेल ने देश की बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं में अपनी अहमियत दर्ज कराई हो। इससे पहले कंपनी का इस्पात चेनाब रेलवे ब्रिज, अटल टनल, बांद्रा–वर्ली सी लिंक, ढोला-सादिया और बोगीबील ब्रिज जैसी कई ऐतिहासिक परियोजनाओं में इस्तेमाल हो चुका है। पूर्वोत्तर भारत में लगातार जारी विकास कार्यों में सेल की भूमिका लगातार मज़बूत हो रही है — चाहे बात हो रेलवे की, पावर प्रोजेक्ट्स की या सीमा क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों की।
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नयी दिल्ली. कॉस्मिक ऑरेंज रंग वाले एप्पल के आईफोन प्रो मैक्स-17 की मांग में भारी उछाल आया है। कंपनी के कर्मचारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अमेरिका और भारत में कंपनी के आधिकारिक स्टोर पर इस उपकरण को लेने के लिए बुकिंग शुरू होने के तीन दिन के भीतर ही ‘यह आउट ऑफ स्टॉक' हो गया है। एप्पल इंडिया वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में पूरी आईफोन प्रो मैक्स श्रृंखला एप्पल स्टोर्स पर पिक-अप विकल्प के साथ पूर्व-ऑर्डर के साथ उपलब्ध नहीं है। कॉस्मिक ऑरेंज उपकरण भारत में आईफोन प्रो मैक्स और आईफोन प्रो श्रृंखला दोनों में स्टोर पर पिक-अप विकल्प के साथ प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध नहीं थे। एक एप्पल विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में पहले से ऑर्डर मिलने के कारण, सभी कॉस्मिक ऑरेंज आईफोन 17 प्रो मैक्स बहुत तेजी से बिक रहे हैं, जिसके कारण ये किसी भी स्टोरेज संस्करण में उपलब्ध नहीं हैं।'' अधिकारी ने बताया कि गहरे नीले रंग में यह उपकरण कुछ स्टोर पर उपलब्ध है।
विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘मुझे असुविधा के लिए सचमुच खेद है, लेकिन बैक-एंड टीम जल्द से जल्द नारंगी रंग के उत्पाद फिर से उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश कर रही है।'' इस बारे में एप्पल को भेजे गए ई-मेल का कोई जवाब नहीं मिला।
एप्पल ने आईफोन 17 श्रृंखला को 82,900 रुपये से 2,29,900 रुपये की कीमत में पेश किया है, जो भारत में 19 सितंबर से उन ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा जिन्होंने पहले से इसका ऑर्डर बुक कर लिया है। विशेषज्ञ के अनुसार, कुछ स्टोर पर 19 सितंबर को सीमित उपकरण भी उपलब्ध होंगे, जिन्हें बिना पूर्व-ऑर्डर के भी लिया जा सकता है, लेकिन ये ‘पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर दिए जाएंगे। इन उपकरणों के लिए ऑर्डर 12 सितंबर को शुरू हुए थे।
‘आउट ऑफ स्टॉक' उपकरण खरीदने के इच्छुक उपभोक्ता बुकिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन उपकरण सात अक्टूबर के बाद उनके पते पर पहुंचा दिए जाएंगे। भारत में, एप्पल इंडिया वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15 सितंबर तक एप्पल स्टोर पर आईफोन प्रो मैक्स उपकरणों की पूरी श्रृंखला उपलब्ध नहीं थी। अमेरिका में, आईफोन 17 श्रृंखला की कीमत 799 अमेरिकी डॉलर (लगभग 70,370 रुपये) से 1,999 अमेरिकी डॉलर (1.76 लाख रुपये) के बीच है। ताइवानी इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज फॉक्सकॉन आईफोन की सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसके विनिर्माण संयंत्र चीन और भारत में हैं। भारत में उत्पादित सभी आईफोन अमेरिकी बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भेजे जाते हैं।
कंपनी ने हाल ही में बेंगलुरु स्थित अपनी दूसरी सबसे बड़ी विनिर्माण इकाई में आईफोन 17 श्रृंखला का उत्पादन शुरू किया है, जो चीन द्वारा लगाए गए अनौपचारिक प्रतिबंधों के तहत संचालित हो रही है। कई सूत्रों के अनुसार, एप्पल इस वर्ष आईफोन उत्पादन को 2024-25 के लगभग 3.5-चार करोड़ इकाई से बढ़ाकर छह करोड़ इकाई करने की योजना बना रही है। 31 मार्च, 2025 को समाप्त वर्ष में एप्पल ने भारत में 60 प्रतिशत अधिक आईफोन असेंबल किए, जिनकी अनुमानित कीमत 22 अरब अमेरिकी डॉलर है। एसएंडपी ग्लोबल के एक विश्लेषण में कहा गया है कि 2024 में अमेरिका में आईफोन की बिक्री 7.59 करोड़ इकाई थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, चीन, भारत में आईफोन उत्पादन के विस्तार के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं, कुशल जनशक्ति आदि की आपूर्ति को अनौपचारिक रूप से प्रतिबंधित कर रहा है। 2025 की पहली छमाही में भारत में एप्पल की आपूर्ति सालाना 21.5 प्रतिशत बढ़कर 5.9 करोड़ इकाई हो गई। इस अवधि के दौरान आईफोन 16 देश भर में सबसे अधिक भेजा जाने वाला मॉडल रहा। दूसरी तिमाही के दौरान, भारत में एप्पल के आईफोन की आपूर्ति जून, 2025 की तिमाही में साल-दर-साल 19.7 प्रतिशत बढ़ी, जिससे देश के स्मार्टफोन बाजार में इसकी हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत हो गई।
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नयी दिल्ली. कमजोर अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीदों के बीच मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 1,800 रुपये उछलकर 1,15,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, इसके अलावा 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,800 रुपये बढ़कर 1,14,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गयी। स्थानीय सर्राफा बाजार में, पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 500-500 रुपये गिरकर क्रमशः 1,13,300 रुपये और 1,12,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘कमजोरर डॉलर और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर कटौती की बढ़ती उम्मीदों के चलते मंगलवार को सोना एक और रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। डॉलर सूचकांक दस हफ्तों के निचले स्तर पर आ गया है, जिससे कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी को बल मिल रहा है।'' इसके अलावा, मंगलवार को चांदी 570 रुपये चढ़कर 1,32,870 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। सोमवार को चांदी 1,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। गांधी ने कहा, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व पर एफओएमसी (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी) बैठक में ब्याज दरों में बड़ी कटौती लागू करने के बढ़ते दबाव से इस तेजी को और बढ़ावा मिला है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हाल में रोजगार के कमजोर आंकड़ों और राष्ट्रपति ट्रंप के प्रभाव को देखते हुए, कारोबारियों ने फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में और अधिक आक्रामक कटौती की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।'' इस बीच, छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.28 प्रतिशत टूटकर 97.03 पर रहा। इससे सर्राफा कीमतों को और बल मिला। एलकेपी सिक्योरिटीज़ के उपाध्यक्ष (शोध विश्लेषक...जिंस और मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘कारोबारी लंबी अवधि के सौदे खरीदे हुए हैं, जिसके प्रमुख कारण फेडरल रिजर्व का अपेक्षित नरम रुख और अमेरिका, भारत और चीन के बीच चल रहे व्यापार समझौतों से जुड़े घटनाक्रम हैं।'' विदेशी बाजारों में, हाजिर सोना 3,698.94 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गया। हाजिर चांदी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 42.72 डॉलर प्रति औंस पर रही।
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नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे हाल ही में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में किए गए संशोधन के कारण मिलने वाली छूट को प्रमुखता से प्रदर्शित करें और उसका विज्ञापन करें। भारतीय खुदरा विक्रेता संघ को भेजे एक पत्र में, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने कहा कि खुदरा विक्रेताओं को रसीद/बिल में जीएसटी में कमी को जीएसटी छूट के रूप में दर्शाना चाहिए और उच्च प्रभाव वाले उत्पादों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डीपीआईआईटी ने कहा, ‘‘अपने नेटवर्क के माध्यम से वे ‘जीएसटी के कारण छूट' को प्रमुखता से प्रदर्शित करें और उसका विज्ञापन करें। उदाहरण के लिए - अपने खुदरा नेटवर्क के माध्यम से पोस्टर/फ्लायर्स और विज्ञापन (प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन) के माध्यम से ऐसा किया जाना चाहिए।'' विभाग ने यह भी सुझाव दिया है कि इस त्योहारी सीजन के दौरान बिक्री के आंकड़ों पर नजर रखी जाए और विभिन्न माध्यमों से इसकी जानकारी दी जाए। 22 सितंबर को नवरात्रि के पहले दिन से जीएसटी में बदलाव लागू होने पर साबुन से लेकर कार, शैंपू से लेकर ट्रैक्टर और एयर कंडीशनर तक, लगभग 400 उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। 22 सितंबर से, जीएसटी स्लैब संरचना बदल जाएगी। आम इस्तेमाल की वस्तुओं पर पांच प्रतिशत और बाकी सभी उत्पादों पर 18 प्रतिशत कर लगेगा। 12 और 28 प्रतिशत की मौजूदा स्लैब को हटा दिया गया है। नए जीएसटी ढांचे में ज़्यादातर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें और किराना सामान पांच प्रतिशत जीएसटी स्लैब में आ जाएंगे, जबकि ब्रेड, दूध और पनीर पर कोई कर नहीं लगेगा।
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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। बाजार के ज्यादातर सूचकांकों में बढ़त देखी गई। दिन के अंत में सेंसेक्स 594.95 अंक या 0.73 प्रतिशत की मजबूती के साथ 82,380.69 और निफ्टी 169.90 अंक या 0.68 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,239.10 पर था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी का रुझान देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 313.45 अंक या 0.54 प्रतिशत की तेजी के साथ 58,799.55 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 171.35 अंक या 0.95 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,298.35 पर था।बाजार की तेजी का नेतृत्व ऑटो शेयरों ने दिया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी रियल्टी (1.07 प्रतिशत), निफ्टी आईटी (0.86 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (0.89 प्रतिशत) और निफ्टी इन्फ्रा (1.02 प्रतिशत) की तेजी का साथ बंद हुआ।सेंसेक्स पैक में कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, एमएंडएम, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल (जोमैटो), एचसीएल टेक, एनटीपीसी, बीईएल, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स और एसबीआई टॉप गेनर्स थे। बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। बाजार के जानकारों ने कहा कि सकारात्मक वैश्विक संकेतों के साथ अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद ने बाजार की रिकवरी में मदद की। वहीं, भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड वार्ता शुरू होने का निवेशकों की धारण पर सकारात्मक असर हुआ है। जीएसटी सुधारों के कारण ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर ने रिकवरी को लीड किया।जानकारों ने आगे कहा कि आने वाले समय निवेशकों का फोकस भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता और घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े आकंड़ों पर होगा। भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई थी। सुबह 9:24 पर सेंसेक्स 195 अंक या 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,981 और निफ्टी 48 अंक या 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ 25,116 पर था।
- नयी दिल्ली.।केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि सरकार अगले पांच साल में भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में शीर्ष पर पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय मूल्य शिखर सम्मेलन 2025' का उद्घाटन करते हुए कहा कि वाहन क्षेत्र सरकार को सबसे अधिक जीएसटी राजस्व देता है और रोजगार के अवसर पैदा करता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य पांच साल के भीतर भारत के वाहन उद्योग को दुनिया में शीर्ष स्थान वाला बनाना है।'' गडकरी ने बताया कि देश में दुनिया की सभी बड़ी वाहन कंपनियां मौजूद हैं।उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था। अब भारतीय वाहन उद्योग का आकार 22 लाख करोड़ रुपये है।'' इस समय अमेरिकी वाहन उद्योग का आकार 78 लाख करोड़ रुपये है। उसके बाद चीन (47 लाख करोड़ रुपये) और भारत (22 लाख करोड़ रुपये) का स्थान है। मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अच्छा बुनियादी ढांचा विकसित करना होगा।''
- नयी दिल्ली। खाद्य पदार्थों और विनिर्मित वस्तुओं के दाम में मामूली वृद्धि के कारण थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) अगस्त में चार महीने के उच्चतम स्तर 0.52 प्रतिशत पर रही। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।मुद्रास्फीति दो महीने बाद एक बार फिर सकारात्मक क्षेत्र में लौट आई है। हालांकि, इस दौरान ईंधन और बिजली क्षेत्र में नरमी देखी गई। डब्ल्यूपीआई आधारित मुद्रास्फीति जुलाई और जून में क्रमशः शून्य से 0.58 प्रतिशत नीचे और शून्य से 0.19 प्रतिशत नीचे रही थी। पिछले साल अगस्त में यह 1.25 प्रतिशत के स्तर पर थी। उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘अगस्त, 2025 में मुद्रास्फीति की सकारात्मक दर मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, गैर-खाद्य पदार्थों, विनिर्माण क्षेत्र, गैर-धात्विक खनिज उत्पादों और परिवहन उपकरणों की कीमतों में वृद्धि के चलते हुई।'' डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खाद्य पदार्थों की महंगाई में 3.06 प्रतिशत की कमी आई, जबकि जुलाई में इसके दाम 6.29 प्रतिशत घटे थे। इस दौरान सब्जियों की कीमतों में तेजी देखी गई। विनिर्मित उत्पादों के मामले में मुद्रास्फीति अगस्त में 2.55 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 2.05 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली क्षेत्र में अगस्त में महंगाई में 3.17 प्रतिशत की कमी आई, जबकि जुलाई में यह 2.43 प्रतिशत थी। आलू और प्याज के दाम अगस्त में 44.11 प्रतिशत और 50.46 प्रतिशत घटे, जबकि जुलाई में इनकी कीमतों में क्रमशः 41.26 प्रतिशत और 44.38 प्रतिशत की गिरावट आई थी। बार्कलेज ने कहा कि खाद्य थोक मूल्य सूचकांक में कम महंगाई और उच्च मुख्य मुद्रास्फीति ने अगस्त में ईंधन कीमतों में आई गिरावट की भरपाई कर दी है। वित्त सेवा फर्म ने आने वाले महीनों में थोक मूल्य सूचकांक में मामूली वृद्धि का अनुमान जताया है।उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि विनिर्मित उत्पादों में वनस्पति और पशु तेल एवं वसा, वस्त्र, तथा रबड़ एवं प्लास्टिक उत्पाद महंगे हुए, जिसका प्रभाव उत्पादन लागत पर कुछ समय बाद दिखाई दे सकता है। इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि ईंधन और बिजली को छोड़कर, सभी क्षेत्रों में कीमतों में व्यापक वृद्धि देखी गई है। इक्रा को उम्मीद है कि सितंबर, 2025 में मुख्य थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) छह महीने के उच्चतम स्तर 0.9 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
- नयी दिल्ली.। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को ऐसे नियामकीय उपायों की जरूरत पर जोर दिया, जो तकनीकी नवोन्मेषण, विशेष रूप से कृत्रिम मेधा (एआई) को जिम्मेदारी के साथ बढ़ावा दें, न कि उसे हतोत्साहित करें। उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट ‘विकसित भारत के लिए एआई: तेज आर्थिक वृद्धि के अवसर' जारी करते हुए यह बात कही। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार न केवल एआई प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में उनका जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसे नियामकीय उपाय नहीं चाहते हैं, जो सचमुच तकनीक को ही खत्म कर दें। हम ऐसे नियमन चाहते हैं जो जिम्मेदार अनुप्रयोग को बढ़ावा दें।'' उन्होंने कहा, ‘‘एआई तेजी से बढ़ रही हमारे वक्त की सच्चाई है। इसलिए हम सभी को सचेत रहना होगा कि हम नैतिकता से पीछे न हटें, क्योंकि एआई की अपनी चुनौतियां भी हो सकती हैं।'' सीतारमण ने आगे कहा कि चुनौतियां सिर्फ नौकरियों में ही नहीं हैं, बल्कि इस बात को लेकर भी हैं कि इनका दुरुपयोग कैसे रोका जाए। रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक ओर एआई कई नई भूमिकाएं तैयार करेगा, वहीं दूसरी ओर यह कई मौजूदा नौकरियों को भी विस्थापित भी करेगा। विशेष रूप से लिपिकीय और निम्न कौशल वाले क्षेत्रों में ऐसा होगा। उन्होंने एक संतुलित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि आवश्यक निगरानी सुनिश्चित करते हुए नवाचार को बढ़ावा देना है। इससे बहुत अधिक नियमन को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक ऐसा देश है, जो किसी भी आने वाली अच्छी चीज को समझ सकता है, लेकिन कोई भी अच्छाई पूरी तरह अच्छी नहीं होती। कोई भी अच्छाई बिना शर्त नहीं होती। हमें इसका इस तरह इस्तेमाल करना चाहिए कि यह आम आदमी के हित में हो।'' उन्होंने कहा कि एआई एक ऐसी चीज है, जिसे हमें अपने काबू में रखना आना चाहिए और इसे आम आदमी की भलाई के लिए काम करना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि एआई तेजी से प्रगति कर रहा है और इसलिए हम सभी को सचेत रहना होगा कि हम नैतिकता से पीछे न हटें। उन्होंने कहा कि अगर प्रौद्योगिकी तेजी से आगे बढ़ रही है, तो नियमन भी तेजी से होना चाहिए।सीतारमण ने कहा कि एआई मौजूदा शहरी क्षेत्रों को बेहतर बनाने और नए शहरी केंद्रों की योजना बनाने के लिए समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत के सभी जिलों में एआई-समर्थित प्रौद्योगिकी को अपनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहूंगी कि सभी जिले नवाचार और वृद्धि की कहानी बनकर उभरें।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में एआई और इससे जुड़े मामलों में तेजी आई है और नीति आयोग इस संबंध में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।



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