विघ्नहर्ता से मिलने मायके आईं महालक्ष्मी
0- महाराष्ट्रीयन परिवारों में तीन दिवसीय उत्सव- पूजा के बाद दी गई भावभीनी विदाई
रायपुर। महाराष्ट्रीयन परिवारों में रविवार को महालक्ष्मी की स्थापना की गई। उसके बाद तीन दिवसीय उत्सव का माहौल रहा। माना जाता है कि महालक्ष्मी, ज्येष्ठा और कनिष्ठा साल में एक बार अपने मायके आतीं हैं। इस दौरान वे विघ्नहर्ता से मुलाकात भी करती हैं। उत्सव को लेकर सप्ताह भर पहले से तैयारियां शुरू हो जाती है।
मंडल के सचिव और आचार्य चेतन गोविंद दंडवते ने बताया महाराष्ट्रीय पंचाग के अनुसार भाद्रपद में ज्येष्ठ गौरी पूजा का विशेष महत्व है। प्रथम दिन महालक्ष्मी का आह्वान कर उन्हें आमंत्रित किया गया। ढोल- ताशे की ध्वनि के साथ जब महालक्ष्मी घर आईं, तो पूरा घर उन्हें दिखाया गया। पश्चात एक स्थान पर आसन दिया गया। जहां पूजा पाठ कर उन्हें विराजित किया गया। महालक्ष्मी के दूसरे महाप्रसादी का आयोजन किया गया। बहुत से ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने महाप्रसादी का आयोजन तीसरे दिन भी किया। इसी दिन हल्दी-कुंकू के बाद महालक्ष्मी को विदाई दी गई। ऐसे समय उनकी सेवा में जुटे भक्तों का मन भारी और आंखें उनकी विदाई के समय नम हो गईं।





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