कोरबा में दशकों बाद हुआ अनिकेत... जैसा नाटक
0- महाराष्ट्र मंडल रायपुर के नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ के प्रभावी मंचन के दीवाने हुए रंगमंच प्रेमी
रायपुर। 'जिस तरह कपड़े बदले जाते हैं, उसी तरह मैंने अपना शरीर बदला, मेरी आत्मा, मेरी बुद्धि, मेरा ह्रदय चीख-चीखकर कह रहे हैं यूअर आनर, मैं अनिकेत हूं, मैं अनिकेत हूं और मैं ही अनिकेत हूं.....' डबडबाई आंखों से रोते... बिलखते, चीखते अनिकेत का यह कृंदन सुनकर राजीव गांधी ऑडिटोरियम में चंद सेंकड सन्नाटा छाया रहा। उसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सैंकड़ों रंगप्रेमी दर्शकों ने खड़े होकर नाटक को जो प्रतिसाद दिया, वह कोरबा के इतिहास में दर्ज हो गया।
बात हो रही हैं रोटरी क्लब कोरबा और महाराष्ट्र मंडल कोरबा के संयुक्त आयोजन और महाराष्ट्र मंडल रायपुर की प्रस्तुति 'मैं अनिकेत हूं' के अभूतपूर्व व अविस्मरणीय मंचन की। नाटक की समाप्ति पर तालियां बजाते दर्शकों को बिठाने के लिए उद्घोषक को बार-बार आग्रह करना पड़ रहा था। साथ ही नाटक समाप्ति व पात्र परिचय के बाद बड़ी संख्या में रंगप्रेमी दर्शक मंच पर आ गए और काफी समय तक नाटक के एक- एक कलाकार से मिलते और उन्हें बधाई देकर सेल्फी लेते रहे।
‘मैं अनिकेत हूं’ के सफलतम पांचवें मंचन का भी पूरा श्रेय निर्देशक और अनिकेत के केंद्रीय पात्र को जीवंत करने वाले शशि वरवंडकर को जाता है। हमेशा की तरह वे अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों के मानस पटल पर मैं अनिकेत या शशिकांत जाधव का सवाल छोड़ जाते हैं। उनकी पत्नी मीनाक्षी शर्मा की भूमिका में वरिष्ठ कलाकार अनुराधा दुबे, जज के रोल में दिलीप लांबे, आक्रामक वकील भारद्वाज की दमदार किरदार में चेतन दंडवते शुरू से अंतिम दृश्य तक छाए रहे। गवाहों में प्रकाश खांडेकर, रंजन मोड़क, रविंद्र ठेंगड़ी, भारती पलसोदकर, समीर टुल्लू, श्याम सुंदर खंगन और डा. शुचिता देशमुख ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया। पहली बार रंगमंच पर उतरीं सुमीता रायजादा ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। विनोद राखुंडे और पंकज सराफ भी मंच पर छाए रहे। पर्दे के पीछे अजय पोतदार, प्रवीण क्षीरसागर, प्रकाश गुरव और भूपेंद्र साहू की भागीदारी सराहनीय रही।
इस मौके पर कोरबा नगर निगम के सभापति नूतन सिंह राजपूत, भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी, रेडक्रास सोसायटी के वरिष्ठ सदस्य रामसिंह अग्रवाल, सीएसपीडीसीएल के प्रमुख कंसल सहित अनेक वक्ताओं ने कहा कि कोरबा में आज तक उन्होंने ऐसा प्रभावशाली व यादगार नाटक नहीं देखा था। इस नाटक ने बरसों से सूने पड़े कोरबा के रंगमंच के लिए संभावनाएं जगाईं हैं। उन्हें विश्वास है कि यहां के स्थानीय कलाकार इस नाटक से प्रेरित होकर रंगमंच की दुनिया में लौटेंगें और उसे रोशन करेंगे।
आयोजक रोटरी क्लब कोरबा के अध्यक्ष पारस जैन और महाराष्ट्र मंडल कोरबा के अध्यक्ष हेमंत माउलीकर ने कहा कि रोटरी क्लब के पूर्व गर्वनर और वरिष्ठ रंगसाधक शशि वरवंडकर के आग्रह पर, आपसी तालमेल और तकरीबन दो दर्जन स्थानीय प्रायोजकों के सहयोग से ‘मैं अनिकेत हूं’ का सफल मंचन हो पाया। इस मंचन से हमें अपने स्तर पर स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने का मौका तो मिलेगा ही, साथ ही हमारा प्रयास होगा कि इसी तरह आपसी तालमेल के साथ हम अगले साल भी महाराष्ट्र मंडल रायपुर की इसी टीम को अन्य नाटक के मंचन के लिए आमंत्रित कर सकें।














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