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 भविष्य के लिए जल संरक्षण और स्वच्छता पर कलेक्टर का जोर, उद्योगों से किया ठोस पहल का आह्वान

 -भविष्य के लिए जल संरक्षण और स्वच्छता पर कलेक्टर का जोर, उद्योगों से किया ठोस पहल का आह्वान

 -जल संकट से बचाव के लिए अभी से तैयारी जरूरी : कलेक्टर संजय अग्रवाल
-बिलासपुर में जल संरक्षण और एस डब्ल्यू एम रूल्स 2026 पर मंथन, उद्योगों और पंचायतों को दिए अहम निर्देश
  बिलासपुर /कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिले में बढ़ते जल संकट की आशंका को देखते हुए जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर गंभीर पहल करने की अपील की है। उन्होंने उद्योगों, पंचायतों और नगरीय निकायों से वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष जोर दिया।
           कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिला पंचायत सभाकक्ष में जिले के नगरीय एवं ग्राम पंचायत क्षेत्रों में चिन्हित समस्त औद्योगिक इकाइयों की बैठक लेकर भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की। बैठक में जलशक्ति मंत्रालय से संबद्ध विशेषज्ञ सुदीप्त मोहन शर्मा और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल भी उपस्थित थे। कलेक्टर ने बैठक में उद्योग प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि महात्मा गांधी नरेगा एवं अन्य विभागीय योजनाओं के अभिसरण से चेक डैम और जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर ने कहा कि वर्तमान में जल संकट की स्थिति को देखते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्री-मानसून अवधि में नदियों एवं जल स्रोतों में जल स्तर घटने के कारण कई स्थानों पर सूखे जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे नए बोर खनन पर रोक लगानी पड़ती है।
        बैठक में जल संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों जैसे रिचार्ज पिट, पोखरा गहरीकरण, चेक डैम, स्टॉप डैम, बोल्डर बंधान तथा तालाब निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि इन कार्यों से लगभग 40 मीटर तक जल रिचार्ज संभव होता है, जबकि गहरे इंजेक्शन बोरवेल 200 मीटर तक भूजल स्तर को रिचार्ज करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने उद्योगों से अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित करने और परिसर के आसपास फ्रैक्चर जोन में पर्याप्त जल संरक्षण कार्य कराने को कहा। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
         कलेक्टर ने औद्योगिक क्षेत्रों में जल मापन हेतु पीजीओमीटर अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश भी दिए, जिससे भूजल स्तर और जल उपयोगिता की वास्तविक जानकारी प्राप्त हो सके और उसके आधार पर जल संरक्षण संबंधी योजनाएं बनाई जा सकें। बैठक में भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय से जुड़े विशेषज्ञ श्री सुदीप्त मोहन शर्मा ने भी जल संरक्षण संबंधी प्रयासों की सराहना करते हुए भू-जल एवं वर्षा जल के वैज्ञानिक उपयोग पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत लागू किए जा रहे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन रूल्स 2026 की जानकारी भी दी गई।अधिकारियों ने बताया कि नियमों के तहत घर-घर कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, खाद निर्माण, रीसाइक्लिंग तथा एमआरएफ सेंटर विकसित करने जैसे कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही प्लास्टिक और अन्य विशेष कचरे के पृथक प्रबंधन तथा स्वच्छता जन जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में जिला पंचायत, जनपद पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, उद्योग विभाग तथा विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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