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 भटकाव से भरोसे तक: प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली पूर्व नक्सली सुदु कड़ती की जिंदगी

-कभी जंगलों में भटकते थे, आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ जी रहे हैं सम्मान और सुरक्षा का जीवन
 रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक प्रमुख कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवास विहीन और कच्चे या जीर्ण-शीर्ण मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराना है। पक्का मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते (DBT)  में दी जाती है।
  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पुनर्वास और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। बीजापुर जिले के ग्राम फूलगट्टा निवासी श्री सुदु कड़ती इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं। कभी नक्सली संगठन से जुड़े सुदु कड़ती आज प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की बदौलत अपने पक्के घर में परिवार के साथ सम्मान और सुरक्षा का जीवन जी रहे हैं।
  सुदु कड़ती एक साधारण आदिवासी परिवार से हैं। क्षेत्र में लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के प्रभाव, सीमित संसाधनों, शिक्षा और रोजगार के अभाव तथा नक्सलियों के दबाव के कारण वर्ष 2017 में वे नक्सली संगठन से जुड़ गए। शुरुआत में उन्हें यही रास्ता सही लगा, लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। जंगलों का जीवन भय, असुरक्षा और अनिश्चितता से भरा था। परिवार से दूर रहने का दर्द भी उन्हें लगातार परेशान करता रहा।
  जब उन्होंने देखा कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है, तब उन्होंने वर्ष 2022 में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला साबित हुआ।
  मुख्यधारा में लौटने के बाद भी उनके सामने कई चुनौतियां थीं। उनके पास न अपना घर था और न ही स्थायी आजीविका का साधन। शासन ने उनके आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए और उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। जब घर का निर्माण शुरू हुआ, तब उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि अब उनका भी समाज में सम्मानजनक स्थान है। वर्षों तक अस्थायी जीवन जीने वाले सुदु के लिए अपने नाम का पक्का घर किसी सपने के साकार होने जैसा था।
 आज सुदु कड़ती अपने पक्के घर में परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब वे चाहते हैं कि उनके बच्चे शिक्षा प्राप्त करें, आगे बढ़ें और सम्मान के साथ अपना जीवन बनाएं।
  भावुक होकर सुदु कड़ती कहते हैं कि जंगल में हर दिन डर और अनिश्चितता के बीच गुजरता था। परिवार से दूर रहने का दर्द हमेशा रहता था। आत्मसमर्पण के बाद लगा कि जिंदगी बदल सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना से अपना घर मिलने के बाद पहली बार महसूस हुआ कि समाज में मेरी भी पहचान है। अब मेरा सपना है कि मेरे बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं और सम्मान के साथ अपना भविष्य बनाएं।
  सुदु कड़ती की कहानी यह साबित करती है कि विश्वास, पुनर्वास और शासकीय योजनाओं का लाभ किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उन्हें केवल एक पक्का घर ही नहीं दिया, बल्कि सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद भी दी। यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो भटकाव छोड़कर विकास और सम्मान का रास्ता चुनना चाहते हैं।

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