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एआई-निर्भर कार्यबल बनकर रह सकता है भारत

-सिर्फ 23 प्रतिशत युवा एआई-नेटिव: नैसकॉम
नयी दिल्ली.
आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम ने मंगलवार को आगाह किया कि अगर उद्योग और अकादमिक जगत बुनियादी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को बनाए रखने में नाकाम रहते हैं, तो भारत में प्रौद्योगिकी कार्यबल 'एआई-नेटिव' होने के बजाय केवल 'एआई-निर्भर' बनकर रह सकता है। एआई-नेटिव व्यक्ति कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल करने के साथ अपनी समझ से भी काम करता है, जबकि एआई-निर्भर व्यक्ति हर काम के लिए एआई पर ही निर्भर रहता है। नैसकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 90 प्रतिशत से अधिक शुरुआती करियर वाले प्रौद्योगिकी पेशेवर पहले से ही एआई को अपना रहे हैं। हालांकि, संगठन ने इस बात को लेकर आगाह किया कि रोजमर्रा के कोडिंग कार्यों में गिरावट आने से मूलभूत तकनीकी कौशल में कमी नहीं आनी चाहिए। नैसकॉम की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य रणनीति अधिकारी संगीता गुप्ता ने कहा, "भारत के पास एआई-नेटिव प्रौद्योगिकी प्रतिभा का वैश्विक केंद्र बनने का अनूठा अवसर है। लेकिन एआई कौशल का प्रसार और एआई-नेटिव होना अलग-अलग बातें हैं। यदि सावधानी नहीं बरती गई, तो कार्यबल एआई-नेटिव होने के बजाय एआई-निर्भर बनकर रह सकता है।" नैसकॉम ने 'भारत में एआई-नेटिव प्रतिभा की स्थिति' शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में करियर के शुरुआती दौर वाले युवा प्रौद्योगिकी पेशेवरों और अंतिम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्रों की एआई क्षमताओं का आकलन किया है। अध्ययन रिपोर्ट कहती है कि भारत के लगभग दो-तिहाई युवा कार्यबल को 'एआई-प्रवीण' माना जा सकता है, लेकिन केवल 23 प्रतिशत ही 'एआई-नेटिव' की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग निर्णय क्षमता और तकनीकी गहराई को मजबूत कर इस प्रतिभा आधार को और विकसित करने की पर्याप्त गुंजाइश है। रिपोर्ट में यह पाया गया कि एआई उत्पादकता और सीखने की गति को बढ़ाता है, लेकिन यह उन नियमित कार्यों को भी स्वचालित कर रहा है जिनके माध्यम से कनिष्ठ इंजीनियर अपनी बुनियादी समझ विकसित करते थे। ऐसे में कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को इंजीनियरों में स्वतंत्र निर्णय क्षमता और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के लिए नए अवसर सृजित करने होंगे। नैसकॉम ने सुझाव दिया कि अकादमिक जगत को पारंपरिक कोडिंग शिक्षा से आगे बढ़कर इंजीनियरिंग समझ, विषय-विशेष ज्ञान और मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव करना होगा। वहीं, उद्योग को भर्ती, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के ढांचे को इस तरह बनाना होगा कि करियर के शुरुआती दौर वाले पेशेवरों में बुनियादी क्षमताएं मजबूत हों और स्वतंत्र समस्या समाधान को बढ़ावा मिले। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी उद्योग को अपनी स्थापित कार्यप्रणालियों पर भी नए सिरे से गौर करना होगा। भर्ती प्रक्रिया में केवल बुनियादी कोडिंग के बजाय एआई-नेटिव क्षमताओं का आकलन किया जाना चाहिए, जबकि प्रशिक्षण में एआई-सहायता प्राप्त बुनियादी सीख, सिमुलेशन आधारित अभ्यास और बहु-स्तरीय मार्गदर्शन को शामिल करना होगा।

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