कलेक्टर ने राजस्व विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की
0- एग्रीस्टैक पोर्टल में शत प्रतिशत पंजीयन एवं बैकेटिंग के कार्य को विशेष प्राथमिकता के साथ पूरा करने के दिए निर्देश
बालोद. कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सभी राजस्व अधिकारियों को एग्रीस्टैक पोर्टल में जिले के शत प्रतिशत कृषकों का पंजीयन एवं बैकेटिंग के कार्य को विशेष प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। इस मौके पर उन्होंने राजस्व विभाग के अंतर्गत सुशासन तिहार एवं राजस्व पखवाड़ा में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की समीक्षा के अलावा राजस्व प्रकरणों के अंतर्गत अविवादित, विवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, व्यपवर्तन एवं अवैध वृक्ष कटाई की रोकथाम के उपाय तथा त्रुटि सुधार तथा ई-कोर्ट के प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।
इसके अलावा उन्होंने स्वामीत्व योजना, बटांकन आदि के कार्यों की प्रगति के अलावा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। श्रीमती मिश्रा ने एग्रीस्टैक पोर्टल में किसानों के पंजीयन के कार्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इस कार्य को विशेष प्राथमिकता के साथ निर्धारित समयावधि में पूरा कराने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों को कोटवार आदि के माध्यम से मुनादी कराने के अलावा अन्य सभी माध्यमों से इसका समुचित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व अधिकारियों को सहकारी समितियों में किसानों के साथ बैठक आयोजित कर इसके संबंध में उन्हें जानकारी देने को कहा।
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने एग्रीस्टैक पोर्टल में किसानों के पंजीयन एवं बैकेटिंग के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीस्टैक भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया कृषि क्षेत्र का एक डिजिटल इकोसिस्टम (पहचान पत्र) है। इसमें हर किसान को एक विशिष्ट किसान आईडी दी जाती है, जो उनके आधार कार्ड, बैंक खाते और जमीन के रिकॉर्ड (खेत का ब्यौरा) को एक साथ जोड़ती है। उन्होंने एग्रीस्टैक से जुड़े मुख्य बिंदुओं के संबंध जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीस्टैक आईडी के माध्यम से पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और खाद, बीज सब्सिडी का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुँचता है। किसानों को हर सरकारी सुविधा के लिए बार-बार कागज (खसरा-खतौनी) जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि सारा डेटा डिजिटल होता है। बैंकों को किसानों की जमीन और फसल की सटीक जानकारी मिलने से किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण मिलना आसान हो जाता है। किसान अपने खेत और पहचान का एग्रीस्टैक पंजीयन कराने हेतु अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जा सकते हैं।











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