सीख मिली जिनसे सदा
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
जानें क्या अच्छा-बुरा, बनें सही इंसान।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
माता होती गुरु प्रथम, सिखलाती जग-रीति।
झूठ-कपट से दूर रह, कर लें सच से प्रीति।
अनुशासन की डोर में, पिता बाँधते हाथ।
जीवन के हर मोड़ पर, सदा निभाते साथ।
कठिन परिश्रम कर्म कर, करें लक्ष्य संधान।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
शिक्षा का दीपक जला, फैलाते उजियार।
कलुष हृदय का मेट कर, भरते शुद्ध विचार।
खेतों में जा ज्यों कृषक, छाँटे खरपतवार।
शिक्षक कमियाँ जान कर, करते हैं उपचार।
सही दिशा जीवन मिले, देते ऐसा ज्ञान।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
बड़े-बुजुर्गों से मिले, सबको आशीर्वाद।
अनुभव की वे पोटली, करना है संवाद।
परंपरा संस्कृति सुलभ, देते शुचि संस्कार।
किस्सों की दुनिया करें, जिज्ञासा विस्तार।
स्वर्ग बड़ों की छाँव में, मानें घर की शान ।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।
देना सीखें वृक्ष से, देते हैं फल-फूल।
मीठा जल देती नदी, बादल को मत भूल।
सूरज सम बनना प्रखर, सागर हृदय विशाल।
कहती शीतल चाँदनी, शांत रहें हर हाल।
जंतु-जीव पंछी सभी, देते हैं अवदान।।
सीख मिली जिनसे सदा, उन्हें मिले सम्मान।।










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