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एम्स में एनएसएसआईकॉन-2024 प्रारंभ, दुनियाभर के 400 से अधिक न्यूरोसर्जन ले रहे भाग

- न्यूरोसर्जरी में नई तकनीक के उपयोग पर जोर

 रायपुर।न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में आ रहे परिवर्तनों और नई तकनीक के बारे में न्यूरोसर्जन्स को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में न्यूरोलॉजीकल सर्जन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया की 12वीं वार्षिक कांफ्रेंस 'एनएसएसआईकॉन-2024' प्रारंभ हुई। इसमें दुनियाभर के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन्स ने नई तकनीक की मदद से न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में आने वाले परिवर्तनों पर चर्चा की।
विश्व के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन में से एक अमेरिका स्थित रुटजर्स-न्यूजर्सी मेडिकल स्कूल एंड रॉबर्ट वुड जॉन्सन मेडिकल स्कूल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. अनिल नंदा ने इस क्षेत्र में आ रहे परिवर्तनों और स्वयं के अनुभवों को नए सर्जन्स के साथ साझा किया। प्रो. नंदा अब तक 16 हजार से अधिक सर्जरी कर चुके हैं और उन्हें 1996 से 2018 के मध्य अमेरिका में सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक का अवार्ड मिल चुका है।
प्रो. नंदा ने बताया कि एशिया और अफ्रीका में अगले कुछ वर्षों के अंदर 23 हजार से अधिक न्यूरोसर्जन्स की आवश्यकता होगी। न्यूरो संबंधी बीमारियों के कारण जीडीपी को 4.4 ट्रिलियन डॉलर की हानि होने की संभावना है। ऐसे में न्यूरोसर्जरी की नई तकनीक की मदद से रोगियों को त्वरित राहत देने के प्रयास करने होंगे।
कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (रिटा.) ने कहा कि सुपरस्पेशियल्टी न्यूरो सर्जरी में निरंतर नए बदलाव आ रहे हैं। इस प्रकार की कांफ्रेंस नए चिकित्सकों को इन परिवर्तनों के विषय में वरिष्ठ चिकित्सकों से सीखने में लाभकारी होगी।कांफ्रेंस में जापान से डॉ. टेकियो गोटो ने स्कल बेस ट्यूमर की एंडोस्कोपी और सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अल्ताफ उमर रमजान ने एंटिइयर स्कल बेस सर्जरी के बारे में ऑनलाइन व्याख्यान दिए।
आयोजन सचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि कांफ्रेंस में न्यूरोसर्जरी के विभिन्न विषयों न्यूरोट्रामा, सेरीब्रोवस्कुलर सर्जरी, न्यूरोएंडोस्कोपी और न्यूरोआंकोलॉजी पर कार्यशाला आयोजित कर हैंड्स ऑन ट्रेनिंग भी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि वर्कशॉप में 125 प्रतिभागियों ने और कांफ्रेंस में दुनियाभर से 400 से अधिक न्यूरोसर्जन भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग में न्यूरोसर्जरी संबंधी सभी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं इसमें डीप ब्रेन स्टीम्युलेशन सर्जरी भी शामिल है।कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में डॉ. राधेश्याम मित्तल, डॉ. डीके पुरोहित, डॉ. ए.के. महापात्रा, डॉ. राजकुमार, डॉ. होसम एलनोमेनी, डॉ. अजय नागराज, डॉ. संदीप चटर्जी, डॉ. रुपेश कुमार और डॉ. रमेश टिगला ने अध्यक्षता की।

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