कृष्ण-राधा-प्रेम ने जग को अचंभित कर दिया...
सजल
- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
कृष्ण-राधा-प्रेम ने जग को अचंभित कर दिया।
छोड़कर अधिकार सब प्रिय को समर्पित कर दिया।।
आज की पीढ़ी न जाने त्याग करना प्रेम में।
स्वार्थ का विष घोल रिश्तों को कलंकित कर दिया।।
प्रेम है विश्वास का घर क्यों भला संशय वहाँ?
दंभ के वातास ने प्रियता तिरोहित कर दिया।।
दूसरों की थाल लगती है सदा व्यंजन भरी।
मूल्य संस्कृति भूल बैठे आत्म प्रवंचित कर दिया।।
दीप के नीचे अँधेरा पल रहा था रात भर।
रोशनी को दोष देकर व्यर्थ दंडित कर दिया।।










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