गोरैया के संरक्षण में ओडिशा के गांव ने पेश की नजीर
बेरहामपुर . आजकल गौरैया का दिखना दुर्लभ हो गया है लेकिन ओडिशा के बाघझरी गांव ने पिछले कुछ वर्षों में पक्षियों की इस विलुप्तप्राय: प्रजाति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गंजाम जिले के इस गांव में एक स्थानीय संगठन ने कई कृत्रिम घोंसले बनाए जिनमें आज इन नन्हीं चिड़ियों को चहचहाते देखा जा सकता है। लगभग एक दशक पहले, ‘आंचलिक बिकास परिषद' (एबीपी) ने वन विभाग के साथ मिलकर गांव में गोरैया के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाया। एबीपी के अध्यक्ष सागर पात्रा ने कहा, “गांव में गौरैया की संख्या मात्र पांच थी जो अब बढ़कर लगभग दो हजार हो गई है।” मिट्टी के घड़े और कृत्रिम घोंसले ग्रामीणों में वितरित किये गए और उन्हें घरों के बाहर टांगा गया ताकि गौरैया को आकर्षित किया जा सके। बाघझरी के अलावा, लंजिया और गुंथाबंधा तथा जिले के कुछ अन्य गांव के लोगों ने भी इस अभियान में भाग लिया। पात्रा ने कहा, “अब हमने गंजाम और गजपति जिलों में विभिन्न स्थानों पर लगभग दो सौ पर्यावरण के अनुकूल कृत्रिम घोंसले और भोजन के बक्से लगाए हैं।” उन्होंने कहा कि इन्हें लगाने और अभियान में लोगों की भागीदारी के बाद, इन पक्षियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। रविवार को संगठन ने विश्व गौरैया दिवस मनाया और इस अवसर पर बेरहामपुर मंडलीय वन अधिकारी अमलन नायक और ईको क्लब के जिला समन्वयक शंकर नारायण बेज तथा अन्य लोग उपस्थित रहे।






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