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विश्व पुस्तक मेला: साहित्य, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान का सजेगा मंच, भारत मंडपम में 10 जनवरी से शुरुआत

 नई दिल्ली।  डिजिटल दुनिया में जहां हर चीज मोबाइल, कंप्यूटर से लेकर आपकी मल्टी-फंक्शन टीवी स्क्रीन पर एक क्लिक में उपलब्ध हो जाती है। उस दौर में भी किताबों का अपना क्रेज है। आज भी किताबों के कद्रदान कम नहीं हैं। कहते हैं, ‘किताबें बोलती हैं, आप बीती और जग बीती भी।’ इस लिहाज से किताबों के शौकीनों, युवाओं, बच्चों-बूढ़ों से लेकर महिलाओं तक, सभी का इंतजार नई दिल्ली में ‘विश्व पुस्तक मेले’ में पूरा होने वाला है।

दरअसल, विश्व का सबसे बड़ा पुस्तक मेला अपने 53वें संस्करण के साथ राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में लौट रहा है। ‘विश्व पुस्तक मेला- 2026’ की शुरुआत शनिवार से हो रही है। यह 18 जनवरी तक चलेगा। विश्व पुस्तक मेले में साहित्य, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान से लेकर हर विषय पर लाखों किताबें लोगों के लिए रहेंगी। इस बार पुस्तक मेले को भारतीय सीमाओं की सुरक्षा में तैनात हमारे वीर जवानों को समर्पित किया गया है। विश्व पुस्तक मेले में एंट्री फ्री रखी गई है।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे के मुताबिक, “हमने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे किए हैं और अपनी सशस्त्र सेनाओं को नमन करते हुए इस बार के विश्व पुस्तक मेले की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75’ रखी गई है।” नौ दिनों तक चलने वाले विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। इस खास अवसर पर कतर और स्पेन का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा।
विश्व पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशक आ रहे हैं। मेले में 3,000 से ज्यादा स्टॉल शामिल होंगे। यहां 600 से अधिक आयोजनों में 1,000 से ज्यादा वक्ता संवाद भी करेंगे। इस पुस्तक मेले में 20 लाख से अधिक लोगों के आने का अनुमान भी जताया गया है।
आयोजकों ने बताया कि इस बार का विश्व पुस्तक मेला भारतीय सेनाओं के तीनों अंगों के साहस, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण में उनकी सराहनीय भूमिका को समर्पित है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहली बार पुस्तक मेले में सभी के लिए प्रवेश फ्री रखा गया है। मेले का आयोजन पुस्तकों और ज्ञान को सभी के लिए सुलभ बनाने के मकसद से किया गया है। जेन-जी को किताबों से जोड़ने के लिए भी यह पहल बेहद खास है। पुस्तक मेले के अंदर आयोजित होने वाली सभी गतिविधियां भी निशुल्क रहेंगी।
वहीं, मेले में बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिलने जा रही है। इस साहित्यिक महाकुंभ में नन्हे पाठकों को देश के गौरव, एस्ट्रोनॉट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से रूबरू होने और उनसे प्रेरणा लेने का विशेष अवसर मिलेगा। विज्ञान, अंतरिक्ष और ज्ञान की दुनिया से सीधे संवाद के साथ यह मुलाकात बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बनेगी, जहां किताबों के साथ-साथ सपनों को भी पंख मिलेंगे।

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