हाइपरसोनिक मिसाइल से संबंधित महत्वपूर्ण ग्राउंड परीक्षण हुआ सफल
नई दिल्ली। हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) की सहायता से हासिल की गई है।
दरअसल, डीआरडीएल ने सक्रिय शीतलन युक्त पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट इंजन (फुल स्केल कंबस्टर) का दीर्घ-अवधि ग्राउंड परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया है। डीआरडीएल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की हैदराबाद स्थित अग्रणी प्रयोगशाला है। इस सफल परीक्षण ने भारत को उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं की वैश्विक अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है। यह महत्वपूर्ण परीक्षण 09 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसने स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन प्रदर्शित किया। यह उपलब्धि भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक, अर्थात 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती है। यह असाधारण क्षमता अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन के माध्यम से प्राप्त की जाती है।
यह सुपरसोनिक दहन तकनीक का उपयोग कर दीर्घ-अवधि तक निरंतर प्रणोदन (मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए उत्पन्न की जाने वाली शक्ति) प्रदान करता है। स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किए गए इन ग्राउंड परीक्षणों ने उन्नत स्क्रैमजेट दहनकक्ष के डिजाइन को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया है।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि शुक्रवार को मिली यह कामयाबी बीते साल 25 अप्रैल को किए गए दीर्घ-अवधि के सब-स्केल परीक्षण पर आधारित है। उस परीक्षण ने इस उन्नत प्रौद्योगिकी के क्रमिक और सुदृढ़ विकास को सुनिश्चित किया है। पूर्ण-स्तरीय स्क्रैमजेट दहनकक्ष और परीक्षण सुविधा का डिजाइन एवं विकास डीआरडीएल द्वारा किया गया।
वहीं, इसके निर्माण और कार्यान्वयन में भारतीय उद्योग साझेदारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और शैक्षणिक संस्थानों को बधाई दी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कामयाबी भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक मजबूत और ठोस आधार प्रदान करती है।उन्होंने बताया कि यह देश की सामरिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। वहीं, डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स और तकनीकी टीमों को उनके सराहनीय योगदान के लिए शुभकामनाएं दीं। इस सफल ग्राउंड परीक्षण के साथ भारत ने हाइपरसोनिक प्रणोदन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर लिया है।








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