'डिजिटल अरेस्ट' में 23 करोड़ रुपये की ठगी के शिकार पूर्व बैंकर की याचिका पर सीबीआई-केंद्र को नोटिस
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य से 78 वर्षीय उस सेवानिवृत्त बैंकर द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा है जिसे कथित तौर पर लगभग एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर करीब 23 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नरेश मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका पर भारत सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य को नोटिस जारी किया है। याचिका में संबंधित बैंकों को याचिकाकर्ता के खातों में ठगी गई 22.92 करोड़ रुपये की राशि जमा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। मल्होत्रा ने कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, सिटी यूनियन बैंक और येस बैंक को मामले में पक्षकार बनाया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करने वाले साइबर अपराधियों ने दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क इलाके के एक सेवानिवृत्त बैंकर को लगभग एक महीने तक कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर 23 करोड़ रुपये की ठगी की। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को बताया कि उसके आधार कार्ड का संबंध नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद के वित्तपोषण और पुलवामा आतंकी हमले से है। इसके बाद आरोपियों ने जांच के बहाने उसे उसके फ्लैट में ही 'डिजिटल अरेस्ट' की स्थिति में रखा। पुलिस ने कहा, ''धोखाधड़ी करने वालों ने उसे घर से बाहर न निकलने का निर्देश दिया और एक महीने की अवधि में उसकी बचत को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया।'' अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास होने पर मल्होत्रा ने पिछले साल 19 सितंबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला 'इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस' (आईएफएसओ) इकाई को सौंप दिया गया। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और धोखाधड़ी से प्राप्त 12.11 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े विभिन्न बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई है।










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