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पुणे में विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, चार अन्य लोगों की मौत

पुणे.  महाराष्ट्र के पुणे जिले में बुधवार को बारामती हवाई अड्डे के पास एक 'टेबलटॉप रनवे' से महज 200 मीटर की दूरी पर एक विमान के दुर्घनटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई। दादा (बड़े भाई) के नाम से मशहूर अजित पवार (66) के निधन से न केवल महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है, बल्कि उनकी अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अजित पवार के चाचा और राकांपा के संस्थापक शरद पवार ने कहा कि यह एक दुर्घटना थी और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। एक अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विमान से बरामद किए जाने वाले 'ब्लैक बॉक्स' (जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर शामिल हैं) का विश्लेषण किया जाएगा। 'वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' की ओर से संचालित 16 साल पुराना चार्टर्ड विमान 'लियरजेट' बारामती हवाई अड्डे पर दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बारामती एक गैर-नियंत्रित हवाई क्षेत्र है, जहां आमतौर पर स्थानीय उड़ान प्रशिक्षण संगठनों के प्रशिक्षक और पायलट यातायात से जुड़ी जानकारी देते हैं। पवार राज्य में पांच फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव के प्रचार अभियान के तहत जनसभाओं को संबोधित करने के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे। दुर्घटना में जान गंवाने वालों में कैप्टन सुमित कपूर भी शामिल हैं, जिनके पास 15,000 घंटे का उड़ान अनुभव था। 1,500 घंटे का उड़ान अनुभव रखने वाली सह-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक, निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) विधिप जाधव और विमान परिचारिका पिंकी माली की भी इस हादसे में मौत हो गई। सरकार ने एक बयान जारी किया, जिसमें दुर्घटना का क्रम विस्तार से बताया गया है।
विमान यातायात नियंत्रण कक्ष (एटीसी) ने बुधवार सुबह खराब दृश्यता के कारण हवा में एक चक्कर लगाने के बाद 'लियरजेट' विमान को उतरने की अनुमति दे दी थी। हालांकि, अनुमति मिलने के बाद भी विमान ने एटीसी को कोई 'रीड-बैक' या प्रतिक्रिया नहीं दी और वह कुछ ही पल बाद रनवे के किनारे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया तथा उसमें आग लग गई। विमान संचालन की भाषा में "चक्कर लगाना" एक मानक प्रक्रिया है, जिसमें पायलट लैंडिंग का प्रयास रोक देता है और पुनः लैंडिंग की कोशिश से पहले विमान ऊपर ले जाना शुरू करता है। खराब मौसम, अस्थिर लैंडिंग पथ या रनवे पर यातायात जैसी वजहों से सुरक्षित लैंडिंग पूरी नहीं होने की स्थिति में ऐसा किया जाता है। यह एक आपात स्थिति नहीं, बल्कि एक एहतियाती सुरक्षा कदम है। वहीं, 'रीड बैक' विमान संचालन की भाषा में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसमें पायलट एटीसी से मिले निर्देशों या संदेश को दोहराता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पायलट ने नियंत्रक के निर्देश ठीक ढंग से समझ लिए हैं। 'टेबलटॉप रनवे' किसी पठार या ऊंची पहाड़ी के ऊपर बनी हवाई पट्टी होती है, जिसके एक या दोनों छोर पर गहरी ढलान या खाई होती है। ऐसे रनवे पर सामान्य, बड़े या सुरक्षित रनवे क्षेत्र के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। इसी वजह से लैंडिंग के दौरान विमान के आगे निकल जाने या उड़ान भरते समय रनवे से बाहर जाने की स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। वीएसआर वेंचर्स के मालिक वीके सिंह ने कहा कि पायलट को संभवतः रनवे दिखाई नहीं दिया, जिसके चलते उसने 'मिस्ड अप्रोच' की, जो ऐसे मामलों में अपनाई जाने वाली एक मानक प्रक्रिया है। 'मिस्ड अप्रोच' वह प्रक्रिया है, जिसमें पायलट उस समय लैंडिंग रोक देता है, जब उसे लगता है कि विमान को सुरक्षित उतारना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में वह विमान को दोबारा ऊपर ले जाकर फिर से उतरने की कोशिश करता है। इसे आम भाषा में 'गो-अराउंड' कहा जाता है। बारामती हवाई अड्डे के पास हुए भयावह विमान हादसे के स्थल से प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी सामने आए हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि विमान के नियंत्रण खोने के कारण हुए जोरदार धमाकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने विमान को हवाई अड्डे के ऊपर चक्कर लगाते हुए देखा और लैंडिंग के अंतिम प्रयास से पहले वह "थोड़ा अस्थिर" नजर आ रहा था। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, विमान जमीन पर जोर से टकराया और फिर उसमें विस्फोट हो गया, जिसकी आवाज आसपास के घरों तक सुनाई दी। बाद में, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बारामती में हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) पर तैनात रहे एक व्यक्ति के हवाले से बयान जारी किया, जिसमें घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा गया है कि लैंडिंग के प्रयास के दौरान विमान को दृश्यता की समस्या का सामना करना पड़ा। बयान में कहा गया है कि पुणे से रवाना होने के बाद विमान ने सुबह 8:18 बजे बारामती एटीसी से पहली बार संपर्क स्थापित किया। इस समय विमान बारामती से 30 समुद्री मील (लगभग 55 किलोमीटर) की दूरी पर था। चालक दल को बताया गया कि वे दृश्यता को ध्यान में रखते हुए अपनी सुविधा के अनुसार विमान को नीचे उतार सकते हैं। उन्हें यह जानकारी भी दी गई कि हवा शांत है और दृश्यता लगभग 3,000 मीटर है। रनवे के करीब पहुंचने पर चालक दल ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने दूसरी बार लैंडिंग के प्रयास के तहत विमान से चक्कर लगाने शुरू कर दिए। शुरुआत में चालक दल ने बताया कि रनवे अब भी दिखाई नहीं दे रहा है, हालांकि इसके कुछ ही सेकंड बाद उन्होंने कहा, "रनवे दिखाई दे रहा है।" इसके बाद एटीसी ने सुबह 8:43 बजे विमान उतारने की मंजूरी दे दी।
हालांकि, चालक दल ने इस अंतिम लैंडिंग अनुमति का अनिवार्य 'रीड बैक' नहीं दिया और पिछली बातचीत से ठीक एक मिनट बाद सुबह 8:44 बजे एटीसी कर्मियों ने रनवे की शुरुआत के पास आग लगती हुई देखी। विस्फोट के तुरंत बाद आपातकालीन सेवाकर्मी घटनास्थल पर पहुंच गए, जिन्हें मलबा रनवे के बाएं हिस्से में पड़ा हुआ मिला। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) फिलहाल इस बात की जांच कर रहा है कि 3,000 मीटर की दृश्यता बताए जाने के बावजूद चालक दल रनवे को देख पाने में क्यों असफल रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि विमान के कुछ हिस्से हवा में उछलकर आसपास के आवासीय भवनों के पास गिर गए। एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "विमान झुका और फिर गिर गया। हमने विस्फोट होता हुआ देखा और यह बेहद डरावना था।" एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, विमान रनवे से लगभग 100 फुट की ऊंचाई पर नियंत्रण खोता हुआ नजर आ रहा था। उसने कहा, "जब विमान नीचे आ रहा था, तो हमें लगा कि यह दुर्घटनाग्रस्त होने वाला है और… जब हम इसकी ओर भागे, तो हमने आग लगती हुई देखी, इसके बाद चार से पांच धमाके हुए, जिसकी वजह से हम विमान के पास नहीं जा पाए।" एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी प्रमोद मदुरीकर ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद शवों की पहचान करके उन्हें एंबुलेंस में भेज दिया गया, जबकि बचाव व आपात अभियान में मदद के लिए दमकल विभाग के कर्मी लगभग उसी समय घटनास्थल पर पहुंच गए। नागर विमानन मंत्री के राम मोहन नायडू ने पुणे में संवाददाताओं से कहा कि खराब दृष्यता के बीच विमान को नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा था। कंपनी के बेड़े में सात 'लियरजेट 45' विमान (जिसमें दुर्घटनाग्रस्त विमान भी शामिल है), पांच 'एम्बरर 135बीजे' विमान, चार 'किंग एयर बी200' विमान और एक 'पिलाटस पीसी-12' विमान शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि दुर्घटना के बाद विमान में आग लग गई। उन्होंने कहा, ''विमान में सवार सभी लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।'' अजित पवार के परिवार में उनकी पत्नी सुनेत्रा और दो बेटे पार्थ और जय हैं। सुनेत्रा राज्यसभा सदस्य हैं। अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने हाल में पुणे और पिंपरी चिंचवड में हुए निकाय चुनावों में अपने चाचा शरद पवार की राकांपा (एसपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश के विभिन्न दलों के कई अन्य नेताओं ने अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया। दिल्ली कैंट में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विमान हादसे में अजित पवार और अन्य लोगों को नियति ने हमसे छीन लिया। बारामती पहुंचे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पवार के निधन को दुखद एवं अविश्वसनीय बताया और कहा कि उन्होंने एक अच्छा मित्र खो दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने 30 जनवरी तक तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। बृहस्पतिवार को बारामती में राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राकांपा के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह पूर्वाह्न 11 बजे विद्या प्रतिष्ठान मैदान में होने वाले अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं। अजित पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए विद्या प्रतिष्ठान मैदान में रखा गया है।
इस बीच, नागर विमानन नायडू ने कहा कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) हादसे की गहन जांच करेगा और विमान परिचालक को लेकर फिलहाल सुरक्षा संबंधी कोई चिंता नहीं है। नायडू ने बताया कि एएआईबी और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की टीमें दुर्घटनास्थल पर मौजूद हैं।
विमानन शिखर सम्मेलन 'विंग्स इंडिया 2026' के मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए नायडू ने कहा, "हमें घटना के समय क्या हुआ, इसकी गहराई से जांच करने की जरूरत है।" उन्होंने बारामती में दुर्घटनास्थल का दौरा करने के बाद यह बयान दिया।
जब नायडू से विमान परिचालक से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे इनकार किया। मंत्री ने कहा, "डीजीसीए ने पूरी तरह जांच की है, सभी आवश्यक मंजूरियां दी गई थीं और कंपनी का पिछले साल भी आकलन किया गया था…, इसलिए उस मोर्चे पर हमें कोई चिंता नजर नहीं आती। वे कई उड़ानों का संचालन कर रहे हैं।"

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