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युद्ध क्षेत्र से दूसरा एलपीजी टैंकर भारत पहुंचा, अटके पड़े 22 अन्य जहाजों को लाने के प्रयास जारी

नयी दिल्ली. भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के बाद मंगलवार तड़के स्वदेश पहुंच गया। युद्ध क्षेत्र में फंसे अन्य 22 भारतीय जहाजों को सुरक्षित लाने के प्रयास जारी हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि एलपीजी टैंकर नंदा देवी, मंगलवार तड़के लगभग 2:30 बजे गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। सोमवार को पहला जहाज, शिवालिक गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पर पहुंचा था।
दोनों जहाज पर लगभग 92,712 टन एलपीजी हैं। यह देश में एक दिन की खाना पकाने की गैस की आवश्यकता के बराबर है। सिन्हा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''दोनों जहाजों ने एलपीजी उतारना शुरू कर दिया है। इस समय, नंदा देवी मुख्य जहाज से अपने छोटे जहाजों में एलपीजी स्थानांतरित कर रहा है।'' उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय जहाजों से जुड़ी कोई भी घटना नहीं हुई है। एलपीजी लाने वाले दोनों जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था। इसके साथ ही युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या चार हो गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 611 नाविकों को ले जा रहे 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर संचालन पर करीबी नजर रख रहा है। फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला संकरा जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद प्रभावी रूप से बंद हो गया है। जब युद्ध शुरू हुआ था, तब जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में 24 और पूर्वी हिस्से में चार जहाज सहित कुल 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे। वर्तमान में, पश्चिमी हिस्से में 22 और पूर्वी हिस्से में दो जहाज बचे हैं। पूर्वी हिस्से में मौजूद जहाजों में से, कच्चे तेल का टैंकर जग लाडकी मंगलवार को लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चे तेल के साथ भारत पहुंचने वाला है। जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुका है और तंजानिया के रास्ते में है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारी क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से छह एलपीजी लाने वाले जहाज हैं, एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क कैरियर हैं। इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और उसमें कोई माल नहीं है और तीन नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में हैं। सिन्हा ने बताया कि पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दो एलपीजी टैंकर के चालक दल के साथ वीडियो कॉल के जरिये बातचीत की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उन्हें धन्यवाद देना और उनके द्वारा दी गई उत्कृष्ट सेवा की सराहना करना था। ''वे सभी अपनी 'यूनिफॉर्म' में थे और स्वस्थ और खुश दिख रहे थे।'' सोनोवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर इस बातचीत का जिक्र भी किया है।
उन्होंने कहा, ''भारतीय तट पर पहुंचने के बाद भारतीय ध्वज वाले एलपीजी पोत शिवालिक और नंदा देवी के बहादुर चालक दल से बातचीत की। फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए उनका आचरण बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में सतर्कता, समन्वय और जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करता है।'' सिन्हा ने कहा कि लगभग 3.18 लाख भारतीय नाविक हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत हैं।

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